Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Health Care Friend and Marital Dispute Consultant
(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)
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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।
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गुड़हल (Hibiscus)
गुड़हल फूल के 5 चमत्कारी लाभ के बारे में जानें
आप सभी ने गुड़हल का फूल तो देखा ही होगा। अक्सर लोग अपने घरों में इस खूबसूरत फूल का पौधा लगाते हैं। लेकिन अगर आपको लगता है कि ये फूल सिर्फ आपके आंगन की खूबसूरती ही बढ़ाता है तो शायद आप अभी इस फूल के बारे में ज्यादा कुछ जानते नहीं है। दरअसल गुड़हल के फूल में काफ अधिक औषधीय गुण भी होते हैं। जिसकी वजह से इन फूलों का इस्तेमाल आप कई शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए कर सकते हैं। गुड़हल का फूल छोटी मोटी चोट को भरने से लेकर आपकी सेक्स लाइफ को बेहतक बनाने तक का काम करता है। चलिए विस्तार से जानते हैं इस खूबसूरत फूल के सभी फायदों के बारे में।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल करे: अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो इस फूल का पौधा घर पर ज़रूर लाकर रखें, ये आपके बहुत काम आएगा। कई प्रकार के अध्ययनों से ये साबित हुआ है कि ये फूल ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करके दिल की बीमारी होने की संभावना को कम करता है। अब बताइये, इससे नैचुरल तरीका मिलेगा आपको अपना ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने का?
खरोंच और कट के घाव ठीक करे: घर में अगर बच्चे हैं तो समझिये छोटी मोटी चोट तो आपके लिए आम बात होगी। बच्चे खेलते-खेलते गिर जाते हैं या कोई नुकीली चीज़ लगा लेते हैं जिससे उनको छोटा घाव हो जाता है। या अगर आप किचन में काम करते हुए चाकू से उंगली काट लेती हैं तो गुड़हल के पत्तों का लेप आपके बहुत काम आएगा। इससे बहुत जल्दी घाव भरता है।
कॉलेस्ट्रॉल कम करे: कॉलेस्ट्रॉल अगर शरीर में बहुत बढ़ जाए तो आपको दिल की कई बीमारियां हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि अपना कॉलेस्ट्रॉल कंट्रोल करें। एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि 1 ग्राम गुड़हल के पत्ते का रस वेट और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल दोनों को कंट्रोल कर सकता है।
सेक्स लाइफ में भरे उमंग – जी हां, हैरान न हो। गुड़हल का फूल आपकी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने में भी आपकी मदद कर सकता है। इस फूल में पुरूषों के कामोत्तेजना को बढ़ाने का गुण होता हैं क्योंकि ये मेल एन्ड्रोजेन का काम करते है।
पेद दर्द व सूजन कम करे – गुड़हल के पत्तों में फ्लेवनॉयड और पॉलीफेनॉल होता है जो शरीर में किसी भी प्रकार के सूजन और पेट की गड़बड़ी के उपचार में मदद करता है। पेट दर्द तो बहुत आम बीमारी है जो घर में किसी न किसी को लगा ही रहता है। इसलिए कोशिश करें कि ये पौधा आपके घर में हो, ताकि आपको ज्यादा दवा न खाना पड़े।
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गुणों से भरपूर है गुड़हल की पत्ती
गुड़हल एक खूबसूरत फूलों वाला पौधा है, जो आमतौर पर ट्रॉपिकल और गर्म क्षेत्रों में पाया जाता है। इस पौधे की कई प्रजातियां पाई जाती है और सभी अपने खूबसूरत फूलों के जानी जाती है। मजेदार बात यह है कि गुड़हल का फूल दक्षिण कोरिया, मलेशिया और हैथी गणराज्य का राष्ट्रीय फूल है। भारत में इस फूल को काफी शुभ माना जाता है और कई धार्मिक संस्कारों और चढ़ावें में इसका इस्तेमाल किया जाता है। प्रचीन भारतीय आयुर्वेद में गुड़हल का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता था। गुड़हल की पत्ती का इस्तेमाल न सिर्फ औषधीय, बल्कि कई रूपों में किया जाता है। कई बार तो इसका इस्तेमाल पार्क और गार्डन को सजाने के लिए भी किया जाता है। गुड़हल की पत्ती को विभिन्न तरह से इस्तेमाल के लिए अलग-अलग रूपों में संसाधित किया जाता है। गुड़हल की सूखी पत्ती का इस्तेमाल मैक्सिकन जैसे कई व्यंजन को सजाने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इसकी पत्ती का इस्तेमाल चाय बनाने के लिए किया जाता है, जो कई देशों में अलग-अलग नामों से चर्चित है। कई शोध के जरिए वैज्ञानिक रूप से यह बात सिद्ध हो चुकी है कि गुड़हल की पत्ती में औषधीय गुण पाए जाते हैं। 2008 में यूएसडीए के अध्ययन में पाया गया कि गुड़हल का चाय पीने से ब्लड प्रेशर कम होता है। आयुर्वेद में लाल और सफेद गुड़हल को औषधीय गुण से भरपूर माना जाता है और इसका इस्तेमाल खांसी, बालों के झड़ने और बालों के सफेद होने की समस्या से निजात पाने के लिए किया जाता है। साथ ही गुड़हल एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होता है और इसका इस्तेमाल एंटी-एजिंग के रूप में किया जाता है। इसके अलावा गुड़हल की पत्ती से बनी चाय का इस्तेमाल शरीर में स्फूर्ति जगाने के लिए भी किया जाता है।
01. हेयर कंडीशनर गुड़हल की पत्ती और इसके फूल की पंखुड़ी से बना पेस्ट प्राकृतिक हेयर कंडीशनर का काम करता है। जब इसे शैंपू के बाद लगाया जाता है तो यह बालों के रंग को काला करता है और डैंड्रफ से भी छुटकारा दिलाता है।
02. चाय गुड़हल की पत्ती से बनी चाय का इस्तेमाल कई देशों में औषधि के रूप में किया जाता है। अगर आपको किडनी की समस्या है तो इससे बनी चाय बिना शक्कर के लें। साथ ही इससे डिप्रेशन के समय मूड भी ठीक हो जाएगा।
03. स्किन केयर अपने खास गुणों के कारण गुड़हल का इस्तेमाल कॉस्मेटिक स्किन केयर में किया जाता है। परंपरागत चीनी दवाइयों में गुड़हल की पत्ती का इस्तेमाल एंटी-सोलर एजेंट के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह अल्ट्रावाइलेट रेडिएशन को सोख लेता है। साथ ही इसका इस्तेमाल स्किन की झुर्रियों से निजात पाने में भी किया जाता है।
04. ब्लड प्रेशर कम करे: अध्ययन से पता चला है गुड़हल की पत्ती से बनी चाय पीने से ब्लड प्रेशर की समस्या से निजात मिलता है। इसलिए ब्लड प्रेशर कम करने के लिए इसका नियमित सेवन करना चाहिए।
05. घाव पर भी असरदार: गुड़हल से निकले तेल का इस्तेमाल खुले घाव और कैंसर से हुए घाव पर किया जाता है। साथ ही ये कैंसर के प्रारंभिक चरण काफी कारगर होता है।
06. कोलेस्टेरोल कम करे गुड़हल: की पत्ती से बनी चाय एलडीएल कोलेस्टेरोल को कम करने में काफी प्रभवी होती है। इसमें पाए जाने वाले तत्व अर्टरी में प्लैक को जमने से रोकते हैं, जिससे कोलेस्टेरोल का स्तर कम होता है।
07. सर्दी और खासी में फायदेमंद: गुड़हल की पत्ती में प्रचूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। जब चाय या अन्य रूपों में इसका सेवन किया जाता है तो यह सर्दी और खांसी के लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे आपको सर्दी से जल्द राहत मिलेगी।
08. वजन कम करने और पाचन में सहायक: गुड़हल के सेवन से भूख की इच्छा शांत होती है। ऐसे में यह वजन कम करने में काफी मददगार होता है। हड़हुल की पत्ती से बनी चाय पीने से आप कम खाएंगे और आपकी पाचन प्रक्रिया भी तेज होगी। इससे शरीर में अनावश्यक फैट नहीं बनता है।
09. रेगुलर मेंस्ट्रल: साइकल गुड़हल की पत्ती से बनी चाय के नियमित सेवन से महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम होता है। इससे शरीर में हार्मोन का संतुलन बना रहता है। यही वजह है मेंस्ट्रल साइकल में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है।
10. एंटी ऐजिंग: गुड़हल की पत्ती में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यह शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को हटाता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। कई मामलों में तो जीवन में भी वृद्धि हो जाती है।
स्वास्थ्यवर्धक खजूर (छुहारा छुआरा)
"होली के बाद खजूर खाना हितकारी नहीं है।"
"लॉ ब्लड प्रेशर/कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें। फिर इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबालें। उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं और छुआरों को चबा-चबा कर खाएं। कुछ ही दिनों में लॉ ब्लड प्रेशर से छुटकारा मिल जायेगी।"
अरबी देशों में खजूर की व्यवस्थित रूप से खेती के प्रमाण ईसा से 3000 वर्ष पूर्व के हैं। चार खजूरों में लगभग 230 कैलोरी, 2 ग्राम प्रोटीन, 62 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 570 मिली ग्राम पोटेशियम और 6 खाद्य रेशे होते हैं। साथ ही इसमें कोलेस्ट्राल और वसा की मात्रा बिलकुल नहीं होती इस कारण यह एक आदर्श फल माना जाता है।
खजूर में 60 से 70 प्रतिशत तक शर्करा होती है, जो गन्ने की चीनी की अपेक्षा बहुत पौष्टिक व गुणकारी है। स्वादिष्ट होने के साथ ही सेहत की दृष्टि से भी खजूर बहुत गुणकारी है।
जानिये खजूर के स्वास्थ्यवर्धक गुण :
खजूर की ऊपरी सतह चिकनी होने से धूल मिट्टी बैठने की संभावना होती है। इसलिए खजूर खरीदते समय सही पैकिंग वाला ही खरीदना चाहिए और प्रयोग में लाने से पहले साफ़ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए।आंखों के रोग : खजूर की गुठली का सुरमा आंखों में डालने से आंखों के रोग दूर होते हैं।
खांसी और बलगम : छुहारे को घी में भूनकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी और बलगम में राहत मिलती है।
कब्ज नाशक खजूर का अचार : सुबह-शाम तीन छुहारे खाकर बाद में गर्म पानी पीने से कब्ज दूर होती है। खजूर का अचार भोजन के साथ खाया जाए तो अजीर्ण रोग नहीं होता तथा मुंह का स्वाद भी ठीक रहता है। खजूर का अचार बनाने की विधि थोड़ी कठिन है, इसलिए बना-बनाया अचार ही ले लेना चाहिए।
मलावरोध : रात को भिगोकर सुबह दूध के साथ लेने से पेट साफ हो जाता है।
नशे का जहर : किसी को नशा करने से शरीर में हानी हो गयी है। नशे का जहर शरीर में है। अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ रही हो। ऐसे लोग भी अस्पताल ले जाने में हो रही देरी के दौरान तुरंत खजूर का सेवन करायें और जल्दी से अस्पताल ले जायें।
खुलकर मासिक धर्म : छुहारे खाने से मासिक धर्म खुलकर आता है और कमर दर्द में भी लाभ होता है।
दांतों का गलना रुक जाता है : छुहारे खाकर गर्म दूध पीने से कैलशियम की कमी से होने वाले रोग, जैसे दांतों की कमजोरी, हड्डियों का गलना इत्यादि रूक जाते हैं।
मस्तिष्क व हृदय की कमजोरी : रात को खजूर भिगोकर सुबह दूध या घी के साथ खाने से मस्तिष्क व हृदय की पेशियों को ताकत मिलती है। विशेषतः रक्त की कमी के कारण होने वाली हृदय की धड़कन व एकाग्रता की कमी में यह प्रयोग लाभदायी है।
मधुमेह रोगियों के लिए : मधुमेह के रोगी जिनके लिए मिठाई, चीनी इत्यादि वर्जित है, सीमित मात्रा में खजूर का इस्तेमाल कर सकते हैं। खजूर में वह अवगुण नहीं है, जो गन्ने वाली चीनी में पाए जाते हैं।
बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो : छुहारे खाने से पेशाब का रोग दूर होता है। बुढ़ापे में पेशाब बार-बार आता हो तो दिन में दो छुहारे खाने से लाभ होगा। छुहारे वाला दूध भी लाभकारी है। यदि बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता हो तो उसे भी रात को छुहारे वाला दूध पिलाएं। यह मसानों को शक्ति पहुंचाते हैं।
मांस की वृद्धि : खजूर में शर्करा, वसा (फैट) व प्रोटीन्स विपुल मात्रा में पाये जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मांस की वृद्धि होकर शरीर पुष्ट हो जाता है।
सिर की जुएं : खजूर की गुठली को पानी में घिसकर सिर पर लगाने से सिर की जुएं मर जाती हैं।
मांस की वृद्धि : खजूर में शर्करा, वसा (फैट) व प्रोटीन्स विपुल मात्रा में पाये जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मांस की वृद्धि होकर शरीर पुष्ट हो जाता है।
सिर की जुएं : खजूर की गुठली को पानी में घिसकर सिर पर लगाने से सिर की जुएं मर जाती हैं।
लॉ ब्लड प्रेशर/रक्तचाप : लॉ ब्लड प्रेशर/कम रक्तचाप वाले रोगी 3-4 खजूर गर्म पानी में धोकर गुठली निकाल दें। फिर इन्हें गाय के गर्म दूध के साथ उबालें। उबले हुए दूध को सुबह-शाम पीएं और छुआरों को चबा-चबा कर खाएं। कुछ ही दिनों में लॉ ब्लड प्रेशर से छुटकारा मिल जायेगी।
परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
मुलेठी की नोट्स
- सावधान: मुलेठी का सेवन लंबे समय तक नहीं करना चाहिए। बीच-बीच में बंद कर दें।
- पहचान: असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है।
- त्रिदोषनाशक: मुलेठी अपने गुणों के कारण ही बढ़े हुए तीनों दोषों वात, कफ और पित्त को शांत करती है।
- अगर आप इसकी जड़ का औषधि के रूप में इस्तेमाल कर रहे हो तो इसकी जड़ को उखाड़ने के 2 साल बाद तक इसका प्रयोग किया जा सकता है।
- ये बच्चो, बड़ों, स्त्री, पुरुषों और वृद्धो सबसे लिए गुणकारी होती है।
- कोई भी समस्या न हो तो भी कभी-कभी मुलेठी का सेवन कर लेना चाहिए आँतों के अल्सर, कैंसर का खतरा कम हो जाता है तथा पाचनक्रिया भी एकदम ठीक रहती है।
- कफ-खांसी में मुलेठी का काढा-सुबह और शाम 3 से 5 दिन तक।
- लगभग एक महीने तक, आधा चम्मच मुलेठी का चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ चाटने से मासिक सम्बन्धी सभी रोग दूर होते है।
- मुलेठी की जड़ पेट के घावों को समाप्त करती है, इससे पेट के घाव जल्दी भर जाते हैं। पेट के घाव होने पर मुलेठी की जड़ का चूर्ण इस्तेमाल करना चाहिए।
January 26, 2015
सिद्ध आयुर्वेदिक
*मुलहठी से विभिन्न रोगों में उपचार*
घाव (जख्म):
- मुलहठी पेट में बन रहे एसिड (तेजाब) को नष्ट करके अल्सर के रोग से बचाती है।
- पेट के घाव की यह सफल औषधि है।
- मुलहठी खाने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। इसका सेवन लंबे समय तक नहीं करना चाहिए। बीच-बीच में बंद कर दें।
- मुलहठी को पीसकर घी के साथ चूर्ण के रूप में हर तरह के घावों पर बांधने से शीघ्र लाभ होता है।
- चाकू आदि के घाव के कारण उत्पन्न तेज दर्द रोगी को बहुत कष्ट देता है। यह दर्द मुलहठी के चूर्ण को घी में मिलाकर थोड़ा गर्म करके लगाने से शीघ्र ही शांत होता है।
कफ व खांसी:
- खांसी होने पर यदि बलगम मीठा व सूखा होता है तो बार-बार खांसने पर बड़ी मुश्किल से निकल पाता है। जब तक गले से बलगम नहीं निकल जाता है, तब तक रोगी खांसता ही रहता है। इसके लिए 2 कप पानी में 5 ग्राम मुलहठी का चूर्ण डालकर इतना उबाल लें कि पानी आधा कप बचे। इस पानी को आधा सुबह और आधा शाम को सोने से पहले पी लें। 3 से 4 दिन तक प्रयोग करने से कफ पतला होकर बड़ी आसानी से निकल जाता है और खांसी, दमा के रोगी को बड़ी राहत मिलती है। यक्ष्मा (टी.बी.) की खांसी में मुलहठी चूसने से लाभ होता है।
- दो ग्राम मुलहठी पाउडर, 2 ग्राम आंवला पाउडर, 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम खाने से खांसी में लाभ होता है।
नपुंसकता (नामर्दी):
- रोजाना मुलहठी चूसने से नपुंसकता नष्ट हो जाती है।
- 10 ग्राम मुलहठी का पिसा हुआ चूर्ण, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध को पीने से नपुंसकता का रोग कुछ ही समय में कम हो जाता है।
- 10-10 ग्राम मुलहठी, विदारीकंद, तज, लौंग, गोखरू, गिलोय और मूसली को लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण लगातार 40 दिनों तक सेवन करने से नपुंसकता का रोग दूर हो जाता है।
दाह (जलन): मुलहठी और लालचंदन पानी के साथ घिसकर शरीर पर लेप करने से जलन शांत होती है।
अम्लपित्त (एसिडिटिज):
- खाना खाने के बाद यदि खट्टी डकारें आती हैं, जलन होती है तो मुलहठी चूसने से लाभ होता है। भोजन से पहले मुलहठी के 3 छोटे-छोटे टुकड़े 15 मिनट तक चूसें, फिर भोजन करें।
- मुलहठी का चूर्ण 1 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से आमाशय की अम्लपित्त (एसिडिटीज) समाप्त हो जाती है और पेट दर्द मिट जाता है।
कब्ज़, आंव:
- 125 ग्राम पिसी मुलहठी, 3 चम्मच पिसी सोंठ, 2 चम्मच पिसे गुलाब के सूखे फूल को 1 गिलास पानी में उबालें। जब यह ठंडा हो जाए तो इसे छानकर सोते समय रोजाना पीने से पेट में जमा आंव (एक तरह का चिकना सफेद मल) बाहर निकल जाता है।
- 5 ग्राम मुलहठी को गुनगुने दूध के साथ सोने से पहले पीने से सुबह शौच साफ आता है और कब्ज दूर हो जाती है।
पेशाब के रोग:
- पेशाब में जलन, पेशाब रुक-रुककर आना, अधिक आना, घाव और खुजली और पेशाब सम्बंधी समस्त बीमारियों में मुलहठी का प्रयोग लाभदायक है। इसे खाना खाने के बाद रोजाना 4 बार हर 2 घंटे के उंतराल पर चूसते रहना लाभकारी होता है। इसे बच्चे भी आसानी से बिना हिचक ले सकते हैं।
- 1 चम्मच मुलहठी का चूर्ण 1 कप दूध के साथ लेने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।
हृदय शक्तिवर्धक (शक्ति को बढ़ाने वाला): ज्यादातर शिराओं और धमनियों पर गलत खान-पान, गलत आदतें और काम का अधिक भार पड़ने से कमजोरी आ जाती है, इससे हृदय को हानि पहुंचती है। इस कारण से अनिंद्रा (नींद का न आना), हाई और लो ब्लड प्रेशर जैसे रोग हो जाते हैं। ऐसे में मुलहठी का सेवन काफी लाभदायक होता है।
फेफड़ों के रोग: मुलहठी फेफड़ों की सूजन, गले में खराश, सूजन, सूखी कफ वाली खांसी में लाभ करती है। मुलहठी फेफड़ों को बल देती है। अत: फेफडे़ सम्बंधी रोगों में यह लाभकारी है। इसको पान में डालकर खाने से लाभ होता है। टी.बी. (क्षय) रोग में भी इसका काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है।
विष (ज़हर): जहर पी लेने पर शीघ्र ही उल्टी करानी चाहिए। तालु को उंगुली से छूने से तुरन्त उल्टी हो जाती है। यदि उल्टी नहीं आये तो एक गिलास पानी में 2 चम्मच मुलहठी और 2 चम्मच मिश्री को पानी में डालकर उबाल लें। आधा पानी शेष बचने पर छानकर पिलायें। इससे उल्टी होकर जहर बाहर निकल आता है।
मांसपेशियों का दर्द: मुलहठी स्नायु (नर्वस स्टिम) संस्थान की कमजोरी को दूर करने के साथ मांसपेशियों का दर्द और ऐंठन को भी दूर करती है। मांसपेशियों के दर्द में मुलहठी के साथ शतावरी और अश्वगंधा को समान रूप से मिलाकर लें। स्नायु दुर्बलता में रोजाना एक बार जटामांसी और मुलहठी का काढ़ा बनाकर लेना चाहिए।
गंजापन, रूसी (ऐलोपीका): मुलहठी का पाउडर, दूध और थोड़ी-सी केसर, इन तीनों का पेस्ट बनाकर नियमित रूप से बाल आने तक सिर पर लगायें। इससे बालों का झड़ना और बालों की रूसी आदि में लाभ मिलता है।
बाजीकरण (कामोद्दीपन): मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से शुक्र वृद्धि और बाजीकरण होता है।
सिद्ध आयुर्वेदिक
See : https://sidhayuvadic7.wordpress.com/2015/01/26/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%A0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE/
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जानिए मुलहठी के 6 अनमोल गुण
1. अगर आप सूखी खांसी या गले की समस्याओं से परेशान हैं, तो मुलहठी आपके काम की चीज है। काली मिर्च के साथ पीस कर मुलहठी का सेवन, सूखी खांसी में तो लाभकारी है ही, साथ ही इसे चूसने या उबालकर सेवन करने से गले की खराश, दर्द आदि में भी लाभ होता है।
2. मुलहठी चेहरे की खूबसूरती को बढ़ाने का काम करती है। इसे घिसकर लगाने पर चेहरे के दाग और मुंहासे ठीक हो जाते हैं, साथ ही यह आपकी त्वचा को जवा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुलहठी रक्त को भी शुद्ध करती है, जिससे त्वचा की समस्याएं नहीं होती।
3. दूध के साथ मुलहठी का सेवन शरीर की ताकत में वृद्धि करता है। इसके अलावा घी व शहद के साथ मुलहठी का प्रयोग करने से हृदय से संबंधित समस्याएं नहीं होती।
4. मुंह में छाले हो जाने की स्थिति में मुलहठी चूसना, इसके पानी से कुल्ला करना और उसे पीना बहुत जल्दी छालों से राहत देता है। साथ ही मुलहठी आवाज को मधुर और सुरीली बनाने के लिए भी उपयोग की जाती है।
5. पेट के अल्सर में मुलहटी का सेवन ठंडक देने के साथ ही लाभप्रद होता है। आंत की टीबी होने की स्थिति में भी मुलहठी फायदेमंद उपाय है।
6. त्वचा या शरीर में कहीं जल जाने पर भी मुलहठी के चूर्ण और मक्खन का लेप एक कारगर उपाय है, साथ ही यह आंखों की रौशनी में भी वृद्धि करती है।
See : http://hindi.webdunia.com/health-care/benefits-of-mulethi-115070600013_3.html
By: PurnimaPublished: Friday, April 11, 2014, 14:04 [IST]
मुलहठी एक प्रसिद्ध और सर्वसुलभ जड़ी है। असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। यह सूखने पर अम्ल जैसे स्वाद की हो जाती है। यह स्वाद में शक्कर से भी मीठी होती है। मुलेठी बड़ी ही गुणकारी औषधि के रूप में उपयोग की जाती है। मुलेठी गले की खराश, खांसी, उदरशूल क्षयरोग, श्वासनली की सूजन तथा मिरगी आदि के इलाज में उपयोगी है। मुलेठी का सेवन आँखों के लिए भी लाभकारी है। इसमें जीवाणुरोधी क्षमता पाई जाती है। यह शरीर के अन्दरूनी चोटों में भी लाभदायक होता है। भारत में इसे पान आदि में डालकर प्रयोग किया जाता है।
मुलेठी या मुलहठी पान में भी डाल कर खाई जाती है। इसे मधुमेह के रोग को ठीक करने के लिये भी प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार मुलेठी अपने गुणों के कारण ही बढ़े हुए तीनों दोषों वात, कफ और पित्त को शांत करती है। कोई भी समस्या न हो तो भी कभी-कभी मुलेठी का सेवन कर लेना चाहिए आँतों के अल्सर, कैंसर का खतरा कम हो जाता है तथा पाचनक्रिया भी एकदम ठीक रहती है।
आइये जानते हैं मुलेठी के स्वास्थ्य लाभ के बारे में थोड़ा और।
पित्त दूर करे: यह ठंडी प्रकृति की होती है और पित्त का नाश करती है।
सूखी खांसी में लाभदायक: मुलेठी को काली-मिर्च के साथ खाने से कफ ढीला होता है। सूखी खांसी आने पर मुलेठी खाने से फायदा होता है। इससे खांसी तथा गले की सूजन ठीक होती है।
गले में खराश: गले में खराश के लिए भी मुलेठी का प्रयोग किया जाता है।
महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है: मुलेठी का एक ग्राम चूर्ण नियमित सेवन करने से वे अपनी सुंदरता को लंबे समय तक बनाये रख सकती हैं।
मासिक सम्बन्धी रोग: लगभग एक महीने तक, आधा चम्मच मुलेठी का चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ चाटने से मासिक सम्बन्धी सभी रोग दूर होते है।
फोड़े हो जाने पर: फोड़े होने पर मुलेठी का लेप लगाने से जल्दी ठीक हो जाते है।
ताकत बढ़ाए: रोज़ 6 ग्रा. मुलेठी चूर्ण, 30 मि.ली. दूध के साथ पिने से शरीर में ताकत आती है।
दिल के रोग से बचाए: लगभग 4 ग्रा. मुलेठी का चूर्ण घी या शहद के साथ लेने से ह्रदय रोगों में लाभ होता है।
मुंह के छालों से राहत: इसके चूर्ण को मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।
खून बढाए: इसके आधा ग्राम रोजाना सेवन से खून में वृद्धि होती है।
जल जाने पर: जलने पर मुलेठी और चन्दन के लेप से शीतलता मिलती है.
पेट का घाव भरने के लिये: मुलेठी की जड़ पेट के घावों को समाप्त करती है, इससे पेट के घाव जल्दी भर जाते हैं। पेट के घाव होने पर मुलेठी की जड़ का चूर्ण इस्तेमाल करना चाहिए।
पेट के अल्सर के लिए फायदेमंद है: इससे न केवल गैस्ट्रिक अल्सर वरन छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी पूरी तरह से फायदा करती है। जब मुलेठी का चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच, हाइपर एसिडिटी आदि पर लाभदायक प्रभाव डालता है। साथ ही अल्सर के घावों को भी तेजी से भरता है।
टीबी रोग में फायदेमंद: मुलेठी आंतों की टीबी के लिए भी फायदेमंद है।
आंखों की रौशनी बढ़ाए: मुलेठी के चूर्ण से आँखों की शक्ति भी बढ़ती है सुबह तीन या चार ग्राम खाना चाहिये।
See : http://hindi.boldsky.com/health/diet-fitness/2014/15-medicinal-uses-liquorice-or-mulethi-005480.html
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मुलहेठी (Liquorice): मुलेठी प्रचीन समय से ही सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली प्रसिद्ध औषधि है. इसे आप आसानी से अपने आसपास की किसी भी आयुर्वेदिक दुकान से खरीद सकते हो. ये अंदर से पिली और रेशेदार होती होती है, साथ ही इसमें से हल्की गंध भी आती है. इसका उपयोग अनेक रोगों से बचने के लिए किया जाता है. इसमें अनेक ऐसी जीवाणुरोधक क्षमता पायी जाती है जिसकी वजह से ये ना सिर्फ बाहरी बल्कि अंदरूनी चोंटों में भी आराम पहुँचती है.

Mulethi ke Aushdhiya Gun
अगर आप इसकी जड़ का औषधि के रूप में इस्तेमाल कर रहे हो तो इसकी जड़ को उखाड़ने के 2 साल बाद तक इसका प्रयोग किया जा सकता है. ताज़ी मुलेठी में करीब 50 प्रतिशत के आसपास जलतत्व होता है. आपको बता दें कि मुलेठी का स्वाद शक्कर से भी कई गुना मीठा होता है इसका कारण इसमें पाया जाने वाला ग्लिसराइजिक एसिड होता है. ये बच्चो, बड़ों, स्त्री, पुरुषों और वृद्धो सबसे लिए गुणकारी होती है. मुलेठी के ऐसे ही कुछ गुणों के बारे मे आज हम चर्चा कर रहे है और आपको इससे स्वस्थ लाभ से परिचित करा रहे है.
मुलेठी के गुण ( Qualities of Liquorice ) :
1. अल्सर (Ulcer) :
- अनेक शौध के बाद ये माना गया है कि अल्सर से होने वाले घावों को ठीक करने और उन्हें भरने में मुलेठी से बेहतर कोई औषधि नही है.
- मुलेठी में पाया जाने वाला तत्व Carbenoxolone गैस्ट्रिक अल्सर तक को ठीक कर देता है. ये तत्व आसानी से पेट में घुल जाता है और पेट के रोगों को दूर करता है.
- कुछ लोग अपने अल्सर से मुक्ति पाने के लिए दवाइयां खाने लगते है जिससे उनके घावों से रक्त बहने लगता है और उनकी स्थित अधिक बिगड़ जाती है किन्तु मुलेठी का प्रयोग करने से उतकों को मजबूती मिलती है और उन्हें इस तरह की परिस्थिति से निजात मिलती है.

मुलेठी के औषधीय गुण :
- · आँखों को लाभ ( Beneficial for Eyes ) : मुलेठी में पायें जाने तत्व हानिकारक जीवाणु को बढ़ने से रोकते है और आँखों को लाभ पहुंचाते है. आँखों को लाभ देने के लिए आप प्रतिदिन 3 से 4 ग्राम मुलेठी का सेवन करें और खुद इस बात का आभास करें कि आपकी आँखों की शक्ति दिन प्रतिदिन बढती जा रही है.
- · खांसी जुखाम ( Cough and Cold ) : खांसी जुखाम सामान्य रोग है, इससे गले और छाती में बलगम जम जाता है और जलन महसूस होने लगती है. किन्तु अगर आप मुलेठी का प्रयोग शहद के साथ करते हो तो इससे जल्द ही आपको बलगम की समस्या से समाधान मिलता है. कुछ लोगो को सुखी खांसी भी हो जाती है, जिससे गले में सुजन की समस्या पैदा होती है. ऐसे रोगियों को काली मिर्च के साथ मुलेठी का इस्तेमाल करना चाहियें.
- · पित्त का नाश ( End Gall Problems ) : क्योकि मुलेठी की तासीर ठंडी होती है तो ये पित्त जैसी समस्या को भी दूर करने में लाभकारी सिद्ध होती है. अगर आपका अमाशय बढ़ा हुआ है तो ये उसे भी नियंत्रित करती है. कुछ लोगो के अमाशय में ही अल्सर हो जाता है. जिसकी वजह से उनके पित्त में वृद्धि होने लगती है. किन्तु अगर आप रोग मुलेठी को घी में पकाकर इस्तेमाल करते हो तो आपको इस रोग से भी जल्दी राहत मिलती है.
- · कब्ज भगायें ( Remove Constipation ) : अनियमित और विपरीत आहार का सेवन करने से अनेक लोगो में मोटापा, कब्ज और वायु रोग उत्पन्न होने लगे है. इनमे से प्रमुख है कब्ज. इस स्थिति में व्यक्ति को मल निकालने में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इस रोग से बचने के लिए आप मुलेठी की सुखी जड़ें लें और उसे पीसकर उसका पाउडर बना लें. इस पाउडर को आप गुड और पानी दे साथ ग्रहण करें. आपको निश्चित रूप से कब्ज की समस्या से निजात मिल जाती है.

- · जोड़ों में दर्द ( Joint Pain ) : आजकल हर पीढ़ी चाहे वो युवा हो या वृद्ध जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से सभी परेशान है. इसका एक कारण आजकल की व्यस्त जीवन भी है. इस तरह के रोगों से बचने के लिए आप मुलेठी को रातभर के लिए पानी में भीगने दें और सुबह उस पानी से मुलेठी अलग कर उस पानी को पी जाएँ. ये उपाय आपके पुराने से पुराने जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द को भी दूर कर देता है.
- · मानसिक रोग ( Cure Psychological Diseases ) : मुलेठी का प्रतिदिन लगभग 2 महीनो के इस्तेमाल से मानसिक रोगी के मानसिक संतुलन को भी ठीक किया जा सकता है. इसके लिए मुलेठी को सुखाकर उसका चूर्ण बनाएं और रोग आधा चम्मच की मात्रा में शहद के साथ मानसिक रोगी को दें.
- · महिलाओं की सुन्दरता ( Make Ladies Look Beautiful ) : महिलायें अपनी सुन्दरता के लिए अत्यंत चिंतित को जागरूक रहती है, यही नही वे खुद को आकर्षक और खुबसूरत दिखने के लिए अनेक तरह की दवाओं और क्रीम का इस्तेमाल भी करती है, किन्तु इसके लिए सबसे लाभकारी मुलेठी है जिसे ये घरेलू उपाय के रूप में आसानी से इस्तेमाल कर सकती है. मुलेठी चूर्ण का प्रतिदिन 1 ग्राम का सेवन ही इनकी त्वचा के रोगों को दूर इनके यौवन को बढ़ा सकता है, जिससे ये लम्बे समय तक खुबसूरत बनी रहती है.
- अगर आप इसको घिसकर अपने चेहरे पर लगती है तो इससे आपके चेहरे के सारे दाग धब्बे और किल मुंहासे ठीक हो जाते है. इसके अलावा ये आपके खून को साफ़ करके आपको फोड़े फुंसियों से भी निजात दिलाती है.

जाने आप मुलहठी के कुछ उपयोग
- · दमा रोग नियंत्रित ( Control Asthma and Respiratory Diseases) : अनेक लोग जो सांस की बिमारी या दमा जैसे रोगों से परेशान है उनके लिए मुलेठी एक संजीवनी के रूप में कार्य करती है इसमें पाया जाने वालाGlycyrrhizin दमा जैसी समस्या के लिए रामबाण तत्व माना जाता है. इसका इस्तेमाल करने के लिए आप इसकी जड़ को प्रतिदिन चबा सकते है. इसका रस आपके गले, श्वास नली, छाती और पेट सबके लिए फायदेमंद सिद्ध होता है. ये आपके छाती नसों में जमे विशुद्ध पदार्थों को दूर कर आपकी सांस लेने की समस्या से आपको निजात दिलाता है.
- · लीवर की मजबूती ( Make Liver Strong ) : लीवर में कुछ फ्री रेडिकल डैमेज होते है जिसकी वजह से हेपाटाइटिस बी रोग लोगो को अपना शिकार बना लेता है. इस स्थिति में मुलेठी लीवर में निकलने वाले बाईल जूस के स्त्राव को तेज करने में सहायक होती है ताकि लीवर को इन रोगों से लड़ने की ताकत मिल सके. ये जूस शरीर और लीवर दोनों के लिए बहुत लाभकारी होता है. अनेक चिकित्सक भी लीवर के रोग में मुलेठी की ही सलाह देते है.

Mulethi Har Rog ki Davaa
- · हृदय रोग ( Cure Heart Problems ) : मुलेठी की जड़ों में कोलेस्ट्रॉल और ट्रीगील्सेराइड की मात्रा अधिक होती है जिससे हृदय की रक्षा की जाती है. कोलेस्ट्रॉल से हृदय मजबूत होता है और हार्ट अटैक की संभावनायें खत्म होती है. इसके साथ ही ये खून को अधिक गाढ़ा होने से भी बचाती है ताकि रक्त संबंधी किसी भी तरह का विकार न उत्पन्न हो सके.
- · बैक्टीरिया से लडती है ( Fight Unwanted Bacteria as An Anti Bacterial ) : कई बार हमे अंदरूनी चोट लग जाती है. जिसकी वजह से शरीर पर बैक्टीरिया का हमला बढ़ जाता है और किन्तु मुलेठी इन्ही बैक्टीरिया से लडती है और अन्य रोगों के उत्पन्न होने से हमे बचाती है. कुछ लोगो अपनी अंदरूनी चोटों को जल्द ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करते है किन्तु इससे उनका लीवर या कितनी क्षतिग्रस्त हो जाता है. इस स्थिति में भी आप मुलेठी का इस्तेमाल कर सकते हो क्योकि मुलेठी को एक एंटी बैक्टीरियल के रूप में देखा जाता है और ये प्राकृतिक रूप से आपके शरीर की रक्षा करती है, जिससे आपके शरीर पर किसी तरह का साइड इफ़ेक्ट नही होता.
- · मुंह के छाले ( Cold Sores ) : मुंह में छाले होने पर ना तो आप अच्छी तरह बोल ही पते है और ना ही कुछ खा पाते हो. किन्तु आप मुलेठी को आयुर्वेदिक तरीके से इस्तेमाल करते हुए इसको कुछ देर तक पानी में भिगों दें और इसके बाद मुलेठी अलग कर उस पानी से गरारे करें. कुछ दिनों तक आप ऐसा करें शीघ्र ही आपके मुंह के छाले खत्म हो जायेंगे.

Mulethi ke Anmol Fayde Laabh
- · मासिक रोग ( Treat Menstruation ) : महिलाओं में बढ़ते मासिक रोग को ठीक करने में भी मुलेठी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए आप मुलेठी की जड़ों को पीस लें और उसका पाउडर तैयार कर लें. इस पाउडर को आप रोज शहद के साथ आधा चम्मच लें. 1 महीने तक इस उपाय को करें आपको निश्चित रूप से मासिक रोग से छुटकारा मिल जाएगा.
- · खून बढायें ( Increase Blood Level ) : शरीर में कमजोरी, शुष्कता और खून की कमी को दूर करने के लिए भी आप मुलेठी का इस्तेमाल कर सकते हो. इसका प्रतिदिन 1 ग्राम सेवन आपके खून में वृद्धि कर आपको लाभ पहुंचाता है और आपको हष्ट पुष्ट रखता है.
- · जल जाने पर ( Cure Burning Part of Body ) : अगर आपके शरीर का कोई हिस्सा जल जाता है तो आप उस स्थान पर मुलेठी और चन्दन को पीसकर लगायें. इससे उस स्थान को ठंडक मिलती है और जल्द हे वो जगह ठीक भी हो जाती है.

मुलहेठी
इसके अलावा मुलेठी घावों को भरने, टीबी, बुद्धि को तेज करने, पाचन तंत्र को सदृढ़ करने, मिर्गी और क्षयरोग में भी फायदेमंद होती है.
ध्यान दें ( Notice ) : अगर आपको उच्च रक्तचाप है तो आप मुलेठी का सेवन ना करें. इसके अलावा जिनके रक्त में पोटैशियम की मात्रा कम है, सोडियम की मात्रा अधिक है, शरीर में सूजन है या कोई स्त्री प्रसव की अवस्था में है तो उन्हें भी मुलेठी का इस्तेमाल नही करना चाहियें.

मुलेठी
See : http://www.jagrantoday.com/2016/01/mulethi-ke-aushdhiya-gun-medicinal.html
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मुलहठी: बलवीर्यवर्द्धक और सुडौल शरीर के साथ साथ दुनिया भर के फायदे
Sunday, 8 June 2014
एक बहुत ही उपयोगी एवं सुपरिचित जड़ी है मुलहठी, जिसे अन्य बोलचाल में मुलेठी भी कहते हैं। यह दो वर्ष तक खराब नहीं होती और विभिन्न नुस्खों में औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है।
मुलहठी के गुण: यह शीतल, शीतवीर्य, भारी, स्वादिष्ट, नेत्रों के लिए हितकारी, बल तथा वर्ण के लिए उत्तम, स्निग्ध, वीर्यवर्द्धक, केशों तथा स्वर के लिए गुणकारी है। यह पित्त, वात एवं रुधिर विकार, व्रण, शोथ, विष, वमन, तृषा, ग्लानि तथा क्षय को नष्ट करने वाली है। नेत्रों के लिए फायदेमन्द, त्रिदोषनाशक और घाव को भरने वाली है।
उपयोग: इसका उपयोग औषधियों में, मीठे जुलाब में, मीठी गोली, खांसी की गोली, बलवीर्यवर्द्धक नुस्खों में प्रायः होता ही है। आयुर्वेदिक योग मधुयष्टादि चूर्ण, यष्टादि क्वाथ, यष्टी मध्वादि तेल में इसका उपयोग होता है। इसे मुंह में रखकर चूसने से कफ आसानी से निकल जाता है, खांसी में आराम होता है, गले की खराश और स्वरभंग में लाभ होता है।
रासायनिक संघटन: इसमें एक प्रमुख तत्व ग्लिसीराइजिन पाया जाता है जो ग्लिसीराजिक एसिड के रूप में रहता है। यह शकर से 50 गुना मीठा होता है। इसमें एक स्टिरॉयड इस्ट्रोजन भी पाया जाता है। इसके अतिरिक्त ग्लूकोज, सुक्रोज, मैनाइट, स्टार्च, ऐस्पैरेजिन, तिक्त पदार्थ, राल, एक प्रकार का उड़नशील तेल और एक रंजक तत्व पाया जाता है
मुलहठी एक पौष्टिक औषधि: शरीर को पुष्ट, सुडौल और शक्तिशाली बनाने के लिए किसी भी आयु वाले स्त्री या पुरुष सुबह और रात को सोने से पहले मुलहठी का महीन पिसा हुआ चूर्ण 5 ग्राम, आधा चम्मच शुद्ध घी और डेढ़ चम्मच शहद में मिलाकर चाटें और ऊपर से मिश्री मिला ठंडा किया हुआ दूध घूंट-घूंट कर पिएं। यह प्रयोग कम से कम 40 दिन करें। बहुत लाभकारी है।
मासिक ऋतुस्राव में लाभकारी: मुलहठी का चूर्ण 5 ग्राम थोड़े शहद में मिलाकर चटनी जैसा बनाकर चाटने और ऊपर से मिश्री मिला ठंडा किया हुआ दूध घूंट-घूंटकर पीने से मासिक स्राव नियमित हो जाता है। इसे कम से कम 40 दिन तक सुबह-शाम पीना चाहिए और तले पदार्थ, गरम मसाला, लाल मिर्च, बेसन के पदार्थ, अंडा व मांस का सेवन बंद रखें। ऊष्ण प्रकृति के पदार्थों का सेवन न करें। यह महिलाओं के मासिक ऋतुस्राव की अनियमितता को दूर करती है।
कफ प्रकोप व खांसी: 5 ग्राम मुलहठी चूर्ण 2 कप पानी में डालकर इतना उबालें कि पानी आधा कप बचे। इस पानी को आधा सुबह और आधा शाम को सोने पहले पी लें। 3-4 दिन तक यह प्रयोग करना चाहिए। इस प्रयोग से कफ पतला हो जाता है और ढीला हो जाता है, जिससे बड़ी आसानी से निकल जाता है और खांसी व दमा के रोगी को बड़ी राहत मिलती है।
मुंह के छाले:
मुलहठी का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से मुंह के छाले ठीक होते हैं। इसके चूर्ण को थोड़े से शहद में मिलाकर चाटने से भी आराम होता है।
हिचकी :
मुलहठी चूर्ण शहद के साथ चाटने से हिचकी आना बंद होता है। यह प्रयोग वात और पित्त का शमन भी करता है।
पेट दर्द :
वात प्रकोप से होने वाले उदरशूल में ऊपर बताए गए मुलहठी के काढ़े का सेवन आधा सुबह और आधा शाम को करने से बादी का उदरशूल ठीक हो जाता है।
बलवीर्यवर्द्धक और सुडौल शरीर :
मुलहठी का चूर्ण 5 ग्राम और 5 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण थोड़े से घी में मिलाकर चाट लें और ऊपर से 1 गिलास मिश्री मिला मीठा दूध पिएं। लगातार 60 दिन तक यह प्रयोग सुबह-शाम करने से खूब बलवीर्य की वृद्धि होती है और शरीर पुष्ट व सुडौल होता है।
दाह (जलन) :
मुलहठी और लाल चंदन पानी के साथ घिसकर लेप करने से दाह (जलन) शांत होती है। केश एवं नेत्रों के लिए इसका प्रयोग अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
See : http://samirfilmeditor.blogspot.in/2014/06/blog-post_2106.html
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धर्मडेस्क . उज्जैन | Jan 31, 2012, 06:32 AM IST
कुछ लोगों को बदलते मौसम में सर्दी और खांसी जैसी समस्याएं ज्यादा परेशान करती हैं, ऐसे में कई बार कड़वी और नींद आने वाली दवाईयां लेने के बाद भी कफ से मुक्ति नहीं मिल पाती है। हमेशा कफ बना ही रहता है। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो हम आपको बताने जा रहे हैं मुलहठी के बारे में। मुलहठी या मुलेठी कफ की ऐसी मीठी दवा है जो कफ से जुड़ी हर समस्या का नाश कर देती है।
मुलहठी की पहचान- मुलहठी रेशेदार,गन्धयुक्त और बहुत ही उपयोगी होती है। आमतौर पर लोग इसे मीठी लकड़ी के नाम से जानते हैं। भारत में इसे मुलहठी या मुलेठी के नाम से जाना जाता है। मुलहठी ही एक ऐसी वस्तु है, जिसका सेवन किसी भी मौसम में किया जा सकता है। पनवाड़ी इसे पान में डालकर देता है। मुलहठी का प्रयोग मधुमेह की औषधि बनाने में किया जाता है। मुलहठी की एक से डेढ़ मीटर ऊंची बेल होती है और इमली जैसे छोटे-छोटे पत्ते होते हैं। इन बेलों पर बैंगनी रंग के फूल लगते हैं इसकी जड़ें जमीन के अंदर फैली होती हैं, जिनका औषधि के लिए उपयोग किया जाता है। मुलहठी स्वाद में मधुर, शीतल, पचने में भारी, स्निग्ध और शरीर को बल देने वाली होती है।
लाभ- इसके ऊपर बताए गए गुणों के कारण ही यह बढ़े हुए तीनों दोषों वात, कफ और पित्त को शांत करती है। कफ से गला, नाक, छाती में जलन होने पर मुलहठी को शहद में मिलाकर चाटने से बहुत फायदा होता है। बड़ों के लिए मुलहठी के चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते हैं। शिशुओं के लिए मुलहठी के जड़ को पत्थर पर पानी के साथ 6-7 बार घिसकर शहद या दूध में मिलाकर दिया जा सकता है। मुलहठी मिलाकर पकाए गया घी इस्तेमाल करने से अल्सर मिटता है। बच्चों के लिए मुलहठी विशेष रूप से फायदेमंद होती है। अगर किसी बच्चे को पेट में गैस के कारण शाम के वक्त पेट में दर्द होता है।
उस समय मुलहठी को पत्थर पर घिसकर पानी या दूध के साथ पिलाने से पेट दर्द शांत हो जाता है। इसकी जड़ को पत्थर पर पानी के साथ 6-7 बार घिसकर देना चाहिए ये स्वाद में मीठी होती है। मुलहठी बुद्धि को भी तेज करती है। इसलिए छोटे बच्चों के लिए इसका उपयोग नियमित रूप से कर सकते हैं। मुलहटी कफ की दुश्मन है दमा, टीबी एवं आवाज बदल जाना आदि फेफड़ों की बीमारियों में मुलहठी का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर चबाने से भी फायदा होता है। खांसी में मुलहठी को शहद में मिलाकर चाटने से बहुत लाभ होता है।
See :http://religion.bhaskar.com/news/yoga-sweet-medicine-the-ayurvedic-herb-unique-to-cure-every-disease-of-the-mucus-2803669.html
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मुलहठी/Mulethi/Glycyrrhiza glabra
मुलहठी (Liquorice/Mulethi) रेशेदार, गन्धयुक्त और बहुत ही उपयोगी होती है। आमतौर पर लोग इसे मीठी लकड़ी के नाम से जानते हैं। भारत में इसे मुलहठी (Liquorice/Mulethi) या मुलेठी के नाम से जाना जाता है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) ही एक ऐसी वस्तु है, जिसका सेवन किसी भी मौसम में किया जा सकता है। पनवाड़ी इसे पान में डालकर देता है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का प्रयोग मधुमेह की औषधि बनाने में किया जाता है।
भारत में यह बहुत ही कम मात्रा में होती है इसलिए यह अधिकांश रूप से विदेशों से आयात की जाती है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) की जड़ और रस हमेशा बाजारों में पंसारियों के यहां मिलती हैं। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) मीठी तथा ठण्डी होती है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) की जड़ पेसाब (Urin) लाने वाली और दर्दनाशक भी होती है। यह खांसी में विशेष लाभकारी है। इससे कफ(Cough) पिघलकर बाहर निकल जाती है।
यह आमाशय की जलन (Irritation of the stomach) को भी दूर कर पीठ की हड्डियों को मजबूत करती है। फेफड़ों (Lungs) के लिए भी यह फायदेमंद है। गले का दर्द व सूजन (Throat pain and inflammation)भी कम करती है। इसके सेवन से अनेक रोग दूर होतें हैं।
मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का पौधा 1 से 6 फुट तक होता है। यह स्वाद में मीठी होती है इसलिए इसे यष्टिमधु भी कहा जाता है। असली मुलहठी (Liquorice/Mulethi) अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। सूखने पर इसका स्वाद अम्लीय हो जाता है।
स्वभाव: यह खाने में ठण्डी होती है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) में 50 प्रतिशत पानी होता हैं। इसमें मुख्य घटक `ग्लिसराइजिन´ हैं, जिसके कारण यह खाने में मीठा होता है जो 5 से 20 प्रतिशत विभिन्न प्रजातियों में पाया जाता है। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) में 10 से 14 प्रतिशत तक ग्लाइकोसाइड भी होता है। इसके अतिरिक्त इसमें घावों को शीघ्र भरने वाले विभिन्न घटक सुक्रोज (Sucrose), डेक्स्ट्रोज (Dextrose), स्टार्च (Starch), प्रोटीन (Protein), वसा (Fat), रेजिन(Resins), कोसाइड्स (Kosaids), लिक्विरीस्ट्रासाइड्स (Likviristrasaids), आइसोलिक्यिरीस्ट्रोसाइड कुमेरिन (Aisolikyiristrosaid Kumerin), फ्रलेकोनोन (Frlekonon), लिक्विरीटिन (Likviritin), आइसोलिक्विरीटिन (Aisolikviritin), अम्वलीफीरोन (Amwlifirom) आदि तत्त्व भी पाये जाते हैं। मुलहठी (Liquorice/Mulethi) में ग्लूकोज (Glucose), स्टीराइड (Stiraid), एस्ट्रोजन (Estrogen), कैल्शियम (Calcium), पोटैशियम (Potassium) आदि तत्त्व भी मौजूद हैं।
मुलहठी (Liquorice/Mulethi) की जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण विद्यमान रहते हैं। इसका औषधि के रूप में प्रयोग बहुत पहले से होता आया है। मुलेठी पेट के रोग, सांस संबंधी रोग, स्तन रोग, योनिगत रोगों (Intestinal diseases, respiratory diseases, breast disease , diseases Yonigt) को दूर करती है।
ताजी मुलेठी में पचास प्रतिशत जल होता है, जो सुखाने पर मात्र दस प्रतिशत ही शेष रह जाता है। ग्लिसराइजिक एसिड (Glisraijik acid)के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है। आइए हम आपको मुलेठी के गुणों के बारे में बताते हैं।
मुलहठी (Liquorice/Mulethi) से विभिन्न रोगों में उपचार
घाव (जख्म): मुलहठी (Liquorice/Mulethi) पेट में बन रहे एसिड (तेजाब) को नष्ट करके अल्सर के रोग से बचाती है।
पेट के घाव की यह सफल औषधि है।
मुलहठी (Liquorice/Mulethi) खाने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। इसका सेवन लंबे समय तक नहीं करना चाहिए। बीच-बीच में बंद कर दें।
मुलहठी (Liquorice/Mulethi) को पीसकर घी के साथ चूर्ण के रूप में हर तरह के घावों पर बांधने से शीघ्र लाभ होता है।
चाकू आदि के घाव के कारण उत्पन्न तेज दर्द रोगी को बहुत कष्ट देता है। यह दर्द मुलहठी (Liquorice/Mulethi) के चूर्ण को घी में मिलाकर थोड़ा गर्म करके लगाने से शीघ्र ही शांत होता है।
कफ व खांसी: खांसी होने पर यदि बलगम मीठा व सूखा होता है तो बार-बार खांसने पर बड़ी मुश्किल से निकल पाता है। जब तक गले से बलगम नहीं निकल जाता है, तब तक रोगी खांसता ही रहता है। इसके लिए 2 कप पानी में 5 ग्राम मुलहठी (Liquorice/Mulethi) का चूर्ण डालकर इतना उबाल लें कि पानी आधा कप बचे। इस पानी को आधा सुबह और आधा शाम को सोने से पहले पी लें। 3 से 4 दिन तक प्रयोग करने से कफ पतला होकर बड़ी आसानी से निकल जाता है और खांसी, दमा के रोगी को बड़ी राहत मिलती है। यक्ष्मा (टी.बी.) की खांसी में मुलहठी (Liquorice/Mulethi) चूसने से लाभ होता है।
2 ग्राम मुलहठी (Liquorice/Mulethi) पाउडर, 2 ग्राम आंवला पाउडर, 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम खाने से खांसी में लाभ होता है।
नपुंसकता (नामर्दी): रोजाना मुलहठी (Liquorice/Mulethi) चूसने से नपुंसकता नष्ट हो जाती है।
10 ग्राम मुलेठी का पिसा हुआ चूर्ण, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिश्री मिले गर्म-गर्म दूध को पीने से नपुंसकता का रोग कुछ ही समय में कम हो जाता है।
10-10 ग्राम मुलहठी (Liquorice/Mulethi), विदारीकंद, तज, लौंग, गोखरू, गिलोय और मूसली को लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण लगातार 40 दिनों तक सेवन करने से नपुंसकता का रोग दूर हो जाता है।
दाह (जलन): मुलहठी (Liquorice/Mulethi) और लालचंदन पानी के साथ घिसकर शरीर पर लेप करने से जलन शांत होती है।
अम्लपित्त (एसिडिटिज): खाना खाने के बाद यदि खट्टी डकारें आती हैं, जलन होती है तो मुलहठी (Liquorice/Mulethi) चूसने से लाभ होता है। भोजन से पहले मुलहठी (Liquorice/Mulethi) के 3 छोटे-छोटे टुकड़े 15 मिनट तक चूसें, फिर भोजन करें।
See : http://dkgoyal.com/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%A0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%94/
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परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.
-Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
सुहागा Borax
सुहागा के नाम : कनक क्षार, सुहागाचौकी, रसघ्न, धातु द्रावक, सौभाग्य, टंकण आदि सुहागा के नाम है। सुहागा पेट की जलन, बलगम, वायु तथा पित्त को नष्ट करता है, और धातुओं को द्रवित करता है।
दुर्गन्ध : एक चम्मच पिसा हुआ सुहागा एक बाल्टी पानी में मिलाकर नहाने से ज्यादा पसीना आना और शरीर से दुर्गन्ध आना बंद हो जाती है।
स्वरभंग : सुहागे को पीसकर चुटकी भर चूसने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।
जुकाम और नज़ला : तवे पर सुहागा को सेंककर पीस ले। इसे चुटकी भर एक घूंट गर्म पानी में घोलकर रोजाना चार बार पीने से जुकाम और नज़ला ठीक हो जाता है।
पाचनशक्ति : छोटा बच्चा रात को सोते हुए रोने लगे, दही की तरह जमे दूध की उल्टी करे, हरे रंग का अतिसार (दस्त) हो तो समझे कि बच्चे को खाया हुआ पचता नहीं है। बच्चे की पाचनशक्ति (Digestion Power/Digestibility) ठीक करने के लिए भुना सुहागा चुटकी भर दूध में घोलकर दो बार पिलाने से लाभ हो जाता है।
फरास/रूसी/(Dundruff) : 50 ग्राम सुहागे को तवे पर भूनकर पीस लें। एक चम्मच सुहागा, एक चम्मच नारियल का तेल और एक चम्मच दही को मिलाकर सिर में लगाकर अच्छे से मलिए और आधे घंटे के बाद सिर को धोने से सिर की फरास (सिकरी) समाप्त हो जाते हैं।
तिल्ली/Spleen : 30 ग्राम भुना हुआ सुहागा और 100 ग्राम राई को पीसकर मैदा की छलनी से छान लें। इसे आधा चम्मच रोजाना डेढ़ महीना तक पानी से फंकी लें। तिल्ली सिकुड कर अपनी सामान्य अवस्था में आ जायेगी, पाचन प्रणाली/Digestive System अच्छी होगी और शरीर में शक्ति का संचार होगा।
चर्म रोग : सुहागे के तेल को चमड़ी पर लगाने से चमड़ी के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।
कान के रोग : लगभग एक ग्राम का चौथा भाग सुहागा कान में दिन में दो बार डालने से कान के रोग ठीक हो जाते हैं।
आंख आने पर : आंख आने पर सुहागा और फिटकरी को एक साथ पानी में घोल बनाकर आंख को धोने और बीच-बीच में आई डरोप्स की तरह आंखों मे डालने से बहुत जल्दी लाभ होता है।
श्वास रोग : लगभग 75 ग्राम भुना हुआ सुहागा 100 ग्राम शहद में मिला ले इसे सोते समय एक चम्मच की मात्रा में लेकर चाटने से श्वास रोग में बहुत लाभ होता है।
आंख : भुने हुए सुहागे को पीसकर कपडे़ में छानकर सलाई से सुबह और शाम आंखों में लगाने से आराम आता है।
मंजन : सुहागा को फुलाकर उसमें मिश्री मिलाकर बारीक पीस कर रोजाना मंजन करने से दांत साफ और मजबूत होते हैं। लकड़ी के कोयले में सुहागा मिलाकर बारीक पाउडर बना लें तथा बांस या नीम के दांतुन पर लगाकर मंजन करें। इससे दांत साफ और मजबूत होते हैं।
खांसी : सुहागा, कलमी शोरा, फिटकरी, कालानमक और यवक्षार को पीसकर चूर्ण तैयार कर इसे तवे पर भूनकर दो दो ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर बच्चों को चटाने से कालीखांसी ठीक हो जाती है। भुना हुआ सुहागा और वंशलोचन को मिलाकर शहद के साथ रोगी बच्चे को चटाने से काली खांसी दूर हो जाती है।
मसूड़ों का दर्द : भुना हुआ सुहागा और शहद को मिलाकर बच्चे के मसूढ़ों पर धीरे-धीरे मलें। इससे दांत आसानी से निकल आते हैं तथा मसूड़ों का दर्द कम होता है।
बच्चों की दांत निकलने की तकलीफें : 10 ग्राम भुना सुहागा और 10 ग्राम पिसी हुई मुलहठी लेकर चूर्ण बना लें। इसमें से लगभग एक ग्राम का चौथा भाग चूर्ण में शहद मिलाकर मसूड़ों पर मलें। इससे बच्चों के दांत निकलते समय दर्द नहीं होता तथा बार-बार दस्त आना बंद हो जाता है।
पायरिया : सुहागा और हीराबोल को मिलाकर रोजाना दो से तीन बार मसूढ़ों पर धीरे-धीरे मलें। इससे दांतों व मसूढ़ों के सभी रोग ठीक होकर पायरिया रोग दूर होता है।
निमोनिया : एक चुटकी फूला सुहागा, एक चुटकी फूली फिटकरी, एक चम्मच तुलसी का रस, एक चम्मच अदरक का रस, आधा चम्मच पान के पत्तों के रस को एक साथ मिलाकर शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से निमोनिया के रोग मे लाभ होता है।
बाल : 20 ग्राम सुहागा और 20 ग्राम कपूर को बारीक पीसकर पानी में घोलकर बाल धोने से बालों का गिरना कम हो जाता है।
जूएं : 20 ग्राम सुहागा और 20 ग्राम फिटकरी को 250 ग्राम पानी में मिलाकर सिर पर मालिश करने से सिर की जूएं मर जाती है।

सुहागा : असरकारक औषधि
सोने पर सुहागा
- 1 मुँह में छाले होने पर सुहागा के पानी से कुल्ला करना चाहिए। तुरंत असर होगा।
- 2 मुँह और गले की सूजन में इसे पानी में औटाकर गरारे करने चाहिए तत्काल फायदा होता है।
- 3 मसूढ़े के घाव में काली मिर्च के साथ पीसकर लगाने से घाव शीघ्र भर जाते हैं।
- 4 भूख ना लगने पर 1/2 माशा फूला सुहागा 1 कप गुनगुने जल में दिन में दो या तीन बार देना फायदेमंद होता है।
- 5 त्वचा की खुजली पर सुहागे का पानी लगाना चाहिए।
- 6 नींबू के रस में मिलाकर सुहागा लगाने से एग्जिमा समाप्त होता है।
- 7 लगभग तीन तोला फूला सुहागा चार तोले शहद में मिलाकर प्रतिदिन लेने से दमा रोग मिटता है।
दमा, फुफ्फुस(फेफड़ो), पेट, कंठ, नाक, के कई प्रकार के साधारण और जटिल रोगो के लिए ये औषिधि किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। अनेक लोगो ने इस से बहुत फायदा उठाया हैं।
आइये जाने इस विशेष प्रयोग के बारे में।
रात्रि सोते समय साधारण से दुगनी मात्रा लेने से स्वास रोगी के रात्रि कष्ट में काफी कमी हो सकती है।
सेवन विधि : साधारण मात्रा आधा ग्राम से एक ग्राम तक दवा दिन में दो-तीन बार शहद के साथ चाटे या गर्म जल के साथ ले। बच्चो के लिए 1/8 ग्राम (एक रत्ती) की मात्रा या आयु के अनुसार कुछ अधिक दे।
परहेज : दही, केला, चावल, ठंडे पदार्थो का सेवन न करे।
विशेष
1. फुफ्फुस (फेफड़ो), पेट, कंठ, नाक, के कई प्रकार के साधारण और जटिल रोगो का चमत्कारिक रूप से नाश करने वाला यह योग नई दिल्ली की कविराज श्री देशराज की अदभुत खोज है। इस एक ही प्रयोग से कई औषधालयों में खांसी, जुकाम, श्वांस, कफ, कुक्कर खांसी कई प्रकार के संक्रमण के रोगियों की कई वर्षों से सफल चिकित्सा की जा रही है जो की सस्ता, आसानी से सर्वत्र उपलब्ध होने वाला, बनाने में सरल, हानिरहित और शीघ्र प्रभावकारी है।
2. ताजा जुखाम में तो चुटकी भर दवा एक घूंट गर्म पानी में घोलकर दिन में तीन बार पिलाने से एक-दो दिन में ही समाप्त हो जाता है। इस योग का मुख्य घटक अकेला सुहागा (फुला हुआ) के बारीक़ चूर्ण का प्रयोग भी सर्दी-जुकाम में चमत्कारिक फल देने वाला है।
(सुहागा का फूला बनाने की विधि)
अ. सुहागे को फूलने या खील (शुद्ध) बनाने के लिए बारीक़ कूटकर लोहे की स्वच्छ कड़ाही में या तवे पर डालें और तेज आंच में इतना पकाएं कि पिघलने के पश्चात सूख जाये। अब यह धीरे-धीरे फूलने लगेगा। फूलने के बीच थोड़े-थोड़े समय बाद लोहे की छुरी से इसे उल्ट-पुलट करते रहे। इस प्रकार सारा सुहागा फूल जायेगा। पर इसे बारीक़ पीसकर किसी शीशी में भरकर रख ले।
ब. कठिन खांसी, क्रुप, काली खांसी, जीर्ण खांसी और खांसी की सबी अवस्थाओं में यह सुहागा और मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ लेना उत्तम ओषधि सिद्ध हुई हैं।
क. कास की खास औषिधि होने के साथ यह उन श्वांस–रोगियों के लिए अत्यन्त लाभदायक है, जिन्हे गाढ़ा-गाढ़ा बलगम बनने की शिकायत है और इतना खासना पड़ता है कि जब तक बलगम बाहर नही निकलता, चैन नही पड़ता। उहने यह दवा शहद या मिश्री की चासनी या केवल गला कत्था लगाये पान के साथ लेनी चाहिए। रात्रि सोते समय साधारण से दुगनी मात्रा लेने से स्वास रोगी के रात्रि कष्ट में काफी कमी हो सकती है। आवश्यकता अनुसार तीन-चार सफ्तह लेने से साधारण दमा दूर हो जाता है। यह बलगम को पखाने के जरिए भी निकाल देती है।
ख. यदि बलगम कच्चा थूक की तरह निकलता हो तो इस दवा की एक चुटकी मुंह में डालकर धीरे-धीरे चूसे। कफ विकार ठीक होगा। जरूरत समझो तो बाद में एक कप सादा या गुनगुना पानी घूँट घूँट कर पिया जा सकता है।
परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
सभी लेखों में लिखी गयी दवाईयों का विवरण जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा मोल नहीं लें।
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन होम्योपैथ एवं परम्परागत चिकित्सक, 9875066111
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शॉर्ट नोट्स
1. फिटकरी (Alum) लाल व सफ़ेद दो प्रकार की होती है। अधिकतर सफ़ेद फिटकरी का प्रयोग ही किया जाता है।
2. फिटकरी एक प्रकार का खनिज है जो प्राकृतिक रूप में पत्थर की शक्ल में मिलता है। इस पत्थर को एल्युनाइट कहते हैं। इससे परिष्कृत फिटकरी तैयार की जाती है। इसका रासायनिक नाम है-पोटेशियम एल्युमिनियम सल्फेट। इसे एलम भी कहते हैं।
3. पोटाश एलम का इस्तेमाल रक्त में थक्का बनाने के लिए किया जाता है। इसीलिए दाढ़ी बनाने के बाद इसे चेहरे पर रगड़ते हैं ताकि छिले-कटे भाग ठीक हो जाएं।
4. यह संकोचक अर्थात सिकुड़न पैदा करने वाली होती है।
5. फिटकरी की भस्म विष नासक हैं। अत: सभी प्रकार के विषों पर इसका प्रभाव होता हैं।
एक छुहारा (छुआरा) लाख दवा रे
"अगर आप पतले हैं और थोड़ा मोटा होना चाहते हैं तो छुहारा आपके लिए वरदान साबित हो सकता है, लेकिन अगर मोटे हैं तो इसका सेवन सावधानीपूर्वक करें।"
छुहारा और खजूर एक ही पेड़ की देन है। इन दोनों की तासीर गर्म होती है और ये दोनों शरीर को स्वस्थ रखने, मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गर्म तासीर होने के कारण सर्दियों में तो इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।
जानते हैं-छुहारा और खजूर के फायदों के बारे में-
पौष्टिक : खजूर में छुहारे से ज्यादा पौष्टिकता होती है। खजूर मिलता भी सर्दी में ही है। अगर पाचन शक्ति अच्छी हो तो खजूर खाना ज्यादा फायदेमंद है। छुहारे का सेवन तो सालभर किया जा सकता है, क्योंकि यह सूखा फल बाजार में सालभर मिलता है। भूख बढ़ाने के लिए छुहारे का गूदा निकाल कर दूध में पकाएं। उसे थोड़ी देर पकने के बाद ठंडा करके पीस लें। यह दूध बहुत पौष्टिक होता है। इससे भूख बढ़ती है और खाना भी पच जाता है।
घाव : घाव है तो छुहारे की गुठली को पानी के साथ पत्थर पर घिस कर उसका लेप घाव पर लगाएं, घाव तुरंत भर जाएगा।
साइटिका : साइटिका रोग से पीड़ित लोगों को इससे विशेष लाभ होता है।
प्रदर : प्रदर रोग स्त्रियों की बड़ी बीमारी है। छुआरे की गुठलियों को कूट कर घी में तल कर, गोपी चन्दन के साथ खाने से प्रदर रोग दूर हो जाता है।
सर्दी-जुकाम : जुकाम से परेशान रहते हैं तो एक गिलास दूध में पांच दाने खजूर डालें। पांच दाने काली मिर्च, एक दाना इलायची और उसे अच्छी तरह उबाल कर उसमें एक चम्मच घी डाल कर रात में पी लें। सर्दी-जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाएगा।
दमा : दमा की शिकायत है तो दो-दो छुहारे सुबह-शाम चबा-चबा कर खाएं। इससे कफ व सर्दी से मुक्ति मिलती है।
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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अरण्ड
अरण्डी
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असली
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आइरन
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आंत्र कृमि
आंत्रकृमि-Helminth
आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever
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आधासीसी
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आमला
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आयुर्वेदिक
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आयुर्वेदिक-Ayurvedic
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आसान प्रसव-Easy Delivery
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आॅर्गेनिक कौंच
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इन्द्रायण
इन्फ्लुएंजा
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इम्युनिटी
इलाज
इलाज का कुल कितना खर्चा
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एलर्जी
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ऐंठन
ऐलोपैथ
ऐसीडिटी
ऑर्गेनिक
ओमेगा 3 के स्रोत
ओमेगा-3
ओर्गेनिक
औषध-Drug
औषधि सूची-Drug List
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कटुपर्णी
कड़वाहट
कंडोम
कद्दू
कनेर
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कपिकच्छू
कपूरीजड़ी
कफ
कब्ज
कब्ज़
कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation
कब्ज. Cucumber
कब्जी
कमजोरी
कमर
कमर दर्द
कमेड़ा
करेला
कर्ण वेदना
कर्णरोग
कष्टार्तव-Dysmenorrhea
कांच निकलना
काजू
कान
कानून सम्मत
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काम शक्ति
कामवाण पाउडर
कामशक्ति
कामशक्ति-Sexual power
कामेच्छा
कामोत्तेजना
कायाकल्प
कार्बोहाइड्रेट
कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates
काला जीरा
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काली जीरी
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काले निशान
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किडनी
किडनी संक्रमण
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कीड़े
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कुकुंदर
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कुबडापन
कुमेड़ा
कुल्थी
कुल्ला
कुष्ट
कुष्ठ
कृमि
केला
केसर
कैफीन-Caffeine
कैलोरी
कैलोरी चार्ट
कैलोरी-Calories
कैवांच
कैविटी
कैंसर
कॉफी
कॉफ़ी
कॉलेस्ट्रॉल
कोंडी घास
कोढ़
कोबरा
कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol
कोलेस्ट्रोल
कौंच
कौमार्य
क्रियाशीलता
क्रोध
क्षय रोग-Tuberculosis
क्षारीय तत्व
क्षुधानाश
खजूर
खजूर की चटनी
खनिज
खरबूजा-Musk melon
खरेंटी
खरैंटी शिलाजीत
खाज
खांसी
खिरेंटी
खिरैटी
खीप
खीरा
खुजली
खुशी-Joy
खुश्की
खुश्बू
खोया
गंजापन-Baldness
गठिया
गठिया-Arthritis
गठिया-Gout
गड़तुम्बा
गंडा-ताबीज
गंध
गन्ने का रस
गरमा गरम
गर्भ निरोधक
गर्भधारण
गर्भपात
गर्भवती
गर्भवती कैसे हों?
गर्भावस्था
गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy
गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy
गर्भाशय
गर्भाशय भ्रंश
गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy
गर्म पानी
गर्मी
गर्मी-Heat
गलगण्ड
गाजर
गाजवां
गांठ
गाँठ-Knot
गारंटी
गारण्टेड इलाज
गाल ब्लैडर
गिलोय
गिल्टी
गुड़हल
गुंदा
गुदाद्वार
गुदाभ्रंश
गुम्मा
गुर्दे
गुलज़ाफ़री
गुस्सा
गृध्रसी
गृह-स्वामिनी
गेदुआ की छाछ
गैस
गैस्ट्रिक
गैहूं का जवारा
गोक्षुरादि चूर्ण
गोखरू
गोखरू (LAND CALTROPS)
गोंद कतीरा-Hog-Gum
गोंदी
गोभी-Cabbage
गोरख मुंडी
गोरखगांजा
गोरखबूटी
गोरखमुंडी
ग्रीन-टी
घमोरी
घरेलु नुस्खे
घाघरा
घाव
चकवड़
चक्कर
चपाती
चमत्कारिक सब्जियां
चरित्र
चर्बी
चर्म
चर्म रोग
चर्मरोग
चाय
चाय-Tea
चालीस के पार-Forty Across
चिकनगुनिया
चिकित्सकीय
चिटकन
चिंतित
चिरायता-Absinth
चिरोटा
चुंबन
चोक
चौलाई
छपाकी
छरहरी काया
छाछ
छाजन बूटी
छाले
छींक
छीकें
छुअ
छुआरा
छुहारा
छोटा गोखरू
छोटा धतूरा
छोटी हरड़
जंक फूड
जकवड़
जख्म
जंगली तिल्ली
जंगली तुलसी
जंगली पेड़
जंगली मिर्ची
जंगली-कटीली चौलाई
जटामांसी-Spikenard
जलजमनी
जलन
जलोदर रोग-Ascites Disease
जवारा
जवारे
जवासा-Alhag
जहर
जामुन का जूस
जायफल
जिगर
जीरा
जीवन रक्षक
जीवनी शक्ति
जुएं
जुकाम
जुदाई
जुलाब
जूएं
जूस
जोड़ों के दर्द
जोड़ों में दर्द
जौ
ज्यूस
ज्योति
ज्वर
ज्वर-Fiver
झाइयाँ
झांईं
झाड़-फूंक
झुर्रियाँ
झुर्रियां
झुर्री
झूठे दर्द
टमाटर का रस
टमाटर-Tomatoes
टाइफाइड
टाटबडंगा
टायफायड
टूटी हड्डी
टॉन्सिल
टोटला
ट्यूमर
ठंड
ठंडापन
ठेकेदार डॉक्टर
डकार
डकारें
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डायरिया
डिग्री फ़ारेनहाइट
डिग्री सेल्सियस
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डिटॉक्सीफाई
डिटॉक्सीफिकेशन
डिनर
डिप्रेशन
डिब्बाबंद भोजन
डिलेवरी
डीकामाली
डीगामाली
डेंगू
डेंगू-Dengue
डॉ. निरंकुश
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
डॉ. मीणा
ढकार
ढीलापन
ढीली योनि
तकलीफ का सही इलाज
तंत्र-मंत्र
तम्बाकू
तरबूज-Watermelon
तलाक
ताकत
तिल
तिल्ली
तुंबा
तुंबी
तुम्बा
तुलसी
तेल
त्रिदोषनाशक
त्रिफला
त्वचा
त्वचा रोग
थकान
थाईरायड
थायरायड-Thyroid
थायरॉइड
दण्डनीय अपराध
दंत वेदना
दन्तकृमि
दन्तरोग
दमा
दर वेदना
दरार
दर्द
दर्द निवारक
दर्द निवारक दवा
दर्दनाक
दस्त
दही
दाग-धब्बे-Stains-Spots
दाढ़
दांत
दांतो में कैविटी-Teeth Cavity
दाद
दाम्पत्य
दाम्पत्य विवाद सलाहकार
दाम्पत्य-Conjugal
दाल
दालचीनी
दालें
दिमांग
दिल
दीर्घायु
दु:खी
दुर्गंध
दुर्बलता
दुष्प्रभाव
दुष्प्रभावरहित
दूध
दूध वृद्धि
दूधी
दूधी-Milk Hedge
दृष्टिदोष
दो मन
द्रोणपुष्पी
द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes
धड़कन
धनिया बीज
धनिया-Coriander
धमासा
धात
धातु
धातु पतन
धार्मिक
धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं?
धैर्यहीन
नज़ला
नपुंसक
नपुंसकता
नाइट्रिक एसिड
नाक
नाखून
नागबला
नागरमोथा
नाडी हिंगु
नाड़ी हिंगु (डिकामाली)
नामर्दी
नारकीय पीड़ा
नारियल
नाश्ता
निमोनिया
निम्न रक्तचाप
निम्बू
नियासिन
निराश
निरोगधाम
निर्गुण्डी
निर्गुन्डी
निष्कपट स्नेह
निष्ठा
निसोरा
नींद
नींबू
नींबू-Lemon
नीम-azadirachta indica
नुस्खे
नुस्खे-Tips
नेगड़
नेत्र रोग
नेुचरल
नैतिक
नॉर्मल डिलेवरी
नोनिया
नौसादर
न्युमोनिया-Pneumonia
न्यूरॉन्स
पक्षघात
पंचकर्म
पढ़ने में मन लगेगा
पंतजलि
पत्तागोभी-CABBAGE
पत्थर फोड़ी
पत्थरचट्टा
पत्नी
पथरी
पदार्थ
पनीर
पपीता
पपीता-CARICA PAPPYA
पमाड
परदेशी लांगड़ी
परम्परागत चिकित्सा
परहेज
पराठा
परामर्श
परिस्थिति
पवाड़
पवाँर
पाइल्स
पाक-कला
पाचक
पाचन
पाचनतंत्र
पाचनशक्ति
पाठक संख्या 16 लाख पार
पाठक संख्या पंद्रह लाख
पायरिया
पारदर्शिता
पारिजात
पालक
पालक-Spinach
पित्त
पित्ताशय
पित्ती
पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne
पिरामिड
पीलिया
पीलिया-Jaundice
पीलिया-कामला-Jaundice
पुआड़
पुदीना
पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava
पुरुष
पुंसत्व
पेचिश
पेट के कीड़े
पेट दर्द
पेट में गैस
पेट रोग
पेड़
पेद दर्द
पेरिकिटो सेसिल
पेशाब
पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
प्लूरिसी-Pleurisy
प्लेटलेट्स
फंगल
फटन
फफूंद-Fungi
फरास
फल
फाइबर
फिटकरी
फुंसी-Pimples
फूलगोभी-CAULIFLOWER
फेंफड़े
फेरम फॉस
फैट
फैटी लीवर
फोटोफोबिया
फोड़ा
फोड़े-Boils
फोरप्ले
फोलिक एसिड
फ्लू
फ्लू-Flu
फ्लेक्स सीड्स
बकायन
बकुल
बड़ी हरड़
बथुआ
बथुआ पाउडर
बथुआ-White Goose Foot
बदबू
बंध्यापन
बबूल-ACACIA
बरसाती बीमारियाँ
बरसाती बीमारियां
बलगम
बलवृद्धि
बला
बलात्कार
बवासीर
बहरापन
बहुनिया
बहुमूत्रता-
बांझपन
बादाम-Almonds
बादाम.
बाल
बाल झड़ना
बाल झडऩा-Hair Falling
बिना सिजेरियन मां बनें
बिवाई
बीजबंद
बीड़ी
बीमारियों के अनुसार औषधियां
बीमारी
बील
बुखार
बूंद-बूंद पेशाब
बेल
बेली
बैक्टीरिया
बॉयोकैमी
ब्रह्मदण्डी
ब्रेस्ट ग्रोथ
ब्लड प्रेशर
ब्लैक मेलिंग
ब्लॉकेज
भगंदर
भगंदर-Fistula-in-ano
भगनासा
भगन्दर
भगोष्ठ
भड़भांड़
भय
भविष्य
भस्मक रोग
भावनात्मक
भुई आंवला-Phyllanthus Niruri
भूई आमला
भूई आंवला
भूख
भूख बढ़ाने
भूत-प्रेत
भूमि
भूमि आंवला
भोजनलीवर
मकोय
मकोय-Soleanum nigrum
मक्का
मक्का के भुट्टे
मंजीठ
मटर-PEA
मंद दृष्टि
मंदाग्नि
मदार
मधुमेह
मधुमेह-Diabetes
मन्दाग्नि-Dyspepsia
मरुआ
मरोड़
मर्द
मर्दाना
मलाशय
मलेरिया
मलेरिया (Malaria)
मवाद
मसाले
मस्तिष्क
मस्से
मस्से-WARTS
महंगा इलाज
महत्वपूर्ण लेख
महाबला
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माईग्रेन
माईंड सैट
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मानसिक
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मानसिक-Mental
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मासिक
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मासिकधर्म
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मीठा खाने की आदत
मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex
मुख्य लक्षण
मुधमेह
मुलहठी
मुलेठी
मुहाँसे
मूँगफली
मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders
मूत्र
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मूत्र में जलन-Burning in Urine
मूत्ररोग
मूत्राशय
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मूली
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मृत्यु
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मेथी
मेथी दाना
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मैथुन
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मौत
मौलसिरी
मौसमी बीमारियां
यकृत
यकृत प्लीहा
यकृत वृद्धि-Liver Growth
यकृत-लीवर-जिगर-Lever
यूपेटोरियम परफोलियेटम
यूरिक एसिड लेबल
योग विज्ञापन
योन
योन संतुष्टि
योनि
योनि ढीली
योनि शिथिल
योनि शूल-Vaginal Colic
योनि संकोचन
योनिद्वारा
योनिभ्रंश
योनी
योनी संकोचन
यौन
यौन आनंद
यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills)
यौन क्षमता
यौन दौर्बल्य
यौन शक्तिवर्धक
यौन शिक्षा
यौन समस्याएं
यौनतृप्ति
यौनशक्ति
यौनशिक्षा
यौनसुख
यौनानंद
यौनि
रक्त प्रदर (Blood Pradar)
रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA
रक्तचाप
रक्तपित्त
रक्तशोधक
रक्ताल्पता
रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia
रस-juices
रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum
रामबाण
रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines
रुक्षांश
रूढिवादी
रूसी
रूसी मोटापा
रेचक
रेठु
रोग प्रतिरोधक
रोबोट सेक्स
रोमांस
लकवा
लक्षण
लक्ष्मी
लंच
लसोड़ा
लस्सी
लहसुन
लहसुन-Garlic
लाइलाज
लाइलाज का इलाज
लाक्षणिक इलाज
लाक्षणिक जानकारी
लाभ
लिंग
लिंग प्रवेश
लिसोड़ा
लीकोरिया
लीवर
लीवर सिरोसिस
लीवर-Liver
लू-hot wind
लैंगिक
लोनिया
लौकी
लौंग की चाय
ल्युकोरिया
ल्यूकोरिया
ल्यूज योनी
वजन
वज़न
वजन कम
वजन बढाएं-Weight Increase
वन तुलसी
वन/जंगली तुलसी
वनौषधियाँ
वमन
वमन विकृति-Vomiting Distortion
वसा
वात
वात श्लैष्मिक ज्वर
वात-Rheumatism
वायरल
वायरल फीवर
वायरल बुखार-Viral Fever
वासना
विचारतंत्र
विटामिन
विधारा
वियाग्रा-Viagra
वियोग
विरह वेदना
विलायती नीम
विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध
विवाहेत्तर सम्बंध
विश्वास
विष
विष हरनी
विषखपरा
वीर्य
वीर्य वृद्धि
वीर्यपात
वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone
वृक्ष
वैज्ञानिक
वैधानिक
वैवाहिक जीवन
वैवाहिक जीवन-Marital
वैवाहिक रिश्ते
वैश्यावृति
व्याकुल
व्यायाम
व्रण
शंखपुष्पी
शरपुंखा
शराब
शरीफा-सीताफल-Custard apple
शर्करा
शलगम-Beets
शल्यक्रिया
शहद
शहद-Honey
शारीरिक
शारीरिक रिश्ते
शिथिलता
शीघ्र पतन
शीघ्रपतन
शीस
शुक्राणु
शुक्राणु-Sperm
शुक्राणू
शुगर
शोक
शोथ
शोध
श्योनाक
श्रेष्ठतर
श्वास
श्वांस
श्वेत प्रदर
श्वेत प्रदर-Leucorrhea
श्वेतप्रदर
षड़यंत्र
संकुचन
संकोच
संक्रमण
संक्रमित
संक्रामक
संखाहुली
सगतरा
संतरा-Orange
संतान
संतुष्टि
सत्यानाशी
सदा सुहागन
सदाफूली
सदाबहार
सदाबहार चूर्ण
सनबर्न
सफ़ेद दाग
सफेद पानी
सफेद मूसली
सब्जि
सब्जी
संभालू
संभोग
समर्पण-Dedication
सरकार को सुझाव
सरफोंका
सरहटी
सर्दी
सर्दी-जुकाम
सर्पक्षी
सर्पविष
सलाद
संवाद
संवेदना
सहदेई
सहदेवी
सहानभूति
साइटिका
साइटिका-Sciatica
साइड इफेक्ट्स
साबूदाना-Sago
सायटिका
सिगरेट
सिजेरियन
सिर दर्द
सिर वेदना
सिरका
सिरदर्द
सिरोसिस
सी-सेक्शन
सीजर डिलेवरी
सुगर
सुदर्शन
सुहागा
सूखा रोग
सूजन
सेक्स
सेक्स उत्तेजक दवा
सेक्स परामर्श-Sex Counseling
सेक्स पार्टनर
सेक्स पावर
सेक्स समस्या
सेक्स हार्मोन
सेक्स-Sex
सेंधा नमक
सेब
सेमल-Bombax Ceiba
सेल्स
सोजन-सूजन
सोंठ
सोना पाठा
सोयाबीन
सोयाबीन (Soyabean)
सोयाबीन-Soyabean
सोराइसिस
सोरियासिस-Psoriasis
सौंठ
सौंदर्य
सौंदर्य-Beauty
सौन्दर्य
सौंफ
सौंफ की चाय
सौंफ-Fennel
स्किन
स्खलन
स्तन
स्तन वृद्धि
स्तनपान
स्तम्भन
स्त्री
स्त्रीत्व
स्त्रैण
स्पर्श
स्मृति-लोप
स्वप्न दोष
स्वप्नदोष
स्वप्नदोष-Night Fall
स्वभाव
स्वभावगत
स्वरभंग
स्वर्णक्षीरी
स्वस्थ
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य परामर्श
स्वास्थ्य रक्षक सखा
हजारदानी
हड़जोड़
हड्डी
हड्डी में दर्द
हड्डी संक्रमण
हड्डीतोड़ ज्वर
हड्डीतोड़ बुखार
हरड़
हरसिंगार
हरी दूब-CREEPING CYNODAN
हरीतकी
हर्टबर्न
हस्तमैथुन
हस्तमैथुन-Masturbation
हाई बीपी
हाथ-पैर नहीं कटवायें
हारसिंगार
हालात
हिचकी
हिचकी-Hiccup
हिमोग्लोबिन-hemoglobin
हिस्टीरिया
हिस्टीरिया-Hysteria
हींग
हीनतर
हुरहुर
हुलहुल
हृदय
हृदय-Heart
हेपेटाइटिस
हेपेटाईटिस
हेल्थ टिप्स-Health-Tips
हेल्थ बुलेटिन
हैजा
हैपीनेस-Happiness
हैल्थ
होम केयर टिप्स-Home Care Tips
होम्यापैथ
होम्योपैथ
होम्योपैथिक
होम्योपैथिक इलाज
होम्योपैथिक उपचार
होम्योपैथी
होम्योपैथी-Homeopathy
