- 1. शीघ्रपतन से कितने पुरुष परेशान रहते हैं?
- 2. शीघ्रपतन किसे कहते हैं?
- 3. वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
- 4. स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
- 5. सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?
- 6. शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध?
- 7. शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण!
- 8. शीघ्रपतन के कारण।
Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Health Care Friend and Marital Dispute Consultant
(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)
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शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु नुस्खे!
लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
'शीघ्रपतन' शीर्षक से 30 नवम्बर, 2017 को लिखे लेख में निम्न विषयों की जानकारी दी जा चुकी है:-
शीघ्रपतन नाशक घरेलु नुस्खों के बारे में बताने से पूर्व पाठकों के लिये उक्त लेख को पढना उचित रहेगा। अत: जिन पाठकों ने उक्त लेख नहीं पढा, वे हमारी वेबसाइट 'स्वास्थ्य रक्षक सखा' (www.healthcarefriend.in) पर जाकर या यहां क्लिक करके या निम्न लिंक पर जाकर इसे पढ सकते हैं। (http://www.healthcarefriend.in/2017/11/blog-post_30.html)
शीघ्रपतन नाशक घरेलु नुस्खे पढने से पहले यह जानना उचित होगा कि पूर्वोक्त 'शीघ्रपतन' शीर्षक से लिखित लेख में बताये गये शीघ्रपतन के 20 कारणों के अलावा पेट की गड़बड़ी भी 'शीघ्रपतन' एक बड़ा शारीरिक कारण होता है। अत: किसी योग्य चिकित्सक से 'शीघ्रपतन' का उपचार/परामर्श लेते समय अपने पेट की तकलीफों को कभी नहीं छुपायें। निम्न नुस्खों का इस्तेमाल करने से पहले अपने पेट की तकलीफों का उपचार अवश्य करवा लें। अन्यथा बताये गये परिणाम नहीं मिलेंगे।
शीघ्रपतन नाशक घरेलु नुस्खों की जानकारी प्रदान करने से पहले यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि इन नुस्खों में बतायी गयी औषधियों की सामग्री का उपयोग करने से पहले किसी अनुभवी चिकित्सक का परामर्श लेना जरूरी होगा। क्योंकि दवाई की मात्रा का सही-सही निर्धारण हर एक पुरुष की आयु, यौन क्षमता/समस्या, शारीरिक एवं मानसिक लक्षणों आदि के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकता है। इसके अलावा बताये गये नुस्खों में जिन आयुर्वेदिक औषधियों का उल्लेख किया गया है, यदि वे सभी शुद्ध, आॅर्गेनिक, ताजा, छाया शुष्क होंगी और जरूरत के अनुसार मात्रा में निधारित समय तक सेवन की जायेंगी तो ही वांछित परिणाम मिलेंगे।
शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु नुस्खे!
1. गिलोय+बड़ा गोखरू+आंवला पाउडर: गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला बराबर मात्रा में लेकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसका एक चम्मच चूर्ण प्रतिदिन मिश्री और घी के साथ सेवन करने से संभोग शक्ति तथा स्तम्भन शक्ति मजबूत होती है। इन तीनों औषधियों के अलावा कुछ अन्य औषधियों के मिश्रण सहित यौन शक्तिवर्धक एवं शीघ्रपतन नाशक यह पाउडर जरूरत के अनुसार हमारी ओर से रोगियों को दिया जाता है।
2. अलसी और वंशलोचन (अधिकतर पंसारी नकली वंशलोचन बेचते हैं, क्योंकि शुद्ध वंशलोचन बहुत मंहगा आता है) समान मात्रा में लेकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसे गिलोय के रस तथा शहद के साथ हफ्ते-दस दिन से एक माह तक सेवन करें। इससे वीर्य गाढ़ा होकर यौन शक्ति एवं स्तम्भन शक्ति बढती है।
3. शोधित कौंच (निर्धारित रीति से कौंच को दूध में शोधित करके ही उपयोग किया जाना चाहिये) के बीज, शतावरी, बड़ा गोखरू, तालमखाना, अतिबला और नागबला को एक साथ मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तम्भन शक्ति बढती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतलापन, यौन-दुर्बलता और युवकों में विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत ही लाभकारी रहता है। ज्यादातर लोग कौंच का इस्तेमाल लंबे समय तक सेक्स की पॉवर बरकरार रखने के लिए किया जाता है। स्थायी यौन क्षमता बढाने के लिये कौंच के शोधित कौंच बीज पाउडर (कोई साईड इफैक्ट नहीं) विदेशी वियाग्रा (अनेक साईड इफैट) से भी 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है, चाहे लिंग की कमजोरी/शिथिलता/ढीलापन, वीर्य पतला, नपुंसकता या शीघ्रपतन कुछ भी समस्या हो सभी का स्थायी इलाज है-शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच बीज का शोधित पाउडर। जयपुर स्थित हमारे निरोगधाम पर आॅर्गेनिक रीति से सफेद और काले कौंच की छोटे स्तर पर खेती की जा रही है। जिनका उपयोग रोगियों को दी जाने वाली दवाईयों में किया जा रहा है। व्यापार के लिये कौंच उपलब्ध नहीं है।
4. निर्धारित रीति से शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच के बीज के शोधित पाउडर के साथ शुद्ध सफेदमूसली और नागौरी अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इस पाउडर की 1 चम्मच मात्रा सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से पुरुषों की सभी प्रकार की यौन-समस्याओं को दूर किया जा सकता है। हर प्रकार की शारीरिक कमजोरी दूर करने की ताकत इन कौंच के बीजों में होती है। आकार के अनुसार कौंच के बीज दो प्रकार के होते हैं-छोटे और बड़े। छोटे कौंच स्त्रियों की बीमारियों में अधिक उपयोगी होते हैं। जो योनि दोष, ब्रण, कुष्ठ दूर करते है और रक्तविकार नाशक हैं।
5. देशी बबूल की छाया शुष्क कच्ची पत्तियां, छाया शुष्क कच्ची फलियां और शुद्ध गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर हवाबंद बोतल में रख लें। इस पाउडर को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है। शीघ्रपतन से मुक्ति मिलती है और स्तम्भन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह स्वप्नदोष में भी बहुत लाभकारी है।
6. यदि शुद्ध आॅर्गेनिक मेथी के कुछ दाने रोज सेवन किये जाएं तो पुरुषों की मानसिक यौन सक्रियता बढ़ती है। इसके सेवन से पुरुषों में होने वाली लिंग उत्थान की समस्या हल हो सकती है। मेथी टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में बढोतरी करके अन्य यौन समस्याओं को भी ठीक करने में मदद करती है। रात को सोते समय आधा चम्मच पिसा हुआ शुद्ध मेथी दाना पाउडर तथा आधा चम्मच धनिया पाउडर मिलाकर गर्म दूध के साथ नियमित रूप से एक महीने तक सेवन करने से पुरुषों की यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। ब्रिसबेन स्थित आणविक चिकित्सा केंद्र के अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि भारत में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली मेथी पुरुषों की कामेच्छाओं को काफी अच्छे स्तर तक बढ़ाने में सक्षम है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है।
7. जायफल का पाउडर एक चौथाई चम्मच, सुबह-शाम शहद के साथ खायें और इसका तेल सरसों के तेल में मिलाकर शिश्न (लिंग) पर मलें। इससे नपुंसकता और शीघ्रपतन का रोग समाप्त हो जाता है।
नोट: याद रहे वर्तमान में फसल में बढोतरी के मकसद से अधिकतर किसान खाद, खरपतवार नाशक दवाई, कीटनाशक जहर इत्यादि का जमकर उपयोग करते हैं। जिसके चलते फसलों में रोगनाशक प्राकृतिक औषधीय तत्व गड़बड़ा जाते हैं या कम या नष्ट हो जाते हैं। जिसका एक मात्र समाधान है-आॅर्गेनिक खेती जो तुलनात्मक रूप से बहुत मंहगी पड़ती है और उत्पादन कम होता है। लेकिन मानवता को रोगमुक्त करना है तो आॅर्गेनिक खेती समय की मांग है। इस दिशा में हमारी ओर से बहुत छोटे स्तर पर प्रयास जारी हैं। ऐसी स्थिति में होम्योपैथिक दवाईयों का सेवन करना अधिक सुरक्षित और परिणामदायी सिद्ध होता है। इस बारे में अगले लेख में जानकारी दी जायेगी।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 07 दिसम्बर, 2017, 08.14AM
हस्तमैथुन की लत (Masturbation Addiction) छुड़ाने का 100% उपचार
समस्या: सर मुझे हस्तमैथुन करने की ऐसी लत लग चुकी है कि मैं लागातार प्रयास के बाद भी इसे छोड़ नहीं पा रहा हूं। अनेक ऐलोपैथ डॉक्टर कहते हैं कि हस्तमैथुन करने से कोई नुकसान नहीं होता है। इसका कोई इलाज नहीं है और विवाह ही इसका समाधान है। जबकि सर हस्तमैथुन की लत के कारण मैं मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होता जा रहा हूं। इस कारण अपराधबोध का शिकार भी हो चुका हूं? सर मुझे उचित परामर्श एवं समाधान बताने का कष्ट करें।-मनीष (बदला हुआ नाम), रायपुर, छत्तीसगढ।
समाधान: मनीष जी, आपकी बात सही है। हस्तमैथुन की लत के आदी हजारों युवक-युवतियां आप ही की जैसी स्थिति में जी रहे हैं। यदि आप किसी ऐलोपैथ डॉक्टर से सम्पर्क करेंगे तो निश्चय ही उनकी ओर से हस्तमैथुन का कोई उपचार या समाधान बताने के बजाय, आपको निम्न सलाह दी जायेंगी:-
(1)—हस्तमैथुन करना कोई बीमारी नहीं है।
(2)—हस्तमैथुन करने से कोई नुकसान नहीं होता है।
(3)—हस्तमैथुन की लत छोड़ने के लिये जल्दी शादी करें।
डॉक्टर्स की उक्त सलाह अपनी जगह पर हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मुझ से सम्पर्क करने वाले हस्तमैथुन की लत के आदी युवक अपने आप को शारीरिक कमजोरी, यौन उत्तेजना में कमी, आत्मविश्वास में कमी, अनिद्रा, कमजोर पाचन क्रिया, भूख की कमी, लैंगिक शिथिलता, स्वत: वीर्यपात और शीघ्रपतन के शिकार बताते रहते हैं।
अनुभव यही बतलाता है कि हस्तमैथुन के साईड इफैक्ट भयावह हैं। जहां तक उचित परामर्श और उपचार का सवाल है तो:-
उचित परामर्थ: अपने विश्वसनीय डॉक्टर को बेहिचक अपनी सभी तकलीफों के बारे में विस्तार से सही, सत्य और पूर्ण जानकारी से अवगत करावें। जिससे आपका समुचित परामर्श दिया जा सके।
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3. आपका परिचय जानने के बाद आपकी स्वास्थ्य रक्षा हेतु
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लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
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उपचार: होम्योपैथी और आयुर्वेदिक औषधियों से हस्तमैथुन की लत और हस्तमैथुन के सभी तरह के साईड इफैक्ट्स का उपचार सम्भव है। मैं बताना चाहूंगा कि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि होम्योपैथी में हस्तमैथुन की लत का 100 फीसदी उपचार सम्भव है। लेकिन हस्तमैथुन के कारण जन्मी अन्य सभी परेशानियों का भी उपचार भी उतना ही जरूरी है, जितना कि हस्तमैथुन का जरूरी है। लेकिन जब तक रोगी का पाचनतंत्र, लीवर, तिल्ली, गुर्दा और मानसिक संतुलन सही से उपचार नहीं होगा, हस्तमैथुन का कोई भी इलाज सफल नहीं हो सकता।
*-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619, 01.10.2017*
*-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619, 01.10.2017*
निरोगधाम पर 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच
हमारा मकसद है रोगियों का आरोग्य अर्थात रोगमुक्ति। यह तब ही सम्भव है, जबकि उनको सही, शुद्ध और ताजा दवाईयां उपलब्ध हों। वर्तमान में बड़े-बड़े नाम वाले बाबाओं तक की औषधियां निर्धारित मानदण्डों पर खरी नहीं उतर रही हैं। ऐसे में रोगी करें भी तो करें क्या?
ऐसे में हम कम से कम हमारे सम्पर्क में आने वाले रोगियों को तो 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक औषधियां उपलब्ध करवाने की कौशिश कर रहे हैं। इस दिशा में हमने छोटी सी शुरूआत की है। हमने हमारे फॉर्म पर कुछ अति महत्वपूर्ण औषधियों की खेती शुरू की है। जिनमें यौन रोगों के निवारण तथा यौन क्षमता बढाने के लिये सुप्रषिद्ध——कौंच——नामक औषधि भी शामिल है। पिछले वर्ष भी हमने 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच की खेती की थी। कौंच के पाउडर से अकल्पनीय परिणाम सामने आये हैं। यद्यपि हम रोगियों की जरूरत पूरी करने में असफल रहे। इस कारण इस बार हमने पिछले साल की तुलना में 100 गुणा अधिक कौंच के पौधे लगाये हैं। कौंच के पौधों का रोपण वर्षाकाल के शुरू होने से बहुत पहले ही कर दिया था। अत: अब बेल छोड़ रहे हैं। जिनके ओरिजनल चित्र प्रस्तुत हैं।
कौंच सहित महत्वपूर्ण औषधियों की पैदावार करना इस कारण भी जरूरी हो गया, क्योंकि बाजार में सड़ी—गली और अनुपयोगी औषधियां मिलती हैं। जिनसे सही परिणाम नहीं मिलने पर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का विश्वास टूटता है और उपचार करने वाला चिकित्सक बदनाम होते हैं। साथ ही रोगी के धन का भी अपव्यय होता है। रोगी का स्वास्थ्य खराब हो जाता है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिये हमारा लेख—''कौंच : सड़ी-गली-पुरानी अनुपयोगी आयुर्वेदिक औषधियां!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश''' पढा जा सकता है।
यहां पर हमारे फॉर्म पर रोपे गये कौंच की बेलों के नवीनतम 11 जनू, 2017 के चित्र प्रस्तुत हैं।
कौंच के पौधे के सभी भागों में औषधीय गुण होते हैं। इसकी पत्तियों, बीजों व शाखाओं का इस्तेमाल दवा के तौर पर किया जाता है। ज्यादातर कौंच का इस्तेमाल लंबे समय तक यौन—शक्ति बरकरार रखने के लिए किया जता है। आयुर्वेदाचार्यों का मत है कि कौंच के बीज अमेरिका की प्रसिद्ध सेक्स शक्ति वर्धक दवा वियग्रा से भी 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होते है। मेरा अपना अनुभव है कि 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच को सही तरीके से शोधन करके अन्य 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक दवाईयों के साथ सेवन करने से निम्न तकलीफों में अकल्पनीय परिणाम मिलते हैं:
1 लिंग की कमजोरी।
लिंग की नसों की कमजोरी
2 वीर्य का पतलापन।
3 नपुंसकता/नामर्दी।
4 शीघ्रपतन/शीघ्रस्खलन।
5 उत्तेजना में कमी।
6 बदन दर्द/गठिया दर्द।
7 पेट/गैस की तकलीफे।
8 मधुमेह/डायबिटीज।
9 पुराना बुखार।
10 बदन में सूजन।
12 श्वेत प्रदर/ल्यूकोरिया।
13 मासिकधर्म की तकलीफें।
14 स्तन वृद्धि।
15 खिलाडि़यों की मांसपेशियों में खिंचाव।
16 शारीरिक बलवृद्धि।
17 वजन बढ़ाना।
18 पुरानी खांसी।
19 उदर कृमि नष्ट।
20 शुक्राणुओं की कमी।
इत्यादि।
नोट: हमें खेद है कि हमारे पास उपलब्ध सौ फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक औषधियों की उपलब्धता में कमी के कारण हम, हम से सम्पर्क करने वाले सभी आयुर्वेद प्रेक्टिशनर्स को औषधियां उपलब्ध नहीं करवा पाते हैं। क्योंकि हमारी पहली प्राथमिकता हम से सम्पर्क करने वाले रोगियों का उपचार करना है।
नोट: हमें खेद है कि हमारे पास उपलब्ध सौ फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक औषधियों की उपलब्धता में कमी के कारण हम, हम से सम्पर्क करने वाले सभी आयुर्वेद प्रेक्टिशनर्स को औषधियां उपलब्ध नहीं करवा पाते हैं। क्योंकि हमारी पहली प्राथमिकता हम से सम्पर्क करने वाले रोगियों का उपचार करना है।
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परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच।
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स्त्रियों की संभोग में रुचियां
स्त्रियों में कामुकता के बहुत से केंद्र होते हैं लेकिन उन केंद्रों के बारे में जानने से पहले यह जानना जरुरी है कि उनमें काम उत्पत्ति कब होती है।
स्त्रियों की संभोग में रुचियां लड़कियों का जब मासिकधर्म शुरू होता है तो उसके बाद उनके शरीर में खास तरह के हार्मोन्स का विकास होना शुरू होता है और इसी समय से लड़कियां काम भावना की ओर भागने लगती हैं। इसी समय लड़कियों के शारीरिक अंगों का भी विकास होने लगता है। जैसे उसके स्तन और नितंबों का भारी होना, जननांगों पर बाल उगना़, आवाज का बदल जाना आदि। माना जाता है कि जिन लड़कियों का मासिकधर्म जल्दी शुरु होता है उनके अंदर संभोग करने की इच्छा भी जल्दी पैदा होती है लेकिन यह बात पूरी तरह से सही नहीं है क्योंकि संभोग करने की इच्छा का संबंध शारीरिक विकास की अपेक्षा सामाजिक या अनुवांशिक कारणों से ज्यादा होता है।
दाम्पत्य सुख को समझने और भोगने के इच्छुक हर एक स्त्री और पुरुष को पढने योग्य अति महत्वपूर्ण और उपयोगी जानकारी प्रदान करने वाला एक पढने योग्य आलेख!-"अतृप्त दाम्पत्य कारण एवं निवारण!"
अक्सर कुछ लड़कियां मासिकधर्म के दौरान संभोग के प्रति उत्तेजना महसूस करती हैं लेकिन संभोग करने से डरती हैं लेकिन यह बात सही नहीं है। अगर वे इस दौरान संभोग के प्रति उत्तेजना महसूस करती हैं तो उसे संभोग करने से डरना नहीं चाहिए वह अपने पति को संभोग के लिए तैयार कर सकती हैं। इस दौरान स्त्री को गर्भ ठहरने का डर भी नहीं रहता है और उसकी योनि में भी वहुत ज्यादा नमी रहती है। शुरुआत में तो स्त्रियां इस दौरान संभोग करते समय योनि में से ज्यादा खून आने की शिकायत करती हैं लेकिन धीरे-धीरे यह खून आना कम हो जाता है क्योंकि कु्छ समय में गर्भाशय का संकुचन हो जाता है। कुछ स्त्रियों में मासिकधर्म के समय दिमागी तनाव जैसे लक्षण पैदा हो जाते हैं जिसका असर उनकी सेक्स करने की इच्छा पर भी पड़ता है। उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है और इसी के साथ ही जी मिचलाना, कमर में दर्द आदि लक्षण प्रकट होते हैं।
दाम्पत्य सुख को समझने और भोगने के इच्छुक हर एक स्त्री और पुरुष को पढने योग्य अति महत्वपूर्ण और उपयोगी जानकारी प्रदान करने वाला एक पढने योग्य आलेख!-"अतृप्त दाम्पत्य कारण एवं निवारण!"
अक्सर कुछ लड़कियां मासिकधर्म के दौरान संभोग के प्रति उत्तेजना महसूस करती हैं लेकिन संभोग करने से डरती हैं लेकिन यह बात सही नहीं है। अगर वे इस दौरान संभोग के प्रति उत्तेजना महसूस करती हैं तो उसे संभोग करने से डरना नहीं चाहिए वह अपने पति को संभोग के लिए तैयार कर सकती हैं। इस दौरान स्त्री को गर्भ ठहरने का डर भी नहीं रहता है और उसकी योनि में भी वहुत ज्यादा नमी रहती है। शुरुआत में तो स्त्रियां इस दौरान संभोग करते समय योनि में से ज्यादा खून आने की शिकायत करती हैं लेकिन धीरे-धीरे यह खून आना कम हो जाता है क्योंकि कु्छ समय में गर्भाशय का संकुचन हो जाता है। कुछ स्त्रियों में मासिकधर्म के समय दिमागी तनाव जैसे लक्षण पैदा हो जाते हैं जिसका असर उनकी सेक्स करने की इच्छा पर भी पड़ता है। उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है और इसी के साथ ही जी मिचलाना, कमर में दर्द आदि लक्षण प्रकट होते हैं।
बहुत सी स्त्रियां गर्भधारण करने के बाद सेक्स करने के बारे में इच्छा तो रखती है लेकिन डरती है कि कहीं इसका उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर न पड़े। ऐसी स्त्रियां गर्भावस्था के दौरान संभोगक्रिया कर सकती हैं लेकिन इसके लिए उन्हें अपने आपको शरीर और दिमाग से पूरी तरह स्वस्थ महसूस करना होता है और कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। अगर किसी स्त्री को पहले गर्भावस्था के समय 3 महीने के दौरान कभी गर्भपात हुआ हो तो दुबारा गर्भ ठहरने के बाद शुरुआती 3 महीनों तक संभोगक्रिया से दूर रहना चाहिए।
अगर स्त्री को पहले कई बार गर्भपात हुआ हो तो गर्भावस्था के दौरान उसे संभोग से दूर रहना चाहिए क्योंकि ऐसी स्त्री के गर्भाशय का मुंह गर्भ को स्थापित रखने में कमजोर होता है। स्वस्थ स्त्री अगर शुरुआती 3 महीने के बाद सातवें महीने तक संभोग करे तो कोई परेशानी की बात नहीं है। लेकिन संभोगक्रिया के लिए ऐसे आसनों का प्रयोग करना चाहिए जिनका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर न पड़े। इन आसनों में संभोगक्रिया के दौरान स्त्री को पुरुष के ऊपर होकर या बगल में लेटकर संभोगक्रिया करनी चाहिए।
यह भी पढें: प्रसव के बाद यौनांगों में शिथिलता और मूत्र असंयमितता (खांसते, छींकते और हसंते हुए पेशाब निकल जाना और यौनानंद में कमी)
यह भी पढें: प्रसव के बाद यौनांगों में शिथिलता और मूत्र असंयमितता (खांसते, छींकते और हसंते हुए पेशाब निकल जाना और यौनानंद में कमी)
बहुत सी स्त्रियों में यौन उत्तेजना इतनी तेज होती है कि उन्हें संभोग करने से पहले प्राकक्रीड़ा द्वारा उत्तेजित करने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसी स्त्रियां पुरुष के द्वारा छूते ही उत्तेजित हो जाती हैं और संभोगक्रिया के लिए तैयार हो जाती हैं। पर दूसरी किस्म की स्त्रियों को कलात्मक प्राकक्रीड़ा द्वारा उत्तेजित करना जरूरी हो जाता है।
जब तक ऐसी स्त्रियों के जननांगों में यौन लहरे तरंगित नहीं होती तब तक उनका पति उनके साथ सफल सेक्स नहीं कर सकता। जब तक स्त्री में यौन उत्तेजना नहीं होगी तब तक उसकी योनि द्रवित नहीं हो पाएगी और उसमें लिंग भी आसानी से प्रवेश कर पाएगा। अगर किसी तरह से लिंग योनि में प्रवेश कर भी जाता है तो उससे तेजी से घर्षण नहीं किया जाएगा। इसलिए हर पति को अपनी पत्नी के काम केंद्रों की जानकारी होनी चाहिए।
वैसे तो स्त्री का पूरा शरीर ही यौन उत्तेजना के मामले में संवेदनशील होता है लेकिन उसके होंठ, जीभ, स्तन, नाभि का हिस्सा, नितंब, जांघ के अंदर का हिस्सा, योनि और भगनासा बहुत उत्तेजक अंग होते हैं। अगर स्त्री के इन अंगों को सहलाया जाए तो स्त्री उत्तेजित होकर तुरंत संभोग के लिए तैयार हो जाती है।
होंठ और जीभ-होंठ और जीभ बहुत ही कामोत्तेजक होते हैं। पति जब अपनी पत्नी का चुंबन लेते समय उसके नीचे वाले होंठ को अपने होंठों के बीच में लेकर चूसता है, उसकी जीभ को अपनी जीभ से रगड़ता है, मुंह में मुंह लेकर चूसता है तो स्त्री के होंठ कामोत्तेजना से गुलाबी हो जाते हैं और उसकी आंखों में भी नशा छाने लगता है। अक्सर पत्नी अपने पति के द्वारा होंठों को चूमने या चूसने से तुरंत ही कामोत्तेजित हो जाती है।
स्तन-स्त्री के स्तन भी बहुत कामोत्तेजक होते हैं। अक्सर पुरुष स्त्री के स्तनों को देखकर ही उत्तेजित हो जाता है लेकिन जब पुरुष भारी और आकर्षक स्तनों को धीरे-धीरे सहलाता और मसलता है, उसके स्तनों के निप्पलों को उंगलियों से धीरे-धीरे दबाता है तो स्त्री उसी समय कामोत्तेजित हो जाती है बेकाबू हो जाती है। अगर पुरुष स्तनों के निप्पलों में से एक को चूसते हुए दूसरे को सहलाता है तो स्त्री कामोत्तेजित होकर सिसकियां लेनी लगती हैं। लेकिन इस सबको अगर एक हद तक ही किया जाए तो ठीक है वरना पुरुष को अपने आपको संभालना मुश्किल हो जाता है और वह तुरंत ही स्खलित हो जाता है। बहुत से पुरुष होते हैं जो स्त्री के स्तनों के साथ खेलते-खेलते ही स्खलित हो जाते हैं।
नाभि-स्त्री के नाभि वाले भाग को अगर हल्के-हल्के से सहलाया या गुदगुदाया जाए तो स्त्री की कामोत्तेजना बढ़ने लगती है। अगर पुरुष स्त्री की नाभि को अपनी जीभ से चूमता या सहलाता है तो स्त्री में कामोत्तेजना चरम पर पहुंचने लगती है। लेकिन स्त्री का नाभि वाला भाग उसके होंठों, जीभ और स्तनों से कम ही उत्तेजक होता है।
नितंब-बहुत सी स्त्रियों के नितंब काफी आकर्षक और कामोत्तेजक होते हैं। बाहर के देशों में उन स्त्रियों को बहुत सुंदर और मादक माना जाता है जिसका सीना और नितंब एक ही साइज के होते हैं जैसे अगर किसी स्त्री का सीना 34 है तो उसके नितंबों के उभारों का नाप भी 34 ही होना चाहिए। सौंदर्य प्रतियोगिताओं में अक्सर वही स्त्री जीतती है जिसके सीने, कमर और नितंब का नाप 34-24-36 होता है। उभरे हुए नितंब पुरुष के लिए स्तनों के समान ही कामोत्तेजक होते हैं। नितंबों को सहलाने और मसलने से पुरुष की नस-नस में कामोत्तेजना पैदा होने लगती है और स्त्री भी कामोत्तेजित होकर पति से लिपटने लगती है।
जांघ-स्त्री के जांघों के भीतरी भाग को धीरे-धीरे सहलाने से भी स्त्री कामोत्तेजित हो जाती है। इन अंगों का मादक स्पर्श पुरुष को भी कामोत्तेजित कर देता है। अक्सर स्त्रियां इन अंगों को सहलाए जाने से प्रसन्न और गदगद हो जाती हैं और संभोगक्रिया के लिए तैयार हो जाती हैं।
भगनासा-स्त्री के शरीर का सबसे कामोत्तेजक अंग उसका भगनासा होता है। यह छोटे भगोष्ठों के बीच उस स्थान पर स्थित होता है जहां से छोटे भगोष्ठों का उभार शुरू होता है। इसके थोड़ा सा नीचे मूत्रद्वार होता है जिससे स्त्री मूत्र त्याग करती है। भगनासा छोटे दाने के आकार में उभरी हुई होती है लेकिन असल में ये बहुत ज्यादा बारीक कामोत्तेजक तंत्रिकाओं का समूह होती है। यह लिंग का ही बहुत छोटा प्रतिरूप होता है। इसमें भी मुंड होता है जो साधारण रूप में मुंडचर्म से ढका रहता है लेकिन उत्तेजित होने पर मुंड अनावृत होकर तन जाता है। इसका आकार भी सामान्य से दुगना हो जाता है। पुरुष जब इस भगनासा को हल्के से सहलाता है या कलात्मक ढंग से छेड़ता है तो स्त्री के शरीर में काम उत्तेजना बहुत ही तेज हो जाती है। अगर यह क्रिया हद से बाहर हो जाती है तो तेज काम उत्तेजना के कारण पुरुष और स्त्री दोनों ही स्खलित हो जाते हैं और संभोगक्रिया के असली आनंद से वंचित रह जाते हैं। इसलिए पुरुष को इस मामले में बहुत ही सावधान रहने की जरूरत होती है। थोड़ी सी सावधानी बरतने से ही पुरुष स्त्री को इतना उत्तेजित कर देता है कि स्त्री की योनि में पुरुष के लिंग के प्रवेश करने तथा हल्के से घर्षण से ही स्त्री तेज स्खलन को महसूस करके बहुत ज्यादा आनंद और गुदगुदी से कुछ पलों के लिए आनंद के सागर में खो जाती है।
योनि-भगनासा के अलावा स्त्रियों का योनि मार्ग भी काफी संवेदनशील कामोत्तेजक अंग होता है। योनि के मुख्य द्वार पर छोटे भगोष्ठ स्थित होते हैं जो बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं। छोटे भगोष्ठों से सलंग्न योनि छल्ला होता है जो भगनासा की तरह ही सूक्ष्म तंत्रिकाओं से घिरा होता है। यह अंग स्वैच्छिक पेशियों से जुड़ा रहता है और स्त्री अपनी इच्छा के अनुसार इसमें संकोच उत्पन्न कर सकती है। संभोगक्रिया के समय जब लिंग तेजी से घर्षण करता है तो उस समय योनि मुख के कलात्मक ढंग से फैलने और सिकुड़ने से पुरुष बहुत ज्यादा आनंद महसूस करता है। उत्तेजना उसे और मदहोश कर देती है और लिंग के द्वारा योनि में घर्षण और तेज होता जाता है। बहुत सी कामुक स्त्रियों में योनि मुख का आंकुचन (योनि मुख का अपने आप सिकुड़ना और फैलना) कामोत्तेजना के समय खुद ही होने लगता है और स्त्री आसानी से उसके सिकुड़ने और फैलने की गति को नियंत्रित नहीं कर सकती है। इस प्रकार की योनि से पुरुष को जो यौन सुख मिलता है, उसको बताया नहीं जा सकता है। स्त्री के इस अंग को उंगली से धीरे-धीरे सहलाने से या जीभ के द्वारा चाटने से स्त्री बहुत ज्यादा उत्तेजित होकर सिसकियां भरने लगती है। ऐसी स्थिति पैदा होने पर अगर पुरुष अपने लिंग को स्त्री की योनि में प्रवेश कराके घर्षण शुरू कर दें तो कुछ ही समय में स्त्री स्खलित होकर संतुष्ट हो जाती है। स्त्री जब बहुत ज्यादा उत्तेजित हो जाती है तब उसके भगोष्ठ फूलकर गुलाबी रंग के हो जाते हैं।
किसी भी स्त्री को उत्तेजित करने में लगभग 15 से 30 मिनट का समय लग जाता है लेकिन पति में अगर सब्र या कामकला की कमी हो तो वह पत्नी को उत्तेजित किये बिना ही एकतरफा संभोगक्रिया में लग जाता है और तुरंत ही स्खलित होकर एक तरफ हो जाता है। इस सब में उसे इस बात की कोई चिंता नहीं रह जाती कि जिस पत्नी ने उसे अलौकिक आनंद प्रदान किया है उसे खुद भी पूरी तरह संतुष्टि मिली है या नहीं।
कई स्त्रियां होती हैं जो संभोगक्रिया के समय चुंबन से ऩफरत करती हैं और पुरुष के द्वारा अपने शरीर पर नाखून गाड़ने से या दांतों से काटने से भी बुरा मानती हैं। ब्रह्मलोक और अवंती की स्त्रियां भी इन्हें पसंद नहीं करती लेकिन संभोगक्रिया के अलग-अलग आसनों में ज्यादा रुचि लेती हैं। इनको युक्तसंगम या बैठकर संभोग करने में आनंद मिलता है। यह 4 प्रकार से किया जाता है- जानूपू्र्वक, हरिविक्रम, द्वितल और अवलंबित।
आमीर प्रदेश और मालवा की स्त्रियों को मजबूत आलिंगन, चुंबन और पीड़ाक जैसी संभोगक्रिया सबसे प्रिय होती है। इन्हें पुरुष के द्वारा अपने शरीर पर नाखून गड़ाना और दांतों से काटना नापसंद होता है। संभोगक्रिया में इन्हें जितना ज्यादा दर्द होता है उतनी ही अधिक इनकी यौन उत्तेजना बढ़ती है।
ईरावती, सिंधु, शतद्रु, चंद्रभागा, विपात और वितस्ता नदियों के पास रहने वाली स्त्रियों के शरीर की उत्तेजना बढ़ाने वाले अंगों पर पुरुष द्वारा सहलाने से काम उत्तेजना तेज होती है।
गुर्जरी स्त्रियों के सिर के बाल घने, दुबला-पतला शरीर, स्तन भरे हुए और आंखे नशीली होती हैं। यह स्त्रियां सरल संभोग करना पसंद करती हैं।
लाट प्रदेश की स्त्रियां बहुत उत्तेजक होती हैं। इनके शरीर के अंग कोमल और नाजुक होते हैं। ऐसी स्त्रियों को लगातार चलने वाली संभोगक्रिया पसंद होती है। अपने पुरुष साथी से
लिपटना इन्हें बहुत पसंद होता है। ये तेज कटिसंचालन करती हैं और काफी देर तक योनिमंथन करने से इन्हें आनंद मिलता है। यह स्त्रियां पुरुष द्वारा अपने शरीर पर नाखून गड़ाना और दांतों से काटना भी पसंद करती हैं।
आंध्रप्रदेश की स्त्रियां कोमल अंगों वाली होती हैं और इनके अंदर यौन उत्तेजना बहुत ज्यादा होती है। यह स्त्रियां संभोग के लिए पुरुष को खुद ही उत्तेजित करती हैं और बड़वा आसन में संभोग करना पसंद करती हैं।
उत्कल और कलिंग प्रदेश की स्त्रियों को काम उत्तेजना के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं होता। यह स्त्रियां पुरुष द्वारा अपने शरीर पर नाखून गड़ाना और दांतों से काटना पसंद करती हैं। उत्कल स्त्रियां बिल्कुल शर्म न करने वाली, हमेशा प्यार करने वाली और लंबे समय तक संभोग की इच्छा रखने वाली होती हैं।
बंगाल और गौड़ प्रदेशों की स्त्रियां कोमल अंगों वाली होती हैं। इन्हें हर समय आलिंगन और चुंबन में रुचि होती है। ऐसी स्त्रियों की काम उत्तेजना को जगाने में बहुत देर लगती है लेकिन एक बार जब इनकी काम उत्तेजना जगती है तो ये अपने आपको पूरी तरह से पुरुष के हवाले कर देती हैं। इनके नितंब भारी होते हैं इसलिए इन्हें नितंबनी भी कहा जाता है।
कामरूप की स्त्रियां मीठी बोली वाली होती हैं। इनके शरीर के अंग कोमल और आकर्षक होते हैं। पुरुष द्वारा सिर्फ इनका आलिंगन करने से ही इन्हें पूरी तरह संभोग संतुष्टि मिल जाती है। एकबार अगर यह स्त्रियां उत्तेजित हो जाती हैं तो उसके बाद यह पूरी तरह से संभोगक्रिया में डूबी रहती हैं।
आदिवासी स्त्रियां अपने शरीर के विकारों को दूसरों से छुपाती हैं लेकिन दूसरों में अगर कोई दोष इन्हें दिखाई देता है तो यह उन्हें ताना मारने से नहीं चूकती हैं। इन्हें संभोग की सभी क्रीड़ाएं पसंद होती हैं और यह सामान्य संभोग में ही यह संतुष्ट हो जाती हैं।
महाराष्ट्र की स्त्रियां 64 कलाओं की ज्ञाता होती हैं। संभोगक्रिया के समय वह किसी प्रकार का संकोच नहीं करती और अश्लील बातें बोलती हैं।
पटना की स्त्रियां भी अश्लील बातें करती हैं लेकिन सिर्फ घर के अंदर, बाहर नहीं।
कर्नाटक की लड़कियों की योनि से पानी ज्यादा मात्रा में निकलता है। यह स्त्रियां आलिंगन. चुंबन और स्तनों को दबवाने के साथ ही योनि में उंगलियों से घर्षण करने से उत्तेजित होती है। संभोगक्रिया के समय यह स्त्रियां जल्दी संतुष्ट हो जाती हैं।
लड़कियों का जब मासिकधर्म शुरू होता है तो उसके बाद उनके शरीर में खास तरह के हार्मोन्स का विकास होना शुरू होता है और इसी समय से लड़कियां काम भावना की ओर भागने लगती हैं।
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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ताकत
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निम्बू
नियासिन
निराश
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निर्गुन्डी
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पवाँर
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पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
प्लूरिसी-Pleurisy
प्लेटलेट्स
फंगल
फटन
फफूंद-Fungi
फरास
फल
फाइबर
फिटकरी
फुंसी-Pimples
फूलगोभी-CAULIFLOWER
फेंफड़े
फेरम फॉस
फैट
फैटी लीवर
फोटोफोबिया
फोड़ा
फोड़े-Boils
फोरप्ले
फोलिक एसिड
फ्लू
फ्लू-Flu
फ्लेक्स सीड्स
बकायन
बकुल
बड़ी हरड़
बथुआ
बथुआ पाउडर
बथुआ-White Goose Foot
बदबू
बंध्यापन
बबूल-ACACIA
बरसाती बीमारियाँ
बरसाती बीमारियां
बलगम
बलवृद्धि
बला
बलात्कार
बवासीर
बहरापन
बहुनिया
बहुमूत्रता-
बांझपन
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बादाम.
बाल
बाल झड़ना
बाल झडऩा-Hair Falling
बिना सिजेरियन मां बनें
बिवाई
बीजबंद
बीड़ी
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बीमारी
बील
बुखार
बूंद-बूंद पेशाब
बेल
बेली
बैक्टीरिया
बॉयोकैमी
ब्रह्मदण्डी
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शीघ्रपतन
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