Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Health Care Friend and Marital Dispute Consultant
(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)
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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।
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नींबू प्रजाति के फल वसा को जला देते हैं, दिल के रोगों पर लगाम कसते हैं और वजन रोकते हैं।
अब तक यदि आप नींबू और अन्य 'सिट्रस' फलों के सेवन से दूरी बनाए हुए थे, तो यह खबर आपको निश्चित ही उनके पास ले आएगी। पिछले दिनों हुए एक शोध से जाहिर हुआ है कि नींबू तथा उसकी ही प्रजाति के फल शरीर में बनी अतिरिक्त वसा को जला देते हैं, दिल के रोगों पर लगाम कस सकते हैं और वजन वृद्धि को रोकते हैं।
यही नहीं, यह इंसुलिन की तरह मधुमेह टाइप-2 को रोकने में भी सहायक हैं। शोध के मुताबिक एक फ्लेवोनोइड 'नैरिनजेनिन' जो कि नींबू प्रजाति के पौधों में पाया जाता है, यह मानव शरीर में 'एंटीऑक्सीडेंट्स' की क्रियाशीलता को बढ़ा देता है जो शरीर में बनी अतिरिक्त वसा को संग्रहीत करने के बजाय उसे खर्च कर देते हैं।
आमतौर पर पौधों में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉइड मानव शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स की गतिविधियों को बढ़ाने में सहायक होते हैं। तो इसलिए अब जब भी खट्टा नींबूड़ा थाली में आए, उसे ना मत कहिएगा।
परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
मोटापा घटाने के 20 रहस्य
मोटापे से दुनिया की आज आधी आबादी परेशान है। मोटापा बढने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें से प्रमुख है-अधिक चर्बीयुक्त आहार का सेवन करना, कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन करना, असंतुलित व्यवहार और मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापा का कारण बनता है, शारीरिक क्रियाओं के सही ढंग से नहीं होने पर भी शरीर में चर्बी जमा होने लगती है, बाल्यावस्था और युवावस्था के समय का मोटापा वयस्क होने पर भी रह सकता है और हाइपोथाइरॉयडिज़्म आदि जैसे कारण मेन हैं। हम सभी मानते हैं कि यदि आप मोटे हैं तो कम खाइये और ज्यादा से ज्यादा व्यायाम कीजिये। पर ऐसा नहीं है, यदि ऐसा होता तो काफी लोग अपना वजन आसानी से कम कर चुके होते। अगर आप भी मोटापे का शिकार हैं और आपका वजन व्यायाम करने के बाद भी कम नहीं हो रहा है तो कहीं ना कहीं कुछ कमी रह गई है। यानी इसका यह मतलब नहीं है कि आप जरुरत से कम खाने लगे या फिर बहुत ज्यादा व्यायाम करने लगें। इसका यह मतलब होता है कि आपको अपनी लाइफस्टाइल में कुछ मामूली और जरुरी परिवर्तन करने होंगे। आज हम आपको कुछ ऐसे ही आसान तरीके बताएंगे, जिन्हें अपना कर आप मोटापे से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं। पर आप को ख्याल रखना होगा कि अगर आपको मोटापा घटाना है तो इसे नियमित करना होगा नहीं तो आपको केवल निराशा के और कुछ हांसिल नहीं होगा।
एक प्लान बनाइये: यदि आप ने मोटापा घटाने का प्लान नहीं बनाया तो समझिये कि आप कभी पतले नहीं हो सकते। एक असली गोल बनाइये कि आप कितने दिनों में कितना वजन कम कर सकते हैं। एक बात का ख्याल रखियेगा कि खुद को परेशानी में ना डालियेगा।
खूब सोइये: नींद मोटापे से लड़ती है। रिसर्च के मुताबिक 7 से 8 घंटो की कम नींद भूख पैदा करती है, जिससे आप जरुरत से ज्यादा खा लेते हैं और मोटापा बढ जाता है।
ना खाइये स्नैक्स: कई लोग खाना भी 4 टाइम खाएंगे और स्नैक्स भी। यदि आपको मिनट-मिनट पर स्नैक्स खाने की आदत है तो खाना थोड़ा कम खाइये, क्योंकि इससे शरीर में कैलोरीज बढ जाती है।
जानिये कि आप कितना खाते हैं? कई लोग बस दिनभर खाते रहते हैं और उन्हें पता ही नहीं होता कि वे कितना खाना खा जाते हैं। आपने दिनभर में कितना खाया उसका हिसाब रखिये।
खूब चलिये: कार और बाइक होने के कारण बहुत से लोग पैर का उपयोग नहीं करते। वजन कम करने के लिये सीढि़यों का प्रयोग करें। इसके अलावा अपना मन पसंद स्पोर्ट्स खेलें।
तरल कैलोरी हटाइये: 65 प्रतिशत लोग शुगर वाला पेय या कोल्ड्रिक्स आदि बहुत पीते हैं, जिससे पेट तो भरता नहीं बल्कि कैलोरी अलग से मिलती है
चीट डे प्लान करें: एक कडक डाइट पर जाना आपके दिमाग और शरीर पर दोनों पर ही भारी पड़ सकता है। इसलिये एक सफल डाइट प्लान पर टिके रहने के लिये हफ्ते में एक बार पिज्जा या चाउमीन खा सकते हैं। ऐसा करने से आप संतुष्ट बने रहेंगे और अपनी डाइट को अच्छे से फॉलो करेंगे।
भारी वजन उठाए: यदि आप पुरष हों या फिर महिला, भारी वजन उठाने से आपका फैट बर्न होगा। इससे मासपेशियां बनती हैं और शरीर का मैटाबॉलिज़्म बढता है। जब आप भारी वजन उठाते हैं तो आप बहुत तेजी से कैलोरीज़ बर्न करने लगते हैं।
खुद को जवाबदेह बनाइये: दोस्तों और रिश्तेदारों को खुद बताइये कि आप इन दिनों वजन कम कर रहे हैं, जिससे वे लोग भी आप का सपोर्ट करें।
अपने वर्कआउट में विविधता लाइये: एक दिन में कई तरह के व्यायाम करें जैसे, 5 मिनट कार्डियो ट्रेडमिल, बाइक करने के तुरंब बाद डंबेल सर्किट, स्ट्रेचिंग और बेंट ओवर रो करें। इन व्यायामों को 8 बार लगातार करें।
कार्ब हटाइये: वेट लॉस करना है तो अपने आहार से पास्ता, चावल और ब्रेड आदि को हटा कर फल और सब्जियां शामिल करें। इससे अगर आप ज्यादा भी खाएंगे तो भी वजन नहीं बढेगा।
सिंपल चीज़ों का उपयोग करें: यदि आपके पास जिम के लिये पैसे नहीं हैं तो घर पर ही रस्सी कूदिये। पहले 50 बार कूदिये और बाद में उसे बढा कर 100 कर दीजिये।
ना ले ज्यादा रेस्ट: एक्सरसाइज करते वक्त केवल 10 से 30 सेकेंड का ही रेस्ट लें।
मिला कर व्यायाम करें: यदि आप थका देने वाले व्यायामों को एक साथ मिला देंगे तो आपका वजन जल्दी कम होगा। यानी की पुशअप करते करते साथ में बुर्पी एक्सरसाइज कर लीजिये।
आंतरायिक उपवास की कोशिश करें: जो लोग दिन में दो से तीन बार खाना खाते हैं उन्हें हफ्ते में 1 दिन उपवास जरुर रखना चाहिये। यह एक अच्छी टेक्नीक है जिससे आप आराम से वजन कम कर सकते हैं।
खूब ज्यादा फैट खाइये: रिसर्च में बताया गया है कि आपके भोजन में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक वसा होना चाहिये। हाई फैट फूड जैसे, मेवे, एवोकाडो और तेल आदि आपको वजन कम करने में ज्यादा सहायता करेंगे। लेकिन अपने आहार में ट्रांस फैट यानी की जमा हुआ फैट ना लें।
खूब खाएं प्रोटीन: प्रोटीन खाने से मासपेशियां बनती हैं और फैट बर्न होता है। इसके अलावा पेट भी भरा रहता है।
बन जाइये हेवी ड्रिंकर: हम आपको शराबी बनने की हिदायत नहीं दे रहे हैं, बल्कि यह कह रहे हैं कि आप दिनभर में खूब सारा पानी पीजिये। इससे आपको भूख नहीं लगेगी और पेट भी भरा रहेगा। भोजन करने के पहले भी 1 गिलास पानी पीना चाहिये, इससे आप मोटापे से बचे रहेंगे।
प्रोटीन शेक: कई लोगों को अपने भोजन में ठीक मात्रा में प्रोटीन नहीं मिल पाती तो ऐसे में उन्हें प्रोटीन शेक पीना चाहिये। जितना वजन हो उससे दो गुना प्रोटीन का सेवन करना उचित माना गया है।
स्त्रोत: हिंदी बोल्ड स्काई, 29.01.13
स्त्रोत: हिंदी बोल्ड स्काई, 29.01.13

क्यों है मूँगफली एक पौष्टिक भोजन? Why peanut is nutritious?
पोषक तत्वों की तुलनात्मक दृष्टि से मूँगफली का अध्ययन इस प्रकार :
- इसमें प्रोटीन की मात्रा मांस की तुलना में 1.3 गुना, अण्डो से 2.5 गुना एवं फलो से 8 गुना अधिक होती हैं।
- 100 ग्राम कच्ची मूँगफली में, 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन होता है।
- मात्र 250 ग्राम भूनी मूँगफली में जिस मात्रा में खनिज और विटामिन पाए जाते हैं, वो 250 ग्राम मांस से भी प्राप्त नहीं किए जा सकते।
- 250 ग्राम मूँगफली के मक्खन से , 300 ग्राम पनीर, 2 लीटर दूध या 15 अंडों के बराबर ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
- एक अंडे के मूल्य के बराबर मूँगफलियों में जितनी प्रोटीन व ऊष्मा होती है, उतनी दूध व अंडे से संयुक्त रूप में भी प्राप्त नहीं होती।
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मूँगफली के लाभ :
- पौष्टिकता से भरपूर मूँगफली में कैंसर प्रतिरोधी तथा कॉलेस्ट्रॉल कम करने की क्षमता है।
- इसका संबंध ह्रदय की बीमारियों को घटाने में भी महत्वपूर्ण है।
- कच्ची मूँगफली रोज खाने से नवजातक माताओं के दूध में वृद्धि होती है।
- यह पाचन शक्ति को बढ़ाती है।
- मूँगफली या उससे निर्मित खाद्य सामग्री के उपयोग से रक्त स्त्राव की बीमारी में आराम मिलता है।
- भुनी मूँगफली एण्टीआक्सिडेंट्स का अच्छा स्रोत है।
- बिना नमक वाली मूँगफली में मोनोसैचुरेटेड वसा बहुत अधिक मात्रा में होती है और यह स्वस्थ धमनियों के लिए अच्छी होती है। धमनियों को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो रक्त में कालेस्ट्रानल के स्तर को ठीक रखें।
- मूँगफली में विटामिन ई का भंडारण होता है और यह कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम करती है।
- मूँगफली महिलाओं और पुरूषों में हार्मोन्स के विकास के लिए भी अच्छी होती है।
- शोधों से ऐसा पता चला है कि मूँगफली में कैल्शियम और विटामिन डी अधिक मात्रा में होता है और यह दांतों के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है।
मूँगफली के बारे में ओर रोचक बाते : मूँगफली एक अखरोट की तरह का नट नहीं है बल्कि यह एक फली की नस्ल से संबंधित है।
फाइटोस्टेरॉल (Phytosterols) :
- मूँगफली में किसी भी अन्य नट की तुलना में अधिक प्रोटीन, नियासिन, फोलेट और फाइटोस्टेरॉल (phytosterols) पादपरसायन होता है।
- मूँगफली में अंगूर,अंगूर का रस, हरी चाय, टमाटर, पालक, ब्रोकोली, गाजर से अधिक उच्च एंटीऑक्सीडेंट क्षमता है।
- मूँगफली चार प्रकार की होती हैं -रनर, वर्जीनिया, स्पेनिश, और वालेंसिया।
- मूँगफली सितंबर और अक्टूबर में नयी आ जाती है।
- फसल रोपण विधि से लगाई जाती है मूँगफली का विकास चक्र 120 से 160 दिन या पाँच महीने होता है।
मूँगफली का मक्खन
मूँगफली और मूँगफली का मक्खन 30 में अधिक आवश्यक पोषक तत्वों और फाइटोन्युट्रीयेंट्स phytonutrients होते हैं।
मूँगफली स्वाभाविक रूप से कोलेस्ट्रॉल मुक्त हैं।
मूँगफली का पौधा मूल रूप से दक्षिण अमेरिका में जन्मा है मूँगफली का पौधा छोटे छोटे पीले फूल पैदा करता है।
एक परिपक्व मूँगफली का पौधे में 40 फली (Pods) होती है यानी एक पोधा 40 मूँगफली पैदा करता है।
नियासिन (Niacin) एक महत्वपूर्ण विटामिन बी है जोकि भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने में मदद करता है मूँगफली नियासिन का एक बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है।
फोलेट (Folate) : फोलेट (Folate) कोशिका विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिसका अर्थ है कि पर्याप्त फोलेट का सेवन गर्भावस्था और बचपन के दौरान जब ऊतकों तेजी से बढ़ रहे हैं तब विशेष रूप से महत्वपूर्ण है मूँगफली फोलेट का एक अच्छा स्रोत है।
एंटीऑक्सिडेंट के रूप में मूँगफली :
- विटामिन ई एक बेहतरीन आहार एंटीऑक्सिडेंट होता है कि आक्सिजनित तनाव, हानिकारक शारीरिक प्रक्रिया से कोशिकाओं की रक्षा में मदद करता है।
- मूँगफली विटामिन ई का एक अच्छा स्रोत है।
- रेशा फाइबर का पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान है. मूँगफली फाइबर का एक अच्छा स्रोत है।
- मोनोअनसेचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड दोनों प्रकार की वसा एक स्वस्थ आहार के लिए योगदान स्वरूप है मूँगफली और मूँगफली के मक्खन के एक बार के आहार में 4.5 ग्राम पॉलीअनसेचुरेटेड वसा और 8 ग्राम मोनोअनसेचुरेटेड वसा शामिल होती है।
- मूँगफली शरीर में गर्मी पैदा करती है, इसलिए सर्दी के मौसम में ज्यादा लाभदायक है। यह खाँसी में उपयोगी है व मेदे और फेफड़े को बल देती है।
- भोजन के बाद यदि 50 या 100 ग्राम मूँगफली प्रतिदिन खाई जाए तो सेहत बनती है, भोजन पचता है, शरीर में खून की कमी पूरी होती है।
- इसे भोजन के साथ सब्जी, खीर, खिचड़ी आदि में डालकर नित्य खाना चाहिए। मूँगफली में तेल का अंश होने से यह वायु की बीमारियों को भी नष्ट करती है।
- सर्दियों में त्वचा में सूखापन आ जाता है। जरा सा मूँगफली का तेल, दूध और गुलाबजल मिलाकर मालिश करें। बीस मिनट बाद स्नान कर लें। इससे त्वचा का सूखापन ठीक हो जाएगा।
- मुट्ठीभर भुनी मूँगफलियाँ निश्चय ही पोषक तत्वों की दृष्टि से लाभकारी हैं।
- तो देखा कितने गुण हैं मूँगफली में .....
- आओ इसे अपने आहार का एक मुख्य भाग बनाएँ और इस के बेहतरीन गुणों का लाभ उठायें।
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रोज पनीर खाने से नहीं होती कोलेस्ट्रॉल की समस्या!
आमतौर पर पनीर खाने से लोग डरते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि पनीर खाने से ब्लड प्रेशर जैसी समस्या हो सकती है, लेकिन एक अध्ययन में पाया गया है कि पनीर से कोलेस्ट्रॉल बढने का खतरा कम होता है।
आमतौर पर पनीर खाने से लोग डरते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि पनीर खाने से ब्लड प्रेशर जैसी समस्या हो सकती है, लेकिन एक अध्ययन में पाया गया है कि पनीर से कोलेस्ट्रॉल बढने का खतरा कम होता है।
अन्य वसा के मुकाबले पनीर से कोलेस्ट्रॉल बहुत कम मात्रा में बढता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर पनीर को सामान्य मात्रा में खाया जो तो कोलेस्ट्रॉल स्तर पर कोई फर्क नहीं पडता है।
शोधकर्ताओं ने 50 लोगों पर छह सप्ताह शोधकर इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि मख्खंन (मक्खन) खाने वालों की तुलना में पनीर खाने वालों में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल [LDL cholesterol is called "bad" cholesterol, because elevated levels of LDL cholesterol are associated with an increased risk of coronary heart disease, stroke, and peripheral artery disease. LDL lipoprotein deposits cholesterol along the inside of artery walls, causing the formation of a hard, thick substance called cholesterol plaque.] की मात्रा बहुत कम थी। मख्खन खाने वालों में कोलेस्ट्रॉल की औसतन मात्रा 7 प्रतिशत अधिक थी।
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शार्ट नोट्स
- हम क्या खाते हैं और कैसा जीवन जीते हैं, इसमें मामूली सुधार करके हम अपने लीवर को स्वस्थ रख सकें।
- भारत में की लीवर की तीन सबसे घातक बीमारियां चर्बीदार लीवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस हैं, प्रत्येक के लिए विशेष खानपान की जरूरत है।
- भारत में मृत्यु होने के 10 शीर्ष कारणों में से लीवर का रोग भी एक है, ये रोग हर उम्र के लोगों पर अपना असर दिखा रहे हैं।
- देश में हर साल लगभग दो लाख लोग लीवर की बीमारियों से दम तोड़ देते हैं।
- हेपेटाइटिस (Hepatitis) लीवर की सूजन है जो दूषित जल में विषाणुओं, असुरक्षित यौन संबंध और दोबारा प्रयोग की गई सुई से हो सकता है। इसे आम तौर पर पीलिया के नाम से जाना जाता है।
- हमारी खुराक में लगभग 40 फीसदी कच्चे फल और सब्जियां शामिल होने चाहिए जो, इसके फाइबर संबंधी सामग्री में इजाफा करते हैं, वसा को अवशोषित करने और पेट की सफाई करने का काम करते हैं।
- शाकाहारी भोजन लेना ठीक रहता है, क्योंकि पशु प्रोटीन से रक्त में अमोनिया के संचय से लीवर कोमा में चला जाता है।
- किसी भी दवाई से ज्यादा श्रेष्ठ सलाह यही होगी कि कम कैलॉरी, कम वसा और अधिक प्रोटीन, नियमित व्यायाम और एल्कोहल की मात्रा को सीमित करके इस पर काबू पाया जा सकता है। यह बेहतर है कि तले हुए खाद्य पदार्थ, नमकीन, अचार, जंक फूड, कंसंट्रेटेड चीनी, एल्कोहल और लाल मांस खाने से बचना चाहिए।
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शहरी भारतीयों के खानपान के तौर-तरीकों में हाल में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. ढेर सारे कार्बोहाइड्रेट, बिना रिफाइन किया हुआ आटा और कम वसा वाली खुराक से रुझान अब उच्च वसायुक्त और कम अवशिष्ट वाली खुराक की ओर हो गया है।
आधुनिक भारतीय आहार अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट और वसायुक्त होता जा रहा है। इसके साथ ही एल्कोहल का सेवन भी बढ़ा है, जिसके नतीजे हृदय की बीमारियों, उच्च रक्तचाप (बीपी), मुधमेह और लीवर (कलेजा) से जुड़ी बीमारियों के रूप में सामने आ रहे हैं।
हृदय रोगों और मधुमेह जैसे रोगों पर मीडिया में खूब तवज्जो दी जा रही है. लेकिन लीवर-शरीर का सबसे बड़ा अंग और इसकी मुख्य केमिकल फैक्टरी-इनकी अपेक्षा थोड़ा उपेक्षित ही रहा है। आंतों से आने वाले खाए गए भोजन का पहला पड़ाव होने के कारण लीवर के हमारे खानपान में किए गए बदलावों से सर्वाधिक प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है।
डेढ़ किग्रा का लीवर हमारे ऊपरी उदर के दाईं ओर स्थित होता है और यह खाए गए भोजन को संसाधित करता है, जिसके बाद इसे अंतड़ियां अवशोषित कर लेती हैं. यह कार्बोहाइड्रेट्स को ग्लाइकोजन (Glycogen) के रूप में जमा करके रखता है और जब भी जरूरत होती है, यह तुरंत ही इसे ग्लूकोज के रूप में स्त्रावित कर देता है।
हमारे द्वारा लिए गए नुक्सानदायक पदार्थों को यह निष्क्रिय कर देता है और प्रोटीन पैदा करता है जो हमें संक्रमण और रक्तस्त्राव से बचाता है। हम क्या खाते हैं और कैसा जीवन जीते हैं, उनमें मामूली सुधार कर के यह संभव है कि हम अपने लीवर को स्वस्थ रख सकें।
कैसे पहुंचता है लीवर को नुकसान : अच्छे और स्वस्थ लीवर के लिए कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन के सही संयोग वाला आहार जरूरी है। जैसा हम जानते हैं कि इनमें से किसी भी चीज की अति खतरनाक हो सकती है। इसमें अत्यधिक खाना भी शामिल है जो लीवर को ज्यादा काम करना पड़ेगा और सही कार्य करने की उसकी क्षमता भी कम होगी. वसा और एल्कोहल के रूप में ढेर सारी कैलॉरी लेने के कारण यह लीवर के इर्द-गिर्द जमा हो जाएगी, जिससे कोशिकाओं संबंधी क्षति हो सकती है और इसके महत्वपूर्ण कार्यों में व्यवधान डाल सकती है।
हमारी खुराक में लगभग 40 फीसदी कच्चे फल और सब्जियां शामिल होने चाहिए जो, इसके फाइबर संबंधी सामग्री में इजाफा करते हैं, वसा को अवशोषित करने और पेट की सफाई करने का काम करते हैं। अच्छा वसा (ये जरूरी फैटी एसिड होते हैं जो फिश ऑयल सरीखे खाद्य पदार्थों में मिलते हैं) शरीर की प्रत्येक कोशिका में मौजूद झिल्ली और लीवर के सही कार्य करने के लिए जरूरी होते हैं।
साधारण साफ-सफाई, जो उबले पानी और साफ भोजन से हासिल की जा सकती है, वायरल हेपेटाइटिस से बचाती है। हमें अपने अल्कोहल के सेवन को सीमित करना चाहिए जो पुरुषों के लिए रोजाना दो यूनिट (एक यूनिट में 10 ग्राम अल्कोहल होता है और यह एक बीयर, वाइन का एक गिलास या स्पिरिट की एक चुस्की के बराबर होता है) और महिलाओं के लिए एक यूनिट काफी है। इसके साथ ही, हमें ढेर सारा पानी या तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए, क्योंकि इनसे किडनी के जरिये ढेर सारे जहरीले रासायनिक पदार्थों को शरीर से बाहर करने में मदद मिलती है।
बढ़ता बोझ : भारत में मृत्यु होने के 10 शीर्ष कारणों में से लीवर का रोग भी एक है, ये रोग हर उम्र के लोगों पर अपना असर दिखा रहे हैं। लीवर के रोगों से पीड़ित लोग सुस्त, पीला रंग और समस्याएं पीलिया (जॉन्डिस), पेट में पानी भर जाना, खून की उल्टी होना, कैंसर, कोमा और मृत्यु का रूप भी अख्तियार कर सकती हैं।
ऐसा अनुमान लगाया गया है कि देश में हर साल लगभग दो लाख लोग लीवर की बीमारियों से दम तोड़ देते हैं और इनमें से अधिकतर को स्वच्छ पेयजल, नकली दवाओं के सेवन से बचाकर, सही खान-पान का अनुकरण करके और एल्कोहल की मात्रा कम करने जैसे साधारण उपायों से बचाया जा सकता है।
तीन बीमारियां : भारत में की लीवर की तीन सबसे घातक बीमारियां चर्बीदार लीवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस हैं, प्रत्येक के लिए विशेष खानपान की जरूरत है।
चर्बीदार लीवर वह स्थिति है, जिसमें वसा की बड़ी बूंदें लीवर की कोशिकाओं में चली जाती हैं और फिर उसकी कार्यप्रणाली के साथ हस्तक्षेप करती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सबसे आम (लेकिन काफी अजीब) अत्यधिक खाने के साथ ही कुपोषण (जरूरी प्रोटीन और विटामिनों की कमी) और एल्कोहल का अत्यधिक सेवन हैं। अत्यधिक खाने के कारण होने वाले गैर-एल्कोहल चर्बीदार लीवर रोग को आम तौर पर एनएएफएलडी के नाम से जाना जाता है।
चर्बीदार लीवर वह स्थिति है, जिसमें वसा की बड़ी बूंदें लीवर की कोशिकाओं में चली जाती हैं और फिर उसकी कार्यप्रणाली के साथ हस्तक्षेप करती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सबसे आम (लेकिन काफी अजीब) अत्यधिक खाने के साथ ही कुपोषण (जरूरी प्रोटीन और विटामिनों की कमी) और एल्कोहल का अत्यधिक सेवन हैं। अत्यधिक खाने के कारण होने वाले गैर-एल्कोहल चर्बीदार लीवर रोग को आम तौर पर एनएएफएलडी के नाम से जाना जाता है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने अनुमान लगाया है कि हमारी आबादी का 32 फीसदी हिस्सा एनएएफएलडी (NAFLD=Non-Alcoholic Fatty Liver Disease) से पीड़ित है। जिसमें कम-से-कम अत्यधिक पोषण शामिल है, और यह आंकड़ा शराब की लत के शिकार लोगों में और भी अधिक है। लीवर में अतिरिक्त और अवांछित वसा 30 फीसदी मामलों में लीवर कोशिका की खराबी आ जाती है, जो अक्सर सिरोसिस का रूप धारण कर लेती है, जिसमें लीवर सख्त, भूरा, छोटा और गांठ जैसा हो जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि चर्बीदार लीवर का जल्द इलाज करा लिया जाए. किसी भी दवाई से ज्यादा श्रेष्ठ सलाह यही होगी कि कम कैलॉरी, कम वसा और अधिक प्रोटीन, नियमित व्यायाम और एल्कोहल की मात्रा को सीमित करके इस पर काबू पाया जा सकता है।
हेपेटाइटिस (Hepatitis) लीवर की सूजन है जो दूषित जल में विषाणुओं, असुरक्षित यौन संबंध और दोबारा प्रयोग की गई सुई से हो सकता है। इसे आम तौर पर पीलिया के नाम से जाना जाता है। इस स्थिति में खानपान में ढेर सारे कार्बोहाइड्रेट (50-60 फीसदी) होने चाहिए। साथ ही वेजिटेबल प्रोटींस (20-30 फीसदी) और कम वसा (10-20 फीसदी) शामिल होने चाहिए। इसमें हाल में सेवन किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में ताजे फल और जूस (सेब, अंगूर, गन्ना, नींबू का रस, नारियल पानी), सब्जियां (मूली, पालक, बंद-गोभी, खीरा, चुकंदर, टमाटर, करेला) और सब्जियों से प्रोटीन (दाल, मटर, फलियां और मेवे) शामिल हैं। यह बेहतर है कि तले हुए खाद्य पदार्थ, नमकीन, अचार, जंक फूड, कंसंट्रेटेड चीनी, एल्कोहल और लाल मांस खाने से बचना चाहिए।
सिरोसिस (Cirrhosis) में, जो कई लीवर रोगों की अंतिम अवस्था है, शुरू में कोई लक्षण नहीं देखने को मिलते हैं, लेकिन नमक और पानी के अवरोधन से पेट और लिंब्स में सूजन आ जाती है। हेपेटाइटिस में दी जाने वाली खुराक के अलावा नमक और पानी की मात्रा सावधानी के साथ सीमित कर दी जानी चाहिए-रोजाना 1,500 मिली (सात गिलास) लिक्विड के साथ एक चम्मच नमक। शाकाहारी भोजन लेना ठीक रहता है, क्योंकि पशु प्रोटीन से रक्त में अमोनिया के संचय से लीवर कोमा में चला जाता है।
स्वस्थ लीवर की खुराक : स्वस्थ लीवर के लिए खुराक में सबसे पहले ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए जो डिटॉक्सिफिकेशन (Detoxification-विषहरण) की प्रक्रिया को बढ़ाते हैं; खाने में ऐसे पदार्थ पर्याप्त मात्रा में हों जो लीवर की रक्षा करते हैं।
प्रत्यारोपित लीवर : हम लीवर रोगों की एडवांस अवस्था में मौजूद लोगों के लिए उम्मीद भरे संदेश के साथ अपनी बात खत्म कर सकते हैं। लीवर के काम न करने की अंतिम अवस्था में भी, भारत में मदद मौजूद है-लीवर प्रत्यारोपण के रूप में। इस जटिल ऑपरेशन में, जिसे देश में 20 केंद्रों में अंजाम दिया जाता है, बीमार लीवर को निकाल दिया जाता है और उसके स्थान पर नया लीवर प्रत्योरित कर दिया जाता है। यह लीवर ब्रेन डेड दानदाता से लिया जाता है। कई बार, दानदाता जीवित इंसान भी होता है जो अपने अंग को दान कर देता है।
तो आप भी अपने लीवर का जरूर ध्यान रखिएगा। अगर इसे कुछ नुकसान पहुंच जाता है तो अपना खान-पान एकदम सही रखिएगा। ऐसे लोग जो अपने लीवर को अब तक घातक नुकसान पहुंचा चुके हैं, उनके लिए भी उम्मीद की किरण अभी बाकी है।-नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी और लीवर ट्रांस्प्लांटेशन विभाग में कार्यरत हैं।
स्वस्थ लीवर के लिए रोजाना के नियम :
- *पर्याप्त मात्रा में ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन।
- *ढेर सारा पानी (उबला हुआ या बोतलबंद), फलों का जूस।
- *अत्यधिक तले हुए भोजन से बचने की कोशिश करें।
- *सही मात्रा में एल्कोहल का सेवन करें।
- *बेकार की दवाएं न खाएं।
सही आहार ही कुंजी :
- अपने रात्रि भोजन की आधी प्लेट में बगैर स्टार्च वाली सब्जियां रखें, एक-चौथाई प्रोटीन हो और बाकी प्लेट में स्टार्च चलेगा।
- भूख बढ़ाने वाले पदार्थों का प्रयोग करें-7 इंच के आकार की प्लेट का प्रयोग करें. यह मात्रा को नियंत्रित करता है।
- वातित ड्रिंक्स एंप्टी कैलॉरी उपलब्ध कराती हैं. इसके बजाए ताजे फलों का जूस, सब्जियों के सूप या छांछ का सेवन करें।
- भोजन तब ही करें जब आपको भूख लगे और अपनी क्षमता से आधा भोजन ही करें।
- पोलीमील आजमाएं जिसमें वाइन (150 मिली प्रतिदिन), मछली (114 ग्राम हफ्ते में चार बार), डार्क चॉकलेट (रोजाना 100 ग्राम), फल और सब्जियां (दिन में 400 ग्राम), लहसुन (2.7 ग्राम प्रतिदिन), और बादाम (68 ग्राम प्रतिदिन)।
अप्रैल, 2011 में पहली बार शहरी खानपान के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश बनाए गए. कुछ सिफारिशें निम्न हैं :-
- कुल ऊर्जा का 50-60 फीसदी कार्बोइड्रेट का सेवन होना चाहिए. पूरा ध्यान चोकर सहित अनाज और पत्तेदार सब्जियों और ताजे फलों से मिलने वाले 20-40 ग्राम प्रतिदिन फाइबर पर होना चाहिए।
- प्रोटीन की मात्रा 10-15 फीसदी होनी चाहिए. इसमें सोयाबीन, चना, दालें (शाकाहारियों के लिए) तथा मांसाहारियों के लिए पोल्ट्री और सी फूड हो सकता है. लाल मांस जैसे अत्यधिक सैचुरेटेड फैट वाले भोजन से बचें।
- सब्जियों के दो स्त्रोतों में वसा और तेल की मात्रा 10 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिएः मूंगफली, जैतून, सरसों, चावल की भूसी और जिंजली ऑयल्स (मक्खन, घी या ट्रांस फैट बिल्कुल नहीं लेने चाहिए)
- गुड़, शहद से चीनी 10 फीसदी (टेबल शुगर से बचना चाहिए); नमक (आयोडाइज्ड) 5 ग्राम प्रतिदिन।
- महिलाओं के लिए रोजाना 200-1,500 कैलॉरी की सिफारिश है जबकि पुरुषों के लिए यह मात्रा 1,500 से 1,800 के बीच है।
परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
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कार्बोहाइड्रेट,
प्रोटीन,
फल,
मुधमेह,
रक्तचाप,
लीवर,
वसा,
सिरोसिस,
हेपेटाइटिस
Monday, October 31, 2011
--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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अंकुरित अनाज
अंकुरित गेहूं-Wheat germ
अंकुरित भोजन-Sprouts
अखरोट
अंगूर-Grapes
अचूक चमत्कारिक चूर्ण
अजवाइन
अजवायन
अजीर्ण-Indigestion
अंडकोष
अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut
अण्डी
अतिबला
अतिसार
अतिसार-Diarrhea
अतृप्त
अतृप्त दाम्पत्य
अत्यंत असहिष्णुता
अदरक
अदरख
अंधश्रृद्धा
अध्ययन
अनिद्रा
अपच
अपराजिता
अपराधबोध
अफरा
अफीम
अमरूद
अमृता
अम्लपित्त-Pyrosis
अरंडी
अरणी
अरण्ड
अरण्डी
अरलू
अरुचि
अरुचि-Anorexia-Distaste
अर्जुन
अर्थराइटिस
अर्द्धसिरशूल
अर्श
अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles
अलसी
अल्टरनेथेरा सेसिलिस
अल्सर
अल्सर-Ulcers
अवसाद
अवसाद-Depression
अश्मःभेदः
अश्वगंधा
अश्वगंधा-Winter Cherry
असंतुष्ट
असफल
असर नहीं
असली
अस्थमा
अस्थमा-दमा-Asthma
आइरन
आक
आकड़ा
आघात
आत्महत्या
आंत्र कृमि
आंत्रकृमि-Helminth
आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever
आदिवासी
आधाशीशी
आधासीसी
आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower
आमला
आमवात
आमाशय
आयुर्वेद
आयुर्वेदिक
आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेदिक औषधियां
आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup
आयुर्वेदिक-Ayurvedic
आरोग्य
आँव
आंव
आंवला
आंवला जूस
आंवला रस
आशावादी-Optimistic
आसन
आसान प्रसव-Easy Delivery
आहार चार्ट
आहार-Food
आॅपरेशन
आॅर्गेनिक
आॅर्गेनिक कौंच
इच्छा-शक्ति
इन्द्रायण
इन्फ्लुएंजा
इमर्जेंसी में होम्योपैथी
इमली-Tamarind Tree
इम्युनिटी
इलाज
इलाज का कुल कितना खर्चा
इलायची
उच्च रक्तचाप
उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension
उत्तेजक
उत्तेजना
उदर शूल-Abdominal Haul
उदासी
उन्माद-Mania
उपवास
उम्र
उल्टी
ऊर्जा
एक्जिमा
एक्यूप्रेशर
एग्जिमा
एजिंग-Aging
एंटी ऑक्सीडेंट्स
एंटी-ओक्सिडेंट
एंटीऑक्सीडेंट
एण्टी-आॅक्सीडेंट
एनजाइना
एनीमिया
एमिनो एसिड
एरंड
एलर्जी
एलर्जी-Allergy
एलोवेरा
एलोवेरा जूस
एल्यूमीनियम
ऐंठन
ऐलोपैथ
ऐसीडिटी
ऑर्गेनिक
ओमेगा 3 के स्रोत
ओमेगा-3
ओर्गेनिक
औषध-Drug
औषधि सूची-Drug List
औषधियों के नुकसान-Loss of drugs
कचनार
कचनार-Bauhinia Purpurea
कटुपर्णी
कड़वाहट
कंडोम
कद्दू
कनेर
कपास-COTTON
कपिकच्छू
कपूरीजड़ी
कफ
कब्ज
कब्ज़
कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation
कब्ज. Cucumber
कब्जी
कमजोरी
कमर
कमर दर्द
कमेड़ा
करेला
कर्ण वेदना
कर्णरोग
कष्टार्तव-Dysmenorrhea
कांच निकलना
काजू
कान
कानून सम्मत
काम
काम शक्ति
कामवाण पाउडर
कामशक्ति
कामशक्ति-Sexual power
कामेच्छा
कामोत्तेजना
कायाकल्प
कार्बोहाइड्रेट
कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates
काला जीरा
काला नमक
काली जीरी
काली तुलसी
काली मिर्च
काले निशान
कास-खांसी-Cough
किडनी
किडनी संक्रमण
किडनी स्टोन
कीड़े
कीमोथेरेपी
कुकरौंधा
कुकुंदर
कुटकी-Black Hellebore
कुबडापन
कुमेड़ा
कुल्थी
कुल्ला
कुष्ट
कुष्ठ
कृमि
केला
केसर
कैफीन-Caffeine
कैलोरी
कैलोरी चार्ट
कैलोरी-Calories
कैवांच
कैविटी
कैंसर
कॉफी
कॉफ़ी
कॉलेस्ट्रॉल
कोंडी घास
कोढ़
कोबरा
कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol
कोलेस्ट्रोल
कौंच
कौमार्य
क्रियाशीलता
क्रोध
क्षय रोग-Tuberculosis
क्षारीय तत्व
क्षुधानाश
खजूर
खजूर की चटनी
खनिज
खरबूजा-Musk melon
खरेंटी
खरैंटी शिलाजीत
खाज
खांसी
खिरेंटी
खिरैटी
खीप
खीरा
खुजली
खुशी-Joy
खुश्की
खुश्बू
खोया
गंजापन-Baldness
गठिया
गठिया-Arthritis
गठिया-Gout
गड़तुम्बा
गंडा-ताबीज
गंध
गन्ने का रस
गरमा गरम
गर्भ निरोधक
गर्भधारण
गर्भपात
गर्भवती
गर्भवती कैसे हों?
गर्भावस्था
गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy
गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy
गर्भाशय
गर्भाशय भ्रंश
गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy
गर्म पानी
गर्मी
गर्मी-Heat
गलगण्ड
गाजर
गाजवां
गांठ
गाँठ-Knot
गारंटी
गारण्टेड इलाज
गाल ब्लैडर
गिलोय
गिल्टी
गुड़हल
गुंदा
गुदाद्वार
गुदाभ्रंश
गुम्मा
गुर्दे
गुलज़ाफ़री
गुस्सा
गृध्रसी
गृह-स्वामिनी
गेदुआ की छाछ
गैस
गैस्ट्रिक
गैहूं का जवारा
गोक्षुरादि चूर्ण
गोखरू
गोखरू (LAND CALTROPS)
गोंद कतीरा-Hog-Gum
गोंदी
गोभी-Cabbage
गोरख मुंडी
गोरखगांजा
गोरखबूटी
गोरखमुंडी
ग्रीन-टी
घमोरी
घरेलु नुस्खे
घाघरा
घाव
चकवड़
चक्कर
चपाती
चमत्कारिक सब्जियां
चरित्र
चर्बी
चर्म
चर्म रोग
चर्मरोग
चाय
चाय-Tea
चालीस के पार-Forty Across
चिकनगुनिया
चिकित्सकीय
चिटकन
चिंतित
चिरायता-Absinth
चिरोटा
चुंबन
चोक
चौलाई
छपाकी
छरहरी काया
छाछ
छाजन बूटी
छाले
छींक
छीकें
छुअ
छुआरा
छुहारा
छोटा गोखरू
छोटा धतूरा
छोटी हरड़
जंक फूड
जकवड़
जख्म
जंगली तिल्ली
जंगली तुलसी
जंगली पेड़
जंगली मिर्ची
जंगली-कटीली चौलाई
जटामांसी-Spikenard
जलजमनी
जलन
जलोदर रोग-Ascites Disease
जवारा
जवारे
जवासा-Alhag
जहर
जामुन का जूस
जायफल
जिगर
जीरा
जीवन रक्षक
जीवनी शक्ति
जुएं
जुकाम
जुदाई
जुलाब
जूएं
जूस
जोड़ों के दर्द
जोड़ों में दर्द
जौ
ज्यूस
ज्योति
ज्वर
ज्वर-Fiver
झाइयाँ
झांईं
झाड़-फूंक
झुर्रियाँ
झुर्रियां
झुर्री
झूठे दर्द
टमाटर का रस
टमाटर-Tomatoes
टाइफाइड
टाटबडंगा
टायफायड
टूटी हड्डी
टॉन्सिल
टोटला
ट्यूमर
ठंड
ठंडापन
ठेकेदार डॉक्टर
डकार
डकारें
डायबिटीज
डायरिया
डिग्री फ़ारेनहाइट
डिग्री सेल्सियस
डिजिसेक्सुअल
डिटॉक्सीफाई
डिटॉक्सीफिकेशन
डिनर
डिप्रेशन
डिब्बाबंद भोजन
डिलेवरी
डीकामाली
डीगामाली
डेंगू
डेंगू-Dengue
डॉ. निरंकुश
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
डॉ. मीणा
ढकार
ढीलापन
ढीली योनि
तकलीफ का सही इलाज
तंत्र-मंत्र
तम्बाकू
तरबूज-Watermelon
तलाक
ताकत
तिल
तिल्ली
तुंबा
तुंबी
तुम्बा
तुलसी
तेल
त्रिदोषनाशक
त्रिफला
त्वचा
त्वचा रोग
थकान
थाईरायड
थायरायड-Thyroid
थायरॉइड
दण्डनीय अपराध
दंत वेदना
दन्तकृमि
दन्तरोग
दमा
दर वेदना
दरार
दर्द
दर्द निवारक
दर्द निवारक दवा
दर्दनाक
दस्त
दही
दाग-धब्बे-Stains-Spots
दाढ़
दांत
दांतो में कैविटी-Teeth Cavity
दाद
दाम्पत्य
दाम्पत्य विवाद सलाहकार
दाम्पत्य-Conjugal
दाल
दालचीनी
दालें
दिमांग
दिल
दीर्घायु
दु:खी
दुर्गंध
दुर्बलता
दुष्प्रभाव
दुष्प्रभावरहित
दूध
दूध वृद्धि
दूधी
दूधी-Milk Hedge
दृष्टिदोष
दो मन
द्रोणपुष्पी
द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes
धड़कन
धनिया बीज
धनिया-Coriander
धमासा
धात
धातु
धातु पतन
धार्मिक
धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं?
धैर्यहीन
नज़ला
नपुंसक
नपुंसकता
नाइट्रिक एसिड
नाक
नाखून
नागबला
नागरमोथा
नाडी हिंगु
नाड़ी हिंगु (डिकामाली)
नामर्दी
नारकीय पीड़ा
नारियल
नाश्ता
निमोनिया
निम्न रक्तचाप
निम्बू
नियासिन
निराश
निरोगधाम
निर्गुण्डी
निर्गुन्डी
निष्कपट स्नेह
निष्ठा
निसोरा
नींद
नींबू
नींबू-Lemon
नीम-azadirachta indica
नुस्खे
नुस्खे-Tips
नेगड़
नेत्र रोग
नेुचरल
नैतिक
नॉर्मल डिलेवरी
नोनिया
नौसादर
न्युमोनिया-Pneumonia
न्यूरॉन्स
पक्षघात
पंचकर्म
पढ़ने में मन लगेगा
पंतजलि
पत्तागोभी-CABBAGE
पत्थर फोड़ी
पत्थरचट्टा
पत्नी
पथरी
पदार्थ
पनीर
पपीता
पपीता-CARICA PAPPYA
पमाड
परदेशी लांगड़ी
परम्परागत चिकित्सा
परहेज
पराठा
परामर्श
परिस्थिति
पवाड़
पवाँर
पाइल्स
पाक-कला
पाचक
पाचन
पाचनतंत्र
पाचनशक्ति
पाठक संख्या 16 लाख पार
पाठक संख्या पंद्रह लाख
पायरिया
पारदर्शिता
पारिजात
पालक
पालक-Spinach
पित्त
पित्ताशय
पित्ती
पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne
पिरामिड
पीलिया
पीलिया-Jaundice
पीलिया-कामला-Jaundice
पुआड़
पुदीना
पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava
पुरुष
पुंसत्व
पेचिश
पेट के कीड़े
पेट दर्द
पेट में गैस
पेट रोग
पेड़
पेद दर्द
पेरिकिटो सेसिल
पेशाब
पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
प्लूरिसी-Pleurisy
प्लेटलेट्स
फंगल
फटन
फफूंद-Fungi
फरास
फल
फाइबर
फिटकरी
फुंसी-Pimples
फूलगोभी-CAULIFLOWER
फेंफड़े
फेरम फॉस
फैट
फैटी लीवर
फोटोफोबिया
फोड़ा
फोड़े-Boils
फोरप्ले
फोलिक एसिड
फ्लू
फ्लू-Flu
फ्लेक्स सीड्स
बकायन
बकुल
बड़ी हरड़
बथुआ
बथुआ पाउडर
बथुआ-White Goose Foot
बदबू
बंध्यापन
बबूल-ACACIA
बरसाती बीमारियाँ
बरसाती बीमारियां
बलगम
बलवृद्धि
बला
बलात्कार
बवासीर
बहरापन
बहुनिया
बहुमूत्रता-
बांझपन
बादाम-Almonds
बादाम.
बाल
बाल झड़ना
बाल झडऩा-Hair Falling
बिना सिजेरियन मां बनें
बिवाई
बीजबंद
बीड़ी
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बीमारी
बील
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ब्लॉकेज
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भगनासा
भगन्दर
भगोष्ठ
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भूई आमला
भूई आंवला
भूख
भूख बढ़ाने
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भूमि
भूमि आंवला
भोजनलीवर
मकोय
मकोय-Soleanum nigrum
मक्का
मक्का के भुट्टे
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मटर-PEA
मंद दृष्टि
मंदाग्नि
मदार
मधुमेह
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मर्द
मर्दाना
मलाशय
मलेरिया
मलेरिया (Malaria)
मवाद
मसाले
मस्तिष्क
मस्से
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महंगा इलाज
महत्वपूर्ण लेख
महाबला
माइग्रेन
माईग्रेन
माईंड सैट
माजूफल
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मासिक
मासिक-धर्म
मासिकधर्म
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मिर्च-Chili
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मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex
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मुलेठी
मुहाँसे
मूँगफली
मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders
मूत्र
मूत्र असंयमितता
मूत्र में जलन-Burning in Urine
मूत्ररोग
मूत्राशय
मूत्रेन्द्रिय
मूर्च्छा (Unconsciousness)
मूली
मूली कर रस
मृत्यु
मृत्युदण्ड
मेथी
मेथी दाना
मेंहदी
मैथुन
मोगरा (Mogra)
मोटापा
मोटापा-Obesity
मोतियाबिंद
मौत
मौलसिरी
मौसमी बीमारियां
यकृत
यकृत प्लीहा
यकृत वृद्धि-Liver Growth
यकृत-लीवर-जिगर-Lever
यूपेटोरियम परफोलियेटम
यूरिक एसिड लेबल
योग विज्ञापन
योन
योन संतुष्टि
योनि
योनि ढीली
योनि शिथिल
योनि शूल-Vaginal Colic
योनि संकोचन
योनिद्वारा
योनिभ्रंश
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योनी संकोचन
यौन
यौन आनंद
यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills)
यौन क्षमता
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यौन शिक्षा
यौन समस्याएं
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यौनशक्ति
यौनशिक्षा
यौनसुख
यौनानंद
यौनि
रक्त प्रदर (Blood Pradar)
रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA
रक्तचाप
रक्तपित्त
रक्तशोधक
रक्ताल्पता
रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia
रस-juices
रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum
रामबाण
रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines
रुक्षांश
रूढिवादी
रूसी
रूसी मोटापा
रेचक
रेठु
रोग प्रतिरोधक
रोबोट सेक्स
रोमांस
लकवा
लक्षण
लक्ष्मी
लंच
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लहसुन
लहसुन-Garlic
लाइलाज
लाइलाज का इलाज
लाक्षणिक इलाज
लाक्षणिक जानकारी
लाभ
लिंग
लिंग प्रवेश
लिसोड़ा
लीकोरिया
लीवर
लीवर सिरोसिस
लीवर-Liver
लू-hot wind
लैंगिक
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लौंग की चाय
ल्युकोरिया
ल्यूकोरिया
ल्यूज योनी
वजन
वज़न
वजन कम
वजन बढाएं-Weight Increase
वन तुलसी
वन/जंगली तुलसी
वनौषधियाँ
वमन
वमन विकृति-Vomiting Distortion
वसा
वात
वात श्लैष्मिक ज्वर
वात-Rheumatism
वायरल
वायरल फीवर
वायरल बुखार-Viral Fever
वासना
विचारतंत्र
विटामिन
विधारा
वियाग्रा-Viagra
वियोग
विरह वेदना
विलायती नीम
विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध
विवाहेत्तर सम्बंध
विश्वास
विष
विष हरनी
विषखपरा
वीर्य
वीर्य वृद्धि
वीर्यपात
वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone
वृक्ष
वैज्ञानिक
वैधानिक
वैवाहिक जीवन
वैवाहिक जीवन-Marital
वैवाहिक रिश्ते
वैश्यावृति
व्याकुल
व्यायाम
व्रण
शंखपुष्पी
शरपुंखा
शराब
शरीफा-सीताफल-Custard apple
शर्करा
शलगम-Beets
शल्यक्रिया
शहद
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शारीरिक रिश्ते
शिथिलता
शीघ्र पतन
शीघ्रपतन
शीस
शुक्राणु
शुक्राणु-Sperm
शुक्राणू
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शोक
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शोध
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श्रेष्ठतर
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श्वेत प्रदर
श्वेत प्रदर-Leucorrhea
श्वेतप्रदर
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