Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
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मक्का (Corn) : परम्परागत औषधीय उपयोग
लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'1-परिचय (Introduction): मक्का की खेती करना या मक्का घर के पास खाली जगह पर उगाना बहुत सरल है। इसकी देखरेख अधिक नहीं करनी पड़ती है और इसकी उपज भी अच्छी होती है। मक्का के टिक्कड़ मोटी रोठियां बनती हैं। भारत के अनेक क्षेत्रों में आदिवासी तथा ग्रामीण लोग मक्के के रोटी, मक्के के पानिये और उड़द के आटे की भुजिया के साथ में भोजन में प्रयोग करते हैं। शुद्ध मक्का के आटे के या मक्का को बेसन या दूसरी दालों में मिलाकर अनेक तरह के पकौडे़ तथा दूसरे पकवान बनाये जाते हैं। पकने से पहले नर्म—नर्म ताजे मक्के के भुट्टे सेंककर खाने का आनंद तो अपने आप में अनौखा होता है। मक्के के सूखे दाने की खील भी बनाये जाते हैं। जिन्हें सिनेमा हालों में ऊंची कीमत पर बेचा जाता है। इन सबसे बढकर मक्का के अनेक औषधीय उपयोग भी हैं।
2-पोषक तत्व: भुट्टे के दानों में बहुत सारा मैग्नीशियम, आयरन, कॉपर, विटामिन ए, विटामिन बी 9, फोलिक एसिड, विटामिन सी और फॉस्फोरस पाया जाता है। जो स्वास्थ्य वर्धक है। अत: इसका सेवन करना चाहिये।
प्रत्येक 100 ग्राम मक्का में उपस्थित पोषक तत्व:
(Nutritional value of corn per 100 gm)
ऊर्जा : 360 किलोजूल (86 किलोकैलोरी)
फाइबर : 2 ग्राम
विटामिन A : 9 μg
विटामिन B1 : 0.155 mg
विटामिन B2 : 0.055 mg
विटामिन B3 : 1.77 mg
विटामिन C : 6.8 mg
आयरन : 0.52 mg
मैग्नीशियम : 37 mg
पोटेशियम : 270 mg
जिंक : 0.46 mg
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3-सामान्य गुण (Property): मक्का अत्यन्त रूक्षा (रूखा), कफ और पित्तनाशक, रुचि को बढ़ाने वाला, दस्तों को रोकने वाला होता है। वायु पैदा करने वाला (बढ़ाने वाला) होता है।
4-हानिकारक प्रभाव (Harmful Effects): मक्का पचने में गरिष्ठ अर्थात भारी है। अत: जिसका शरीर बलवान हो और जिसकी पाचन शक्ति तेज या अच्छी हो, वही इसको आसानी से पचा सकता है। कमजोर पाचन-शक्ति वालों के लिए मक्का हानिकारक है। यह शरीर की नसों को शिथिल करता है।
5-मक्का का तेल: मक्का का तेल भी निकाला/बनाया जा सकता है। जो बेहद स्वास्थ्यवर्धक है।
6-तेल को निकालने की विधि: ताजी नर्म-दूधिया मक्का के दाने पीसकर कांच की शीशी में भरकर खुली हुई शीशी धूप में रख दें। कुछ दिनों में शीशी में से दूध सूखकर उड़ जाएगा और तेल मात्र शीशी में शेष रह जाएगा। इस तेल को छानकर दूसरी साफ शीशी में भरकर सुरक्षित रख लें और इस तेल से मालिश किया करें। इस तेल की कमजोर बच्चों के पैरों पर मालिश करने से बच्चे के पैरों में शक्ति आती है और बच्चा जल्दी चलने लगता है। 1 चम्मच तेल में शर्बत मिलाकर पीने से शारीरिक बल भी बढ़ता है।
7-भुट्टे के रेशों का ड्रिंक बनाने की विधि और रेशों के लाभ:
(1) एक गिलास पानी को उबलने के लिये रख दें। पानी उबलने के बाद, इसमें भुट्टे के रेशों को डालकर 15 मिनट तक और उबालें। गुनगुना होने पर इसमे चुटकी भर काला नमक और नींबू निचोड़कर पियें।
(2) काच के बर्तन में एक गिलास साफ पानी में भुट्टे के रेशे डालकर दिनभर के लिये धूप में रख दे। शाम को इस पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पियें।
(3) भुट्टे के रेशों का ड्रिंक किडनी को हेल्दी रखने और कई बीमारियों से बचाने में हेल्पफुल होता है।
(4) भुट्टे के बालों/रेशों में भी कई हेल्दी न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो अनेक बीमारियों से बचाव में मददगार होते हैं। जो अनेक बीमारियों से लड़ने में सहायता करते हैं।
(5) संक्रमण से सुरक्षा: इनका सेवन ब्लैडर/मूत्राशय में इंफेक्शन पैदा करने वाले माइक्रोब्स को मारते हैं। अत: मूत्राशय के संक्रमण की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
(6) भुट्टे के रेशों से बना ड्रिंक फैट बर्निंग प्रोसेस को तेज करता है।
इससे मोटापे से बचाव होता है।
(7) पथरी के उपचार में सिल्क को पानी में उबालकर बनाये गये काढ़े का प्रयोग होता है।
(8) मक्के के बाल (Corn Silk) का उपयोग पथरी रोगों की चिकित्सा मे होता है। पथरी से बचाव के लिए रात भर सिल्क को पानी मे भिगोकर सुबह सिल्क हटाकर पानी पीने से लाभ होता है।
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8-मक्का का विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases): पेट एवं पाचन: मक्का मनुष्य के पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करता है। जिससे भोजन अच्छे से पचता है और भूख भी अच्छी लगती है। मक्का में पेट यानि आमाशय को ताकत देने का बहुत अच्छा गुण पाया जाता है। अत: यदि गेहूँ के आटे के स्थान पर मक्के के आटे का प्रयोग करें तो यह लीवर के लिये अधिक लाभकारी है। यह प्रचूर मात्रा में रेशे से भरा हुआ है इसलिये इसे खाने से पेट का डायजेशन/चाचन अच्छा रहता है। मक्का कब्ज को दूर करता है। कब्ज से कौन राहत नहीं पाना चाहता? मक्का/कॉर्न में जो फाइबर होता है, वह मलाशय या कोलन/पेट में जमे हुए खाद्य पदार्थों को निकालने में सहायता कर कब्ज के कष्ट से राहत दिलाता है। अत: मक्का के सेवन से कब्ज, बवासीर और पेट के कैंसर के होने की संभावना कम हो जाती है। भुट्टे के रेशे और रेशों से बने ड्रिंक में मौजूद फाइबर भी पाचन क्रिया को बेहतरीन रखते हैं। मक्का का भुट्टा खाने से मुंह के अंदर अधिक लार बनने लगती है, जिससे पंचान तंत्र सही हो जाता है।
9-शक्तिवर्धक: मक्का खाने से शरीर को काफी लाभ मिलता है। इसे मक्का आमाशय को मजबूत बनता है। मक्का खून को बढ़ाने वाला (रक्त-वर्धक) होता है।
10-खांसी, कुकर-खांसी और जुकाम: मक्का के भुट्टे को जलाकर उसकी राख पीस लें, इसमें स्वादानुसार सेंधानमक मिला लें, फिर रोजाना 4 बार चौथाई चम्मच लेकर गर्म पानी से फंकी लें। इसके सेवन से खांसी, कुकर-खांसी और जुकाम में लाभ मिलता है।
11-पेशाब में जलन होना: ताजा मक्का के भुट्टे को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन और गुर्दों की कमजोरी दूर होती है।
12-यक्ष्मा (टी.बी.): टी.बी. के रोग से पीड़ित व्यक्ति को मक्का की रोटी खिलाने से आराम मिलता है।
13-पथरी: पथरी के उपचार के लिये मक्का के अनेक उपयोग हैं—
(1) भुट्टे के बाल का उपयोग पथरी से बचाव के लिए किया जाता है। अगर भुट्टे के बाल को रात भर पानी मे भिगो दें और सुबह मक्का के सारे बाल हटाकर उस पानी को पी लें। इससे लाभ मिलता है।
(2) मक्का के भुट्टे और जौ को जलाकर राख कर लें। दोनों को अलग-अलग पीसकर अलग-अलग शीशियों में भरकर रख लें। उन शीशियों में से दो चम्मच मक्का की राख और दो चम्मच जौ की राख को एक कप पानी में घोल लें, फिर छानकर इस पानी को पी लें। ऐसा करने से पथरी गल जाती है और पेशाब खुलकर आता है।
(3) मक्के को तथा जौ को अलग-अलग जलाकर भस्म (राख) बनाकर पीस लें तथा अलग-अलग बर्तन में रखें। रोजाना सुबह मक्के का 2 चम्मच भस्म (राख) 1 कप पानी में मिलाकर पीयें तथा शाम को जौ का भस्म (राख) 2 चम्मच एक कप पानी में मिलाकर पीने से पथरी ठीक हो जाती है।
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14-उल्टी: मक्का के भुट्टे में से दाने निकालकर उन्हें जलाकर राख कर लें, फिर इस राख को आधा ग्राम लेकर शहद के साथ चाटें। इससे कै (उल्टी) आना तुंरत ही बन्द होती है।
15-काली/सूखी खांसी: मक्का के बीज निकाले हुए भुट्टे को जलाकर राख कर लें। इसके 1-2 ग्राम राख को शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से काली खांसी दूर हो जाती है।
16-खांसी:
(1) मक्का को जलाकर उसकी राख को इकट्ठा कर लें, फिर इसमें लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में पिसा हुआ कोयला और कालानमक मिलाकर रख दें। इसे शहद के साथ सुबह-शाम चाटने से कालीखांसी और कुकुर खांसी भी दूर हो जाती है।
(2) मक्का के भुट्टे को जलाकर उसकी राख को पीस लें। इसमें थोड़ा-सा सेंधानमक मिला दें। इसके आधा-आधा चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करने से खांसी में लाभ मिलता है।
(3) गुल्ली के दाने निकालने के बाद जो बीच का हिस्सा बचे, उसको सुखाकर जला लें और राख बना लें। इस राख को प्रतिदिन गुनगुने पानी के साथ फांकने से खांसी का इलाज होता है। खांसी कैसी भी हो यह चूर्ण लाभ देता ही है। यहां तक कि कूकर खांसी में भी बड़ी राहत मिलती है।
17-जुकाम: मक्के के भुट्टे को पूरी तरह से जलाकर उसकी राख बना लें, फिर इसमें स्वाद के अनुसार सेंधानमक मिलाकर रोजाना 4 बार फंकी लें। इससे जुकाम ठीक हो जाता है। इसके अलावा जब भुट्टे खाएं तो गुल्ली के दानों को खाने के बाद जो भुट्टे का बीच का भाग बचता है, उसे फेंकें नहीं, बल्कि उसे बीच में से तोड़ लें और उसे सूंघें। इससे जुकाम में बड़ा फायदा मिलता है। इसके बाद में भी फेंकें नहीं, बल्कि इसे जानवर को खाने के लिए डाल सकते हैं।
18-मूत्ररोग:
(1) लगभग 30 ग्राम मक्का के सुनहरी बालों को 250 ग्राम पानी में उबालें और जब 60 ग्राम रह जाये तो छानकर ठंडा करके पी लें, इससे पेशाब खुलकर आता है। अगर ताजे भुट्टे को छिलके सहित पानी में उबाल लें और फिर उस पानी को छानकर मिसरी मिलाकर पी लें। तो इसे पीने से पेशाब की जलन धीरे-धीरे दूर हो जाती है।
(2) ताजा मक्का के भुट्टे को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन व गुर्दों की कमजोरी हो जाती है।
19-गुर्दे के रोग: मक्के के भुट्टे के 20 ग्राम बालों को 200 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें। जब 100 मिलीलीटर पानी ही शेष बचे तब छानकर पीने से गुर्दे के रोग ठीक हो जाते हैं।
20-प्रदर रोग: मक्का की छूंछ/डंठल की राख शहद के साथ सेवन करने से प्रदर रोग में लाभ होता है।
21-मोटापा कम करे: भुट्टे के बालों/रेशों के सेवन से कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) कंट्रोल में रहता है और मोटापा भी कम होता है। इसलिए यह दिल की बीमारियों से भी रक्षा करता है।
22-दिल की कमजोरी: मक्का के दाने निकली हुई भुट्टे की डण्डी (भुट्टे का बीच का भाग) को जलाकर इसकी राख को पीसकर रख लें। इसके आधा ग्राम चूर्ण को ताजा मक्खन के साथ खाने से दिल की कमजोरी दूर होती है। मक्का के भुट्टों के रेशों का ड्रिंक शुगर और कोलेस्ट्रोल लेवल को कण्ट्रोल करता है, इससे हार्ट की समस्या से बचाव होता है। भुट्टा दिल की बीमारी को भी दूर करने में सहायक है, क्योंकि इसमें विटामिन सी, कैरोटिनॉइड और बायोफ्लेवनॉइड पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढ़ने से बचाता है और शरीर में खून के प्रवाह को भी बढ़ाता है।
23-हड्डियां मजबूत: भुट्टे में विटामिन A, B और E, मिनरल्स और कैल्शियम काफी मात्रा में पाये जाते हैं। मक्का में जिन्क, फॉस्फोरस, मैग्नेशियम और आयरन होता है, जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में अहम् भूमिका निभाते हैं। जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। यहाँ तक कि मक्का का सेवन गठिया या अर्थराइटिस जैसे रोगों के होने की संभावना को भी कम करता है।
24-दृष्टि वर्धक: मक्का में बीटा-कैरोटीन होता है, जो विटामिन ए के उत्पादन में सहायता करता है। यह आँख संबंधी समस्याओं को कम करता और दृश्य-शक्ति को उन्नत करता है। साथ ही बढ़ती उम्र में होने वाली रतौंधी या मैक्युलर डीजनरेशन (Macular Degeneration* =जिसका परिणाम दृष्टि में धुंधलापन होता है। यह अंधापन पैदा कर सकता) की संभावना को कम करता है।
*A degenerative condition affecting the central part of the retina (the macula) and resulting in distortion or loss of central vision. It occurs especially in older adults, in which case it is called age-related macular degeneration.-एक degenerative स्थिति रेटिना (मैक्यूला) के केंद्रीय हिस्से को प्रभावित करता है और जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय दृष्टि के विरूपण या नुकसान होता है। यह विशेष रूप से पुराने वयस्कों में होता है, इस मामले में इसे आयु से संबंधित मैकुलर अपघटन कहा जाता है।
25-एनर्जी: मक्का एनर्जी प्रदान करता है। कार्बोहाइड्रेड एनर्जी का स्रोत होता है। मक्का/कॉर्न में कार्बोहाइड्रेड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर को भरपूर मात्रा में एनर्जी तो देता ही है साथ ही पेट को देर तक भरा हुआ रखता है। भुट्टे के तेल को पीने से शरीर शक्तिशाली होता है। हर रोज एक चम्मच तेल को चीनी के बने शर्बत में मिलाकर पीने से बल बढ़ता है।
26-कोलेस्ट्रॉल फाइटर: भुट्टे को एक बेहतरीन कोलेस्ट्रॉल फाइटर माना जाता है, जो दिल के मरीजों के लिए बहुत अच्छा है। यह कोलेस्ट्रॉल लेवल को बढने से बचाता/रोकता है और शरीर में खून के फ्लो/बहाव को भी बढाता है। यह खून की नलियों में कोलेस्ट्रोल जमा होने से रोकता है। साथ ही यह धमनियों में जमें कॉलेस्ट्रॉल को बाहर निकाल देता है।
27-बच्चों के लिये: बच्चों के विकास के लिए भुट्टा बहुत फायदेमंद माना जाता है। भुट्टे के तेल से बच्चों की मालिश की जाती है।
28-कैंसर फाईटर: भुट्टे को सेंकने या पकाने के बाद इसके 50 प्रतिशत एंटी-ऑक्सीडेंट्स गुण बढ़ जाते हैं। ये बढती उम्र को रोकते हैं और यह कैंसर से लड़ने में मदद करता है। पके हुए भुट्टे में फेरूलिक एसिड होता है जो कि कैंसर जैसी बीमारी में लड़ने में बहुत मददगार होता है। इसके अलावा भुट्टे में मिनरल्स और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं।
29-गर्भावस्था में उपयोगी: मक्का का सेवन प्रेगनेंसी/गर्भावस्था में भी बहुत लाभदायक होता है। मक्का में जो विटामिन बी9 और फॉलिक एसिड होता है, वह गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। मक्का एक ऐसा हेल्दी स्नैक्स/नाश्ता है, जो वजन को कंट्रोल करने के साथ-साथ आपको स्वस्थ/हेल्दी और फिट एण्ड फाइन बनाता है। इसलिये गर्भवती महिलाओं को इसे अपने आहार में अवश्य शामिल करना चाहिये। इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है। जिसकी कमी से होने वाला बच्चा अंडरवेट हो सकता है और कई अन्य बीमारियों से पीड़ित भी हो सकता है। अत: मक्का का सेवन इन तकलीफों से प्रतिरक्षा करता है। बच्चों के विकास के लिए मक्का या ताजा भुट्टा बहुत फायदेमंद माना जाता है।
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30-एनीमिया-रक्ताल्पता (Anemia): (रक्ताल्पता=रक्त की ऑक्सीजन वाहन की क्षमता में कमी हो जाना जो रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या अथवा हीमोग्लोबिन की मात्रा में सामान्य से नीचे कमी हो जाने पर होती है) एनीमिया रोग आयरन के कमी के कारण होता है। मक्का में आयरन खूब होता है जो खून की कमी को दूर करता है। मक्का का भुट्टा आयरन का एक अच्छा स्रोत है। अगर मक्का-भुट्टे को दैनिक आहार में शामिल किया जायेगा तो इससे आयरन की कमी पूरी होने लगेगी और एनीमिया रोग से बचाव भी होगा। भुट्टा हमारे शरीर में खून की कमी को पूरी करता है। इससे हमारा खून भी साफ हो जाता है, जिससे हमारे शरीर का रंग भी साफ हो जाता है।
31-खून जमने में सहायता: विटामिन की अधिकता के कारण मक्का रक्त के जमने की क्षमता को बढ़ाता है। इससे चोट लगने पर खून कम बहता है।
32-डायबीटीज: भुट्टे के रेशे खून में इन्सुलिन की मात्रा को संतुलित रखते हैं, जिससे डायबीटीज कंट्रोल में रहता है| यह ब्लड में सुगर लेवल मेन्टेन रखता है। इसके कारण डायबिटीज से बचाव होता है।
33-चर्मरोग: मक्का में कैरोटिन होता है जो कि त्वचा के लिये बहुत फायदेमंद होता है। इसलिये मक्का दाद, खाज, खुजली आदि चर्म रोगों के लिये बहुत अच्छी दवा है। खुजली के लिए भी भुट्टे का स्टॉर्च (Starch=मांडी) प्रयोग किया जाता है। वहीं इसके सौंदर्य लाभ भी कुछ कम नहीं है।
34-त्वचा निखारे: बढ़ती हुई उम्र के कारण झुर्रियों का पड़ना और खूबसूरती में कमी आना यह समस्या सभी को बहुत परेशान करती है। इस समस्या से बचने के लिए भुट्टा ज़रूर खाएं, क्योंकि इसमें विटामिन ए, विटामिन सी और एंटी ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो झुर्रियों को आने से रोककर त्वचा को निखार प्रदान करते हैं। मक्का के स्टार्च के प्रयोग से त्वचा खूबसूरत और चिकनी बन जाती है।
35-दांत: सबसे पहली बात तो यह है कि बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी भुट्टे अवश्य खिलाने चाहिए, इससे उनके दांत मजबूत होते हैं।
36-सांस: गुल्ली के दाने निकालने के बाद जो बीच का हिस्सा बचे, उसको सुखाकर जला लें और राख बना लें। सांस के रोगों में यह बड़ा कारगर इलाज है।
37-कैसी भी खांसी: गुल्ली के दाने निकालने के बाद जो बीच का हिस्सा बचे, उसको सुखाकर जला लें और राख बना लें। इस राख को प्रतिदिन गुनगुने पानी के साथ फांकने से खांसी का इलाज होता है। खांसी कैसी भी हो यह चूर्ण लाभ देता ही है। यहां तक कि कूकर खांसी में भी बड़ी राहत मिलती है।
38-बाल: नियमित भुट्टा खाने से बाल झड़ने की समस्या खत्म हो जाती है, क्योंकि भुट्टा में काफी मात्रा में विटामिन ई तत्व मिलता है जो बालों को जड़ से मजबूत बना देता है। जिन लोगों के बालों की समस्या रहती है-जैसे बालों का झड़ना, असमय सफेद बाल आना, उनको हफ्ते में एक बार भुट्टे का सेवन जरूर करना चाहिए। भुट्ठा बालों को संपूर्ण आजादी देता है, जिससे बाल काले मजबूत और घने हो जाते हैं।
39-पढ़ाई में एकाग्रता: सभी विद्यार्थियों को हफ्ते में कम से कम एक बार भुट्टा/मक्का जरूर खाना चाहिए। क्योंकि भुट्टे में मौजूद प्रोटीन पढ़ाई में एकाग्रता को बढ़ाते हैं। इससे दिमाग भी तरोताजा रहता है। यह पढ़ने की शक्ति को भी बढ़ाता है।
40-गुर्दा एवं गुर्दे की पथरी: मक्का के भुट्टे के रेशे किडनी में जमा हुए टॉक्सिन्स और नाइट्रेट (Toxins and Nitrate) को बाहर निकाल देते हैं, जिससे किडनी स्टोन होने का खतरा समाप्त हो जाता है। यह बॉडी Toxins (विषाक्त पदार्थों) निकालकर किडनी को स्वस्थ रखता है। किडनी स्टोन के खतरे से बचाता है। मक्के के रेशों/बालों (Corn Silks) का उपयोग पथरी रोगों की चिकित्सा में होता है। पथरी से बचाव के लिये रात भर रेशों को पानी मे भिगोकर सुबह रेशे हटाकर पानी पीने से लाभ होता है। पथरी के उपचार में रेशों को पानी में उबालकर बनाये गये काढ़े का प्रयोग भी किया जाता है।
यदि आप किसी लाइलाज समझी जाने वाली तकलीफ के कारण लम्बे समय से बीमार या अस्वस्थ या परेशान हैं तो निरामय उपचार हेतु आपके निकट के किसी आयुर्वेद और, या होम्योपैथी के डॉक्टर से सम्पर्क करें।साथ ही*अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की अधिक जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु हमारी निम्न वेबसाइट पर विजिट/क्लिक करके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बने:*
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मूत्ररोग
Wednesday, October 03, 2018
बुरे कोलेस्ट्रोल तथा धमनियों के ब्लॉकेज का प्रतिरोधक है-ओमेगा/Omega-3
लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
क्या आप जानते हैं-ओमेगा 3 (Omega 3) पोषक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और धमनियों में ब्लॉकेज नहीं होने देता है?ओमेगा 3 के स्रोत
1. फ्लेक्स सीड्स एवं अखरोट (Omega 3 Fatty Acid in Flax Seeds and Walnut) : शाकाहारी लोगों के फ्लेक्स सीड्स-अलसी एवं अखरोट ओमेगा 3 फैटी एसिड्स के दो प्रमुख स्त्रोत हैं। इसके अलावा ब्लूबेरी (Blueberry) ब्लूबेरी न केवल एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स का अच्छा एक स्रोत है, बल्कि इसमें ओमेगा 3 भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ब्लूबेरी में ही लगभग 174 मिलीग्राम में 3 ग्राम ओमेगा फैटी एसिड पाया जाता है।-------------------उपरोक्त के अलावा फ्लेक्स सीड-असली का तेल, केनोला का तेल, सोयाबीन, सोयाबीन का तेल, कद्दू के बीज, कद्दू के बीज का तेल, पर्सलेन पेरिला के बीज का तेल, अखरोट, अखरोट का तेल आदि भी ओमेगा 3 फैटी एसिड्स के प्रमुख स्त्रोत हैं।
सामान्यत: एक चौथाई (1/4) कप अखरोट में लगभग 2.7 ग्राम तथा 1/4 कप फ्लेक्स सीड्स में 6.3 ग्राम ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है। इसलिए 1/4 कप अखरोट का एक चम्मच फ्लेक्स सीड्स के साथ बना मिश्रण हमारे स्वास्थ के लिए लाभदायक होता है।
2. मछली, पौधों एवं नट्स का तेल (Omega 3 Fatty Acid in Fish, Herbs and Nuts Oil) : मांसाहारी लोगों के लिये सेलमन, मेकेरल, हैलिबट, सार्डिनेस, ट्युना एवं हैरिग जैसी ठण्डे पानी में रहने वाली मछलियों में इकोसेपेन्टेनोइक एसिड (EPA) तथा डोकासेहेक्सेनोइक एसिड (DHA) मौजूद होता है।
3. ओमेगा-3 घर बैठे प्राप्त करें: हमारे द्वारा ओमेगा-3 तत्वों से भरपूर 100% शुद्ध शाकाहारी और 100% शुद्ध ओर्गेनिक ताजा आयुर्वेदिक औषधियां बहुत कम कीमत पर रजिस्टर्ड पार्सल से देशभर में उपलब्ध करवायी जा रही हैं। जिनका सेवन बहुत आसान, सुगम और स्वास्थ्यवर्धक है। मंगवाने हेतु मो./वाट्सएप नं. 9875066111 पर सम्पर्क किया जा सकता है।नोट : ओमेगा-3 पोषक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और धमनियों में ब्लॉकेज नहीं होने देता। इस प्रकार ओमेगा 3 फैटी एसिड्स के स्त्रोत बता दिये गये है। अब अपने स्वास्थ की संपूर्ण देखभाल के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड्स से युक्त खाद्य का उपभोग करें।
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कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
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हमारे 95 फीसदी रोगियों को व्यक्तिगत रूप से हम से आकर मिलने की जरूरत नहीं पड़ती। यद्यपि रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें। (Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.)
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन होम्योपैथ एवं परम्परागत चिकित्सक, 9875066111
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Sunday, April 16, 2017
पोष्टिक तत्व नियासिन (विटामिन बी 3) का परिचय
(1) विटामिन बी 3 को नियासिन भी कहा जाता है। नियासिन की एक खासियत यह है कि यह रक्त में हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन के स्तर को बढ़ाता है। रक्त में एच.डी.एल. के स्तर के बढ़े रहने से कोरोनरी आर्टरी डिसीज और दिल का दौरा पड़ने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं। वाशिंग्टन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार नियासिन रक्त में एचडीएल कोलेस्ट्राल में प्रोटीन के संरचनात्मक स्वरूप को बदल देता है। प्रोटीन का यह बदला हुआ स्वरूप पूर्व के एचडीएल से कहीं ज्यादा बेहतर होता है। वस्तुत: कोरोनरी आर्टरी डिसीज(हृदय धमनी रोग ) से ग्रस्त लोगों या फिर जिन लोगों के रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा होता है, उनका एचडीएल कम प्रभावकारी होता है। ऐसे लोगों को नियासिन सप्लीमेंट्स का सेवन करना चाहिए।
(2) Niaspan एक कोलेस्ट्रॉल Abbott प्रयोगशालाओं द्वारा निर्मित दवा है. डॉक्टरों customarily नियासिन निर्धारित की है एक statin गोली है कि सफलतापूर्वक अपने एलडीएल ("बुरा" कोलेस्ट्रॉल) को कम लेने के रोगियों में एचडीएल ("" अच्छा कोलेस्ट्रॉल) के स्तर को बढ़ाने के लिए. अभी तक इस अभ्यास अब स्वास्थ्य अध्ययन के राष्ट्रीय संस्थानों देर से मई में जारी की, AIM उच्च बुलाया, के बाद पूछताछ की जा रही है पता चला है कि Niaspan दिल के दौरे को रोकने में विफल रहा है और एक स्ट्रोक का थोड़ा जोखिम उठाया जब कोलेस्ट्रॉल दवा Zocor (simvastatin) के साथ संयुक्त . लॉस एंजिल्स टाइम्स के मुताबिक, डॉक्टरों का कहना है कि simvastatin Lipitor, और Crestor सहित statins, कम में महान हैं खराब कोलेस्ट्रॉल इतना अच्छा है कि यह आवश्यक करने के लिए एक रोगी के आहार के लिए एक अन्य दवा जोड़ने नहीं है. नए अध्ययन का कहना है, टाइम्स, डॉक्टरों और अधिक कारण Niaspan, जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल बढ़ा नहीं जोड़ दे रहा है. "हालांकि इस खोज एचडीएल क्षेत्र में भविष्य दवा के विकास के लिए संबंधित हो सकता है, इसे फिर से विशाल एचडीएल जीव विज्ञान आसपास जटिलता मिसाल" अमर ए सेठी, एमडी, पीएचडी, प्रशांत Biomarkers, Inc में अनुसंधान और विकास के उपाध्यक्ष का कहना है ( PBI), एक सिएटल आधारित biomarker प्रयोगशाला सेवाओं की दवा, जैव प्रौद्योगिकी, और निदान उद्योगों के लिए प्रदाता. "(Niaspan में सक्रिय संघटक) नियासिन, AIM उच्च डेटा बहुत अधिक जांच और उपसमूह विश्लेषण करने के लिए प्रारंभिक निष्कर्ष का समर्थन के हकदार हैं पर पिछले नैदानिक परीक्षणों से सकारात्मक सबूत के बड़े शरीर के कारण" डा. सेठी जारी है. इसी तरह, "बहुत छोटे यद्यपि टोपी चिकित्सीय परीक्षण, simvastatin और नियासिन का एक संयोजन चिकित्सा हार्ड endpoints में कमी का प्रदर्शन इस्तेमाल किया. मध्यस्थ 6 स्टापें अध्ययन और ऑक्सफोर्ड Niaspan अध्ययन दोनों का सुझाव दिया है कि नियासिन की statins के अलावा की प्रगति रुका मन्या intima मीडिया मोटाई इस प्रकार, हम बहुत कुछ है कि हम वर्तमान समय में बैठक कर रहे हैं निष्कर्ष फर्म और अच्छी तरह से स्थापित कर रहे हैं की जरूरत है. " डा. सेठी का कहना है कि यह कैसे AIM उच्च अध्ययन से परिणाम पहले नियासिन और हृदय रोग के बारे में निष्कर्ष का खंडन उल्लेखनीय है. उनके विचार में, हम बहुत बड़ा नियासिन परीक्षण अध्ययन, HPS-2 थ्राइव कहा जाता है, जो इस दवा के भाग्य के संबंध में निश्चित जवाब देना चाहिए के लिए इंतजार की जरूरत है. एफडीए, वह नोट, किसी भी लेबल बदल सिफारिश नहीं है. यदि AIM उच्च परिणाम में चल रहे बड़े बहुत HPS-2 अध्ययन कामयाब सही पकड़, एक डा. सेठी कहते हैं, अटकलें शुरू हो सकता है कि मामलों में जहां एलडीएल-C काफी कम इलाज किया जाता है में एचडीएल मायने रखती है.
(3) नियासिन, भी विटामिन बी 3 के रूप में कहा जाता है, लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक अनिवार्य तत्व है. अन्य बी श्रेणी के विटामिन की तरह, नियासिन मदद करता है कोशिकाओं के लिए ऊर्जा जारी है और 50 से अधिक कार्बोहाइड्रेट और वसा के अवशोषण, प्रोटीन के चयापचय, हार्मोन का उत्पादन है, और के गठन लाल रक्त कोशिकाओं सहित शरीर की प्रक्रियाओं की सुविधा. नियासिन के विभिन्न कार्यों में भी मदद स्वस्थ त्वचा को बढ़ावा देने और पाचन और तंत्रिका प्रक्रियाओं को बनाए रखने. एक स्वस्थ नियासिन स्तर लोगों को स्वास्थ्य के लिए सिफारिश की है और अच्छी तरह से किया जा रहा है, इसलिए पोषण और डॉक्टरों नियासिन परीक्षण प्रशासन के लिए एक मरीज की स्थिति का मूल्यांकन करने और पोषण की कमी के निशान का पता लगाने. नियासिन एक इलाज के लिए एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर या खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने, और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल स्तर या अच्छे कोलेस्ट्रॉल बढ़ा ज्ञात कारक के रूप में प्रयोग किया जाता है. हृदय जटिलताओं के साथ लोगों के लिए बढ़ा, नियासिन की खुराक आम तौर पर मदद करने के लिए बीमारी का इलाज निर्धारित है. नियासिन इलाज भी चक्कर के लिए निर्धारित है, कान, पूर्व मासिक धर्म सिंड्रोम, सिर दर्द, ऐंठन, और रक्त परिसंचरण समस्याओं से बज रही है. भोजन में नियासिन सामग्री उच्च प्रोटीन आहार में पाया जाता है. इसलिए जो लोग बड़े पैमाने पर शाकाहारी हैं के लिए नियासिन खुराक लेने के लिए खाई को सही और नियासिन कमी को रोकने के लिए सिफारिश की है. शराबखोरी नियासिन अवशोषण जो भी कमी नियासिन नेतृत्व कर सकते हैं रोकता है.
नियासिन कमी : Niacin की कमीकारकों की एक किस्म के कारण होता है. गरीब देशों में, नियासिन कमी कुपोषित बच्चों में स्पष्ट है. विकसित देशों में, नियासिन कमी शाकाहारी आहार, शराबियों, और तनावपूर्ण स्थितियों के तहत लोगों को जो भोजन को छोड़ करने के लिए अवसाद से निपटने के साथ फसल कर सकते हैं. जो लोग नियासिन कमी के जोखिम वाले कारकों के नीचे गिर करने के लिए नियासिन कमी परीक्षण लेने के लिए एक सामान्य पोषण स्तर का आकलन प्रोत्साहित किया जाता है.
नियासिन कमी के लक्षण नासूर घावों, मनोभ्रंश, अवसाद, दस्त, चक्कर आना, थकान, सिरदर्द, मुंह से दुर्गंध, और अपच शामिल हैं. गंभीर नियासिन कमी के लक्षण अनिद्रा, अंग दर्द, भूख की कमी, कम रक्त शर्करा, मांसपेशियों में कमजोरी, त्वचा eruptions, और सूजन शामिल हैं. चरम मामलों के लिए, नियासिन कमी एक घातक बीमारी कहा जाता करने के लिए नेतृत्व कर सकते हैं
Pellagra. : Pellagra एक उत्तेजित विकार है कि अत्यधिक शरीर में नियासिन की कमी के कारण होता है. त्वचा, मस्तिष्क, और पाचन तंत्र पर हमला, पॅलाग्रा विभिन्न लक्षण है कि गलत तरीके से एक अलग बीमारी के रूप में ग्रहण किया जा सकता शामिल हैं. इसलिए, डॉक्टरों और एक रोगी के समग्र स्वास्थ्य कल्याण अध्ययन और नियासिन परीक्षण की सिफारिश की है अगर वह नियासिन कमी संदिग्धों. एक व्यक्ति की नियासिन स्तर को जानने का एक रोगी में पॅलाग्रा निदान में डॉक्टर की मदद करेगा. नियासिन नियासिन पैनल परीक्षणों की एक श्रृंखला के परीक्षण की कमी सबसे अच्छा घर के लिए मदद का वर्णन है और शरीर में नियासिन स्तर यों तो तरीका है. नियासिन स्तर परीक्षण न केवल नियासिन कमी का पता लगाता है, लेकिन यह भी नियासिन अधिक मात्रा के लिए एक गाइड है जो एक शर्त है कि के रूप में नियासिन कमी के रूप में हानिकारक हो सकता है के रूप में खड़ा है. नियासिन लार परीक्षण की प्रक्रिया सरल और आसान करने के लिए बाहर ले जाना है. लार के नमूने का एक विशेष रूप से तैयार झाड़ू द्वारा एकत्र की है. नमूना परिणाम और व्याख्या के लिए एक सम्मानित प्रयोगशाला को भेज दिया जा सकता.
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कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
वजन और कोलेस्ट्रॉल कैसे कम करें?
(1) अंकुरित अनाज (Sprouted Grains) : अंकुरित किए जाने से अनाज में पोषक तत्वों की मात्रा दुगुनी हो जाती है। चना, मूंग, सोयाबीन, मटर आदि को अंकुरित करके खाया जा सकता है। सर्दियों के मौसम में नाश्ते में अंकुरित अनाज को शामिल करना स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर है। भरपूर अंकुरित अनाज का सेवन आप सूप या सलाद के साथ भी कर सकते हैं। सुलभ, सस्ता, बनाने में आसान व पौष्टिक होने के कारण अंकुरित अनाज का सेवन आपके शरीर के लिए लाभदायक होता है। विटामिन, मिनरल्स, प्रोटीन, एंटी ऑक्सीडेंट आदि की भरपूर मात्रा होने के कारण अंकुरित अनाज हमारे भोजन के पाचन में भी सहायक होता है।
(2) छिलके वाली दालें (Peel Pulses) : छिलके वाली दालों में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है। प्रोटीन (Protein) के साथ ही दालों (Lentils) में-
फोलिक एसिड (Folic acid),
विटामिन ए (Vitamin A),
विटामिन बी (Vitamin B) आदि होता है।
इनका रोजाना सेवन शरीर में कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) की मात्रा को कम करता है, जिससे आपका वजन नियंत्रित होता है।
(3) सलाद (Salad) : सुबह व शाम के भोजन में सलाद अवश्य होना चाहिए। यदि कम कैलोरी और हाई फाइबर वाला फूड लेना चाहते हैं तो भोजन में सलाद बेहतर विकल्प है। सलाद के लिए प्रयोग में आने वाली कच्ची सब्जियों व फलों में-
एंटी ऑक्सीडेंट,
नेचुरल एंजाइम्स
और
फाइबर्स होते हैं, जो शरीर के कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ ही भोजन के पाचन में भी सहायक होते हैं। इससे वजन भी नियंत्रित रहता है। यदि आप सेहत के प्रति जागरूक हैं, तो आपको रोजाना कम से कम एक बड़ा कप हरी सलाद खानी चाहिए।
(4) पीले व खट्टे फल (Yellow and Citrus Fruits) : फलों में सबसे अधिक गुणकारी खट्टे फल होते हैं। पीले व नारंगी रंग के फलों में बीटा केरोटिन व एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। खट्टे फल विटामिन सी, कैल्शियम, मिनरल, फाइबर्स आदि का प्रमुख स्रोत होते हैं, जो शरीर के विकास के लिए उपयोगी होते हैं। नींबू में मौजूद पेक्टिन शरीर में जमा वसा को गलाता है और पाचन प्रक्रिया को भी धीमा करता है, जिससे खाने के बाद भी लगने वाली भूख शांत होती है। खट्टे फलों का सेवन-
डाइबिटीज/मधुमेह,
कैंसर,
एनीमिया,
मोतियाबिंद,
अस्थमा,
किडनी में पथरी आदि रोगों में लाभदायक होता है। इन फलों को निरंतर सेवन से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) में भी वृद्धि होती है।
(5) तरल, जूस एवं ड्रिंक (Liquid, Juice and Drink) : भोजन के पूर्व या पश्चात यदि आप तरल पदार्थ लेने के आदी हैं तो सर्द मौसम में भी आप छाछ, लस्सी, दही व फ्रूट जूस का सेवन कर सकते हैं। दही, छाछ व ताजे फलों का रस शरीर के लिए गुणकारी होता है। खट्टे फलों में नींबू का रस वजन कम करने, डेंटल केयर, बुखार, रक्त शुद्धि आदि में सहायक होता है। भोजन के बाद ली जाने वाली छाछ में दूध की अपेक्षा फैट की मात्रा कम होती है। यदि हम लिक्विड में नारियल पानी की बात करें तो इसमें पोटेशियम की भरपूर मात्रा होती है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के साथ ही शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को भी बढ़ाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, शर्करा व वसा की कम मात्रा होती है।
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Thursday, December 08, 2016
मेथीदाना हो सकता है खतरनाक! जानिए 5 नुकसान
1 यह जरूरी नहीं कि मेथीदाने का सेवन सभी के लिए फायदेमंद हो, कुछ लोगों को इससे नुकसान भी होता है। खास तौर से जो लोग ब्लडशुगर या डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि यह यह शुगर के स्तर को प्रभावित करता है।
2 कई बार इसे खाने से पेट संबंधी समस्याएं भी होती हैं, जैसे गैस बनना, खट्टी डकार आना आदि। इससे बचने के लिए इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखें और यदि यह आपको सूट न कर रहा हो तो इसे न खाएं।
3 कई बार मेथीदाना खाने से त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। त्वचा पर सूजन या दर्द जैसी समस्या भी इसका सेवन करने से हो सकती हैं।
4 इसकी तासीर गर्म होती है। इससे मूत्र संबंधी समस्याएं भी हो सकती है। मूत्र में अजीब से गंध आना या अन्य समस्या से बचने के लिए इसका प्रयोग सोच समझ कर करें।
5 गर्भवती महिलाओं या नवजात बच्चों की मांओं को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए। इससे दस्त आदि की समस्याएं हो सकती हैं।
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मेथी देखने में तो हैं छोटे, मगर गुण है अनेक। ये अपने महक और स्वाद के द्वारा पूरे व्यंजन के स्वाद को बदल देने की क्षमता रखते हैं। वैसे तो मेथी का स्वाद थोड़ा कड़वा होता है लेकिन भारतीय रसोईघरों में मेथी का इस्तेमाल साधारणतः करी, सब्ज़ियों से बने व्यंजन, दाल आदि के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है। और मेथी के पत्तों से बनें मेथी पराठा की बात कैसे भूल सकते हैं।
इन सबके अलावा मेथी के बहुत सारे औषधीय गुण भी हैं, जिसके बारे में शायद बहुत कम ही लोग जानते हैं।मेथी में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, नियासिन, पोटेशियम, आयरन, और एल्कलॉयड (क्षाराभ- वनस्पतियों का मूल तत्व) होते हैं। इसमें डाओस्जेनिन नामक यौगिक (कम्पाउन्ड) होता है जो एस्ट्रोजन सेक्स हार्मोन जैसा काम करता है। इस यौगिक के कारण ही मेथी बहुगुणी बन जाता है, जिसके कारण वह स्वास्थ्य से लेकर सौन्दर्य सभी क्षेत्रों में अपना जादू चला पाता है।
मेथी के स्वास्थ्यवर्द्धक गुण :
स्तन-आकार बढ़ाना : अगर आप स्तन के छोटे आकार को लेकर शर्मिंदा महसूस करती हैं तो मेथी को अपने रोज के आहार में शामिल करें। इसका एस्ट्रोजेन हार्मोन स्तन के आकार को बढ़ाने में मदद करता है।
बालों की समस्या से राहत दिलाता है : बालों की समस्या से लड़ने के लिए अपने आहार में मेथी को शामिल करें या बालों पर मेथी का पेस्ट भी लगा सकते हैं, इससे आपके बाल काले और घने बन जायेंगे। अगर आपके बाल झड़ रहे हैं या पतले हो गए हैं तो नारियल के तेल में मेथी के दानों को उबालकर रात भर भिगोकर रखें। अगले दिन सुबह इस तेल को बालों में लगायें, इससे बालों का झड़ना कम हो जाएगा।
एसिड रिफल्क्स या हर्टबर्न से राहत दिलाता है : अपने आहार में एक छोटा चम्मच मेथी को शामिल करने से एसिड रिफल्क्स या हर्टबर्न से प्रभावकारी रूप से राहत मिलता है। इस्तेमाल करने के पहले मेथी के दानों को पानी में भिगोकर रखने से उसके ऊपर म्यूसीलाजिनॉस का स्तर बन जाता है जो पेट में जलन से राहत दिलाने में मदद करता है।
स्तन्य आहार : मेथी में डाओस्जेनिन (Diosgenin= a steroid compound obtained from Mexican yams and used in the synthesis of steroid hormones.) नामक यौगिक होता है जो दूध पिलाने वाली माँ के लिए दूध का उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।महिला-स्वास्थ्य समस्याओं को आसान करता है : मेथी में जो एस्ट्रोजन सेक्स हार्मोन जैसे गुण वाला यौगिक डाओस्जेनिन और आईसोफ्लैवोन्स (isoflavones) होता है वह मासिक धर्म चक्र के समय शारीरिक समस्याओं जैसे उल्टी करने की इच्छा, बेचैनी, मनोभाव में बदलाव आदि समस्याओं को कम करने में मदद करता है। मेनोपोज़ या रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में जो समस्याएं उत्पन्न होती है, जैसे गर्मी लगना, कुछ भी अच्छा न लगना यानि मनोभाव में जल्दी-जल्दी बदलाव आना जैसी अवस्थाओं को कुछ हद तक कम करने में मदद करता है। किशोरावस्था, गर्भावस्था, दूध पिलाने की अवधि में आयरन की कमी को पूर्ण करने में मेथी मदद करता है। इसलिए अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में मेथी साग खाना न भूलें। खाना बनाते वक्त आयरन के सोखने की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए व्यंजन में आलू या टमाटर को डालना न भूलें। पढ़े : महिलाओं के लिए मेथी क्यों है उपयोगी
आसान प्रसव : मेथी शिशु के जन्म की प्रक्रिया को आसान बनाने में बहुत मदद करता है। यह शिशु के जन्म के समय गर्भाशय के संकुचन को बढ़ाकर जन्म की प्रकिया को आसान करने में मदद करता है। इसके कारण यह प्रसव वेदना को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें गर्भधारण के अवस्था में अत्यधिक मात्रा में मेथी न खायें, इससे गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।
कोलेस्ट्रॉल : अध्ययन के अनुसार मेथी शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करती है। पढ़िए : प्राकृतिक तरीके से उच्च कोलेस्ट्रॉल का उपचार
हर्ट की रक्षा : मेथी के दानों में गैलाक्टोमेनन (galactomannan) के गुण के कारण वह दिल के दौरा पड़ने के खतरे को कम करने में मदद करता है। मेथी पोटेशियम का सबसे अच्छा स्रोत होता है जो सोडियम के प्रभाव को कम करके दिल के हृदय गति और रक्त चाप को नियंत्रित करने में मदद करता है। पढ़िए : आयुर्वेदिक तरीके से उच्च रक्तचाप का उपचार कैसे करें
मधुमेह : मेथी मधुमेह ग्रस्त लोगों के लिए वरदान स्वरूप है। मेथी में जो घुलनशील फाइबर गैलाक्टोमेनन होता है, वह रक्त में शुगर के सोखने की प्रक्रिया को कम करने में मदद करता है। पढ़िए: 5 सामान्य तरीकों से मधुमेह (डाइबीटिज) को नियंत्रित करें
हाजमा : मेथी शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है। साथ ही कब्ज़ से भी राहत दिलाता है।
बुखार और गले के दर्द से राहत दिलाता है : एक छोटा चम्मच नींबू का रस और शहद के साथ मेथी खाने से न सिर्फ बुखार कम होता है, म्यूसलिज के प्रभाव से सर्दी-खांसी और गले के दर्द से राहत मिलती है।
कोलोन कैंसर : मेथी का फाइबर शरीर से विषाक्त पदार्थ टॉक्सिन्स को निकालने में सहायता करता है। इस प्रक्रिया के द्वारा वह कैंसर से कोलोन के म्युकस मेमब्रेन की रक्षा करता है।
वज़न घटाने में मदद : सुबह भिगोया हुआ मेथी दाना खाने से पेट देर तक भरा हुआ महसूस होता है। इसलिए जो लोग वज़न घटाना चाहते हैं वे खाली पेट इसका सेवन कर सकते हैं।
त्वचा के सूजन और दाग : अगर आपके त्वचा में कहीं भी जल गया है, फोड़ा हुआ है या एक्जिमा हुआ है, उस जगह पर मेथी के पेस्ट में भिगोया हुआ साफ कपड़ा बाँध दें। यह उपचार प्रभावकारी रूप से काम करता है।
सौन्दर्य : मेथी के बने फेस पैक ब्लैकहेड, मुँहासे, झुर्रियों को रोकने में बहुत प्रभावकारी रूप से काम करते हैं। थोड़े से पानी में मेथी के दानें डालकर उबाल लें फिर उससे मुँह को धोयें। एक और भी तरीका है, मेथी के पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें और उसको चेहरे पर बीस मिनट तक लगाकर रखें। सूखने पर पानी से धो लें। इस पैक से चेहरे की रौनक बढ़ जाती है। पढ़िए : छह आसान तरीकों से अपनी त्वचा की देखभाल करें .
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बेल – Bael
बेल हमारी एक ऐसी धरोहर है जिसे ईश्वरीय माना जाता है। सावन में भगवान शिव की पूजा और व्रत के समय बेलपत्र अर्पित किया जाना ये प्रमाणित करता है कि ये कोई साधारण फल या पत्ते नहीं है। बीलपत्र के तीन पत्ते शिवजी को अर्पित करना तीन प्रकार के अहम ( Ego ) –
"मैं, मेरा और मेरे कारण" शिवजी के चरणों में अर्पित किये जाने का सूचक है। यानि ये हर तरह का अहम भाव त्यागने का सन्देश है।
ये बहुत पुराना पारम्परिक औषधीय पेड़ है। लगभग 4000 सालों से इसे उपयोग में लाया जा रहा है। आयुर्वेद ने दशमूल जड़ीबूटी में इसे शामिल किया है। दशमूल दस ऐसी आयुर्वेदिक दवाओं का मिश्रण है, जिनकी मदद से कई प्रकार की लाभकारी आयुर्वेदिक दवा बनाई जाती है। जो विभिन्न रोगों को ठीक करती है। बील का फल, पत्ते, छाल और जड़ सभी दवा के रूप मे काम आते है।
इसमें केलशियम, पोटेशियम, आयरन, फास्फोरस, प्रोटीन और विटामिन "A", विटामिन "C", विटामिन "B" तथा कई ऑर्गनिक कंपाउंड व एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है। इसमें भरपूर मात्रा में फायबर होता है। इन्ही कारणों की वजह ये एक बहुत ही फायदेमंद फल है।
इसका बोटैनिकल नाम एगल मरमेलोस है और ये रुतेसिया फैमिली में का सदस्य है। इंग्लिश में इसे वुड एप्पल (Wood Apple) कहते है।
हिंदी में इसे कैत के नाम से भी जाना जाता है।
बेल का फल अनेक प्रकार के रोगों की दवा है। ये कब्ज, अपच, पेट के अल्सर, बवासीर, साँस की तकलीफ, डायरिया आदि से मुक्ति दिलाता है। वायरल और बेक्टेरियल इन्फेक्शन को रोकता है। कैंसर जैसे रोग से बचाता है। इनके अलावा भी कई रोगों में काम आता है।
सफ़ेद दाग और टूटी हुई हड्डी जोड़ने के लिए भी बील दवा के रूप में काम आता है। ये अग्नाशय को ताकत देता है, जिससे इन्सुलिन का स्तर सही बना रहता है और खून में शुगर कंट्रोल रहती है इस तरह डायबिटीज ठीक होती है। ये ब्लड प्रेशर भी कम करता है।
बेल के फायदे लाभ – Bael Ke Fayde , Benefits
1. पेचिश – Dysentery : बील पेचिश ठीक करने के लिए बहुत प्रभावकारी है। इससे पुरानी पेचिश तक ठीक हो सकती है। सूखा बील का पाउडर और धनिया पाउडर आधा -आधा चम्मच और मिश्री एक चम्मच मिलाकर सुबह शाम पानी के साथ लेने से पेचिश ठीक होती है। पेचिश के कारण दस्त के साथ खून आता हो तो वो भी बंद होता है।
सौंफ पाउडर – 3 चम्मच ,सूखा बील का पाउडर -3 चम्मच और सोंठ पाउडर दो चम्मच इन तीनो को एक गिलास पानी में उबाल लें। जब आधा रह जाये तब ठंडा होने पर छान लें। ये पानी सुबह शाम पीने से पेचिश ठीक हो जाती है।
बील का मुरब्बा प्रतिदिन खाने से पेचिश में आराम मिलता है। इसका गोंद भी दस्त में और पेचिश में लाभकारी होता है।
तीन चम्मच बील का गूदा और एक चम्मच इमली एक कप पानी में भिगो दें। दो घंटे बाद मसल कर छान लें। इसमें स्वाद के अनुसार मिलाकर मिश्री मिलाकर पियें। पसंद के हिसाब से पानी की मात्रा थोड़ी बढ़ा सकते है। ये बील का शरबत नियमित पीने से कब्ज ठीक हो जाती है।
गर्मी के मौसम में बील बाजार में आसानी से मिल जाता है। इसका ऊपर का कड़क छिलका तोड़कर अंदर का गूदा चार चम्मच एक गिलास पानी में दो घंटे भिगो दें। मसल कर छान कर मिश्री मिलाकर पीएं। मिश्री की जगह काला नमक भी ले सकते है। ये शरबत कब्ज मिटा देता है।
3. मधुमेह – diabitis : बीलपत्र मधुमेह (डायबिटीज) रोग में बहुत लाभकारी है। 10 -12 बीलपत्र और 4 -5 काली मिर्च पीस कर पानी में मिलाकर रोज पीने से डायबिटीज रोग में आराम मिलता है। बील का जूस पीने से अग्नाशय ( Pancreas ) को शक्ति मिलती है और इन्सुलिन की मात्रा संतुलित रहकर डायबिटीज में फायदा मिलता है।
5. सफ़ेद दाग – Vitiligo : त्वचा के ऊपर बनने वाले सफ़ेद धब्बे बील की मदद से ठीक हो सकते है। बील के गूदे में सोरलिन ( psoralen ) नाम का तत्व होता है जो स्किन की धूप सहने की शक्ति बढ़ाता है। इसके अलावा बील में कैरोटीन भी होता है। ये दोनों तत्व मिलकर स्किन का रंग एकसार बनाए रखने में महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाते है। नियमित बील के उपयोग से सफ़ेद दाग हलके पड़कर त्वचा सामान्य हो जाती है।
6. दस्त और हैजा – diarrhoea and cholera : बील में मौजूद टेनिन नामक तत्व में एंटी बैक्टीरियल गुण होते है। बैक्टीरिया के कारण होने वाले दस्त में बील का ये गुण बहुत लाभदायक होता है। बारिश के मौसम की बीमारियों में दस्त और हैजा अधिक होते है जिसमे बील विशेष रूप से गुणकारी होता है।
बील के विटामिन ” C ” से लाभ : बील में प्रचुर मात्रा में विटामिन C होता है। जो इम्युनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। विटामिन C के कारण ही ये स्कर्वी नामक रोग से भी बचाव करता है। शरीर में चुस्ती फुर्ती लाकर सुस्ती मिटाता है। विटामिन “C ” के कारण ही बील दांत मसूड़ों को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।
8. कोलेस्ट्रॉल – cholesterol : बील की पत्तियों में कोलेस्ट्रॉल कम करने का गुण होता है। बील की ताजा पत्तियों का रस पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है। सुबह खाली पेट एक चम्मच रस प्रतिदिन लेना चाहिए। रस निकालना भी सरल है। पत्तियों को कूट पीस कर कपड़े में डालकर नीचो कर रस निकाल लें। ये रस कुछ दिन लेने से जिन्हे कोलेस्ट्रॉल नहीं है, उन्हें भी दिल की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।
9. लीवर – Liver : बील में बीटा कैरोटीन, थायमिन और रिबोफ्लेविन होने के कारण लीवर की समस्या से मुक्ति दिलाकर लीवर को शक्ति शाली बनाता है।
10. किडनी – kidney : बील में शरीर के विषैले तत्व को बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति होती है। बील का नियमित उपयोग किडनी की मदद करके किडनी को स्वस्थ बनाता है। अतः किडनी की समस्या में बील का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
11. बेल का शर्बत बनाने की विधि/bel ka sharbat banane ki vidhi : बील का शर्बत बनाने के लिए पहले बील का सीरप तैयार कर ले।
बील का सीरप बनाने का तरीका :-
सामग्री :-
सूखा हुआ बील -250 ग्राम
पानी -2 लीटर
शक्कर – 1 किलोग्राम
सिट्रिक एसिड – 1 चुटकी
सूखे बील को धोकर पानी में रात भर भिगो दें। सुबह इसे उबालने चढ़ा दें। आधा रह जाए तब बारीक चलनी या कपड़े से छान लें। इसमें शक्कर मिलाकर मध्यम आँच पर दस मिनट उबाल लें। बहुत ज्यादा देर न उबालें। गैस से उतारकर इसमें सिट्रिक एसिड मिला दें। ठंडा होने पर साफ बोतल में भर ले। ये बील का सीरप तैयार है।
जब भी शर्बत बनाना हो तो एक ग्लास के लिए :-
1/4 ग्लास बील सीरप में पानी डालकर ग्लास पूरा भर लें।
एक चम्मच नींबू का रस मिला लें
बर्फ डालें।
मेहमान को पिलाएँ , खुद भी पिएँ।
स्वाद के अनुसार भुना जीरा , काला नमक , काली मिर्च आदि मिला सकते है।
बेल का शेक बनाने की विधि/bel ka shek banane ki vidhi
चार ग्लास शेक के लिए :-
बील के गूदे को पानी में दो घंटे के लिए भिगो दें।
बीज निकाल दें ।
बील का ये गूदा – एक कप
वेनिला आइस क्रीम – एक कप
दूध – दो ग्लास
थोड़ी बर्फ
स्वाद के अनुसार शक्कर
मिक्सी में घुमा लें।
ग्लास में डालकर थोड़े मेवे डाल दें।
बील का स्वादिष्ट शेक तैयार है।
बील का जूस बनाने की विधी
bel ka juice banane ki vidhi
बील के ऊपरी कड़क हिस्से को तोड़कर अंदर का गूदा पानी में भिगो दें। बील का गूदा पका हुआ यानी थोड़ा लाल होना चाहिए। गूदा अगर सफेद या पीला है तो कच्चा है।
चार घंटे बाद गूदे को पानी में मसल लें। इस पानी को छान लें। छानने के लिए स्टील की छलनी लें। चम्मच से थोड़ा दबा कर पानी डालकर गूदा अच्छे से निकल लें।
छने हुए गूदे में यदि चाहें तो जरूरत के हिसाब से और पानी मिला लें।
अब इसमें स्वाद के अनुसार शक्कर , काला नमक, थोड़ी काली मिर्च मिलाकर पिएँ।
खरबूजे के आकार का बील है तो चार ग्लास जूस के लिए चौथाई गूदा ही काफी होगा।
बील के गूदे को बीजों को नहीं मसलना चाहिए वर्ना जूस का स्वाद खराब हो सकता है। गूदे को मिक्सी में बीज सहित घुमाने से भी जूस का स्वाद बिगड़ जाता है।
स्रोत : http://www.dadimakenuskhe.com/%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A6%E0%A5%87/
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aajtak.in [Edited by: भूमिका राय]
नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2016 | अपडेटेड: 13:44 IST
बेल का रस पीने के फायदे
बेल एक ऐसा पेड़ है, जिसके हर हिस्से का इस्तेमाल सेहत बनाने और सौंदर्य निखारने के लिए किया जा सकता है. आयुर्वेद में इसके कई फायदों का उल्लेख मिलता है. इसका फल बेहद कठोर होता है, लेकिन अंदर का हिस्सा मुलायम, गूदेदार और बीजों से युक्त होता है.
बेल के फल का जीवनकाल काफी लंबा होता है. पेड़ से टूटने के कई दिनों बाद भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. बेल का इस्तेमाल कई तरह की दवाइयों को बनाने में तो किया जाता है ही साथ ही ये कई स्वादिष्ट व्यंजनों में भी प्रमुखता से इस्तेमाल होता है. बेल में प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है.
बेल का रस पीने के फायदे:
1. दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव में सहायक: बेल का रस तैयार कर लीजिए और उसमें कुछ कुछ बूंदें घी की मिला दीजिए. इस पेय को हर रोज एक निश्चित मात्रा में लें. इसके नियमित सेवन से दिल से जुड़ी बीमारियों से बचाव होता है. ये ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है.
2. गैस, कब्ज की समस्या में राहत: नियमित रूप से बेल का रस पीने से गैस, कब्ज और अपच की समस्या में आराम मिलता है.
3. कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार: बेल का रस कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मददगार होता है.
4. दस्त और डायरिया की समस्या में भी फायदेमंद: आयुर्वेद में बेल के रस को दस्त और डायरिया में बहुत फायदेमंद माना गया है. आप चाहें तो इसे गुड़ या चीनी के साथ मिलाकर पी सकते हैं.
5. ठंडक देने का काम करता है: बेल के रस को शहद के साथ मिलाकर पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है. अगर आपको मुंह के छाले हो गए हैं तो भी इसका सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा. गर्मी के लिहाज से ये एक बेहतरीन पेय है. एक ओर जहां ये लू से सुरक्षित रखने में मददगार होता है वहीं शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करता है.
6. नई मांओं के लिए भी है फायदेमंद: अगर आप एक नई मां हैं तो आपके लिए बेल का रस पीना बहुत फायदेमंद रहेगा. ये मां के स्वास्थ्य को बेहतर करने में तो सहायक है ही साथ ही ब्रेस्ट मिल्क प्रोडक्शन को भी बढ़ाता है.
7. कैंसर से बचाव के लिए: नियमित रूप से बेल का रस पीने से ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका काफी कम हो जाती है.
8. खून साफ करने में सहायक: बेल के रस में कुछ मात्रा गुनगुने पानी की मिला लें. इसमें थोड़ी सी मात्रा में शहद डालें. इस पेय के नियमित सेवन से खून साफ हो जाता है.
स्रोत : http://aajtak.intoday.in/story/benefits-of-bael-juice-1-862486.html
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Bel ke Aushdhiy Pryog | बेल के औषधीय प्रयोग | Medicine Uses of Bel
बेल के औषधीय प्रयोग (Medicine Uses of Beal)
1. अपच: बेल का पका हुआ फल पेट की अपच को खत्म करने के लिए बेहद उपयोगी ओता हैं. यदि आपके पेट में कब्ज हो गई हैं तो आपको पके हुए बेल के गूदे का सेवन 2 – 4 दिनों तक रोजाना करना चाहिए. कुछ ही दिनों में आपको पेट की कब्ज से मुक्ति मिल जायेगी.
2. अल्सर: अल्सर के रोग से मुक्ति पाने के लिए भी बेल का प्रयोग किया जा सकता हैं. बेल के अलावा बेल के पेड़ की पत्तियां जिन्हें बेलपत्र भी कहा जाता हैं. उसका प्रयोग भी आप इस रोग से छुटकारा पाने के लिए कर सकते हैं. अल्सर के रोग से निजात पाने के लिए बेल की दस या बारह पत्तियां लें और इन्हें पानी में भिगो दें. अगले दिन सुबह उठकर इन पत्तियों को पानी में से निकालकर पानी को छान लें और इसे पी जाएँ. कुछ दिनों तक लगातार ऐसे करने से आपको अवश्य ही इस रोग से राहत मिल जायेगी.
3. नेत्ररोग: बेल के पेड़ की पत्तियां नेत्र से सम्बन्धित रोगों के लिए भी कभी लाभदायक होती हैं. आप इनका प्रयोग कर नेत्र के रोगों से मुक्ति पा सकते हैं. नेत्र के रोगों को ठीक करने के लिए बेल की कुछ पत्तियों का रस निकाल लें और उसे अपनी आँखों में काजल की तरह लगा लें. कुछ दिनों तक लगातार बेल के पत्तों का प्रयोग करने से नेत्र रोग ठीक हो जाएगा.
4. श्वास रोग: सांस से सम्बन्धित रोगों को दूर करने के लिए भी बेल के पत्तों का रस बहुत ही लाभदायक होता हैं. सांस की बिमारी से राहत पाने के लिए बेल की कुछ पत्तियां लें और उन्हें पीसकर पत्तियों का रस निकाल लें. अब बेल की पत्तियों के रस की समान मात्रा में तिल का तेल लें और इसे बेल की पत्तियों के रस में अच्छी तरह से मिला लें. अब इस रस को थोडा गर्म कर लें और इसमें काली मिर्च तथा जीरे का पाउडर मिला दें. अब इस रस को कुछ देर ठंडा करने के बाद अपने गले पर लगा लें. इस मिश्रण को गले पर लगाने से आपको काफी राहत मिलेगी तथा अगर आपको खांसी या जुखाम की शिकायत हैं तो इन दोनों परेशानियों से भी आपको मुक्ति मिल जायेगी. CLICK HERE TO READ MORE ABOUT बेल एक उपयोगी फल ...
5. संग्रहणी: यदि आप संग्रहणी की बिमारी से अत्यधिक परेशान हैं और लगातार यह बिमारी बढती जा रही हैं और संग्रहणी का वेग अधिक हो गया हैं और उसमें खून आने की भी शिकायत हैं तो आप इस रोग से मुक्ति पाने के लिए कच्चे बेल के चुर्ण का प्रयोग कर सकते हैं. इस बिमारी से राहत पाने के लिए बेल के कच्चे फल का चुर्ण लें और एक चम्मच शहद लें. अब इन दोनों को एक साथ मिला लें और इसका सेवन करें. प्रतिदिन 1 या 2 चम्मच इस मिश्रण का सेवन करने से आपको संग्रहणी के रोग से छुटकारा मिल जाएगा.
संग्रहणी के रोग से मुक्ति पाने के लिए आप पके हुए बेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए पके हुए बेल को फोड़ कर इसके अंदर का गूदा निकाल लें. अब एक कटोरी दही लें और उसमें बेल के गूदे को मिलाकर हल्की आँच पर भून लें. भूनने के बाद इस मिश्रण को उतार लें और इसमें अपनी इच्छानुसार कच्ची शक्कर मिला लें. अब एक गिलास हल्का गरम दूध लें और उसके साथ इस मिश्रण का सेवन करें. प्रतिदिन दूध के साथ दो चम्मच मिश्रण का सेवन करने से जल्द ही पुरानी संग्रहणी की बिमारी ठीक हो जायेगी.
6. शरीर में ठंडक: शरीर को ठंडक प्रदान करने के लिए बेल बहुत ही लाभप्रद होता हैं. इसलिए गर्मी के दिनों में इसके जूस का सेवन करना अधिक्तर लोग पसंद करते हैं. बल का फल शरीर को ठंडक प्रदान करने के साथ – साथ शरीर के पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद होता हैं. गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडक प्रदान करने के लिए पके हुए बेल का गूदा निकाल लें. अब एक बर्तन में दूध लें और उसमें बेल के गूदे को डालकर मिला लें. अब इसमें 2 चम्मच शक्कर डालें और शर्बत को अच्छी तरह से घोलने के बाद इस मिश्रण का सेवन करें. गर्मी के दिनों में रोजाना बेल के शर्बत का प्रयोग करने से शरीर को ठंडक मिलती हैं.
7. कब्ज: अगर आपके पेट में गैस (कब्ज) बनने की शिकायत हैं तो इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए भी आप बेल के गूदे का प्रयोग कर सकते हैं. पेट की कब्ज से मुक्ति पाने के लिए 150 ग्राम पके हुए बेल का गूदा लें और उसे रोजाना सोने से पहले खाकर सोयें. बेल के गूदे को खाकर सोने से मल मुलायम होकर निकल जाता हैं और पेट की कब्ज भी ख़त्म हो जाती हैं. यदि खुश्की अधिक हैं तो भी आप बेल के गुदे का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए बेल का गूदा लें और उसमें मिश्री के दाने या शक्कर अच्छी तरह से मिला लें. अब इस मिश्रण का सेवन करें. इस मिश्रण का सेवन रोजाना करने से खुश्की नहीं होती. CLICK HERE TO READ MORE ABOUT बेल का आयुर्वेदिक इस्तेमाल ...
बेल के औषधीय प्रयोग
8. अतिसार: अतिसार की बिमारी से राहत पाने के लिए भी आप बेल का प्रयोग कर सकते हैं. अतिसार के रोग से मुक्ति पाने के लिए 30 ग्राम सुखी बेलगिरी लें और 10 ग्राम कत्था लें. अब इन दोनों को अच्छी तरह से पीस कर बारीक़ चुर्ण बना लें. अब इस चुर्ण में 1 ग्राम चीनी मिला लें. अब एक गिलास पानी लें. अब एक चम्मच चुर्ण को पानी के साथ फांक लें. रोजाना इस चुर्ण का सेवन करने से कुछ ही दिनों के अन्दर अतिसार का रोग ठीक हो जाएगा.
9. बच्चों में अतिसार की बिमारी: अगर बच्चों को अतिसार की बीमारी हो गई हैं तो भी आप उन्हें इस बिमारी से निजात दिलाने के लिए भी सूखे हुए बेल का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए सुखी बेलगिर का एक टुकड़ा लें और अर्क वाली सौंफ लें. अब एक साफ पत्थर पर इन दोनों को पीसकर बारीक़ चुर्ण तैयार कर लें. अब इस पिसे हुए चुर्ण की एक चौथाई मात्रा दिन में 2 – 3 बार अपने बच्चे को चटायें. रोजाना बच्चे को चुर्ण चटाने से कुछ ही समय में बच्चे को अतिसार की बिमारी से छुटकारा मिल जाएगा.
10. यौन रोग: यौन रोग जैसे स्त्रियों के रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर तथा पुरुषों में धातु दुर्बलता, स्वप्नदोष, पुरुष प्रमेह आदि रोगों के लिए भी बेल बहुत ही फायदेमंद होता हैं. इन सभी रोगों से मुक्ति पाने के लिए 4 ग्राम बेल के पत्तें लें और इन्हें पीस लें. अब एक चमच्च शहद लें और उसे बेल के पत्ते के चूर्ण में मिला दें. अब एक गिलास दूध लें और इसके साथ एक चमच्च मिश्रण का सेवन करें. रोजाना दूध के साथ एक चम्मच चुर्ण का सेवन करने से इन सभी यौन रोगों से पुरुष और महिला को मुक्ति मिल जाती हैं.
स्रोत : http://www.jagrantoday.com/2015/12/bel-ke-aushdhiy-pryog-medicine-uses-of.html
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गर्मियों में हेल्थगार्ड है बेल का फल, जानें इसके फायदे
Patrika news network Posted: 2015-04-23 12:01:52 IST Updated: 2015-04-23 12:01:52 IST
संक्षिप्त विवरण
बील या बेल एक ऐसा ही फल हो, जो अपने विशेष गुणों के कारण गर्मियों में अधिक उपयोगी माना जाता है...
जयपुर
अस्थमा
बेल-पत्रों से बना क्वाथ (काढ़ा) सर्दी-जुकाम के कहर को कम करता है। यह सर्दी से होने वाली श्लेष्मा (कफ) को कम करता है और अस्थमा के प्रसार को धीमा करता है।
आंखों का संक्रमण
बेल-पत्रों को आंखों में होने वाले विभिन्न संक्रमण तथा सूजन के निदान में व्यवहार किया जाता है। खासतौर से नेत्र-शोध(Psoralen) यह बहुत प्रभावी होता है।
बुखार
बेल-मूल तथा पेड़ का छाल से बने क्वाथ से विभिन्न तरह के ज्वरों का इलाज किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में बेल-मूलों से वात-कफ-पित्त से होने वाले दोषों तथा ज्वरों को ठीक किया जाता है।
कब्ज
उदर विकारों में बेल का फल अचूक दवा के रूप में उपयोग किया जाता है। फल के नियमित सेवन से कब्ज जड़ से समाप्त हो जाता है। बेल फल उदर की स्वच्छता के अलावा आंतों को साफ कर उन्हें ताकत भी देता है।
डायरिया
गर्मियों में प्राय: अतिसार/ डायरिया की वजह से पतले दस्त होने लगते हैं, ऐसी स्थिति में कच्चे बेल को आग में भून कर उसका गूदा, रोगी को खिलाने से फौरन लाभ मिलता है। बेल का मुरब्बा खाने से पित्त व अतिसार में लाभ होता है। पेट के सभी रोगों में बेल का मुरब्बा खाना लाभप्रद है।
गर्मियों में जरा-सी असावधानी से लू लगने का खतरा बना रहता है, इसलिए गर्मियों में बेल का सेवन जरूर करें। अगर लू लग जाए, तो निवारण करने के लिए बेल के ताजे पत्तों को पीसकर मेहंदी की तरह पैर के तलुओं में ठीक से मलें। इसके अलावा सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करने से राहत मिलती है। बेल के शर्बत में मिश्री मिलाकर पीने से भी तुरंत राहत मिलती है।
अल्सर
बेल फल तथा बेल पत्रों के रस से बनी दवाओं का प्रयोग पेप्टिक अल्सर को ठीक करने के लिए किया जाता है। फल के गूदे से गैस्ट्रिक म्यूकोसा पर म्यूसिलेजिनस लेयर बन जाती है, जिससे अम्लता म्यूकोसल स्तर के साथ प्रतिक्रिया नहीं कर पाती है और अल्सर बढऩे से रूक जाता है।
कान की समस्या
बेल की जड़ों में एस्ट्रिंजेंट ए्क्टिविटी पाई जाती है और इसी वजह से यह घरेलू उपायों में कान की समस्या को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। बेल की जड़ों को नीम के पत्तों के साथ मिलाकर बनी दवाएं कान के संक्रमण, असाध्य सूजन तथा पस को निकलाने में मदद करती है।
कैंसर
अध्ययनों ने बताया है कि बेल फल के सत्त में एंटी-प्रोलिफरेटिव एक्टिविटी होती है। जो मानवों में ट्यूमर सेल्स के फैलाव को रोकने में मदद करती है। गूदे से बने शर्बत में जल में घुलनसील एंटी-ऑक्सीडेंट्स, फेनोलिक तत्व तथा एंटी-म्यूटाजेन्स पाए जाते हैं, जो कैंसर-रोधी होते हैं तथा ये शरीर की सेल्स को फ्री-रेडिएशन से होने वाली क्षति से बचाते हैं।
ल्यूकोडर्म
बेल फल के स्वादिष्ट तथा सुंगधित गूदे में सोरेलेन (क्कह्यशह्म्ड्डद्यद्गठ्ठ) नामक घटक पाया जाता है, जो सामान्य त्वचा की कड़ी धूप को सहने की शक्ति या टोलेरेंस पॉवर बढ़ाता है। इससे त्वचा का सामान्य रंग नहीं बदलता। त्वचा के सामान्य रंग से श्वेत होने की स्थिति को ल्यूकोडर्म कहते हैं और बेल फल का सेवन इस त्वचा विकार का अचूक उपाय माना जाता है।
मधुमेह
मधुमेह रोगियों के लिए बेल फल बहुत लाभदायक है। इसकी पत्तियों को पीसकर उसके रस का दिन में दो बार सेवन करने से मधुमेह रोगियों की रिस्क कम होती है। पत्तों के सत्त से ब्लड यूरिया तथा कोलेस्ट्रोल को सार्थक तरीके से कम करता है। बेल प्राकृतिक तौर पर एक क्षारीय फल है, जो शरीर से जहरीले पदार्थ निकालता है, अम्लीयता कम करता है।
स्रोत : http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/diet/health-benefits-of-bel-fruit-976617.html
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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अतिसार
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अरण्डी
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अर्श
अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles
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अल्सर
अल्सर-Ulcers
अवसाद
अवसाद-Depression
अश्मःभेदः
अश्वगंधा
अश्वगंधा-Winter Cherry
असंतुष्ट
असफल
असर नहीं
असली
अस्थमा
अस्थमा-दमा-Asthma
आइरन
आक
आकड़ा
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आंत्रकृमि-Helminth
आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever
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आधासीसी
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आमला
आमवात
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आयुर्वेद
आयुर्वेदिक
आयुर्वेदिक उपचार
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आयुर्वेदिक-Ayurvedic
आरोग्य
आँव
आंव
आंवला
आंवला जूस
आंवला रस
आशावादी-Optimistic
आसन
आसान प्रसव-Easy Delivery
आहार चार्ट
आहार-Food
आॅपरेशन
आॅर्गेनिक
आॅर्गेनिक कौंच
इच्छा-शक्ति
इन्द्रायण
इन्फ्लुएंजा
इमर्जेंसी में होम्योपैथी
इमली-Tamarind Tree
इम्युनिटी
इलाज
इलाज का कुल कितना खर्चा
इलायची
उच्च रक्तचाप
उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension
उत्तेजक
उत्तेजना
उदर शूल-Abdominal Haul
उदासी
उन्माद-Mania
उपवास
उम्र
उल्टी
ऊर्जा
एक्जिमा
एक्यूप्रेशर
एग्जिमा
एजिंग-Aging
एंटी ऑक्सीडेंट्स
एंटी-ओक्सिडेंट
एंटीऑक्सीडेंट
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एलर्जी-Allergy
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एलोवेरा जूस
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ऐलोपैथ
ऐसीडिटी
ऑर्गेनिक
ओमेगा 3 के स्रोत
ओमेगा-3
ओर्गेनिक
औषध-Drug
औषधि सूची-Drug List
औषधियों के नुकसान-Loss of drugs
कचनार
कचनार-Bauhinia Purpurea
कटुपर्णी
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कनेर
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कपिकच्छू
कपूरीजड़ी
कफ
कब्ज
कब्ज़
कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation
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कब्जी
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कर्णरोग
कष्टार्तव-Dysmenorrhea
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काली जीरी
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कास-खांसी-Cough
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किडनी संक्रमण
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कुटकी-Black Hellebore
कुबडापन
कुमेड़ा
कुल्थी
कुल्ला
कुष्ट
कुष्ठ
कृमि
केला
केसर
कैफीन-Caffeine
कैलोरी
कैलोरी चार्ट
कैलोरी-Calories
कैवांच
कैविटी
कैंसर
कॉफी
कॉफ़ी
कॉलेस्ट्रॉल
कोंडी घास
कोढ़
कोबरा
कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol
कोलेस्ट्रोल
कौंच
कौमार्य
क्रियाशीलता
क्रोध
क्षय रोग-Tuberculosis
क्षारीय तत्व
क्षुधानाश
खजूर
खजूर की चटनी
खनिज
खरबूजा-Musk melon
खरेंटी
खरैंटी शिलाजीत
खाज
खांसी
खिरेंटी
खिरैटी
खीप
खीरा
खुजली
खुशी-Joy
खुश्की
खुश्बू
खोया
गंजापन-Baldness
गठिया
गठिया-Arthritis
गठिया-Gout
गड़तुम्बा
गंडा-ताबीज
गंध
गन्ने का रस
गरमा गरम
गर्भ निरोधक
गर्भधारण
गर्भपात
गर्भवती
गर्भवती कैसे हों?
गर्भावस्था
गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy
गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy
गर्भाशय
गर्भाशय भ्रंश
गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy
गर्म पानी
गर्मी
गर्मी-Heat
गलगण्ड
गाजर
गाजवां
गांठ
गाँठ-Knot
गारंटी
गारण्टेड इलाज
गाल ब्लैडर
गिलोय
गिल्टी
गुड़हल
गुंदा
गुदाद्वार
गुदाभ्रंश
गुम्मा
गुर्दे
गुलज़ाफ़री
गुस्सा
गृध्रसी
गृह-स्वामिनी
गेदुआ की छाछ
गैस
गैस्ट्रिक
गैहूं का जवारा
गोक्षुरादि चूर्ण
गोखरू
गोखरू (LAND CALTROPS)
गोंद कतीरा-Hog-Gum
गोंदी
गोभी-Cabbage
गोरख मुंडी
गोरखगांजा
गोरखबूटी
गोरखमुंडी
ग्रीन-टी
घमोरी
घरेलु नुस्खे
घाघरा
घाव
चकवड़
चक्कर
चपाती
चमत्कारिक सब्जियां
चरित्र
चर्बी
चर्म
चर्म रोग
चर्मरोग
चाय
चाय-Tea
चालीस के पार-Forty Across
चिकनगुनिया
चिकित्सकीय
चिटकन
चिंतित
चिरायता-Absinth
चिरोटा
चुंबन
चोक
चौलाई
छपाकी
छरहरी काया
छाछ
छाजन बूटी
छाले
छींक
छीकें
छुअ
छुआरा
छुहारा
छोटा गोखरू
छोटा धतूरा
छोटी हरड़
जंक फूड
जकवड़
जख्म
जंगली तिल्ली
जंगली तुलसी
जंगली पेड़
जंगली मिर्ची
जंगली-कटीली चौलाई
जटामांसी-Spikenard
जलजमनी
जलन
जलोदर रोग-Ascites Disease
जवारा
जवारे
जवासा-Alhag
जहर
जामुन का जूस
जायफल
जिगर
जीरा
जीवन रक्षक
जीवनी शक्ति
जुएं
जुकाम
जुदाई
जुलाब
जूएं
जूस
जोड़ों के दर्द
जोड़ों में दर्द
जौ
ज्यूस
ज्योति
ज्वर
ज्वर-Fiver
झाइयाँ
झांईं
झाड़-फूंक
झुर्रियाँ
झुर्रियां
झुर्री
झूठे दर्द
टमाटर का रस
टमाटर-Tomatoes
टाइफाइड
टाटबडंगा
टायफायड
टूटी हड्डी
टॉन्सिल
टोटला
ट्यूमर
ठंड
ठंडापन
ठेकेदार डॉक्टर
डकार
डकारें
डायबिटीज
डायरिया
डिग्री फ़ारेनहाइट
डिग्री सेल्सियस
डिजिसेक्सुअल
डिटॉक्सीफाई
डिटॉक्सीफिकेशन
डिनर
डिप्रेशन
डिब्बाबंद भोजन
डिलेवरी
डीकामाली
डीगामाली
डेंगू
डेंगू-Dengue
डॉ. निरंकुश
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
डॉ. मीणा
ढकार
ढीलापन
ढीली योनि
तकलीफ का सही इलाज
तंत्र-मंत्र
तम्बाकू
तरबूज-Watermelon
तलाक
ताकत
तिल
तिल्ली
तुंबा
तुंबी
तुम्बा
तुलसी
तेल
त्रिदोषनाशक
त्रिफला
त्वचा
त्वचा रोग
थकान
थाईरायड
थायरायड-Thyroid
थायरॉइड
दण्डनीय अपराध
दंत वेदना
दन्तकृमि
दन्तरोग
दमा
दर वेदना
दरार
दर्द
दर्द निवारक
दर्द निवारक दवा
दर्दनाक
दस्त
दही
दाग-धब्बे-Stains-Spots
दाढ़
दांत
दांतो में कैविटी-Teeth Cavity
दाद
दाम्पत्य
दाम्पत्य विवाद सलाहकार
दाम्पत्य-Conjugal
दाल
दालचीनी
दालें
दिमांग
दिल
दीर्घायु
दु:खी
दुर्गंध
दुर्बलता
दुष्प्रभाव
दुष्प्रभावरहित
दूध
दूध वृद्धि
दूधी
दूधी-Milk Hedge
दृष्टिदोष
दो मन
द्रोणपुष्पी
द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes
धड़कन
धनिया बीज
धनिया-Coriander
धमासा
धात
धातु
धातु पतन
धार्मिक
धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं?
धैर्यहीन
नज़ला
नपुंसक
नपुंसकता
नाइट्रिक एसिड
नाक
नाखून
नागबला
नागरमोथा
नाडी हिंगु
नाड़ी हिंगु (डिकामाली)
नामर्दी
नारकीय पीड़ा
नारियल
नाश्ता
निमोनिया
निम्न रक्तचाप
निम्बू
नियासिन
निराश
निरोगधाम
निर्गुण्डी
निर्गुन्डी
निष्कपट स्नेह
निष्ठा
निसोरा
नींद
नींबू
नींबू-Lemon
नीम-azadirachta indica
नुस्खे
नुस्खे-Tips
नेगड़
नेत्र रोग
नेुचरल
नैतिक
नॉर्मल डिलेवरी
नोनिया
नौसादर
न्युमोनिया-Pneumonia
न्यूरॉन्स
पक्षघात
पंचकर्म
पढ़ने में मन लगेगा
पंतजलि
पत्तागोभी-CABBAGE
पत्थर फोड़ी
पत्थरचट्टा
पत्नी
पथरी
पदार्थ
पनीर
पपीता
पपीता-CARICA PAPPYA
पमाड
परदेशी लांगड़ी
परम्परागत चिकित्सा
परहेज
पराठा
परामर्श
परिस्थिति
पवाड़
पवाँर
पाइल्स
पाक-कला
पाचक
पाचन
पाचनतंत्र
पाचनशक्ति
पाठक संख्या 16 लाख पार
पाठक संख्या पंद्रह लाख
पायरिया
पारदर्शिता
पारिजात
पालक
पालक-Spinach
पित्त
पित्ताशय
पित्ती
पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne
पिरामिड
पीलिया
पीलिया-Jaundice
पीलिया-कामला-Jaundice
पुआड़
पुदीना
पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava
पुरुष
पुंसत्व
पेचिश
पेट के कीड़े
पेट दर्द
पेट में गैस
पेट रोग
पेड़
पेद दर्द
पेरिकिटो सेसिल
पेशाब
पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
प्लूरिसी-Pleurisy
प्लेटलेट्स
फंगल
फटन
फफूंद-Fungi
फरास
फल
फाइबर
फिटकरी
फुंसी-Pimples
फूलगोभी-CAULIFLOWER
फेंफड़े
फेरम फॉस
फैट
फैटी लीवर
फोटोफोबिया
फोड़ा
फोड़े-Boils
फोरप्ले
फोलिक एसिड
फ्लू
फ्लू-Flu
फ्लेक्स सीड्स
बकायन
बकुल
बड़ी हरड़
बथुआ
बथुआ पाउडर
बथुआ-White Goose Foot
बदबू
बंध्यापन
बबूल-ACACIA
बरसाती बीमारियाँ
बरसाती बीमारियां
बलगम
बलवृद्धि
बला
बलात्कार
बवासीर
बहरापन
बहुनिया
बहुमूत्रता-
बांझपन
बादाम-Almonds
बादाम.
बाल
बाल झड़ना
बाल झडऩा-Hair Falling
बिना सिजेरियन मां बनें
बिवाई
बीजबंद
बीड़ी
बीमारियों के अनुसार औषधियां
बीमारी
बील
बुखार
बूंद-बूंद पेशाब
बेल
बेली
बैक्टीरिया
बॉयोकैमी
ब्रह्मदण्डी
ब्रेस्ट ग्रोथ
ब्लड प्रेशर
ब्लैक मेलिंग
ब्लॉकेज
भगंदर
भगंदर-Fistula-in-ano
भगनासा
भगन्दर
भगोष्ठ
भड़भांड़
भय
भविष्य
भस्मक रोग
भावनात्मक
भुई आंवला-Phyllanthus Niruri
भूई आमला
भूई आंवला
भूख
भूख बढ़ाने
भूत-प्रेत
भूमि
भूमि आंवला
भोजनलीवर
मकोय
मकोय-Soleanum nigrum
मक्का
मक्का के भुट्टे
मंजीठ
मटर-PEA
मंद दृष्टि
मंदाग्नि
मदार
मधुमेह
मधुमेह-Diabetes
मन्दाग्नि-Dyspepsia
मरुआ
मरोड़
मर्द
मर्दाना
मलाशय
मलेरिया
मलेरिया (Malaria)
मवाद
मसाले
मस्तिष्क
मस्से
मस्से-WARTS
महंगा इलाज
महत्वपूर्ण लेख
महाबला
माइग्रेन
माईग्रेन
माईंड सैट
माजूफल
मानवव्यवहार
मानसिक
मानसिक लक्षण
मानसिक-Mental
मानिसक तनाव-Mental Stress
मायोपिया
मासिक
मासिक-धर्म
मासिकधर्म
मासिकस्राव
माहवारी
मिनरल
मिर्गी
मिर्च-Chili
मीठा खाने की आदत
मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex
मुख्य लक्षण
मुधमेह
मुलहठी
मुलेठी
मुहाँसे
मूँगफली
मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders
मूत्र
मूत्र असंयमितता
मूत्र में जलन-Burning in Urine
मूत्ररोग
मूत्राशय
मूत्रेन्द्रिय
मूर्च्छा (Unconsciousness)
मूली
मूली कर रस
मृत्यु
मृत्युदण्ड
मेथी
मेथी दाना
मेंहदी
मैथुन
मोगरा (Mogra)
मोटापा
मोटापा-Obesity
मोतियाबिंद
मौत
मौलसिरी
मौसमी बीमारियां
यकृत
यकृत प्लीहा
यकृत वृद्धि-Liver Growth
यकृत-लीवर-जिगर-Lever
यूपेटोरियम परफोलियेटम
यूरिक एसिड लेबल
योग विज्ञापन
योन
योन संतुष्टि
योनि
योनि ढीली
योनि शिथिल
योनि शूल-Vaginal Colic
योनि संकोचन
योनिद्वारा
योनिभ्रंश
योनी
योनी संकोचन
यौन
यौन आनंद
यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills)
यौन क्षमता
यौन दौर्बल्य
यौन शक्तिवर्धक
यौन शिक्षा
यौन समस्याएं
यौनतृप्ति
यौनशक्ति
यौनशिक्षा
यौनसुख
यौनानंद
यौनि
रक्त प्रदर (Blood Pradar)
रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA
रक्तचाप
रक्तपित्त
रक्तशोधक
रक्ताल्पता
रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia
रस-juices
रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum
रामबाण
रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines
रुक्षांश
रूढिवादी
रूसी
रूसी मोटापा
रेचक
रेठु
रोग प्रतिरोधक
रोबोट सेक्स
रोमांस
लकवा
लक्षण
लक्ष्मी
लंच
लसोड़ा
लस्सी
लहसुन
लहसुन-Garlic
लाइलाज
लाइलाज का इलाज
लाक्षणिक इलाज
लाक्षणिक जानकारी
लाभ
लिंग
लिंग प्रवेश
लिसोड़ा
लीकोरिया
लीवर
लीवर सिरोसिस
लीवर-Liver
लू-hot wind
लैंगिक
लोनिया
लौकी
लौंग की चाय
ल्युकोरिया
ल्यूकोरिया
ल्यूज योनी
वजन
वज़न
वजन कम
वजन बढाएं-Weight Increase
वन तुलसी
वन/जंगली तुलसी
वनौषधियाँ
वमन
वमन विकृति-Vomiting Distortion
वसा
वात
वात श्लैष्मिक ज्वर
वात-Rheumatism
वायरल
वायरल फीवर
वायरल बुखार-Viral Fever
वासना
विचारतंत्र
विटामिन
विधारा
वियाग्रा-Viagra
वियोग
विरह वेदना
विलायती नीम
विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध
विवाहेत्तर सम्बंध
विश्वास
विष
विष हरनी
विषखपरा
वीर्य
वीर्य वृद्धि
वीर्यपात
वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone
वृक्ष
वैज्ञानिक
वैधानिक
वैवाहिक जीवन
वैवाहिक जीवन-Marital
वैवाहिक रिश्ते
वैश्यावृति
व्याकुल
व्यायाम
व्रण
शंखपुष्पी
शरपुंखा
शराब
शरीफा-सीताफल-Custard apple
शर्करा
शलगम-Beets
शल्यक्रिया
शहद
शहद-Honey
शारीरिक
शारीरिक रिश्ते
शिथिलता
शीघ्र पतन
शीघ्रपतन
शीस
शुक्राणु
शुक्राणु-Sperm
शुक्राणू
शुगर
शोक
शोथ
शोध
श्योनाक
श्रेष्ठतर
श्वास
श्वांस
श्वेत प्रदर
श्वेत प्रदर-Leucorrhea
श्वेतप्रदर
षड़यंत्र
संकुचन
संकोच
संक्रमण
संक्रमित
संक्रामक
संखाहुली
सगतरा
संतरा-Orange
संतान
संतुष्टि
सत्यानाशी
सदा सुहागन
सदाफूली
सदाबहार
सदाबहार चूर्ण
सनबर्न
सफ़ेद दाग
सफेद पानी
सफेद मूसली
सब्जि
सब्जी
संभालू
संभोग
समर्पण-Dedication
सरकार को सुझाव
सरफोंका
सरहटी
सर्दी
सर्दी-जुकाम
सर्पक्षी
सर्पविष
सलाद
संवाद
संवेदना
सहदेई
सहदेवी
सहानभूति
साइटिका
साइटिका-Sciatica
साइड इफेक्ट्स
साबूदाना-Sago
सायटिका
सिगरेट
सिजेरियन
सिर दर्द
सिर वेदना
सिरका
सिरदर्द
सिरोसिस
सी-सेक्शन
सीजर डिलेवरी
सुगर
सुदर्शन
सुहागा
सूखा रोग
सूजन
सेक्स
सेक्स उत्तेजक दवा
सेक्स परामर्श-Sex Counseling
सेक्स पार्टनर
सेक्स पावर
सेक्स समस्या
सेक्स हार्मोन
सेक्स-Sex
सेंधा नमक
सेब
सेमल-Bombax Ceiba
सेल्स
सोजन-सूजन
सोंठ
सोना पाठा
सोयाबीन
सोयाबीन (Soyabean)
सोयाबीन-Soyabean
सोराइसिस
सोरियासिस-Psoriasis
सौंठ
सौंदर्य
सौंदर्य-Beauty
सौन्दर्य
सौंफ
सौंफ की चाय
सौंफ-Fennel
स्किन
स्खलन
स्तन
स्तन वृद्धि
स्तनपान
स्तम्भन
स्त्री
स्त्रीत्व
स्त्रैण
स्पर्श
स्मृति-लोप
स्वप्न दोष
स्वप्नदोष
स्वप्नदोष-Night Fall
स्वभाव
स्वभावगत
स्वरभंग
स्वर्णक्षीरी
स्वस्थ
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य परामर्श
स्वास्थ्य रक्षक सखा
हजारदानी
हड़जोड़
हड्डी
हड्डी में दर्द
हड्डी संक्रमण
हड्डीतोड़ ज्वर
हड्डीतोड़ बुखार
हरड़
हरसिंगार
हरी दूब-CREEPING CYNODAN
हरीतकी
हर्टबर्न
हस्तमैथुन
हस्तमैथुन-Masturbation
हाई बीपी
हाथ-पैर नहीं कटवायें
हारसिंगार
हालात
हिचकी
हिचकी-Hiccup
हिमोग्लोबिन-hemoglobin
हिस्टीरिया
हिस्टीरिया-Hysteria
हींग
हीनतर
हुरहुर
हुलहुल
हृदय
हृदय-Heart
हेपेटाइटिस
हेपेटाईटिस
हेल्थ टिप्स-Health-Tips
हेल्थ बुलेटिन
हैजा
हैपीनेस-Happiness
हैल्थ
होम केयर टिप्स-Home Care Tips
होम्यापैथ
होम्योपैथ
होम्योपैथिक
होम्योपैथिक इलाज
होम्योपैथिक उपचार
होम्योपैथी
होम्योपैथी-Homeopathy



