Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

Health Care Friend and Marital Dispute Consultant

(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)

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स्त्री और पुरुष का के बीच लैंगिक अंतर तो प्रकृति की अनुपम दैन है! इसको स्त्री की कमजोरी और पुरुष की ताकत समझना, पुरुष की सबसे बड़ी मूर्खता है और इसे अपनी कमजोरी मानकर, इसे छुपाने के लिए स्त्री द्वारा पुरुषोचित व्यवहार या आचरण करना उससे भी बड़ी मूर्खता है।
केवल भारत में ही नहीं, बल्कि सारे विश्व में हमारे पुरुष प्रधान समाज की कुछ मूलभूत समस्याएँ हैं। भारत में हजारों सालों से अमानवीय मनुवादी कुव्यवस्था के चंगुल में रही है। जिसमें स्त्री की मानवीय संवेदनाओं तक को क्रूरता से कुचला जाता रहा है। ऎसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में स्त्री और पुरुष के बीच भारत में अनेक प्रकार की वैचारिक, सामाजिक और व्यवहारगत समस्याएं विशेष रूप से देखने को मिलती हैं। जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:-

1-पुरुष का स्त्री के प्रति हीनता का विचार और स्त्री को परुष से कमतर मानने का अहंकारी सोच। 

2-पुरुष का स्त्री के प्रति पूर्वाग्रही और रुग्णता पर आधारित स्वनिर्मित अवधारणाएं। 

3-स्त्री द्वारा स्त्री को प्रकृति प्रदत्त अनुपम उपहार स्त्रीत्व और प्रजनन को स्त्री जाति की कमजोरी समझने का असंगत, किन्तु संस्कारगत विचार। 

4-स्त्री का पुरुष द्वारा निर्मित धारणाओं के अनुसार खुद का, खुद को कमतर आकलन करने का संकीर्ण, किन्तु संस्कारगत नजरिया। 

5-इसी के साथ-साथ स्त्री का खुद को पुरुष की बराबरी करने का अव्यावहारिक और असंगत विचार भी बड़ी समस्या है, क्योंकि न पुरुष स्त्री की बराबरी कर सकता है और न ही स्त्री पुरुष की बराबरी कर सकती है। 

6-स्त्री को पुरुष की या पुरुष को स्त्री की बराबरी करने की जरूरत भी नहीं होनी चाहिए। बराबरी करने की जरूरत भी नहीं है, क्योंकि दोनों अपने आप में अनूठे हैं और दोनों एक दूसरे के बिना अ-पूर्ण हैं।

7-स्त्री और पुरुष की पूर्णता आपसी प्रतिस्पर्धा या एक दूसरे को कमतर या श्रेष्ठतर समझने में नहीं, बल्कि सम्मानजनक मिलन, सहयोग और सहजीवन में ही है। 

8-एक स्त्री का स्त्रैण और पुरुष का पौरुष दोनों में प्रकृतिदत्त अनूठा और विपरीतगामी स्वभावगत अद्वितीय गौरव है। 

9-स्त्री और पुरुष दोनों में बराबरी की बात सोचना ही बेमानी हैं। दोनों प्रकृति ने ही भिन्न बनाये हैं, लेकिन इसका अर्थ किसी का किसी से कमतर या हीनतर या उच्चतर या श्रेष्ठतर का विचार अन्याय पूर्ण है। दोनों अनुपम हैं, दोनों अनूठे हैं।

10-स्त्री और पुरुष की सोचने और समझे की मानसिक और स्वभावगत प्रक्रिया और आदतें भी भिन्न है। 

11-यद्यपि पुरुष का दिमांग स्त्री के दिमांग से दस फीसदी बड़ा होता है, लेकिन पुरुष के दिमांग का केवल एक बायाँ (आधा) हिस्सा ही काम करता है। जबकि स्त्री के दिमांग के दोनों हिस्से बराबर और लगातार काम करते रहते हैं। इसीलिए तुलनात्मक रूप से स्त्री अधिक संवेदनशील होती हैं और पुरुष कम संवेदनशील! स्त्रियों को "बात-बात पर रोने वाली" और "मर्द रोता नहीं" जैसी सोच भी इसी भिन्नता का अनुभवजन्य परिणाम है। बावजूद इसके पुरुष और खुद स्त्रियाँ भी, स्त्री को कम बुद्धिमान मानने की भ्रांत धारणा से ग्रस्त हैं।

12-यदि बिना पूर्वाग्रह के अवलोकन और शोधन किया जाये तो स्त्री और पुरुष की प्रकृतिगत वैचारिक और बौद्धिक भिन्नता उनके दैनिक जीवन के व्यवहार और आचरण में आसानी से देखी-समझी जा सकती है।
कुछ उदाहरण-
  • (1) स्त्रियों को ऐसे मर्द पसंद होते हैं, जो खुलकर सभी संवेदनशील परेशानी और बातें स्त्री से कहने में संकोच नहीं करें, जबकि इसके ठीक विपरीत पुरुष खुद तो अपनी संवेदनाओं को व्यक्त नहीं करना चाहते और साथ ही वे कतई भी नहीं चाहते कि स्त्रियाँ अपनी संवेदनाओं (जिन्हें पुरुष समस्या मानते हैं) में पुरुषों को उलझाएँ। 
  • (1) स्त्री के साथ, पुरुष की प्रथम प्राथमिकता प्यार नहीं, स्त्री को सम्पूर्णता से पाना है। स्त्री को हमेशा के लिए अपने वश में, अपने नियंत्रण में और अपने काबू में करना एवं रखना है। प्यार पुरुष के लिए द्वितीयक (बल्कि गौण) विषय है। आदिकाल से पुरुष स्त्री को अपनी निजी अर्जित संपत्ति समझता रहा है, (इस बात की पुष्टि भारतीय दंड संहिता की धारा 497 से भी होती है, जिसमें स्त्री को पुरुष की निजी संपत्ति माना गया गया है), जबकि स्त्री की पहली प्राथमिकता पुरुष पर काबू करने के बजाय, पुरुष का असीमित प्यार पाना है (जो बहुत कम को नसीब होता है) और पुरुष से निश्छल प्यार करना है। अपने पति या प्रेमी को काबू करना स्त्री भी चाहती है, लेकिन ये स्त्री की पहली नहीं, अंतिम आकांक्षा है। यह स्त्री की दृष्टि में उसके प्यार का स्वाभाविक प्रतिफल है।  
  • (3) विश्वभर के मानव व्यवहार शास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि स्त्री प्यार में ठगी जाने के कुछ समय बाद फिर से खुद को संभालने में सक्षम हो जाती हैं, जबकि पुरुषों के लिए यह बहुत असम्भव या बहुत ही मुश्किल होता है। (इस विचार से अनेक पाठक असहमत हो सकते हैं, मगर अनेकों बार किये गए शोध, हर बार इस निष्कर्ष की पुष्टि करते रहे हैं।)
  • (4) पुरुष अनेक महत्वपूर्ण दिन और तारीखों को (जैसे पत्नी का जन्म दिन, विवाह की वर्ष गाँठ आदि) भूल जाते हैं और पुरुष इन्हें साधारण भूल मानकर इनकी अनदेखी करते रहते हैं, जबकि स्त्रियों के लिए हर छोटी बात, दिन और तारीख को याद रखना आसान होता है। साथ ही ऐसे दिन और तरीखों को पुरुष (पति या प्रेमी) द्वारा भूल जाना स्त्री (पत्नी या प्रेमिका) के लिए अत्यंत असहनीय और पीड़ादायक होता है। जो पारिवारिक कलह और विघटन के कारण भी बन जाते हैं। 
  • (5) स्त्रियाँ चाहती हैं कि उनके साथ चलने वाला उनका पति या प्रेमी, अन्य किसी भी स्त्री को नहीं देखे, जबकि राह चलता पुरुष अपनी पत्नी या प्रेमिका के आलावा सारी स्त्रियों को देखना चाहता है। यही नहीं स्त्रियाँ भी यही चाहती हैं कि राह चलते समय हर मर्द की नजर उन्हीं पर आकर टिक जाये। स्त्रियाँ खुद भी कनखियों से रास्तेभर उनकी ओर देखने वाले हर मर्द को देखती हुई चलती हैं, मगर स्त्री के साथ चलने वाले पति या प्रेमी को इसका आभास तक नहीं हो पाता। 
13-कालांतर में समाज ने स्त्री और पुरुष दोनों के समाजीकरण (लालन-पालन-व्यवहार और कार्य विभाजन) में जो प्रथक्करण किया गया, वास्तव में वही आज के समय की बड़ी मुसीबत है और इससे भी बड़ी मुसीबत है, स्त्री का आँख बंद करके पुरुष की बराबरी करने की मूर्खतापूर्ण लालसा! गहराई में जाकर समझें तो यह केवल लालसा नहीं, बल्कि पुरुष जैसी दिखने की उसकी हजारों सालों से दमित रुग्ण आकांक्षा है! क्योंकि हजारों सालों से स्त्री पुरुष पर निर्भर रही है, बल्कि पुरुष की गुलाम जैसी ही रही है। इसलिए वह पुरुष जैसी दिखकर पुरुष पर निर्भरता से मुक्ति पाने की मानसिक आकांक्षी होने का प्रदर्शन करती रहती है। 

14-एक स्त्री जब अपने आप में प्रकृति की पूर्ण कृति है तो उसे अपने नैसर्गिक स्त्रैण गुणों को दबाकर या छिपाकर या कुचलकर पुरुष जैसे बनने या दिखने या दिखाने का असफल प्रयास करके की क्या जरूरत है? इस तथ्य पर विचार किये बिना, स्त्री के लिए अपने स्त्रैणत्व के गौरव की रक्षा करना असंभव है।

15-बेशक जेनेटिक कारण भी स्त्री और पुरुष दोनों को जन्म से मानसिक रूप से भिन्न बनाते हैं। लेकिन स्त्री और पुरुष प्राकृतिक रूप से अ-समान होकर भी एक-दूसरे से कमतर या उच्चतर व्यक्तित्व नहीं, बल्कि एक दूसरे के सम्पूर्णता से पूरक हैं। स्त्रैण और पौरुष दोनों के अनूठे और मौलिक गुण हैं। 

16-हम शनै-शनै समाजीकरण की प्रक्रिया में कुछ बदलाव अवश्य ला सकते हैं। यदि इसे हम आज शुरू करते हैं तो असर दिखने में सदियाँ लगेंगी। मगर बदलाव स्त्री या पुरुष की निजी महत्वाकांक्षा या जरूरत पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि दोनों के जीवन की जीवन्तता को जिन्दादिल बनाये रखने के लिए होने चाहिए।

17-समाज शास्त्रियों या समाज सुधारकों या स्त्री सशक्तिकरण के समर्थकों या पुरुष विरोधियों की दृष्टि में कुछ सामाजिक सुधारों की तार्किक जरूरत सिद्ध की जा सकती है। लेकिन कानून बनाकर या सामाजिक निर्णयों को थोपकर इच्छित परिणाम नहीं मिल सकते। बदलाव तब ही स्वागत योग्य और परिणामदायी समझे जा सकते हैं, जबकि हम उन्हें स्त्री-पुरुष के मानसिक और सामाजिक द्वंद्व से निकलकर, एक इन्सान के रूप में सहजता और सरलता से आत्मसात और अंगीकार करके जीने में फक्र अनुभव करें। 

18-अंत में यही कहा जा सकता है कि स्त्री और पुरुष का के बीच लैंगिक अंतर तो प्रकृति की अनुपम दैन है! इसको स्त्री की कमजोरी और पुरुष की ताकत समझना, पुरुष की सबसे बड़ी मूर्खता है और इसे अपनी कमजोरी मानकर, इसे छुपाने के लिए स्त्री द्वारा पुरुषोचित व्यवहार या आचरण करना उससे भी बड़ी मूर्खता है।
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-098750-66111
शीघ्रपतन, Sheeghrapatan, Early Discharge, Early Ejaculation, Premature Ejaculation


लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

परामर्श हेतु हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
30 नवम्बर, 2017

शीघ्रपतन हर एक पुरुष के यौन जीवन (Sexual life) से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील अत्यंत संवेदनशील (Extremely Sensitive) और महत्वपूर्ण (Important) विषय है। अत: इस बारे में वास्तविकता (Reality) को जानने और समझने के लिये बहुत जरूरी, बल्कि अनिवार्य है कि शीघ्रपतन से पीड़ित पुरुषों आगे पढने से पहले अपनी यौन धारणाओं, आशंकाओं और ग़लतफ़हमियों (Sexual Concepts, Doubts and Mis-conceptions) पर आधारित जानकारी को दिमांग से बाहर निकालना बहुत जरूरी है।


स्त्री-पुरुष के यौन सम्बन्धों के दौरान, स्त्री की यौनतृप्ति/संतुष्टि से पहले ही पुरुष का वीर्यपात/वीर्य स्खलित (Ejaculation-the action of ejecting semen from the body) हो जाने को ही आम बोलचाल में शीघ्रपतन कहा जाता है। शीघ्रपतन के लिये अंग्रेजी में तीन टर्म यूज की जाती हैं। (ED=Early Discharge/अर्ली डिस्चार्ज or EE=Early Ejaculation/अर्ली इजाकुलेशन or PE=Premature Ejaculation/प्रीमैच्योर इजाकुलेशन)।


एक अध्ययन के मुताबिक वर्तमान में हर एक पुरुष को अपने जीवन काल में कभी न कभी शीघ्रपतन की समस्या का सामना करना ही पड़ता है। 30 से 40 फीसदी पुरुषों को जीवनभर शीघ्रपतन की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए अगर कोई पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं तो ऐसे पुरुष को अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं होनी चाहिये। क्योंकि कोई भी अकेला पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से नहीं जूझता है, बल्कि संसार के एक-तिहाई से अधिक पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं। यद्यपि यहां पर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि अधिकतर पुरुषों के लिये शीघ्रपतन उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितनी कि पुरुषों द्वारा शीघ्रपतन की समस्या के बारे में सेक्सपर्ट या डॉक्टर से खुलकर बात नहीं करने का संकोच है। दूसरी ओर गारण्टी देकर लूट-खंसोट करने वाले सेक्सपर्ट या डॉक्टरों के चक्कर में फंसना भी पुरुषों के जीवन में शीघ्रपतन की समस्या के बने रहने का सबसे बड़ा कारण है।


शीघ्रपतन किसे कहते हैं?


  • 1. जब एक पुरुष अपनी यौन सहयोगिनी यौन सहयोगिनी (Sexual Partner) की योनि में लिंग को प्रवेश करवाकर लिंग का योनि में घर्षण करता है, तो घर्षण शुरू करने के बाद अत्यल्प समय में ही वीर्य स्खलित (Semen Discharged) हो जाने को सामान्यत: शीघ्रपतन कहा जाता है। 
  • 2. पुरुष या स्त्री को योन संतुष्टि मिलने से पहले ही वीर्य स्खलित हो जाना भी शीघ्रपतन कहा जा सकता है।
  • 3. योनि में लिंग को प्रवेश करवाने से पहले ही फोरप्ले अर्थात रोमांस के दौरान ही पुरुष के लिंग से स्वत: वीर्यपात हो जाने अर्थात वीर्य निकल जाने को को शीघ्रपतन कह सकते हैं।
  • 4. कामुक विचार, बातचीत, कामुक दृश्य, कामुक मूवी/फिल्म या किसी प्रिय, इच्छित या आकर्षक महिला को देखने या उसकी कल्पना करने से ही लिंग से स्वत: वीर्य निकल जाने को भी शीघ्रपतन कह सकते हैं।
  • 5. इसके अलावा भी कुछ अन्य कारण हो सकते हैं। जिनकी वजह से सेक्स शुरू करने, योनि में लिंग प्रविष्ठ करवाने, स्त्री की यौन संतुष्टि से पहले ही वीर्य स्खलित हो जाता है। इस स्थिति को भी शीघ्रपतन कहा जा सकता है।


वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
योनि में लिंग प्रवेश कराने के बाद कितने समय में लिंग से वीर्य स्खलित होना आदर्श स्थिति मानी जानी चाहिये? इस विषय में विश्वभर के सैकड़ों वैज्ञानिक द्वारा अनेकानेक शोध और अध्ययन करने के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि वीर्य स्खलन की कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित करना असम्भव है। क्योंकि शोध और अध्ययन के दौरान निम्न तथ्य सामने आये:-

  • 1. भारत जैसी जलवायु में सामान्यत: 1 से 3 मिनट में पुरुष डिस्चार्ज हो जाते हैं।
  • 2. अपवादस्वरूप 3 मिनिट से अधिक समय तक डिस्चार्ज नहीं होने वाले पुरुषों की सेक्स सहयोगी स्त्री को भी अनेकों बार पूर्ण यौन सन्तुष्टि नहीं मिलती है।
  • 3. कुछ स्त्रियों को 1 मिनट से भी कम समय में पूर्ण यौनतृप्ति मिल जाती है।

स्त्री की यौन तृप्ति क्या है?
यह एक ऐसा सवाल है, जिसके बारे में स्त्रियों में भी मतैक्य का अभाव (Lack of Consensus) है। विश्वप्रसिद्ध महिला सेक्स-विशेषज्ञ मैरी स्टॉप्स का कहना है कि अधिकतर स्त्रियां यौन सन्तुष्टि के बारे में अपनी राय व्यक्त करते समय भ्रमित होती/रहती हैं। उनका कहना है कि यदि दस महिलाओं से यौनतृप्ति के अनुभव को शब्दों में व्यक्त करने को कहा जाये या पूछा जाये तो तकरीबन सभी के अनुभव भिन्न-भिन्न होंगे। इसका कारण स्पष्ट करते हुए मेरी स्टॉप्स कहती हैं कि प्रत्येक स्त्री का सेक्स ज्ञान, सेक्स अनुभव, सेक्स रुचि, सेक्स परफॉर्मेंश आदि का अनुभव अलग-अलग होता है। क्योंकि स्त्री को पुरुष की भांति सेक्स के दौरान वीर्य या ऊर्जा स्खलन जैसा शारीरिक अनुभव नहीं होता। बल्कि स्त्री के लिये सेक्स का आनंद मानसिक पहले और शारीरिक बाद में है। कुछ अन्य स्त्री सेक्स एक्सपर्ट का कहना है कि सेक्स के दौरान स्त्री को केवल योनि में लिंग के घर्षण करने से ही यौनतृप्ति नहीं मिलती है, बल्कि स्त्री के अंग-अंग में यौनानंद की प्राप्ति होती है, बशर्ते उसका पुरुष साथी यौन कला में प्रवीण हो?

सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?

एक आदर्श सम्भोग में, स्त्री-पुरुष दोनों एक साथ समान रूप से, यौनानंद प्राप्त करते हैं। इसी कारण इस शारीरिक क्रिया को सम्भोग कहा जाता है।
In an ideal sexual intercourse, both men and women receive equally, Sexual pleasure. For this reason, this physical activity is called SAMBHOG.

स्त्री की यौन संतुष्टि को पश्चिमी सेक्स एक्सपर्ट अंग्रेजी में आर्गेज्म/Orgasm कहते हैं। जबकि मैं इसके लिये हिन्दी में यौनतृप्ति या सेक्सुअ फुलफिलमेंट/Sexual Fulfillment लिखना या बोलना अधिक उपयुक्त समझता हूं। साथ ही सम्भोग को समान भोग बताने वाली उक्त धारणा मेरी राय में केवल कागजों तक सीमित है। वर्ष 1998 से लगातार दाम्पत्य विवाद सलाहकार के रूप में सेवाएं देने के दौरान अधिकतर स्त्रियों ने मुझे यह बताया कि वे यौन-सम्बन्धों के दौरान पुरुष से योनि में केवल लैंगिक घर्षण ही नहीं चाहती हैं, बल्कि सेक्स प्रारम्भ करने से पूर्व, सेक्स के दौरान और सेक्स के बाद (Before Sex, During Sex and After Sex) भी पुरुष की सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक सक्रियता चाहती हैं। जबकि पुरुष की मानसिकता इससे ठीक विपरीत या भिन्न होती है।

मैं मेरे अनेक लेखों में अनेक बार इस स्थिति को अग्रलिखित शब्दों में व्यक्त करता/लिखता आया हूं।

'स्त्री पुरुष के समक्ष समर्पण करती है, पुरुष का प्यार पाने के लिये। जबकि पुरुष स्त्री को प्यार करता है, स्त्री का शरीर पाने के लिये।'

व्यवहार में बहुत कम ऐसा होता है, जबकि पुरुष के वीर्य स्खलन के साथ ही स्त्री को यौन तृप्ति मिले।

शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध

शीघ्रपतन के कारण परेशान अनेक पुरुषों के मनोमस्तिष्क में यह गलत धारणा अन्दर तक बैठ जाती है कि शीघ्रपतन के कारण वे पिता नहीं बन सकेंगे। विशेषकर युवाओं में यह आशंका घर कर जाती है, जबकि गर्भ धारण का शीघ्रपतन से कोई सम्बन्ध नहीं है। गर्भधारण के लिये सेक्स के दौरान वीर्य का अन्दर योनि में स्खलन होना ही पर्याप्त होता है। अत: शीघ्रपतन के कारण पिता नहीं बन सकने का भय 100% निराधार है।

शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण

इसमें कोई संदेह नहीं कि पुरुष जब स्त्री को सम्पूर्ण रूप से भावनात्मक तृप्ति देने में असमर्थ है तो स्त्री को यौन-क्रिया के दौरान पुरुष से शारीरिक सक्षमता की उम्मीद तो रहती ही है। ऐसे हालात में स्त्री अपने पुरुष साथी से पर्याप्त समय तक लैंगिक यौन घर्षण की उम्मीद करती है। उसे उम्मीद बनी रहती है, यदा-कदा उसे यौनतृप्ति भी मिल सकेगी। अनेक स्त्रियां अपने अनुभवों में बतलाती हैं कि बेशक उनका डिस्चार्ज नहीं होता, लेकिन जब पुरुष उन्हें सम्पूर्णता से चाहता है। प्यार करता है और मानसिक तथा शारीरिक योगदान करता है तो लम्बे लैंगिक यौन घर्षण के बाद, योनि में ऐसी अनुभूति होती है, जैसे योनि के हर एक ऊतक शिथिल हो जाना (Tissue laxation) या एक फुहार सी निकलती हुई अनुभव होती है या ऐसा लगता है, जैसे कोई जलता हुआ गर्म अंगारा एकदम से ठंडा हो गया/बुझ गया हो। वहीं कुछ का मानना है कि यौनतृपित के समय ऐसा लगता है, जैसे सागर की गहराई में गोते लगा रहे हों। योनि में ऐसा महसूस होता है, जैसे योनि बार-बार संकुचित हो रही है और वापस खुल रही है। उन पलों का आलौकिक आनंद अवर्णनीय होता है। उन पलों के दौरान भी यदि पुरुष स्खलित नहीं होता है और लैंगिक घर्षण जारी रखता है तो यौनानंद की कोई सीमा नहीं होती है।

इन दिनों तेजी से बदलते सामाजिक हालातों में जबकि स्त्री-पुरुष के मध्य विवाह पूर्व यौन सम्बन्ध (Pre-marital Sex) और विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध (Extramarital Sex) सामान्य बात हो चुकी है। ऐसे में यदि किसी स्त्री को जब कभी उक्त या ऐसी ही सम्पूर्ण यौन अनुभूति या यौनतृप्ति अपने पति या प्रेमी से प्राप्त हो जाती है, तो उसे हर बार सेक्स में इसी प्रकार की अनुभूति की उम्मीद बनी रहती है। जिसकी प्राप्ति नहीं होने पर वह अपने प्रेमी या पति से नाखुश रहने लगती है और पति को नाकारा, नामर्द और सेक्स क्रिया में असफल मानकर चिड़चिड़ी भी हो जाती है। इन हालातों में शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण भी बन सकता है।


शीघ्रपतन के कारण:
उपरोक्त पृष्ठभूमि (Background) के होते हुए भी बहुत से पुरुषों को वास्तव में शीघ्रपतन की समस्या होती है। जिसके निम्न प्रमुख कारण हैं:-
  • 1. स्त्री-पुरुष की प्रकृतिदत्त भिन्न मनोस्थिति। पुरुष शीघ्रता से सब कुछ पा लेना चाहता है, जबकि स्त्री आराम से सम्पूर्ण यौन तृप्ति की प्रतीक्षा करती है।
  • 2. वास्तविक एवं व्यावहारिक यौन शिक्षा का अभाव (Lack of real and practical sex education)।
  • 3. अपरिहार्य कारणों से (Due to Unavoidable Reasons) लम्बे समय बाद सेक्स करना।
  • 4. शीघ्रपतन हो जाने की आशंका का भय (Fear of Phobia of Premature Ejaculation)।
  • 5. अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाने की आशंका (Fear of not satisfying your wife)।
  • 6. तनाव, मानसिक दबाव या क्लेशमय स्थिति के दौरान सेक्स (Sex during stress, mental pressure or distress situations)।
  • 7. डिप्रेशन के दौरान सेक्स करना (Having Sex During Depression)।
  • 8. सेक्स के दौरान किसी के देखे/पकड़े जाने का भय (Fear of being seen/caught during sex)।
  • 9. मन में इस बात का भय कि लम्बे समय तक स्खलन को रोकना मुश्किल होगा (There is a fear in the mind that it will be difficult to stop ejaculation for a long time)।
  • 10. सेक्स के प्रति नकारात्मक या अपराधबोधात्मक विचार (Negative or guilt-related thoughts about sex)।
  • 11. नासमझ या नापसंद या बेमेल यौन साथी (Goofy or dislike or mismatched sexual partner)।
  • 12. स्त्री को दुर्गंध फैलाने वाली ल्यूकोरिया (Leukorrhoea) की बीमारी।
  • 13. सेक्स के दौरान स्त्री का सपोर्ट नहीं मिलना।
  • 14. हार्मोंस की गड़बड़।
  • 15. पुरुष का प्रोस्टेट, थॉइरॉइड या डाईबिटीज से पीड़ित होना।
  • 16. पुरुष को अपने लिंग के आकार को लेकर भ्रांति होना।
  • 17. पुरुष को फैंफड़ों सम्बंधी कोई बीमारी होने के कारण, अधिक समय तक लैंगिक यौन घर्षण करने से सांस फूल जाने का भय बने रहना।
  • 18. पुरुष मस्तिष्क के रसायनों के असामान्य (Abnormal level of brain chemicals) स्तर होना।
  • 19. सेक्स कलाओं की अज्ञानता (Ignorance of Sex Arts)।
  • 20. लिंग और योनि के आकार में अत्यधिक असमानता (Extreme inequality in the size of genders/penis and vagina)।
इत्यादि।-30 नवम्बर, 2017
नोट: उक्त लेख को दिनांक: 27.10.2018 को आंशिक रूप से सम्पादित किया गया है।

नोट: शीघ्रपतन का उपचार अगले अंक में प्रस्तुत किया जायेगा।

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मनोशारीरिक विकारों की अनदेखी सेक्स जीवन बर्बाद कर सकती है।

लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

मनुष्य ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव-जन्तु के जीवन में सेक्स एक अनिवार्य क्रिया है। जिससे यह संसार संचालित हो रहा है। मनुष्य के लिये सेक्स अत्यधिक सुखद और आनन्ददायक क्रिया है। यही वजह है कि प्रत्येक स्त्री और पुरुष को एक उम्र के बाद विवाह से पूर्व और विवाह के बाद सुखद सेक्स का आनन्द की अतृप्ति/Dissatisfaction बनी रहती है। सेक्स की अतृप्त इच्छा बनी रहना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि ऐसा बहुत ही स्वाभाविक है। आमतौर पर सेक्स में स्त्री की सन्तुष्टि को पुरुष की सेक्स करने की कला या शारीरिक क्षमता या पौरुष/Virility से जोड़ा जाता है। इस कारण प्रत्येक पुरुष के लिये अपनी सेक्स पार्टनर को संतुष्ट करना बहुत ज़रूरी समझा जाता है। अगर किसी कारण से कोई पुरुष अपनी सेक्स पार्टनर को सन्तुष्ट नहीं कर पाता है या किसी कारण से कोई स्त्री, अपने पुरुष साथी से सन्तुष्ट नहीं हो पाती है तो इसे सीधे पुरुष की योन क्षमता या मर्दानगी में कमी करार दे दिया जाता है। जो बिलकुल भी सही और उचित नहीं है। क्योंकि अनेक बार, अनेक कारणों से जो असहज हालातों में अनेक पुरुष सही से सेक्स नहीं कर पाते हैं या लम्बे समय तक सेक्स करना चाहते हैं, मगर अधिकतर मामलों में वे सफल नहीं हो पाते हैं। यह असफलता उन्हें हर वक्त सताती है। इस कारण उनको अपराधबोध (Guilty Feeling) आ घेरता है। उनका घरेलु और व्यावसायिक/कार्यालयीन कार्यों में मन नहीं लगता। अनेक पुरुष इस कारण तनाव और अवसाद (Stress and Depression) से ग्रस्त होकर विभिन्न मानसिक और शारीरिक बीमारियों के शिकार होते हुए देखे जा सकत हैं।


इसी प्रकार पुरुष के सम्पूर्ण रूप से शारीरिक रूप से सक्षम होने और पुरुष के सभी प्रकार के प्रयासों के बाद भी अनेक औरतें सेक्स के दौरान सन्तुष्ट नहीं हो पाती हैं। जिससे ऐसी स्त्रियां भी तनाव और अवसाद से ग्रस्त होकर अनेक शारीरिक बीमारियों सहित, हिस्टीरिया (Hysteria) से पीड़ित होती देखी जा सकती हैं।


इसलिये बार-बार यह सवाल उठता रहता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है?

हमारे पास प्रतिदिन आने वाले टेलीफोन/मोबाईल काल्स में 18 वर्ष से 60 वर्ष तक के पुरुषों के लिये यह एक जटिल सवाल (Knotty Question) और अनसुलझी समस्या (Unsolved Problem) बना हुआ है। सेक्स में असन्तुष्टि से ऐसे स्त्री-पुरुष अत्यधिक परेशान रहते हैं। हजारों-लाखों लोगों का दाम्पत्य जीवन (Married Life) इस कारण ​बिखर कर बर्बाद हो रहा है। इसी कारण अनेक लोग तलाक लेने को विवश हो रहे हैं और दु:खद कड़वा सच यह भी है कि कुछ कमजोर मानसिकता के लोग आत्मघात (Suicide) तक कर लेते हैं। अत: 'स्वास्थ्य रक्षक सखा' के पाठकों के लिये इस विषय पर 1990 से और वर्तमान तक हजारों स्त्रियों और पुरुषों की सेक्स समस्याओं के समाधान और उपचार के अनुभवों पर आधारित महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत है:—


1. सेक्स एज्युकेशन/Sex Education : सभी जीवों में सेक्स ओपन अर्थात् सरेआम होता है। अत: उनकी नयी पीढी को किसी प्रकार की औपचारित सेक्स एज्युकेशन की जरूरत नहीं होती है। इसके विपरीत मानव ने, विशेषकर भारतीय उपमहाद्वीप में सेक्स को गुप्त, गोपनीय और घृणित करार देकर, सेक्स के बारे में प्रत्येक युवा होने वाली, नयी पीढी को मानसिक और सामाजिक रूप से असहज बना दिया है। भारत में एक मोपेड को चलाने के लिये तो लाईसेंस की जरूरत होती है, लेकिन यौन जीवन प्रारम्भ करने के लिये किसी प्रकार की सेक्स एज्युकेशन या ज्ञान की कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है। यही वजह है कि बिना वैज्ञानिक, सही और जरूरी ज्ञान के सेक्स जीवन का असहज, असन्तुष्ट और तनावपूर्ण रहना स्वाभाविक है। अत: बहुत जरूरी है कि सभी स्त्री-पुरुष सेक्स का सही ज्ञान प्राप्त करें। वर्ष 1997 से हमारी ओर से व्यावसायिक दाम्पत्य सलाहकार के रूप में सेवाएं प्रदान की जाती रही है। अब तक कई सौ दम्पत्ति (Couple) इसका लाभ उठा चुके हैं।



2. सेक्स पर खुलकर चर्चा जरूरी है : सेक्स पार्टनर या पति-पत्नी को केवल शरीररिक तौर पर या शक्ल-ओ-सूरत से जानना ही पर्याप्त नहीं होता है, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं, मानसिक स्थिति और शारीरिक जरूरतों पर खुलकर आपसी चर्चा करना बेहद जरूरी होता है। आश्चर्यजनक रूप से अनेक पति-पत्नी वर्षों साथ रहने के बाद भी सेक्स जरूरतों पर सहज होकर चर्चा नहीं कर पाते हैं। जो उनके दु:खद सेक्स का मूल कारण हो सकता है।


3. रोमांस (Romance) के जरिये जीवन में रोमांच (Excitement) पैदा करें : बिना रोमांच के जीवन निरर्थक है। रोमांच के बिना सेक्स का कोई मूल्य ही नहीं है। अत: पति-पत्नी या सेक्स पार्टनर्स को रोमांस का व्यावहारिक अनुभव और महत्व समझना बहुत जरूरी है। जिससे जीवन में रोमांच और ताजगी बनी रहे।


4. फोरप्ले (Foreplay) अर्थात संभोग पूर्व क्रीड़ा : आमतौर पर सेक्स की उतावली में पुरुष फोरप्ले को नकारते हैं। या उनको सेक्स में अधैर्य के कारण फोरप्ले का व्यावहारिक महत्व समझ में नहीं आता है। इसके चलते स्त्री को सेक्स में सन्तुष्टि नहीं मिल पाती है और सेक्स सम्बन्धों में निराशा और रूखापन आ जाता है। जिसके चलते  यौन जीवन बिखर सकता है।


5. सेक्स के दौरान पूर्वाग्रहों से मुक्ति जरूरी : किसी बुरे, अप्रिय, अनुभव, धुत्कार, असफलता या पर-पुरुष या पर-स्त्री  यौन अनुभव के कारण या अन्य किसी कारण से अनेक स्त्री-पुरुष शारीरिक रूप से सेक्स करने से पूर्व, मन ही मन में सेक्स के बारे में अनेक प्रकार की कल्पनाएं करके, सेक्स के सम्भावित अंतिम अंजाम (Possible Final Result) तक पहुंच जाते हैं। जिसके कारण उनके द्वारा वास्तव में सहजता से सेक्स करना असम्भव हो जाता है। लगातार और लम्बे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहने के कारण, अकसर ऐसे स्त्री-पुरुष सेक्स में असफल या असन्तुष्ट पाये जाते हैं। स्त्री आनन्द के चर्मोत्कर्ष (Orgasm or Climax) पर पहुंचने से पहले ही पुरुष स्खलित हो जाते हैं या पुरुष के पर्याप्त समय तक सेक्स जारी रखने के बाद भी स्त्री उत्तेजना और आनन्द की अनुभूतिक (Excitement and Pleasure) का अनुभव ही नहीं कर पाती है। इसके कारण अनेक बार पुरुष अपने आप को असक्षम या नपुंसक और स्त्री खुद को फ्रिजिडिटी का शिकार अनुभव करने लगती है। ऐसे में स्त्री के मन में सेक्स के प्रति अरुचि या घृणा हो उत्पन्न हो सकती है। इस स्थिति का जल्दी से जल्दी उचित परामर्श के जरिये समाधान बहुत जरूरी होता है।



6. मनोशारीरिक विकार : कुछ स्त्रियों और पुरुषों में वास्तविक मानसिक और शारीरिक समस्याएं देखने को मिलती हैं। जिनके चलते उन्हें अन्तर्द्वन्द्व से गुजरना पड़ता है। ऐसे हालात उत्पन्न हो जाते हैं, जब मन साथ देता है तो शरीर साथ नहीं देता और शरीर साथ देता है तो मन इनकार कर देता है। यदि लम्बे समय तक इसका समाधान नहीं हो तो यह स्थिति भी पुरुष को नामर्द और स्त्री को ठण्डी बना सकते हैं। अत: इस स्थिति का भी जल्दी से जल्दी उचित परामर्श के जरिये सही समाधान बहुत जरूरी होता है।


7. औषधीय उपचार : सेक्स से सम्बन्धित करीब 10 फीसदी मामले ही ऐसे होते हैं, जिनमें केवल औषधीय उपचार (Medicinal Treatment) ही एक मात्र समाधान होता है। अन्यथा अधिकतर मामलों में मनोशारीरिक चिकित्सा की जरूरत होती है। जिसमें उचित परामर्श और औषधीय उपचार दोनों का संयुक्त समावेश होता है। जिन मामलों में औषधीय उपचार की जरूरत होती है। उन में सेक्स उत्तेजक दवाईयों का उपयोग हानिकारक हो सकता है। अत: आयुर्वेद और होम्योपैथी का औषधीय उपचार दुष्प्रभाव रहित, सुरक्षित, बेहतर और दीर्घकालिक और स्थायी  परिणाम दायक होता है।

उपरोक्त के अलावा स्वस्थ और सफल सेक्स के लिये—
1. सही समय पर उचित, नियमित एवं पोषक भोजन।
2. नियमित और उचित व्यायाम। 
3. पर्याप्त नींद।
4. तनाव रहित तथा नशामुक्त सहज जीवन बहुत जरूरी है।
और 
5. मनोशारीरिक विकारों की अनदेखी नहीं करें। अन्यथा यह आपके यौन जीवन बर्बाद कर सकती है।

सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
परम्परागत एवं होम्योपैथ चिकित्सक
M/WA No. : 9875066111/11.01.2017
Web Site : http://www.healthcarefriend.in/
facebook page : https://www.facebook.com/healthcarefriendpage/


परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor. 
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
स्त्रियों की संभोग में रुचियां

स्त्रियों में कामुकता के बहुत से केंद्र होते हैं लेकिन उन केंद्रों के बारे में जानने से पहले यह जानना जरुरी है कि उनमें काम उत्पत्ति कब होती है।
स्त्रियों की संभोग में रुचियां लड़कियों का जब मासिकधर्म शुरू होता है तो उसके बाद उनके शरीर में खास तरह के हार्मोन्स का विकास होना शुरू होता है और इसी समय से लड़कियां काम भावना की ओर भागने लगती हैं। इसी समय लड़कियों के शारीरिक अंगों का भी विकास होने लगता है। जैसे उसके स्तन और नितंबों का भारी होना, जननांगों पर बाल उगना़, आवाज का बदल जाना आदि। माना जाता है कि जिन लड़कियों का मासिकधर्म जल्दी शुरु होता है उनके अंदर संभोग करने की इच्छा भी जल्दी पैदा होती है लेकिन यह बात पूरी तरह से सही नहीं है क्योंकि संभोग करने की इच्छा का संबंध शारीरिक विकास की अपेक्षा सामाजिक या अनुवांशिक कारणों से ज्यादा होता है। 

दाम्पत्य सुख को समझने और भोगने के इच्छुक हर एक स्त्री और पुरुष को पढने योग्य अति महत्वपूर्ण और उपयोगी जानकारी प्रदान करने वाला एक पढने योग्य आलेख!-"अतृप्त दाम्पत्य कारण एवं निवारण!"

अक्सर कुछ लड़कियां मासिकधर्म के दौरान संभोग के प्रति उत्तेजना महसूस करती हैं लेकिन संभोग करने से डरती हैं लेकिन यह बात सही नहीं है। अगर वे इस दौरान संभोग के प्रति उत्तेजना महसूस करती हैं तो उसे संभोग करने से डरना नहीं चाहिए वह अपने पति को संभोग के लिए तैयार कर सकती हैं। इस दौरान स्त्री को गर्भ ठहरने का डर भी नहीं रहता है और उसकी योनि में भी वहुत ज्यादा नमी रहती है। शुरुआत में तो स्त्रियां इस दौरान संभोग करते समय योनि में से ज्यादा खून आने की शिकायत करती हैं लेकिन धीरे-धीरे यह खून आना कम हो जाता है क्योंकि कु्छ समय में गर्भाशय का संकुचन हो जाता है। कुछ स्त्रियों में मासिकधर्म के समय दिमागी तनाव जैसे लक्षण पैदा हो जाते हैं जिसका असर उनकी सेक्स करने की इच्छा पर भी पड़ता है। उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है और इसी के साथ ही जी मिचलाना, कमर में दर्द आदि लक्षण प्रकट होते हैं।
बहुत सी स्त्रियां गर्भधारण करने के बाद सेक्स करने के बारे में इच्छा तो रखती है लेकिन डरती है कि कहीं इसका उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर न पड़े। ऐसी स्त्रियां गर्भावस्था के दौरान संभोगक्रिया कर सकती हैं लेकिन इसके लिए उन्हें अपने आपको शरीर और दिमाग से पूरी तरह स्वस्थ महसूस करना होता है और कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। अगर किसी स्त्री को पहले गर्भावस्था के समय 3 महीने के दौरान कभी गर्भपात हुआ हो तो दुबारा गर्भ ठहरने के बाद शुरुआती 3 महीनों तक संभोगक्रिया से दूर रहना चाहिए। 
अगर स्त्री को पहले कई बार गर्भपात हुआ हो तो गर्भावस्था के दौरान उसे संभोग से दूर रहना चाहिए क्योंकि ऐसी स्त्री के गर्भाशय का मुंह गर्भ को स्थापित रखने में कमजोर होता है। स्वस्थ स्त्री अगर शुरुआती 3 महीने के बाद सातवें महीने तक संभोग करे तो कोई परेशानी की बात नहीं है। लेकिन संभोगक्रिया के लिए ऐसे आसनों का प्रयोग करना चाहिए जिनका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर न पड़े। इन आसनों में संभोगक्रिया के दौरान स्त्री को पुरुष के ऊपर होकर या बगल में लेटकर संभोगक्रिया करनी चाहिए।

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बहुत सी स्त्रियों में यौन उत्तेजना इतनी तेज होती है कि उन्हें संभोग करने से पहले प्राकक्रीड़ा द्वारा उत्तेजित करने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसी स्त्रियां पुरुष के द्वारा छूते ही उत्तेजित हो जाती हैं और संभोगक्रिया के लिए तैयार हो जाती हैं। पर दूसरी किस्म की स्त्रियों को कलात्मक प्राकक्रीड़ा द्वारा उत्तेजित करना जरूरी हो जाता है। 
जब तक ऐसी स्त्रियों के जननांगों में यौन लहरे तरंगित नहीं होती तब तक उनका पति उनके साथ सफल सेक्स नहीं कर सकता। जब तक स्त्री में यौन उत्तेजना नहीं होगी तब तक उसकी योनि द्रवित नहीं हो पाएगी और उसमें लिंग भी आसानी से प्रवेश कर पाएगा। अगर किसी तरह से लिंग योनि में प्रवेश कर भी जाता है तो उससे तेजी से घर्षण नहीं किया जाएगा। इसलिए हर पति को अपनी पत्नी के काम केंद्रों की जानकारी होनी चाहिए।
वैसे तो स्त्री का पूरा शरीर ही यौन उत्तेजना के मामले में संवेदनशील होता है लेकिन उसके होंठ, जीभ, स्तन, नाभि का हिस्सा, नितंब, जांघ के अंदर का हिस्सा, योनि और भगनासा बहुत उत्तेजक अंग होते हैं। अगर स्त्री के इन अंगों को सहलाया जाए तो स्त्री उत्तेजित होकर तुरंत संभोग के लिए तैयार हो जाती है।
होंठ और जीभ-होंठ और जीभ बहुत ही कामोत्तेजक होते हैं। पति जब अपनी पत्नी का चुंबन लेते समय उसके नीचे वाले होंठ को अपने होंठों के बीच में लेकर चूसता है, उसकी जीभ को अपनी जीभ से रगड़ता है, मुंह में मुंह लेकर चूसता है तो स्त्री के होंठ कामोत्तेजना से गुलाबी हो जाते हैं और उसकी आंखों में भी नशा छाने लगता है। अक्सर पत्नी अपने पति के द्वारा होंठों को चूमने या चूसने से तुरंत ही कामोत्तेजित हो जाती है।
स्तन-स्त्री के स्तन भी बहुत कामोत्तेजक होते हैं। अक्सर पुरुष स्त्री के स्तनों को देखकर ही उत्तेजित हो जाता है लेकिन जब पुरुष भारी और आकर्षक स्तनों को धीरे-धीरे सहलाता और मसलता है, उसके स्तनों के निप्पलों को उंगलियों से धीरे-धीरे दबाता है तो स्त्री उसी समय कामोत्तेजित हो जाती है बेकाबू हो जाती है। अगर पुरुष स्तनों के निप्पलों में से एक को चूसते हुए दूसरे को सहलाता है तो स्त्री कामोत्तेजित होकर सिसकियां लेनी लगती हैं। लेकिन इस सबको अगर एक हद तक ही किया जाए तो ठीक है वरना पुरुष को अपने आपको संभालना मुश्किल हो जाता है और वह तुरंत ही स्खलित हो जाता है। बहुत से पुरुष होते हैं जो स्त्री के स्तनों के साथ खेलते-खेलते ही स्खलित हो जाते हैं।
नाभि-स्त्री के नाभि वाले भाग को अगर हल्के-हल्के से सहलाया या गुदगुदाया जाए तो स्त्री की कामोत्तेजना बढ़ने लगती है। अगर पुरुष स्त्री की नाभि को अपनी जीभ से चूमता या सहलाता है तो स्त्री में कामोत्तेजना चरम पर पहुंचने लगती है। लेकिन स्त्री का नाभि वाला भाग उसके होंठों, जीभ और स्तनों से कम ही उत्तेजक होता है।
नितंब-बहुत सी स्त्रियों के नितंब काफी आकर्षक और कामोत्तेजक होते हैं। बाहर के देशों में उन स्त्रियों को बहुत सुंदर और मादक माना जाता है जिसका सीना और नितंब एक ही साइज के होते हैं जैसे अगर किसी स्त्री का सीना 34 है तो उसके नितंबों के उभारों का नाप भी 34 ही होना चाहिए। सौंदर्य प्रतियोगिताओं में अक्सर वही स्त्री जीतती है जिसके सीने, कमर और नितंब का नाप 34-24-36 होता है। उभरे हुए नितंब पुरुष के लिए स्तनों के समान ही कामोत्तेजक होते हैं। नितंबों को सहलाने और मसलने से पुरुष की नस-नस में कामोत्तेजना पैदा होने लगती है और स्त्री भी कामोत्तेजित होकर पति से लिपटने लगती है।
जांघ-स्त्री के जांघों के भीतरी भाग को धीरे-धीरे सहलाने से भी स्त्री कामोत्तेजित हो जाती है। इन अंगों का मादक स्पर्श पुरुष को भी कामोत्तेजित कर देता है। अक्सर स्त्रियां इन अंगों को सहलाए जाने से प्रसन्न और गदगद हो जाती हैं और संभोगक्रिया के लिए तैयार हो जाती हैं।
भगनासा-स्त्री के शरीर का सबसे कामोत्तेजक अंग उसका भगनासा होता है। यह छोटे भगोष्ठों के बीच उस स्थान पर स्थित होता है जहां से छोटे भगोष्ठों का उभार शुरू होता है। इसके थोड़ा सा नीचे मूत्रद्वार होता है जिससे स्त्री मूत्र त्याग करती है। भगनासा छोटे दाने के आकार में उभरी हुई होती है लेकिन असल में ये बहुत ज्यादा बारीक कामोत्तेजक तंत्रिकाओं का समूह होती है। यह लिंग का ही बहुत छोटा प्रतिरूप होता है। इसमें भी मुंड होता है जो साधारण रूप में मुंडचर्म से ढका रहता है लेकिन उत्तेजित होने पर मुंड अनावृत होकर तन जाता है। इसका आकार भी सामान्य से दुगना हो जाता है। पुरुष जब इस भगनासा को हल्के से सहलाता है या कलात्मक ढंग से छेड़ता है तो स्त्री के शरीर में काम उत्तेजना बहुत ही तेज हो जाती है। अगर यह क्रिया हद से बाहर हो जाती है तो तेज काम उत्तेजना के कारण पुरुष और स्त्री दोनों ही स्खलित हो जाते हैं और संभोगक्रिया के असली आनंद से वंचित रह जाते हैं। इसलिए पुरुष को इस मामले में बहुत ही सावधान रहने की जरूरत होती है। थोड़ी सी सावधानी बरतने से ही पुरुष स्त्री को इतना उत्तेजित कर देता है कि स्त्री की योनि में पुरुष के लिंग के प्रवेश करने तथा हल्के से घर्षण से ही स्त्री तेज स्खलन को महसूस करके बहुत ज्यादा आनंद और गुदगुदी से कुछ पलों के लिए आनंद के सागर में खो जाती है।
योनि-भगनासा के अलावा स्त्रियों का योनि मार्ग भी काफी संवेदनशील कामोत्तेजक अंग होता है। योनि के मुख्य द्वार पर छोटे भगोष्ठ स्थित होते हैं जो बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं। छोटे भगोष्ठों से सलंग्न योनि छल्ला होता है जो भगनासा की तरह ही सूक्ष्म तंत्रिकाओं से घिरा होता है। यह अंग स्वैच्छिक पेशियों से जुड़ा रहता है और स्त्री अपनी इच्छा के अनुसार इसमें संकोच उत्पन्न कर सकती है। संभोगक्रिया के समय जब लिंग तेजी से घर्षण करता है तो उस समय योनि मुख के कलात्मक ढंग से फैलने और सिकुड़ने से पुरुष बहुत ज्यादा आनंद महसूस करता है। उत्तेजना उसे और मदहोश कर देती है और लिंग के द्वारा योनि में घर्षण और तेज होता जाता है। बहुत सी कामुक स्त्रियों में योनि मुख का आंकुचन (योनि मुख का अपने आप सिकुड़ना और फैलना) कामोत्तेजना के समय खुद ही होने लगता है और स्त्री आसानी से उसके सिकुड़ने और फैलने की गति को नियंत्रित नहीं कर सकती है। इस प्रकार की योनि से पुरुष को जो यौन सुख मिलता है, उसको बताया नहीं जा सकता है। स्त्री के इस अंग को उंगली से धीरे-धीरे सहलाने से या जीभ के द्वारा चाटने से स्त्री बहुत ज्यादा उत्तेजित होकर सिसकियां भरने लगती है। ऐसी स्थिति पैदा होने पर अगर पुरुष अपने लिंग को स्त्री की योनि में प्रवेश कराके घर्षण शुरू कर दें तो कुछ ही समय में स्त्री स्खलित होकर संतुष्ट हो जाती है। स्त्री जब बहुत ज्यादा उत्तेजित हो जाती है तब उसके भगोष्ठ फूलकर गुलाबी रंग के हो जाते हैं।
किसी भी स्त्री को उत्तेजित करने में लगभग 15 से 30 मिनट का समय लग जाता है लेकिन पति में अगर सब्र या कामकला की कमी हो तो वह पत्नी को उत्तेजित किये बिना ही एकतरफा संभोगक्रिया में लग जाता है और तुरंत ही स्खलित होकर एक तरफ हो जाता है। इस सब में उसे इस बात की कोई चिंता नहीं रह जाती कि जिस पत्नी ने उसे अलौकिक आनंद प्रदान किया है उसे खुद भी पूरी तरह संतुष्टि मिली है या नहीं।
कई स्त्रियां होती हैं जो संभोगक्रिया के समय चुंबन से ऩफरत करती हैं और पुरुष के द्वारा अपने शरीर पर नाखून गाड़ने से या दांतों से काटने से भी बुरा मानती हैं। ब्रह्मलोक और अवंती की स्त्रियां भी इन्हें पसंद नहीं करती लेकिन संभोगक्रिया के अलग-अलग आसनों में ज्यादा रुचि लेती हैं। इनको युक्तसंगम या बैठकर संभोग करने में आनंद मिलता है। यह 4 प्रकार से किया जाता है- जानूपू्र्वक, हरिविक्रम, द्वितल और अवलंबित।
आमीर प्रदेश और मालवा की स्त्रियों को मजबूत आलिंगन, चुंबन और पीड़ाक जैसी संभोगक्रिया सबसे प्रिय होती है। इन्हें पुरुष के द्वारा अपने शरीर पर नाखून गड़ाना और दांतों से काटना नापसंद होता है। संभोगक्रिया में इन्हें जितना ज्यादा दर्द होता है उतनी ही अधिक इनकी यौन उत्तेजना बढ़ती है।
ईरावती, सिंधु, शतद्रु, चंद्रभागा, विपात और वितस्ता नदियों के पास रहने वाली स्त्रियों के शरीर की उत्तेजना बढ़ाने वाले अंगों पर पुरुष द्वारा सहलाने से काम उत्तेजना तेज होती है।
गुर्जरी स्त्रियों के सिर के बाल घने, दुबला-पतला शरीर, स्तन भरे हुए और आंखे नशीली होती हैं। यह स्त्रियां सरल संभोग करना पसंद करती हैं।
लाट प्रदेश की स्त्रियां बहुत उत्तेजक होती हैं। इनके शरीर के अंग कोमल और नाजुक होते हैं। ऐसी स्त्रियों को लगातार चलने वाली संभोगक्रिया पसंद होती है। अपने पुरुष साथी से 
लिपटना इन्हें बहुत पसंद होता है। ये तेज कटिसंचालन करती हैं और काफी देर तक योनिमंथन करने से इन्हें आनंद मिलता है। यह स्त्रियां पुरुष द्वारा अपने शरीर पर नाखून गड़ाना और दांतों से काटना भी पसंद करती हैं।
आंध्रप्रदेश की स्त्रियां कोमल अंगों वाली होती हैं और इनके अंदर यौन उत्तेजना बहुत ज्यादा होती है। यह स्त्रियां संभोग के लिए पुरुष को खुद ही उत्तेजित करती हैं और बड़वा आसन में संभोग करना पसंद करती हैं।
उत्कल और कलिंग प्रदेश की स्त्रियों को काम उत्तेजना के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं होता। यह स्त्रियां पुरुष द्वारा अपने शरीर पर नाखून गड़ाना और दांतों से काटना पसंद करती हैं। उत्कल स्त्रियां बिल्कुल शर्म न करने वाली, हमेशा प्यार करने वाली और लंबे समय तक संभोग की इच्छा रखने वाली होती हैं।
बंगाल और गौड़ प्रदेशों की स्त्रियां कोमल अंगों वाली होती हैं। इन्हें हर समय आलिंगन और चुंबन में रुचि होती है। ऐसी स्त्रियों की काम उत्तेजना को जगाने में बहुत देर लगती है लेकिन एक बार जब इनकी काम उत्तेजना जगती है तो ये अपने आपको पूरी तरह से पुरुष के हवाले कर देती हैं। इनके नितंब भारी होते हैं इसलिए इन्हें नितंबनी भी कहा जाता है।
कामरूप की स्त्रियां मीठी बोली वाली होती हैं। इनके शरीर के अंग कोमल और आकर्षक होते हैं। पुरुष द्वारा सिर्फ इनका आलिंगन करने से ही इन्हें पूरी तरह संभोग संतुष्टि मिल जाती है। एकबार अगर यह स्त्रियां उत्तेजित हो जाती हैं तो उसके बाद यह पूरी तरह से संभोगक्रिया में डूबी रहती हैं।
आदिवासी स्त्रियां अपने शरीर के विकारों को दूसरों से छुपाती हैं लेकिन दूसरों में अगर कोई दोष इन्हें दिखाई देता है तो यह उन्हें ताना मारने से नहीं चूकती हैं। इन्हें संभोग की सभी क्रीड़ाएं पसंद होती हैं और यह सामान्य संभोग में ही यह संतुष्ट हो जाती हैं।
महाराष्ट्र की स्त्रियां 64 कलाओं की ज्ञाता होती हैं। संभोगक्रिया के समय वह किसी प्रकार का संकोच नहीं करती और अश्लील बातें बोलती हैं।
पटना की स्त्रियां भी अश्लील बातें करती हैं लेकिन सिर्फ घर के अंदर, बाहर नहीं।
कर्नाटक की लड़कियों की योनि से पानी ज्यादा मात्रा में निकलता है। यह स्त्रियां आलिंगन. चुंबन और स्तनों को दबवाने के साथ ही योनि में उंगलियों से घर्षण करने से उत्तेजित होती है। संभोगक्रिया के समय यह स्त्रियां जल्दी संतुष्ट हो जाती हैं।
लड़कियों का जब मासिकधर्म शुरू होता है तो उसके बाद उनके शरीर में खास तरह के हार्मोन्स का विकास होना शुरू होता है और इसी समय से लड़कियां काम भावना की ओर भागने लगती हैं।
http://dev.designsdev.org/2016/07/blog-post_14.html
यह अवस्था अर्थात् तृप्ति या ऑर्गेज्म तो स्त्री की पुरुष के समक्ष हार या समर्पण का स्वाभाविक प्रतिफल होता है, जबकि ऐसी आधुनिका नारियों का अवचेतन तो इतना रुग्ण हो चुका होता है कि वे पुरुष के समक्ष अपना सबकुछ समर्पित करके हार जाने के बजाय कुछ भी समर्पित नहीं करके सब कुछ पा लेने की लालसा लिये और बिना दिल से जुड़े केवल शरीर का अपनी शर्तों के अनुसार मनचाहा मिलन (संसर्ग) करने में अपनी शान समझती हैं| जिन्हें, उनके तथाकथित प्रेमी भी एक देह से अधिक कुछ नहीं समझते हैं और जो पुरुष सिर्फ देह से जुड़ता है, वह स्त्री को वह सब कभी नहीं दे सकता जो एक स्त्री की प्रकृतिप्रदत्त आकांक्षा होती है|
स्त्री ​के दिमांग की तुलना में पुरुष का दिमांग करीब 10% बड़ा होता है, लेकिन फिर भी स्त्रियों में संवेदनात्मक बौद्धिक क्षमताएं अधिक होती है!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
आधुनिक विज्ञान ने मशीनों के माध्यम से अनेक अनसुलझी गुथ्थियों को सुलझा कर सामने रख दिया है। जैसे पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी (पेट) स्कैन [Positron Emission Tomography (PET) Scans] जैसी मशीनों ने इस बात को सिद्ध कर दिया है कि स्त्री ​के दिमांग की तुलना में पुरुष का दिमांग करीब 10% बड़ा होता है। मगर इसका मतलब यह कतई नहीं कि दिमांग का आकार छोटा होने के कारण स्त्री की दिमांगी क्षमताएं पुरुषों से कम या कमतर होती हैं। बल्कि महिलाओं के दिमांग के कुछ हिस्सों में न्यूरॉन्स (Neurons) पुरुषों के दिमांग में पाये जाने वाले न्यूरॉन्स से अधिक होते हैं। जिनका कार्य मानव शरीर के कार्यों, विचारों और इंद्रियों को नियंत्रित/संचालित करना होता है। 

मामला केवल स्त्रियों के दिमांग के कुछ हिस्सों में न्यूरॉन्स की अधिकता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मनोवैज्ञानिकों का दावा है कि सामान्यत: पुरुष अनादिकाल से अपने दिमांग के केवल बांये हिस्से का ही इस्तेमाल करते आये हैं। जबकि स्त्रियां अपने दिमांग के दोनों हिस्सों का उपयोग करती आयी हैं। इस वजह के दोनों के मध्य के पारस्परिक व्यवहार, हालातों और, या आपसी या पारिवारिक रिश्तों की गहराई, महत्ता और संवेदनशीलता को भावनात्मक रूप से समझने में पुरुषों की तुलना में स्त्रियां जन्म से ही अधिक निपुण तथा दक्ष होती है। यही वजह है कि स्त्रियां अपने पुरुष साथी से भावनात्मक निकटता की चाहत में न चाहते हुए भी, अनचाहे शारीरिक सम्बन्ध बना बैठती हैं या स्त्रियों की भावनाओं से सराबोर निकटता का पुरुष अपने हित में इस्तेमाल कर लेते हैं। शायद यही वजह है कि एक बालिग स्त्री भी पुरुष पर यह आरोप लगाती है कि पुरुष द्वारा उसे फुसलाकर, उसके साथ धोखा किया गया। जिसे कानून द्वारा भी स्वीकृति प्राप्त है। खैर इस विषय पर फिर कभी। 

मानव दिमांग का बायां हिस्सा सामान्यत: संवेदनाहीन-तार्किकता (Senseless-Logicality) का क्षेत्र होता है, जबकि दायां हिस्सा संवेदना से ओतप्रोत/सराबोर होता है। यही वजह है कि जहां पुरुषों के स्वभाव में सामान्यत: तर्क-वितर्क, राजनीतिक उठापटक, कूटनीति, सामने बाले को आहत कर देने वाली तीखी बहस, मारामारी, खोज, संघर्ष, प्रतिशोध इत्यादि में अधिक निपुणता पायी जाती है। जबकि छोटी-छोटी घटनाओं, पेड़-पौधों, सहज व साधारण सी बातों, मोहक दृश्यों, कपड़ों के रंगों तक को याद रखने, दूसरों को धैर्य पूर्वक सुनने और समझने, विषय की संवेदना को गहराई से समझने, वाकपटुता तथा वाकचातुर्य में स्त्रियां पुरुषों से कई कदम आगे होती हैं।

सामान्यत: स्त्री जब किसी विषय की व्याख्या करती है तो उसमें आत्मीय भावों और संवेदनाओं के रंगों का मिश्रण अवश्य पाया जात है, जबकि पुरुष की व्याख्या रूखे तार्किक निष्कर्ष (Rude logical conclusions) तक सीमित होती है। कारण स्त्री अपने दिमांग के दोनों हिस्सों का उपयोग करती हैं। यही वजह है कि स्त्रियां बहुत जल्दी भावुक हो जाती हैं, जबकि छोटी-छोटी बातों पर भावुक नहीं होने को पुरुष अपने अहंकार से जोड़कर अपने आप को मर्द/यौद्धा की भांति सिद्ध करने की कोशिश करते रहते हैं। यही वजह है कि अधिकतर पुरुषों को ऐसी स्त्रियां बिलकुल भी पसंद नहीं जो बात-बात पर आंसू टपकाती रहें, जबकि अधिकतर स्त्रियों को ऐसे पुरुष बिलकुल भी पसंद नहीं जो अपने दु:ख दर्द को अंदर ही अंदर पीकर जीवनभर घुट-घुट कर मरते रहें। बावजूद इसके हर घर की यही कहानी है।

यद्यपि कड़वी हकीकत यह है कि सामान्य पुरुष चाहें तो भी आसानी से भावुक नहीं हो सकते। इसकी वजह पुरुषों के स्वभाव में प्रकृतिदत्त भावुकता की जन्मजात कमी का होना है। अत: पुरुष चाहें तो भी बात-बात पर भावुक और संवेदनशीलता से परिपूर्ण व्यवहार नहीं कर सकते। यद्यपि मनोवैज्ञानिकों तथा मानवव्यवहार शास्त्रियों का कहना है कि पुरुषों द्वारा सतत अभ्यास (continuous practice) के जरिये भावनाओं और संवेदनाओं को स्त्रियों की ही तरह से प्रकट करना सीखा जा सकता है। जैसे कि फिल्मों और नाटकों में काम करने वाले पुरुष सीख लेते हैं।

इस विषय में मेरा मत है कि भावनाओं और संवेदनाओं को प्रकट करना केवल नाटक करने या ऑडियंस (audience) या मिलने-जुलने वालों को प्रभावित करने तक ही सीमित नहीं होना चाहिये, बल्कि इसे दैनिक पारिवारिक जीवन में आपसी व्यवहार में भी सहजता से उपयोग किया जाये तो बहुत से विवाद जन्म ही नहीं लेंगे। लेकिन स्त्रियों को भी पुरुषों की तार्किक मनोस्थिति का ज्ञान होना बहुत जरूरी हैं। भारत जैसे देश में जहां एक मोपेड (Moped) चलाने के लिये तो लाईसेंस की अनिवार्यता है, लेकिन 6 से 8 दशक तक दाम्पत्य जीवन को संचालित करने के लिये किसी प्रकार की व्यावहारिक दाम्पत्य/यौन शिक्षा या उचित परामर्श तक आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में नवदम्पत्तियों के मध्य होने वाले टकराव अस्वाभाविक नही हैं।

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फिर इंतजार किस बात का है, आज से ही दूसरों की भावनाओं को संवेदनापूर्वक समझने की कोशिश की जाये, जिससे कि दूसरे हमारी भावनाओं का भी आदर कर सकें। विशेष रूप से यह कला सुखद दाम्पत्य जीवन के लिये बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। टूटते रिश्तों को बचा सकती है। अंत में फिर से दौहरना चाहूंगा कि

'अधिकतर पुरुषों को ऐसी स्त्रियां बिलकुल भी पसंद नहीं जो बात-बात पर आंसू टपकाती रहें, जबकि अधिकतर स्त्रियों को ऐसे पुरुष बिलकुल भी पसंद नहीं जो अपने दु:ख दर्द को अंदर ही अंदर पीकर जीवनभर घुट-घुट कर मरते रहें।'

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-दाम्पत्य विवाद सलाहकार, 9875066111
-Online Dr. P. L. Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 8561955619 (10 AM to 10 PM), 17.06.2018.
14 फरवरी: जानें विवाहेत्तर सम्बंधों की यह सबसे बड़ी वजह?
लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'


वैसे तो हर पल जीवन का अन्तिम पल होता है। अत: कोई भी दिन या पल ऐसा नहीं हो सकता, जब प्यार का इजहार संभव नहीं, लेकिन जब जमाना बदल रहा है और युवा पीढी वैश्विक संस्कृति में समाविष्ट हो रही है तो 14 फरवरी भी प्यार का प्रतीक बनता जा रहा है। लोकतंत्र में लोक अवधारणाएं और लोकतम ही सर्वोच्च होता है। अत: मानो या नहीं, लेकिन 14 फरवरी को भारत की युवा पीढी में मान्यता मिल चुकी है। जिसे आज नहीं तो कल सार्वजनिक स्वीकृति मिलना तय है। इस अवसर पर दाम्पत्य विवाद सलाहकार के रूप में कुछ अनुभवजन्य तथा मनोवैज्ञानिक शोधों पर आधारित स्त्री-पुरुष सम्बंधों से जुड़े हुए निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से साझा कर रहा हूं:-
  • 1. आपसी रिश्तों में पुरुष स्त्री पर काबू पाना चाहता है, जबकि स्त्री की प्राथमिकता काबू करने की नहीं, बल्कि कुछ सहयोग, प्यार और योगदान करने की होती है।
  • 2. पुरुष के लिये तर्क सर्वोच्च होता है, जबकि स्त्री के लिये भावनाएं और संवेदनाएं जिसका कारण पुरुष के दिमांग का एक ही हिस्सा काम करता है, जबकि स्त्री के दोनों।
  • 3. रिश्तों में चोट खाने के बाद तुलनात्मक रूप से स्त्री के लिये संभलना बहुत आसान होता है, जबकि पुरुष के लिये बहुत मुश्किल। अनेक बार असंभव भी।
  • 4. अधिकतर पुरुषों को स्त्रियों की शारीरिक बनावट और सौन्दर्य में ही दिलचस्पी होती है। स्त्री की संवेदनाओं को समझने में उन्हें कोई रुचि नहीं होती। जबकि कड़वा सच यह है कि 'स्त्री की देह को पाकर रह जाने वाले पुरुष का जीवन सदैव अधूरा ही रहता है।'
  • 5. पत्नी के साथ चलते हुए दूसरी स्त्रियों को देखने वाले पति अकसर रंगे हाथ पकड़े जाते हैं, जबकि किन्हीं अपवादों को छोड़कर स्त्रियां कभी नहीं पकड़ी जाती! जबकि पुरुषों की तुलना में स्त्रियां अधिक ताकझांक करती हैं!
  • 6. स्त्री पुरुष की कमजोरियों को जानते हुए भी उसे चाहती और अपना भी लेती है, जबकि पुरुष के लिये ऐसा करना प्राय: असंभव होता है। परिणामस्वरूप ताउम्र दाम्पत्य जीवन में कभी न समाप्त होने वाली दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
  • 7. एक विवाहिता पत्नी को दुत्कार देने वाला पुरुष दूसरी पत्नी को छोड़ देने या नकार देने में वक्त नहीं लगाता।
  • 8. विवाहेत्तर सम्बंध-एक्स्ट्रा मैरीटल रिलेशन बनाने वाले नब्बे फीसदी पुरुषों के पास इन सम्बंधों की कोई वजह नहीं होती। अत: अंत में उसे निराशा ही हाथ लगती है। पुरुष ऐसे काल्पनिक आनंद को वहां, खोजता फिरता है, जहां या कहीं भी वह होता ही नहीं है। वहीं दूसरी ओर विवाहेत्तर सम्बन्ध स्त्री को धन और मजे तो दे सकते हैं, लेकिन प्यारभरी ऊष्मा तथा सम्मान नहीं दे सकते। अत: दोनों ही निराश होते हैं।
  • 9. यह बात लगभग सर्वस्वीकार्य है कि शानो-शौकत, पद, प्रतिष्ठा, धन-सम्पदा और चकाचौंध से स्त्री को विवाह हेतु आकर्षित तो किया जा सकता है, लेकिन विवाह के बाद शानो-शौकत, पद, प्रतिष्ठा, धन-सम्पदा और चकाचौंध की तुलना में स्त्री को एक व्यक्ति के रूप में महत्व, उसकी संवेदनाओं का खयाल तथा उसके प्रति प्यारभरी ऊष्मा अधिक महत्वपूर्ण होती है। अत: हर स्त्री को शानो-शौकत, पद, प्रतिष्ठा, धन-सम्पदा और चकाचौंध तो चाहिये, लेकिन अपने सम्मान और संवेदनाओं के बदले में नहीं।
  • 10. सबसे बड़ी उलझन-पत्नी सोचती है कि वह अपने पति के बारे में सब कुछ जानती है, जबकि पुरुष सोचता है कि काश उसे समझने वाली पत्नी मिल पाती? दूसरी ओर पति सोचता है कि अन्य पुरुषों की तुलना में वह अपनी पत्नी को बहुत ज्यादा प्यार तथा सम्मान प्रदान करता है, जबकि पत्नी सोचती है, काश दूसरे पतियों की भांति उसका पति भी उसे प्यार और सम्मान प्रदान कर पाता? विवाहेत्तर सम्बंधों की यह सबसे बड़ी वजह है!
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, ऑन लाईन-स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार, संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज), Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619, Mobile No.: 98750-66111 (10AM to 10 PM), 14.02.2018.
बिखरता जीवन संभाला जा सकता है-एक दूसरे के प्रति-सम्मान का भाव, निष्ठा, विश्वास, पारदर्शिता और निष्कपट स्नेह, दाम्पत्य के प्रेमरस की कुंजी एवं पुख्ता आधारशिला हैं।

लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' 

विभिन्न देशों में, विभिन्न समयों पर, विभिन्न शोधकों के शोधों से यह बात अनेकों बार प्रमाणित हुई है कि-



1. हजारों सालों के वंशानुगत आचरण, अवचेतन में स्थापित जीवन जीने के मानदंडों और प्रचलित सामाजिक व्यवस्था का एक पारिणामिक सच-

"स्त्री, अपने पति या प्रेमी की बुरी आदतों और उसके चरित्र की कमजोरियों को जान लेने के बाद भी, उनकी अनदेखी कर के उसे जीवनभर चाह सकती है। उसके साथ दाम्पत्य और आत्मीय प्रेम सम्बंधों का निर्वाह कर सकने में सफल हो सकती है।"
जबकि इसके ठीक विपरीत-
2. किन्हीं अपवादों को छोड़कर, एक सामान्य पुरुष, स्त्री की व्यवहारगत कमजोरियों, बुरी आदतों और उसके हलके चरित्र को कभी सहन नहीं कर सकता। बेशक उसे इसकी कितनी भी बड़ी कीमत क्यों ना चुकानी पड़े।
परिणामस्वरूप
3. स्त्री, पुरुष को चाहते हुए भी, अपने आप के बारे में बहुत कुछ छिपाने में खुद को पारंगत समझने लगती हैं। पुरुष भी अपनी संगिनी को विश्वास पात्र, वफादार, समर्पित और सद्चरित्र मानकर उस पर गर्व करने लगता है।
लेकिन
4. जिस दिन स्त्री की हकीकत पुरुष के सामने आती है, उन दोनों के जीवन बिखर जाते हैं। स्त्री के पास सुधार के लिए शेष कुछ नहीं बचता है।
और
5. पुरुष के पास जीवन जीने का कोई कारण नहीं बचता है।
दु:खद परिणिती-
6. परिवार बिखर जाते हैं। अनेक पुरुष नशे के आदि हो जाते हैं या आत्महत्या तक कर लेते हैं। मासूम बच्चों का जीवन बर्बाद हो जाता है। जो ज़िंदा रहते हैं-पल-प्रतिपल घुट-घुट कर जीने को विवश हो जाते हैं।

अत: अब जबकि सामाजिक और पारिवारिक मूल्य विखण्डित हो रहे हैं, जिन्हें सुधारवादी बदलाव कहते हैं। बेहतर और जरूरी है, बल्कि अपरिहार्य है कि-

7. स्त्री और पुरुष या प्रेमी-युगल इस बात को समझें कि समय और हालातों के अनुसार अपने सोचने और जीने के तरीकों और आदतों में यथासम्भव सजगता लाएं और अधिक सजग तथा पारदर्शी जीवन जियें। आपसी विश्वास खोकर एक साथ और एक छत के नीचे रहते हुए-
प्रेममय,
सजग
और
सफल
जीवन की कामना असम्भव है।
अंतिम बात-
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स्त्री और पुरुष दोनों का सोचने का ढंग मूल रूप से मनोसामाजिक एवं आनुवांशिक समाजीकरण का परिणाम है। जिसके लिये सम्पूर्ण रूप से उनको दोषी नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन आज जबकि हम हर एक क्षेत्र में बदल रहे हैं। बदलने को तत्पर हैं। ऐसे में यह अपेक्षा की जाती है कि—

''एक दूसरे के प्रति-सम्मान का भाव, निष्ठा, विश्वास, पारदर्शिता और निष्कपट स्नेह, दाम्पत्य के प्रेमरस की कुंजी एवं पुख्ता आधारशिला हैं। अत: यह निर्णय नितांत जरूरी है कि 'आज तक हम से जो हो चुका, सो चुका या जो खो चुका, सो खो चुका। अब उसका रोना छोड़कर या उसे दुस्वप्न की भांति भुलाकर शेष बचे जीवन को तो संभाला ही जा सकता है। क्योंकि वर्तमान ही सत्य है।"
विचार प्रवाह के तहत यह विचार दिनांक: 19.12.2015 को लिखा गया था। जो आज भी प्रासंगिक है। अत: प्रसारित है।
नोट : आपको यह सन्देश व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि वाट्सएप के ब्रॉड कॉस्टिंग सिस्टम के जरिये भेजा गया है। अत: यदि आपको किसी भी प्रकार की आपत्ति हो तो, कृपया अवगत करावें। आगे से आपको ऐसा कोई सन्देश नहीं भेजा जायेगा।
शुभाकांक्षी और स्नेही
*डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'* On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, ऑन लाईन-स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार, संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज), *Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 इस पर काल नहीं करें। Mobile No.: 9875066111 (केवल 10AM to 10 PM के बीच ही काल करें)*—07.02.2018.
हस्तमैथुन में आनंद आता है, लेकिन संभोग में नहीं, क्या करूँ?

समस्या: डॉ. साहब मेरी उम्र चौबीस साल है! मैं जब 14-15 वर्ष का था, तब से ही हस्तमैथुन कर रहा हूँ! पिछले वर्ष मेरी शादी हो गयी। मुझे पत्नी के साथ सेक्स करने में कोई आनंद नहीं आता। पत्नी की योनी पहले दिन से ही ढीली-ढाली है, जिसमें से न जाने सफ़ेद-सफ़ेद सा क्या निकलता रहता है? योनी से बदबू भी आती रहती है! पत्नी चिड़चिड़ी भी रहने लगी है! बार-बार अपने पीहर जाने की जिद करती रहती है। एक वर्ष में मुश्किल से तीन महिने मेरे साथ रही है! उसकी मुझमें और सेक्स करने में कोई रूचि नहीं है! वह मुझसे प्यार भी नहीं करती है। मुझे संदेह है कि उसके विवाह से पूर्व से ही किसी से यौन सम्बन्ध हैं, इसी कारण से उसकी योनी बिलकुल ढीली-ढाली है। इस कारण मैं बहुत परेशान रहता हूँ, क्या करूँ? कृपया मुझे ऐसी सलाह दें कि मैं जिन्दा रह सकूँ और मेरा वैवाहिक जीवन बच जाये! मेरी पत्नी मुझे पूरी तरह से स्वीकार कर ले और मैं उसके साथ सेक्स का पूर्ण आनंद ले सकूँ।-रमेश चंद शर्मा, इंदौर, मध्य प्रदेश।

समाधान: श्री रमेश चंद जी आप ऐसे पहले व्यक्ति नहीं हैं, जो किशोरावस्था से हस्तमैथुन करते रहे हैं, तकरीबन हर एक युवा और अधिकतर युवतियां अपने जीवन में कभी न कभी जाने-अनजाने हस्तमैथुन करते हैं। साथ ही यह भी बतला दूँ कि मानव जाति का जितना पुराना इतिहास है, उतना ही पुराना पुरुष द्वारा हस्तमैथुन किये जाने का इतिहास है। हाँ यदि आप आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के वाहक अर्थात् ऐलोपैथ चिकित्सकों से पूछेंगे तो वे आपको नि:शंकोच कहेंगे कि हस्तमैथुन करने से कोई नुकसान नहीं होता है। आजकल अनेक अन्य पैथी के चिकित्सक भी ऐलोपैथ चिकित्सकों की देखादेख इसी प्रकार की राय व्यक्त करने लगे हैं। इसका हमारी युवा पीढी को बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसलिए मेरे पास सलाह लेने आने वाले अनेक युवा अधिकतर यही सवाल करते हैं कि ‘‘जब ऐलोपैथ चिकित्सकों का कहना है कि हस्तमैथुन से कोई नुकसान नहीं होता तो फिर उनको सेक्स करने में परेशानी क्यों हो रही है?’’


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इस बारे में मेरा भी स्पष्ट रूप से मानना है कि यदि केवल सिद्धान्त की बात करें तो हस्तमैथुन से सीधे तौर पर कोई शारीरिक हानि नहीं होती है, लेकिन व्यवहार की बात करें तो हस्तमैथुन से युवापीढी बर्बाद हो रही है। दुखद तो ये है कि आजकल तो अविवाहित लड़कियां और स्त्रियॉं भी हस्तमैथुन करने लगी हैं। कड़वी हकीकत तो ये है कि पुरुषों और स्त्रियों दोनों को हस्तमैथुन के मानसिक और शारीरिक दुष्परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं। जिसके चलते अनेक विवाह टूट रहे हैं। अनेकानेक दम्पत्ति हर पल मर-मर कर जी रहे हैं। बहुत सारे युवक और युवतियां इस कारण मानसिक रूप से इस कदर टूट चुके हैं कि विवाह करने के नाम से ही डरने लगे हैं। इसी रुग्ण मानसिकता के चलते अनेक स्त्री और पुरुष आत्महत्या तक कर लेते हैं। केवल यही नहीं, बल्कि केवल इस वजह से इन दिनों विवाहेत्तर सम्बन्धों का प्रचलन भी बढ रहा है।
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श्री रमेश जी आप और आप जैसी समस्या से ग्रस्त युवकों और पुरुषों से मेरा साफ शब्दों में कहना है कि आप हस्तमैथुन को और इसके वास्तविक कुप्रभावों को समझने से पूर्व इस बात को खुले मन से समझने का प्रयास करें कि हस्तमैथुन (Masturbation) करने वाले युवा-पुरुष अपनी हथेली से अपनी इन्द्रिय (Organ) या (Penis) पेनिस) पर मनमाफिक दबाव और घर्षण (A friendly pressure and friction) के साथ अपनी इन्द्रिय को उत्तेजित करके यौनसुख (Sexual pleasure) प्राप्त करने के आदी (Addicted) हो चुके होते हैं। उन्हें लम्बे समय तक अपनी हथेली के मनमाफिक दबाव के साथ वीर्यपात (Ejaculation) करके यौनसुख प्राप्त करने की आदत (habit) हो चुकी होती है। जो उनके अवचेतन मन (Subconscious mind) में स्थापित (Established) हो चुकी होती है। इस कारण हस्तमैथुन करने के आदी ऐसे पुरुष पहली बार जब स्त्री के साथ सेक्स करते हैं, तो उन्हें अपनी पत्नी या महिला साथी से वह सुख मिल ही नहीं सकता जो स्वाभाविक सेक्स (Natural sex) में मिलना चाहिये। क्योंकि हस्तमैथुन के आदी पुरुष इस बात को समझने के लिये मन से तैयार नहीं होते हैं कि स्त्री योनि का आन्तरिक हिस्सा बहुत ही नाजुक और लचीला होता है तथा हस्तमैथुन करने वाले अपने हाथ हथैली की कठोरता की तुलना में तो बेहद कौमल होता है, जो हस्तमैथुन के अभ्यस्त पुरुषों को स्वाभाविक रूप से ढीलाढाला ही अनुभव होगा। जिसके बारे में रमेश जी ने अपनी समस्या में जिक्र किया है।

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जबकि प्रकृति की अनुपम सौगात (Unique gift of nature) योनि की कौमलता को ऐसे दुर्भाग्यशाली पुरुष समझ ही नहीं पाते हैं और ऐसे पुरुष अप्राकृतिक हस्तमैथुन को ही सच्चा सेक्स एवं सच्चा यौनानन्द (Sexual pleasure) समझ बैठते हैं। इसके आलावा ये बात भी समझने वाली है कि एक नयी-नवेली स्त्री (दुल्हन) द्वारा अपनी योनि को सिकोड़ कर पुरुष के यौनांगों (पेनिस) पर उतना दबाव डाल पाना सम्भव भी नहीं हो पाता है, जितना कि सेक्स क्रिया की अभ्यस्त हो जाने के बाद एक स्त्री द्वारा डाला जा सकता है। इसके कारण हस्तमैथुन के आदी पुरुषों को स्त्री के साथ सेक्स करने में कोई आनन्द नहीं आता है। (इसी प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति हस्तमैथुन की आदी स्त्रियों के साथ भी होती है। जिस पर फिर कभी अलग से चर्चा की जायेगी।)

पुरुषों के मामलों में एक बड़ी वजह यह भी होती है कि आमतौर पर युवकों को यह भ्रान्ति होती है कि पहली बार सेक्स करते समय स्त्री की योनि में अपनी इन्द्रिय (पेनिस) को आसानी प्रवेश नहीं करवाया जा सकेगा, बल्कि उसे ताकत लगाकर घुसेड़ना पडे़गा, जबकि इसके विपरीत यदि नवविवाहिता स्त्री की योनि में पुरुष का इन्द्रिय पहली ही बार आसानी से प्रविष्ठ हो (घुस) जाता है, तो नवविवाहित युवक की सारी फंतासी कल्पनाएँ धराशाही हो जाती हैं। ऐसे पुरुष को स्त्री की योनि में आसानी से इन्द्रिय के प्रवेश हो जाने पर, उसकी कल्पनाओं के विपरीत प्राप्त ढीली योनि से प्राप्त होने वाले कम या अपूर्ण योनसुख की तुलना में कहीं अधिक पीड़ा इस बात की होती है कि यदि योनि में आसानी से इन्द्रिय प्रविष्ठ हो रहा है तो ऐसे युवक ऐसा मान लेते को विवश हो जाते हैं कि उनकी पत्नी अक्षतयोनि (Virgin) नहीं है और वे ये धारणा बना लेते हैं कि उनकी पत्नी ने विवाह से पूर्व सेक्स का अनुभव प्राप्त किया है। उन्हें लगता है कि उन्हें किसी अन्य पुरुष द्वारा उपयोग की जा चुकी अर्थात सेकैण्डहैंड पत्नी मिली है। आजकल अनेक मामलों में यही सच्चाई भी है। लड़कियां विवाह से पूर्व सेक्स का अनुभव प्राप्त कर चुकी होती हैं। जैसा कि प्रस्तुत मामले में रमेश जी का मामला है, इसमें जैसा इन्होंने बताया है, यदि वह सब सच है तो इनकी पत्नी के विवाह पूर्व सेक्स करने की अभ्यस्त रही है, जिसके चलते उसकी योनि ढीली ढाली है।

इस बारे में लीक से हटकर एक और बात भी मैं जरूर बताना चाहता हूँ, जिस प्रकार से आज भ्रूणहत्या के चलते लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या कम हो गई है और लड़कों को आसानी से दुल्हन नहीं मिल रही हैं, उसी प्रकार से विवाह पूर्व लड़कों द्वारा अपनी अविवाहित प्रेमिकाओं-लड़कियों के साथ योन-सम्बन्ध बनाने की प्रवृत्ति के चलते, युवकों को अक्षतयोनि (Virgin) दुल्हनें नहीं मिल पा रही हैं। इसलिए हर एक को समझ लेना चाहिए कि यदि आप किसी अविवाहित लड़की के साथ योन सम्बन्ध बना रहे हैं, तो साथ ही यह भी मानकर चलें कि वह अविवाहित लड़की भी भविष्य में किसी की पत्नी बनने वाली है और इसी प्रकार से ये भी सम्भावना हो सकती है कि आपकी पत्नी भी किसी अन्य की बाहों में समाने के बाद ही आपकी सेज पर दुल्हन बनकर आने वाली है। ऐसे में ऐसी दुल्हन की योनी का ढीली-ढाली होना स्वाभाविक है। कुवांरी लड़कियों को भी समझना होगा कि यदि वे विवाह पूर्व किसी पुरुष से सेक्स करती है तो उनको भी पहले से ही सेक्स का अभ्यस्त पति मिलने की अधिक सम्भावना होगी। हालाँकि भारतीय सन्दर्भ और हालातों में इसके लिये अकेली स्त्री को दोषी नहीं ठहरा सकते हैं। इसके अलावा ये बात भी समझने की है कि यदि स्त्री विवाहपूर्व सेक्स की अभ्यस्त (Premarital sex Habitual) नहीं भी रही है, तो भी हस्तमैथुन के आदी युवकों को तो स्त्री की योनि में सहज में वो मजा-आनंद आ ही नहीं सकता, जो उन्हें हस्तमैथुन के दौरान आता रहा है।

अत: जब तक युवक सेक्स की वास्तविकता को स्वीकार करके अपनी रुग्ण मानसिकता को नहीं बदलेंगे, तब तक न तो वे खुद सुखी रहेंगे और न ही वे अपनी पत्नी को सुखी रख सकेंगे। इसलिये रमेश जी आप इस बात को स्वीकार करें कि यदि आपने विवाह से पूर्व हस्तमैथुन किया है और यदि मान लें कि आपकी पत्नी ने विवाह से पूर्व सेक्स किया है या हस्तमैथुन किया है, जिसके चलते, आपके अनुसार उसकी योनि ढीली-ढाली है भी तो भी यदि आप अपने दाम्पत्य जीवन को बचाना चाहते हो और अपनी पत्नी के साथ ही अपना वैवाहिक जीवन निष्ठापूर्वक व्यतीत करना चाहते हो तो आप को सबसे पहले तो स्वयं को हस्तमैथुन के बारे में सब कुछ भुलाकर पत्नी के साथ संसर्ग को ही सच्चा और स्वाभाविक सुख मानकर इसे स्वीकारना होगा।


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इसके अलावा मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहूँगा कि यदि तुम किसी योग्य होम्योपैथ से मिलोगे और अपनी सारी समस्या को बताओगे तो तुम्हारी पत्नी की योनि में कसावट (Vaginal drag) आ सकेगी। तुम स्वयं भी हस्तमैथुन जनित मानसिक परेशानियों से मुक्त हो सकते हो, क्योंकि होम्योपैथी में इस प्रकार की अनेक चमत्कारिक परिणाम देने वाली दवाईयॉं हैं, लेकिन इससे साथ-साथ आपको यह निश्‍चय करना होगा कि आप भविष्य में गलती से भी कभी हस्तमैथुन करना तो दूर इस बारे में सोचेंगे भी नहीं।

इसके अलावा अपनी पत्नी के साथ सेक्स करते समय हस्तमैथुन से प्राप्त यौन सुख के बारे में कभी नहीं सोचें। हस्तमैथुन से प्राप्त यौन सुख और स्त्री से प्राप्त यौन सुख दोनों प्रकार के यौन-आनन्द की कभी भी तुलना नहीं करें, बल्कि इसके विपरीत सेक्स के दौरान अपनी पत्नी के शारीरिक सौन्दर्य, उसके नयन-नक्श तथा उसके कामुक यौनांगों के बारे में ही सोचेंगे, बात करेंगे और सेक्स करने से पूर्व फोरप्ले अर्थात भरपूर रोमांस करेंगे तो आप कुछ ही समय बाद अपनी पत्नी की ढीली-ढाली योनि को भूल जायेंगे और आपको अपनी पत्नी की जैसी भी योनी है, उसी में पूर्ण योन सुख प्राप्त होने लगेगा। क्योंकि सेक्स शरीर से कहीं अधिक मानसिक क्रिया है, जिसके लिए आप दोनों को अपने दोनों के भूत काल को भूलकर एक दूसरी को, अपनी सभी अच्छाईयों और कमियों के साथ बिना किसी पूर्वाग्रह के तहेदिल (Irrespective) से स्वीकार करना होगा।

अन्त में यह बतलाना भी जरूरी समझता हूँ कि आजकल ऐलोपैथ चिकित्सक युवकों को खुलेआम यह सलाह देते देखे जाते हैं कि हस्तमैथुन करने से कोई नुकसान नहीं होता है। मैं भी मानता हूँ कि सीधे तौर पर कोई बड़ा शारीरिक नुकसान नहीं होता, लेकिन इसके मानसिक कुप्रभाव अत्यंत घातक होते हैं। जिनके बारे में ऊपर लिखा जा चुका है। सेक्स के समय हथेली के दबाव और योनि की कमजोर पकड़ के बारे में मानसिक स्तर पर चलने वाला अन्तर्रद्वंद्व आपके सम्पूर्ण वैवाहिक जीवन को बर्बाद कर सकता है। इसलिये सभी युवकों को मेरी सलाह है कि हस्तमैथुन के मानसिक कुप्रभावों से बचने के लिये सर्व-प्रथम तो याद रहे कि हस्तमैथुन कभी नहीं करें और यदि अब से पूर्व कोई युवक हस्तमैथुन करता रहा है तो या किसी पुरुष के जीवन में हस्तमैथुन करना परिस्थितिजन्य विवशता हो तो हस्तमैथुन एवं यौनिजनति योन सुख की आपस में तुलना करके अपने योन जीवन को बर्बाद नहीं करें।

श्री रमेश जी जहॉं तक आपकी पत्नी या किसी भी स्त्री की योनि से सफेद-सफेद द्रव्य निकलने और बदबू आने का सवाल है तो यह एक ऐसी शारीरिक समस्या हो सकती है, जिससे अधिकतर स्त्रियॉं जीवन में कभी न कभी पीड़ित रहती ही हैं और अनेक तो ताउम्र ही पीड़ित रहती हैं। इस कारण स्त्रियॉं इसे अधिक गम्भीरता से नहीं लेती हैं। इस बीमारी को श्‍वेत प्रदर (Blennenteria) या सफेद पानी या लीकोरिया (Leucorrhoea) के नाम से जाना जाता है। जिसके अनेक कारण होते हैं, जिन पर कभी भविष्य में अलग से चर्चा करेंगे, लेकिन श्री रमेश जी आपको अपनी पत्नी का किसी योग्य चिकित्सक से पूर्ण उपचार करवाना चाहिये। यह समस्या ऐसी नहीं है कि इसका उपचार सम्भव नहीं हो।

अब अन्तिम बात यह कि आपकी नयी-नवेली पत्नी, जिसके साथ आपको योनसुख की प्राप्ति नहीं होती है, क्योंकि आपको हस्तमैथुन जैसा मजा उसके साथ नहीं आता है, तो आप ये कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वह आपके साथ खुश रहे और वह दाम्पत्य जीवन का सच्चा आनन्द या सुख भोगे बिना भी आपका साथ दे। ऐसे में यदि वह चिड़चिड़ी हो गयी है या वह आपके साथ रहने के बजाय अपने पीहर में रहना अधिक पसन्द करती है और आपके अनुसार वह आपसे प्यार नहीं करती है और आपके साथ सेक्स में रुचि नहीं लेती है और सम्भवत: आपको सन्देह है कि वह विवाहपूर्व के अपने प्रेमी के सम्पर्क में है तो इन हालातों में इसमें बुरा क्या है? या इसमें अस्वाभाविक क्या है? आप लिखते हैं कि ‘‘इस कारण मैं बहुत परेशान रहता हूँ, क्या करूँ? कृपया मुझे ऐसी सलाह दें कि मैं जिन्दा रह सकूँ और मेरा वैवाहिक जीवन बच जाये! मेरी पत्नी मुझे पूरी तरह से स्वीकार कर ले और मैं उसके साथ सेक्स का पूर्ण आनंद ले सकूँ।’’

श्री रमेश जी आपको वही करना चाहिये जो आप सच में चाहते हैं, क्योंकि आपके सवाल से मैं ये समझ पा रहा हूँ कि आप सच में अपने वैवाहिक जीवन को बचाना चाहते हैं। इसलिये जितना जल्दी संभव हो आपको अपनी पत्नी के समक्ष सभी जरूरी बातें खुलकर रखनी चाहिये। आपस में ईमानदारी से चर्चा करें और पिछली बातों और गलतियों को भुलाकर दोनों का किसी योग्य और विश्‍वसनीय डॉक्टर से उपचार करवायें और अपने व्यवहार से एक दूसरे का दिल जीतने का प्रयास करें। जब दोनों के दिल एक दूसरे के लिये धड़कने लगेंगे, दोनों मानसिक स्तर पर अपनापन महसूस करने लगेंगे तो शारीरिक सुख भी प्राप्त होने लगेगा। सेक्स को शारीरिक सम्बन्ध जरूर कहा जाता है, लेकिन हकीकत में यह दो मनों और दो दिलों का सम्बन्ध है। जब तक शरीर के साथ-साथ दोनों के मन और हृदय नहीं मिलते हैं, तब तक सेक्स का कोई मतलब ही नहीं है और जिस दिन मन और हृदय मिल जायेंगे, उस दिन योनी ढीली-ढाली है या टाईट इस बात का कोई मतलब ही नहीं होगा!

अन्त में वही एक पंक्ति जो मैं हमेशा कहता और लिखता और बोलता रहता हूँ कि-


सेक्स दो टांगों के बीच का खेल नहीं, बल्कि दो कानों के बीच (दिमांग) का खेल है। अर्थात सेक्स शारीरिक बाद में, पहले मानसिक क्रिया है। इसलिये इस बता को समझना महत्वूपर्ण होगा कि मन पर पड़ने वाले अच्छे-बुरे विचारों का प्रभाव शरीर पर पड़ता है। अत: स्वस्थ सेक्स के लिये, स्वस्थ शरीर के साथ-साथ स्वस्थ विचारों/मन का होना भी बेहद जरूरी है।
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot 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