Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

Health Care Friend and Marital Dispute Consultant

(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)

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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।

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हमारे आपपास में बहुतायत में पायी जाने पाली त्रिदोषनाशक एक महौषधि द्रोणपुष्पी विषहर है, जो सांप और बिच्छू जहर नाशक है। एक्जिमा (Eczema) एवं एलर्जी सहित चर्मरोगों, विषैले द्रव्य नाशक (Antitoxins), साईनस/Sinus एवं पुराने सिरदर्द से मुक्ति दिलाती है। पुराने, हठी एवं विषम-ज्वर बुखार, सूजन, खांसी-जुकाम और संधिवात नाशक होने के अलावा, यकृत/लीवर रक्षक (Liver Protector), यकृत वृद्धि+तिल्ली वृद्धि (Fatty Liver+Spleen Increase) उपचारक, संक्रमण रोधी (Anti Infective), पीलिया (Jaundice), अनिद्रा (Insomnia), श्वास, दमा, अस्थमा (Asthma) और स्नायविक-विकारों (Neurotic Disorders) सहित अनेक बीमारियों की बहुत अच्छी औषधि है। विस्तार से जानने के लिये निम्न लेख पढा जा सकता है।

आॅर्गेनिक द्रोणपुष्पी
(गुम्मा, तुम्बा, Dronapushpi, Leucas Cephalotes, Gumma, Tumba, Spiderwort) के औषधीय उपयोग (Medicinal Uses)

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

Botanical Name (वानस्पतिक नाम): Leucas Cephalotes
English Name (अंग्रेजी नाम): Spider Wort, Spiderwort
Family (कुल): Lamiaceae (लेमिएसी) or Labiatae
Synonyms(पर्यायवाची):
हिन्दी-गुम्मा, गूमाडलेडोना, गोया, मोरापाती, धुरपीसग;
राजस्थानी-उडापता (Udapata), निडालू कुबी (Nidalu kubi)
संस्कृत-द्रोणपुष्पी, फलेपुष्पा, पालिंदी, कुंभयोनिका, द्रोणा;
कन्नड़-तुम्बे (Thumbai);
गुजराती-दोशिनाकुबो (Doshinokubo), कुबो (Kubo), कुबी (Kubi);
तमिल-कोकरातासिल्टा (Kocaratacilta), नेयप्पीरक्कू (Neyppirkku);
पंजाबी-छत्रा (Chatra), गुल्डोडा (Guldoda), मलडोडा (Maldoda);
मराठी-तुम्बा (Tumba), देवखुम्बा (Devkhumba), शेतवाद (Shetvad);
तेलुगु-पेड्डातुम्नी (Peddatumni), तुम्मी (Tummi) तुम्बई (Thumbai);
बंगाली-घलघसे (Ghalghase), बराहलकसा (Barahalkasa);
मलयालम-तुम्बा (Tumba);
नेपाली-सयपत्री (Syapatri);


संकलन (Collection): सितम्बर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के पहले-दूसरे सप्ताह के दौरान अर्थात बरसात के मौसम की समाप्ति के बाद जैसे ही धूप निकलना शूरू हो तो इसके पौधे को जड़ से उखाड़ कर और छाया शुष्क करके इसका पंचांग बनाया जा सकता है। इसी प्रकार से हरे पत्ते और पकने पर इसके फलों को सुखाकर बीज संग्रहित किये जा सकते हैं। संग्रहित औषधि तत्वों को ठीक से सुखाकर सूखे और हवाबंद डब्बों में सुरक्षित किया जाना चाहिये।

द्रोणपुष्पी का सत बनाने की विधि: द्रोणपुष्पी के रस में दो गुना पानी मिलाकर एक बर्तन में 24 घंटे के लिए स्थिर रख दें। 24 घंटे बाद ऊपर का पानी निथारकर फेंक दें और नीचे बचे हुए अवशेष/Residue को किसी चौड़े बर्तन में फैलाकर छाया में सुखा लें। तीन चार दिन बाद जब यह अवशेष सूख जाये तो इसे संग्रहित करके हवाबंद कांच की बोतल में पैक करके रख लें। इसे ही द्रोणपुष्पी का सत कहते हैं। अनुभवी वैद्यों का मत है कि इसे प्रतिदिन आधा ग्राम की मात्र में लेने से सब प्रकार की व्याधियां समाप्त हो जाती हैं। और अगर कोई व्याधि नहीं भी है, तब भी इसे लेने से व्याधियों से बचे रहते हैं, प्रदूषणजन्य बीमारियों से भी बचाव होता है। अर्थात रोगप्रतिरोधक क्षमता विकसित/मजबूत हो जाती है।

चेतावनी (Warning): यहां प्रस्तुत विवरण केवल जनहित में औषधियों/दवाइयों, मानव स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता बढाने के लिए ही लिखा गया है। पाठक स्वयं अपना इलाज करने का खतरा मोल नहीं लें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]

द्रोणपुष्पी के हानिकारक प्रभाव: ठण्डी प्रकृति के लोगों को द्रोणपुष्पी का अधिक मात्रा में उपयोग हानिकारक हो सकता है।

औषधीय उपयोग (Medicinal Uses): सर्वोत्तम परिणामों हेतु आॅर्गेनिक औषधि का ही उपयोग करें। (Use only organic medicine for best results):-

1-त्रिदोषनाशक: यह उन गिनीचुनी महा औषधियों में शामिल है जो वात, पित्त, कफ तीनों को नष्ट करती हैं।

2-साँप के काटने पर: यह विषहर है। यह हर प्रकार के जहर का असर खत्म करता है। द्रोणपुष्पी के बारे में अनेक लेखकों का मत है कि कितना भी जहरीला साँप क्यों न काटा हो, व्यक्ति को तुरंत द्रोणपुष्पी के पत्ते या टहनी को खिलाना चाहिए या इसके 10 से 15 बून्द रस पिला देना चाहिए। जहर के प्रभाव से यदि व्यक्ति बेहोश हो गया हो तो द्रोणपुष्पी के रस निकाल कर, उसके कान, मुँह और नाक के रास्ते टपका दें। उसकी बेहोशी टूट जायेगी। यदि दंशित व्यक्ति के शरीर में जान बाकी होगी तो निश्चित ही उसकी जान बच जायेगी। होश में आने के बाद उसे 4—5 घंटे तक तक सोन न दें।

3-बिच्छू-दंश: द्रोणपुष्पी के पत्रों को पीसकर बिच्दू दंश स्थान पर बांधने/लगाने से विषाक्त प्रभाव नष्ट हो जाता है।

4-चर्म रोग (Skin diseases): द्रोणपुष्पी एक्जिमा (Eczema) एवं एलर्जी सहित सभी प्रकार की त्वचा सम्बन्धी समस्याओं के उपचार के लिए उपयोगी है। यह रक्तशोधक माना जाता है। यही वजह है कि यदि त्वचा या रक्त सम्बन्धी कोई भी परेशानी है, सांप के जहर का असर है, कोई विषैला कीड़ा काट गया है, या चमड़ी/Skin पर Allopathy/ऐलोपैथी की दवाइयों का दुष्प्रभाव/Reaction हो गया है; तो इसके 5 ग्राम पंचांग में, 3 ग्राम नीम के पत्ते मिलाकर, दो गिलास पानी में उबाल लें। जब आधा गिलास बच जाए तो कुछ दिनों तक रोगी को सुबह—शाम पिलायें। सभी तकलीफों से मुक्ति मिलेगी।

5-विषैले द्रव्य नाशक (Antitoxins): सब्जियों, दूध, जंक फूड, तेल, खाद्य पदार्थों आदि में अस्वास्थ्यकर कीटनाशकों एवं अखाद्य द्रव्यों/पदार्थों की मिलावट के कारण मानव शरीर में अनेक प्रकार के विषैले द्रव्यों, कैमीकल्स/Chemicals, Toxins/विषाक्त पदार्थों आदि का जहर जमा हो जाता है। इनके कारण शरीर में दाद, खाज, खुजली, एलर्जी सहित विभिन्न प्रकार की बाहरी और आंतरिक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। द्रोणपुष्पी के पंचांग/पाउडर का काढ़ा पिलाने से इनका समाधान संभव है। चर्मरोगों और अनेक प्रकार की एलर्जी सम्बन्धी बीमारियों को ठीक करने के लिए द्रोणपुष्पी के सत का भी सेवन किया जा सकता है।

6-साईनस/Sinus या पुराना सिरदर्द: साईनस/Sinus या पुराना सिरदर्द है तो द्रोणपुष्पी के रस में दो गुना पानी मिलाकर चार-चार बूँद नाक में डालें। 3-4 दिन करने से ही आराम मिल जायेगा और जमा हुआ कफ भी बाहर निकल जायेगा।

7-पुराना बुखार (Old Fever): पुराना बुखार जो बार बार आ जाता हो या जाता ही नहीं हो तो द्रोणपुष्पी की दो तीन टहनियों में गिलोय और नीम मिलाकर काढ़ा बनाकर कुछ दिन पिलायें। या दो चम्मच द्रोणपुष्पी के रस के साथ 5 कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर रोगी को पिलाने से बुखार ठीक हो जाता है।

8-विषम-ज्वर (Odd Fever): द्रोणपुष्पी की टहनी को पीस कर पुटली बनाले और उसे बाए हाथ के नाड़ी पर कपड़ा के सहयोग से बाँध दे। इसे रोगी का ज्वर बहुत ही जल्द ठीक हो जाता है। या 5 मिलीलीटर द्रोणपुष्पी पत्र-स्वरस में 1 ग्राम काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से मलेरिया ठीक हो होता है। 10-30 मिलीलीटर पंचांग पाउडर क्वाथ का सेवन करने से विषमज्वर ठीक हो जाता है।

9-यकृत रक्षक (Liver Protector): यदि किसी रोगी का लीवर खराब हो गया हो और काफी समय से ठीक नहीं हो रहा हो। उसका SGOT, SGPT बढा हुआ हो। या रोगी को पीलिया रोग हो रहा हो। तो द्रोणपुष्पी के काढ़े में कुछ दिनों तक 4-5 मुनक्का डालकर मसलकर छानकर पिलायें।

10-यकृत वृद्धि+तिल्ली वृद्धि (Fatty Liver+Spleen Increase): द्रोणपुष्पी की जड़ का चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में 1 ग्राम पीपल के चूर्ण के साथ सुबह-शाम कुछ हफ्ते तक सेवन करने से जिगर बढ़ने का रोग दूर हो जाता है। तिल्ली वृद्धि (Spleen Increase) विकार में भी समान रूप से उपयोगी है।

11-संक्रमण रोधी (Anti Infective): किसी भी प्रकार के संक्रमण/Infection के लिये द्रोणपुष्पी अत्यधिक उपयोगी है। यहां तक कि कैंसर (Cancer) जैसी घातक समस्याओं से लड़ने में भी के लिए द्रोणपुष्पी का ताजा पंचांग या पाउडर, भृंगराज एवं देसी बबूल की पत्तियों का काढ़ा बनाकर नियमित रूप से रोगी को पिलाते रहें। इससे चिकित्सा में जटिलता कम होंगी। मगर कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के निर्देशन में अन्य जरूरी दवाइयों का सेवन भी जारी रखें। उन इवाइयों के साक—साथ भी इसे ले सकते हैं।

12-शोथ (सूजन) (Inflammation): द्रोणपुष्पी और नीम के पत्तों की कौंपलों को पीसकर रोगी के सूजन वाले अंग पर गर्म-गर्म लेप लगाने से सूजन में आराम मिलता है।

13-खांसी-जुकाम (Cough & Cold): द्रोणपुष्पी के 1 चम्मच रस में आधा चम्मच बहेड़े का चूर्ण मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से खांसी दूर हो जाती है। या 5 मिली द्रोणपुष्पी पत्र-स्वरस में समान भाग शहद मिलाकर पीने से खांसी तथा प्रतिश्याय (जुकाम) में आराम मिलता है। द्रोणपुष्पी का रस नाक में 2-2 बूंद डालने से और उसका रस नाक से सूंघने से सर्दी दूर हो जाती है।

14-संधिवात (Rheumatoid Arthritis): ताजा द्रोणपुष्पी पंचांग का क्वाथ या द्रोणपुष्पी पंचांग के पाउडर के 10-30 मिली काढे में 1-2 ग्राम पिप्पली चूर्ण मिलाकर पिलाने से संधिवात में आराम मिलता है। या 10 मिली द्रोणपुष्पी स्वरस में शहद मिलाकर पिलाने से सभी वातविकारों में लाभ होता है।

15-सिरदर्द (Headache): द्रोणपुष्पी का रस 2-2 बूंद की मात्रा में नाक के नथुनों में टपकाने से और द्रोणपुष्पी का रस में 1-2 कालीमिर्च पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द में आराम मिलता है।

16-पीलिया (Jaundice): द्रोणपुष्पी के पत्तों का 1-1 बूंद रस आंखों और नाक में हर रोज सुबह-शाम कुछ समय तक लगातार डालते रहने तथा 5 मिलीलीटर स्वरस में समभाग शहद मिलाकर पीने से पीलिया रोग दूर हो जाता है।

17-श्वास, दमा, अस्थमा (Asthma): द्रोणपुष्पी के सूखे फूल और धतूरे के फूल का छोटा सा भाग मिलाकर धूम्रपान करने से दमे का दौरा रुक जाता है। इसके अलावा द्रोणपुष्पी के पत्र स्वरस समभाग अदरख एवं शहद मिलाकर विधिवत फांट तैयार करें। मात्र 6 माशे दिन में 3 बार रोगी को पिलाने से अस्थमा ठीक हो जाता है।

18-दांतों का दर्द (Toothache): द्रोणपुष्पी का रस, समुद्रफेन, शहद तथा तिल के तेल को मिलाकर कान में डालने से दांतों के कीड़े नष्ट हो जाते हैं तथा दांतों का दर्द ठीक होता है।

19-सूखा रोग: सुखा रोग ख़ास कर छोटे बच्चों को होता है। द्रोणपुष्पी की टहनी या पत्तों को पीस कर शुद्ध घी में आग पर पक्का लें और ठंडा होने के बाद इस घी से बच्चे के शरीर पर मालिश करें। इस से बच्चों का सूखा रोग बहुत ही जल्द दूर हो जाता है।

20-अनिद्रा (Insomnia): मात्र 10-20 मिली द्रोणपुष्पी बीज के क्वाथ का सेवन करने से अच्छी नींद आती है।

21-स्नायविक-विकार (Neurotic disorder): द्रोणपुष्पी पत्र-क्वाथ का सेवन करने से स्नायविक विकारों में अराम होता है।

वयस्कों के लिये दवाई की मात्रा: चिकित्सक के परामर्शानुसार ही सेवन करें।

पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल तथा फल) का चूर्ण/पाउडर: 5 से 10 ग्राम।
पत्तों का रस: 10 से 20 मिलीलीटर।
पंचांग क्वाथ: 10-30 मिली।


ऑर्गेनिक औषधि अधिक प्रभावी (Organic Herb More Effective): भारत सरकार की कृषि नीति किसानों के हित में नहीं होने के कारण किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। जो किसानों की दुर्दशा का मूल कारण रहा है। इस कारण किसी भी तरीके से किसान अधिकतम उपज चाहता है। अत: किसानों द्वारा उपज बढाने के लिये अस्वास्थ्यकर रासायनिक उर्वरकों/खादों एवं कीटनाशकों का अधिकाधिक प्रयोग किया जाता है। (Therefore, more and more unhealthy chemical fertilizers and pesticides are used to increase yield by farmers) जिसके कारण फसल के साथ-साथ खेतों में उगने वाली वनौषधियां (Herbal Remedies) भी अप्रभावी या विषैली/विषाक्त) (Ineffective or Toxic) हो जाती हैं। जिनका औषधीय प्रयोग (Medicinal Use) करने से वांछित उपचारात्मक परिणाम (Desired Remedial Results) नहीं मिल पाते हैं। अत: उपज कम और लागत अधिक होने के बावजूद रोगियों के इलाज हेतु जैविक/ऑर्गेनिक/कार्बनिक पद्धति से उत्पादित (Produced by Organic Method) वनौषधियों का ही उपयोग किया जाना चाहिये। लेकिन ऑर्गेनिक वनौषधियों का बाजार में मिलना मुश्किल ही नहीं, असंभव सा होता जा रहा है। इसी वजह से हमारे द्वारा कुछ महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों का छोटे स्तर पर ऑर्गेनिक पद्धति से उत्पादन और, या संग्रहण किया जाना शुरू किया गया है। इसी क्रम में ऑर्गेनिक हुलहुल भी हमारे यहां उपलब्ध है। जिसे जरूरतमंद लोगों को निजी उपयोग हेतु अल्प मात्रा में घर बैठे डाक के जरिये रजिस्टर्ड पार्सल से भी पाउडर के रूप में उपलब्ध करवाया जाता है। लेकिन व्यापारियों के लिये बड़ी मात्रा में इसकी आपूर्ति करना संभव नहीं है।


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निरोगधाम: पर 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक मकोय
आयुर्वेद शास्त्रियों का कहना है कि मकोय का पौधा इस पृथ्वी पर यकृत के रोगों व हृदय रोगों की सबसे अच्छी औषधि कही जाती है। मकोय पीलिया (जॉन्डिस) की अचूक दवा है और इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है। मकोय भूख को बढ़ाने वाला फल है। इसकी कार्य क्षमता इतनी है कि इसका 10 प्रतिशत भाग भी सही रहे अर्थात् शुद्ध रहे तो भी यह काम करती रहेगी। वर्तमान समय की कड़वी हकीकत यह है कि बहुत कम आयुर्वेदिक औषधियां सही और शुद्ध मिलती हैं। इस कारण अनेक चिकित्सक विद्वानों का ऐसा अनुभव रहा है कि यदि मकोय 10 फीसदी शुद्ध हो तो भी कुछ न कुछ काम अवश्य करती है। 
कल्पना करें कि यदि खतपतवार नाशक कीटनाशकों की मार झेलने के बाद भी खेत में शेष बची मकोय को किसानों द्वारा खेत से काटकर मेड़ के आसपास जो मकोय फेंकी जाती है। वही मकोय जब सूख सड़—गल जाती है और धूप में सूख जाती। ऐसी मकोय को पंसारियों के द्वारा बेचा जायेगा, तो मकोय के सेवन से स्वस्थ होने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? दूसरी ओर इस देश का दुर्भाग्य है कि बाजरा, ज्वार जैसी बहुत सस्ती फसल प्राप्त करने के लिये किसानों द्वारा मकोय जैसी महौषधि को नष्ट किया जा रहा है। मकोय के पौधे में अनेक रोगों को नष्ट करने के गुण होते हैं। जैसे—

चर्म रोग, पीलिया, गठिया, बवासीर, सूजन, कोढ़, दिल के रोग, आंखों की बीमारी, खांसी, कफ, स्वर शोधक, रसायन, वीर्य उत्पादक और वीर्यवर्द्धक, प्रमेह नाशक, ज्वर नाशक, वमन को दूर करती, नेत्रों रोगों में हितकर है। मकोय यकृत/लीवर एवं हृदय के रोगों को हरने वाली औषधि है। मकोय त्रिदोषनाशक अर्थात वात,पित्त व कफ तीनों दोषों का शमन करने वाली महौषधि है। इसके अलावा भी मकोय अनेको रोगों को ठीक करती है। 
यकृत की क्रिया विधि जब बिगड़ जाती है तो शरीर में अनेक उपद्रव यथा सूजन, पतले दस्त व पीलिया जैसे रोगों के अलाबा कई बार बवासीर जैसे रोग होने लगते हैं। इन रोगों में मकोय का सेवन बहुत ही लाभ करता है। यह औषधि यकृत की क्रियाविधि को धीरे-धीरे सुदृढ करके लीवर सम्बन्धी सभी रोगों को जड़ से नष्अ कर देती है। कुछ अन्य औषधियों के साथ इस औषधि के प्रयोग से यकृत सम्बन्धी रोग समाप्त हो जाते हैं। भूख बढ जाती है। शरीर पुष्ट हो जाता है। इस औषधि के पत्तों का रस/पाउडर आँतों में पहुँचकर वहाँ इकठ्ठे विषों को नष्ट कर देता है और विषैले द्रव्य पेशाब के मार्ग से शरीर से बाहर निकल जाते हैं। खूनी बबासीर में या मुँह के किसी भी हिस्से से रक्त स्त्राव में मकोय के पत्तों का रस लाभप्रद है। यदि शरीर में खुजली की शिकायत हो तथा वह किसी भी दवाई से मिट नहीं रही हो। तो मकोय के रस की 25 से 50 ग्राम की मात्रा लेते रहने से यह मिट जाऐंगी। इससे शरीर का रक्त शुद्ध हो जाता है और रक्त से जुड़े सभी रोग मिट जाते हैं।
उपरोक्त विवरण एक आम व्यक्ति भी आसानी से समझ सकता है कि मकोय कितनी उपयोगी और अमूल्य औषधि है। अत: हमने जयुपर स्थित हमारे निरोगधाम पर पिछले वर्ष से मकोय की 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक खेती की शुरूआत की है। जिससे मकोय का शुद्ध पाउडर रोगियों को उपलब्ध करवाया जाता है। एक दुर्घटना का शिकार हो जाने के कारण पिछले साल तो हम मकोय का मात्र 5 किलो शुद्ध पाउडर ही उपलब्ध करवा पाये थे। इस वजह से अनेक रोगियों को पर्याप्त मात्रा में मकोय पाउडर उपलब्ध नहीं करवा सके। जिसका हमें खेद है। इस महने वर्ष मकोय की खेती बढा दी है। ​हमारा लक्ष्य है कि इस बार हम मकोय, श्योनाक, शरफुंका, पुनर्नवा, भूई आंवला आदि दर्जनों 100 फीसदी शुद्ध औषधियों के सहयोग से हम कम से कम 2000 ऐसे रोगियों को स्वस्थ कर सकेंगे, जिनको जीवन लीवर या लीवर सम्बन्धी बवासीर, अपच, कब्ज, भगंदर आदि बीमारियों ने परेशान किया हुआ है।

नोट: यहां पर मकोय के जितने भी चित्र दिये गये हैं। सभी हमारे निरोगधाम पर लहलहाती मकोय के हैं।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
85-619-55-619, 25.06.2017


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सरफोंका, शरपुंखा (Purple Tephrosia)

परिचय :
1. नाम :
शरपुंखा (संस्कृत),
सरफोंका (हिन्दी),
बनतील (बंगला),
उन्हाली (मराठी),
शरपंखी (गुजराती),
कमुविकवेलाई (तमिल),
वेंपलि (तेलुगु) तथा
टेफ्रीजिया पप्युरिया (लैटिन) में कहते हैं।



2. आकार : सरफोंका का पौधा 2-3 फुट ऊँचा, झाड़ीनुमा हर वर्ष उत्पन्न होता है। सरफोंका के पत्ते 3-6 इंच लम्बे होते हैं, जिसमें कई (13-21) छोटे पत्रक रहते हैं। फूल लाल रंग के 3-6 इंच लम्बे डंठल पर लगते हैं। फली 1-2 इंच लम्बी तथा 6-10 बीजों से युक्त होती है।
3. भेद : लाल तथा सफेद रंग के फूलों के भेद से इसकी दो जातियाँ होती हैं।
4. उपलब्धता : यह समस्त भारत में, अधिकतर पथरीली भूमि में उत्पन्न होता है। सफेद जाति का पौंधा कम प्राप्त होता है।
5. रासायनिक संघटन : इसमें क्लोरोफिल, राल, मोम, क्वेर्सेटीन के समान एक पदार्थ, गोंद, कुछ एल्ब्यूमिन, रंजक-द्रव्य, एश (भस्म) 6 प्रतिशत होते हैं।
6. गुण : यह स्वाद में कड़वा, कसैला, पचने पर कटु तथा हल्का, रूखा, तीक्ष्ण और गर्म होता है। इसका मुख्य प्रभाव पाचन-संस्थान पर यकृत प्लीहा रोगहर रूप में पड़ता है। यह शोथहर, चर्मरोगहर, कीटाणुहर, घाव भरनेवाला, रक्तशोधक, कफ-निःसारक, मूत्रजनक, गर्भाशय-उत्तेजक, रसायन, ज्वरहर, अग्निदीपक तथा विषहर है।
7. औषधीय प्रयोग :
उदरशूल : शरपुंखा मूल हरड़ सेंधा नमक तीनों समान भाग मिलाकर 3 ग्राम चूर्ण खाने से लाभ होता है। 
प्लीहा : शरपुंखा की जड़ को मट्ठे के साथ लेने से बढ़ी हुई तिल्ली ठीक होती है। 
दन्तरोग : इसकी जड़ की दातुन करने से दांतों का कोई रोग नही होता। 
शस्त्रक्षत : कटे अंग का रक्त बंद करने के लिए इसकी जड़ को दातों से चबाकर बांध देने से चमत्कार होता है । 
मूषक-विष: चूहे के काटने पर इसके बीजों को मट्ठे में पीसकर पीने को दें।

8. प्रयोग, फायदे, तथा उपयोग :
शरपुंखा (Sharpunkha) का प्रयोग निम्नलिखित बीमारियों, स्थितियों और लक्षणों के उपचार, नियंत्रण, रोकथाम और सुधार के लिए किया जाता है:
लीवर सिरोसिस
पीलिया
तिल्ली/प्लीहा की वृद्धि
एनजाइना दर्द
दिल की घबराहट
9. दुष्प्रभाव : निम्नलिखित उन संभावित दुष्प्रभावों की सूची है जो उन दवाओं से हो सकते हैं जिनमें शरपुंखा (Sharpunkha) शामिल होता है। यह व्यापक सूची नहीं है। ये दुष्प्रभाव संभव हैं, लेकिन हमेशा नहीं होते हैं। कुछ दुष्प्रभाव दुर्लभ, लेकिन गंभीर हो सकते हैं। यदि आपको निम्नलिखित में से किसी भी दुष्प्रभाव का पता चलता है, और यदि ये समाप्त नहीं होते हैं तो अपने चिकित्सक से परामर्श लें।
उल्टी
जी मिचलाना
दस्त
10. Constituents of Sharpunkha : The plant contain flavonoids such as rutin, purpurin, purpurenone and purpuritenin and quercetin, retenoids like deguelin, elliptone, rotenone, tephrosin and sterols such as sitosterol. .The major constituents are Rutin, quercetin, retenoids deguelin, elliptone, rotenone, tephrosin and lupeol.
शरपुंखा के घटक : संयंत्र में फ्लूनोयोइड जैसे कि रूटीन, पुरपुरीन, पुरपुरेनोन और पुरपुरीतिनिन और क्वेरेटिन, डिएग्लिन, एल्प्टोऑन, रोटोनोइन, टेफ्रोसिन और स्टेरोल जैसे सैटेस्टेरोल जैसे रेटेनोड्स होते हैं। । प्रमुख घटक हैं रुतिन, क्वरेट्टिन, रेटेनोइड्स डिजेलिन, एल्प्टोऑन, रोटोनोइन, टेफ्रोसिन और ल्यूपोल।
11. Important Medicinal properties of Purple Tephrosia (Tephrosia Purpurea) Sharpunkha

Anthelmintic: expel parasitic worms (helminths) and other internal parasites from the body.
एन्थेल्मिंटिक: शरीर से परजीवी कीड़े (हेल्मीनथ) और अन्य आंतरिक परजीवी निकालें
Antipyretic/antifebrile/febrifuge: Effective against fever.
एंटिपेरेक्टिक / एंटिफेब्रीले / फीब्रिफ्यूज: बुखार के खिलाफ प्रभावी।
Anti-Hyperglycemic (counteracting the accumulation of excess sugar in the blood) : Counteracting high levels of glucose in the blood.
एंटी-हाइपरग्लिसेमिक (खून में अतिरिक्त चीनी का संचय करने की प्रतिक्रिया): रक्त में ग्लूकोज के उच्च स्तर का विरोध करना।
Deobstruent (Any medicine that removes obstructions; an aperient.) : Removing obstructions; having power to clear or open the natural ducts of the fluids and secretions of the body.
Deobstruent (कोई दवा जो अवरोधों को दूर करती है; एक उत्सव।): अवरोधों को दूर करना; शरीर के तरल पदार्थ और स्राव के प्राकृतिक नलिकाएं साफ़ करने या खोलने की शक्ति होने पर
Diuretic: Promoting excretion of urine/agent that increases the amount of urine excreted.
मूत्रवर्धक: मूत्र / एजेंट के उत्सर्जन को बढ़ावा देना जिससे कि मूत्र की मात्रा बढ़ जाती है।
Depurative: Purifying agent.
आबादी: शुद्ध एजेंट
Hepatoprotective: prevent damage to the liver.
हेपेटोप्रोटेक्टीक: यकृत को नुकसान रोके।
Immunomodulatory: modifies the immune response or the functioning of the immune system.
Immunomodulatory: प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया या प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज को संशोधित करता है।
Laxative: tending to stimulate or facilitate evacuation of the bowels.
रेचक: आंत्र की निकासी को प्रोत्साहित करने या सुगम बनाने के लिए तैनात।
Medicinal Uses/औषधीय उपयोग:
Sharpunkha is recommended in conditions of enlarged spleen and disturbed liver functioning.बढ़े हुए तिल्ली और परेशान यकृत के कामकाज की परिस्थितियों में शरपुंखा की सिफारिश की जाती है।
Sharpunkha alleviates inflammation, benefits in skin diseases; and possesses antidotal, bactericidal, wound healing and haemostatic.-शरपुंखा सूजन को कम करता है, त्वचा रोगों में लाभ; और असामान्य, जीवाणुनाशक, घाव भरने और हेमोस्टेटिक होते हैं।

12. How to Use Sharpunkha plant-शरपुंखा पौधे का उपयोग कैसे करें
For medicinal purpose whole plant is used in form of juice, paste, decoction and powder.-औषधीय उद्देश्य के लिए पूरे पौधे का रस, पेस्ट, काढ़े और पाउडर के रूप में प्रयोग किया जाता है।
Paste: The leaves, flowers and tender twigs are washed and ground to form a paste.-पेस्ट करें: पत्तियां, फूल और टेंडर टहनियाँ एक पेस्ट बनाने के लिए धोया जाता है और ग्राउंड है।
Leaf juice: The leaf juice is extracted by pounding leaves and then squeezing through clothes. Dosage:14-28 ml.-पत्ता का रस: पत्ते का रस पाउंडिंग पत्तियों से निकाला जाता है और फिर कपड़े के माध्यम से फैलाए जाते हैं। खुराक: 14-28 मिलीलीटर
Dry powder of plant: For making power of plant, the plant parts are cleaned, cut and dried in the sun.-पौधे का सूखे पाउडर: पौधे की शक्ति बनाने के लिए, पौधे के हिस्सों को साफ किया जाता है, काटा जाता है और सूरज में सूख जाता है।
The dried parts are then ground to get the powder.-सूखे भागों तो पाउडर पाने के लिए जमीन है।
Dosage:3-5 grams.-खुराक: 3-5 ग्राम।
Decoction: For making decoction, five to ten grams of dried powder of whole plant is taken and boiled in one glass of water. It is cooked till volume reduces to one-fourth. It is filtered and taken.
काढ़े: काढ़े बनाने के लिए, पूरे पौधे के सूखे पाउडर के पांच से दस ग्राम को एक गिलास पानी में ले लिया जाता है। यह तब तक पकाया जाता है, जब मात्रा एक चौथाई तक कम हो जाती है। यह फ़िल्टर्ड और लिया जाता है।
13. Medicinal Uses of Sharpunkha-शरपुंखा के औषधीय उपयोग
In Ayurveda, whole plant of Sharpunkha is used for medicinal purpose. All parts of the plant have tonic and laxative properties. The dried plant is deobstruent and diuretic. It is used in treatment of bronchitis, obstructions of the liver, spleen and kidneys.--आयुर्वेद में, शरपुंखा के पूरे पौधे का औषधीय उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाता है। पौधे के सभी भागों में टॉनिक और रेचक गुण हैं। सूखे पौधे विकृत और मूत्रवर्धक है। इसका उपयोग ब्रोंकाइटिस, यकृत, रुम और गुर्दे की रोकथाम के उपचार में किया जाता है।
Sharpunkha dry powder is also used in removing toxins from the blood. It works like a blood purifying agent and is useful treatment of boils, pimples and other skin diseases.--शरपुंखा सूखे पाउडर का उपयोग खून से विषाक्त पदार्थों को हटाने में भी किया जाता है। यह रक्त शुद्ध एजेंट की तरह काम करता है और फोड़े, मुंह और अन्य त्वचा रोगों का उपयोगी उपचार होता है।
The decoction of the fruit is indicated in intestinal parasites.--फल का काढ़ा आंतों परजीवी में दर्शाया गया है।
Sharpunkha plant has property to heal all types of wounds (Sarva vranvishapaka). शरपुंखा पौधे में सभी प्रकार के घावों को भरने के लिए गुण है (सर्व vruvnivishapaka)।
Liver cirrhosis, jaundice, and other Diseases of liver, Spleen diseases--लिवर सिरोसिस, पीलिया, और अन्य जिगर के रोग, प्लीहा रोग
1. Prepare decoction of plant and drink twice a day.-
1. पौधे का काढ़ा तैयार करें और एक दिन में दो बार पियें। 
2. Fresh juice (14-28 ml) of whole plant is given twice daily.
2. पूरे संयंत्र का ताजा रस (14-28 एमएल) दो बार दैनिक दिया जाता है। 
3. Powder (1-3 gram) of whole plant is given with one cup milk.
3. पूरे पौधे का पाउडर (1-3 ग्राम) एक कप दूध के साथ दिया जाता है।
Enlargement of spleen, Diseases of spleen and liver-प्लीहा, प्लीहा और यकृत के रोगों का इज़ाफ़ा
1. Paste of root (1 to 2 gram) is given with butter milk/Chach, twice daily.
1. रूट का पेस्ट (1 से 2 ग्राम) मक्खन दूध / चाच के साथ दिया जाता है, दो बार दैनिक।
2. Drink decoction of plant.
2. पौधे का काढ़ा पियें।
Dropsy-ड्रॉप्सी
Fresh juice (14-28 ml) of whole plant is given twice daily.
पूरे संयंत्र का ताजा रस (14-28 एमएल) दो बार दैनिक दिया जाता है
Angina pain, heart palpitation
एनजाइना दर्द, दिल की दमनियां
Prepare decoction by boiling Sharpunkha panchang (5 gram), Arjun bark (5 gram) and Clove (2-3) in one glass water. Cook till initial volume reduces to one-fourth. Filter and drink. Take twice a day.-एक ग्लास पानी में शारुनपुंछ पानांचंग (5 ग्राम), अर्जुन छाल (5 ग्राम) और लौंग (2-3) को उबलते हुए काढ़ा तैयार करें। कुक तक प्रारंभिक मात्रा एक चौथाई तक कम हो जाती है फ़िल्टर और पेय दिन में दो बार लें।
Excessive cough, coughing, Kasa--अत्यधिक खाँसी, खांसी, कासा
Prepare decoction by boiling Sharpunkha panchang (panchang means all five parts of plant viz. leaves, stem, flowers, fruits and roots) (5 gram), tulsi patti (7 leaves) and dry ginger powder (2-3 gram) in one glass water. Cook till initial volume reduces to one-fourth. Filter and drink.--शरपुंखा पंचांग उबलते द्वारा काढ़ा तैयार (पंचांग का मतलब है कि सभी पांच पत्तियों अर्थात पत्ते, स्टेम, फूल, फल और जड़ें) (5 ग्राम), तुलसी पट्टी (7 पत्ते) और सूखे अदरक पाउडर (2-3 ग्राम) एक गिलास में पानी। कुक तक प्रारंभिक मात्रा एक चौथाई तक कम हो जाती है फ़िल्टर और पेय
Hyperacidity-अति अम्लता
Drink decoction of Sharpunkha panchang.
Abdominal pain, flatulence--पेट दर्द, पेट फूलना
Removing toxins from blood, blood purifying, diseases of skin, boils--रक्त से जहरीले पदार्थों को निकालना, रक्त शुद्ध करना, त्वचा के रोग, फोड़े
Prepare decoction of Sharpunkha plant with few Neem leaves and drink.--कुछ नीम पत्तियों और पेय के साथ Sharpunkha संयंत्र का काढ़ा तैयार। 
Malarial fever, Visham Jwar मलेरियाय बुखार, विषम ज्वर। 
Prepare decoction by boiling Sharpunkha panchang (5 gram), and giloy powder (5 gram) in one glass water. Cook till initial volume reduces to one-fourth. Filter and drink. Give twice a day.--एक ग्लास पानी में शारफुखां पंचांग (5 ग्राम), और गिलॉय पाउडर (5 ग्राम) उबलते हुए काढ़ा तैयार करें। कुक तक प्रारंभिक मात्रा एक चौथाई तक कम हो जाती है फ़िल्टर और पेय दिन में दो बार दो।
External Uses--बाहरी उपयोग
Toothache-दांत दर्द
The leaves of the plant are pounded to make a paste which is applied on teeth for ½ hours/day for three days.--पौधे की पत्तियों को एक पेस्ट बनाने के लिए बढ़ा दिया जाता है जो दाँत पर तीन दिनों के लिए आधा घंटे / दिन के लिए लागू होता है।
Non-healing wounds--गैर-चिकित्सा घाव
Boil Sharpunkha and few neem leaves in water and Wash the affected area.--शरपुंखा और कुछ नीम के पत्तों को पानी में उबालें और प्रभावित क्षेत्र धो लें।
Swelling, inflammation--सूजन, सूजन
Prepare poultice of plant and tie at the affected area.
प्रभावित इलाके में पौधे के टाइट और टाई तैयार करें।

परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor. 
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
एलोवेरा जूस (Aloevera juice)

जामुन ज्यूस बनाने की विधि : सबसे पहले आप आवशयक्ता अनुसार एलोवेरा की पत्तियां ले और उसे अच्छी तरह पानी में धो लें। उसके बाद चाकू से उसके किनारे के कांटे वाले भाग काट कर निकाल दें। अब पत्तियों को सुविधानुसार छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लें, फिर पत्तियों के टुकडे लेकर उसके ऊपर का हरा छिलका निकाल कर अलग कर दें। ध्यान रहे ऐसा करते समय पत्तियों के गूदे के ऊपर की पीले रंग की पर्त भी साथ में निकाल दें, नहीं तो जूस में कड़वाहट रह जाएगी और आप उसका सेवन नहीं कर सकेंगे।
एलोवेरा के सफेद भाग को अलग करने के बाद उसे मिक्सी में डालें और दो मिनट के लिए मिक्सी को चला दें। इससे एलोवेरा की पत्तियों का जेल जूस में बदल जाएगा। अब इसे गिलास में निकालें और इसमें उचित मात्रा में पानी और नमक मिला लें। यदि आप चाहें, तो इसमें फलों का जूस भी मिला सकते हैं। ओरेंज (संतरा) जूस इसके स्वाद को टेस्टी बना देता है। इससे एलोवेरा जूस स्वादिष्ट हो जाएगा और आपको पीने में दिक्कत नहीं होगी। आइस क्यूब डालकर भी ले सकते हैं। अगर आप डायट पर हैं तो इस एलोवेरा जूस को रोज पियें।
लाभ- यह ठंडा होता है। इसे पीना स्किन और बालों के ही लिए बहुत ही फायदेमंद है। शरीर की इम्यूनिटी पावर और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में भी ये मददगार होता है। यह दिल और लिवर से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
(1) प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है : एलोवेरा में 18 धातु, 15 एमिनो एसिड और 12 विटामिन मौजूद होते हैं जो खून की कमी को दूर कर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं।

(2) चुस्ती-स्फूर्ति : एलोवेरा के कांटेदार पत्तियों को छीलकर रस निकाला जाता है। 3 से 4 चम्मदच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है।

(3) पेट रोग : एलोवेरा का जूस पीने से कब्ज की बीमारी से फायदा मिलता है। एलोवेरा का जूस बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग व पेट के विकारों को दूर करता है। एलोवेरा का जूस ब्लड को प्यूरीफाई करता है साथ ही हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है।
(4) बाल : एलोवेरा का जूस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ्पय होते हैं।
(5) शुगर : एलोवेरा का जूस पीने से शरीर में शुगर का स्तर उचित रूप से बना रहता है।
(6) जोडों का दर्द : एलोवेरा के जूस का हर रोज सेवन करने से शरीर के जोडों के दर्द को कम किया जा सकता है।


(7) चर्म रोग : एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वगचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों, आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है।
(8) इन्फेक्शन : एलोवेरा का जूस पीने से मच्छर काटने पर फैलने वाले इन्फेक्शन को कम किया जा सकता है।
(9) व्हाईट ब्लड सेल्स : शरीर में वहाईट ब्लड सेल्स की संख्या को बढाता है।


(10) जवान और खूबसूरत : एलोवेरा का जूस त्वचा की नमी को बनाए रखता है जिससे त्वचा स्वस्थ दिखती है। यह स्किन के कोलाजन और लचीलेपन को बढाकर स्किन को जवान और खूबसूरत बनाता है। एलोवेरा के जूस का नियमित रूप से सेवन करने से त्वचा भीतर से खूबसूरत बनती है और बढती उम्र से त्वचा पर होने वाले कुप्रभाव भी कम होते हैं। एलोवेरा को सौंदर्य निखार के लिए हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट जैसे एलोवेरा जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम आदि में प्रयोग किया जा रहा है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 10 से 30 मिली.।
एहतियातकफ की शिकायत है, तो मानसून या सर्दी के मौसम में इसे नहीं पीना चाहिए, क्योंकि कई बार इससे गले में खराश, खांसी और सीने में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। एलोवेरा शरीर में नए सेल्स को बनाता है और उनका ग्रोथ भी करता है, इसलिए कैंसर रोगी इसे न पिएं।

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aajtak.in [Edited by: भूमिका राय]
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर 2015 | अपडेटेड: 13:32 IST

हम सभी के घरों में अजवायन एक प्रमुख मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. पर आपको शायद ही पता हो कि ये एक प्राकृतिक औषधि भी है. आप चाहें तो कई छोटी-छोटी सामान्य बीमारियों का इलाज अजवायन की मदद से कर सकते हैं. अच्छी बात ये है कि इसका फायदा बड़े और छोटे दोनों को समान रूप से होता है.

अजवायन को इस्तेमाल करने का तरीका:
अजवायन का पूरा फायदा लेने के लिए इसे पानी में उबाल लेते हैं. अगर आप चाहें तो इसे यूं भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसके पानी का इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद होता है. इसका पानी बनाने के लिए एक चम्मच अजवायन को एक कप पानी में उबाल लें. जब ये पानी आधा रह जाए और पानी मटमैला दिखने लगे तो गैस बंद कर दें. इस पानी को छान लें. जब ये ठंडा हो जाए तो इसे इस्तेमाल करें.

अजवायन के फायदे:

1. अगर आप मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं तो अजवायन का पानी पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. ये चर्बी को गलाने का काम करता है, जिससे बहुत जल्दी वजन घट जाता है.
2. अगर आपको पाचन से जुड़ी कोई समस्या है तो अजवायन का पानी आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं. अजवायन का पानी पीने से कब्ज और गैस की समस्या में राहत मिलती है.
3. अजवायन का पानी दर्द निवारक की तरह काम करता है. अगर आपको दांत दर्द की तकलीफ है तो अजवायन के पानी से गार्गल करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. साथ ही इसके इस्तेमाल से मुंह की दुर्गंध भी दूर हो जाती है.
4. पीरियड्स के दौरान दर्द और ऐंठन की समस्या से राहत पाने के लिए भी अजवायन का पानी बहुत फायदेमंद होता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो पेट के इंफेक्शन को दूर करने में मददगार होता है.
5. अगर आपको हल्की सर्दी हो रखी है तो भी अजवायन के पानी से गार्गल करना फायदेमंद रहता है. सर्दी दूर करने के लिए ग्रामीण इलाकों में लोग अजवायन का धुंआ भी लेते हैं.

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AdminJune 5, 2016

अजवायन का प्रयोग घरों में ना केवल मसाले के रूप में ही किया जाता है बल्‍कि छोटी-मोटी पेट की बीमारियां भी इसके सेवन से दूर हो जाती हैं। खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूरन बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये। वैसे तो अजवायन बड़ी ही काम की चीज़ है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है। जी हां, यह बात काफी कम लोग जानते हैं कि अजवायन का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। मोटापा कम करने के लिये अक्‍सर लोग गरम पानी और नींबू पीते हैं, जिससे शरीर के विशैले तत्‍व बाहर निकलते हैं ना कि वजन में कमी आती है।

कई बीमारियों में लाभकारी अजवायन का पानी-

पाचन क्रिया बेहतर: अजवायन में थायमॉल (Thymol) मौजूद होता है। दुनिया में सबसे अधिक थायमॉल वाला पौधा अजवायन का ही होता है। ये केमिकल गेस्ट्रिक द्रव्यों को बाहर निकालने में पेट की मदद करता है, जिससे की पाचन क्रिया आसान हो जाती है। अपच, मतली और शिशुओं के पेट दर्द जैसी समस्याओं में इससे मदद मिलती है।

अजवायन का प्रयोग घरों में ना केवल मसाले के रूप में ही किया जाता है बल्‍कि छोटी-मोटी पेट की बीमारियां भी इसके सेवन से दूर हो जाती हैं। खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूरन बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये। वैसे तो अजवायन बड़ी ही काम की चीज़ है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है। जी हां, यह बात काफी कम लोग जानते हैं कि अजवायन का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। मोटापा कम करने के लिये अक्‍सर लोग गरम पानी और नींबू पीते हैं, जिससे शरीर के विशैले तत्‍व बाहर निकलते हैं ना कि वजन में कमी आती है।

कई बीमारियों में लाभकारी अजवायन का पानी-

पाचन क्रिया बेहतर

अजवायन में थायमॉल (Thymol) मौजूद होता है। दुनिया में सबसे अधिक थायमॉल वाला पौधा अजवायन का ही होता है। ये केमिकल गेस्ट्रिक द्रव्यों को बाहर निकालने में पेट की मदद करता है, जिससे की पाचन क्रिया आसान हो जाती है। अपच, मतली और शिशुओं के पेट दर्द जैसी समस्याओं में इससे मदद मिलती है।

वजन घटाने में मददगार

अजवायन न सिर्फ आपकी पाचन क्रिया को बेहतर करता है बल्कि आपके मेटाबॉलिज़्म को भी तेज़ी देता है, जिससे कि आपको वजन घटाने में मदद मिलती है।

सिरदर्द और कंजेस्शन से छुटकारा

अजवायन का पानी उबालने पर या उसका पानी पीते हुए जो उससे भाप मिलती है उससे सिरदर्द और नाक के कंजेस्शन (Congestion) में काफी राहत मिलती है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अजवायन में बहुत सारे वाष्पशील पदार्थ होते हैं जो कि उबाले जाने पर भाप बनकर उड़ते हैं।जब आप इस भाप को अंदर लेते हैं तो आपको सिरदर्द और जुकाम से भी राहत मिलती है।

मतली से राहत: अजवायन के पानी से मतली भी ठीक की जा सकती है। कई मामलों में, इसको पीने से लगातार आ रहीं उल्टियां भी रूक जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अजवायन में बहुत अधिक प्रभावी एंटीबैक्टीरियल तत्व होते हैं जो कि पेट से बैक्टीरिया इंफेक्शन को दूर करते हैं।

दांद दर्द करता है दूर

अजवायन दांद दर्द को दूर करने और मुंह को स्वस्थ बनाए रखने में बहुत मददगार होती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर ये सलाह देते हैं कि दांत दर्द होने पर अजवायन के पानी से कुल्ला करें। अजयावय में मौजूद थायमोल (Thymol) दर्द से राहत दिलाता है और मुंह के स्वास्थ्य का ख्याल रखता है।

दूसरी ओर अजवायन का पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्‍म बढ़ता है जिसकी वजह से कार्ब तथा फैट बर्न होने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है। तो अगर आप भी अपने बढ़ते हुए वजन से परेशान है तो, कुछ दिनों तक इस नुस्खे को आजमाइये और असर देखिये। आइये जानते हैं अजवान का पानी बनाने की विधि और रिजल्‍ट पाने के लिये किन-किन चीज़ों से परहेज रखना है।

ऐसे बनाएं अजवायन का पानी

1. कैसे तैयार करें अजवाय का पानी
2. 50 ग्राम अजवायन लें (आप चाहें तो 25 ग्राम भी ले सकते हैं पर 50 ग्राम ज्यादा प्रभाव शाली है)
3. अजवायन को 1 गिलास पानी में रातभर के लिये भिगो कर छोड़ दें और फिर सुबह पानी को छान लें।
4. उसके बाद पानी में 1 चम्मच शहद मिक्स करें और सुबह खाली पेट पी लें।
5. यदि आप चाहें तो उसी अजवायन को धूप मे सुखा कर फिर से दूसरे दिन भी प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन तीसरे दिन आपको इर्न अजवायन का प्रयोग करना होगा।
6. अजवायन के पानी को 45 दिन लगातार पियें, आपको फायदा जरुर मिलेगा। वैसे तो आपको इसका असर मात्र 15 दिनों में ही दिखने लगेगा पर अगर प्रभावी परिणाम चाहिये तो, 45 दिन लगेंगे। वजन कम होना आपके शरीर के प्रकार पर भी निर्भर करेगा। इस पानी को पीने से आपका 5 किलो वजन कम होगा पर अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित नहीं होंगे तो।

अच्छा रिजल्ट पाने के लिये कुछ जरुरी बातों का पालन करें :-
  • 1. चावल पूरी तरह से छोड़ दें रोटियों का संख्या घटा दें। मतलब अगर आप दो राटी खाते हैं तो उसे आधा कर दें।
  • 2. आलू, शक्कर, फास्ट फूड और ऑइली फूड ना खाएं।
  • 3. भोजन करने के एक घंटे तक पानी ना पियें।
यह उपचार खास तौर पर उन महिलाओं के लिये है, जिन्हें पीरियड्स की समस्या है और जिसकी वजह से उनका वजन बढ़ जाता है।
==========

सदियों के अजवाइन का इस्तेमाल कई तरह के घरेलू नुस्ख़ों के लिए किया जाता रहा है। उदाहरण के लिए एसिडिटी के लिए एन्टासिड खाने के जगह पर अजवाइन खाना तो लोग सामान्यतः सेफ मानते हैं। यहाँ तक कि अर्थराइटिस होने पर भी अजवाइन का पेस्ट जोड़ों पर लगाने जैसा घरेलू इलाज दर्द को कम करने में असरदार रूप से काम करता है। जिन लोगों को बदहजमी का प्रॉबल्म होता है वह तो अजवाइन बिना सोचे समझे दिन में कितनी बार खाते हैं उसके बारे में कहना मुश्किल है। अजवाइन में थाइमोल नाम का तत्व होता है जो पीएच लेवल को नॉर्मल रखने के साथ-साथ गैस्ट्रिक जूस के निष्कासन से खाना को जल्दी हजम करवाने में मदद करता है। ये तो अजवाइन का एक पहलू है उसके दूसरे पहलू के बारे में जानकर आप आश्चर्य में पड़ जायेंगे। पढ़े-

अजवाइन के साइड-इफेक्ट्स: लेकिन डायटीशियन और न्यूट्रीशनिस्ट नेहा चांदना का कहना है कि अजवाइन को खाना तब तक स्वास्थ्य या सेहत के दृष्टि से सेफ है जब तक आप इसको सीमित मात्रा में ले रहे हैं। यानि अजवाइन का सेवन आप दिन में कम से कम 10 ग्राम तक ही ले सकते हैं। इससे ज्यादा मात्रा में अजवाइन खाने से आपके सेहत को फायदा पहुँचने से जगह पर नुकसान ही पहुँचेगा। क्यों आश्चर्य में पड़ गए न! अतिरिक्त मात्रा में अजवाइन लेने से एसिडिटी कम होने के जगह पर बढ़ सकती है, सिर दर्द, उल्टी, पेट में जलन जैसा अनुभव और अल्सर जैसे प्रॉबल्म्स का सामना करना पड़ सकता है। यहाँ तक कि प्रेगनेंट महिलायें भी अजवाइन का सेवन कब्ज़ और एसिडिटी की समस्या के लिए कर तो सकती है लेकिन दिन में 10 ग्राम से ज्यादा नहीं।
ध्यान देने की बात ये है कि छह महीने से बड़े शिशु या बच्चों के हजम शक्ति को बढ़ाने के लिए आप उनको एक छोटा चम्मच गुड़ और अजवाइन का पाउडर दे सकते है। इससे उनका डाइजेस्टिव सिस्टेम बेहतर हो जाता है, लेकिन सीमित मात्रा में।
कैसे करें इसका सेवन? अजवाइन को पानी में डालकर उबाल लें। फिर उस पानी को छानकर पियें या गुड़ के साथ भी इसको ले सकते हैं।
अजवायन एक औषधि है। जिसका उपयोग कई रोगों का इलाज करने के लिए होता है। इसका चूर्ण बनाकर सेंधानमक मिलाने से पेट की तकलीफों से चुरंत आराम मिलता है। खासकर पेट दर्द, मन्दाग्नि, अपच, अफरा, अजीर्ण और दस्त में अजवायन काफी लाभकारी है। जिसका सेवन दिन में कम से कम तीन बार करना चाहिए।
अजवाइन के फायदे
अजवाइन में 7 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 21 प्रतिशत प्रोटीन, 17 प्रतिशत खनिज, 7 प्रतिशत कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह, पोटेशियम, सोडियम, रिबोफ्लेविन, थायमिन, निकोटिनिक एसिड अल्प मात्रा में होता है। आंशिक रूप से आयोडीन, शर्करा, सेपोनिन, टेनिन, केरोटिन और 14 प्रतिशत तेल पाया जाता है।
कुछ घरेलू उपचार
  1. *100 तोला अजवायन के फूल का चूर्ण पानी में मिलाकर घाव पर लगाएं। दाद, खुजली, फुंसियां जैसे चर्मरोग में फायदा होगा। 
  2. *अजवायन के तेल की मालिश से दर्द कम होता है। प्रयोग प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए अजवायन काफी लाभदायक है।
  3. *अजवायन के फूल को शक्कर के साथ तीन- चार बार पानी घोलकर से लेने से पित्ती की बीमारी ठीक हो जाती है।
  4. *पेट खराब होने पर अजवाइन को चबाकर खाएं, उसके बाद एक कप गर्म पानी पी लें, पेट ठीक हो जाएगा।
  5. *पेट दर्द होने पर अजवाइन के दाने 10ग्राम, सोंठ 5ग्राम और काला नमक 2 ग्राम को अच्छी तरह मिलाए, फिर मिश्रण का 3 ग्राम गुनगुने पानी के साथ सेवन करें आराम मिलेगा। 
  6. *काले नमक के अजवायन पेट के कीड़े निकाल देती है।
  7. * लीवर की परेशानी होने पर 3ग्राम अजवाइन और आधा ग्राम नमक खाने के बाद लेने से लाभ होगा।
  8. *पेट में गैस होने पर हल्दी, अजवाइन और चुटकीभर काला नमक लेने से जल्दी आराम मिलता है।
  9. *पथरी की समस्या होने पर 5ग्राम ग्राम जंगली अजवाइन को पानी के साथ निगल लें। ऐसा महीने में पांच दिन करें, तो पथरी नहीं बनेगी।
  10. *अजवाइन को भूनकर कपड़े में लपेट ले, फिर रात में तकिए के नजदीक रखें, इससे दमा, सर्दी, खांसी के रोगियों को अच्छे से नींद आएगी।
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Sonu Singla 10:14:00 pm
"अजवाइन के गुण/ फायदे, अजवाइन का पानी के लाभ, अजवाइन का तेल/ नुकसान, अजवायन खाने के फायदे"
अजवायन-अजवायन का बीज छोटा,दानेदार और बारीक़ होता है।अजवायन के बीज से जो तेल या अर्क निकाला जाता है उसे सर्जरी के बाद एंटी सेप्टिक मरहम के तौर पर लगाया जाता है। इजिप्ट और अफगानिस्तान को अजवायन का घर कहा जाता है। अजवायन के पोधे को घर में लगाना भी बहुत आसान है। अक्टूबर और नवंबर इस पोधे को उगाने के लिए ज्यादा लाभदायक होते है।
खाने में इसका उपयोग-
तड़का एक खाना पकाने की विधि, जिसमें खाना पकाने के लिए तेल गरम किया जाता है उसमे पूरे मसाले डाले जाते है। भारतीय खाना पकाने में अजवाइन अक्सर थाली में तड़का का हिस्सा है। यह कम मात्रा में प्रयोग किया जाता है और लगभग हमेशा पकाया करते थे। यह अपनी मजबूत, प्रभावी स्वाद की वजह से प्रयोग होता है।अजवाइन भी सब्जियों के व्यंजन (अपने विशिष्ट स्वाद के लिए) और अचार (अपने संरक्षक के गुणों के लिए) में प्रयोग किया जाता है।
साइज: बहुत छोटा
रंग: भूरा हरे रंग के लिए पीले रंग
स्वाद: गर्म और तीखे स्वाद
पत्ते: जैसे छोटे पंख
खुशबू: मजबूत गंध, अजवायन के फूल की तरह
खुजली, फोड़े और पिम्पल्स :
• यह एक शांत, अंधेरे और सूखी जगह में एक कसकर मोहरबंद ग्लास कंटेनर में ताजा रखा जा सकता है।
• यह एक साल के लिए ताजा रहेगी।
आकार: ओवल और चोटी वाला।
अजवाइन और इसके तेल के पोषण का महत्व:
कैरम बीज 100 ग्राम प्रति होता है:
प्रोटीन -17.1%
वसा - 21.8%
खनिज-7.9%
फाइबर-21.2%
कार्बोहाइड्रेट-24.6%
इसमें कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, फास्फोरस, लोहा और नियासिन भी शामिल हैं। इसका तेल या तो बेरंग या रंग में पीला भूरे रंग का है। कैरम तेल व्यापक रूपमें कीटाणु नाशक और कवकनाशी के रूप में प्रयोग किया जाता है।
अजवाइन का लाभ:
1. अम्लता: एक चम्मच जीरा के साथ एक चम्मच अजवाइन का मिश्रण अदरक पाउडर के साथ हर रोज ले ।यह प्राकृतिक रूप से अपच समस्याओं का इलाज करने के लिए एक सबसे अच्छा तरीका है। यह अम्लता और एसिड समस्या के इलाज में उपयोगी है।
2. कब्ज: अजवाइन पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए सबसे अच्छा उपाय है। इसलिए इसे कब्ज से भी छुटकारा पाने के लिए उपयोग कर सकते हैं। अजवाइन का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
3. गुर्दा विकार और गुर्दे की पथरी: अजवाइन गुर्दे की पथरी का इलाज करने के लिए बहुत उपयोगी हैं। इसे गुर्दा रोग के इलाज के लिए और दर्द को कम करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
4. अस्थमा: गर्म पानी के साथ अजवाइन लेने से शरीर से खांसी और बलगम को निष्कासित किया जा सकता है। यह ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के इलाज के लिए बहुत उपयोगी है। इसे दिन में दो बार गुड़ के साथ सेवन किया जा सकता है। आप को निश्चय ही लाभ होगा।
5. जिगर और गुर्दे की खराबी: अजवाइन का पानी पीने से अपच और संक्रमण की वजह होने वाले आंतों में दर्द का सफल इलाज किया जा सकता है। अजवाइन जिगर और गुर्दे की खराबी के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद है।
6. मुँह समस्याएँ: अजवाइन दांत दर्द का इलाज करने के लिए असरकारक सिद्ध किया गया है। लौंग के तेल में एक हिस्सा अजवाइन का तेल होता है। दांत दर्द, मुँह से बुरी गंध और क्षय के इलाज के लिए अजवाइन पावडर और पानी के साथ कुल्ला करे । मौखिक स्वच्छता बनाए रखने के लिए यह सबसे अच्छा और कारगर तरीका है।
7. ठंड लगने पर उपयोगी: अजवाइन बंद नाक आदि सर्दी के लक्षणों का इलाज करने के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक तरीका है। राहत के लिए गर्म पानी में अजवाइन डालकर भाप ले,नाक तुरंत खुल जाएगी और सर्दी में भी आराम होगा।
अजवाइन पीसकर गुनगुने पानी के साथ इसका पेस्ट बना लें। चेहरे या शरीर के किसी भी प्रभावित हिस्से पर इस पेस्ट को लगाये । इसके अलावा सबसे अच्छा परिणाम के लिए अजवाइन के पानी से प्रभावित अंग को धोने की कोशिश करो। यह सूजन , फोड़े, पिम्पल्स या एक्जिमा में बहुत असरकारक है। नींबू के रस के साथ अजवाइन बीज का पेस्ट बना लें। यह सूजन को दूर करने में सहायक होगा।
8. अत्यधिक रक्तस्राव और अनियमित मासिक धर्म: इस समस्या में महिलाओं को अजवाइन का पानी पीने से बहुत लाभ होता है। रात में पानी से भरे मिट्टी के बर्तन में मुट्ठी भर अजवाइन भिगो दे । सुबह उन्हें पीसकर पी लो । धीरे धीरे आराम हो जायेगा।
9. पाचन: अजवाइन पाचन समस्याओं में भी बहुत लाभ पहुंचाती है। चीनी के साथ 1 बड़ा चम्मच अजवाइन चबाने से अपच से छुटकारा मिलेगा। यह चीनी के बिना भी सेवन किया जा सकता है।
10. गठिया: अजवाइन का तेल गठिया के दर्द के इलाज के लिए एक बहुत ही उपयोगी असरकारक नुस्खा है। अजवाइन के तेल के साथ नियमित रूप से प्रभावित जोड़ों पर मालिश करने से दर्द से राहत मिलती है।और गठिया रोग ठीक होने लगता है।
11. दस्त: अजवाइन पेचिश या दस्त का इलाज करने के लिए एक प्राकृतिक उपचार है। एक गिलास पानी में अजवाइन की एक मुट्ठी उबाल लें।ठंडा करके छानकर इसे दिन में दो बार पिए,तुरंत आराम मिलेगा। यह अपच और पेचिश के इलाज के लिए एक अचूक उपाय है।
12. वायरल संक्रमण: अजवाइन पाउडर के साथ दही का मिश्रण बना ले । एक पूरी रात के लिए चेहरे पर इस पेस्ट को लगाने से मुँहासे और निशान को हल्का कर सकते है। अच्छे परिणाम के लिए सुबह गुनगुने पानी से धो लें।
13. पेट दर्द में आराम: अजवाइन को नमक के साथ मिला कर गुनगुने पानी से लो। पेट दर्द में तुरंत आराम मिल जायेगा। यह बहुत अचूक नुस्खा है।
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अजवायन एक ऐसी चीज या औषधि है, जो अकेली ही एक ऐसी है जो कि सौ प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने वाली होती है।

अनेक प्रकार के गुणों से भरपूर अजवायन पाचक रूचि कारक, तीक्ष्ण, कढवी, अग्नि प्रदीप्त करने वाली, पित्तकारक तथा शूल, वात, कफ, उदर आनाह, प्लीहा, तथा क्रमि का नाश करने वाली होती है।

अति गर्म प्रकृति वालों के लिए यह हानिकारक होती है।
इसकी खेती सारे देश में होती है।

अजवायन का उपयोग औषिध के रूप में, मुख्यत: उदर एवं पाचन से समबन्धित विकारों तथा वात व्याधियों को दूर करने में बहुत गुणकारी होती है।

अजवायन में लाल मिर्च की तेजी, राई की कटुता तथा हींग और लहसुन की वातनाशक गुण एक साथ मिलते हें। इस लिए यह गुणों का भंङार है । इसी लिए यह उदर शूल, गैस, वायुशोला, पेट फूलना, वात प्रकोप आदि को दूर करता है। इसी कारण इसे घर पर छुपा हुआ वेद्य कहा गया है।

अजवायन की पत्ती का दिलकश स्वाद होता है। इसी कारण इसका (पत्ती) इतालवी व्यंजनों में, जेसे पिज्जा पास्ता आदि। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवायन की ताजा पत्ती में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन होते है.
विटामिन सी, विटामिन ए, लोहा, मैंगनीज और कैल्शियम और साथ ही युक्त ओमेगा -3 फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है। अजवायन से कैलशियम, फासफोरस, लोहा सोडियम व पोटेशियम जैसे तत्व मिलते हैं।
अजवायन के लाभ-अजवायन के गुण-अजवायन का औषिध
के रूप में उपयोग (THE BENEFITS OF PARSLEY)
  1. यह एक उत्कृष्ट एंटीऑक्सिडेंट है, अजवायन मोटापे को कम करने में भी मदद करती है। सर्दियों के मौसम में सर्द से बचने के लिए अजवायन एक सफल औषधि है। जंगली अजवायन की पत्ती का तेल श्रेष्ट माना गया है प्रतिरक्षा प्रणाली को दृढ़ करता है, श्वसन क्रिया को दुरुस्त करता है। जोड़ों और मांसपेशियों का लचीलापन बढाता है और त्वचा को संक्रमण से बचाता है। 
  2. अपच: बरसात के मौसम में पाचन क्रिया के शिथिल पड़ने पर अजवायन का सेवन काफी लाभदायक होता है। इससे अपच को दूर किया जा सकता है।
  3. अजीर्ण: अजवायन, काला नमक, सौंठ तीनों को पीसकर चूर्ण बना लें। भोजन के बाद फाँकने पर अजीर्ण, अशुद्ध वायु का बनना व ऊपर चढ़ना बंद हो जाएगा।
  4. झाईं: खीरे के रस में अजवायन पीसकर चेहरे की झाइयों पर लगाने से लाभ होता है।
  5. शराब उपद्रव नाशक: अधिक शराब पी लेने से अगर व्‍यक्ति को उल्‍टियां आ रहीं हो तो उसे अजवाईन खिलाना बेहतर होगा। इससे उसको आराम मिलेगा और भूंख भी अच्‍छी तरह से लगेगी।
  6. गर्भावस्था में: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अजवाइन जरुर खानी चाहिए, क्‍योंकि इससे ना सिर्फ खून साफ रहता है, बल्कि यह पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को संचालित भी करता है।
  7. कान दर्द: कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे कान में डालने से आराम मिलता है। 
  8. दाद-खा़ज: शरीर में दाने हो जाएं या फिर दाद-खा़ज हो जाए तो, अजवाइन को पानी में गाढ़ा पीसकर दिन में दो बार लेप करने से फायदा होता है। घाव और जले हुए स्थानों पर भी इस लेप को लगाने से आराम मिलता है और निशान भी दूर हो जाते हैं।
  9. गठिया: गठिया के रोगी को अजवाइन के चूर्ण की पोटली बनाकर सेंकने से रोगी को दर्द में आराम पहुंचता है। अजवाइन का रस आधा कप में पानी मिलाकर आधा चम्मच पिसी सोंठ लेकर ऊपर से इसे पीलें। इससे गठिया का रोग ठीक हो जाता है।
  10. खांसी: अजवाइन के रस में एक चुटकी काला नमक मिलाकर सेवन करें। और ऊपर से गर्म पानी पी लें। इससे खांसी बंद हो जाती है।
  11. गुर्दे का दर्द: गुड़ और पिसी हुई कच्ची अजवाइन समान मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच रोजाना 4 बार खायें। इससे गुर्दे का दर्द भी ठीक हो जाता है।
  12. रात में पेशाब करने  आदत: जिन बच्चे को रात में पेशाब करने की आदत होती है उन्हें रात में लगभग आधा ग्राम अजवाइन खिलायें।
  13. चेहरे का लेप : 2 चम्मच अजवाइन को 4 चम्मच दही में पीसकर रात में सोते समय पूरे चेहरे पर मलकर लगाएं और सुबह गर्म पानी से साफ कर लें।
  14. मसूढ़ों के रोग: अजवाइन को भून व पीसकर मंजन बना लें। इससे मंजन करने से मसूढ़ों के रोग मिट जाते हैं।
  15. खट्टी डकारें: अजवाइन, सेंधानमक, सेंचर नमक, यवाक्षार, हींग और सूखे आंवले का चूर्ण आदि को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम शहद के साथ चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
  16. जुकाम के साथ हल्का बुखार: देशी अजवाइन 5 ग्राम, सतगिलोए 1 ग्राम को रात में 150 मिलीलीटर पानी में भिगोकर, सुबह मसल-छान लें। फिर इसमें नमक मिलाकर दिन में 3 बार पिलाने से लाभ मिलता है।
  17. दमा: अजवाइन का रस आधा कप इसमें इतना ही पानी मिलाकर दोनों समय (सुबह और शाम) भोजन के बाद लेने से दमा का रोग नष्ट हो जाता है।
  18. मासिक धर्म की पीड़ा: मासिक धर्म के समय पीड़ा होती हो तो 15 से 30 दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ अजवायन लेने से दर्द मिट जाता है। मासिक अधिक आता हो, गर्मी अधिक हो तो यह प्रयोग न करें। सुबह खाली पेट 2-4 गिलास पानी पीने से अनियमित मासिक स्राव में लाभ होता है।
  19. एसिडिटी: एसिडिटी की तकलीफ है तो थोड़ा-थोड़ा अजवाइन और जीरा को एक साथ भून लें। फिर इसे पानी में उबाल कर छान लें। इस छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं, एसिडिटी से राहत मिलेगी।
  20. पेट दर्द, गैस और अशुद्ध वायु: इसे अदरक (सोंठ) पाउडर और काला नमक 2-2 और 1 के अनुपात में मिलाएं भोजन करने के बाद एक चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें तो पेट दर्द व गैस की समस्या में आराम मिलेगा। अशुद्ध वायु का बनना व सर में चढ़ना ख़त्म होगा।
  21. पेट दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि: अजवायन पाउडर का एक चम्मच (टी स्पून) ले उसमे एक चुटकी काला नमक मिला कर दिन में दो या तीन बार गुनगुने पानी के साथ सेवन से पेट में दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि में लाभकारी होती है।
  22. भूख लगाना: अजवायन, सौंफ, सोंठ और काला नमक को बराबर मात्रा में मिलाकर देसी घी के साथ दिन में तीन बार खाएं। भूख लगने लगेगी ।
  23. मोटापा नाशक: शाम को अजवायन को एक गिलास पानी में भिगोएं सुबह छानकर उस पानी में शहद डालकर पीने से मोटापे को कम करने में मदद होती है।
  24. मसूड़ों की सूजन: अजवायन के तेल की कुछ बूंदें गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है।
  25. खांसी जुकाम में रामबाण: खांसी जुकाम में चुटकी भर काला नमक, आधा चम्मच अजवायन और दो लोंग इन सब को पिसकर गुनगुने पानी के साथ दिन में कई बार पीने से अदभुत लाभ मिलता है। यह रामबाण दवा है।
  26. जमा कफ निकालने हेतु: आधा कप पानी में आधा चम्मच अजवायन और थोड़ी सी हल्दी पाउडर डालकर उबाले और ठंडा करें और इसमें एक चम्मच शहद डालकर पीएं। और गर्म पानी में अजवायन डालकर इसका भाप लें। इस से छाती में जमा कफ निकल जाता है ।
  27. शीत-पित्ती: शीत-पित्ती की बीमारी के लिए अजवायन के फूल को गुड के साथ मिला कर पानी से लेने से पित्ती ठीक होती है। अजवायन का चूर्ण गेरु में मिलाकर शरीर पर मलने से पित्ती में तुरन्त लाभ होता है।
  28. खांसी: बेर के पत्तों और अजवायन को पानी में उबालकर, छानकर उस पानी से गरारे करने पर खांसी में लाभ होता है।
  29. अर्धशिरशूल: अजवायन को पानी में डालकर उबालें। छानकर बार बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से आधे सिर दर्द में लाभ होता है। रात को कई बार पेशाब आने पर भी इसके सेवन से फायदा होता है।
  30. जोड़ों का दर्द: जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छे से गर्म करें व छान ले और इससे जोड़ों की मालिश करे इससे आराम होगा।
  31. कृमिनाशक: अजवायन प्रबल कीटनाशक है। आँतों में कीड़े होने पर अजवायन के साथ काले नमक का सेवन करने पर पेट के कीड़े बाहर निकल जाते हैं। अजवायन का चूर्ण और गुड समान मात्रा में मिलकर गोली बनाकर दिन में दो तीन बार खिलाने से पेट के सभी प्रकार के कीडे नष्ट हो जाते है।
  32. कृमिनाशक: एक से दो ग्राम ग्राम अजवायन का चूर्ण छाछ के साथ देने से पेट के कीडे नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते है।
  33. कृमिनाशक: सुबह दस-पन्द्रह ग्राम गुड खाकर दस-पन्द्रह मिनट बाद एक से दो ग्राम अजवायन का चूर्ण बासी पानी के साथ ले। इससे आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे मर कर मल के साथ बहार निकल जायेंगे।
  34. दस्तावर: अजवायन को रात में चबाकर गरम पानी पीने से सवेरे पेट साफ हो जाता है।
  35. खॉसी और कफ एवं कफ की दुर्गन्ध: अजवायन के फूल को शहद में मिलाकर लेने से खॉसी और कफ में फायदेमंद होता है। इससे कफ की दुर्गन्ध भी खत्म होती है।
  36. चोट सूजन व दर्द: चोट लगने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस बाँधने से चोट की सूजन व दर्द कम होती है।
  37. दस्त: अजवायन का अर्क या तेल 10-15 बूँद बराबर लेते रहने से दस्त बंद होते हैं।
  38. ठंड का बुखार: अजवायन का चूर्ण दो-दो ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार लेने से ठंड का बुखार शान्त होता है।
  39. ब्लडप्रेशर: ब्लडप्रेशर, बाय का दर्द, रक्तचाप और चर्म रोगों, में ऊँगलियों के काम न करने पर अजवायन के फूल एवं गिलोय का अर्क 1-1 ग्राम साथ मिलाकर लेना लाभ दायक होता है।
  40. चर्मरोग: अजवायन के फूल (सफ़ेद दाने के रूप में बाज़ार में उपलब्ध) का चूर्ण पानी में मिलाकर उस घोल से घाव, दाद, खुजली, फुंसियाँ आदि धोने पर ये चर्मरोग नष्ट होते हैं।
  41. प्रसव के बाद: अजवायन का प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन को पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए सभी परम्परागत भारतीय परिवारों में लड्डू बना कर खिलाया जाने की परंपरा हे। यह चमत्कारी लाभ देता हे। प्रसूति स्त्रियों को अजवायन व गुड मिलाकर देने से भूख बढ़ती है। प्रसव के बाद अजवायन के प्रयोग से गर्भाशय शुद्ध होता है। गर्भाशय पूर्वास्थिती में आ जाता है। दूध ज्यादा बनता है। बुखार व कमर का दर्द ठीक करता है। इससे खराब मासिक चक्र ठीक भी हो जाता हें।
  42. पेट दर्द, जलन, अफारा और मलमूत्र की रूकावट: अजवायन 10 ग्राम, छोटी हरड़ का चूर्ण 6 ग्राम, सेंधा नमक 3 ग्राम, हींग 3 ग्राम का चूर्ण बनाकर रखें और 3-3 ग्राम की मात्रा में जल के साथ लें तो पेट दर्द, जलन, अफारा , और मलमूत्र की रूकावट दूर होती है।
  43. बदन दर्द: अजवायन चूर्ण गरम पानी के साथ लेने से या अर्क को गुनगुना करके पीने से या इसके तेल की मालिश करने से बदन दर्द ठीक होता है।
  44. शक्तिशाली एंटीबायोटिक, एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सिडेंट: अजवायन की पत्ती माहवारी के विकारों के उपचार, फेफड़ों की समस्याओं और अजीर्ण में और प्रयोग किया जाता है यह शक्तिशाली एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सिडेंट भी होता है। अजवायन की पत्ती में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक तत्व हंड यह संक्रमण को दूर रखने के महत्वपूर्ण होता है।
  45. किडनी या गुर्दे का दर्द: किडनी या गुर्दे संबंधी परेशानी में एक बड़ा चम्मच जीरा और दो चम्मच अजावयन को पीस कर पाउडर बना लें। इसमें थोड़ा सा काला नमक और एक चम्मच भूरे रंग का सिरका डाले। हर घंटे बाद एक-एक चम्मच इस मिश्रण का लें। दर्द से जल्द ही आराम मिल जाएगा।
  46. हाजमा: दोपहर को भोजन के बाद पिसी 2 - 3 ग्राम अजवायन लेने से खाना आसानी से हजम होता है।
  47. पुरानी खांसी: पान में अजवायन को डाल कर खाने से पुरानी खांसी ठीक होती है।
  48. मालिश: अजवायन को सरसों के तेल में डाल कर पकायें उससे बच्चों को मालिश करें सर्दी-जुकाम में तथा प्रसव उपरांत लाभ होगा।
  49. मसूड़ों में सूजन: मसूड़ों में सूजन होने पर अजवायन के तेल की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर कुल्ला करने से सूजन कम होती है।
  50. आधे सिर में दर्द: आधे सिर में दर्द होने पर एक चम्मच अजवायन आधा लीटर पानी में डालकर उबालें। पानी को छानकर रखें एवं दिन में दो-तीन बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से काफी लाभ होगा।
  51. जोड़ों का दर्द: सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छी तरह गरम करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
  52. चोट के नीले-लाल दाग: चोट लगने पर नीले-लाल दाग पड़ने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस चोट पर बाँधने पर दर्द व सूजन कम होती है।
  53. मुख में दुर्गंध: मुख से दुर्गंध आने पर थोड़ी सी अजवायन को पानी में उबालकर रख लें, फिर इस पानी से दिन में दो-तीन बार कुल्ला करने पर दो-तीन दिन में दुर्गंध खत्म हो जाती है।
स्रोत : http://desi-prescriptions.blogspot.in/2015/10/benefits-of-parsley.html
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नोट : कृपया उपचार के नाम पर गारण्टी देकर ठगने वालों से बचें और एक बार सेवा का मौका प्रदान करें। उपचारक बाद में पहले-स्वास्थ्य रक्षक सखा डॉ. पुरुषोत्तम मीणा-मोबाईल एवं वाट्स एप नम्बर : 9875066111.

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

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सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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(Tribulus Terrestris) 14 फरवरी Abutilon Indicum Aerva Lanat Allergy Aloevera Juice Alternanthera Sessilis Alum Aluminum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Appetite Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Ban Tulasi Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Bone Infection Borax BPH Calories Calories Chart Cancer Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chemotherapy Chenopodium Album Chikungunya Cholesterol Cleome viscosa Clerodendrum Phlomidis Clitoria Ternatea Colocynth Colpoptosis Constipation Convolvulus Pluricaulis Corn Creak Crotalaria Bburhia Croton Bonplandianum Croton Sparsiflorus Cumin Date Palm Dengue Depression Diabetes digestion Disorders Divorce Dog Mustard Dronapushpi Dysentery Early Ejaculation Emblic Myrobalan Extramarital Relation Extremely Intolerance Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Ferrum Phosphoricum Fever Fissure Fistula Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hainampfer Hair Falling Headaches Health Health Care Friend Health Consultation Health Links Health Tips Heliotropium Eeuropaeum Hemorrhoids Hepatitis Hibiscus Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? Immunity Impotence IMPOTENCY Incurable indigestion Jaundice Juice Juice of Berries LAND CALTROPS Lemon Leucas Aspera Leucas Cephalotes Leucorrhea Lever Liver Liver Cirrhosis Liver fibrosis Low Blood Pressure Marital Dispute Consultant Masturbation Mental Mexican Daisy Mexican Poppy Migraine Migraines Myopia Neurons Night Jasmine Nutgrass Nutmeg Nutsedge Obesity Omega 3 Oroxylum indicum Painkillers Periquito Sessil Phyllanthus Niruri Piles Portulaca Oleracea Post Effect Pregnancy Safe-Guard Pregnancy Safeguard Pregnancy-Safe-Guard Premature Ejaculation Prostate Gland Protein Purple Nutsedge Raan Tulas Radish Rectal Collapse Rectal Prolapse rectum collapse Saffron Senna occidentalis Separation Sex Sexual Power Sickness Side Effects side effects less Side-Effects Spermatorrhoea Sperms Spiny Amaranth Stone Stone Breaker Sword fruit tree TECOMA STANS Thermometer Tickweed Tips Treatment of Incurable Tribulus Terrestris Tridax Procumbens Umbrella Sedge Unquenchable Conjugal Uterine Prolapse vaginal Creaks Vaginal Prolapse Viral Vitamins Vitex Negundo Wart Wheatgrass White Discharge Yellow Spider Flower अंकुरित अनाज अंकुरित गेहूं-Wheat germ अंकुरित भोजन-Sprouts अखरोट अंगूर-Grapes अचूक चमत्कारिक चूर्ण अजवाइन अजवायन अजीर्ण-Indigestion अंडकोष अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut अण्डी अतिबला अतिसार अतिसार-Diarrhea अतृप्त अतृप्त दाम्पत्य अत्यंत असहिष्णुता अदरक अदरख अंधश्रृद्धा अध्ययन अनिद्रा अपच अपराजिता अपराधबोध अफरा अफीम अमरूद अमृता अम्लपित्त-Pyrosis अरंडी अरणी अरण्ड अरण्डी अरलू अरुचि अरुचि-Anorexia-Distaste अर्जुन अर्थराइटिस अर्द्धसिरशूल अर्श अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles अलसी अल्टरनेथेरा सेसिलिस अल्सर अल्सर-Ulcers अवसाद अवसाद-Depression अश्मःभेदः अश्वगंधा अश्वगंधा-Winter Cherry असंतुष्ट असफल असर नहीं असली अस्थमा अस्थमा-दमा-Asthma आइरन आक आकड़ा आघात आत्महत्या आंत्र कृमि आंत्रकृमि-Helminth आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever आदिवासी आधाशीशी आधासीसी आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower आमला आमवात आमाशय आयुर्वेद आयुर्वेदिक आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक औषधियां आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup आयुर्वेदिक-Ayurvedic आरोग्य आँव आंव आंवला आंवला जूस आंवला रस आशावादी-Optimistic आसन आसान प्रसव-Easy Delivery आहार चार्ट आहार-Food आॅपरेशन आॅर्गेनिक आॅर्गेनिक कौंच इच्छा-शक्ति इन्द्रायण इन्फ्लुएंजा इमर्जेंसी में होम्योपैथी इमली-Tamarind Tree इम्युनिटी इलाज इलाज का कुल कितना खर्चा इलायची उच्च रक्तचाप उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension उत्तेजक उत्तेजना उदर शूल-Abdominal Haul उदासी उन्माद-Mania उपवास उम्र उल्टी ऊर्जा एक्जिमा एक्यूप्रेशर एग्जिमा एजिंग-Aging एंटी ऑक्सीडेंट्स एंटी-ओक्सिडेंट एंटीऑक्सीडेंट एण्टी-आॅक्सीडेंट एनजाइना एनीमिया एमिनो एसिड एरंड एलर्जी एलर्जी-Allergy एलोवेरा एलोवेरा जूस एल्यूमीनियम ऐंठन ऐलोपैथ ऐसीडिटी ऑर्गेनिक ओमेगा 3 के स्रोत ओमेगा-3 ओर्गेनिक औषध-Drug औषधि सूची-Drug List औषधियों के नुकसान-Loss of drugs कचनार कचनार-Bauhinia Purpurea कटुपर्णी कड़वाहट कंडोम कद्दू कनेर कपास-COTTON कपिकच्छू कपूरीजड़ी कफ कब्ज कब्ज़ कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation कब्ज. Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गलगण्ड गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गारण्टेड इलाज गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाद्वार गुदाभ्रंश गुम्मा गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गेदुआ की छाछ गैस गैस्ट्रिक गैहूं का जवारा गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखगांजा गोरखबूटी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिटकन चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाजन बूटी छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जख्म जंगली तिल्ली जंगली तुलसी जंगली पेड़ जंगली मिर्ची जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बंध्यापन बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूत-प्रेत भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्ररोग मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनिद्वारा योनिभ्रंश योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills) यौन क्षमता यौन दौर्बल्य यौन शक्तिवर्धक यौन शिक्षा यौन समस्याएं यौनतृप्ति यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea 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शीघ्रपतन शीस शुक्राणु शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोक शोथ शोध श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संक्रमित संक्रामक संखाहुली सगतरा संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सफेद मूसली सब्जि सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी-जुकाम सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवाद संवेदना सहदेई सहदेवी सहानभूति साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिगरेट सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सी-सेक्शन सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स उत्तेजक दवा सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पार्टनर सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्खलन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्पर्श स्मृति-लोप स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य परामर्श स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डी संक्रमण हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हाई बीपी हाथ-पैर नहीं कटवायें हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हुरहुर हुलहुल हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हेल्थ बुलेटिन हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्यापैथ होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक इलाज होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy