पित्ताशय/गाल ब्लैडर/Gallbladder पथरी: आयुर्वेदिक उपचार
वर्तमान में पित्ताशय (Gallbladder) या पित्त (Bile) की थैली में पथरी (Stone) बनने की समस्या तेजी से बढती जा रही है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (Modern Medical Science) के 100 फीसदी डॉक्टर पित्त पथरी का एक मात्र इलाज आॅपरेशन ही बतलाते हैं। जबकि आयुर्वेद और होम्योपैथी की मदद से अधिकतर मामलों में पित्त पथरी की तकलीफ से बिना ऑपरेशन (Without Operation) के भी मुक्ति पायी जा सकती है।
पित्ताशय/पित्त की थैली/गाल ब्लैडर/Gallbladder क्या है?
शरीर में नाशपाती के आकार का थैलीनुमा यह अंग लीवर (Lever) के नीचे पाया जाता है। सामान्यतः इसका कार्य पित्त को संग्रहित/इकट्ठा करना एवं उसे गाढ़ा करना है। आम धारणा के विपरीत पित्ताशय स्वयं पित्त नहीं बनाता है। अर्थात पिताशय पित्त का निर्माण नहीं करता है।
क्या होता है पित्त?
पित्त एक पाचक (Digestive) रस है जो कि लीवर द्वारा बनाया जाता है। मुख्यत: पित्ताशय में इस जमा पित्त का उपयोग छोटी आंत में फैटी अर्थात वसायुक्त खाद्य पदार्थों को तोड़ने और उनको पचाने के लिए होता है।
पित्त का स्वरूप:
शहद या शक्कर की गाढी चाशनी का जो तरल रूप होता है, पित्ताशय/पित्त की थैली में जमा पित्त की ऐसी ही कल्पना करके, पित्त के स्वरूप को समझा जा सकता है।
पित्त के पित्त पथरी में परिवर्तित होने के कारण:
निम्न प्रमुख कारणों से पित्त कठोर, सूखा या सख्त स्वरूप धारण करने पर पित्त पथरी में परिवर्तित हो जाता है:-
1. कॉलेस्ट्रॉल: पित्त की पथरियों के बनने पीछे शरीर में बढे हुए कॉलेस्ट्रॉल की प्रमुख भूमिका होती है। यही वजह है कि जांच करने पर पित्त की पथरी में 50 से 95 फीसदी कॉलेस्ट्रॉल पदार्थ पाया जाता है।
2. अनियमित भोजन: समय पर भोजन नहीं करने के कारण, भोजन को पचाने के लिये जमा पित्त से पित्ताशय लंबे समय तक भरा रहता है। जिसका समय पर और नियमित उपयोग नहीं होते रहने के कारण संग्रहित पित्त का, पित्त की थैली या पित्ताशय में जमाव शुरू हो जाता है, जो धीरे-धीरे कठोर होता जाता है और अन्त में पथरी का रूप धारण कर लेता है।
3. आन्तरिक संक्रमण (Internal Infection): किसी आन्तरिक संक्रमण/इंफेक्शन के कारण पित्त, जिसे पाचक रस भी कहा जाता है, वह अधिक गाढा हो जाता हैं। कालांतर में यही संग्रहित गाढा पित्त, पित्त की पथरी का रूप धारण कर लेता है।
4. मोटापा (Obesity): मोटापे से ग्रस्त लोगों के पित्त में कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने के कारण, पित्ताशय में संग्रहित पित्त रस के सूखने की सम्भावना अधिक होती है। इस कारण मोटे लोगों में और विशेषकर मोटी महिलाओं में पित्त की पथरी बनने की संभावना अधिक होती है।
5. कम उम्र में अधिक प्रजनन और गर्भ निरोधक गोली: औरतों में कम उम्र में ही अधिक बच्चे जनने के कारण और, या अधिक समय तक एलोपैथिक गर्भ-निरोधक गोलियां खाने के कारण भी पित्ताशय में पथरी बनती देखी गयी है। अथवा इन हालातों में औरतों के पित्ताशय में पथरी बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
6. अन्य कारण: डायबिटीज (मधुमेह), तेजी से वजन घटना या घटाना, डायटिंग-अधिक भूखा रहना, आनुवांशिक खून संबंधी बीमारियाँ और कुछ भौगोलिक एवं जलवायू परिस्थितियाँ।
पित्त पथरी के प्रमुख लक्षण:
1. पित्ताशय में पथरी होने पर भी बहुत से मामलों में जीवनपर्यन्त किसी प्रकार के लक्षण प्रकट नहीं होते हैं।
2. पित्ताशय में सूजन आ जाती है। जिसके कारण पीड़ित व्यक्ति को बिना कोई कारण हल्का या कभी-कभी तेज बुखार रहने लगता है।
3. रोगी को अपना यकृत एवं पित्ताशय बढा हुआ अनुभव होता है। जिसे छूने पर पित्ताशय के स्थान पर उदर में दाईं तरफ दर्द होता है। साथ ही पित्ताशय में बिना छुए भी दर्द होता रहता है।
4. पित्ताशय में पित्त इकठ्ठा हो जाने के कारण, पित्तविसर्जन नली में, पथरी के कारण रुकावट आ जाती है। जिसके कारण पीलिया हो जाता है। अकसर पीलियाग्रस्त लोगों को पित्त पथरी होने की सम्भावना बनी रहती है।
5. जी मिचलाता रहता है। रोगी बार-बार उलटी/वोमिट (Vomit) करना चाहता है, लेकिन उसे उलटी होती नहीं है। इस कारण वह भूख होने पर भी भोजन करने से कतराता रहता है।
पित्ताशय की पथरी का उपचार:
भ्रांति के कारण तुरंत आॅपरेशन: पित्ताशय की पथरी के बारे में यह भ्रांति फैली या जानबूझकर फैलाई हुई है कि एक बार पित्ताशय में पथरी बनना शुरू हो गया या पथरी बन गयी तो उसका कोई इलाज ही नहीं है। इसलिये पिताशय का आॅपरेशन ही एक मात्र उपचार है। इस भ्रांति के कारण अधिकतर रोगी तुरंत आॅपरेशन करवा लेते हैं और फिर जीवनभर भुगतते रहते हैं। इसका मूल कारण है-आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी कारगर चिकित्सा पद्धतियों के प्रति केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय का सौतेला रवैया। जिसके चलते आयुर्वेद और होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धतियों की विशेषताओं का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं हो पाता है और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के निष्कर्षों को ही अन्तिम सत्य मान लिया जाता है। जबकि कोई भी चिकित्सा पद्धति सम्पूर्ण नहीं है।
आयुर्वेदिक उपचार:
1. गुडहल (Hibiscus): गुडहल के फूलों का शुद्ध और आॅर्गेनिक पाउडर 1 चम्मच/टी स्पून (पथरी की अवस्था और आकार के अनुसार उचित मात्रा में) रात को सोते समय खाना खाने के कम से कम एक डेढ़ घंटा बाद गुनगुने पानी के साथ फंकी लेेते रहें। इसका स्वाद हलका कड़वा होता है। यद्यपि बुहत अधिक कड़वा भी नहीं होता है। अत: इसके कड़वे स्वाद को सहने के लिये अपने आप को तैयार रखें। इसके सेवन के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। पाउडर लेने के बाद सीने में अचानक बहुत तेज़ दर्द हो सकता है। जैसे हार्ट अटैक आ जायेगा। यह दर्द पथरी टूटने का हो सकता है। इसके प्रयोग के दौरान पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें। अगर पित्त की पथरी बड़ी है तो पथरी गलने/पिघलने या टूटते समय दर्द भी हो सकता है। इसलिये अपने स्वैच्छिक निर्णय से ही आप इसका प्रयोग को करें।
2. गुडहल फूल पाउडर की उपलब्धता: गुडहल के फूलों का पाउडर बहुत आसानी से पंसारी (आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी-दवा विक्रेता) के यहां मिल जाता है। यद्यपि गुडहल का शुद्ध और आॅर्गेनिक फूल पाउडर मिलना अंसभव नहीं, लेकिन बहुत मुश्किल अवश्य है। जयपुर स्थित हमारे निरोगधाम पर लगे गुडहल के पेड़ों में खिलने वाले फूलों से 100 प्रतिशत शुद्ध आर्गेनिक गुडहल फूल का पाउडर तैयार किया जाता है। जिसे केवल हमारे द्वारा उपचारित रोगियों के लिये ही दिया जाता है। शुद्ध आर्गेनिक गुडहल फूल का पाउडर ट्रेडिंग/व्यापार के लिये उपलब्ध नहीं है।
3. नाशपाती का जूस (Pear Juice): नाशपाती में मौजूद पैक्टिन (Pectene), कॉलेस्ट्रॉल (Cholesterol) को बनने और जमने से रोकता है। अत: एक गिलास गुनगुने पानी में, एक गिलास नाशपाती का जूस और दो चम्मच शहद (Honey) मिलाकर पीएं। इस जूस को एक दिन में तीन बार पीना चाहिए। इसका लगातार सेवन करने से पित्ताशय की थैली की पथरी पिघलकर निकल जाती है। इसके अलावा भी नाशपाती के बहुत से फायदे हैं।
4. सेब का जूस+सिरका (Apple Juice+Vinegar): वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि सेब में पित्त की पथरी को गलाने का प्राकृतिक गुण होता है। यद्यपि अनुभव यह प्रमाणित करते हैं कि सेब के जूस को सेब के सिरका के साथ लेने पर यह ज्यादा असरकारी होता है। सेब में मौजूद प्राकृतिक मैलिक एसिड (Mallic Acid) पथरी को प्राकृतिक तरीके से पिघलाने में मदद करता है तथा सेब का सिरका लीवर में कॉलेस्ट्रॉल (Cholesterol) नहीं बनने देता, जो पित्ताशय में पथरी बनने के लिए जिम्मेदार होता है। सेब जूस+सिरका का यह घोल न केवल पथरी को पिघलाता है, बल्कि साथ ही साथ पथरी को दुबारा बनने से भी रोकता है और पथरी के दर्द से भी राहत प्रदान करता है। अत: एक गिलास सेब के जूस में, एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर, इस घोल को ठीक नहीं होने तक नियमित रूप से दिनभर में दो बार पीना चाहिये।
5. पुदीना (Mint) का काढा या पुदीने की चाय: आयुर्वेद में पुदीना को पाचन के लिए सबसे अच्छी घरेलू औषधि (Home Remedy) माना जाता है जो पित्त वाहिका तथा पाचन से संबंधित अन्य रसों के निर्माण में सहयोगी बनकर उन्हें बढ़ाता है। पुदीना में तारपीन (Terpenes) विद्यमान होता है जो कि पथरी को प्राकृतिक तरीके से गलाने में सहायक माना जाता है। इसी वजह से पुदीने की पत्तियों से बनी चाय गॉल ब्लैडर पथरी को पिघलाने में सहायक हो सकती है। अत: एक गिलाश पानी को गरम करें, इसमें ताजी या सूखी पुदीने के पत्तियों को उबालें। अर्थात काढा बनायें। हल्का गुनगुना रहने पर पानी को छानकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं और इसे चाय की भांति पियें। इस काढे/चाय को दिन में दो बार पिया जा सकता है।
6. जांच: आयुर्वेदिक इलाज करवायें तो प्रत्येक 45 दिन बाद पथरी की वास्तविक स्थिति को जानने के लिये अल्ट्रासाउण्ड/Ultrasound जांच करवाते रहना जरूरी है। अगर उपरोक्त में से किसी भी उपचार से पित्ताशय में सूखा पित्त, फिर से पिघल जाये तो आॅपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी!
नोट:
1-यहां प्रस्तुत सामग्री के आधार पर, बिना किसी डॉक्टर की सलाह के खुद ही, अपना उपचार करना उचित नहीं है।2-लेख काफी लम्बा हो गया है। अत: पित्ताशय की थैली के होम्यापैथिक उपचार के बारे में अलग से उपयोगी सामग्री प्रस्तुत की जायेगी।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
HCF&MDC (Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
मोबाईन नम्बर: 9875066111
02 दिसम्बर, 2017