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Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Health Care Friend and Marital Dispute Consultant
(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)
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85619-55619 (10 AM to 10 PM)
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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।
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लाइलाज एलर्जी (Incurable Allergy) का इलाज
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
राजस्थान के जिला भरतपुर की बयाना तहसील के पास गाँव के एलर्जी से 8-9 वर्षों से पीड़ित 1 व्यक्ति के चार चित्र यहां प्रस्तुत हैं। जो उपचार हेतु मेरे पास आने से पहले एक दिन छोड़कर इंजेक्शन लगवाता था। इसके बाद भी उसकी दशा अत्यधिक खराब थी। जिसे 23.10.2017 के चित्र को जूम करके देखकर समझा जा सकता है। वह दिनभर खुजाता रहता था। उसके जख्मों पर मक्खियां भिनभिनाती रहती थी। अत: हमेशा मक्खियों को उड़ाता रहता था। रोगी ने बताया कि कभी-कभी उसके सारे शरीर में भयंकर सोजन आ जाती थी। जख्मों से रक्त निकलता रहता था। अनेक बार उसके लिये चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता था। इस कारण उसका जीवन अत्यधिक कष्टमय था। लोग उसे देखकर नफरत करते थे। उसके पास बैठना पसंद नहीं करते थे। इस कारण वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाता था। इस दौरान उसने बयाना, भरतपुर एवं मथुरा में अनेकों डॉक्टरों से इलाज करवाने में अपनी कड़ी मेहनत का बहुत सा रुपया खर्च किया। लेकिन सभी डॉक्टर्स ने अंत में यही कहा कि एलर्जी का कोई स्थायी इलाज सम्भव नहीं। उपरोक्त हालातों में पीड़ित व्यक्ति ने दिनांक: 23.10.17 को निदान हेतु मुझ से संपर्क किया। उसने बताया कि वह करीब 45-50 साल से बीड़ी पीने का आदी है। चूंकि धूम्रपान करने वालों को होम्योपैथिक दवाई असर नहीं करती हैं।
अत: सबसे पहले बीड़ी छोड़ने हेतु उसका होम्योपैथिक उपचार किया गया। पीड़ित व्यक्ति के सहयोग से मात्र 5 दिन में उनकी बीड़ी पीने की आदत छुड़वा दी गयी। दिनांक: 28.10.17 से पीड़ित व्यक्ति की एलर्जी का निदान शुरु किया गया। आॅर्गेनिक देशी-जड़ी बूटियों एवं दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक दवाइयों के उपचार से 15.11.17 तक अनुमान से बहुत पहले एलर्जी नियंत्रित हो गयी। दिनांक: 24.12.17 तक अर्थात 2 माह में शरीर और चेहरे के सभी जख्म मिट गये। दिनांक: 30.01.18 तक, अर्थात 3 महिने में रोगी ऊपरी तौर पर एलर्जी से पूर्णत: स्वस्थ हो गया एवं खुजली बंद हो गयी। लेकिन फिर से तकलीफ न हो इसलिये कम से कम अगले 3 महिने तक रोगी का आंतरिक उपचार किया जायेगा। जिसमें उनकी रक्तशुद्धि भी की जायेगी। यह सब हमारे निरोगधाम पर पैदा की जा रही शुद्ध-ताजा आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों तथा अमृततुल्य एवं दुष्प्रभाव रहित जर्मन होम्योपैथिक-बॉयोकैमिक तत्वों-दवाईयों का सुखद परिणाम है। उक्त रोगी का विवरण जैसे ही मैंने अपनी वेब साईट website www.healthcarefriend.in पर प्रकाशित किया तो एलर्जी, दाद, खाज, खुजली आदि त्वचा/चर्म रोगों से पीड़ित लोगों के फोन आने का सिलसिला शुरू हो गया। हजारों काल आ चुके हैं। जो यह संशोधित नोट डाले जाने तक जारी है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि समयाभाव के चलते तथा हमारे निरोगधाम पर पैदा की जा रही शुद्ध-ताजा आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों की उपलब्धता सीमित होने के कारण मैं सीमित संख्या में ही कुछेक रोगियों का ही उपचार कर पाता हूं।
नोट: देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ महंगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारंटेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।
Online Dr. PL Meena (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 09.04.2018
हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-2 (Health Bulletin-2)
नोट: सुझाई गयी सभी होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयां केवल जर्मनी निर्मित सील पैक और देशी जड़ी-बूटियां शुद्ध, ताजा तथा आॅर्गेनिक उपयोग करने पर ही परिणाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
1. मैं जब भी किसी बड़े अफसर से मिलता हूँ या परीक्षा या इंटरव्यू देने जाता हूँ तो मेरा कॉन्फिडेंस जवाब दे जाता है। क्या इसका कोई इलाज हो सकता है?-भरत कुलश्रेष्ठ, उज्जैन, मप्र।
परामर्श: जब भी ऐसा मौका आये आप होम्योपैथी की दवाई अर्जेण्टम नाईट्रिकम-30 की 1-1 घण्टे में 4-5 खुराक सेवन करें। सम्पूर्ण उपचार के लिये किसी योग्य हिम्योपैथ से सम्पर्क करें।
2. मेरी एज 37 वर्ष है। मैरिज को 15 साल हो गये। 2 बच्चे हैं। लेकिन मुझे अभी भी शीघ्रपतन की समस्या है। अनेक डॉक्टर्स का कहना है कि मैरिज के बाद सब ठीक हो जाता है, लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं हुआ। इस कारण हमारी मैरिज लाइफ डिस्टर्ब है। कोई पक्का इलाज बतायें।-के के सिंह, कानपुर, उप्र।
परामर्श: आपके प्रोपर/सही उपचार के लिये आपका सम्पूर्ण लक्षणात्मक विवरण जानना बहुत जरूरी है। फिर भी फौरी उपचार के लिये आप होम्योपैथी की दवाई स्टेफिसेग्रिया-200 और शुद्ध ऑर्गेनिक काले कौंच, सफेद मूसली, शतावरी, भूई आमला, शरफुंका और मिश्री का सम्भाग मिश्रण बनाकर, प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम तक शाम को दूध के साथ 2-3 महीने तक सेवन करें। आप मेरी वेब साइट पर 'शीघ्रपतन' शीर्षक से 30.11.2017 को प्रकाशित लेख अवश्य पढें। इसे पढने के बाद आपकी अनेक भ्रांतियां और उलझनें दूर हो सकेंगी।
3. मेरी पत्नी की उम्र 40 साल है। उसको 20 साल की उम्र से सफेद पानी की बीमारी है। बहुत इलाज करवाया, लेकिन कोई लाभ नहीं। बिल्कुल सूख गई है। 35 किलो भजन रह गया है। कोई काम नहीं कर पाती। चक्कर आते हैं और आधे सिर में दर्द रहता है। भूख नहीं लगती। कब्जी रहती है। क्या करें?-रमेश शर्मा, मुरेना, मध्य प्रदेश।
परामर्श: जितना आपने बताया है, उतनी सी जानकारी से उपचार बताना सम्भव नहीं है। लगता है आपकी पत्नी को लीवर में सूजन या इंफेक्शन के साथ ल्यूकोरिया/श्वेत प्रदर और माइग्रेन की पीड़ा है। इन सभी तकलीफों का प्रोपर उपचार जरूरी है। किसी योग्य होम्योपैथ और, या आयुर्वेद के डॉक्टर से सम्पर्क करें। तब तक आप उन्हें नियमित रूप से शुद्ध ऑर्गेनिक और ताजा भूई आमला, मकोय, पुनर्नवा और आंवले का काढ़ा सुबह शाम पिला सकते हैं। आपकी पत्नी की पूर्ण जानकारी हेतु मेरे हेल्थ वाट्सएप नम्बर 8561955619 पर भी सम्पर्क कर सकते हैं।
4. मेरे अंडकोषों में 8-9 महिने से दाद और खुजली की समस्या है। जब तक गोली, कैप्सूल और इंजेक्शन लेता हूँ, सब ठीकठाक रहता है। कुछ दिन बाद फिर से तकलीफ शुरू हो जाती है। जिसमें जलन होती है और खुजाने पर रक्त निकलने लगता है। प्लीज मुझे इससे मुक्ति दिलाएं।-पीएस गंगवाल, भोपाल, मप्र।
परामर्श: सबसे जरूरी सावधानी-अपने सभी आंतरिक कपड़े सूती पहनें और उन्हें साफ रखें। जिसके लिये स्वस्थ होने तक रोजाना उबलते पानी में कपड़ों की धुलाई जरूरी है। नहाते समय नीम के पत्ते पानी में उबालें या गुनगुने पानी में एंटी इंफेक्शन पाऊडर पानी में डालकर नहाएं। प्रतिदिन होम्योपैथी की दवाई सल्फर-200+कैंथरिस-200 की एक-एक खुराक और शुद्ध ऑर्गेनिक शरफुंका+श्योनाक पाउडर, प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम तक सुबह-शाम पानी के साथ ठीक होने तक सेवन करें।
5. मेरी पत्नी की उम्र 32 साल है। विवाह को 6 महिने हुए हैं। उसकी योनि का करीब 2 इंच हिस्सा बाहर निकलता है। डॉक्टर का कहना है कि वैजाइना कोलैप्स की तकलीफ है, ऑपरेशन करना पड़ेगा। हमें बहुत घबराहट और डर है। क्या मेरी पत्नी बिना ऑपरेशन ठीक हो सकती है और क्या वह माँ बन पाएगी? खर्चे की कोई दिक्कत नहीं हम दोनों जॉब करते हैं।-मनीष पांचाल, रेवाड़ी, हरियाणा।
परामर्श: बिना बच्चों को जन्म दिये योनिभ्रंश अर्थात वैजाइना कोलैप्स, लगभग असम्भव। मामला उतना सरल नहीं जितना आप को लग रहा है। आपकी पत्नी के सहयोग के बिना उपचार सम्भव नहीं। उन्हें सम्पूर्ण केस हिस्ट्री ईमानदारी से बतानी होगी। आप तुरन्त किसी होम्योपैथ से सम्पर्क करें या मेरे हेल्थ वाट्सएप 85619 55619 पर सम्पर्क करें। तब तक होम्योपैथी की दवाई कोलोफाईलम-200 + कॉस्टीकम-200 सुबह शाम सेवन करवा सकते हैं।
चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]
Note: अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे उचित समाधान प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619
----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।
उपशीर्षक:
आॅर्गेनिक,
खुजली,
दाद,
माइग्रेन,
योनिभ्रंश,
ल्यूकोरिया,
शीघ्रपतन,
श्वेत प्रदर
Saturday, March 10, 2018
कनेर के पौधे के उपयोग ,उपचार
ध्यान देने योग्य बात:- कनेर का पूरा पौधा जहरीला होता है | इसलिए इसका प्रयोग कभी भी खाली पेट नही करना चाहिए | कनेर का उपयोग करने से पहले किसी और्वेदिक आचार्य से या किसी अच्छे वैद्य से परामर्श करना चाहिए | अन्यथा यह शरीर को नुकसान पंहुचा सकता है|
कनेर का पौधा भारत में हर स्थान पर पाया जाता है | इसका पौधा भारत के मंदिरों में , उद्यान में और घर में उपस्थित वाटिकाओं में लगायें जाते है | कनेर के पौधे की मुख्य रूप से तीन प्रजाति पाई जाती है | जैसे :- लाल कनेर, सफेद कनेर और पीले कनेर | इन प्रजाति पर सारा साल फूल आते रहते है | जंहा पर सफेद और पीली कनेर के पौधे होते है वह स्थान हरा – भरा बसंत के मौसम की तरह लगता है |
कनेर का पौधा एक झाड़ीनुमा होता है | इसकी ऊंचाई 10 से 12 फुट की होती है | कनेर के पौधे की शाखाओं पर तीन – तीन के जोड़ें में पत्ते लगे हुए होते है | ये पत्ते 6 से 9 इंच लम्बे एक इंच चौड़े और नोकदार होते है | पीले कनेर के पौधे के पत्ते हरे चिकने चमकीले और छोटे होते है | लेकिन लाल कनेर और सफेद कनेर के पौधे के पत्ते रूखे होते है।
कनेर के पौधे को अलग – अलग स्थान पर अलग अलग नाम से जाना जाता है | जैसे :-
१. संस्कृत में :- अश्वमारक, शतकुम्भ, हयमार, करवीर
३. मराठी में :- कणहेर
४. बंगाली में :- करवी
५. अरबी में :- दिफ्ली
६. पंजाबी में :- कनिर
७. तेलगु में :- कस्तूरीपिटे
आदि नमो से जाना जाता है |
कनेर के पौधे में पाए जाने वाले रासायनिक घटक :- कनेर का पौधा पूरा विषेला होता है| इस पौधे में नेरीओडोरिन और कैरोबिन स्कोपोलिन पाया जाता है | इसकी पत्तियों में हृदय पदार्थ ओलिएन्डरन पाया जाता है | पीले कनेर में पेरुबोसाइड नामक तत्व पाया जाता है | इसकी भस्म में पोटाशियम लवण की मात्रा पाई जाती है |
कनेर के पौधे के गुण : इसके उपयोग से कुष्टघन, व्रण, व्रण रोपण आदि बीमारियाँ ठीक की जाती है | इसके आलावा यह कफवात का शामक होता है | इसके उपयोग से विदाही, दीपन और पेट की जुडी हुई समस्या ठीक हो जाती है | यदि कनेर को उचित मात्रा मे प्रयोग किया जाता है तो यह अमृत के समान होती है, लेकिन यदि इसका प्रयोग अधिक मात्रा में किया जाता है तो यह जहर बन जाता है | कनेर का उपयोग रक्त की शुद्धी के लिए भी किया जाता है | यह एक तीव्र विष है जिसका उपयोग मुत्रक्रिछ और अश्मरी आदि रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है |
कनेर का औषधि के रूप में प्रयोग:-
1. बाल : दूब घास(Cynodon dactylon) के पंचाग (फल, फूल, जड़, तना, पत्ती) तथा कनेर के पत्तोँ को पीस कर कपड़े मेँ रखकर रस निकालेँ और सिर के गंजे स्थान पर लगायेँ तो सिर्फ 15 दिनोँ मेँ ही उस स्थान पर नये बाल दिखाई देने शुरू हो जाते हैँ। तथा पूरे सिर मेँ तेल की तरह इस रस का प्रयोग करेँ तब सफेद बाल काले होने लगते हैँ ।
2. नेत्र रोग : आँखों के रोग को दूर करने के लिए पीले कनेर के पौधे की जड़ को सौंफ और करंज के साथ मिलाकर बारीक़ पीसकर एक लेप बनाएं। इस लेप को आँखों पर लगाने से पलकों की मुटाई जाला फूली और नजला आदि बीमारी ठीक हो जाती है।
3. हृदय शूल : कनेर के पौधे की जड़ की छाल की 100 से 200 मिलीग्राम की मात्रा को भोजन के बाद खाने से हृदय की वेदना कम हो जाती है।
4. दातुन : सफेद कनेर की पौधे की डाली से दातुन करने से हिलते हुए दांत मजबूत हो जाते है। इस पौधे का दातुन करने से अधिक लाभ मिलता है।
5. सिर दर्द : कनेर के फूल और आंवले को कांजी में पीसकर लेप बनाएं। इस लेप को अपने सिर पर लगायें। इस प्रयोग से सिर का दर्द ठीक हो जाता है |
7. सिर्फ 10 दिन के अन्दर अन्दर बाल झड़ने बंद : *कनेर के 60-70 ग्राम पत्ते (लाल या पीली दोनों में से कोई भी या दोनों ही एक साथ ) ले के उन्हें पहले अच्छे से सूखे कपडे से साफ़ कर लें ताकि उनपे जो मिटटी है वो निकल जाये। अब एक लीटर सरसों का तेल या नारियल का तेल या जेतून का तेल ले के उसमे पत्ते काट-काट के डाल दें। अब तेल को गरम करने के लिए रख दें। जब सारे पत्ते जल कर काले पड़ जाएँ तो उन्हें निकाल कर फेंक दें और तेल को ठण्डा कर के छान लें और किसी बोटल में भर के रख लें।
प्रयोग विधि : रोज़ जहाँ-जहाँ पर भी बाल नहीं हैं, वहां-वहां थोडा सा तेल ले के बस 2 मिनट मालिश करनी है और बस फिर भूल जाएँ, अगले दिन तक। ये आप रात को सोते हुए भी लगा सकते हैं और दिन में काम पे जाने से पहले भी। बस एक महीने में आपको असर दिखना शुरू हो जायेगा। सिर्फ 10 दिन के अन्दर अन्दर बाल झड़ने बंद हो जायेंगे या बहुत ही कम... और नए बाल भी एक महीने तक आने शुरू हो जायेंगे।
नोट : ये उपाय पूरी तरह से tested है। हमने कम से कम भी 10 लोगो पे इसका सफल परीक्षण किया है।एक औरत के 14 साल से बाल झड़ने बंद नहीं हो रहे थे। इस तेल से मात्र 6 दिन में बाल झड़ने बंद हो गये।65 साल तक के आदमियों के बाल आते देखे हैं। इस प्रयोग से जिनका के हमारे पास data भी पड़ा है। आप भी लाभ उठायें और अगर किसी को फरक पड़े तो कृपया हमे जरुर बताये।
चेतावनी: कनेर के पौधे में जो रस होता है वो बहुत ज़हरीला होता है। तो ये सिर्फ बाहरी प्रयोग के लिए है। सफेद कनेर के पौधे के पीले पत्तों को अच्छी तरह सुखाकर बारीक़ पीस लें। इस पिसे हुए पत्ते को नाक से सूंघे। इससे आपको छीक आने लगेगी जिससे आपका सिर का दर्द ठीक हो जायेगा।
9. सफेद कनेर : सफेद कनेर की जड़ की छाल बारीक पीसकर भटकटैया के रस में खरल करके 21 दिन इन्द्री की सुपारी छोड़कर लेप करने से तेजी आ जाती है।
10. पक्षघात के रोग में : सफेद कनेर के पौधे की जड़ की छाल, सफेद गूंजा की दाल तथा काले धतूरे के पौधे के पत्ते आदि को एक समान मात्रा में लेकर इनका कल्क तैयार कर लें। इसके बाद चार गुना पानी में कल्क के बराबर तेल मिलाकर किसी बर्तन में धीमी आंच पर पकाएं। जब केवल तेल रह जाये तो किसी सूती कपड़े से छानकर मालिश करें। इससे पक्षाघात का रोग ठीक हो जाता है।
11. चर्म रोग : सफेद कनेर के पौधे की जड़ का क्वाथ बनाकर राई के तेल में उबालकर त्वचा पर लगाने से त्वचा सम्बन्धी रोग दूर हो जाते है।
12. कुष्ठ रोग : कनेर के पौधे की छाल का लेप बनाकर लगाने से चर्म कुष्ठ रोग दूर होता है।
13. अफीम की आदत से छुटकारे के लिए : कनेर के पौधे की जड़ का बारीक़ चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण को 100 मिलीग्राम की मात्रा में दूध के साथ दें। इससे कुछ हफ्तों में ही अफीम की आदत छुट जाएगी।
14. घाव कृमि की बीमारी : कनेर के पत्तों को तेल में पकाकर घाव पर बांधने से घाव के कीड़े मर जाते है।
कनेर के पौधे के पत्तों का क्वाथ से नियमित रूप से नहाने से कुष्ठ रोग काफी कम हो जाता है। कनेर के पौधे के पत्तों को बारीक़ पीस लें। अब इसमें तेल मिलाकर लेप तैयार कर लें। शरीर में जंहा पर भी जोड़ों का दर्द है, उस स्थान पर लेप लगा लें। इससे दर्द कम हो जाता है।
15. खुजली के लिए : कनेर के पौधे के पत्तों को तेल में पका लें। इस तेल को खुजली वाले स्थान पर लगाने से एक घंटे के अंदर खुजली का प्रभाव कम हो जाता है। पीले कनेर के पौधे की पत्तियां या जैतून का तेल में बनाया हुआ महलम को खुजली वाले स्थान पर लगायें। इससे हर तरह की खुजली ठीक हो जाती है।
16. सर्पदंश के लिए : कनेर की जड़ की छाल को 125 से 250 मिलीग्राम की मात्रा में रोगी को देते रहे इसके आलावा आप कनेर के पौधे की पत्ती को थोड़ी –थोड़ी देर के अंतर पे दे सकते है। इस उपयोग से उल्टी के सहारे विष उतर जाता है।
17. दाद के रोग के लिए : सफेद कनेर के पौधे की जड़ की छाल का तेल बनाकर लगाने से कुष्ट रोग और दाद का रोग ठीक होता है |
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कनेर एक लाभदायक पौधा |कनेर के बारे में कुछ विशेष जानकारी :-
भूमिका :- कनेर का पौधा भारत में हर स्थान पर पाया जाता है| इसका पौधा भारत के मंदिरों में, उद्यान में और घर में उपस्थित वाटिकाओं में लगायें जाते है| कनेर के पौधे की मुख्य रूप से तीन प्रजाति पाई जाती है| जैसे :- लाल कनेर, सफेद कनेर और पीले कनेर| इन प्रजाति पर सारा साल फूल आते रहते है| जंहा पर सफेद और पीली कनेर के पौधे होते है, वह स्थान हरा – भरा बसंत के मौसम की तरह लगता है |
कनेर का पौधा
कनेर के पौधे की संरचना :- कनेर का पौधा एक झाड़ीनुमा होता है | इसकी ऊंचाई 10 से 12 फुट की होती है | कनेर के पौधे की शखाओं पर तीन – तीन के जोड़ें में पत्ते लगे हुए होते है | ये पत्ते 6 से ९ इंच लम्बे एक इंच चौड़े और नोकदार होते है | पीले कनेर के पौधे के पत्ते हरे चिकने चमकीले और छोटे होते है | लेकिन लाल कनेर और सफेद कनेर के पौधे के पत्ते रूखे होते है |
कनेर के पौधे को अलग – अलग स्थान पर अलग अलग नाम से जाना जाता है | जैसे :-
१. संस्कृत में :- अश्वमारक , शतकुम्भ , हयमार ,करवीर
२. हिंदी में :- कनेर , कनैल३. मराठी में :- कणहेर
४. बंगाली में :- करवी
५. अरबी में :- दिफ्ली
६. पंजाबी में :- कनिर
७. तेलगु में :- कस्तूरीपिटे
आदि नमो से जाना जाता है |
कनेर के पौधे में पाए जाने वाले रासायनिक घटक :- कनेर का पौधा पूरा विषेला होता है | इस पौधे में नेरीओडोरिन और कैरोबिन स्कोपोलिन पाया जाता है | इसकी पत्तियों में हृदय पदार्थ ओलिएन्डरन पाया जाता है | पीले कनेर में पेरुबोसाइड नामक तत्व पाया जाता है | इसकी भस्म में पोटाशियम लवण की मात्रा पाई जाती है |

कनेर का फूल
कनेर के पौधे के गुण : इसके उपयोग से कुष्टघन, व्रण, व्रण रोपण आदि बीमारियाँ ठीक की जाती है। इसके आलावा यह कफवात का शामक होता है। इसके उपयोग से विदाही, दीपन और पेट की जुडी हुई समस्या ठीक हो जाती है। यदि कनेर को उचित मात्रा मे प्रयोग किया जाता है तो यह अमृत के समान होती है, लेकिन यदि इसका प्रयोग अधिक मात्रा में किया जाता है तो यह जहर बन जाता है। कनेर का उपयोग रक्त की शुद्धी के लिए भी किया जाता है। यह एक तीव्र विष है, जिसका उपयोग मुत्रक्रिछ और अश्मरी आदि रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है।

कनेर का औषधि के रूप में प्रयोग :
नेत्र रोग : आँखों के रोग को दूर करने के लिए पीले कनेर के पौधे की जड़ को सौंफ और करंज के साथ मिलाकर बारीक़ पीसकर एक लेप बनाएं| इस लेप को आँखों पर लगाने से पलकों की मुटाई जाला फूली और नजला आदि बीमारी ठीक हो जाती है|
सिर दर्द :
1. कनेर के फूल और आंवले को कांजी में पीसकर लेप बनाएं| इस लेप को अपने सिर पर लगायें| इस प्रयोग से सिर का दर्द ठीक हो जाता है|
2. सफेद कनेर के पौधे के पीले पत्तों को अच्छी तरह सुखाकर बारीक़ पीस लें| इस पिसे हुए पत्ते को नाक से सूंघे| इससे आपको छीक आने लगेगी जिससे आपका सिर का दर्द ठीक हो जायेगा|
कनेर के बीज:
अर्श: कनेर की जड़ को ठन्डे पानी में पीसकर लेप बनाएं | दस्त होने के बाद जो अर्श बाहर निकलता है उस पर यह लेप लगा लें | अर्श रोग का प्रभाव समाप्त हो जाता है |
हृदय शूल: कनेर के पौधे की जड़ की छाल की 100 से 200 मिलीग्राम की मात्रा को भोजन के बाद खाने से हृदय की वेदना कम हो जाती है |
दातुन: सफेद कनेर की पौधे की डाली से दातुन करने से हिलते हुए दांत मजबूत हो जाते है | इस पौधे का दातुन करने से अधिक लाभ मिलता है |
उबटन: सफेद कनेर के फूलों को पीसकर चहरे पे मलने से चहरे की सुन्दरता बढती है |
इन सभी लाभ के आलावा और भी कई फायदे होते है | जैसे :-
1. कनेर के ताज़े–ताज़े फूल की 50 ग्राम की मात्रा को 100 ग्राम मीठे तेल में पीसकर कम से कम एक सप्ताह तक रख दें| एक सप्ताह के बाद इसमें 200 ग्राम जैतून का तेल मिलाकर एक अच्छा सा मिश्रण तैयार करें| इस तेल की नियमित रूप से तीन बार मालिश करने से कामेन्द्रिय पर उभरी हुई नस की कमजोरी दूर हो जाती है इसके साथ पीठ दर्द और बदन दर्द को भी राहत मिलती है|
सफेद कनेर का पौधा :
2. सफेद कनेर के पौधे की 10 ग्राम जड़ की मात्रा में 20 ग्राम वनस्पति घी पकाएं| जब यह पक जाये तो इसे ठंडा होने के लिए रख दें| इससे मालिश करने से कामेन्द्रिय की बीमारी ठीक हो जाती है|
उपदंश: यदि किसी व्यक्ति को घाव हो जाते है तो सफेद कनेर के पौधे की जड़ को पानी में पीसकर लगाने से उपदंश के घाव ठीक हो जाते है |
पक्षघात के रोग में: सफेद कनेर के पौधे की जड़ की छाल , सफेद गूंजा की दाल तथा काले धतूरे के पौधे के पत्ते आदि को एक समान मात्रा में लेकर इनका कल्क तैयार कर लें | इसके बाद चार गुना पानी में कल्क के बराबर तेल मिलाकर किसी बर्तन में धीमी आंच पर पकाएं | जब केवल तेल रह जाये तो किसी सूती कपड़े से छानकर मालिश करें | इससे पक्षाघात का रोग ठीक हो जाता है |
जोड़ो का दर्द: जो व्यक्ति जोड़ों के दर्दे परेशान है, उनके लिए कनेर के पौधे के निम्नलिखित उपचार है:-
1. जोड़ों का दर्द: कनेर के पौधे के पत्तों को बारीक़ पीस लें| अब इसमें तेल मिलाकर लेप तैयार कर लें| शरीर में जंहा पर भी जोड़ों का दर्द है, उस स्थान पर लेप लगा लें| इससे दर्द कम हो जाता है|
2. दाद के रोग के लिए: सफेद कनेर के पौधे की जड़ की छाल का तेल बनाकर लगाने से कुष्ट रोग और दाद का रोग ठीक होता है |

लाल कनेर का पौधा
चर्म रोग :- सफेद कनेर के पौधे की जड़ का क्वाथ बनाकर राई के तेल में उबालकर त्वचा पर लगाने से त्वचा सम्बन्धी रोग दूर हो जाते है |
कुष्ठ रोग:
1. कनेर के पौधे की छाल का लेप बनाकर लगाने से चर्म कुष्ठ रोग दूर होता है|
2. कनेर के पौधे के पत्तों का क्वाथ से नियमित रूप से नहाने से कुष्ठ रोग काफी कम हो जाता है |
खुजली के लिए:
1. कनेर के पौधे के पत्तों को तेल में पका लें| इस तेल को खुजली वाले स्थान पर लगाने से एक घंटे के अंदर खुजली का प्रभाव कम हो जाता है|
2. पीले कनेर के पौधे की पत्तियां या जैतून का तेल में बनाया हुआ महलम को खुजली वाले स्थान पर लगायें| इससे हर तरह की खुजली ठीक हो जाती है|
सर्पदंश के लिए: कनेर की जड़ की छाल को 125 से 250 मिलीग्राम की मात्रा में रोगी को देते रहे इसके आलावा आप कनेर के पौधे की पत्ती को थोड़ी–थोड़ी देर के अंतर पे दे सकते है| इस उपयोग से उल्टी के सहारे विष उतर जाता है|
अफीम की आदत से छुटकारे के लिए: कनेर के पौधे की जड़ का बारीक़ चूर्ण तैयार कर लें| इस चूर्ण को 100 मिलीग्राम की मात्रा में दूध के साथ दें| इससे कुछ हफ्तों में ही अफीम की आदत छुट जाएगी|कृमि की बीमारी: कनेर के पत्तों को तेल में पकाकर घाव पर बांधने से घाव के कीड़े मर जाते है|
कनेर के पत्ते: जिस अंग पर कीड़े का प्रभाव अधिक है, वंहा कनेर की जड़ को गौमूत्र में पीसकर लेप लगा लें| इससे कीड़े का प्रभाव दूर हो जायेगा|
स्रोत : http://ayurvedhome.blogspot.in/2016/06/blog-post_60.html
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सावधानी : जिन लोगों को दमा, खांसी, जुकाम की शिकायत हो, उन्हें नींबू नहीं लेना चाहिए।
विभिन्न फलों के बीच नींबू प्रजाति के फलों का विशिष्ट स्थान दर्जा होता है। इसमें विटामिन ए.बी.सी. एवं खनिज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा पध्दति में इसके रस, छिलके और बीज का औषधि के रूप में काफी बखान किया गया है। नींबू एक छोटा फल है। इसकी अनेक प्रजातियां हैं। मगर कागजी नींबू सबसे उत्तम माना जाता है। मौसंबी, बिजौरा, जमीरी, पनपस, मीठा, खट्टा नारंगी भी औषधीय गुण लिये होते हैं। नींबू सदाबहार सर्वोत्तम रोगनाशक व आरोग्य एवं सौंदर्य प्रदाता है। नींबू की कई किस्में हैं। सभी किस्म उपयोगी व फलदायी हैं।
नींबू में जल 90 प्रतिशत, वसा 1 प्रतिशत, रेशे 2 प्रतिशत, प्रोटीन 1.5 प्रतिशत, कैल्शियम 0.08 प्रतिशत, फास्फोरस 0.03 प्रतिशत और विटामिन- सी सबसे अधिक, जो नींबू की प्रकृति पर निर्भर करता है। नींबू में ऊपर बताए तत्वों के अतिरिक्त शर्करा, तांबा, लवण, थॉयमिन, पोटाश, सोडियम, लोह तत्व, विटामिन- बी, क्लोरिन तथा मैग्नीशियम पोटाशियम आदि भी रहते हैं। जो हमारे शरीर के लिये हितकारी होते हैं। कागजी नींबू हल्का तिक्त, रुचिकर, उष्ण, पाचन शक्ति से भरपूर, जीवाणु नाशक, पित्त नाशक, पाचन शक्ति तीव्र करने व भूख लगाने में पूरी तरह सक्षम होता है।
नींबू का सेवन कैसे करें : किसी भी चीज का सेवन करने के लिए जानकारी पहले जरूरी है:-
- नींबू का सेवन का सबसे आसान तरीका है कि एक ग्लास गुनगुने पानी में नींबू निचोड कर पीलें।
- नींबू में अग्नि का बल होता है इसमें दो चुटकी सेंधा नमक या काला नमक अवश्य डालें ।
- नींबू वर्षाकाल में अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि बरसात में हमेशा शरीर के अंदर दूषित तत्व (टाक्सिक) बनते हैं। उन्हें नींबू दूर करता है तथा बरसात में होने वाली तमाम बीमारियों से बचाता है।
- नींबू का रस हमेशा छानकर ही लेना चाहिए नींबू का बीज लेना उचित नहीं है।
- नींबू का रस कांच या मिट्टी के बरतन में ही रखें. काऱण अन्य धातु में यह जहरीला हो जाता है।
- जहां तक संभव हो कागजी नींबू इस्तेमाल करें।
नींबू के औषधीय उपयोग : ताज़ा ताज़ा नींबू केवल रस भरा ही नहीं होता, बल्कि इसमें भरी हैं ढेर सारी विशेषताएं भी, जिसके कारण बीमारियां दूर भागती हैं :
- शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है।
- नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।
- रक्तक्षीणता दूर करता है नींबू के रस में, कच्चा टमाटर का रस मिलाकर पीयें।
- आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोडकर पियें, रक्त की कमी दूर होगी।
- नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है।
- यदि ज्वर हो और खूब प्यास भी लगे। मुंह सूखता रहे। उबला हुआ पानी लें। इसमें नींबू निचोड़कर पिया करें।
- नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।
- नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।
- नींबू के रस में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढ़ता है।
- नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है।
- नींबू के बीज को पीसकर लगाने से गंजापन दूर होता है।
- थकान दूर कर स्फूर्ति का संचार करता है, पेट का दर्द ठीक करता है।
- बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें।
- आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पिएँ, रक्त की कमी दूर होगी।
- पेट के कीटाणुओं को साफ करने में भी प्रबल होता है। ऐसा यह अपने साइट्रिक अम्ल के कारण कर पाता है। नींबू का खटापन ही इसका सबसे बड़ा गुण है।
- बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें।
- कान का दर्द हो तो प्याज के रसमें भी मिलाकर डालें।
- कद्दू की सब्जी में नींबू निचोड कर अवश्य खायें।
- कील-मुंहासों को हटाने के लिये मलाई व नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर लगाएं। चेहरा चमकने लगेगा।
- चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए नींबू की कुछ बूंदें दूध में डालें। रूई भिंगोकर चेहरा चमकाएं।
- नींबू को नमक तथा काली मिर्च के साथ चाटें। यह भोजन से पूर्व चाटना है। तब अधिक भूख लगा करेगी।
- यदि दस्त लगे हों तो दूध में नींबू का रस 8-10 बूंद डालकर मिलाकर रोगी को पिलाएं। यह बहुत लाभकारी रहता है। दिन में चार बार लेवें। अधिक फायदा होगा। एक गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़ें। रोगी इसे पी ले। दिन में चार बार ऐसी खुराक लें। आराम आता जाएगा।
- नींबू गर्म कर, नमक के साथ चूसा करें। यह भी आराम देता है।
- नींबू का रस शरीर के भीतर के टॉक्सिक (गंद) को बाहर निकालता है।
- शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है।
- नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।
- गुनगुना पानी एक गिलास लें। इसमें एक नींबू निचोड़ें। आधा चम्मच अदरक का रस डालें। मिलाकर रोगी को पिलाएं प्रात: खाली पेट। इससे यूरिक एसिड कम होता है तथा वात रोग शांत होता है।
- रोगों से बचने के लिये निरोगता पाने के लिये नींबू का सेवन नियमित किया करें। स्वस्थ रह सकेंगे।
- नींबू खट्टी ढकारों को दूर करता है, वायु विकार मिटाकर भूख बढ़ाता है, नींबू खाने को जल्दी हजम करता है, नीबू पेट के कीटाणुओं व कीड़ों को नष्ट करता है।
- किसी भी रूप में रोजाना नींबू का सेवन करना चाहिये
- भोजन के प्रति अरुचि दूर करने में सबसे ज्यादा लाभ कारी है।नींबू का पुराना अचार लाभकारी है।
- मुंह का स्वाद बढ़ाता है व कब्ज दूर करता है।
- हैजे से बचाव करता है, नींबू के रस में चीनी मिलाकर (शिकंजी) लेने से हैजे में आराम मिलता है।
- यात्रा में वमन रोकने व दूर करने का सरल उपाय नींबू है।
- खट्टे फलों में नींबू लेने से स्वास्थ्य को कोई हानि नहीं होती है। जोड़ों की खुश्की दूर करता है।
- दांतों तथा मुंह की बीमारियों से दूर रखता है, चीनी मिट्टी की कटोरी में नींबू का रस रखें, रोज उससे दांत साफ करें। दांत चमकेगा तथा पायरिया ठीक होगा।
- बिच्छू व मधुमख्खियों के काटने पर नींबू के बीजों को पीसकर सेंधा नमक डालकर पिलायें कारण बीज बहुत कसैला होता है यह इनके जहर को मारता है। आमतौर (रोज)पर बीज इस्तमाल ने करें।
- दूध तथा नींबू के रस में काली मसूर पीसकर मिलाएं, इसका उबटन लगायें, झाइया दूर होंगी।
- काली चाय में नींबू ङालकर पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है पेट में गैस नहीं बनती।
- नींबू का रस तेल की तरह बालों की जड, में लगाने से रूसी खत्म होती है।
- नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है।
- नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।
- नींबू में पिसी काली मिर्च छिडक कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।
- निम्बू के रस तथा नमक पानी में मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढता है।
- नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है।
- नींबू के बीज को पीसकर सर पर लगाने से गंजापन दूर होता है।
- आधा कप पालक के रस में नींबू निचोडकर धीरे-धीरे करीब बीस मिनट तक पियें, रक्त की कमी दूर करेगा।
- गर्भाधान (गर्भ ठहरने में सहायक) एक दो नींबू का बीज पीस लें, घी में मिलाकर सेवन करें।
- आधा सीसा दर्द में नींबू का रस नाक में दो-दो बूंद डालना चाहिये।
- कान का दर्द हो तो अदरक पीसकर बगैर पानी अब नींबू का रस मिलायें(कहीं भी पानी इस्तमाल न करें)तथा कान में डालें।
- याददाश्त की कमी दूर करता है-1. नींबू के रस में सौंफ का रस मिलाकर लें। 2. चुकंदर के रस में नींबू का रस मिलाकर पियें।
- सरल प्रसव-पांचवे माह से गर्भवती स्त्री रोज नियम से नींबू की शिकंजी पिये। रोजाना 1 गिलास पानी में नींबू का रस मिलाकर भी पी सकते है।
- दो चम्मच बादाम के तेल में नींबू की दो बूंद मिलाएं और रूई की सहायता से दिन में कई बार घाव पर लगाएं, घाव बहुत जल्द ठीक हो जाएगा।
- नींबू को अपने प्रतिदिन आहार का भाग बनाएं इसमें मौजूद एसिड से शरीर में वसा की मात्रा कम हो जाती है।
- प्रतिदिन नाश्ते से पहले एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच ज़ैतून का तेल पीने से पत्थरी से छुटकारा मिलता है।
- किसी जानवर के काटे या डसे हुए भाग पर रूई से नींबू का रस लगांए, लाभ होगा।
- एक गिलास गर्म पानी में नींबू डाल कर पीने से पांचन क्रिया ठीक रहती है।
- इसी प्रकार चक्तचाप, खांसी, क़ब्ज़ और पीड़ा में भी नींबू चमत्कारिक प्रभाव दिखाता है।
- दमा-दमा की शिकायत बनी रहती है तो ऐसे लोगों को दमा का दौरा पड़ने पर गरम पानी में नींबू निचोड़कर पिलायें, बेहतर साबित होगा।
- मधुमेह-अक्सर मधुमेह पीड़ित व्यक्तियों को नींबू पानी में निचोड़कर पीने से लाभ मिलता है।
- कब्ज-ताजे नींबू से निकाले गए रस और शक्कर प्रत्येक 12 ग्राम, एक स्वच्छ पानी में मिलाकर रात्रि को पीने से कुछ दिनों में ही पुराने से पुराने कब्ज रूपी रोग का खात्मा हो जाता है।
- चेहरे की सुंदरता-यूं तो अधिकांश महिलाएं अपनी सुंदरता को लेकर चिंताग्रस्त रहती है, लेकिन यदि आपको भी ऐसी ही शिकायत हैं तो नींबू के रस के संग गुलाबजल, ग्लिसरीन बराबर मात्रा में मिलाकर रोजाना चेहरे पर लगायें कुछ दिनों पश्चात् से ही झांई, मुंहासे, झुर्रियां, फुंसियां आदि छूमंतर हो जाएंगी और चेहरा पहले से कहीं ज्यादा सुंदर दिखाई देने लगेगा जिससे आपकी शिकायत स्वत: दूर हो जायेंगी।
- खांसी-श्वास एवं खांसी में नींबू में काली मिर्च और नमक भरकर चूसने से लाभ होता है जो खांसी की बीमारी भगाने में कारगर सिध्द होती है।
- कफ-आयुर्वेद के अनुसार, नींबू के रस में डाले हुए अदरक के टुकड़े और नमक मिलाकर खाने से कफ का नाश हो जाता है। इस प्रकार कफ के रोगियों के लिए नींबू का रस किसी अनमोल औषधि से कमतर नहीं है।
- बुखार- बुखार के समय में नींबू में सेंधा नमक और काली मिर्च भरकर, गरम करके चूसने से बुखार में लाभ मिलता है।
- जी घबराने की शिकायत -बसों में यात्रा अथवा घूमते वक्त कई लोगों को जी घबराने की समस्या होने लगती है। सो, नींबू को बीच से काटकर, नमक एवं काली मिर्च के साथ चूसें। यह समस्या खुद ब खुद दूर हो जाएगी।
- नाक से खून आने पर-गाड़ी चलाते वक्त अचानक किसी दुर्घटना घटने पर नाक से खून आने की बुरी स्थिति में दोनों नथुनी में दो-दो बूंद नींबू का रस गिराने से खून का तेजी के साथ गिरना बंद हो जाता है।
- आखिर में, उपरोक्त बीमारी के अलावा नींबू अपने औषधीय गुणों के कारण
- चेचक,
- मसूड़ों से खून आना,
- अजीर्ण एवं
- मंद्राग्नि,
- पीलिया,
- अतिसार,
- अम्लता,
- पेट दर्द,
- सर्दी-जुकाम और
- मलेरिया जैसे अनगिनत रोगों में भी काफी लाभप्रद है। जिसके द्वारा अक्सर शरीर में उत्पन्न होने वाली बीमारियों का उपचार किया जाता है।
टिप्स : नींबू के कुछ उपयोगी किचन टिप्स
- चावल पकाते समय उसमें नींबू की चार पांच बूंद डाल दें चावल अलग-अलग बनेगा।
- अंण्डा उबालते समय 4-5 बूंद नींबू डाल दें। अंडा चटकेगा नहीं।
- गोभी की सब्जी बनाते समय 3-4 बूंद नींबू का रस डाल दें बदबू नहीं आयेगी तथा गोभी का रंग सफेद।
- आलू उबालते समय नींबू 3-4 बूंद डाल दें तो आलू सफेद, भुर-भुरे रहेंगे। चीनी भी डाल सकते हैं।
परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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खुजली
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गठिया
गठिया-Arthritis
गठिया-Gout
गड़तुम्बा
गंडा-ताबीज
गंध
गन्ने का रस
गरमा गरम
गर्भ निरोधक
गर्भधारण
गर्भपात
गर्भवती
गर्भवती कैसे हों?
गर्भावस्था
गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy
गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy
गर्भाशय
गर्भाशय भ्रंश
गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy
गर्म पानी
गर्मी
गर्मी-Heat
गलगण्ड
गाजर
गाजवां
गांठ
गाँठ-Knot
गारंटी
गारण्टेड इलाज
गाल ब्लैडर
गिलोय
गिल्टी
गुड़हल
गुंदा
गुदाद्वार
गुदाभ्रंश
गुम्मा
गुर्दे
गुलज़ाफ़री
गुस्सा
गृध्रसी
गृह-स्वामिनी
गेदुआ की छाछ
गैस
गैस्ट्रिक
गैहूं का जवारा
गोक्षुरादि चूर्ण
गोखरू
गोखरू (LAND CALTROPS)
गोंद कतीरा-Hog-Gum
गोंदी
गोभी-Cabbage
गोरख मुंडी
गोरखगांजा
गोरखबूटी
गोरखमुंडी
ग्रीन-टी
घमोरी
घरेलु नुस्खे
घाघरा
घाव
चकवड़
चक्कर
चपाती
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चर्म
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चिकित्सकीय
चिटकन
चिंतित
चिरायता-Absinth
चिरोटा
चुंबन
चोक
चौलाई
छपाकी
छरहरी काया
छाछ
छाजन बूटी
छाले
छींक
छीकें
छुअ
छुआरा
छुहारा
छोटा गोखरू
छोटा धतूरा
छोटी हरड़
जंक फूड
जकवड़
जख्म
जंगली तिल्ली
जंगली तुलसी
जंगली पेड़
जंगली मिर्ची
जंगली-कटीली चौलाई
जटामांसी-Spikenard
जलजमनी
जलन
जलोदर रोग-Ascites Disease
जवारा
जवारे
जवासा-Alhag
जहर
जामुन का जूस
जायफल
जिगर
जीरा
जीवन रक्षक
जीवनी शक्ति
जुएं
जुकाम
जुदाई
जुलाब
जूएं
जूस
जोड़ों के दर्द
जोड़ों में दर्द
जौ
ज्यूस
ज्योति
ज्वर
ज्वर-Fiver
झाइयाँ
झांईं
झाड़-फूंक
झुर्रियाँ
झुर्रियां
झुर्री
झूठे दर्द
टमाटर का रस
टमाटर-Tomatoes
टाइफाइड
टाटबडंगा
टायफायड
टूटी हड्डी
टॉन्सिल
टोटला
ट्यूमर
ठंड
ठंडापन
ठेकेदार डॉक्टर
डकार
डकारें
डायबिटीज
डायरिया
डिग्री फ़ारेनहाइट
डिग्री सेल्सियस
डिजिसेक्सुअल
डिटॉक्सीफाई
डिटॉक्सीफिकेशन
डिनर
डिप्रेशन
डिब्बाबंद भोजन
डिलेवरी
डीकामाली
डीगामाली
डेंगू
डेंगू-Dengue
डॉ. निरंकुश
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
डॉ. मीणा
ढकार
ढीलापन
ढीली योनि
तकलीफ का सही इलाज
तंत्र-मंत्र
तम्बाकू
तरबूज-Watermelon
तलाक
ताकत
तिल
तिल्ली
तुंबा
तुंबी
तुम्बा
तुलसी
तेल
त्रिदोषनाशक
त्रिफला
त्वचा
त्वचा रोग
थकान
थाईरायड
थायरायड-Thyroid
थायरॉइड
दण्डनीय अपराध
दंत वेदना
दन्तकृमि
दन्तरोग
दमा
दर वेदना
दरार
दर्द
दर्द निवारक
दर्द निवारक दवा
दर्दनाक
दस्त
दही
दाग-धब्बे-Stains-Spots
दाढ़
दांत
दांतो में कैविटी-Teeth Cavity
दाद
दाम्पत्य
दाम्पत्य विवाद सलाहकार
दाम्पत्य-Conjugal
दाल
दालचीनी
दालें
दिमांग
दिल
दीर्घायु
दु:खी
दुर्गंध
दुर्बलता
दुष्प्रभाव
दुष्प्रभावरहित
दूध
दूध वृद्धि
दूधी
दूधी-Milk Hedge
दृष्टिदोष
दो मन
द्रोणपुष्पी
द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes
धड़कन
धनिया बीज
धनिया-Coriander
धमासा
धात
धातु
धातु पतन
धार्मिक
धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं?
धैर्यहीन
नज़ला
नपुंसक
नपुंसकता
नाइट्रिक एसिड
नाक
नाखून
नागबला
नागरमोथा
नाडी हिंगु
नाड़ी हिंगु (डिकामाली)
नामर्दी
नारकीय पीड़ा
नारियल
नाश्ता
निमोनिया
निम्न रक्तचाप
निम्बू
नियासिन
निराश
निरोगधाम
निर्गुण्डी
निर्गुन्डी
निष्कपट स्नेह
निष्ठा
निसोरा
नींद
नींबू
नींबू-Lemon
नीम-azadirachta indica
नुस्खे
नुस्खे-Tips
नेगड़
नेत्र रोग
नेुचरल
नैतिक
नॉर्मल डिलेवरी
नोनिया
नौसादर
न्युमोनिया-Pneumonia
न्यूरॉन्स
पक्षघात
पंचकर्म
पढ़ने में मन लगेगा
पंतजलि
पत्तागोभी-CABBAGE
पत्थर फोड़ी
पत्थरचट्टा
पत्नी
पथरी
पदार्थ
पनीर
पपीता
पपीता-CARICA PAPPYA
पमाड
परदेशी लांगड़ी
परम्परागत चिकित्सा
परहेज
पराठा
परामर्श
परिस्थिति
पवाड़
पवाँर
पाइल्स
पाक-कला
पाचक
पाचन
पाचनतंत्र
पाचनशक्ति
पाठक संख्या 16 लाख पार
पाठक संख्या पंद्रह लाख
पायरिया
पारदर्शिता
पारिजात
पालक
पालक-Spinach
पित्त
पित्ताशय
पित्ती
पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne
पिरामिड
पीलिया
पीलिया-Jaundice
पीलिया-कामला-Jaundice
पुआड़
पुदीना
पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava
पुरुष
पुंसत्व
पेचिश
पेट के कीड़े
पेट दर्द
पेट में गैस
पेट रोग
पेड़
पेद दर्द
पेरिकिटो सेसिल
पेशाब
पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
प्लूरिसी-Pleurisy
प्लेटलेट्स
फंगल
फटन
फफूंद-Fungi
फरास
फल
फाइबर
फिटकरी
फुंसी-Pimples
फूलगोभी-CAULIFLOWER
फेंफड़े
फेरम फॉस
फैट
फैटी लीवर
फोटोफोबिया
फोड़ा
फोड़े-Boils
फोरप्ले
फोलिक एसिड
फ्लू
फ्लू-Flu
फ्लेक्स सीड्स
बकायन
बकुल
बड़ी हरड़
बथुआ
बथुआ पाउडर
बथुआ-White Goose Foot
बदबू
बंध्यापन
बबूल-ACACIA
बरसाती बीमारियाँ
बरसाती बीमारियां
बलगम
बलवृद्धि
बला
बलात्कार
बवासीर
बहरापन
बहुनिया
बहुमूत्रता-
बांझपन
बादाम-Almonds
बादाम.
बाल
बाल झड़ना
बाल झडऩा-Hair Falling
बिना सिजेरियन मां बनें
बिवाई
बीजबंद
बीड़ी
बीमारियों के अनुसार औषधियां
बीमारी
बील
बुखार
बूंद-बूंद पेशाब
बेल
बेली
बैक्टीरिया
बॉयोकैमी
ब्रह्मदण्डी
ब्रेस्ट ग्रोथ
ब्लड प्रेशर
ब्लैक मेलिंग
ब्लॉकेज
भगंदर
भगंदर-Fistula-in-ano
भगनासा
भगन्दर
भगोष्ठ
भड़भांड़
भय
भविष्य
भस्मक रोग
भावनात्मक
भुई आंवला-Phyllanthus Niruri
भूई आमला
भूई आंवला
भूख
भूख बढ़ाने
भूत-प्रेत
भूमि
भूमि आंवला
भोजनलीवर
मकोय
मकोय-Soleanum nigrum
मक्का
मक्का के भुट्टे
मंजीठ
मटर-PEA
मंद दृष्टि
मंदाग्नि
मदार
मधुमेह
मधुमेह-Diabetes
मन्दाग्नि-Dyspepsia
मरुआ
मरोड़
मर्द
मर्दाना
मलाशय
मलेरिया
मलेरिया (Malaria)
मवाद
मसाले
मस्तिष्क
मस्से
मस्से-WARTS
महंगा इलाज
महत्वपूर्ण लेख
महाबला
माइग्रेन
माईग्रेन
माईंड सैट
माजूफल
मानवव्यवहार
मानसिक
मानसिक लक्षण
मानसिक-Mental
मानिसक तनाव-Mental Stress
मायोपिया
मासिक
मासिक-धर्म
मासिकधर्म
मासिकस्राव
माहवारी
मिनरल
मिर्गी
मिर्च-Chili
मीठा खाने की आदत
मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex
मुख्य लक्षण
मुधमेह
मुलहठी
मुलेठी
मुहाँसे
मूँगफली
मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders
मूत्र
मूत्र असंयमितता
मूत्र में जलन-Burning in Urine
मूत्ररोग
मूत्राशय
मूत्रेन्द्रिय
मूर्च्छा (Unconsciousness)
मूली
मूली कर रस
मृत्यु
मृत्युदण्ड
मेथी
मेथी दाना
मेंहदी
मैथुन
मोगरा (Mogra)
मोटापा
मोटापा-Obesity
मोतियाबिंद
मौत
मौलसिरी
मौसमी बीमारियां
यकृत
यकृत प्लीहा
यकृत वृद्धि-Liver Growth
यकृत-लीवर-जिगर-Lever
यूपेटोरियम परफोलियेटम
यूरिक एसिड लेबल
योग विज्ञापन
योन
योन संतुष्टि
योनि
योनि ढीली
योनि शिथिल
योनि शूल-Vaginal Colic
योनि संकोचन
योनिद्वारा
योनिभ्रंश
योनी
योनी संकोचन
यौन
यौन आनंद
यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills)
यौन क्षमता
यौन दौर्बल्य
यौन शक्तिवर्धक
यौन शिक्षा
यौन समस्याएं
यौनतृप्ति
यौनशक्ति
यौनशिक्षा
यौनसुख
यौनानंद
यौनि
रक्त प्रदर (Blood Pradar)
रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA
रक्तचाप
रक्तपित्त
रक्तशोधक
रक्ताल्पता
रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia
रस-juices
रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum
रामबाण
रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines
रुक्षांश
रूढिवादी
रूसी
रूसी मोटापा
रेचक
रेठु
रोग प्रतिरोधक
रोबोट सेक्स
रोमांस
लकवा
लक्षण
लक्ष्मी
लंच
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लस्सी
लहसुन
लहसुन-Garlic
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लाइलाज का इलाज
लाक्षणिक इलाज
लाक्षणिक जानकारी
लाभ
लिंग
लिंग प्रवेश
लिसोड़ा
लीकोरिया
लीवर
लीवर सिरोसिस
लीवर-Liver
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लौकी
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ल्युकोरिया
ल्यूकोरिया
ल्यूज योनी
वजन
वज़न
वजन कम
वजन बढाएं-Weight Increase
वन तुलसी
वन/जंगली तुलसी
वनौषधियाँ
वमन
वमन विकृति-Vomiting Distortion
वसा
वात
वात श्लैष्मिक ज्वर
वात-Rheumatism
वायरल
वायरल फीवर
वायरल बुखार-Viral Fever
वासना
विचारतंत्र
विटामिन
विधारा
वियाग्रा-Viagra
वियोग
विरह वेदना
विलायती नीम
विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध
विवाहेत्तर सम्बंध
विश्वास
विष
विष हरनी
विषखपरा
वीर्य
वीर्य वृद्धि
वीर्यपात
वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone
वृक्ष
वैज्ञानिक
वैधानिक
वैवाहिक जीवन
वैवाहिक जीवन-Marital
वैवाहिक रिश्ते
वैश्यावृति
व्याकुल
व्यायाम
व्रण
शंखपुष्पी
शरपुंखा
शराब
शरीफा-सीताफल-Custard apple
शर्करा
शलगम-Beets
शल्यक्रिया
शहद
शहद-Honey
शारीरिक
शारीरिक रिश्ते
शिथिलता
शीघ्र पतन
शीघ्रपतन
शीस
शुक्राणु
शुक्राणु-Sperm
शुक्राणू
शुगर
शोक
शोथ
शोध
श्योनाक
श्रेष्ठतर
श्वास
श्वांस
श्वेत प्रदर
श्वेत प्रदर-Leucorrhea
श्वेतप्रदर
षड़यंत्र
संकुचन
संकोच
संक्रमण
संक्रमित
संक्रामक
संखाहुली
सगतरा
संतरा-Orange
संतान
संतुष्टि
सत्यानाशी
सदा सुहागन
सदाफूली
सदाबहार
सदाबहार चूर्ण
सनबर्न
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सफेद पानी
सफेद मूसली
सब्जि
सब्जी
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संभोग
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सरकार को सुझाव
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हड्डीतोड़ बुखार
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हरीतकी
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हस्तमैथुन-Masturbation
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हाथ-पैर नहीं कटवायें
हारसिंगार
हालात
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हिचकी-Hiccup
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हिस्टीरिया-Hysteria
हींग
हीनतर
हुरहुर
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हृदय-Heart
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हेल्थ बुलेटिन
हैजा
हैपीनेस-Happiness
हैल्थ
होम केयर टिप्स-Home Care Tips
होम्यापैथ
होम्योपैथ
होम्योपैथिक
होम्योपैथिक इलाज
होम्योपैथिक उपचार
होम्योपैथी
होम्योपैथी-Homeopathy


