Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

Health Care Friend and Marital Dispute Consultant

(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)

-:Mob. & WhatsApp No.:-

85619-55619 (10 AM to 10 PM)

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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।

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हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-1



1. डॉ. साहब मुझे साल में 6 महिने जुकाम रहती है। जब तक टैबलेट लेता हूं, आराम रहता है। दवाई छोड़ते ही तकलीफ फिर से शुरू हो जाती ​है। जुकाम के दौरान आंसुओं से आंखें जलने लगती हैं। आंसू गालों पर लगते हैं तो गालों पर भी जलन होती है।-रश्मि गोयल, मथुरा, उप्र।
परामर्श: रश्मि जी आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कामजोर हो चुकी है। जिसका प्रोपर इलाज जरूरी है। फिर भी आप होम्योपैथी की यूफ्रेशिया-30 दवाई लेकर देख सकते हैं।

2. डॉ. साहब मेरा वजन बढ रहा है। 25 साल में 80 किलो। थॉइराइड नहीं है। पेट खराब रहता है। ढकारें आती हैं। भूख नहीं लगती। पेट के ऊपरी दायें हिस्से में दर्द होता है। गैस बनती हैं और बहुत कमजोरी अनुभव होती है।-प्रशांत कुमार सैनी, अजमेर, राजस्थान।
परामर्श: प्रशांत जी आपके लीवर की स्थिति ठीक नहीं लगती। लीवर की जांच करवायें। उसके बाद प्रोपर उपचार करवायें। तब तक सुबह खाली पेट चाय और दूध पीते हों तो तत्काल बंद कर दें। चावल, तली, भुनी, बासी और पैक्ट सामग्री, जंक फूड और मांसाहार आपके लिये विशेष रूप से नुकसान दायक हैं। सुबह, दोपहर और शाम को 1-1 गिलास गुनगुना पानी पीने की आदत डालें। सोते समय होम्योपैथी की नक्स वोमिका-200 दवाई का सेवन कर सकते हैं।
3. डॉ. सर मेरी उम्र 30 साल है। बचपन से गुदाद्वारा बाहर निकलता है। बहुत परेशान हूं। जीवन नर्क बना हुआ है। कोई घरेलु इलाज बतायें।-गौरव सिंह, मंदसौर, मप्र।
परामर्श: भारत में 80 फीसदी से अधिक लोगों का पेट खराब है। जिनमें से लगभग आधों को बवासीर, गुदाभ्रंश-गुदाद्वारा बाहर निकलना और भगदंर की तकलीफ है। शर्म और अज्ञानता के कारण लोग इन्हें छुपाते हैं। जिसके कारण मर्ज बढता जाता है। अनेक तो आॅपरेशन करवाकर जीवनभर पछताते रहते हैं। इसमें घरेलु इलाज काम नहीं आने वाला, आपको इसे गंभीरता से लेना चाहिये और तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से पूर्ण उपचार लें। फिर भी आप दिन में तीन बार होम्योपैथी की रटानिया-200 दवाई का सेवन कर सकते हैं, लेकिन अपने हाजमें को सही रखें।

4. सर मेरी बहिन के पैर में एक फोड़ा है, अनेक एण्टी बॉयोटिक खाली लेकिन 8 महिने से ठीक नहीं हो रहा है। कृपया होम्योपैथिक इलाज बतायें।-महेश गुर्जर, गुरूग्राम, हरियाणा।
परामर्श: बेहतर होगा आप अपनी बहिन को किसी अनुभवी होम्योपैथ को दिखायें। तब तक आप होम्योपैथी की हिपर सल्फ-30 दवाई दिन में 3 बार देकर देख सकते हैं।

5. डॉ. साहब गुदाद्वार में जलन होती है। मरोड़ के साथ पतले दस्त आते हैं। जिनमें कुछ चिकना पदार्थ निकलता है। 3 साल से परेशान हूं। कोई पक्का इलाज बतायें।-अश्विन कुमार जगमाल, देहरादून, उख।
परामर्श: अश्विन जी पक्के इलाज के लिये आपका सम्पूर्ण लक्षणात्मक विवरण जानना जरूरी है। जितना आपने बताया है, उसके अनुसार आप होम्योपैथी की मर्क सोल-200 दवाई दिन देकर देख सकते हैं।

चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]
Note:----------------------------स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन इलाज प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619
----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को अनेकानेक लाइलाज समझी जाने वाली तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। गारंटी और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।

पेट दर्द का प्रोपर इलाज नहीं करवाना घातक हो सकता है! 

भारत में ऐसे लोगों की बहुत बड़ी संख्या है, जिन्हें कोई न कोई पाचन अर्थात् डाईजेशन सम्बन्धी समस्या लगातार बनी ही रहती है। इनमें बच्चे, जवान, वयस्क और वृद्ध सभी शामिल हैं। जिसके कारण उन्हें भूख में कमी, पेट दर्द, डकारें, गैस, कब्ज, कभी कब्ज कभी दस्त, मरोड़-पेचिश, अपच, मिचली, उबकाई, आतों में छाले, बवासीर, सिरदर्द, बदन में सोजन, इत्यादि में से एक या एकाधिक तकलीफें हो सकती हैं।





सामान्यत: ऐसे व्यथित लोगों का प्रस्तुत चित्र में दर्शाये गये अंगों में से लीवर, तिल्ली/स्पलीन, छोटी-बड़ी आतों में कोई न कोई अंग अफेक्टेड हो सकता है। इनमें से फैटी लीवर होना बहुत आम और बड़ी समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संसार में 32 फीसदी लोग इससे पीड़ित हैं। अत: समय रहते अपनी तकलीफ का पता लगाकर, उसका प्रोपर इलाज नहीं करवाना घातक हो सकता है।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' स्वास्थ्य रक्षक सखा, हेल्थ वाट्सएप 8561955619, मो. 9875066111, 29.11.2017
कुल मिलाकर डाक खर्च सहित मात्र साढे 9 हजार रुपये खर्च हुए और मैं स्वस्थ हो गयी। डॉ. निरंकुश जी का धन्यवाद।-दीपिका सेन


मैं पिछले 10-12 साल से कब्ज, डकार और गैस से बहुत परेशान थी। पेट फूला-फूला सा रहता था। भूख नहीं लगती थी। अनेक बार उल्टी करने का मन करता था। अनेक अंग्रेजी डॉक्टरों को दिखाया। दो आयुर्वेद वाले वैद्यजी को दिखाया। चूर्ण, काढे और ईसबगोल की भुस्सी बताई। जब तक दवाई लेती ठीक रहती। उसके बाद वही की वही परेशानी। इस दौरान मुझे सफेद पानी की बीमारी भी हो गयी। बहुत कमजोर हो गयी। शरीर में जान ही नहीं रही। सिर दर्द भी रहने लगा। जीवन में कोई उत्साह ही नहीं रह गया था। हमारा दाम्पत्य जीवन भी नीरस हो गया था।

थक-हारकर एक दिन मैंने गूगल पर सर्च किया। अनेक डॉक्टरों से बात की, लेकिन सन्तुष्टी नहीं मिली। सर्च करते-करते एक दिन डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी से मोबाईल नम्बर 9875066111 पर बात हुई। मैंने उनको अपनी तकलीफें और सारी बात बताई तो, डॉक्टर निरंकुश ने मुझे कहा कि मैं किसी भी रोग या रोगी को ठीक करने की कोई गारण्टी नहीं देता, लेकिन ठीक करने की सौ परशेंट कोशिश करता हूं। मुझे उनकी यह बात अच्छी लगी।

मैंने खर्चा पूछा तो बोले कि पहले मैं आपकी सम्पूर्ण जानकारी लूंगा। उसके बाद खर्चा बताऊंगा। इसके बाद बाद उन्होंने मेरी सम्पूर्ण डिटेल्स पूछ ली। इससे मुझे शुरू में लगा कि इतनी सारी जानकारी का क्या करेंगे? मुझ से अनेक बार आगे से बात की और मेरा सम्पूर्ण शारीरिक तथा मानसिक लक्षणों विवरण पूछ लिया। फिर मुझे इलाज का खर्चा बताया। इस बात से मुझे बहुत खुशी हुई।

डॉक्टर साहब ने बताया कि कम से कम तीन महिना और अधिक से अधिक 6 से 8 महिने नियमित रूप से दवाई लेनी होगी। पहले 15 दिन तो पुरानी दवाईयों का असर खतम करने के लिये दवाई दी गयी। खर्चा पूछा तो मात्र 1300 से 1800 रुपये प्रति महिने के करीब बताया। मुझे मन ही मन बहुत खुशी हुई, क्योंकि मैं तो पहले कम से कम 30-35 हजार रुपये खर्च कर चुकी थी और कोई फायदा भी नहीं हुआ।

मैंने डॉक्टर साहब के निर्देशों के अनुसार रेग्यूलर दवाई ली और देखते ही देखते मैं अच्छी होने लगी। सफेद-पानी तो 2-3 महिने में ही पूरी तरह से ठीक हो गयी। कुल 5 महिने में, मैं पूरी तरह ठीक हो गयी। इसके बाद भी मुझे एक महिना और दवाई दी। दवाई छोड़े मुझे अब 6 महिने हो गये हैं। अब कोई दवाई नहीं लेती हूं और पूरी तरह से स्वस्थ हूं। कुल मिलाकर डाक खर्च सहित मात्र साढे 9 हजार रुपये खर्च हुए और मैं स्वस्थ हो गयी। डॉ. निरंकुश जी का धन्यवाद।-दीपिका सेन, उज्जैन, मध्य प्रदेश।

डॉक्टर टिप्पणी:
~~~~~~~~मैडम दीपिका जी ने जब मुझे पहली बार काल किया था तो बहुत निराश और मायूस लग रही थी। जीवन के प्रति उत्साह और डॉक्टरों के प्रति दीपिका जी का विश्वास ही कमजोर पड़ गया था। ऐसी मनोशारीरिक स्थिति में रोगी का उपचार करना डॉक्टर के लिए बहुत बड़ी चुनौती की तरह होता है। क्योंकि निराश और हताश रोगी के शरीर में औषधियां आसानी से परिणाम नहीं दिखा पाती हैं। इसलिए मुझे दीपिका जी से अनेक बार बात करनी पड़ी और उनमें जीवन तथा चिकित्सा के प्रति विश्वास जगाना पड़ा। इसके बाद क्या हुआ, वो सब तो खुद दीपिका जी ऊपर लिख ही चुकी हैं। अतः समझने वाली बात यह है कि इलाज के लिए रोगी का जीवन, डॉक्टर और दवाइयों के प्रति आशावान होना बहुत जरूरी होता है। अन्यथा दवाइयां इच्छित परिणाम नहीं दे पाती हैं।
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-85-619-55-619



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1. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 को अपने मोबाईल में सेव करें।
2. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 पर हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करने हेतु
या स्वास्थ्य परामर्थ हेतु रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
3. आपका परिचय जानने के बाद आपकी स्वास्थ्य रक्षा ​हेतु
हेल्थ बुलेटिन भेजा जाने लगेगा।
लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।
अन्यथा आपके नम्बर को ब्लॉक कर दिया जायेगा।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
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आपके पाचन को सुधारने और उम्र बढ़ाने के लिए टॉप टिप्स
Top Tips for Improving your Digestion and Aging

सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
किसी भी देश या समाज का वर्तमान और भविष्य उस देश के लोगों के वर्तमान और भविष्य पर पर निर्भर करता है। जबकि लोगों का वर्तमान तथा भविष्य उनके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। यदि लोगों का स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा, तो लोगों के पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय क्रियाकलाप भी अच्छे नहीं हो सकते। अत: 'स्वास्थ्य रक्षक सखा' नाम से हमारी ओर से एक वेब साईट संचालित की जा रही है। जिसका मूल मकसद लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।



पाचन अच्छा तो सब कुछ अच्छा : विश्व स्वाथ्य संगठन का कहना है कि विश्व में 32 फीसदी लोगों को कोई न कोई लीवर सम्बन्धी तकलीफ/बीमारी है। अविकसित और भारत जैसे विकासशील देशों में स्थिति और भी खराब है। भारत में किये गये एक अघ्ययन के अनुसार अशिक्षा और अनियमित खानपीन की आदतों के चलते भारत में सत्तर फीसदी से अधिक लोग—अपच, कब्जी, गैस, डकार, बवासीर, पेट के अल्सर, भगंदर, आदि बीमारियों से ग्रस्त हैं।




इन सभी बीमारियों के मूल में लीवर दोष है। लीवर में सूजन या अन्य किसी कारण से लीवर का ठीक से काम नहीं करना, असल वजह है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि अपच, कब्जी और गैस के कारण पुरुषों में असमय नपुंसकता तथा स्त्रियों में श्वेत प्रदर की समस्या उत्पन्न होती देखी जा रही है। अध्ययन में इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया गया ​है कि भारत में उच्च पदस्थ और उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों तक को अपनी पेट सम्बन्धी तकलीफों के प्रति अज्ञानता है। लीवर विकृति का मूल कारण खानपीन सम्बन्धी गलत आदतें या गलत खानपीन है। जिसका समय रहते गलत आदतों और खानपीन में सुधार के साथ तत्काल उपचार जरूरी है। लेकिन उपचार भी पूरी तरह से तब ही कारगर होगा, जबकि हम अपनी खाने—पीने की आदतों को सुधारें। अत: उपचार से बेहतर, आदतों में सुधार हो सकता है। पाचन अच्छा तो सब कुछ अच्छा, क्योंकि पाचन क्रिया पर ही इंसान की जीवनी शक्ति (Vitality) और अन्तत: यह निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति का जीवन कितना लम्बा या छोटा होगा। अत: पाचन क्रिया को सुधारने और आयु को बढ़ाने के लिए 15 टिप्स/सूत्र प्रस्तुत हैं, जो अनेक देशों के ख्याति प्राप्त डाइटीशियंस के अनुभवों और गहन वैज्ञानिका शोधों पर आधारित हैं। इन पर अमल करके हम अपने स्वास्थ्य में आमूलचूल सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।




आपके पाचन को सुधारने और उम्र बढ़ाने के लिए टॉप टिप्स
Top Tips for Improving your Digestion and Aging


  • 1. नाश्ते से पहले सुबह में एक कप उबला हुआ पानी पियें। यह पेट को साफ करता है और अक्सर अद्भुत काम करता है। (Drink a cup of boiled water in the morning before breakfast. This cleanse the stomach and often works wonders.)
  • 2-धीरे धीरे और चबाकर खायें। अपच के मुख्य कारणों में से एक है-चबाये बिना भोजन करना। (Eat slowly and chewing. One of the main causes of indigestion food without chewing.)
  • 3. "गरमा गरम" भोजन नहीं खायें। (Don’t eat food “PIPING HOT”.)
  • 4. हमारा पेट गर्म खाद्य पदार्थों के लिये नहीं बनाया गया है। (Our stomach is not designed for hot foods.)
  • 5. याद रखने के लिए यह एक उपयोगी बात यह है कि-अगर खाना मुंह में गर्म है, तो यह पेट में भी गर्म ही रहेगा। इसमें चाय और कॉफी भी शामिल है। (This is a useful thing to remember that-If the food is hot in the mouth, then It will remain in the stomach too hot. It includes tea and coffee.)
  • 6. गर्म खाद्य और पेय पदार्थों का सेवन एंजाइम्स को गड़बड़ कर सकते हैं और पेट की आन्तरिक सतह को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। [Hot food and beverage consumption may disrupt enzymes And also injure lining of the stomach (the inner surface)]
  • 7. अत: हमेशा भोजन और पेय पदार्थों के ठण्डा होने की प्रतीक्षा करें। (So, always wait for it to cool of food and beverage.)
  • 8. भोजन को जानवरों की भांति जल्दी-जल्दी नहीं ठूंसें, बल्कि स्वाद लेकर और इत्मीनान खायें। (Do not eat food fastly like animals, but eat with tastes and leisurely.)
  • 9. यदि आप चलते फिरते खाते हैं, तो वहाँ अधिक संभावना है कि, पाचन शुरू ही नहीं हो पाये। (If you eat on the move, there is more chance that digestion will not begin.)
  • 10. भोजन के साथ फल खाने से बचें। (Avoid eating fruit with the meal.)
  • 11. यदि पेट फूलने की लगातार समस्या है तो अपने भोजन में बदलाव लाएं और हल्का भोजन लें। (If flatulence is a persistent problem, try to changes your diet and take light meals.)
  • 12. एक बार में बहुत सारा भोजन खाने के बजाय, भोजन को टुकड़ों में खायें। (Instead of eating a lot of food at once, eat the food into pieces.)
  • 13. उदाहरण के लिए, प्रोटीन को पचाने के लिए एंजाइम अम्लीय पाचक रस की जरूरत होती है। जबकि कार्बोहाइड्रेट को पचाने के लिए एंजाइम क्षारीय पाचक रस की जरूरत होती है। (For example, proteins needed to digest-enzyme acidic digestive juices. While the carbohydrates are required to digest enzyme alkaline digestive juices .)
  • 14. भोजन करने से आधा घंटा पहले एक गिलास पानी अवश्य पियें। (Be sure to drink a glass of water half an hour before meals.)
  • 15. सुनिश्चित करें कि आप दिन में पर्याप्त पानी पीते हैं, लेकिन भोजन के दौरान पानी नहीं पियें। (Make sure you drink enough water during the day, But Do not drink water during meals.)



कृपया उपरोक्त टिप्स/स्वास्थ्य सूत्रों को पढकर और अमल में लाकर अपने अनुभवों और विचारों से अवश्य अवगत करवायें। अगले आलेख में अस्वस्थ लीवर और लीवर सम्बन्धी समस्याओं के समाधान पर प्रकाश डाला जायेगा।
सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
परम्परागत एवं होम्यौपथ चिकित्सक
परामर्श समय : 10 AM से 10 PM तक
मो. एवं वाट्स एप नम्बर : 9875066111
Saturday, Dt. : 24.12.2016/15.32 Hrs.


परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor. 
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111

बेल – Bael

बेल हमारी एक ऐसी धरोहर है जिसे ईश्वरीय माना जाता है। सावन में भगवान शिव की पूजा और व्रत के समय बेलपत्र अर्पित किया जाना ये प्रमाणित करता है कि ये कोई साधारण फल या पत्ते नहीं है। बीलपत्र के तीन पत्ते शिवजी को अर्पित करना तीन प्रकार के अहम ( Ego ) –

"मैं, मेरा और मेरे कारण" शिवजी के चरणों में अर्पित किये जाने का सूचक है। यानि ये हर तरह का अहम भाव त्यागने का सन्देश है।
ये बहुत पुराना पारम्परिक औषधीय पेड़ है। लगभग 4000 सालों से इसे उपयोग में लाया जा रहा है। आयुर्वेद ने दशमूल जड़ीबूटी में इसे शामिल किया है। दशमूल दस ऐसी आयुर्वेदिक दवाओं का मिश्रण है, जिनकी मदद से कई प्रकार की लाभकारी आयुर्वेदिक दवा बनाई जाती है। जो विभिन्न रोगों को ठीक करती है। बील का फल, पत्ते, छाल और जड़ सभी दवा के रूप मे काम आते है।

इसमें केलशियम, पोटेशियम, आयरन, फास्फोरस, प्रोटीन और विटामिन "A", विटामिन "C", विटामिन "B" तथा कई ऑर्गनिक कंपाउंड व एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है। इसमें भरपूर मात्रा में फायबर होता है। इन्ही कारणों की वजह ये एक बहुत ही फायदेमंद फल है।

इसका बोटैनिकल नाम एगल मरमेलोस है और ये रुतेसिया फैमिली में का सदस्य है। इंग्लिश में इसे वुड एप्पल (Wood Apple) कहते है।

हिंदी में इसे कैत के नाम से भी जाना जाता है।

बेल का फल अनेक प्रकार के रोगों की दवा है। ये कब्ज, अपच, पेट के अल्सर, बवासीर, साँस की तकलीफ, डायरिया आदि से मुक्ति दिलाता है। वायरल और बेक्टेरियल इन्फेक्शन को रोकता है। कैंसर जैसे रोग से बचाता है। इनके अलावा भी कई रोगों में काम आता है।

सफ़ेद दाग और टूटी हुई हड्डी जोड़ने के लिए भी बील दवा के रूप में काम आता है। ये अग्नाशय को ताकत देता है, जिससे इन्सुलिन का स्तर सही बना रहता है और खून में शुगर कंट्रोल रहती है इस तरह डायबिटीज ठीक होती है। ये ब्लड प्रेशर भी कम करता है।

बेल के फायदे लाभ – Bael Ke Fayde , Benefits

1. पेचिश – Dysentery : बील पेचिश ठीक करने के लिए बहुत प्रभावकारी है। इससे पुरानी पेचिश तक ठीक हो सकती है। सूखा बील का पाउडर और धनिया पाउडर आधा -आधा चम्मच और मिश्री एक चम्मच मिलाकर सुबह शाम पानी के साथ लेने से पेचिश ठीक होती है। पेचिश के कारण दस्त के साथ खून आता हो तो वो भी बंद होता है।

सौंफ पाउडर – 3 चम्मच ,सूखा बील का पाउडर -3 चम्मच और सोंठ पाउडर दो चम्मच इन तीनो को एक गिलास पानी में उबाल लें। जब आधा रह जाये तब ठंडा होने पर छान लें। ये पानी सुबह शाम पीने से पेचिश ठीक हो जाती है।

बील का मुरब्बा प्रतिदिन खाने से पेचिश में आराम मिलता है। इसका गोंद भी दस्त में और पेचिश में लाभकारी होता है। 

2. कब्ज – Constipation : ये आंतों को बलवान बनाता है। बील कब्ज को ठीक करता है, इसके उपयोग से पेट साफ रहता है। फायबर की भरपूर मात्रा के कारण आतें साफ और स्वस्थ रहती है।

तीन चम्मच बील का गूदा और एक चम्मच इमली एक कप पानी में भिगो दें। दो घंटे बाद मसल कर छान लें। इसमें स्वाद के अनुसार मिलाकर मिश्री मिलाकर पियें। पसंद के हिसाब से पानी की मात्रा थोड़ी बढ़ा सकते है। ये बील का शरबत नियमित पीने से कब्ज ठीक हो जाती है।

गर्मी के मौसम में बील बाजार में आसानी से मिल जाता है। इसका ऊपर का कड़क छिलका तोड़कर अंदर का गूदा चार चम्मच एक गिलास पानी में दो घंटे भिगो दें। मसल कर छान कर मिश्री मिलाकर पीएं। मिश्री की जगह काला नमक भी ले सकते है। ये शरबत कब्ज मिटा देता है।

3. मधुमेह – diabitis : बीलपत्र मधुमेह (डायबिटीज) रोग में बहुत लाभकारी है। 10 -12 बीलपत्र और 4 -5 काली मिर्च पीस कर पानी में मिलाकर रोज पीने से डायबिटीज रोग में आराम मिलता है। बील का जूस पीने से अग्नाशय ( Pancreas ) को शक्ति मिलती है और इन्सुलिन की मात्रा संतुलित रहकर डायबिटीज में फायदा मिलता है।

4. पेट का अल्सर – Peptik Ulcer : बील में विशेष फेनोलिक कम्पाउंड और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है जो पेट के अल्सर को ठीक करते है। पेट में लम्बे समय तक होने वाली एसिडिटी के कारण पेट की अंदरूनी त्वचा को नुकसान पहुंचता है। जिसकी वजह से अल्सर बन जाते है। बील एसिडिटी मिटाने के साथ अल्सर को भी ठीक करता है।

5. सफ़ेद दाग – Vitiligo : त्वचा के ऊपर बनने वाले सफ़ेद धब्बे बील की मदद से ठीक हो सकते है। बील के गूदे में सोरलिन ( psoralen ) नाम का तत्व होता है जो स्किन की धूप सहने की शक्ति बढ़ाता है। इसके अलावा बील में कैरोटीन भी होता है। ये दोनों तत्व मिलकर स्किन का रंग एकसार बनाए रखने में महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाते है। नियमित बील के उपयोग से सफ़ेद दाग हलके पड़कर त्वचा सामान्य हो जाती है।

6. दस्त और हैजा – diarrhoea and cholera : बील में मौजूद टेनिन नामक तत्व में एंटी बैक्टीरियल गुण होते है। बैक्टीरिया के कारण होने वाले दस्त में बील का ये गुण बहुत लाभदायक होता है। बारिश के मौसम की बीमारियों में दस्त और हैजा अधिक होते है जिसमे बील विशेष रूप से गुणकारी होता है।

बील के विटामिन ” C ” से लाभ : बील में प्रचुर मात्रा में विटामिन C होता है। जो इम्युनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। विटामिन C के कारण ही ये स्कर्वी नामक रोग से भी बचाव करता है। शरीर में चुस्ती फुर्ती लाकर सुस्ती मिटाता है। विटामिन “C ” के कारण ही बील दांत मसूड़ों को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।

7. बवासीर – Piles : बवासीर Piles का मुख्य कारण कब्ज ही होता है। बील का टेनिन बवासीर को ठीक करता है। बील में आंतों की क्रियाशीलता बढाने का विशेष गुण होता है जिसकी वजह से अंदरूनी पाचन तंत्र को नुकसान पंहुचे बिना बाउल मूवमेंट आसान होता है। जिसकी वजह से कब्ज ठीक होकर पाईल्स में आराम मिलता है। बील में मौजूद दर्द और सूजन मिटाने वाले तत्व भी बवासीर ठीक करते है। इसके लेने से पाइल्स में बहुत आराम मिलता है। पढ़ें बवासीर Piles के घरेलु नुस्खे

8. कोलेस्ट्रॉल – cholesterol : बील की पत्तियों में कोलेस्ट्रॉल कम करने का गुण होता है। बील की ताजा पत्तियों का रस पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है। सुबह खाली पेट एक चम्मच रस प्रतिदिन लेना चाहिए। रस निकालना भी सरल है। पत्तियों को कूट पीस कर कपड़े में डालकर नीचो कर रस निकाल लें। ये रस कुछ दिन लेने से जिन्हे कोलेस्ट्रॉल नहीं है, उन्हें भी दिल की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।

9. लीवर – Liver : बील में बीटा कैरोटीन, थायमिन और रिबोफ्लेविन होने के कारण लीवर की समस्या से मुक्ति दिलाकर लीवर को शक्ति शाली बनाता है।

10. किडनी – kidney : बील में शरीर के विषैले तत्व को बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति होती है। बील का नियमित उपयोग किडनी की मदद करके किडनी को स्वस्थ बनाता है। अतः किडनी की समस्या में बील का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

11. बेल का शर्बत बनाने की विधि/bel ka sharbat banane ki vidhi : बील का शर्बत बनाने के लिए पहले बील का सीरप तैयार कर ले।
बील का सीरप बनाने का तरीका :-
सामग्री :-
सूखा हुआ बील -250 ग्राम
पानी -2 लीटर
शक्कर – 1 किलोग्राम
सिट्रिक एसिड – 1 चुटकी

सूखे बील को धोकर पानी में रात भर भिगो दें। सुबह इसे उबालने चढ़ा दें। आधा रह जाए तब बारीक चलनी या कपड़े से छान लें। इसमें शक्कर मिलाकर मध्यम आँच पर दस मिनट उबाल लें। बहुत ज्यादा देर न उबालें। गैस से उतारकर इसमें सिट्रिक एसिड मिला दें। ठंडा होने पर साफ बोतल में भर ले। ये बील का सीरप तैयार है।

जब भी शर्बत बनाना हो तो एक ग्लास के लिए :-
1/4 ग्लास बील सीरप में पानी डालकर ग्लास पूरा भर लें।
एक चम्मच नींबू का रस मिला लें
बर्फ डालें।
मेहमान को पिलाएँ , खुद भी पिएँ।
स्वाद के अनुसार भुना जीरा , काला नमक , काली मिर्च आदि मिला सकते है।

बेल का शेक बनाने की विधि/bel ka shek banane ki vidhi
चार ग्लास शेक के लिए :-

बील के गूदे को पानी में दो घंटे के लिए भिगो दें।
बीज निकाल दें ।
बील का ये गूदा – एक कप
वेनिला आइस क्रीम – एक कप
दूध – दो ग्लास
थोड़ी बर्फ
स्वाद के अनुसार शक्कर
मिक्सी में घुमा लें।
ग्लास में डालकर थोड़े मेवे डाल दें।
बील का स्वादिष्ट शेक तैयार है।

बील का जूस बनाने की विधी
bel ka juice banane ki vidhi

बील के ऊपरी कड़क हिस्से को तोड़कर अंदर का गूदा पानी में भिगो दें। बील का गूदा पका हुआ यानी थोड़ा लाल होना चाहिए। गूदा अगर सफेद या पीला है तो कच्चा है।
चार घंटे बाद गूदे को पानी में मसल लें। इस पानी को छान लें। छानने के लिए स्टील की छलनी लें। चम्मच से थोड़ा दबा कर पानी डालकर गूदा अच्छे से निकल लें।
छने हुए गूदे में यदि चाहें तो जरूरत के हिसाब से और पानी मिला लें।
अब इसमें स्वाद के अनुसार शक्कर , काला नमक, थोड़ी काली मिर्च मिलाकर पिएँ।
खरबूजे के आकार का बील है तो चार ग्लास जूस के लिए चौथाई गूदा ही काफी होगा।
बील के गूदे को बीजों को नहीं मसलना चाहिए वर्ना जूस का स्वाद खराब हो सकता है। गूदे को मिक्सी में बीज सहित घुमाने से भी जूस का स्वाद बिगड़ जाता है।
स्रोत : http://www.dadimakenuskhe.com/%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A6%E0%A5%87/
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बेल का रस पीने के 8 बेजोड़ फायदे

aajtak.in [Edited by: भूमिका राय]
नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2016 | अपडेटेड: 13:44 IST

बेल का रस पीने के फायदे
बेल एक ऐसा पेड़ है, जिसके हर हिस्से का इस्तेमाल सेहत बनाने और सौंदर्य निखारने के लिए किया जा सकता है. आयुर्वेद में इसके कई फायदों का उल्लेख मिलता है. इसका फल बेहद कठोर होता है, लेकिन अंदर का हिस्सा मुलायम, गूदेदार और बीजों से युक्त होता है.
बेल के फल का जीवनकाल काफी लंबा होता है. पेड़ से टूटने के कई दिनों बाद भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. बेल का इस्तेमाल कई तरह की दवाइयों को बनाने में तो किया जाता है ही साथ ही ये कई स्वादिष्ट व्यंजनों में भी प्रमुखता से इस्तेमाल होता है. बेल में प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है.

बेल का रस पीने के फायदे:
1. दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव में सहायक: बेल का रस तैयार कर लीजिए और उसमें कुछ कुछ बूंदें घी की मिला दीजिए. इस पेय को हर रोज एक निश्चित मात्रा में लें. इसके नियमित सेवन से दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव होता है. ये ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है.
2. गैस, कब्ज की समस्या में राहत: नियमित रूप से बेल का रस पीने से गैस, कब्ज और अपच की समस्या में आराम मिलता है.
3. कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार: बेल का रस कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मददगार होता है.
4. दस्त और डायरिया की समस्या में भी फायदेमंद: आयुर्वेद में बेल के रस को दस्त और डायरिया में बहुत फायदेमंद माना गया है. आप चाहें तो इसे गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर पी सकते हैं.
5. ठंडक देने का काम करता है: बेल के रस को शहद के साथ मिलाकर पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है. अगर आपको मुंह के छाले हो गए हैं तो भी इसका सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा. गर्मी के लिहाज से ये एक बेहतरीन पेय है. एक ओर जहां ये लू से सुरक्षित रखने में मददगार होता है वहीं शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करता है.
6. नई मांओं के लिए भी है फायदेमंद: अगर आप एक नई मां हैं तो आपके लिए बेल का रस पीना बहुत फायदेमंद रहेगा. ये मां के स्वास्थ्य को बेहतर करने में तो सहायक है ही साथ ही ब्रेस्ट मिल्क प्रोडक्शन को भी बढ़ाता है.
7. कैंसर से बचाव के लिए: नियमित रूप से बेल का रस पीने से ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका काफी कम हो जाती है.
8. खून साफ करने में सहायक: बेल के रस में कुछ मात्रा गुनगुने पानी की मिला लें. इसमें थोड़ी सी मात्रा में शहद डालें. इस पेय के नियमित सेवन से खून साफ हो जाता है.
स्रोत : http://aajtak.intoday.in/story/benefits-of-bael-juice-1-862486.html
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Bel ke Aushdhiy Pryog | बेल के औषधीय प्रयोग | Medicine Uses of Bel
बेल के औषधीय प्रयोग (Medicine Uses of Beal)

1. अपच: बेल का पका हुआ फल पेट की अपच को खत्म करने के लिए बेहद उपयोगी ओता हैं. यदि आपके पेट में कब्ज हो गई हैं तो आपको पके हुए बेल के गूदे का सेवन 2 – 4 दिनों तक रोजाना करना चाहिए. कुछ ही दिनों में आपको पेट की कब्ज से मुक्ति मिल जायेगी.

2. अल्सर: अल्सर के रोग से मुक्ति पाने के लिए भी बेल का प्रयोग किया जा सकता हैं. बेल के अलावा बेल के पेड़ की पत्तियां जिन्हें बेलपत्र भी कहा जाता हैं. उसका प्रयोग भी आप इस रोग से छुटकारा पाने के लिए कर सकते हैं. अल्सर के रोग से निजात पाने के लिए बेल की दस या बारह पत्तियां लें और इन्हें पानी में भिगो दें. अगले दिन सुबह उठकर इन पत्तियों को पानी में से निकालकर पानी को छान लें और इसे पी जाएँ. कुछ दिनों तक लगातार ऐसे करने से आपको अवश्य ही इस रोग से राहत मिल जायेगी.

3. नेत्ररोग: बेल के पेड़ की पत्तियां नेत्र से सम्बन्धित रोगों के लिए भी कभी लाभदायक होती हैं. आप इनका प्रयोग कर नेत्र के रोगों से मुक्ति पा सकते हैं. नेत्र के रोगों को ठीक करने के लिए बेल की कुछ पत्तियों का रस निकाल लें और उसे अपनी आँखों में काजल की तरह लगा लें. कुछ दिनों तक लगातार बेल के पत्तों का प्रयोग करने से नेत्र रोग ठीक हो जाएगा.

4. श्वास रोग: सांस से सम्बन्धित रोगों को दूर करने के लिए भी बेल के पत्तों का रस बहुत ही लाभदायक होता हैं. सांस की बिमारी से राहत पाने के लिए बेल की कुछ पत्तियां लें और उन्हें पीसकर पत्तियों का रस निकाल लें. अब बेल की पत्तियों के रस की समान मात्रा में तिल का तेल लें और इसे बेल की पत्तियों के रस में अच्छी तरह से मिला लें. अब इस रस को थोडा गर्म कर लें और इसमें काली मिर्च तथा जीरे का पाउडर मिला दें. अब इस रस को कुछ देर ठंडा करने के बाद अपने गले पर लगा लें. इस मिश्रण को गले पर लगाने से आपको काफी राहत मिलेगी तथा अगर आपको खांसी या जुखाम की शिकायत हैं तो इन दोनों परेशानियों से भी आपको मुक्ति मिल जायेगी. CLICK HERE TO READ MORE ABOUT बेल एक उपयोगी फल ...

5. संग्रहणी: यदि आप संग्रहणी की बिमारी से अत्यधिक परेशान हैं और लगातार यह बिमारी बढती जा रही हैं और संग्रहणी का वेग अधिक हो गया हैं और उसमें खून आने की भी शिकायत हैं तो आप इस रोग से मुक्ति पाने के लिए कच्चे बेल के चुर्ण का प्रयोग कर सकते हैं. इस बिमारी से राहत पाने के लिए बेल के कच्चे फल का चुर्ण लें और एक चम्मच शहद लें. अब इन दोनों को एक साथ मिला लें और इसका सेवन करें. प्रतिदिन 1 या 2 चम्मच इस मिश्रण का सेवन करने से आपको संग्रहणी के रोग से छुटकारा मिल जाएगा.

संग्रहणी के रोग से मुक्ति पाने के लिए आप पके हुए बेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए पके हुए बेल को फोड़ कर इसके अंदर का गूदा निकाल लें. अब एक कटोरी दही लें और उसमें बेल के गूदे को मिलाकर हल्की आँच पर भून लें. भूनने के बाद इस मिश्रण को उतार लें और इसमें अपनी इच्छानुसार कच्ची शक्कर मिला लें. अब एक गिलास हल्का गरम दूध लें और उसके साथ इस मिश्रण का सेवन करें. प्रतिदिन दूध के साथ दो चम्मच मिश्रण का सेवन करने से जल्द ही पुरानी संग्रहणी की बिमारी ठीक हो जायेगी.

6. शरीर में ठंडक: शरीर को ठंडक प्रदान करने के लिए बेल बहुत ही लाभप्रद होता हैं. इसलिए गर्मी के दिनों में इसके जूस का सेवन करना अधिक्तर लोग पसंद करते हैं. बल का फल शरीर को ठंडक प्रदान करने के साथ – साथ शरीर के पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद होता हैं. गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडक प्रदान करने के लिए पके हुए बेल का गूदा निकाल लें. अब एक बर्तन में दूध लें और उसमें बेल के गूदे को डालकर मिला लें. अब इसमें 2 चम्मच शक्कर डालें और शर्बत को अच्छी तरह से घोलने के बाद इस मिश्रण का सेवन करें. गर्मी के दिनों में रोजाना बेल के शर्बत का प्रयोग करने से शरीर को ठंडक मिलती हैं.

7. कब्ज: अगर आपके पेट में गैस (कब्ज) बनने की शिकायत हैं तो इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए भी आप बेल के गूदे का प्रयोग कर सकते हैं. पेट की कब्ज से मुक्ति पाने के लिए 150 ग्राम पके हुए बेल का गूदा लें और उसे रोजाना सोने से पहले खाकर सोयें. बेल के गूदे को खाकर सोने से मल मुलायम होकर निकल जाता हैं और पेट की कब्ज भी ख़त्म हो जाती हैं. यदि खुश्की अधिक हैं तो भी आप बेल के गुदे का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए बेल का गूदा लें और उसमें मिश्री के दाने या शक्कर अच्छी तरह से मिला लें. अब इस मिश्रण का सेवन करें. इस मिश्रण का सेवन रोजाना करने से खुश्की नहीं होती. CLICK HERE TO READ MORE ABOUT बेल का आयुर्वेदिक इस्तेमाल ...

बेल के औषधीय प्रयोग 

8. अतिसार: अतिसार की बिमारी से राहत पाने के लिए भी आप बेल का प्रयोग कर सकते हैं. अतिसार के रोग से मुक्ति पाने के लिए 30 ग्राम सुखी बेलगिरी लें और 10 ग्राम कत्था लें. अब इन दोनों को अच्छी तरह से पीस कर बारीक़ चुर्ण बना लें. अब इस चुर्ण में 1 ग्राम चीनी मिला लें. अब एक गिलास पानी लें. अब एक चम्मच चुर्ण को पानी के साथ फांक लें. रोजाना इस चुर्ण का सेवन करने से कुछ ही दिनों के अन्दर अतिसार का रोग ठीक हो जाएगा.

9. बच्चों में अतिसार की बिमारी: अगर बच्चों को अतिसार की बीमारी हो गई हैं तो भी आप उन्हें इस बिमारी से निजात दिलाने के लिए भी सूखे हुए बेल का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए सुखी बेलगिर का एक टुकड़ा लें और अर्क वाली सौंफ लें. अब एक साफ पत्थर पर इन दोनों को पीसकर बारीक़ चुर्ण तैयार कर लें. अब इस पिसे हुए चुर्ण की एक चौथाई मात्रा दिन में 2 – 3 बार अपने बच्चे को चटायें. रोजाना बच्चे को चुर्ण चटाने से कुछ ही समय में बच्चे को अतिसार की बिमारी से छुटकारा मिल जाएगा.

10. यौन रोग: यौन रोग जैसे स्त्रियों के रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर तथा पुरुषों में धातु दुर्बलता, स्वप्नदोष, पुरुष प्रमेह आदि रोगों के लिए भी बेल बहुत ही फायदेमंद होता हैं. इन सभी रोगों से मुक्ति पाने के लिए 4 ग्राम बेल के पत्तें लें और इन्हें पीस लें. अब एक चमच्च शहद लें और उसे बेल के पत्ते के चूर्ण में मिला दें. अब एक गिलास दूध लें और इसके साथ एक चमच्च मिश्रण का सेवन करें. रोजाना दूध के साथ एक चम्मच चुर्ण का सेवन करने से इन सभी यौन रोगों से पुरुष और महिला को मुक्ति मिल जाती हैं.

स्रोत : http://www.jagrantoday.com/2015/12/bel-ke-aushdhiy-pryog-medicine-uses-of.html
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गर्मियों में हेल्थगार्ड है बेल का फल, जानें इसके फायदे
Patrika news network Posted: 2015-04-23 12:01:52 IST Updated: 2015-04-23 12:01:52 IST
संक्षिप्त विवरण 
बील या बेल एक ऐसा ही फल हो, जो अपने विशेष गुणों के कारण गर्मियों में अधिक उपयोगी माना जाता है...
जयपुर
गर्मियों ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है, इसलिए अपने पेट और दिमाग को शांत रखना जरूरी है। बील या बेल एक ऐसा ही फल हो, जो अपने विशेष गुणों के कारण गर्मियों में अधिक उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में भी बेल के फल और पत्र दोनों को समान रूप से उपयोगी माना गया है। फल की मज्जा में क्यूसिलेज पेक्टिन तथा टेनिन आदि रसायन पाए जाते हैं। फल का गूदा, बेल-पत्र, मूल एवं छाल का चूर्ण तथा पेड़ के अन्य सभी अंग एवं अवयव उपयोग में लिए जाते हैं। बेल का चूर्ण बनाने के लिए कच्चा, मुरब्बे के लिए अधपका और ताजे शर्बत के लिये पके हुए फल का उपयोग होता है।
अस्थमा
बेल-पत्रों से बना क्वाथ (काढ़ा) सर्दी-जुकाम के कहर को कम करता है। यह सर्दी से होने वाली श्लेष्मा (कफ) को कम करता है और अस्थमा के प्रसार को धीमा करता है।
आंखों का संक्रमण
बेल-पत्रों को आंखों में होने वाले विभिन्न संक्रमण तथा सूजन के निदान में व्यवहार किया जाता है। खासतौर से नेत्र-शोध(Psoralen) यह बहुत प्रभावी होता है।

बुखार
बेल-मूल तथा पेड़ का छाल से बने क्वाथ से विभिन्न तरह के ज्वरों का इलाज किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में बेल-मूलों से वात-कफ-पित्त से होने वाले दोषों तथा ज्वरों को ठीक किया जाता है।

कब्ज
उदर विकारों में बेल का फल अचूक दवा के रूप में उपयोग किया जाता है। फल के नियमित सेवन से कब्ज जड़ से समाप्त हो जाता है। बेल फल उदर की स्वच्छता के अलावा आंतों को साफ कर उन्हें ताकत भी देता है।

डायरिया
गर्मियों में प्राय: अतिसार/ डायरिया की वजह से पतले दस्त होने लगते हैं, ऐसी स्थिति में कच्चे बेल को आग में भून कर उसका गूदा, रोगी को खिलाने से फौरन लाभ मिलता है। बेल का मुरब्बा खाने से पित्त व अतिसार में लाभ होता है। पेट के सभी रोगों में बेल का मुरब्बा खाना लाभप्रद है।

गर्मियों में जरा-सी असावधानी से लू लगने का खतरा बना रहता है, इसलिए गर्मियों में बेल का सेवन जरूर करें। अगर लू लग जाए, तो निवारण करने के लिए बेल के ताजे पत्तों को पीसकर मेहंदी की तरह पैर के तलुओं में ठीक से मलें। इसके अलावा सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करने से राहत मिलती है। बेल के शर्बत में मिश्री मिलाकर पीने से भी तुरंत राहत मिलती है।

अल्सर
बेल फल तथा बेल पत्रों के रस से बनी दवाओं का प्रयोग पेप्टिक अल्सर को ठीक करने के लिए किया जाता है। फल के गूदे से गैस्ट्रिक म्यूकोसा पर म्यूसिलेजिनस लेयर बन जाती है, जिससे अम्लता म्यूकोसल स्तर के साथ प्रतिक्रिया नहीं कर पाती है और अल्सर बढऩे से रूक जाता है। 

कान की समस्या
बेल की जड़ों में एस्ट्रिंजेंट ए्क्टिविटी पाई जाती है और इसी वजह से यह घरेलू उपायों में कान की समस्या को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। बेल की जड़ों को नीम के पत्तों के साथ मिलाकर बनी दवाएं कान के संक्रमण, असाध्य सूजन तथा पस को निकलाने में मदद करती है।

कैंसर
अध्ययनों ने बताया है कि बेल फल के सत्त में एंटी-प्रोलिफरेटिव एक्टिविटी होती है। जो मानवों में ट्यूमर सेल्स के फैलाव को रोकने में मदद करती है। गूदे से बने शर्बत में जल में घुलनसील एंटी-ऑक्सीडेंट्स, फेनोलिक तत्व तथा एंटी-म्यूटाजेन्स पाए जाते हैं, जो कैंसर-रोधी होते हैं तथा ये शरीर की सेल्स को फ्री-रेडिएशन से होने वाली क्षति से बचाते हैं। 

ल्यूकोडर्म
बेल फल के स्वादिष्ट तथा सुंगधित गूदे में सोरेलेन (क्कह्यशह्म्ड्डद्यद्गठ्ठ) नामक घटक पाया जाता है, जो सामान्य त्वचा की कड़ी धूप को सहने की शक्ति या टोलेरेंस पॉवर बढ़ाता है। इससे त्वचा का सामान्य रंग नहीं बदलता। त्वचा के सामान्य रंग से श्वेत होने की स्थिति को ल्यूकोडर्म कहते हैं और बेल फल का सेवन इस त्वचा विकार का अचूक उपाय माना जाता है।

मधुमेह
मधुमेह रोगियों के लिए बेल फल बहुत लाभदायक है। इसकी पत्तियों को पीसकर उसके रस का दिन में दो बार सेवन करने से मधुमेह रोगियों की रिस्क कम होती है। पत्तों के सत्त से ब्लड यूरिया तथा कोलेस्ट्रोल को सार्थक तरीके से कम करता है। बेल प्राकृतिक तौर पर एक क्षारीय फल है, जो शरीर से जहरीले पदार्थ निकालता है, अम्लीयता कम करता है।
स्रोत : http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/diet/health-benefits-of-bel-fruit-976617.html
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सावधानी : जिन लोगों को दमा, खांसी, जुकाम की शिकायत हो, उन्हें नींबू नहीं लेना चाहिए।

विभिन्न फलों के बीच नींबू प्रजाति के फलों का विशिष्ट स्थान दर्जा होता है। इसमें विटामिन ए.बी.सी. एवं खनिज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा पध्दति में इसके रस, छिलके और बीज का औषधि के रूप में काफी बखान किया गया है। नींबू एक छोटा फल है। इसकी अनेक प्रजातियां हैं। मगर कागजी नींबू सबसे उत्तम माना जाता है। मौसंबी, बिजौरा, जमीरी, पनपस, मीठा, खट्टा नारंगी भी औषधीय गुण लिये होते हैं। नींबू सदाबहार सर्वोत्तम रोगनाशक व आरोग्य एवं सौंदर्य प्रदाता है। नींबू की कई किस्में हैं। सभी किस्म उपयोगी व फलदायी हैं।
नींबू में जल 90 प्रतिशत, वसा 1 प्रतिशत, रेशे 2 प्रतिशत, प्रोटीन 1.5 प्रतिशत, कैल्शियम 0.08 प्रतिशत, फास्फोरस 0.03 प्रतिशत और विटामिन- सी सबसे अधिक, जो नींबू की प्रकृति पर निर्भर करता है। नींबू में ऊपर बताए तत्वों के अतिरिक्त शर्करा, तांबा, लवण, थॉयमिन, पोटाश, सोडियम, लोह तत्व, विटामिन- बी, क्लोरिन तथा मैग्नीशियम पोटाशियम आदि भी रहते हैं। जो हमारे शरीर के लिये हितकारी होते हैं। कागजी नींबू हल्का तिक्त, रुचिकर, उष्ण, पाचन शक्ति से भरपूर, जीवाणु नाशक, पित्त नाशक, पाचन शक्ति तीव्र करने व भूख लगाने में पूरी तरह सक्षम होता है।
नींबू का सेवन कैसे करें : किसी भी चीज का सेवन करने के लिए जानकारी पहले जरूरी है:-
  1. नींबू का सेवन का सबसे आसान तरीका है कि एक ग्लास गुनगुने पानी में नींबू निचोड कर पीलें।
  2. नींबू में अग्नि का बल होता है इसमें दो चुटकी सेंधा नमक या काला नमक अवश्य डालें ।
  3. नींबू वर्षाकाल में अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि बरसात में हमेशा शरीर के अंदर दूषित तत्व (टाक्सिक) बनते हैं। उन्हें नींबू दूर करता है तथा बरसात में होने वाली तमाम बीमारियों से बचाता है।
  4. नींबू का रस हमेशा छानकर ही लेना चाहिए नींबू का बीज लेना उचित नहीं है।
  5. नींबू का रस कांच या मिट्टी के बरतन में ही रखें. काऱण अन्य धातु में यह जहरीला हो जाता है।
  6. जहां तक संभव हो कागजी नींबू इस्तेमाल करें।
नींबू के औषधीय उपयोग : ताज़ा ताज़ा नींबू केवल रस भरा ही नहीं होता, बल्कि इसमें भरी हैं ढेर सारी विशेषताएं भी, जिसके कारण बीमारियां दूर भागती हैं :
  1. शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है।
  2. नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।
  3. रक्तक्षीणता दूर करता है नींबू के रस में, कच्चा टमाटर का रस मिलाकर पीयें। 
  4. आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोडकर पियें, रक्त की कमी दूर होगी। 
  5. नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है।
  6. यदि ज्वर हो और खूब प्यास भी लगे। मुंह सूखता रहे। उबला हुआ पानी लें। इसमें नींबू निचोड़कर पिया करें।
  7. नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।
  8. नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।
  9. नींबू के रस में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढ़ता है।
  10. नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है।
  11. नींबू के बीज को पीसकर लगाने से गंजापन दूर होता है।
  12. थकान दूर कर स्फूर्ति का संचार करता है, पेट का दर्द ठीक करता है। 
  13. बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें।
  14. आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पिएँ, रक्त की कमी दूर होगी।
  15. पेट के कीटाणुओं को साफ करने में भी प्रबल होता है। ऐसा यह अपने साइट्रिक अम्ल के कारण कर पाता है। नींबू का खटापन ही इसका सबसे बड़ा गुण है।
  16. बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें। 
  17. कान का दर्द हो तो प्याज के रसमें भी मिलाकर डालें। 
  18. कद्दू की सब्जी में नींबू निचोड कर अवश्य खायें। 
  19. कील-मुंहासों को हटाने के लिये मलाई व नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर लगाएं। चेहरा चमकने लगेगा।
  20. चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए नींबू की कुछ बूंदें दूध में डालें। रूई भिंगोकर चेहरा चमकाएं।
  21. नींबू को नमक तथा काली मिर्च के साथ चाटें। यह भोजन से पूर्व चाटना है। तब अधिक भूख लगा करेगी।
  22. यदि दस्त लगे हों तो दूध में नींबू का रस 8-10 बूंद डालकर मिलाकर रोगी को पिलाएं। यह बहुत लाभकारी रहता है। दिन में चार बार लेवें। अधिक फायदा होगा। एक गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़ें। रोगी इसे पी ले। दिन में चार बार ऐसी खुराक लें। आराम आता जाएगा।
  23. नींबू गर्म कर, नमक के साथ चूसा करें। यह भी आराम देता है।
  24. नींबू का रस शरीर के भीतर के टॉक्सिक (गंद) को बाहर निकालता है। 
  25. शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है। 
  26. नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है। 
  27. गुनगुना पानी एक गिलास लें। इसमें एक नींबू निचोड़ें। आधा चम्मच अदरक का रस डालें। मिलाकर रोगी को पिलाएं प्रात: खाली पेट। इससे यूरिक एसिड कम होता है तथा वात रोग शांत होता है।
  28. रोगों से बचने के लिये निरोगता पाने के लिये नींबू का सेवन नियमित किया करें। स्वस्थ रह सकेंगे।
  29. नींबू खट्टी ढकारों को दूर करता है, वायु विकार मिटाकर भूख बढ़ाता है, नींबू खाने को जल्दी हजम करता है, नीबू पेट के कीटाणुओं व कीड़ों को नष्ट करता है। 
  30. किसी भी रूप में रोजाना नींबू का सेवन करना चाहिये 
  31. भोजन के प्रति अरुचि दूर करने में सबसे ज्यादा लाभ कारी है।नींबू का पुराना अचार लाभकारी है। 
  32. मुंह का स्वाद बढ़ाता है व कब्ज दूर करता है। 
  33. हैजे से बचाव करता है, नींबू के रस में चीनी मिलाकर (शिकंजी) लेने से हैजे में आराम मिलता है। 
  34. यात्रा में वमन रोकने व दूर करने का सरल उपाय नींबू है। 
  35. खट्टे फलों में नींबू लेने से स्वास्थ्य को कोई हानि नहीं होती है। जोड़ों की खुश्की दूर करता है। 
  36. दांतों तथा मुंह की बीमारियों से दूर रखता है, चीनी मिट्टी की कटोरी में नींबू का रस रखें, रोज उससे दांत साफ करें। दांत चमकेगा तथा पायरिया ठीक होगा। 
  37. बिच्छू व मधुमख्खियों के काटने पर नींबू के बीजों को पीसकर सेंधा नमक डालकर पिलायें कारण बीज बहुत कसैला होता है यह इनके जहर को मारता है। आमतौर (रोज)पर बीज इस्तमाल ने करें। 
  38. दूध तथा नींबू के रस में काली मसूर पीसकर मिलाएं, इसका उबटन लगायें, झाइया दूर होंगी। 
  39. काली चाय में नींबू ङालकर पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है पेट में गैस नहीं बनती। 
  40. नींबू का रस तेल की तरह बालों की जड, में लगाने से रूसी खत्म होती है। 
  41. नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है। 
  42. नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है। 
  43. नींबू में पिसी काली मिर्च छिडक कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है। 
  44. निम्बू के रस तथा नमक पानी में मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढता है। 
  45. नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है। 
  46. नींबू के बीज को पीसकर सर पर लगाने से गंजापन दूर होता है। 
  47. आधा कप पालक के रस में नींबू निचोडकर धीरे-धीरे करीब बीस मिनट तक पियें, रक्त की कमी दूर करेगा। 
  48. गर्भाधान (गर्भ ठहरने में सहायक) एक दो नींबू का बीज पीस लें, घी में मिलाकर सेवन करें। 
  49. आधा सीसा दर्द में नींबू का रस नाक में दो-दो बूंद डालना चाहिये। 
  50. कान का दर्द हो तो अदरक पीसकर बगैर पानी अब नींबू का रस मिलायें(कहीं भी पानी इस्तमाल न करें)तथा कान में डालें। 
  51. याददाश्त की कमी दूर करता है-1. नींबू के रस में सौंफ का रस मिलाकर लें। 2. चुकंदर के रस में नींबू का रस मिलाकर पियें। 
  52. सरल प्रसव-पांचवे माह से गर्भवती स्त्री रोज नियम से नींबू की शिकंजी पिये। रोजाना 1 गिलास पानी में नींबू का रस मिलाकर भी पी सकते है।
  53. दो चम्मच बादाम के तेल में नींबू की दो बूंद मिलाएं और रूई की सहायता से दिन में कई बार घाव पर लगाएं, घाव बहुत जल्द ठीक हो जाएगा।
  54. नींबू को अपने प्रतिदिन आहार का भाग बनाएं इसमें मौजूद एसिड से शरीर में वसा की मात्रा कम हो जाती है।
  55. प्रतिदिन नाश्ते से पहले एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच ज़ैतून का तेल पीने से पत्थरी से छुटकारा मिलता है।
  56. किसी जानवर के काटे या डसे हुए भाग पर रूई से नींबू का रस लगांए, लाभ होगा।
  57. एक गिलास गर्म पानी में नींबू डाल कर पीने से पांचन क्रिया ठीक रहती है। 
  58. इसी प्रकार चक्तचाप, खांसी, क़ब्ज़ और पीड़ा में भी नींबू चमत्कारिक प्रभाव दिखाता है।
  59. दमा-दमा की शिकायत बनी रहती है तो ऐसे लोगों को दमा का दौरा पड़ने पर गरम पानी में नींबू निचोड़कर पिलायें, बेहतर साबित होगा। 
  60. मधुमेह-अक्सर मधुमेह पीड़ित व्यक्तियों को नींबू पानी में निचोड़कर पीने से लाभ मिलता है। 
  61. कब्ज-ताजे नींबू से निकाले गए रस और शक्कर प्रत्येक 12 ग्राम, एक स्वच्छ पानी में मिलाकर रात्रि को पीने से कुछ दिनों में ही पुराने से पुराने कब्ज रूपी रोग का खात्मा हो जाता है। 
  62. चेहरे की सुंदरता-यूं तो अधिकांश महिलाएं अपनी सुंदरता को लेकर चिंताग्रस्त रहती है, लेकिन यदि आपको भी ऐसी ही शिकायत हैं तो नींबू के रस के संग गुलाबजल, ग्लिसरीन बराबर मात्रा में मिलाकर रोजाना चेहरे पर लगायें कुछ दिनों पश्चात् से ही झांई, मुंहासे, झुर्रियां, फुंसियां आदि छूमंतर हो जाएंगी और चेहरा पहले से कहीं ज्यादा सुंदर दिखाई देने लगेगा जिससे आपकी शिकायत स्वत: दूर हो जायेंगी। 
  63. खांसी-श्वास एवं खांसी में नींबू में काली मिर्च और नमक भरकर चूसने से लाभ होता है जो खांसी की बीमारी भगाने में कारगर सिध्द होती है। 
  64. कफ-आयुर्वेद के अनुसार, नींबू के रस में डाले हुए अदरक के टुकड़े और नमक मिलाकर खाने से कफ का नाश हो जाता है। इस प्रकार कफ के रोगियों के लिए नींबू का रस किसी अनमोल औषधि से कमतर नहीं है।
  65. बुखार- बुखार के समय में नींबू में सेंधा नमक और काली मिर्च भरकर, गरम करके चूसने से बुखार में लाभ मिलता है। 
  66. जी घबराने की शिकायत -बसों में यात्रा अथवा घूमते वक्त कई लोगों को जी घबराने की समस्या होने लगती है। सो, नींबू को बीच से काटकर, नमक एवं काली मिर्च के साथ चूसें। यह समस्या खुद ब खुद दूर हो जाएगी। 
  67. नाक से खून आने पर-गाड़ी चलाते वक्त अचानक किसी दुर्घटना घटने पर नाक से खून आने की बुरी स्थिति में दोनों नथुनी में दो-दो बूंद नींबू का रस गिराने से खून का तेजी के साथ गिरना बंद हो जाता है। 
  68. आखिर में, उपरोक्त बीमारी के अलावा नींबू अपने औषधीय गुणों के कारण 
  69. चेचक,
  70. मसूड़ों से खून आना,
  71. अजीर्ण एवं
  72. मंद्राग्नि,
  73. पीलिया,
  74. अतिसार,
  75. अम्लता,
  76. पेट दर्द,
  77. सर्दी-जुकाम और
  78. मलेरिया जैसे अनगिनत रोगों में भी काफी लाभप्रद है। जिसके द्वारा अक्सर शरीर में उत्पन्न होने वाली बीमारियों का उपचार किया जाता है।

टिप्स : नींबू के कुछ उपयोगी किचन टिप्स 
  1. चावल पकाते समय उसमें नींबू की चार पांच बूंद डाल दें चावल अलग-अलग बनेगा। 
  2. अंण्डा उबालते समय 4-5 बूंद नींबू डाल दें। अंडा चटकेगा नहीं। 
  3. गोभी की सब्जी बनाते समय 3-4 बूंद नींबू का रस डाल दें बदबू नहीं आयेगी तथा गोभी का रंग सफेद। 
  4. आलू उबालते समय नींबू 3-4 बूंद डाल दें तो आलू सफेद, भुर-भुरे रहेंगे। चीनी भी डाल सकते हैं। 
परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor. 
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? 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Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बंध्यापन बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूत-प्रेत भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी 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Medicines रुक्षांश रूढिवादी रूसी रूसी मोटापा रेचक रेठु रोग प्रतिरोधक रोबोट सेक्स रोमांस लकवा लक्षण लक्ष्मी लंच लसोड़ा लस्सी लहसुन लहसुन-Garlic लाइलाज लाइलाज का इलाज लाक्षणिक इलाज लाक्षणिक जानकारी लाभ लिंग लिंग प्रवेश लिसोड़ा लीकोरिया लीवर लीवर सिरोसिस लीवर-Liver लू-hot wind लैंगिक लोनिया लौकी लौंग की चाय ल्युकोरिया ल्यूकोरिया ल्यूज योनी वजन वज़न वजन कम वजन बढाएं-Weight Increase वन तुलसी वन/जंगली तुलसी वनौषधियाँ वमन वमन विकृति-Vomiting Distortion वसा वात वात श्लैष्मिक ज्वर वात-Rheumatism वायरल वायरल फीवर वायरल बुखार-Viral Fever वासना विचारतंत्र विटामिन विधारा वियाग्रा-Viagra वियोग विरह वेदना विलायती नीम विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध विवाहेत्तर सम्बंध विश्वास विष विष हरनी विषखपरा वीर्य वीर्य वृद्धि वीर्यपात वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone वृक्ष वैज्ञानिक वैधानिक वैवाहिक जीवन वैवाहिक जीवन-Marital वैवाहिक रिश्ते वैश्यावृति व्याकुल व्यायाम व्रण शंखपुष्पी शरपुंखा शराब शरीफा-सीताफल-Custard apple शर्करा शलगम-Beets शल्यक्रिया शहद शहद-Honey शारीरिक शारीरिक रिश्ते शिथिलता शीघ्र पतन 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स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्पर्श स्मृति-लोप स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य परामर्श स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डी संक्रमण हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हाई बीपी हाथ-पैर नहीं कटवायें हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हुरहुर हुलहुल हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हेल्थ बुलेटिन हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्यापैथ होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक इलाज होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy