नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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Tuesday, January 24, 2012

आंवला


आंवला एक कसैला स्वाद वाला अत्यन्त गुणकारी पोसक शीतल विटामिन सी से भरपूर वृद्धावस्था को रोकने में समर्थ धातृ फल है, आयुर्वेद में आँवले का भरपूर प्रयोग किया जाता है आकर में बड़ा , बेदाग और हलकी-सी लाली लिए हुए हो, वह आँवला सबसे उत्तम होता है। एक आँवला एक अंण्डे से अधिक बल देता है। एक आँवले में विटामिन- सी की मात्रा चार नारंगी और आठ टमाटर या चार केले के बराबर मिलता है। इसलिए यह शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति में महत्वपूर्ण है। यह फल पितनाश्क होने के कारण पित-प्रधान रोगों की प्रधान औषधि है। यह रक्तवाहिनियों के विकारों को नष्ट करने में सक्षम है। यह फल मधुरता और शीतलता के कारण पित को शान्त करता है आँवले में कई तरह के विटामिन होते है आँवले में कैलोरी, प्रोटीन, कैल्सियम, लोहा, विटामिन, थायोमिन, रिबोफ्लोविन, नियासिन, विटामिन-सी जल, कार्बोहाईड्रेट खनिज लवण रेशा वसा और फास्फोरस भरपूर मात्र में होता है।




[दाम्पत्य सुख को समझने और भोगने के इच्छुक हर एक स्त्री और पुरुष को पढने योग्य अति महत्वपूर्ण और उपयोगी जानकारी प्रदान करने वाला एक पढने योग्य आलेख!-"अतृप्त दाम्पत्य कारण एवं निवारण!" ]
  1. आंवला ताजा व सुखा दोनों रूप में मिलता है हो सके तो ताजा आंवला इस्तेमाल करे, वरना धूल (मिट्टी)रहित शुष्क स्थान पर छाया में सुखा कर प्रयोग करे, जिससे विटामिन सी कम से कम नष्ट होता है। आंवलों की सुरक्षित अवधि एक साल मानी गयी है। उसके बाद इसके गुणों में कमी आने लगती है। आंवला तीनो दोषों (वाट पित कफ) को संतुलित करता है। यह पाचक, अरुचि नाशक वमन में लाभकारी है। यह नाड़ी तंत्र व इन्द्रियों को ताकत देने वाला पोष्टिक रसायन है।
  2. अमल्पित, रक्तपित, अजीर्ण और अरुचि की सफल ओषधि है। गर्भवती स्त्रियों के वमन मितली के लिए आंवला अच्छी व निरापद ओषधि है। पेट की गैस पेट का शूल, कब्ज, चक्कर आना और मन्दाग्नि के लिए अच्छी दवा है।
  3. तीन ग्राम आंवला दिन में दो या तीन बार लेने से अत्यधिक अम्लपित से हुई बिमारियों को 15 दीन में आराम होता है। विटामिन सी की कमी से उत्पन स्क्रीवी नामक रोग होता है, जिससे कमजोरी चिडचिडापन मसूडो का फूलना व पाचन तंत्र का ख़राब होना हड्डियों का स्वयं से टूटना शुरू हो जाता है। इस स्थिति में रोगी को 100 मिलीग्राम विटामिन सी देना जरुरी होता है जो आंवले में पर्याप्त मात्र में होता है। 10 ग्राम आंवले में 92 मिलीग्राम विटामिन सी होता है|
  4. आंवला चूर्ण तीन से दस ग्राम और आंवला का रस 25 ग्राम तक दिन में दो बार लिया जाना चाहिए। यकृत की कमजोरी आना या पीलिया होने पर आंवले की चटनी को शहद के साथ सुबह शाम देने से रोग ठीक होता है|
  5. आंवले का रस व मिश्री या शहद सामान मात्रा में दिन में दो बार लेने से अम्लपित का रोग ठीक होता है। शाम को 5 ग्राम आंवला पानी में भिगो कर रख दे सुबह 100 ग्राम दूध के साथ 1 माह तक लेने से पाचन  सम्बन्धी सभी रोग ठीक होते है।
  6. आंवला गुड या दही के साथ लेने से रक्तपित भी ठीक होता है।
  7. आँवले के नियमित सेवन से नेत्रज्योति और स्मरणशक्ति बढती है। आंवले में सकसीनिक नामक अम्ल होता है, जो बुढ़ापे को रोकता है। पुनः यौवन शक्ति प्रदान करता है। इसका नियमित सेवन वृद्धावस्था को भगाता है।
  8. आंवला कफ को बहार निकलता है। यह तवचा, स्नायु तंत्र सम्बन्धी रोग ठीक करता है।
  9. सौन्दर्य को बढाता है। त्वचा के दाग धब्बे मिटाता है। समरण शक्ति को बढाता है मनुष्य के दिमाग को शीतलता प्रदान करता है और मन को शान्त रखता है।
  10. इसके नियमित सेवन से खून साफ होता है। ख़राब तत्वों को बहार धकेल कर नया खून बनता है और आँवला रक्‍त की कमी को दूर करता है। यह गर्भवती महिला के लिए तथा जन्म लेने वाले बच्चे के लिए अमृत सामान है।
  11. उच्च रक्तचाप में मधुमेह के रोगीओं के लिए, ह्रदय रोग से बचाव के लिए कोलेस्ट्रोल तथा मस्तिस्क की निर्बलता के लिए नेत्र ज्योति बढाने के लिए बहुत गुणकारी है।
  12. ह्रदय की बेचैनी में, दिल की धड़कन, मेदा, रक्तचाप, दाद आदि में लाभदायक है।
  13. आँवला पाउडर 1 चम्मच दो बार पानी या दूध के साथ लेने से मधुमेह में लाभ होता है।
  14. आयुर्वेद में पेट सम्बन्धित रोगों के लिए आँवले को रामबाण माना गया है।
  15. आँवले के चूर्ण को शहद के साथ मिला कर चाटने से पेट व गले की जलन, खाना न पचना, खट्टी डकार, गैस व कब्‍ज आदि रोग दूर होते हैं। अपच, भूख न लगना, गैस, एसिडिटी और सबसे मुख्य रोग कब्ज़ और कब्ज़ ही सभी बीमारीयों की जड़ होती है, जिसमे बवासीर, वात प्रकोप, एसिडिटी, गैस और जोड़ों का दर्द आदि बीमारीयां होती है |
  16. कब्ज़ में आँवला रात को एक चम्मच पिसा हुआ पानी या दूध के साथ लेने से सुबह शौच साफ़ आता है, कब्ज़ नहीं रहती| इससे आंते और पेट हलकी और साफ़ रहता है |
  17. विशेष आंवला अनेक रोगों को नष्ट करने वाला पोषक, धातुवर्द्धक और रसायन है
  18. विशेष : इसे पोषण के लिए सुबह दूध या पानी के साथ व रेचक के लिए (पेट साफ़ करने के लिए) शाम को गुनगुने दूध या पानी के साथ हर रोगी और स्वस्थ व्यक्ति ले सकता है और पूरी जिन्दगी ले सकता है। क्योंकि आंवला निरापद है|
  19. आंवले में उपस्थित तत्वों का विवरण
    तत्वमात्रा
    प्रोटीन0.5 %
    वसा0.1 %
    रेशा3.4 %
    खनिज द्रव्य0.7 %
    कार्बोहाइड्रेट14.1 %
    पानी81.2 %
    विटामिन-"C”लगभग 1/2 ग्राम
    कैल्शियम0.05 %
    फास्फोरस0.02 %
    लोहालगभग 1 ग्राम का 4 भाग/100 ग्रा

    विभिन्न भाषाओं में आंवला का नाम
    भाषानाम
    हिन्दीआंवला, आमला, आंवरा।
    अंग्रेज़ीएमब्लिक माइरोबेलन, इंडियन गोसबेरी।
    संस्कृतआमलकी, धात्री, शिवा।
    मराठीआंवली, आंवलकांटी, आंवला।
    गुजरातीआंवला, आमला।
    बंगालीआमलकी, आमला, आंगला।
    तेलगूअसरिकाय, उशीरिकई।
    कन्नड़निल्लकाय, नेल्लि।
    द्राविड़ीनेल्लिक्काय्, अमृत फल, वयस्था।
    अरबीआमलन्।
    लैटिनएमब्लिका ऑफिसिनेलिस।

जी हां ये आंवला ही है, जो गरीब व अमीर सभी को सहज उपलब्ध है व बच्चे से बूढे तक सभी के लिये उपयोगी ! क्यों न ऐसे समय में जब आंवले का ही मौसम हो, इसके गुणो पर भी चर्चा कर ली जाये ! आंवला प्रायः भारतवर्ष में सभी जगह पाया जाता है। इसका वृक्ष प्रायः 20 से 25 फ़ुट तक ऊंचा होता है। पत्ते इमली के पत्तों की तरह होते हैं।

जंगली आंवले का आकार छोटा होता है तथा यह कुछ कठोर होता है। लेकिन बाग बगीचों में लगाया हुआ आंवला आकार में बडा व गूदेदार होता है। अक्टूबर से लेकर अप्रैल तक आंवले का फ़ल प्राप्त होता है।

आंवले के फल में संतरे के रस से 20 गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है। आंवले में सभी रोगों को दूर करने की शक्ति है। आंवला युवाओं को यौवन प्रदान करता है व बूढों को युवाओं जैसी शक्ति देता है। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।

इसे चटनी, अचार, मुरब्बा, शर्बत या कच्चा ही किसी भी रूप में अधिक से अधिक प्रयोग मे लाना चाहिये। 

आंवले के कुछ औषधीय उपयोग निम्न हैं।

1-आंवले के सेवन से आंखों की ज्योती बढती है। सूखा आंवला रात को पानी में भिगो दें व सुबह छानकर इसके पानी से आंखें धोने से नेत्र ज्योति बढती है 

2-आंवले को कूट कर (लगभग २० ग्राम) लगभग आधा किलो पानी में उसे उबालें व धीमी आंच पर दो घंटे तक उस पानी को छानकर आखों में दिन में तीन बार डालने से नेत्र रोग मे लाभ होता है।

3-पीपली आंवला व सौंठ 2-2 ग्राम की मात्रा पीसकर शहद के साथ बार- बार प्रयोग करने से श्वास सम्बन्धी रोग दूर होते हैं।

4-पिसा हुआ आंवला एक चम्मच को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर दिन में दो या तीन बार लेने से खांसी दूर होगी।

5-पिसे हुए आंवले को पानी के साथ फंकी लेकर लगातार लेने से आवाज खुल जायेगी।

6-यदि आखों के आगे अंधेरा छा जाता हो, सिर में जलन हो या बार-बार पेशाब आता हो तो आंवले का रस पानी में मिलाकर सुबह शाम लगातार चार दिन पीने से लाभ होगा।

7-सूखा आवला 30 ग्राम, 10 ग्राम बहेड़ा व 50 ग्राम आम की गुठली की गिरी को पीसकर रात भर लोहे की कढ़ाई मे भिगोकर रखे, बालो पर इसका रोज लेप [करीब एक घंटा ] करने से कम उम्र मे सफ़ेद हुए बाल कुछ ही दिनो मे काले होने लगते है !

8-सूखा आंवला व मिस्री दोनो को पीसकर [समान मात्रा मे] एक-एक चम्मच रोज फंकी लेकर खाने से हार्ट संबंधी सभी रोग दूर होते है!

9-यदि दांत मे दर्द हो तो आंवले के रस मे कपूर मिला कर दांत मे रखने से दांत दर्द कम होता है 1

10-यदि किडनी मे पथरी हो तो मूली के साथ आंवला खाने से लाभ होता है !

11-यदि गरमियो में जी घबराता हो तो व चक्कर आते हो तो आंवले का शर्बत पिये, कमजोरी दूर होगी व आपका इम्यून सिस्टम (Immune System-प्रतिरक्षा प्रणाली) ठीक होगा !
12-सूखा आंवला व काला नमक समान मात्रा मे पीस कर आधा चम्मच पानी से लेने से लूज मोशन बंद हो जाते है!

13-नित्य प्रति आंवले का मुरब्बा खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है !

14-आंवला की गुठली को जला कर उसकी भस्म नारियल के तेल मे मिलकर किसी भी प्रकार की खुजली मे लगाए लाभ होगा !

15-शरीर मे किसी स्थान विशेष मे कट जाने पर रक्त निकल रहा हो तो तत्काल आंवले का रस लगाने से रक्त निकालना बंद हो जाएगा ! 

16-आंवले का नित्य प्रयोग करने से सिर के बाल गिरने बंद हो जाते है !

17-आंवला खाने से मसूड़े स्वस्थ होते है व स्कर्बी नमक रोग दूर होता है !

18-आंवले का नित्य प्रयोग हमारे शरीर के टाक्सिन्स दूर करता है जिससे शरीर धीरे-धीरे पूर्णतया स्वस्थ हो जाता है !

19-आंवले का उबटन [पैक] चेहरे व बालो मे लगाने से चेहरे व बालो की सुंदरता की वृद्धि होती है !

20-ताजे आंवले का रस {1ओंस } प्रातः काल खाली पेट 15 दिन तक लगातार लेने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते है!

21-सूखे आंवले को बारीक पीस कर एक-एक टी स्पून सुबह व शाम दोनों टाईम गाय के दूध की लस्सी या गाय के दूध के साथ लेने से खूनी बाबासीर मे लाभ होता है !

22-रात को एक चम्मच पिसा आंवला या आंवले का रस गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट की कब्ज संबंधी समस्याए दूर होती है !

आंवले का प्रयोग सारी उम्र लगातार भी कर सकते है, इसके प्रयोग से कभी कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता, यह मनुष्य को मिला प्रकृति का एक अनुपम उपहार है!-प्रस्तुतकर्ता Janki Oli, शनिवार, 7 जनवरी 2012


अमृत फल आंवला

आंवले के निरंतर प्रयोग से बाल टूटना, रू सी, बाल सफेद होना रूक जाते हैं। नेत्र ज्योति सुरक्षित रहती है। दांत मजबूत होते हैं ।

आंवला आयुर्वेद और यूनानी पैथी की प्रसिद्ध दवाइयों, च्यवन प्राश, ब्राह्म रसायन, धात्री रसायन, अनोशदारू , त्रिफला रसायन, आमलकी रसायन, त्रिफला चूर्ण, धा˜यरिष्ट, त्रिफलारिष्ट, त्रिफला घृत आदि के साथ मुरब्बे, शर्बत, केश तेल आदि निर्माण में प्रयुक्त होता है। रक्तवर्धक नवायस लौह, धात्री लौह, योगराज रसायन, त्रिफला मंडूर भी आंवले से बनाए जाते हैं। मानव शरीर में सिर्फ श्वेत कुष्ठ [ल्यूकोडर्मा] में आंवला उपयोग में नहीं लिया जाता। इसके अलावा सिर से पैर तक का कोई ऎसा रोग नहीं जहां आंवला दवा या खुराक के रू प में उपयोगी न रहता हो। 

भारतीय गृहिणी की रसोई में भी आंवला, चटनी, सब्जी, आचार, मुरब्बे के रू प में सदा से विराजमान है। बढ़ती उम्र के प्रभावों को धीमा करने का अद्भुत गुण इसे "रसायन" बनाता है। इसके निरंतर प्रयोग से बाल टूटना, रू सी, सफेद होना रूक जाते हैं। नेत्र ज्योति सुरक्षित रहती है। दांत मजबूत बने रहते हैं तथा नेत्र, हाथ पांव के तलुओं, मूत्रमार्ग, आमाशय, आंतों तथा मलमार्ग की जलन समाप्त हो जाती है। इसके प्रयोग से इम्युनिटी पावर सुरक्षित रहती है। बार-बार होने वाली बीमारियों से बचाव करने वाला आंवला विटामिन "सी" का सबसे बड़ा भण्डार है। इसका विटामिन "सी" पकाने, सुखाने, तलने, पुराना होने पर भी नष्ट नहीं होता। आजकल आंवला+ पालक+ गाजर का मिश्रित रस जूस बेचने वालों व पीने वालों का सर्वप्रिय स्वास्थ्यवर्धक पेय है।

आयुर्वेद के विद्वानों एवं ग्रंथों में वनौषधियों में हरड़ और आंवले को सर्वश्रेष्ठ माना है। इसमें हरड़ रोगनाशक तथा आंवला सर्वोत्तम स्वास्थ्य रक्षक माने गए हैं। आंवले में खट्टापन एवं कसैलापन प्रधान रू प से है पर इसमें मिठास, कडुवापन और खारापन भी गौण रूप से विद्यमान है।

आयुर्वेद ग्रंथों के अनुसार आंवला कब्जकारक, मूत्रल, रक्त शोधक, पाचक, रूचिवर्धक तथा अतिसार, प्रमेह, दाह, पीलिया, अम्ल पित्त, रक्त विकार, रक्त स्त्राव, बवासीर, कब्ज, अजीर्ण, बदहजमी, श्वास, खांसी, वीर्य क्षीणता, रक्त प्रदर नाशक तथा आयुवर्धक है। 

इसके घरेलू प्रयोग

अतिसार: कच्चा आंवला पीस कर रोगी की नाभि के चारों ओर कटोरी जैसी बनाकर इस नाभि में अदरक का रस भर दें।

हिचकी: आंवला, कैथ का गूदा, छोटी पीपर का चूर्ण, शहद से चटाएं तो हिचकियां मिट जाएंगी।

अजीर्ण: ताजा आंवला, अदरक, हरा धनिया मिलाकर चटनी बनावें इसमें सेंधा नमक, काला नमक, 

हींग, जीरा, काली मिर्च मिला चटावें। डकारें आएंगी, भूख खुलेगी, हाजमा बढ़ेगा।

स्त्रियों का बहुमूत्र [सोमरोग]: आंवले का रस, पका हुआ केले का गूदा, शहद व मिश्री चारों मिलाकर चटाएं।

मूत्र कष्ट: आंवले का 25 ग्राम ताजा रस, छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण बुरक कर पिलाएं। मूत्र आने लगेगा।

बवासीर: आंवले पीस कर पीठी को मिट्टी के बर्तन में लेप कर दें। इसमें गाय की ताजा छाछ भर रोगी को पिलाएं।

मुंह के छाले और घाव: आंवले के पत्तों के काढे से दिन में 2 से 3 बार कुल्ले कराएं।

श्वेत प्रदर: आंवले की गुठली फोड़ कर निकाले बीजों का चूर्ण पानी से पीस कर शहद व मिश्री मिला पिलाएं।

नेत्रों के रोग: आंवला छिलका दरदरा कूट कर पानी में भिगोकर रखें। इसे कपड़े से [साफ] छान कर दिन में तीन बार 2-2 बूंद आंखों में टपकाएं।

-वैद्य हरिमोहन शर्मा, Source : पत्रिका


आंवले गुणों का खजाना है और यह हार्ट व डाइजेस्टिव सिस्टम लेकर खूबसूरती तक को निखारता है। जानते हैं, इसकी खूबियों के बारे में। 

-अगर आप अपनी आईसाइट इंप्रूव करना चाहते हैं, तो आंवले के जूस में शहद मिलाकर पीएं। यह मोतियाबिंद की परेशानी में भी फायदेमंद रहता है। 

-आंवले में क्रोमियम काफी मात्रा में होता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है। दरअसल, क्रोमियम इंसुलिन बनाने वाले सेल्स को ऐक्टिवेट करता है और इस हॉर्मोन का काम शरीर में ब्लड शुगर को कंट्रोल करना होता है। 

-दिल को सेहतमंद रखने के लिए रोजा आंवला खाने की आदत डालें। इससे आपके दिल की मांसपेशियां मजबूत होंगी, जिससे दिल शरीर को ज्यादा व साफ खून सप्लाई कर पाएगा। बेशक इससे आप सेहतमंद रहेंगे। 

-आंवले में एंटि-बैक्टीरियल क्वॉलिटीज होती हैं, जो बॉडी की इम्युनिटी पावर बढ़ाकर उसे इंफेक्शंस से लड़ने की स्ट्रेंथ देती हैं। 

-अगर आपका पेट खराब है, तो आंवला खाएं। दरअसल, लेक्सेटिव क्वॉलिटीज की वजह से यह डायरिया जैसी परेशानियों को दूर करने में बहुत फायदेमंद है। 

-आंवले को कई हेयर प्रॉडक्ट्स में भी डाला जाता है। दरअसल, देखने में आया है कि आंवला बालों को मजबूत बनाता है, इनकी जड़ों को स्ट्रॉन्ग करता है और बालों का झड़ना भी काफी हद तक रोकता है। 

-एक रिसर्च से पता चला है कि खाना खाने से पहले आंवले का पाउडर, शहद और मक्खन मिलाकर खाने से भूख अच्छी लगती है। 

-आपको एसिडिटी की समस्या है, तो एक ग्राम आंवला पाउडर और थोड़ी-सी चीनी को एक गिलास पानी या दूध में मिलाकर लें। इसे ड्रिंक को दिन में दो बार लेने से एसिडिटी की प्रॉब्लम तभी दूर हो जाएगी। 

-आवंले में विटामिन सी, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन और विटामिन बी बहुत होते हैं। इसलिए इसे अपनी डाइट में शामिल करना एक हेल्दी ऑप्शन है। 

-आंवला खाने को अच्छी तरह पचाने में मदद करता है, जिससे आपको खाने के तमाम न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं।


जो मनुष्य आंवले का रस १० से १५ मि.ली., शहद १० से १५ ग्राम, मिश्री १० से १५ ग्रामऔर घी २० ग्राम मिलाकर चाटता है तथा पथ्य भोजन करता है, उससे वृद्धावस्था दूररहती है l इस प्रयोग से शारीर में गर्मी, रक्त, चमड़ी तथा अम्लपित्त के रोग दूर होते हैं और शक्ति मिलती है l 

आंवला घृतकुमारी के संग पीने से पित्त का नाश होता है l 

१५-२० मि.ली. आंवलों का रस तथा एक चम्मच शहद मिलाकर चटाने से आँखों की रोशनी में वृद्धि होती है l 

सर्दी या कफ्फ की तकलीफ हो तो आंवले के १५-२० मि.ली. रस या १ ग्राम (पाँव चम्मच) चूर्ण में १ ग्राम हल्दी मिलाकर लें l 

१-२ आंवले और १०-२० ग्राम काले तिल रोज़ सुबह चबाकर खाने से स्मरणशक्ति तेज़ होजाती है l 

आंवले का रस और शुद्ध शहद सामान मात्रा में लेकर मिला लें l इस मिश्रण को प्रतिदिनरात के समय आँखों में आंजने से आँखों का धुंधलापन कम हो जाता है l इस मिश्रण को पीने से भी फायदा होता है l 

मैले दांत चमकाने हों तो दांतों पर आंवले के रस से मालिश करें l आंवले के रस मेंसरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों पर हलकी मालिश करने से भी बहुत फायदा होता है l 

२५० ग्राम आंवले के चूर्ण में ५० ग्राम लहसुन पीसकर यह मिश्रण शहद में डुबाकर पंद्रहदिन तक धूप में रखें l उसके पश्चात् हर रोज़ एक चम्मच मिश्रण खा लें l यह एक उत्तमह्रदय-पोषक है l यह प्रयोग ह्रदय को मज़बूत बनाने वाला एक सरल इलाज है l 

रक्तचाप, ह्रदय का बढ़ना, मानसिक तनाव (डिप्रेशन), अनिद्रा जैसे रोगों में २० ग्रामगाजर के रस के साथ ४० ग्राम आंवले का रस लेना चाहिए l 

आधा भोजन करने के पश्चात् हरे आंवलों का ३० ग्राम रस आधा ग्लास पानी मेंमिलाकर पी लें l फिर शेष आधा भोजन करें l यह प्रयोग २१ दिन तक करें l इससे ह्रदय वमस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा स्वास्थ्य सुधरता है l 

सूखे आंवले तथा सुखा धनिया सामान मात्रा में लेकर रात को कुल्लढ में इक्कठे भिगो दें lसुबह छान के मिश्री मिलाकर पियें l इससे पेशाब की जलन दूर होती है तथा मूत्ररोगोंमें लाभ होता है l 

दो चम्मच कच्चे आंवले का रस और दो चम्मच कच्ची हल्दी का रस शहद के साथ लेने से प्रमेह मिट जाता है l कुछ दिनों तक प्रयोग करने से मधुमेह नियंत्रण में आजाता है तथा सभी तरह के मूत्र-विकारों से छुटकारा मिल जाता है l 

आंवले का चूर्ण गौमूत्र में घोंटकर शरीर पर लगाने से तुरंत पित्तियां दब जाती हैं l 


आंवला एक ऎसा फल है जिसमें अम्ल, क्षार, लवण, तिक्त, मधु और कषाय गुण एक साथ होते हैं। यह त्रिदोष से बचाता है। आंवला शरीर में षट्रसों की पूर्ति कर रोग प्रतिरोधक शक्ति प्रदान करता है। चरक संहितानुसार आंवले के 100 ग्राम रस में 921 मिलीग्राम और 100 ग्राम गूदे [फल का चूरा] में 720 मिलीग्राम विटामिन सी और अन्य शरीर के लिए आवश्यक खनिज तžव पाए जाते हैं। 

रोगों के सरल उपचार

प्रतिदिन आंवले का रस और शहद पचास-पचास ग्राम सुबह तथा रात सोते समय लेने से पेट का मोटापा दूर हो जाता है।

हाई ब्लडप्रैशर, एसिडिटी, दृष्टि दोष, मौसमी बुखार, सिर दर्द, पित्त शूल, वायु विकार, अनिद्रा, उल्टी आना, , बार-बार पेशाब जाना, प्रोस्टेट ग्रंथि के विकार, हकलाना, तुतलाना, पेशाब में जलन, ह्वदयशूल [पित्त दोष] आदि रोगों में पचास-पचास ग्राम आंवला रस और शहद मिलाकर रोजाना सोते समय लेने से रोग विकार दूर होकर शरीर स्वस्थ बन जाता है।

बाल झड़ना : आंवला रस और नारियल तेल बराबर मात्रा में मिलाकर बालों की जड़ों में मालिश करें।

सूखी खांसी में भी आंवला रस और शहद फायदेमंद है।

बवासीर [मस्से], स्वप्न दोष, स्मरण शक्ति का कमजोर होना, औरतों में श्वेत प्रदर , सोमरोग [बूंद-बूंद पेशाब आना मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहना] आदि रोगों में भी पूर्व में बताए अनुसार शहद और आंवला रस का सेवन हितकारी है।

नाक से खून आना : नाक से खून आने पर नाक में आंवले के रस की दो बूंद डालें तथा आंवले को पीस कर सिर पर लेप करें।

आंवला ताजा हो या प्राकृतिक रूप से सूखा उसके गुण सदैव विद्यमान रहते हैं।

आंवले के रस को कांच एवं प्लास्टिक के बर्तन में रख सकते हैं।

हरा ताजा आंवला नहीं मिलने पर सूखे आंवले का चूर्ण बनाकर सुबह और शाम दूध या ताजा पानी के साथ लेना चाहिए।- नन्दलाल डागर, Source : Patrika,


आंवले को आयुर्वेद में गुणों का फल माना गया है। चाहे आवंला स्वाद में कड़वा और कसैला हो लेकिन आंवला विटामिन का एक बहुत अच्छा स्त्रोत है। इसीलिए हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस फल को पूज्यनीय माना गया है। इसकी छांव में बैठकर खाने से भी अनेक रोग दूर होते हैं।

कहते हैं एक आंवले में 3 संतरों के बराबर विटामिन की मात्रा होती है। आवंला खाने से सबसे अच्छा प्रभाव बालों और त्वचा पर पड़ता है। आंवला खाने से लीवर को शक्ति मिलती है जिससे लीवर हमारे शरीर में से विषैले पदार्थों को शरीर में से आसानी से बाहर निकाल देता है।

आंवला हमारे पाचन तन्त्र और हमारी किडनी को स्वस्थ रखता है। आंवला अर्थराइटिस के दर्द को कम करने में भी सहायक होता है। साथ ही आंवले का स्वादिष्ट मुरब्बा ताकत देने वाला होता है। आंवले का चूर्ण मूली में भरकर खाने से मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है। जो लोग स्वस्थ रहना चाहते हैं वो ताजा आंवला का रस शहद में मिलाकर पीने के बाद ऊपर से दूध पियें इससे स्वास्थ अच्छा रहता है। दिन भर प्रसन्नता का अनुभव होता है। आंवले का जूस पीने के भी बहुत से फायदे हैं पेट से जुड़ी सारी समस्याएं मिट जाती हैं। इसके नियमित सेवन से कभी बुढ़ापा नहीं आता है।-Dainik Bhaskar
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आंवला

नोट : काले तिल की पोस्ट में एक आदरणीय पाठक महोदय ने आंवला के बारे में जानना चाहा था ,इसलिए ये लेख मैं आपके सम्मुख रख रही हूँ .यह लेख प्रतिष्ठित पत्रिका कादम्बिनी में दिसंबर २०१० के अंक में प्रकाशित हो चुका है|
आंवला हमारी नस नस में समाया हुआ फल है. हर खासो-आम इसका मुरीद है, लड़कियों के बाल धुलने से लेकर दादी नानी के चटपटे हाज़मा चूर्ण तक में इसकी गहरी पैठ है. बुजुर्ग लोग आज भी कार्तिक का महीना आते ही आंवले का पेड़ खोजने लगते हैं ताकि दिन भर उसी के नीचे बैठकी जमे. बहुत शुभ और गुणकारी माना जाता है कार्तिक के महीने में आंवले का सेवन. इसके पेड़ की छाया तक में एंटीवायरस गुण हैं और गज़ब की जीवनी शक्ति है. कार्तिक के महीने में इस पेड़ के ये दोनों गुण चरम पर होते हैं, अगर आप श्वास की किसी भी बीमारी से परेशान है तो सिर्फ इसके पेड़ के नीचे खड़े होकर ५ मिनट गहरी गहरी श्वासें लीजिये,१०-१५ दिन में ही बीमारी आपका पीछा छोड़ देगी.

इसे अमर फल भी कहते हैं. कहीं-कहीं धात्रीफल और आदिफल के नाम से भी जानते हैं. इसका वैज्ञानिक नाम है-एम्ब्लिका आफीसिनेलिस. इस आमले/आंवले के फल और बीज दोनों ही उपयोगी हैं. इसके फल में प्रोटीन,कर्बोहाईड्रेट, रेशा, वसा, विटामिन-सी, विटामिन बी-१, एस्कार्बिक एसिड, निकोटेनिक एसिड, टैनिन्स, ग्लूकोज, फ्लेविन, गेलिक एसिड और इलैजिक एसिड पाए जाते हैं.इसके बीजों में आलिक एसिड लिनोलिक एसिड और लिनोलेनिक एसिड पाए जाते हैं.
ये एक आंवला हजार बीमारियों को भगाता है, लेकिन वहीँ आंवले का मुरब्बा अगर चूने के पानी में उबाल कर बनाया गया है तो सिर्फ सुस्वादु ही हो सकता है, गुणकारी नहीं. इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि हरा आंवला ही ज्यादा प्रयोग किया जाए. ये चार महीने बाजार में उपलब्ध रहता है. अगर हम चार महीने इसका सेवन कर लें तो शेष आठ महीने तक तो रोग रहित होकर जीवनयापन कर ही सकते हैं.
इसके सेवन का बिलकुल सामान्य और आयुर्वेदिक तरीका कुछ यूं है-
-आप 1 किलोग्राम हरा आंवला लीजिये साथ ही 200 ग्राम हरी मिर्च. दोनों को धो लीजिये. आंवले को काट कर गुठलियाँ बाहर निकाल दीजिये, अब दोनों को ग्राईडर में दरदरा पीस लीजिये (बिना पानी डाले). अब इसमें 100 ग्राम सेंधा नमक मिला दीजिये. इसे परिवार का प्रत्येक सदस्य चटपटी चटनी की तरह मजे से खायेगा. इसी को आप धूप में सुखा कर पूरे वर्ष के लिए सुरक्षित भी रख सकते हैं. जब इच्छा हो दाल या सब्जी में ऊपर से डाल कर खा सकते हैं. हरी मिर्च (कच्ची) हीमोग्लोविन बढाती है और आंवले के साथ उसका मिश्रण सोने में सुहागा हो जाता है. इसका प्रयोग शरीर में एक्टिवनेस को तो 24 घंटे में ही बढ़ा देता है. अनगिनत लाभ हैं. इससे .लीवर मजबूत  हो जाता है.
ल्यूकोरिया के लिए
आंवले के बीजों का पावडर बना लीजिये. एक चम्मच पावडर में आधा चम्मच शहद और थोड़ी सी मिश्री मिला कर सवेरे खाली पेट खाएं. १५ दिनों तक
बुढापा दूर करने के लिए
100 ग्राम आंवले का पावडर और 100 ग्राम काले तिल का पावडर मिलाये. अब इसमें 50 ग्राम शहद और 100 ग्राम देसी घी मिलाएं. एक चम्मच प्रतिदिन सुबह सिर्फ एक महीने तक खाना है.
ज्वर दूर करने के लिए
दो चम्मच हरे आंवले का रस और दो ही चम्मच अदरक का रस मिश्री मिलाकर दिन में दो बार, बस.
मूत्र त्याग में दर्द के लिए
150 ग्राम आंवले का रस लीजिये, बिना कुछ मिलाये पी जाएं, बस दो दिनों तक.
खांसी में
सूखे आंवले के एक चम्मच पावडर में थोड़ा घी मिला कर पेस्ट बना लीजिये, दिन में दो बार चाटिये.
सुगर के मरीजों के लिए
आंवला और हल्दी का पावडर बराबर मात्रा में लीजिये, अच्छी तरह मिक्स कीजिए. जितनी बार भी भोजन करें, उसके बाद एक चम्मच पावडर पानी से निगल लीजिये. सुगर कभी परेशान नहीं करेगी.
हकलाहट हो तो
100 ग्राम गाय के दूध में एक चम्मच सूखे आंवले का पावडर मिला कर लगातार 15 दिन पीयें, आवाज बराबर से निकलेगी और कंठ सुरीला भी होगा.
छाती (सीने) में जलन के लिए
सूखे आंवले का एक चम्मच पावडर शहद मिला कर सुबह चाटिये.
या
एक चम्मच पावडर में दो चम्मच चीनी और दो ही चम्मच घी मिलाकर चाटिये.
पीलिया (जांडिस) में
एक गिलास गन्ने के रस में तीन बड़े चम्मच हरे आंवले का रस और तीन ही चम्मच शहद मिला कर दिन में दो बार पिलाए. १० दिन तक पिलाना बेहतर रहेगा जबकि रोग तो तीन दिन में ही ख़त्म हो जाएगा| Source : Mera Samast

घर का वैद्य है आंवला


आंवले में विटामिन बी, सी, ई पाया जाता है। इसके सेवन से अनेक रोग दूर हो जाते हैं। यह खट्टा, मधुर रस वाला, कटु, कषाय और सारक है। खट्टे पदार्थ का सेवन करने से पित्त की वृध्दि होती है लेकिन खट्टा होने पर भी इसका विपाक मधुर होता है। इसके मधुर, शीतल गुण के कारण पित्त की वृध्दि नहीं होती अपितु पित्त को यह लाभ देता है। इसके सेवन से नेत्रों की ज्योति बढ़ जाती है।
आंवला और असगंध को समभाग लेकर, बारीक चूर्ण बनाकर गाय के दूध के साथ लेने से बल, कांति और वीर्य की वृध्दि होती है। आंवलों के स्वरस में हल्दी का चूर्ण मिलाकर शहद में चाटने से सभी तरह के प्रमेह रोग दूर हो जाते हैं। आंवले का चूर्ण चीनी के साथ खाने से स्त्रियों के प्रदर रोग और बहुमूत्र रोग मिट जाते हैं। आंवले के दो तोला रस में एक पका केला मसलकर, आधा तोला चीनी डालकर खाने से स्त्रियों के बहुमूत्र रोग मिट जाते हैं।
आंवले का रस शहद के साथ सेवन करने से स्त्रियों का योनिदाह शांत हो जाता है। आंवले के चूर्ण को गाय के दूध में मिलाकर रात को सोते समय सिर पर मस्तिष्क के हिस्से में बांधने से बाल बढ़ जाते हैं, मस्तिष्क की गर्मी कम होती है और बार-बार नाक में से होने वाला खून का गिरना बंद हो जाता है। इसके रस में भी घी मिलाकर चाटने से मर्ूच्छा आना बंद हो जाता है। इसके पेड़ के मूल को पानी में घिसकर बिच्छू के डंक पर लगाने से जलन दूर हो जाती है। यदि सूजन में जलन हो तो आंवले के पेड़ के मूल को पानी में घिसकर लगाने से लाभ होता है।
आंवले और हल्दी एक-एक तोला लेकर, कूट कर इसका क्वाथ बनाकर पीने से गुदामार्ग में मूत्रमार्ग का दाह शांत करता है और पेशाब साफ लाता है। आंवले को जलाकर, तिल के तेल में मिलाकर लगाने से खुजली में लाभ मिलता है। आंवला, दारुहल्दी, गिलोय और मुलेठी समभाग लेकर उसका क्वाथ बनाकर, सुबह-शाम दो बार पीने से, अत्यन्त पतला कफ निकलता हो, नाक से भारी मात्रा में कफस्राव होता हो, प्रमेह या प्रदररोग के कारण कुस्राव होता हो तो यह दूर कर देता है। कफस्राव में यह क्वाथ लाभदायक होता है।
हर्र बहेड़ा और सूखा आंवला, इन तीनों के फलों की गुठलियां निकालकर, समभाग लेकर बारीक पीसकर, कपड़े से छान लें। इसे त्रिफला चूर्ण कहते हैं और इस चूर्ण का सेवन कफ और पित्त को मिटा देता है, कब्ज, कोढ़ और प्रमेह रोग को भी यह ठीक कर देता है। अधकूटे त्रिफला चूर्ण को रात में पानी में भिंगोकर रख दें। प्रात: इस पानी को छानकर आंखों पर छिड़कने से आंखों को रोशनी बढ़ जाती है। आंवले के रस में पीपल का चूर्ण डालकर शहद में मिलाकर खाने से कै आनी बंद हो जाती है।
आंवला, हर्र, बहेड़ा, कडुवे नीम की अंतरत्वचा, मामेजक और जामुन की गुठली को समभाग में लेकर, चूर्ण बनाकर, सुबह-शाम लेने से मधुमेह रोग ठीक हो जाता है। आंवले के चूर्ण को आंवले के रस में इक्कीस बार भिगोएं और सुखाएं इसके सेवन से सिर के बाल काले हो जाते हैं और शरीर की कांति के साथ बल की वृध्दि होती है।
ताजे, पके, बड़ा एक किलो आंवले लेकर, बांस या स्टील की सलाख से इसमें खूब छेद बना दें। फिर इसके बाद चूने के निथार वाले पानी में कुछ देर तक रख दें। दो लिटर उबलते पानी में डालकर पका लें। फिर इसे बाहर निकालकर कपड़े से पोंछकर थोड़ा सा सुखा दें। ढाई-तीन किलो चीनी की तीन तारवाली चाशनी में इन आंवलों को डुबो दें, इस तरह से आंवले का मुरब्बा तैयार हो जाता है। यह मुरब्बा दो-तीन वर्षों तक रखा जा सकता है।
प्रतिदिन एक आंवला सुबह खाने से शरीर को बलवान और पित्तशामक होता है। ताजे आंवले के अभाव में पके सुखाये हुए आंवले भिंगोकर प्रयोग करने से भी समस्त लाभ मिल सकता है। आंवले का प्रयोग जनेन्द्रिय संबंधी विकारों को दूर करने में महत्वपूर्ण कार्य करता है आंवले के उचित प्रयोग से स्त्री और पुरुष का असमय आया हुआ बुढ़ापा दूर हो जाता है।-Ranchee Express, 07.12.11

आंवला जूस – How to make Amla Juice at Home



आंवला फल (Indian gooseberry) आइरन और विटामिन सी से भरपूर रस से भरा हुआ प्राकृ्तिक खजाना है. आंवले का जूस रोजाना लेने से पाचन दुरुस्त, त्वचा में चमक, त्वचा के रोगों में लाभ, बालों की चमक बढाने, बालों को सफेद होने से रोकने के अलावा और भी बहुत सारे फायदे हैं.
आंवले का मौसम दिसम्बर से चालू होकर अप्रेल तक रहता है.  दिसम्बर से अप्रेल तक  तो ताजा आंवला जूस ताजा निकाल कर पी सकते हैं.  आंवले के जूस (Amla Juice) को सीजन के बाद प्रयोग करने के लिये आप आंवला जूस को घर में आसानी से निकाल सकते हैं और प्रिजर्व कर सकते हैं

आवश्यक सामग्री - Ingredients for Amla Juice

  • आंवला - 1 कि. ग्राम ( 28 - 30)

विधि - How to make Amla Juice at Home

आंवले को छोटे टुकड़े में काट लीजिये, बीज हटा दीजिये.
आंवले के थोड़े से टुकड़े मिक्सर जार जिसमें मसाला पीसा जाता है, उसमें डालिये और पीसिये, इन टुकड़ों के पेस्ट बन जाने पर थोड़े और टुकड़े जार में डालिये और बिलकुल बारीक होने तक पीस लीजिये. पहली बार थोड़े ही आंवले बारीक पीस लीजिये, इस पेस्ट को साफ सूती कपड़े में डालिये और दबाकर जूस किसी प्याले में छान लीजिये. आंवला पल्प को अलग प्याले में रख लीजिये.
इसके बाद आंवले के टुकडों के साथ निकाला हुआ आंवला जूस भी मिक्सी में डाल दीजिये और आंवले के टुकडों को पीस लीजिये. सूखे आंवले के टुकड़े पीसने के बजाय इन्हें थोडा तरल पदार्थ मिला कर आसानी से पीसा जा सकता है. थोड़ा पहले से निकाला हुआ आंवला जूस मिला देने से यह जल्दी और अच्छी तरह से पिस जायेंगे.
पिसे हुये आंवले और जूस के मिश्रण को कपड़े में डालिये और हाथ से दबाकर सारा जूस निकाल लीजिये, पल्प को पल्प वाले प्याले में रख दीजिये.
सारे आंवले के टुकड़ों के लिये यही तरीका बार बार दुहरा कर जूस निकाल लीजिये. एक किलोग्राम आंवले में लगभग 600 -700 ग्राम तक जूस निकल आता है.
आंवला जूस को किसी कांच या प्लास्टिक के कन्टेनर में भरकर फ्रिज में रख लीजिये. इस आंवला जूस को आप 15 दिन तक प्रयोग कर सकते हैं.

आंवला जूस को प्रिजर्व कैसे करें - How to Preserve Amla Juice

आंवला जूस प्रिजर्व करने के लिये 500 ग्राम आंवला जूस को 500 ग्राम कांच की या प्लास्टिक की बोतल में भरें और इसमें दो चम्मच सोडियम लेक्टेट (Sodium Lactate) डालकर बोतल को अच्छी तरह से हिला दें ताकि सोडियम लेक्टेट (Sodium Lactate) आंवला जूस में भली भांति मिल जाय. प्रिजर्व करने के लिये उतनी ही बड़ी बोतल लें जितना जूस आप प्रिजर्व कर रहे है. जूस की मात्रा से अधिक बड़ी बोतल न लें. इस प्रिजर्व की हुई बोतल को आप फ्रिज में रखकर आठ-दस महीने तक प्रयोग कर सकते हैं.
सोडियम लेक्टेट (Sodium Lactate) आपको खाने के कैमीकल बेचने वाली दुकानों पर आराम से मिल जाता है.
इसके अलावा आप आंवले जूस को आइस ट्रें में जमाकर आंवला जूस क्यूब भी बना सकते है़.

आंवला जूस को कैसे प्रयोग करें - How to use Amla Juice

जब भी आप आंवला जूस प्रयोग करना चाहें तो दो छोटी चम्मच आंवला जूस या एक आंवला जूस क्यूब को एक कप गरम पानी और दो छोटी चम्मच शहद में मिलाईये. यदि आप शहद न लेना चाहें तो आंवला जूस को काला नमक मिलाकर भी पी सकते हैं.

तुरन्त प्रयोग के लिये आंवला जूस कैसे निकालें - How to use Fresh Amla for Juice


दो आंवले के बीज हटाकर छोटे छोटे टुकडे करें और इसे ग्राइंडर में थोड़ा सा पानी डालकर पेस्ट बना लीजिये.  इस पेस्ट को एक कप पानी में मिलाकर छान लीजिये.  इस जूस में दो चम्मच शहद या एक चुटकी काला नमक मिलाकर प्रयोग कर सकते हैं.-निशामधुलिका 
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भोजन के मध्य में आंवले का रस

भोजन के मध्य में अगर आंवले का रस ३०-३५ ग्राम पानी मिलाकर २१ दिन पिया जाए, तो ह्रदय व मस्तिष्क की सारी दुर्बलताएं दूर हो जाएगी । ह्रदय पुष्ट होता है व दिमाग तीव्र होता है
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सर्दियो में आंवले का सेवन

कसैला आंवला भले ही देखने में छोटा हो पर हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी फल है... इसके गुणों के कारण ही इसे अमृतफल कहा गया है... आंवले में विटामिन 'सी' की प्रचुरता होती है और इसमें संतरे से भी लगभग 20 गुना अधिक विटामिन 'सी' होता है... आंवला रक्त साफ करता है, हाजमे को दुरुस्त करता है...मानसिक विकास में सहायता देता है और शरीर को रोगों से मुक्त करता है... आंवला पीलिया, एसिडिटी और तपेदिक में भी लाभप्रद है... अलग-अलग तरह से इसका प्रयोग करने से अलग-अलग बीमारियों में इसके प्रभाव चमत्कारिक होते हैं... एक तोला आंवले का चूर्ण रोज दूध के साथ लेने से रक्त शुद्ध होता है और त्वचा संबंधी रोग दूर होते हैं...

रात को सोते समय रोज आंवले का चूर्ण शहद या पानी से लेने से पेट साफ रहता है और आंखों से संबंधित रोगों में लाभ मिलता है... सूखे आंवले को शुद्ध घी में तलकर पीस लें, इस चूर्ण का सिर पर लेप करने से नकसीर में लाभ मिलता है... सूखे आंवले के चूर्ण को चमेली के तेल में मिलाकर लगाने से खुजली दूर हो जाती है... आंवले का रस उपयोग करने पर पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं... आंवले को चबाने से दांत मजबूत होते हैं और इसका रस दांतों पर लगाने से पायरिया में लाभ मिलता है... भोजन को पचाने और मुंह को साफ करने के लिए आंवले की सुपारी का उपयोग किया जाता है...


बहु उपयोगी है आंवला

आंवले का प्रयोग भोजन में करने से जहां हमारा स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है वहीं यह हमें अनेक बीमारियों से बचाता है, क्योंकि आंवले में विटामिन ‘सी’ की मात्रा अधिक होती है। कुछ व्यक्ति तो आंवला कच्चा ही खा लेते हैकच्चे आंवले की चटनी काफी स्वादिष्ट बनती है।
औषधी के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता है। बालों के लिए आंवला एक वरदान है। आंवले के नियमित प्रयोग से बाल काले, घने व लम्बे होते हैं। आंवले का प्रयोग हम निम्न प्रकार से कर सकते हैं।
आंवले का प्रयोग एक औषधी के रूप में
* दिमाग की शक्ति ब़ढाने के लिए आंवले को कस कर शहद में मिलाकर लें।
* आंवला पाउडर, मुलहठी पाउडर खाली पेट लें। खांसी बलगम में लाभ मिलेगा।
* आंवला पाउडर, मिश्री पाउडर के साथ खाली पेट लेने से दिल से संबंधित बीमारियों में लाभ मिलता है।
* यकृत की बीमारी में आंवले का रस पानी के साथ दिन में तीन बार लें। लाभ मिलेगा।
* दिमाग की शक्ति ब़ढाने के लिए आंवले का मुरब्बा प्रतिदिन खाने से लाभ मिलेगा।
* आंवले की चटनी बनाकर खाने से विभिन्न रोग अपने आप दूर होंगे।
बालों के लिए आंवला :
* आंवले का प्रयोग प्रतिदिन भोजन में करें चाहे चटनी के रूप में या मुरब्बे के रूप में कच्चा आंवला भी खाया जा सकता है।
* आंवले के सेवन से बाल झ़डने कम होंगे, लम्बे, घने व मजबूत बनेंगे। आंवले के सेवन से बालों को समय से पहले सफेद होने से बचाया जा सकता है। अगर आपके बाल सफेद हो गये हैं तो कच्चे आंवले का पेस्ट बालों की ज़डों में लगायें। धीरेधीरे बालों का सफेद होना रुक जाएगा।
* बाल धोने के लिए लोहे की क़डाही में आंवला पाउडर, रीठा पाउडर, शिकाकाई पाउडर तीनों भिगो दें। सुबह उस पानी से बाल धोयें। बालों का झ़डना कम होगा और बाल लंबे भी होंगे।
सफेद बालों को काला करने के लिए रीठा पाउडर, आंवला पाउडर शिकाकाई पाउडर रात को लोहे की क़डाही में भिगो दें। सुबह चाय के पानी में मेंहदी मिला कर उसे क़डाही वाले मिश्रण में मिला लें। ब्रुश लेकर इस पेस्ट को बालों में लगा दें। चार पांच घंटे तक बालों में लगा रहने दें। सूखने पर शेंपू से बाल धो लें। सप्ताह में दो बार बालों में उपरोक्त मिश्रण को लगायें धीरेधीरे बालों की सफेदी दूर होगी।
बाल धोने के बाद आंवले का तेल बालों में लगायें। बालों को काला करने के लिए यह भी उपयोगी है। अगर हम थ़ोडा सा ध्यान देकर आंवले का प्रतिदिन प्रयोग करें तो यह सोने पे सुहागे का कार्य करता है। गर्मी के मौसम में इसका नियमित सेवन ठंडक प्रदान करता है।
नीलम गुप्ता, Swatantra Warta

3 comments:

  1. bahut hi achhi information di hai aapne...bahut bahut dhanybaad....
    mjaayka

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  2. jai sadgurudev
    aapka pratyek lekh ayurved ka vardaan hai jo aapke dayalu hirday ke maadhyam se hum tak pahunch rahe hai iseeliye aapka dhanywaad anant baar aur guru parmeshwar sadev aap ar apni karuna drashti rakhen aisee meri unse prarthna hai www.the-comforter.org

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  3. jai sadgurudev
    aapka pratyek lekh ayurved ka vardaan hai jo aapke dayalu hirday ke maadhyam se hum tak pahunch rahe hai iseeliye aapka dhanywaad anant baar aur guru parmeshwar sadev aap ar apni karuna drashti rakhen aisee meri unse prarthna hai www.the-comforter.org

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Followers : स्वास्थ्य रक्षक सखा के नियमित पाठक और हमारा हौसला बढ़ाने वाले मार्गदर्शक