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फैटी लीवर/Fatty Liver कारण एवं निवारण

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
20.10.2017, M & WA-85619-55619

छाती के दाँये ओर की पसलियों के नीचे की हड्डी के नीचे और पेट के ऊपरी भाग में लीवर/यकृत (Liver) नामक अंग होता है। इसी को अंग्रेजी में Liver/लीवर कहा जाता है। फैटी लीवर/Fatty Liver से आशय लीवर में चर्बी जमा होने से है।

यहाँ यह समझने वाली बात है कि शरीर में लीवर एक महत्वपूर्ण अंग होता है। यह (लीवर) स्वस्थ अवस्था में हमारे शरीर में तकरीबन ढाई सौ से अधिक प्रकार से फंक्शन करता रहता है। लीवर का आकार बढ जाने अर्थात फैटी लीवर हो जाने से लीवर की कार्यकुशलता अर्थात कार्य/फंक्शन करने की गति कम हो जाती है। परिणामस्वरूप फैटी लीवर/Fatty Liver से अनेक प्रकार की परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं।












फैटी लीवर/Fatty Liver के लक्षण:

सबसे दु:खदायी स्थिति यह होती है कि सामान्यत: शुरूआत में फैटी लीवर का पता नहीं चल पाता है। इस कारण रोगी की स्थिति अधिक बिगड़ सकती है। यद्यपि जैसे-जैसे लीवर बढना शुरू होता है, वैसे-वैसे इसके लक्षण प्रकट होने लगते हैं। जिन लोगों का फैटी लीवर/Fatty Liver होता है, उनमें आमतौर पर निम्न असामान्य लक्षण प्रकट होते देखे जा सकते हैं:-

  • 1. भूख की कमी।
  • 2. पेट दर्द और उबकायी।
  • 3. थकान एवं वजन में कमी।
  • 4. भ्रमावस्था/कंन्फ्यूजन।
  • 5. अन्य अनेक कारण।
:कृपया ध्यान दें: स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता हेतु प्रकाशित सामग्री को पढकर आप खुद अपना या अपने किसी स्वजन का उपचार करने का खतरा नहीं उठायें, क्योंकि रोगी के लक्षणों को जानने के बाद, सही दवाई की उपयुक्त शक्ति और मात्रा का निर्धारण, एक अनुभवी डॉक्टर ही कर सकता है।

फैटी लीवर/Fatty Liver का पता कब चलता है?

आमतौर पर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं रहने वाले लोगों को 40 की आयु पार करने पर फैटी लीवर का पता चलता है। लेकिन तब तक स्थिति नियंत्रण से बाहर जा चुकी होती है या स्थिति अधिक पीड़ादायक हो चुकी होती है। लीवर को अधिक क्षति हो चुकी होती है।

अनेक लोगों को लीवर सिरोसिस/Cirrhosis, पीलिया/Jaundice, हेपैइाईटिस/Hepatitis आदि से पीड़ित होते देखा जा सकता है।

फैटी लीवर/Fatty Liver के मुख्य कारण:


  • 1. शराब का अधिक सेवन करना।
  • 2. लम्बे समय तक अपच और कब्ज।
  • 3. आधुनिक दवाईयों के सेवन का दुष्प्रभाव।
  • 4. रोड-छाप बाजारू तला-भुना-गरिष्ठ भोजन।
  • 5. जंक फूड और डिब्बाबंद भोजन का सेवन।
  • 6. आठ घंटे से अधिक सोने की आदत।
  • 7. अधिक मात्रा में आईरन का सेवन।
  • 8. उच्च कोलेस्ट्रोल तथा डायबिटीज से पीड़ित लोगों को फैटी लीवर का खतरा बढ जाता है।
  • 9. मोटापा: मोटापे के कारण लीवर के फैटी होने का खतरा बढ जाता है।
  • 10. फैट प्रोटीन का उच्च स्तर: शरीर में फैट प्रोटीन का उच्च स्तर भी फैटी लीवर का जनक हो सकता है।
  • 11. अनुवांशिक कारण: जिनके माता-पिता में से किसी एक या दोनों का फैटी लीवर होता है, उनको फैटी लीवर होने का खतरा बढ जाता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग विवाह करते समय इस बात का ध्यान रखते हैं।
  • 12. रोटी, आलू और कार्बोहाईड्रेट्स की उच्च मात्रा से युक्त भोजन की आदत।
  • 13. लीवर में रक्त की मात्रा अधिक हो जाना।
  • 14. हृदय या फेफड़ों के रोगों से ग्रस्त होना।
  • 15. अन्य विविध कारणों से भी यकृत/लीवर बढ़ जाता है।

फैटी लीवर/Fatty Liver से बचाव के उपाय:

  • 1. स्वस्थ, सुपाच्य और ताजा भोजन का सेवन करें।
  • 2. अधिक समय तक भूखे नहीं रहें।
  • 3. संतुलित भोजन करें।
  • 4. भोजन में विटामिन-डी एवं ई तथा ओमेगा 3 फैडी एसिड जैसे पोषक तत्वों को शामिल करें।
  • 5. चीनी का सेवन बहुत जरूरी होने पर ही करें।

फैटी लीवर/Fatty Liver का आयुर्वेदिक उपचार:

  • 1. भूई आंवला।*
  • 2. मकोय।*
  • 3. शरपुंखा।*
  • 4. पुनर्नवा।*
  • 5. हरसिंगार।*
  • 6. गिलोय।*
  • 7. अपामार्ग।
  • 8. श्योनाक।*
  • 9. बथुआ।*
  • 10. कालमेघ।
  • 11. द्रोणपुष्पी।*
  • इत्यादि।
नोट: उक्त दवाइयां ऑर्गेनिक ही अधिक प्रभावी होती हैं। (जो तुलनात्मक रूप से कुछ महंगी जरूर मिलती हैं) जिनके नाम के आगे */स्टार लगा है, उनके शुद्ध ऑर्गेनिक पाउडर, सीमित मात्रा में निजी उपयोग हेतु हमारे द्वारा उपलब्ध करवाए जा सकते हैं 
फैटी लीवर/Fatty Liver के उपचार के लिये उक्त दवाईयों में से एक या एकाधिक की मात्रा और खुराक का निर्धारण रोग तथा रोगी की स्थिति के अनुसार योग्य डॉक्टर द्वारा ही किया जा सकता है।

-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 8-5619-5-5619, 20.10.2017

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एलोवेरा जूस (Aloevera juice)

जामुन ज्यूस बनाने की विधि : सबसे पहले आप आवशयक्ता अनुसार एलोवेरा की पत्तियां ले और उसे अच्छी तरह पानी में धो लें। उसके बाद चाकू से उसके किनारे के कांटे वाले भाग काट कर निकाल दें। अब पत्तियों को सुविधानुसार छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लें, फिर पत्तियों के टुकडे लेकर उसके ऊपर का हरा छिलका निकाल कर अलग कर दें। ध्यान रहे ऐसा करते समय पत्तियों के गूदे के ऊपर की पीले रंग की पर्त भी साथ में निकाल दें, नहीं तो जूस में कड़वाहट रह जाएगी और आप उसका सेवन नहीं कर सकेंगे।
एलोवेरा के सफेद भाग को अलग करने के बाद उसे मिक्सी में डालें और दो मिनट के लिए मिक्सी को चला दें। इससे एलोवेरा की पत्तियों का जेल जूस में बदल जाएगा। अब इसे गिलास में निकालें और इसमें उचित मात्रा में पानी और नमक मिला लें। यदि आप चाहें, तो इसमें फलों का जूस भी मिला सकते हैं। ओरेंज (संतरा) जूस इसके स्वाद को टेस्टी बना देता है। इससे एलोवेरा जूस स्वादिष्ट हो जाएगा और आपको पीने में दिक्कत नहीं होगी। आइस क्यूब डालकर भी ले सकते हैं। अगर आप डायट पर हैं तो इस एलोवेरा जूस को रोज पियें।
लाभ- यह ठंडा होता है। इसे पीना स्किन और बालों के ही लिए बहुत ही फायदेमंद है। शरीर की इम्यूनिटी पावर और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में भी ये मददगार होता है। यह दिल और लिवर से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
(1) प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है : एलोवेरा में 18 धातु, 15 एमिनो एसिड और 12 विटामिन मौजूद होते हैं जो खून की कमी को दूर कर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं।

(2) चुस्ती-स्फूर्ति : एलोवेरा के कांटेदार पत्तियों को छीलकर रस निकाला जाता है। 3 से 4 चम्मदच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है।

(3) पेट रोग : एलोवेरा का जूस पीने से कब्ज की बीमारी से फायदा मिलता है। एलोवेरा का जूस बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग व पेट के विकारों को दूर करता है। एलोवेरा का जूस ब्लड को प्यूरीफाई करता है साथ ही हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है।
(4) बाल : एलोवेरा का जूस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ्पय होते हैं।
(5) शुगर : एलोवेरा का जूस पीने से शरीर में शुगर का स्तर उचित रूप से बना रहता है।
(6) जोडों का दर्द : एलोवेरा के जूस का हर रोज सेवन करने से शरीर के जोडों के दर्द को कम किया जा सकता है।


(7) चर्म रोग : एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वगचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों, आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है।
(8) इन्फेक्शन : एलोवेरा का जूस पीने से मच्छर काटने पर फैलने वाले इन्फेक्शन को कम किया जा सकता है।
(9) व्हाईट ब्लड सेल्स : शरीर में वहाईट ब्लड सेल्स की संख्या को बढाता है।


(10) जवान और खूबसूरत : एलोवेरा का जूस त्वचा की नमी को बनाए रखता है जिससे त्वचा स्वस्थ दिखती है। यह स्किन के कोलाजन और लचीलेपन को बढाकर स्किन को जवान और खूबसूरत बनाता है। एलोवेरा के जूस का नियमित रूप से सेवन करने से त्वचा भीतर से खूबसूरत बनती है और बढती उम्र से त्वचा पर होने वाले कुप्रभाव भी कम होते हैं। एलोवेरा को सौंदर्य निखार के लिए हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट जैसे एलोवेरा जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम आदि में प्रयोग किया जा रहा है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 10 से 30 मिली.।
एहतियातकफ की शिकायत है, तो मानसून या सर्दी के मौसम में इसे नहीं पीना चाहिए, क्योंकि कई बार इससे गले में खराश, खांसी और सीने में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। एलोवेरा शरीर में नए सेल्स को बनाता है और उनका ग्रोथ भी करता है, इसलिए कैंसर रोगी इसे न पिएं।

परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor. 
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
घरेलु दवाई : जीरे के दुष्प्रभाव-साइड इफेक्ट्स

हम अनेक बार घरेलु उपचार के नाम पर अनेक औषधियों का आंख बंद करके सेवन करने लगते हैं। जिससे अनेक बार फायदे के बजाय शारीरिक दुष्प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। ऐसा ही आंख बन्द करके जीरे का सेवन करने के बाद होता देखा गया है। माना कि जीरा भोजन में अरुचि, पेट फूलना, अपच आदि जैसे पाचन संबंधी अनेक समस्‍याओं से निजात दिलाता है। लेकिन जीरे के कई प्रकार के दुष्प्रभाव भी होते हैं। अत: उपचार से पहले किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना सदैव उचित रहता है।
आइये जानते हैं-जीरे के दुष्प्रभावों के बारे में:-



1. गर्भपात का खतरा : जीरे का मतलब ज्‍यादा मात्रा में जीरे के सेवन करने से गर्भपात या समय से पहले डिलीवरी होने की आंशका बढ़ जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को जीरे के अधिक सेवन से बचना चाहिए। 

2. हार्ट बर्न : बुक "पॉकेट गाइड टू हर्बल मेडिसिन" के अनुसार जीरा आपके गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट में अधिक गैस बनने में योगदान देता है। इस प्रकार जीरा हार्ट बर्न (Heartburn=A form of indigestion felt as a burning sensation in the chest, caused by acid regurgitation into the esophagus.) का एक कारण हो सकता है!

3. डायबिटीज रोगियों के लिए अस्वास्थ्यकर : डायबिटीज रोगियों को अपने ब्‍लड शुगर के स्‍तर को नियंत्रण में रखने की जरूरत होती है। उन्‍हें स्‍वस्‍थ रहने के लिए ब्‍लड शुगर का स्‍तर सामान्‍य रखना होता है। ब्‍लड शुगर के स्‍तर में उतार-चढ़ाव डायबिटीज रोगियों के लिए अच्‍छा नहीं होता। जैसा की आप जानते हैं कि जीरे के सेवन से ब्‍लड शुगर के स्‍तर में बहुत जल्‍दी कमी आने लगती है और यह लो ब्‍लड शुगर स्‍तर का कारण बन सकता है। इसलिए डायबिटीज से पीड़ि‍त लोगों को जीरे के अधिक सेवन से बचना चाहिए।

4. डकार की समस्‍या : जीरे के वातहर गुण या प्रभाव के कारण जीरा अत्‍यधिक डकार उत्पन्न करने का कारण बन सकता है। कभी-कभी डकार में अधिक आंत्र पथ में गैस दके माध्‍यम से बाहर निकलती है। और तो और कभी-कभी डकार से अजीब से गंध और विशेष ध्‍वनि भी आने लगती हैं। हालांकि वास्‍तविक अर्थों में यह कोई समस्‍या नहीं है, लेकिन डकार निश्‍चित रूप से शर्मिंदगी का कारण बन सकती है।

5. मादक प्रभाव : जीरे में मादक/नशे गुण मौजूद होते हैं। इसलिए जीरे का सेवन सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, क्‍योंकि यह नशे की लत बन सकता है।

6. स्तनपान कराने वाली माताओं को नुकसानदेह : जीरा ब्रेस्‍टफीडिंग करवाने वाली महिलाओं के लिए अच्‍छा नहीं होता। इसलिए स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को जीरे के अत्‍यधिक मात्रा में सेवन से बचना चाहिए, क्‍योंकि इससे दूध का उत्‍पादन कम होने लगता है।

7. भारी माहवारी चक्र : जीरा मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का कारण बन सकता है। इ‍सलिए महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से बचने के लिए जीरे का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिये।

8. लीवर को नुकसान : जीरे में मौजूद तेल अत्‍यधिक अस्थिर होने के कारण, अधिक लंबे समय तक जीरे के अधिक मात्रा में सेवन करने से यह लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। जीरा का तेल मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने या रोकने के लिए जानवरों के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है।

9. सर्जरी से आगे-पीछे ब्‍लड शुगर स्‍तर कम होने का खतरा : अधिक मात्रा में जीरे के सेवन से शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर कम होने लगता है। इसलिए निकट भविष्य में एक सर्जरी में जाने से पहले इस बात को याद रखना बहुत महत्‍वपूर्ण हो जाता है। क्‍योंकि सर्जरी के दौरान ब्‍लड शुगर के स्‍तर को बनाये रखना जरूरी होता है। इसलिए डॉक्‍टर सर्जरी के दौरान और बाद ब्‍लड शुगर के स्‍तर को नियंत्रित करने के लिए कम से कम दो सप्‍ताह पहले जीरा बंद करने की सलाह देता है। 

10. एलर्जी की समस्‍या : जीरा आयरन का सबसे अच्छा स्रोत है। इसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर हो जाती है। और त्‍वचा पर निखार आता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि जीरे का इस्‍तेमाल त्‍वचा पर चकत्‍ते और एलर्जी भी पैदा कर सकता है। इसलिए त्‍वचा में एलर्जी से परेशान लोगों को जीरे का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए।

11. अन्‍य : जीरे के अन्‍य दुष्‍प्रभावों में मानसिक समस्‍याएं, उनींदापन और मतली जैसी समस्‍याएं भी शामिल है।

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सभी लेखों में लिखी गयी दवाईयों का विवरण जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा मोल नहीं लें। 
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
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मेथी दाना/Fenugreek Seeds
मेथीदाना हो सकता है खतरनाक! जानिए 5 नुकसान:-
1 यह जरूरी नहीं कि मेथीदाने का सेवन सभी के लिए फायदेमंद हो, कुछ लोगों को इससे नुकसान भी होता है। खास तौर से जो लोग ब्लडशुगर या डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि यह यह शुगर के स्तर को प्रभावित करता है।
2 कई बार इसे खाने से पेट संबंधी समस्याएं भी होती हैं, जैसे गैस बनना, खट्टी डकार आना आदि। इससे बचने के लिए इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखें और यदि यह आपको सूट न कर रहा हो तो इसे न खाएं।
3 कई बार मेथीदाना खाने से त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। त्वचा पर सूजन या दर्द जैसी समस्या भी इसका सेवन करने से हो सकती हैं।
4 इसकी तासीर गर्म होती है। इससे मूत्र संबंधी समस्याएं भी हो सकती है। मूत्र में अजीब से गंध आना या अन्य समस्या से बचने के लिए इसका प्रयोग सोच समझ कर करें।

5 गर्भवती महिलाओं या नवजात बच्चों की मांओं को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए। इससे दस्त आदि की समस्याएं हो सकती हैं। 
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हर घर में पाया जाने वाला मेथी दाना भोजन की सिर्फ स्वाद और महक ही नहीं बढ़ाता, बल्कि हमारे स्वास्थ्य की रक्षा भी करता है। मेथी दाना हमारे लिये बहुत ही गुणकारी और स्वास्थ्यवर्धक होता है।

इससे भी बड़ी बात यह है कि मेथी दाना का सर्वाधिक उत्पादन भारत में ही होता है और भारत में भी राजस्थान में सबसे ज्यादा (लगभग 80%) पैदा होता है। गुजरात, यूपी, एमपी, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब में भी इसका काफी मात्रा में उत्पादन होता है।

हरी मेथी : मेथी के पत्ते या हरी मेथी के गुण भी लगभग मेथी दाना जैसे ही होते है।

मेथी दाना के पोषक तत्व (Nutrients) : मेथी दाना में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा कई प्रकार के खनिज जैसे आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नेशियम, कॉपर, मैगनीज तथा ज़िंक आदि होते है। इसके अतिरिक्त मेथी दाना कई प्रकार के विटामिन और जरुरी पोषक तत्वों का बहुत अच्छा स्रोत है। जिसमे विटामिन बी-6, विटामिन ए, विटामिन सी, फोलिक एसिड, थायमिन, राइबोफ्लेविन तथा नियासिन आदि शामिल है।

मेथी में कई प्रकार के फायदेमंद फोटो न्यूट्रिएंट्स (Photo Nutrients=Phytonutrients are compounds found in plants or fruits, veggie, grains and grasses. They serve various functions in plants, helping to protect the plant's vitality. For example, some phytonutrients protect the plant from UV radiation while others protect it from insect attack.) भी होते है। फोटो न्यूट्रिएंट्स पेड़ पौधों में पाए जाने वाले वे तत्व है जो पौधों को तो बीमारी, फंगस आदि से बचाते ही है, हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक होते हैं।

मेथी दाना में मौजूद फायबर तथा सैपोनिन (Saponin=Saponins occur in many plant foods and get their name from their soap-like qualities. Eating saponins may help lower your cholesterol and reduce your risk of heart disease. Your immune function benefits from these plant compounds as well. Your risk of developing certain forms of cancer or getting tumors may even decrease from eating more saponins.) इसे आश्चर्यजनक औषधि बनाते है। इसमें म्यूसिलेज नाम का एक चिपचिपा तत्व होता है। मेथी को पानी में भिगोने पर यह तत्व फैलकर मल्हम जैसे जैल में परिवर्तित हो जाता है। यह जैल शरीर के तंतुओं की मरम्मत कर उन्हें मजबूत बनाने का काम करता है।

मेथी दाना का सेवन कैसे? : मेथी दाना अंकुरित करके खाया जा सकता है। मेथी दाना की किशमिश के साथ सब्जी बनाकर खाई जा सकती है। इसे साबुत ही पानी के साथ फांक सकते है या चूर्ण बनाकर बूरा चीनी मिलाकर फंकी ले सकते है। सर्दी के मौसम में मेथी के लडडू बनाकर खाये जा सकते है। अगर मेथी के दाने ज्‍यादा कडुवे हों तो उन्‍हें कैप्‍सूल के रूप में भी खाया जा सकता है।


मेथी को अंकुरित करने की विधि : चार चम्मच मेथी दाना धोकर आधा गिलास पानी में 6 -7 घंटे के लिए भिगो दें। इसके बाद छान कर कपड़े में बांध कर अंकुरित करके खाएं। इसका बचा हुआ पानी भी पी लेना चाहिए।

मेथी दाना से सावधान (Beware of Fenugreek Seeds) :  मेथी दाना के लाभ जानने से इसके संभावित नुकसान जान लिए जाएँ : कई बीमारियों में रामबाण के रूप में काम करने वाला मेथी न केवल आपके चेहरे की सुंदरता को बरकरार रखता है, बल्कि आपकी पाचन संबंधी समस्या को भी दूर कर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं इसका सेवन कई बार आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है। आइए जानते है इसके नुकासन के बारे में…
1. डायबिटीज : मेथी के सेवन से ब्लड सुगर का स्तर प्रभावित होता है। इसलिए जो व्यक्ति डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें मेथी खाते समय बहुत ही सावधानी बरतनी पड़ेगी।

2. एलर्जी : ऐसे कई सारे मामले देखे गए हैं कि जो लोग ज्यादा मेथी का सेवन करते हैं, उन्हें स्किन में होने वाली एलर्जी की दिक्कते आने लगती है। इस तरह के एलर्जी से न केवल आपका चेहरा सूज जाता है, बल्कि आपके चेस्ट में दर्द भी होने लगता है।

3. खट्टी डकार और गैस : अगर आप अच्छा और सही तरीके से भोजन नहीं लेते, तो आपको गैस और खट्टी डकार की समस्या होने लगती है। डकार में पेट की गैस को मुंह से निकाला जाता है, जिसमें कभी-कभी अजीब सी आवाज़ और गंध होती है। यह ज्यादातार तीखी भोजन खाने वालों को होती है। लेकिन अगर आप मेथी का ज्यादा सेवन करते हैं, तो आपको खट्टी डकार, गैस और सूजन जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए मेथी जब खाएं उसकी मात्रा के बारे में अच्छी तरह से जान लें।

4. दस्त : अगर आप मेथी का ज्यादा सेवन करते हैं तो आपको दस्त की समस्या हो सकती है और जिन माताओं ने अभी-अभी अपने बच्चे को जन्म दिया है, उन्हें तो मेथी खाते समय और भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि स्तनपान कराने वाली मताएं अगर दस्त की शिकार हैं तो यह रोग उनके बच्चे को भी हो सकता है। जिसकी वजह से डिहाइड्रेशन की भी समस्या हो सकती है।

5. मूत्र की गंध : गंध चाहे पसीने की हो या मूत्र की हर कोई इससे दूर भागता है। अगर आपके साथ भी यह समस्या है तो इसे जल्द से जल्द दूर कर लें। मेथी के खाने से मूत्र में गंध की समस्या आने लगती है। इसलिए इसे खाते समय सावधानी बरतें। वैसे यह बदबू मूत्र में मौजूद बैक्टीलरिया और सूक्ष्म जीवों की वजह से भी आ सकती है।

6. अन्य नुकसान : डॉक्टरों के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को मेथी का कम से कम सेवन करना चाहिए या हो सके तो इसका सेवन न करें। इसके अलावा ज्यादा मेथी दानों के सेवन से आप इंटरनल ब्लीडिंग की समस्या से जूझ सकते हैं। यहा तक की मेथी दाना आपके बच्चे की सोचने समझने की शक्ति को कम कर देता है इसलिए उसे डॉक्टर की सलाह के बाद मेथी दाना दें।

Note : मेथी दाना की तासीर बहुत गर्म होती है। जिन लोगों के शरीर से किसी भी प्रकार से रक्त निकलता हो जैसे बवासीर के कारण, नकसीर के कारण, पेशाब में रक्त जाता हो, माहवारी के समय अधिक मात्रा में या अधिक दिन तक रक्त स्राव होता हो तो उन्हें मेथी का उपयोग बड़ी सावधानी और चिकित्सक की देख रेख में करना चाहिए। मेथी दाना रक्त स्राव बढ़ा सकती है। तेज गर्मी में भी मेथी का उपयोग कम ही करना चाहिए। सर्दी के मौसम में इसका उपयोग अधिक लाभदायक सिद्ध होता है।

मेथी दाना के फायदे :

1. कोलेस्ट्रॉल : मेथी में कोलेस्ट्रॉल को कम करने का गुण होता है। इससे हानिकारक LDL कोलेस्ट्रॉल कम होता है। यही वह कोलेस्ट्रॉल है जो रक्तवाहिकाओं में जमा होकर हार्ट अटैक पैदा कर सकता है। मेथी में मौजूद फायबर गेलेक्टोमेनन के कारण भी रक्त में कोलस्ट्रोल की मात्रा कम करने में मदद मिलती है। इसके नियमित उपयोग से रक्त में क्लोट बनने की सम्भावना कम हो जाती है। इस प्रकार मेथी से हृदय रोग से बचाव हो सकता है। मेथी की सब्जी इस परेशानी में लाभ देती है। डॉक्‍टरों का कहना है कि यह हार्ट रोगियों के लिए एक वरदान के समान है, जिसे वह रोज अपने भोजन में खा कर अपने बढे हुए कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम कर सकता है। अगर मेथी के दाने ज्‍यादा कडुवे हों तो उन्‍हें कैप्‍सूल के रूप में भी खाया जा सकता है। भोजन में कुछ दाने मेथी के खाने से कोलेस्‍ट्रॉल लेवल में सुधार तो आता ही है साथ में हार्ट अटैक का रिस्‍क भी कम हो जाता है।

2. डायबिटीज : मेथी डायबिटीज को कंट्रोल में रखने में मदद करती है। इससे पेशाब में शक्कर की मात्रा कम हो जाती है। इसके प्राकृतिक फायबर के कारण तथा इन्सुलिन पर मेथी दाना के उपयोग से पड़ने वाले प्रभाव से डायबिटीज में यह बहुत लाभदायक सिद्ध होती है। यह इन्सुलिन के बनने तथा इसके रक्त में प्रवाहित होने की गति दोनों पर अच्छा प्रभाव डालती है। इससे ब्लड शुगर बहुत ऊपर नीचे होना बंद होता है। रोजाना तीन चार चम्मच मेथी के उपयोग से अच्छे परिणाम आ सकते है। इसके गर्म प्रभाव से बचने के लिए मेथी दाना मोटा पिसा हुआ दो चम्मच और सौंफ एक चम्मच रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह छान कर यह पानी पिएँ। हरी मेथी रक्त में शकर को कम कर देती हैं। इस कारण डायबिटीज रोगियों के लिए भी यह फायदेमंद होती है। प्रतिदिन एक चम्मच मेथी दाना पाउडर पानी के साथ फांकें। डायबिटीज से दूर रहेंगे। मधुमेह की समस्या से राहत दिलाये मेथी–मधुमेह की समस्या आजकल अनेक लोगों में देखने को मिल ही जाती है. इस परेशानी को समाप्त करने के लिए मेथी के पत्तों का रस निकाल कर सुबह शाम पियें इससे मधुमेह ठीक होने लगता है। मेथी से करें मधुमेह की रोकथाम–मेथी पाउडर का सेवन मधुमेह की समस्या को दूर करने के लिए काफी लाभदायक होता है. इसके सेवन के लिए थोड़ा मेथी पाउडर लें. अब इस पाउडर को दूध में डालकर पीए. इससे मधुमेह की समस्या कम होने लगती है। रिसर्च के अनुसार यह जानकारी प्राप्‍त हुई है कि यह टाइप 2 के मधुमेह रोगियों के लिए काफी लाभकारी होता है। अगर रोगी रोज़ दिन में 6-7 मेथी के दानों का या फिर मेथी के पानी का सेवन करे तो उसका ब्‍लड शुगर लेवल कम हो सकता है।

3. त्‍वचा रोगों से निजात : अगर आपको खुजली, जलन, फोड़े-फुसीं और गांठ की समस्‍या है तो आपको कुछ ग्राम मेथी खाने की आवश्‍यक्‍ता है। न सिर्फ खानें से बल्कि इसके पेस्‍ट को लगाने से भी फायदा होता है। अगर रुसी की समस्‍या है तो बालों में मेथी और दही मिला कर लगाने से यह समस्‍या जल्‍द दूर हो जाएगी। त्‍वचा रोग ठीक होता है-त्‍वचा रोग जैसे एक्‍जिमा, जलने का घाव, फोडे-फुंसी और गठिया रोग मेंथी पो पीस कर पेस्‍ट लगाने से ठीक हो सकता है।

4. मौसमी बीमारियां : कहा जाता है कि अगर बुखार या कोई भी अन्‍य बीमारी में मेथी का उपयोग किया जाए तो वह तुरंत ही ठीक हो जाती है। और अगर आप खुद को रिफ्रैश करना चाहते हैं तो मेथी के पत्‍तों से बनी हर्बल टी पिएं। फिर देखें कैसा फील/अनुभव करते हैं? मेथी एक अच्‍छी घरेलू दवा है जो कि बुखार और कई अन्‍य बीमारियों को ठीक करती है। यही नहीं मेथी के पत्‍तों से हर्ब टी बनाई जा सकती है जिससे दिमाग शांत और फ्रेश रहता है।

5. स्तन सौन्दर्य और वृद्धि : मेथी दाना की सब्जी खाने से अविकसित और छोटे स्तन बड़े और पुष्ट हो जाते है। साथ ही मेथी दाना को पानी के साथ बारीक पीसकर स्तन की हल्के हाथ से नियमित मालिश भी करनी चाहिए। इन दोनों के करने से स्तन के आकार में वृद्धि होती है। यदि स्तन में दूध सुखाना हो या स्तन में सूजन और दर्द हो तो मेथी की हरी पत्तियां पीस कर स्तन पर लगा कर दो घंटे बाद धो लें। इससे आराम मिल जाता है।

6. दाग-धब्बे : चेहरे के दाग-धब्बों को कम करें मेथी–चेहरे से दाग तथा धब्बों को समाप्त करने के लिए भी मेथी बहुत फायदेमंद होती है. इसका प्रयोग करने के लिए मेथी के दानो को पीस कर उसका लेप बना लें. अब इस लेप को अपने चेहरे पर लगाए. इससे त्वचा कोमल तथा बेदाग बनती है.

7. पाचन तंत्र : मेथी से कई प्रकार से पाचन तंत्र को फायदा पहुंचता है। इससे पेट और आँतों की जलन सूजन आदि में आराम मिलता है। यह पेट और आँतों के अल्सर में आराम दिलाती है । इसके पानी में घुलनशील फायबर आँतों की सफाई करके कब्ज मिटाते है तथा आँतों की शक्ति बढ़ाते है। मेथी में मौजूद पाचक एंजाइम अग्नाशय को अधिक क्रियाशील बना देते हैं। इससे पाचन क्रिया अत्यंत सरल हो जाती है।  इससे भूख खुल कर लगने लगती है। खाने में अरुचि हो जाने पर इससे रुचि जाग्रत हो जाती है। मेथी मेटाबोलिज्म को भी सुधरती है। जिसके कारण कमजोरी दूर होती है। मेथी में लासा होता है जो पाचन से संबधित हर रोग को दूर कर देता है। यह डायरिया और हार्ट बर्न आदि को दूर करती है। इसके अलावा अगर मेथी के दाने को मठ्ठे के साथ मिला कर पिया जाए तो अल्‍सर और एसीडिटी में लाभ होता है। कुछ मेथी के दाने सुबह खाने से पेट के कीडे मरते हैं।

8. पेट के छाले/अल्सर : पेट के छाले ठीक करने के लिए मेथी का उपयोग–पेट के छाले ठीक करने के लिए भी मेथी एक अच्छा उपाय है। इसके लिए दो चम्मच पीसी हुयी मेथी एक कप पानी में उबाल कर मेथी का काढ़ा बना लें. अब इस काढ़े को पीए. इससे पेट के छाले कम होने लगेंगे। पाचन उपचार-डायरिया और हार्टबर्न के अलावा मेथी के रस से पेट और आंत की सभी समस्‍याएं दूर होती हैं। अगर आप अल्‍सर और एसिडिटी को ठीक करना चाहते हैं तो मेथी और मठ्ठे को घोल कर पीएं। सिर्फ यही नहीं अगर आप रोज़ सुबह खाली पेट कुछ मेथी के दानें खाएगें तो पेट के सभी रोग दूर होगें।

9. आँतों के कैंसर से बचाव : मेथी में कैंसर को मिटाने के गुण होते है। मेथी में पाया जाने वाला डिओसजेनिन नामक तत्व आँतों के कैंसर से बचाव करने में सक्षम होता है। इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले सैपोनिन , म्यूसिलेज , पेक्टिन आदि तत्व आँतों के म्युकस मेंब्रेन की रक्षा करते है। इस तरह आंतों पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव से मुक्ति दिलाकर यह कैंसर होने से बचाती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट्स के कारण फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से भी बचाव संभव है।

10. मोटापा : मेथी के दानों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। खाली पेट मेथी दानों को चबाने से एक्सट्रा कैलरी बर्न होती है। सुबह दो गिलास मेथी का पानी पीने से मोटापा दूर होता है। मेथी का पानी बनाने क लिए एक बड़ा चम्मच मेथी के दानों को दो गिलास पानी में रातभर भिगो दें और सुबह इसे छानकर पी लें। 
किडनी भी स्वस्थ : मेथी का पानी  पीने से किडनी भी स्वस्थ होती है।

11. दर्द निवारक : वात रोग, बुखार, गैस को दूर करने के लिए मेथी का उपयोग–शरीर की अनेक समस्याओं को दूर करने के लिए मेथी बहुत ही फायदेमंद होती है. वात रोग, बुखार तथा गैस की समस्या से निपटने के लिए थोड़ी मेथी के दाने लें. अब इन दानों को पीस कर इनका चूर्ण बना लें. इसके बाद इस चूर्ण को एक गिलास छाछ में डालकर पी लें. इससे इस सभी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा. मेथी से करें घुटनों का दर्द कम–घुटनों का दर्द लोगों को काफी परेशान करने वाला दर्द होता है. इस दर्द को समाप्त करने के लिए मेथी दाने को पीस कर बारीक़ चूर्ण बना लें. अब इस चूर्ण को रोजाना सुबह पानी के साथ खाये. इससे घुटनों का दर्द कम होने लगता है.

12. आँखों के काले घेरे : मेथी से आँखों के नीचे का कालापन हटाए-कई बार उम्र बढ़ने या कोई अन्य समस्या होने के कारण हमारी आँखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं. जिसके कारण चेहरा भी बेजान लगने लगता है. इस समस्या को दूर करने के लिए मेथी के दानों को पीस कर उसका पेस्ट बना लें. अब इस पेस्ट को अपने आँखों के नीचे कालेपन पर लगाए. इससे फायदा होगा.
13. बाल बढ़ाने के लिए : बालों को लम्बा करने के लिये मेथी का प्रयोग-लम्बे तथा घने बाल हर किसी को अच्छे लगते हैं. बालों को लम्बा करने के लिए मेथी भी बहुत फायदेमंद होती है. इसका प्रयोग करने के लिए इस के दानों को रात भर पानी में भिंगोकर रख दें. अब सुबह उसे पीसकर बालों में लगाए तथा कुछ देर बाद बालों को धो दें. इससे बाल कुछ समय बाद आपको लम्बे लगने लगेंगे।

14. खांसी और श्वांस : खाँसी से आराम पाने के लिए करें मेथी का प्रयोग-मेथी का सेवन करने से गला साफ होता है. खांसी की समस्या को ठीक करने के लिए मेथी के कुछ दानों को खायें. जिससे खांसी या श्वांस सम्बन्धी समस्याएं कम होने लगती हैं। 

15. मुंह के छाले : मुंह के छाले ठीक करने के लिए मेथी का प्रयोग–मुंह के छालों को कम करने के लिए सबसे पहले मेथी के दानों को पाने में उबाल लें. अब इस पानी से कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले कम होने लगेंगे। 

16. पथरी: पथरी के इलाज में भी मेथी फायदा करती है। इस जादुई औषधि से पथरी पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है।

17. यौन शक्ति/सेक्स पावर: एक सर्वे के मुताबिक मेथी सेक्स पावर को भी बढ़ाने में सक्षम है। इस सर्वे के दौरान मेथी के इस्तेमाल से लोगों की सेक्स क्षमता में एक चौथाई का इजाफा हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक इंडियन करी में मेथी डाली जाती है। यह सीधे आदमियों के सेक्स हार्मोन्स को बढ़ाने का काम करती है। दूसरे अर्थों मे मेथी के सेवन से सेक्स पावर बढती है। इसलिए मेथी का सेवन आपकी यौन क्षमता में अतिशय वृद्धि करता है। यदि मेथी के कुछ दाने रोज लिए जाएं तो मानसिक सक्रियता बढ़ती है। पुरुषों में होने वाली लिंग उत्थान की समस्या इससे हल हो सकती है। इसके अलावा यह टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में इजाफा करके अन्य समस्या को भी ठीक करने में मदद करती है। रात को सोते समय आधा चम्मच पिसा हुआ मेथी दाना तथा आधा चम्मच धनिया पाउडर मिलाकर गर्म दूध के साथ नियमित एक महीने लेने से पुरुषों में यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। ब्रिसबेन स्थित आणविक चिकित्सा केंद्र के अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि भारत में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली मेथी पुरुषों की कामेच्छाओं को काफी अच्छे स्तर तक बढ़ाने में सक्षम है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है।

18. गठिया: यह वात के कारण जॉइंट्स में होने वाले दर्द से तथा गठिया रोग से मुक्ति दिला सकती है। एक चम्मच पिसा हुआ मेथी दाना सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ नियमित लेने से जॉइंट पैन में बहुत आराम आता है। मेथी के लडडू (मेथी, आटा और गुड़ से बनाये जाते है) खाने से भी जोड़ों का दर्द नहीं सताता है। टूटी हुई हड्डी इसके उपयोग से जल्दी जुड़ती है।

19. मेनोपॉज (Menopause=रजोनिवृत्ति): मेनोपोज़ के समय स्त्रियों को कई तरह की परेशानियां होती है जैसे डिप्रेशन, मूड बदलना, क्रेम्प आना, रात को बहुत पसीना आना आदि। मेथी के उपयोग से इनमे कमी हो सकती है। क्योंकि इसें स्त्री हार्मोन इस्ट्रोजन जैसे तत्व होते है। इसके अलावा इससे स्त्रियों को होने वाली अन्य हार्मोन संबंधी परेशानियां भी कम होती है।

20. गले की खराश (Sore Throat): मेथी में पाया जाने वाला म्यूसिलेज नामक तत्व गले की खराश और कफ आदि में आराम दिलाता है। दो कप पानी में दो चम्मच दाना मेथी डालकर उबाल लें। इसे छानकर इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर पियें। इससे गले की खराश, जुकाम, कफ आदि में आराम मिलता है। मेथी उबाल कर छाने हुए पानी से कुल्ला करने से मुँह की दुर्गन्ध मिटती है।

21. बालों के लिए: बालों के लिए मेथी कंडीशनर का काम करती है। इससे रुसी में भी आराम मिलता है। बालों का गिरना कम हो जाता है। दाना मेथी पाउडर को पानी में एक घंटे भिगोकर, बालों की जड़ों में लगा लें। आधा घंटे बाद धो लें। इससे बालों को ये सारे लाभ मिल जाते है। या मेथी दाना नारियल के तेल में उबालकर छान कर रख लें। इस तेल की नियमित मालिश करने से बाल घने और मुलायम होते है।

22. औरतों के ल‌िए मेथी का सेवन (Fenugreek Intake for Women:): वैसे तो मेथी का सेवन दमा से लेकर कामेच्छा तक, कई मामलों में फायदेमंद है, लेकिन महिलाओं के लिए इसका सेवन खास वजह से भी जरूरी है। चाहे मेथी का सेवन साग के रूप में हो या फिर दाने के तौर पर, महिलाओं के लिए मासिक चक्र से जुड़ी समस्याओं के उपचार में यह काफी फायदेमंद माना जाता है।

(1) पीरियड्स में : मेथी में सेपोनिन्स और डायोसजेनिन नामक दो ऐसे तत्व हैं जो शरीर में स्टेरॉयड्स (Steroids=Steroids are synthetic hormones designed to treat medical ailments…) व एस्ट्रोजन (What Is Estrogen? The hormone that controls a woman's monthly cycle, estrogen, gets a lot of attention in women's lives, but it is actually a hormone that affects both men and women.) की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से पीरियड्स के दौरान पड़ने वाले क्रैंप और पेट दर्द में आराम मिलता है।
(2) गर्भावस्था में: इसमें आयरन की मात्रा अधिक है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन जच्चा-बच्चा की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।
(3) सेक्स की इच्छा बढ़ाता है: मेथी में मौजूद सेपोनिन्स और डायोसजेनिन शरीर में सेक्स हार्मोन बढ़ाते हैं, जिससे महिलाओं की कामेच्छा बढ़ती है।
(4) मेनो़पॉज में: मेथी में मौजूद डायोसजेनिन और आइसोफ्लेवोन्स मेनोपॉड के दौरान महिलाओं के मूड को नियंत्रित करने में मददगार माना जाता है।
(5) हार्मोनल बैलेंस: मेथी में मौजूद डायोसजेनिन महिलाओं के शररीर में हार्मोनल संतुलन बनाए रखता है। इससे हार्मोन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।

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कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111


India TV Lifestyle Desk [ Updated 23 Dec 2015, 21:39:27 ]

नई दिल्ली: अगर आपको बहुत अधिक थकान है और प्यास हो और आपको कोई एक गिलास गन्ने का रस देदे तो वाह क्या बात है। इसके पीते ही आपकी थकान गायब हो जाएगी। आपको शायद ये बात न पता हो कि एक गिलास गन्ने का रस आपके सेहत के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।


गन्नें के रस में अनेक औषधि के गुण मौजूद होते है। जो आपको कई बीमारियों से बचाता है। इसको पीने से गंभीर से गंभीर बीमारियों से बचाव होता है। इसमें अधिक मात्रा में कैल्शियम, क्रोमियम, कोबाल्ट, मैग्निशियम, मैगनीज, फॉस्फोरस, पोटैशियम और जिंक जैसे मिनिरल्स हैं।

इसके साथ ही इसमें आयरन और विटामिन ए, सी, बी1, बी2, बी3, बी4, बी5 और बी6, प्रोटीन एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर अच्छी मात्रा में हैं। साथ ही इसे पीने से आपके शरीर की के पोषक तत्व खून के बहाव को सही रखते है। जानइए इसे पीने से होने वाले फायदों के बारें में।

तुंरत ऊर्जावान बनाए
गन्ने के रस में प्राकृतिक तौर पर शुगर है जो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ाती है और यह पानी की कमी को पूरा करता है। इसके सेवन के तुरंत बाद आप ताजा और ऊर्जावान महसूस करेंगे।

कैंसर से करें बचाव
गन्ने के रस में अधिक मात्रा में कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन और मैग्नेशियम पाया जाता है। जो इसके स्वाद को खारा करती है। इसी कारण ये तत्व आपको कैंसर होने से बचाते है। यह तत्व कई तरह के कैसंर से लडते है जैसे कि प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर आदि।

पीलिया से लाभ दिलाए
गन्ने के रस में मौजूद तत्व आपको पीलिया से भी बचाते है। अगर आपको यह समस्या है तो एक गिलास में गन्न का रस और नींबू का रस डालकर पीएं। जल्द ही आपको लाभ मिलेगा।

मुहासें से दिलाए निजात
अगर आपके चेहरे में मुहासे है तो गन्ने का रस काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इसे पीने से त्वचा को अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड मिलता है। जिससे आपको मुहासे नही होते है।

किडनी के लिए फायदेमंद
गन्ने के रस में अधिक मात्रा में प्रोटीन होता है। जो आपको किडनी में संक्रमण, युरीन इन्फेक्शन, एसटीडी और पत्थर जैसी समस्याओं से निजात दिलाता है। अगर आपको भी कभी यह समस्या हो जाती है तो गन्ने के रस में नींबू और नारियल पानी मिलाकर पीने से आपको आराम मिल सकता है।

पाचन को रखें ठीक
गन्ने के रस में अधिक मात्रा में पोटैशियम पदार्थ पाया जाता है जो आपके पाचनतंत्र को ठीक रखने में सहायक है। असको पीने से पाचन के साथ-साथ कब्ज की भी समस्या से भी निजात मिल जाता है।

मोटापा को भगाए
अगर आपको अपना वजन कम करना है तो यह काफी फायदेमंद हो सकता है। गन्ने का रस शरीर में प्राकृतिक शक्कर पहुंचाकर और खराब कॉलेस्ट्रोल को कम करके आपका वजन कम करने में सहायक होता है। इससे घुलनशील फाइबर होने के कारण वजन संतुलित रहता है। जिससे आपका वजन नही बढ़ता है।

डायबिटीज
अगर आपको डायबिटीज का समस्या है तो गन्‍ने का जूस आपको लाभ पंहुचा सकता है। इसमें एैसे तत्व पाे जाते है जो आपके ब्‍लड ग्‍लूकोज लेवल को बैलेंस कर के रखता है। जिससे आपको मधुमेह की समस्या से आराम मिलता है।

ह्रदय संबंधी रोगों से बचाए
गन्ने के रस में रस दिल की बीमारियों जैसे दिल के दौरे के लिए भी बचावकारी है। गन्ने का रस से शरीर में कॉलेस्ट्रोल और ट्राईग्लिसराइड का स्तर गिरता है। इस तरह धमनि‍यों में फैट नहीं जमता और दिल व शरीर के अंगों के बीच खूब का बहाव अच्छा रहता है।

सर्दी-जुखाम को सही करें
अगर आपको सर्दी-जुखाम की समस्या है तो गन्ने का रस काफी फायदेमंद हो सकता है। इसमें मौजूद तत्व तुरंत आपको आराम देगे।

Source : http://www.khabarindiatv.com/lifestyle/health-benifit-of-sugarcane-juice-in-hindi-466693
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नीता रावत
आयरन व कार्बोहाइड्रेट की प्रचुर मात्रा होने के कारण गन्ने का रस तुरंत शक्ति व स्फूर्ति प्रदान करता है। इसमें ढेर सारे खनिज तत्व व ऑर्गेनिक एसिड होने के कारण इसका औषधीय महत्व भी है। गन्ने का रस पेट, दिल, दिमाग, गुर्दे व आंखों के लिए विशेष लाभदायक है। गन्ने का रस हमेशा ताजा व छना हुआ ही पीना चाहिए।
  1. बुखार होने पर इसका सेवन करने से बुखार जल्दी उतर जाता है।
  2. एसीडिटी के कारण होने वाली जलन में भी गन्ने का रस लाभदायक होता है। 
  3. गन्ने के रस का सेवन यदि नींबू के रस के साथ किया जाए तो पीलिया जल्दी ठीक हो जाता है। 
  4. दुबले लोगों को भी गन्ने का रस काफी फायदा करता है। 
  5. गन्ने को दांतों से चूसकर खाने से कमजोर दांत मजबूत होते हैं।

Source : http://hindi.webdunia.com/article/health-care/%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0-111052000027_1.htm
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गन्ने का रस /sugarcane juice

गर्मी के मौसम में गन्ने (sugarcane) का ताज़ा ठंडा रस पीने का मजा ही अलग है। गन्ने का रस केवल आपको तपती गर्मी से ही नहीं बचाता है बल्कि कई बीमारियों से भी दूर रखता है। इसे पीने से आपको भरपूर ऊर्जा मिलती है। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने की वजह से ये डायबिटीज मरीजों के लिए भी अच्छा होता है। ये आपको डीहाइड्रैशन से भी बचाता है।

गन्ने का रस बहुत ही सेहतमंद और गुणकारी पेय है. इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नेशियम और फॉस्फोरस जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं. इनसे हड्डि‍यां मजबूत बनती हैं और दांतों की समस्या भी कम होती है. गन्ने के रस के ये पोषक तत्व शरीर में खून के बहाव को भी सही रखते हैं. वहीं इस रस में कैंसर व मधुमेह जैसी जानलेवा बीमारियों से लड़ने की ताकत भी होती है.
गन्ने के रस के फायदे / benefits of sugarcane juice
1.कैंसर से बचाव-

गन्ने के रस में कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन और मैग्नेशियम की मात्रा इसके स्वाद को क्षारीय (खारा) करती है, इस रस में मौजूद यह तत्व हमें कैंसर से बचाते हैं. गन्ने का रस कई तरह के कैंसर से लड़ने में सहायक है. प्रोस्टेट और स्तन (ब्रेस्ट) कैंसर से लड़ने में भी इसे कारगर माना जाता है.

2.तुरंत ताकत के लिए-
गन्ने के रस में प्राकृतिक तौर पर शुगर है जो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ाती है और यह पानी की कमी को पूरा करता है। इसके सेवन के तुरंत बाद आप ताजा और ऊर्जावान महसूस करेंगे। गर्मियों में डीहाइड्रेशन से बचाने में मददगार है।

3.पाचन को ठीक रखता है-
गन्ने के रस में पोटैशियम की अधिक मात्रा होने की वजह से यह शरीर के पाचनतंत्र के लिए बहुत फायदेमंद है. यह रस पाचन सही रखने के साथ-साथ पेट में संक्रमण होने से भी बचाता है. गन्ने का रस कब्ज की समस्या को भी दूर करता है.

4.ह्रदय रोगों से बचाव-

यह रस दिल की बीमारियों जैसे दिल के दौरे के लिए भी बचावकारी है. गन्ने का रस से शरीर में कॉलेस्ट्रोल और ट्राईग्लिसराइड का स्तर गिरता है. इस तरह धमनि‍यों में फैट नहीं जमता और दिल व शरीर के अंगों के बीच खूब का बहाव अच्छा रहता है.
5.वजन कम करने में सहायक-

गन्ने का रस शरीर में प्राकृतिक शक्कर पहुंचाकर और खराब कॉलेस्ट्रोल को कम करके आपका वजन कम करने में सहायक होता है. इस रस में घुलनशील फाइबर होने के कारण वजन संतुलित रहता है.
6.त्वचा में निखार लाता है-

गन्ने के रस में अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड (AHAs) पदार्थ होता है, जो त्वचा संबंधित परेशानियों को दूर करता है और इसमें कसाव लेकर आता है. AHA मुहांसों से भी राहत पहुंचाता है, त्वचा के दाग कम करता है, त्वचा को नमी देकर झुर्रियां कम करता है. गन्ने के रस को त्वचा पर लगाएं और सूखने के बाद पानी से धो लें. बस इतना प्रयास करने पर ही आपकी त्वचा खिली-खि‍ली और साफ नजर आएगी.

7.किडनी के लिए फायदेमंद-

गन्ने के रस में प्रोटीन अच्छी मात्रा में है। इसमें नींबू और नारियल पानी मिलाकर पीने से किडनी में संक्रमण, युरीन इन्फेक्शन, एसटीडी और पत्थर जैसी समस्याओं में आराम मिल सकता है।

8.रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है-

गन्ने के रस में एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में हैं जो शरीर की प्रतिरोक्षी क्षमता को मजबूत करते हैं। यह लिवर से जुड़े संक्रमण और पीलिया के मरीजों के लिए भी इसलिए ही फायदेमंद माना जाता है।

9.दांतों के लिए फायदेमंद-

इसमें मिनिरल्स अधिक होते हैं इसलिए यह मुंह से संबंधित समस्या जैसे – दांतों में सड़न, सांसों की दुर्गंध से बचाव में मददगार है। सफेद चमकदार दांतों के लिए गन्ने के रस का सेवन करें।

10.बुखार से बचाव-

फेब्रा‌इल डिसॉडर यानी प्रोटीन की कमी से बार-बार बुखार से बचाव के लिहाज से गन्ने का रस काफी फायदेमंद है।

11.लीवर को स्वस्थ रखता है-

गन्ना आपका बिलीरुबिन (bilirubin) लेवल बनाए रखता है। इसलिए आयुर्वेद में इसका पीलिया के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। अध्ययन के अनुसार, गन्ने का रस लीवर को डैमेज होने से बचाने में सहायक है। रोजाना एक गिलास रस पीने से पीलिया से पीड़ितों को लाभ होता है।
Source : http://onlyayurved.com/drinks/sugarcane-juice-benefits-in-hindi/
:शॉर्ट नोट्स:
1. इसका सम्पूर्ण भाग जड़ समेत उपयोग किेया जाता है।
2. यह पीलिया और हेपेटाईटिस बी एवं सी के लिये रामबाण है।
3. यह लीवर की सबसे प्रमाणिक औषधि है।
4. साल में एक माह इसका काढा पीने से सालभर लीवर की सुरक्षा होती है।
5. मु्ह/मसूडों के छालों में यह अत्यन्त लाभकारी है।
6. यदि पेट में पीड़ा का कारण समझ नहीं आये तो भुई आंवला का काढ़ा बनाकर पी लें आराम हो जाएगा।
7. भुई आंवला में काली मिर्च मिलाकर सेवन करें। इससे आप मधुमेह जैसे खतरनाक बीमारी से मुक्त हो जाएँगे।

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Bhui Aanvala ke Ghrelu Deshi Upchar |
भुई आंवला के घरेलू देशी उपचार |
Home Deshi Remedies by Bhui Amla

भुई आंवले का पेड़ नहीं बल्कि पौधा होता है जिस प्रकार बारिश के मौसम में खरपतवार होते हैं ठीक उसी प्रकार सभी स्थानों पर भुई आंवले का पौधा दिखाई देता है. आंवले की पत्तियों के नीचे छोटे – छोटे आंवले फल के रूप में लगते हैं.

1. लीवर बढ़ना ( Liver Swelling ) : भुई आंवला जिगर के रोग को ठीक करने की सबसे ज्यादा विश्वसनीय दवाई है. यदि आपका लीवर बढ़ गया है या सूज गया है तो भुई आंवले का काढ़ा बनाकर सेवन करें. CLICK HERE TO KNOW आंवले का आयुर्वेद में महत्व ... 

2. Bilurubin बढ़ना तथा पीलिया रोग ( Jaundice and Bilurubin Swelling ) : यदि आपका Bilurubin अधिक हो गया है या आपको पीलिया हो गया है तो इस पेड़ को जड़ समेत ही उखाड लें, इसका काढ़ा बना लें, इस काढ़े को रोजाना प्रात: तथा शाम को पियें या सूखे हुए पंचांग का 2-3 ग्राम काढ़ा बना लें और प्रात: तथा शाम को पियें. इसे पीने से आपका Bilurubin सही हो जाएगा साथ ही आपका पीलिया रोग भी ठीक हो जाएगा.
3. जिगर में सूजन ( Hepatitis ) : यदि आपके जिगर में सूजन आ गई है तो थोड़ा भुई आंवला का रस, श्योनाक का रस तथा पुनर्नवा के ताजे रस का सेवन करें या पंचांग का काढ़ा पिएं इससे आपके जिगर की सूजन खत्म हो जाएगी.
4. खांसी ( Cough ) : जिसे खांसी है उसे भुई आंवला तथा तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए इससे खांसी ठीक हो जाती है. CLICK HERE TO KNOW खट्टा मीठा मौसमी का फल ... 
भुई आंवला के घरेलू देशी उपचार
5. शरीर में पाए जाने वाले अवयव ( Compound Found in Body ) : शरीर में ऐसे अनेक जहरीले अवयव पाए जाते है जो शरीर के लिए बहुत ही हानिकारक होते हैं. अगर आप चाहते हैं कि आपके शरीर में पाए जाने वाले विविध अवयव नष्ट हो जाएं तो आप भुई आंवला का सेवन करें.
6. मुंह के छाले ( Cold Sores ) : कई बार मुंह में छाले हो जाते हैं जिसके कारण खाना खाने में बहुत ही कठिनाई होती है. क्या आपके मुंह में भी छाले हो गये हैं, जिसके कारण आप कुछ भी नहीं खा पाते तो मुंह के छालों को ठीक करने के लिए भुई आंवला के पत्तों को चबाएं. इसे चबाने से आपके मुंह के छाले ठीक हो जाएँगे और आपको किसी भी चीज को खाने में कठिनाई महसूस नहीं होगी.
7. मसूढ़े पकना ( Gum Rankle ) : मसूढ़ों के पक जाने पर भुई आंवला का सेवन बहुत ही लाभदायक होता है.
8. सीने में सूजन तथा गांठ ( Chest Swelling and Lumps ) : जिसके सीने में सूजन आ गई है या गांठ बन गई है उसे भुई आंवला के पत्तों को पीसकर इसका लेप लगाना चाहिए. इसके लेप से सीने की सूजन दूर हो जाती है.
9. ज्वर ( Fever ) : अगर आपको बहुत दिनों से ज्वर है या भूख नहीं लगती तो थोड़ा भुई आंवला लें, मुलेठी लें, गिलोय लें, इन सभी को मिलाकर काढ़ा बना लें, रोजाना इस काढ़े का सेवन करें इससे आपका ज्वर ठीक हो जाएगा साथ ही आपको भूख भी लगने लगेगी.

10. जलशोथ में लीवर का कार्य न करना ( Damaged Liver in Dropsy ) : कई लोगों की जलशोथ में लीवर अपना काम करना बंद कर देते हैं. ऐसी स्थिति में वे लोग जिनकी जलशोथ में लीवर ने काम करना बंद कर दिया है, 4-5 ग्राम भुई आंवला लें, 1/2 ग्राम कुटकी लें, 1-2 ग्राम सुखी हुई अदरक लें, इन सभी चीजों को मिलाकर काढ़ा बना लें, काढ़े को हर रोज सुबह–शाम पियें. इस काढ़े को पीने से आपके जलशोथ में लीवर अपना काम करना आरंभ कर देंगे.
11. किडनी में सूजन तथा रोग संचार ( Kidney Inflammation and Infection ) : किडनी की सूजन तथा रोग संचार (infection) को दूर करने के लिए भुई आंवला का काढ़ा बनाकर पियें. इसे पीने से किडनी की सूजन तो दूर हो ही जाती है साथ ही इसका रोग संचार (infection) भी दूर हो जाता है.
12. प्रमेह तथा प्रदर रोग ( Gonorrhea and Leucorrhoea ) : प्रदर रोग तथा प्रमेह जैसी घातक बीमारी से बचने के लिए भुई आंवला का सेवन किया जाता है.
13. पेट का दर्द ( Stomach Pain ) : यदि आपके पेट में पीड़ा हो रही है और समझ नहीं आ रहा है कि पीड़ा किस कारण से हो रही है तो चिंता ना करें, भुई आंवला का काढ़ा बनाकर पी लें इससे आपके पेट के दर्द में आराम हो जाएगा.
14. मधुमेह (Sugar): मधुमेह एक बहुत ही खतरनाक रोग है. जिस व्यक्ति को यह रोग होता है उसके मुंह में खुजली होती है, उसे बहुत ज्यादा भूख और प्यास तो लगती है, किन्तु ज्यादा खाना खाने के बाद भी वह व्यक्ति कमजोर रहता है, बिना किसी वजह के व्यक्ति का वजन कम होने लगता है, उसे थकान महसूस होती है, उसका मन विचलित रहता है, पीड़ित व्यक्ति को बहुत ज्यादा पेशाब आता है, उसके पेशाब में शुगर की मात्रा होती है जिसके कारण वह व्यक्ति जिस जगह पर पेशाब करता है उस स्थान पर चीटियाँ लग जाती हैं, उनके शरीर में छाले तथा फोड़े–फुंसी बार–बार हो जाते हैं जो जल्दी ठीक नहीं होते, शरीर में लगातार खुश्की होती है तथा शरीर के जिस अंग पर खुश्की होती है वहां के आस–पास के अंग सुन्न पड़ जाते हैं, आँखों की रौशनी बिना किसी वजह के कम हो जाती है, संतानोत्पादक क्षमता कम हो जाती है तथा महिलाओं का पीरियड्स स्राव ठीक से नहीं होता या बंद हो जाता है.
उपचार ( Treatment ) : मधुमेह से बचने के लिए भुई आंवला में काली मिर्च मिलाकर सेवन करें इससे आप मधुमेह जैसे खतरनाक बीमारी से मुक्त हो जाएँगे. यदि मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति को फोड़े–फुंसी होने पर घाव जल्दी ठीक नहीं हो रहा है तो उसे भुई आंवला का लेप बनाकर घाव पर लगाना चाहिए.
15. Pus cells बढ़ना (Pus Cells Increase): यदि आपका Pus cells बढ़ गया है तो आप भुई आंवला का सेवन करें. इससे आपका pus cells सामान्य हो जाएगा.
16. खुश्की (Dryness): अगर आपके शरीर के किसी भाग में खुश्की (खुजली) हो रही है तो भुई आंवला के पत्तों का रस अपने शरीर के उस भाग पर मलें जहाँ आपको खुजली हो रही है. इसे मलने से कुछ ही देर में आपकी खुश्की बंद हो जाएगी.
17. रक्त प्रदर रोग (Blood Leucorrhoea): रक्त प्रदर रोग अनेक कारणों से जैसे–एक दिन में 3-4 बार शयन करने के कारण, लाला मिर्च, खटाई वाली तथा मसालेदार चीजों जैसे अंडा, शराब तथा मांस आदि ज्यादा मात्रा में खाने से, अधिक गर्भपात होने से, आत्मिक जख्म के कारण, ज्यादा घबराहट तथा उदासी के कारण तथा ज्यादा वजन उठाने के कारण रक्त प्रदर रोग होता है. इस रोग में रज के साथ रक्त का स्राव होता है, कई बार गाढे रक्त का भी स्राव होता है. रक्त प्रदर में महिलाओं की कमर तथा पेट के नीचे वाले भाग में पीड़ा होती है, हाथ तथा पैरों में सूजन आ जाती है, घबराहट होती है तथा शरीर में धीरे-धीरे कमजोरी आ जाती है.

उपचार ( Treatment ) : रक्त प्रदर रोग से छुटकारा पाने के लिए भुई थोड़ा आंवला का रस लें, कुछ दूब का रस लें, इन दोनों को मिला लें, कुछ दिनों तक हर रोज सुबह शाम दो से तीन चम्मच पियें. इसे पीने से कुछ ही दिनों में आपका रक्त प्रदर रोग ठीक हो जाएगा.

18. आँतों का रोग संचार अथवा Ulcerative Colitis ( Infection in Intestines and Ulcerative Colitis ) : यदि आपको आँतों का रोग संचार अथवा Ulcerative Colitis है तो भुई आंवला तथा दूब का पौधा जड़ समेत ही उखाड़ लें, तीन – चार दिन तक लगातार भुई आंवला तथा दूब की जड़ का रस पियें. इससे आपका रक्त स्राव बंद हो जाएगा. 
भुई आंवला के रोगों में अन्य घरेलू देशी उपचार को जानने के लिए आप तुरंत नीचे कमेंट कर जानकारी हासिल कर सकते हो.

भूमि आंवला

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भूमि आंवला लीवर के रोगियों के लिये वरदान

भूमि आंवल लीवर की सूजन, सिरोसिस, फैटी लिवर, बिलीरुबिन बढ़ने पर, पीलिया में, हेपेटायटिस B और C में, किडनी क्रिएटिनिन बढ़ने पर, मधुमेह आदि में चमत्कारिक रूप से उपयोगी हैं।

यह  पौधा लीवर व किडनी के रोगो मे चमत्कारी लाभ करता है। यह बरसात मे अपने आप उग जाता है और छायादार नमी वाले स्थानो पर पूरा साल मिलता है। इसके पत्ते के नीचे छोटा सा फल लगता है जो देखने मे आंवले जैसा ही दिखाई देता है। इसलिए इसे भुई आंवला कहते है। इसको भूमि आंवला या भू धात्री भी कहा जाता है। यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है। इसका सम्पूर्ण भाग, जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके गुण इसी से पता चल जाते हैं के कई बाज़ीगर भूमि आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं।

बरसात मे यह मिल जाए तो इसे उखाड़ कर रख ले व छाया मे सूखा कर रख ले। ये जड़ी बूटी की दुकान पंसारी आदि के पास से आसानी से मिल जाता है।

साधारण सेवन मात्रा : आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ दिन मे 2-4 बार तक। या पानी मे उबाल कर छान कर भी दे सकते हैं। इस पौधे का ताज़ा रस अधिक गुणकारी है।

लीवर की सूजन, बिलीरुबिन और पीलिया में फायदेमंद : लीवर की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है। लीवर बढ़ गया है या या उसमे सूजन है तो यह पौधा उसे बिलकुल ठीक कर देगा। बिलीरुबिन बढ़ गया है , पीलिया हो गया है तो इसके पूरे पौधे को जड़ों समेत उखाडकर, उसका काढ़ा सुबह शाम लें। सूखे हुए पंचांग का 3 ग्राम का काढ़ा सवेरे शाम लेने से बढ़ा हुआ बाईलीरुबिन ठीक होगा और पीलिया की बीमारी से मुक्ति मिलेगी। पीलिया किसी भी कारण से हो चाहे पीलिया का रोगी मौत के मुंह मे हो यह देने से बहुत अधिक लाभ होता है। अन्य दवाइयो के साथ भी दे सकते (जैसे कुटकी/रोहितक/भृंगराज) अकेले भी दे सकते हैं। पीलिया में इसकी पत्तियों के पेस्ट को छाछ के साथ मिलाकर दिया जाता है। वैकल्पिक रूप से इसके पेस्ट को बकरी के दूध के साथ मिलाकर भी दिया जाता है। पीलिया के शुरूआती लक्षण दिखाई देने पर भी इसकी पत्तियों को सीधे खाया जाता है।

कभी नहीं होगी लीवर की समस्या : अगर वर्ष में एक महीने भी इसका काढ़ा ले लिया जाए तो पूरे वर्ष लीवर की कोई समस्या ही नहीं होगी। LIVER CIRRHOSIS जिसमे यकृत मे घाव हो जाते हैं। यकृत सिकुड़ जाता है उसमे भी बहुत लाभ करता है। Fatty LIVER जिसमे यकृत मे सूजन आ जाती है। पर बहुत लाभ करता है।

हेपेटायटिस B और C में. Hepatitis B – Hepatitis C : हेपेटायटिस B और C के लिए यह रामबाण है। भुई आंवला +श्योनाक +पुनर्नवा ; इन तीनो को मिलाकर इनका रस लें। ताज़ा न मिले तो इनके पंचांग का काढ़ा लेते रहने से यह बीमारी बिलकुल ठीक हो जाती है।

डी टॉक्सिफिकेशन : इसमें शरीर के विजातीय तत्वों को दूर करने की अद्भुत क्षमता है।

मुंह में छाले और मुंह पकने पर : मुंह में छाले हों तो इनके पत्तों का रस चबाकर निगल लें या बाहर निकाल दें। यह मसूढ़ों के लिए भी अच्छा है और मुंह पकने पर भी लाभ करता है।

स्तन में सूजन या गाँठ : स्तन में सूजन या गाँठ हो तो इसके पत्तों का पेस्ट लगा लें पूरा आराम होगा।

जलोदर या असाईटिस : जलोदर या असाईटिस में लीवर की कार्य प्रणाली को ठीक करने के लिए 5 ग्राम भुई आंवला +1/2 ग्राम कुटकी +1 ग्राम सौंठ का काढ़ा सवेरे शाम लें।


खांसी : खांसी में इसके साथ तुलसी के पत्ते मिलाकर काढ़ा बनाकर लें .

किडनी : यह किडनी के इन्फेक्शन को भी खत्म करती है। इसका काढ़ा किडनी की सूजन भी खत्म करता है। SERUM CREATININE बढ़ गया हो, पेशाब मे इन्फेक्शन हो बहुत लाभ करेगा।

स्त्री रोगो में : प्रदर या प्रमेह की बीमारी भी इससे ठीक होती है। रक्त प्रदर की बीमारी होने पर इसके साथ दूब का रस मिलाकर 2-3 चम्मच प्रात: सायं लें। इसकी पत्तियाँ गर्भाधान को प्रोत्सहित करती है। इसकी जड़ो एवं बीजों का पेस्ट तैयार करके चांवल के पानी के साथ देने पर महिलाओ में रजोनिवृत्ति के समय लाभ मिलता है।

पेट में दर्द : पेट में दर्द हो और कारण न समझ आ रहा हो तो इसका काढ़ा ले लें। पेट दर्द तुरंत शांत हो जाएगा। ये पाचन प्रणाली को भी अच्छा करता है।

शुगर में : शुगर की बीमारी में घाव न भरते हों तो इसका पेस्ट पीसकर लगा दें . इसे काली मिर्च के साथ लिया जाए तो शुगर की बीमारी भी ठीक होती है।

पुराना बुखार : पुराना बुखार हो और भूख कम लगती हो तो , इसके साथ मुलेठी और गिलोय मिलाकर, काढ़ा बनाकर लें। इसका उपयोग घरेलू औषधीय के रूप में जैसे ऐपेटाइट, कब्ज. टाइफाइट, बुखार, ज्वर एवं सर्दी किया जाता है। मलेरिया के बुखार में इसके संपूर्ण पौधे का पेस्ट तैयार करके छाछ के साथ देने पर आराम मिलता है।

आँतों का इन्फेक्शन : आँतों का इन्फेक्शन होने पर या अल्सर होने पर इसके साथ दूब को भी जड़ सहित उखाडकर , ताज़ा ताज़ा आधा कप रस लें . रक्त स्त्राव 2-3 दिन में ही बंद हो जाएगा .

अन्य उपयोग :
  1.  खुजली होने पर इसके पत्तों का रस मलने से लाभ होता है।
  2.  इसे मूत्र तथा जननांग विकारों के लिये उपयोग किया जाता है।
  3.  प्लीहा एवं यकृत विकार के लिये इसकी जडों के रस को चावल के पानी के साथ लिया जाता है।
  4. इसे अम्लीयता, अल्सर, अपच, एवं दस्त में भी उपयोग किया जाता है।
  5. इसे बच्चों के पेट में कीडे़ होने पर देने से लाभ पहुँचाता है।
  6. इसकी पत्तियाँ शीतल होती है।
  7. इसकी जडों का पेस्ट बच्चों में नींद लाने हेतु किया जाता है।
  8. इसकी पत्तियों का पेस्ट आंतरिक घावों सुजन एवं टूटी हड्डियो पर बाहरी रूप से लगाने में किया जाता है।
  9. एनीमिया, अस्थमा, ब्रोकइटिस, खांसी, पेचिश, सूजाक, हेपेटाइटिस, पिलिया एवं पेट में ट्यूमर होने की दशा में उपयोग किया जा सकता है।
इसका कोई साइडेफेक्ट नहीं है :
लीवर व किडनी रोगियों के लिए विशेष : लीवर व किडनी के रोगी को खाने मे घी तेल मिर्च खटाई व सभी दाले बंद कर देनी चाहिए। मूंग की दाल कम मात्रा मे ले सकते हैं। मिर्च के लिए कम मात्रा मे काली मिर्च व खटाई के लिए अनारदाना प्रयोग करना चाहिए।भोजन मे चावल का अधिक प्रयोग करना चाहिए। हरे नारियल का पानी बहुत अच्छा है।

भोजन :–
1- सभी किस्म की दाले बंद कर दे। केवल मूंग बिना छिलके की दाल ले सकते।
2-लाल मिर्च, हरी मिर्च, अमचूर, इमली, गरम मसाला और पैकेट का नमक बंद कर दे।
3- सैंधा नमक और काली मिर्च का प्रयोग करे बहुत कम मात्रा मे।
4- यदि खटाई की इच्छा हो खट्टा सूखा अनारदाना प्रयोग करे।
5- प्रतिदिन लगभग 50 ग्राम किशमिश/दाख/ मुनक्का (सूखा अंगूर) , खजूर व सुखी अंजीर पानी मे धो कर खिलाए।
6- चावल उबालते समय जो पानी (माँड़) निकलता है वह ले। वह स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है।
7- गेहू का दलिया, लौकी की सब्जी, परवल की सब्जी दे
8- भिंडी, घुइया (अरबी), कटहल आदि न खाए।
9- सफ़ेद पेठा (कूष्माण्ड जिसकी मिठाई बनाई जाती है) वह मिले तो उसका रस पिए व उसकी सब्जी खाए। पीले रंग का पेठा जिसे काशीफल या सीताफल कहते हैं वह न खाए।
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FRIDAY, AUGUST 24, 2012


आजकल देश में लीवर बढ़ने की समस्या बड़ी तेजी से फैलती जा रही है . ये रोग लीवर सोरायसिस, लीवर फेल्ड, लीवर पेशेंट, आदि कई रूपों में दिखाई दे रहा है। एसिडिटी, हाजमा खराब होना इसके प्राथमिक लक्षण हैं. उलटी दस्त, पानी तक हज़म न होना सीरियस कंडीशन की तरफ इशारा करते हैं. हालांकि इससे बचने के तो कई सारे उपाय हैं, लेकिन सबसे सरल उपाय मैं आपको आज बताती हूँ।
एक पौधा होता है भुई आंवला. ये इसी मौसम की पैदावार है -

इसकी पत्तियाँ पहचान लीजिये. इसकी लम्बाई मुश्किल से एक या डेढ़ फीट होती है. आपको पेट की कोई भी बीमारी हो या न हो, अगर ये पौधा दिख जाए तो पूरा उखाड़ लीजिये और धोकर चबा जाइए। इसका वैज्ञानिक नाम है- Phyllanthus Niruri इसमें फ़ाइलैन्थीन, हाइपोफ़ाइलैन्थीन, विटामिन-सी, क्वेरसैट्रीन, लिनोलिक एसिड, लिनोलेनिक एसिड, सैक्लोफ्लेवान, रिसीनालिक एसिड, एस्त्रोगैलिन क़्वेरसैट्रीन, लिगनान आदि रासायनिक तत्व पाए जाते हैं।

अब इसके अन्य सदुपयोग सुनिए----
मलेरिया-----अगर मलेरिया हो जाय तो पूरा पौधा उखाड़ कर उसका काढा बनाकर पी लीजिये। दिन में दो बार, दो- दो- पौधे का काढा .
सुगर----आपको डायबीटीज ज्यादा परेशान कर रही हो तो 20 ग्राम इस पौधे का चूर्ण और 20 दाने काली मिर्च का चूर्ण दिन में एक बार पानी से निगल लीजिये ,एक माह लगातार, फिर देखिये फायदा।
खुजली-पूरे पौधे की चटनी पीस लीजिये उसमे सेंधा नमक मिलाइए और खुजली वाली जगह पर लेप कर लीजिये ।
प्रदर----किसी भी तरीके का प्रमेह या प्रदर हो तो या तो भूमि आमला के जड़ का काढा पीजिये या इसके बीजों का चूर्ण 2 चुटकी, चावल के पानी में मिला कर पीजिये।
दस्त ----किसी को दस्त की बहुत पुरानी बीमारी हो तो पूरे पौधे के काढ़े में आधा चम्मच मेथी का चूर्ण मिलाकर पी लीजिये।
खांसी---इस पौधे का काढा पुरानी खांसी और सांस की बीमारियों में भी बहुत तेज फायदा पहुंचाता है। दिन में दो बार पीना चाहिये।
हम फिर से लीवर पर आते हैं - लीवर के मरीजों को मकोय के पत्तो का रस 2 चम्मच और नीम के पत्तों का रस दो चम्मच सुबह, दोपहर शाम लेना चाहिए, क्रांतिकारी परिवर्तन दिखाई देगा।
** इन्हें 250 ग्राम गुड एक दिन में खा लेना चाहिये, भले खाना खाने के लिए पेट में जगह न बचे।
** और पानी तो खैर हर आधे घंटे पर 150 ग्राम पी ही लेना चाहिए, भले ही प्यास न लगे।
चित्र गूगल से साभार 
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Bhumi amla medicinal plant uses and pictures

BY ANOOP SHARMA · JULY 13, 2015
Bhumi amla medicinal plant uses and pictures (Phyllanthus niruri)

Since time immemorial, Bhumi Amla has been used as a medicinal plant. It is an annual herb and as a whole used in various treatments. It is famous for its anti-viral activities across the world. It has been seen growing in coastal areas. It looks like Amla and grows 50-70cm high. Hence of Amla like appearance and short height, it is called as Bhumi Amla. Because of its low harvest in the climatic situation, it has to go through the shortage. The seeds can be sown from late April to late May. After 3 months, the crops get ready for harvest. The plant can be described as analgesic and digestive.

Bhumi amla Plant / Phyllanthus niruri

The genus Phyllanthus means leaf and flower. The flowers and seeds are seemed to be united with the leaves. The leaves are small and flowers are whitish green.

Common name

Country gooseberry

Botanical name

Family- Euphorbiaceae

Botanical name- Phyllanthus Niruri
Geological distribution of Bhumi Amla

The plant is mostly seen in India, China, Philippines, Cuba, Nigeria, Guam, and West Africa, America. In India, it grows as a weed in rainy season in Punjab, Uttar Pradesh, Tamil Nadu, Maharashtra, Sikkim, and Odisha. This is a tropical weed and can survive during high rainfall.

Bhumi amla Fruit / Phyllanthus niruri Fruit
Medicinal use of Bhumi Amla

Bhumi Amla is a medicinal plant used in India. It has several medicinal properties such as hepatoprotective, antiviral, anticancer, anti-diabetic, antibacterial and anti-inflammatory properties.

It cures inflammation of the liver. The extract of the plant is used to cure Hepatitis A, Hepatitis B, and Hepatitis C. Specialists expect it to cure AIDS in the days to come.
It gives relief from jaundice, dyspepsia, ulcers, wounds, chronic dysentery, diabetes, dropsy and menorrhagia. Because of its bitter, cold and astringent nature; it is useful for cough, asthma and spleen disorder.
A paste of Bhumi Amla plant can be used to get relief from swelling of breasts.
The juice of the leaves can be used for abdominal pain. The dry powder of Bhumi Amla mixed with black pepper can be used to cure diabetes.
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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(Tribulus Terrestris) 14 फरवरी Abutilon Indicum Aerva Lanat Allergy Aloevera Juice Alternanthera Sessilis Alum Aluminum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Appetite Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Ban Tulasi Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Bone Infection Borax BPH Calories Calories Chart Cancer Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chemotherapy Chenopodium Album Chikungunya Cholesterol Cleome viscosa Clerodendrum Phlomidis Clitoria Ternatea Colocynth Colpoptosis Constipation Convolvulus Pluricaulis Corn Creak Crotalaria Bburhia Croton Bonplandianum Croton Sparsiflorus Cumin Date Palm Dengue Depression Diabetes digestion Disorders Divorce Dog Mustard Dronapushpi Dysentery Early Ejaculation Emblic Myrobalan Extramarital Relation Extremely Intolerance Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Ferrum Phosphoricum Fever Fissure Fistula Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hainampfer Hair Falling Headaches Health Health Care Friend Health Consultation Health Links Health Tips Heliotropium Eeuropaeum Hemorrhoids Hepatitis Hibiscus Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? 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Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गलगण्ड गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गारण्टेड इलाज गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाद्वार गुदाभ्रंश गुम्मा गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गेदुआ की छाछ गैस गैस्ट्रिक गैहूं का जवारा गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखगांजा गोरखबूटी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिटकन चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाजन बूटी छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जख्म जंगली तिल्ली जंगली तुलसी जंगली पेड़ जंगली मिर्ची जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बंध्यापन बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूत-प्रेत भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्ररोग मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनिद्वारा योनिभ्रंश योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills) यौन क्षमता यौन दौर्बल्य यौन शक्तिवर्धक यौन शिक्षा यौन समस्याएं यौनतृप्ति यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea 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शीघ्रपतन शीस शुक्राणु शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोक शोथ शोध श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संक्रमित संक्रामक संखाहुली सगतरा संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सफेद मूसली सब्जि सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी-जुकाम सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवाद संवेदना सहदेई सहदेवी सहानभूति साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिगरेट सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सी-सेक्शन सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स उत्तेजक दवा सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पार्टनर सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्खलन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्पर्श स्मृति-लोप स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य परामर्श स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डी संक्रमण हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हाई बीपी हाथ-पैर नहीं कटवायें हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हुरहुर हुलहुल हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हेल्थ बुलेटिन हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्यापैथ होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक इलाज होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy