Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

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डिप्रेशन (Depression): अनुभवसिद्ध (Experienced) सफल होम्योपैथिक उपचार

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
WhatsApp No. 8561955619 (10AM to 10PM)
@>>>>>>>>>> हम अनेक लोगों से सुनते रहते हैं कि मैं डिप्रेशन में हूं। हकीकत यह है कि वर्तमान में तेजी से भागती दौड़ती दुनिया में अधिकतर लोग किसी न किसी चाहत, असफलता या उपलब्धि (Desire, Failure or Achievement) के दबाव एवं तनाव (Pressure and Stress) में जीने को विवश हैं। जब यह दबाव एवं तनाव अधिक बढकर अनियंत्रित हो जाता है तो अधिकतर लोग अत्यधिक निराश हो जाते हैं। निराश व्यक्ति को कुछ भी नहीं सूझता और कुछ निराश लोग इतने दु:खी हो जाते हैं कि उन्हें अपना जीवन निरर्थक लगने लगता है। सामान्यत: इसी अवस्था को डिप्रेशन (Depression) कहा जाता है। जिसके कारण अनेक लोगों के मन में आत्मघात (Suicide) के विचार भी आने लगते हैं। जिनमें से कुछ आत्महत्या भी कर लेते हैं। अत: इस स्थिति का समय रहते समाधान करना बहुत जरूरी होता है।


[@] *नोट: कृपया सम्पूर्ण लेख को ध्यान से पढें और यदि पढ़ने के बाद यह उपयोगी लगे तो जनहित में इसे लोगों को आगे फॉरवर्ड/शेयर किया जा सकता है!* [@]


@>>>>>>>>>> दुष्प्रभाव रहित (Without side effect) होम्योपैथित दवाइयों से डिप्रेशन का सफल उपचार: होम्योपैथिक दवाइयों का परीक्षण चूहे, खरगोश या मेंढकों पर नहीं, बल्कि स्वस्थ लोगों पर किया जाता है। अत: परीक्षण के दौरान यह नोट किया जाता है कि किसी दवा विशेष का मानव के शरीर के साथ-साथ मन पर क्या और कैसे प्रभाव पड़ता है। इसी कारण होम्योपैथिक दवाइयां मनुष्य के मन पर बहुत गहरा एवं सकारात्मक असर करती हैं। अत: यह समझना और समझाना जरूरी है कि होम्योपैथी में मन से जुड़े विकारों या गड़बड़ियों के उपचार की बहुत सारी दवाइयां उपलब्ध हैं। मगर सही दवा, दवा की शक्ति एवं मात्रा का चयन किसी अनुभवी होम्योपैथ द्वारा डिप्रेशन की स्थिति से पीड़ित व्यक्ति के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों को जानकर तथा विश्लेषण करके ही किया जा सकता है। डिप्रेशन के रोगी तथा रोगी के परिजनों को रोगी की हर प्रकार की छोटी-बड़ी लाक्षणिक जानकारी डॉक्टर को बताना बहुत जरूरी होता है। अन्यथा रोगी का सही उपचार असंभव है। होम्योपैथिक दवाइयां व्यक्ति के अंदर स्थापित उस कारण को दूर करने में सक्षम होती हैं, जो डिप्रेशन सहित किसी भी बीमारी का मूलाधार/कारण होता है। यहां कुछ होम्योपैथक दवाइयों के लक्षणानुसार नाम दिये जा रहे हैं, जो डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को स्वस्थ करने में सहायक हो सकती हैं। मैं जिन दवाइयों का उल्लेख कर रहा हूं, मैंने उन दवाइयों के सहयोग से डिप्रेशन के शिकार दर्जनों रोगियों को स्वस्थ किया हैं। आगे बढने से पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यद्यपि होम्योपैथिक दवाइयों के कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं, लेकिन यह बतलाना कानूनी बाध्यता है कि किसी योग्य होम्योपैथ के परामर्श के बिना खुद अपना इलाज करने का प्रयास न करें।


1. अर्जेंटम नाइट्रिकम: जब रोगी को मानसिक और शारीरिक रूप से खुद पर नियंत्रण रख पाना मुश्किल या असंभव हो जाये। रास्ते में चलते समय ऊंची इमारतों के पास से गुजरते समय ऊंची इमारतों की ओर देखने से रोगी को डर लगने लगे। रोगी को पुल पार करने से डर लगता है। ऊंची इमारतों के ऊपर से नीचे देखने से भी रोगी डरता है। उसे हमेशा मृत्यु का भय घेरे रहता है। अनेक बार रोगी अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी किया करता है। रोगी को किसी के इंतजार से घबराहट होती है। उसे मीठे की विशेष चाहत होती है। किसी बड़े या अनजान व्यक्ति से मिलने जाने या किसी समारोह में जाने या किसी प्रकार का भाषण देने जाने से पहले रोगी के मन में इतनी व्याकुलता, घबराहट और डर की स्थिति पैदा हो जाती है कि उसे बार-बार पेशाब और शौच जाना पड़ता है। यह सब रोगी के स्नायुमंडल की कमजोरी के प्रमाण हैं। ऐसे लक्षणों के आधार पर इस दवाई से मैंने अनेक रोगियों को सम्पूर्ण आरोग्य प्रदान किया है। यहां तक कि यौन सम्बन्धों में घबराहट के मामले में भी यह दवा अत्यंत उपयोगी है।


2. आर्सेनिक एल्बम: जिस रोगी में बेचैनी, घबराहट, मृत्युभय और अत्यधिक कमजोरी के लक्षण दिखाई दें। रोगी को बार-बार थोड़ी थोड़ी प्यास लगती रहती है। रोगी कितनी ही कमजोर और नि:शक्त हो गया हो, लेकिन वह एक जगह टिक कर बैठ नहीं सकता। रोगी को हमेशा मृत्यु का भय सताता रहता है, वह मन में सोचता और अपने परिवारजनों को बोलता रहता है कि दवा खाना बेकार है, अब वह नहीं बचेगा। उसे अकेले रहने से डर लगता है। जब रोगी भूत-प्रेत दिखने की बातें करे या उसके मन में आत्महत्या करने की प्रबल इच्छा हो तो यह दवा अत्यंत उपयोगी होती है। अनेक ऐसे रोगी जो ऊपरी हवा या भूत-प्रेत का साया बतलाकर नारकीय जीवन जीने को विवश कर दिये जाते हैं। उनके लक्षण मिलाने करने पर यह दवा चमत्कार जैसा प्रभाव दिखाती है। मैंने अनेक ऐसी औरतों को स्वस्थ करने में सफलता अर्जित की है। जिन्हें भूतग्रस्त बतलाकर प्रताड़ित किया जाता था। जिन्हें भोपाओं के हवाले करके प्रताड़नाएं दी जाती थी।


3. एसिड फॉस: वियोग, जुदाई, प्रेम में असफलता, शोक, दु:ख, आत्मीयजन की मृत्यु, प्रेम में धोखा या असफलता आदि के कारण अनेक प्रकार की मानसिक और शारीरिक परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं। जैसे-चिंताग्रस्त रहना और थकावट, पर्याप्त नींद नहीं आना, अचानक पसीना-पसीना हो जाना, किसी भी काम या विषय में मन नहीं लगना, हतोत्साह के साथ रोगी दु:खी और व्याकुल रहने लगे। शुरुआत मानसिक कमजोरी से होती है, जो बाद में शारीरिक कमजोरी में भी बदल जाती है। यदि तत्काल ध्यान नहीं दिया जाये तो रोगी इस कदर डिप्रेशन का शिकार हो जाता है कि वह अनेक बार अपने मित्रों, ग्राहकों, पड़ोसियों, सहकर्मियों और परिजनों तक के नाम भूल जाता है। छोटा-मोटा हिसाब-किताब तक नहीं कर सकता। मन अत्यधिक शिथिल हो जाता है। ऐसी अवस्था में यह दवा उपयोगी होती है। वियोग, जुदाई और असफल प्रेम सम्बन्धों के कारण अवसादग्रस्त अनेक रोगियों का मैंने सफल उपचार किया है। जिसमें अन्य दवाओं के साथ इस दवा की भी अहम भूमिका रही।


अन्य दवाइयां: उपरोक्त के अलावा लक्षणानुसार नेट्रम म्यूर, आॅरम मैटालिकम, स्टेफिसेग्रिया, नक्स वोमिका, इग्नेशिया, विरेट्रम एल्बम, कल्केरिया कार्बोनिका आदि होम्योपैथक अनेक दवाइयां रोगी की मानसिक एवं शारीरिक स्थिति के अनुसार उपयोगी हो सकती हैं। जिनका निर्धारण अनुभवी होम्योपैथ आसानी से कर सकते हैं।


कमजोरी का उपचार: डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से अत्यधिक कमजोर हो जाते हैं। अत: उनकी कमजोरी के निदान हेतु मैं शुद्ध, ताजा एवं आॅर्गेनिक देशी दर्जनों जड़ी बूटियों से निर्मित 'Rejuvenation Powder-कायाकल्प पाउडर' एवं 'Stimulator (Recharge and Stimulate Yourself)' का भी सेवन करवाता हूं। जिससे कुछ ही महिनों में रोगी फिर से अपने आप को स्वस्थ और तरोताजा अनुभव करने लगता है।


लेख का मकसद: इस लेख को लिखने का मूल मकसद आम लोगों/पाठकों में यह समझ पैदा करना है कि जब किसी कारण से किसी भी व्यक्ति/परिजन को मानसिक परेशानी हो तो उसे डिप्रेशन कहकर हल्के से नहीं लें या उसे कैमीकलयुक्त दवाइयों के हवाले नहीं करें, बल्कि ऐसे हालात में पेशेंट के प्रति विशेष अपनापन, सहानुभूति और देखरेख का भाव रखते हुए उसे किसी योग्य होम्योपैथ को दिखायें तो आश्चर्यजनक परिणाम मिलेंगे। *लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'* 21.11.2018, (यह लेख विशेष रूप से मेरे द्वारा संचालित वाट्सएप ग्रुप *Health Care Friend-स्वास्थ्य रक्षक सखा* के सदस्यों के लिये लिखा गया है।) जिसका लिंक: https://chat.whatsapp.com/HHcJSKjEpKsAFzk2sZAg53 यह लिंक कुछ दिनों बाद बंद कर किया जा सकता है।


*नोट:* किसी भी पुरानी या लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी से पीड़ित लोगों को, अपनी बीमारी को अपनी नियति मानकर निराश या हताश (Frustrated or Depressed) होने की जरूरत नहीं है। देशी जड़ी बूटियों और होम्योपैथी में इलाज संभव है। अपने आपपास के किसी अनुभवी डॉक्टर से सम्पर्क किया जा सकता है। देशभर में अनेकानेक अनुभवी तथा योग्य होम्योपैथ/आयुर्वेद के डॉक्टर उपलब्ध हैं।


*हां अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु मेरी निम्न वेबसाइट/Facebook Page पर विजिट/क्लिक कर सकते हैं:-*


*Online Doctor:* Only Online Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) Dr. P. L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा) Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM*
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हस्तमैथुन की लत (Masturbation Addiction) छुड़ाने का 100% उपचार

समस्या: सर मुझे हस्तमैथुन करने की ऐसी लत लग चुकी है कि मैं लागातार प्रयास के बाद भी इसे छोड़ नहीं पा रहा हूं। अनेक ऐलोपैथ डॉक्टर कहते हैं कि हस्तमैथुन करने से कोई नुकसान नहीं होता है। इसका कोई इलाज नहीं है और विवाह ही इसका समाधान है। जबकि सर हस्तमैथुन की लत के कारण मैं मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होता जा रहा हूं। इस कारण अपराधबोध का शिकार भी हो चुका हूं? सर मुझे उचित परामर्श एवं समाधान बताने का कष्ट करें।-मनीष (बदला हुआ नाम), रायपुर, छत्तीसगढ।

समाधान: मनीष जी, आपकी बात सही है। हस्तमैथुन की लत के आदी हजारों युवक-युवतियां आप ही की जैसी स्थिति में जी रहे हैं। यदि आप किसी ऐलोपैथ डॉक्टर से सम्पर्क करेंगे तो निश्चय ही उनकी ओर से हस्तमैथुन का कोई उपचार या समाधान बताने के बजाय, आपको निम्न सला​ह दी जायेंगी:-

(1)—हस्तमैथुन करना कोई बीमारी नहीं है।
(2)—हस्तमैथुन करने से कोई नुकसान नहीं होता है।
(3)—हस्तमैथुन की लत छोड़ने के लिये जल्दी शादी करें।

डॉक्टर्स की उक्त सलाह अपनी जगह पर हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मुझ से सम्पर्क करने वाले हस्तमैथुन की लत के आदी युवक अपने आप को शारीरिक कमजोरी, यौन उत्तेजना में कमी, आत्मविश्वास में कमी, अनिद्रा, कमजोर पाचन क्रिया, भूख की कमी, लैंगिक शिथिलता, स्वत: वीर्यपात और शीघ्रपतन के शिकार बताते रहते हैं।

अनुभव यही बतलाता है कि हस्तमैथुन के साईड इफैक्ट भयावह हैं। जहां तक उचित परामर्श और उपचार का सवाल है तो:-

उचित परामर्थ: अपने विश्वसनीय डॉक्टर को बेहिचक अपनी सभी तकलीफों के बारे में विस्तार से सही, सत्य और पूर्ण जानकारी से अवगत करावें। जिससे आपका समुचित परामर्श दिया जा सके। 


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परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच।
My WhatsApp No.: 85-619-55-619
क्या आप अपने स्वास्थ्य की रक्षा हेतु अपने व्हाट्सएप पर
नियमित रूप से हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करना चाहते हैं?
यदि हां तो आप से उम्मीद की जाती है कि-
1. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 को अपने मोबाईल में सेव करें।
2. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 पर हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करने हेतु
या स्वास्थ्य परामर्थ हेतु रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
3. आपका परिचय जानने के बाद आपकी स्वास्थ्य रक्षा ​हेतु
हेल्थ बुलेटिन भेजा जाने लगेगा।
लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।
अन्यथा आपके नम्बर को ब्लॉक कर दिया जायेगा।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
My Whatsapp No. : 85-619-55-619

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उपचार: होम्योपैथी और आयुर्वेदिक औषधियों से हस्तमैथुन की लत और हस्तमैथुन के सभी तरह के साईड इफैक्ट्स का उपचार सम्भव है। मैं बताना चाहूंगा कि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि होम्योपैथी में हस्तमैथुन की लत का 100 फीसदी उपचार सम्भव है। लेकिन हस्तमैथुन के कारण जन्मी अन्य सभी परेशानियों का भी उपचार भी उतना ही जरूरी है, जितना कि हस्तमैथुन का जरूरी है। लेकिन जब तक रोगी का पाचनतंत्र, लीवर, तिल्ली, गुर्दा और मानसिक संतुलन सही से उपचार नहीं होगा, हस्तमैथुन का कोई भी इलाज सफल नहीं हो सकता।

*-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619, 01.10.2017*
स्वास्थ्यवर्धक खजूर (छुहारा छुआरा)
"होली के बाद खजूर खाना हितकारी नहीं है।"
"लॉ ब्लड प्रेशर/कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें। फिर इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबालें। उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं और छुआरों को चबा-चबा कर खाएं। कुछ ही दिनों में लॉ ब्लड प्रेशर से छुटकारा मिल जायेगी।"
अरबी देशों में खजूर की व्यवस्थित रूप से खेती के प्रमाण ईसा से 3000 वर्ष पूर्व के हैं। चार खजूरों में लगभग 230 कैलोरी, 2 ग्राम प्रोटीन, 62 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 570 मिली ग्राम पोटेशियम और 6 खाद्य रेशे होते हैं। साथ ही इसमें कोलेस्ट्राल और वसा की मात्रा बिलकुल नहीं होती इस कारण यह एक आदर्श फल माना जाता है। 
सर्दियों की मेवा के रूप में प्रकृति ने हमें बहुत सी चीजें दी हैं, जिनमें खजूर की मिठास का भी प्रमुख स्थान रहा है। खजूर खाने से शरीर की आवश्यक धातुओं को बल मिलता है। यह छाती में एकत्रित कफ को निकालता है। खजूर दिल, दिमाग, कमर दर्द तथा आंखों की कमजोरी के लिए बहुत गुणकारी है। 
खजूर में 60 से 70 प्रतिशत तक शर्करा होती है, जो गन्ने की चीनी की अपेक्षा बहुत पौष्टिक व गुणकारी है। स्वादिष्ट होने के साथ ही सेहत की दृष्टि से भी खजूर बहुत गुणकारी है।

जानिये खजूर के स्वास्थ्यवर्धक गुण :


खजूर की ऊपरी सतह चिकनी होने से धूल मिट्टी बैठने की संभावना होती है। इसलिए खजूर खरीदते समय सही पैकिंग वाला ही खरीदना चाहिए और प्रयोग में लाने से पहले साफ़ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए।
आंखों के रोग : खजूर की गुठली का सुरमा आंखों में डालने से आंखों के रोग दूर होते हैं।
खांसी और बलगम : छुहारे को घी में भूनकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी और बलगम में राहत मिलती है।
वीर्यवर्धक शुक्राल्पता दूर करता है : खजूर उत्तम वीर्यवर्धक है। गाय के घी अथवा बकरी के दूध के साथ लेने से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त अधिक मासिक स्राव, क्षयरोग, खाँसी, भ्रम(चक्कर), कमर व हाथ पैरों का दर्द एवं सुन्नता तथा थायराइड संबंधी रोगों में भी यह लाभदायी है।
कब्ज नाशक खजूर का अचार : सुबह-शाम तीन छुहारे खाकर बाद में गर्म पानी पीने से कब्ज दूर होती है। खजूर का अचार भोजन के साथ खाया जाए तो अजीर्ण रोग नहीं होता तथा मुंह का स्वाद भी ठीक रहता है। खजूर का अचार बनाने की विधि थोड़ी कठिन है, इसलिए बना-बनाया अचार ही ले लेना चाहिए।
मलावरोध : रात को भिगोकर सुबह दूध के साथ लेने से पेट साफ हो जाता है।
नशे का जहर : किसी को नशा करने से शरीर में हानी हो गयी है। नशे का जहर शरीर में है। अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ रही हो। ऐसे लोग भी अस्पताल ले जाने में हो रही देरी के दौरान तुरंत खजूर का सेवन करायें और जल्दी से अस्पताल ले जायें। 
शारीरिक वं मानसिक कमजोरी दूर होती है : खजूर 200 ग्राम, चिलगोजा गिरी 60 ग्राम, बादाम गिरी 60 ग्राम, काले चनों का चूर्ण 240 ग्राम, गाय का घी 500 ग्राम, दूध दो लीटर और चीनी या गुड़ 500 ग्राम। इन सबका पाक बनाकर 50 ग्राम प्रतिदिन गाय के दूध के साथ खाने से हर प्रकार की शारीरिक वं मानसिक कमजोरी दूर होती है।
खुलकर मासिक धर्म : छुहारे खाने से मासिक धर्म खुलकर आता है और कमर दर्द में भी लाभ होता है।
दांतों का गलना रुक जाता है : छुहारे खाकर गर्म दूध पीने से कैलशियम की कमी से होने वाले रोग, जैसे दांतों की कमजोरी, हड्डियों का गलना इत्यादि रूक जाते हैं।
मस्तिष्क व हृदय की कमजोरी : रात को खजूर भिगोकर सुबह दूध या घी के साथ खाने से मस्तिष्क व हृदय की पेशियों को ताकत मिलती है। विशेषतः रक्त की कमी के कारण होने वाली हृदय की धड़कन व एकाग्रता की कमी में यह प्रयोग लाभदायी है।
पुराने घाव भर जाते हैं : पुराने घावों के लिए खजूर की गुठली को जलाकर भस्म बना लें। घावों पर इस भस्म को लगाने से घाव भर जाते हैं।
मधुमेह रोगियों के लिए : मधुमेह के रोगी जिनके लिए मिठाई, चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का इस्तेमाल कर सकते हैं। खजूर में वह अवगुण नहीं है, जो गन्ने वाली चीनी में पाए जाते हैं।
बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो : छुहारे खाने से पेशाब का रोग दूर होता है। बुढ़ापे में पेशाब बार-बार आता हो तो दिन में दो छुहारे खाने से लाभ होगा। छुहारे वाला दूध भी लाभकारी है। यदि बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो उसे भी रात को छुहारे वाला दूध पिलाएं। यह मसानों को शक्ति पहुंचाते हैं।
मांस की वृद्धि : खजूर में शर्करा, वसा (फैट) व प्रोटीन्स विपुल मात्रा में पाये जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मांस की वृद्धि होकर शरीर पुष्ट हो जाता है।
सिर की जुएं : खजूर की गुठली को पानी में घिसकर सिर पर लगाने से सिर की जुएं मर जाती हैं।
लॉ ब्लड प्रेशर/रक्तचाप : लॉ ब्लड प्रेशर/कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें। फिर इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबालें। उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं और छुआरों को चबा-चबा कर खाएं। कुछ ही दिनों में लॉ ब्लड प्रेशर से छुटकारा मिल जायेगी।

परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor. 
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
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Health Solutions For India
22 October 2013 · 
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कई लोगों का मश्वरा मिलने के बाद यह लेख आप सब की ख़िदमत में पेश कर रहा हूँ। इस में नामर्दानगी को दूर करने के 122 तरीक़े बताया गया है। उम्मिद है कि जिस किसी को भी यह परेशानी होगी। इस से वह फ़ायदा उठाऐंगे। तो आइये सब से पहले इस को पूरा पढ लिया जाए।  
नपुंसकता
(IMPOTENCY)

परिचय: जो व्यक्ति यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है, वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है। इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी, किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता, मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता, तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े होते हैं और कई तरह के पारिवारिक मन मुटाव हो जाते हैं। बात यहां तक भी बढ़ जाती है कि आखिरी में उन्हें अलग होना पड़ता है। 

कुछ लोग शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फसकर, सेक्स के शिकार होकर मानसिक रूप से नपुंसक हो जाते हैं। मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डर जाते हैं। सहवास भी नहीं कर पाते और मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है।

कारण: नपुंसकता के दो कारण होते हैं। शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है। नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता, तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है। हस्तमैथुन, ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसक के शिकार होते हैं। ऐसे नवयुवकों की सहवास की इच्छा कम हो जाती है।

लक्षण: मैथुन के योग्य ना रहना, नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना, या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना, इसका दूसरा लक्षण है। मैथुन अथवा बहुमैथुन के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में शिशन पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। अधिक अमचूर खाने से धातु दुर्बल होकर नपुंसकता आ जाती है।

1. हेल्थ टिप्स:
• नपुंसकता से परेशान रोगी को औषधियों खाने के साथ कुछ और बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे सुबह शाम किसी पार्क में घूमना चाहिए, खुले मैदान में, किसी नदी या झील के किनारे घूमना चाहिए। सुबह सूर्य उगने से पहले घूमना ज्यादा लाभदायक है। सुबह साफ पानी और हवा शरीर में पहुंचकर शक्ति और स्फूर्ति पैदा करती है। इससे खून भी साफ होता है।
• नपुंसकता के रोगी को अपने खाने (आहार) पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। आहार में पौष्टिक खाद्य पदार्थों घी, दूध, मक्खन के साथ सलाद भी ज़रूर खाना चाहिए। फ़ल और फ़लों के रस के सेवन से शारीरिक क्षमता बढ़ती है। नपुंसकता की चिकित्सा के चलते रोगी को अश्लील वातावरण और फिल्मों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इसका मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इससे बुरे सपने भी आते हैं, जिसमें वीर्यस्खलन होता है।

2. ईसबगोल:
• ईसबगोल की भूसी 5 ग्राम और मिश्री 5 ग्राम दोनों को रोज सुबह के समय खायें और ऊपर से दूध पी लें। इससे शीध्रपतन की विकृति खत्म होती है।
• ईसबगोल की भूसी और बड़े गोखरू का चूर्ण 20-20 ग्राम तथा छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण 5 ग्राम इन सबका चूर्ण बनाकर रोज 2 चम्मच गाय के दूध के साथ लें।

3. सफेद प्याज:
• सफेद प्याज़ का रस 8 मिलीलीटर, अदरक का रस 6 मिलीलीटर और शहद 4 ग्राम, घी 3 ग्राम मिलाकर 6 हफ्ते खाने से नपुंसकता खत्म हो जाती है।
• सफेद प्याज़ को कूटकर दो लीटर रस निकाल लें। इसमें 1 किलो शुद्ध शहद मिलाकर धीमी आग पर पकायें, जब सिर्फ शहद ही बच कर रह जाए, तो आग से उतार लें और उसमें आधा किलो सफेद मूसली का चूर्ण मिलाकर चीनी या शीशे के बर्तन में भर दें। 10 से 20 ग्राम तक दवा सुबह-शाम खाने से नामर्दी मिट जाती है।

4. जामुन:
जामुन की गुठली का चूर्ण रोज गर्म दूध के साथ खाने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द हो जाता है।

5. छुहारे:
• छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और उसी दूध को पीने से नपुंसकता खत्म होती है।
• रात को पानी में दो छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे को दूध के साथ खायें।

6. बादाम:
• बादाम की गिरी, मिश्री, सौंठ और काली मिर्च कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर, कुछ हफ्ते खाने से और ऊपर से दूध पीने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द होता है।
• बादाम को गर्म पानी में रात में भींगने दें। सुबह थोड़ी देर तक पकाकर पेय बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर रोज़ पीऐं, इससे मूत्रजनेन्द्रिय संस्थान के सारे रोग खत्म हो जाते हैं।

7. गाजर:
• रोज गाजर का रस 200 मिलीलीटर पीने से मैथुन शक्ति (संभोग) बढ़ती है।
• गाजर का हलवा, रोज़ 100 ग्राम खाने से सेक्स की क्षमता बढ़ती है।

8. कौंच:
• कौंच के बीज के चूर्ण में तालमखाना और मिश्री का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 3-3 ग्राम की मात्रा में खाने और दूध के साथ पीने से नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।
• कौंच के बीजों की गिरी तथा राल ताल मखाने के बीज। दोनों को 25 - 25 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर छान लें, फिर इसमें 50 ग्राम मिस्री मिला लें। इसमें 2 चम्मच चूर्ण रोज़ दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

9. गिलोय: गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला सभी बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण रोज़ मिस्री और घी के साथ खाने से प्रबल मैथुन शक्ति विकसित होती है।

10. जायफल:
• जायफल का चूर्ण लगभग आधा ग्राम शाम को पानी के साथ खाने से 6 हफ्ते में ही धातु (वीर्य) की कमी और मैथुन में कमजोरी दूर होगी। 
• जायफल का चूर्ण एक चौथाई चम्मच सुबह - शाम शहद के साथ खाऐं और इसका तेल सरसों के तेल के मिलाकर शिश्न (लिंग) पर मलें।

11. बेल:
• बेल के पत्तों का रस 20 मिली लीटर निकालकर, उसमें सफेद जीरे का चूर्ण 5 ग्राम, मिस्री का चूर्ण 10 ग्राम के साथ खाने और दूध पीने से शरीर की कमजोरी ख़त्म होती है।
• बेल के पत्तों का रस लेकर, उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर शिश्नि पर 40 दिन तक लेप करने से नपुंसकता में लाभ होगा।

12. सफेद मूसली:
• सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मिलाकर, पीसकर चूर्ण बना कर रखें और चूर्ण बनाकर 5 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ खाने से शरीर की शक्ति और खोई हुई मैथुन शक्ति, वापस मिल जाती है।
• सफेद मूसली 250 ग्राम बारीक चूर्ण बना लें। उसे 2 लीटर दूध में मिलाकर खोया बना लें। फिर 250 ग्राम घी में डालकर इस खोए को भून लें। ठंडा हो जाने पर आधा किलो पीसकर शक्कर (चीनी) मिलाकर पलेट या थाली में जमा लें। सुबह -शाम 20 ग्राम खाने से काम शक्ति बढ़ती है।
• सफेद मूसली, सतावर, असगंध 50 - 50 ग्राम कूट छान कर, 10 ग्राम दवा सोते समय 250 मिली लीटर, कम गर्म दूध में खांड़ के संग मिलाकर लें।
• सफेद मूसली 20 ग्राम, ताल मखाने के बीज 200 ग्राम और गोखरू 200 ग्राम। तीनों को पीसकर चूर्ण बनाकर रखें, फिर इसमें से 5 ग्राम चूर्ण दूध के साथ खायें।
• सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मात्रा में कूट पीसकर चूर्ण बनाकर 6 ग्राम की मात्रा में खाने से नपुंसकता (नामर्दी) खत्म होती है।

13. चना: भीगे चने सुबह - शाम चबाकर खाने से ऊपर से बादाम की गिरी खाने से, मैथुन शक्ति बढ़ती है और नंपुसकता ख़त्म होती है।
14. शतावर:
• शतावर को दूध में देर तक उबाल कर मिस्री मिला लें और उस दूध को पीने से ही कुछ महीनों में नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म हो जाती है।
• शतावर, असगंध, एला, कुलंजन और वंशलोचन का चूर्ण बनाकर रखें। 3 ग्राम चूर्ण में 6 ग्राम शक्कर को मिलाकर खाने से और फिर ऊपर से दूध पीने से कुछ महीनों में नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।
• शतावर और असगन्ध के 4 ग्राम चूर्ण को दूध में उबाल कर पीने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।
• शतावर का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम को चीनी मिले दूध में, सुबह - शाम डालकर पीऐं, इससे नपुंसकता दूर होती है। शरीर की कमजोरी भी दूर होती है।

15. सेमल:
• सेमल के पेड़ की छाल के 20 मिली लीटर रस में मिस्री मिलाकर, पीने से शरीर में वीर्य और मैथुन शक्ति बढ़ती है।
• 10-10 ग्राम सेमल के चूर्ण और चीनी को 100 मिली लीटर पानी के साथ घोट कर सुबह-शाम लेने से बाजीकरण यानी संभोग शक्ति ठीक होती है और नपुंसकता भी दूर हो जाती है।

16. बड़ी गोखरू:
• बड़ी गोखरू का फांट या घोल सुबह-शाम लेने से काम शक्ति यानी संभोग की वृद्धि दूर होती है। 250 मिलीलीटर को खुराक के रूप में सुबह और शाम सेवन करें।
• बड़ा गोखरू और काले तिल, इन दोनों को 14 ग्राम की मात्रा में कूट-पीस लें। फिर इस को 1 किलो गाय के दूध में पकाकर खोआ बना लें। यह एक मात्रा है। इस खोयें को खाकर ऊपर से 250 मिली लीटर गाय के निकाले दूध के साथ पी लें। 40 दिन तक इसको खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
• 25 ग्राम बड़ी गोखरू के फल का चूर्ण, 250 मिली लीटर उबले पानी में डालकर रखें। इसमें से थोड़ा-थोड़ा बार-बार पिलाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
• बड़ी गोखरू के फल का चूर्ण 2 ग्राम को चीनी और घी के साथ सेवन करें तथा ऊपर से मिस्री मिले दूध का सेवन करने से कामोत्तेजना बढ़ती है।

17. गोखरू:
• हस्तमैथुन की बुरी लत से पैदा हुई नपुंसकता को दूर करने के लिए 1-1 चम्मच, गोखरू के फ़ल का चूर्ण और काले तिल को मिलाकर शहद के साथ दिन में 3 बार नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक सेवन करें। इससे नपुंसकता में लाभ होता है।
• गोखरू, कौंच के बीज, सफेद मूसली, सफेद सेमर की कोमल जड़, आंवला, गिलोय का सत और मिस्री, बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 10 ग्राम से लगभग 20 ग्राम तक चूर्ण दूध के साथ खाने से नपुंसकता और वीर्य की कमजोरी दूर होती है।
• गोखरू को 3 बार दूध में उबालकर तीनों बार सुखाकर चूर्ण बनाकर खाने से नपुंसकता दूर होती है।
• गोखरू का चूर्ण और तिल बराबर मिलाकर बकरी के दूध में पकाकर शहद में मिला लें और खायें। इससे अनेक प्रकार की नपुंसकता ख़त्म होती है।
• देशी गोखरू 150 ग्राम पीसकर छान लें। इसे 5 - 5 ग्राम सुबह - शाम शहद में मिलाकर चाटने से नपुंसकता (नामर्दी) में लाभ मिलता है।
• गोखरू, तालमखाना, शतावर, कौंच के बीजों की गिरी, बड़ी खिरेंटी तथा गंगरेन इन सबको 100 ग्राम की मात्रा में लेकर पीस लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम से 10 ग्राम तक की मात्रा में रात के समय फांककर ऊपर से गरम दूध पियें। 60 दिनों तक रोज़ खाने से वीर्य बढ़ता है और नपुंसकता दूर होती है।

18. विदारीकन्द:
• विदारीकन्द के चूर्ण को घी, दूध और गूलर के रस के साथ खाने से प्रौढ़ पुरुष भी नवयुवकों की तरह मैथुन शक्ति प्राप्त कर सकता है।
• 5 ग्राम विदारीकन्द को पीसकर लुगदी बना लें। इसे खाकर ऊपर से 5 ग्राम देशी घी और मिस्री मिलाकर, दूध के साथ पियें। यह बल और वीर्य को बढ़ाता है तथा इससे नपुंसकता दूर होती है।

19. सूखे सिंघाड़े: सूखे सिंघाड़े को कूट पीसकर घी और चीनी के साथ हलवा बनाकर खाने से कुछ ही हफ्ते में नपुंसकता ख़त्म हो जाती है।

20. तरबूज़: तरबूज़ के बीजों की गिरी 6 ग्राम, मिस्री 6 ग्राम मिलाकर, चबाकर खाने से और ऊपर से दूध पीने से शरीर में शक्ति विकसित होने से नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।

21. गेंदे के बीज: गेंदे के बीज 4 ग्राम और मिस्री 4 ग्राम को पीसकर कुछ दिनों तक खाने से वीर्य स्तंभन शक्ति का विकास होता है।

22. कैथ: कैथ के सूखे पत्तों का चूर्ण 6 ग्राम रोज़ खाकर ऊपर से मिस्री मिलाकर, दूध पीने से धातु (वीर्य) बढ़ता है।

23. उड़द:
• उड़द की दाल 40 ग्राम को पीसकर शहद और घी में मिलाकर खाने से पुरुष कुछ दिनों में ही मैथुन (संभोग) करने के लायक बन जाता है।
• उड़द की दाल के थोड़े से लड्डू बना लें। उसमें से 2-2 लड्डू खायें और ऊपर से दूध पी लें। इससे नपुंसकता दूर होती है।

24. इमली: इमली के बीजों को भून लें, फिर उनके छिलके अलग करके, उनका चूर्ण बनाकर रोज़ 3 ग्राम चूर्ण मिस्री के साथ खाने से वीर्य शक्ति बढ़ने लगती है और नपुंसकता दूर हो जाती है।

25. तुलसी:
• तुलसी की जड़ और ज़मीकन्द को पान में रखकर खाने से शीघ्रपतन की विकृति खत्म होती है। 
• धातु दुर्बलता में तुलसी के बीज 1 ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से लाभ मिलता है।
• तुलसी के बीज या तुलसी की जड़ के चूर्ण में पुराना गुड़ समान मात्रा में मिलाकर 3-3 ग्राम की गोली बना लें। इसकी 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के ताजे दूध के साथ लेते रहें। इससे नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।
• तुलसी की मंजरी या जड़ के 1 से 3 ग्राम बारीक चूर्ण में गुड़ मिलाकर ताजे दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है।

26. गंधक: गंधक और शहद को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को शिश्न (लिंग) पर लेप करें। इससे वीर्य स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है।

27. काली मूसली:
• काली मूसली का पाक बनाकर खाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
• काली मूसली 10 ग्राम की मात्रा में लेकर दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
• काली मूसली की जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम मिस्री मिले, हल्के गर्म दूध के साथ खाने से नपुंसकता में कुछ हद तक लाभ होता है।

28. काले तिल: काले तिल, सोंठ, पीपल, मिर्च, भारंगी और गुड़ समान मात्रा में मिलाकर काढ़ा बनायें। इस काढ़े को 21 दिनों तक पीने से शरीर की गर्मी बढ़ती है।

29. जावित्री: जावित्री डेढ़ ग्राम, जायफल 10 ग्राम, बड़ी इलायची 10 ग्राम और अफीम आधा ग्राम को मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इसके 2 ग्राम चूर्ण को शहद में मिलाकर सर्दियों में लगभग एक महीने तक खाने से नपुंसकता मिट जाती है। याद रहे, अफ़ीम नशाआवर है।

30. ग्वारपाठा: ग्वारपाठे का गूदा और गेहूं का आटा बराबर मात्रा में लेकर घी मिला लें। फिर इसके दुगुने वज़न के बराबर शक्कर (चीनी) लेकर हलुआ बनाकर खाने से 7 दिन में नपुंसकता दूर होती है।

31. गुलाबजल: 3 बोतल गुलाबजल में 10 ग्राम सोने का बुरादा डालकर कूटकर मिला लें। जब सब गुलाबजल उसमें समा जायें, तब निकालकर रख लें। लगभग आधा ग्राम मलाई में मिलाकर खाने से सहवास करने से जल्दी ही वीर्य पतन नहीं होता है।

32. अगर का चोया: अगर का चोया, पान में मिलाकर खाने से नामर्दी में लाभ होता है।

33. घी : सहवास से 1 घण्टा पहले शिश्न पर लगभग 1 ग्राम के चौथे भाग घी की मालिश करने से नपुंसकता नहीं रहती है।

34. मालकांगनी:
• मालकांगनी के तेल की 10 बूंदे नागबेल के पान पर लगाकर खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
नोट : औषधि खाने के साथ दूध और घी का प्रयोग ज्यादा करें।
• मांलकांगनी के बीजों को खीर में मिलाकर खाने से नपुंसकता मिट जाती है।
• मालकांगनी के दाने 50 ग्राम और 25 ग्राम शक्कर (शुगर) को आधा किलो गाय के दूध में डालकर आग पर चढ़ा दें। जब दूध का खोया बन जाए, तब उतारकर मोटी - मोटी गोली बनाकर रख लें और रोज़ 1 - 1 गोली सुबह - शाम गाय के दूध के साथ खायें। इससे नपुंसकता दूर होती है।

35. बड़ी कटेरी: बड़ी कटेरी की 25 ग्राम ताजी जड़ की छाल को गाय के दूध में उबालकर पीने से नपुंसकता मिट जाती है।
नोट : खटाई और बादीयुक्त समान ना खाऐं।

36. कलौंजी: कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नामर्दी मिट जाती है।

37. जदवार: जदवार 2 ग्राम खाने से काम शक्ति (संभोग) बढ़ती है।

38. जवासीद: जवासीद की गोंद को अकरकरा के साथ पीसकर तिल के तेल में मिलाकर लिंग पर लेप करने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।

39. धतूरा: धतूरे के बीज, अकरकरा और लौंग बराबर मात्रा में पीसकर चने के बराबर गोलियां बनाकर रोज सुबह-शाम 1-1 गोली का सेवन करें।

40. बहेड़े: बहेड़े का चूर्ण 6 ग्राम, 6 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर रोज़ खाने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर हो जाती है।

41. महुआ: महुए के 25 ग्राम फूलों को 250 मिली लीटर दूध में उबालकर पीने से कमजोरी की नपुंसकता (नामर्दी) मिट जाती है।

42. सेमर: सेमर की छोटी जड़ों को छाया में सुखाकर पका दें। पकाने के बाद इसकी जड़ों को खाने से नपुसंकता (नामर्दी) दूर होती है।

43. सुहागा: सुहागा, कूट और मैनसिल को बराबर मिलाकर चूर्ण बनाकर चमेली के रस और तिल के तेल में पकाकर लिंग पर मलें। इससे लिंग का टेढ़ापन दूर होता है।

44. गोरखमुण्डी:
• गोरखमुण्डी 75 ग्राम कूट छानकर इसमें 75 ग्राम खांड़ मिला लें। 10 ग्राम दवा सोते समय गर्म गर्म खांड़ मिले दूध के साथ लें।
• गोरखमुण्डी के फूलों के चूर्ण को नीम के रस के साथ लेने से नपुंसकता (नामर्दी) में लाभ होता है।

45. कुलिंजन: लगभग 2 ग्राम कुलिंजन के चूर्ण को 10 ग्राम शहद में मिलाकर खाने से और ऊपर से गाय के दूध में शहद को मिलाकर पीने से काम शक्ति बढ़ती है।

46. असगन्ध: 10 ग्राम असगन्ध नागौरी के बारीक चूर्ण को गाय के 500 मिली लीटर दूध में उबालें। जब 400 मिली लीटर दूध रह जाऐ, तब उसमें शहद मिलाकर 40 दिन तक पिऐं। इससे काम शक्ति बढ़ती है।

47. दालचीनी: दालचीनी 75 ग्राम कूटकर छान लें। 5 ग्राम को पानी में पीसकर सोते समय लिंग पर सुपारी (लिंग का अगला हिस्से) को छोड़कर लेप करें और 2 - 2 ग्राम को सुबह - शाम दूध के साथ सेवन करने से नपुंसकता (नामर्दी) में आराम मिलता है।

48. सीम्बल: सीम्बल की जड़ 100 ग्राम कूट छानकर 5 - 5 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम प्रयोग करने से नपुंसकता (नामर्दी) में आराम मिलता है।

49. मल्ल सिंदूर: मल्ल सिंदूर एक ग्राम का चौथा भाग, शहद और अदरक के रस को सुबह-शाम लें। इससे हस्तमैथुन से हुई नामर्दी दूर हो जाती है।

50. हल्दी: हल्दी और कपूर 10 - 10 ग्राम पीस लें, फिर 5 ग्राम को खुराक के रूप में सुबह-शाम दूध के साथ लेना चाहिए।

51. चनसूर: चनसूर 10 ग्राम को दूध में उबालकर मिस्री के साथ सुबह-शाम खाऐं। इससे संभोग की शक्ति बढ़ जाती है।

52. कुलिजंन: कुलिजंन को मुंह में रखकर चूसते रहने से भी काम शक्ति में वृद्धि होती है।

53. उशवा: जंगली उशवा के चूर्ण में 10 ग्राम का काढ़ा बनाकर रोज़ 1 मात्रा पीते रहने से  नपुंसकता दूर होती है।

54. छोटी माई: छोटी माई की दाल का चूर्ण 5 ग्राम से 10 ग्राम का काढ़ा बनाकर तैयार कर रोज़ 2 बार सेवन करने से लाभ होता है।

55. पटुओक (सन): पटुओक (सन) के बीज का तेल खाने कें काम में आता है। जिससे शरीर हुष्ट पुष्ट होता है, कामोत्तेजना बढ़ती है। इस तेल की मालिश से चोट मोच का दर्द भी जल्दी ठीक होता है।

56. लहसुन:
• नपुंसकता और कामशक्ति में कमजोरी आने पर 60 ग्राम लहसुन की कली को घी में तलकर रोजाना खाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
• लहसुन की एक पुतिया घी में भूनकर शहद मे साथ खाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
• रोज़ लगभग 20 दिन तक 4 - 5 लहसुन की कलियां दूध के साथ खाने से नपुंसकता में लाभ होता है।

57. प्याज़:
• प्याज़ के रस में घी और शहद मिला कर खाने से नपुंसकता दूर होती है। प्याज़ का रस 10 से 20 मिली लीटर रोज सुबह - शाम लें।
• प्याज़ के हिस्से का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम मिस्री मिले, दूध के साथ सुबह-शाम प्रयोग करने से कामोत्तेजना की वृद्धि होती है।

58. जबाद कस्तूरी: जबाद कस्तूरी शिश्न यानी लिंग पर लेप करने से संभोग करने में ज्यादा आनन्द मिलता है। मगर इससे गर्भधारण नहीं होता है।

59. अगर: अगर का पुराना सेंट 1 से 2 बूंद को पान में डालकर खाने से बाजीकरण होता है और नपुंसकता दूर होती है।

60. छोटी इलायची: बाजीकरण के लिए छोटी इलायची का चूर्ण लगभग आधे से दो ग्राम तक सुबह - शाम खाऐं या मिस्री मिले गर्म - गर्म दूध के साथ रोज़ रात को सोने से पहले खाऐं।

61. केवटी मोथा: केवटी मोथा के बीज 10 ग्राम पीसकर, मिस्री मिले गर्म गाय के दूध के साथ रोज़ शाम को पीने से नपुंसकता दूर हो जाती है।

62. फरहद: सफेद फूल वाले फरहद की जड़ पीसकर 5 से 10 ग्राम को ठंडे दूध के साथ सुबह शाम पिलाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।

63. सहजना (मुनगा): सहजना के फूलों को दूध में उबाल कर रोज़ रात को मिस्री मिलाकर पीने से नपुंसकता की बीमारी दूर होकर लाभ होता है।

64. गुंजा (करजनी): गुंजा (करजनी) की जड़ 2 ग्राम दूध में पकाकर भोजन से पहले रोज़ रात में खाने से पूरा लाभ होता है। वीर्य सम्बन्धी समस्त दोष दूर होते हैं।

65. केवांच (कपिकच्छू): केवांच (कपिकच्छू) के बीजों के बीच का हिस्सा का चूर्ण 2 से 6 ग्राम रोज़ रात को सोते समय मिस्री मिले गर्म दूध के साथ पीने से लाभदायक होता है।

66. अतिबला: अतिबला के बीज 4 से 8 ग्राम सुबह शाम मिस्री मिले गर्म दूध के साथ खाने से नपुंसकता में पूरा लाभ होता है।

67. पटेरा: पटेरा (एरफा) के फूल 3 से 6 ग्राम को घोंटकर पीसकर सुबह - शाम मिस्री मिले दूध के साथ खाने से वीर्य बढ़ता है।

68. जमालगोटा: जमालगोटा के तेल को लिंग के ऊपर लगाने से लाभ मिलता है।

69. तालमखाना: नपुंसकता को दूर करने के लियें तालमखाना के बीज का चूर्ण, 2 से 4 ग्राम केवाचं के बीज के साथ मिस्री मिले ताजे निकाले दूध के साथ सुबह - शाम पीने से लाभ होता है।

70. भंगरैया: भंगरैया के बीज मिस्री मिले गर्म दूध में डालकर दूध सेवन करने से नपुंसकता दूर होती है।

71. मधुरसा: मधुरसा की जड़ का रस 5 ग्राम से 10 ग्राम सुबह - शाम शहद के साथ खाने से शरीर मज़बूत बनाता है और कामोत्तेजना भी बढ़ती है।

72. विष्णुकान्ता: विष्णुकान्ता का रस 20 से 40 मिली लीटर या काढ़ा 40 से 80 मिली लीटर तक सुबह - शाम खाने से पूयमेह, शुक्र मेह, दुर्बल्यता (कमजोरी) आदि कष्ट दूर हो जाते है।

73. वनतुलसी: वनतुलसी के बीज 3 से 7 ग्राम लेकर मिस्री मिले गाय के दूध से लेने से लाभ होता है।

74. बड़ (बरगद):
• बड़ (बरगद) का दूध 20 से 30 बूंद रोज़ सवेरे बताशे या चीनी पर डालकर खाने से पुरुषत्व शक्ति बढ़ती है।
• नपुंसकता दूर करने के लिए बताशे में दूध की 5 -10 बूंदें सुबह - शाम रोज खाने से लाभ होता हैं।
• बरगद के पेड़ की कोंपले और गूलर के पेड़ की छाल 3 - 3 ग्राम और मिस्री 6 ग्राम इन सबको पीसकर लुगदी सी बना लें और 3 बार मुंह में रखकर खालें और ऊपर से 250 मिली लीटर दूध पी लें। 40 दिन तक खाने से वीर्य बढ़ता है और संभोग से ख़त्म शक्ति बढ़ती है।

75. सिरिस:
• सिरिस के फूलों का रस 20 से 40 मिली लीटर की मात्रा में सुबह - शाम मिस्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ होगा और इससे शीघ्रपतन में भी लाभ होगा।
• सिरिस के बीज का चूर्ण 1 से 2 ग्राम को मिस्री मिले दूध के साथ सुबह - शाम लेने से वीर्य गाढ़ा होता है।
• सिरिस की छाल का चूर्ण 3 से 6 ग्राम घी में शक्कर मिलाकर गर्म दूध के साथ 2 बार खाऐं। अगर फूलों का रस, बीज का चूर्ण और छाल का चूर्ण एक साथ मिस्री मिले दूध के साथ खाया जाए, तो शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है।
• सिरस के थोड़े से बीज सुखाकर पीस लें। इसमें 3 ग्राम चूर्ण सुबह - शाम दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

76. मुनक्का: नपुंसक व्यक्ति को मुनक्का खाने से वीर्य की वृद्धि होती है।

77. ज्वार: ज्वार को अपने खाने के रूप में लेने से नपुंसकता दूर होती है।

78. कलम्बी: कलम्बी का साग रोज खाने से वीर्य बढ़ता है।

79. चौपतिया साग: चौपतिया साग नपुंसकों के लियें फायदेमन्द है। क्योंकि इसमें वीर्य को बढ़ाने का गुण होता है।

80. भूईछत्ता: भूईछत्ता को शक्कर (शुगर) मिले दूध में बराबर रूप से उबाल कर खाने से काम शक्ति और शारीरिक शक्ति दोनों बढ़ती है।

81. रोहू मछली: रोहू मछली वीर्यवर्द्धक होता है। इसलियें नपुंसकों के लियें अनुकूल खाद्य है। हिलसा मछली भी रोहू की तरह वीर्य वर्धक होती है।

82. अंबर: नपुंसकता में अंबर आधा से एक ग्राम सुबह - शाम मिस्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

83. उटंगन: उटंगन के बीज, जो चपटे और रोमाच्छादित होते हैं, पानी में भिगोनें पर काफी लुआबदार हो जाते हैं। इनको शतावरी, कौंच बीच चूर्ण आदि के साथ सुबह शाम मिस्री मिले गर्म - गर्म दूध के साथ सेवन करने से काफी लाभ होता है।

84. बहमन सफेद-बहमन सफेद या बहमन सुर्ख की जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह और शाम मिस्री को मिलाकर गर्म-गर्म दूध से खाने से कामोद्दीपन होता है।

85. ब्रहमदण्डी: ब्रहमदण्डी का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह शाम शहद के साथ सुबह-शाम खाने से पुरुषत्व शक्ति बढ़ती है।

86. सालव मिस्री: सालव मिस्री का कनद चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है।

87. हरमल: हरमल के बीज का चूर्ण 2 से 4 ग्राम मिस्री को मिलाकर गर्म - गर्म दूध के साथ सुबह-शाम लेने से लाभ होता है।

88. आम:
• आम की मंजरी 5 ग्राम की मात्रा में सुखाकर दूध के साथ लेने से काम शक्ति बढ़ती है।
• 2 - 3 महीने आम का रस पीने से ताक़त आती है। शरीर की कमजोरी दूर होती है और शरीर मोटा होता है। इससे वात संस्थान (नर्वस सिस्टम) भी ठीक हो जाता है।

89. अनार: रोज़ मीठे अनार के 100 ग्राम दानों को दोपहर के समय खाने से संभोग शक्ति बढ़ाती है।

90. पिप्पली: पिप्पली, उड़द, लाल चावल, जौ, गेहूं। सब को 100 - 100 ग्राम की मात्रा में लेकर आटा पीसकर फिर इसको देशी घी में पूरियां बनाकर, रोज़ 3 पूरियां 40 दिन तक खाऐं। ऊपर से दूध पी लें। इससे नपुंसकता दूर हो जाती है।

91. आंवला: आंवलों का रस निकाल कर एक चम्मच आंवले के चूर्ण में मिलाकर लें। उसमें थोड़ी सी शक्कर (चीनी) और शहद मिलाकर घी के साथ सुबह-शाम खाऐं।

92. अरण्ड: अरण्ड के बीज 5 ग्राम, पुराना गुड़ 10 ग्राम, तिल 5 ग्राम, बिनौले की गिरी 5 ग्राम, कूट 2 ग्राम, जायफल 2 ग्राम, जावित्री 2 ग्राम तथा अकरकरा 2 ग्राम। इन सबको कूट - पीसकर एक साफ कपड़े में रखकर, पोटली बना लें और इस पोटली को बकरी के दूध में उबालें। दूध जब अच्छी तरह पक जायें, तो इसे ठंड़ा करके 5 दिन तक पियें तथा पोटली से शिश्नि की सिंकाई करें।

93. मुलेठी: मुलेठी, विदारीकन्द, तज, लौग, गोखरू, गिलोय और मूसली। सब चीजे 10 - 10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण रोज 40 दिन तक सेवन करें।

94. नागौरी असगंध: नागौरी असगंध और विधारा। दोनों 250 - 250 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 2 चम्मच चूर्ण देसी घी या शहद के साथ लें।

95. सालम मिस्री: सालम मिस्री, तोदरी सफेद, कौंच के बीजों की मींगी, ताल मखाना, सखाली के बीज, सफेद व काली मूसली, शतावर तथा बहमन लाल। इन सबका 10 - 10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट पीस लें और चूर्ण बना लें। 2 चम्मच रोज़ दूध से 40 दिन तक बराबर खाने से पूरा लाभ होता है।

96. नारियल: नारियल कामोत्तेजक है। वीर्य को गाढ़ा करता है।

97. चिलगोजे: 15 चिलगोजे रोज़ खाने से नपुंसकता दूर होती है।

98. शहद: शहद और दूध को मिलाकर पीने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है। शरीर बलवान होता है।

99. गेहूं: अंकुरित गेहूंओं को बिना पकायें ही खाऐं। स्वाद के लिए गुड़ या किशमिश मिलाकर खा सकते हैं। इन अंकुरित गेहूंओं में विटामिन ´ई` मिलता है। यह नपुंसकता और बांझपन में लाभकारी है।

100. पिस्ता: पिस्ता में विटामिन `ई´ बहुत होता है। विटामिन `ई´ से वीर्य बढ़ता है।

101. सफेद कनेर: सफेद कनेर की जड़ की छाल बारीक पीसकर भटकटैया के रस में खरल करके 21 दिन इन्द्री की सुपारी छोड़कर लेप करने से तेजी आ जाती है।

102. आक: किसी कपड़े को आक के दूध में चौबीस घंटे तक भिगोकर रखा रहने दें, उसके बाद निकालकर सुखा लें। फिर उस पर घी लपेट कर 2 बत्तियां बना लें और उसको लोहे की सलाई पर रखे। नीचे एक कांसे की थाली रख दे और बत्तियां जला दें, जो तेल नीचे थाली पर गिरेगा। उसे लिंग पर सुपारी छोड़ कर पूरे पर मलते रहें। आधा घंटे तक, उसके बाद एरण्ड का पत्ता लपेट कर ऊपर से कच्चा धागा बांध दें। इससे हस्तमैथुन का दोष दूर हो जाता है।

103. लौंग: लौंग 8 ग्राम, जायफल 12 ग्राम, अफीम शुद्ध 16 ग्राम, कस्तूरी लगभग आधा ग्राम, इनको कूट पीसकर शहद में मिलाकर आधे आधे ग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। 1 गोली बंगला पान में रखकर खाने से स्तम्भन होता है। अगर स्तम्भन ज्यादा हो जाऐ, तो खटाई खा ले। स्खलन हो जायेगा।

104. चमेली: चमेली के पत्तों का रस तिल के तेल की बराबर की मात्रा में मिलाकर आग पर पकाएं। जब पानी उड़ जाए और केवल तेल शेष रह जाए, तो इस तेल की मालिश शिश्न पर सुबह - शाम प्रतिदिन करना चाहिए। इससे नपुंसकता और शीघ्रपतन नष्ट हो जाता है।

105. ढाक: ढाक की जड़ का काढ़ा आधा कप की मात्रा दिन में 2 बार पीने से, बीज का तेल शिश्न पर मुण्ड छोड़कर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में लाभ मिलता है।

106. हींग: हींग को शहद के साथ पीसकर शिश्न या लिंग पर लेप करने से वीर्य ज्यादा देर तक रुकता है और संभोग करने में आंनद मिलता है।

107. मालकांगनी: मालकांगनी के तेल को पान के पत्ते पर लगा कर रात में शिशन (लिंग) पर लपेटकर सो जाऐं और 2 ग्राम बीजों को दूध की खीर के साथ सुबह - शाम सेवन करने से लाभ मिलता है।

108. आक:
• छुआरों के अन्दर की गुठली निकाल कर उनमें आक का दूध भर दे, फिर इनके ऊपर आटा लपेट कर पकायें, ऊपर का आटा जल जाने पर छुआरों को पीसकर मटर जैसी गोलियां बना लें, रात्रि के समय 1 - 2 गोली खाकर तथा दूध पीने से स्तम्भन होता है।
• आक की छाया सूखी जड़ के 20 ग्राम चूर्ण को 500 मिली लीटर दूध में उबालकर दही जमाकर घी तैयार करें, इसके सेवन से नामर्दी दूर होती है।
• आक का दूध असली मधु और गाय का घी, समभाग 4 - 5 घंटे खरल कर शीशी में भरकर रख लें, इन्द्री की सीवन और सुपारी को बचाकर इसकी धीरे धीरे मालिश करें और ऊपर से खाने का पान और एरण्ड का पत्ता बांध दें, इस प्रकार सात दिन मालिश करें। फिर 15 दिन छोड़कर पुन: मालिश करने से शिश्न के समस्त रोंगों में लाभ होता है।

109. मुलहठी: मुलहठी का पीसा हुआ चूर्ण 10 ग्राम, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिस्री मिले गर्म गर्म दूध पीने से नपुंसकता में लाभ होता है।

110. जटामांसी–जटामांसी, सोठ, जायफल और लौंग। सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें। 1 - 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार खाऐं।

111. काकड़ासिंगी: आधा चम्मच काकड़ासिंगी कोष का बारीक चूर्ण एक कप दूध के साथ सुबह - शाम सेवन कराते रहने से कुछ हफ्ते में नपुंसकता में पूरा लाभ मिलेगा।

112. कलौंजी: कलौंजी के तेल को शिश्न व कमर पर नियमित रूप से सुबह - शाम कुछ हफ्तों तक मालिश करते रहने से यह रोग दूर हो जायेगा।

113. कनेर–सफेद कनेर की 10 ग्राम जड़ को पीसकर 20 ग्राम वनस्पति घी में पकायें। फिर ठंड़ा करके जमने पर इसे शिश्न पर सुबह - शाम लगाने से नपुंसकता में आराम मिलता है।

114. पान:
• रोगी के लिंग पर पान के पत्ते बांधने से और पान के पत्ते पर मालकांगनी का तेल 10 बूंद लगाकर दिन में 2 से 3 बार कुछ दिन खाने से नपुंसकता दूर होती है। इस प्रयोग के दौरान दूध, घी का अधिक मात्रा में सेवन जारी रखें।
• ध्वज भंग रोग में पान को चबाने से और रोगी के लिंग पर बांधने से लाभ होता है।

115. कपूर–घी में कपूर को घिसकर शिशन (पेनिस) के ऊपर मालिश करें। प्रयोग रोज़ कुछ हफ्ते तक करें।

116. अजवाइन: तीन ग्राम अजवायन को सफेद प्याज़ के रस 10 मिली लीटर में तीन बार 10 - 10 ग्राम शक्कर मिलाकर सेवन करें। 21 दिन में पूर्ण लाभ होता है। इस प्रयोग से नपुंसकता, शीघ्रपतन व शुक्राणु अल्पता के रोग में भी लाभ होता है।

117. अकरकरा:
• अकरकरा का बारीक चूर्ण शहद में मिलाकर शिश्न पर लेप करके रोजाना पान के पत्ते से लपेट रखने से शैथिल्यता दूर होकर वीर्य बढेगा।
• अकरकरा 2 ग्राम, जंगली प्याज़ 10 ग्राम इन दोनों को पीसकर लिंग पर मलने से इन्द्री कठोर हो जाती है। 11 या 21 दिन तक यह प्रयोग करना चाहिए।

118. सरसों का तेल: नपुंसकता दूर करने के लिए कटुपर्णी की एक ग्राम छाल तथा बरगद का दूध दोनों को गर्म कर चने के बराबर गोलियां बनाकर चौदह दिन तक पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से नपुंसकता दूर होती है।

119. कुचला–शोधित कुचला लगभग एक चौथाई से आधे ग्राम सुबह - शाम मिस्री मिले गर्म गर्म दूध के साथ पीने से हस्तमैथुन या ज्यादा मैथुन से हुई नामर्दी दूर हो जाती है।

120 कुलंजन–एक कप दूध मे एक चम्मच कुलंजन के चूर्ण को मिलाकर सुबह शाम पिया जाए, तो नपुंसकता दूर होती है।

121. तिल:
• तिल और गोखरू दूध में उबालकर पीने से धातु स्राव बन्द हो जाता है और नामर्दी दूर हो जाती है।
• तिल और अलसी का 100 मिली लीटर काढ़ा सुबह और शाम भोजन से पहले पिलाने से मर्दाना ताकत बढ़ती है।
• तिल का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम रोजाना 2 बार खाने से पुरुषत्व (सहवास) शक्ति की बढ़ती है।

122. अश्वगंधा:
• अश्वगंधा का कपड़े से छना चूर्ण और खांड़ को बराबर मात्रा मे मिलाकर रखें, इसको एक चम्मच गाय के ताजे दूध के साथ सुबह भोजन से 3 घण्टे पहले चुटकी चुटकी चूर्ण खायें और ऊपर से दूध पीते रहें। रात के समय इसके बारीक चूर्ण को चमेली के तेल में अच्छी तरह घोंटकर लगाने से इन्द्रिय की शिथिलता दूर होकर कठोर और दृढ़ हो जाती है।
• अश्वगंधा, दालचीनी और कडुवा कूठ समभाग कूटकर छान लें और गाय के मक्खन में मिलाकर 5-10 ग्राम की मात्रा सुबह - शाम सुपारी छोड़ शेष लिंग पर मलें, इसको मलने के पहले और बाद में लिंग को गर्म पानी से धो लें।
• असगंध के चूर्ण में शहद, घी और मिस्री को मिलाकर सुबह के समय खाने से कुछ महीनो में ही नपुंसकता (नामर्दी) खत्म हो जाती है।
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पुरुषों की कमजोरी को जड़ से मिटाने के देसी तरीके
THURSDAY, 28 APRIL 2016

★ पुरुषों की कमजोरी को जड़ से मिटाने के देसी तरीके ★

1. तालमखाना (Talmakhana)-अधिकतर धान के खेतों में पाया जाने वाला तालमखाना लैटिन भाषा में एस्टरकैन्था-लोंगिफोलिया (Asteracantha Longifolia) कहलाता है। रोजाना सुबह और शाम लगभग 3-3 ग्राम तालमखाना के बीज दूध के साथ लेने से वीर्य गाढ़ा होता है और शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, शुक्राणुओं की कमी आदि रोगों से छुटकारा मिलता है। www.allayurvedic.org
2. गोखरू (Gokhru)-गोखरू का फल कांटेदार होता है और औषधि के रूप में काम आता है। बारिश के मौसम में यह हर जगह पर पाया जाता है। नपुंसकता रोग में गोखरू के लगभग 10 ग्राम बीजों के चूर्ण में इतने ही काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।
3. मूसली (Musli)-मूसली काली और सफेद दो तरह की होती है। सफेद मूसली काली मूसली से अधिक गुणकारी होती है और वीर्य को गाढ़ा करने वाली होती है। मूसली का 3-3 ग्राम चूर्ण सुबह और शाम दूध के साथ लेने से वीर्य गाढ़ा होता है और शरीर में काम-उत्तेजना की वृद्धि होती है। www.allayurvedic.org
4. उड़द (Urad)- उड़द के लड्डू, उड़द की दाल, दूध में बनाई हुई उड़द की खीर का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोतरी होती है।
5. अन्य उपाय-
  • (1) वीर्य तथा सेक्स क्षमता में वृद्धि के लिए-पीपल का फल और पीपल की कोमल जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चटनी बना लें। इस 2 चम्मच चटनी को 100 मि.ली. दूध तथा 400 मि.ली. पानी में मिलाकर उसे लगभग चौथाई भाग होने तक पकाएं। फिर उसे छानकर आधा कप सुबह और शाम को पी लें।
  • (2) तालमखाने के बीज, चोबचीनी, ढाक का गोंद और मोचरस (सभी 100-100 ग्राम) तथा 250 ग्राम मिश्री को कूटकर चूर्ण बना लें। रोजाना सुबह एक चम्मच चूर्ण में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं। इससे यौन रुपी कमजोरी तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे रोग दूर होते हैं।

See : http://www.allayurvedic.org/2016/04/desi-nuskhe-for-men-power.html
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Tuesday, 10 June 2014
पुुरुषों को मजबूत बनाने वाले 15 नुस्खे, ये करने से मिलेगी जबरदस्त ताकत

किसी भी तरह की कमजोरी पुरुषों में आत्मविश्वास की कमी का कारण बन सकती है। जो पुरुष ताकतवर होते हैं, उनका दांपत्य जीवन भी सुखी रहता है। कई बार पुरुषों में पाई जाने वाली शारीरिक कमजोरियां अस्वस्थ संबंधों का कारण बन जाती हैं।

कुछ शारीरिक कमजोरियां जैसे स्वप्न दोष, शीघ्र पतन व कमजोरी आदि ऐसी समस्याएं हैं, जो मन पर नियंत्रण न होने के कारण होती हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में यौन समस्याएं उसके यौन जीवन में शुरुआत में विकसित हो सकती हैं या असुखद व असंतोषजनक यौन अनुभव होने के बाद भी विकसित हो सकती हैं।

यौन समस्याओं के कारण शारीरिक, मानसिक, या दोनों हो सकते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं पुरुषों में कमजोरी पैदा करने वाली समस्याओं को खत्म करने के लिए कुछ नेचुरल नुस्खे। ये इस समस्या में रामबाण की तरह काम करते हैं।
  1. - रोज रात को सोने से पहले लहसुन की दो कलियां निगल लें। फिर थोड़ा-सा पानी पिएं। आंवले के चूर्ण में मिश्री पीसकर मिलाएं। इसके बाद प्रतिदिन रात को सोने से पहले करीब एक चम्मच इस मिश्रित चूर्ण का सेवन करें। इसके बाद थोड़ा-सा पानी पिएं।
  2. - आंवले का मुरब्बा खाएं। केला पुरुष की शक्ति को बढ़ाने वाला फल है। प्रतिदिन केले खाएं और संभव हो तो केला खाने के बाद दूध भी पिएं।
  3. - अजवाइन की पत्तियां स्वप्नदोष की समस्या के लिए एक बेहतरीन दवा है। अजवाइन की पत्तियों का जूस निकालकर उसे शहद के साथ लें। अजवाइन का रस इस तरह से लेने से बहुत जल्दी लाभ होता है।
  4. - नपुंसकता दूर करने के लिए पुरुषों को कच्ची भिंडी चबानी चाहिए। इस समस्या में भिंडी एक बेहतरीन दवा का काम करती है।
  5. - प्याज के सफेद कंद का रस, शहद, अदरक का रस और घी का मिश्रण 21 दिनों तक लगातार लेने से नपुंसकता दूर होकर पौरुष शक्ति प्राप्त होती है।
  6. -छुई-मुई के बीजों के चूर्ण (3 ग्राम) को दूध में मिलाकर रोजाना रात को सोने से पहले लिया जाए तो शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है।
  7. - स्वस्थ सोच से ही शरीर स्वस्थ रहता है। यह एक सच्चाई है। इन समस्याओं के लिए हमारे मन की भावनाएं भी काफी हद तक जिम्मेदार होती हैं। मन में भोग-विलास के वासनात्मक ख्याल रहना या मन में हमेशा काम-वासना के विचार घुमड़ते रहना स्वप्नदोष व शीघ्रपतन जैसी समस्याओं का एक बड़ा कारण है।
  8. -मेथी को इस समस्या की बहुत कारगर दवा माना गया है। दो चम्मच मेथी के जूस में आधा चम्मच शहद मिलाकर रोजाना रात को लेने से इस समस्या में बहुत जल्दी आराम मिलता है।
  9. - हमारी आदतें भी स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है। यही कारण है कि कई बार सिर्फ गलत आहार-विहार यानी गलत समय पर गलत चीजें गलत तरीके से गलत मात्रा में लेने और अप्राकृतिक तरीके से अपनी दिनचर्या रखने से समस्याएं पैदा होती हैं।
  10. - इन सभी कारणों से न सिर्फ स्वास्थ्य पर, बल्कि विवाहित जीवन पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही, आवश्यकता से अधिक भोजन करना भी पुरुषों में शारीरिक कमजोरी का एक बड़ा कारण बन सकता है।
  11. - बहुत अधिक गरिष्ठ भोजन, जैसे पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड भी इसका एक बड़ा कारण हैं। अधिक घी-दूध, मेवे-मिठाई आदि का सेवन करना भी आयुर्वेद की दृष्टि से अच्छा नहीं माना गया है।
  12. - कच्चे प्याज का सेवन स्वप्नदोष की समस्या में बहुत अच्छा माना गया है। खाने में किसी भी रूप में प्याज का सेवन किया जाए तो इस समस्या में लाभ पहुंचता है। साथ ही, अगर इसे कच्चा खाया जाए तो बेहतर परिणाम मिलते हैं।
  13. - कुछ पौधों को कभी खर-पतवार तो कभी कचरा या कभी फालतू पौधा मानकर उखाड़ फेंक दिया जाता है। ऐसा ही एक पौधा है पुनर्नवा। पुनर्नवा का वानस्पतिक नाम बोहराविया डिफ्यूसा है। पुनर्नवा की ताजी जड़ों का रस (2 चम्मच) दो से तीन माह तक लगातार दूध के साथ सेवन करने से वृद्ध व्यक्ति भी युवा की तरह महसूस करने लगता है।
  14. - तिल का तेल भी इस समस्या में रामबाण की तरह काम करता है। तिल के तेल को जितनी मात्रा में लें, उतनी ही मात्रा में लौकी का जूस भी लें। रात को सोने से पहले इस तेल के मिश्रण से अपने सिर और बॉडी पर मसाज करें। यह एक बहुत प्रभावी नुस्खा है, जो बिना किसी खास खर्च के आपको इस समस्या से पूरी तरह राहत देगा।
  15. - स्वस्थ सोच से ही शरीर स्वस्थ रहता है। यह एक बड़ी सच्चाई है। इन समस्याओं के लिए हमारे मन की भावनाएं भी काफी हद तक जिम्मेदार होती हैं। मन में भोग-विलास के वासनात्मक ख्याल लाना या मन में काम-वासना के विचार करना स्वप्रदोष व शीघ्रपतन जैसी समस्याओं का एक बड़ा कारण है।
  16. - साबुत अनाज को भिगोकर अंकुरित कर खाने से खून बढ़ता है। इसके नियमित सेवन से स्वप्नदोष की समस्या कम हो जाती है।

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गलगण्ड गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गारण्टेड इलाज गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाद्वार गुदाभ्रंश गुम्मा गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गेदुआ की छाछ गैस गैस्ट्रिक गैहूं का जवारा गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखगांजा गोरखबूटी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिटकन चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाजन बूटी छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जख्म जंगली तिल्ली जंगली तुलसी जंगली पेड़ जंगली मिर्ची जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बंध्यापन बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूत-प्रेत भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्ररोग मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनिद्वारा योनिभ्रंश योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills) यौन क्षमता यौन दौर्बल्य यौन शक्तिवर्धक यौन शिक्षा यौन समस्याएं यौनतृप्ति यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines रुक्षांश रूढिवादी रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक रोबोट सेक्स रोमांस लकवा लक्षण लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाइलाज का इलाज लाक्षणिक इलाज लाक्षणिक जानकारी लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर सिरोसिस लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन तुलसी वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विचारतंत्र विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra वियोग विरह वेदना विलायती नीम विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध विवाहेत्तर सम्बंध विश्वास विष विष हरनी विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वीर्यपात वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैवाहिक रिश्ते वैश्यावृति व्याकुल व्यायाम व्रण शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शारीरिक रिश्ते शिथिलता शीघ्र पतन शीघ्रपतन शीस शुक्राणु शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोक शोथ शोध श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संक्रमित संक्रामक संखाहुली सगतरा संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सफेद मूसली सब्जि सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी-जुकाम सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवाद संवेदना सहदेई सहदेवी सहानभूति साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिगरेट सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सी-सेक्शन सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स उत्तेजक दवा सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पार्टनर सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्खलन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्पर्श स्मृति-लोप स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य परामर्श स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डी संक्रमण हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हाई बीपी हाथ-पैर नहीं कटवायें हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हुरहुर हुलहुल हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हेल्थ बुलेटिन हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्यापैथ होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक इलाज होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy