Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

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प्रमेह (Spermatorrhoea): पुरुषों और विशेषकर युवकों के पौरुष का दुश्मन, लेकिन इसका इलाज संभव है!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश',
04 अक्टूबर, 2018, +91 8561955619

प्रमेह पुरुषों, विशेषकर युवकों का रोग है। प्रमेह का प्रमुख कारण अजीर्ण, कब्ज एवं पाचनतंत्र की खराबी होती है। प्रेमिका या किसी युवती को याद करने या उसका स्पर्श करने, कामुक फोटो/फिल्म देखने, कामुक बातें करने आदि कारणों से ही प्रमेह से पीड़ित रोगी का वीर्यपात हो जाता है। अर्थात बिना सेक्स किये ही अपने आप वीर्य निकल जाता है। रोगी शिकायत करता है कि शौच/मलत्याग के समय या मलत्याग के समय जोर लगाने पर, विशेषकर सुबह के समय मूत्र त्याग से पहले, वीर्य/धात/धातु की कुछ बूंदें अपने आप निकल जाती हैं।

उपरोक्त कारणों से रोगी को पिंडलियों और कमर में दर्द रहने लगता है। उसे मानसिक एवं शारीरिक दुर्बलता अनुभव होती है। किसी काम में मन नहीं लगता। हमेशा सुस्ती बनी रहती है। रोगी उनींदा सा पड़ा रहता है। याददाश्त भी कमजोर हो जाती है। बहुत जरूरी, बल्कि अत्यावश्यक कार्यों को करने का भी मन नहीं करता है। उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। स्त्री के नाम से ही उसे घबराहट होने लगती है।

रोगी के मन में आशंका बनी रहती है कि वह अपनी प्रेमिका या पत्नी के साथ सेक्स कर भी पायेगा या नहीं? अधिकतर मामलों में सेक्स शुरू करने से पहले ही रोगी का वीर्यपात हो जाता है। अत्यधिक हस्तमैथुन करने और हस्तमैथुन करने के दौरान या बाद में स्वप्नदोष के बाद ऐसी स्थिति उत्पन्न होती देखी गयी है। इसके अलावा अत्यधिक नशा करने के दुष्पपरिणामस्वरूप भी इस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

यहां समझने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रकार की तकलीफों से ग्रसित रोगियों के मन में अनेक तरह की आधारहीन, लेकिन उनको सच लगने वाली भ्रांतियां उनके अवचेतन मन में (अंदर तक बैठ) स्थापित हो चुकी होती हैं। किसी ऊंची इमारत को नीचे से देखने पर या ऊपर/ऊंची इमारत से नीचे देखने पर अत्यधिक डर लगने लगता है। पुल पार करते समय डर लगता है। मिठाई या नमक खाने की उत्कट (Passionate) इच्छा उत्पन्न होने लगती है।

इन सबके कारण रोगी को लगने लगता है, बल्कि उसको सच में अनुभव होता है कि उसका वीर्य पानी जैसा पतला हो चुका है। लिंग की नशें कमजोर तथा शिथिल हो चुकी हैं। लिंग में टेढापन आ गया है। इन सबके साथ रोगी का पाचन तंत्र भी बुरी तरह से खराब हो चुका होता है। कुछ रोगियों को बवासीर/पाइल्स, फिश्चुला/भगंदर, रैक्टम कॉलैप्स/गुदाभ्रंश की समस्या भी होने लगती है।

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात जो मैंने अपने अनुभव में पायी है। ऐसे यौन रोगियों के मानसिक विकारों का उपचार किये बिना, उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं किया जा सकता है। मगर बहुत कम रोगी इस बात को समझना चाहते हैं। इस कारण वे यहां-वहां लुटते-पिटते रहते हैं और अनेक तो जवानी में ही वृद्ध नजर आने लगते हैं। अत: दवाइयों के साथ-साथ रोगी की काउंसलिंग पहली जरूरत होती है। (Therefore, counseling of patients along with medicines is first required.) मगर यहां फिर से एक बड़ी समस्या यह है कि अनुभवहीनता और, या समयाभाव के कारण डॉक्टर काउंसलिंग पर ध्यान नहीं देते हैं या डॉक्टर्स को काउंसलिंग के लिये वांछित सेवाशुल्क अदा करने में रोगी असमर्थ होते हैं।

उपरोक्त प्रकार की मनोशारीरिक यौन तकलीफों से परेशान/पीड़ित पुरुषों/युवकों की संख्या छोटी नहीं है, बल्कि इनकी संख्या बहुत ज्यादा है।

मैं ऐसे रोगियों का उपचार करते समय समुचित परामर्श के साथ शुद्ध देशी ऑर्गेनिक जड़ी-बूटियां, बॉयोकैमिक पाउडर्स एवं होम्योपैशिक दवाइयों का सेवन करवाता हूं।

सुखी एवं सफल दाम्पत्य जीवन के लिये मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ होना पहली अनिवार्य शर्त है। अत: मानसिक रुग्ण ग्रंथियों से मुक्त हो जाने वाले, तकरीबन सभी रोगी पुरुष प्रमेह की तकलीफ से पूर्णत: स्वस्थ हो जाते हैं, जबकि मानसिक रूप से अपने आप को असाध्य या लाइलाज बीमारी के रोगी मान चुके, रोगियों को ठीक करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। जिसके लिये दवाइयों से ज्यादा लगातार काउंसलिंग की जरूरत होती है, मगर काउंसलिंग में जो वक्त खर्च होता है, उसकी कीमत अदा नहीं कर पाने वालों में से अधिकतर हमेशा को मनोशारीरिक यौन रोगी बने रहते हैं। खुद को नपुंसक और नामर्द पुरुषों की श्रेणी में शामिल कर चुके ऐसे पुरुषों द्वारा इलाज नहीं हो पाने के लिये किसी चिकित्सक को दोषी ठहराना भी उनकी मानसिक बीमारी ही है।

लक्षणों पर आधारित/निर्वाचित होम्योपैथी की सुसंगत दवाइयों में इतनी प्रबल आरोग्यकारी ताकत होती है, जिससे बहुसंख्यक मनोरोगियों की मनोस्थिति बदली जा सकती है, लेकिन इसमें भी चिकित्सक का बहुत सा समय खर्च होता है।
याद रखने लायक अंतिम न तो कोई चिकित्सक मुफ्त मिल सकता है और न ही कोई चिकित्सा सम्पूर्ण होती है, क्योंकि स्वस्थ होने के लिये प्रकृति का सहयोग भी जरूरी होता है।

इस लेख का प्राथमिक और अंतिम लक्ष्य प्रमेह से पीड़ित रोगियों को तीन बातें समझाना है।
पहली: प्रमेह केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रोग भी है। दूसरी: प्रमेह का रोग लाइलाज नहीं है। औरतीसरी: प्रमेह के इलाज के लिये रोगी को अपने मन में यह दृढ विश्वास होना अनिवार्य है कि वह ठीक हो सकता है।
यदि आप किसी लाइलाज समझी जाने वाली तकलीफ के कारण लम्बे समय से बीमार या अस्वस्थ या परेशान हैं तो निरामय उपचार हेतु आपके निकट के किसी आयुर्वेद और, या होम्योपैथी के डॉक्टर से सम्पर्क करें। साथ ही *अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की अधिक जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु हमारी निम्न वेबसाइट पर विजिट/क्लिक करके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बने:*



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गुदाभ्रंश (Rectum Collapse or Rectal Prolapse) लाइलाज (Incurable) नहीं!



लेखक-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'



गुदाभ्रंश क्या है? (What is Rectum Collapse?)
मलत्याग के समय गुदाद्वारा बाहर निकलने को आम बोलचाल में कांच निकलना बोला जाता है। इसे ही चिकित्सकीय भाषा में गुदाभ्रंश या Rectum Collapse कहा जाता है। य​ह तकलीफ छोटे बच्चों, किशोरों, युवकों, वयस्कों और वृद्धों सहित सभी उम्र के स्त्री-पुरुषों को होती देखी जा सकती है।





गुदाभ्रंश क्यों? (Why the Rectum Collapse?)

वंशानुगत कारणों से या लम्बे समय तक पाचन क्रिया की गड़बड़ी (Digestive System Disorder), सूखे मल को त्यागते समय जोर/ताकत लगाने, पेचिश (Dysentery) आदि की वजह से गुदाद्वार से चिकना पदार्थ/झिल्ली/आंव जैसा पदार्थ निकलने के साथ गुदा क्षेत्र के तंत्रिकातंत्र की मांसपेशियों के कमजोर हो जाने के कारण गुदाद्वारा बाहर निकलने लगता है।

>>>>>[यह भी पढें: शरीर को डिटॉक्सीफाई (जहरीले तत्वों से मुक्त) करें!




गुदाभ्रंश की अनदेखी का दुष्परिणाम भगन्दर (The Consequences of Ignoring the Rectum Collapse):
जब गुदाद्वारा बार-बार बाहर निकलता है तो गुदा में सूजन और संक्रमण होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। शर्म और संकोच के कारण अधिकतर लोग इस तकलीफ को लम्बे समय तक किसी को नहीं बताते हैं। शर्म-संकोच इन सभी तकलीफों को बढाने और दुष्कर (Incurable) बनाने में सहायक होते हैं। यही नहीं, इन हालातों में गुदाद्वारा में भगंदर (Fissure) भी हो सकता है। स्त्रियों में योनिभ्रंश (Colpoptosis/Elytroptosis) की तकलीफ भी छिपाने के कारण बढती है। अत: गुदाभ्रंश या योनिभ्रंश की तकलीफों को छिपायें नहीं, बल्कि तुरंत नजदीकतम डॉक्टर को दिखायें और नियमित रूप से ठीक होने तक इलाज करवायें।




गुदाभ्रंश का एलोपैथिक​ उपचार (Allopathic Treatment of Rectum Collapse):

आधुनिक चिकित्सा पद्धति अर्थात् एलोपैथी का मुझे ज्ञान नहीं है। अत: मुझे यह कहने का कोई हक नहीं होगा है कि गुदाभ्रंश का ऐलोपैथी में उपचार नहीं है। हां यह बात सच है कि गुदाभ्रंश की तकलीफ से पीड़ित अधिकतर रोगी मुझे यही कहते हैं कि उन्होंने वर्षों तक एलोपैथिक उपचार करवाया, लेकिन वे ठीक नहीं हुए और अंत में उन्हें ऑपरेशन की सलाह दी गयी। यह भी एक कड़वा सच है कि ऑपरेशन के डर से भी अनेक रोगी हम से सम्पर्क करते हैं।




गुदाभ्रंश का ऑपरेशन पहला नहीं, बल्कि अंतिम विकल्प (Operation not the first, but the last option):

किसी सर्जन डॉक्टर द्वारा ऑपरेशन की सलाह देने पर भी ऑपरेशन करवाने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिये। एक से अधिक डॉक्टर्स से सलाह करें। अन्य चिकित्सा पद्धति के किन्हीं वरिष्ठ डॉक्टर्स से सलाह करें। जब सभी सभी डॉक्टर्स के द्वारा गुदाभ्रंश की तकलीफ का निदान संभव नहीं हो पाये तो और सभी जगह से निराशा मिले फिर भी ऑपरेशन को प्रथम नहीं, बल्कि अंतिम विकल्प (Operation not the first, but the last option) के रूप में ही चुनें।




गुदाभ्रंश का इलाज संभव है (Rectum Collapse is Curable):

सबसे पहली बात खानपीन पर ध्यान रखें और अपनी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखें। मेरा अपना अनुभव है कि जब तक आप अपना हाजमा ठीक नहीं करेंगे, गुदाभ्रंश और बवासीर जैसी पीड़ाओं से मुक्ति असम्भव है? पाचन क्रिया में होने वाली गड़बड़ी की बिलकुल भी अनदेखी नहीं करें। क्योंकि इस संसार में स्वास्थ्य से बढकर महत्वूपर्ण कुछ भी नहीं है। इसके बावजूद भी हमारे देश में केवल गरीब और अशिक्षित ही नहीं, बल्कि अनेक उच्च शिक्षित लोग भी स्वास्थ के प्रति लापरवाह होते हैं। गुदाद्वार या प्रजनन अंगों से जुड़ी किसी भी तकलीफ में ऑपरेशन करवाने की जल्दबाजी नहीं करें। ऑपरेशन का निर्णय लेने से पहले 100 बार सोचें। दूसरे-तीसरे डॉक्टर्स की राय लें। मेरा अनुभव है कि इस तकलीफ के कारण हजारों-लाखों ही नहीं, करोड़ों लोग हर दिन असहनीय पीड़ा झेलने को विवश हैं। जबकि लाइलाज (Incurable) समझी जाने वाले गुदाभ्रंश (Rectum Collapse) की पीड़ा से बिना ऑपरेशन मुक्ति सम्भव है। हमारे द्वारा ताजा देशी ऑर्गेनिक (Organic) जड़ी-बूटियों और दुष्प्रभाव रहित जर्मन होम्योपैथक एवं बॉयोकैमिक चिकित्सा पद्धति से गुदाभ्रंश का लम्बे समय से उपचार किया जाता रहा है। सफलता की दर 80% से भी अधिक है। जिसके परिणामस्वरूप अनेकानेक रोगी हर दिन स्वस्थ होकर, सामान्य जीवन जी रहे हैं।


नोट:--------------------------ऑर्गेनिक (Organic) देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त अनमोल ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान हमने अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये हैं। जो बेशक कुछ गरीब या कंजूस लोगों को महंगे लग सकते हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों की "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम हमारी वेब साइट स्वास्थ्य रक्षक सखा के जरिये हर दिन देशभर में जारी है। लेकिन 'तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज' चाहने वाले हमें माफ करें।

-Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 06.05.2018. Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 केवल नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श चाहने वालों के लिये सार्वजनिक है। इस पर फालतू सामग्री भेजने वालों को तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता है।


काश मेरी बहन को भी प्रसव सुरक्षा चक्र (Pregnancy Safeguard) का कोर्स दिलवाया होता?

डॉ. मीणा साहब नमस्कार। मैं आज बहुत खुश हूं, लेकिन साथ ही दु:खी भी बहुत ज्यादा हूं। जैसा कि आपको पता है सर आपने मेरी पत्नी को गर्भ धारण करने पर प्रसव सुरक्षा चक्र का कोर्स उपलब्ध करवाया था। ठीक 9 माह 10 दिन में आपकी दी हुई तारीख: 20.03.2018 को मेरी पत्नी को दिन के 11 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई और दोपहर बाद 3 बजे मेरी पत्नी ने फूल सी बिटिया को जन्म दिया।



हम माता-पिता बने, मेरे माता-पिता दादा-दादी और मेरे सास-ससुर नाना-नानी बन गये। हम सभी बहुत खुश थे। जिसका सबसे बड़ा कारण-पिछले दो साल में हमारे ​परिवार तथा रिश्तेदारी में 7 महिलाएं पहली बार मां बनी, लेकिन सब को सिजेरियन डिलेवरी हुई। उन सबकी हालते देखकर बेहद दु:ख होता है। मेरी पत्नी गर्भ धारण करने के नाम से ही डरने लगती थी।

अत: हम दोनों ने तय किया कि बच्चा तो पैदा करेंगे, लेकिन सिजेरियन नहीं। सबसे पहले सेफ और बिदाउट सीजर डिलेवरी का रास्ता तलाशते-तलाशते हमें आपकी साइट हेल्थ केयर फ्रेंड पर 'आसान डिलेवरी-इजी डिलेवरी-सैफ डिलेवरी' की जानकारी पढने को मिली। जिसे पढने के बाद आप से बात हुई और हमने आपकी सलाह के अनुसार बच्चे को जन्म देने का प्लान किया। जैसे ही मेरी पत्नी ने कंसीव किया, मैंने आपकी राय के अनुसार मेरी पत्नी को 'प्रसव सुरक्षा चक्र' कोर्स दिलवाया। परिणाम चौंकाने वाला रहा। मेरी पत्नी को गर्भावस्था के दौरान बिना किसी प्रकार की गड़बड़ी और असहनीय पीड़ा के नेच्युअरली मां बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

लेकिन इस बात का दु:ख ज्यादा है कि मेरी पत्नी के साथ-साथ मेरी बहन ने भी गर्भधारण किया था। हमने उन्हें नहीं बताया कि हमने सिजेरियन से बचाव हेतु 'प्रसव सुरक्षा चक्र' कार्स शुरू किया हुआ है और उसे भी लेना चाहिये। कारण हम खुद कनफर्म नहीं थे कि 'प्रसव सुरक्षा चक्र' कितना सफल होने वाला है। इसकी दु:खद कीमत मेरी बहन चुका चुकी है। उसे 09 अप्रेल, 2018 को सिजेरियन डिलेवरी हुई है। अभी भी उसे अनेक प्रकार की तकलीफें झेलनी पड़ रही हैं। डॉ. साहब मेरी बहन की दशा देखकर मैं अपने आप को बहुत ज्यादा दोषी मान रहा हूं। काश मैंने मेरी बहन को भी प्रसव सुरक्षा चक्र का कोर्स दिलवाया होता?-प्रभाकर सिंह, इंदौर, मध्यप्रदेश। (व्यक्तिगत आग्रह पर नाम और स्थान बदल दिये हैं।)

डॉक्टर टिप्पणी: प्रभाकर सिंह जिस तरह पछता रहे हैं। आये दिन इस प्रकार के अनेकों मामले हो रहे हैं। कारण अशिक्षा, अविश्वास, संकोच और अनुभवहीनता। सबसे महत्वपूर्ण और समझने वाली बात यह है कि सिजेरियन डिलेवरी के लिये केवल डॉक्टरों को दोष देना भी इस ​स्थि​ति के एक पहलु को ही देखना है। सिजेरियन डिलेवरी के अनेकानेक कारण हो सकते हैं। जिनमें गर्भिणी की शारीरिक श्रम करने की प्रवृत्ति के साथ-साथ घर का माहौल एवं गर्भिणी की मनोस्थिति बड़ी भूमिका निभाती है। जो औरतें गर्भधारण करने से पहले ही सिजेरियन डिलेवरी के डरावने सपने देखने लगती हैं। उन्हें सिजेरियन डिलेवरी से बचाना बहुत मुश्किल होता है। स्पष्ट किया जाता है कि हम बिना सहमति-अनुमति के किसी का भी केस प्रकाशिक नहीं करते हैं। जनहित में जो लोग अपनी स्थिति को सार्वजनिक करना चाहते हैं। उनके मामले प्रकाशित किये जाते हैं। इस विषय में अधिक जानकारी के लिये निम्न लेख भी पढे जा सकते हैं।
Online Dr. PL Meena (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 17.04.2018
----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ महंगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम हर दिन जारी है। लेकिन 'तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज' चाहने वाले माफ करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-17.04.2018.
लाइलाज एलर्जी (Incurable Allergy) का इलाज
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
राजस्थान के जिला भरतपुर की बयाना तहसील के पास गाँव के एलर्जी से 8-9 वर्षों से पीड़ित 1 व्यक्ति के चार चित्र यहां प्रस्तुत हैं। जो उपचार हेतु मेरे पास आने से पहले एक दिन छोड़कर इंजेक्शन लगवाता था। इसके बाद भी उसकी दशा अत्यधिक खराब थी। जिसे 23.10.2017 के चित्र को जूम करके देखकर समझा जा सकता है। वह दिनभर खुजाता रहता था। उसके जख्मों पर मक्खियां भिनभिनाती रहती थी। अत: हमेशा मक्खियों को उड़ाता रहता था। रोगी ने बताया कि कभी-कभी उसके सारे शरीर में भयंकर सोजन आ जाती थी। जख्मों से रक्त निकलता रहता था। अनेक बार उसके लिये चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता था। इस कारण उसका जीवन अत्यधिक कष्टमय था। लोग उसे देखकर नफरत करते थे। उसके पास बैठना पसंद नहीं करते थे। इस कारण वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाता था। इस दौरान उसने बयाना, भरतपुर एवं मथुरा में अनेकों डॉक्टरों से इलाज करवाने में अपनी कड़ी मेहनत का बहुत सा रुपया खर्च किया। लेकिन सभी डॉक्टर्स ने अंत में यही कहा कि एलर्जी का कोई स्थायी इलाज सम्भव नहीं। उपरोक्त हालातों में पीड़ित व्यक्ति ने दिनांक: 23.10.17 को निदान हेतु मुझ से संपर्क किया। उसने बताया कि वह करीब 45-50 साल से बीड़ी पीने का आदी है। चूंकि धूम्रपान करने वालों को होम्योपैथिक दवाई असर नहीं करती हैं।

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अत: सबसे पहले बीड़ी छोड़ने हेतु उसका होम्योपैथिक उपचार किया गया। पीड़ित व्यक्ति के सहयोग से मात्र 5 दिन में उनकी बीड़ी पीने की आदत छुड़वा दी गयी। दिनांक: 28.10.17 से पीड़ित व्यक्ति की एलर्जी का निदान शुरु किया गया। आॅर्गेनिक देशी-जड़ी बूटियों एवं दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक दवाइयों के उपचार से 15.11.17 तक अनुमान से बहुत पहले एलर्जी नियंत्रित हो गयी। दिनांक: 24.12.17 तक अर्थात 2 माह में शरीर और चेहरे के सभी जख्म मिट गये। दिनांक: 30.01.18 तक, अर्थात 3 महिने में रोगी ऊपरी तौर पर एलर्जी से पूर्णत: स्वस्थ हो गया एवं खुजली बंद हो गयी। लेकिन फिर से तकलीफ न हो इसलिये कम से कम अगले 3 महिने तक रोगी का आंतरिक उपचार किया जायेगा। जिसमें उनकी रक्तशुद्धि भी की जायेगी। यह सब हमारे निरोगधाम पर पैदा की जा रही शुद्ध-ताजा आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों तथा अमृततुल्य एवं दुष्प्रभाव रहित जर्मन होम्योपैथिक-बॉयोकैमिक तत्वों-दवाईयों का सुखद परिणाम है। उक्त रोगी का विवरण जैसे ही मैंने अपनी वेब साईट website www.healthcarefriend.in पर प्रकाशित किया तो एलर्जी, दाद, खाज, खुजली आदि त्वचा/चर्म रोगों से पीड़ित लोगों के फोन आने का सिलसिला शुरू हो गया। हजारों काल आ चुके हैं। जो यह संशोधित नोट डाले जाने तक जारी है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि समयाभाव के चलते तथा हमारे निरोगधाम पर पैदा की जा रही शुद्ध-ताजा आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों की उपलब्धता सीमित होने के कारण मैं सीमित संख्या में ही कुछेक रोगियों का ही उपचार कर पाता हूं।

नोट: देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ महंगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारंटेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।
Online Dr. PL Meena (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 09.04.2018
रोगी अनर्थ या अपराध करे, इससे पहले उसे होम्योपैथिक इलाज की जरूरत होती है। लाक्षणिक इलाज: लक्षणों का मिलान करें और लाइलाज बीमारियों से मुक्ति पायें। भाग-2

जिन पाठकों ने पहला भाग नहीं पढा या जिन्हें पहले भाग का विवरण याद नहीं, तात्कालिक जानकारी के लिये दोहराया जाता है कि होम्योपैथी के मूल सिद्धान्त के अनुसार, होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। (There is no sure medication for any disease) केवल इतना ही नहीं, बल्कि-
*1-दो बीमार लोगों की एक जैसी बीमारी के लिये, अलग-अलग दवाई दी जा सकती है। (For the same illness of two sick people, different medicines can be given)*
*2-एक ही दवाई से, एक या एकाधिक रोगियों के अनेक रोगों को ठीक किया जा सकता है। (With the same medication, many diseases of one or more patients can be cured)*
*3-इसकी मूल वजह यह है कि होम्योपैथी में हम रोग का नहीं, रोगी का इलाज करते हैं। (We treat the patient, not the disease)*
*4-रोगी के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों के अनुसार मेल खाने वाली दवाई का चयन/सिलेक्शन करके रोगी की सभी प्रकार की तकलीफों का इलाज किया जा सकता है। (All types of diseases of the patient can be cured)*
*5-होम्योपैथी की किसी भी दवाई के कोई साईड इफैक्ट/दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। (There are no side effects of any medicine in Homeopathy)*
*आपके इलाज के लिए आधारभूत लक्षण*
*(Basic Symptoms for Your Cure)*




होम्योपैथी के समान लाक्षणिक चिकित्सा सिद्धान्त को आम लोगों के लिये सरल, सुगम और रोचक बनाने के लिये मेरी ओर से छोटा सा प्रयास शुरू किया गया है। जिसके तहत विश्व के महान होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा अनुभवसिद्ध कुछ अति-महत्वूपर्ण लक्षणों को पाठकों के समक्ष सरल तरीके से पेश कर रहा हूं।

यहां प्रस्तुत निम्न लक्षणों से यदि आप में से किसी के भी शारीरिक और, या मानसिक लक्षण मेल खाते हैं, तो आप इनके आधार पर अपनी कितनी भी पुरानी किसी भी मानसिक या शारीरिक बीमारी या व्यसन (mental or physical illness or addiction) के इलाज की उम्मीद कर सकते हैं।

*1 स्मृति-लोप:* स्मृति-लोप इतना हो जाता है कि रोगी अपने बच्चों, माता पिता, पति या पत्नी तक भूल जाते हैं। जब रोगी को यह अनुभूति या अहसास हो रहा हो कि सब कुछ अवास्तविक और अयथार्थ है। रोगी की स्मरण शक्ति कम हो जाती है, वह हर बात में कसम खाता है और छोटी-छोटी बातों में लोगों को समझाने लगता है। याद रहे रोगी को ऐसा वेद, धर्म, दर्शन आदि के कारण ऐसा नहीं सोचता, बल्कि उसे लगता ही ऐसा है कि जो कुछ दीखता है, वह वैसा नहीं है, जैसा दिख रहा है। इसी कारण उसे लगता है कि उसका पुत्र। पुत्र नहीं, पुत्री, पुत्री नहीं। पति, पति नहीं। पत्नी, पत्नी नहीं। माता, माता नहीं। पिता, पिता नहीं।

*2 दो मन:* रोगी को ऐसा भ्रामक विश्वास हो जाता है कि वह एक नहीं दो है। उसके शरीर में दो व्यक्ति या दो आत्मायें या दो मन हैं। उसे किसी से किसी क प्रकार के कार्य को करने का आदेश मिलता है, जबकि दूसरे से उस कार्य के विरोध करने का आदेश मिलता है।अनेक बार रोगी को लगता है कि उसका शरीर और उसकी आत्मा या मन दोनों अलग-अलग हैं। उसे लागता है कि उसके ऊपर दो आत्माओं का अधिकार स्थापित हो गया है।

*3 अनियंत्रित और बेकाबू मन:* रोगी की इच्छा एक काम करने को होती है तो दूसरी इच्छा उस काम को न करने की होती है। रोगी को लगता है कि उसकी दो 'इच्छा-शक्तियां' (Wills) हैं। उनमें से एक इच्छा-शक्ति उसे जो कुछ करने को कहती है, दूसरी उसे करने से रोकती है। वह निश्चय नहीं कर पाता कि क्या करे और क्या नहीं। उसके भीतर से उसे एक आवाज आती है-यह करो; दूसरी आवाज आती हैं-यह न करो। उसकी इच्छा है कि दूसरे को मार, दूसरे के साथ अन्याय करे, परन्तु उसे दूसरी आवाज ही अपने भीतर से सुनाई देती है कि ऐसा न करे। क्या करे, क्या न करे, इसका विवाद उसके भीतर लगातार चलता ही रहता है। ऊपरी तल पर तो तो ऐसी मनोस्थिति सभी लोगों की होती है, लेकिन सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति अच्छे-बुरे का निर्णय करने में सक्षम होता है। परन्तु जब मन इतना अनियंत्रित और बेकाबू (Uncontrolled and Uncontrollable) हो जाये कि वह दो इच्छाओं में से बुरी इच्छा के चंगुल में ही फंस जाय। रोगी में यह निर्णय करने के क्षमता नहीं रहे कि वह यह सोच सके बुरे और भले में से सही क्या है? रोगी यह नहीं सोच सके कि कानून का डर क्या है? ऐसी स्थिति में वह अनर्थ या अपराध करे, इससे पहले उसे होम्योपैथिक इलाज की जरूरत होती है।

*उपचार कहां से प्राप्त करें?*

उपरोक्त लक्षणों में से पचास फीसदी से अधिक लक्षण मेल खाने पर अपने नजदीक के किसी भी अनुभवी होम्योपैथ और, या आयुर्वेद डॉक्टर से सम्पर्क करें और, या *सुबह 10 बजे से रात्रि 10 बजे के बीच मोबाईल नम्बर 98750 66111 पर तथा हेल्थ वोट्स एप नम्बर: 85619 55619 पर मुझ से सीधे सम्पर्क किया जा सकता है।* हो सकता है कि *अभी तक 'लाइलाज समझी जाने वाली' (incurable considered) आपकी तकलीफ/लत से आपको मुक्ति मिल जाये?*

MY Ref-(MUIDHROAMCOAENOA-10-01-2018)
*आपका-अपना*
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF & MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
मुख्य प्रबन्ध संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज)
*केवल हेल्थ वाट्सएप: 85619-55619 (इस पर काल नहीं करें)*
Mobile No: 9875066111 (10 AM to 10 PM बजे काल करें)
Jaipur, Rajasthan, 10 जनवरी, 2018, 22.10PM
*सर्दी-जुकाम का होम्योपैथिक इलाज*

सर्दी का मौसम है। हर घर में किसी न किसी को सर्दी-जुकाम ने पकड़ रखा होगा? यद्यपि होम्योपैथी में किसी भी रोग के नाम से कोई दवाई नहीं दी जाती है, लेकिन लक्षणों के अनुसार लाइलाज समझी जाने वाली पुरानी से पुरानी तकलीफों को भी होम्योपैथी से ठीक किया जा सकता है। अत: सर्दी-जुकाम के बारे में भी यही नियम लागू होता है। अत: लक्षणानुसार कुछ होम्योपैथिक दवाइयों की जानकारी प्रस्तुत है:-



*एलियम सीपा (Allium Cepa):* मुख्य लक्षण-जुकाम में नाक से बहने वाले पानी से होंठ एवं नाक पर चिरमिराहट एवं खुजली हो रही हो साथ में छीकों के साथ नाक और आंखों से पानी आता हो तो एलियम सीपा जुकाम को ठीक कर देगी

*यूफ्रेशिया (Euphrasia):* इसका प्रमुख लक्षण-इसमें आँख से दाह करने वाला पानी/आंसू का स्राव और नाक से दाह न करने वाला स्राव बहता है। यदि आंखों के पानी से, गालों पर जलन एवं खुजली हो और नाक के पानी से कोई परेशानी न हो तो यूफ्रेशिया से जुकाम ठीक हो जायेगा।

*आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album):* प्रमुख लक्षण-नाक बंद/अवरुद्ध, बलगम से भरी हुई नाक और लगातार छींक आती हों। रोगी को किसी भी स्थान पर चैन और आराम नहीं मिलता हो। रोगी कभी यहां बैठता है, कभी वहां बैठता है। कभी एक कुर्सी पर बैठता है, कभी दूसरी कुर्सी पर बैठता है। कभी एक बिछौने पर लेटता है, कभी दूसरे बिछौने पर लेटता है। किसी एक जगह टिक कर बैठना, लेटना, रहना उसके लिये बहुत मुश्किल हो जाता है। रोगी को ऐसा लगता है कि उसका बदन जलन रहा है, लेकिन जब दूसरे लोग उसके शरीर को स्पर्श करके देखते हैं तो उन्हें ठंडा अनुभव होता है। शरीर की ऐसी आंतरिक जलन में भी रोगी को गर्मी से ही आराम मिलता है। इसी कारण रोगी अन्दर की जलन होने पर भी गर्म कपड़ा ही ओढ़ना चाहता हैं। साथ ही साथ रोगी बार-बार लेकिन बहुत थोड़ा-थोड़ा पानी पीता रहता है। ऐसी जुकाम आर्सेनिकम एल्बम से तुरंत ठीक हो जाती है।

*डल्कामारा (Dulcamara):* ऐसा जुकाम जो खुली, ठंडी हवा में बढ़ जाती है। गर्म हवा में, गर्म स्थान में रोगी को आराम मिलता है। रोगी अगर ठंडे कमरे में जायेगा, तो उसे नाक की हड्डी में दर्द शुरू हो जाएगा। छींकें आने लगेंगी और नाक से पानी बहने लगेगा। ऐसी जुकाम डल्कामारा से ठीक हो जायेगी।

*एकोनाइट (Aconite):* सर्दी-जुकाम दो प्रकार से हो सकता है। नमी वाली हवा लगने से सर्दी-जुकाम और खुश्क हवा लगने से सर्दी-जुकाम होना। सूखी ठंडी हवा के अचानक ठंड लगने से जो सर्दी-जुकाम हो जाती है। रोगी कितना ही पानी पीता जाये, उसकी प्यास नहीं बुझेती। रोगी बार-बार, बहुत-सा पानी पीता जाता है। ऐसे लक्षणों में एकोनाइट श्रेृष्ठ दवा है।

*नोट: उपरोक्त दवाई कितनी मात्रा में और कितनी बार लेनी हैं? इसका निर्धारण कोई अनुभवी होम्योपैथ ही कर सकता है। अत: बेहतर होगा कि किसी होम्योपैथ की देखरेख या परामर्श से ही इलाज लिया जाये।*

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
*Health WhatsApp/हेल्थ वाट्सएप: 85-619-55-619*
*Mobile No./मोबाईन नम्बर: 98750-66111 (10AM to 10PM)*
Jaipur, Rajasthan, 25 दिसम्बर, 2017, 05.10PM 
लक्षणों का मिलान करें और लाइलाज बीमारियों से मुक्ति पायें। भाग-1

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

होम्योपैथी के मूल सिद्धान्त के अनुसार, होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। (There is no sure medication for any disease) केवल इतना ही नहीं, बल्कि-

1-दो बीमार लोगों की एक जैसी बीमारी के लिये, अलग-अलग दवाई दी जा सकती है। (For the same illness of two sick people, different medicines can be given)

2-एक ही दवाई से, एक या एकाधिक रोगियों के अनेक रोगों को ठीक किया जा सकता है। (With the same medication, many diseases of one or more patients can be cured)

3-इसकी मूल वजह यह है कि होम्योपैथी में हम रोग का नहीं, रोगी का इलाज करते हैं। (We treat the patient, not the disease)

4-रोगी के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों के अनुसार मेल खाने वाली दवाई का चयन/सिलेक्शन करके रोगी की सभी प्रकार की तकलीफों का इलाज किया जा सकता है। (All types of diseases of the patient can be cured)

5-होम्योपैथी की किसी भी दवाई के कोई साईड इफैक्ट/दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। (There are no side effects of any medicine in Homeopathy)

होम्योपैथी के लाक्षणिक चिकित्सा सिद्धान्त को आम लोगों के लिये सरल, सुगम और रोचक बनाने के लिये मेरी ओर से छोटा सा प्रयास शुरू किया जा रहा है। जिसके तहत विश्व के महान होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा अनुभवसिद्ध कुछ अति-महत्वूपर्ण लक्षणों को पाठकों के समक्ष सरल तरीके से पेश कर रहा हूं।

प्रस्तुत निम्न लक्षणों से यदि आप में से किसी के भी लक्षण मेल खाते हैं, तो आप इनके आधार पर अपनी किसी भी और कितनी भी पुरानी मानसिक या शारीरिक बीमारी या व्यसन (mental or physical illness or addiction) के इलाज की उम्मीद कर सकते हैं।

कृपया 50 फीसदी से अधिक लक्षण मेल खाने पर किसी अनुभवी होम्योपैथ चिकित्सक से सम्पर्क करें। हो सकता है कि अभी तक 'लाइलाज समझी जाने वाली' (incurable considered) आपकी तकलीफ/लत से आपको मुक्ति मिल जाये?

आपके इलाज के लिए आधारभूत लक्षण
Basic Symptoms for Your Cure

1. जैसे स्त्रियों के सिर के बाल उलझते हैं, वैसे ही रोगी की आँखों की पलकों के बाल उलझ कर पलकों के अन्दर की ओर मुड़ जाते हैं।

2. युवतियों की नाक नोक पर चमकीली लाली सी दिखती है।

3. बच्चों के बालों के अगले सिरे अर्थात बालों की नोक एक-दूसरे से उलझ कर लट बंध जाती है। यदि इनको काट दिया जाये, तो फिर जो नये बाल निकलते हैं वे भी इसी प्रकार उलझते रहते हैं।

4. मुँह के अन्दर, होठों में, जीभ में, गाल के आंतरिक भाग में छाले या छालों के घाव पड़ जाते हैं। अनेक रोगियों के ऐसे छालें गले के अंदर, आतों में, यहां तक कि मल-द्वार तक पहुँच जाते हैं।

5. रोगिणी की योनि से अंडे की सफेदी की तरह का गाढ़ा श्वेत प्रदर निकलता है। श्वेत प्रदर के दौरान रोगिणी को ऐसा अनुभव होता है, मानो गर्म पानी की धार बह रही है।

6. रोगी/रोगिणी का ऊपर से नीचे की ओर गति से डरना, घबराना है। वह झूला नहीं झूल सकता। इस कारण वह ऊपर से नीचे की ओर गति करने से बचने की कोशिश करता है।















7. स्त्रियों को माहवारी समय से पहले तथा अधिक मात्रा में आती है। माहवारी के दौरान पेट में मरोड़ जैसा दर्द होता है। रोगिणी का जी मिचलाता है। पेट दर्द जो धीरे-धीरे पेट से कमर तक फैल जाता है। माहवारी के दौरान योनि का मुं​ह फूला हुआ सा महसूस होता है। साथ ही योनि में कुछ गड़ने/चुभने जैसा दर्द भी होता रहता है।

8. माहवारी के दौरान योनि से श्लैष्मिक-झिल्ली के कुछ टुकड़े-थक्के से निकलते रहते हैं। क्योंकि यह श्लैष्मिक-झिल्ली रुधिर के प्रवाह को रोकती है। इसलिये इस झिल्ली को बाहर धकेलने के लिये स्त्री के भीतरी अंगों से प्रसव-पीड़ा के समान दर्द उठता रहता है। उसे ऐसा अनुभव होता है कि भग में से जरायु बाहर निकल पड़ेगी। माहवारी के दौरान जब तक झिल्ली के ये टुकड़े बाहर नहीं निकल जाते, तब-तक अन्दर से प्रसव-पीड़ा के समान दर्द उठता रहता है।

9. इसी झिल्ली के कारण अनेक स्त्रियों को बांझपन की समस्या भी हो सकता है।

10. विचित्र-लक्षण रोगी/रोगिणी को किसी भी रोग में घबराहट 11 बजे दोपहर तक रहती है, उसके बाद घबराहट समाप्त हो जाती है।

11. दूसरा विचित्र-लक्षण कि रोगी अपने मुँह पर मकड़ी का जाला-सा लिपटा हुआ अनुभव करता है, और बार-बार उसे हटाने के लिये चेहरे पर हाथ फेरा करता है, लेकिन चेहरे पर होता कुछ भी नहीं है।

12. तीसरा विचित्र-लक्षण रोगी जब कुछ देर तक मानसिक-कार्य करता है, जैसे-लिखना, पढ़ना आदि तो उसका जी मिचलाने लगता है।

13. चौथा विचित्र-लक्षण स्त्री के स्तनों में दूध अधिक होने के कारण दूध अपने आप स्तनों से निकलने लगता है। साथ ही बच्चे को स्तनपान कराते समय, दूसरे स्तन में दर्द होता है।

14. हाथ की अंगुलियों के जोड़ों के पिछले भाग में खुजली होती रहती है तथा त्वचा अधिक मैली सी दिखती है। जिसके पसीने से बदबू आती रहती है।

15. रोगी/रोगिणी को अधिक गर्मी लगना, विशेषकर सिर में अधिक गर्मी लगने के कारण रात को ठीक से नींद नहीं आना। नींद में डरावने या काम वासना वाले सपने आना। सोते-सोते अचानक चिल्लाकर उठ जाना तथा डर लगना।

16. नीचे की ओर गति करने, शोरगुल, धूम्रपान करने तथा गर्मी के मौसम या गर्म कमरे में रहने से रोगी/रोगिणी के सभी प्रकार के रोगों का बढना या रोगी का मिजाज बिगड़ जाना।

MY Ref-(HOMEO15112017XEROB)
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा।
परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच।
दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Marital Dispute Consultant
हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
मोबाईन नम्बर: 9875066111
15 नवम्बर, 2017
28 साल पुरानी गुदाभ्रंश (rectum collapse) की पीड़ा से मुक्ति


चित्र: गूगल से साभार।
इस वक्त मेरी आयु 57 साल है। 28-29 साल की उम्र में मुझे टायफाईड हुआ था। इलाज के दौरान न जाने कौनसी दवाई खाई कि मेरी गुदा बाहर आने लग गयी। तब से लेकर 3 महिने पहले तक मैंने 28 साल में कितनी पीड़ा झेली है। इसको मैं शब्दों में बयान करने में असमर्थ हूं। मैंने अनेकों डॉक्टर्स से इलाज करवाया, लेकिन स्थायी लाभ नहीं मिला। इसी बीच ट्रेन में मेरी एक मित्र से मुलाकात हुई। बात ही बातों में, मैंने उन्हें अपनी तकलीफ बताई तो उन्होंने मुझ डॉ. पुरुषोत्तम मीणा जी के नम्बर 9875066111 लिखाये। मैंने काल किया तो डॉक्टर साहब के कहने पर मैंने अपने बेटे के मोबाईल के वाट्स एप से डॉक्टर साहब को सारी जानकारी भेजी। पहला कोर्स मात्र 1370 रुपये का भेजा, मुझे तब आश्चर्य हुआ, जबकि 7वें दिन ही मेरी गुदा का बाहर निकलना बन्द हो गया। मगर डॉ. साहब ने कहा कि जब तक मैं बन्द नहीं करूं तब तक दवाई चलने देना है। मात्र तीन महिने की दवाई के बाद मैं गुदाभ्रंश अर्थात गुदा बाहर निकलने की नारकीय पीड़ा से पूरी तरह से मुक्त हो चुका हूं। डॉ. साहब को मेरी दिली दुआएं हैं।-रामशरण शुक्ला, बरेली, उत्तर प्रदेश।
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यह भी पढें: प्रसव सुरक्षा चक्र (Pregnancy Safeguard) प्राप्त करें और बिना सिजेरियन/आॅपरेशन मां बनें-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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डॉक्टर टिप्पणी: गुदाद्वार के बाहर निकलने को आम बोलचाल में कांच निकलना भी कहा जाता है। इस तकलीफ के कारण हजारों-लाखों लोग असहनीय पीड़ा झेलने को विवश हैं। जबकि लाइलाज समझी जाने वाले गुदाभ्रंश (rectum collapse) की पीड़ा से मुक्ति सम्भव है। ग्रदाभ्रंश से पीड़ित अनेकों रोगियों को हमने स्वस्थ किया है और अब वे सामान्य जीवन जी रहे हैं।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन होम्योपैथ डॉक्टर एवं परम्परागत उपचारक। परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 85-619-55-619
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परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच।
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1. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 को अपने मोबाईल में सेव करें।
2. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 पर हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करने हेतु
या स्वास्थ्य परामर्थ हेतु रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
3. आपका परिचय जानने के बाद आपकी स्वास्थ्य रक्षा ​हेतु
हेल्थ बुलेटिन भेजा जाने लगेगा।
लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।
अन्यथा आपके नम्बर को ब्लॉक कर दिया जायेगा।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
My Whatsapp No. : 85-619-55-619
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होम्योपैथी : लाइलाज बीमारियों का भी उपचार सम्भव है। (बशर्ते)
Homeopathy : The treatment of incurable diseases is possible. (Provided)

लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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>>>>>सर्वप्रथम जानने योग्य, सबसे महत्वपूर्ण तथ्य : होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति उपचार का एक अद्भुत विज्ञान है। होम्योपैथिक चिकित्सा का ज्ञान नहीं रखने वाले व्यक्ति के लिये, यह अविश्वसनीय विज्ञान है। होम्योपैथी में प्राकृतिक पदार्थों से बनी औषधियों का इस्तेमाल किया जाता है। होम्योपैथी की औषधियां विषाक्त दुष्प्रभावों से रहित और सुरक्षित (safe and free of toxic side effects) होती हैं। होम्योपैथी में रोग का इलाज नहीं किया जाता, बल्कि सम्पूर्ण रोगी का उपचार किया जाता है। बीमारी के मूल कारणों को ठीक करके, रोगी को सम्पूर्णता से स्वस्थ किया हैं। होम्योपैथी के प्रति रुचि रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिये यह जानना उपयोगी होगा कि—

  • 1. होम्योपैथी की औषधियों का परीक्षण चूहे, खरगोश, मेंढक आदि जानवरों पर नहीं किया जाता है।
  • 2 .होम्योपैथी की औषधियों का परीक्षण इंसानों पर किया जाता। इंसानी परीक्षणों के दौरान, प्रत्येक औषधि के भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक प्रभावों को नोट किया जाता है।
  • 3. होम्योपैथी की औषधियां किसी रोग विशेष के लिये नहीं खोजी गयी हैं।
  • 4. होम्योपैथी की औषधियों का चयन प्रत्येक रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को जानकर, उनके अनुसार ही उपचार किया जाता है।
  • 5. किसी भी होम्योपैथ के लिये दवाई का चयन करने से पूर्व, रोगी का सम्पूर्णता से परीक्षण करना अनिवार्य होता है।
  • 6. बीमार व्यक्ति के, भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक (Emotional, mental and physical) लक्षणों को जानना बहुत जरूरी ही नहीं, बल्कि अपरिहार्य होता है।
  • 7. आम बोलचाल मे ऐसा कहा जाता है, कि होम्योपैथी रोगी के लिये आसान है, लेकिन होम्योपैथ के लिये कठिन चुनौती है।
  • 8. होम्योपैथी की निरापद औषधियों के आरोग्यकारी परिणाओं को देखते हुए, हम होम्योपैथ लोग, होम्योपैथी के प्रति गहरा अनुराग और असीम श्रद्धा रखते हैं।
  • 9. वर्तमान में, इस बात की जरूरत है कि आम लोग और
  • विशेषकर बीमार व्यक्ति, बीमार व्यक्ति की देखभाल करने वाले लोग और रोगी के परिजन भी होम्योपैथी के प्राथमिक सिद्धान्तों को जानें और समझें।
  • 10. क्योंकि होम्योपैथी से अनेक लाइलाज बीमारियों का भी उपचार सम्भव है।

->>>>>>>>सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
मो. एवं वाट्स एप नम्बर : 9875066111/21.12.2016
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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Immunity Impotence IMPOTENCY Incurable indigestion Jaundice Juice Juice of Berries LAND CALTROPS Lemon Leucas Aspera Leucas Cephalotes Leucorrhea Lever Liver Liver Cirrhosis Liver fibrosis Low Blood Pressure Marital Dispute Consultant Masturbation Mental Mexican Daisy Mexican Poppy Migraine Migraines Myopia Neurons Night Jasmine Nutgrass Nutmeg Nutsedge Obesity Omega 3 Oroxylum indicum Painkillers Periquito Sessil Phyllanthus Niruri Piles Portulaca Oleracea Post Effect Pregnancy Safe-Guard Pregnancy Safeguard Pregnancy-Safe-Guard Premature Ejaculation Prostate Gland Protein Purple Nutsedge Raan Tulas Radish Rectal Collapse Rectal Prolapse rectum collapse Saffron Senna occidentalis Separation Sex Sexual Power Sickness Side Effects side effects less Side-Effects Spermatorrhoea Sperms Spiny Amaranth Stone Stone Breaker Sword fruit tree TECOMA STANS Thermometer Tickweed Tips Treatment of Incurable Tribulus Terrestris Tridax Procumbens Umbrella Sedge Unquenchable Conjugal Uterine Prolapse vaginal Creaks Vaginal Prolapse Viral Vitamins Vitex Negundo Wart Wheatgrass White Discharge Yellow Spider Flower अंकुरित अनाज अंकुरित गेहूं-Wheat germ अंकुरित भोजन-Sprouts अखरोट अंगूर-Grapes अचूक चमत्कारिक चूर्ण अजवाइन अजवायन अजीर्ण-Indigestion अंडकोष अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut अण्डी अतिबला अतिसार अतिसार-Diarrhea अतृप्त अतृप्त दाम्पत्य अत्यंत असहिष्णुता अदरक अदरख अंधश्रृद्धा अध्ययन अनिद्रा अपच अपराजिता अपराधबोध अफरा अफीम अमरूद अमृता अम्लपित्त-Pyrosis अरंडी अरणी अरण्ड अरण्डी अरलू अरुचि अरुचि-Anorexia-Distaste अर्जुन अर्थराइटिस अर्द्धसिरशूल अर्श अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles अलसी अल्टरनेथेरा सेसिलिस अल्सर अल्सर-Ulcers अवसाद अवसाद-Depression अश्मःभेदः अश्वगंधा अश्वगंधा-Winter Cherry असंतुष्ट असफल असर नहीं असली अस्थमा अस्थमा-दमा-Asthma आइरन आक आकड़ा आघात आत्महत्या आंत्र कृमि आंत्रकृमि-Helminth आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever आदिवासी आधाशीशी आधासीसी आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower आमला आमवात आमाशय आयुर्वेद आयुर्वेदिक आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक औषधियां आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup आयुर्वेदिक-Ayurvedic आरोग्य आँव आंव आंवला आंवला जूस आंवला रस आशावादी-Optimistic आसन आसान प्रसव-Easy Delivery आहार चार्ट आहार-Food आॅपरेशन आॅर्गेनिक आॅर्गेनिक कौंच इच्छा-शक्ति इन्द्रायण इन्फ्लुएंजा इमर्जेंसी में होम्योपैथी इमली-Tamarind Tree इम्युनिटी इलाज इलाज का कुल कितना खर्चा इलायची उच्च रक्तचाप उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension उत्तेजक उत्तेजना उदर शूल-Abdominal Haul उदासी उन्माद-Mania उपवास उम्र उल्टी ऊर्जा एक्जिमा एक्यूप्रेशर एग्जिमा एजिंग-Aging एंटी ऑक्सीडेंट्स एंटी-ओक्सिडेंट एंटीऑक्सीडेंट एण्टी-आॅक्सीडेंट एनजाइना एनीमिया एमिनो एसिड एरंड एलर्जी एलर्जी-Allergy एलोवेरा एलोवेरा जूस एल्यूमीनियम ऐंठन ऐलोपैथ ऐसीडिटी ऑर्गेनिक ओमेगा 3 के स्रोत ओमेगा-3 ओर्गेनिक औषध-Drug औषधि सूची-Drug List औषधियों के नुकसान-Loss of drugs कचनार कचनार-Bauhinia Purpurea कटुपर्णी कड़वाहट कंडोम कद्दू कनेर कपास-COTTON कपिकच्छू कपूरीजड़ी कफ कब्ज कब्ज़ कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation कब्ज. Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गलगण्ड गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गारण्टेड इलाज गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाद्वार गुदाभ्रंश गुम्मा गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गेदुआ की छाछ गैस गैस्ट्रिक गैहूं का जवारा गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखगांजा गोरखबूटी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिटकन चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाजन बूटी छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जख्म जंगली तिल्ली जंगली तुलसी जंगली पेड़ जंगली मिर्ची जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बंध्यापन बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूत-प्रेत भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्ररोग मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनिद्वारा योनिभ्रंश योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills) यौन क्षमता यौन दौर्बल्य यौन शक्तिवर्धक यौन शिक्षा यौन समस्याएं यौनतृप्ति यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea 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स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्पर्श स्मृति-लोप स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य परामर्श स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डी संक्रमण हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हाई बीपी हाथ-पैर नहीं कटवायें हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हुरहुर हुलहुल हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हेल्थ बुलेटिन हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्यापैथ होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक इलाज होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy