Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Health Care Friend and Marital Dispute Consultant
(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)
-:Mob. & WhatsApp No.:-
85619-55619 (10 AM to 10 PM)
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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।
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हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-2 (Health Bulletin-2)
नोट: सुझाई गयी सभी होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयां केवल जर्मनी निर्मित सील पैक और देशी जड़ी-बूटियां शुद्ध, ताजा तथा आॅर्गेनिक उपयोग करने पर ही परिणाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
1. मैं जब भी किसी बड़े अफसर से मिलता हूँ या परीक्षा या इंटरव्यू देने जाता हूँ तो मेरा कॉन्फिडेंस जवाब दे जाता है। क्या इसका कोई इलाज हो सकता है?-भरत कुलश्रेष्ठ, उज्जैन, मप्र।
परामर्श: जब भी ऐसा मौका आये आप होम्योपैथी की दवाई अर्जेण्टम नाईट्रिकम-30 की 1-1 घण्टे में 4-5 खुराक सेवन करें। सम्पूर्ण उपचार के लिये किसी योग्य हिम्योपैथ से सम्पर्क करें।
2. मेरी एज 37 वर्ष है। मैरिज को 15 साल हो गये। 2 बच्चे हैं। लेकिन मुझे अभी भी शीघ्रपतन की समस्या है। अनेक डॉक्टर्स का कहना है कि मैरिज के बाद सब ठीक हो जाता है, लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं हुआ। इस कारण हमारी मैरिज लाइफ डिस्टर्ब है। कोई पक्का इलाज बतायें।-के के सिंह, कानपुर, उप्र।
परामर्श: आपके प्रोपर/सही उपचार के लिये आपका सम्पूर्ण लक्षणात्मक विवरण जानना बहुत जरूरी है। फिर भी फौरी उपचार के लिये आप होम्योपैथी की दवाई स्टेफिसेग्रिया-200 और शुद्ध ऑर्गेनिक काले कौंच, सफेद मूसली, शतावरी, भूई आमला, शरफुंका और मिश्री का सम्भाग मिश्रण बनाकर, प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम तक शाम को दूध के साथ 2-3 महीने तक सेवन करें। आप मेरी वेब साइट पर 'शीघ्रपतन' शीर्षक से 30.11.2017 को प्रकाशित लेख अवश्य पढें। इसे पढने के बाद आपकी अनेक भ्रांतियां और उलझनें दूर हो सकेंगी।
3. मेरी पत्नी की उम्र 40 साल है। उसको 20 साल की उम्र से सफेद पानी की बीमारी है। बहुत इलाज करवाया, लेकिन कोई लाभ नहीं। बिल्कुल सूख गई है। 35 किलो भजन रह गया है। कोई काम नहीं कर पाती। चक्कर आते हैं और आधे सिर में दर्द रहता है। भूख नहीं लगती। कब्जी रहती है। क्या करें?-रमेश शर्मा, मुरेना, मध्य प्रदेश।
परामर्श: जितना आपने बताया है, उतनी सी जानकारी से उपचार बताना सम्भव नहीं है। लगता है आपकी पत्नी को लीवर में सूजन या इंफेक्शन के साथ ल्यूकोरिया/श्वेत प्रदर और माइग्रेन की पीड़ा है। इन सभी तकलीफों का प्रोपर उपचार जरूरी है। किसी योग्य होम्योपैथ और, या आयुर्वेद के डॉक्टर से सम्पर्क करें। तब तक आप उन्हें नियमित रूप से शुद्ध ऑर्गेनिक और ताजा भूई आमला, मकोय, पुनर्नवा और आंवले का काढ़ा सुबह शाम पिला सकते हैं। आपकी पत्नी की पूर्ण जानकारी हेतु मेरे हेल्थ वाट्सएप नम्बर 8561955619 पर भी सम्पर्क कर सकते हैं।
4. मेरे अंडकोषों में 8-9 महिने से दाद और खुजली की समस्या है। जब तक गोली, कैप्सूल और इंजेक्शन लेता हूँ, सब ठीकठाक रहता है। कुछ दिन बाद फिर से तकलीफ शुरू हो जाती है। जिसमें जलन होती है और खुजाने पर रक्त निकलने लगता है। प्लीज मुझे इससे मुक्ति दिलाएं।-पीएस गंगवाल, भोपाल, मप्र।
परामर्श: सबसे जरूरी सावधानी-अपने सभी आंतरिक कपड़े सूती पहनें और उन्हें साफ रखें। जिसके लिये स्वस्थ होने तक रोजाना उबलते पानी में कपड़ों की धुलाई जरूरी है। नहाते समय नीम के पत्ते पानी में उबालें या गुनगुने पानी में एंटी इंफेक्शन पाऊडर पानी में डालकर नहाएं। प्रतिदिन होम्योपैथी की दवाई सल्फर-200+कैंथरिस-200 की एक-एक खुराक और शुद्ध ऑर्गेनिक शरफुंका+श्योनाक पाउडर, प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम तक सुबह-शाम पानी के साथ ठीक होने तक सेवन करें।
5. मेरी पत्नी की उम्र 32 साल है। विवाह को 6 महिने हुए हैं। उसकी योनि का करीब 2 इंच हिस्सा बाहर निकलता है। डॉक्टर का कहना है कि वैजाइना कोलैप्स की तकलीफ है, ऑपरेशन करना पड़ेगा। हमें बहुत घबराहट और डर है। क्या मेरी पत्नी बिना ऑपरेशन ठीक हो सकती है और क्या वह माँ बन पाएगी? खर्चे की कोई दिक्कत नहीं हम दोनों जॉब करते हैं।-मनीष पांचाल, रेवाड़ी, हरियाणा।
परामर्श: बिना बच्चों को जन्म दिये योनिभ्रंश अर्थात वैजाइना कोलैप्स, लगभग असम्भव। मामला उतना सरल नहीं जितना आप को लग रहा है। आपकी पत्नी के सहयोग के बिना उपचार सम्भव नहीं। उन्हें सम्पूर्ण केस हिस्ट्री ईमानदारी से बतानी होगी। आप तुरन्त किसी होम्योपैथ से सम्पर्क करें या मेरे हेल्थ वाट्सएप 85619 55619 पर सम्पर्क करें। तब तक होम्योपैथी की दवाई कोलोफाईलम-200 + कॉस्टीकम-200 सुबह शाम सेवन करवा सकते हैं।
चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]
Note: अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे उचित समाधान प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619
----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।
एल्यूमीनियम (Aluminum) के बर्तनों में खाना-पकाना घातक!
—डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
एल्यूमीनियम के बर्तनों में खाना पकाने और खाने से स्वास्थ्य को गंभीर हानि हो सकती हैं! अत: कुकर सहित जितने भी एल्यूमीनियम के बर्तन हैं, आज ही से उनका उपयोग करना बंद कर दें। यदि आपके घर में एल्यूमीनियम के बर्तनों में खाना पकाया जाता है, तो आपके परिवार के लोगों को अनेकों प्रकार की मानसिक और शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं। जैसे-
1—जागते ही उदासी: रोगी प्रात:काल सोकर उठने के बाद उदास होता है, रोता है। वैसे वह रोता-धोता ही रहता है। अपनी परिस्थिति से दूर भाग जाना चाहता है, भयभीत रहता है, समझता है कि जिन परिस्थितियों से घिरा है उनसे हटने पर उसका दु:ख दूर होगा। साधारणतया भयभीतपना उसमें भरा रहता है। जब अपनी मानसिक-दशा को सोचने लगता है, तब डरता है कि कहीं पागल न हो जाय। जब वह सोचता है कि वह अपना नाम तक भूल जाता है, मन गड़बड़ाया रहता है, तब वह सोचने लगता है कि अब वह सचमुच पागल हो गया है। प्रात:काल सोकर उठने के बाद उसमें ऐसे विचार आते-जाते रहते हैं, परन्तु चित-वृति बदलती रहती है। कभी निराशा की मनोवृति से निकल कर वह आशाभरी, शांत मनोवृति में आ जाता है, इसके बाद फिर उसी निराशा के गर्त में जा गिरता है।
2—मूत्राशय की शिथिलता: स्त्री या पुरुष को देर तक पेशाब के लिये बैठे रहना पड़ता है, पेशाब उतरता ही नहीं, देर में उतरता है, धीरे-धीरे निकलता है, रोगी कहता है कि पेशाब जल्दी नहीं उतरता। कभी-कभी धार की जगह बूंद-बूद टपकता है।
3—मलाशय की शिथिलता: मलाशय इतना शिथिल हो जाता है कि भरा रहने पर भी मल नहीं निकलता, मल कठोर न होकर तरल भी क्यों न हो, वह निकलता ही नहीं। जब गुदा-द्वार में इस प्रकार की जड़ता, शिथिलता हो कि दस्त भी न निकले, ऐसी कब्ज हो, तब यह जांच लेना चाहिये कि आपकी रसाई में एल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग तो नहीं हो रहा?
4—ल्यूकोरिया: स्त्रियों में पानी की तरह टांगों तक बह जाने वाला प्रदर हो जाता है। रोगिणी के जननांग इतने शिथिल हो जाते हैं कि प्रदर का पानी बहता हुआ टांगों के नीचे तक पहुंच जाता है। यह पानी तीखा, पीला या अंडे की सफेदी जैसा और त्वचा को काटने/छीलने वाला हो सेता ह। अनेक बाद प्रदर के तार या धागे जैसे बन जाते हैं। प्रदर के साथ रोगिणी के जननांगों में निम्न-लक्षण प्रकट होते हैं:-
- (1) जरायु को मुख पर जख्म।
- (2) सब जननांगों में शिथिलता।
- (3) जननांगों की शिथिलता के कारण नीचे को बोझ की अनुभूति।
- (4) सब मांसपेशियों में कमजोरी, ढिलाई और शिथिलता।
- (5) यौन-सम्बन्धों के समय जलन और दर्द की अनुभूति। इत्यादि।
5—रोगी का चरित्र-चित्रण: उपरोक्त के अलावा एल्यूमीनियम के बर्तनों में खाना पकाने और खाने वाले व्यक्ति का चित्रण इस प्रकार से किया जा सकता है। रोगी के रुधिर की गति इतनी शिथिल होती है कि सर्दी में उसके हाथ-पांव ठंडे हो जाते हैं। वे खुश्की के कारण फट जाते हैं। पैरों में बड़ी-बड़ी बिवाइयां पड़ जाती हैं, जिनसे खून निकला करता है। ठंड से उसकी सभी तकलीफें बढ़ जाती हैं। नम मौसम में रोगी अच्छा अनुभव करता है। रोगी की त्वचा का अत्यन्त खुश्क हो जाती है। रोगी अपने को कपड़ों से ढक कर रखना चाहता है। शरीर को गर्म कपड़ों से ढके रहता है, परन्तु फिर भी खुली हवा चाहता है। मौसम की जरा भी तब्दीली से उसे ठंड लग जाती है, जुकाम हो जाता है। कभी-कभी बिस्तर में लेटते हुए इतनी ठंड अनुभव करता है कि दांत किटकिटाते हैं, परन्तु कुछ देर बाद बिस्तर में उसे इतनी खुजली उठती है और गर्मी लगती है कि तन पर कपड़ा रखना ही नहीं चाहता। ये दोनों विरोधी बातें रोगी की प्रकृति में पायी जाती हैं।
यदि उपरोक्त लक्षणों में से आपके शरीर में कोई एक या एकाधिक लक्षण मौजूद (Existing) हैं और यदि आप उपरोक्त में से किन्हीं तकलीफों से पीड़ित हैं तो आपके दीर्घ-स्वस्थ जीवन के हित में यह उचित होगा कि आप तुरंत अपने नजदीक के किसी भी अनुभवी डॉक्टर से सम्पर्क करें। *यदि आप सब जगह इलाज करवाकर थक चुके हैं तो सुबह 10 बजे से रात्रि 10 बजे के बीच मोबाईल नम्बर 98750 66111 पर और, या Health Advice WhatsApp No.: 85619 55619 पर आप सीधे मुझ से भी सम्पर्क कर सकते हैं।*
Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619, Mobile No.: 9875066111 (10AM to 10 PM)
उपशीर्षक:
Aluminum,
उदासी,
एल्यूमीनियम,
मलाशय,
मूत्राशय,
ल्यूकोरिया,
शिथिलता
Friday, February 16, 2018
ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर), अनियमित पीरियड्स, गर्भपात, ल्यूज योनी, सेक्स की अतिइच्छा, भय, अपराधबोध सीजर डिलेवरी इत्यादि के भय के कारण मैं विवाह के नाम से ही घबराने लगी थी।
जब मैं 13 साल की थी। मेरी मौसी की सीजर डिलेवरी हुई। 14 की थी तब चाची के रिश्ते में सीजर डिलेवरी हुई। कुछ ही समय बाद हमारे पड़ौस में सीजर डिलेवरी हुई। इस प्रकार 23 साल की हुई तब तक 20-25 सीजर डिलेवरी के केस मैंने देख लिये। सीजर के बाद अधिकतर लेडीज को मैंने कई तरह से परेशान होते और रोते हुए देखा। इस कारण मैं विवाह के नाम से ही घबराने लगी थी। हालांकि 14-15 साल की उम्र में ही मुझे सेक्स की इच्छा होने लगी थी और चाहे-अनचाहे 15 की उम्र से ही सेक्स शुरू हो गया जो शादी तक मैंने अनेक लडकों के साथ खूब इंजोय किया। प्राईवेट कम्पनी में नौकरी लग गयी तो इकोनोमिक प्रोब्लम भी खतम हो गयी। यंग बैचलर सर्किल होने के कारण कई बॉइज के साथ खुलकर सेक्स होने लगा।
अनेक फ्रेंडस ने धोखा भी दिया तो मेरा बॉय फ्रेंड्स को लाइफ पार्टनर बनाने का सोच खतम हो गया। लेकिन हालातों के कारण जब यह तय हो गया कि मैरिज करनी ही है तो बहुत सारे टेंशन माइंड में घूमने लगे। सोचते-सोचते हैडेक (सिरदर्द) होने लगता। अधिक सेक्स करने के कारण मुझे ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) भी हो गया। पीरियड्स रैग्यूलर नहीं आते। बहुत दर्द होता था। माइंड में बहुत सारी बातें घूमती रहती थी। जैसे यदि मेरी सीजर डिलेवरी हुई तो क्या होगा? मेरे बॉय फ्रेंड्स के बारे में, मेरे होने वाले हसबैंड को पता चल गया तो क्या होगा? यदि शादी से पहले किये सेक्स के कारण मेरी वैजाईना की ल्यूजनेस (योनी के साइज के ढीलेपन) का होने वाले हसबैंड को पता चल गया तो मेरा क्या होगा? ल्यूकोरिया के कारण वैजाइना में स्मैल भी आने लगी थी। जिसका एलोपैथी डॉक्टर से इलाज करवाया लेकिन सब बेकार।
मैंने नैट पर सभी प्रोब्लम्स के सोल्यूशन तलाशने शुरू किये। अनेक डॉक्टर्स से बात भी की, लेकिन अधिकतर का मैन मकसद डराकर रुपये ऐंठना लगा। कुछ अच्छे डॉक्टर्स भी लगे, लेकिन उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ। इसी दौरान मैंने गर्भनिरोधक पिल्स के साईड इफैक्ट पढे। जिनको पढकर मैं तो घबरा ही गयी। क्योंकि मैंने तो हजारों गर्भनिरोधक पिल्स खाई थी। दो बार एबोर्ट (गर्भपात) भी करवाया था। इस कारण मुझे ऐसी अनेक मैंटल प्रोब्लम्स तथा टेंशन हो गयी, जिनको किसी को बता भी नहीं सकती थी। नैट पर अनेक तरह से सोल्यूशन मिल रहे थे, लेकिन कंफ्यूजन भी बढ रहा था। अनेक आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे पढे। लेकिन सीजर डिलवरी का मेरा भय नहीं मिटा। दूसरी टेंशन भी मुझे खाये जा रही थी। मैं खुद ग्युल्टी फील (अपराधबोध अनुभव) करने लगी। सोचने लगी मुझे भी ऐसा ही हसबैंड मिलेगा, जिसके बहुत गर्ल्स के साथ सेक्स रिलेशन रहे होंगे।
नैट पर ऐसे लड़कों के बारे में भी पढा जो मस्टरबेशन (हस्तमैथुन) करने के कारण सेक्स की पावर खो चुके थे। मुझे इसका भी भय सताने लगा कि यदि मुझे ऐसा हसबैंड मिला तो क्या होगा? क्योंकि मैं बहुत सेक्सी हो चुकी थी। हर दिन 2-4 बार सेक्स करने की इच्छा होती थी। आखिर में मैंने अपने किसी बॉय फेंड के बजाय किसी नये लड़के से मैरिज करने का तय किया। इसी बीच 2014 में मैंने हैल्थ केयर फ्रेंड (http://www.healthcarefriend.in/) पर डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश जी का एक आर्टिकल बढा। जिसमें बिना सीजर के इजी एंड सेफ डिलेवरी के बारे में लिखा था। नीचे डॉ. साहब का मो. नं. 9875066111 लिखा था। मैंने तुरंत काल किया। डॉ. साहब के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति ने पिक किया और मुझे बताया कि डॉ. साहब किसी मीटिंग में स्पीच दे रहे हैं। मुझे भी वोइस सुनाई दे रही थी। मुझे लगा कम से कम यह बंदा चोर-उचक्का तो नहीं है। सोशल स्टेटस वाला बंदा है। मैंने दूसरे दिन फिर काल किया तो डॉ. साहब ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। बात शुरू होते से ही कट गयी।
आखिर तीसरे दिन डॉ. साहब से बात हुई। मैंने उन्हें बताया कि मुझे सीजर डिलेवरी नहीं चाहिये और बैबी भी चाहिये। साथ ही हो सके तो वैजाइना की लूजनेस भी कम करनी है। मुझे सरप्राईज हुआ डॉ. मीणा जी ने सभी प्रोब्लम को सोल्व करने की बात कही। मैंने खर्चा पूछा तो बोले पहले वाट्सएप पर अपनी डिटेल्स भेजें और खर्च की चिंता नहीं करें, बहुत कम लूंगा।
सारी जानकारी देने के बाद डॉ. साहब द्वारा मुझे कहा गया कि जो कुछ भी हुआ और जो हो रहा है, उसके बारे में जितना सच तथा सही बताओगी, उतना ही इलाज तथा समाधान के सफल होने की उम्मीद की जा सकती है। मुझे सारी बातों को 100 परसेंट कॉन्फीडेंसियल रखने का विश्वास दिलाया तो मैंने अपनी सारी स्टोरी खुलकर बता दी। इसके दो दिन बाद डॉ. साहब ने मुझे 48 मिनट तक मोबाईल पर जो कुछ काउनसिल किया। मैं उसे कभी नहीं भुला सकती। डॉ. साहब ने मेरे सोचने का तरीका ही बदल दिया। मेरा सारा भय खतम कर दिया और बोल दिया कि सब कुछ भूलकर बिना संकोच मैरीज करो, लेकिन फ्यूचर में अपने लाइफ पार्टनर के साथ धोखा नहीं करना। हो सके तो बॉय फ्रेंड्स से अभी से ही दूर रहो। पुरानी बातों को याद करने से लाभ नहीं, नुकसान ही हो सकता है। यदि अत्यधिक सेक्स इच्छा होगी तो उसका भी नेच्युरल उपचार है।
डॉ. साहब ने मुझे यह भी विश्वास दिलाया कि यदि बाई चांस मेरे होने वाले हसबैंड को कोई सेक्सुल प्रोब्लम हुई तो उसको भी संभाल लेंगे। वैजाइना की ल्यूजनेस कम करने के साथ ही हर हाल में विदाउट सीजर नॉर्मल डिलेवरी का विश्वास दिलाया। करीब 5 महिने के उपचार के बाद मेरी वैजाइना की ल्यूजनेस लगभग खतम हो गयी। ल्यूकोरिया भी ठीक हो गया। पेट (हाजमा) खराब रहता था, वो भी ठीक हो गया। सब कुछ ठीक हो गया, लेकिन सीजर डिलेवरी का थोड़ा सा भय अभी मन में था। मैंने डॉ. साहब की एडवाईस को नहीं मानकर अपने एक पुराने बॉय फ्रेंड के साथ यह जानने के लिये सेक्स किया कि क्या वाकई मेरी वैजाइना टाईट हो चुकी है? रिलेशन के बाद मेरा बॉय फ्रेंड तो बहुत खुश हुआ ही मुझे भी बहुत अच्छा लगा।
आखिर में 28 की उम्र में मई, 2015 में मैंने फैमिली द्वारा सिलेक्ट लड़के से अरेंज मैरिज कर ली। मैरीज से पहले मेरी डॉ. साहब से व्यक्तिगत रूप से मिलने की बहुत इच्छा थी। इसलिये मैंने डॉ. साहब को मैरिज में इनवाइट भी किया। लेकिन डॉ. साहब किसी मीटिंग के कारण नहीं आये या मीटिंग का बहाना बनाया पता नहीं, लेकिन मेरी मैरिज में नहीं आये। इसका उस समय मुझे दु:ख हुआ।
आखिर मुझ जैसी गंदी और धोखेबाज लड़की की जिन्दगी में सुहागरात का क्षण आ गया। मेरे स्मार्ट हसबैंड ने वैजाइना में अपना पैनिस 2-3 बार डाला और डिस्चार्ज हो गये। उनका पहला सेंटेंस था-''डार्लिंग सोरी, मेरी गलत हैबिट्स के कारण मेरी सेक्स पावर खतम हो चुकी है, बट आई प्राउड यू, इतनी एज में भी तुम्हारी वैजाइना इतनी टाइट है। आईएम लकी।''
पहले सेक्स के कुछ समय बाद पतिदेव निढाल होकर सो गये। बैड पर लेटे हुए मेरा दिमांग घूमने लग गया। सोचिये मुझे जैसी गंदी और धोखेबाज लड़की को पाकर मेरे हसबैंड द्वारा अपने आप को लकी मानना मुझे कैसा लगा होगा? मेरे मन में बहुत से विचार घूमने लगे।
फर्स्ट-मुझे खुशी हुई कि मेरी पुरानी जिन्दगी का मेरे हसबैंड को कभी पता नहीं चलेगा। मन ही मन मैंने डॉ. मीणा जी को दिल से थैंक्स बोला।
सेकण्ड-सेक्स पावरलेस हसबैंड मिलना, मुझे लगा कि मेरे कर्मों की सजा है। लेकिन तुरंत ही खुद को संभाला डॉ. मीणा जी के होते चिंता किस बात की?
थर्ड-क्या ये बंदा मुझे कभी प्रिग्नेंट कर पायेगा?
ऐसे न जाने कितने विचार घूमते रहे और सोचते-साचते नींद आ गयी। सुबह जागने पर ननदों और भाभियों की ठिठोली के बीच मैं अन्दर ही अन्दर रो रही थी। अचानक मुझे अन्दर अकेले में बुलाकर पतिदेव महोदय ने आदेश फरमाया-''रात को जो कुछ हुआ, उसके बारे में किसी को मत बताना, मैं अपना इलाज करवा लूंगा। एक बाबा हैं, जो बहुत अच्छी दवाई देते हैं।'' मन ही मन डर भी लगा कि कहीं कोई गलत मैडीसिन नहीं ले आये? अगली रात दवाई के सेवने के बाद सेक्स शुरू किया तो आधा घंटे तक मेहनत करने के बाद भी डिस्चार्ज नहीं हुआ। परेशान होकर अधूरा ही छोड़ दिया। एक घंटे बाद फिर कोशिश की तब डिस्चार्ज हुआ। बोले अब तो ठीक है। मैंने कहा क्या खाक ठीक है? आपने मुझे क्या समझ रखा है? कौनसी मैडीसिन लाये हो? कहीं कोई साइड इफैक्ट नहीं हो जाये? बोले जो होगा देखा जायेगा, तुम तो खुश हो ना? मैंने कहा नहीं, मैं ऐसे खुश नहीं हो सकती। आप ऐसी दवाई नहीं लेना कोई नेचुरल और सेफ मैडीसन लीजिये। बेशक आप सेक्स मत करो मैं वेट कर लूंगी।
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परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच।
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2. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 पर हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करने हेतु
या स्वास्थ्य परामर्थ हेतु रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
3. आपका परिचय जानने के बाद आपकी स्वास्थ्य रक्षा हेतु
हेल्थ बुलेटिन भेजा जाने लगेगा।
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लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।
अन्यथा आपके नम्बर को ब्लॉक कर दिया जायेगा।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
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आखिर में, मैं पीहर लौटी तो मैंने डॉ. साहब को सारी कहानी बतायी। डॉ. साहब की एडवाइस के मुताबिक मैंने एक झूंठी कहानी गढकर डॉ. मीणा जी का नम्बर अपने हसबैंड को दिया। डॉ. मीणा जी से उनकी बात हुई, उपचार शुरू हुआ और नवम्बर, 2015 तक मेरे हसबैंड 100% मर्द बन गये। इस बीच हम दोनों की डॉ. साहब से बात होने लगी। अब डॉ. साहब की सलाह के मुताबिक मुझे कंसीव (गर्भधारण) करना था। जनवरी, 2016 में मुझे कंसीव करने में सफलता मिली। दूसरे महिने से ही मैंने डॉक्टर साहब के 'प्रसव सुरक्षा चक्र' (http://www.healthcarefriend.in/2017/07/blog-post_18.html) की दवाईयों को अन्तिम दिन तक सेवन किया। ठीक समय पर नवम्बर, 2016 में बिना सीजर, बिना फाल्स लैबर पैन, बिना इंज्री, बिना परेशानी और लगभग बिना डॉक्टरी मदद के मैं एक स्वस्थ बेटे की मां बन चुकी हूं। मन ही मन अपने आप को लकी माना और मैंने डॉ. साहब के लिये भगवान से दुआएं मांगी। काश ऐसा डॉक्टर और एडवाईजर सबको मिले। डॉ. साहब की सलाह के मुताबिक मार्च, 2017 के पहले वीक में हमने डिलेवरी के बाद पहली बार सेक्स किया। मेरे हसबैंक को सरप्राईज हुआ और बोले-"तू तो वापस कुंवारी जैसी हो गयी! मजा आ गया।"
अन्त में सबसे बड़ा सवाल इस सबका खर्चा किना हुआ? फिगर (आंकडा) देने के बजाय मैं इतना ही कहूंगी कि बहुत ही कम खर्चा हुआ। इतना बता दूं कि मेरे इलाज, मेरे हसबैंड के इलाज और अन्त में प्रसव सुरक्षा चक्र पर कुल मिलाकर मेरी एक महिने की सैलेरी भी खर्च नहीं हुई। अब हम बहुत खुश हैं। बीच-बीच में डॉ. साहब से दुआ-सलाम करते रहते हैं।
डॉ. साहब कृपया आप मेरी इस स्टोरी को अपनी वेबसाइट पर डालने का कष्ट करें। जिससे दूसरे हम जैसे दु:खी लोग भी इंस्पायर हो सकें। खुद को अनलकी और ग्युल्टी मानने वाली एक लकी लड़की-बदला हुआ नाम 'प्रतिभा'।
डॉक्टर टिप्पणी: प्रतिभा और प्रतिभा के हसबैंड जैसी समस्याओं का सामना करने वाले युवक-युवतियां की संख्या असंख्य है। जो यौनशिक्षा की कमी, गलत संगत, अपराधबोध, अविश्वास, संकोच और गलत आदतों के कारण घुट-घुट कर जीने को विवश हैं। ऐसे लोगों के परिवार और जीवन बिखर रहे हैं। बड़ी संख्या में होने वाले तलाकों की छुपी वजह यौन सम्बन्धों में असंतुष्टि होता है। मेरे पास तकरीब हर दिन ऐसे अनेकों व्यथित युवक-युवतियां के काल आते रहते हैं। हम पर जो विश्वास कर लेते हैं, उनका उपचार हो जाता है और जो हम पर विश्वास नहीं कर पाते उनकी वे जानें। मैं इतना ही लिखूंगा कि यदि सही डॉक्टर को, सही समय पर, सच बताओगे तो शारीरिक और मानसिक व्यधियों और परेशानियों से मुक्ति सम्भव है! मैडम प्रतिभा के हसबैंड की स्टोरी भी बड़ी दर्दनाक और युवकों को सबक सिखाने वाली है। लेकिन उनकी अनुमति के बिना प्रकाशन नहीं किया जायेगा।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-85-619-55-619
उपशीर्षक:
Sex,
अपराधबोध,
गर्भपात,
भय,
मर्द,
ल्यूकोरिया,
ल्यूज योनी,
सीजर डिलेवरी,
सेक्स
Thursday, August 24, 2017
डॉ. निरंकुश जी ने लीवर ठीक कर, मेरी सेक्स लाईफ लौटायी! शराब का सेवन कभी नहीं करें। जिन्दगी बर्बाद हो जायेगी।
मेरी एज 58 साल है। मुझे 10-15 साल की एज से ही कब्जी रहती थी। अनेक चूरण, काढे और गोली-कैप्सूल खाये। कब्जी ठीक नहीं हुई। सर्विस लगने के बाद फ्रेंड बने एक पड़ौसी ने 25 साल की उम्र में सलाह दी कि शराब का सेवन करने से कब्जी ठीक हो जाती है। शुरू में एक ढक्कन शराब पीना शुरू किया। कुछ असर हुआ। धीरे-धीरे शराब बढती गयी। मैं शराब का हैबीच्युअल हो गया। इस कारण घर में झगड़े रहने लगे। यदि मैं सरकारी नौकरी में नहीं होता तो मेरी पत्नी मुझे कभी की छोड़कर चली गयी होती। 45 की उम्र आते-आते मेरा वेट 70 से 45 किलो रह गया। पेट में भयंकर दर्द रहने लगा। सेक्स करने की इच्छा और शक्ति खतम सी हो गयी। इस कारण घर में अत्यधिक कलह बढ गयी। 8 साल छोटी पत्नी की हालत मुझ से देखी नहीं जाती थी। कुलमिलाकर जीना हराम हो गया। हरदम टेंशन ही टेंशन रहने लगा।
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अनेक डॉक्टरों को दिखाया। अनेक जांच करवायी तो सबने बताया कि लीवर खराब हो गया। मुझे सलाह दी कि शराब मेरे लिये जहर है। मगर मेरी शराब की लत नहीं छूटी। लीवर में अत्यन्त सोजन आ गयी। आंतों में अल्सर हो गये। पेट में असहनीय दर्द रहने लगा। न भूख लगती और न कुछ खाना पचता। उल्टी होने लगी। सौभाग्य से एक देशी वैद्यजी ने मेरी शराब तो छुड़ा दी। वे लीवर का भी इलाज कर रहे थे कि इसी दौरान एक दुर्घटना में वैद्य जी चल बसे। लीवर की तकलीफ की वजह से मेरा जीवन नर्क हो गया। दफ्तर में बैठकर नौकरी करना भी मुश्किल हो गया। लिव-52, त्रिफला, ईसबगोल, अनेक प्रकार के आसव और सीरप मेरी जिन्दगी के हिस्सा बन गये थे। फिर भी मैं जैसे-तैसे केवल जीवन को घसीटने की हालत में था।
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इसी बीच मुझे मेरी एक सहकर्मी माधवीजी (बदला नाम) ने डॉ. निरंकुश जी के बारे में बताया कि उनकी बेटी को भयंकर ल्यूकोरिया था, जो डॉ. निरंकुश जी के इलाज से ठीक हो गया। मुझे भी डॉ. निरंकुश जी से सम्पर्क करने की सलाह दी। मैंने उनके मोबाईल 9875066111 पर बात की। मेरा सारा विवरण वाट्स एप के जरिये जानने के बाद डॉ. साहब ने कहा कि कम से कम 10 से 12 महिने तक दवाई लेनी होंगी। मेरा इलाज शुरू किया। पहले दो महिने कोई खास लाभ नहीं हुआ, तीसरे महिने मुझे लगा कि अब मेरा इलाज हो रहा है। मुझे खाने की थोड़ी-थोड़ी इच्छा होने लगी। चौथे महिने मुझे अच्छी भूख लगने लगी तथा शारीरिक शक्ति का अनुभव हुआ। दवाई लेते सात महिने हो गये हैं। अब मैं 80 परसेंट ठीक हो गया हूं। शरीर में ताकत भी बढी है। सेक्स करने की भी इच्छा होने लगी है। वजन 52 किलो हो गया है। मुझे उम्मीद है कि मैं बहुत जल्दी पूरी तरह से ठीक हो जाउंगा। मैं चाहता हूं कि मेरा नाम उजागर नहीं करें, लेकिन मेरा उक्त विवरण साईट पर सार्वजनिक किया जाये। जिससे दूसरे दु:खी लोग भी मुझे उदाहरण समझ कर अपना जीवन सुधार सकें। मैं यही कहूंगा कि शराब का सेवन कभी नहीं करें। जिन्दगी बर्बाद हो जायेगी।
—राधेश्याम गुप्ता (बदला हुआ नाम) नियर कश्मीरी गैट, दिल्ली।
~~~~~~~~मैने बहुत सारे रोगी देखे हैं। हर दिन सैकड़ों नये रोगियों के काल आते हैं। राधेश्याम गुप्ता जी अपनी आप बीती में सच नहीं लिखा है। इनकी स्थिति बहुत विचित्र रही है। इन्होंने मुझ से लीवर का इलाज करवाने के लिये सम्पर्क नहीं किया, बल्कि सेक्स पावर बढाने की दवाई के लिये सम्पर्क किया। जब इनकी सारी जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि इनको शराब की लत थी और इनका लीवर खराब था।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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Friday, July 07, 2017
मेरी पत्नी का बदबू मारने वाला ल्यूकोरिया, सिरदर्द और मेरी
नामर्दी, कब्जी, लीवर की बीमारी सहित सभी तकलीफें खत्म हो गयी
रेस्पेक्टेड डॉक्टर निरंकुश सर मैं आपका धन्यवाद किन शब्दों में अदा करूं समझ में नहीं आ रहा। आपने बहुत छोटी सी रकम लेकर मेरा व्यक्तिगत और सेक्सुअल जीवन बचा लिया। मैं 14 साल से 23 साल की उम्र तक लगभग हर रोज हस्तमैथुन करने का अभ्यस्त रहा। अनेक बार एक ही दिन में कई कई बार हस्तमैथुन करता था। इसके बाद एक खूबसूरत आंटी (मकान मालकिन) ने मुझे अपने सौंदर्य के जाल में ऐसा फंसाया कि 28 साल की उम्र तक शादी याद ही नहीं आयी। मकान मालिक अंकल के दफ्तर जाते ही आंटी मेरे साथ और मेरे दोस्त के साथ लगभग हर दिन सेक्स करती थी। अनेक बार एक ही दिन में कई कई बार भी सेक्स करवाती थी। इस चक्कर में हम दोनों का केरियर बर्बाद हो गया। जब अंकल का तबादला दूसरे शहर में हो गया और आंटी भी साथ चली गयी तब हमें पता चला कि अब शादी करनी होगी।
शादी की तो पत्नी को ल्यूकोरिया की इतनी भयंकर बीमारी कि उसकी योनि से बदबू आती थी। मैं उसके साथ सम्बन्ध ही नहीं बना पाया और पत्नी के होते हुए फिर से हस्तमैथुन शुरू हो गया। टेंशन में शराब शुरू कर दी। पत्नी का इलाज कराया तो कुछ सुधार हुआ। जिससे सेक्स शुरू हुआ। 2 बच्चे हो गए। पत्नी बच्चों में खो गयी, लेकिन मैं खुश नहीं हुआ। हमेशा टेंशन ही टेंशन और शराब ही शराब। लीवर खराब हो गया। कब्ज और पाइल्स का शिकार हो गया। पत्नी टेंशन में एकदम सूख कर लकड़ी हो गयी। उसे भयंकर सिरदर्द वाला माइग्रेन हो गया। सिर की नसें फूलने लगी और भयंकर दर्द होने पर उल्टियां होने लगी। उसके लिए रसोई और बच्चे संभालना ही मुश्किल हो गए। मैं पत्नी से विमुख, घर परिवार की कोई परवाह नहीं। मेरी सेक्स उत्तेजना जाती रही। मेरी सेक्स करने की भयंकर इच्छा होती, लेकिन शरीर साथ नहीं देता। पत्नी और मैं दोनों एक दूसरे से सेक्स सुख पाने को तरसने लगे। साथ रहकर भी अजनबी लोगों की तरह रहने लगे। पत्नी का बदन बदबू मारता और मेरा बदन निष्प्राण सा हो गया। बहुतेरी दवाई करवाई। जब तक दवा तब तक थोड़ा बहुत असर। हम दोनों ने इलाज पर डेढ़ लाख से अधिक खर्चा कर दिया, लेकिन अंत में सब बेकार।
जनवरी, 2016 की बात है। एक दिन मेरी पत्नी को उसकी सहेली ने डॉक्टर पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी के बारे में बताया और उनकी साईट हैल्थ केयर फ्रेंड के बारे में बताया तो नेट पर पढा। पत्नी ने मुझे बताया। मैंने इलाज और डॉक्टर के नाम से ही तौबा कर ली थी। सो इलाज करवाने से मना कर दिया। पत्नी को अपना इलाज करवाने को बोल दिया। पहले महीने में मेरी पत्नी ने 1570 रुपये की दवाई मंगवाई और उसका सिर दर्द गायब हो गया। पत्नी से मैंने डॉक्टर निरंकुश जी का नम्बर लिया और 9875066111 पर बात की और अपना इलाज शुरू करवाया।
6-7 महीना के लगातार इलाज ने हमारी दोनों की जिंदगी बदल दी। मेरी शराब की लत छुड़वाई। लीवर और कब्ज का इलाज किया तो धीरे-धीरे लिंग में उत्तेजना आने लगी। एक दिन ख़ुशी में मैंने अपनी पत्नी को बाहों में भर लिया और हम फिर से सेक्स के आनंद को पाने में सफल हुए। मेरी पत्नी का बदबू मारने वाला ल्यूकोरिया, माइग्रेन और मेरी नामर्दी, कब्जी, लीवर की बीमारी सहित सभी तकलीफें खत्म हो गयी हैं। हम दोनों डॉक्टर साहब के कर्जदार हैं। हमारा सही इलाज करके और अपने लिटरेचर तथा मौखिक समझाइश के जरिये हमारा सोचने का तरीका ही बदल दिया।-मनमोहन दुबे (परिवर्तित नाम) लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
डॉक्टर टिप्पणी:
~~~~~~~~बेशक पेशेंट दम्पत्ति अपने इलाज के लिए मुझे श्रेय दे रहे हैं, लेकिन असल में यह अमृततुल्य तथा हानि रहित होम्योपैथिक दवाईयों और आयुर्वेद की 100 फीसदी शुद्ध ऑर्गेनिक औषधियों का कमाल है। मेरे मतानुसार सभी डॉक्टर अपने रोगी का सही से इलाज करना चाहते हैं। मगर वर्षों तक पंसारी की दुकान की शोभा बढाने वाली सड़ी-गली और निष्प्राण वनौषधियाँ इलाज में सबसे बड़ी बाधा हैं। आयुर्वेद की असफलता का यही सबसे बड़ा कारण है। हम हमारे फ़ार्म पर पैदा की गयी ताजा और 100 फीसदी शुद्ध ऑर्गेनिक औषधियों का ही उपयोग करते हैं। होम्योपैथी की विश्वसनीय फार्मेसी की दवाई खरीदते हैं और रोगी को अपना ग्राहक नहीं, अपनी चिकित्सा का मकसद समझते हैं। रोगी हम पर विश्वास करते हैं। बस सफल चिकित्सा का यही छोटा सा राज है।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-85-619-55-619
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कुल मिलाकर डाक खर्च सहित मात्र साढे 9 हजार रुपये खर्च हुए और मैं स्वस्थ हो गयी। डॉ. निरंकुश जी का धन्यवाद।-दीपिका सेन
मैं पिछले 10-12 साल से कब्ज, डकार और गैस से बहुत परेशान थी। पेट फूला-फूला सा रहता था। भूख नहीं लगती थी। अनेक बार उल्टी करने का मन करता था। अनेक अंग्रेजी डॉक्टरों को दिखाया। दो आयुर्वेद वाले वैद्यजी को दिखाया। चूर्ण, काढे और ईसबगोल की भुस्सी बताई। जब तक दवाई लेती ठीक रहती। उसके बाद वही की वही परेशानी। इस दौरान मुझे सफेद पानी की बीमारी भी हो गयी। बहुत कमजोर हो गयी। शरीर में जान ही नहीं रही। सिर दर्द भी रहने लगा। जीवन में कोई उत्साह ही नहीं रह गया था। हमारा दाम्पत्य जीवन भी नीरस हो गया था।
थक-हारकर एक दिन मैंने गूगल पर सर्च किया। अनेक डॉक्टरों से बात की, लेकिन सन्तुष्टी नहीं मिली। सर्च करते-करते एक दिन डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी से मोबाईल नम्बर 9875066111 पर बात हुई। मैंने उनको अपनी तकलीफें और सारी बात बताई तो, डॉक्टर निरंकुश ने मुझे कहा कि मैं किसी भी रोग या रोगी को ठीक करने की कोई गारण्टी नहीं देता, लेकिन ठीक करने की सौ परशेंट कोशिश करता हूं। मुझे उनकी यह बात अच्छी लगी।
मैंने खर्चा पूछा तो बोले कि पहले मैं आपकी सम्पूर्ण जानकारी लूंगा। उसके बाद खर्चा बताऊंगा। इसके बाद बाद उन्होंने मेरी सम्पूर्ण डिटेल्स पूछ ली। इससे मुझे शुरू में लगा कि इतनी सारी जानकारी का क्या करेंगे? मुझ से अनेक बार आगे से बात की और मेरा सम्पूर्ण शारीरिक तथा मानसिक लक्षणों विवरण पूछ लिया। फिर मुझे इलाज का खर्चा बताया। इस बात से मुझे बहुत खुशी हुई।
डॉक्टर साहब ने बताया कि कम से कम तीन महिना और अधिक से अधिक 6 से 8 महिने नियमित रूप से दवाई लेनी होगी। पहले 15 दिन तो पुरानी दवाईयों का असर खतम करने के लिये दवाई दी गयी। खर्चा पूछा तो मात्र 1300 से 1800 रुपये प्रति महिने के करीब बताया। मुझे मन ही मन बहुत खुशी हुई, क्योंकि मैं तो पहले कम से कम 30-35 हजार रुपये खर्च कर चुकी थी और कोई फायदा भी नहीं हुआ।
मैंने डॉक्टर साहब के निर्देशों के अनुसार रेग्यूलर दवाई ली और देखते ही देखते मैं अच्छी होने लगी। सफेद-पानी तो 2-3 महिने में ही पूरी तरह से ठीक हो गयी। कुल 5 महिने में, मैं पूरी तरह ठीक हो गयी। इसके बाद भी मुझे एक महिना और दवाई दी। दवाई छोड़े मुझे अब 6 महिने हो गये हैं। अब कोई दवाई नहीं लेती हूं और पूरी तरह से स्वस्थ हूं। कुल मिलाकर डाक खर्च सहित मात्र साढे 9 हजार रुपये खर्च हुए और मैं स्वस्थ हो गयी। डॉ. निरंकुश जी का धन्यवाद।-दीपिका सेन, उज्जैन, मध्य प्रदेश।
डॉक्टर टिप्पणी:
~~~~~~~~मैडम दीपिका जी ने जब मुझे पहली बार काल किया था तो बहुत निराश और मायूस लग रही थी। जीवन के प्रति उत्साह और डॉक्टरों के प्रति दीपिका जी का विश्वास ही कमजोर पड़ गया था। ऐसी मनोशारीरिक स्थिति में रोगी का उपचार करना डॉक्टर के लिए बहुत बड़ी चुनौती की तरह होता है। क्योंकि निराश और हताश रोगी के शरीर में औषधियां आसानी से परिणाम नहीं दिखा पाती हैं। इसलिए मुझे दीपिका जी से अनेक बार बात करनी पड़ी और उनमें जीवन तथा चिकित्सा के प्रति विश्वास जगाना पड़ा। इसके बाद क्या हुआ, वो सब तो खुद दीपिका जी ऊपर लिख ही चुकी हैं। अतः समझने वाली बात यह है कि इलाज के लिए रोगी का जीवन, डॉक्टर और दवाइयों के प्रति आशावान होना बहुत जरूरी होता है। अन्यथा दवाइयां इच्छित परिणाम नहीं दे पाती हैं।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-85-619-55-619
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Monday, June 05, 2017
डॉ. मीणा ने लीकोरिया ठीक करके मेरा जीवन लौटाया
मैं 12 साल से सफेद पानी-लीकोरिया से पीड़ित थी। जलन होती थी। शरीर कमजोर और ढीला हो गया था। मैंने बहुत इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं। जब भी मेरे पति सेक्स करना चाहते। बोलते बदबू आ रही है। हमेशा पानी जैसा बहता रहता है। ढीली-ढाली योनि में मजा ही नहीं आता। एक दिन मेरी सहेली ने बताया कि 9875066111 (वर्तमान में 85-619-55-619) पर डॉ. पुरुषोत्त्म मीणा जी से बात करो। मैंने शर्माते हुए बात की, लेकिन डॉ. मीणा जी से मेरी सारी समस्या सुनी और उन्होंने मेरा सारा डर और संकोच दूर करके मुझे लीकोरिया सहित सभी तकलीफों के ठीक होने का विश्वास दिलाया। अपच, कब्ज, कमजोरी और लीकोरिया गायब हो गये। मेरी योनि में कसावट आ गयी। अब मैं सम्पूर्ण नारी हूं। मेरा पति, अब सिर्फ मेरा है। मेरा वजन भी 38 से 55 हो गया। काश डॉ. मीणा मुझे 12 साल पहले मिल गये होते?
डॉक्टर टिप्पणी:
डॉक्टर टिप्पणी:
——वास्तव में हमारे समाज में स्त्रियों की स्थिति अत्यधिक चिन्ताजनक है। यौनशिक्षा की कमी और प्रदर को लेकर फैली ना-ना प्रकार की भ्रामक धारणाओं तथा शर्म-संकोच के चलते अनेक महिलाओं/युवतियों का यौन जीवन बर्बाद हो रहा है। अकसर प्रदर से पीड़ित रोगिड़ियों को सही सलाह नहीं मिलती है। उन्हें बताया जाता है कि सफेद पानी की बीमारी तो सभी महिलाओं को होती है, इसका कोई इलाज नहीं है। जबकि ऐसी सलाह में पहला वाक्य तो सही है, क्योंकि अकसर अधिकतर महिलाओं को सफेद पानी अर्थात् ल्यूकोरियो अर्थात् श्वेद प्रदर की बीमारी कभी न कभी होती देखी जाती है, लेकिन यह बात सही नहीं है कि इसका कोई इलाज नहीं है। प्रदर का इलाज सम्भव है। हमने हजारों महिलाओं को रोगमुक्त किया है। जरूरत इस बात की है कि पीड़ित महिला शर्म-संकोच छोड़कर हमें अपनी तकलीफ के बारे में बतायें। इसके बाद हमारी 100 फीसदी कोशिश होती है कि उनको रोगमुक्त किया जा सके।डॉ. पुरुषोत्त्म मीणा 'निरंकुश'-85-619-55-619
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Saturday, May 20, 2017
श्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया) का आयुर्वेदिक उपचार
केला : 2 पके हुए केले को चीनी के साथ कुछ दिनों तक रोज खाने से स्त्रियों को होने वाला प्रदर (ल्यूकोरिया) में आराम मिलता है। या केला खाकर ऊपर से दूध में शहद डालकर पियें। केला दूध अच्छी डाइट है, इससे आपकी सेहत भी ठीक होगी। कमजोरी दूर होगी। ये कम से कम तीन माह लगातार लें, गर्म दूध में शहद न डालें। कच्चे केले की सब्जी खायें। या दो केले में शहद डाल कर खायें।
झरबेरी : झरबेरी के बेरों को सुखाकर रख लें। इसे बारीक चूर्ण बनाकर लगभग 3 से 4 ग्राम की मात्रा में चीनी (शक्कर) और शहद के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम को प्रयोग करने से श्वेतप्रदर यानी ल्यूकोरिया का आना समाप्त हो जाता है।
आंवला : आंवले को सुखाकर अच्छी तरह से पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसी बने चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा को लगभग 1 महीने तक रोज सुबह-शाम को पीने से स्त्रियों को होने वाला श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) नष्ट हो जाता है। आंवला पिसा एक चम्मच 2-3 चम्मच शहद रोज दिन में एक बार खायें। 30 दिनों तक खटाई से परहेज करें। आंवले का रस व शहद लगातार एक माह तक लें। श्वेत प्रदर ठीक होगा। आंवला में विटामिन सी होने से आपकी त्वचा ग्लो भी करेगी।
शिरीश : शिरीश की छाल का चूर्ण 1 ग्राम को देशी घी में मिलाकर सुबह-शाम पीने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ मिलता है।
मुलहठी : मुलहठी को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में लेकर पानी के साथ सुबह-शाम पीने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) की बीमारी नष्ट हो जाती है।
बला : बला की जड़ को पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ 3 ग्राम की मात्रा में दूध में मिलाकर सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ प्राप्त होता है।
रोहितक : रोहितक की जड़ को पीसकर पानी के साथ लेने से श्वेतप्रदर के रोग में लाभ मिलता है।
रोहितक : रोहितक की जड़ को पीसकर पानी के साथ लेने से श्वेतप्रदर के रोग में लाभ मिलता है।
जामुन : छाया में सुखाई जामुन की छाल का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ कुछ दिन तक रोज खाने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है।
गुलाब : गुलाब के फूलों को छाया में अच्छी तरह से सुखा लें, फिर इसे बारीक पीसकर बने पाउडर को लगभग 3 से 5 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह और शाम दूध के साथ लेने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) से छुटकारा मिलता है।
बड़ी इलायची : बड़ी इलायची और माजूफल को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर समान मात्रा में मिश्री को मिलाकर चूर्ण बना लें, फिर इसी चूर्ण को 2-2 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम को लेने से स्त्रियों को होने वाले श्वेत प्रदर की बीमारी से छुटकारा मिलता है।
ककड़ी : ककड़ी के बीज, कमल, ककड़ी, जीरा और चीनी (शक्कर) को बराबर मात्रा में लेकर 2 ग्राम की मात्रा में रोजाना सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है।
धाय : स्त्रियों के श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में धातकी (धाय) के फूलों का चूर्ण 2 चम्मच लगभग 3 ग्राम शहद के साथ सुबह खाली पेट व सायंकाल भोजन से एक घंटा पहले सेवन करने से लाभ होता है।
जीरा : जीरा और मिश्री को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इस चूर्ण को चावल के धोवन के साथ प्रयोग करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ मिलता है।
शतावरी या सफेद मूसली : 3 ग्राम शतावरी या सफेद मूसली, 3 ग्राम मिश्री इनका चूरण सुबह-शाम गरम दूध से लें। श्वेत प्रदर तो ठीक होगा ही साथ कमजोरी तो ठीक होगी ही साथ स्वास्थ्य ठीक होगा।
चना : सेंके हुए चने पीसकर उसमें खांड मिलाकर खाएं। ऊपर से दूध में देशी घी मिलाकर पीयें, इससे श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) गिरना बंद हो जाता है।
नागर मोथा : नागर मोथा, लाल चंदन आक के फूल, चिरायता, दारूहल्दी, रसौता सबको 25-25 ग्राम लें तीन पाव पानी में उबालें आधा पानी रह जाय तो छानकर रख दें उसमे 100 ग्राम शहद मिलाकर दिन में दो बार 50-50 ग्राम लें हर प्रकार का प्रदर ठीक होजाताहै।

धातकी के फूलों का चूर्ण और मिश्री 1-1 चम्मच की मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम नियमित रूप से दूध या जल के साथ कुछ समय तक सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ मिलता है।
फिटकरी : चौथाई चम्मच पिसी हुई फिटकरी पानी से रोजाना 3 बार फंकी लेने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग ठीक हो जाते हैं। फिटकरी पानी में मिलाकर योनि को गहराई तक सुबह-शाम धोएं और पिचकारी की सहायता से साफ करें। या एक ग्राम कच्ची फिटकरी पिसी हुई, एक केले को बीच में से काटकर भर दें इसे दिन में या रात में एक बार खायें। सात दिन में प्रदर रोग ठीक हो सकता है।
दूधी : 2 ग्राम दूधी की जड़ को पीसकर और छानकर दिन में 3 बार पिलाने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) और रक्तप्रदर नष्ट होता है।
गूलर : रोजाना दिन में 3-4 बार गूलर के पके हुए फल 1-1 करके सेवन करने से लाभ श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) के रोग में मिलता है। मासिक-धर्म में खून ज्यादा जाने और गर्भाशय में पांच पके हुए गूलरों पर चीनी डालकर रोजाना खाने से लाभ मिलता है। गूलर का रस 5 से 10 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर महिलाओं को नाभि के निचले हिस्से में पूरे पेट पर लेप करने से महिलाओं के श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) के रोग में आराम आता है। 1 किलो कच्चे गूलर लेकर इसके 3 भाग कर लें। एक भाग कच्चे गूलर उबाल लें। उनको पीसकर एक चम्मच सरसों के तेल में फ्राई कर लें तथा उसकी रोटी बना लें। रात को सोते समय रोटी को नाभि के ऊपर रखकर कपड़ा बांध लें। इस प्रकार शेष 2 भाग दो दिन तक और बांधने से श्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है।
अनार : अनार के ताजे पत्ते मिल जायें तो 25-30 पत्ते लें और काली मिर्च के साथ पिसलें, उसमें आधा ग्लास पानी डालें छान कर रोज सुबह-शाम पियें।
ककड़ी : ककड़ी के बीजों का गर्भ 10 ग्राम और सफेद कमल की कलियां 10 ग्राम पीसकर उसमें जीरा और शक्कर मिलाकर 7 दिनों तक सेवन करने से स्त्रियों का श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) रोग मिटता है।
ककड़ी : ककड़ी के बीजों का गर्भ 10 ग्राम और सफेद कमल की कलियां 10 ग्राम पीसकर उसमें जीरा और शक्कर मिलाकर 7 दिनों तक सेवन करने से स्त्रियों का श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) रोग मिटता है।
मूंग : 100 ग्राम धुली मूंग तवे पर हल्का भून लें दो मुट्ठी चावल एक कप पानी में भिगा दें, दाल को पीसकर रख ले शीशी में अब इस चूरण को चावल भीगे पानी के साथ एक कप में घोलकर पी जायें।
गाजर : गाजर, पालक, गोभी और चुकन्दर के रस को पीने से स्त्रियों के गर्भाशय की सूजन समाप्त हो जाती है और श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) रोग भी ठीक हो जाता है।
मेथी : मेथी के चूर्ण के पानी में भीगे हुए कपड़े को योनि में रखने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) नष्ट होता है। रात को 4 चम्मच पिसी हुई दाना मेथी को सफेद और साफ भीगे हुए पतले कपड़े में बांधकर पोटली बनाकर अन्दर जननेन्द्रिय में रखकर सोयें। पोटली को साफ और मजबूत लम्बे धागे से बांधे जिससे वह योनि से बाहर निकाली जा सके। लगभग 4 घंटे बाद या जब भी किसी तरह का कष्ट हो, पोटली बाहर निकाल लें। इससे श्वेतप्रदर ठीक हो जाता है और आराम मिलता है। मेथी-पाक या मेथी-लड्डू खाने से श्वेतप्रदर से छुटकारा मिल जाता है, शरीर हष्ट-पुष्ट बना रहता है। इससे गर्भाशय की गन्दगी को बाहर निकलने में सहायता मिलती है। गर्भाशय कमजोर होने पर योनि से पानी की तरह पतला स्राव होता है। गुड़ व मेथी का चूर्ण 1-1 चम्मच मिलाकर कुछ दिनों तक खाने से प्रदर बंद हो जाता है।
ईसबगोल : ईसबगोल को दूध में देर तक उबालकर, उसमें मिश्री मिलाकर खाने से श्वेत प्रदर में बहुत लाभ होता है।
सफेद पेठा : औरतों के श्वेत प्रदर (जरायु से पीले, मटमैले या सफेद पानी जैसा तरल या गाढ़े स्राव के बहने को) रोग (ल्यूकोरिया), अधिक मासिक का स्राव (बहना), खून की कमी आदि रोगों में पेठे का साग घी में भूनकर खाने या उसके रस में चीनी को मिलाकर सुबह-शाम आधा-आधा गिलास पीने से आराम मिलता है।
गुलाब : श्वेतप्रदर, पेशाब में जलन हो तो गुलाब के ताजे फूल और 50 ग्राम मिश्री दोनों को पीसकर, आधा गिलास पानी में मिलाकर रोजाना 10 दिनों तक पीने से लाभ मिलता है।
कुलथी : श्वेतप्रदर (ल्युकोरिया) में 100 ग्राम कुलथी 1 किलो पानी में उबालकर बचे पानी छानकर पीने से लाभ मिलेगा।
लोध : लोध और वट के पेड़ की छाल मिलाकर काढ़ा बना लें। 2 चम्मच की मात्रा में यह काढ़ा रोजाना सुबह-शाम कुछ दिनों तक पीने से श्वेतप्रदर (ल्युकोरिया) में लाभ होता है।
बकायन : बकायन के बीज और श्वेतचन्दन समान मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर उसमें बराबर मात्रा में बूरा मिलाकर 6 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्युकोरिया) में लाभ मिलता है।
अर्जुन की छाल : महिलाओं में होने वाले श्वेतप्रदर और पेशाब की जलन को ठीक करने के लिए अर्जुन की छाल के बारीक चूर्ण का सेवन करना चाहिए। स्त्रोत : जे के हैल्थ डोट कॉम
तुलसी का रस : तुलसी का रस 10 ग्राम चावल के माड में मिलाकर पीने से एक सप्ताह में यह रोग ठीक हो जाएगा। इस दवा के खाने तक दूध भात खायें या भात खाना होगा।
बबूल : बबूल की 10 ग्राम छाल को 400 ग्राम में उबालें, जब यह 100 शेष बचे तो इस काढ़े को 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम पीने से और इस काढे़ में थोड़ी-सी फिटकरी मिलाकर योनि में पिचकारी देने से योनिमार्ग शुद्ध होकर निरोगी बनेगा और योनि सशक्त पेशियों वाली और तंग होगी। बबूल की 10 ग्राम छाल को लेकर उसे 100 ग्राम पानी में रात भर भिगोकर उस पानी को उबालें, जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर बोतल में भर लें। लघुशंका के बाद इस पानी से योनि को धोने से प्रदर दूर होता है एवं योनि टाईट हो जाती है।
परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
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Thursday, December 08, 2016
स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहने वाली स्त्रियां श्वेत प्रदर से पीड़ित रहती है। यौन स्वच्छंदता, अधिक सहवास व अश्लील बातों में संलग्न रहने वाली अधिकांश स्त्रियां श्वेत प्रदर का शिकार बनती है। श्वेत प्रदर से योनि से सफेद रंग का स्त्राव होता है। स्त्राव की अधिकता से आंतरिक वस्त्र खराब हो जाते हैं।
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Monday, July 22, 2013
- 1. श्वेत प्रदर वास्तव में एक बीमारी न होकर किसी अन्य योनिगत गर्भाशयगत बीमारी का बाहरी लक्षण है या सामान्यतः प्रजनन अंगों में सूजन का प्रमाण है। प्रदर दो प्रकार का होता है। एक सफेद पानी जाना और दूसरा योनि मार्ग से माहवारी के रूप में अत्यधिक-अधिक दिनों तक (4-5 दिन से ज्यादा) या बार-बार रक्त स्राव होना, जिसे रक्तप्रदर कहते हैं।
- 2. इसे महिलाएँ अत्यंत सामान्य रूप से लेकर ध्यान नहीं देती, छुपा लेती हैं। जिससे कभी-कभी गर्भाशयगत कैंसर होने की भी संभावना रहती है।
- 3. शुरू में ही ध्यान देकर चिकित्सा की जाए तो बहुत जल्दी रोगिणी ठीक हो सकती है, किन्तु इसकी उपेक्षा करने पर या विलम्ब से चिकित्सा शुरू करने पर यह रोग गंभीर या असाध्य भी हो सकता है।
- 4. अधिकांश मामलों में यह देखने में आया है कि इस बीमारी को योग्य चिकित्सक से इलाज कराने के बजाए लोग नीम हकीमों के पास जाना पसंद करते हैं। जिसके कारण भी रोग बढ जाता या असाध्य हो जाता है।
- 5. आयुर्वेद में काश्यप संहिता में वर्णित कौमार भृत्य (बालरोग) के अंतर्गत बीस प्रकार की योनिगत व्याधियों का वर्णन किया गया है, जिसमें से 'पिच्छिला योनि' नामक रोग के लक्षण पूर्णतः ल्यूकोरिया से मिलते हैं।
- 6. चिकित्सा से ज्यादा जरूरी सफाई : स्फटिका या फिटकरी को तवे पर गर्म कर पीसकर रखें, इससे सुबह शाम योनि स्थल की सफाई करें। फिटकरी एक श्रेष्ठ जीवाणु नाशक सस्ती औषधि है, जो सर्वसुलभ है।
इलाज : कौंच जिसमें कैल्शियम, फास्फोरस, लौह तत्व, प्रोटीन, गंधक और गेलिक एसिड (Gallic Acid) पाया जाता है। यद्यपि सबसे बड़ी समस्या है कौंच के पाउडर में और बीजों में मिलावट या ताजा नहीं मिलना। फिर भी आप घर पर ही उपचार करना चाहें तो कौंच के बीज लीजिये। उनको शोधित करके उनका पावडर बना लीजिये। बस इसी पावडर को ठीक नहीं होने तक सुबह शाम 2-2 ग्राम में दूध या पानी से निगल लीजिये। अधिकतर स्त्रियों को इससे लाभ मिलता है। प्रदर से रोगमुक्त होने के बाद रोज 3 महीने तक अश्वगंधा का 3 ग्राम पावडर पानी से निगल लिया जाये तो शरीर की सारी खोई हुई ताकत वापस आ जायेगी।
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Tuesday, November 29, 2011
--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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ओर्गेनिक
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कनेर
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कब्ज़
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गोखरू
गोखरू (LAND CALTROPS)
गोंद कतीरा-Hog-Gum
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चपाती
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चिटकन
चिंतित
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चिरोटा
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चोक
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छरहरी काया
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छाले
छींक
छीकें
छुअ
छुआरा
छुहारा
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छोटा धतूरा
छोटी हरड़
जंक फूड
जकवड़
जख्म
जंगली तिल्ली
जंगली तुलसी
जंगली पेड़
जंगली मिर्ची
जंगली-कटीली चौलाई
जटामांसी-Spikenard
जलजमनी
जलन
जलोदर रोग-Ascites Disease
जवारा
जवारे
जवासा-Alhag
जहर
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जायफल
जिगर
जीरा
जीवन रक्षक
जीवनी शक्ति
जुएं
जुकाम
जुदाई
जुलाब
जूएं
जूस
जोड़ों के दर्द
जोड़ों में दर्द
जौ
ज्यूस
ज्योति
ज्वर
ज्वर-Fiver
झाइयाँ
झांईं
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झुर्रियां
झुर्री
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टाइफाइड
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टॉन्सिल
टोटला
ट्यूमर
ठंड
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डीगामाली
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ढीली योनि
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तंत्र-मंत्र
तम्बाकू
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तलाक
ताकत
तिल
तिल्ली
तुंबा
तुंबी
तुम्बा
तुलसी
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त्रिदोषनाशक
त्रिफला
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त्वचा रोग
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थायरायड-Thyroid
थायरॉइड
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दन्तकृमि
दन्तरोग
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दर वेदना
दरार
दर्द
दर्द निवारक
दर्द निवारक दवा
दर्दनाक
दस्त
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दांत
दांतो में कैविटी-Teeth Cavity
दाद
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दाम्पत्य विवाद सलाहकार
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दाल
दालचीनी
दालें
दिमांग
दिल
दीर्घायु
दु:खी
दुर्गंध
दुर्बलता
दुष्प्रभाव
दुष्प्रभावरहित
दूध
दूध वृद्धि
दूधी
दूधी-Milk Hedge
दृष्टिदोष
दो मन
द्रोणपुष्पी
द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes
धड़कन
धनिया बीज
धनिया-Coriander
धमासा
धात
धातु
धातु पतन
धार्मिक
धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं?
धैर्यहीन
नज़ला
नपुंसक
नपुंसकता
नाइट्रिक एसिड
नाक
नाखून
नागबला
नागरमोथा
नाडी हिंगु
नाड़ी हिंगु (डिकामाली)
नामर्दी
नारकीय पीड़ा
नारियल
नाश्ता
निमोनिया
निम्न रक्तचाप
निम्बू
नियासिन
निराश
निरोगधाम
निर्गुण्डी
निर्गुन्डी
निष्कपट स्नेह
निष्ठा
निसोरा
नींद
नींबू
नींबू-Lemon
नीम-azadirachta indica
नुस्खे
नुस्खे-Tips
नेगड़
नेत्र रोग
नेुचरल
नैतिक
नॉर्मल डिलेवरी
नोनिया
नौसादर
न्युमोनिया-Pneumonia
न्यूरॉन्स
पक्षघात
पंचकर्म
पढ़ने में मन लगेगा
पंतजलि
पत्तागोभी-CABBAGE
पत्थर फोड़ी
पत्थरचट्टा
पत्नी
पथरी
पदार्थ
पनीर
पपीता
पपीता-CARICA PAPPYA
पमाड
परदेशी लांगड़ी
परम्परागत चिकित्सा
परहेज
पराठा
परामर्श
परिस्थिति
पवाड़
पवाँर
पाइल्स
पाक-कला
पाचक
पाचन
पाचनतंत्र
पाचनशक्ति
पाठक संख्या 16 लाख पार
पाठक संख्या पंद्रह लाख
पायरिया
पारदर्शिता
पारिजात
पालक
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पित्त
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पित्ती
पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne
पिरामिड
पीलिया
पीलिया-Jaundice
पीलिया-कामला-Jaundice
पुआड़
पुदीना
पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava
पुरुष
पुंसत्व
पेचिश
पेट के कीड़े
पेट दर्द
पेट में गैस
पेट रोग
पेड़
पेद दर्द
पेरिकिटो सेसिल
पेशाब
पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
प्लूरिसी-Pleurisy
प्लेटलेट्स
फंगल
फटन
फफूंद-Fungi
फरास
फल
फाइबर
फिटकरी
फुंसी-Pimples
फूलगोभी-CAULIFLOWER
फेंफड़े
फेरम फॉस
फैट
फैटी लीवर
फोटोफोबिया
फोड़ा
फोड़े-Boils
फोरप्ले
फोलिक एसिड
फ्लू
फ्लू-Flu
फ्लेक्स सीड्स
बकायन
बकुल
बड़ी हरड़
बथुआ
बथुआ पाउडर
बथुआ-White Goose Foot
बदबू
बंध्यापन
बबूल-ACACIA
बरसाती बीमारियाँ
बरसाती बीमारियां
बलगम
बलवृद्धि
बला
बलात्कार
बवासीर
बहरापन
बहुनिया
बहुमूत्रता-
बांझपन
बादाम-Almonds
बादाम.
बाल
बाल झड़ना
बाल झडऩा-Hair Falling
बिना सिजेरियन मां बनें
बिवाई
बीजबंद
बीड़ी
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बीमारी
बील
बुखार
बूंद-बूंद पेशाब
बेल
बेली
बैक्टीरिया
बॉयोकैमी
ब्रह्मदण्डी
ब्रेस्ट ग्रोथ
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सब्जी
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