मेथीदाना हो सकता है खतरनाक! जानिए 5 नुकसान:-
1 यह जरूरी नहीं कि मेथीदाने का सेवन सभी के लिए फायदेमंद हो, कुछ लोगों को इससे नुकसान भी होता है। खास तौर से जो लोग ब्लडशुगर या डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि यह यह शुगर के स्तर को प्रभावित करता है।
2 कई बार इसे खाने से पेट संबंधी समस्याएं भी होती हैं, जैसे गैस बनना, खट्टी डकार आना आदि। इससे बचने के लिए इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखें और यदि यह आपको सूट न कर रहा हो तो इसे न खाएं।
3 कई बार मेथीदाना खाने से त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। त्वचा पर सूजन या दर्द जैसी समस्या भी इसका सेवन करने से हो सकती हैं।
4 इसकी तासीर गर्म होती है। इससे मूत्र संबंधी समस्याएं भी हो सकती है। मूत्र में अजीब से गंध आना या अन्य समस्या से बचने के लिए इसका प्रयोग सोच समझ कर करें।
5 गर्भवती महिलाओं या नवजात बच्चों की मांओं को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए। इससे दस्त आदि की समस्याएं हो सकती हैं।
Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Health Care Friend and Marital Dispute Consultant
(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)
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मेथी दाना/Fenugreek Seeds
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हर घर में पाया जाने वाला मेथी दाना भोजन की सिर्फ स्वाद और महक ही नहीं बढ़ाता, बल्कि हमारे स्वास्थ्य की रक्षा भी करता है। मेथी दाना हमारे लिये बहुत ही गुणकारी और स्वास्थ्यवर्धक होता है।
इससे भी बड़ी बात यह है कि मेथी दाना का सर्वाधिक उत्पादन भारत में ही होता है और भारत में भी राजस्थान में सबसे ज्यादा (लगभग 80%) पैदा होता है। गुजरात, यूपी, एमपी, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब में भी इसका काफी मात्रा में उत्पादन होता है।
हरी मेथी : मेथी के पत्ते या हरी मेथी के गुण भी लगभग मेथी दाना जैसे ही होते है।
मेथी दाना के पोषक तत्व (Nutrients) : मेथी दाना में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा कई प्रकार के खनिज जैसे आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नेशियम, कॉपर, मैगनीज तथा ज़िंक आदि होते है। इसके अतिरिक्त मेथी दाना कई प्रकार के विटामिन और जरुरी पोषक तत्वों का बहुत अच्छा स्रोत है। जिसमे विटामिन बी-6, विटामिन ए, विटामिन सी, फोलिक एसिड, थायमिन, राइबोफ्लेविन तथा नियासिन आदि शामिल है।
मेथी में कई प्रकार के फायदेमंद फोटो न्यूट्रिएंट्स (Photo Nutrients=Phytonutrients are compounds found in plants or fruits, veggie, grains and grasses. They serve various functions in plants, helping to protect the plant's vitality. For example, some phytonutrients protect the plant from UV radiation while others protect it from insect attack.) भी होते है। फोटो न्यूट्रिएंट्स पेड़ पौधों में पाए जाने वाले वे तत्व है जो पौधों को तो बीमारी, फंगस आदि से बचाते ही है, हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक होते हैं।
मेथी दाना में मौजूद फायबर तथा सैपोनिन (Saponin=Saponins occur in many plant foods and get their name from their soap-like qualities. Eating saponins may help lower your cholesterol and reduce your risk of heart disease. Your immune function benefits from these plant compounds as well. Your risk of developing certain forms of cancer or getting tumors may even decrease from eating more saponins.) इसे आश्चर्यजनक औषधि बनाते है। इसमें म्यूसिलेज नाम का एक चिपचिपा तत्व होता है। मेथी को पानी में भिगोने पर यह तत्व फैलकर मल्हम जैसे जैल में परिवर्तित हो जाता है। यह जैल शरीर के तंतुओं की मरम्मत कर उन्हें मजबूत बनाने का काम करता है।
मेथी दाना का सेवन कैसे? : मेथी दाना अंकुरित करके खाया जा सकता है। मेथी दाना की किशमिश के साथ सब्जी बनाकर खाई जा सकती है। इसे साबुत ही पानी के साथ फांक सकते है या चूर्ण बनाकर बूरा चीनी मिलाकर फंकी ले सकते है। सर्दी के मौसम में मेथी के लडडू बनाकर खाये जा सकते है। अगर मेथी के दाने ज्यादा कडुवे हों तो उन्हें कैप्सूल के रूप में भी खाया जा सकता है।
मेथी को अंकुरित करने की विधि : चार चम्मच मेथी दाना धोकर आधा गिलास पानी में 6 -7 घंटे के लिए भिगो दें। इसके बाद छान कर कपड़े में बांध कर अंकुरित करके खाएं। इसका बचा हुआ पानी भी पी लेना चाहिए।
मेथी दाना से सावधान (Beware of Fenugreek Seeds) : मेथी दाना के लाभ जानने से इसके संभावित नुकसान जान लिए जाएँ : कई बीमारियों में रामबाण के रूप में काम करने वाला मेथी न केवल आपके चेहरे की सुंदरता को बरकरार रखता है, बल्कि आपकी पाचन संबंधी समस्या को भी दूर कर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं इसका सेवन कई बार आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है। आइए जानते है इसके नुकासन के बारे में…
1. डायबिटीज : मेथी के सेवन से ब्लड सुगर का स्तर प्रभावित होता है। इसलिए जो व्यक्ति डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें मेथी खाते समय बहुत ही सावधानी बरतनी पड़ेगी।
3. खट्टी डकार और गैस : अगर आप अच्छा और सही तरीके से भोजन नहीं लेते, तो आपको गैस और खट्टी डकार की समस्या होने लगती है। डकार में पेट की गैस को मुंह से निकाला जाता है, जिसमें कभी-कभी अजीब सी आवाज़ और गंध होती है। यह ज्यादातार तीखी भोजन खाने वालों को होती है। लेकिन अगर आप मेथी का ज्यादा सेवन करते हैं, तो आपको खट्टी डकार, गैस और सूजन जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए मेथी जब खाएं उसकी मात्रा के बारे में अच्छी तरह से जान लें।
4. दस्त : अगर आप मेथी का ज्यादा सेवन करते हैं तो आपको दस्त की समस्या हो सकती है और जिन माताओं ने अभी-अभी अपने बच्चे को जन्म दिया है, उन्हें तो मेथी खाते समय और भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि स्तनपान कराने वाली मताएं अगर दस्त की शिकार हैं तो यह रोग उनके बच्चे को भी हो सकता है। जिसकी वजह से डिहाइड्रेशन की भी समस्या हो सकती है।
5. मूत्र की गंध : गंध चाहे पसीने की हो या मूत्र की हर कोई इससे दूर भागता है। अगर आपके साथ भी यह समस्या है तो इसे जल्द से जल्द दूर कर लें। मेथी के खाने से मूत्र में गंध की समस्या आने लगती है। इसलिए इसे खाते समय सावधानी बरतें। वैसे यह बदबू मूत्र में मौजूद बैक्टीलरिया और सूक्ष्म जीवों की वजह से भी आ सकती है।
6. अन्य नुकसान : डॉक्टरों के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को मेथी का कम से कम सेवन करना चाहिए या हो सके तो इसका सेवन न करें। इसके अलावा ज्यादा मेथी दानों के सेवन से आप इंटरनल ब्लीडिंग की समस्या से जूझ सकते हैं। यहा तक की मेथी दाना आपके बच्चे की सोचने समझने की शक्ति को कम कर देता है इसलिए उसे डॉक्टर की सलाह के बाद मेथी दाना दें।
Note : मेथी दाना की तासीर बहुत गर्म होती है। जिन लोगों के शरीर से किसी भी प्रकार से रक्त निकलता हो जैसे बवासीर के कारण, नकसीर के कारण, पेशाब में रक्त जाता हो, माहवारी के समय अधिक मात्रा में या अधिक दिन तक रक्त स्राव होता हो तो उन्हें मेथी का उपयोग बड़ी सावधानी और चिकित्सक की देख रेख में करना चाहिए। मेथी दाना रक्त स्राव बढ़ा सकती है। तेज गर्मी में भी मेथी का उपयोग कम ही करना चाहिए। सर्दी के मौसम में इसका उपयोग अधिक लाभदायक सिद्ध होता है।
मेथी दाना के फायदे :
1. कोलेस्ट्रॉल : मेथी में कोलेस्ट्रॉल को कम करने का गुण होता है। इससे हानिकारक LDL कोलेस्ट्रॉल कम होता है। यही वह कोलेस्ट्रॉल है जो रक्तवाहिकाओं में जमा होकर हार्ट अटैक पैदा कर सकता है। मेथी में मौजूद फायबर गेलेक्टोमेनन के कारण भी रक्त में कोलस्ट्रोल की मात्रा कम करने में मदद मिलती है। इसके नियमित उपयोग से रक्त में क्लोट बनने की सम्भावना कम हो जाती है। इस प्रकार मेथी से हृदय रोग से बचाव हो सकता है। मेथी की सब्जी इस परेशानी में लाभ देती है। डॉक्टरों का कहना है कि यह हार्ट रोगियों के लिए एक वरदान के समान है, जिसे वह रोज अपने भोजन में खा कर अपने बढे हुए कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम कर सकता है। अगर मेथी के दाने ज्यादा कडुवे हों तो उन्हें कैप्सूल के रूप में भी खाया जा सकता है। भोजन में कुछ दाने मेथी के खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल में सुधार तो आता ही है साथ में हार्ट अटैक का रिस्क भी कम हो जाता है।
2. डायबिटीज : मेथी डायबिटीज को कंट्रोल में रखने में मदद करती है। इससे पेशाब में शक्कर की मात्रा कम हो जाती है। इसके प्राकृतिक फायबर के कारण तथा इन्सुलिन पर मेथी दाना के उपयोग से पड़ने वाले प्रभाव से डायबिटीज में यह बहुत लाभदायक सिद्ध होती है। यह इन्सुलिन के बनने तथा इसके रक्त में प्रवाहित होने की गति दोनों पर अच्छा प्रभाव डालती है। इससे ब्लड शुगर बहुत ऊपर नीचे होना बंद होता है। रोजाना तीन चार चम्मच मेथी के उपयोग से अच्छे परिणाम आ सकते है। इसके गर्म प्रभाव से बचने के लिए मेथी दाना मोटा पिसा हुआ दो चम्मच और सौंफ एक चम्मच रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह छान कर यह पानी पिएँ। हरी मेथी रक्त में शकर को कम कर देती हैं। इस कारण डायबिटीज रोगियों के लिए भी यह फायदेमंद होती है। प्रतिदिन एक चम्मच मेथी दाना पाउडर पानी के साथ फांकें। डायबिटीज से दूर रहेंगे। मधुमेह की समस्या से राहत दिलाये मेथी–मधुमेह की समस्या आजकल अनेक लोगों में देखने को मिल ही जाती है. इस परेशानी को समाप्त करने के लिए मेथी के पत्तों का रस निकाल कर सुबह शाम पियें इससे मधुमेह ठीक होने लगता है। मेथी से करें मधुमेह की रोकथाम–मेथी पाउडर का सेवन मधुमेह की समस्या को दूर करने के लिए काफी लाभदायक होता है. इसके सेवन के लिए थोड़ा मेथी पाउडर लें. अब इस पाउडर को दूध में डालकर पीए. इससे मधुमेह की समस्या कम होने लगती है। रिसर्च के अनुसार यह जानकारी प्राप्त हुई है कि यह टाइप 2 के मधुमेह रोगियों के लिए काफी लाभकारी होता है। अगर रोगी रोज़ दिन में 6-7 मेथी के दानों का या फिर मेथी के पानी का सेवन करे तो उसका ब्लड शुगर लेवल कम हो सकता है।
3. त्वचा रोगों से निजात : अगर आपको खुजली, जलन, फोड़े-फुसीं और गांठ की समस्या है तो आपको कुछ ग्राम मेथी खाने की आवश्यक्ता है। न सिर्फ खानें से बल्कि इसके पेस्ट को लगाने से भी फायदा होता है। अगर रुसी की समस्या है तो बालों में मेथी और दही मिला कर लगाने से यह समस्या जल्द दूर हो जाएगी। त्वचा रोग ठीक होता है-त्वचा रोग जैसे एक्जिमा, जलने का घाव, फोडे-फुंसी और गठिया रोग मेंथी पो पीस कर पेस्ट लगाने से ठीक हो सकता है।
4. मौसमी बीमारियां : कहा जाता है कि अगर बुखार या कोई भी अन्य बीमारी में मेथी का उपयोग किया जाए तो वह तुरंत ही ठीक हो जाती है। और अगर आप खुद को रिफ्रैश करना चाहते हैं तो मेथी के पत्तों से बनी हर्बल टी पिएं। फिर देखें कैसा फील/अनुभव करते हैं? मेथी एक अच्छी घरेलू दवा है जो कि बुखार और कई अन्य बीमारियों को ठीक करती है। यही नहीं मेथी के पत्तों से हर्ब टी बनाई जा सकती है जिससे दिमाग शांत और फ्रेश रहता है।
5. स्तन सौन्दर्य और वृद्धि : मेथी दाना की सब्जी खाने से अविकसित और छोटे स्तन बड़े और पुष्ट हो जाते है। साथ ही मेथी दाना को पानी के साथ बारीक पीसकर स्तन की हल्के हाथ से नियमित मालिश भी करनी चाहिए। इन दोनों के करने से स्तन के आकार में वृद्धि होती है। यदि स्तन में दूध सुखाना हो या स्तन में सूजन और दर्द हो तो मेथी की हरी पत्तियां पीस कर स्तन पर लगा कर दो घंटे बाद धो लें। इससे आराम मिल जाता है।
6. दाग-धब्बे : चेहरे के दाग-धब्बों को कम करें मेथी–चेहरे से दाग तथा धब्बों को समाप्त करने के लिए भी मेथी बहुत फायदेमंद होती है. इसका प्रयोग करने के लिए मेथी के दानो को पीस कर उसका लेप बना लें. अब इस लेप को अपने चेहरे पर लगाए. इससे त्वचा कोमल तथा बेदाग बनती है.
7. पाचन तंत्र : मेथी से कई प्रकार से पाचन तंत्र को फायदा पहुंचता है। इससे पेट और आँतों की जलन सूजन आदि में आराम मिलता है। यह पेट और आँतों के अल्सर में आराम दिलाती है । इसके पानी में घुलनशील फायबर आँतों की सफाई करके कब्ज मिटाते है तथा आँतों की शक्ति बढ़ाते है। मेथी में मौजूद पाचक एंजाइम अग्नाशय को अधिक क्रियाशील बना देते हैं। इससे पाचन क्रिया अत्यंत सरल हो जाती है। इससे भूख खुल कर लगने लगती है। खाने में अरुचि हो जाने पर इससे रुचि जाग्रत हो जाती है। मेथी मेटाबोलिज्म को भी सुधरती है। जिसके कारण कमजोरी दूर होती है। मेथी में लासा होता है जो पाचन से संबधित हर रोग को दूर कर देता है। यह डायरिया और हार्ट बर्न आदि को दूर करती है। इसके अलावा अगर मेथी के दाने को मठ्ठे के साथ मिला कर पिया जाए तो अल्सर और एसीडिटी में लाभ होता है। कुछ मेथी के दाने सुबह खाने से पेट के कीडे मरते हैं।
8. पेट के छाले/अल्सर : पेट के छाले ठीक करने के लिए मेथी का उपयोग–पेट के छाले ठीक करने के लिए भी मेथी एक अच्छा उपाय है। इसके लिए दो चम्मच पीसी हुयी मेथी एक कप पानी में उबाल कर मेथी का काढ़ा बना लें. अब इस काढ़े को पीए. इससे पेट के छाले कम होने लगेंगे। पाचन उपचार-डायरिया और हार्टबर्न के अलावा मेथी के रस से पेट और आंत की सभी समस्याएं दूर होती हैं। अगर आप अल्सर और एसिडिटी को ठीक करना चाहते हैं तो मेथी और मठ्ठे को घोल कर पीएं। सिर्फ यही नहीं अगर आप रोज़ सुबह खाली पेट कुछ मेथी के दानें खाएगें तो पेट के सभी रोग दूर होगें।
9. आँतों के कैंसर से बचाव : मेथी में कैंसर को मिटाने के गुण होते है। मेथी में पाया जाने वाला डिओसजेनिन नामक तत्व आँतों के कैंसर से बचाव करने में सक्षम होता है। इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले सैपोनिन , म्यूसिलेज , पेक्टिन आदि तत्व आँतों के म्युकस मेंब्रेन की रक्षा करते है। इस तरह आंतों पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव से मुक्ति दिलाकर यह कैंसर होने से बचाती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट्स के कारण फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से भी बचाव संभव है।
10. मोटापा : मेथी के दानों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। खाली पेट मेथी दानों को चबाने से एक्सट्रा कैलरी बर्न होती है। सुबह दो गिलास मेथी का पानी पीने से मोटापा दूर होता है। मेथी का पानी बनाने क लिए एक बड़ा चम्मच मेथी के दानों को दो गिलास पानी में रातभर भिगो दें और सुबह इसे छानकर पी लें।
किडनी भी स्वस्थ : मेथी का पानी पीने से किडनी भी स्वस्थ होती है।
11. दर्द निवारक : वात रोग, बुखार, गैस को दूर करने के लिए मेथी का उपयोग–शरीर की अनेक समस्याओं को दूर करने के लिए मेथी बहुत ही फायदेमंद होती है. वात रोग, बुखार तथा गैस की समस्या से निपटने के लिए थोड़ी मेथी के दाने लें. अब इन दानों को पीस कर इनका चूर्ण बना लें. इसके बाद इस चूर्ण को एक गिलास छाछ में डालकर पी लें. इससे इस सभी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा. मेथी से करें घुटनों का दर्द कम–घुटनों का दर्द लोगों को काफी परेशान करने वाला दर्द होता है. इस दर्द को समाप्त करने के लिए मेथी दाने को पीस कर बारीक़ चूर्ण बना लें. अब इस चूर्ण को रोजाना सुबह पानी के साथ खाये. इससे घुटनों का दर्द कम होने लगता है.
12. आँखों के काले घेरे : मेथी से आँखों के नीचे का कालापन हटाए-कई बार उम्र बढ़ने या कोई अन्य समस्या होने के कारण हमारी आँखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं. जिसके कारण चेहरा भी बेजान लगने लगता है. इस समस्या को दूर करने के लिए मेथी के दानों को पीस कर उसका पेस्ट बना लें. अब इस पेस्ट को अपने आँखों के नीचे कालेपन पर लगाए. इससे फायदा होगा.
13. बाल बढ़ाने के लिए : बालों को लम्बा करने के लिये मेथी का प्रयोग-लम्बे तथा घने बाल हर किसी को अच्छे लगते हैं. बालों को लम्बा करने के लिए मेथी भी बहुत फायदेमंद होती है. इसका प्रयोग करने के लिए इस के दानों को रात भर पानी में भिंगोकर रख दें. अब सुबह उसे पीसकर बालों में लगाए तथा कुछ देर बाद बालों को धो दें. इससे बाल कुछ समय बाद आपको लम्बे लगने लगेंगे।
14. खांसी और श्वांस : खाँसी से आराम पाने के लिए करें मेथी का प्रयोग-मेथी का सेवन करने से गला साफ होता है. खांसी की समस्या को ठीक करने के लिए मेथी के कुछ दानों को खायें. जिससे खांसी या श्वांस सम्बन्धी समस्याएं कम होने लगती हैं।
15. मुंह के छाले : मुंह के छाले ठीक करने के लिए मेथी का प्रयोग–मुंह के छालों को कम करने के लिए सबसे पहले मेथी के दानों को पाने में उबाल लें. अब इस पानी से कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले कम होने लगेंगे।
16. पथरी: पथरी के इलाज में भी मेथी फायदा करती है। इस जादुई औषधि से पथरी पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है।
17. यौन शक्ति/सेक्स पावर: एक सर्वे के मुताबिक मेथी सेक्स पावर को भी बढ़ाने में सक्षम है। इस सर्वे के दौरान मेथी के इस्तेमाल से लोगों की सेक्स क्षमता में एक चौथाई का इजाफा हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक इंडियन करी में मेथी डाली जाती है। यह सीधे आदमियों के सेक्स हार्मोन्स को बढ़ाने का काम करती है। दूसरे अर्थों मे मेथी के सेवन से सेक्स पावर बढती है। इसलिए मेथी का सेवन आपकी यौन क्षमता में अतिशय वृद्धि करता है। यदि मेथी के कुछ दाने रोज लिए जाएं तो मानसिक सक्रियता बढ़ती है। पुरुषों में होने वाली लिंग उत्थान की समस्या इससे हल हो सकती है। इसके अलावा यह टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में इजाफा करके अन्य समस्या को भी ठीक करने में मदद करती है। रात को सोते समय आधा चम्मच पिसा हुआ मेथी दाना तथा आधा चम्मच धनिया पाउडर मिलाकर गर्म दूध के साथ नियमित एक महीने लेने से पुरुषों में यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। ब्रिसबेन स्थित आणविक चिकित्सा केंद्र के अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि भारत में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली मेथी पुरुषों की कामेच्छाओं को काफी अच्छे स्तर तक बढ़ाने में सक्षम है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है।
18. गठिया: यह वात के कारण जॉइंट्स में होने वाले दर्द से तथा गठिया रोग से मुक्ति दिला सकती है। एक चम्मच पिसा हुआ मेथी दाना सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ नियमित लेने से जॉइंट पैन में बहुत आराम आता है। मेथी के लडडू (मेथी, आटा और गुड़ से बनाये जाते है) खाने से भी जोड़ों का दर्द नहीं सताता है। टूटी हुई हड्डी इसके उपयोग से जल्दी जुड़ती है।
19. मेनोपॉज (Menopause=रजोनिवृत्ति): मेनोपोज़ के समय स्त्रियों को कई तरह की परेशानियां होती है जैसे डिप्रेशन, मूड बदलना, क्रेम्प आना, रात को बहुत पसीना आना आदि। मेथी के उपयोग से इनमे कमी हो सकती है। क्योंकि इसें स्त्री हार्मोन इस्ट्रोजन जैसे तत्व होते है। इसके अलावा इससे स्त्रियों को होने वाली अन्य हार्मोन संबंधी परेशानियां भी कम होती है।
20. गले की खराश (Sore Throat): मेथी में पाया जाने वाला म्यूसिलेज नामक तत्व गले की खराश और कफ आदि में आराम दिलाता है। दो कप पानी में दो चम्मच दाना मेथी डालकर उबाल लें। इसे छानकर इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर पियें। इससे गले की खराश, जुकाम, कफ आदि में आराम मिलता है। मेथी उबाल कर छाने हुए पानी से कुल्ला करने से मुँह की दुर्गन्ध मिटती है।
21. बालों के लिए: बालों के लिए मेथी कंडीशनर का काम करती है। इससे रुसी में भी आराम मिलता है। बालों का गिरना कम हो जाता है। दाना मेथी पाउडर को पानी में एक घंटे भिगोकर, बालों की जड़ों में लगा लें। आधा घंटे बाद धो लें। इससे बालों को ये सारे लाभ मिल जाते है। या मेथी दाना नारियल के तेल में उबालकर छान कर रख लें। इस तेल की नियमित मालिश करने से बाल घने और मुलायम होते है।
22. औरतों के लिए मेथी का सेवन (Fenugreek Intake for Women:): वैसे तो मेथी का सेवन दमा से लेकर कामेच्छा तक, कई मामलों में फायदेमंद है, लेकिन महिलाओं के लिए इसका सेवन खास वजह से भी जरूरी है। चाहे मेथी का सेवन साग के रूप में हो या फिर दाने के तौर पर, महिलाओं के लिए मासिक चक्र से जुड़ी समस्याओं के उपचार में यह काफी फायदेमंद माना जाता है।
(1) पीरियड्स में : मेथी में सेपोनिन्स और डायोसजेनिन नामक दो ऐसे तत्व हैं जो शरीर में स्टेरॉयड्स (Steroids=Steroids are synthetic hormones designed to treat medical ailments…) व एस्ट्रोजन (What Is Estrogen? The hormone that controls a woman's monthly cycle, estrogen, gets a lot of attention in women's lives, but it is actually a hormone that affects both men and women.) की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से पीरियड्स के दौरान पड़ने वाले क्रैंप और पेट दर्द में आराम मिलता है।
(2) गर्भावस्था में: इसमें आयरन की मात्रा अधिक है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन जच्चा-बच्चा की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।
(3) सेक्स की इच्छा बढ़ाता है: मेथी में मौजूद सेपोनिन्स और डायोसजेनिन शरीर में सेक्स हार्मोन बढ़ाते हैं, जिससे महिलाओं की कामेच्छा बढ़ती है।
(4) मेनो़पॉज में: मेथी में मौजूद डायोसजेनिन और आइसोफ्लेवोन्स मेनोपॉड के दौरान महिलाओं के मूड को नियंत्रित करने में मददगार माना जाता है।
(5) हार्मोनल बैलेंस: मेथी में मौजूद डायोसजेनिन महिलाओं के शररीर में हार्मोनल संतुलन बनाए रखता है। इससे हार्मोन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
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वजन और मोटापा कम : अपनायें दस नुस्खे-
1. नीबू का रस 15 ग्राम, 15 ग्राम शहद व 125 ग्राम गरम पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट 2 या 3 महीने तक लगातार पीये मोटापा कम होगा।
2. अधिक मीठा व अधिक नमक न लें; नमक व मीठा दोनों एकदम बन्द कर देने से मोटापा तीव्रता से कम होता है।
3. तुलसी के पत्तों का रस 10 बूंद व दो चम्मच शहद एक ग्लास पानी मे मिलाकर कुछ दिन पीने से मोटापा कम होता है।
4. सोने से पहले कम से कम 2 घण्टा पहले डिनर करें।
5. खाने के बाद एक कप गरम पानी घूंट-घूंट चाय की तरह पीये, मोटापा कम होगा।
6. दही का सेवन करने से शरीर की फ़ालतू चर्बी कम होती है। अत:दूध के बजाय दही या मट्ठे का सेवन करें!
7. एक कप गाजर के रस में एक चौथाई कप पालक का रस मिलाकर पीयें; एक या दो महीने तक लगातार पीने से लाभ होगा।
8. पैदल घूमने जायें व साइकिलिंग करें! मोटापा घटाने वाले आसन करने से विशेष लाभ होता है। जैसे-उत्तानपदासन; हलासन, धनुरासन, भुजंगासन, सूर्य नमस्कार आदि। सूर्य नमस्कार एक पूर्ण व्यायाम है, जो शरीर के सभी अंगो को स्वस्थ रखता है व मोटापा कम करता है।
9. नित्य प्रात: प्राणायाम या व्यायाम करें; प्राणायाम करने से शरीर का मैटाबलिजम सिस्टम ठीक होता है।
10. अनामिका अंगुली के टौप भाग पर अंगूठे से दबाकर कम से कम 5 मिनट तक एक्यूप्रेशर करे; दिन में दो या तीन बार ऐसा कर सकते हैं! शरीर का वेट सन्तुलित रहेगा।
2. अधिक मीठा व अधिक नमक न लें; नमक व मीठा दोनों एकदम बन्द कर देने से मोटापा तीव्रता से कम होता है।
3. तुलसी के पत्तों का रस 10 बूंद व दो चम्मच शहद एक ग्लास पानी मे मिलाकर कुछ दिन पीने से मोटापा कम होता है।
4. सोने से पहले कम से कम 2 घण्टा पहले डिनर करें।
5. खाने के बाद एक कप गरम पानी घूंट-घूंट चाय की तरह पीये, मोटापा कम होगा।
6. दही का सेवन करने से शरीर की फ़ालतू चर्बी कम होती है। अत:दूध के बजाय दही या मट्ठे का सेवन करें!
7. एक कप गाजर के रस में एक चौथाई कप पालक का रस मिलाकर पीयें; एक या दो महीने तक लगातार पीने से लाभ होगा।8. पैदल घूमने जायें व साइकिलिंग करें! मोटापा घटाने वाले आसन करने से विशेष लाभ होता है। जैसे-उत्तानपदासन; हलासन, धनुरासन, भुजंगासन, सूर्य नमस्कार आदि। सूर्य नमस्कार एक पूर्ण व्यायाम है, जो शरीर के सभी अंगो को स्वस्थ रखता है व मोटापा कम करता है।
9. नित्य प्रात: प्राणायाम या व्यायाम करें; प्राणायाम करने से शरीर का मैटाबलिजम सिस्टम ठीक होता है।
10. अनामिका अंगुली के टौप भाग पर अंगूठे से दबाकर कम से कम 5 मिनट तक एक्यूप्रेशर करे; दिन में दो या तीन बार ऐसा कर सकते हैं! शरीर का वेट सन्तुलित रहेगा।
परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.-Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
मोटापा घटाने के लिए आहार चार्ट
1. आहार चार्ट : सबसे पहले अधिक चीनी, अधिक चर्बी, अधिक मसालें वाले खाने को बंद करना होगा। नीचे पूरा आहार चार्ट दिया गया है। अगर इस चार्ट के अनुसार खाएँगे तो मोटापा बहुत ही जल्द कम हो जायगा।
- नाश्ता (7:00-8:00) : सुबह-सुबह नाश्ता जरूरी है। अगर भूख नहीं हो तो सिर्फ एक ग्लास जूस का ले सकतें हैं जूस संतरा, मौसम्मी, अनन्नास किसी का भी हो सकता है। अगर भूख है तो नाश्ते में कोई भी मौसमी फल (सेब, अंगूर, तरबूज, खरबूजा, आम) भरपेट खाएं।
- लंच (12:30-1:30) दोपहर का भोजन : दोपहर के भोजन में आप अपनी तासीर के अनुसार गेहूं की रोटी या चावल ले सकतें हैं। दोपहर के खाने मे आपको दाल कम से कम खानी है! दाल आप सप्ताह में एक दो बार खा सकतें हैं! रोटी के साथ आप कोई सब्जी ले सकतें हैं। दोपहर के खाने मे आपको दही जरूर लेनी है। दही की मात्रा 250 ग्राम ले सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें की दही में आपको चीनी नहीं डालनी, बल्कि सादा दही खाना है।
- डिनर (7:00-8:00) रात का भोजन : रात के भोजन में टमाटर, खीरा, गाजर, चुकंदर कुछ भी अधिक से अधिक सब्जियों का सलाद लें। अगर आपको सलाद खाना पसंद नही है तो आप कोई भी मौसमी फल (सेब, आम, अंगूर, नाशपाती आदि) भर पेट खा सकतें हैं।
गेहूं या चावल से बना भोजन खाना दिन में केवल एक बार : उक्त आहार चार्ट में आपको इस बात का ध्यान रखना है कि आपको पूरे दिन में सिर्फ एक बार ही गेहूं या चावल से बना भोजन खाना है। अगर आप गेहूं या चावल का भोजन एक बार से ज्यादा लेने लगेंगे तो मोटापा कभी नहीं रुक पायगा। इस आहार चार्ट में आप बीच-बीच मे जूस भी पी सकतें हैं।
2. एक बार व्यायाम जरूर : दिन में कम सक कम एक बार व्यायाम जरूर करना चाहिये। व्यायाम सुबह या श्याम जब भी समय मिले किया जा सकता है, वैसे सुबह का समय अच्छा रहता है।
3. सोना-जागना : रात को जल्दी सोना चाहिए। रात 10 बजे तक सो जाना चाहिए और सुबह भी जल्दी उठना चाहिए।
अगर उपरोक्त तरीकों को पूरी तरह अपनाया जायेगा तो मोटापा बहुत ही जल्द कम हो जायगा! एक महीने में 5 से 10 किलो तक वजन कम हो जायेगा।
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परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
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कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
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aajtak.in [Edited by: भूमिका राय]
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर 2015 | अपडेटेड: 13:32 IST
हम सभी के घरों में अजवायन एक प्रमुख मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. पर आपको शायद ही पता हो कि ये एक प्राकृतिक औषधि भी है. आप चाहें तो कई छोटी-छोटी सामान्य बीमारियों का इलाज अजवायन की मदद से कर सकते हैं. अच्छी बात ये है कि इसका फायदा बड़े और छोटे दोनों को समान रूप से होता है.
अजवायन को इस्तेमाल करने का तरीका:
अजवायन का पूरा फायदा लेने के लिए इसे पानी में उबाल लेते हैं. अगर आप चाहें तो इसे यूं भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसके पानी का इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद होता है. इसका पानी बनाने के लिए एक चम्मच अजवायन को एक कप पानी में उबाल लें. जब ये पानी आधा रह जाए और पानी मटमैला दिखने लगे तो गैस बंद कर दें. इस पानी को छान लें. जब ये ठंडा हो जाए तो इसे इस्तेमाल करें.
अजवायन के फायदे:
1. अगर आप मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं तो अजवायन का पानी पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. ये चर्बी को गलाने का काम करता है, जिससे बहुत जल्दी वजन घट जाता है.
2. अगर आपको पाचन से जुड़ी कोई समस्या है तो अजवायन का पानी आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं. अजवायन का पानी पीने से कब्ज और गैस की समस्या में राहत मिलती है.
3. अजवायन का पानी दर्द निवारक की तरह काम करता है. अगर आपको दांत दर्द की तकलीफ है तो अजवायन के पानी से गार्गल करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. साथ ही इसके इस्तेमाल से मुंह की दुर्गंध भी दूर हो जाती है.
4. पीरियड्स के दौरान दर्द और ऐंठन की समस्या से राहत पाने के लिए भी अजवायन का पानी बहुत फायदेमंद होता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो पेट के इंफेक्शन को दूर करने में मददगार होता है.
5. अगर आपको हल्की सर्दी हो रखी है तो भी अजवायन के पानी से गार्गल करना फायदेमंद रहता है. सर्दी दूर करने के लिए ग्रामीण इलाकों में लोग अजवायन का धुंआ भी लेते हैं.
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AdminJune 5, 2016
अजवायन का प्रयोग घरों में ना केवल मसाले के रूप में ही किया जाता है बल्कि छोटी-मोटी पेट की बीमारियां भी इसके सेवन से दूर हो जाती हैं। खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूरन बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये। वैसे तो अजवायन बड़ी ही काम की चीज़ है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है। जी हां, यह बात काफी कम लोग जानते हैं कि अजवायन का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। मोटापा कम करने के लिये अक्सर लोग गरम पानी और नींबू पीते हैं, जिससे शरीर के विशैले तत्व बाहर निकलते हैं ना कि वजन में कमी आती है।
कई बीमारियों में लाभकारी अजवायन का पानी-
पाचन क्रिया बेहतर: अजवायन में थायमॉल (Thymol) मौजूद होता है। दुनिया में सबसे अधिक थायमॉल वाला पौधा अजवायन का ही होता है। ये केमिकल गेस्ट्रिक द्रव्यों को बाहर निकालने में पेट की मदद करता है, जिससे की पाचन क्रिया आसान हो जाती है। अपच, मतली और शिशुओं के पेट दर्द जैसी समस्याओं में इससे मदद मिलती है।
अजवायन का प्रयोग घरों में ना केवल मसाले के रूप में ही किया जाता है बल्कि छोटी-मोटी पेट की बीमारियां भी इसके सेवन से दूर हो जाती हैं। खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूरन बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये। वैसे तो अजवायन बड़ी ही काम की चीज़ है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है। जी हां, यह बात काफी कम लोग जानते हैं कि अजवायन का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। मोटापा कम करने के लिये अक्सर लोग गरम पानी और नींबू पीते हैं, जिससे शरीर के विशैले तत्व बाहर निकलते हैं ना कि वजन में कमी आती है।
कई बीमारियों में लाभकारी अजवायन का पानी-
पाचन क्रिया बेहतर
अजवायन में थायमॉल (Thymol) मौजूद होता है। दुनिया में सबसे अधिक थायमॉल वाला पौधा अजवायन का ही होता है। ये केमिकल गेस्ट्रिक द्रव्यों को बाहर निकालने में पेट की मदद करता है, जिससे की पाचन क्रिया आसान हो जाती है। अपच, मतली और शिशुओं के पेट दर्द जैसी समस्याओं में इससे मदद मिलती है।
वजन घटाने में मददगार
अजवायन न सिर्फ आपकी पाचन क्रिया को बेहतर करता है बल्कि आपके मेटाबॉलिज़्म को भी तेज़ी देता है, जिससे कि आपको वजन घटाने में मदद मिलती है।
सिरदर्द और कंजेस्शन से छुटकारा
अजवायन का पानी उबालने पर या उसका पानी पीते हुए जो उससे भाप मिलती है उससे सिरदर्द और नाक के कंजेस्शन (Congestion) में काफी राहत मिलती है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अजवायन में बहुत सारे वाष्पशील पदार्थ होते हैं जो कि उबाले जाने पर भाप बनकर उड़ते हैं।जब आप इस भाप को अंदर लेते हैं तो आपको सिरदर्द और जुकाम से भी राहत मिलती है।
मतली से राहत: अजवायन के पानी से मतली भी ठीक की जा सकती है। कई मामलों में, इसको पीने से लगातार आ रहीं उल्टियां भी रूक जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अजवायन में बहुत अधिक प्रभावी एंटीबैक्टीरियल तत्व होते हैं जो कि पेट से बैक्टीरिया इंफेक्शन को दूर करते हैं।
दांद दर्द करता है दूर
अजवायन दांद दर्द को दूर करने और मुंह को स्वस्थ बनाए रखने में बहुत मददगार होती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर ये सलाह देते हैं कि दांत दर्द होने पर अजवायन के पानी से कुल्ला करें। अजयावय में मौजूद थायमोल (Thymol) दर्द से राहत दिलाता है और मुंह के स्वास्थ्य का ख्याल रखता है।
दूसरी ओर अजवायन का पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है जिसकी वजह से कार्ब तथा फैट बर्न होने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है। तो अगर आप भी अपने बढ़ते हुए वजन से परेशान है तो, कुछ दिनों तक इस नुस्खे को आजमाइये और असर देखिये। आइये जानते हैं अजवान का पानी बनाने की विधि और रिजल्ट पाने के लिये किन-किन चीज़ों से परहेज रखना है।
ऐसे बनाएं अजवायन का पानी
1. कैसे तैयार करें अजवाय का पानी
2. 50 ग्राम अजवायन लें (आप चाहें तो 25 ग्राम भी ले सकते हैं पर 50 ग्राम ज्यादा प्रभाव शाली है)
3. अजवायन को 1 गिलास पानी में रातभर के लिये भिगो कर छोड़ दें और फिर सुबह पानी को छान लें।
4. उसके बाद पानी में 1 चम्मच शहद मिक्स करें और सुबह खाली पेट पी लें।
5. यदि आप चाहें तो उसी अजवायन को धूप मे सुखा कर फिर से दूसरे दिन भी प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन तीसरे दिन आपको इर्न अजवायन का प्रयोग करना होगा।
6. अजवायन के पानी को 45 दिन लगातार पियें, आपको फायदा जरुर मिलेगा। वैसे तो आपको इसका असर मात्र 15 दिनों में ही दिखने लगेगा पर अगर प्रभावी परिणाम चाहिये तो, 45 दिन लगेंगे। वजन कम होना आपके शरीर के प्रकार पर भी निर्भर करेगा। इस पानी को पीने से आपका 5 किलो वजन कम होगा पर अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित नहीं होंगे तो।
अच्छा रिजल्ट पाने के लिये कुछ जरुरी बातों का पालन करें :-
- 1. चावल पूरी तरह से छोड़ दें रोटियों का संख्या घटा दें। मतलब अगर आप दो राटी खाते हैं तो उसे आधा कर दें।
- 2. आलू, शक्कर, फास्ट फूड और ऑइली फूड ना खाएं।
- 3. भोजन करने के एक घंटे तक पानी ना पियें।
यह उपचार खास तौर पर उन महिलाओं के लिये है, जिन्हें पीरियड्स की समस्या है और जिसकी वजह से उनका वजन बढ़ जाता है।
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सदियों के अजवाइन का इस्तेमाल कई तरह के घरेलू नुस्ख़ों के लिए किया जाता रहा है। उदाहरण के लिए एसिडिटी के लिए एन्टासिड खाने के जगह पर अजवाइन खाना तो लोग सामान्यतः सेफ मानते हैं। यहाँ तक कि अर्थराइटिस होने पर भी अजवाइन का पेस्ट जोड़ों पर लगाने जैसा घरेलू इलाज दर्द को कम करने में असरदार रूप से काम करता है। जिन लोगों को बदहजमी का प्रॉबल्म होता है वह तो अजवाइन बिना सोचे समझे दिन में कितनी बार खाते हैं उसके बारे में कहना मुश्किल है। अजवाइन में थाइमोल नाम का तत्व होता है जो पीएच लेवल को नॉर्मल रखने के साथ-साथ गैस्ट्रिक जूस के निष्कासन से खाना को जल्दी हजम करवाने में मदद करता है। ये तो अजवाइन का एक पहलू है उसके दूसरे पहलू के बारे में जानकर आप आश्चर्य में पड़ जायेंगे। पढ़े-
अजवाइन के साइड-इफेक्ट्स: लेकिन डायटीशियन और न्यूट्रीशनिस्ट नेहा चांदना का कहना है कि अजवाइन को खाना तब तक स्वास्थ्य या सेहत के दृष्टि से सेफ है जब तक आप इसको सीमित मात्रा में ले रहे हैं। यानि अजवाइन का सेवन आप दिन में कम से कम 10 ग्राम तक ही ले सकते हैं। इससे ज्यादा मात्रा में अजवाइन खाने से आपके सेहत को फायदा पहुँचने से जगह पर नुकसान ही पहुँचेगा। क्यों आश्चर्य में पड़ गए न! अतिरिक्त मात्रा में अजवाइन लेने से एसिडिटी कम होने के जगह पर बढ़ सकती है, सिर दर्द, उल्टी, पेट में जलन जैसा अनुभव और अल्सर जैसे प्रॉबल्म्स का सामना करना पड़ सकता है। यहाँ तक कि प्रेगनेंट महिलायें भी अजवाइन का सेवन कब्ज़ और एसिडिटी की समस्या के लिए कर तो सकती है लेकिन दिन में 10 ग्राम से ज्यादा नहीं।
ध्यान देने की बात ये है कि छह महीने से बड़े शिशु या बच्चों के हजम शक्ति को बढ़ाने के लिए आप उनको एक छोटा चम्मच गुड़ और अजवाइन का पाउडर दे सकते है। इससे उनका डाइजेस्टिव सिस्टेम बेहतर हो जाता है, लेकिन सीमित मात्रा में।
कैसे करें इसका सेवन? अजवाइन को पानी में डालकर उबाल लें। फिर उस पानी को छानकर पियें या गुड़ के साथ भी इसको ले सकते हैं।
अजवायन एक औषधि है। जिसका उपयोग कई रोगों का इलाज करने के लिए होता है। इसका चूर्ण बनाकर सेंधानमक मिलाने से पेट की तकलीफों से चुरंत आराम मिलता है। खासकर पेट दर्द, मन्दाग्नि, अपच, अफरा, अजीर्ण और दस्त में अजवायन काफी लाभकारी है। जिसका सेवन दिन में कम से कम तीन बार करना चाहिए।
अजवाइन के फायदे
अजवाइन में 7 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 21 प्रतिशत प्रोटीन, 17 प्रतिशत खनिज, 7 प्रतिशत कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह, पोटेशियम, सोडियम, रिबोफ्लेविन, थायमिन, निकोटिनिक एसिड अल्प मात्रा में होता है। आंशिक रूप से आयोडीन, शर्करा, सेपोनिन, टेनिन, केरोटिन और 14 प्रतिशत तेल पाया जाता है।
कुछ घरेलू उपचार
- *100 तोला अजवायन के फूल का चूर्ण पानी में मिलाकर घाव पर लगाएं। दाद, खुजली, फुंसियां जैसे चर्मरोग में फायदा होगा।
- *अजवायन के तेल की मालिश से दर्द कम होता है। प्रयोग प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए अजवायन काफी लाभदायक है।
- *अजवायन के फूल को शक्कर के साथ तीन- चार बार पानी घोलकर से लेने से पित्ती की बीमारी ठीक हो जाती है।
- *पेट खराब होने पर अजवाइन को चबाकर खाएं, उसके बाद एक कप गर्म पानी पी लें, पेट ठीक हो जाएगा।
- *पेट दर्द होने पर अजवाइन के दाने 10ग्राम, सोंठ 5ग्राम और काला नमक 2 ग्राम को अच्छी तरह मिलाए, फिर मिश्रण का 3 ग्राम गुनगुने पानी के साथ सेवन करें आराम मिलेगा।
- *काले नमक के अजवायन पेट के कीड़े निकाल देती है।
- * लीवर की परेशानी होने पर 3ग्राम अजवाइन और आधा ग्राम नमक खाने के बाद लेने से लाभ होगा।
- *पेट में गैस होने पर हल्दी, अजवाइन और चुटकीभर काला नमक लेने से जल्दी आराम मिलता है।
- *पथरी की समस्या होने पर 5ग्राम ग्राम जंगली अजवाइन को पानी के साथ निगल लें। ऐसा महीने में पांच दिन करें, तो पथरी नहीं बनेगी।
- *अजवाइन को भूनकर कपड़े में लपेट ले, फिर रात में तकिए के नजदीक रखें, इससे दमा, सर्दी, खांसी के रोगियों को अच्छे से नींद आएगी।
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Sonu Singla 10:14:00 pm
"अजवाइन के गुण/ फायदे, अजवाइन का पानी के लाभ, अजवाइन का तेल/ नुकसान, अजवायन खाने के फायदे"
अजवायन-अजवायन का बीज छोटा,दानेदार और बारीक़ होता है।अजवायन के बीज से जो तेल या अर्क निकाला जाता है उसे सर्जरी के बाद एंटी सेप्टिक मरहम के तौर पर लगाया जाता है। इजिप्ट और अफगानिस्तान को अजवायन का घर कहा जाता है। अजवायन के पोधे को घर में लगाना भी बहुत आसान है। अक्टूबर और नवंबर इस पोधे को उगाने के लिए ज्यादा लाभदायक होते है।
खाने में इसका उपयोग-
तड़का एक खाना पकाने की विधि, जिसमें खाना पकाने के लिए तेल गरम किया जाता है उसमे पूरे मसाले डाले जाते है। भारतीय खाना पकाने में अजवाइन अक्सर थाली में तड़का का हिस्सा है। यह कम मात्रा में प्रयोग किया जाता है और लगभग हमेशा पकाया करते थे। यह अपनी मजबूत, प्रभावी स्वाद की वजह से प्रयोग होता है।अजवाइन भी सब्जियों के व्यंजन (अपने विशिष्ट स्वाद के लिए) और अचार (अपने संरक्षक के गुणों के लिए) में प्रयोग किया जाता है।
साइज: बहुत छोटा
रंग: भूरा हरे रंग के लिए पीले रंग
स्वाद: गर्म और तीखे स्वाद
पत्ते: जैसे छोटे पंख
खुशबू: मजबूत गंध, अजवायन के फूल की तरह
खुजली, फोड़े और पिम्पल्स :
• यह एक शांत, अंधेरे और सूखी जगह में एक कसकर मोहरबंद ग्लास कंटेनर में ताजा रखा जा सकता है।
• यह एक साल के लिए ताजा रहेगी।
आकार: ओवल और चोटी वाला।
अजवाइन और इसके तेल के पोषण का महत्व:
कैरम बीज 100 ग्राम प्रति होता है:
प्रोटीन -17.1%
वसा - 21.8%
खनिज-7.9%
फाइबर-21.2%
कार्बोहाइड्रेट-24.6%
इसमें कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, फास्फोरस, लोहा और नियासिन भी शामिल हैं। इसका तेल या तो बेरंग या रंग में पीला भूरे रंग का है। कैरम तेल व्यापक रूपमें कीटाणु नाशक और कवकनाशी के रूप में प्रयोग किया जाता है।
अजवाइन का लाभ:
1. अम्लता: एक चम्मच जीरा के साथ एक चम्मच अजवाइन का मिश्रण अदरक पाउडर के साथ हर रोज ले ।यह प्राकृतिक रूप से अपच समस्याओं का इलाज करने के लिए एक सबसे अच्छा तरीका है। यह अम्लता और एसिड समस्या के इलाज में उपयोगी है।
2. कब्ज: अजवाइन पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए सबसे अच्छा उपाय है। इसलिए इसे कब्ज से भी छुटकारा पाने के लिए उपयोग कर सकते हैं। अजवाइन का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
3. गुर्दा विकार और गुर्दे की पथरी: अजवाइन गुर्दे की पथरी का इलाज करने के लिए बहुत उपयोगी हैं। इसे गुर्दा रोग के इलाज के लिए और दर्द को कम करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
4. अस्थमा: गर्म पानी के साथ अजवाइन लेने से शरीर से खांसी और बलगम को निष्कासित किया जा सकता है। यह ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के इलाज के लिए बहुत उपयोगी है। इसे दिन में दो बार गुड़ के साथ सेवन किया जा सकता है। आप को निश्चय ही लाभ होगा।
5. जिगर और गुर्दे की खराबी: अजवाइन का पानी पीने से अपच और संक्रमण की वजह होने वाले आंतों में दर्द का सफल इलाज किया जा सकता है। अजवाइन जिगर और गुर्दे की खराबी के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद है।
6. मुँह समस्याएँ: अजवाइन दांत दर्द का इलाज करने के लिए असरकारक सिद्ध किया गया है। लौंग के तेल में एक हिस्सा अजवाइन का तेल होता है। दांत दर्द, मुँह से बुरी गंध और क्षय के इलाज के लिए अजवाइन पावडर और पानी के साथ कुल्ला करे । मौखिक स्वच्छता बनाए रखने के लिए यह सबसे अच्छा और कारगर तरीका है।
7. ठंड लगने पर उपयोगी: अजवाइन बंद नाक आदि सर्दी के लक्षणों का इलाज करने के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक तरीका है। राहत के लिए गर्म पानी में अजवाइन डालकर भाप ले,नाक तुरंत खुल जाएगी और सर्दी में भी आराम होगा।
अजवाइन पीसकर गुनगुने पानी के साथ इसका पेस्ट बना लें। चेहरे या शरीर के किसी भी प्रभावित हिस्से पर इस पेस्ट को लगाये । इसके अलावा सबसे अच्छा परिणाम के लिए अजवाइन के पानी से प्रभावित अंग को धोने की कोशिश करो। यह सूजन , फोड़े, पिम्पल्स या एक्जिमा में बहुत असरकारक है। नींबू के रस के साथ अजवाइन बीज का पेस्ट बना लें। यह सूजन को दूर करने में सहायक होगा।
8. अत्यधिक रक्तस्राव और अनियमित मासिक धर्म: इस समस्या में महिलाओं को अजवाइन का पानी पीने से बहुत लाभ होता है। रात में पानी से भरे मिट्टी के बर्तन में मुट्ठी भर अजवाइन भिगो दे । सुबह उन्हें पीसकर पी लो । धीरे धीरे आराम हो जायेगा।
9. पाचन: अजवाइन पाचन समस्याओं में भी बहुत लाभ पहुंचाती है। चीनी के साथ 1 बड़ा चम्मच अजवाइन चबाने से अपच से छुटकारा मिलेगा। यह चीनी के बिना भी सेवन किया जा सकता है।
10. गठिया: अजवाइन का तेल गठिया के दर्द के इलाज के लिए एक बहुत ही उपयोगी असरकारक नुस्खा है। अजवाइन के तेल के साथ नियमित रूप से प्रभावित जोड़ों पर मालिश करने से दर्द से राहत मिलती है।और गठिया रोग ठीक होने लगता है।
11. दस्त: अजवाइन पेचिश या दस्त का इलाज करने के लिए एक प्राकृतिक उपचार है। एक गिलास पानी में अजवाइन की एक मुट्ठी उबाल लें।ठंडा करके छानकर इसे दिन में दो बार पिए,तुरंत आराम मिलेगा। यह अपच और पेचिश के इलाज के लिए एक अचूक उपाय है।
12. वायरल संक्रमण: अजवाइन पाउडर के साथ दही का मिश्रण बना ले । एक पूरी रात के लिए चेहरे पर इस पेस्ट को लगाने से मुँहासे और निशान को हल्का कर सकते है। अच्छे परिणाम के लिए सुबह गुनगुने पानी से धो लें।
13. पेट दर्द में आराम: अजवाइन को नमक के साथ मिला कर गुनगुने पानी से लो। पेट दर्द में तुरंत आराम मिल जायेगा। यह बहुत अचूक नुस्खा है।
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अजवायन एक ऐसी चीज या औषधि है, जो अकेली ही एक ऐसी है जो कि सौ प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने वाली होती है।
अनेक प्रकार के गुणों से भरपूर अजवायन पाचक रूचि कारक, तीक्ष्ण, कढवी, अग्नि प्रदीप्त करने वाली, पित्तकारक तथा शूल, वात, कफ, उदर आनाह, प्लीहा, तथा क्रमि का नाश करने वाली होती है।
इसकी खेती सारे देश में होती है।
अजवायन का उपयोग औषिध के रूप में, मुख्यत: उदर एवं पाचन से समबन्धित विकारों तथा वात व्याधियों को दूर करने में बहुत गुणकारी होती है।
अजवायन में लाल मिर्च की तेजी, राई की कटुता तथा हींग और लहसुन की वातनाशक गुण एक साथ मिलते हें। इस लिए यह गुणों का भंङार है । इसी लिए यह उदर शूल, गैस, वायुशोला, पेट फूलना, वात प्रकोप आदि को दूर करता है। इसी कारण इसे घर पर छुपा हुआ वेद्य कहा गया है।
अजवायन की पत्ती का दिलकश स्वाद होता है। इसी कारण इसका (पत्ती) इतालवी व्यंजनों में, जेसे पिज्जा पास्ता आदि। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवायन की ताजा पत्ती में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन होते है.
विटामिन सी, विटामिन ए, लोहा, मैंगनीज और कैल्शियम और साथ ही युक्त ओमेगा -3 फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है। अजवायन से कैलशियम, फासफोरस, लोहा सोडियम व पोटेशियम जैसे तत्व मिलते हैं।
अजवायन के लाभ-अजवायन के गुण-अजवायन का औषिध
के रूप में उपयोग (THE BENEFITS OF PARSLEY)
- यह एक उत्कृष्ट एंटीऑक्सिडेंट है, अजवायन मोटापे को कम करने में भी मदद करती है। सर्दियों के मौसम में सर्द से बचने के लिए अजवायन एक सफल औषधि है। जंगली अजवायन की पत्ती का तेल श्रेष्ट माना गया है प्रतिरक्षा प्रणाली को दृढ़ करता है, श्वसन क्रिया को दुरुस्त करता है। जोड़ों और मांसपेशियों का लचीलापन बढाता है और त्वचा को संक्रमण से बचाता है।
- अपच: बरसात के मौसम में पाचन क्रिया के शिथिल पड़ने पर अजवायन का सेवन काफी लाभदायक होता है। इससे अपच को दूर किया जा सकता है।
- अजीर्ण: अजवायन, काला नमक, सौंठ तीनों को पीसकर चूर्ण बना लें। भोजन के बाद फाँकने पर अजीर्ण, अशुद्ध वायु का बनना व ऊपर चढ़ना बंद हो जाएगा।
- झाईं: खीरे के रस में अजवायन पीसकर चेहरे की झाइयों पर लगाने से लाभ होता है।
- शराब उपद्रव नाशक: अधिक शराब पी लेने से अगर व्यक्ति को उल्टियां आ रहीं हो तो उसे अजवाईन खिलाना बेहतर होगा। इससे उसको आराम मिलेगा और भूंख भी अच्छी तरह से लगेगी।
- गर्भावस्था में: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अजवाइन जरुर खानी चाहिए, क्योंकि इससे ना सिर्फ खून साफ रहता है, बल्कि यह पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को संचालित भी करता है।
- कान दर्द: कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे कान में डालने से आराम मिलता है।
- दाद-खा़ज: शरीर में दाने हो जाएं या फिर दाद-खा़ज हो जाए तो, अजवाइन को पानी में गाढ़ा पीसकर दिन में दो बार लेप करने से फायदा होता है। घाव और जले हुए स्थानों पर भी इस लेप को लगाने से आराम मिलता है और निशान भी दूर हो जाते हैं।
- गठिया: गठिया के रोगी को अजवाइन के चूर्ण की पोटली बनाकर सेंकने से रोगी को दर्द में आराम पहुंचता है। अजवाइन का रस आधा कप में पानी मिलाकर आधा चम्मच पिसी सोंठ लेकर ऊपर से इसे पीलें। इससे गठिया का रोग ठीक हो जाता है।
- खांसी: अजवाइन के रस में एक चुटकी काला नमक मिलाकर सेवन करें। और ऊपर से गर्म पानी पी लें। इससे खांसी बंद हो जाती है।
- गुर्दे का दर्द: गुड़ और पिसी हुई कच्ची अजवाइन समान मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच रोजाना 4 बार खायें। इससे गुर्दे का दर्द भी ठीक हो जाता है।
- रात में पेशाब करने आदत: जिन बच्चे को रात में पेशाब करने की आदत होती है उन्हें रात में लगभग आधा ग्राम अजवाइन खिलायें।
- चेहरे का लेप : 2 चम्मच अजवाइन को 4 चम्मच दही में पीसकर रात में सोते समय पूरे चेहरे पर मलकर लगाएं और सुबह गर्म पानी से साफ कर लें।
- मसूढ़ों के रोग: अजवाइन को भून व पीसकर मंजन बना लें। इससे मंजन करने से मसूढ़ों के रोग मिट जाते हैं।
- खट्टी डकारें: अजवाइन, सेंधानमक, सेंचर नमक, यवाक्षार, हींग और सूखे आंवले का चूर्ण आदि को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम शहद के साथ चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
- जुकाम के साथ हल्का बुखार: देशी अजवाइन 5 ग्राम, सतगिलोए 1 ग्राम को रात में 150 मिलीलीटर पानी में भिगोकर, सुबह मसल-छान लें। फिर इसमें नमक मिलाकर दिन में 3 बार पिलाने से लाभ मिलता है।
- दमा: अजवाइन का रस आधा कप इसमें इतना ही पानी मिलाकर दोनों समय (सुबह और शाम) भोजन के बाद लेने से दमा का रोग नष्ट हो जाता है।
- मासिक धर्म की पीड़ा: मासिक धर्म के समय पीड़ा होती हो तो 15 से 30 दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ अजवायन लेने से दर्द मिट जाता है। मासिक अधिक आता हो, गर्मी अधिक हो तो यह प्रयोग न करें। सुबह खाली पेट 2-4 गिलास पानी पीने से अनियमित मासिक स्राव में लाभ होता है।
- एसिडिटी: एसिडिटी की तकलीफ है तो थोड़ा-थोड़ा अजवाइन और जीरा को एक साथ भून लें। फिर इसे पानी में उबाल कर छान लें। इस छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं, एसिडिटी से राहत मिलेगी।
- पेट दर्द, गैस और अशुद्ध वायु: इसे अदरक (सोंठ) पाउडर और काला नमक 2-2 और 1 के अनुपात में मिलाएं भोजन करने के बाद एक चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें तो पेट दर्द व गैस की समस्या में आराम मिलेगा। अशुद्ध वायु का बनना व सर में चढ़ना ख़त्म होगा।
- पेट दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि: अजवायन पाउडर का एक चम्मच (टी स्पून) ले उसमे एक चुटकी काला नमक मिला कर दिन में दो या तीन बार गुनगुने पानी के साथ सेवन से पेट में दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि में लाभकारी होती है।
- भूख लगाना: अजवायन, सौंफ, सोंठ और काला नमक को बराबर मात्रा में मिलाकर देसी घी के साथ दिन में तीन बार खाएं। भूख लगने लगेगी ।
- मोटापा नाशक: शाम को अजवायन को एक गिलास पानी में भिगोएं सुबह छानकर उस पानी में शहद डालकर पीने से मोटापे को कम करने में मदद होती है।
- मसूड़ों की सूजन: अजवायन के तेल की कुछ बूंदें गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है।
- खांसी जुकाम में रामबाण: खांसी जुकाम में चुटकी भर काला नमक, आधा चम्मच अजवायन और दो लोंग इन सब को पिसकर गुनगुने पानी के साथ दिन में कई बार पीने से अदभुत लाभ मिलता है। यह रामबाण दवा है।
- जमा कफ निकालने हेतु: आधा कप पानी में आधा चम्मच अजवायन और थोड़ी सी हल्दी पाउडर डालकर उबाले और ठंडा करें और इसमें एक चम्मच शहद डालकर पीएं। और गर्म पानी में अजवायन डालकर इसका भाप लें। इस से छाती में जमा कफ निकल जाता है ।
- शीत-पित्ती: शीत-पित्ती की बीमारी के लिए अजवायन के फूल को गुड के साथ मिला कर पानी से लेने से पित्ती ठीक होती है। अजवायन का चूर्ण गेरु में मिलाकर शरीर पर मलने से पित्ती में तुरन्त लाभ होता है।
- खांसी: बेर के पत्तों और अजवायन को पानी में उबालकर, छानकर उस पानी से गरारे करने पर खांसी में लाभ होता है।
- अर्धशिरशूल: अजवायन को पानी में डालकर उबालें। छानकर बार बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से आधे सिर दर्द में लाभ होता है। रात को कई बार पेशाब आने पर भी इसके सेवन से फायदा होता है।
- जोड़ों का दर्द: जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छे से गर्म करें व छान ले और इससे जोड़ों की मालिश करे इससे आराम होगा।
- कृमिनाशक: अजवायन प्रबल कीटनाशक है। आँतों में कीड़े होने पर अजवायन के साथ काले नमक का सेवन करने पर पेट के कीड़े बाहर निकल जाते हैं। अजवायन का चूर्ण और गुड समान मात्रा में मिलकर गोली बनाकर दिन में दो तीन बार खिलाने से पेट के सभी प्रकार के कीडे नष्ट हो जाते है।
- कृमिनाशक: एक से दो ग्राम ग्राम अजवायन का चूर्ण छाछ के साथ देने से पेट के कीडे नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते है।
- कृमिनाशक: सुबह दस-पन्द्रह ग्राम गुड खाकर दस-पन्द्रह मिनट बाद एक से दो ग्राम अजवायन का चूर्ण बासी पानी के साथ ले। इससे आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे मर कर मल के साथ बहार निकल जायेंगे।
- दस्तावर: अजवायन को रात में चबाकर गरम पानी पीने से सवेरे पेट साफ हो जाता है।
- खॉसी और कफ एवं कफ की दुर्गन्ध: अजवायन के फूल को शहद में मिलाकर लेने से खॉसी और कफ में फायदेमंद होता है। इससे कफ की दुर्गन्ध भी खत्म होती है।
- चोट सूजन व दर्द: चोट लगने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस बाँधने से चोट की सूजन व दर्द कम होती है।
- दस्त: अजवायन का अर्क या तेल 10-15 बूँद बराबर लेते रहने से दस्त बंद होते हैं।
- ठंड का बुखार: अजवायन का चूर्ण दो-दो ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार लेने से ठंड का बुखार शान्त होता है।
- ब्लडप्रेशर: ब्लडप्रेशर, बाय का दर्द, रक्तचाप और चर्म रोगों, में ऊँगलियों के काम न करने पर अजवायन के फूल एवं गिलोय का अर्क 1-1 ग्राम साथ मिलाकर लेना लाभ दायक होता है।
- चर्मरोग: अजवायन के फूल (सफ़ेद दाने के रूप में बाज़ार में उपलब्ध) का चूर्ण पानी में मिलाकर उस घोल से घाव, दाद, खुजली, फुंसियाँ आदि धोने पर ये चर्मरोग नष्ट होते हैं।
- प्रसव के बाद: अजवायन का प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन को पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए सभी परम्परागत भारतीय परिवारों में लड्डू बना कर खिलाया जाने की परंपरा हे। यह चमत्कारी लाभ देता हे। प्रसूति स्त्रियों को अजवायन व गुड मिलाकर देने से भूख बढ़ती है। प्रसव के बाद अजवायन के प्रयोग से गर्भाशय शुद्ध होता है। गर्भाशय पूर्वास्थिती में आ जाता है। दूध ज्यादा बनता है। बुखार व कमर का दर्द ठीक करता है। इससे खराब मासिक चक्र ठीक भी हो जाता हें।
- पेट दर्द, जलन, अफारा और मलमूत्र की रूकावट: अजवायन 10 ग्राम, छोटी हरड़ का चूर्ण 6 ग्राम, सेंधा नमक 3 ग्राम, हींग 3 ग्राम का चूर्ण बनाकर रखें और 3-3 ग्राम की मात्रा में जल के साथ लें तो पेट दर्द, जलन, अफारा , और मलमूत्र की रूकावट दूर होती है।
- बदन दर्द: अजवायन चूर्ण गरम पानी के साथ लेने से या अर्क को गुनगुना करके पीने से या इसके तेल की मालिश करने से बदन दर्द ठीक होता है।
- शक्तिशाली एंटीबायोटिक, एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सिडेंट: अजवायन की पत्ती माहवारी के विकारों के उपचार, फेफड़ों की समस्याओं और अजीर्ण में और प्रयोग किया जाता है यह शक्तिशाली एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सिडेंट भी होता है। अजवायन की पत्ती में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक तत्व हंड यह संक्रमण को दूर रखने के महत्वपूर्ण होता है।
- किडनी या गुर्दे का दर्द: किडनी या गुर्दे संबंधी परेशानी में एक बड़ा चम्मच जीरा और दो चम्मच अजावयन को पीस कर पाउडर बना लें। इसमें थोड़ा सा काला नमक और एक चम्मच भूरे रंग का सिरका डाले। हर घंटे बाद एक-एक चम्मच इस मिश्रण का लें। दर्द से जल्द ही आराम मिल जाएगा।
- हाजमा: दोपहर को भोजन के बाद पिसी 2 - 3 ग्राम अजवायन लेने से खाना आसानी से हजम होता है।
- पुरानी खांसी: पान में अजवायन को डाल कर खाने से पुरानी खांसी ठीक होती है।
- मालिश: अजवायन को सरसों के तेल में डाल कर पकायें उससे बच्चों को मालिश करें सर्दी-जुकाम में तथा प्रसव उपरांत लाभ होगा।
- मसूड़ों में सूजन: मसूड़ों में सूजन होने पर अजवायन के तेल की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर कुल्ला करने से सूजन कम होती है।
- आधे सिर में दर्द: आधे सिर में दर्द होने पर एक चम्मच अजवायन आधा लीटर पानी में डालकर उबालें। पानी को छानकर रखें एवं दिन में दो-तीन बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से काफी लाभ होगा।
- जोड़ों का दर्द: सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छी तरह गरम करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
- चोट के नीले-लाल दाग: चोट लगने पर नीले-लाल दाग पड़ने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस चोट पर बाँधने पर दर्द व सूजन कम होती है।
- मुख में दुर्गंध: मुख से दुर्गंध आने पर थोड़ी सी अजवायन को पानी में उबालकर रख लें, फिर इस पानी से दिन में दो-तीन बार कुल्ला करने पर दो-तीन दिन में दुर्गंध खत्म हो जाती है।
परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
सभी लेखों में लिखी गयी दवाईयों का विवरण जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा मोल नहीं लें।
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन होम्योपैथ एवं परम्परागत चिकित्सक, 9875066111
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निवेदन : उपरोक्त पोस्ट में दी गयी जानकारी अच्छी लगे तो कृपया लेखक के उत्साहवर्धन के लिये एक कमेंट अवश्य करें। हमारे द्वारा पीलिया की दवाई मुफ्त में दी जाती है। जबकि-पैट में गैस, ऐसीडिटी, कब्जी, आँतों के अल्सर/छाले, लीवर/यकृत में सूजन/कमजोरी सिरदर्द, आधासीसी/माईग्रेन, पथरी, आसान और बिना सिजेरियन सुरक्षित प्रसव/डिलेवरी, विरह वेदना/प्रेम विछोह, डिप्रेशन, प्रदर, प्रमेह, शीघ्रपतन, यौन दुर्बलता, चिकनगुनिया/डेंगू के दर्द, सियाटिक आदि जटिल रोगों का बहुत कम खर्चे में उपचार किया जाता है। इसके अलावा दाम्पत्य विवाद समाधान के लिये भी सम्पर्क किया जा सकता है।
नोट : कृपया उपचार के नाम पर गारण्टी देकर ठगने वालों से बचें और एक बार सेवा का मौका प्रदान करें। उपचारक बाद में पहले-स्वास्थ्य रक्षक सखा डॉ. पुरुषोत्तम मीणा-मोबाईल एवं वाट्स एप नम्बर : 9875066111.
--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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दृष्टिदोष
दो मन
द्रोणपुष्पी
द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes
धड़कन
धनिया बीज
धनिया-Coriander
धमासा
धात
धातु
धातु पतन
धार्मिक
धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं?
धैर्यहीन
नज़ला
नपुंसक
नपुंसकता
नाइट्रिक एसिड
नाक
नाखून
नागबला
नागरमोथा
नाडी हिंगु
नाड़ी हिंगु (डिकामाली)
नामर्दी
नारकीय पीड़ा
नारियल
नाश्ता
निमोनिया
निम्न रक्तचाप
निम्बू
नियासिन
निराश
निरोगधाम
निर्गुण्डी
निर्गुन्डी
निष्कपट स्नेह
निष्ठा
निसोरा
नींद
नींबू
नींबू-Lemon
नीम-azadirachta indica
नुस्खे
नुस्खे-Tips
नेगड़
नेत्र रोग
नेुचरल
नैतिक
नॉर्मल डिलेवरी
नोनिया
नौसादर
न्युमोनिया-Pneumonia
न्यूरॉन्स
पक्षघात
पंचकर्म
पढ़ने में मन लगेगा
पंतजलि
पत्तागोभी-CABBAGE
पत्थर फोड़ी
पत्थरचट्टा
पत्नी
पथरी
पदार्थ
पनीर
पपीता
पपीता-CARICA PAPPYA
पमाड
परदेशी लांगड़ी
परम्परागत चिकित्सा
परहेज
पराठा
परामर्श
परिस्थिति
पवाड़
पवाँर
पाइल्स
पाक-कला
पाचक
पाचन
पाचनतंत्र
पाचनशक्ति
पाठक संख्या 16 लाख पार
पाठक संख्या पंद्रह लाख
पायरिया
पारदर्शिता
पारिजात
पालक
पालक-Spinach
पित्त
पित्ताशय
पित्ती
पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne
पिरामिड
पीलिया
पीलिया-Jaundice
पीलिया-कामला-Jaundice
पुआड़
पुदीना
पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava
पुरुष
पुंसत्व
पेचिश
पेट के कीड़े
पेट दर्द
पेट में गैस
पेट रोग
पेड़
पेद दर्द
पेरिकिटो सेसिल
पेशाब
पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
प्लूरिसी-Pleurisy
प्लेटलेट्स
फंगल
फटन
फफूंद-Fungi
फरास
फल
फाइबर
फिटकरी
फुंसी-Pimples
फूलगोभी-CAULIFLOWER
फेंफड़े
फेरम फॉस
फैट
फैटी लीवर
फोटोफोबिया
फोड़ा
फोड़े-Boils
फोरप्ले
फोलिक एसिड
फ्लू
फ्लू-Flu
फ्लेक्स सीड्स
बकायन
बकुल
बड़ी हरड़
बथुआ
बथुआ पाउडर
बथुआ-White Goose Foot
बदबू
बंध्यापन
बबूल-ACACIA
बरसाती बीमारियाँ
बरसाती बीमारियां
बलगम
बलवृद्धि
बला
बलात्कार
बवासीर
बहरापन
बहुनिया
बहुमूत्रता-
बांझपन
बादाम-Almonds
बादाम.
बाल
बाल झड़ना
बाल झडऩा-Hair Falling
बिना सिजेरियन मां बनें
बिवाई
बीजबंद
बीड़ी
बीमारियों के अनुसार औषधियां
बीमारी
बील
बुखार
बूंद-बूंद पेशाब
बेल
बेली
बैक्टीरिया
बॉयोकैमी
ब्रह्मदण्डी
ब्रेस्ट ग्रोथ
ब्लड प्रेशर
ब्लैक मेलिंग
ब्लॉकेज
भगंदर
भगंदर-Fistula-in-ano
भगनासा
भगन्दर
भगोष्ठ
भड़भांड़
भय
भविष्य
भस्मक रोग
भावनात्मक
भुई आंवला-Phyllanthus Niruri
भूई आमला
भूई आंवला
भूख
भूख बढ़ाने
भूत-प्रेत
भूमि
भूमि आंवला
भोजनलीवर
मकोय
मकोय-Soleanum nigrum
मक्का
मक्का के भुट्टे
मंजीठ
मटर-PEA
मंद दृष्टि
मंदाग्नि
मदार
मधुमेह
मधुमेह-Diabetes
मन्दाग्नि-Dyspepsia
मरुआ
मरोड़
मर्द
मर्दाना
मलाशय
मलेरिया
मलेरिया (Malaria)
मवाद
मसाले
मस्तिष्क
मस्से
मस्से-WARTS
महंगा इलाज
महत्वपूर्ण लेख
महाबला
माइग्रेन
माईग्रेन
माईंड सैट
माजूफल
मानवव्यवहार
मानसिक
मानसिक लक्षण
मानसिक-Mental
मानिसक तनाव-Mental Stress
मायोपिया
मासिक
मासिक-धर्म
मासिकधर्म
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माहवारी
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मिर्गी
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मीठा खाने की आदत
मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex
मुख्य लक्षण
मुधमेह
मुलहठी
मुलेठी
मुहाँसे
मूँगफली
मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders
मूत्र
मूत्र असंयमितता
मूत्र में जलन-Burning in Urine
मूत्ररोग
मूत्राशय
मूत्रेन्द्रिय
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मूली
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मृत्यु
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मेथी दाना
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मोटापा-Obesity
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मौत
मौलसिरी
मौसमी बीमारियां
यकृत
यकृत प्लीहा
यकृत वृद्धि-Liver Growth
यकृत-लीवर-जिगर-Lever
यूपेटोरियम परफोलियेटम
यूरिक एसिड लेबल
योग विज्ञापन
योन
योन संतुष्टि
योनि
योनि ढीली
योनि शिथिल
योनि शूल-Vaginal Colic
योनि संकोचन
योनिद्वारा
योनिभ्रंश
योनी
योनी संकोचन
यौन
यौन आनंद
यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills)
यौन क्षमता
यौन दौर्बल्य
यौन शक्तिवर्धक
यौन शिक्षा
यौन समस्याएं
यौनतृप्ति
यौनशक्ति
यौनशिक्षा
यौनसुख
यौनानंद
यौनि
रक्त प्रदर (Blood Pradar)
रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA
रक्तचाप
रक्तपित्त
रक्तशोधक
रक्ताल्पता
रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia
रस-juices
रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum
रामबाण
रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines
रुक्षांश
रूढिवादी
रूसी
रूसी मोटापा
रेचक
रेठु
रोग प्रतिरोधक
रोबोट सेक्स
रोमांस
लकवा
लक्षण
लक्ष्मी
लंच
लसोड़ा
लस्सी
लहसुन
लहसुन-Garlic
लाइलाज
लाइलाज का इलाज
लाक्षणिक इलाज
लाक्षणिक जानकारी
लाभ
लिंग
लिंग प्रवेश
लिसोड़ा
लीकोरिया
लीवर
लीवर सिरोसिस
लीवर-Liver
लू-hot wind
लैंगिक
लोनिया
लौकी
लौंग की चाय
ल्युकोरिया
ल्यूकोरिया
ल्यूज योनी
वजन
वज़न
वजन कम
वजन बढाएं-Weight Increase
वन तुलसी
वन/जंगली तुलसी
वनौषधियाँ
वमन
वमन विकृति-Vomiting Distortion
वसा
वात
वात श्लैष्मिक ज्वर
वात-Rheumatism
वायरल
वायरल फीवर
वायरल बुखार-Viral Fever
वासना
विचारतंत्र
विटामिन
विधारा
वियाग्रा-Viagra
वियोग
विरह वेदना
विलायती नीम
विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध
विवाहेत्तर सम्बंध
विश्वास
विष
विष हरनी
विषखपरा
वीर्य
वीर्य वृद्धि
वीर्यपात
वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone
वृक्ष
वैज्ञानिक
वैधानिक
वैवाहिक जीवन
वैवाहिक जीवन-Marital
वैवाहिक रिश्ते
वैश्यावृति
व्याकुल
व्यायाम
व्रण
शंखपुष्पी
शरपुंखा
शराब
शरीफा-सीताफल-Custard apple
शर्करा
शलगम-Beets
शल्यक्रिया
शहद
शहद-Honey
शारीरिक
शारीरिक रिश्ते
शिथिलता
शीघ्र पतन
शीघ्रपतन
शीस
शुक्राणु
शुक्राणु-Sperm
शुक्राणू
शुगर
शोक
शोथ
शोध
श्योनाक
श्रेष्ठतर
श्वास
श्वांस
श्वेत प्रदर
श्वेत प्रदर-Leucorrhea
श्वेतप्रदर
षड़यंत्र
संकुचन
संकोच
संक्रमण
संक्रमित
संक्रामक
संखाहुली
सगतरा
संतरा-Orange
संतान
संतुष्टि
सत्यानाशी
सदा सुहागन
सदाफूली
सदाबहार
सदाबहार चूर्ण
सनबर्न
सफ़ेद दाग
सफेद पानी
सफेद मूसली
सब्जि
सब्जी
संभालू
संभोग
समर्पण-Dedication
सरकार को सुझाव
सरफोंका
सरहटी
सर्दी
सर्दी-जुकाम
सर्पक्षी
सर्पविष
सलाद
संवाद
संवेदना
सहदेई
सहदेवी
सहानभूति
साइटिका
साइटिका-Sciatica
साइड इफेक्ट्स
साबूदाना-Sago
सायटिका
सिगरेट
सिजेरियन
सिर दर्द
सिर वेदना
सिरका
सिरदर्द
सिरोसिस
सी-सेक्शन
सीजर डिलेवरी
सुगर
सुदर्शन
सुहागा
सूखा रोग
सूजन
सेक्स
सेक्स उत्तेजक दवा
सेक्स परामर्श-Sex Counseling
सेक्स पार्टनर
सेक्स पावर
सेक्स समस्या
सेक्स हार्मोन
सेक्स-Sex
सेंधा नमक
सेब
सेमल-Bombax Ceiba
सेल्स
सोजन-सूजन
सोंठ
सोना पाठा
सोयाबीन
सोयाबीन (Soyabean)
सोयाबीन-Soyabean
सोराइसिस
सोरियासिस-Psoriasis
सौंठ
सौंदर्य
सौंदर्य-Beauty
सौन्दर्य
सौंफ
सौंफ की चाय
सौंफ-Fennel
स्किन
स्खलन
स्तन
स्तन वृद्धि
स्तनपान
स्तम्भन
स्त्री
स्त्रीत्व
स्त्रैण
स्पर्श
स्मृति-लोप
स्वप्न दोष
स्वप्नदोष
स्वप्नदोष-Night Fall
स्वभाव
स्वभावगत
स्वरभंग
स्वर्णक्षीरी
स्वस्थ
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य परामर्श
स्वास्थ्य रक्षक सखा
हजारदानी
हड़जोड़
हड्डी
हड्डी में दर्द
हड्डी संक्रमण
हड्डीतोड़ ज्वर
हड्डीतोड़ बुखार
हरड़
हरसिंगार
हरी दूब-CREEPING CYNODAN
हरीतकी
हर्टबर्न
हस्तमैथुन
हस्तमैथुन-Masturbation
हाई बीपी
हाथ-पैर नहीं कटवायें
हारसिंगार
हालात
हिचकी
हिचकी-Hiccup
हिमोग्लोबिन-hemoglobin
हिस्टीरिया
हिस्टीरिया-Hysteria
हींग
हीनतर
हुरहुर
हुलहुल
हृदय
हृदय-Heart
हेपेटाइटिस
हेपेटाईटिस
हेल्थ टिप्स-Health-Tips
हेल्थ बुलेटिन
हैजा
हैपीनेस-Happiness
हैल्थ
होम केयर टिप्स-Home Care Tips
होम्यापैथ
होम्योपैथ
होम्योपैथिक
होम्योपैथिक इलाज
होम्योपैथिक उपचार
होम्योपैथी
होम्योपैथी-Homeopathy




