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(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)

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डिप्रेशन (Depression): अनुभवसिद्ध (Experienced) सफल होम्योपैथिक उपचार

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
WhatsApp No. 8561955619 (10AM to 10PM)
@>>>>>>>>>> हम अनेक लोगों से सुनते रहते हैं कि मैं डिप्रेशन में हूं। हकीकत यह है कि वर्तमान में तेजी से भागती दौड़ती दुनिया में अधिकतर लोग किसी न किसी चाहत, असफलता या उपलब्धि (Desire, Failure or Achievement) के दबाव एवं तनाव (Pressure and Stress) में जीने को विवश हैं। जब यह दबाव एवं तनाव अधिक बढकर अनियंत्रित हो जाता है तो अधिकतर लोग अत्यधिक निराश हो जाते हैं। निराश व्यक्ति को कुछ भी नहीं सूझता और कुछ निराश लोग इतने दु:खी हो जाते हैं कि उन्हें अपना जीवन निरर्थक लगने लगता है। सामान्यत: इसी अवस्था को डिप्रेशन (Depression) कहा जाता है। जिसके कारण अनेक लोगों के मन में आत्मघात (Suicide) के विचार भी आने लगते हैं। जिनमें से कुछ आत्महत्या भी कर लेते हैं। अत: इस स्थिति का समय रहते समाधान करना बहुत जरूरी होता है।


[@] *नोट: कृपया सम्पूर्ण लेख को ध्यान से पढें और यदि पढ़ने के बाद यह उपयोगी लगे तो जनहित में इसे लोगों को आगे फॉरवर्ड/शेयर किया जा सकता है!* [@]


@>>>>>>>>>> दुष्प्रभाव रहित (Without side effect) होम्योपैथित दवाइयों से डिप्रेशन का सफल उपचार: होम्योपैथिक दवाइयों का परीक्षण चूहे, खरगोश या मेंढकों पर नहीं, बल्कि स्वस्थ लोगों पर किया जाता है। अत: परीक्षण के दौरान यह नोट किया जाता है कि किसी दवा विशेष का मानव के शरीर के साथ-साथ मन पर क्या और कैसे प्रभाव पड़ता है। इसी कारण होम्योपैथिक दवाइयां मनुष्य के मन पर बहुत गहरा एवं सकारात्मक असर करती हैं। अत: यह समझना और समझाना जरूरी है कि होम्योपैथी में मन से जुड़े विकारों या गड़बड़ियों के उपचार की बहुत सारी दवाइयां उपलब्ध हैं। मगर सही दवा, दवा की शक्ति एवं मात्रा का चयन किसी अनुभवी होम्योपैथ द्वारा डिप्रेशन की स्थिति से पीड़ित व्यक्ति के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों को जानकर तथा विश्लेषण करके ही किया जा सकता है। डिप्रेशन के रोगी तथा रोगी के परिजनों को रोगी की हर प्रकार की छोटी-बड़ी लाक्षणिक जानकारी डॉक्टर को बताना बहुत जरूरी होता है। अन्यथा रोगी का सही उपचार असंभव है। होम्योपैथिक दवाइयां व्यक्ति के अंदर स्थापित उस कारण को दूर करने में सक्षम होती हैं, जो डिप्रेशन सहित किसी भी बीमारी का मूलाधार/कारण होता है। यहां कुछ होम्योपैथक दवाइयों के लक्षणानुसार नाम दिये जा रहे हैं, जो डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को स्वस्थ करने में सहायक हो सकती हैं। मैं जिन दवाइयों का उल्लेख कर रहा हूं, मैंने उन दवाइयों के सहयोग से डिप्रेशन के शिकार दर्जनों रोगियों को स्वस्थ किया हैं। आगे बढने से पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यद्यपि होम्योपैथिक दवाइयों के कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं, लेकिन यह बतलाना कानूनी बाध्यता है कि किसी योग्य होम्योपैथ के परामर्श के बिना खुद अपना इलाज करने का प्रयास न करें।


1. अर्जेंटम नाइट्रिकम: जब रोगी को मानसिक और शारीरिक रूप से खुद पर नियंत्रण रख पाना मुश्किल या असंभव हो जाये। रास्ते में चलते समय ऊंची इमारतों के पास से गुजरते समय ऊंची इमारतों की ओर देखने से रोगी को डर लगने लगे। रोगी को पुल पार करने से डर लगता है। ऊंची इमारतों के ऊपर से नीचे देखने से भी रोगी डरता है। उसे हमेशा मृत्यु का भय घेरे रहता है। अनेक बार रोगी अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी किया करता है। रोगी को किसी के इंतजार से घबराहट होती है। उसे मीठे की विशेष चाहत होती है। किसी बड़े या अनजान व्यक्ति से मिलने जाने या किसी समारोह में जाने या किसी प्रकार का भाषण देने जाने से पहले रोगी के मन में इतनी व्याकुलता, घबराहट और डर की स्थिति पैदा हो जाती है कि उसे बार-बार पेशाब और शौच जाना पड़ता है। यह सब रोगी के स्नायुमंडल की कमजोरी के प्रमाण हैं। ऐसे लक्षणों के आधार पर इस दवाई से मैंने अनेक रोगियों को सम्पूर्ण आरोग्य प्रदान किया है। यहां तक कि यौन सम्बन्धों में घबराहट के मामले में भी यह दवा अत्यंत उपयोगी है।


2. आर्सेनिक एल्बम: जिस रोगी में बेचैनी, घबराहट, मृत्युभय और अत्यधिक कमजोरी के लक्षण दिखाई दें। रोगी को बार-बार थोड़ी थोड़ी प्यास लगती रहती है। रोगी कितनी ही कमजोर और नि:शक्त हो गया हो, लेकिन वह एक जगह टिक कर बैठ नहीं सकता। रोगी को हमेशा मृत्यु का भय सताता रहता है, वह मन में सोचता और अपने परिवारजनों को बोलता रहता है कि दवा खाना बेकार है, अब वह नहीं बचेगा। उसे अकेले रहने से डर लगता है। जब रोगी भूत-प्रेत दिखने की बातें करे या उसके मन में आत्महत्या करने की प्रबल इच्छा हो तो यह दवा अत्यंत उपयोगी होती है। अनेक ऐसे रोगी जो ऊपरी हवा या भूत-प्रेत का साया बतलाकर नारकीय जीवन जीने को विवश कर दिये जाते हैं। उनके लक्षण मिलाने करने पर यह दवा चमत्कार जैसा प्रभाव दिखाती है। मैंने अनेक ऐसी औरतों को स्वस्थ करने में सफलता अर्जित की है। जिन्हें भूतग्रस्त बतलाकर प्रताड़ित किया जाता था। जिन्हें भोपाओं के हवाले करके प्रताड़नाएं दी जाती थी।


3. एसिड फॉस: वियोग, जुदाई, प्रेम में असफलता, शोक, दु:ख, आत्मीयजन की मृत्यु, प्रेम में धोखा या असफलता आदि के कारण अनेक प्रकार की मानसिक और शारीरिक परेशानियां उत्पन्न होने लगती हैं। जैसे-चिंताग्रस्त रहना और थकावट, पर्याप्त नींद नहीं आना, अचानक पसीना-पसीना हो जाना, किसी भी काम या विषय में मन नहीं लगना, हतोत्साह के साथ रोगी दु:खी और व्याकुल रहने लगे। शुरुआत मानसिक कमजोरी से होती है, जो बाद में शारीरिक कमजोरी में भी बदल जाती है। यदि तत्काल ध्यान नहीं दिया जाये तो रोगी इस कदर डिप्रेशन का शिकार हो जाता है कि वह अनेक बार अपने मित्रों, ग्राहकों, पड़ोसियों, सहकर्मियों और परिजनों तक के नाम भूल जाता है। छोटा-मोटा हिसाब-किताब तक नहीं कर सकता। मन अत्यधिक शिथिल हो जाता है। ऐसी अवस्था में यह दवा उपयोगी होती है। वियोग, जुदाई और असफल प्रेम सम्बन्धों के कारण अवसादग्रस्त अनेक रोगियों का मैंने सफल उपचार किया है। जिसमें अन्य दवाओं के साथ इस दवा की भी अहम भूमिका रही।


अन्य दवाइयां: उपरोक्त के अलावा लक्षणानुसार नेट्रम म्यूर, आॅरम मैटालिकम, स्टेफिसेग्रिया, नक्स वोमिका, इग्नेशिया, विरेट्रम एल्बम, कल्केरिया कार्बोनिका आदि होम्योपैथक अनेक दवाइयां रोगी की मानसिक एवं शारीरिक स्थिति के अनुसार उपयोगी हो सकती हैं। जिनका निर्धारण अनुभवी होम्योपैथ आसानी से कर सकते हैं।


कमजोरी का उपचार: डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से अत्यधिक कमजोर हो जाते हैं। अत: उनकी कमजोरी के निदान हेतु मैं शुद्ध, ताजा एवं आॅर्गेनिक देशी दर्जनों जड़ी बूटियों से निर्मित 'Rejuvenation Powder-कायाकल्प पाउडर' एवं 'Stimulator (Recharge and Stimulate Yourself)' का भी सेवन करवाता हूं। जिससे कुछ ही महिनों में रोगी फिर से अपने आप को स्वस्थ और तरोताजा अनुभव करने लगता है।


लेख का मकसद: इस लेख को लिखने का मूल मकसद आम लोगों/पाठकों में यह समझ पैदा करना है कि जब किसी कारण से किसी भी व्यक्ति/परिजन को मानसिक परेशानी हो तो उसे डिप्रेशन कहकर हल्के से नहीं लें या उसे कैमीकलयुक्त दवाइयों के हवाले नहीं करें, बल्कि ऐसे हालात में पेशेंट के प्रति विशेष अपनापन, सहानुभूति और देखरेख का भाव रखते हुए उसे किसी योग्य होम्योपैथ को दिखायें तो आश्चर्यजनक परिणाम मिलेंगे। *लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'* 21.11.2018, (यह लेख विशेष रूप से मेरे द्वारा संचालित वाट्सएप ग्रुप *Health Care Friend-स्वास्थ्य रक्षक सखा* के सदस्यों के लिये लिखा गया है।) जिसका लिंक: https://chat.whatsapp.com/HHcJSKjEpKsAFzk2sZAg53 यह लिंक कुछ दिनों बाद बंद कर किया जा सकता है।


*नोट:* किसी भी पुरानी या लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी से पीड़ित लोगों को, अपनी बीमारी को अपनी नियति मानकर निराश या हताश (Frustrated or Depressed) होने की जरूरत नहीं है। देशी जड़ी बूटियों और होम्योपैथी में इलाज संभव है। अपने आपपास के किसी अनुभवी डॉक्टर से सम्पर्क किया जा सकता है। देशभर में अनेकानेक अनुभवी तथा योग्य होम्योपैथ/आयुर्वेद के डॉक्टर उपलब्ध हैं।


*हां अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु मेरी निम्न वेबसाइट/Facebook Page पर विजिट/क्लिक कर सकते हैं:-*


*Online Doctor:* Only Online Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) Dr. P. L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा) Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM*
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बवासीर/पाइल्स-Hemorrhoids/Piles:

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
बवासीर गुदा मार्ग की ऊपरी या बाहरी बीमारी नहीं है। क्योंकि बवासीर का मुख्य कारण वर्षों तक कब्ज का कब्जा रहना होता है। अधिक मिर्च मसाले एवं बाजारू भोजन के कारण कब्ज उत्पन्न होने लगती है। जिसके कारण मल कठोर तथा शुष्क हो जाता है। कठोर और शुष्क मल असानी से बाहर नहीं आता है। अत: मल त्याग हेतु व्यक्ति को अधिक जोर लगाना पड़ता है। जिससे गुदा का आंतरिक हिस्सा जख्मी हो जाता है। लगातार यही स्थिति बनी रहने पर तेजी से कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं और आंतरिक तंत्रिकाएं जख्मी हो जाती हैं या फूल जाती है। जिसके चलते मस्से फूल जाते और, या गुदा से मल के साथ रक्त आने लगता है। सामान्यत: इसे ही बवासीर रोग कहा जाता है।




मुख्यत: बवासीर दो प्रकार को होता है-खूनी बवासीर और बादी बवासीर। यदि मल के साथ खून बूंद-बूंद कर आये तो उसे खूनी बवासीर कहते हैं। यदि मलद्वार के बाहर या मलद्वार के आसपास की नसों में या मलद्वार के अंदर सूजन हो और मटर या अंगूर के दानों के समान मस्से बाहर निकलने लगें या गुदा में अंदर मस्से या सोजन अनुभव होने लगे। ऐसे मस्से जो मलत्याग के समय गुदा से बाहर भी आ जाते हों। ऐसी स्थिति में मल के साथ खून न आए तो सामान्यत: इसे बादी बवासीर कहा जाता है।

जब बवासीर में मलद्वार पर मस्से निकल आते हैं और उनमें सूजन और जलन होने के साथ अधिक पीड़ा भी होती हो। बैठने-उठने पर मस्सों में तेज दर्द होता हो। उनमें से रक्त या चिकना सा पदार्थ निकलने लगे। अनेक बार बिना दर्द के भी मल के साथ या ​मलत्योग के बाद या उठने-बैठने पर गुदाद्वार से रक्त निकलने लगे तो सामान्यत: इसे खूनी बवासीर कहते हैं। बवासीर होने पर उचित एवं सही उपचार के अभाव में गुदाद्वारा में जख्म/फोड़ा भी हो सकता है। गुदाद्वार में दरारें आ सकती हैं। जिनमें मलत्याग के समय असहनीय पीड़ा होती है। यदि बवासीर का समय रहते उचित उपचार नहीं करवाया जाये तो यह कुछ मामलों में भगंदर और, या गुदाभ्रंश में भी परिवर्तित हो सकता है।

इस असहनीय दर्दनाक पीड़ा से भयभीत होकर कुछ रोगी नासमझी में बवासीर, भगंदर या ग्रदाभ्रंश का ऑपरेशन करवा लेते हैं। इसके बाद वाकई ये तलीफें लाइलाज बन जाती हैं। ऑपरेशन के बाद, फिर ऑपरेशन यह सिलसिला। लोगों की जिंदगी को जीते जी नर्क बना देता है।

इसका भी कारण समझना जरूरी है। जैसा कि ऊपर लिखा जा चुका है कि बवासीर गुदा मार्ग की ऊपरी या बाहरी बीमारी नहीं है। क्योंकि बवासीर का मुख्य कारण वर्षों तक कब्ज का कब्जा रहना होता है। अधिक मिर्च मसाले एवं बाजारू भोजन के कारण कब्ज उत्पन्न होने लगती है। जिसके कारण मल कठोर तथा शुष्क हो जाता है। कठोर और शुष्क मल असानी से बाहर नहीं आता है। अत: मल त्याग हेतु व्यक्ति को अधिक जोर लगाना पड़ता है। जिससे गुदा का आंतरिक हिस्सा जख्मी हो जाता है। लगातार यही स्थिति बनी रहने पर तेजी से कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं और आंतरिक तंत्रिकाएं जख्मी हो जाती हैं या फूल जाती है। जिसके चलते मस्से फूल जाते और, या गुदा से मल के साथ रक्त आने लगता है। सामान्यत: इसे ही बवासीर रोग कहा जाता है।

इसलिये यदि कोई सामान्य विवेक का व्यक्ति भी इस बात पर विचार करेगा तो उसे आसानी से समझ में आ जायेगा कि जब तक पाचन तंत्र ठीक नहीं होगा। जब तक सख्त और कठोर मल बनना बंद नहीं होगा। बाहरी ऑपरेशन करने के बाद भी बवासीर को ठीक कैसे किया जा सकता है? यही स्थिति गुर्दे की पथरी की भी होती है। जिसको ऑपरेशन से निकाल देना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि वास्तविक उपचार पथरी का शरीर में बनना बंद करना असली उपचार है। इसके बाद भी हमारे देश में हर दिन बवासीर के हजारों रोगियों के ऑपरेशन किये जा रहे हैं।

बवासीर का उपचार:
बवासीर से पीड़ित अधिकतर लोग शर्म-संकोच के चलते अपनी तकलीफ को परिवार के सदस्यों तक से छिपाते हैं और इधर-उधर ​की दवाइयां लेते रहते हैं। या किसी अनुभवी डॉक्टर से नियमित रूप से उपचार नहीं लेते हैं। अधिकतर रोगियों को तो यह बात ही समझ में नहीं आती कि वर्षों/दशकों तक पेट खराब रहने और कब्ज रहने के बाद जन्मी बवासीर की तकलीफ का बिना कब्ज को ठीक किये सफल उपचार कैसे सम्भव है?

अत: सबसे पहली जरूरत होती है, रोगी के पाचनतंत्र और कब्ज को ठीक करना। जिसके लिये पहले से कोई सुनिश्चित समय सीमा तय नहीं की जा सकती। क्योंकि रोगी का स्वस्थ होना केवल दवाइयों पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि कुछ बातें हैं, जिनके कारण उपचार में कम या अधिक समय लग सकता है। जैसे-पहले लिये गये उपचार के रोगी के दुष्प्रभाव, रोगी की जीवनचर्या, खान-पान की आदतें, लीवर की स्थिति, रोगी के जीवन में चिंता-तनवा और अवसाद की स्थिति, वंशानुगत पाचनतंत्र की क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता, रोगी द्वारा दवा पर प्रतिक्रिया करने की क्षमता इत्यादि। इस सब के बावजूद अधिकतर रोगी डॉक्टर्स से इलाज की निश्चित समय सीमा तथा गारंटेड इलाज की उम्मीद करते हैं। जो व्यावहारिक एवं कानूनी तौर गलत एवं असंभव है, फिर भी रोगी की जेब से पैसे निकलवाने के चक्कर में धन के लोभी अनेक निष्ठुर तथा असंवेदनशील डॉक्टर रोगी की भाषा बोलने लगे हैं। जिसके परिणाम या दुष्परिणाम ऐसे गारंटी मांगने वाले रोगी ही जानते हैं।

मेरा अनुभव तो यही है कि बवासीर का मूल कब्ज है। अत: बवासीर के उपचार के लिये सबसे पहले कब्ज को ठीक करने के लिये सरल, सौम्य तथा उचित दवाइयों का, उचित मात्रा में स्वस्थ होने तक नियमित रूप ये सेवन करना पहली और अंतिम जरूरत है। ठीक होना या नहीं होना, डॉक्टर, रोगी तथा रोग की स्थिति एवं दवाइयों के साथ-साथ प्रकृति पर भी निर्भर करता है। क्योंकि अंतिम सत्य यही है कि डॉक्टर केवल दवाई देता है, रोगी को पूर्णत: स्वस्थ प्रकृति ही करती है।
उपचार हेतु निकट के किसी आयुर्वेद और, या होम्योपैथी के डॉक्टर से सम्पर्क करें। स्वास्थ्य सम्बन्धी अधिक जानकारी हेतु: http://www.healthcarefriend.in पर विजिट/क्लिक करें।

नोट:---->>>>>>>>>>---- ऑर्गेनिक (Organic) देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त अनमोल ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान हमने अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये हैं। जो बेशक कुछ गरीब या स्वास्थ्य के प्रति कंजूस लोगों को महंगे लग सकते हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों की "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक शारीरिक तथा मानसिक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है। चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम हमारी वेब साइट स्वास्थ्य रक्षक सखा के जरिये हर दिन देशभर में जारी है। लेकिन-गारण्टी की उम्मीद करना खुद को धोखा देना और डॉक्टर को झूठ बोलने हेतु उकसाने जैसा है, क्योंकि इलाज में गारण्टी देना असम्भव और गैर कानूनी है। अतः तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज की उम्मीद नहीं करें।
-Online Dr. P. L. Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 8561955619 (10AM to 10 PM), 07.06.2018.
नवविवाहित दम्पत्तियों को समर्पित लेख: यदि करते हो पत्नी से प्यार तो होम्योपैथिक प्रसव सुरक्षा चक्र (Pregnancy Safe-Guard) से क्यों इनकार?

हर वर्ष की भांति, इस वर्ष भी हजारों-लाखों युवक-युवती दाम्पत्य जीवन की शुरूआत कर चुके हैं या करने जा रहे हैं। सभी को मुझ डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' की ओर से हार्दिक बधाई तथा सुखद, स्वस्थ एवं सफल दाम्पत्य जीवन की अनंत शुभकामनाएं।


विवाह के बाद आप सभी नव दम्पत्ती रंगीन सपनों की दुनियां में बिल्कुल नये जीवन से सुखद अहसास से मुखातिब हो रहे हैं। इस नयी भूमिका में आप सभी के सामने रोमांचकारी चुनौतियां तथा अनेक जिम्मेदारियां भी हैं। जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर एक अति महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ।

नवदम्पत्तियों (newly married) को भी प्रकृति के अनुक्रम को आगे बढाने के लिये निकट भविष्य में सन्तान सुख की प्राप्ति होनी है। जिसकी भावात्मक अनुभूति का अहसास क्या होता है, इसे सन्तान पाकर ही समझ सकेंगे।

एक लड़की, पत्नी से मां बनकर सम्पूर्ण नारी बनती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सन्तान को जन्म देकर स्त्री को पुनर्जन्म मिलता है। प्रसव पीड़ा और प्रसव के बाद की सुखानुभूति क्या होती है, इसे सिर्फ एक माँ ही समझ सकती है।

विज्ञान ने हमारे जीवन को आसान बनाया है। इसके उपरांत भी आंकड़े बताते हैं, कि शहरों में 40% तक प्रसव सिजेरियन होने लगे हैं। गांवों में यह आंकड़ा कुछ कम है। आंकड़े यह भी बतलाते हैं कि जिन माताओं के सिजेरियन प्रसव होते हैं, उनमें से 70% से अधिक गैर-जरूरी होते हैं। जिसके मूलत: तीन बड़े कारण बताए जाते हैं:-

1-नवयुवतियों में सामान्य प्रसव को लेकर भ्रांत धारणा तथा युवावस्था की दहलीज पर कदम रखने के साथ ही आसन्न प्रसव (impending delivery or childbirth) की काल्पनिक पीड़ा (fictional pain) का असहनीय दर्दनाक अहसास अवचेतन मन (subconscious mind) में स्थापित कर लेना। जो उनके दिलों-दिमांग पर फोबिया (phobia) बनकर कब्जा कर लेता है।
2-लालची डॉक्टर्स की कभी न तृप्त होने वाली धन की भूख, जिसके कारण सामान्य हो सकने वाले प्रसव को भी सिजेरियन प्रसव बना दिया जाता है। और
3-प्रकृतिदत्त पेचीदगियां। जिनमें जच्चा और बच्चा में से किसी एक या दोनों की जान बचाने के लिए सिजेरियन प्रसव जरूरी हो जाता है।
उपरोक्त हालातों में असामान्य तरीके से मां बनने वाली माताओं का प्रसव के बाद का जीवन जहां शारीरिक एवं मानसिक रूप से अनंत अनचाही पीड़ाओं (unwanted infinite pain) का कारण बन जाता है। वहीं सिजेरियन प्रसव शारीरिक कुरूपता को भी जन्म देता है। जिसका स्त्री के मन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सी-सेक्शन प्रसव के बाद भी बहुत सारी महिलाएं आसानी से यौन-सम्बन्ध नहीं बना पाती है। उनके जीवन में यौन-सम्बन्ध पीड़ादायक अहसास बन जाता है। जिससे ऐसे जोड़ों का दाम्पत्य जीवन बिखराव के कगार पर पहुंच जाता है। जिसके कारण अनेक मामलों में विवाहेत्तर यौन सम्बन्धों (extramarital sexual relations) का जन्म होता है। ऐसे हालात परिवारों के बिखराव, तलाक तथा सामाजिक विकृतियों के लिये उत्तरदायी होते हैं।

इस सब अनचाही स्थितियों से 95% से अधिक मामलों में बचा जा सकता है। बशर्ते:-
  • 1-गर्भिणी महिलाएं गर्भ के दौरान निठल्ली एवं निष्क्रिय बनकर सिजेरियन प्रसव होने के सपने देखना बंद कर दें और लालची डॉक्टरों के डराने से डरें नहीं। और
  • 2-गर्भ धारण करते ही होम्योपैथी तथा बॉयोकैमी की दुष्प्रभाव रहित दवाईयों का नियमित सेवन करें।
होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयां गर्भावस्था एवं प्रसव को कैसे आसान बनाती हैं?
  • 1-गर्भस्राव और गर्भपात को रोकती हैं।
  • 2-गर्भकालीन अनचाही तकलीफों से मुक्ति दिलाती हैं।
  • 3-असमय/समय पूर्व प्रसव (premature delivery) को रोकती हैं।
  • 4-दर्दरहित और आसान प्रसव में सहयोग करती हैं।
  • 5-शिशु के संरक्षण, विकास एवं पोषण में सहायक बनती हैं।
होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयों के सेवन के बाद सिजेरियन प्रसव की जरूरत क्यों नहीं पड़ती है?

होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयां स्त्री के प्रजनन संस्थान के तंत्रिका-तंत्र में ऐसा संतुलित लचीलापन (balanced flexibility) एवं संकोचन (Contraction) पैदा कर देती हैं। जिसके फलस्वरूप स्त्री का सम्पूर्ण प्रजनन संस्थान निर्धारित समय से पहले प्रसव होने नहीं देता और निर्धारित समय के बाद गर्भ का अतिरिक्त समय बढने नहीं देता। अर्थात न समय से पहले प्रसव (premature delivery), न समय के बाद (undue delay)। जिसे यों कह सकते हैं कि चित भी मेरी और पट भी मेरी।

प्रसव के समय स्त्री के सम्पूर्ण प्रजनन संस्थान का तंत्रिका-तंत्र इतना कोमल और लचीला हो जाता है कि बिना किसी बाहरी एवं अप्राकृतिक हस्तक्षेप तथा विशेष दर्दनाक पीड़ा को झेले बिना ही शिशु बहुत ही आसानी से जन्म ले पाता है। इसी वजह से गर्भिणी को प्रसव पूर्व, झूठी प्रसव पीड़ा भी नहीं झेलनी पड़ती है। भविष्य में स्त्री को गर्भाशयच्युति (Uterus Collapse) की समस्या होने की संभावना नगण्य हो जाती है। प्रसव के बाद स्त्री के प्रजनन अंक सिकुड़कर लगभग पूर्ववत स्त्री में लौट आते हैं, जो भावी सुखद दाम्पत्य जीवन के लिये सुखद अहसास के आधार बनते हैं। अंतिम बात होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयों का सेवन बहुत आसान और तुलनात्मक रूप से बहुत कम खर्चीला होता है। मैं गत दो दशक से अधिक समय से प्रसव सुरक्षा चक्र (Pregnancy Safe-Guard-PSG) उपलब्ध करवाता रहा हूं और जिसके परिणामस्वरूप गर्भिणियों को आसानी से प्राकृतिक प्रसव होते रहे हैं। बशर्ते कि लालची डॉक्टर्स के डराने से डरें नहीं।

अत: माता-पिता बनने से पहले और अपनी पहली संतान को जन्म देने से पहले किसी होम्योपैथ की सलाह लेना नहीं भूलें। यह कदम गर्भिणी के लिये सौंदर्य रक्षक, आसान, पीड़ा रहित तथा सामान्य प्रसव का सुखद अहसास और आप दोनों के भावी दाम्पत्य जीवन में रोमांचकारी अनुभव का आधार बनेगा।
-Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 09.05.2018. मेरा Health WhatsApp No.: 85619-55619 केवल नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श चाहने वालों के लिये सार्वजनिक है। इस नम्बर पर फालतू सामग्री भेजने वालों को तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता है।
भाग-3: यदि ठंड, छुअन/स्पर्श और दर्द के प्रति अत्यंत असहिष्णुता (Extremely Intolerance) हो तो होम्योपैथी के जरिये सभी विकारों (Disorders) से मुक्ति!


होम्योपैथी के समान लाक्षणिक चिकित्सा सिद्धान्त को रोचक भाषा में आम लोगों के लिये सरल और सुगम बनाने के लिये छोटा सा प्रयास शुरू किया गया है। इसी क्रम में निम्न विवरण से यदि किसी के भी शारीरिक और, या मानसिक लक्षण मिलते हैं, तो इनके आधार पर उनके कितने भी पुराने और किसी भी मानसिक और, या शारीरिक विकारों से मुक्ति (cure from mental and, or physical disorders) संभव है।

*आरोग्य के लिए आधारभूत लक्षण*
*(Basic Symptoms for Cure)*

*1-अत्यधिक सर्दी लगना (Extreme cold):* सर्दी में हरेक व्यक्ति को गर्म कपड़े की जरूरत पड़ती है, लेकिन कुछ लोग हमेशा अपने-आप को गर्म कपड़ों से ढके रखते हैं। घर और दफ्तर के दरवाजे और खिड़कियां बन्द रखते हैं। अपने कमरे की ही नहीं, अपने साथ के कमरों के दरवाजे और खिड़कियां भी बन्द रखा करते हैं। सर्दी बर्दाश्त कर ही नहीं सकते। सोते हुए रजाई/कम्बल में कहीं से भी ठंडी हवा न घुस सके, इसका पूरा प्रबन्ध कर लेते हैं। खिड़की या दरवाजा जरा सा भी खुला रहने से उनको ऐसा लगता है कि उस स्थान से हवा आकर शरीर में प्रवेश कर रही है या शरीर को ठंडा कर रही है और उससे उनको तकलीफ बढ़ने की आशंका होती है!

*2-दर्द और स्पर्श के प्रति अत्यधिक असहनशीलता (Extreme intolerance towards pain and touch):* व्यक्ति में सहनशीलता का इस कदर अभाव होता है कि यदि उसके शरीर में कहीं सूजन या कोई चर्मरोग या फोड़ा-फुंसी हो तो वह न तो उन्हें किसी को छूने देता है, न उनके दर्द को सह सकता है। उसे थोड़ा सा भी दर्द ऐसे महसूस होता है, जैसे सूइयां चुभोई जा रही हों। जैसे वह ठंडी हवा को नहीं सह सकता, वैसे छूअन/स्पर्श (touch) को भी नहीं सह सकता। उसमें हर प्रकार की असहनशीलता (intolerance) पायी जाती है। दूसरे लोग जिस दर्द को साधारण समझ कर उस पर ध्यान भी नहीं देते, उस दर्द में वह चीखने-चिल्लाने लगता है। यहां तक कि थोड़े-से दर्द में ही बेहोश तक हो जाता है!


रजिस्ट्रेशन-फ्री: यदि आप लाइलाज (Incurable) समझी जाने वाली किसी बीमारी का इलाज करवा-करवाकर थक चुके/चुकी हैं और आपकी बीमारी ठीक नहीं हो रही हैं तो इसकी की अनदेखी नहीं करें स्वास्थ्य परामर्श या इलाज हेतु अभी और इसी समय 85-619-55-619 पर अपनी समस्या लिखकर वाट्सएप करें और फ्री रजिस्ट्रेशन करवायें। जिससे बहुत कम खर्चे में आपका घर-बैठे इलाज-समाधान हो सके। Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) तथा संचालक-निरोगधाम (लाइलाज का इलाज)।


*3-मानसिक-असहिष्णुता (Mental intolerance):* ठंड को न सहना, स्पर्श को न सहना, दर्द को न सहना, इतने पर ही बस नहीं होता। मानसिक-अनुभूति (Mental feeling) की भी असहिष्णुता होती है। सामान्य से कारण व्यक्ति को बहुत अधिक क्रोध आ जाता है, वह उत्तेजित और झगड़े के लिये तैयार रहता है। ऐसा चित्त-विकार (Mental disorder) उसे इस कदर दबोच लेता है कि बिना कारण के अपने मित्रों तक को मारने-पीटने के लिये उतावला हो जाता है।

*4-त्वचा रोग (skin diseases):* थोड़े सी ही त्वचा के कट जाने मात्रा से वह पक जाती है और उसमें मवाद आने लगती है। एक्जिमा के कारण हुए घाव में भी स्पर्श मात्र से ही खून का निकलना, छोटी-छोटी फुंसियों का निकलना, इन छोटी-छोटी फुंसियों में मवाद पड़ जाता है तथा पनीर की जैसी बदबू आना।

*इन विकारों से मुक्ति हेतु क्या करें?*
*(What to do to get rid of these disorders?)*

उपरोक्त लक्षणों में से यदि पचास फीसदी से अधिक लक्षण किसी व्यक्ति में मिलने पर अपने नजदीक के किसी भी अनुभवी होम्योपैथ से सम्पर्क करें और, या *सुबह 10 बजे से रात्रि 10 बजे के बीच मोबाईल नम्बर 98750 66111 पर तथा Health Advice WhatsApp No.: 85619 55619 पर मुझ से भी सम्पर्क किया जा सकता है।* हो सकता है कि *अभी तक 'लाइलाज समझी जाने वाले' (incurable considered) आपके किसी मानसिक और, या शारीरिक विकार से आपको मुक्ति मिल जाये?*
Ref-RUHPPLLUMSEREANPAENH (27-01-2018)
*आपका-अपना*
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF & MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
आॅन लाइन-स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
संचालक-निरोगधाम (लाइलाज समझे जाने वाले विकारों का इलाज)
*हेल्थ परामर्श वाट्सएप: 85619-55619 (इस पर काल नहीं करें)*
मो. नं.: 9875066111 (10 AM to 10 PM बजे के बीच)
शीघ्रपतन का होम्योपैथिक इलाज!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
आगे बढने से पहले पाठकों को अवगत करवाना उचित होगा कि 30 नवम्बर, 2017 को 'शीघ्रपतन' शीर्षक से लिखे लेख में निम्न विषयों की जानकारी दी जा चुकी है:
1. शीघ्रपतन से कितने पुरुष परेशान रहते हैं?
2. शीघ्रपतन किसे कहते हैं?
3. वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
4. स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
5. सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?
6. शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध?
7. शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण!
8. शीघ्रपतन के कारण।
उक्त जानकारी मेरी वेबसाइट के निम्न लिंक पर पढी जा सकती है:-

07 दिसम्बर, 2017 को 'शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!' शीर्षक से लिखे लेख में शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा चुकी है।
उक्त जानकारी मेरी वेबसाइट के निम्न लिंक पर पढी जा सकती है:-
http://www.healthcarefriend.in/2017/12/blog-post_69.html

शीघ्रपतन के होम्योपैथिक इलाज के बारे में लिखने से पहले स्पष्ट कर देना उचित होगा कि होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। इलाज करने के लिये रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को जानने के बाद उचित दवाई का निर्धारण करना होता है, जो हम होम्योपैथ्स के लिये बहुत ही कठिन और परिश्रमपूर्ण कार्य है। दु:खद पहलु यह है कि अधिकतर रोगी, अपने लक्षण बताने में ही संकोच करते हैं। जिसके कारण रोगी को भारी शारीरिक एवं आर्थिक नुकसान होता है। साथ ही उपचारक का भी समय बर्बादा होता है और नाम खराब होता है।





यहां पर कुछ प्रमुख होम्योपैथिक औषधियों की जानकारी दी जा रही है, जो शीघ्रपतन की समस्या के समाधान में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। मगर याद रहे किसी अनुभवी होम्योपैथ के परामर्श के बिना इन दवाईयों का सेवन करना उचित नहीं होगा, क्योंकि दवाई के नाम मात्र से कुछ नहीं हो सकता। महत्वपूर्ण कार्य है, रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को पूछकर/जानकर दवा की सही मात्रा और दवा की शक्ति का निर्धारण करना।

आॅरम मेटालिकम: रोगी को आत्महत्या करने का मन करता है और अपने आप को बिल्कुल निकम्मा महसूस करता है, निराशा अधिक होने के साथ ही शरीर का रक्तदाब बढ़ जाता है, जीवन में एकदम निराशापन हो जाता है। रोगी को भूख तथा प्यास लगती है, जी मिचलाने लगता है और दम घुटने लगता है तथा गर्मी भी लगने लगती है। अण्डकोष में दर्द और सूजन आ जाती है, अण्डको अन्डकोषों में कठोरता उत्पन्न हो जाती है, लिंग में तेज उत्तेजना होती है। भयंकर शारीरिक कामोत्तेजना तथा चंचलता का भाव होना, परन्तु इसके बाद बहुत शीघ्र ही लिंग में अत्यधिक शिथिलता। मैथुन शूरू करते ही लिंग का ढीला पड़ जाना। हस्तमैथुन के दुष्परिणाम आदि लक्षण पाये जाते हैं। स्त्री रोगी की योनि में तेज उत्तेजना होती है। बांझपन का रोग तथा इसके साथ ही योनि में तेज जलन के साथ बांझपन हो तो यह दवाई स्त्रियों के लिए भी बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

सेलिनियम: सेलेनियम उन रोगियों के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है जो व्यक्ति जवानी के जोश में आकर अपने वीर्य को समय से पहले ही समाप्त कर चुके होते हैं और संभोग क्रिया के समय पूरी तरह सफल नहीं हो पाते। स्त्री के साथ संभोग क्रिया करने के बाद रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना। सोते समय रोगी का वीर्य अपने आप ही निकल जाना। मन में संभोग करने की इच्छा तेज होना, लेकिन संभोग करते समय लिंग का उत्तेजित न होना, वीर्य का पतला हो जाना। बार-बार वीर्य-स्राव। बिना कामेच्छा के ही प्रात: काल लिंग में उत्तेजना होना, परन्तु सहवास की कोशिश करने पर लिंग का शिथिल हो जाना। अत्यधिक लैंगिक दुर्बलता। मन में अत्यधिक कामेच्छा होने पर भी लिंग में कड़ापन न आना अथवा सेक्स पूर्ण न हो पाना। जननेन्द्रिय/लिंग में खुजली तथा सुरसुरी। नींद में, पाखाने के समय अथवा अनजाने में लिंग से गोंद जैसा लसदार पदार्थ निकलना आदि लक्षणों में सेलिनियम का उपयोग लाभदायी हो सकता है।

ऐग्नस कैक्टस: लैंगिक दोष उत्पन्न होना, मृत्यु का भय होना। अधिक उदासी के साथ जल्दी मृत्यु का भय महसूस हो रहा हो। मन-मस्तिष्क स्थिर न रहना, याददाश्त कमजोर होना, किसी कार्य को करने में उत्साह न होना। जो पुरुष जवानी में अधिक मौज-मस्ती करते रहे हैं और कामवासना में अधिक डूबे रहने के कारण शारीरिक रूप से कमजोर तथा नपुंसक हो जाते हैं। जिनके प्रजनन अंग ठण्डे तथा ढीले पड़ गये हों। लिंग में कमजोरी, परन्तु कामेच्छा का अधिक होना, मल-त्याग के समय जोर लगाने से अथवा नींद में वीर्य स्खलन, एकदम मानसिक अवसन्नता, कमजोर तथा अनमनेपन का भाव आदि लक्षणों में इसका सेवन करें।

ग्रैफाइटिस: हर समय डर सा लगते रहना, किसी भी काम को करने में मन न लगना, बहुत ज्यादा भावुक हो जाना, किसी भी फैसले को करने में दुविधा होना, उदास सा बैठे रहना। गर्म पीने वाली चीजों का हजम न होना। जितनी बार भी भोजन करे उतनी ही बार जी मिचलाना और उल्टी आना, आमाशय में दबाव सा महसूस होना। आमाशय में जलन होने के कारण भूख न लगन। डकार लेने में परेशानी होना। पेट में गैस बनना। सेक्स करने की इच्छा का तेज होना, लेकिन सेक्सक्रिया के दौरान अपने सहभागी को पूरी तरह से खुश न कर पाना। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण योनि में लिंग-प्रवेश के तुरन्त बाद या प्रवेश से पूर्व ही वीर्य-स्खलन हो जाए। लिंग में कड़ापन न आना। हस्तमैथुन तथा अतिरिक्त काम-तृप्ति के कारण लिंग में शिथिलता, लिंगमुण्ड/सुपारी पर कटे-फटे घाव तथा खाल उधड़ जाना, लिंग में सूजन तथा लसदार-चिपचिपे स्राव होना। सेक्स क्रिया से मन का बिल्कुल हट जाना आदि लक्षणों के नज़र आने पर रोगी को ग्रैफाइटिस औषधि देने से लाभ होता है।

लाइकोपोडियम: लाइकोपोडियम नामर्दी की मुख्य औषध है। यह ऐसे रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है जो मानसिक तथा शारीरिक दृष्टि से भी कमजोर होते हैं और जिन्हें शरीर में बहुत अधिक कमजोरी होती है। रोगी को और भी कई प्रकार के रोग होते हैं जो इस प्रकार हैं- लालची, कंजूस, धन का लालची, दूसरे के प्रति घृणा की भावना रखना आदि। रोगी को भय होता है तथा क्रोधित स्वभाव का हो जाता है, अपमान के कारण उसे और भी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। अत्यधिक मैथुन तथा अत्यधिक अप्राकृतिक मैथुन के कारण लिंग में उत्तेजना या कड़ापन ही न आना। नपुंसकता रोग होने के साथ ही रोगी को संभोग करने की इच्छा अधिक होती है तथा समय से पहले अपने आप ही वीर्य निकल जाता है और इसके बाद लिंग ठण्डा हो जाता है तथा संभोग की शक्ति कम हो जाती है अर्थात संभोग करने का मन नहीं करता है, संभोग करने के समय में लिंग में हल्का कड़ापन होता है, संभोग करते समय नींद सी आने लगती है, रोगी संभोग के प्रति भयभीत हो जाता है तथा जम्भाई आती है। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तो इन लक्षणों के साथ शीघ्रपतन के लक्षण में लाइकोपोडियम सर्वोत्तम दवाई है। यह दवाई विशेषकर वृद्धों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हो चुकी है।

फास्फोरस: रोगी का उत्साह कम, मन चिड़चिड़ा हो जाता है। उसे डर लगता है और रोगी को ऐसा लगता है कि हर कोने से कोई चीज रैंगती हुई बाहर निकल रही हो तथा उसके मन में दिव्यदृष्टि जैसी दशा उत्पन्न हो जाती है। रोगी अचानक चौंक पड़ता है। रोगी की सोचने की शक्ति कम हो जाती है, रोगी पागलों की तरह का व्यवहार करता है। उसे जीवन मेें आनन्द की अनुभूति नहीं होती है। अकेले रहने पर मृत्यु का भय लगा रहता है। दिमाग थका-थका सा रहता है। वह अपने प्रति अधिक उच्च धारणा रखता है, शरीर में उत्तेजना अधिक होती है, सारा शरीर गरम रहता है, रोगी अस्थिर रहता है और उसे चारों ओर अशान्ति प्रतीत होती है। खाना खाते ही रोगी को तुरन्त भूख लग जाती है, भोजन करने के बाद हर बार खट्टा स्वाद और खट्टी डकारें आती है, डकार आने के साथ ही खाना खाया हुआ भोजन तुरन्त वापस मुंह में आ जाता है, जैसे ही आमाशय के अन्दर पानी गरम होता है, वैसे ही उसकी उल्टी हो जाती है। रोगी में संभोग करने की शक्ति नहीं रहती है, रोगी को संभोग क्रिया करने के लिए अधिक इच्छा होती है, लेकिन उसका अपने आप ही वीर्यपात हो जाता है। दिन-रात बारम्बार पतले, लसदार रंगहीन तरल पदार्थ का मूत्र-मार्ग से स्राव होना। रोगी को संभोग करने के सपने आते हैं और अपने आप ही वीर्यपात हो जाता है। इत्यादि लक्षणों पर फास्फोरस लाभदायक है।

फास्फोरिक एसिडम: ऐसे रोगियों के रोगों को ठीक करने के लिए उपयोगी है जो पहले बहुत तन्दुरुस्त (स्वास्थ्य) रहे हों, लेकिन बाद में स्वप्नदोष, हस्तमैथुन, स्त्री प्रसंग, अनुचित बुरे कार्य करने के कारण अपने वीर्य को नष्ट करते हैं जिसके कारण उनका शरीर ठण्डा पड़ जाता है और कमजोरी अधिक हो जाती हैं। अधिक रोना-धोना और बड़बड़ाना, इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी को ठण्ड भी लगती है और अधिक निराशा होती है। रोगी को रसीले पदार्थों का सेवन करने की इच्छा होती है, खट्टी डकारें आती है, जी मिचलाने लगता है। आमाशय में दबाव महसूस होता है और भोजन करने के बाद ठीक प्रकार से नींद नहीं आती है, ठण्डा दूध पीने का मन करता है। रोगी को बार-बार पेशाब आता है तथा इसके साथ ही पेशाब में दूध जैसा सफेद पदार्थ भी आता है। जो वीर्य नहीं होता, लेकिन रोगी वीर्य समझकर परेशान होता रहता है। रोगी को रात के समय में मलत्याग करते समय वीर्यपात हो जाता है। वीर्यपात होते ही रोगी को जलन भी होती है। संभोग करने की शक्ति घट जाती है, अण्डकोष को छूने पर दर्द होता है तथा अण्डकोष सूजा रहता है, आलिंगन करने के समय में लिंग ठण्डा (शिथिल) पड़ जाता है। युवकों की अत्यधिक कामवासनाओं में लिप्तता तथा हस्तमैथुन। व्यभिचार आदि के कारण लैंगिक कमजोरी। नामर्दी के साथ अचैतन्यता/मूर्छा जैसी अवस्था। मलत्याग करने के समय में भी लिंग शिथिल पड़ा रहता है। लिंग की त्वचा पर सूजन आ जाती है तथा लिंग की सुपारी पर भी सूजन आ जाती है, लिंग पर घाव हो जाता है। मानसिक दुर्बलता। थोड़ी-बहुत उत्तेजना हो भी जाये तो सेक्स क्रिया पूर्ण न कर पाना। इस प्रकार के लक्षणों में फास्फोरिकम एसिडम का प्रयोग किया जा सकता है।

प्लैटिनम: रोगी अत्यधिक अहंकारी, अभिमानी हो जाता है। किसी की परवाह नहीं करना। सबको हर बात में अपने से छोटा समझना और अपने आप को हर बात में सब से बड़ा समझना। दूसरों के प्रति घृणा का भाव। इस प्रकार की अत्यधिक उत्तेजना, जिसके कारण हस्तमैथुन या अन्य तरीके से वीर्यपात करने को विवश होना पड़े। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण मिर्गी का दौरा पड़ जाये, असहनीय कामोत्तेजना होते रहना तथा साथ में लिंग/जननेन्द्रिय में लगातार सुरसुरी होना। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण शीघ्रपतन के लक्षण में प्लैटिनम लाभदायक है।

सीपिया: रोगी को अपने जननांग बिल्कुल ठण्डे से महसूस होना और उनमें बहुत ज्यादा पसीना आना, पुराना सुजाक रोग होने के कारण पेशाब के रास्ते से रात के समय दर्द के साथ स्राव का आना। लिंग के आगे के भाग पर मस्से से निकलना। बहुत दिनों तक बीमारी बने रहना अथवा बारम्बार वीर्यस्राव के कारण लिंग का दुर्बल हो जाना। कामेच्छा का घट जाना अथवा कामेच्छा के प्रति अरुचि आदि लक्षणों में सीपिया मदद कर सकती है।

सल्फर: रोगी का हर बात को तुरंत ही भूल जाना, किसी भी बात को सोचने और समझने में बहुत मुश्किल होना, मन में अजीब-अजीब से विचार आना जैसे कि वह किसी भी चीज को सुंदर वस्तु समझने लगता है, अपने आपको दुनिया का सबसे अमीर आदमी समझने लगता है, रोगी का बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाना, किसी भी व्यक्ति से सही तरीके से बात न करना, काम करने में मन न लगना, रोगी इतना आलसी हो जाता है कि उसको खुद को ही जगा पाना मुश्किल हो जाता है, खुलकर भूख लगने पर भी रोगी का हमेशा कमजोरी और दुबला-पतला सा रहना। रोगी चाहे जितना भी भोजन कर ले उसको तब भी भूख लगती रहती है, अगर रोगी भोजन नही करता तो उसके सिर में दर्द शुरू हो जाता है और कभी-कभी तो रोगी को बिल्कुल भी भूख नहीं लगती, थोड़ा सा भोजन करते ही रोगी की भूख समाप्त हो जाती है। रोगी के लिंग में सूजन आने के कारण दर्द होना। वीर्य का अपने आप ही निकल जाना। सोते समय लिंग में बहुत तेजी से खुजली का होना और लिंग का बहुत कमजोर पड़ जाना। अंडकोषों का लटक जाना। कामेच्छा के समय जबरदस्त खाँसी उठना। लिंग में भरपूर कड़ापन न आना एवं योनि में प्रवेश के पूर्व ही अथवा प्रवेश करते ही बहुत जल्दी वीर्य स्खलित हो जाना। रोगी के लिंग में बहुत ही बदबूदार पसीने आना आदि लक्षणों के आधार पर सल्फर औषधि का प्रयोग करना असरकारक रहता है।

जिंकम मेटालिकम: मुख्य क्रिया मस्तिष्क सम्बंधित लक्षणों में विशेष रूप से होती है। यह औषधि ऊतकों को सुधारने में तेजी से क्रिया करती है और ऊतकों से सम्बंधी लक्षणों को समाप्त करती है। अण्डकोष की सूजन और ऊपर की ओर खिंचाव महसूस होना। लिंग की तेज उत्तेजना। रोगी में उत्पन्न ऐसे लक्षण जिसमें रोगभ्रम रहता है और साथ ही वीर्यपात हो जाता है। बालों का झड़ना। अण्डकोषों के वीर्य की थैली में खिंचाव महसूस होना। मन से सम्बंधित ऐसे लक्षण, जिसमें रोगी की स्मरणशक्ति कमजोर होने लगती है तथा उसे थोड़े देर पहले ही कही हुए बातें याद नहीं रहती। ऐसे रोगी शोर-शराबा पसन्द नहीं करता तथा हल्के शोर-शराबा में ही गुस्सा हो जाता है। इसके अतिरिक्त काम करने की इच्छा न करना, किसी से मिलने या बातचीत करने की इच्छा न होना। दूसरे के कहे हुए बातों को दोहराते रहना। मन में बुरे विचार आना तथा काल्पनिक रूप से भयभीत रहना। मल का सूखकर कठोर हो जाना तथा कब्ज बनना। इन कारणों से शीघ्रपतन होने पर रोगी को जिंकम मेटालिकम उपयोगी सिद्ध होगी।

कैलेडियम: रोगी अत्यन्त भुलक्कड़ होता है। जो काम कर चुका हो उस पर फिर सोचने लगता है कि किया या नहीं; दरवाजा बन्द कर चुका है, किन्तु लौट कर फिर ख्याल आता है कि बन्द किया या नहीं और फिर जाकर दरवाजे की कुण्डी को हाथ लगाकर इतमिनान करता है। जिस चीज का निश्चय करना हो उसे बार-बार जाकर, देखकर, हाथ लगाकर निश्चय करता है और वापस लौटने पर फिर अनिश्चित-का-अनिश्चित बना रहता है। रोगी सारे दिन बैठा-बैठा यही सोचा करता है कि जो काम वह कर चुका है या हो जाने चाहिये थे, वे उसने किये या नहीं किये, वे हुए या नहीं हुए। मन की इस प्रकार की दुर्बलता इसमें आ जाती है। जितना ही वह किसी विषय पर मन केन्द्रित करना चाहता है, उतना ही मन उस पर केन्द्रित नहीं हो पाता। मन की इस प्रकार की दुर्बलता प्राय: व्यभिचारियों में, हस्त-मैथुन करनेवालों में पायी जाती है। रोगी का मन अत्यन्त विषयासक्त होता है। उसमें स्त्री-प्रसंग की उत्कट इच्छा होती है, परन्तु मैथुन के प्रति असमर्थता होती है। स्त्री का आलिंगन करता है, परन्तु शारीरिक उत्तेजना ही नहीं हो पाती। ऐसे लोग सड़क के किनारे खड़े हुए आती-जाती ललनाओं की ओर ताका करते हैं और उनका वीर्य रिसता रहता है। ऐसे व्यभिचारी-विचारों से ग्रस्त पुरुष रातभर उलटा-पलटा करते हैं, लेकिन संभोग करने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे रोगी को इतना मीठा पसीना आता है कि मक्खियां तक उस मिठास के लिये उसकी तरफ़ खिंची चली आती हैं। पसीना आने से रोगी को सभी तकलीफों में आराम मिलता है। इन लक्षणों में कैलेडियम सर्वोत्तम दवाई है।

कार्बोनियम सल्फ्यूरेटम: ज्यादा नशा करने के कारण रोगी की मांसपेशियों के कमजोर हो जाने पर, ठण्ड न बर्दाश्त कर पाना, त्वचा और श्लैष्मिका झिल्लियों का सुन्न पड़ जाना। ज्यादा नींद आना या नींद न आना, रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना और याददाश्त का कमजोर हो जाना। संभोग क्रिया करने का बिल्कुल मन न करना, लिंग का सिकुड़कर छोटा हो जाना, अपने आप ही वीर्य निकल जाना। मूत्रनली से पुराने सूजाक जैसा स्राव निकलना। मूत्राशय के कष्ट, मूत्रनली में वेदना, सम्पूर्ण ध्वजभंग/नामर्दी। लिंगमुण्ड का प्रदाह, अण्डकोष में दर्द, जननेन्द्रिय में खुजली, जननेन्द्रिय की शिथिलता, सहवास के समय अतिशीघ्र स्खलित हो जाना, रात में स्वप्नदोष, कामेच्छा का अभाव आदि लक्षणों में कार्बोनियम सल्फ्यूरेटम का सेवन अत्यन्त उपयोगी है।

कोनियम मेकुलेटम: टांगों का कांपना, चलने-फिरने में परेशानी होना, कुछ दूर चलते ही शरीर का जवाब दे देना, कमजोरी, खून की कमी आदि लक्षण जो ज्यादा बुढ़ापे के लक्षण होते हैं। याददाश्त का कमजोर हो जाना और जनेन्द्रियों का कमजोर पड़ जाना। रात को नींद न आना, सुबह-सुबह बिस्तर छोड़ने का मन न करना, शरीर का टूटा-टूटा सा लगना। किसी भी चीज को रखकर कुछ ही समय में भूल जाना की कहां रखी है। पुरुष के अंदर संभोग की इच्छा तेज होने पर भी संभोग क्रिया में सफल न हो पाना, लिंग का कमजोर पड़ जाना, अण्डकोश का सख्त और बढ़ जाना। प्रचण्ड कामेच्छा रहने पर भी लिंग का उत्तेजित न होना। रात्रि में बिना स्वप्न के ही वीर्यम्राव। अत्यधिक सेक्स इच्छा होने पर भी सम्पूर्ण अथवा आंशिक, ध्वजभंग/नामर्दी। दर्द भरा वीर्यस्राव तथा भारी दर्दनाक लिंगोत्तेजना। लिंगोत्तेजना होने पर छुरी से काटने जैसा दर्द। विधुर तथा स्त्री प्रसंग के अनभ्यस्त पुरुषों की दबी हुई कामेच्छा का दुष्परिणाम, लैंगिक दुर्बलता, शीघ्रपतन के लक्षण आदि में कोनियम मेकुलेटम सर्वोत्तम दवाई है।

उक्त औषधियों के अतिरिक्त भी लक्षणानुसार होम्योपैथी में अनेकानेक ऐसी औषधियाँ हैं, जो शीघ्रपतन नामक तकलीफ का समाधान करने में उपयोगी सिद्ध होती हैं।

*नोट: मेरी ओर से भेजी जा रही उक्त पाठ्य सामग्री से यदि आपको किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो प्लीज तुरंत अवगत कराएं। आगे से आपको नहीं भेजी जायेगी। यदि यह सामग्री आपको किसी अन्य स्रोत से मिली है और यदि आप अपने वाट्सएप इनबॉक्स में नियमित रूप से प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने मोबाईल में हमारा वाट्सएप 9875066111 सेव/एड करें और हमें नियमित सामग्री प्राप्त करने हेतु वाट्सएप 9875066111 पर लिखें।*
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 26 दिसम्बर, 2017, 04.44AM
*सर्दी-जुकाम का होम्योपैथिक इलाज*

सर्दी का मौसम है। हर घर में किसी न किसी को सर्दी-जुकाम ने पकड़ रखा होगा? यद्यपि होम्योपैथी में किसी भी रोग के नाम से कोई दवाई नहीं दी जाती है, लेकिन लक्षणों के अनुसार लाइलाज समझी जाने वाली पुरानी से पुरानी तकलीफों को भी होम्योपैथी से ठीक किया जा सकता है। अत: सर्दी-जुकाम के बारे में भी यही नियम लागू होता है। अत: लक्षणानुसार कुछ होम्योपैथिक दवाइयों की जानकारी प्रस्तुत है:-



*एलियम सीपा (Allium Cepa):* मुख्य लक्षण-जुकाम में नाक से बहने वाले पानी से होंठ एवं नाक पर चिरमिराहट एवं खुजली हो रही हो साथ में छीकों के साथ नाक और आंखों से पानी आता हो तो एलियम सीपा जुकाम को ठीक कर देगी

*यूफ्रेशिया (Euphrasia):* इसका प्रमुख लक्षण-इसमें आँख से दाह करने वाला पानी/आंसू का स्राव और नाक से दाह न करने वाला स्राव बहता है। यदि आंखों के पानी से, गालों पर जलन एवं खुजली हो और नाक के पानी से कोई परेशानी न हो तो यूफ्रेशिया से जुकाम ठीक हो जायेगा।

*आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album):* प्रमुख लक्षण-नाक बंद/अवरुद्ध, बलगम से भरी हुई नाक और लगातार छींक आती हों। रोगी को किसी भी स्थान पर चैन और आराम नहीं मिलता हो। रोगी कभी यहां बैठता है, कभी वहां बैठता है। कभी एक कुर्सी पर बैठता है, कभी दूसरी कुर्सी पर बैठता है। कभी एक बिछौने पर लेटता है, कभी दूसरे बिछौने पर लेटता है। किसी एक जगह टिक कर बैठना, लेटना, रहना उसके लिये बहुत मुश्किल हो जाता है। रोगी को ऐसा लगता है कि उसका बदन जलन रहा है, लेकिन जब दूसरे लोग उसके शरीर को स्पर्श करके देखते हैं तो उन्हें ठंडा अनुभव होता है। शरीर की ऐसी आंतरिक जलन में भी रोगी को गर्मी से ही आराम मिलता है। इसी कारण रोगी अन्दर की जलन होने पर भी गर्म कपड़ा ही ओढ़ना चाहता हैं। साथ ही साथ रोगी बार-बार लेकिन बहुत थोड़ा-थोड़ा पानी पीता रहता है। ऐसी जुकाम आर्सेनिकम एल्बम से तुरंत ठीक हो जाती है।

*डल्कामारा (Dulcamara):* ऐसा जुकाम जो खुली, ठंडी हवा में बढ़ जाती है। गर्म हवा में, गर्म स्थान में रोगी को आराम मिलता है। रोगी अगर ठंडे कमरे में जायेगा, तो उसे नाक की हड्डी में दर्द शुरू हो जाएगा। छींकें आने लगेंगी और नाक से पानी बहने लगेगा। ऐसी जुकाम डल्कामारा से ठीक हो जायेगी।

*एकोनाइट (Aconite):* सर्दी-जुकाम दो प्रकार से हो सकता है। नमी वाली हवा लगने से सर्दी-जुकाम और खुश्क हवा लगने से सर्दी-जुकाम होना। सूखी ठंडी हवा के अचानक ठंड लगने से जो सर्दी-जुकाम हो जाती है। रोगी कितना ही पानी पीता जाये, उसकी प्यास नहीं बुझेती। रोगी बार-बार, बहुत-सा पानी पीता जाता है। ऐसे लक्षणों में एकोनाइट श्रेृष्ठ दवा है।

*नोट: उपरोक्त दवाई कितनी मात्रा में और कितनी बार लेनी हैं? इसका निर्धारण कोई अनुभवी होम्योपैथ ही कर सकता है। अत: बेहतर होगा कि किसी होम्योपैथ की देखरेख या परामर्श से ही इलाज लिया जाये।*

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
*Health WhatsApp/हेल्थ वाट्सएप: 85-619-55-619*
*Mobile No./मोबाईन नम्बर: 98750-66111 (10AM to 10PM)*
Jaipur, Rajasthan, 25 दिसम्बर, 2017, 05.10PM 
हाथ-पैर नहीं कटवायें, होम्योपैथी में हड्डी संक्रमण का इलाज सम्भव है!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
यह संस्मण 1990 के उन दिनों की है, जब मैं होम्योपैथी का नौसिखिया ही था। अर्थात अनुभव की पूंजी नहीं के बराबर थी। मुम्बई (जो तब बम्बई थी) में सेवारत था। मेरे सहकर्मी की साली का पैर दुर्घटना में कुचल गया था। जिसके दो आॅपरेशन किये गये। आॅर्थोपैडिक सर्जन ने आॅपरेशन के जरिये हड्डियों को ठीक से फिक्स कर दिया था। वह चलने-फिरने भी लगी थी, लेकिन 1 साल और 3 महिने बाद भी हड्डी के एक हिस्से का संक्रमण (Infection) ठीक नहीं हो पा रहा था। हैवी-हैवी एण्टीबॉयोटिक्स खाने के बाद भी आराम नहीं पड़ रहा था। उन्होंने अनेक वरिष्ठ डॉक्टर्स को दिखाया। सब ने यही राय दी कि एण्टीबॉयोटिक्स खाने और ड्रेंसिंग करवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। किसी एक डॉक्टर ने तो यह भी कहा बताया कि यदि हड्डी का संक्रमण (Bone Infection) लम्बे समय तक जारी रहा तो पैर काटना पड़ सकता है। इसके बाद पीड़िता के सभी स्वजनों में घबराहट और चिन्ता होना स्वाभाविक था। इसके बाद उन्होंने अपनी हैसियत ​के अनुसार बम्बई के अच्छे से अच्छे डॉक्टर को दिखाया, लेकिन संक्रमण ठीक नहीं हुआ।

तब एक दिन मेरे सहकर्मी ने मुझ उक्त बात बताई और पूछा कि क्या होम्योपैथी की सफेद गोलियां इसमें कुछ मदद कर सकती हैं? मैंने कहा पक्का कुछ नहीं कह सकता, लेकिन मैटेरिया मैडीका का अध्ययन करके कोशिश अवश्य कर सकता हूं। एक सप्ताह तक अध्ययन करने के बाद मैंने उन्हें कुछ दवाई दी। 15 दिन दवाई सेवन करने के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ा। लेकिन इस बीच मैं लगातार मैटेरिया मैडीका का अध्ययन करता रहा।

अब मैंने पीड़िता से व्यक्तिगत रूप से मिलना का तय किया। उसके निवास पर जाकर, तब तक के अपने अनुभव और समझ के अनुसार जरूरी लक्षण पूछे। आधा घंटा तक पूछताछ करने के बाद भी कोई ऐसा लक्षण हाथ नहीं लगा, जिसके आधार पर उस लड़की के पैर को बचाने हेतु किसी दवाई का सिलेक्शन किया जा सकता। तब ही आते-आते मैंने एक व्यक्तिगत सवाल पूछा, 'सिर के बालों को कंघी क्यों नहीं करती और सिर क्यों बांध रखा है?' क्योंकि उसके बाल बड़े ही बेतरतीब से बिखरे हुए थे। लड़की ने जवाब दिया, 'मुझे कंघी करने में परेशानी होती है। सिर दर्द के कारण कपड़ा बांध रखा है।' इसके बाद पूछताछ में पता चला कि उसको सिर में अत्यन्त पसीना आता था। उसे दिनभर नींद सी आती रहती थी। उसे कभी भी जरा सी चोट लगते ही पक जाती थी और ठीक होने का नाम ही नहीं लेती थी, जबकि डायबिटीज नहीं थी।

उक्त सभी लक्षणों को नोट करके ले आया। 5-7 दिन तक फिर से मैटेरिया मैडीका का अध्ययन किया। अंत में फिर से मैंने 200 शक्ति में दवाई दी। 7 दिन बाद उसके पैर से निकलने वाली मवाद कम होने लगी। मुझे अपार खुशी हुई। एक महिने में उसका संक्रमण 50 फीसदी ठीक हो गया। इसके बाद मेरा ट्रासफर मुम्बई से मध्य प्रदेश के रतलाम शहर में हो गया। आने से पहले उनको एक माह की दवाई देकर आया।

उस जमाने में मोबाईल नहीं हुआ करते थे। अत: कोई एक माह के प्रयासों के बाद वे मुझ से सम्पर्क कर पाये। बताया कि 60-70 फीसदी फायदा होने के बाद फायदा होना रुक गया। दवाई भी खतम हो गयी थी। वे मेरे से मिलने रतलाम आ गये। मैंने उन्हें रतलाम से ही दो महिने की और उच्च शक्ति की दवाई दी। दो महिने बाद वे फिर से मिलने आये। लड़की बिलकुल ठीक हो चुकी थी। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। इसके बाद तो कई दर्जन दुर्घटनाग्रस्त लोगों के हाथ-पैर कटने से बचाये जा चुके हैं।
मैं अनेक आर्थोपैडिक सर्जन्स से मिला और हड्डी के संक्रमण में एलोपैथिक एण्टीबॉयोटिक्स की असफलता की चर्चा की, तो मुझे बताया कि यदि हड्डी में अंदर संक्रमण हो जाये तो सामान्यत: एलोपैथिक एण्टीबॉयोटिक्स दवाईयों से ठीक नहीं होता है। ऐसे में अनेक बार संक्रमित हिस्से को काटना पड़ सकता है।
इन दिनों भी एक ऐसे ही पेशेंट का उपचार चल रहा है, जिनके पैर में 12 संक्रमण थे। अभी एक शेष रहा है। वाकई होम्योपैथी में अनेक असम्भव और लाइलाज समझी जाने वाली पीड़ाओं से मुक्ति दिलाने की शक्ति है। यदि आपकी नजर में भी ऐसा कोई परेशान व्यक्ति हो तो कृपया तुरंत किसी अनुभवी होम्योपैथ से सम्पर्क करें।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
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Mobile No./मोबाईन नम्बर: 98750-66111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 17 दिसम्बर, 2017, 07.49AM
लाइलाज का इलाज (Treatment of Incurable)


होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में किसी रोग की कोई पेटेंट दवा नहीं होती। फिर भी होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में असाध्य बीमारियों का भी इलाज सम्भव है। क्योंकि होम्योपैथ चिकित्सक मरीज के सम्पूर्ण लक्षणों के आधार पर दवा निर्धारित करते हैं।
There is no patent drug for any disease in homeopathic medicine. Nevertheless, Treatment of incurable diseases is also possible in homeopathic medicines. Because homeopath doctors determine the drug based on the patient's entire symptoms.-Dr. Purushottam Meena-M-9875066111, Health WhatsApp-85619-55619, 20112017

मित्रो क्या आप होम्योपैथी के बारे में जानते हैं?
Friends do you know about Homoeopathy?



होमियोपैथी एक मरीज के लिए बहुत आसान है, लेकिन एक होम्योपैथ के लिए बहुत मुश्किल काम है। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि एक होम्योपैथ चिकित्सक असफल हो सकता है, लेकिन होम्योपैथी कभी विफल नहीं होती, क्योंकि यह एक व्यक्ति को संपूर्णता से ठीक करने में सक्षम है। इसके अलावा, होम्योपैथिक दवाइयां तुलनात्मक रूप से सस्ती और लेने में बहुत आसान हैं।  यह सुरक्षित और दुष्प्रभावरहित हैं। यह न तो खतरनाक है और न ही जीवन के लिए हानिकारक है।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा-M-9875066111, Health WA-85619-55619

Homoeopathy is very easy for a patient but very tough-task to a Homoeopath. Therefore it is said that a Homoeopath doctor may fail, but Homoeopathy never fail, because it is able to cure a person with totality. Other than this, Homoeopathic medicines are Comparatively Cheap and very easy to take. It is safe and side effects less. It is neither dangerous nor Harmful for life.-Dr. Purushottam Meena-M-9875066111, Health WA-85619-55619
लक्षणों का मिलान करें और लाइलाज बीमारियों से मुक्ति पायें। भाग-1

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

होम्योपैथी के मूल सिद्धान्त के अनुसार, होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। (There is no sure medication for any disease) केवल इतना ही नहीं, बल्कि-

1-दो बीमार लोगों की एक जैसी बीमारी के लिये, अलग-अलग दवाई दी जा सकती है। (For the same illness of two sick people, different medicines can be given)

2-एक ही दवाई से, एक या एकाधिक रोगियों के अनेक रोगों को ठीक किया जा सकता है। (With the same medication, many diseases of one or more patients can be cured)

3-इसकी मूल वजह यह है कि होम्योपैथी में हम रोग का नहीं, रोगी का इलाज करते हैं। (We treat the patient, not the disease)

4-रोगी के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों के अनुसार मेल खाने वाली दवाई का चयन/सिलेक्शन करके रोगी की सभी प्रकार की तकलीफों का इलाज किया जा सकता है। (All types of diseases of the patient can be cured)

5-होम्योपैथी की किसी भी दवाई के कोई साईड इफैक्ट/दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। (There are no side effects of any medicine in Homeopathy)

होम्योपैथी के लाक्षणिक चिकित्सा सिद्धान्त को आम लोगों के लिये सरल, सुगम और रोचक बनाने के लिये मेरी ओर से छोटा सा प्रयास शुरू किया जा रहा है। जिसके तहत विश्व के महान होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा अनुभवसिद्ध कुछ अति-महत्वूपर्ण लक्षणों को पाठकों के समक्ष सरल तरीके से पेश कर रहा हूं।

प्रस्तुत निम्न लक्षणों से यदि आप में से किसी के भी लक्षण मेल खाते हैं, तो आप इनके आधार पर अपनी किसी भी और कितनी भी पुरानी मानसिक या शारीरिक बीमारी या व्यसन (mental or physical illness or addiction) के इलाज की उम्मीद कर सकते हैं।

कृपया 50 फीसदी से अधिक लक्षण मेल खाने पर किसी अनुभवी होम्योपैथ चिकित्सक से सम्पर्क करें। हो सकता है कि अभी तक 'लाइलाज समझी जाने वाली' (incurable considered) आपकी तकलीफ/लत से आपको मुक्ति मिल जाये?

आपके इलाज के लिए आधारभूत लक्षण
Basic Symptoms for Your Cure

1. जैसे स्त्रियों के सिर के बाल उलझते हैं, वैसे ही रोगी की आँखों की पलकों के बाल उलझ कर पलकों के अन्दर की ओर मुड़ जाते हैं।

2. युवतियों की नाक नोक पर चमकीली लाली सी दिखती है।

3. बच्चों के बालों के अगले सिरे अर्थात बालों की नोक एक-दूसरे से उलझ कर लट बंध जाती है। यदि इनको काट दिया जाये, तो फिर जो नये बाल निकलते हैं वे भी इसी प्रकार उलझते रहते हैं।

4. मुँह के अन्दर, होठों में, जीभ में, गाल के आंतरिक भाग में छाले या छालों के घाव पड़ जाते हैं। अनेक रोगियों के ऐसे छालें गले के अंदर, आतों में, यहां तक कि मल-द्वार तक पहुँच जाते हैं।

5. रोगिणी की योनि से अंडे की सफेदी की तरह का गाढ़ा श्वेत प्रदर निकलता है। श्वेत प्रदर के दौरान रोगिणी को ऐसा अनुभव होता है, मानो गर्म पानी की धार बह रही है।

6. रोगी/रोगिणी का ऊपर से नीचे की ओर गति से डरना, घबराना है। वह झूला नहीं झूल सकता। इस कारण वह ऊपर से नीचे की ओर गति करने से बचने की कोशिश करता है।















7. स्त्रियों को माहवारी समय से पहले तथा अधिक मात्रा में आती है। माहवारी के दौरान पेट में मरोड़ जैसा दर्द होता है। रोगिणी का जी मिचलाता है। पेट दर्द जो धीरे-धीरे पेट से कमर तक फैल जाता है। माहवारी के दौरान योनि का मुं​ह फूला हुआ सा महसूस होता है। साथ ही योनि में कुछ गड़ने/चुभने जैसा दर्द भी होता रहता है।

8. माहवारी के दौरान योनि से श्लैष्मिक-झिल्ली के कुछ टुकड़े-थक्के से निकलते रहते हैं। क्योंकि यह श्लैष्मिक-झिल्ली रुधिर के प्रवाह को रोकती है। इसलिये इस झिल्ली को बाहर धकेलने के लिये स्त्री के भीतरी अंगों से प्रसव-पीड़ा के समान दर्द उठता रहता है। उसे ऐसा अनुभव होता है कि भग में से जरायु बाहर निकल पड़ेगी। माहवारी के दौरान जब तक झिल्ली के ये टुकड़े बाहर नहीं निकल जाते, तब-तक अन्दर से प्रसव-पीड़ा के समान दर्द उठता रहता है।

9. इसी झिल्ली के कारण अनेक स्त्रियों को बांझपन की समस्या भी हो सकता है।

10. विचित्र-लक्षण रोगी/रोगिणी को किसी भी रोग में घबराहट 11 बजे दोपहर तक रहती है, उसके बाद घबराहट समाप्त हो जाती है।

11. दूसरा विचित्र-लक्षण कि रोगी अपने मुँह पर मकड़ी का जाला-सा लिपटा हुआ अनुभव करता है, और बार-बार उसे हटाने के लिये चेहरे पर हाथ फेरा करता है, लेकिन चेहरे पर होता कुछ भी नहीं है।

12. तीसरा विचित्र-लक्षण रोगी जब कुछ देर तक मानसिक-कार्य करता है, जैसे-लिखना, पढ़ना आदि तो उसका जी मिचलाने लगता है।

13. चौथा विचित्र-लक्षण स्त्री के स्तनों में दूध अधिक होने के कारण दूध अपने आप स्तनों से निकलने लगता है। साथ ही बच्चे को स्तनपान कराते समय, दूसरे स्तन में दर्द होता है।

14. हाथ की अंगुलियों के जोड़ों के पिछले भाग में खुजली होती रहती है तथा त्वचा अधिक मैली सी दिखती है। जिसके पसीने से बदबू आती रहती है।

15. रोगी/रोगिणी को अधिक गर्मी लगना, विशेषकर सिर में अधिक गर्मी लगने के कारण रात को ठीक से नींद नहीं आना। नींद में डरावने या काम वासना वाले सपने आना। सोते-सोते अचानक चिल्लाकर उठ जाना तथा डर लगना।

16. नीचे की ओर गति करने, शोरगुल, धूम्रपान करने तथा गर्मी के मौसम या गर्म कमरे में रहने से रोगी/रोगिणी के सभी प्रकार के रोगों का बढना या रोगी का मिजाज बिगड़ जाना।

MY Ref-(HOMEO15112017XEROB)
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा।
परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच।
दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Marital Dispute Consultant
हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
मोबाईन नम्बर: 9875066111
15 नवम्बर, 2017
*'हाथ में डंडा लिये यह सोचा करता है कि किस के सिर पर मारूं?'*
*होम्योपैथी के जरिये ऐसे गुस्सेल लोगों पर काबू पाया जा सकता है।*

*लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'*
मैं एक ऐलोपैथ डॉक्टर के पास गया तो उनके पास एक रोगी बैठा था। जिसके बारे में उसके परिवार के लोग बता रहे थे कि यह व्यक्ति हमेशा लोगों से झकड़ा करता रहता है। डॉक्टर साहब ने मजाक में मुझ से पूछा कि क्या आपकी होम्योपैथी में इसका कोई इलाज है? मैंने तपाक से हां कहा तो सभी को आश्चर्य हुआ। डॉ. साहब बोले मजाकर कर रहे हो या फिर...? मैंने कहा, मजाक नहीं, ऐसा हो सकता है।

इस सन्दर्भ में पाठकों की जानकारी के लिये बताना उचित होगा कि होम्योपैथी में गुस्से या क्रोधपूर्ण स्वभाव को मानसिक विकारों में शामिल किया गया। यहां तक कि यदि किसी व्यक्ति के शारीरिक रोगों में कोई महत्वपूर्ण मानसिक लक्षण भी प्रकट होता हो तो हम शारीरिक के बजाय मानसिक लक्षणों को आधार मानकर औषधि निर्णय करने से इलाज करते हैं। इससे शारीरिक रोग के समूल नाश में शीघ्र-सफलता मिलती है। क्रोध/गुस्सा से जुड़े ऐसे ही कुछ मानसिक या स्वभावगत लक्षण यहां प्रस्तुत हैं। इन लक्षणों का और रोगी की अन्य शारीरिक बीमारियों का होम्योपैथिक दवाईयों के जरिये में उपचार किया जा सकता है।
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:कृपया ध्यान दें:
स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता हेतु प्रकाशित सामग्री को पढकर आप खुद अपना या अपने किसी स्वजन का उपचार करने का खतरा नहीं उठायें, क्योंकि रोगी के लक्षणों को जानने के बाद, उपयुक्त दवाई की शक्ति और मात्रा का निर्धारण, एक अनुभवी डॉक्टर ही कर सकता है।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
हेल्थ वाट्सएप: 85-619-55-619
मोबाईल नम्बर: 98750-66111

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समाज में कुछ लोग ऐसे मिलेंगे। जो शारीरिक-विकास में फिसड्डी, लेकिन मानसिक-विकास आगे होते हैं। ऐसे दुबले-पतले शरीर में तीक्ष्ण बुद्धिमता का निवास होता है। जो बड़े नाजुक (Sensitive) होते हैं। जरा-सी बात पर ही उनका पारा चढ़ जाता है। उनके बारे में कहा जा सकता है कि अत्यन्त धैर्यहीन, असंतुष्ट और किसी पर भी विश्वास न करने वाले। इनके बारे में लोगों को पता होता है कि ऐसे लोग खुद दूसरे लोगों से आगे से झगड़ा मोल लिया करते हैं।

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1. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 8-5619-5-5619 को अपने मोबाईल में सेव करें।
2. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 8-5619-5-5619 पर हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करने हेतु
या स्वास्थ्य परामर्थ हेतु रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
3. आपका परिचय जानने के बाद आपकी स्वास्थ्य रक्षा ​हेतु
हेल्थ बुलेटिन भेजा जाने लगेगा।
लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।
अन्यथा आपके नम्बर को ब्लॉक कर दिया जायेगा।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
My Whatsapp No. : 8-5619-5-5619

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ये लोग दूसरे पर हावी होना चाहते हैं, हर बात में नुक्स निकालना इनकी आदत होती है। इनका मिजाज तेज होता है। यदि गलती से कोई ऐसे लोगों की बात को काटे तो उनको सहन नहीं होता। ऐसे लोगों की तुलना ऐसे व्यक्ति से की जाती है जो हाथ में डंडा लिये यह सोचा करता है कि किस के सिर पर मारूं!

ऐसे लोगों में यह भी देखा जाता है कि अकसर वे लोभी, कंजूस, लालची, और लड़ाकू किस्म के होते हैं।

ऐसे लोगों में से कुछ में एक विचत्र लक्षण पाया जाता है। उनको एकान्त से डर भी लगता है और वो एकान्त भी चाहते हैं। जिसका अभिप्राय यह है कि ऐसा व्यक्ति एक छोटे-से कमरे में एकान्त में रहना पसन्द करता है, परन्तु वह यह भी चाहता है कि उसके पास एक दूसरा भी कमरा भी हो जिसमें कोई उसका जान-पहचान का व्यक्ति रहे।

यही नहीं ऐसा भी देखा गया है कि ऐसा व्यक्ति उन्हीं लोगों के पास रहना चाहता है जो सदा उसके साथ रहते आये हैं और अपरिचितों से वह दूर रहना चाहता है। इस प्रकार वह एकान्त चाहता भी है, और एकान्त से डरता भी है।

ऐसा व्यक्ति जिन्हें दूसरे लोग क्रोधी के नाम से जानते हैं, वही व्यक्ति झट से रो भी देता है-जब कभी उसका कोई आत्मीय मित्र मिलता है, तो उसकी आखों में आँसू आ जाते हैं। यदि उसे कोई व्यक्ति कुछ उपहार भेंट करें तो धन्यवाद देने के साथ-साथ उसकी आंखें से आँसू टपक पड़ते हैं। वह जरा-सी खुशी के अवसर पर भी रो देता है। इस प्रकार क्रोधी होने के साथ-साथ वह अत्यंत भावुक भी होता है।

*ऐसे व्यक्तियों में से अनेक के चित्त में अजीब तरह के बुरे-बुरे खयाल आते रहते हैं। जैसे अगर दुनिया का नाश हो जाये तो? अगर घर के सब लोग मर जायें तो? अगर घर को आग लग जाये तो? कार में चलते वक्त दुर्घटना हो जाये तो? अपने और अपने परिवार के भविष्य के बारे में इस तरह के विचारों को सोचते-सोचते अनेक बार ऐसे लोगों को पागलपन आ जाता है।*

यदि शुरूआत में ऐसे लोगों को किसी योग्य और अनुभवी होम्योपैथ को दिखाया जाये तो सभी मानसिक विकारों से मुक्ति दिलायी जा सकती है!

-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। केवल हेल्थ परामर्श हेतु वाट्सएप नम्बर: 8-5619-5-5619, 01.11.2017

>>>>>>>>>>>नोट: यदि यह सामग्री आपको अच्छी/उपयोगी लगे तो आप इसे अपने मित्रों को भी भेज सकते हैं और मेरे हेल्थ परामर्श वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 को सेव करके हेल्थ बुलेटिन सीधे अपने इनबॉक्स में प्राप्त करने हेतु अपनी सहमति मेरे वाट्सएप नम्बर: 8-5619-5-5619 पर भेज सकते हैं।

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NOTE: यहां पर सभी लेखों में लिखी गयी दवाईयों का विवरण जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा मोल नहीं लें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.] हमारे 95 फीसदी रोगियों को व्यक्तिगत रूप से हम से आकर मिलने की जरूरत नहीं पड़ती। यद्यपि रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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(Tribulus Terrestris) 14 फरवरी Abutilon Indicum Aerva Lanat Allergy Aloevera Juice Alternanthera Sessilis Alum Aluminum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Appetite Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Ban Tulasi Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Bone Infection Borax BPH Calories Calories Chart Cancer Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chemotherapy Chenopodium Album Chikungunya Cholesterol Cleome viscosa Clerodendrum Phlomidis Clitoria Ternatea Colocynth Colpoptosis Constipation Convolvulus Pluricaulis Corn Creak Crotalaria Bburhia Croton Bonplandianum Croton Sparsiflorus Cumin Date Palm Dengue Depression Diabetes digestion Disorders Divorce Dog Mustard Dronapushpi Dysentery Early Ejaculation Emblic Myrobalan Extramarital Relation Extremely Intolerance Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Ferrum Phosphoricum Fever Fissure Fistula Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hainampfer Hair Falling Headaches Health Health Care Friend Health Consultation Health Links Health Tips Heliotropium Eeuropaeum Hemorrhoids Hepatitis Hibiscus Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? Immunity Impotence IMPOTENCY Incurable indigestion Jaundice Juice Juice of Berries LAND CALTROPS Lemon Leucas Aspera Leucas Cephalotes Leucorrhea Lever Liver Liver Cirrhosis Liver fibrosis Low Blood Pressure Marital Dispute Consultant Masturbation Mental Mexican Daisy Mexican Poppy Migraine Migraines Myopia Neurons Night Jasmine Nutgrass Nutmeg Nutsedge Obesity Omega 3 Oroxylum indicum Painkillers Periquito Sessil Phyllanthus Niruri Piles Portulaca Oleracea Post Effect Pregnancy Safe-Guard Pregnancy Safeguard Pregnancy-Safe-Guard Premature Ejaculation Prostate Gland Protein Purple Nutsedge Raan Tulas Radish Rectal Collapse Rectal Prolapse rectum collapse Saffron Senna occidentalis Separation Sex Sexual Power Sickness Side Effects side effects less Side-Effects Spermatorrhoea Sperms Spiny Amaranth Stone Stone Breaker Sword fruit tree TECOMA STANS Thermometer Tickweed Tips Treatment of Incurable Tribulus Terrestris Tridax Procumbens Umbrella Sedge Unquenchable Conjugal Uterine Prolapse vaginal Creaks Vaginal Prolapse Viral Vitamins Vitex Negundo Wart Wheatgrass White Discharge Yellow Spider Flower अंकुरित अनाज अंकुरित गेहूं-Wheat germ अंकुरित भोजन-Sprouts अखरोट अंगूर-Grapes अचूक चमत्कारिक चूर्ण अजवाइन अजवायन अजीर्ण-Indigestion अंडकोष अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut अण्डी अतिबला अतिसार अतिसार-Diarrhea अतृप्त अतृप्त दाम्पत्य अत्यंत असहिष्णुता अदरक अदरख अंधश्रृद्धा अध्ययन अनिद्रा अपच अपराजिता अपराधबोध अफरा अफीम अमरूद अमृता अम्लपित्त-Pyrosis अरंडी अरणी अरण्ड अरण्डी अरलू अरुचि अरुचि-Anorexia-Distaste अर्जुन अर्थराइटिस अर्द्धसिरशूल अर्श अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles अलसी अल्टरनेथेरा सेसिलिस अल्सर अल्सर-Ulcers अवसाद अवसाद-Depression अश्मःभेदः अश्वगंधा अश्वगंधा-Winter Cherry असंतुष्ट असफल असर नहीं असली अस्थमा अस्थमा-दमा-Asthma आइरन आक आकड़ा आघात आत्महत्या आंत्र कृमि आंत्रकृमि-Helminth आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever आदिवासी आधाशीशी आधासीसी आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower आमला आमवात आमाशय आयुर्वेद आयुर्वेदिक आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक औषधियां आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup आयुर्वेदिक-Ayurvedic आरोग्य आँव आंव आंवला आंवला जूस आंवला रस आशावादी-Optimistic आसन आसान प्रसव-Easy Delivery आहार चार्ट आहार-Food आॅपरेशन आॅर्गेनिक आॅर्गेनिक कौंच इच्छा-शक्ति इन्द्रायण इन्फ्लुएंजा इमर्जेंसी में होम्योपैथी इमली-Tamarind Tree इम्युनिटी इलाज इलाज का कुल कितना खर्चा इलायची उच्च रक्तचाप उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension उत्तेजक उत्तेजना उदर शूल-Abdominal Haul उदासी उन्माद-Mania उपवास उम्र उल्टी ऊर्जा एक्जिमा एक्यूप्रेशर एग्जिमा एजिंग-Aging एंटी ऑक्सीडेंट्स एंटी-ओक्सिडेंट एंटीऑक्सीडेंट एण्टी-आॅक्सीडेंट एनजाइना एनीमिया एमिनो एसिड एरंड एलर्जी एलर्जी-Allergy एलोवेरा एलोवेरा जूस एल्यूमीनियम ऐंठन ऐलोपैथ ऐसीडिटी ऑर्गेनिक ओमेगा 3 के स्रोत ओमेगा-3 ओर्गेनिक औषध-Drug औषधि सूची-Drug List औषधियों के नुकसान-Loss of drugs कचनार कचनार-Bauhinia Purpurea कटुपर्णी कड़वाहट कंडोम कद्दू कनेर कपास-COTTON कपिकच्छू कपूरीजड़ी कफ कब्ज कब्ज़ कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation कब्ज. Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गलगण्ड गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गारण्टेड इलाज गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाद्वार गुदाभ्रंश गुम्मा गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गेदुआ की छाछ गैस गैस्ट्रिक गैहूं का जवारा गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखगांजा गोरखबूटी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिटकन चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाजन बूटी छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जख्म जंगली तिल्ली जंगली तुलसी जंगली पेड़ जंगली मिर्ची जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बंध्यापन बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूत-प्रेत भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्ररोग मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनिद्वारा योनिभ्रंश योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills) यौन क्षमता यौन दौर्बल्य यौन शक्तिवर्धक यौन शिक्षा यौन समस्याएं यौनतृप्ति यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea 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शीघ्रपतन शीस शुक्राणु शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोक शोथ शोध श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संक्रमित संक्रामक संखाहुली सगतरा संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सफेद मूसली सब्जि सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी-जुकाम सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवाद संवेदना सहदेई सहदेवी सहानभूति साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिगरेट सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सी-सेक्शन सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स उत्तेजक दवा सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पार्टनर सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्खलन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्पर्श स्मृति-लोप स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य परामर्श स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डी संक्रमण हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हाई बीपी हाथ-पैर नहीं कटवायें हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हुरहुर हुलहुल हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हेल्थ बुलेटिन हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्यापैथ होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक इलाज होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy