शीघ्रपतन का होम्योपैथिक इलाज!
लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
आगे बढने से पहले पाठकों को अवगत करवाना उचित होगा कि 30 नवम्बर, 2017 को 'शीघ्रपतन' शीर्षक से लिखे लेख में निम्न विषयों की जानकारी दी जा चुकी है:
1. शीघ्रपतन से कितने पुरुष परेशान रहते हैं?
2. शीघ्रपतन किसे कहते हैं?
3. वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
4. स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
5. सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?
6. शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध?
7. शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण!
8. शीघ्रपतन के कारण।
उक्त जानकारी मेरी वेबसाइट के निम्न लिंक पर पढी जा सकती है:-
उक्त जानकारी मेरी वेबसाइट के निम्न लिंक पर पढी जा सकती है:-
http://www.healthcarefriend.in/2017/12/blog-post_69.html
शीघ्रपतन के होम्योपैथिक इलाज के बारे में लिखने से पहले स्पष्ट कर देना उचित होगा कि होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। इलाज करने के लिये रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को जानने के बाद उचित दवाई का निर्धारण करना होता है, जो हम होम्योपैथ्स के लिये बहुत ही कठिन और परिश्रमपूर्ण कार्य है। दु:खद पहलु यह है कि अधिकतर रोगी, अपने लक्षण बताने में ही संकोच करते हैं। जिसके कारण रोगी को भारी शारीरिक एवं आर्थिक नुकसान होता है। साथ ही उपचारक का भी समय बर्बादा होता है और नाम खराब होता है।
यहां पर कुछ प्रमुख होम्योपैथिक औषधियों की जानकारी दी जा रही है, जो शीघ्रपतन की समस्या के समाधान में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। मगर याद रहे किसी अनुभवी होम्योपैथ के परामर्श के बिना इन दवाईयों का सेवन करना उचित नहीं होगा, क्योंकि दवाई के नाम मात्र से कुछ नहीं हो सकता। महत्वपूर्ण कार्य है, रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को पूछकर/जानकर दवा की सही मात्रा और दवा की शक्ति का निर्धारण करना।
आॅरम मेटालिकम: रोगी को आत्महत्या करने का मन करता है और अपने आप को बिल्कुल निकम्मा महसूस करता है, निराशा अधिक होने के साथ ही शरीर का रक्तदाब बढ़ जाता है, जीवन में एकदम निराशापन हो जाता है। रोगी को भूख तथा प्यास लगती है, जी मिचलाने लगता है और दम घुटने लगता है तथा गर्मी भी लगने लगती है। अण्डकोष में दर्द और सूजन आ जाती है, अण्डको अन्डकोषों में कठोरता उत्पन्न हो जाती है, लिंग में तेज उत्तेजना होती है। भयंकर शारीरिक कामोत्तेजना तथा चंचलता का भाव होना, परन्तु इसके बाद बहुत शीघ्र ही लिंग में अत्यधिक शिथिलता। मैथुन शूरू करते ही लिंग का ढीला पड़ जाना। हस्तमैथुन के दुष्परिणाम आदि लक्षण पाये जाते हैं। स्त्री रोगी की योनि में तेज उत्तेजना होती है। बांझपन का रोग तथा इसके साथ ही योनि में तेज जलन के साथ बांझपन हो तो यह दवाई स्त्रियों के लिए भी बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
सेलिनियम: सेलेनियम उन रोगियों के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है जो व्यक्ति जवानी के जोश में आकर अपने वीर्य को समय से पहले ही समाप्त कर चुके होते हैं और संभोग क्रिया के समय पूरी तरह सफल नहीं हो पाते। स्त्री के साथ संभोग क्रिया करने के बाद रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना। सोते समय रोगी का वीर्य अपने आप ही निकल जाना। मन में संभोग करने की इच्छा तेज होना, लेकिन संभोग करते समय लिंग का उत्तेजित न होना, वीर्य का पतला हो जाना। बार-बार वीर्य-स्राव। बिना कामेच्छा के ही प्रात: काल लिंग में उत्तेजना होना, परन्तु सहवास की कोशिश करने पर लिंग का शिथिल हो जाना। अत्यधिक लैंगिक दुर्बलता। मन में अत्यधिक कामेच्छा होने पर भी लिंग में कड़ापन न आना अथवा सेक्स पूर्ण न हो पाना। जननेन्द्रिय/लिंग में खुजली तथा सुरसुरी। नींद में, पाखाने के समय अथवा अनजाने में लिंग से गोंद जैसा लसदार पदार्थ निकलना आदि लक्षणों में सेलिनियम का उपयोग लाभदायी हो सकता है।
ऐग्नस कैक्टस: लैंगिक दोष उत्पन्न होना, मृत्यु का भय होना। अधिक उदासी के साथ जल्दी मृत्यु का भय महसूस हो रहा हो। मन-मस्तिष्क स्थिर न रहना, याददाश्त कमजोर होना, किसी कार्य को करने में उत्साह न होना। जो पुरुष जवानी में अधिक मौज-मस्ती करते रहे हैं और कामवासना में अधिक डूबे रहने के कारण शारीरिक रूप से कमजोर तथा नपुंसक हो जाते हैं। जिनके प्रजनन अंग ठण्डे तथा ढीले पड़ गये हों। लिंग में कमजोरी, परन्तु कामेच्छा का अधिक होना, मल-त्याग के समय जोर लगाने से अथवा नींद में वीर्य स्खलन, एकदम मानसिक अवसन्नता, कमजोर तथा अनमनेपन का भाव आदि लक्षणों में इसका सेवन करें।
ग्रैफाइटिस: हर समय डर सा लगते रहना, किसी भी काम को करने में मन न लगना, बहुत ज्यादा भावुक हो जाना, किसी भी फैसले को करने में दुविधा होना, उदास सा बैठे रहना। गर्म पीने वाली चीजों का हजम न होना। जितनी बार भी भोजन करे उतनी ही बार जी मिचलाना और उल्टी आना, आमाशय में दबाव सा महसूस होना। आमाशय में जलन होने के कारण भूख न लगन। डकार लेने में परेशानी होना। पेट में गैस बनना। सेक्स करने की इच्छा का तेज होना, लेकिन सेक्सक्रिया के दौरान अपने सहभागी को पूरी तरह से खुश न कर पाना। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण योनि में लिंग-प्रवेश के तुरन्त बाद या प्रवेश से पूर्व ही वीर्य-स्खलन हो जाए। लिंग में कड़ापन न आना। हस्तमैथुन तथा अतिरिक्त काम-तृप्ति के कारण लिंग में शिथिलता, लिंगमुण्ड/सुपारी पर कटे-फटे घाव तथा खाल उधड़ जाना, लिंग में सूजन तथा लसदार-चिपचिपे स्राव होना। सेक्स क्रिया से मन का बिल्कुल हट जाना आदि लक्षणों के नज़र आने पर रोगी को ग्रैफाइटिस औषधि देने से लाभ होता है।
लाइकोपोडियम: लाइकोपोडियम नामर्दी की मुख्य औषध है। यह ऐसे रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है जो मानसिक तथा शारीरिक दृष्टि से भी कमजोर होते हैं और जिन्हें शरीर में बहुत अधिक कमजोरी होती है। रोगी को और भी कई प्रकार के रोग होते हैं जो इस प्रकार हैं- लालची, कंजूस, धन का लालची, दूसरे के प्रति घृणा की भावना रखना आदि। रोगी को भय होता है तथा क्रोधित स्वभाव का हो जाता है, अपमान के कारण उसे और भी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। अत्यधिक मैथुन तथा अत्यधिक अप्राकृतिक मैथुन के कारण लिंग में उत्तेजना या कड़ापन ही न आना। नपुंसकता रोग होने के साथ ही रोगी को संभोग करने की इच्छा अधिक होती है तथा समय से पहले अपने आप ही वीर्य निकल जाता है और इसके बाद लिंग ठण्डा हो जाता है तथा संभोग की शक्ति कम हो जाती है अर्थात संभोग करने का मन नहीं करता है, संभोग करने के समय में लिंग में हल्का कड़ापन होता है, संभोग करते समय नींद सी आने लगती है, रोगी संभोग के प्रति भयभीत हो जाता है तथा जम्भाई आती है। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तो इन लक्षणों के साथ शीघ्रपतन के लक्षण में लाइकोपोडियम सर्वोत्तम दवाई है। यह दवाई विशेषकर वृद्धों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हो चुकी है।
फास्फोरस: रोगी का उत्साह कम, मन चिड़चिड़ा हो जाता है। उसे डर लगता है और रोगी को ऐसा लगता है कि हर कोने से कोई चीज रैंगती हुई बाहर निकल रही हो तथा उसके मन में दिव्यदृष्टि जैसी दशा उत्पन्न हो जाती है। रोगी अचानक चौंक पड़ता है। रोगी की सोचने की शक्ति कम हो जाती है, रोगी पागलों की तरह का व्यवहार करता है। उसे जीवन मेें आनन्द की अनुभूति नहीं होती है। अकेले रहने पर मृत्यु का भय लगा रहता है। दिमाग थका-थका सा रहता है। वह अपने प्रति अधिक उच्च धारणा रखता है, शरीर में उत्तेजना अधिक होती है, सारा शरीर गरम रहता है, रोगी अस्थिर रहता है और उसे चारों ओर अशान्ति प्रतीत होती है। खाना खाते ही रोगी को तुरन्त भूख लग जाती है, भोजन करने के बाद हर बार खट्टा स्वाद और खट्टी डकारें आती है, डकार आने के साथ ही खाना खाया हुआ भोजन तुरन्त वापस मुंह में आ जाता है, जैसे ही आमाशय के अन्दर पानी गरम होता है, वैसे ही उसकी उल्टी हो जाती है। रोगी में संभोग करने की शक्ति नहीं रहती है, रोगी को संभोग क्रिया करने के लिए अधिक इच्छा होती है, लेकिन उसका अपने आप ही वीर्यपात हो जाता है। दिन-रात बारम्बार पतले, लसदार रंगहीन तरल पदार्थ का मूत्र-मार्ग से स्राव होना। रोगी को संभोग करने के सपने आते हैं और अपने आप ही वीर्यपात हो जाता है। इत्यादि लक्षणों पर फास्फोरस लाभदायक है।
फास्फोरिक एसिडम: ऐसे रोगियों के रोगों को ठीक करने के लिए उपयोगी है जो पहले बहुत तन्दुरुस्त (स्वास्थ्य) रहे हों, लेकिन बाद में स्वप्नदोष, हस्तमैथुन, स्त्री प्रसंग, अनुचित बुरे कार्य करने के कारण अपने वीर्य को नष्ट करते हैं। जिसके कारण उनका शरीर ठण्डा पड़ जाता है और कमजोरी अधिक हो जाती हैं। अधिक रोना-धोना और बड़बड़ाना, इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी को ठण्ड भी लगती है और अधिक निराशा होती है। रोगी को रसीले पदार्थों का सेवन करने की इच्छा होती है, खट्टी डकारें आती है, जी मिचलाने लगता है। आमाशय में दबाव महसूस होता है और भोजन करने के बाद ठीक प्रकार से नींद नहीं आती है, ठण्डा दूध पीने का मन करता है। रोगी को बार-बार पेशाब आता है तथा इसके साथ ही पेशाब में दूध जैसा सफेद पदार्थ भी आता है। जो वीर्य नहीं होता, लेकिन रोगी वीर्य समझकर परेशान होता रहता है। रोगी को रात के समय में मलत्याग करते समय वीर्यपात हो जाता है। वीर्यपात होते ही रोगी को जलन भी होती है। संभोग करने की शक्ति घट जाती है, अण्डकोष को छूने पर दर्द होता है तथा अण्डकोष सूजा रहता है, आलिंगन करने के समय में लिंग ठण्डा (शिथिल) पड़ जाता है। युवकों की अत्यधिक कामवासनाओं में लिप्तता तथा हस्तमैथुन। व्यभिचार आदि के कारण लैंगिक कमजोरी। नामर्दी के साथ अचैतन्यता/मूर्छा जैसी अवस्था। मलत्याग करने के समय में भी लिंग शिथिल पड़ा रहता है। लिंग की त्वचा पर सूजन आ जाती है तथा लिंग की सुपारी पर भी सूजन आ जाती है, लिंग पर घाव हो जाता है। मानसिक दुर्बलता। थोड़ी-बहुत उत्तेजना हो भी जाये तो सेक्स क्रिया पूर्ण न कर पाना। इस प्रकार के लक्षणों में फास्फोरिकम एसिडम का प्रयोग किया जा सकता है।
प्लैटिनम: रोगी अत्यधिक अहंकारी, अभिमानी हो जाता है। किसी की परवाह नहीं करना। सबको हर बात में अपने से छोटा समझना और अपने आप को हर बात में सब से बड़ा समझना। दूसरों के प्रति घृणा का भाव। इस प्रकार की अत्यधिक उत्तेजना, जिसके कारण हस्तमैथुन या अन्य तरीके से वीर्यपात करने को विवश होना पड़े। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण मिर्गी का दौरा पड़ जाये, असहनीय कामोत्तेजना होते रहना तथा साथ में लिंग/जननेन्द्रिय में लगातार सुरसुरी होना। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण शीघ्रपतन के लक्षण में प्लैटिनम लाभदायक है।
सीपिया: रोगी को अपने जननांग बिल्कुल ठण्डे से महसूस होना और उनमें बहुत ज्यादा पसीना आना, पुराना सुजाक रोग होने के कारण पेशाब के रास्ते से रात के समय दर्द के साथ स्राव का आना। लिंग के आगे के भाग पर मस्से से निकलना। बहुत दिनों तक बीमारी बने रहना अथवा बारम्बार वीर्यस्राव के कारण लिंग का दुर्बल हो जाना। कामेच्छा का घट जाना अथवा कामेच्छा के प्रति अरुचि आदि लक्षणों में सीपिया मदद कर सकती है।
सल्फर: रोगी का हर बात को तुरंत ही भूल जाना, किसी भी बात को सोचने और समझने में बहुत मुश्किल होना, मन में अजीब-अजीब से विचार आना जैसे कि वह किसी भी चीज को सुंदर वस्तु समझने लगता है, अपने आपको दुनिया का सबसे अमीर आदमी समझने लगता है, रोगी का बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाना, किसी भी व्यक्ति से सही तरीके से बात न करना, काम करने में मन न लगना, रोगी इतना आलसी हो जाता है कि उसको खुद को ही जगा पाना मुश्किल हो जाता है, खुलकर भूख लगने पर भी रोगी का हमेशा कमजोरी और दुबला-पतला सा रहना। रोगी चाहे जितना भी भोजन कर ले उसको तब भी भूख लगती रहती है, अगर रोगी भोजन नही करता तो उसके सिर में दर्द शुरू हो जाता है और कभी-कभी तो रोगी को बिल्कुल भी भूख नहीं लगती, थोड़ा सा भोजन करते ही रोगी की भूख समाप्त हो जाती है। रोगी के लिंग में सूजन आने के कारण दर्द होना। वीर्य का अपने आप ही निकल जाना। सोते समय लिंग में बहुत तेजी से खुजली का होना और लिंग का बहुत कमजोर पड़ जाना। अंडकोषों का लटक जाना। कामेच्छा के समय जबरदस्त खाँसी उठना। लिंग में भरपूर कड़ापन न आना एवं योनि में प्रवेश के पूर्व ही अथवा प्रवेश करते ही बहुत जल्दी वीर्य स्खलित हो जाना। रोगी के लिंग में बहुत ही बदबूदार पसीने आना आदि लक्षणों के आधार पर सल्फर औषधि का प्रयोग करना असरकारक रहता है।
जिंकम मेटालिकम: मुख्य क्रिया मस्तिष्क सम्बंधित लक्षणों में विशेष रूप से होती है। यह औषधि ऊतकों को सुधारने में तेजी से क्रिया करती है और ऊतकों से सम्बंधी लक्षणों को समाप्त करती है। अण्डकोष की सूजन और ऊपर की ओर खिंचाव महसूस होना। लिंग की तेज उत्तेजना। रोगी में उत्पन्न ऐसे लक्षण जिसमें रोगभ्रम रहता है और साथ ही वीर्यपात हो जाता है। बालों का झड़ना। अण्डकोषों के वीर्य की थैली में खिंचाव महसूस होना। मन से सम्बंधित ऐसे लक्षण, जिसमें रोगी की स्मरणशक्ति कमजोर होने लगती है तथा उसे थोड़े देर पहले ही कही हुए बातें याद नहीं रहती। ऐसे रोगी शोर-शराबा पसन्द नहीं करता तथा हल्के शोर-शराबा में ही गुस्सा हो जाता है। इसके अतिरिक्त काम करने की इच्छा न करना, किसी से मिलने या बातचीत करने की इच्छा न होना। दूसरे के कहे हुए बातों को दोहराते रहना। मन में बुरे विचार आना तथा काल्पनिक रूप से भयभीत रहना। मल का सूखकर कठोर हो जाना तथा कब्ज बनना। इन कारणों से शीघ्रपतन होने पर रोगी को जिंकम मेटालिकम उपयोगी सिद्ध होगी।
कैलेडियम: रोगी अत्यन्त भुलक्कड़ होता है। जो काम कर चुका हो उस पर फिर सोचने लगता है कि किया या नहीं; दरवाजा बन्द कर चुका है, किन्तु लौट कर फिर ख्याल आता है कि बन्द किया या नहीं और फिर जाकर दरवाजे की कुण्डी को हाथ लगाकर इतमिनान करता है। जिस चीज का निश्चय करना हो उसे बार-बार जाकर, देखकर, हाथ लगाकर निश्चय करता है और वापस लौटने पर फिर अनिश्चित-का-अनिश्चित बना रहता है। रोगी सारे दिन बैठा-बैठा यही सोचा करता है कि जो काम वह कर चुका है या हो जाने चाहिये थे, वे उसने किये या नहीं किये, वे हुए या नहीं हुए। मन की इस प्रकार की दुर्बलता इसमें आ जाती है। जितना ही वह किसी विषय पर मन केन्द्रित करना चाहता है, उतना ही मन उस पर केन्द्रित नहीं हो पाता। मन की इस प्रकार की दुर्बलता प्राय: व्यभिचारियों में, हस्त-मैथुन करनेवालों में पायी जाती है। रोगी का मन अत्यन्त विषयासक्त होता है। उसमें स्त्री-प्रसंग की उत्कट इच्छा होती है, परन्तु मैथुन के प्रति असमर्थता होती है। स्त्री का आलिंगन करता है, परन्तु शारीरिक उत्तेजना ही नहीं हो पाती। ऐसे लोग सड़क के किनारे खड़े हुए आती-जाती ललनाओं की ओर ताका करते हैं और उनका वीर्य रिसता रहता है। ऐसे व्यभिचारी-विचारों से ग्रस्त पुरुष रातभर उलटा-पलटा करते हैं, लेकिन संभोग करने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे रोगी को इतना मीठा पसीना आता है कि मक्खियां तक उस मिठास के लिये उसकी तरफ़ खिंची चली आती हैं। पसीना आने से रोगी को सभी तकलीफों में आराम मिलता है। इन लक्षणों में कैलेडियम सर्वोत्तम दवाई है।
कार्बोनियम सल्फ्यूरेटम: ज्यादा नशा करने के कारण रोगी की मांसपेशियों के कमजोर हो जाने पर, ठण्ड न बर्दाश्त कर पाना, त्वचा और श्लैष्मिका झिल्लियों का सुन्न पड़ जाना। ज्यादा नींद आना या नींद न आना, रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना और याददाश्त का कमजोर हो जाना। संभोग क्रिया करने का बिल्कुल मन न करना, लिंग का सिकुड़कर छोटा हो जाना, अपने आप ही वीर्य निकल जाना। मूत्रनली से पुराने सूजाक जैसा स्राव निकलना। मूत्राशय के कष्ट, मूत्रनली में वेदना, सम्पूर्ण ध्वजभंग/नामर्दी। लिंगमुण्ड का प्रदाह, अण्डकोष में दर्द, जननेन्द्रिय में खुजली, जननेन्द्रिय की शिथिलता, सहवास के समय अतिशीघ्र स्खलित हो जाना, रात में स्वप्नदोष, कामेच्छा का अभाव आदि लक्षणों में कार्बोनियम सल्फ्यूरेटम का सेवन अत्यन्त उपयोगी है।
कोनियम मेकुलेटम: टांगों का कांपना, चलने-फिरने में परेशानी होना, कुछ दूर चलते ही शरीर का जवाब दे देना, कमजोरी, खून की कमी आदि लक्षण जो ज्यादा बुढ़ापे के लक्षण होते हैं। याददाश्त का कमजोर हो जाना और जनेन्द्रियों का कमजोर पड़ जाना। रात को नींद न आना, सुबह-सुबह बिस्तर छोड़ने का मन न करना, शरीर का टूटा-टूटा सा लगना। किसी भी चीज को रखकर कुछ ही समय में भूल जाना की कहां रखी है। पुरुष के अंदर संभोग की इच्छा तेज होने पर भी संभोग क्रिया में सफल न हो पाना, लिंग का कमजोर पड़ जाना, अण्डकोश का सख्त और बढ़ जाना। प्रचण्ड कामेच्छा रहने पर भी लिंग का उत्तेजित न होना। रात्रि में बिना स्वप्न के ही वीर्यम्राव। अत्यधिक सेक्स इच्छा होने पर भी सम्पूर्ण अथवा आंशिक, ध्वजभंग/नामर्दी। दर्द भरा वीर्यस्राव तथा भारी दर्दनाक लिंगोत्तेजना। लिंगोत्तेजना होने पर छुरी से काटने जैसा दर्द। विधुर तथा स्त्री प्रसंग के अनभ्यस्त पुरुषों की दबी हुई कामेच्छा का दुष्परिणाम, लैंगिक दुर्बलता, शीघ्रपतन के लक्षण आदि में कोनियम मेकुलेटम सर्वोत्तम दवाई है।
उक्त औषधियों के अतिरिक्त भी लक्षणानुसार होम्योपैथी में अनेकानेक ऐसी औषधियाँ हैं, जो शीघ्रपतन नामक तकलीफ का समाधान करने में उपयोगी सिद्ध होती हैं।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
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Jaipur, Rajasthan, 26 दिसम्बर, 2017, 04.44AM