परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.
-Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
ठेकेदार डॉक्टर चाहिये या अपनी तकलीफ का सही इलाज?

मेरे पास हर दिन अनेक प्रकार की बीमारियों से पीड़ित सैकड़ों लोगों के काल आते हैं। जिनमें से अधिकतर गुप्त यौन रोगों से पीड़ित लड़के-लड़की होते हैं। जो इलाज करवाने के बजाय, मुझे इलाज का ठेका देना चाहते हैं। यह अत्यन्त दु:खद है। वास्तविकता यह है कि रोगी मुझे बताते हैं कि चिकित्सा के नाम पर अनेक लुटेरे और चालाक लोग भोले-भाले लोगों के इलाज के नाम पर गुमराह करते हैं और डॉक्टरी-ठेकेदारी चला रहे हैं। दवाई देने या इलाज करने के बजाय, अनेक प्रकार के कोर्स बेचते रहते हैं। जिनकी कीमतें निर्धारित होती है। ऐसे में अधिकतर रोगियों का दिमांग/माईंड सैट भी ठेकेदारी देने का हो चुका है। अत: अधिकतर रोगी अपनी बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी देने के बजाय मुझ से सीधे सवाल करते हैं कि इलाज का कुल कितना खर्चा होगा?


इस बारे में यह बताना जरूरी समझता हूं कि हम डॉक्टरी ठेकेदार नहीं हैं, बल्कि हमारा मकसद रोगी की समस्या को विस्तार से जानकार, यदि सम्भव हो तो अत्यन्त कम दामों पर उनका स्थायी इलाज करना होता है। जिन लोगों को ठेकेदार डॉक्टरों की जरूरत है। ऐसे लोग हमें काल नहीं करें।


हां जिन मरीजों को अपना सही और सफल उपचार चाहिये उनका स्वागत है। ऐसे लोग हम से सीधे सम्पर्क करें। हो सके तो वाट्स एप पर अपनी तकलीफ का संक्षिप्त विवरण लिखकर और अपना परिचयात्मक विवरण लिखकर भेजें। इसके बाद आप से जरूरी जानकारी चाही जायेगी।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, 

मो./वाट्स एप नम्बर : 9875066111, 25.03.17

हर्बल जूस : लाभ और दुष्प्रभाव


Herbal Juice: Benefits and Side Effects

आँख बन्द कर प्रचार किया जा रहा है कि सभी तरह के प्राकृतिक उत्पाद हमें अद्भुत फायदा पहुंचाते हैं और स्वास्थ्य के लिए अमृत हैं, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। कई बार ये आपको बीमार भी कर सकते हैं। साथ ही यह भी याद रखा जाए कि आयुर्वेदिक दवाएं उम्र, शारीरिक शक्ति और बीमारी, बीमारी की स्थिति/स्टेज, उचित मात्रा और मौसम/जलवायू के अनुसार लेने पर ही फायदेमंद साबित होती हैं। इसलिए सेवन से पूर्व किसी एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
प्राकृतिक जूस का सेवन शुरू करने से पहले भी उनकी शुद्धता और सवाल की हिदायतों को जानना जरूरी है। वरना फायदे की जगह हो नुकसान हो सकता है।

1. करेले का रस (Karele ka juice) :

प्रकृति–गर्म और खुश्क। करेला घी में छौंककर खाने से अधिक लाभदायक है।
सेवन कब और कितना-सुबह खाली पेट पानी के साथ 20 से 50 मिली तक बीमारी और चिकित्सक की सलाह के अनुसार।
लाभ-कच्चे करेले का जूस बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसमें जरूरी विटामिन्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कि शरीर को चाहियें।
(1) ब्लड शुगर के लेवल को कम करता है : शुगर को नियंत्रित करने के लिए आप तीन दिन तक खली पेट सुबह करेले का जूस ले सकते हैं। मोमर्सिडीन और चैराटिन जैसे एंटी-हाइपर ग्लेसेमिक तत्वों के कारण करेले का जूस ब्लड शुगर लेवल को मांसपेशियों में संचारित करने में मदद करता है। इसके बीजों में भी पॉलीपेप्टाइड-पी होता है जो कि इन्सुलिन को काम में लेकर डायबेटिक्स में शुगर लेवल को कम करता है।
(2) सोराइसिस में उपयोगी : एक कप करेले के जूस में एक चम्मच नींबू का जूस मिला लें। इस मिश्रण का खाली पेट सेवन करें। 3 से 6 महीनें तक इसका सेवन करने से त्वचा पर सोराइसिस के लक्षण दूर होते हैं। यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और सोराइसिस को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में मदद करता है।
(3) पाचन शक्ति में वृद्धि : करेले का जूस कमजोर पाचन तंत्र को सुधारता है और अपच को दूर करता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि यह एसिड के स्त्राव को बढ़ाता है। जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है। इसलिए अच्छी पाचन क्षमता के लिए सप्ताह में एक बार सुबह करेले का जूस जरूर लें।
(4) दृष्टि क्षमता में वृद्धि : लगातार करेले के जूस का सेवन कर आप विभिन्न दृष्टि दोषों को दूर कर सकते हैं। करेले में बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए की अधिकता होती है। जिससे दृष्टि ठीक होती है। इसके अलावा इसमें उपस्थित विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाली नजरों की कमजोरी से बचाता है।
(5) अग्नाशय कैंसर में उपयोगी : रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाएं नष्ट होती हैं। ऐसा इसलिए होता हैं, क्योंकि करेले में मौजूद एंटी-कैंसर कॉम्पोनेंट्स अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं में ग्लूकोस का पाचन रोक देते हैं। जिससे इन कोशिकाओं की शक्ति ख़त्म हो जाती हैं और ये ख़त्म हो जाती हैं।
(6) लीवर को मजबूती : रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से लीवर मजबूत होता है, क्योंकि यह पीलिया जैसी बिमारियों को दूर रखता है। साथ ही यह लीवर से जहरीले पदार्थों को निकालता है और पोषण प्रदान करता है। जिससे लीवर सही काम करता है और लीवर की बीमारियां दूर रहती हैं। 3 से 8 वर्ष तक के बच्चों को आधा चम्मच करेले का रस नित्य देने से यकृत ठीक रहता है। यह पेट साफ रखता है। करेले की सब्जी खाने और दो चम्मच करेले का रस, दो चम्मच पानी, स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाकर नित्य कुछ दिन पीने से बढ़ों की यकृत क्रिया ठीक हो जाती है।
(7) रक्त शोधक : करेले का जूस शरीर में एक प्राकृतिक रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है। यह खून से जहरीले तत्वों को बाहर निकालता है और फ्री रेडिकल्स से हुए नुकसान से बचाता है। इसलिए ब्लड को साफ़ करने और मुहासों जैसी समस्याओं को दूर करने केलिए रोज एक गिलास करेले का जूस जरूर पियें।
(8) भूख बढ़ाता है : भूख नहीं लगने से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है, जिससे कि स्वास्थ्य से सम्बंधित परेशानियां होती हैं। इसलिए करेले के जूस को रोजाना पीने से पाचन क्रिया सही रहती है और जिससे भूख बढ़ती है।
(9) प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करे : जिन लोगो का प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर है, उन्हें करेले के जूस का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। इसमें विटामिन B1, B2, B3, जिंक, मैग्नीशियम पाया जाता है, जो शरीर के लिए बहुत आवश्यक तत्व हैं।
(10) चर्म रोग नाशक : करेले के रस के सेवन से पाचन क्रिया ठीक होती है। इस कारण चेहरे पर मुंहासे जैसे रोग नहीं होते। करेला पेट साफ़ करने में भी सहायक होता हैं। जिससे चर्म रोग नहीं होते। करेले की पत्तियों में भी विशेष गुण होते हैं। आप चाहे तो इसका लैप भी बना के लगा सकते हैं।
(11) पथरी :
  • (A) करेले में मैग्नीशियम, फॉस्फोरस होते हैं, जो पथरी को तोड़ देते हैं। करेला वृक्क व मूत्राशय की पथरी को तोड़कर पेशाब के साथ बाहर लाता है। इसके लिए दो करेलों का रस नित्य पियें, सब्जी खायें।
  • (B) दो करेलों का रस तथा एक कप छाछ मिलाकर नित्य दो बार पियें जब तक पथरी निकल नहीं जाए।
  • (C) करेला पेशाब ज्यादा लाता है। इसका रस पीने से पेशाब की जलन दूर होती है। करेले का रस भूखे पेट पीना लाभदायक है।
  • (D) करेले के पत्तों का रस 6 चम्मच चार चम्मच दही में मिलाकर पिलायें, इसके बाद एक कप छाछ पिलायें। इस तरह तीन दिन पिलाकर तीन दिन पिलाना बन्द रखें। इसी प्रकार पुनः चार दिन, फिर पाँच दिन पिलायें और जितने दिन पिलायें उतने ही दिन बन्द रखें। इस अवधि में चावल और खिचड़ी ही खायें।
(12) गठिया :
  • (A) करेले के रस को गर्म करके गठिया पर लगायें और सब्जी खायें। जोड़ों में दर्द हो तो करेले के पत्तों के रस या करेले के रस की मालिश करें।
  • (B) करेले की चटनी पीसकर गठिया की सूजन पर लेप करें। 100 ग्राम करेले सेंक कर या उबाल कर भुर्ता बनाकर गर्म-गर्म नित्य सुबह-शाम खायें। भुर्ते में सामान्य मसाले या शक्कर डाल लें। करेला गठिया व जोड़ों का दर्द दूर करता है। करेले की सब्जी में घी का छौंक लगाकर खायें। इससे संधिवात, स्नायुगतवात में लाभ होता है।
(13) सूजन :
  • (A) आधा कप करेले का रस, चौथाई चम्मच पिसी हुई सोंठ, थोड़ा-सा पानी मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीने से सूजन ठीक हो जाती है।
  • (B) करेले पर पानी डालकर चटनी पीस कर सूजनग्रस्त जगह पर लेप करने से सूजन दूर हो जाती है। लेप को चार घंटे बाद ठंडे पानी से धो दें।
(14) कब्ज़ : करेला कब्ज़ दूर करता है। करेले का मूल अरिष्ट, जो होम्योपैथी में मोमर्डिका कैरन्शिया Q नाम से मिलता है, की 10 बूंद चार चम्मच पानी में मिलाकर नित्य चार बार देने से कब्ज़ दूर हो जाती है।
(15) बवासीर : रक्तस्रावी बवासीर में रक्त गिरने पर आधा कप करेले का रस स्वादानुसार मिश्री या शक्कर मिलाकर नित्य दो बार पीने से लाभ होता है। बवासीर के मस्सों में दर्द, सूजन, जलन हो तो करेले का रस शौच जाने के बाद नित्य मस्सों पर लगायें। मस्से सूखने तक रस लगाते रहें। लाभ होगा।
(16) हड्डी, दाँत, मस्तिष्क, रक्त और अन्य शारीरिक अवयवों के लिए जितने फॉस्फोरस की जरूरत होती है, करेले में मिल जाता है। करेला दर्द दूर करता है, शरीर में शक्ति पैदा करता है। कफ, बलगम निकलना बन्द हो जाता है।
मात्रा–एक-दो करेले के रस को आधा कप पानी में मिलाकर लें। करेला सेवन करने से उत्पन्न विकारों को दूर करने के लिए दही, नीबू, घी और चावल में से एक का सेवन करना चाहिए।
सावधानी-करेले के जूस का अत्यधिक सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
(1) लीवर व किडनी के मरीजों के लिए करेले का अत्यधिक सेवन हानिकारक साबित हो सकता है। यह लीवर में एन्जाइम्स के निर्माण को बढ़ा देता है, जिससे लीवर प्रभावित होता है।
(2) करेले के जूस में मोमोकैरिन नामक तत्व होता है, जो महिलाओं में पीरियड्स के फ्लो को बढ़ा देता है। गर्भावस्था के दौरान करेले के ज्यादा सेवन करने से गर्भपात का खतरा भी ज्यादा रहता है। 
(3) कई बार करेले के जूस के अधिक सेवन से प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स की स्थिति भी पैदा हो सकती है। साथ ही करेले में एंटी लैक्टोलन तत्व भी होते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान दूध बनने की प्रक्रिया में रुकावट पैदा करता है।
(4) करेले में मौजूद तत्व फर्टिलिटी संबंधित दवाओं का प्रभाव खत्म कर देते हैं। वहीं करेले के बीजों में लेक्टिन नामक तत्व होता है जो आंतों तक प्रोटीन को पहुंचने नहीं देता।
(5) अध्ययनों में पाया गया कि करेले के अत्यधिक सेवन से हेमोलाइट‌िक अनीमिया हो सकता है। हेमोलाइट‌िक अनीमिया में पेट दर्द, सिरदर्द, बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

3. जामुन का जूस (Juice of Berries) :

1. जामुन जूस बनाने की विधि
(1) सामग्री : 500 ग्राम पके काले जामुन, 600 ग्राम शक्कर, 1/2 चम्मच कालीमिर्च पावडर, 1/2 चम्मच काला नमक, 1/2 चम्मच भुना जीरा पावडर, 1 चम्मच साइट्रिक एसिड, पानी 1 लीटर।
(2) विधि : सबसे पहले जामुन को धोकर पानी में तब तक उबालें जब तक कि उनका छिलका न उतर जाए। अब ठंडे होने पर हाथ से मसलकर गूदे को भली-भांति निकालें और शक्कर मिलाएं। जूस को छलनी से छानें और साइट्रिक एसिड मिलाकर बोतलों में भरें। सर्व करने से पहले ठंडे पानी में मिलाएं, ऊपर से आइस क्यूब डालें और जामुन का खट्टा-मीठा शरबत पेश करें।
2. लाभ-जामुन का रस स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उत्तम किस्म का तांबा  पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
(1) मधुमेह : डायबिटीज रोगियों के लिए खासतौर से फायदेमंद। ब्लड में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करता है। जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है।
(2) पेट की तकलीफें : भूख न लगती हो तो कुछ दिनों तक जामुन रस का सेवन करें और आश्चर्यजनक रूप से फायदा देखें। डाइजेशन सिस्टम को सही रखने में मददगार होता है। वमन होने पर जामुन का रस सेवन करें। कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें। इसके फायदे आप खुद अनुभव करेंगे।
(3) विष नाशक : विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन के रस के साथ जामुन की पत्तियों का रस भी पिलाना चाहिए।
(4) छाले : मुंह में छाले होने पर जामुन का रस लगाएं।
(5) यकृत-तिल्ली-मूत्राशय : जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय में आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है।  जामुन का रस तिल्ली के रोग में हितकारी है।
(6) यौन तथा स्मरण शक्ति वर्धक : जामुन का रस, शहद, आंवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।
(7) उल्टी-दस्त या हैजा : जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है।
(8) रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा : जामुन का रस यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है।
कब-कितना :  पानी के साथ 20 मिली.।
सावधानी : कसैला होने के कारण वात प्रकृति के लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। गले में खराश या दर्द की शिकायत होने पर भी इसका सेवन न करें।  इतना ध्यान रहे कि अधिक मात्रा में जामुन रस लेने से शरीर में जकड़न की संभावना रहती है। इसे कभी खाली पेट नहीं लेना चाहिए और न ही इसके बाद दूध पीना चाहिए। 


1. एलोवेरा जूस (Aloevera juice) :

जामुन ज्यूस बनाने की विधि

सबसे पहले आप आवशयक्ता अनुसार एलोवेरा की पत्तियां ले और उसे अच्छी तरह पानी में धो लें। उसके बाद चाकू से उसके किनारे के कांटे वाले भाग काट कर निकाल दें। अब पत्तियों को सुविधानुसार छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लें, फिर पत्तियों के टुकडे लेकर उसके ऊपर का हरा छिलका निकाल कर अलग कर दें। ध्यान रहे ऐसा करते समय पत्तियों के गूदे के ऊपर की पीले रंग की पर्त भी साथ में निकाल दें, नहीं तो जूस में कड़वाहट रह जाएगी और आप उसका सेवन नहीं कर सकेंगे।
एलोवेरा के सफेद भाग को अलग करने के बाद उसे मिक्सी में डालें और दो मिनट के लिए मिक्सी को चला दें। इससे एलोवेरा की पत्तियों का जेल जूस में बदल जाएगा। अब इसे गिलास में निकालें और इसमें उचित मात्रा में पानी और नमक मिला लें। यदि आप चाहें, तो इसमें फलों का जूस भी मिला सकते हैं। ओरेंज (संतरा) जूस इसके स्वाद को टेस्टी बना देता है। इससे एलोवेरा जूस स्वादिष्ट हो जाएगा और आपको पीने में दिक्कत नहीं होगी। आइस क्यूब डालकर भी ले सकते हैं। अगर आप डायट पर हैं तो इस एलोवेरा जूस को रोज पियें।
लाभ- यह ठंडा होता है। इसे पीना स्किन और बालों के ही लिए बहुत ही फायदेमंद है। शरीर की इम्यूनिटी पावर और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में भी ये मददगार होता है। यह दिल और लिवर से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
(1) प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है : एलोवेरा में 18 धातु, 15 एमिनो एसिड और 12 विटामिन मौजूद होते हैं जो खून की कमी को दूर कर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं।
(2) चुस्ती-स्फूर्ति : एलोवेरा के कांटेदार पत्तियों को छीलकर रस निकाला जाता है। 3 से 4 चम्मदच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है।
(3) पेट रोग : एलोवेरा का जूस पीने से कब्ज की बीमारी से फायदा मिलता है। एलोवेरा का जूस बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग व पेट के विकारों को दूर करता है। एलोवेरा का जूस ब्लड को प्यूरीफाई करता है साथ ही हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है।
(4) बाल : एलोवेरा का जूस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ्पय होते हैं।
(5) शुगर : एलोवेरा का जूस पीने से शरीर में शुगर का स्तर उचित रूप से बना रहता है।
(6) जोडों का दर्द : एलोवेरा के जूस का हर रोज सेवन करने से शरीर के जोडों के दर्द को कम किया जा सकता है।
(7) चर्म रोग : एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वगचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों, आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है।
(8) इन्फेक्शन : एलोवेरा का जूस पीने से मच्छर काटने पर फैलने वाले इन्फेक्शन को कम किया जा सकता है।
(9) व्हाईट ब्लड सेल्स : शरीर में वहाईट ब्लड सेल्स की संख्या को बढाता है।
(10) जवान और खूबसूरत : एलोवेरा का जूस त्वचा की नमी को बनाए रखता है जिससे त्वचा स्वस्थ दिखती है। यह स्किन के कोलाजन और लचीलेपन को बढाकर स्किन को जवान और खूबसूरत बनाता है। एलोवेरा के जूस का नियमित रूप से सेवन करने से त्वचा भीतर से खूबसूरत बनती है और बढती उम्र से त्वचा पर होने वाले कुप्रभाव भी कम होते हैं। एलोवेरा को सौंदर्य निखार के लिए हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट जैसे एलोवेरा जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम आदि में प्रयोग किया जा रहा है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 10 से 30 मिली.।
एहतियातकफ की शिकायत है, तो मानसून या सर्दी के मौसम में इसे नहीं पीना चाहिए, क्योंकि कई बार इससे गले में खराश, खांसी और सीने में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। एलोवेरा शरीर में नए सेल्स को बनाता है और उनका ग्रोथ भी करता है, इसलिए कैंसर रोगी इसे न पिएं।

2. आंवला जूस (Amla juice) :
लाभ- वजन कंट्रोल करता है, आंखों, बालों और स्किन के लिए फायदेमंद होता है। इम्यूनिटी और डाइजेशन सिस्टम को मज़बूत बनाता है। शरीर की गर्मी को बाहर करने के साथ-साथ एसिडिटी और कोलेस्ट्रॉल की शिकायत भी दूर करता है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 20 से 40 मिली.।
एहतियातगर्मियों में तो इसे कोई भी व्यक्ति पी सकता है, लेकिन कफ की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को बारिश और ठंड के दिनों में इससे परहेज करना चाहिए।

5. जवारे का रस (Jaware ka ras) :
लाभ- खून की कमी दूर करता है। कैंसर मरीजों के लिए फायदेमंद होता है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 40 मिली.।
एहतियातडायबिटीज की शिकायत हो, तो इससे परहेज करें।

Source : http://www.ajabgjab.com/2015/10/herbal-juices-benefits-and-side-effects.html


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एलोवेरा जूस (Aloevera juice)

जामुन ज्यूस बनाने की विधि : सबसे पहले आप आवशयक्ता अनुसार एलोवेरा की पत्तियां ले और उसे अच्छी तरह पानी में धो लें। उसके बाद चाकू से उसके किनारे के कांटे वाले भाग काट कर निकाल दें। अब पत्तियों को सुविधानुसार छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लें, फिर पत्तियों के टुकडे लेकर उसके ऊपर का हरा छिलका निकाल कर अलग कर दें। ध्यान रहे ऐसा करते समय पत्तियों के गूदे के ऊपर की पीले रंग की पर्त भी साथ में निकाल दें, नहीं तो जूस में कड़वाहट रह जाएगी और आप उसका सेवन नहीं कर सकेंगे।
एलोवेरा के सफेद भाग को अलग करने के बाद उसे मिक्सी में डालें और दो मिनट के लिए मिक्सी को चला दें। इससे एलोवेरा की पत्तियों का जेल जूस में बदल जाएगा। अब इसे गिलास में निकालें और इसमें उचित मात्रा में पानी और नमक मिला लें। यदि आप चाहें, तो इसमें फलों का जूस भी मिला सकते हैं। ओरेंज (संतरा) जूस इसके स्वाद को टेस्टी बना देता है। इससे एलोवेरा जूस स्वादिष्ट हो जाएगा और आपको पीने में दिक्कत नहीं होगी। आइस क्यूब डालकर भी ले सकते हैं। अगर आप डायट पर हैं तो इस एलोवेरा जूस को रोज पियें।
लाभ- यह ठंडा होता है। इसे पीना स्किन और बालों के ही लिए बहुत ही फायदेमंद है। शरीर की इम्यूनिटी पावर और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में भी ये मददगार होता है। यह दिल और लिवर से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
(1) प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है : एलोवेरा में 18 धातु, 15 एमिनो एसिड और 12 विटामिन मौजूद होते हैं जो खून की कमी को दूर कर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं।

(2) चुस्ती-स्फूर्ति : एलोवेरा के कांटेदार पत्तियों को छीलकर रस निकाला जाता है। 3 से 4 चम्मदच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है।

(3) पेट रोग : एलोवेरा का जूस पीने से कब्ज की बीमारी से फायदा मिलता है। एलोवेरा का जूस बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग व पेट के विकारों को दूर करता है। एलोवेरा का जूस ब्लड को प्यूरीफाई करता है साथ ही हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है।
(4) बाल : एलोवेरा का जूस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ्पय होते हैं।
(5) शुगर : एलोवेरा का जूस पीने से शरीर में शुगर का स्तर उचित रूप से बना रहता है।
(6) जोडों का दर्द : एलोवेरा के जूस का हर रोज सेवन करने से शरीर के जोडों के दर्द को कम किया जा सकता है।


(7) चर्म रोग : एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वगचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों, आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है।
(8) इन्फेक्शन : एलोवेरा का जूस पीने से मच्छर काटने पर फैलने वाले इन्फेक्शन को कम किया जा सकता है।
(9) व्हाईट ब्लड सेल्स : शरीर में वहाईट ब्लड सेल्स की संख्या को बढाता है।


(10) जवान और खूबसूरत : एलोवेरा का जूस त्वचा की नमी को बनाए रखता है जिससे त्वचा स्वस्थ दिखती है। यह स्किन के कोलाजन और लचीलेपन को बढाकर स्किन को जवान और खूबसूरत बनाता है। एलोवेरा के जूस का नियमित रूप से सेवन करने से त्वचा भीतर से खूबसूरत बनती है और बढती उम्र से त्वचा पर होने वाले कुप्रभाव भी कम होते हैं। एलोवेरा को सौंदर्य निखार के लिए हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट जैसे एलोवेरा जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम आदि में प्रयोग किया जा रहा है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 10 से 30 मिली.।
एहतियातकफ की शिकायत है, तो मानसून या सर्दी के मौसम में इसे नहीं पीना चाहिए, क्योंकि कई बार इससे गले में खराश, खांसी और सीने में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। एलोवेरा शरीर में नए सेल्स को बनाता है और उनका ग्रोथ भी करता है, इसलिए कैंसर रोगी इसे न पिएं।

परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
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कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
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जामुन का जूस (Juice of Berries) : 

1. जामुन जूस बनाने की विधि
(1) सामग्री : 500 ग्राम पके काले जामुन, 600 ग्राम शक्कर, 1/2 चम्मच कालीमिर्च पावडर, 1/2 चम्मच काला नमक, 1/2 चम्मच भुना जीरा पावडर, 1 चम्मच साइट्रिक एसिड, पानी 1 लीटर।
(2) विधि : सबसे पहले जामुन को धोकर पानी में तब तक उबालें जब तक कि उनका छिलका न उतर जाए। अब ठंडे होने पर हाथ से मसलकर गूदे को भली-भांति निकालें और शक्कर मिलाएं। जूस को छलनी से छानें और साइट्रिक एसिड मिलाकर बोतलों में भरें। सर्व करने से पहले ठंडे पानी में मिलाएं, ऊपर से आइस क्यूब डालें और जामुन का खट्टा-मीठा शरबत पेश करें।
2. लाभ-जामुन का रस स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उत्तम किस्म का तांबा  पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
(1) मधुमेह : डायबिटीज रोगियों के लिए खासतौर से फायदेमंद। ब्लड में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करता है। जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है।
(2) पेट की तकलीफें : भूख न लगती हो तो कुछ दिनों तक जामुन रस का सेवन करें और आश्चर्यजनक रूप से फायदा देखें। डाइजेशन सिस्टम को सही रखने में मददगार होता है। वमन होने पर जामुन का रस सेवन करें। कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें। इसके फायदे आप खुद अनुभव करेंगे।

(3) विष नाशक : विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन के रस के साथ जामुन की पत्तियों का रस भी पिलाना चाहिए।
(4) छाले : मुंह में छाले होने पर जामुन का रस लगाएं।
(5) यकृत-तिल्ली-मूत्राशय : जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय में आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है।  जामुन का रस तिल्ली के रोग में हितकारी है।
(6) यौन तथा स्मरण शक्ति वर्धक : जामुन का रस, शहद, आंवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।

(7) उल्टी-दस्त या हैजा : जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है।
(8) रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा : जामुन का रस यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है।
कब-कितना :  पानी के साथ 20 मिली.।
सावधानी : कसैला होने के कारण वात प्रकृति के लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। गले में खराश या दर्द की शिकायत होने पर भी इसका सेवन न करें।  इतना ध्यान रहे कि अधिक मात्रा में जामुन रस लेने से शरीर में जकड़न की संभावना रहती है। इसे कभी खाली पेट नहीं लेना चाहिए और न ही इसके बाद दूध पीना चाहिए।

परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor. 
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
1. करेले का जूस (Bitter Gourd Juice) :

प्रकृति–गर्म और खुश्क। करेला घी में छौंककर खाने से अधिक लाभदायक है।
सेवन कब और कितना-सुबह खाली पेट पानी के साथ 20 से 50 मिली तक बीमारी और चिकित्सक की सलाह के अनुसार।
लाभ-कच्चे करेले का जूस बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसमें जरूरी विटामिन्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कि शरीर को चाहियें।
(1) ब्लड शुगर के लेवल को कम करता है : शुगर को नियंत्रित करने के लिए आप तीन दिन तक खली पेट सुबह करेले का जूस ले सकते हैं। मोमर्सिडीन और चैराटिन जैसे एंटी-हाइपर ग्लेसेमिक तत्वों के कारण करेले का जूस ब्लड शुगर लेवल को मांसपेशियों में संचारित करने में मदद करता है। इसके बीजों में भी पॉलीपेप्टाइड-पी होता है जो कि इन्सुलिन को काम में लेकर डायबेटिक्स में शुगर लेवल को कम करता है।
(2) सोराइसिस में उपयोगी : एक कप करेले के जूस में एक चम्मच नींबू का जूस मिला लें। इस मिश्रण का खाली पेट सेवन करें। 3 से 6 महीनें तक इसका सेवन करने से त्वचा पर सोराइसिस के लक्षण दूर होते हैं। यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और सोराइसिस को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में मदद करता है।


(3) पाचन शक्ति में वृद्धि : करेले का जूस कमजोर पाचन तंत्र को सुधारता है और अपच को दूर करता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि यह एसिड के स्त्राव को बढ़ाता है। जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है। इसलिए अच्छी पाचन क्षमता के लिए सप्ताह में एक बार सुबह करेले का जूस जरूर लें।
(4) दृष्टि क्षमता में वृद्धि : लगातार करेले के जूस का सेवन कर आप विभिन्न दृष्टि दोषों को दूर कर सकते हैं। करेले में बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए की अधिकता होती है। जिससे दृष्टि ठीक होती है। इसके अलावा इसमें उपस्थित विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाली नजरों की कमजोरी से बचाता है।
(5) अग्नाशय कैंसर में उपयोगी : रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाएं नष्ट होती हैं। ऐसा इसलिए होता हैं, क्योंकि करेले में मौजूद एंटी-कैंसर कॉम्पोनेंट्स अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं में ग्लूकोस का पाचन रोक देते हैं। जिससे इन कोशिकाओं की शक्ति ख़त्म हो जाती हैं और ये ख़त्म हो जाती हैं।
(6) लीवर को मजबूती : रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से लीवर मजबूत होता है, क्योंकि यह पीलिया जैसी बिमारियों को दूर रखता है। साथ ही यह लीवर से जहरीले पदार्थों को निकालता है और पोषण प्रदान करता है। जिससे लीवर सही काम करता है और लीवर की बीमारियां दूर रहती हैं। 3 से 8 वर्ष तक के बच्चों को आधा चम्मच करेले का रस नित्य देने से यकृत ठीक रहता है। यह पेट साफ रखता है। करेले की सब्जी खाने और दो चम्मच करेले का रस, दो चम्मच पानी, स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाकर नित्य कुछ दिन पीने से बढ़ों की यकृत क्रिया ठीक हो जाती है।
(7) रक्त शोधक : करेले का जूस शरीर में एक प्राकृतिक रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है। यह खून से जहरीले तत्वों को बाहर निकालता है और फ्री रेडिकल्स से हुए नुकसान से बचाता है। इसलिए ब्लड को साफ़ करने और मुहासों जैसी समस्याओं को दूर करने केलिए रोज एक गिलास करेले का जूस जरूर पियें।
(8) भूख बढ़ाता है : भूख नहीं लगने से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है, जिससे कि स्वास्थ्य से सम्बंधित परेशानियां होती हैं। इसलिए करेले के जूस को रोजाना पीने से पाचन क्रिया सही रहती है और जिससे भूख बढ़ती है।
(9) प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करे : जिन लोगो का प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर है, उन्हें करेले के जूस का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। इसमें विटामिन B1, B2, B3, जिंक, मैग्नीशियम पाया जाता है, जो शरीर के लिए बहुत आवश्यक तत्व हैं।

(10) चर्म रोग नाशक : करेले के रस के सेवन से पाचन क्रिया ठीक होती है। इस कारण चेहरे पर मुंहासे जैसे रोग नहीं होते। करेला पेट साफ़ करने में भी सहायक होता हैं। जिससे चर्म रोग नहीं होते। करेले की पत्तियों में भी विशेष गुण होते हैं। आप चाहे तो इसका लैप भी बना के लगा सकते हैं।
(11) पथरी :
  • (A) करेले में मैग्नीशियम, फॉस्फोरस होते हैं, जो पथरी को तोड़ देते हैं। करेला वृक्क व मूत्राशय की पथरी को तोड़कर पेशाब के साथ बाहर लाता है। इसके लिए दो करेलों का रस नित्य पियें, सब्जी खायें।
  • (B) दो करेलों का रस तथा एक कप छाछ मिलाकर नित्य दो बार पियें जब तक पथरी निकल नहीं जाए।
  • (C) करेला पेशाब ज्यादा लाता है। इसका रस पीने से पेशाब की जलन दूर होती है। करेले का रस भूखे पेट पीना लाभदायक है।
  • (D) करेले के पत्तों का रस 6 चम्मच चार चम्मच दही में मिलाकर पिलायें, इसके बाद एक कप छाछ पिलायें। इस तरह तीन दिन पिलाकर तीन दिन पिलाना बन्द रखें। इसी प्रकार पुनः चार दिन, फिर पाँच दिन पिलायें और जितने दिन पिलायें उतने ही दिन बन्द रखें। इस अवधि में चावल और खिचड़ी ही खायें।

(12) गठिया :
  • (A) करेले के रस को गर्म करके गठिया पर लगायें और सब्जी खायें। जोड़ों में दर्द हो तो करेले के पत्तों के रस या करेले के रस की मालिश करें।
  • (B) करेले की चटनी पीसकर गठिया की सूजन पर लेप करें। 100 ग्राम करेले सेंक कर या उबाल कर भुर्ता बनाकर गर्म-गर्म नित्य सुबह-शाम खायें। भुर्ते में सामान्य मसाले या शक्कर डाल लें। करेला गठिया व जोड़ों का दर्द दूर करता है। करेले की सब्जी में घी का छौंक लगाकर खायें। इससे संधिवात, स्नायुगतवात में लाभ होता है।
(13) सूजन :
  • (A) आधा कप करेले का रस, चौथाई चम्मच पिसी हुई सोंठ, थोड़ा-सा पानी मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीने से सूजन ठीक हो जाती है।
  • (B) करेले पर पानी डालकर चटनी पीस कर सूजनग्रस्त जगह पर लेप करने से सूजन दूर हो जाती है। लेप को चार घंटे बाद ठंडे पानी से धो दें।
(14) कब्ज़ : करेला कब्ज़ दूर करता है। करेले का मूल अरिष्ट, जो होम्योपैथी में मोमर्डिका कैरन्शिया Q नाम से मिलता है, की 10 बूंद चार चम्मच पानी में मिलाकर नित्य चार बार देने से कब्ज़ दूर हो जाती है।
(15) बवासीर : रक्तस्रावी बवासीर में रक्त गिरने पर आधा कप करेले का रस स्वादानुसार मिश्री या शक्कर मिलाकर नित्य दो बार पीने से लाभ होता है। बवासीर के मस्सों में दर्द, सूजन, जलन हो तो करेले का रस शौच जाने के बाद नित्य मस्सों पर लगायें। मस्से सूखने तक रस लगाते रहें। लाभ होगा।
(16) हड्डी, दाँत, मस्तिष्क, रक्त और अन्य शारीरिक अवयवों के लिए जितने फॉस्फोरस की जरूरत होती है, करेले में मिल जाता है। करेला दर्द दूर करता है, शरीर में शक्ति पैदा करता है। कफ, बलगम निकलना बन्द हो जाता है।
मात्रा–एक-दो करेले के रस को आधा कप पानी में मिलाकर लें। करेला सेवन करने से उत्पन्न विकारों को दूर करने के लिए दही, नीबू, घी और चावल में से एक का सेवन करना चाहिए।
सावधानी-करेले के जूस का अत्यधिक सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
(1) लीवर व किडनी के मरीजों के लिए करेले का अत्यधिक सेवन हानिकारक साबित हो सकता है। यह लीवर में एन्जाइम्स के निर्माण को बढ़ा देता है, जिससे लीवर प्रभावित होता है।
(2) करेले के जूस में मोमोकैरिन नामक तत्व होता है, जो महिलाओं में पीरियड्स के फ्लो को बढ़ा देता है। गर्भावस्था के दौरान करेले के ज्यादा सेवन करने से गर्भपात का खतरा भी ज्यादा रहता है। 
(3) कई बार करेले के जूस के अधिक सेवन से प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स की स्थिति भी पैदा हो सकती है। साथ ही करेले में एंटी लैक्टोलन तत्व भी होते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान दूध बनने की प्रक्रिया में रुकावट पैदा करता है।
(4) करेले में मौजूद तत्व फर्टिलिटी संबंधित दवाओं का प्रभाव खत्म कर देते हैं। वहीं करेले के बीजों में लेक्टिन नामक तत्व होता है जो आंतों तक प्रोटीन को पहुंचने नहीं देता।
(5) अध्ययनों में पाया गया कि करेले के अत्यधिक सेवन से हेमोलाइट‌िक अनीमिया हो सकता है। हेमोलाइट‌िक अनीमिया में पेट दर्द, सिरदर्द, बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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मनोशारीरिक विकारों की अनदेखी सेक्स जीवन बर्बाद कर सकती है।

लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

मनुष्य ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव-जन्तु के जीवन में सेक्स एक अनिवार्य क्रिया है। जिससे यह संसार संचालित हो रहा है। मनुष्य के लिये सेक्स अत्यधिक सुखद और आनन्ददायक क्रिया है। यही वजह है कि प्रत्येक स्त्री और पुरुष को एक उम्र के बाद विवाह से पूर्व और विवाह के बाद सुखद सेक्स का आनन्द की अतृप्ति/Dissatisfaction बनी रहती है। सेक्स की अतृप्त इच्छा बनी रहना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि ऐसा बहुत ही स्वाभाविक है। आमतौर पर सेक्स में स्त्री की सन्तुष्टि को पुरुष की सेक्स करने की कला या शारीरिक क्षमता या पौरुष/Virility से जोड़ा जाता है। इस कारण प्रत्येक पुरुष के लिये अपनी सेक्स पार्टनर को संतुष्ट करना बहुत ज़रूरी समझा जाता है। अगर किसी कारण से कोई पुरुष अपनी सेक्स पार्टनर को सन्तुष्ट नहीं कर पाता है या किसी कारण से कोई स्त्री, अपने पुरुष साथी से सन्तुष्ट नहीं हो पाती है तो इसे सीधे पुरुष की योन क्षमता या मर्दानगी में कमी करार दे दिया जाता है। जो बिलकुल भी सही और उचित नहीं है। क्योंकि अनेक बार, अनेक कारणों से जो असहज हालातों में अनेक पुरुष सही से सेक्स नहीं कर पाते हैं या लम्बे समय तक सेक्स करना चाहते हैं, मगर अधिकतर मामलों में वे सफल नहीं हो पाते हैं। यह असफलता उन्हें हर वक्त सताती है। इस कारण उनको अपराधबोध (Guilty Feeling) आ घेरता है। उनका घरेलु और व्यावसायिक/कार्यालयीन कार्यों में मन नहीं लगता। अनेक पुरुष इस कारण तनाव और अवसाद (Stress and Depression) से ग्रस्त होकर विभिन्न मानसिक और शारीरिक बीमारियों के शिकार होते हुए देखे जा सकत हैं।


इसी प्रकार पुरुष के सम्पूर्ण रूप से शारीरिक रूप से सक्षम होने और पुरुष के सभी प्रकार के प्रयासों के बाद भी अनेक औरतें सेक्स के दौरान सन्तुष्ट नहीं हो पाती हैं। जिससे ऐसी स्त्रियां भी तनाव और अवसाद से ग्रस्त होकर अनेक शारीरिक बीमारियों सहित, हिस्टीरिया (Hysteria) से पीड़ित होती देखी जा सकती हैं।


इसलिये बार-बार यह सवाल उठता रहता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है?

हमारे पास प्रतिदिन आने वाले टेलीफोन/मोबाईल काल्स में 18 वर्ष से 60 वर्ष तक के पुरुषों के लिये यह एक जटिल सवाल (Knotty Question) और अनसुलझी समस्या (Unsolved Problem) बना हुआ है। सेक्स में असन्तुष्टि से ऐसे स्त्री-पुरुष अत्यधिक परेशान रहते हैं। हजारों-लाखों लोगों का दाम्पत्य जीवन (Married Life) इस कारण ​बिखर कर बर्बाद हो रहा है। इसी कारण अनेक लोग तलाक लेने को विवश हो रहे हैं और दु:खद कड़वा सच यह भी है कि कुछ कमजोर मानसिकता के लोग आत्मघात (Suicide) तक कर लेते हैं। अत: 'स्वास्थ्य रक्षक सखा' के पाठकों के लिये इस विषय पर 1990 से और वर्तमान तक हजारों स्त्रियों और पुरुषों की सेक्स समस्याओं के समाधान और उपचार के अनुभवों पर आधारित महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत है:—


1. सेक्स एज्युकेशन/Sex Education : सभी जीवों में सेक्स ओपन अर्थात् सरेआम होता है। अत: उनकी नयी पीढी को किसी प्रकार की औपचारित सेक्स एज्युकेशन की जरूरत नहीं होती है। इसके विपरीत मानव ने, विशेषकर भारतीय उपमहाद्वीप में सेक्स को गुप्त, गोपनीय और घृणित करार देकर, सेक्स के बारे में प्रत्येक युवा होने वाली, नयी पीढी को मानसिक और सामाजिक रूप से असहज बना दिया है। भारत में एक मोपेड को चलाने के लिये तो लाईसेंस की जरूरत होती है, लेकिन यौन जीवन प्रारम्भ करने के लिये किसी प्रकार की सेक्स एज्युकेशन या ज्ञान की कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है। यही वजह है कि बिना वैज्ञानिक, सही और जरूरी ज्ञान के सेक्स जीवन का असहज, असन्तुष्ट और तनावपूर्ण रहना स्वाभाविक है। अत: बहुत जरूरी है कि सभी स्त्री-पुरुष सेक्स का सही ज्ञान प्राप्त करें। वर्ष 1997 से हमारी ओर से व्यावसायिक दाम्पत्य सलाहकार के रूप में सेवाएं प्रदान की जाती रही है। अब तक कई सौ दम्पत्ति (Couple) इसका लाभ उठा चुके हैं।



2. सेक्स पर खुलकर चर्चा जरूरी है : सेक्स पार्टनर या पति-पत्नी को केवल शरीररिक तौर पर या शक्ल-ओ-सूरत से जानना ही पर्याप्त नहीं होता है, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं, मानसिक स्थिति और शारीरिक जरूरतों पर खुलकर आपसी चर्चा करना बेहद जरूरी होता है। आश्चर्यजनक रूप से अनेक पति-पत्नी वर्षों साथ रहने के बाद भी सेक्स जरूरतों पर सहज होकर चर्चा नहीं कर पाते हैं। जो उनके दु:खद सेक्स का मूल कारण हो सकता है।


3. रोमांस (Romance) के जरिये जीवन में रोमांच (Excitement) पैदा करें : बिना रोमांच के जीवन निरर्थक है। रोमांच के बिना सेक्स का कोई मूल्य ही नहीं है। अत: पति-पत्नी या सेक्स पार्टनर्स को रोमांस का व्यावहारिक अनुभव और महत्व समझना बहुत जरूरी है। जिससे जीवन में रोमांच और ताजगी बनी रहे।


4. फोरप्ले (Foreplay) अर्थात संभोग पूर्व क्रीड़ा : आमतौर पर सेक्स की उतावली में पुरुष फोरप्ले को नकारते हैं। या उनको सेक्स में अधैर्य के कारण फोरप्ले का व्यावहारिक महत्व समझ में नहीं आता है। इसके चलते स्त्री को सेक्स में सन्तुष्टि नहीं मिल पाती है और सेक्स सम्बन्धों में निराशा और रूखापन आ जाता है। जिसके चलते  यौन जीवन बिखर सकता है।


5. सेक्स के दौरान पूर्वाग्रहों से मुक्ति जरूरी : किसी बुरे, अप्रिय, अनुभव, धुत्कार, असफलता या पर-पुरुष या पर-स्त्री  यौन अनुभव के कारण या अन्य किसी कारण से अनेक स्त्री-पुरुष शारीरिक रूप से सेक्स करने से पूर्व, मन ही मन में सेक्स के बारे में अनेक प्रकार की कल्पनाएं करके, सेक्स के सम्भावित अंतिम अंजाम (Possible Final Result) तक पहुंच जाते हैं। जिसके कारण उनके द्वारा वास्तव में सहजता से सेक्स करना असम्भव हो जाता है। लगातार और लम्बे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहने के कारण, अकसर ऐसे स्त्री-पुरुष सेक्स में असफल या असन्तुष्ट पाये जाते हैं। स्त्री आनन्द के चर्मोत्कर्ष (Orgasm or Climax) पर पहुंचने से पहले ही पुरुष स्खलित हो जाते हैं या पुरुष के पर्याप्त समय तक सेक्स जारी रखने के बाद भी स्त्री उत्तेजना और आनन्द की अनुभूतिक (Excitement and Pleasure) का अनुभव ही नहीं कर पाती है। इसके कारण अनेक बार पुरुष अपने आप को असक्षम या नपुंसक और स्त्री खुद को फ्रिजिडिटी का शिकार अनुभव करने लगती है। ऐसे में स्त्री के मन में सेक्स के प्रति अरुचि या घृणा हो उत्पन्न हो सकती है। इस स्थिति का जल्दी से जल्दी उचित परामर्श के जरिये समाधान बहुत जरूरी होता है।



6. मनोशारीरिक विकार : कुछ स्त्रियों और पुरुषों में वास्तविक मानसिक और शारीरिक समस्याएं देखने को मिलती हैं। जिनके चलते उन्हें अन्तर्द्वन्द्व से गुजरना पड़ता है। ऐसे हालात उत्पन्न हो जाते हैं, जब मन साथ देता है तो शरीर साथ नहीं देता और शरीर साथ देता है तो मन इनकार कर देता है। यदि लम्बे समय तक इसका समाधान नहीं हो तो यह स्थिति भी पुरुष को नामर्द और स्त्री को ठण्डी बना सकते हैं। अत: इस स्थिति का भी जल्दी से जल्दी उचित परामर्श के जरिये सही समाधान बहुत जरूरी होता है।


7. औषधीय उपचार : सेक्स से सम्बन्धित करीब 10 फीसदी मामले ही ऐसे होते हैं, जिनमें केवल औषधीय उपचार (Medicinal Treatment) ही एक मात्र समाधान होता है। अन्यथा अधिकतर मामलों में मनोशारीरिक चिकित्सा की जरूरत होती है। जिसमें उचित परामर्श और औषधीय उपचार दोनों का संयुक्त समावेश होता है। जिन मामलों में औषधीय उपचार की जरूरत होती है। उन में सेक्स उत्तेजक दवाईयों का उपयोग हानिकारक हो सकता है। अत: आयुर्वेद और होम्योपैथी का औषधीय उपचार दुष्प्रभाव रहित, सुरक्षित, बेहतर और दीर्घकालिक और स्थायी  परिणाम दायक होता है।

उपरोक्त के अलावा स्वस्थ और सफल सेक्स के लिये—
1. सही समय पर उचित, नियमित एवं पोषक भोजन।
2. नियमित और उचित व्यायाम। 
3. पर्याप्त नींद।
4. तनाव रहित तथा नशामुक्त सहज जीवन बहुत जरूरी है।
और 
5. मनोशारीरिक विकारों की अनदेखी नहीं करें। अन्यथा यह आपके यौन जीवन बर्बाद कर सकती है।

सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
परम्परागत एवं होम्योपैथ चिकित्सक
M/WA No. : 9875066111/11.01.2017
Web Site : http://www.healthcarefriend.in/
facebook page : https://www.facebook.com/healthcarefriendpage/


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घरेलु दवाई : जीरे के दुष्प्रभाव-साइड इफेक्ट्स

हम अनेक बार घरेलु उपचार के नाम पर अनेक औषधियों का आंख बंद करके सेवन करने लगते हैं। जिससे अनेक बार फायदे के बजाय शारीरिक दुष्प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। ऐसा ही आंख बन्द करके जीरे का सेवन करने के बाद होता देखा गया है। माना कि जीरा भोजन में अरुचि, पेट फूलना, अपच आदि जैसे पाचन संबंधी अनेक समस्‍याओं से निजात दिलाता है। लेकिन जीरे के कई प्रकार के दुष्प्रभाव भी होते हैं। अत: उपचार से पहले किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना सदैव उचित रहता है।
आइये जानते हैं-जीरे के दुष्प्रभावों के बारे में:-



1. गर्भपात का खतरा : जीरे का मतलब ज्‍यादा मात्रा में जीरे के सेवन करने से गर्भपात या समय से पहले डिलीवरी होने की आंशका बढ़ जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को जीरे के अधिक सेवन से बचना चाहिए। 

2. हार्ट बर्न : बुक "पॉकेट गाइड टू हर्बल मेडिसिन" के अनुसार जीरा आपके गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट में अधिक गैस बनने में योगदान देता है। इस प्रकार जीरा हार्ट बर्न (Heartburn=A form of indigestion felt as a burning sensation in the chest, caused by acid regurgitation into the esophagus.) का एक कारण हो सकता है!

3. डायबिटीज रोगियों के लिए अस्वास्थ्यकर : डायबिटीज रोगियों को अपने ब्‍लड शुगर के स्‍तर को नियंत्रण में रखने की जरूरत होती है। उन्‍हें स्‍वस्‍थ रहने के लिए ब्‍लड शुगर का स्‍तर सामान्‍य रखना होता है। ब्‍लड शुगर के स्‍तर में उतार-चढ़ाव डायबिटीज रोगियों के लिए अच्‍छा नहीं होता। जैसा की आप जानते हैं कि जीरे के सेवन से ब्‍लड शुगर के स्‍तर में बहुत जल्‍दी कमी आने लगती है और यह लो ब्‍लड शुगर स्‍तर का कारण बन सकता है। इसलिए डायबिटीज से पीड़ि‍त लोगों को जीरे के अधिक सेवन से बचना चाहिए।

4. डकार की समस्‍या : जीरे के वातहर गुण या प्रभाव के कारण जीरा अत्‍यधिक डकार उत्पन्न करने का कारण बन सकता है। कभी-कभी डकार में अधिक आंत्र पथ में गैस दके माध्‍यम से बाहर निकलती है। और तो और कभी-कभी डकार से अजीब से गंध और विशेष ध्‍वनि भी आने लगती हैं। हालांकि वास्‍तविक अर्थों में यह कोई समस्‍या नहीं है, लेकिन डकार निश्‍चित रूप से शर्मिंदगी का कारण बन सकती है।

5. मादक प्रभाव : जीरे में मादक/नशे गुण मौजूद होते हैं। इसलिए जीरे का सेवन सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, क्‍योंकि यह नशे की लत बन सकता है।

6. स्तनपान कराने वाली माताओं को नुकसानदेह : जीरा ब्रेस्‍टफीडिंग करवाने वाली महिलाओं के लिए अच्‍छा नहीं होता। इसलिए स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को जीरे के अत्‍यधिक मात्रा में सेवन से बचना चाहिए, क्‍योंकि इससे दूध का उत्‍पादन कम होने लगता है।

7. भारी माहवारी चक्र : जीरा मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का कारण बन सकता है। इ‍सलिए महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से बचने के लिए जीरे का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिये।

8. लीवर को नुकसान : जीरे में मौजूद तेल अत्‍यधिक अस्थिर होने के कारण, अधिक लंबे समय तक जीरे के अधिक मात्रा में सेवन करने से यह लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। जीरा का तेल मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने या रोकने के लिए जानवरों के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है।

9. सर्जरी से आगे-पीछे ब्‍लड शुगर स्‍तर कम होने का खतरा : अधिक मात्रा में जीरे के सेवन से शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर कम होने लगता है। इसलिए निकट भविष्य में एक सर्जरी में जाने से पहले इस बात को याद रखना बहुत महत्‍वपूर्ण हो जाता है। क्‍योंकि सर्जरी के दौरान ब्‍लड शुगर के स्‍तर को बनाये रखना जरूरी होता है। इसलिए डॉक्‍टर सर्जरी के दौरान और बाद ब्‍लड शुगर के स्‍तर को नियंत्रित करने के लिए कम से कम दो सप्‍ताह पहले जीरा बंद करने की सलाह देता है। 

10. एलर्जी की समस्‍या : जीरा आयरन का सबसे अच्छा स्रोत है। इसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर हो जाती है। और त्‍वचा पर निखार आता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि जीरे का इस्‍तेमाल त्‍वचा पर चकत्‍ते और एलर्जी भी पैदा कर सकता है। इसलिए त्‍वचा में एलर्जी से परेशान लोगों को जीरे का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए।

11. अन्‍य : जीरे के अन्‍य दुष्‍प्रभावों में मानसिक समस्‍याएं, उनींदापन और मतली जैसी समस्‍याएं भी शामिल है।
मेथी दाना/Fenugreek Seeds

हर घर में पाया जाने वाला मेथी दाना भोजन की सिर्फ स्वाद और महक ही नहीं बढ़ाता, बल्कि हमारे स्वास्थ्य की रक्षा भी करता है। मेथी दाना हमारे लिये बहुत ही गुणकारी और स्वास्थ्यवर्धक होता है।

इससे भी बड़ी बात यह है कि मेथी दाना का सर्वाधिक उत्पादन भारत में ही होता है और भारत में भी राजस्थान में सबसे ज्यादा (लगभग 80%) पैदा होता है। गुजरात, यूपी, एमपी, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब में भी इसका काफी मात्रा में उत्पादन होता है।

हरी मेथी : मेथी के पत्ते या हरी मेथी के गुण भी लगभग मेथी दाना जैसे ही होते है।

मेथी दाना के पोषक तत्व (Nutrients) : मेथी दाना में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा कई प्रकार के खनिज जैसे आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नेशियम, कॉपर, मैगनीज तथा ज़िंक आदि होते है। इसके अतिरिक्त मेथी दाना कई प्रकार के विटामिन और जरुरी पोषक तत्वों का बहुत अच्छा स्रोत है। जिसमे विटामिन बी-6, विटामिन ए, विटामिन सी, फोलिक एसिड, थायमिन, राइबोफ्लेविन तथा नियासिन आदि शामिल है।

मेथी में कई प्रकार के फायदेमंद फोटो न्यूट्रिएंट्स (Photo Nutrients=Phytonutrients are compounds found in plants or fruits, veggie, grains and grasses. They serve various functions in plants, helping to protect the plant's vitality. For example, some phytonutrients protect the plant from UV radiation while others protect it from insect attack.) भी होते है। फोटो न्यूट्रिएंट्स पेड़ पौधों में पाए जाने वाले वे तत्व है जो पौधों को तो बीमारी, फंगस आदि से बचाते ही है, हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक होते हैं।

मेथी दाना में मौजूद फायबर तथा सैपोनिन (Saponin=Saponins occur in many plant foods and get their name from their soap-like qualities. Eating saponins may help lower your cholesterol and reduce your risk of heart disease. Your immune function benefits from these plant compounds as well. Your risk of developing certain forms of cancer or getting tumors may even decrease from eating more saponins.) इसे आश्चर्यजनक औषधि बनाते है। इसमें म्यूसिलेज नाम का एक चिपचिपा तत्व होता है। मेथी को पानी में भिगोने पर यह तत्व फैलकर मल्हम जैसे जैल में परिवर्तित हो जाता है। यह जैल शरीर के तंतुओं की मरम्मत कर उन्हें मजबूत बनाने का काम करता है।

मेथी दाना का सेवन कैसे? : मेथी दाना अंकुरित करके खाया जा सकता है। मेथी दाना की किशमिश के साथ सब्जी बनाकर खाई जा सकती है। इसे साबुत ही पानी के साथ फांक सकते है या चूर्ण बनाकर बूरा चीनी मिलाकर फंकी ले सकते है। सर्दी के मौसम में मेथी के लडडू बनाकर खाये जा सकते है। अगर मेथी के दाने ज्‍यादा कडुवे हों तो उन्‍हें कैप्‍सूल के रूप में भी खाया जा सकता है।

मेथी को अंकुरित करने की विधि : चार चम्मच मेथी दाना धोकर आधा गिलास पानी में 6 -7 घंटे के लिए भिगो दें। इसके बाद छान कर कपड़े में बांध कर अंकुरित करके खाएं। इसका बचा हुआ पानी भी पी लेना चाहिए।

मेथी दाना से सावधान (Beware of Fenugreek Seeds) :  मेथी दाना के लाभ जानने से इसके संभावित नुकसान जान लिए जाएँ : कई बीमारियों में रामबाण के रूप में काम करने वाला मेथी न केवल आपके चेहरे की सुंदरता को बरकरार रखता है, बल्कि आपकी पाचन संबंधी समस्या को भी दूर कर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं इसका सेवन कई बार आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है। आइए जानते है इसके नुकासन के बारे में…
1. डायबिटीज : मेथी के सेवन से ब्लड सुगर का स्तर प्रभावित होता है। इसलिए जो व्यक्ति डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें मेथी खाते समय बहुत ही सावधानी बरतनी पड़ेगी।

2. एलर्जी : ऐसे कई सारे मामले देखे गए हैं कि जो लोग ज्यादा मेथी का सेवन करते हैं उन्हें स्किन में होने वाली एलर्जी की दिक्कते आने लगती है। इस तरह के एलर्जी से न केवल आपका चेहरा सूज जाता है बल्कि आपके चेस्ट में दर्द भी होने लगता है।

3. खट्टी डकार और गैस : अगर आप अच्छा और सही तरीके से भोजन नहीं लेते, तो आपको गैस और खट्टी डकार की समस्या होने लगती है। डकार में पेट की गैस को मुंह से निकाला जाता है, जिसमें कभी कभी अजीब सी आवाज़ और गंध होती है। यह ज्यादातार तीखी भोजन खाने वालों को होती है। लेकिन अगर आप मेथी का ज्यादा सेवन करते हैं, तो आपको खट्टी डकार, गैस और सूजन जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए मेथी जब खाएं उसकी मात्रा के बारे में अच्छी तरह से जान लें।

4. दस्त : अगर आप मेथी का ज्यादा सेवन करते हैं तो आपको दस्त की समस्या हो सकती है और जिन माताओं ने अभी-अभी अपने बच्चे को जन्म दिया है, उन्हें तो मेथी खाते समय और भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि स्तनपान कराने वाली मताएं अगर दस्त की शिकार हैं तो यह रोग उनके बच्चे को भी हो सकता है। जिसकी वजह से डिहाइड्रेशन की भी समस्या हो सकती है।

5. मूत्र की गंध : गंध चाहे पसीने की हो या मूत्र की हर कोई इससे दूर भागता है। अगर आपके साथ भी यह समस्या है तो इसे जल्द से जल्द दूर कर लें। मेथी के खाने से मूत्र में गंध की समस्या आने लगती है। इसलिए इसे खाते समय सावधानी बरतें। वैसे यह बदबू मूत्र में मौजूद बैक्टीलरिया और सूक्ष्म जीवों की वजह से भी आ सकती है।

6. अन्य नुकसान : डॉक्टरों के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को मेथी का कम से कम सेवन करना चाहिए या हो सके तो इसका सेवन न करें। इसके अलावा ज्यादा मेथी दानों के सेवन से आप इंटरनल ब्लीडिंग की समस्या से जूझ सकते हैं। यहा तक की मेथी दाना आपके बच्चे की सोचने समझने की शक्ति को कम कर देता है इसलिए उसे डॉक्टर की सलाह के बाद मेथी दाना दें।

Note : मेथी दाना की तासीर बहुत गर्म होती है। जिन लोगों के शरीर से किसी भी प्रकार से रक्त निकलता हो जैसे बवासीर के कारण, नकसीर के कारण, पेशाब में रक्त जाता हो, माहवारी के समय अधिक मात्रा में या अधिक दिन तक रक्त स्राव होता हो तो उन्हें मेथी का उपयोग बड़ी सावधानी और चिकित्सक की देख रेख में करना चाहिए। मेथी दाना रक्त स्राव बढ़ा सकती है। तेज गर्मी में भी मेथी का उपयोग कम ही करना चाहिए। सर्दी के मौसम में इसका उपयोग अधिक लाभदायक सिद्ध होता है।

मेथी दाना के फायदे :

1. कोलेस्ट्रॉल : मेथी में कोलेस्ट्रॉल को कम करने का गुण होता है। इससे हानिकारक LDL कोलेस्ट्रॉल कम होता है। यही वह कोलेस्ट्रॉल है जो रक्तवाहिकाओं में जमा होकर हार्ट अटैक पैदा कर सकता है। मेथी में मौजूद फायबर गेलेक्टोमेनन के कारण भी रक्त में कोलस्ट्रोल की मात्रा कम करने में मदद मिलती है। इसके नियमित उपयोग से रक्त में क्लोट बनने की सम्भावना कम हो जाती है। इस प्रकार मेथी से हृदय रोग से बचाव हो सकता है। मेथी की सब्जी इस परेशानी में लाभ देती है। डॉक्‍टरों का कहना है कि यह हार्ट रोगियों के लिए एक वरदान के समान है, जिसे वह रोज अपने भोजन में खा कर अपने बढे हुए कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम कर सकता है। अगर मेथी के दाने ज्‍यादा कडुवे हों तो उन्‍हें कैप्‍सूल के रूप में भी खाया जा सकता है। भोजन में कुछ दाने मेथी के खाने से कोलेस्‍ट्रॉल लेवल में सुधार तो आता ही है साथ में हार्ट अटैक का रिस्‍क भी कम हो जाता है।

2. डायबिटीज : मेथी डायबिटीज को कंट्रोल में रखने में मदद करती है। इससे पेशाब में शक्कर की मात्रा कम हो जाती है। इसके प्राकृतिक फायबर के कारण तथा इन्सुलिन पर मेथी दाना के उपयोग से पड़ने वाले प्रभाव से डायबिटीज में यह बहुत लाभदायक सिद्ध होती है। यह इन्सुलिन के बनने तथा इसके रक्त में प्रवाहित होने की गति दोनों पर अच्छा प्रभाव डालती है। इससे ब्लड शुगर बहुत ऊपर नीचे होना बंद होता है। रोजाना तीन चार चम्मच मेथी के उपयोग से अच्छे परिणाम आ सकते है। इसके गर्म प्रभाव से बचने के लिए मेथी दाना मोटा पिसा हुआ दो चम्मच और सौंफ एक चम्मच रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह छान कर यह पानी पिएँ। हरी मेथी रक्त में शकर को कम कर देती हैं। इस कारण डायबिटीज रोगियों के लिए भी यह फायदेमंद होती है। प्रतिदिन एक चम्मच मेथी दाना पाउडर पानी के साथ फांकें। डायबिटीज से दूर रहेंगे। मधुमेह की समस्या से राहत दिलाये मेथी–मधुमेह की समस्या आजकल अनेक लोगों में देखने को मिल ही जाती है. इस परेशानी को समाप्त करने के लिए मेथी के पत्तों का रस निकाल कर सुबह शाम पियें इससे मधुमेह ठीक होने लगता है। मेथी से करें मधुमेह की रोकथाम–मेथी पाउडर का सेवन मधुमेह की समस्या को दूर करने के लिए काफी लाभदायक होता है. इसके सेवन के लिए थोड़ा मेथी पाउडर लें. अब इस पाउडर को दूध में डालकर पीए. इससे मधुमेह की समस्या कम होने लगती है। रिसर्च के अनुसार यह जानकारी प्राप्‍त हुई है कि यह टाइप 2 के मधुमेह रोगियों के लिए काफी लाभकारी होता है। अगर रोगी रोज़ दिन में 6-7 मेथी के दानों का या फिर मेथी के पानी का सेवन करे तो उसका ब्‍लड शुगर लेवल कम हो सकता है।

3. त्‍वचा रोगों से निजात : अगर आपको खुजली, जलन, फोड़े-फुसीं और गांठ की समस्‍या है तो आपको कुछ ग्राम मेथी खाने की आवश्‍यक्‍ता है। न सिर्फ खानें से बल्कि इसके पेस्‍ट को लगाने से भी फायदा होता है। अगर रुसी की समस्‍या है तो बालों में मेथी और दही मिला कर लगाने से यह समस्‍या जल्‍द दूर हो जाएगी। त्‍वचा रोग ठीक होता है-त्‍वचा रोग जैसे एक्‍जिमा, जलने का घाव, फोडे-फुंसी और गठिया रोग मेंथी पो पीस कर पेस्‍ट लगाने से ठीक हो सकता है।

4. मौसमी बीमारियां : कहा जाता है कि अगर बुखार या कोई भी अन्‍य बीमारी में मेथी का उपयोग किया जाए तो वह तुरंत ही ठीक हो जाती है। और अगर आप खुद को रिफ्रैश करना चाहते हैं तो मेथी के पत्‍तों से बनी हर्बल टी पिएं। फिर देखें कैसा फील/अनुभव करते हैं? मेथी एक अच्‍छी घरेलू दवा है जो कि बुखार और कई अन्‍य बीमारियों को ठीक करती है। यही नहीं मेथी के पत्‍तों से हर्ब टी बनाई जा सकती है जिससे दिमाग शांत और फ्रेश रहता है।

5. स्तन सौन्दर्य और वृद्धि : मेथी दाना की सब्जी खाने से अविकसित और छोटे स्तन बड़े और पुष्ट हो जाते है। साथ ही मेथी दाना को पानी के साथ बारीक पीसकर स्तन की हल्के हाथ से नियमित मालिश भी करनी चाहिए। इन दोनों के करने से स्तन के आकार में वृद्धि होती है। यदि स्तन में दूध सुखाना हो या स्तन में सूजन और दर्द हो तो मेथी की हरी पत्तियां पीस कर स्तन पर लगा कर दो घंटे बाद धो लें। इससे आराम मिल जाता है।

6. दाग-धब्बे : चेहरे के दाग-धब्बों को कम करें मेथी–चेहरे से दाग तथा धब्बों को समाप्त करने के लिए भी मेथी बहुत फायदेमंद होती है. इसका प्रयोग करने के लिए मेथी के दानो को पीस कर उसका लेप बना लें. अब इस लेप को अपने चेहरे पर लगाए. इससे त्वचा कोमल तथा बेदाग बनती है.

7. पाचन तंत्र : मेथी से कई प्रकार से पाचन तंत्र को फायदा पहुंचता है। इससे पेट और आँतों की जलन सूजन आदि में आराम मिलता है। यह पेट और आँतों के अल्सर में आराम दिलाती है । इसके पानी में घुलनशील फायबर आँतों की सफाई करके कब्ज मिटाते है तथा आँतों की शक्ति बढ़ाते है। मेथी में मौजूद पाचक एंजाइम अग्नाशय को अधिक क्रियाशील बना देते हैं। इससे पाचन क्रिया अत्यंत सरल हो जाती है।  इससे भूख खुल कर लगने लगती है। खाने में अरुचि हो जाने पर इससे रुचि जाग्रत हो जाती है। मेथी मेटाबोलिज्म को भी सुधरती है। जिसके कारण कमजोरी दूर होती है। मेथी में लासा होता है जो पाचन से संबधित हर रोग को दूर कर देता है। यह डायरिया और हार्ट बर्न आदि को दूर करती है। इसके अलावा अगर मेथी के दाने को मठ्ठे के साथ मिला कर पिया जाए तो अल्‍सर और एसीडिटी में लाभ होता है। कुछ मेथी के दाने सुबह खाने से पेट के कीडे मरते हैं।

8. पेट के छाले/अल्सर : पेट के छाले ठीक करने के लिए मेथी का उपयोग–पेट के छाले ठीक करने के लिए भी मेथी एक अच्छा उपाय है। इसके लिए दो चम्मच पीसी हुयी मेथी एक कप पानी में उबाल कर मेथी का काढ़ा बना लें. अब इस काढ़े को पीए. इससे पेट के छाले कम होने लगेंगे। पाचन उपचार- डायरिया और हार्टबर्न के अलावा मेथी के रस से पेट और आंत की सभी समस्‍याएं दूर होती हैं। अगर आप अल्‍सर और एसिडिटी को ठीक करना चाहते हैं तो मेथी और मठ्ठे को घोल कर पीएं। सिर्फ यही नहीं अगर आप रोज़ सुबह खाली पेट कुछ मेथी के दानें खाएगें तो पेट के सभी रोग दूर होगें।

9. आँतों के कैंसर से बचाव : मेथी में कैंसर को मिटाने के गुण होते है। मेथी में पाया जाने वाला डिओसजेनिन नामक तत्व आँतों के कैंसर से बचाव करने में सक्षम होता है। इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले सैपोनिन , म्यूसिलेज , पेक्टिन आदि तत्व आँतों के म्युकस मेंब्रेन की रक्षा करते है। इस तरह आंतों पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव से मुक्ति दिलाकर यह कैंसर होने से बचाती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट्स के कारण फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से भी बचाव संभव है।

10. मोटापा : मेथी के दानों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। खाली पेट मेथी दानों को चबाने से एक्सट्रा कैलरी बर्न होती है। सुबह दो गिलास मेथी का पानी पीने से मोटापा दूर होता है। मेथी का पानी बनाने क लिए एक बड़ा चम्मच मेथी के दानों को दो गिलास पानी में रातभर भिगो दें और सुबह इसे छानकर पी लें। 
किडनी भी स्वस्थ : मेथी का पानी  पीने से किडनी भी स्वस्थ होती है।

11. दर्द निवारक : वात रोग, बुखार, गैस को दूर करने के लिए मेथी का उपयोग–शरीर की अनेक समस्याओं को दूर करने के लिए मेथी बहुत ही फायदेमंद होती है. वात रोग, बुखार तथा गैस की समस्या से निपटने के लिए थोड़ी मेथी के दाने लें. अब इन दानों को पीस कर इनका चूर्ण बना लें. इसके बाद इस चूर्ण को एक गिलास छाछ में डालकर पी लें. इससे इस सभी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा. मेथी से करें घुटनों का दर्द कम–घुटनों का दर्द लोगों को काफी परेशान करने वाला दर्द होता है. इस दर्द को समाप्त करने के लिए मेथी दाने को पीस कर बारीक़ चूर्ण बना लें. अब इस चूर्ण को रोजाना सुबह पानी के साथ खाये. इससे घुटनों का दर्द कम होने लगता है.

12. आँखों के काले घेरे : मेथी से आँखों के नीचे का कालापन हटाए–कई बार उम्र बढ़ने या कोई अन्य समस्या होने के कारण हमारी आँखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं. जिसके कारण चेहरा भी बेजान लगने लगता है. इस समस्या को दूर करने के लिए मेथी के दानों को पीस कर उसका पेस्ट बना लें. अब इस पेस्ट को अपने आँखों के नीचे कालेपन पर लगाए. इससे फायदा होगा.
13. बाल बढ़ाने के लिए : बालों को लम्बा करने के लिये मेथी का प्रयोग–लम्बे तथा घने बाल हर किसी को अच्छे लगते हैं. बालों को लम्बा करने के लिए मेथी भी बहुत फायदेमंद होती है. इसका प्रयोग करने के लिए इस के दानों को रात भर पानी में भिंगोकर रख दें. अब सुबह उसे पीसकर बालों में लगाए तथा कुछ देर बाद बालों को धो दें. इससे बाल कुछ समय बाद आपको लम्बे लगने लगेंगे।

14. खांसी और श्वांस : खाँसी से आराम पाने के लिए करें मेथी का प्रयोग–मेथी का सेवन करने से गला साफ होता है. खांसी की समस्या को ठीक करने के लिए मेथी के कुछ दानों को खायें. जिससे खांसी या श्वांस सम्बन्धी समस्याएं कम होने लगती हैं। 

15. मुंह के छाले : मुंह के छाले ठीक करने के लिए मेथी का प्रयोग–मुंह के छालों को कम करने के लिए सबसे पहले मेथी के दानों को पाने में उबाल लें. अब इस पानी से कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले कम होने लगेंगे। 

16. पथरी : पथरी के इलाज में भी मेथी फायदा करती है। इस जादुई औषधि से पथरी पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है।

17. यौन शक्ति/सेक्स पावर : एक सर्वे के मुताबिक मेथी सेक्स पावर को भी बढ़ाने में सक्षम है। इस सर्वे के दौरान मेथी के इस्तेमाल से लोगों की सेक्स क्षमता में एक चौथाई का इजाफा हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक इंडियन करी में मेथी डाली जाती है। यह सीधे आदमियों के सेक्स हार्मोन्स को बढ़ाने का काम करती है। दूसरे अर्थों मे मेथी के सेवन से सेक्स पावर बढती है। इसलिए मेथी का सेवन आपकी यौन क्षमता में अतिशय वृद्धि करता है। यदि मेथी के कुछ दाने रोज लिए जाएं तो मानसिक सक्रियता बढ़ती है। पुरुषों में होने वाली लिंग उत्थान की समस्या इससे हल हो सकती है। इसके अलावा यह टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में इजाफा करके अन्य समस्या को भी ठीक करने में मदद करती है। रात को सोते समय आधा चम्मच पिसा हुआ मेथी दाना तथा आधा चम्मच धनिया पाउडर मिलाकर गर्म दूध के साथ नियमित एक महीने लेने से पुरुषों में यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। ब्रिसबेन स्थित आणविक चिकित्सा केंद्र के अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि भारत में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली मेथी पुरुषों की कामेच्छाओं को काफी अच्छे स्तर तक बढ़ाने में सक्षम है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है।

18. गठिया : यह वात के कारण जॉइंट्स में होने वाले दर्द से तथा गठिया रोग से मुक्ति दिला सकती है। एक चम्मच पिसा हुआ मेथी दाना सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ नियमित लेने से जॉइंट पैन में बहुत आराम आता है। मेथी के लडडू (मेथी, आटा और गुड़ से बनाये जाते है) खाने से भी जोड़ों का दर्द नहीं सताता है। टूटी हुई हड्डी इसके उपयोग से जल्दी जुड़ती है।

19. मेनोपॉज (Menopause=रजोनिवृत्ति) : मेनोपोज़ के समय स्त्रियों को कई तरह की परेशानियां होती है जैसे डिप्रेशन, मूड बदलना, क्रेम्प आना, रात को बहुत पसीना आना आदि। मेथी के उपयोग से इनमे कमी हो सकती है। क्योंकि इसें स्त्री हार्मोन इस्ट्रोजन जैसे तत्व होते है। इसके अलावा इससे स्त्रियों को होने वाली अन्य हार्मोन संबंधी परेशानियां भी कम होती है।

20. गले की खराश (Sore throat) : मेथी में पाया जाने वाला म्यूसिलेज नामक तत्व गले की खराश और कफ आदि में आराम दिलाता है। दो कप पानी में दो चम्मच दाना मेथी डालकर उबाल लें। इसे छानकर इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर पियें। इससे गले की खराश, जुकाम, कफ आदि में आराम मिलता है। मेथी उबाल कर छाने हुए पानी से कुल्ला करने से मुँह की दुर्गन्ध मिटती है।

21. बालों के लिए : बालों के लिए मेथी कंडीशनर का काम करती है। इससे रुसी में भी आराम मिलता है। बालों का गिरना कम हो जाता है। दाना मेथी पाउडर को पानी में एक घंटे भिगोकर, बालों की जड़ों में लगा लें। आधा घंटे बाद धो लें। इससे बालों को ये सारे लाभ मिल जाते है। या मेथी दाना नारियल के तेल में उबालकर छान कर रख लें। इस तेल की नियमित मालिश करने से बाल घने और मुलायम होते है।

22. औरतों के ल‌िए मेथी का सेवन (Fenugreek Intake for Women:) : वैसे तो मेथी का सेवन दमा से लेकर कामेच्छा तक, कई मामलों में फायदेमंद है, लेकिन महिलाओं के लिए इसका सेवन खास वजह से भी जरूरी है। चाहे मेथी का सेवन साग के रूप में हो या फिर दाने के तौर पर, महिलाओं के लिए मासिक चक्र से जुड़ी समस्याओं के उपचार में यह काफी फायदेमंद माना जाता है।

(1) पीरियड्स में : मेथी में सेपोनिन्स और डायोसजेनिन नामक दो ऐसे तत्व हैं जो शरीर में स्टेरॉयड्स (Steroids=Steroids are synthetic hormones designed to treat medical ailments…) व एस्ट्रोजन (What Is Estrogen? The hormone that controls a woman's monthly cycle, estrogen, gets a lot of attention in women's lives, but it is actually a hormone that affects both men and women.) की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से पीरियड्स के दौरान पड़ने वाले क्रैंप और पेट दर्द में आराम मिलता है।
(2) गर्भावस्था में : इसमें आयरन की मात्रा अधिक है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन जच्चा-बच्चा की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।
(3) सेक्स की इच्छा बढ़ाता है : मेथी में मौजूद सेपोनिन्स और डायोसजेनिन शरीर में सेक्स हार्मोन बढ़ाते हैं, जिससे महिलाओं की कामेच्छा बढ़ती है।
(4) मेनो़पॉज में : मेथी में मौजूद डायोसजेनिन और आइसोफ्लेवोन्स मेनोपॉड के दौरान महिलाओं के मूड को नियंत्रित करने में मददगार माना जाता है।
(5) हार्मोनल बैलेंस : मेथी में मौजूद डायोसजेनिन महिलाओं के शररीर में हार्मोनल संतुलन बनाए रखता है। इससे हार्मोन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।

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कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
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Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

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सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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के अनुसार औषधियां बुखार बेल बेल – Bael बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भय भस्मक रोग भावनात्मक भूख भूमि आंवला/भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भोजनलीवर मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्दाना मलेरिया (Malaria) मस्तिष्क मस्से-WARTS महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईग्रेन (आधासीसी)-Migraine माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक-धर्म मासिकस्राव मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी यकृत यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम योग विज्ञापन योन योनि योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूसी मोटापा रेचक रोग प्रतिरोधक लकवा लक्ष्मी लंच लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाभ लिंग लीवर लीवर-Lever लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्यूकोरिया वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra विलायती नीम विष विषखपरा वीर्य वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन-Marital वैश्यावृति व्यायाम शंखपुष्पी शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शहद शहद-Honey शारीरिक शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुगर शोथ श्योनाक-Oroxylum indicum श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea षड़यंत्र संकुचन संक्रमण संखाहुली संतरा-Orange संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सिर दर्द सिरदर्द सिरोसिस सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वास्थ्य हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार-Night Jasmine हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन-Masturbation हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हैजा 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