Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

Health Care Friend and Marital Dispute Consultant

(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)

-:Mob. & WhatsApp No.:-

85619-55619 (10 AM to 10 PM)

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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।

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सिरदर्द और माईग्रेन-अधिक दर्द निवारक हानिकारक हैं, होम्योपैथी अपनाएं।-Headaches and Migraines-More Painkillers are Harmful, Adopt Homeopathy.


वर्तमान भागमभाग जीवन की व्यस्तता और मानसिक दबावों में अधिकतर लोगों को आमतौर पर सिर में दर्द की शिकायत बनी रहती है। महिलाओं में यह तकलीफ अधिक देखने को मिलती है। शोध प्रमाणित करते हैं कि सिर दर्द के प्रमुख कारण अप्रसन्नता, असंतोष, अनिश्चय, चिंता, तनाव, अवसाद, क्रोध, कार्य का दबाव आदि हैं। इन दिनों यह समस्या बड़ों के साथ-साथ छोटे बच्चों में भी देखी जा सकती है।



यदि सिर दर्द बार-बार होने लगे तो यह तकलीफ माइग्रेन Migraine अर्थात् आधासीसी में बदल सकती है। सामान्यत: माइग्रेन का दर्द, सिर के आधे हिस्से में होता है। जो दायें, बायें, आगे, पीछे या कपाल पर हो सकता है। दर्द का सम्बन्ध सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ भी जुड़ा हो सकता है। दर्द इतना भयंकर होता है कि रोगी को दर्द निवारक/पेन किलर दवाइयों का सेवन करने को मजबूर होना पड़ जाता है।

दर्द निवारक दवाओं से कुछ समय के लिए तो राहत मिल सकती है, लेकिन माईग्रेन का उपचार नहीं हो पाता है। अधिक समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन करना अन्य अनेक नयी और बड़ी तकलीफों को जन्म दे सकता है। इसके बाद भी अनेक उच्च शिक्षित तथा उच्च पदस्थ लोग तक ऐसी तकलीफ को बहुत हल्के में लेते देखे जा सकते हैं। जो उनके स्वास्थ्य की दृष्टि से अनुचित और चिंताजनक है।

होम्योपैथी और देशी जड़ी बूटियों के जरिये माईग्रेन का स्थायी इलाज संभव है। मेरे अनुभव में 80 फीसदी से अधिक रोगी पूरी तरह से रोगमुक्त हो जाते हैं। यद्यपि किसी अनुभवी डॉक्टर की देखरेख में ही इलाज लेना चाहिये। स्वास्थ्य सम्बन्धी जागरूकता हेतु सिरदर्द एवं माईग्रेन की कुछ होम्योपैथिक दवाईयां रोगी के लक्षणों के अनुसार प्रस्तुत हैं:-

1. Glonoinum: लक्षण-(1) होम्योपैथी में यह सिर-दर्द की विशिष्ट औषधि है। रोगी के सिर में रक्त की अधिकता से सिर-दर्द होता है। लू लगने से या सर्दी से या किसी और कारण से जब सिर में रक्त की अधिकता हो जाती है, तब यह उत्तम कार्य करती है। सामान्यत: सिर-दर्द गर्दन से शुरू होता है। जहां रोगी को भारीपन अनुभव होता है, और हृदय की धड़कन/स्पन्दन के साथ सिर में भी धड़कन/स्पन्दन सी अनुभव होती है। रोगी को लगता है कि सिर बहुत बड़ा हो गया है जो उस की छोटी-सी खोपड़ी में नहीं समा रहा। सिर में धड़कन/स्पन्दन इतना उग्र होता है कि जिस तकिये पर रोगी ने सिर रखा होता है, वह भी स्पन्दन करता दीखता है, सिर के हर स्पन्दन के साथ तकिया हिलता है। ‘सन-स्ट्रोक’ की यह मुख्य दवा है।
(2) रोगी के सिर में एकदम, अचानक रक्त-संचय होने से रक्त-संचार के दौरे-से पड़ते हैं। सिर में रक्त-संचार ऐसे अवसरों पर होने लगता है, जब इसकी बिल्कुल संभावना नहीं होती है। जैसे-रोगी सड़क पर चला जा रहा है। एकदम गर्मी की लहर मस्तिष्क में उठती/चढ़ती हुई सी अनुभव होती है। उसे एकदम पसीना छूटने लगता है। रोगी का चेहरा लाल हो जाता है। रोगी चारों तरफ देखता है, मगर किसी को पहचान नहीं पाता। उसे परिचित लोग हैं वे भी अजनबी से लगने लगते हैं।
[स्वास्थ्य परामर्श हेतु-Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM)]

2. Natrum Muriaticum: लक्षण-सूर्योदय के साथ सिर-दर्द होना और सूर्यास्त के साथ समाप्त हो जाना इस दवाई का प्रमुख लक्षण है। सिर-दर्द में इस औषधि का स्थान किसी अन्य औषधि से कम नहीं है। विशेषतौर पर रक्तक्षीणता/रक्ताल्पता (Anemic) से पीउ़ित लड़कियों/महिलाओं के सिर-दर्द में यह बहुत उपयोगी है। सिर दर्द होने पर रोगी अनुभव करता है कि सैकड़ों हथौड़ों की चोट उसके सिर पर पड़ रही है। कभी-कभी यह सिर-दर्द प्रात: 10-11 बजे शुरू होती है, दोपहर बाद 3 बजे या सूर्य ढलने तक बना रहता है। सूर्यास्त होते ही समाप्त हो जाता है। कभी कभी यह प्रतिदिन, प्रति तीसरे या प्रति चौथे दिन हो सकता हे। सिर-दर्द इतना तीव्र होता है कि कोई नया होम्योपैथ बेलाडोना देने की सोच सकता है, परन्तु अगर रोगी का चेहरा पीला हो, वह रक्त-क्षीण हो, तो नेट्रम म्यूर से ही लाभ होगा। यह सिर-दर्द महिलाओं को माहवारी के बाद होता देखा गया है। जिसका कारण सम्भवत: रोगिणी में रक्तक्षीणता हो जाना है।
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3. Sanguinaria Canadensis: लक्षण-(1) दायीं ओर के आधे सिर में दर्द जो सूरज के चढ़ने के साथ दाहिनी आँख पर आकर जम जाय तो इस दवाई को अवश्य याद रखना चाहिये। ऐसा सिर-दर्द जो प्रात: काल सूर्य के चढ़ने के साथ शुरू हो। सिर की गुद्दी से चलकर सिर के ऊपर से होकर दाहिनी आंख के ऊपर और सिर के दाहिनी तरफ आकर जम जाता है। इस प्रकार के सिर दर्द को दवा अवश्य ठीक कर देती है। रोगी अंधेरे कमरे में बिस्तर पर जा लेटता है, जिससे उसे कुछ आराम मिलता है। जबकि सिर दर्द दिन में बढ़ता है और तेज रोशनी या प्रकाश में दर्द अधिक बढ़ता जाता है। दर्द के बाद उल्टी आ जाती है और उल्टी आने पर दर्द चला जाता है। अगर रात को बिस्तर पर लेटते हुए रोगी के हाथ-पैरों जलन होती हो और रोगी अपने तपते हुए अंगों को ओढ़नी से बाहर रखना चाहता हो, तो यह इस दवाई का विशेष लक्षण है। इसके अलावा उठकर बैठने से नहीं, बल्कि लेटने से रोगी को आराम मिलता है। इस प्रकार के लक्षणों में दायीं ओर के सिर-दर्द में यह दवाई बहुत लाभ करती है।
[स्वास्थ्य परामर्श हेतु-Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM)]

4. Spigelia: लक्षण-(1) स्नायु-शूल (दर्द) की यह प्रमुख दवा है। इस दवाई का प्रभाव क्षेत्र विशेष रूप से स्नायु शूल है। जैसे हृदय, सिर, चेहरा, आंख आदि के दर्द के ऊपर इसका मुख्य-प्रभाव है। ऐसा हृदय-शूल तथा सिर दर्द जो बांयीं आंख के ऊपर आकर जम जाये। कभी कभी दायीं आंख के ऊपर भी आकर जम जाता है।
(2) सिर दर्द (Neuralgic headache)–सिर-दर्द, चेहरे का दर्द तथा आंखों के दर्द में इस औषधि का प्रमुख स्थान है। सिर-दर्द प्राय: एक तरफ होता है। प्रात: काल सूर्य के उदय के साथ यह शुरू होता है, ज्यों-ज्यों सूर्य चढ़ता जाता है त्यों-त्यों यह बढ़ता जाता है, और सूर्य के अस्त होने के साथ यह समाप्त हो जाता है। यह दर्द सिर की गुद्दी से उठता है, सिर पर चढ़कर बायीं आंख के ऊपर जाकर ठहर जाता है।

इनके अलावा भी माईग्रेन की बहुत सी अन्या दवाइयां भी हैं, जिनको रोगी के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों के अनुसार उचित शक्ति, मात्रा एवं निर्धारित समय तक सेवन करवाया जाता है।
नोट:---------------->>>>>>>>>>--------------------------ऑर्गेनिक (Organic) देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त अनमोल ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान हमने अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये हैं। जो बेशक कुछ गरीब या स्वास्थ्य के प्रति कंजूस लोगों को महंगे लग सकते हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों की "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम हमारी वेब साइट स्वास्थ्य रक्षक सखा के जरिये हर दिन देशभर में जारी है। लेकिन -'तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज' चाहने वाले हमें माफ करें।

-Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 24.05.2018. केवल नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श चाहने वालों के लिये सार्वजनिक है। इस पर फालतू सामग्री भेजने वालों को तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता है।
जो व्यक्ति खुद अपनी मदद नहीं कर सकता!
दुनियां में कोई उसकी मदद नहीं कर सकता!
आप को बीमारी का निदान चाहिये तो स्वास्थ्य-परामर्श-फॉर्म भरना ही होगा।
(रोगी और स्वास्थ्य रक्षक सखा (स्वरस) के मध्य संवाद)




रोगी: मुझे सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन की समस्या है। क्या मैं ठीक हो सकता हूं?
स्वास्थ्य रक्षक सखा (स्वरस): जरूर हो सकते हैं, लेकिन पहले आपकी डिटेल जानकारी के लिये आपको वाट्सएप या मेल पर 'स्वास्थ्य-परामर्श-फॉर्म (Health Consultation Form)' भरना होगा!
रोगी: सर फॉर्म भेज दें।
स्वरस: फॉर्म भेज दिया है। कृपया इसे ठीक पढकर और समझकर भर दें।
रोगी: सर जब मैंने अपनी तकलीफ सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन की बता दी है तो इतनी सारी जानकारी क्यों जरूरी हैं?
स्वरस: आपकी तकलीफों का सही से निदान करने के लिये।
रोगी: अब से पहले तो किसी डॉक्टर ने इतनी जानकारी नहीं पूछी। जबकि मैं 8-10 डॉक्टरों से इलाज करवा चुका हूं।
स्वरस: उन 8-10 डॉक्टरों से इलाज तो करवा चुके, लेकिन इलाज का परिणाम क्या रहा?
रोगी: सर मेरी बीमारी उनसे ठीक नहीं हुई तब ही तो आपसे कॉण्टेक्ट किया है..
स्वरस: आपका इलाज 8-10 डॉक्टरों से नहीं हुआ। इसका मतलब या तो बीमारी गंभीर है या आपने उन्हें सही से बतायी नहीं या उनमें से किसी को समझ में नहीं आयी? हमारी कोशिश है कि आपकी बीमारी के मूल कारण को समझकर उसका पक्का निदान किया जाये। इसीलिये फॉर्म में डिटेल जानकारी चाही गयी है।
रोगी: लेकिन सर इलाज तो सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन का करवाना है, आप तो मेरी पाचन क्रिया के बारे में 25 जानकारी मांग रहे हैं...?
स्वरस: आपके इलाज के लिये आपके खानपान की आदतों तथा आपकी पाचन क्रिया की जानकारी बहुत जरूरी है। बल्कि अनिवार्य है।
रोगी: सर क्या बिना डिटेल लिखे इलाज संभव नहीं?
स्वरस: बिलकुल नहीं!
रोगी: क्या आप माबाईल पर लिख सकते हैं?
स्वरस: बिलकुल नहीं!
रोगी: क्या मैं कागज पर लिखकर, उसका फोटो खींचकर भेज सकता हूं?
स्वरस: बिलकुल नहीं!
रोगी: क्या मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर समस्या बता सकता हूं?
स्वरस: बिलकुल नहीं! पहले फॉर्म भरें, उसके बाद जरूरी हुआ तो मिलने भी बुला लूंगा। वैसे 99 फीसदी केसेज में, रोगी को व्यक्तिगत रूप से मिलने की जरूरत नहीं होती है। क्योंकि मैं केवल आॅन लाईन निदान करता हूं। अत: ऐसे केस ही लेता हूं, जिनमें व्यक्तिगत रूप से मिलने की जरूरत नहीं होती है।
रोगी: सर क्या मेरी बीमारियों का पक्का इलाज हो जायेगा?
स्वरस: बिना फॉर्म भरे और बिना डिटेल जाने कुछ नहीं कहा जा सकता! इसके अलावा आप यह भी जान लें कि हम किसी को ठीक करने की गारण्टी नहीं देते हैं।
रोगी: फिर मेरा इलाज कैसे होगा?
स्वरस: आप पहले फॉर्म तो भरें!
रोगी: बिना फॉर्म भरे...?
स्वरस: बिलकुल नहीं! क्योंकि जो व्यक्ति खुद अपनी मदद नहीं कर सकता! दुनियां में कोई उसकी मदद नहीं कर सकता! आप को बीमारी का निदान चाहिये तो फॉर्म भरना ही होगा।
रोगी: सर लेकिन सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन के इलाज के लिये इतनी सारी जानकारी क्यों?
स्वरस: आप सवाल रिपीट कर रहे हो। इसका जवाब पहले दिया जा चुका है।
रोगी: सर...
स्वरस: प्लीज मेरा और अपना समय खराब नहीं करें। आगे से फॉर्म भरे बिना किसी प्रकार के संवाद की उम्मीद नहीं करें। अन्यथा आपका नम्बर ब्लॉक कर दिया जायेगा।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' 
स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619, Mobile No.: 9875066111 (10AM to 10 PM)
पेट दर्द का प्रोपर इलाज नहीं करवाना घातक हो सकता है! 

भारत में ऐसे लोगों की बहुत बड़ी संख्या है, जिन्हें कोई न कोई पाचन अर्थात् डाईजेशन सम्बन्धी समस्या लगातार बनी ही रहती है। इनमें बच्चे, जवान, वयस्क और वृद्ध सभी शामिल हैं। जिसके कारण उन्हें भूख में कमी, पेट दर्द, डकारें, गैस, कब्ज, कभी कब्ज कभी दस्त, मरोड़-पेचिश, अपच, मिचली, उबकाई, आतों में छाले, बवासीर, सिरदर्द, बदन में सोजन, इत्यादि में से एक या एकाधिक तकलीफें हो सकती हैं।





सामान्यत: ऐसे व्यथित लोगों का प्रस्तुत चित्र में दर्शाये गये अंगों में से लीवर, तिल्ली/स्पलीन, छोटी-बड़ी आतों में कोई न कोई अंग अफेक्टेड हो सकता है। इनमें से फैटी लीवर होना बहुत आम और बड़ी समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संसार में 32 फीसदी लोग इससे पीड़ित हैं। अत: समय रहते अपनी तकलीफ का पता लगाकर, उसका प्रोपर इलाज नहीं करवाना घातक हो सकता है।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' स्वास्थ्य रक्षक सखा, हेल्थ वाट्सएप 8561955619, मो. 9875066111, 29.11.2017
ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन (Migraine)

नोट: हमारे अनुभव से यह बात प्रमाणित हो चुकी है कि ऐलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से माईग्रेन का स्थायी उपचार सम्भव नहीं होता है, लेकिन ऐलोपैथी माईग्रेन के भयंकर दर्द में तत्काल राहत देने में रामवाण सिद्ध होती है। इसके बावजूद भी आधुनिक विज्ञान में अत्यधिक विश्वास रखने वाले मरीजों की जानकारी के लिये बताना जरूरी है कि ऐलोपैथ चिकित्सक माईग्रेन के बारे में क्या सोचते हैं? अत: यहां ऐलोपैथिक चिकित्सकों के अनुभवों पर आधारित जानकारी संकलित करके प्रस्तुत की जा रही है।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन होम्योपैथ एवं परम्परागत चिकित्सक।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन क्या है?
माइग्रेन (Migraine) एक प्रकार का मस्तिष्क का रोग या विकार है, जिसमें रोगी को भयंकर और असहनीय सिरदर्द होता है। इसे आम बोलचाल में आधासीसी भी कहा जाता है। यह प्राय: शाम के समय प्रारंभ होता है। इसमें दर्द 2 से 72 घंटे तक हो सकता है।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन के कितने प्रकार होते हैं?
माइग्रेन दो प्रकार के होते हैं :
(1) एपिसॉडिक माइग्रेन (प्रासंगिक माइग्रेन)
(2) क्रॉनिक माइग्रेन (दीर्घकालिक माइग्रेन)

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन में कौन से अंग प्रभावित होते हैं?
इस में सिर में एकतरफा दर्द होता है। इसलिए आम बोलचाल की भाषा में इसे आधासीसी, अधकपारी, अर्द्धसिरशूल आदि नामों से भी पुकारा जाता है।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन के लक्षण?
माइग्रेन में जी का मिचलाना, वोमिटिंग, फोटोफोबिया (प्रकाश वृद्धि पर संवेदनशील होना), फोनोफोबिया (ध्वनि वृद्धि में संवेदनशीलता) और शारीरिक गतिविधियों का बढ़ जाना प्रमुख लक्षण है। सेरेब्रल कॉर्टेक्स (मस्तिष्क की बाहरी परत है, जो कि टिशू होता है) में वृद्धि के कारण उत्तेजना और दर्द अधिक होता है।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन के कारण?
मौसम में बदलाव (खासकर मानसून में इसके मरीजों की संख्या कई गुनी बढ़ जाती है), वातावरण में होने वाला शोर-शराबा, मोटर-गाड़ी की आवाज, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, रोशनी का अधिक और कम होना, तनाव, भावात्मक तनाव, कम सोना, धूम्रपान करने से तथा अन्य कई कारकों से माइग्रेन के रोगी प्रभावित होते हैं।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन से कौन अधिक अधिक प्रभावित होते हैं?
माइग्रेन किशोरावस्था से पहले लड़कियों की तुलना में लड़कों को अधिक प्रभावित करता है, लेकिन वयस्क अवस्था में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में माइग्रेन होने की आशंका अधिक होती है। यद्यपि ऐसा देखा गया है कि प्रसव काल के दौरान इसकी आशंका काफी कम हो जाती है।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन में बढोतरी के कारण?
अपने देश में माइग्रेन बढ़ने की वजह लोगों की जीवनशैली में तेजी से आया बदलाव है। इस कारण कॉर्पोरेट कल्चर में बेहतर मांग को लेकर आम लोगों के जीवन में हमेशा तनाव रहता है। हालांकि माइग्रेन को लेकर कोई एक सर्वमान्य सिद्धांत नहीं है। यह एक मस्तिष्क विकार माना जाता है। इसका प्राथमिक सिद्धांत यह है कि अधिकतर लोग जानकारी के अभाव में दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन में में बढोतरी के प्रमुख कारण?
माइग्रेन के मरीजों की संख्या में वृद्धि होने की मुख्य वजह हमारी बदलती जीवनशैली है। दुनियाभर के 15 प्रतिशत लोग माइग्रेन से पीडित हैं। वर्ष अर्थात 2013 में संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 6 फीसदी पुरुष और 18 फीसदी महिलाएं माइग्रेन से प्रभावित हुईं, जबकि यूरोप में पिछले वर्ष माइग्रेन से 12 से 18 प्रतिशत तक आबादी प्रभावित हुई। इनमें 6 से 15 प्रतिशत पुरुष और 14 से 35 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। क्रॉनिक माइग्रेन से विश्व की कुल जनसंख्या में से 1.4 से 2.2 प्रतिशत लोग प्रभावित हैं। सिरदर्द पश्चिमी देशों की तुलना में एशिया और अफ्रीका में कम है, लेकिन इसके बारे में सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन का इलाज?
ऐलोपैथ चिकित्सकों का मानना है कि इस बीमारी का इलाज दो तरह से होता है। पहला एक्यूट ऑबरेटिव ट्रीटमेंट और दूसरा प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट। इस बीमारी में उपचार का पहला उद्देश्य लक्षणों को दूर करना होता है। उसके बाद सिरदर्द को कंट्रोल करना पड़ता है। माइग्रेन में प्राथमिक उपचार का लक्ष्य आवृत्ति, तीव्रता और सिरदर्द को कम करना होता है। इस उपचार में मरीज को कम से कम तीन महीने और कुछ स्थिति में छ: महीने तक नियमित दवा लेनी चाहिए। रोगी को इस बीमारी में प्राथमिक उपचार कराना चाहिए और डॉक्टर की सलाह से दवा लेनी चाहिए। उपचार निवारक पद्धति में पहले दवा की कम खुराक दी जाती है और धीरे-धीरे खुराक को तब तक बढ़ाया जाता है, जब तक कि दर्द से निजात न मिल जाए। इस पद्धति में मरीज को दवा का साइड इफेक्ट न हो, इसका भी पूरा ख्याल रखा जाता है। भावनात्मक उपचार द्वारा प्राय: असंवेदनशील रोगियों का इलाज किया जाता है।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार एक्यूपंचर चिकित्सा: एक्यूपंचर चिकित्सा प्रासंगिक माइग्रेन और दीर्घकालिक माइग्रेन, दोनों में कारगर बतायी जाती है, परंतु ऐलोपैथ डॉक्टर्स का कहना है कि उनके शोधों के परिणामों के अनुसार यह पता लगता है कि एक्यूपंचर का प्रभाव दवा की तुलना में आभासी/दिखावटी ही होता है। स्थायी प्रभाव नहीं मिलते हैं।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माइग्रेन से बचाव हेतु सावधानियां?
डॉक्टर्स का अनुभव है कि यह रोग हवा और धूप के पड़ने से 30 प्रतिशत बढ़ जाता है। रोशनी और सोने की अनियमित आदतें माइग्रेन बढ़ने का प्रमुख कारण है। मौसमी सिरदर्द 75 प्रतिशत दूषित पर्यावरण और 46 प्रतिशत अन्य कारणों से होता है। प्रत्येक 9 डिग्री फॉरेंहाइट तापमान बढ़ने पर 7.5 प्रतिशत बीमारी बढ़ने का जोखिम रहता है। समझदारी और जानकारी इस बीमारी से बचाने में मददगार हो सकती है। इससे बचने के लिए एक डायरी बनाएं, जिसमें माइग्रेन से संबंधित सभी तथ्यों का समावेश होना चाहिए। मसलन पहली बार सिरदर्द होने पर कितनी देर तक सिरदर्द हुआ और उसके लक्षण क्या थे, सिरदर्द पहले से ज्यादा हो रहा है या कम, इस दौरान कौन सी दवाएं ली गईं आदि।

ऐलोपैथ चिकित्सकों के अनुसार माईग्रेन से इससे बचाव के उपाय:
1. अधिक से अधिक पानी पिएं।
2. भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचें।
3. कॉफी का सेवन करना लाभदायक होता है, लेकिन सीमित मात्रा में।
4. सूर्य की रोशनी से दूर रहें।
5. स्नान के समय वॉशरूम की लाइट ऑफ रखा करें।
6. नियमित समय पर खाना खाएं और सोएं।
7. सिरदर्द अधिक होने पर बर्फ के गोले से सेंक करें।
8. अनजान दवाओं का सेवन न करें।
9. हार्मोन की नियमित जांच करवाएं।
10. काले चश्मे का प्रयोग करें, जो आपको धूप से बचाए।
11. रात में अच्छी नींद लें।
12 .अपनी कार्य क्षमता को जानें और तनाव से मुक्त रहें।
13. सोते समय कमरे की बत्ती बुझा दें।

मेरी टिप्पणी: होम्योपैथी और आयुर्वेद के जरिये माईग्रेन के 70 फीसदी से अधिक रोगियों का स्थायी उपचार सम्भव है, जबकि 20 फीसदी रोगियों को यदा-कदा हानिरहित दवाईयों का सेवन करना पड़ता है। 10 फीसदी रोगी ऐसे भी होते हैं, जिन्हें नियमित रूप से दवाईयों का सेवन करना होता है। जिनसे किसी प्रकार की शारीरिक हानि नहीं होती है। इस विषय में शीघ्र ही अलग से जानकारी प्रस्तुत की जायेगी।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन होम्योपैथ एवं परम्परागत चिकित्सक।

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
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मेरी पत्नी का बदबू मारने वाला ल्यूकोरिया, सिरदर्द और मेरी
नामर्दी, कब्जी, लीवर की बीमारी सहित सभी तकलीफें खत्म हो गयी

रेस्पेक्टेड डॉक्टर निरंकुश सर मैं आपका धन्यवाद किन शब्दों में अदा करूं समझ में नहीं आ रहा। आपने बहुत छोटी सी रकम लेकर मेरा व्यक्तिगत और सेक्सुअल जीवन बचा लिया। मैं 14 साल से 23 साल की उम्र तक लगभग हर रोज हस्तमैथुन करने का अभ्यस्त रहा। अनेक बार एक ही दिन में कई कई बार हस्तमैथुन करता था। इसके बाद एक खूबसूरत आंटी (मकान मालकिन) ने मुझे अपने सौंदर्य के जाल में ऐसा फंसाया कि 28 साल की उम्र तक शादी याद ही नहीं आयी। मकान मालिक अंकल के दफ्तर जाते ही आंटी मेरे साथ और मेरे दोस्त के साथ लगभग हर दिन सेक्स करती थी। अनेक बार एक ही दिन में कई कई बार भी सेक्स करवाती थी। इस चक्कर में हम दोनों का केरियर बर्बाद हो गया। जब अंकल का तबादला दूसरे शहर में हो गया और आंटी भी साथ चली गयी तब हमें पता चला कि अब शादी करनी होगी।




शादी की तो पत्नी को ल्यूकोरिया की इतनी भयंकर बीमारी कि उसकी योनि से बदबू आती थी। मैं उसके साथ सम्बन्ध ही नहीं बना पाया और पत्नी के होते हुए फिर से हस्तमैथुन शुरू हो गया। टेंशन में शराब शुरू कर दी। पत्नी का इलाज कराया तो कुछ सुधार हुआ। जिससे सेक्स शुरू हुआ। 2 बच्चे हो गए। पत्नी बच्चों में खो गयी, लेकिन मैं खुश नहीं हुआ। हमेशा टेंशन ही टेंशन और शराब ही शराब। लीवर खराब हो गया। कब्ज और पाइल्स का शिकार हो गया। पत्नी टेंशन में एकदम सूख कर लकड़ी हो गयी। उसे भयंकर सिरदर्द वाला माइग्रेन हो गया। सिर की नसें फूलने लगी और भयंकर दर्द होने पर उल्टियां होने लगी। उसके लिए रसोई और बच्चे संभालना ही मुश्किल हो गए। मैं पत्नी से विमुख, घर परिवार की कोई परवाह नहीं। मेरी सेक्स उत्तेजना जाती रही। मेरी सेक्स करने की भयंकर इच्छा होती, लेकिन शरीर साथ नहीं देता। पत्नी और मैं दोनों एक दूसरे से सेक्स सुख पाने को तरसने लगे। साथ रहकर भी अजनबी लोगों की तरह रहने लगे। पत्नी का बदन बदबू मारता और मेरा बदन निष्प्राण सा हो गया। बहुतेरी दवाई करवाई। जब तक दवा तब तक थोड़ा बहुत असर। हम दोनों ने इलाज पर डेढ़ लाख से अधिक खर्चा कर दिया, लेकिन अंत में सब बेकार।

जनवरी, 2016 की बात है। एक दिन मेरी पत्नी को उसकी सहेली ने डॉक्टर पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी के बारे में बताया और उनकी साईट हैल्थ केयर फ्रेंड के बारे में बताया तो नेट पर पढा। पत्नी ने मुझे बताया। मैंने इलाज और डॉक्टर के नाम से ही तौबा कर ली थी। सो इलाज करवाने से मना कर दिया। पत्नी को अपना इलाज करवाने को बोल दिया। पहले महीने में मेरी पत्नी ने 1570 रुपये की दवाई मंगवाई और उसका सिर दर्द गायब हो गया। पत्नी से मैंने डॉक्टर निरंकुश जी का नम्बर लिया और 9875066111 पर बात की और अपना इलाज शुरू करवाया।
6-7 महीना के लगातार इलाज ने हमारी दोनों की जिंदगी बदल दी। मेरी शराब की लत छुड़वाई। लीवर और कब्ज का इलाज किया तो धीरे-धीरे लिंग में उत्तेजना आने लगी। एक दिन ख़ुशी में मैंने अपनी पत्नी को बाहों में भर लिया और हम फिर से सेक्स के आनंद को पाने में सफल हुए। मेरी पत्नी का बदबू मारने वाला ल्यूकोरिया, माइग्रेन और मेरी नामर्दी, कब्जी, लीवर की बीमारी सहित सभी तकलीफें खत्म हो गयी हैं। हम दोनों डॉक्टर साहब के कर्जदार हैं। हमारा सही इलाज करके और अपने लिटरेचर तथा मौखिक समझाइश के जरिये हमारा सोचने का तरीका ही बदल दिया।-मनमोहन दुबे (परिवर्तित नाम) लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
डॉक्टर टिप्पणी:
~~~~~~~~बेशक पेशेंट दम्पत्ति अपने इलाज के लिए मुझे श्रेय दे रहे हैं, लेकिन असल में यह अमृततुल्य तथा हानि रहित होम्योपैथिक दवाईयों और आयुर्वेद की 100 फीसदी शुद्ध ऑर्गेनिक औषधियों का कमाल है। मेरे मतानुसार सभी डॉक्टर अपने रोगी का सही से इलाज करना चाहते हैं। मगर वर्षों तक पंसारी की दुकान की शोभा बढाने वाली सड़ी-गली और निष्प्राण वनौषधियाँ इलाज में सबसे बड़ी बाधा हैं। आयुर्वेद की असफलता का यही सबसे बड़ा कारण है। हम हमारे फ़ार्म पर पैदा की गयी ताजा और 100 फीसदी शुद्ध ऑर्गेनिक औषधियों का ही उपयोग करते हैं। होम्योपैथी की विश्वसनीय फार्मेसी की दवाई खरीदते हैं और रोगी को अपना ग्राहक नहीं, अपनी चिकित्सा का मकसद समझते हैं। रोगी हम पर विश्वास करते हैं। बस सफल चिकित्सा का यही छोटा सा राज है।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-85-619-55-619

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पोष्टिक तत्व नियासिन (विटामिन बी 3) का परिचय

(1) विटामिन बी 3 को नियासिन भी कहा जाता है। नियासिन की एक खासियत यह है कि यह रक्त में हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन के स्तर को बढ़ाता है। रक्त में एच.डी.एल. के स्तर के बढ़े रहने से कोरोनरी आर्टरी डिसीज और दिल का दौरा पड़ने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं। वाशिंग्टन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार नियासिन रक्त में एचडीएल कोलेस्ट्राल में प्रोटीन के संरचनात्मक स्वरूप को बदल देता है। प्रोटीन का यह बदला हुआ स्वरूप पूर्व के एचडीएल से कहीं ज्यादा बेहतर होता है। वस्तुत: कोरोनरी आर्टरी डिसीज(हृदय धमनी रोग ) से ग्रस्त लोगों या फिर जिन लोगों के रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा होता है, उनका एचडीएल कम प्रभावकारी होता है। ऐसे लोगों को नियासिन सप्लीमेंट्स का सेवन करना चाहिए।

(2) Niaspan एक कोलेस्ट्रॉल Abbott प्रयोगशालाओं द्वारा निर्मित दवा है. डॉक्टरों customarily नियासिन निर्धारित की है एक statin गोली है कि सफलतापूर्वक अपने एलडीएल ("बुरा" कोलेस्ट्रॉल) को कम लेने के रोगियों में एचडीएल ("" अच्छा कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को बढ़ाने के लिए. अभी तक इस अभ्यास अब स्वास्थ्य अध्ययन के राष्ट्रीय संस्थानों देर से मई में जारी की, AIM उच्च बुलाया, के बाद पूछताछ की जा रही है पता चला है कि Niaspan दिल के दौरे को रोकने में विफल रहा है और एक स्ट्रोक का थोड़ा जोखिम उठाया जब कोलेस्ट्रॉल दवा Zocor (simvastatin) के साथ संयुक्त . लॉस एंजिल्स टाइम्स के मुताबिक, डॉक्टरों का कहना है कि simvastatin Lipitor, और Crestor सहित statins, कम में महान हैं खराब कोलेस्ट्रॉल इतना अच्छा है कि यह आवश्यक करने के लिए एक रोगी के आहार के लिए एक अन्य दवा जोड़ने नहीं है. नए अध्ययन का कहना है, टाइम्स, डॉक्टरों और अधिक कारण Niaspan, जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल बढ़ा नहीं जोड़ दे रहा है. "हालांकि इस खोज एचडीएल क्षेत्र में भविष्य दवा के विकास के लिए संबंधित हो सकता है, इसे फिर से विशाल एचडीएल जीव विज्ञान आसपास जटिलता मिसाल" अमर ए सेठी, एमडी, पीएचडी, प्रशांत Biomarkers, Inc में अनुसंधान और विकास के उपाध्यक्ष का कहना है ( PBI), एक सिएटल आधारित biomarker प्रयोगशाला सेवाओं की दवा, जैव प्रौद्योगिकी, और निदान उद्योगों के लिए प्रदाता. "(Niaspan में सक्रिय संघटक) नियासिन, AIM उच्च डेटा बहुत अधिक जांच और उपसमूह विश्लेषण करने के लिए प्रारंभिक निष्कर्ष का समर्थन के हकदार हैं पर पिछले नैदानिक ​​परीक्षणों से सकारात्मक सबूत के बड़े शरीर के कारण" डा. सेठी जारी है. इसी तरह, "बहुत छोटे यद्यपि टोपी चिकित्सीय परीक्षण, simvastatin और नियासिन का एक संयोजन चिकित्सा हार्ड endpoints में कमी का प्रदर्शन इस्तेमाल किया. मध्यस्थ 6 स्टापें अध्ययन और ऑक्सफोर्ड Niaspan अध्ययन दोनों का सुझाव दिया है कि नियासिन की statins के अलावा की प्रगति रुका मन्या intima मीडिया मोटाई इस प्रकार, हम बहुत कुछ है कि हम वर्तमान समय में बैठक कर रहे हैं निष्कर्ष फर्म और अच्छी तरह से स्थापित कर रहे हैं की जरूरत है. " डा. सेठी का कहना है कि यह कैसे AIM उच्च अध्ययन से परिणाम पहले नियासिन और हृदय रोग के बारे में निष्कर्ष का खंडन उल्लेखनीय है. उनके विचार में, हम बहुत बड़ा नियासिन परीक्षण अध्ययन, HPS-2 थ्राइव कहा जाता है, जो इस दवा के भाग्य के संबंध में निश्चित जवाब देना चाहिए के लिए इंतजार की जरूरत है. एफडीए, वह नोट, किसी भी लेबल बदल सिफारिश नहीं है. यदि AIM उच्च परिणाम में चल रहे बड़े बहुत HPS-2 अध्ययन कामयाब सही पकड़, एक डा. सेठी कहते हैं, अटकलें शुरू हो सकता है कि मामलों में जहां एलडीएल-C काफी कम इलाज किया जाता है में एचडीएल मायने रखती है.

(3) नियासिन, भी विटामिन बी 3 के रूप में कहा जाता है, लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक अनिवार्य तत्व है. अन्य बी श्रेणी के विटामिन की तरह, नियासिन मदद करता है कोशिकाओं के लिए ऊर्जा जारी है और 50 से अधिक कार्बोहाइड्रेट और वसा के अवशोषण, प्रोटीन के चयापचय, हार्मोन का उत्पादन है, और के गठन लाल रक्त कोशिकाओं सहित शरीर की प्रक्रियाओं की सुविधा. नियासिन के विभिन्न कार्यों में भी मदद स्वस्थ त्वचा को बढ़ावा देने और पाचन और तंत्रिका प्रक्रियाओं को बनाए रखने. एक स्वस्थ नियासिन स्तर लोगों को स्वास्थ्य के लिए सिफारिश की है और अच्छी तरह से किया जा रहा है, इसलिए पोषण और डॉक्टरों नियासिन परीक्षण प्रशासन के लिए एक मरीज की स्थिति का मूल्यांकन करने और पोषण की कमी के निशान का पता लगाने. नियासिन एक इलाज के लिए एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर या खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने, और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल स्तर या अच्छे कोलेस्ट्रॉल बढ़ा ज्ञात कारक के रूप में प्रयोग किया जाता है. हृदय जटिलताओं के साथ लोगों के लिए बढ़ा, नियासिन की खुराक आम तौर पर मदद करने के लिए बीमारी का इलाज निर्धारित है. नियासिन इलाज भी चक्कर के लिए निर्धारित है, कान, पूर्व मासिक धर्म सिंड्रोम, सिर दर्द, ऐंठन, और रक्त परिसंचरण समस्याओं से बज रही है. भोजन में नियासिन सामग्री उच्च प्रोटीन आहार में पाया जाता है. इसलिए जो लोग बड़े पैमाने पर शाकाहारी हैं के लिए नियासिन खुराक लेने के लिए खाई को सही और नियासिन कमी को रोकने के लिए सिफारिश की है. शराबखोरी नियासिन अवशोषण जो भी कमी नियासिन नेतृत्व कर सकते हैं रोकता है.

नियासिन कमी : Niacin की कमीकारकों की एक किस्म के कारण होता है. गरीब देशों में, नियासिन कमी कुपोषित बच्चों में स्पष्ट है. विकसित देशों में, नियासिन कमी शाकाहारी आहार, शराबियों, और तनावपूर्ण स्थितियों के तहत लोगों को जो भोजन को छोड़ करने के लिए अवसाद से निपटने के साथ फसल कर सकते हैं. जो लोग नियासिन कमी के जोखिम वाले कारकों के नीचे गिर करने के लिए नियासिन कमी परीक्षण लेने के लिए एक सामान्य पोषण स्तर का आकलन प्रोत्साहित किया जाता है.
नियासिन कमी के लक्षण नासूर घावों, मनोभ्रंश, अवसाद, दस्त, चक्कर आना, थकान, सिरदर्द, मुंह से दुर्गंध, और अपच शामिल हैं. गंभीर नियासिन कमी के लक्षण अनिद्रा, अंग दर्द, भूख की कमी, कम रक्त शर्करा, मांसपेशियों में कमजोरी, त्वचा eruptions, और सूजन शामिल हैं. चरम मामलों के लिए, नियासिन कमी एक घातक बीमारी कहा जाता करने के लिए नेतृत्व कर सकते हैं

Pellagra. : Pellagra एक उत्तेजित विकार है कि अत्यधिक शरीर में नियासिन की कमी के कारण होता है. त्वचा, मस्तिष्क, और पाचन तंत्र पर हमला, पॅलाग्रा विभिन्न लक्षण है कि गलत तरीके से एक अलग बीमारी के रूप में ग्रहण किया जा सकता शामिल हैं. इसलिए, डॉक्टरों और एक रोगी के समग्र स्वास्थ्य कल्याण अध्ययन और नियासिन परीक्षण की सिफारिश की है अगर वह नियासिन कमी संदिग्धों. एक व्यक्ति की नियासिन स्तर को जानने का एक रोगी में पॅलाग्रा निदान में डॉक्टर की मदद करेगा. नियासिन नियासिन पैनल परीक्षणों की एक श्रृंखला के परीक्षण की कमी सबसे अच्छा घर के लिए मदद का वर्णन है और शरीर में नियासिन स्तर यों तो तरीका है. नियासिन स्तर परीक्षण न केवल नियासिन कमी का पता लगाता है, लेकिन यह भी नियासिन अधिक मात्रा के लिए एक गाइड है जो एक शर्त है कि के रूप में नियासिन कमी के रूप में हानिकारक हो सकता है के रूप में खड़ा है. नियासिन लार परीक्षण की प्रक्रिया सरल और आसान करने के लिए बाहर ले जाना है. लार के नमूने का एक विशेष रूप से तैयार झाड़ू द्वारा एकत्र की है. नमूना परिणाम और व्याख्या के लिए एक सम्मानित प्रयोगशाला को भेज दिया जा सकता.



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माईग्रेन (अर्धावभेदक-आधासीसी) क्या है?

सिरदर्द एक आम रोग है और प्रत्येक व्यक्ति को कभी न कभी इसे मेहसूस करता ही है।इस रोग के विशेषग्य इसके कारण के मामले में एकमत न होकर अलग-अलग राय रखते हैं। सभी की राय है कि माईग्रेन के विषय में और अनुसंधान की आवश्यकता है। अभी तक माईग्रेन की तीव्रता का कोइ वैग्यानिक माप नहीं है।

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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(Tribulus Terrestris) 14 फरवरी Abutilon Indicum Aerva Lanat Allergy Aloevera Juice Alternanthera Sessilis Alum Aluminum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Appetite Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Ban Tulasi Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Bone Infection Borax BPH Calories Calories Chart Cancer Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chemotherapy Chenopodium Album Chikungunya Cholesterol Cleome viscosa Clerodendrum Phlomidis Clitoria Ternatea Colocynth Colpoptosis Constipation Convolvulus Pluricaulis Corn Creak Crotalaria Bburhia Croton Bonplandianum Croton Sparsiflorus Cumin Date Palm Dengue Depression Diabetes digestion Disorders Divorce Dog Mustard Dronapushpi Dysentery Early Ejaculation Emblic Myrobalan Extramarital Relation Extremely Intolerance Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Ferrum Phosphoricum Fever Fissure Fistula Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hainampfer Hair Falling Headaches Health Health Care Friend Health Consultation Health Links Health Tips Heliotropium Eeuropaeum Hemorrhoids Hepatitis Hibiscus Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? 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Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गलगण्ड गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गारण्टेड इलाज गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाद्वार गुदाभ्रंश गुम्मा गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गेदुआ की छाछ गैस गैस्ट्रिक गैहूं का जवारा गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखगांजा गोरखबूटी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिटकन चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाजन बूटी छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जख्म जंगली तिल्ली जंगली तुलसी जंगली पेड़ जंगली मिर्ची जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया 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बदबू बंध्यापन बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूत-प्रेत भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी 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