Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Health Care Friend and Marital Dispute Consultant
(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)
-:Mob. & WhatsApp No.:-
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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।
पालक और सौंदर्य : महिलाएँ यदि अपने मुख का नैसर्गिक सौंदर्य एवं रक्तिमा (लालिमा) बढ़ाना चाहती हैं, तो उन्हें नियमित रूप से पालक के रस का सेवन करना चाहिए।
- अदरख : अदरख या अदरक की प्रकृति गर्म होने के कारण जिन व्यक्तियों को ग्रीष्म ऋतु में गर्म प्रकृति का भोजन न पचता हो, कुष्ठ, पीलिया, रक्तपित्त, घाव, ज्वर, शरीर से रक्तस्राव की स्थिति, मूत्रकृच्छ, जलन जैसी बीमारियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए। खून की उल्टी होने पर और गर्मी के मौसम में अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए और यदि आवश्यकता हो तो कम से कम मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।
ताजा हरा धनिया (Fresh coriander leaves)
10 गुणकारी उपयोग
1 धनिया चरपरा, कसैला और जठराग्नि को प्रदिप्त करने वाला होता है।
10 गुणकारी उपयोग
1 धनिया चरपरा, कसैला और जठराग्नि को प्रदिप्त करने वाला होता है।
2 यह पाचक एवं ज्वरनाशक भी है।
वजन घटाए, सेहत बनाए टमाटर
(टमाटर सेवफल व संतरा दोनों के गुणों से युक्त होता है।)
(टमाटर सेवफल व संतरा दोनों के गुणों से युक्त होता है।)
विभा मित्तल
- पूरे शरीर को ऊर्जा देता और लीवर संबंधी विकारों को दूर करता है।
- इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है, जिस कारण एक उत्तम भोजन माना जाता है।
- इसके लगातार सेवन से जिगर बेहतर ढंग से काम करता है और गैस की शिकायत भी दूर होती है।
- अगर आपको डायबिटीज है तो टमाटर का नियमित सेवन करें। यह पेशाब में चीनी की मात्र पर नियंत्रण पाने के लिए प्रभावशाली है।
- एक मध्यम आकार के टमाटर में केवल 12 कैलोरीज होती है, इसलिए इसे वजन कम करने के लिए काफी उपयुक्त माना जाता है। वजन कम करना चाहते हैं तो सुबह-शाम एक गिलास टमाटर का रस पीएं, लाभ होगा।
- टमाटर इतने पौष्टिक होते हैं कि सुबह नाश्ते में केवल दो टमाटर संपूर्ण भोजन के बराबर माने जाते हैं।
- पके लाल टमाटर खाने वालों को कैंसर रोग की आशंका कम हो जाती है।
- इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- टमाटर को काटकर उस पर काली मिर्च और सेंधा नमक डालकर खाएं। भूख बढ़ेगी, आंतों में मौजूद कीड़े मरेंगे।
- बच्चों को सूखा रोग होने पर आधा गिलास टमाटर के रस का सेवन कराने से फायदा होता है।
- गठिया रोग हो तो एक गिलास टमाटर के रस की सोंठ तैयार करें व एक चम्मच अजवायन का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीएं, लाभ होगा।-हिंदुस्तान, 16-11-11
उपशीर्षक:
कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates,
टमाटर-Tomatoes,
मोटापा-Obesity,
लीवर-Liver,
हृदय-Heart
Monday, January 30, 2012
पालक : खून बढ़ाने वाली सब्जी
पालक में जो गुण पाए जाते हैं, वे सामान्यतः अन्य शाक-भाजी में नहीं होते। यही कारण है कि पालक स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है, सर्वसुलभ एवं सस्ता है।
गाजर
भारत में गाजर तीन रंगों में पाई जाती हैं काली, लाल व पीली। काली गाजर अधिक गुणकारी होती है। लाल गाजर में भी पर्याप्त गुण होते हैं, किन्तु पीली गाजर में अधिक गुण नहीं पाए जाते और न ही यह खाने में स्वादिष्ट होती है। वैसे सब रोगों की दवा है गाजर। इसे चाहे कच्चा खाया जाए या पकाकर अथवा उबालकर, इससे मिलने वाले लाभ में कमी नहीं होती।
सावधानियां : गाजर का सेवन करते निम्न बातों का ख्याल रखें:-
1. गाजर के बीज गरम होते हैं। अत: गर्भवती महिलाओं को उनका प्रयोग नहीं करना चाहिए।2. गाजर के भीतर का/बीच का पीला भाग नहीं खाना चाहिए। क्योंकि, यह अत्यघिक गरम होता है। इससे छाती में जलन होती है। लेकिन यदि आप अगर आप गाजरों को कच्ची ही खा रहे हैं। तो भूल से भी उसकी ऊपरी तह/परत को न छीलें, क्योंकि उसी तह में विटामिन्स और पोषक तत्व छुपे होते हैं।3. आप डाइट में गाजर का ओवर डोज न लें। वरना आपको कैरोटेनीमिया (Carotenemia=रम्त में कैरोटिन की विद्यमानता जिससे त्वचा पीली हो जाती है) हो सकता है। इसमें स्किन येलो हो जाती है।4. गाजर को काटने से पहले उबाल लें। इससे यह आपको 25 फीसदी ज्यादा तक कैंसर से सुरक्षा दे पाएगी।
5. चूंकि गाजर में बहुत ज्यादा न्यूट्रिशंस होते हैं, इसलिए आप उसे कच्चा खाने की बजाय सब्जी, सूप वगैरह के तौर पर लेंगे तो उसमें मौजूद सेल्युलर नर्म हो जाते हैं और आपको 25 फीसदी बीटा कैरोटिन व विटामिन ए ज्यादा मिलेगा। गाजर के छिलके/ऊपरी परत में भी बहुत ज्यादा न्यूट्रिशन होता है, इसलिए इन्हें उतारे बिना ही गाजर खाएं।
गाजर के कुछ प्रमुख औषधीय गुण इस प्रकार हैं :
- कब्ज : एक कप गाजर का रस लें। उसमें एक नींबू निच़ोड लें। इस मिश्रण को आधा घंटा धूप में रखा रहने दें। इसके बाद इसे धीरे-धीरे पीएं। कब्ज दूर हो जाएगी। अगर आप दिन में दो गिलास गाजर का जूस पीते हैं तो वह आपके हाजमे को ठीक रखता है। गाजर शरीर से गंदे पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है। और तो और, अल्सर जैसी खतरनाक बीमारी में भी गाजर फायदा करती है।
- पाचन : गाजर के रस में नमक, घनिया पत्ती, जीरा, काली मिर्च, नीबू का रस डालकर पीने से पाचन संबंधी गड़बड़ी दूर होती है।
- पीलिया : गाजर का ताजा रस दो सौ ग्राम गर्म करके सुबह—शाम दो—तीन सप्ताह तक पीएं। इस दौरान हल्का भोजन खाएं।
- पेट के कीड़े : गाजर को कद्दूकस कर लें। इसे पानी में उबालकर गुड़ मिलाकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। आंतों के हानिकारक कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
- खूनी बवासीर : गाजर का रस सौ ग्राम, बकरी के दूध का दही पचास ग्राम तथा दो चम्मच चीनी, इन सबको मिलाकर भोजन के बाद सुबह-शाम लें। एक सप्ताह में ही खूनी बवासीर (Emerods) में लाभ होना शुरू हो जाता है। रोग ठीक होने तक सेवन करें।
- प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करे : गाजऱ में बीटा कैरोटीन होती है और यह प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अच्छा होती है। गाजर प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) को मजबूत करती है। यही वजह है कि रोजाना गाजर का जूस लेने से सर्दी जुकाम नहीं होगा। इससे आप जर्म्स व इंफेक्शन वगैरह होने से बचे रहते हैं।
- पोष्टिक : अगर आप कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सल्फर की टेबलेट लेते हैं, तो बेहतर होगा कि इसके बजाय आप गाजर खाएं। कमजोरी से अगर आपको चक्कर आते हों तो गाजर खाना आपके लिए संजीवनी बूटी का काम करेगा।
- दूध और सेब का विकल्प : जो लोग महंगा दूध और सेब नहीं खरीद सकते, उनको गाजर का सेवन करना चाहिए। यह शरीर में रक्त की कमी दूर करती है।
- दस्त/डायरिया : गाजर और नींबू का रस मिला कर पीने से दस्त आना बंद हो जाते हैं। दिन में दो से तीन बार इस जूस को पीने से दस्तों में फौरन फायदा पहुंचता है।
- पथरी : गाजर का हलवा प्रतिदिन पचास ग्राम नियमित रूप से दो सप्ताह खाएं अनेक लोगों की पथरी गलकर निकल जाती है।
- आधासीसी/आधे सिर का दर्द : गाजर को उबालकर छील लें और कुचलकर गाजर का हलवा बना लें। इस हलवे को शहद के साथ सुबह-शाम खाने से आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है।
- दिमागी कमजोरी : गाजर को कद्दूकस करके दो चुटकी सेंधा नमक मिलाकर खाने से मस्तिष्क के सारे द्वार खुल जाते हैं।
- नींद न आना : 200 ग्राम मीठी गाजरें छीलकर सेंधा नमक लगाकर सुबह 8—9 बजे के करीब कच्ची खाएं।
- बाल झड़ना : दो सौ ग्राम गाजर दही में रायता बनाकर खाएं। गाजर को कद्दूकस करने के बाद उसमें दही मिलाएं तथा थोड़ा सा जीरा और गरम मसाले भी मिला लें। यह रायता बालों की जड़ों में रक्त का संचार ब़ढाता है और बालों की जड़ें मजबूत करता है।
- डायबिटीज़ : गाज़र के प्रतिदिन सेवन से डायबिटीज़ के मरीजों के रक्त में शर्करा का स्तर ठीक रहता है।
- कम दिखाना : एक कप गाजर के रस में एक कप पालक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीएं। लगातार बीस दिन पीने से ही आंखों की रोशनी बढनी शुरू हो जाएगी। गाजर में मिनरल और सिलिकॉन होने के कारण आंखों की रोशनी बढ़ती है।
- उच्च रक्तचाप : सौ ग्राम गाजर का जूस पीएं। इसमें नमक न डालें। जूस में तुलसी के पत्ते डाल लें।
- निम्न रक्तचाप : सौ ग्राम गाजर के रस में दो चममच शहद मिलाकर पीएं।
- मर्दाना कमजोरी : छिली हुई गाजरें दो सौ ग्राम, दो पत्तियां लहसुन, आठ लौंग पीसकर नित्य पन्द्रह दिन तक खाएं। रात को सोने से पहले एक गिलास दूध पीएं। रोज गाजर खाने से भी सेक्स पावर बढती है।
- महिलाओं के लिये : अगर गर्भवती महिला रोज गाजर खाती है तो उसके गर्भ में पलने वाले बच्चा स्वस्थ पैदा होता है। उसे आंखों और त्वचा से संबधित रोग नहीं होते हैं। यही नहीं महिलाओं को प्रसव के दौरान तकलीफ भी कम होती है। गाजर खाने से एनीमिया की आशंका भी कम होती है।
- कैंसर : गाजर का रस दो सौ ग्राम, पालक का रस सौ ग्राम, दोनों मिलाकर बिना नमक के पीएं, बहुत लाभ मिलता है। अनेक बार कैंसर के रोग का सम्बन्ध लीवर से होता है। साथ-साथ ब़डी आंतों में पुराना जमा हुआ मल भी इस रोग का मूल कारण है। शरीर शोधन के सभी मार्ग खोलने से बहुत लाभ मिलता है। शरीर का मल निष्कासन ही इस रोग का समाधान है। गहरी श्वांस लेना, चुकन्दर, तुलसी के पत्ते, बिना पका भोजन करना बहुत उपयोगी है। गाजर कैंसर को रोकने के साथ स्ट्रोक की आशंका को भी कम करती है।
- सौन्दर्य : अगर रोज करने लगे तो किसी ब्यूटी पार्लर में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गाजर में पाये जाता है विटामिन ए जो आंखों के लिए काफी फायदेमंद होता है। गाजर चेहरे की झुर्रियों को भी दूर करता है। रोज गाजर खाने से आंखों के नीचे के काले धब्बे दूर होते हैं। गाजर बालों को टूटने से रोकता है। गाजर के जूस से रक्त भी साफ होता है, जिससे मुंहासे नहीं होते। चेहरे पर लालिमा आती है। टीनएजर्स को रोजाना फ्रेश गाजर का जूस लेना चाहिए। इससे उनकी एक्ने/मुंहासों की प्रॉब्लम दूर होगी। गाजर से कई विटामिन व मिनरल्स मिलते हैं। इसमें एंटीऑक्सिडेंट (Antioxidant=प्रतिउपचायक) बीटा कैरोटिन, अल्फा कैरोटिन, कैल्शियम, विटामिन ए, बी1, बी2, सी और ई भी है। एंटीऑक्सिडेंट से स्किन में चमक आती है।
- प्रसूता माताओं के लिये : अगर आप अपने बच्चे को दूध पिलाती हैं, तो गाजर दूध की मात्रा बढ़ाने में सहायक है।
- गाजर का उबटन : गाजर का उबटन बनाने के लिए सबसे पहले दो चम्मच गाजर का जूस लें। उसमें दो चम्मच बादाम का तेल और उसी मात्रा में बेसन मिलाएं। अच्छी तरह से मिक्स करके उसका पेस्ट बना लें और बीस मिनट बाद चेहरे ठंडे पानी से धो लें। फिर देखें गाजर का कमाल। इस उबटन का प्रयोग करते रहने से त्वचा पर जमी मैल साफ हो जाती है।
- दांत-हड्डियां : गाजर कमजोर हड्डियों को भी मजबूत बनाता है और दांतों को भी मजबूती प्रदान करती है। सलाद में गाजर खाने से शरीर में कैल्शियम बढ़ता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं।
- बच्चों के लिये : बच्चों के लिए गाजर खाना बहुत फायदेमंद होता है। बचपन से आप अगर गाजर का नियमित सेवन करते हैं तो आपको असमय हुई झुर्रियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
लेकिन इस सनातन सत्य कथन को भी याद रखें कि प्रकृति जिस रोग को ठीक नहीं कर सकती, उसे कोई भी दवाई ठीक नहीं कर सकती।=============
परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
बीमारियों से लड़ने की ढाल है इम्यूनिटी
सर्दियों में होने वाली छोटी-मोटी बीमारियां जैसे जुकाम, खांसी उन लोगों को ज्यादा तंग करती हैं, जिनकी जीवनी शक्ति (इम्यूनिटी) कमजोर हो गई है। ऐसे लोगों को चाहिए कि बीमारियों के पीछे लट्ठ लेकर भागने के बजाय वे अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाएं। रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी, तो सर्दी, जुकाम, खांसी तो भूल ही जाइए, कई बड़ी बीमारियों और इंफेक्शंस से भी शरीर खुद-ब-खुद अपना बचाव कर लेगा। तमाम क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स की मदद से जीवनी शक्ति बढ़ाने के तरीके बता रहे हैं-प्रभात गौड़:-
किसी विषय को शुरू करने का यह तरीका खराब हो सकता है, फिर भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को समझने के लिए हम एक मरे हुए इंसान का उदाहरण लेंगे। जब कोई शख्स मरता है, तो कुछ ही समय में तमाम बैक्टीरिया, माइक्रोब्स, वायरस और पैरासाइट्स शरीर पर हमला कर देते हैं और उसे सड़ाना, गलाना शुरू कर देते हैं। अगर कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया जाए, तो मृत शरीर में केवल कंकाल का ढांचा भर बचा रहेगा, लेकिन जिंदा आदमी के साथ कभी ऐसा नहीं होता। वजह यह है कि जिंदा लोगों में रोग प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) नाम का एक ऐसा मेकनिजम होता है, जो इन बैक्टीरिया, वायरस और माइक्रोब्स को शरीर से दूर रखता है। इंसान के मरते ही उसका इम्यून सिस्टम भी खत्म हो जाता है और शरीर पर हमला करने की ताक में बैठे माइक्रोब्स बॉडी को अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं। यानी हमारे शरीर के भीतर एक प्रोटेक्शन मेकनिजम है, जो शरीर की तमाम रोगों से सुरक्षा करता है। इसे ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं।
वातावरण में मौजूद तमाम बैक्टीरिया और वायरस को हम सांस के जरिये रोजाना अंदर लेते रहते हैं, लेकिन ये बैक्टीरिया हमें नुकसान नहीं पहुंचाते। क्यों? क्योंकि हमारा प्रतिरोधक तंत्र इनसे हरदम लड़ता रहता है और इन्हें पस्त करता रहता है। लेकिन कई बार जब इन बाहरी कीटाणुओं की ताकत बढ़ जाती है तो ये शरीर के प्रतिरोधक तंत्र को बेध जाते हैं। नतीजा होता है, गला खराब होना, जुकाम और ज्यादा तेज हमला हो गया तो कभी-कभी फ्लू या बुखार भी। सर्दी, जुकाम इस बात का संकेत हैं कि आपका प्रतिरोधक तंत्र कीटाणुओं को रोक पाने में नाकामयाब हो गया। कुछ दिन में आप ठीक हो जाते हैं। इसका मतलब है कि तंत्र ने फिर से जोर लगाया और कीटाणुओं को हरा दिया। अगर प्रतिरोधक तंत्र ने दोबारा जोर न लगाया होता तो इंसान को जुकाम, सर्दी से कभी राहत ही नहीं मिलती। इसी तरह कुछ लोगों को किसी खास चीज से एलर्जी होती है और कुछ को उस चीज से नहीं होती। इसकी वजह यह है कि जिस शख्स को एलर्जी हो रही है, उसका प्रतिरोधक तंत्र उस चीज पर रिऐक्शन कर रहा है, जबकि दूसरों का तंत्र उसी चीज पर सामान्य व्यवहार करता है। इसी तरह डायबीटीज में भी प्रतिरोधक तंत्र पैनक्रियाज में मौजूद सेल्स को गलत तरीके से मारने लगता है। ज्यादातर लोगों में बीमारियों की मुख्य वजह वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है। इनकी वजह से खांसी-जुकाम से लेकर खसरा, मलेरिया और एड्स जैसे रोग हो सकते हैं। इन इंफेक्शन से शरीर की रक्षा करने का काम ही करता है-इम्यून सिस्टम।
इम्यूनिटी बढ़ाने के तरीके
1. खानपान:
- -रोग प्रतिरोधक क्षमता के बारे में सबसे खास बात यह है कि इसका निर्माण शरीर खुद कर लेता है। ऐसा नहीं है कि आपने बाहर से कोई चीज खाया और उसने जाकर सीधे आपकी प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा कर दिया। इसलिए ऐसी सभी चीजें जो सेहतमंद खाने में आती हैं, उन्हें लेना चाहिए। इनकी मदद से शरीर इस काबिल बन जाता है कि वह खुद अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सके।
- -अगर खानपान सही है तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किसी दवा या अतिरिक्त कोशिश करने की जरूरत नहीं है। आयुर्वेद के मुताबिक, कोई भी खाना जो आपके ओज में वृद्धि करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है। जो खाना अम बढ़ाता है, वह नुकसानदायक है। ओज खाने के पूरी तरह से पच जाने के बाद बनने वाली कोई चीज है और इसी से अच्छी सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। पचने में मुश्किल खाना खाने के बाद शरीर में अम का निर्माण होता है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है।
- -खानपान में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात का रखें कि भूलकर भी वातावरण की प्रकृति के खिलाफ न जाएं। मसलन अभी सर्दियां हैं, तो आइसक्रीम खाने से परहेज करना चाहिए।
- -बाजार में मिलने वाले फूड सप्लिमेंट्स का फायदा उन लोगों के लिए है , जिनकी खानपान की आदतें अजीब-सी हैं। मसलन जो लोग खाने में सलाद नहीं लेते , वक्त पर खाना नहीं खाते, गरिष्ठ और जंक फूड ज्यादा खाते हैं, वे अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इन सप्लिमेंट्स की मदद ले सकते हैं। अगर कोई शख्स सलाद, दालें, हरी सब्जी आदि से भरपूर हेल्थी डाइट ले रहा है तो उसे इन सप्लिमेंट्स की कोई जरूरत नहीं है। बाजार में कोई भी सप्लिमेंट ऐसा नहीं है, जिसके बारे में दावे से कहा जा सके कि उसमें वे सभी विटामिंस और तत्व हैं, जो हमारी बॉडी के लिए जरूरी हैं। मल्टीविटामिंस के नाम से बिकने वाले प्रॉडक्ट में भी सभी जरूरी चीजें नहीं होतीं। इसलिए नैचरल खानपान ही सबसे बेहतर तरीका है।
- -प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से जितना हो सके, बचना चाहिए। ऐसी चीजें जिनमें प्रिजरवेटिव्स मिले हों, उनसे भी बचना चाहिए।
- -विटामिन सी और बीटा कैरोटींस: विटामिन सी और बीटा कैरोटींस जहां भी है, वह इम्युनिटी बढ़ाता है। इसके लिए मौसमी, संतरा, नींबू लें।
- -जिंक: जिंक का भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में बड़ा हाथ है। जिंक का सबसे बड़ा स्त्रोत सीफूड है, लेकिन ड्राई फ्रूट्स में भी जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
- -फल और हरी सब्जियां भरपूर मात्रा में खाएं।
- -खानपान में गलत कॉम्बिनेशन न लें। मसलन दही खा रहे हैं तो हेवी नॉनवेज न लें। दही के साथ कोई खट्टी चीज न खाएं।
- -अचार कम: अचार का इस्तेमाल कम करें। जिन चीजों की तासीर खट्टी है, वे शरीर में पानी रोकती हैं, जिससे शरीर में असंतुलन पैदा होता है। सिरका से भी बचना चाहिए।
- -ठंड में शरीर को ज्यादा एक्सपोज न करें। ऐसा करने पर गर्म करने के लिए शरीर को अतिरिक्त मेहनत करनी होगी, जिससे प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
- -स्ट्रेस न लें। कुछ लोगों में अंदरूनी ताकत नहीं होती। ऐसे में अगर ऐसे लोग स्ट्रेस भी लेना शुरू कर देंगे तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता एकदम कम हो जाएगी। ऐसे लोगों को जल्दी-जल्दी वायरल इंफेक्शन होने लगेगा।
- -ज्यादा देर तक बंद कमरे और बंद जगहों पर न रहें। जहां इतने लोग सांसें ले रहे होंगे, वहां इंफेक्शन जल्दी ट्रांसफर होगा। खुली हवा में निकलें और लंबी गहरी सांसें लें।
ये चीजें हैं फायदेमंद
- ग्रीन टी: इसमें एंटिऑक्सिडेंट होते हैं , जो कई तरह के कैंसर से बचाव करते हैं। ग्रीन टी छोटी आंत में पैदा होने वाले गंदे बैक्टीरिया को पनपने से रोकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि दिन में तीन कप ग्रीन टी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाती है।
- चिलीज: इनकी मदद से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। ये नैचरल ब्लड थिनर की तरह काम करती है और एंडॉर्फिंस की रिलीज में मदद करती है। चिलीज में बीटा कैरोटीन भी होता है , जो विटामिन ए में बदलकर इंफेक्शन से लड़ने में मदद करता है।
- दालचीनी: दालचीनी एंटिऑक्सिडेंट से भरपूर होती है। दालचीनी लेने से ब्लड क्लॉटिंग और बैक्टीरिया की बढ़ोतरी रोकने में मदद मिलती है। ब्लड शुगर को स्थिर करती है और बुरे कॉलेस्ट्रॉल से लड़ने में मददगार है।
- शकरकंद: शकरकंद प्रतिरोधक तंत्र को बेहतर बनाने में मददगार है। अल्जाइमर , पार्किंसन और दिल के रोगों को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
- अंजीर: अंजीर में पोटेशियम, मैग्नीज और एंटिऑक्सिडेंट्स होते हैं। अंजीर की मदद से शरीर के भीतर पीएच का सही स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है। अंजीर में फाइबर होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को कम कर देता है।
- मशरूम: मशरूम कैंसर के रिस्क को कम करता है। वाइट ब्लड सेल्स का प्रॉडक्शन बढ़ाकर शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को बूस्ट करता है।
2. आयुर्वेद:
च्यवनप्राश: आयुर्वेद में रसायन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बेहद मददगार होते हैं। रसायन का मतलब केमिकल नहीं है। कोई ऐसा प्रॉडक्ट जो एंटिऑक्सिडेंट हो , प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला हो और स्ट्रेस को कम करता हो , रसायन कहलाता है। मसलन त्रिफला, ब्रह्मा रसायन आदि , लेकिन च्यवनप्राश को आयुर्वेद में सबसे बढि़या रसायन माना गया है। इसे बनाने में मुख्य रूप से ताजा आंवले का इस्तेमाल होता है। इसमें अश्वगंधा, शतावरी, गिलोय समेत कुल 40 जड़ी बूटियां डाली जाती हैं। अलग-अलग देखें तो आंवला, अश्वगंधा, शतावरी और गिलोय का रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में जबर्दस्त योगदान है। मेडिकल साइंस कहता है कि शरीर में अगर आईजीई का लेवल कम हो तो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। देखा गया है कि च्यवनप्राश खाने से शरीर में आईजीई का लेवल कम होता है। इसी तरह शरीर में कुछ नैचरल किलर सेल्स होती हैं, जिनका काम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी करना होता है। च्यवनप्राश इन कोशिकाओं के काम करने की क्षमता को बढ़ा देता है।
कैसे लें: च्यवनप्राश रोजाना सुबह खाली पेट एक चम्मच लेना चाहिए। उसके बाद थोड़ा दूध ले लें। इसी तरह रात को सोते वक्त एक चम्मच च्यवनप्राश लें और उसके बाद दूध लें। पांच साल से कम उम्र के बच्चों को च्यवनप्राश नहीं देना चाहिए। पांच साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को दे सकते हैं, लेकिन आधा चम्मच सुबह और आधा चम्मच रात को। च्यवनप्राश सिर्फ सर्दी, जुकाम, खांसी , बुखार से ही दूर नहीं रखता, बल्कि लीवर की शक्ति को भी बढ़ाता है। अगर कोई शख्स बीमारी से उठा है या ज्यादा बुजुर्ग है तो उसे च्यवनप्राश नहीं लेना चाहिए। इसे पूरे साल हर मौसम में लिया जा सकता है।
कुछ नुस्खे:
हल्दी:
- - सुबह खाली पेट आधा चम्मच ताजे पानी से ले सकते हैं।
- - सिर्फ खांसी हो तो हल्दी को भूनकर शहद या घी के साथ मिलाकर चाट लें।
- - गुड़ और गोमूत्र के साथ हल्दी का सेवन करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है।
- - आंवले का रस एक चम्मच , हल्दी की गांठ का रस आधा चम्मच और शहद आधा चम्मच मिला लें। सुबह , शाम लेने से सभी तरह के प्रमेह , मधुमेह और मूत्र रोगों में फायदा होता है।
अश्वगंधा:
-आधा चम्मच अश्वगंधा सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध के साथ लें। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है। शरीर को कमजोर कर देने वाले रोगों का डटकर मुकाबला कर सकते हैं।
आंवला :
- ताजे आंवले का रस या चूर्ण त्रिदोषनाशक है। आयुर्वेद में इसे बुढ़ापे और रोगों से दूर रखने वाला रसायन माना गया है। कहते हैं कि आंवले के स्वाद और बड़ों की बात की गहराई का पता देर से चलता है। एक साल तक रोजाना एक चम्मच आंवले का रस या आधा चम्मच चूर्ण ताजे पानी या शहद के साथ सेवन करने वालों को आंख, त्वचा और मूत्र संबंधी बीमारियों से जिंदगी भर के लिए निजात मिल जाती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने का अचूक नुस्खा है आंवला।
शिलाजीत:
- सर्दियों में दूध के साथ शुद्ध शिलाजीत का सेवन करने से हड्डियों, लिवर और प्रजनन संबंधी रोग नहीं होते। शिलाजीत का सेवन करने वाले को कबूतर का सेवन नहीं करना चाहिए।
मुलहठी:
- मुलहठी का चूर्ण आयुर्वेदिक एंटिबायॉटिक है। सर्दियों में दूध या शहद के साथ रोज मुलहठी चूर्ण लेने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सर्दी, खांसी, न्यूमोनिया जैसे रोग नहीं होते। कफ संबंधी बीमारियों को खात्मा होता है और श्वसन संबंधी रोग भी नहीं होते। बच्चों को दो चुटकी मुलहठी चूर्ण शहद के साथ दिन में एक बार दी जा सकती है। बड़ों को आधा चम्मच मुलहठी चूर्ण गर्म दूध के साथ दिन में एक बार लेना चाहिए।
तुलसी:
- तुलसी के पत्तों में खांसी, जुकाम, बुखार और सांस संबंधी रोगों से लड़ने की शक्ति है। बदलते मौसम में तुलसी की पत्तियों को उबालकर या चाय में डालकर पीने से नाक और गले के इंफेक्शन से बचाव होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में गजब का इजाफा होता है।
लहसुन:
लहसुन हमारे इम्यून सिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण दो सेल्स को मजबूत करता है। कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और दूसरे दुर्लभ खनिज तत्वों का भंडार लहसुन शरीर और दिमाग दोनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यह सर्दी, जुकाम, दर्द, सूजन और त्वचा से संबधित बीमारियां को नहीं होने देता। लहसुन का इस्तेमाल घी में तलकर या सब्जियों और चटनी के रूप में किया जा सकता है।
गिलोय:
नीम के पेड़ में पान जैसे पत्तों वाली लिपटी लता को गिलोय के नाम से जाना जाता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली इससे अच्छी कोई चीज नहीं है। इससे सभी तरह के बुखार, प्रमेह और लिवर से संबंधित तकलीफों से बचाव होता है। इसका इस्तेमाल वैद्य की सलाह से ही करना चाहिए। यह शरीर के तापमान को भी कंट्रोल करती है।
जवानी का नायाब नुस्खा: जो युवा हमेशा अपनी फिटनेस और जवानी बरकरार रखना चाहते हैं, उन्हें हर साल तीन महीने तक यह नुस्खा लेना चाहिए : आंवला, अश्वगंधा और गिलोय का चूर्ण बराबर मात्रा में मिला लें और इसे शहद के साथ लें।
3. होम्योपैथी:
होम्योपैथी में वाइटल फोर्स का सिद्धांत काम करता है। इम्युनिटी को बढ़ाना ही होम्योपैथी का आधार है। पूरी जिंदगी को वाइटल फोर्स ही कंट्रोल करता है। यही है जो जिंदगी को आगे बढ़ाता है। अगर शरीर की वाइटल फोर्स डिस्टर्ब है तो शरीर में बीमारियां बढ़ने लगेंगी। होम्योपैथी में मरीज को ऐसी दवा दी जाती है, जो उसकी वाइटल फोर्स को सही स्थिति में ला दे। वाइटल फोर्स ही बीमारी को खत्म करता है और इसी में शरीर की इम्यूनिटी होती है। दवा देकर वाइटल फोर्स की पावर बढ़ा दी जाती है, जिससे वह बीमारी से लड़ती है और उसे खत्म कर देती है। होम्योपैथी में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आमतौर पर इन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
- - अल्फाअल्फा क्यू ( मदर टिंक्चर ) की 5 से 7 बूंदें तीन चम्मच पानी में डालकर दिन में तीन बार रोजाना लें।
- - अल्फाअल्फा 30 की 3 से 4 बूंद पानी में डालकर दिन में तीन बार लें। इन दोनों दवाओं में अल्फाअल्फा 30 का असर ज्यादा गहरा होता है। बच्चों के लिए भी ज्यादा बढ़िया यही दवा है।
- - दूसरी दवा है अवाइना सटाइवा 30 और अवाइना सटाइवा क्यू। इन दोनों दवाओं को भी ऊपर दिए गए तरीकों से ही लेना है।
- - अगर किसी को बार- बार सर्दी, जुकाम, खांसी आदि होते हैं तो इन दवाओं में से कोई एक दो से तीन महीने तक ले सकते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और छोटी-मोटी बीमारियों से राहत मिलती है।
4. नैचरोपैथी:
नैचरोपैथी के मुताबिक बुखार, खांसी और जुकाम जैसे रोगों को शरीर से टॉक्सिंस बाहर निकालने का मेकनिजम माना जाता है। नैचरोपैथी में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए अच्छी डाइट और लाइफस्टाइल को सुधारने के अलावा शरीर को डीटॉक्स भी किया जाता है। शरीर को डीटॉक्स करने के लिए:-
- -खूब पानी पिएं। हाइड्रेशन के अलावा यह शरीर पर हमला करने वाले माइक्रो ऑर्गैनिजम को बाहर निकालने का काम भी करता है।
- -लिवर के काम करने की क्षमता को बेहतर बनाएं। इसके लिए नैचरोपैथी में गैस्ट्रोहिपेटिक पैक (लिवर पैक) की मदद से इलाज किया जाता है। इसमें पानी का इस्तेमाल होता है। Source : News Zone India
पेट के कीड़े और मन्दाग्नि (खाने का देर से पचना)
पेट के कीडे और भूख का न लगना एक आम बीमारी है,पेट में कीडे होने पर जहां रोगी को अत्याधिक भूख लगती है,वहीं मंदाग्नि में भूख नही होने के कारण स्वास्थ्य खराब होना चालू हो जाता है,पेट के कीडे अधिकतर बच्चों के अन्दर पाये जाते है।
पेट के कीडे
पेट के कीडे सामान्यत: कब्ज करने वाले भोजन मांस और खट्टे मीठे पदार्थ अधिक खाने से पैदा होते है,इनके कारण शरीर में बुखार पेट दर्द जी मिचलाना चक्कर आना दस्त लगना गुदा में कांटे से चुभना आदि लक्षण होते हैं। पेट के अन्दर कीडे होने पर कब्ज से बचना चाहिये,इसके लिये दोनों समय चावल दाल खाया जा सकता है,पुराने चावलों का भात परवल करेला गूलर बकरी का दूध कांजी नीबू का रस साबूदाना अखरोट आदि हल्के पदार्थ खाने पेट में कीडे नही होते है,यदि कीडे पेट में हो जावें तो यह इलाज काम में लेने चाहिये।
- * दो टमाटरों में नमक और काली मिर्च लगा कर रोजाना सुबह पन्द्रह दिन तक खायें पेट के कीडे मर कर बाहर निकल जायेंगे,इसे तीन साल से कम उम्र के बच्चों को न दें। बडे बच्चे को रात को दूध जरूर पिलायें।
- * पेट की कीडों को खत्म करने के लिये हल्दी का काढा बनाकर पिलाना चाहिये।
- * दो तीन रत्ती हींग को अजवायन और ग्वारपाठा के गूदे के साथ देने से पेट की कीडे खत्म हो जाते है।
- * कमीला और बायबिडंग दोनो को बराबर बराबर लेकर पीस लें, बच्चों को एक ग्राम और बडों को तीन ग्राम सोने से पूर्व रात को दूध से दें,कीडे मर कर पेट से बाहर निकल जायेंगे।
- *भात के मांड में बायविडंग और त्रिफ़ला का चूर्ण डालकर पीने से पेट के कीडों का नाश होता है।
- * छ: माशे खुरासानी अजवायन को छ: ग्राम बासी पानी के साथ पीस कर उसमें एक तोला पुराना गुड मिलाकर पीने से कीडे खत्म हो जाते है।
- * नीम के पत्तों का रस शहद के साथ मिलाकर पीने से कीडे मर जाते है।
- * ढाक के पत्तों का रस शहद के साथ पीने से कीडे खत्म हो जाते है।
- * बायबिडंग का चूर्ण पांच माशे अथवा पांच ग्राम एक तोले अर्थात दस ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से पेत की कीडे नष्ट हो जाते है।
- * नीबू के पत्तों का रस शहद में मिलाकर चाटने से पेट के कीडे नष्ट हो जाते है।
- * पांच ग्राम ढाक के बीज लेकर मट्ठे के साथ रात को निगल जायें,सुबह मल में मरे हुये कीडे निकल जायेंगे।
- * दही में कमीला मिलाकर पीने से सभी तरह के पेट के कीडे मर जाते है।
- * नारियल का छिलका पानी में औटाकर सुबह निराहार पीने से पेट के कीडे मर जाते है।
- * काले जीरे का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से कीडे मर जाते है।
- * दो ग्राम नौसादर को देशी घी में मिलाकर खाने से कीडे मर जाते है।
- * सुबह उठकर पहले थोडा सा गुड खायें,फ़िर खुरासानी अजबायन को पानी के साथ पीस कर उस जल को पी जायें,पेट के कीडे नष्ट हो जायेंगे।
- * नीम के कडवे पत्ते और जरा सी हींग मिलाकर चबाने से तथा उसके रस को चूंसने से पेट और दांत के कीडे नष्ट हो जाते है।
- * प्याज का रस पिलाने से बालकों के पेट के कीडे खत्म हो जाते है।
- * जैतून के तेल को पिलाने और गुदा में लगाने से बच्चों के चुनचुने समाप्त हो जाते है।
- * कच्ची हल्दी को गुड में मिलाकर खिलाने से बच्चों के पेट के कीडे समाप्त हो जाते है।
- * अधिक मीठा खाने से बच्चों के मल द्वार में कीडे काटने लगते है,और बच्चा अचानक चिल्लाने लगता है,उसके मल द्वार में मिट्टी के तेल का फ़ाया लगाने के बाद चुनचुने काटना बंद कर देते है।
- * नारंगी के छिलके काटकर सुखा लें फ़िर उतनी ही मात्रा में बायबिडंग को कूट पीस कर उसमें मिलालें,आधा चम्मच चूर्ण गरम पानी से बच्चे को रोज एक बार तीन दिन तक दें,चौथे दिन एक चम्मच कैस्टर आयल दूध में डालकर पिला दें,दस्त के साथ मरे हुये कीडे निकल जायेंगे।
- * टेसू के फ़ूल लाकर उसका काढा बनाकर गुद मिलाकर पिलाने से पेट के कीडे खत्म हो जाते है। इसे सिर्फ़ तीन दिन ही पिलाना चाहिये।
भूख न लगना
हमारे शरीर की अग्नि खाये गये भोजन को पचाने का काम करती है,यदि यह अग्नि किसी कारण से मंद पड़ जाये तो भोजन ठीक तरह से नही पचता है, भोजन के ठीक से नही पचने के कारण शरीर में कितने ही रोग पैदा हो जाते है,अनियमित खानपान से वायु पित्त और कफ़ दूषित हो जाते है,जिसकी वजह से भूख लगनी बंद हो जाती है,और अजीर्ण अपच वायु विकार तथा पित्त आदि की शिकायतें आने लगती है,भूख लगनी बंद हो जाती है,शरीर टूटने लगता है,क्मुंह में साबुन सा घुलने लगता है,स्वाद बिगड जाता है,पेट में भारीपन महसूस होने लगता है,पेट खराब होने से दिमाग खराब रहना चालू हो जाता है,अथवा समझ लीजिये कि शरीर का पूरा का पूरा तंत्र ही खराब हो जाता है,इसके लिये मंन्दाग्नि से हमेशा बचना चाहिये और तकलीफ़ होने पर इन दवाओं का प्रयोग करना चाहिये।
- * भूख नही लगने पर आधा माशा फ़ूला हुआ सुहागा एक कप गुनगुने पानी में दो तीन बार लेने से भूख खुल जाती है।
- * काला नमक चाटने से गैस खारिज होती है,और भूख बढती है,यह नमक पेट को भी साफ़ करता है।
- * हरड का चूर्ण सौंठ और गुड के साथ अथवा सेंधे नमक के साह सेवन करने से मंदाग्नि ठीक होती है।
- * सेंधा नमक,हींग अजवायन और त्रिफ़ला का समभाग लेकर कूट पीस कर चूर्ण बना लें,इस चूर्ण के बराबर पुराना गुड लेकर सारे चूर्ण के अन्दर मिला दें,और छोटी छोटी गोलियां बना लें,रोजाना ताजे पानी से एक या दो गोली लेना चालू कर दे,यह गोलियां खाना खाने के बाद ली जाती है,इससे खाना पचेगा भी और भूख भी बढेगी।
- * हरड को नीब की निबोलियों के साथ लेने से भूख बढती है,और शरीर के चर्म रोगों का भी नाश होता है।
- * हरड गुड और सौंठ का चूर्ण बनाकर उसे थोडा थोडा मट्ठे के साथ रोजाना लेने से भूख खुल जाती है।
- * छाछ के रोजाना लेने से मंदाग्नि खत्म हो जाती है।
- * सोंठ का चूर्ण घी में मिलाकर चाटने से और गरम जल खूब पीने से भूख खूब लगती है।
- * रोज भोजन करने से पहले छिली हुई अदरक को सेंधा नमक लगाकर खाने से भूख बढती है।
- * लाल मिर्च को नीबू के रस में चालीस दिन तक खरल करके दो दो रत्ती की गोलियां बना लें,रोज एक गोली खाने से भूख बढती है।
- * गेंहूं के चोकर में सेंधा नमक और अजवायन मिलाकर रोटी बनवायी जाये,इससे भूख बहुत बढती है।
- * चने के प्रयोग से पाचन शक्ति बढती है,इसके लिये उबले चने चने की रोटी भुने चने खाने चाहिये।
- * मोठ की दाल मंदाग्नि और बुखार की नाशक है।
- * डेढ ग्राम सांभर नमक रोज सुबह फ़ांककर पानी पीलें,मंदाग्नि का नामोनिशान मिट जायेगा।
- * टमाटर का सास चाटते रहने से या पके टमाटर की फ़ांके चूंसते रहने से भूख खुल जाती है।
- * दो छुहारों का गूदा निकाल कर तीन सौ ग्राम दूध में पका लें,छुहारों का सत निकलने पर दूध को पी लें,इससे खाना भी पचता है,और भूख भी लगती है।
- * जीरा सोंठ अजवायन छोटी पीपल और काली मिर्च समभाग में लें,उसमे थोडी सी हींग मिला लें,फ़िर इन सबको खूब बारीक पीस कर चूर्ण बना लें,इस चूर्ण का एक चम्मच भाग छाछ मे मिलाकर रोजाना पीना चालू करें,दो सप्ताह तक लेने से कैसी भी कब्जियत में फ़ायदा देगा।
- * भोजन के आधा घंटा पूर्व चुकन्दर गाजर टमाटर पत्ता गोभी पालक तथा अन्य हरी साग सब्जियां व फ़लीदार सब्जियों के मिश्रण का रस पीने से भूख बढती है।
- * सेब का सेवन करने से भूख भी बढती है और खून भी साफ़ होता है।
- * अजवायन चालीस ग्राम सेंधा नमक दस ग्राम दोनो को कूट पीस कर एक साफ़ बोतल में रखलें,इसमे दो ग्राम चूर्ण रोजाना सवेरे फ़ांक कर ऊपर से पानी पी लें,इससे भूख भी बढेगी और वात वाली बीमारियां भी समाप्त होंगी।
- * एक पाव सौंफ़ पानी में भिगो दें,फ़िर इस पानी में चौगुनी मिश्री मिलाकर पका लें,इस शरबत को चाटने से भूख बढती है।
- * पकी हुई मीठी इमली के पत्ते सेंधा नमक या काला नमक काली मिर्च और हींग का काढा बनाकर पीने से मंदाग्नि ठीक हो जाती है।
- * जायफ़ल का एक ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से जठराग्नि प्रबल होकर मंदाग्नि दूर होती है।
- * सोंफ़ सोंठ और मिश्री सभी को समान भाग लेकर ताजे पानी से रोजाना लेना चाहिये इससे पाचन शक्ति प्रबल होती है।
- * जवाखार और सोंठ का चूर्ण गरम पानी से लेने से मंदाग्नि दूर होती है।
- * लीची को भोजन से पहले लेने से पाचन शक्ति और भूख में बढोत्तरी होती है।
- * अनार भी क्षुधा वर्धक होता है,इसका सेवन करने से भूख बढती है।
- * नीबू का रस रोजाना पानी में मिलाकर पीने से भूख बढती है।
- * आधा गिलास अनन्नास का रस भोजन से पहले पीने से भूख बढती है।
- * तरबूज के बीज की गिरी खाने से भूख बढती है।
- * बील का फ़ल या जूस भी भूख बढाने वाला होता है।
- * इमली की पत्ती की चटनी बनाकर खाने से भूख भी बढती है,और खाना भी हजम होता है।
- * सिरका सोंठ काला नमक भुना सुहागा और फ़ूला हींग समभाग मे लेकर मिला लें,रोजाना खाने के बाद भूख बढती है।
- * सूखा पौदीना बडी इलायची सोंठ सौंफ़ गुलाब के फ़ूल धनिया सफ़ेद जीरा अनारदाना आलूबुखारा और हरड समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें,मंदाग्नि अवश्य दूर हो जायेगी।
- * एक ग्राम लाल मिर्च को अदरक और नीबू के रस में खरल कर लें,फ़िर इसकी काली मिर्च के बराबर की गोलिया बना लें, यह गोली चूसने से भूख बढती है।
पेशाब वाली बीमारियां
पेशाब में जलन
- * पेशाब में जलन होने पर तुलसी के बीज और दानेदार शक्कर को दूध के साथ सुबह शाम दो दिन तक लेने से जलन और पीडा शांत होती है।
- * अनार का छिलका सुखाकर बारीक पीस लें,प्रतिदिन चार ग्राम चूरण ताजे पानी से दो तीन बार लेने से पेशाब की जलन और पीडा शांत होती है।
- * शीतल चीनी के काढे में पांच बूंदे चन्दन का तेल डालकर पीने से पेशाब की जलन शांत होती है।
- * मूली के पत्तों के आधा किलो रस में तीन ग्राम कलमी शोरा मिलाकर पिलाने से कैसी भी पेशाब रुकी हुई हो जाती है और जलन शांत होती है।
बहुमूत्र
- * मूली के नियमित प्रयोग से बहुमूत्र में आराम मिलता है
- * आंवले का रस या सूखा चूर्ण गुड के साथ मिलाकर लेने से पेशाब खुलकर आता है
- * जवाखार और मिश्री तीन तीन ग्राम ताजे जल के साथ कुछ दिन लेने से बहुमूत्र का रोग समाप्त हो जाता है
- * राई काले तिल कलमी शोरा टेसू के फ़ूल एवं दालचीनी सभी को समभाग में लेकर चूर्ण बना लें,रोज दो ग्राम सुबह शाम शहद के साथ खाने पर बहुमूत्र रोग से मुक्ति मिलती है
- * बहुमूत्र में बबूल का गोंद घी मे भून कर मक्खन के साथ सुबह को खाने से फ़ायदा होता है
- * अदरक का ताजा रस सेवन करने से रुका हुआ मूत्र जल्दी बाहर निकल जाता है,साथ ही बहुमूत्र की शिकायत भी दूर होती है
- * जामुन की गुठली एवं बहेडे का चिलका दोनो बारीक पीस लें,आठ दिन तक चार ग्राम रोज पानी के साथ लें,बार बार पेशाब आना बंद हो जायेगा
- * कलमी शोरा दस ग्राम दूध दो सौ पचास ग्राम और पानी एक किलो इन सबको मिलाकर दिन में दो बार पियें पेशाब खुलकर आयेगा बहुमूत्र रोग ठीक हो जायेगा
- * पिस्ता छ: दाने मुनक्का तीन दाने और काली मिर्च तीन दाने इन्हे सुबह शाम चबाकर पंद्रह दिन खाने से पेशाब बार बार नही आयेगा
बिस्तर पर पेशाब करना
- * बिस्तर में पेशाब करने वाले बच्चों को प्रतिदिन दो मुनक्का बीज निकालकर और एक छुहारा रात को सोने से पहले खिलायें,दही लस्सी और चावल का परहेज करें।
- * आंवले का गूदा और काले जीरा का समभाग शहद के साथ लेने पर सोते समय पेशाब निकलना बन्द हो जाता है
- * बिस्तर में पेशाब करने वाले बच्चों को एक कप ठंडे फ़ीके दूध में एक चम्मच शहद घोलकर सुबह शाम चालीस दिन तक पिलाना चाहिये,साथ ही तिल का लड्डू गुड में बनाकर रोज प्रात:काल खिलाये,शाम के समय गरम तथा शीतल पेय कतई पीने को न दें.
आंवला (Gooseberry/Emblic Myrobalan)
एक आंवला हजार बीमारियों को भगाता है, लेकिन वहीँ आंवले का मुरब्बा अगर चूने के पानी में उबाल कर बनाया गया है तो सिर्फ सुस्वादु ही हो सकता है, गुणकारी नहीं. इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि हरा आंवला ही ज्यादा प्रयोग किया जाए. ये चार महीने बाजार में उपलब्ध रहता है। अगर हम चार महीने इसका सेवन कर लें तो शेष आठ महीने तक तो रोग रहित होकर जीवनयापन कर ही सकते हैं। एक आँवला एक अंण्डे से अधिक बल देता है। एक आँवले में विटामिन-सी की मात्रा चार नारंगी और आठ टमाटर या चार केले के बराबर मिलता है। इसलिए यह शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति में महत्वपूर्ण है। आँवले में कई तरह के विटामिन होते है आँवले में कैलोरी, प्रोटीन, कैल्सियम, लोहा, विटामिन, थायोमिन, रिबोफ्लोविन, नियासिन, विटामिन-सी जल, कार्बोहाईड्रेट खनिज लवण रेशा वसा और फास्फोरस भरपूर मात्र में होता है। इसके नियमित सेवन से कभी बुढ़ापा नहीं आता है।
>>>>>आंवला एक कसैला स्वाद वाला अत्यन्त गुणकारी पोसक शीतल विटामिन सी से भरपूर वृद्धावस्था को रोकने में समर्थ धातृ फल है, आयुर्वेद में आँवले का भरपूर प्रयोग किया जाता है। आकर में बड़ा, बेदाग और हलकी-सी लाली लिए हुए हो, वह आँवला सबसे उत्तम होता है। यह फल पितनाश्क होने के कारण पित-प्रधान रोगों की प्रधान औषधि है। यह रक्तवाहिनियों के विकारों को नष्ट करने में सक्षम है। यह फल मधुरता और शीतलता के कारण पित को शान्त करता है।
>>>>>लड़कियों के बाल धुलने से लेकर दादी नानी के चटपटे हाज़मा चूर्ण तक में इसकी गहरी पैठ है. बुजुर्ग लोग आज भी कार्तिक का महीना आते ही आंवले का पेड़ खोजने लगते हैं, ताकि दिन भर उसी के नीचे बैठकी जमे. बहुत शुभ और गुणकारी माना जाता है कार्तिक के महीने में आंवले का सेवन. इसके पेड़ की छाया तक में एंटीवायरस गुण हैं और गज़ब की जीवनी शक्ति है. कार्तिक के महीने में इस पेड़ के ये दोनों गुण चरम पर होते हैं, अगर आप श्वास की किसी भी बीमारी से परेशान है तो सिर्फ इसके पेड़ के नीचे खड़े होकर 5 मिनट गहरी गहरी श्वासें लीजिये, 10-15 दिन में ही बीमारी आपका पीछा छोड़ देगी. इसे अमर फल भी कहते हैं. कहीं-कहीं धात्रीफल और आदिफल के नाम से भी जानते हैं. इस आमले/आंवले के फल और बीज दोनों ही उपयोगी हैं।
: आंवले के औषधीय उपयोग :
इसे चटनी, अचार, मुरब्बा, शर्बत या कच्चा ही किसी भी रूप में अधिक से अधिक प्रयोग मे लाना चाहिये। आंवले का प्रयोग सारी उम्र लगातार भी कर सकते है, इसके प्रयोग से कभी कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता, यह मनुष्य को मिला प्रकृति का एक अनुपम उपहार है! आंवले गुणों का खजाना है और यह हार्ट व डाइजेस्टिव सिस्टम लेकर खूबसूरती तक को निखारता है। जानते हैं, इसकी खूबियों के बारे में।
बालों के लिए आंवला :
- आंवले का प्रयोग प्रतिदिन भोजन में करें चाहे चटनी के रूप में या मुरब्बे के रूप में कच्चा आंवला भी खाया जा सकता है।
- आंवले के सेवन से बाल झ़डने कम होंगे, लम्बे, घने व मजबूत बनेंगे। आंवले के सेवन से बालों को समय से पहले सफेद होने से बचाया जा सकता है। अगर आपके बाल सफेद हो गये हैं तो कच्चे आंवले का पेस्ट बालों की ज़डों में लगायें। धीरे—धीरे बालों का सफेद होना रुक जाएगा।
- बाल धोने के लिए लोहे की क़डाही में आंवला पाउडर, रीठा पाउडर, शिकाकाई पाउडर तीनों भिगो दें। सुबह उस पानी से बाल धोयें। बालों का झ़डना कम होगा और बाल लंबे भी होंगे।
- सफेद बालों को काला करने के लिए रीठा पाउडर, आंवला पाउडर शिकाकाई पाउडर रात को लोहे की क़डाही में भिगो दें। सुबह चाय के पानी में मेंहदी मिला कर उसे क़डाही वाले मिश्रण में मिला लें। ब्रुश लेकर इस पेस्ट को बालों में लगा दें। चार पांच घंटे तक बालों में लगा रहने दें। सूखने पर शेंपू से बाल धो लें। सप्ताह में दो बार बालों में उपरोक्त मिश्रण को लगायें धीरेधीरे बालों की सफेदी दूर होगी।
- बाल धोने के बाद आंवले का तेल बालों में लगायें। बालों को काला करने के लिए यह भी उपयोगी है। अगर हम थ़ोडा सा ध्यान देकर आंवले का प्रतिदिन प्रयोग करें तो यह सोने पे सुहागे का कार्य करता है। गर्मी के मौसम में इसका नियमित सेवन ठंडक प्रदान करता है।
- सूखा आवला 30 ग्राम, 10 ग्राम बहेड़ा व 50 ग्राम आम की गुठली की गिरी को पीसकर रात भर लोहे की कढ़ाई मे भिगोकर रखे, बालो पर इसका रोज लेप [करीब एक घंटा ] करने से कम उम्र मे सफ़ेद हुए बाल कुछ ही दिनो मे काले होने लगते है!
- आंवले का नित्य प्रयोग करने से सिर के बाल गिरने बंद हो जाते है!
- आंवले को कई हेयर प्रॉडक्ट्स में भी डाला जाता है। दरअसल, देखने में आया है कि आंवला बालों को मजबूत बनाता है, इनकी जड़ों को स्ट्रॉन्ग करता है और बालों का झड़ना भी काफी हद तक रोकता है।
- बाल झड़ना : आंवला रस और नारियल तेल बराबर मात्रा में मिलाकर बालों की जड़ों में मालिश करें।
दिल, यकृत, हृदय :
- आंवला पाउडर, मिश्री पाउडर के साथ खाली पेट लेने से दिल से संबंधित बीमारियों में लाभ मिलता है।
- यकृत की बीमारी में आंवले का रस पानी के साथ दिन में तीन बार लें। लाभ मिलेगा।
- 250 ग्राम आंवले के चूर्ण में 50 ग्राम लहसुन पीसकर यह मिश्रण शहद में डुबाकर पंद्रह दिन तक धूप में रखें. उसके पश्चात् हर रोज़ एक चम्मच मिश्रण खा लें. यह एक उत्तमह्रदय-पोषक है. यह प्रयोग ह्रदय को मज़बूत बनाने वाला एक सरल इलाज है.
- रक्तचाप, ह्रदय का बढ़ना, मानसिक तनाव (डिप्रेशन), अनिद्रा जैसे रोगों में 20 ग्रामगाजर के रस के साथ 40 ग्राम आंवले का रस लेना चाहिए.
- आधा भोजन करने के पश्चात् हरे आंवलों का 30 ग्राम रस आधा ग्लास पानी मेंमिलाकर पी लें l फिर शेष आधा भोजन करें. यह प्रयोग 21 दिन तक करें. इससे ह्रदय व मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा स्वास्थ्य सुधरता है.
- दिल : दिल को सेहतमंद रखने के लिए रोजा आंवला खाने की आदत डालें। इससे आपके दिल की मांसपेशियां मजबूत होंगी, जिससे दिल शरीर को ज्यादा व साफ खून सप्लाई कर पाएगा। बेशक इससे आप सेहतमंद रहेंगे।सूखा आंवला व मिस्री दोनो को पीसकर [समान मात्रा मे] एक-एक चम्मच रोज फंकी लेकर खाने से हार्ट संबंधी सभी रोग दूर होते है!
चर्म रोग :
- पित्त : आंवला घृतकुमारी के संग पीने से पित्त का नाश होता है।
- आंवले का चूर्ण गौमूत्र में घोंटकर शरीर पर लगाने से तुरंत पित्तियां दब जाती हैं.
- खुजली : आंवला की गुठली को जला कर उसकी भस्म नारियल के तेल मे मिलाकर किसी भी प्रकार की खुजली मे लगाए लाभ होगा!
- स्कर्बी : आंवला खाने से मसूड़े स्वस्थ होते है व स्कर्बी नामक रोग दूर होता है!
- दांत : मैले दांत चमकाने हों तो दांतों पर आंवले के रस से मालिश करें। आंवले के रस मेंसरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों पर हलकी मालिश करने से भी बहुत फायदा होता है।
योन रोग :
- मूत्र-विकार : दो चम्मच कच्चे आंवले का रस और दो चम्मच कच्ची हल्दी का रस शहद के साथ लेने से प्रमेह मिट जाता है. कुछ दिनों तक प्रयोग करने से मधुमेह नियंत्रण में आ जाता है तथा सभी तरह के मूत्र-विकारों से छुटकारा मिल जाता है.
- श्वेत प्रदर: आंवले की गुठली फोड़ कर निकाले बीजों का चूर्ण पानी से पीस कर शहद व मिश्री मिला पिलाएं।
- ल्यूकोरिया के लिए : आंवले के बीजों का पावडर बना लीजिये. एक चम्मच पावडर में आधा चम्मच शहद और थोड़ी सी मिश्री मिला कर सवेरे खाली पेट खाएं। 15 दिनों तक सेवन करें।
- स्त्रियों का बहुमूत्र [सोमरोग]: आंवले का रस, पका हुआ केले का गूदा, शहद व मिश्री चारों मिलाकर चटाएं।
- मूत्ररोग : सूखे आंवले तथा सुखा धनिया सामान मात्रा में लेकर रात को कुल्लढ में इक्कठे भिगो दें. सुबह छान के मिश्री मिलाकर पियें. इससे पेशाब की जलन दूर होती है तथा मूत्ररोगों में लाभ होता है.
- मूत्र त्याग में दर्द के लिए : 150 ग्राम आंवले का रस लीजिये, बिना कुछ मिलाये पी जाएं, बस दो दिनों तक।
- मूत्र कष्ट: आंवले का 25 ग्राम ताजा रस, छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण बुरक कर पिलाएं। मूत्र आने लगेगा।
मोटापा :
प्रतिदिन आंवले का रस और शहद पचास-पचास ग्राम सुबह तथा रात सोते समय लेने से पेट का मोटापा दूर हो जाता है।
बुढापा दूर करने के लिए :
- बुढापा दूर करने के लिए : 100 ग्राम आंवले का पावडर और 100 ग्राम काले तिल का पावडर मिलाये। अब इसमें 50 ग्राम शहद और 100 ग्राम देसी घी मिलाएं। एक चम्मच प्रतिदिन सुबह सिर्फ एक महीने तक खाना है।
- ज्वर दूर करने के लिए : दो चम्मच हरे आंवले का रस और दो ही चम्मच अदरक का रस मिश्री मिलाकर दिन में दो बार, सेवन करें, बस। जो मनुष्य आंवले का रस 10 से 15 मि.ली., शहद 10 से 15 ग्राम, मिश्री 10 से 15 ग्रामऔर घी 20 ग्राम मिलाकर चाटता है तथा पथ्य भोजन करता है, उससे वृद्धावस्था दूर रहती है। इस प्रयोग से शारीर में गर्मी, रक्त, चमड़ी तथा अम्लपित्त के रोग दूर होते हैं और शक्ति मिलती है।
- हेल्दी ऑप्शन : आवंले में विटामिन सी, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन और विटामिन बी बहुत होते हैं। इसलिए इसे अपनी डाइट में शामिल करना एक हेल्दी ऑप्शन है।
- न्यूट्रिएंट्स : आंवला खाने को अच्छी तरह पचाने में मदद करता है, जिससे आपको खाने के तमाम न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं। आंवले की चटनी बनाकर खाने से विभिन्न रोग अपने आप दूर होंगे।
नेत्रों के रोग :
- आंवले के सेवन से आंखों की ज्योती बढती है। सूखा आंवला रात को पानी में भिगो दें व सुबह छानकर इसके पानी से आंखें धोने से नेत्र ज्योति बढती है।
- यदि आखों के आगे अंधेरा छा जाता हो, सिर में जलन हो या बार-बार पेशाब आता हो तो आंवले का रस पानी में मिलाकर सुबह शाम लगातार चार दिन पीने से लाभ होगा।
- अगर आप अपनी आईसाइट इंप्रूव करना चाहते हैं, तो आंवले के जूस में शहद मिलाकर पीएं। यह मोतियाबिंद की परेशानी में भी फायदेमंद रहता है।
- आंवले को कूट कर (लगभग 20 ग्राम) लगभग आधा किलो पानी में उसे उबालें व धीमी आंच पर दो घंटे तक उस पानी को छानकर आखों में दिन में तीन बार डालने से नेत्र रोग मे लाभ होता है।
- आंवले का रस और शुद्ध शहद सामान मात्रा में लेकर मिला लें। इस मिश्रण को प्रतिदिन रात के समय आँखों में आंजने से आँखों का धुंधलापन कम हो जाता है. इस मिश्रण को पीने से भी फायदा होता है.
- नेत्रों के रोग: आंवला छिलका दरदरा कूट कर पानी में भिगोकर रखें। इसे कपड़े से [साफ] छान कर दिन में तीन बार 2-2 बूंद आंखों में टपकाएं।
- आँखों की रोशनी : 15-20 मि.ली. आंवलों का रस तथा एक चम्मच शहद मिलाकर चटाने से आँखों की रोशनी में वृद्धि होती है।
खांसी :
- पिसा हुआ आंवला एक चम्मच को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर दिन में दो या तीन बार लेने से खांसी दूर होगी।
- खांसी में : सूखे आंवले के एक चम्मच पावडर में थोड़ा घी मिला कर पेस्ट बना लीजिये, दिन में दो बार चाटिये।
- आंवला पाउडर, मुलहठी पाउ खाली पेट लें। खांसी बलगम में लाभ मिलेगा।
- सर्दी या कफ्फ की तकलीफ हो तो आंवले के 15-20 मि.ली. रस या 1 ग्राम (पाँव चम्मच) चूर्ण में 1 ग्राम हल्दी मिलाकर लें। सूखी खांसी में भी आंवला रस और शहद फायदेमंद है।
दिमाग की शक्ति :
- दिमाग की शक्ति : दिमाग की शक्ति ब़ढाने डरके लिए आंवले को कस कर शहद में मिलाकर लें। दिमाग की शक्ति ब़ढाने के लिए आंवले का मुरब्बा प्रतिदिन खाने से लाभ मिलेगा।
- स्मरण शक्ति : सूखा आंवला व काला नमक समान मात्रा मे पीस कर आधा चम्मच पानी से लेने से लूज मोशन बंद हो जाते है! नित्य प्रति आंवले का मुरब्बा खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है! 1-2 आंवले और 10-20 ग्राम काले तिल रोज़ सुबह चबाकर खाने से स्मरणशक्ति तेज़ हो जाती है।
- इम्यून सिस्टम : यदि गरमियो में जी घबराता हो तो व चक्कर आते हो तो आंवले का शर्बत पिये, कमजोरी दूर होगी व आपका इम्यून सिस्टम (Immune System-प्रतिरक्षा प्रणाली) ठीक होगा!
- इम्युनिटी : आंवले में एंटि-बैक्टीरियल क्वॉलिटीज होती हैं, जो बॉडी की इम्युनिटी पावर बढ़ाकर उसे इंफेक्शंस से लड़ने की स्ट्रेंथ देती हैं।
पाचन संबंधी तकलीफें :
- डायरिया : अगर आपका पेट खराब है, तो आंवला खाएं। दरअसल, लेक्सेटिव क्वॉलिटीज की वजह से यह डायरिया जैसी परेशानियों को दूर करने में बहुत फायदेमंद है।
- अतिसार: कच्चा आंवला पीस कर रोगी की नाभि के चारों ओर कटोरी जैसी बनाकर इस नाभि में अदरक का रस भर दें।
- भूख अच्छी : एक रिसर्च से पता चला है कि खाना खाने से पहले आंवले का पाउडर, शहद और मक्खन मिलाकर खाने से भूख अच्छी लगती है।
- एसिडिटी : आपको एसिडिटी की समस्या है, तो एक ग्राम आंवला पाउडर और थोड़ी-सी चीनी को एक गिलास पानी या दूध में मिलाकर लें। इसे ड्रिंक को दिन में दो बार लेने से एसिडिटी की प्रॉब्लम तभी दूर हो जाएगी।
- कब्ज : रात को एक चम्मच पिसा आंवला या आंवले का रस गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट की कब्ज संबंधी समस्याए दूर होती है!
- खूनी बाबासीर : सूखे आंवले को बारीक पीस कर एक-एक टी स्पून सुबह व शाम दोनों टाईम गाय के दूध की लस्सी या गाय के दूध के साथ लेने से खूनी बाबासीर मे लाभ होता है!
- बवासीर : बवासीर [मस्से], स्वप्न दोष, स्मरण शक्ति का कमजोर होना, औरतों में श्वेत प्रदर , सोमरोग [बूंद-बूंद पेशाब आना मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहना] आदि रोगों में भी पूर्व में बताए अनुसार शहद और आंवला रस का सेवन हितकारी है।
- बवासीर: आंवले पीस कर पीठी को मिट्टी के बर्तन में लेप कर दें। इसमें गाय की ताजा छाछ भर रोगी को पिलाएं।
- कीड़े नष्ट : ताजे आंवले का रस {1ओंस } प्रातः काल खाली पेट 15 दिन तक लगातार लेने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते है!
- हिचकी: आंवला, कैथ का गूदा, छोटी पीपर का चूर्ण, शहद से चटाएं तो हिचकियां मिट जाएंगी।
- अजीर्ण: ताजा आंवला, अदरक, हरा धनिया मिलाकर चटनी बनावें इसमें सेंधा नमक, काला नमक, हींग, जीरा, काली मिर्च मिला चटावें। डकारें आएंगी, भूख खुलेगी, हाजमा बढ़ेगा।
- पीलिया (जांडिस) : एक गिलास गन्ने के रस में तीन बड़े चम्मच हरे आंवले का रस और तीन ही चम्मच शहद मिला कर दिन में दो बार पिलाए. 10 दिन तक पिलाना बेहतर रहेगा जबकि रोग तो तीन दिन में ही ख़त्म हो जाएगा।
विविध :
- मुंह के छाले और घाव: आंवले के पत्तों के काढे से दिन में 2 से 3 बार कुल्ले कराएं।
- हाई ब्लडप्रैशर, एसिडिटी, दृष्टि दोष, मौसमी बुखार, सिर दर्द, पित्त शूल, वायु विकार, अनिद्रा, उल्टी आना, बार-बार पेशाब जाना, प्रोस्टेट ग्रंथि के विकार, हकलाना, तुतलाना, पेशाब में जलन, ह्वदयशूल [पित्त दोष] आदि रोगों में पचास-पचास ग्राम आंवला रस और शहद मिलाकर रोजाना सोते समय लेने से रोग विकार दूर होकर शरीर स्वस्थ बन जाता है।
- श्वास रोग : पीपली आंवला व सौंठ 2-2 ग्राम की मात्रा पीसकर शहद के साथ बार- बार प्रयोग करने से श्वास सम्बन्धी रोग दूर होते हैं।
- नकसीर : नाक से खून आना : नाक से खून आने पर नाक में आंवले के रस की दो बूंद डालें तथा आंवले को पीस कर सिर पर लेप करें।
- आवाज : पिसे हुए आंवले को पानी के साथ फंकी लेकर लगातार लेने से आवाज खुल जायेगी।
- दांत दर्द : यदि दांत मे दर्द हो तो आंवले के रस मे कपूर मिला कर दांत मे रखने से दांत दर्द कम होता है 1
- पथरी : यदि किडनी मे पथरी हो तो मूली के साथ आंवला खाने से लाभ होता है!
- रक्त निकालना बंद : शरीर मे किसी स्थान विशेष मे कट जाने पर रक्त निकल रहा हो तो तत्काल आंवले का रस लगाने से रक्त निकालना बंद हो जाएगा!
- सुंदरता : आंवले का उबटन [पैक] चेहरे व बालो मे लगाने से चेहरे व बालो की सुंदरता की वृद्धि होती है!
- हकलाहट हो तो : 100 ग्राम गाय के दूध में एक चम्मच सूखे आंवले का पावडर मिला कर लगातार 15 दिन पीयें, आवाज बराबर से निकलेगी और कंठ सुरीला भी होगा।
- छाती (सीने) में जलन के लिए : सूखे आंवले का एक चम्मच पावडर शहद मिला कर सुबह चाटिये। या एक चम्मच पावडर में दो चम्मच चीनी और दो ही चम्मच घी मिलाकर चाटिये।
- टाक्सिन्स : आंवले का नित्य प्रयोग हमारे शरीर के टाक्सिन्स दूर करता है, जिससे शरीर धीरे-धीरे पूर्णतया स्वस्थ हो जाता है !
- सुगर के मरीजों के लिए : आंवला और हल्दी का पावडर बराबर मात्रा में लीजिये, अच्छी तरह मिक्स कीजिए। जितनी बार भी भोजन करें, उसके बाद एक चम्मच पावडर पानी से निगल लीजिये। सुगर कभी परेशान नहीं करेगी।
आंवले के बारे में जरूरी जानकारी :
- आंवला ताजा हो या प्राकृतिक रूप से सूखा उसके गुण सदैव विद्यमान रहते हैं।
- आंवले के रस को कांच एवं प्लास्टिक के बर्तन में रख सकते हैं।
- हरा ताजा आंवला नहीं मिलने पर सूखे आंवले का चूर्ण बनाकर सुबह और शाम दूध या ताजा पानी के साथ लेना चाहिए।
- आंवले के निरंतर प्रयोग से बाल टूटना, रूसी, बाल सफेद होना रूक जाते हैं। नेत्र ज्योति सुरक्षित रहती है। दांत मजबूत होते हैं।
आंवले और हरिमिर्ची की चटनी :
एक किलोग्राम हरा आंवला लीजिये साथ ही 200 ग्राम हरी मिर्च।
एक किलोग्राम हरा आंवला लीजिये साथ ही 200 ग्राम हरी मिर्च।
- दोनों को धो लीजिये।
- आंवले को काट कर गुठलियाँ बाहर निकाल दीजिये, अब दोनों को ग्राईडर में दरदरा पीस लीजिये (बिना पानी डाले)।
- अब इसमें 100 ग्राम सेंधा नमक मिला दीजिये।
- इसे परिवार का प्रत्येक सदस्य चटपटी चटनी की तरह मजे से खायेगा।
- इसी को आप धूप में सुखा कर पूरे वर्ष के लिए सुरक्षित भी रख सकते हैं।
- जब इच्छा हो दाल या सब्जी में ऊपर से डाल कर खा सकते हैं।
- हरी मिर्च (कच्ची) हीमोग्लोविन बढाती है और आंवले के साथ उसका मिश्रण सोने में सुहागा हो जाता है।
- इसका प्रयोग शरीर में एक्टिवनेस को तो 24 घंटे में ही बढ़ा देता है।
- अनगिनत लाभ हैं, इससे लीवर मजबूत हो जाता है।
परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
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कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
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उपशीर्षक:
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Tuesday, January 24, 2012
सावधानी : जिन लोगों को दमा, खांसी, जुकाम की शिकायत हो, उन्हें नींबू नहीं लेना चाहिए।
विभिन्न फलों के बीच नींबू प्रजाति के फलों का विशिष्ट स्थान दर्जा होता है। इसमें विटामिन ए.बी.सी. एवं खनिज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा पध्दति में इसके रस, छिलके और बीज का औषधि के रूप में काफी बखान किया गया है। नींबू एक छोटा फल है। इसकी अनेक प्रजातियां हैं। मगर कागजी नींबू सबसे उत्तम माना जाता है। मौसंबी, बिजौरा, जमीरी, पनपस, मीठा, खट्टा नारंगी भी औषधीय गुण लिये होते हैं। नींबू सदाबहार सर्वोत्तम रोगनाशक व आरोग्य एवं सौंदर्य प्रदाता है। नींबू की कई किस्में हैं। सभी किस्म उपयोगी व फलदायी हैं।
नींबू में जल 90 प्रतिशत, वसा 1 प्रतिशत, रेशे 2 प्रतिशत, प्रोटीन 1.5 प्रतिशत, कैल्शियम 0.08 प्रतिशत, फास्फोरस 0.03 प्रतिशत और विटामिन- सी सबसे अधिक, जो नींबू की प्रकृति पर निर्भर करता है। नींबू में ऊपर बताए तत्वों के अतिरिक्त शर्करा, तांबा, लवण, थॉयमिन, पोटाश, सोडियम, लोह तत्व, विटामिन- बी, क्लोरिन तथा मैग्नीशियम पोटाशियम आदि भी रहते हैं। जो हमारे शरीर के लिये हितकारी होते हैं। कागजी नींबू हल्का तिक्त, रुचिकर, उष्ण, पाचन शक्ति से भरपूर, जीवाणु नाशक, पित्त नाशक, पाचन शक्ति तीव्र करने व भूख लगाने में पूरी तरह सक्षम होता है।
नींबू का सेवन कैसे करें : किसी भी चीज का सेवन करने के लिए जानकारी पहले जरूरी है:-
- नींबू का सेवन का सबसे आसान तरीका है कि एक ग्लास गुनगुने पानी में नींबू निचोड कर पीलें।
- नींबू में अग्नि का बल होता है इसमें दो चुटकी सेंधा नमक या काला नमक अवश्य डालें ।
- नींबू वर्षाकाल में अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि बरसात में हमेशा शरीर के अंदर दूषित तत्व (टाक्सिक) बनते हैं। उन्हें नींबू दूर करता है तथा बरसात में होने वाली तमाम बीमारियों से बचाता है।
- नींबू का रस हमेशा छानकर ही लेना चाहिए नींबू का बीज लेना उचित नहीं है।
- नींबू का रस कांच या मिट्टी के बरतन में ही रखें. काऱण अन्य धातु में यह जहरीला हो जाता है।
- जहां तक संभव हो कागजी नींबू इस्तेमाल करें।
नींबू के औषधीय उपयोग : ताज़ा ताज़ा नींबू केवल रस भरा ही नहीं होता, बल्कि इसमें भरी हैं ढेर सारी विशेषताएं भी, जिसके कारण बीमारियां दूर भागती हैं :
- शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है।
- नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।
- रक्तक्षीणता दूर करता है नींबू के रस में, कच्चा टमाटर का रस मिलाकर पीयें।
- आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोडकर पियें, रक्त की कमी दूर होगी।
- नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है।
- यदि ज्वर हो और खूब प्यास भी लगे। मुंह सूखता रहे। उबला हुआ पानी लें। इसमें नींबू निचोड़कर पिया करें।
- नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।
- नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।
- नींबू के रस में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढ़ता है।
- नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है।
- नींबू के बीज को पीसकर लगाने से गंजापन दूर होता है।
- थकान दूर कर स्फूर्ति का संचार करता है, पेट का दर्द ठीक करता है।
- बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें।
- आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पिएँ, रक्त की कमी दूर होगी।
- पेट के कीटाणुओं को साफ करने में भी प्रबल होता है। ऐसा यह अपने साइट्रिक अम्ल के कारण कर पाता है। नींबू का खटापन ही इसका सबसे बड़ा गुण है।
- बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें।
- कान का दर्द हो तो प्याज के रसमें भी मिलाकर डालें।
- कद्दू की सब्जी में नींबू निचोड कर अवश्य खायें।
- कील-मुंहासों को हटाने के लिये मलाई व नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर लगाएं। चेहरा चमकने लगेगा।
- चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए नींबू की कुछ बूंदें दूध में डालें। रूई भिंगोकर चेहरा चमकाएं।
- नींबू को नमक तथा काली मिर्च के साथ चाटें। यह भोजन से पूर्व चाटना है। तब अधिक भूख लगा करेगी।
- यदि दस्त लगे हों तो दूध में नींबू का रस 8-10 बूंद डालकर मिलाकर रोगी को पिलाएं। यह बहुत लाभकारी रहता है। दिन में चार बार लेवें। अधिक फायदा होगा। एक गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़ें। रोगी इसे पी ले। दिन में चार बार ऐसी खुराक लें। आराम आता जाएगा।
- नींबू गर्म कर, नमक के साथ चूसा करें। यह भी आराम देता है।
- नींबू का रस शरीर के भीतर के टॉक्सिक (गंद) को बाहर निकालता है।
- शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है।
- नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।
- गुनगुना पानी एक गिलास लें। इसमें एक नींबू निचोड़ें। आधा चम्मच अदरक का रस डालें। मिलाकर रोगी को पिलाएं प्रात: खाली पेट। इससे यूरिक एसिड कम होता है तथा वात रोग शांत होता है।
- रोगों से बचने के लिये निरोगता पाने के लिये नींबू का सेवन नियमित किया करें। स्वस्थ रह सकेंगे।
- नींबू खट्टी ढकारों को दूर करता है, वायु विकार मिटाकर भूख बढ़ाता है, नींबू खाने को जल्दी हजम करता है, नीबू पेट के कीटाणुओं व कीड़ों को नष्ट करता है।
- किसी भी रूप में रोजाना नींबू का सेवन करना चाहिये
- भोजन के प्रति अरुचि दूर करने में सबसे ज्यादा लाभ कारी है।नींबू का पुराना अचार लाभकारी है।
- मुंह का स्वाद बढ़ाता है व कब्ज दूर करता है।
- हैजे से बचाव करता है, नींबू के रस में चीनी मिलाकर (शिकंजी) लेने से हैजे में आराम मिलता है।
- यात्रा में वमन रोकने व दूर करने का सरल उपाय नींबू है।
- खट्टे फलों में नींबू लेने से स्वास्थ्य को कोई हानि नहीं होती है। जोड़ों की खुश्की दूर करता है।
- दांतों तथा मुंह की बीमारियों से दूर रखता है, चीनी मिट्टी की कटोरी में नींबू का रस रखें, रोज उससे दांत साफ करें। दांत चमकेगा तथा पायरिया ठीक होगा।
- बिच्छू व मधुमख्खियों के काटने पर नींबू के बीजों को पीसकर सेंधा नमक डालकर पिलायें कारण बीज बहुत कसैला होता है यह इनके जहर को मारता है। आमतौर (रोज)पर बीज इस्तमाल ने करें।
- दूध तथा नींबू के रस में काली मसूर पीसकर मिलाएं, इसका उबटन लगायें, झाइया दूर होंगी।
- काली चाय में नींबू ङालकर पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है पेट में गैस नहीं बनती।
- नींबू का रस तेल की तरह बालों की जड, में लगाने से रूसी खत्म होती है।
- नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है।
- नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।
- नींबू में पिसी काली मिर्च छिडक कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।
- निम्बू के रस तथा नमक पानी में मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढता है।
- नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है।
- नींबू के बीज को पीसकर सर पर लगाने से गंजापन दूर होता है।
- आधा कप पालक के रस में नींबू निचोडकर धीरे-धीरे करीब बीस मिनट तक पियें, रक्त की कमी दूर करेगा।
- गर्भाधान (गर्भ ठहरने में सहायक) एक दो नींबू का बीज पीस लें, घी में मिलाकर सेवन करें।
- आधा सीसा दर्द में नींबू का रस नाक में दो-दो बूंद डालना चाहिये।
- कान का दर्द हो तो अदरक पीसकर बगैर पानी अब नींबू का रस मिलायें(कहीं भी पानी इस्तमाल न करें)तथा कान में डालें।
- याददाश्त की कमी दूर करता है-1. नींबू के रस में सौंफ का रस मिलाकर लें। 2. चुकंदर के रस में नींबू का रस मिलाकर पियें।
- सरल प्रसव-पांचवे माह से गर्भवती स्त्री रोज नियम से नींबू की शिकंजी पिये। रोजाना 1 गिलास पानी में नींबू का रस मिलाकर भी पी सकते है।
- दो चम्मच बादाम के तेल में नींबू की दो बूंद मिलाएं और रूई की सहायता से दिन में कई बार घाव पर लगाएं, घाव बहुत जल्द ठीक हो जाएगा।
- नींबू को अपने प्रतिदिन आहार का भाग बनाएं इसमें मौजूद एसिड से शरीर में वसा की मात्रा कम हो जाती है।
- प्रतिदिन नाश्ते से पहले एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच ज़ैतून का तेल पीने से पत्थरी से छुटकारा मिलता है।
- किसी जानवर के काटे या डसे हुए भाग पर रूई से नींबू का रस लगांए, लाभ होगा।
- एक गिलास गर्म पानी में नींबू डाल कर पीने से पांचन क्रिया ठीक रहती है।
- इसी प्रकार चक्तचाप, खांसी, क़ब्ज़ और पीड़ा में भी नींबू चमत्कारिक प्रभाव दिखाता है।
- दमा-दमा की शिकायत बनी रहती है तो ऐसे लोगों को दमा का दौरा पड़ने पर गरम पानी में नींबू निचोड़कर पिलायें, बेहतर साबित होगा।
- मधुमेह-अक्सर मधुमेह पीड़ित व्यक्तियों को नींबू पानी में निचोड़कर पीने से लाभ मिलता है।
- कब्ज-ताजे नींबू से निकाले गए रस और शक्कर प्रत्येक 12 ग्राम, एक स्वच्छ पानी में मिलाकर रात्रि को पीने से कुछ दिनों में ही पुराने से पुराने कब्ज रूपी रोग का खात्मा हो जाता है।
- चेहरे की सुंदरता-यूं तो अधिकांश महिलाएं अपनी सुंदरता को लेकर चिंताग्रस्त रहती है, लेकिन यदि आपको भी ऐसी ही शिकायत हैं तो नींबू के रस के संग गुलाबजल, ग्लिसरीन बराबर मात्रा में मिलाकर रोजाना चेहरे पर लगायें कुछ दिनों पश्चात् से ही झांई, मुंहासे, झुर्रियां, फुंसियां आदि छूमंतर हो जाएंगी और चेहरा पहले से कहीं ज्यादा सुंदर दिखाई देने लगेगा जिससे आपकी शिकायत स्वत: दूर हो जायेंगी।
- खांसी-श्वास एवं खांसी में नींबू में काली मिर्च और नमक भरकर चूसने से लाभ होता है जो खांसी की बीमारी भगाने में कारगर सिध्द होती है।
- कफ-आयुर्वेद के अनुसार, नींबू के रस में डाले हुए अदरक के टुकड़े और नमक मिलाकर खाने से कफ का नाश हो जाता है। इस प्रकार कफ के रोगियों के लिए नींबू का रस किसी अनमोल औषधि से कमतर नहीं है।
- बुखार- बुखार के समय में नींबू में सेंधा नमक और काली मिर्च भरकर, गरम करके चूसने से बुखार में लाभ मिलता है।
- जी घबराने की शिकायत -बसों में यात्रा अथवा घूमते वक्त कई लोगों को जी घबराने की समस्या होने लगती है। सो, नींबू को बीच से काटकर, नमक एवं काली मिर्च के साथ चूसें। यह समस्या खुद ब खुद दूर हो जाएगी।
- नाक से खून आने पर-गाड़ी चलाते वक्त अचानक किसी दुर्घटना घटने पर नाक से खून आने की बुरी स्थिति में दोनों नथुनी में दो-दो बूंद नींबू का रस गिराने से खून का तेजी के साथ गिरना बंद हो जाता है।
- आखिर में, उपरोक्त बीमारी के अलावा नींबू अपने औषधीय गुणों के कारण
- चेचक,
- मसूड़ों से खून आना,
- अजीर्ण एवं
- मंद्राग्नि,
- पीलिया,
- अतिसार,
- अम्लता,
- पेट दर्द,
- सर्दी-जुकाम और
- मलेरिया जैसे अनगिनत रोगों में भी काफी लाभप्रद है। जिसके द्वारा अक्सर शरीर में उत्पन्न होने वाली बीमारियों का उपचार किया जाता है।
टिप्स : नींबू के कुछ उपयोगी किचन टिप्स
- चावल पकाते समय उसमें नींबू की चार पांच बूंद डाल दें चावल अलग-अलग बनेगा।
- अंण्डा उबालते समय 4-5 बूंद नींबू डाल दें। अंडा चटकेगा नहीं।
- गोभी की सब्जी बनाते समय 3-4 बूंद नींबू का रस डाल दें बदबू नहीं आयेगी तथा गोभी का रंग सफेद।
- आलू उबालते समय नींबू 3-4 बूंद डाल दें तो आलू सफेद, भुर-भुरे रहेंगे। चीनी भी डाल सकते हैं।
परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
साधारण सी नजर आने वाली मटमैली गांठों वाली अदरख (Ginger) के सेवन से जुकाम-बुखार से लेकर जोड़ों का दर्द तक में तुरंत फ़ायदा होता है।आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार मानव शरीर सात धातुओं (रक्त, रक्त-मांस, मेद, मज्जा, अस्थि और शुक्र या ओज) से बना है। इनके संतुलन से ही शरीर स्वस्थ बना रहता है। सातवें धातु शुक्र के निर्माण में अदरक/अदरख (Ginger) का बहुत बड़ा योगदान होता है।
इसीलिये यहाँ अदरख के चिकित्सीय गुणों की जानकारी दी जा रही है:-
इसीलिये यहाँ अदरख के चिकित्सीय गुणों की जानकारी दी जा रही है:-
वैज्ञानिक नाम: वनस्पति शास्त्र की भाषा में इसे जिंजिबर अफिसिनेल (Zingiber Offisinel) नाम दिया गया है। अदरख को-
अंग्रेजी में जिंजर (Ginger),
संस्कृत में आद्रक,
मराठी में आदा के नाम से जाना जाता है।
गीले स्वरूप में इसे अदरख तथा सूखने पर इसे सौंठ (शुष्ठी) (Dry Ginger) कहते हैं।
अदरख का कोई बीज नहीं होता, इसके कंद के ही छोटे-छोटे टुकड़े जमीन में गाड़ दिए जाते हैं। यह एक पौधे की जड़ है।
आयुर्वेद के अनुसार:
प्रकृति: अदरख गुरु, तीक्ष्ण, उष्णवीर्य, अग्नि प्रदीपक, कटु रसयुक्त, मल भेदक, भारी, गरम, उदराग्नि बढ़ाने वाला, विपाक में मधुर रसयुक्त, रूक्ष, वात-कफ नाशक होता है।
सेवन का समय: अदरख , हल्दी आदि औषधियों के सेवन हेतु ठंड का समय स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है। कमज़ोर जीवन शक्ति वाले लोग जुकाम, गले और फेफड़े से सम्बंधित रोगों का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में अदरख एक बेहतर दवा सिद्ध होती है।
अदरख के 9 गुण:
- अदरख स्वाद को टेस्ट को बेहतर बनाने के साथ-साथ पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखता है।
- अदरख के टुकड़ों पर सेंधा (काला) नमक और नींबू डाल कर खाने से जीभ और गला साफ होता है और भोजन के प्रति अरूचि मिटती है।
- प्रतिदिन यदि भोजन से पहले अदरक का रस पीया जाए तो यह भोजन को पचा देता है और गले और जीभ के कैंसर से भी बचाता है।
- अदरक की चाय जुकाम, खांसी, कफ, सिरदर्द, कमर दर्द, पसली और छाती की पीड़ा दूर करती है ।
- अदरख में जीवाणुओं के मारने के ठोस और कफ अवरोधी गुण पाए गए हैं।
- अदरख बड़ी आँत में पाए जाने वाली बैक्टीरिया का बढ़ना रोक देता है, जिसके कारण गैस से राहत मिलती है।
- अदरख में किसी भी चीज को संरक्षित करने के गुण प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।
- कच्चे अदरख के अलावा इसके सूखे हुए रूप ‘सोंठ’ को भी उपयोग में लिया जाता है। इसे शहद में मिला कर लेना श्रेष्ठतम है।
- स्वास्थ्य की दृष्टि से अदरख और सोंठ दोनों ही लाभदायक होते हैं, लेकिन सुखाने पर अदरख में मौजूद कई तैलीय तत्व नष्ट हो जाते हैं।
कार्बोहाइड्रेट 12.3 ग्राम,
प्रोटीम 24 ग्राम,
वसा 0.8 ग्राम
रेशा 2.50 ग्राम,
कैल्शियम 20 मिलीग्राम,
फास्फोरस 60 मि.ग्रा.,
आयरन 26 मि.ग्रा.,
विटामिन ए 40 आई.यू.,
औषधीय प्रयोग :
- जुकाम व सांस की समस्याओं में अदरख का प्रयोग: तीन ग्राम अदरख , पचास ग्राम काली मिर्च, छह ग्राम मिश्री को कूटकर एक कप पानी में ओटा लें व चौथाई कप रहने पर चाय की तरह गरम पीएं। ज्वर, वायरल फीवर, डेंगू व ऋतु परिवर्तन पर होने वाले बुखार, गले में खराश में अदरक का रस दो चम्मच और एक चम्मच शहद, सौंठ, काली मिर्च पीसकर मिलाएं और हल्का गरम कर चटाएं। शरीर दर्द, कफ, खांसी व इन्फ्लुएंजा में शीघ्र लाभ होगा।
- पेट के रोग: अदरख छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें। कुछ छुआरे के टुकड़े, किशमिश, धनिया, जीरा, इलायची, सेंधा नमक, पुदीना और काली मिर्च को थोड़े पानी मिलाकर पीस लें। हल्की आंच पर पकाएं, बाद में नीबू का रस डालें। इसे भोजन के साथ या वैसे ही चाटें, यह भूख को जागृत करेगा।
- अपच: बदहजमी, पेट का दर्द, ऐंठन, दस्त, पेट फूलना और अन्य पेट और आंत्र समस्याओं में अदरख का टुकड़ा मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसें |
- कैंसर प्रतिरोधी: इसमें एंटी-ओक्सिडेंट (Antioxidant-प्रतिउपचायक) गुण भी होते है, इसके सेवन से कैंसर बचाव में सहायक एंजायम सक्रिय हो जाते है। इस गुण के कारण कैंसर से भी बचा जा सकता है। अदरख के पाउडर का सेवन करने से महिलाओं के गर्भाशय के डिम्बग्रंथि (ओवेरियन) के कैंसर की कोशिकाओं में कैंसर कोशिका नष्ट हो जाती है।
- सौंदर्य वर्धक: अदरख त्वचा को आकर्षक व चमकदार बनाने में मदद करता है। सुबह ख़ाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी के साथ अदरख का एक टुकड़ा खाएं। इससे न केवल आपकी त्वचा में निखार आएगा बल्कि बुढ़ापा भी जल्दी नहीं आएगा।
- खांसी: सर्दियों में अदरख को गुड़ में मिलाकर खाने से सर्दी कम लगती है तथा शरीर में गर्मी पैदा होती है। सर्दी लगकर होने वाली खांसी का कफ वाली खांसी की यह अचूक दवा है।
- उल्टी (वमन): अदरख और प्याज का रस समान मात्रा में पीने से उल्टी (वमन) होना बंद हो जाता है।
- हिचकी: अदरख के छोटे-छोटे टुकड़े मुंह में रखकर चूसने से हिचकियां आनी बंद हो जाती हैं।
- दर्द निवारण: ताजे अदरख को पीसकर दर्द वाले जोड़ों व पेशियों पर इसका लेप करके ऊपर से पट्टी बाँध दें। इससे उस जोड़ की सूजन व दर्द तथा माँसपेशियों का दर्द भी कम हो जाता है।
- जोड़ों का दर्द: 100 मिली अदरख का तेल व रस और 20 मिली तिल के तेल को स्टील के भगोने में मंदी आंच पर पकाएं। पानी के पूरे जल जाने पर तेल शेष रह जाएगा। इसे ठंडा होने दें और बोतल में भरकर रख लें। जोड़ो के दर्द में मालिश करते समय इसमें 10 ग्राम हींग और दस ग्राम नमक भी मिलाएं, दर्द में शीघ्र ही फ़ायदा होगा।
- बवासीर: सोंठ का चूर्ण छाछ में मिलाकर पीने से अर्श (बवासीर) मस्से में लाभ होता है।
- कफ निष्कासन: यदि खांसी के साथ कफ की भी शिकायत है तो रात को सोते समय दूध में अदरख डालकर उबालकर पिएं। यह प्रक्रिया क़रीब 15 दिनों तक अपनाएं। इससे सीने में जमा कफ आसानी से बाहर निकल आएगा।
- अदरख की चाय: पांच ग्राम अदरख कूटकर पाव भर पानी में पकाएं। आधा पाव पानी रहने पर चाय की पत्ती, दूध और चीनी मिलाकर पीएं। यह कफ, खांसी, जुकाम, सिरदर्द, कमर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, गठिया, सिर दर्द, माइग्रेन पसली और छाती की पीड़ा दूर करती है और पसीना लाकर रोम छिद्रों को खोलती है।
- दिल की बीमारी: अदरख का रस और पानी बराबर मात्रा में पीने से हृदय रोग में लाभ होता है।
- कंठ व जीभ की शुध्दि: भोजन से पूर्व अदरख की कतरन में नमक डालकर खाने से खुलकर भूख लगती है, रुचि पैदा होती है, कफ व वायु के रोग नहीं होते एवं कंठ व जीभ की शुध्दि होती है।
- दांत व दाढ़ के दर्द: सर्दी के कारण होने वाले दांत व दाढ़ के दर्द में अदरख के टुकड़े दबाकर रस चूसने से लाभ होता है।
- मुंह की दुर्गंध: एक गिलास गरम पानी में एक चम्मच अदरख का रस मिलाकर कुल्ले करने से मुंह से दुर्गंध आनी बंद हो जाती है।
- सिरदर्द: सर्दी के कारण सिरदर्द हो तो सोंठ को घी या पानी में घिसकर सिर पर लेप करने से आराम मिलता है।
- माईग्रेन: जिन लोगों को आधीसीसी (माईग्रेन) का दर्द हो वह एक नीबू का रस और आधा चम्मच अदरख का रस ले आराम मिलेगा।
- पेट दर्द: एक ग्राम पिसी हुई सोंठ, थोड़ी सी हींग और सेंधा नमक की फंकी गरम पानी के साथ लेने से फ़ायदा होता है।
- पतले दस्त: आधा कप उबलते हुए गरम पानी में एक चम्मच अदरख का रस मिलाकर एक-एक घंटे के अंतराल पर पीने से पानी की तरह हो रहे पतले दस्त पूरी तरह बंद हो जाते हैं।
- वात: प्रतिदिन बनाई जाने वाली सब्जियों में अदरख का उपयोग अच्छा होता है। इससे शरीर के होने वाले वात रोगों से मुक्ति मिलती है।
- अदरख का शर्बत: एक पाव मिश्री को आधा किलो पानी में डालकर चाशनी बना लें। फिर पाव भर अदरख के रस में पकाएं। एक तार की चाशनी रह जाने पर उसमें दो ग्राम असली केसर डालकर बोतल में भर लें। इसे छोटे बच्चों को भी पिलाया जा सकता है। सुबह सेवन करने पर यह भूख जागृत करता है और सर्दी-जुकाम, खांसी और श्वास के रोगियों के लिए फ़ायदेमंद है। बच्चों में अपच, दस्त आदि में लाभदायक है।
- एक दिन में पांच से दस ग्राम, सोंठ का चूर्ण एक से तीन ग्राम, रस पांच से दस से मिलीलीटर रस और शर्बत दस से तीस मिलीलीटर तक ही सेवन करना चाहिए।
- जिन व्यक्तियों को ग्रीष्म ऋतु में गर्म प्रकृति का भोजन न पचता हो उन्हें कुष्ठ, रक्तपित्त, पीलिया, ज्वर, घाव, शरीर से रक्तस्राव की स्थिति, मूत्रकृच्छ, जलन जैसी बीमारियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
- खून की उल्टी होने पर अदरख का सेवन नहीं करना चाहिए और यदि आवश्यकता हो तो कम से कम मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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एनीमिया
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एरंड
एलर्जी
एलर्जी-Allergy
एलोवेरा
एलोवेरा जूस
एल्यूमीनियम
ऐंठन
ऐलोपैथ
ऐसीडिटी
ऑर्गेनिक
ओमेगा 3 के स्रोत
ओमेगा-3
ओर्गेनिक
औषध-Drug
औषधि सूची-Drug List
औषधियों के नुकसान-Loss of drugs
कचनार
कचनार-Bauhinia Purpurea
कटुपर्णी
कड़वाहट
कंडोम
कद्दू
कनेर
कपास-COTTON
कपिकच्छू
कपूरीजड़ी
कफ
कब्ज
कब्ज़
कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation
कब्ज. Cucumber
कब्जी
कमजोरी
कमर
कमर दर्द
कमेड़ा
करेला
कर्ण वेदना
कर्णरोग
कष्टार्तव-Dysmenorrhea
कांच निकलना
काजू
कान
कानून सम्मत
काम
काम शक्ति
कामवाण पाउडर
कामशक्ति
कामशक्ति-Sexual power
कामेच्छा
कामोत्तेजना
कायाकल्प
कार्बोहाइड्रेट
कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates
काला जीरा
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कोबरा
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कोलेस्ट्रोल
कौंच
कौमार्य
क्रियाशीलता
क्रोध
क्षय रोग-Tuberculosis
क्षारीय तत्व
क्षुधानाश
खजूर
खजूर की चटनी
खनिज
खरबूजा-Musk melon
खरेंटी
खरैंटी शिलाजीत
खाज
खांसी
खिरेंटी
खिरैटी
खीप
खीरा
खुजली
खुशी-Joy
खुश्की
खुश्बू
खोया
गंजापन-Baldness
गठिया
गठिया-Arthritis
गठिया-Gout
गड़तुम्बा
गंडा-ताबीज
गंध
गन्ने का रस
गरमा गरम
गर्भ निरोधक
गर्भधारण
गर्भपात
गर्भवती
गर्भवती कैसे हों?
गर्भावस्था
गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy
गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy
गर्भाशय
गर्भाशय भ्रंश
गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy
गर्म पानी
गर्मी
गर्मी-Heat
गलगण्ड
गाजर
गाजवां
गांठ
गाँठ-Knot
गारंटी
गारण्टेड इलाज
गाल ब्लैडर
गिलोय
गिल्टी
गुड़हल
गुंदा
गुदाद्वार
गुदाभ्रंश
गुम्मा
गुर्दे
गुलज़ाफ़री
गुस्सा
गृध्रसी
गृह-स्वामिनी
गेदुआ की छाछ
गैस
गैस्ट्रिक
गैहूं का जवारा
गोक्षुरादि चूर्ण
गोखरू
गोखरू (LAND CALTROPS)
गोंद कतीरा-Hog-Gum
गोंदी
गोभी-Cabbage
गोरख मुंडी
गोरखगांजा
गोरखबूटी
गोरखमुंडी
ग्रीन-टी
घमोरी
घरेलु नुस्खे
घाघरा
घाव
चकवड़
चक्कर
चपाती
चमत्कारिक सब्जियां
चरित्र
चर्बी
चर्म
चर्म रोग
चर्मरोग
चाय
चाय-Tea
चालीस के पार-Forty Across
चिकनगुनिया
चिकित्सकीय
चिटकन
चिंतित
चिरायता-Absinth
चिरोटा
चुंबन
चोक
चौलाई
छपाकी
छरहरी काया
छाछ
छाजन बूटी
छाले
छींक
छीकें
छुअ
छुआरा
छुहारा
छोटा गोखरू
छोटा धतूरा
छोटी हरड़
जंक फूड
जकवड़
जख्म
जंगली तिल्ली
जंगली तुलसी
जंगली पेड़
जंगली मिर्ची
जंगली-कटीली चौलाई
जटामांसी-Spikenard
जलजमनी
जलन
जलोदर रोग-Ascites Disease
जवारा
जवारे
जवासा-Alhag
जहर
जामुन का जूस
जायफल
जिगर
जीरा
जीवन रक्षक
जीवनी शक्ति
जुएं
जुकाम
जुदाई
जुलाब
जूएं
जूस
जोड़ों के दर्द
जोड़ों में दर्द
जौ
ज्यूस
ज्योति
ज्वर
ज्वर-Fiver
झाइयाँ
झांईं
झाड़-फूंक
झुर्रियाँ
झुर्रियां
झुर्री
झूठे दर्द
टमाटर का रस
टमाटर-Tomatoes
टाइफाइड
टाटबडंगा
टायफायड
टूटी हड्डी
टॉन्सिल
टोटला
ट्यूमर
ठंड
ठंडापन
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डकार
डकारें
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डिग्री सेल्सियस
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डिनर
डिप्रेशन
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
डॉ. मीणा
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तम्बाकू
तरबूज-Watermelon
तलाक
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तिल
तिल्ली
तुंबा
तुंबी
तुम्बा
तुलसी
तेल
त्रिदोषनाशक
त्रिफला
त्वचा
त्वचा रोग
थकान
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थायरायड-Thyroid
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दन्तकृमि
दन्तरोग
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दरार
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दर्द निवारक
दर्द निवारक दवा
दर्दनाक
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निर्गुन्डी
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नेगड़
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नेुचरल
नैतिक
नॉर्मल डिलेवरी
नोनिया
नौसादर
न्युमोनिया-Pneumonia
न्यूरॉन्स
पक्षघात
पंचकर्म
पढ़ने में मन लगेगा
पंतजलि
पत्तागोभी-CABBAGE
पत्थर फोड़ी
पत्थरचट्टा
पत्नी
पथरी
पदार्थ
पनीर
पपीता
पपीता-CARICA PAPPYA
पमाड
परदेशी लांगड़ी
परम्परागत चिकित्सा
परहेज
पराठा
परामर्श
परिस्थिति
पवाड़
पवाँर
पाइल्स
पाक-कला
पाचक
पाचन
पाचनतंत्र
पाचनशक्ति
पाठक संख्या 16 लाख पार
पाठक संख्या पंद्रह लाख
पायरिया
पारदर्शिता
पारिजात
पालक
पालक-Spinach
पित्त
पित्ताशय
पित्ती
पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne
पिरामिड
पीलिया
पीलिया-Jaundice
पीलिया-कामला-Jaundice
पुआड़
पुदीना
पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava
पुरुष
पुंसत्व
पेचिश
पेट के कीड़े
पेट दर्द
पेट में गैस
पेट रोग
पेड़
पेद दर्द
पेरिकिटो सेसिल
पेशाब
पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
प्लूरिसी-Pleurisy
प्लेटलेट्स
फंगल
फटन
फफूंद-Fungi
फरास
फल
फाइबर
फिटकरी
फुंसी-Pimples
फूलगोभी-CAULIFLOWER
फेंफड़े
फेरम फॉस
फैट
फैटी लीवर
फोटोफोबिया
फोड़ा
फोड़े-Boils
फोरप्ले
फोलिक एसिड
फ्लू
फ्लू-Flu
फ्लेक्स सीड्स
बकायन
बकुल
बड़ी हरड़
बथुआ
बथुआ पाउडर
बथुआ-White Goose Foot
बदबू
बंध्यापन
बबूल-ACACIA
बरसाती बीमारियाँ
बरसाती बीमारियां
बलगम
बलवृद्धि
बला
बलात्कार
बवासीर
बहरापन
बहुनिया
बहुमूत्रता-
बांझपन
बादाम-Almonds
बादाम.
बाल
बाल झड़ना
बाल झडऩा-Hair Falling
बिना सिजेरियन मां बनें
बिवाई
बीजबंद
बीड़ी
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बीमारी
बील
बुखार
बूंद-बूंद पेशाब
बेल
बेली
बैक्टीरिया
बॉयोकैमी
ब्रह्मदण्डी
ब्रेस्ट ग्रोथ
ब्लड प्रेशर
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यौनशिक्षा
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वजन बढाएं-Weight Increase
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वमन
वमन विकृति-Vomiting Distortion
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वात श्लैष्मिक ज्वर
वात-Rheumatism
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वायरल बुखार-Viral Fever
वासना
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विवाहेत्तर सम्बंध
विश्वास
विष
विष हरनी
विषखपरा
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वीर्य वृद्धि
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वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone
वृक्ष
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वैवाहिक रिश्ते
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शहद-Honey
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शारीरिक रिश्ते
शिथिलता
शीघ्र पतन
शीघ्रपतन
शीस
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शोक
शोथ
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श्वेत प्रदर-Leucorrhea
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संतान
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सब्जी
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सहदेवी
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