- जीरा पाचक और सुगंधित मसाला है।
- भोजन में अरुचि, पेट फूलना, अपच आदि को दूर करने में जीरा विश्वसनीय औषधि है।
- भुने हुए जीरे को लगातार सूँघने से जुकाम की छीकें आना बंद हो जाती है।
- प्रसूति के पश्चात जीरे के सेवन से गर्भाशय की सफाई हो जाती है।
- जीरा गरम प्रकृति का होता है अत: इसके अधिक सेवन से उल्टी भी हो सकती है।
- जीरा कृमिनाशक है और ज्वरनिवारक भी।
- जीरे को उबाल कर उस पानी से स्नान करने से खुजली मिटती है।
- बवासीर में मिश्री के साथ सेवन करने से शांति मिलती है।
- जीरे व नमक को पीसकर घी व शहद में मिलाकर थोड़ा गर्म करके बिच्छू के डंक पर लगाने से विष उतर जाता है।
- जीरे का चूर्ण 4 से 6 ग्राम दही में मिलाकर खाने से अतिसार मिटता है।