परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
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कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
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हर्बल जूस : लाभ और दुष्प्रभाव-Herbal Juice: Benefits and Side Effects

हर्बल जूस : लाभ और दुष्प्रभाव


Herbal Juice: Benefits and Side Effects

आँख बन्द कर प्रचार किया जा रहा है कि सभी तरह के प्राकृतिक उत्पाद हमें अद्भुत फायदा पहुंचाते हैं और स्वास्थ्य के लिए अमृत हैं, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। कई बार ये आपको बीमार भी कर सकते हैं। साथ ही यह भी याद रखा जाए कि आयुर्वेदिक दवाएं उम्र, शारीरिक शक्ति और बीमारी, बीमारी की स्थिति/स्टेज, उचित मात्रा और मौसम/जलवायू के अनुसार लेने पर ही फायदेमंद साबित होती हैं। इसलिए सेवन से पूर्व किसी एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
प्राकृतिक जूस का सेवन शुरू करने से पहले भी उनकी शुद्धता और सवाल की हिदायतों को जानना जरूरी है। वरना फायदे की जगह हो नुकसान हो सकता है।

1. करेले का रस (Karele ka juice) :

प्रकृति–गर्म और खुश्क। करेला घी में छौंककर खाने से अधिक लाभदायक है।
सेवन कब और कितना-सुबह खाली पेट पानी के साथ 20 से 50 मिली तक बीमारी और चिकित्सक की सलाह के अनुसार।
लाभ-कच्चे करेले का जूस बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसमें जरूरी विटामिन्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो कि शरीर को चाहियें।
(1) ब्लड शुगर के लेवल को कम करता है : शुगर को नियंत्रित करने के लिए आप तीन दिन तक खली पेट सुबह करेले का जूस ले सकते हैं। मोमर्सिडीन और चैराटिन जैसे एंटी-हाइपर ग्लेसेमिक तत्वों के कारण करेले का जूस ब्लड शुगर लेवल को मांसपेशियों में संचारित करने में मदद करता है। इसके बीजों में भी पॉलीपेप्टाइड-पी होता है जो कि इन्सुलिन को काम में लेकर डायबेटिक्स में शुगर लेवल को कम करता है।
(2) सोराइसिस में उपयोगी : एक कप करेले के जूस में एक चम्मच नींबू का जूस मिला लें। इस मिश्रण का खाली पेट सेवन करें। 3 से 6 महीनें तक इसका सेवन करने से त्वचा पर सोराइसिस के लक्षण दूर होते हैं। यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और सोराइसिस को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में मदद करता है।
(3) पाचन शक्ति में वृद्धि : करेले का जूस कमजोर पाचन तंत्र को सुधारता है और अपच को दूर करता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि यह एसिड के स्त्राव को बढ़ाता है। जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है। इसलिए अच्छी पाचन क्षमता के लिए सप्ताह में एक बार सुबह करेले का जूस जरूर लें।
(4) दृष्टि क्षमता में वृद्धि : लगातार करेले के जूस का सेवन कर आप विभिन्न दृष्टि दोषों को दूर कर सकते हैं। करेले में बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए की अधिकता होती है। जिससे दृष्टि ठीक होती है। इसके अलावा इसमें उपस्थित विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाली नजरों की कमजोरी से बचाता है।
(5) अग्नाशय कैंसर में उपयोगी : रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाएं नष्ट होती हैं। ऐसा इसलिए होता हैं, क्योंकि करेले में मौजूद एंटी-कैंसर कॉम्पोनेंट्स अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं में ग्लूकोस का पाचन रोक देते हैं। जिससे इन कोशिकाओं की शक्ति ख़त्म हो जाती हैं और ये ख़त्म हो जाती हैं।
(6) लीवर को मजबूती : रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से लीवर मजबूत होता है, क्योंकि यह पीलिया जैसी बिमारियों को दूर रखता है। साथ ही यह लीवर से जहरीले पदार्थों को निकालता है और पोषण प्रदान करता है। जिससे लीवर सही काम करता है और लीवर की बीमारियां दूर रहती हैं। 3 से 8 वर्ष तक के बच्चों को आधा चम्मच करेले का रस नित्य देने से यकृत ठीक रहता है। यह पेट साफ रखता है। करेले की सब्जी खाने और दो चम्मच करेले का रस, दो चम्मच पानी, स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाकर नित्य कुछ दिन पीने से बढ़ों की यकृत क्रिया ठीक हो जाती है।
(7) रक्त शोधक : करेले का जूस शरीर में एक प्राकृतिक रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है। यह खून से जहरीले तत्वों को बाहर निकालता है और फ्री रेडिकल्स से हुए नुकसान से बचाता है। इसलिए ब्लड को साफ़ करने और मुहासों जैसी समस्याओं को दूर करने केलिए रोज एक गिलास करेले का जूस जरूर पियें।
(8) भूख बढ़ाता है : भूख नहीं लगने से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है, जिससे कि स्वास्थ्य से सम्बंधित परेशानियां होती हैं। इसलिए करेले के जूस को रोजाना पीने से पाचन क्रिया सही रहती है और जिससे भूख बढ़ती है।
(9) प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करे : जिन लोगो का प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर है, उन्हें करेले के जूस का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। इसमें विटामिन B1, B2, B3, जिंक, मैग्नीशियम पाया जाता है, जो शरीर के लिए बहुत आवश्यक तत्व हैं।
(10) चर्म रोग नाशक : करेले के रस के सेवन से पाचन क्रिया ठीक होती है। इस कारण चेहरे पर मुंहासे जैसे रोग नहीं होते। करेला पेट साफ़ करने में भी सहायक होता हैं। जिससे चर्म रोग नहीं होते। करेले की पत्तियों में भी विशेष गुण होते हैं। आप चाहे तो इसका लैप भी बना के लगा सकते हैं।
(11) पथरी :
  • (A) करेले में मैग्नीशियम, फॉस्फोरस होते हैं, जो पथरी को तोड़ देते हैं। करेला वृक्क व मूत्राशय की पथरी को तोड़कर पेशाब के साथ बाहर लाता है। इसके लिए दो करेलों का रस नित्य पियें, सब्जी खायें।
  • (B) दो करेलों का रस तथा एक कप छाछ मिलाकर नित्य दो बार पियें जब तक पथरी निकल नहीं जाए।
  • (C) करेला पेशाब ज्यादा लाता है। इसका रस पीने से पेशाब की जलन दूर होती है। करेले का रस भूखे पेट पीना लाभदायक है।
  • (D) करेले के पत्तों का रस 6 चम्मच चार चम्मच दही में मिलाकर पिलायें, इसके बाद एक कप छाछ पिलायें। इस तरह तीन दिन पिलाकर तीन दिन पिलाना बन्द रखें। इसी प्रकार पुनः चार दिन, फिर पाँच दिन पिलायें और जितने दिन पिलायें उतने ही दिन बन्द रखें। इस अवधि में चावल और खिचड़ी ही खायें।
(12) गठिया :
  • (A) करेले के रस को गर्म करके गठिया पर लगायें और सब्जी खायें। जोड़ों में दर्द हो तो करेले के पत्तों के रस या करेले के रस की मालिश करें।
  • (B) करेले की चटनी पीसकर गठिया की सूजन पर लेप करें। 100 ग्राम करेले सेंक कर या उबाल कर भुर्ता बनाकर गर्म-गर्म नित्य सुबह-शाम खायें। भुर्ते में सामान्य मसाले या शक्कर डाल लें। करेला गठिया व जोड़ों का दर्द दूर करता है। करेले की सब्जी में घी का छौंक लगाकर खायें। इससे संधिवात, स्नायुगतवात में लाभ होता है।
(13) सूजन :
  • (A) आधा कप करेले का रस, चौथाई चम्मच पिसी हुई सोंठ, थोड़ा-सा पानी मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीने से सूजन ठीक हो जाती है।
  • (B) करेले पर पानी डालकर चटनी पीस कर सूजनग्रस्त जगह पर लेप करने से सूजन दूर हो जाती है। लेप को चार घंटे बाद ठंडे पानी से धो दें।
(14) कब्ज़ : करेला कब्ज़ दूर करता है। करेले का मूल अरिष्ट, जो होम्योपैथी में मोमर्डिका कैरन्शिया Q नाम से मिलता है, की 10 बूंद चार चम्मच पानी में मिलाकर नित्य चार बार देने से कब्ज़ दूर हो जाती है।
(15) बवासीर : रक्तस्रावी बवासीर में रक्त गिरने पर आधा कप करेले का रस स्वादानुसार मिश्री या शक्कर मिलाकर नित्य दो बार पीने से लाभ होता है। बवासीर के मस्सों में दर्द, सूजन, जलन हो तो करेले का रस शौच जाने के बाद नित्य मस्सों पर लगायें। मस्से सूखने तक रस लगाते रहें। लाभ होगा।
(16) हड्डी, दाँत, मस्तिष्क, रक्त और अन्य शारीरिक अवयवों के लिए जितने फॉस्फोरस की जरूरत होती है, करेले में मिल जाता है। करेला दर्द दूर करता है, शरीर में शक्ति पैदा करता है। कफ, बलगम निकलना बन्द हो जाता है।
मात्रा–एक-दो करेले के रस को आधा कप पानी में मिलाकर लें। करेला सेवन करने से उत्पन्न विकारों को दूर करने के लिए दही, नीबू, घी और चावल में से एक का सेवन करना चाहिए।
सावधानी-करेले के जूस का अत्यधिक सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
(1) लीवर व किडनी के मरीजों के लिए करेले का अत्यधिक सेवन हानिकारक साबित हो सकता है। यह लीवर में एन्जाइम्स के निर्माण को बढ़ा देता है, जिससे लीवर प्रभावित होता है।
(2) करेले के जूस में मोमोकैरिन नामक तत्व होता है, जो महिलाओं में पीरियड्स के फ्लो को बढ़ा देता है। गर्भावस्था के दौरान करेले के ज्यादा सेवन करने से गर्भपात का खतरा भी ज्यादा रहता है। 
(3) कई बार करेले के जूस के अधिक सेवन से प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स की स्थिति भी पैदा हो सकती है। साथ ही करेले में एंटी लैक्टोलन तत्व भी होते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान दूध बनने की प्रक्रिया में रुकावट पैदा करता है।
(4) करेले में मौजूद तत्व फर्टिलिटी संबंधित दवाओं का प्रभाव खत्म कर देते हैं। वहीं करेले के बीजों में लेक्टिन नामक तत्व होता है जो आंतों तक प्रोटीन को पहुंचने नहीं देता।
(5) अध्ययनों में पाया गया कि करेले के अत्यधिक सेवन से हेमोलाइट‌िक अनीमिया हो सकता है। हेमोलाइट‌िक अनीमिया में पेट दर्द, सिरदर्द, बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

3. जामुन का जूस (Juice of Berries) :

1. जामुन जूस बनाने की विधि
(1) सामग्री : 500 ग्राम पके काले जामुन, 600 ग्राम शक्कर, 1/2 चम्मच कालीमिर्च पावडर, 1/2 चम्मच काला नमक, 1/2 चम्मच भुना जीरा पावडर, 1 चम्मच साइट्रिक एसिड, पानी 1 लीटर।
(2) विधि : सबसे पहले जामुन को धोकर पानी में तब तक उबालें जब तक कि उनका छिलका न उतर जाए। अब ठंडे होने पर हाथ से मसलकर गूदे को भली-भांति निकालें और शक्कर मिलाएं। जूस को छलनी से छानें और साइट्रिक एसिड मिलाकर बोतलों में भरें। सर्व करने से पहले ठंडे पानी में मिलाएं, ऊपर से आइस क्यूब डालें और जामुन का खट्टा-मीठा शरबत पेश करें।
2. लाभ-जामुन का रस स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उत्तम किस्म का तांबा  पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
(1) मधुमेह : डायबिटीज रोगियों के लिए खासतौर से फायदेमंद। ब्लड में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करता है। जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है।
(2) पेट की तकलीफें : भूख न लगती हो तो कुछ दिनों तक जामुन रस का सेवन करें और आश्चर्यजनक रूप से फायदा देखें। डाइजेशन सिस्टम को सही रखने में मददगार होता है। वमन होने पर जामुन का रस सेवन करें। कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें। इसके फायदे आप खुद अनुभव करेंगे।
(3) विष नाशक : विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन के रस के साथ जामुन की पत्तियों का रस भी पिलाना चाहिए।
(4) छाले : मुंह में छाले होने पर जामुन का रस लगाएं।
(5) यकृत-तिल्ली-मूत्राशय : जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय में आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है।  जामुन का रस तिल्ली के रोग में हितकारी है।
(6) यौन तथा स्मरण शक्ति वर्धक : जामुन का रस, शहद, आंवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।
(7) उल्टी-दस्त या हैजा : जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है।
(8) रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा : जामुन का रस यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है।
कब-कितना :  पानी के साथ 20 मिली.।
सावधानी : कसैला होने के कारण वात प्रकृति के लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। गले में खराश या दर्द की शिकायत होने पर भी इसका सेवन न करें।  इतना ध्यान रहे कि अधिक मात्रा में जामुन रस लेने से शरीर में जकड़न की संभावना रहती है। इसे कभी खाली पेट नहीं लेना चाहिए और न ही इसके बाद दूध पीना चाहिए। 


1. एलोवेरा जूस (Aloevera juice) :

जामुन ज्यूस बनाने की विधि

सबसे पहले आप आवशयक्ता अनुसार एलोवेरा की पत्तियां ले और उसे अच्छी तरह पानी में धो लें। उसके बाद चाकू से उसके किनारे के कांटे वाले भाग काट कर निकाल दें। अब पत्तियों को सुविधानुसार छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लें, फिर पत्तियों के टुकडे लेकर उसके ऊपर का हरा छिलका निकाल कर अलग कर दें। ध्यान रहे ऐसा करते समय पत्तियों के गूदे के ऊपर की पीले रंग की पर्त भी साथ में निकाल दें, नहीं तो जूस में कड़वाहट रह जाएगी और आप उसका सेवन नहीं कर सकेंगे।
एलोवेरा के सफेद भाग को अलग करने के बाद उसे मिक्सी में डालें और दो मिनट के लिए मिक्सी को चला दें। इससे एलोवेरा की पत्तियों का जेल जूस में बदल जाएगा। अब इसे गिलास में निकालें और इसमें उचित मात्रा में पानी और नमक मिला लें। यदि आप चाहें, तो इसमें फलों का जूस भी मिला सकते हैं। ओरेंज (संतरा) जूस इसके स्वाद को टेस्टी बना देता है। इससे एलोवेरा जूस स्वादिष्ट हो जाएगा और आपको पीने में दिक्कत नहीं होगी। आइस क्यूब डालकर भी ले सकते हैं। अगर आप डायट पर हैं तो इस एलोवेरा जूस को रोज पियें।
लाभ- यह ठंडा होता है। इसे पीना स्किन और बालों के ही लिए बहुत ही फायदेमंद है। शरीर की इम्यूनिटी पावर और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में भी ये मददगार होता है। यह दिल और लिवर से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
(1) प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है : एलोवेरा में 18 धातु, 15 एमिनो एसिड और 12 विटामिन मौजूद होते हैं जो खून की कमी को दूर कर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं।
(2) चुस्ती-स्फूर्ति : एलोवेरा के कांटेदार पत्तियों को छीलकर रस निकाला जाता है। 3 से 4 चम्मदच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है।
(3) पेट रोग : एलोवेरा का जूस पीने से कब्ज की बीमारी से फायदा मिलता है। एलोवेरा का जूस बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग व पेट के विकारों को दूर करता है। एलोवेरा का जूस ब्लड को प्यूरीफाई करता है साथ ही हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है।
(4) बाल : एलोवेरा का जूस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ्पय होते हैं।
(5) शुगर : एलोवेरा का जूस पीने से शरीर में शुगर का स्तर उचित रूप से बना रहता है।
(6) जोडों का दर्द : एलोवेरा के जूस का हर रोज सेवन करने से शरीर के जोडों के दर्द को कम किया जा सकता है।
(7) चर्म रोग : एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वगचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों, आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है।
(8) इन्फेक्शन : एलोवेरा का जूस पीने से मच्छर काटने पर फैलने वाले इन्फेक्शन को कम किया जा सकता है।
(9) व्हाईट ब्लड सेल्स : शरीर में वहाईट ब्लड सेल्स की संख्या को बढाता है।
(10) जवान और खूबसूरत : एलोवेरा का जूस त्वचा की नमी को बनाए रखता है जिससे त्वचा स्वस्थ दिखती है। यह स्किन के कोलाजन और लचीलेपन को बढाकर स्किन को जवान और खूबसूरत बनाता है। एलोवेरा के जूस का नियमित रूप से सेवन करने से त्वचा भीतर से खूबसूरत बनती है और बढती उम्र से त्वचा पर होने वाले कुप्रभाव भी कम होते हैं। एलोवेरा को सौंदर्य निखार के लिए हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट जैसे एलोवेरा जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम आदि में प्रयोग किया जा रहा है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 10 से 30 मिली.।
एहतियातकफ की शिकायत है, तो मानसून या सर्दी के मौसम में इसे नहीं पीना चाहिए, क्योंकि कई बार इससे गले में खराश, खांसी और सीने में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। एलोवेरा शरीर में नए सेल्स को बनाता है और उनका ग्रोथ भी करता है, इसलिए कैंसर रोगी इसे न पिएं।

2. आंवला जूस (Amla juice) :
लाभ- वजन कंट्रोल करता है, आंखों, बालों और स्किन के लिए फायदेमंद होता है। इम्यूनिटी और डाइजेशन सिस्टम को मज़बूत बनाता है। शरीर की गर्मी को बाहर करने के साथ-साथ एसिडिटी और कोलेस्ट्रॉल की शिकायत भी दूर करता है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 20 से 40 मिली.।
एहतियातगर्मियों में तो इसे कोई भी व्यक्ति पी सकता है, लेकिन कफ की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को बारिश और ठंड के दिनों में इससे परहेज करना चाहिए।

5. जवारे का रस (Jaware ka ras) :
लाभ- खून की कमी दूर करता है। कैंसर मरीजों के लिए फायदेमंद होता है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 40 मिली.।
एहतियातडायबिटीज की शिकायत हो, तो इससे परहेज करें।

Source : http://www.ajabgjab.com/2015/10/herbal-juices-benefits-and-side-effects.html


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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पनीर पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परहेज पराठा परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाक-कला पाचक पाचन पायरिया पारिजात पालक-Spinach पित्त पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पेचिश पेट के कीड़े पेट रोग पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पौरुष प्याज-Onion प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा-इम्युनिटी-Immunity प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेमिका प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट ग्रन्थि-Prostate Gland प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy फफूंद-Fungi फरास फल फल-Fruit फाइबर फिटकरी फिटकरी-Alum फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फैट फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोलिक एसिड-Folic Acid फ्लू फ्लू-Flu बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ-White Goose Foot बदबू बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बला बवासीर बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झडऩा-Hair Falling बीजबंद बीमारियों के अनुसार औषधियां बुखार बेल बेल – Bael बेली बैक्टीरिया ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगोष्ठ भय भस्मक रोग भावनात्मक भूख भूमि आंवला/भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भोजनलीवर मकोय-Soleanum nigrum मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मर्दाना मलेरिया (Malaria) मस्तिष्क मस्से-WARTS महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईग्रेन (आधासीसी)-Migraine माईंड सैट माजूफल मानसिक मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक-धर्म मासिकस्राव मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्राशय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी यकृत यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम योग विज्ञापन योन योनि योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनी योनी संकोचन यौन यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूसी मोटापा रेचक रोग प्रतिरोधक लकवा लक्ष्मी लंच लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाभ लिंग लीवर लीवर-Lever लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्यूकोरिया वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन/जंगली तुलसी वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra विलायती नीम विष विषखपरा वीर्य वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन-Marital वैश्यावृति व्यायाम शंखपुष्पी शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शहद शहद-Honey शारीरिक शीघ्र पतन शीघ्रपतन शुक्राणु-Sperm शुगर शोथ श्योनाक-Oroxylum indicum श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea षड़यंत्र संकुचन संक्रमण संखाहुली संतरा-Orange संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सब्जि सब्जियां-Vegetables संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी जुकाम-Cold सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवेदना साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिजेरियन सिर दर्द सिरदर्द सिरोसिस सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वास्थ्य हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार-Night Jasmine हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन-Masturbation हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हैजा 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