Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

Health Care Friend and Marital Dispute Consultant

(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)

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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।

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गुड़हल (Hibiscus)

गुड़हल फूल के 5 चमत्कारी लाभ के बारे में जानें

आप सभी ने गुड़हल का फूल तो देखा ही होगा। अक्सर लोग अपने घरों में इस खूबसूरत फूल का पौधा लगाते हैं। लेकिन अगर आपको लगता है कि ये फूल सिर्फ आपके आंगन की खूबसूरती ही बढ़ाता है तो शायद आप अभी इस फूल के बारे में ज्यादा कुछ जानते नहीं है। दरअसल गुड़हल के फूल में काफ अधिक औषधीय गुण भी होते हैं। जिसकी वजह से इन फूलों का इस्तेमाल आप कई शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए कर सकते हैं। गुड़हल का फूल छोटी मोटी चोट को भरने से लेकर आपकी सेक्स लाइफ को बेहतक बनाने तक का काम करता है। चलिए विस्तार से जानते हैं इस खूबसूरत फूल के सभी फायदों के बारे में।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करे: अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो इस फूल का पौधा घर पर ज़रूर लाकर रखें, ये आपके बहुत काम आएगा। कई प्रकार के अध्ययनों से ये साबित हुआ है कि ये फूल ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करके दिल की बीमारी होने की संभावना को कम करता है। अब बताइये, इससे नैचुरल तरीका मिलेगा आपको अपना ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने का?

खरोंच और कट के घाव ठीक करे: घर में अगर बच्चे हैं तो समझिये छोटी मोटी चोट तो आपके लिए आम बात होगी। बच्चे खेलते-खेलते गिर जाते हैं या कोई नुकीली चीज़ लगा लेते हैं जिससे उनको छोटा घाव हो जाता है। या अगर आप किचन में काम करते हुए चाकू से उंगली काट लेती हैं तो गुड़हल के पत्तों का लेप आपके बहुत काम आएगा। इससे बहुत जल्दी घाव भरता है।

कॉलेस्ट्रॉल कम करे: कॉलेस्ट्रॉल अगर शरीर में बहुत बढ़ जाए तो आपको दिल की कई बीमारियां हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि अपना कॉलेस्ट्रॉल कंट्रोल करें। एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि 1 ग्राम गुड़हल के पत्ते का रस वेट और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल दोनों को कंट्रोल कर सकता है।

सेक्स लाइफ में भरे उमंग – जी हां, हैरान न हो। गुड़हल का फूल आपकी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने में भी आपकी मदद कर सकता है। इस फूल में पुरूषों के कामोत्तेजना को बढ़ाने का गुण होता हैं क्योंकि ये मेल एन्ड्रोजेन का काम करते है।

पेद दर्द व सूजन कम करे – गुड़हल के पत्तों में फ्लेवनॉयड और पॉलीफेनॉल होता है जो शरीर में किसी भी प्रकार के सूजन और पेट की गड़बड़ी के उपचार में मदद करता है। पेट दर्द तो बहुत आम बीमारी है जो घर में किसी न किसी को लगा ही रहता है। इसलिए कोशिश करें कि ये पौधा आपके घर में हो, ताकि आपको ज्यादा दवा न खाना पड़े।
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गुणों से भरपूर है गुड़हल की पत्ती

गुड़हल एक खूबसूरत फूलों वाला पौधा है, जो आमतौर पर ट्रॉपिकल और गर्म क्षेत्रों में पाया जाता है। इस पौधे की कई प्रजातियां पाई जाती है और सभी अपने खूबसूरत फूलों के जानी जाती है। मजेदार बात यह है कि गुड़हल का फूल दक्षिण कोरिया, मलेशिया और हैथी गणराज्य का राष्ट्रीय फूल है। भारत में इस फूल को काफी शुभ माना जाता है और कई धार्मिक संस्कारों और चढ़ावें में इसका इस्तेमाल किया जाता है। प्रचीन भारतीय आयुर्वेद में गुड़हल का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता था। गुड़हल की पत्ती का इस्तेमाल न सिर्फ औषधीय, बल्कि कई रूपों में किया जाता है। कई बार तो इसका इस्तेमाल पार्क और गार्डन को सजाने के लिए भी किया जाता है। गुड़हल की पत्ती को विभिन्न तरह से इस्तेमाल के लिए अलग-अलग रूपों में संसाधित किया जाता है। गुड़हल की सूखी पत्ती का इस्तेमाल मैक्सिकन जैसे कई व्यंजन को सजाने के लिए भी किया जाता है। साथ ही इसकी पत्ती का इस्तेमाल चाय बनाने के लिए किया जाता है, जो कई देशों में अलग-अलग नामों से चर्चित है। कई शोध के जरिए वैज्ञानिक रूप से यह बात सिद्ध हो चुकी है कि गुड़हल की पत्ती में औषधीय गुण पाए जाते हैं। 2008 में यूएसडीए के अध्ययन में पाया गया कि गुड़हल का चाय पीने से ब्लड प्रेशर कम होता है। आयुर्वेद में लाल और सफेद गुड़हल को औषधीय गुण से भरपूर माना जाता है और इसका इस्तेमाल खांसी, बालों के झड़ने और बालों के सफेद होने की समस्या से निजात पाने के लिए किया जाता है। साथ ही गुड़हल एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होता है और इसका इस्तेमाल एंटी-एजिंग के रूप में किया जाता है। इसके अलावा गुड़हल की पत्ती से बनी चाय का इस्तेमाल शरीर में स्फूर्ति जगाने के लिए भी किया जाता है।

01. हेयर कंडीशनर गुड़हल की पत्ती और इसके फूल की पंखुड़ी से बना पेस्ट प्राकृतिक हेयर कंडीशनर का काम करता है। जब इसे शैंपू के बाद लगाया जाता है तो यह बालों के रंग को काला करता है और डैंड्रफ से भी छुटकारा दिलाता है।
02. चाय गुड़हल की पत्ती से बनी चाय का इस्तेमाल कई देशों में औषधि के रूप में किया जाता है। अगर आपको किडनी की समस्या है तो इससे बनी चाय बिना शक्कर के लें। साथ ही इससे डिप्रेशन के समय मूड भी ठीक हो जाएगा।
03. स्किन केयर अपने खास गुणों के कारण गुड़हल का इस्तेमाल कॉस्मेटिक स्किन केयर में किया जाता है। परंपरागत चीनी दवाइयों में गुड़हल की पत्ती का इस्तेमाल एंटी-सोलर एजेंट के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह अल्ट्रावाइलेट रेडिएशन को सोख लेता है। साथ ही इसका इस्तेमाल स्किन की झुर्रियों से निजात पाने में भी किया जाता है।
04. ब्लड प्रेशर कम करे: अध्ययन से पता चला है गुड़हल की पत्ती से बनी चाय पीने से ब्लड प्रेशर की समस्या से निजात मिलता है। इसलिए ब्लड प्रेशर कम करने के लिए इसका नियमित सेवन करना चाहिए।
05. घाव पर भी असरदार: गुड़हल से निकले तेल का इस्तेमाल खुले घाव और कैंसर से हुए घाव पर किया जाता है। साथ ही ये कैंसर के प्रारंभिक चरण काफी कारगर होता है। 
06. कोलेस्टेरोल कम करे गुड़हल: की पत्ती से बनी चाय एलडीएल कोलेस्टेरोल को कम करने में काफी प्रभवी होती है। इसमें पाए जाने वाले तत्व अर्टरी में प्लैक को जमने से रोकते हैं, जिससे कोलेस्टेरोल का स्तर कम होता है।
07. सर्दी और खासी में फायदेमंद: गुड़हल की पत्ती में प्रचूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। जब चाय या अन्य रूपों में इसका सेवन किया जाता है तो यह सर्दी और खांसी के लिए काफी फायदेमंद होता है। इससे आपको सर्दी से जल्द राहत मिलेगी।
08. वजन कम करने और पाचन में सहायक: गुड़हल के सेवन से भूख की इच्छा शांत होती है। ऐसे में यह वजन कम करने में काफी मददगार होता है। हड़हुल की पत्ती से बनी चाय पीने से आप कम खाएंगे और आपकी पाचन प्रक्रिया भी तेज होगी। इससे शरीर में अनावश्यक फैट नहीं बनता है।
09. रेगुलर मेंस्ट्रल: साइकल गुड़हल की पत्ती से बनी चाय के नियमित सेवन से महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम होता है। इससे शरीर में हार्मोन का संतुलन बना रहता है। यही वजह है मेंस्ट्रल साइकल में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है।
10. एंटी ऐजिंग: गुड़हल की पत्ती में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यह शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को हटाता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। कई मामलों में तो जीवन में भी वृद्धि हो जाती है।
शीघ्रपतन का होम्योपैथिक इलाज!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
आगे बढने से पहले पाठकों को अवगत करवाना उचित होगा कि 30 नवम्बर, 2017 को 'शीघ्रपतन' शीर्षक से लिखे लेख में निम्न विषयों की जानकारी दी जा चुकी है:
1. शीघ्रपतन से कितने पुरुष परेशान रहते हैं?
2. शीघ्रपतन किसे कहते हैं?
3. वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
4. स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
5. सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?
6. शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध?
7. शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण!
8. शीघ्रपतन के कारण।
उक्त जानकारी मेरी वेबसाइट के निम्न लिंक पर पढी जा सकती है:-

07 दिसम्बर, 2017 को 'शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!' शीर्षक से लिखे लेख में शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा चुकी है।
उक्त जानकारी मेरी वेबसाइट के निम्न लिंक पर पढी जा सकती है:-
http://www.healthcarefriend.in/2017/12/blog-post_69.html

शीघ्रपतन के होम्योपैथिक इलाज के बारे में लिखने से पहले स्पष्ट कर देना उचित होगा कि होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। इलाज करने के लिये रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को जानने के बाद उचित दवाई का निर्धारण करना होता है, जो हम होम्योपैथ्स के लिये बहुत ही कठिन और परिश्रमपूर्ण कार्य है। दु:खद पहलु यह है कि अधिकतर रोगी, अपने लक्षण बताने में ही संकोच करते हैं। जिसके कारण रोगी को भारी शारीरिक एवं आर्थिक नुकसान होता है। साथ ही उपचारक का भी समय बर्बादा होता है और नाम खराब होता है।





यहां पर कुछ प्रमुख होम्योपैथिक औषधियों की जानकारी दी जा रही है, जो शीघ्रपतन की समस्या के समाधान में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। मगर याद रहे किसी अनुभवी होम्योपैथ के परामर्श के बिना इन दवाईयों का सेवन करना उचित नहीं होगा, क्योंकि दवाई के नाम मात्र से कुछ नहीं हो सकता। महत्वपूर्ण कार्य है, रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को पूछकर/जानकर दवा की सही मात्रा और दवा की शक्ति का निर्धारण करना।

आॅरम मेटालिकम: रोगी को आत्महत्या करने का मन करता है और अपने आप को बिल्कुल निकम्मा महसूस करता है, निराशा अधिक होने के साथ ही शरीर का रक्तदाब बढ़ जाता है, जीवन में एकदम निराशापन हो जाता है। रोगी को भूख तथा प्यास लगती है, जी मिचलाने लगता है और दम घुटने लगता है तथा गर्मी भी लगने लगती है। अण्डकोष में दर्द और सूजन आ जाती है, अण्डको अन्डकोषों में कठोरता उत्पन्न हो जाती है, लिंग में तेज उत्तेजना होती है। भयंकर शारीरिक कामोत्तेजना तथा चंचलता का भाव होना, परन्तु इसके बाद बहुत शीघ्र ही लिंग में अत्यधिक शिथिलता। मैथुन शूरू करते ही लिंग का ढीला पड़ जाना। हस्तमैथुन के दुष्परिणाम आदि लक्षण पाये जाते हैं। स्त्री रोगी की योनि में तेज उत्तेजना होती है। बांझपन का रोग तथा इसके साथ ही योनि में तेज जलन के साथ बांझपन हो तो यह दवाई स्त्रियों के लिए भी बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

सेलिनियम: सेलेनियम उन रोगियों के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है जो व्यक्ति जवानी के जोश में आकर अपने वीर्य को समय से पहले ही समाप्त कर चुके होते हैं और संभोग क्रिया के समय पूरी तरह सफल नहीं हो पाते। स्त्री के साथ संभोग क्रिया करने के बाद रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना। सोते समय रोगी का वीर्य अपने आप ही निकल जाना। मन में संभोग करने की इच्छा तेज होना, लेकिन संभोग करते समय लिंग का उत्तेजित न होना, वीर्य का पतला हो जाना। बार-बार वीर्य-स्राव। बिना कामेच्छा के ही प्रात: काल लिंग में उत्तेजना होना, परन्तु सहवास की कोशिश करने पर लिंग का शिथिल हो जाना। अत्यधिक लैंगिक दुर्बलता। मन में अत्यधिक कामेच्छा होने पर भी लिंग में कड़ापन न आना अथवा सेक्स पूर्ण न हो पाना। जननेन्द्रिय/लिंग में खुजली तथा सुरसुरी। नींद में, पाखाने के समय अथवा अनजाने में लिंग से गोंद जैसा लसदार पदार्थ निकलना आदि लक्षणों में सेलिनियम का उपयोग लाभदायी हो सकता है।

ऐग्नस कैक्टस: लैंगिक दोष उत्पन्न होना, मृत्यु का भय होना। अधिक उदासी के साथ जल्दी मृत्यु का भय महसूस हो रहा हो। मन-मस्तिष्क स्थिर न रहना, याददाश्त कमजोर होना, किसी कार्य को करने में उत्साह न होना। जो पुरुष जवानी में अधिक मौज-मस्ती करते रहे हैं और कामवासना में अधिक डूबे रहने के कारण शारीरिक रूप से कमजोर तथा नपुंसक हो जाते हैं। जिनके प्रजनन अंग ठण्डे तथा ढीले पड़ गये हों। लिंग में कमजोरी, परन्तु कामेच्छा का अधिक होना, मल-त्याग के समय जोर लगाने से अथवा नींद में वीर्य स्खलन, एकदम मानसिक अवसन्नता, कमजोर तथा अनमनेपन का भाव आदि लक्षणों में इसका सेवन करें।

ग्रैफाइटिस: हर समय डर सा लगते रहना, किसी भी काम को करने में मन न लगना, बहुत ज्यादा भावुक हो जाना, किसी भी फैसले को करने में दुविधा होना, उदास सा बैठे रहना। गर्म पीने वाली चीजों का हजम न होना। जितनी बार भी भोजन करे उतनी ही बार जी मिचलाना और उल्टी आना, आमाशय में दबाव सा महसूस होना। आमाशय में जलन होने के कारण भूख न लगन। डकार लेने में परेशानी होना। पेट में गैस बनना। सेक्स करने की इच्छा का तेज होना, लेकिन सेक्सक्रिया के दौरान अपने सहभागी को पूरी तरह से खुश न कर पाना। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण योनि में लिंग-प्रवेश के तुरन्त बाद या प्रवेश से पूर्व ही वीर्य-स्खलन हो जाए। लिंग में कड़ापन न आना। हस्तमैथुन तथा अतिरिक्त काम-तृप्ति के कारण लिंग में शिथिलता, लिंगमुण्ड/सुपारी पर कटे-फटे घाव तथा खाल उधड़ जाना, लिंग में सूजन तथा लसदार-चिपचिपे स्राव होना। सेक्स क्रिया से मन का बिल्कुल हट जाना आदि लक्षणों के नज़र आने पर रोगी को ग्रैफाइटिस औषधि देने से लाभ होता है।

लाइकोपोडियम: लाइकोपोडियम नामर्दी की मुख्य औषध है। यह ऐसे रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है जो मानसिक तथा शारीरिक दृष्टि से भी कमजोर होते हैं और जिन्हें शरीर में बहुत अधिक कमजोरी होती है। रोगी को और भी कई प्रकार के रोग होते हैं जो इस प्रकार हैं- लालची, कंजूस, धन का लालची, दूसरे के प्रति घृणा की भावना रखना आदि। रोगी को भय होता है तथा क्रोधित स्वभाव का हो जाता है, अपमान के कारण उसे और भी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। अत्यधिक मैथुन तथा अत्यधिक अप्राकृतिक मैथुन के कारण लिंग में उत्तेजना या कड़ापन ही न आना। नपुंसकता रोग होने के साथ ही रोगी को संभोग करने की इच्छा अधिक होती है तथा समय से पहले अपने आप ही वीर्य निकल जाता है और इसके बाद लिंग ठण्डा हो जाता है तथा संभोग की शक्ति कम हो जाती है अर्थात संभोग करने का मन नहीं करता है, संभोग करने के समय में लिंग में हल्का कड़ापन होता है, संभोग करते समय नींद सी आने लगती है, रोगी संभोग के प्रति भयभीत हो जाता है तथा जम्भाई आती है। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तो इन लक्षणों के साथ शीघ्रपतन के लक्षण में लाइकोपोडियम सर्वोत्तम दवाई है। यह दवाई विशेषकर वृद्धों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हो चुकी है।

फास्फोरस: रोगी का उत्साह कम, मन चिड़चिड़ा हो जाता है। उसे डर लगता है और रोगी को ऐसा लगता है कि हर कोने से कोई चीज रैंगती हुई बाहर निकल रही हो तथा उसके मन में दिव्यदृष्टि जैसी दशा उत्पन्न हो जाती है। रोगी अचानक चौंक पड़ता है। रोगी की सोचने की शक्ति कम हो जाती है, रोगी पागलों की तरह का व्यवहार करता है। उसे जीवन मेें आनन्द की अनुभूति नहीं होती है। अकेले रहने पर मृत्यु का भय लगा रहता है। दिमाग थका-थका सा रहता है। वह अपने प्रति अधिक उच्च धारणा रखता है, शरीर में उत्तेजना अधिक होती है, सारा शरीर गरम रहता है, रोगी अस्थिर रहता है और उसे चारों ओर अशान्ति प्रतीत होती है। खाना खाते ही रोगी को तुरन्त भूख लग जाती है, भोजन करने के बाद हर बार खट्टा स्वाद और खट्टी डकारें आती है, डकार आने के साथ ही खाना खाया हुआ भोजन तुरन्त वापस मुंह में आ जाता है, जैसे ही आमाशय के अन्दर पानी गरम होता है, वैसे ही उसकी उल्टी हो जाती है। रोगी में संभोग करने की शक्ति नहीं रहती है, रोगी को संभोग क्रिया करने के लिए अधिक इच्छा होती है, लेकिन उसका अपने आप ही वीर्यपात हो जाता है। दिन-रात बारम्बार पतले, लसदार रंगहीन तरल पदार्थ का मूत्र-मार्ग से स्राव होना। रोगी को संभोग करने के सपने आते हैं और अपने आप ही वीर्यपात हो जाता है। इत्यादि लक्षणों पर फास्फोरस लाभदायक है।

फास्फोरिक एसिडम: ऐसे रोगियों के रोगों को ठीक करने के लिए उपयोगी है जो पहले बहुत तन्दुरुस्त (स्वास्थ्य) रहे हों, लेकिन बाद में स्वप्नदोष, हस्तमैथुन, स्त्री प्रसंग, अनुचित बुरे कार्य करने के कारण अपने वीर्य को नष्ट करते हैं जिसके कारण उनका शरीर ठण्डा पड़ जाता है और कमजोरी अधिक हो जाती हैं। अधिक रोना-धोना और बड़बड़ाना, इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी को ठण्ड भी लगती है और अधिक निराशा होती है। रोगी को रसीले पदार्थों का सेवन करने की इच्छा होती है, खट्टी डकारें आती है, जी मिचलाने लगता है। आमाशय में दबाव महसूस होता है और भोजन करने के बाद ठीक प्रकार से नींद नहीं आती है, ठण्डा दूध पीने का मन करता है। रोगी को बार-बार पेशाब आता है तथा इसके साथ ही पेशाब में दूध जैसा सफेद पदार्थ भी आता है। जो वीर्य नहीं होता, लेकिन रोगी वीर्य समझकर परेशान होता रहता है। रोगी को रात के समय में मलत्याग करते समय वीर्यपात हो जाता है। वीर्यपात होते ही रोगी को जलन भी होती है। संभोग करने की शक्ति घट जाती है, अण्डकोष को छूने पर दर्द होता है तथा अण्डकोष सूजा रहता है, आलिंगन करने के समय में लिंग ठण्डा (शिथिल) पड़ जाता है। युवकों की अत्यधिक कामवासनाओं में लिप्तता तथा हस्तमैथुन। व्यभिचार आदि के कारण लैंगिक कमजोरी। नामर्दी के साथ अचैतन्यता/मूर्छा जैसी अवस्था। मलत्याग करने के समय में भी लिंग शिथिल पड़ा रहता है। लिंग की त्वचा पर सूजन आ जाती है तथा लिंग की सुपारी पर भी सूजन आ जाती है, लिंग पर घाव हो जाता है। मानसिक दुर्बलता। थोड़ी-बहुत उत्तेजना हो भी जाये तो सेक्स क्रिया पूर्ण न कर पाना। इस प्रकार के लक्षणों में फास्फोरिकम एसिडम का प्रयोग किया जा सकता है।

प्लैटिनम: रोगी अत्यधिक अहंकारी, अभिमानी हो जाता है। किसी की परवाह नहीं करना। सबको हर बात में अपने से छोटा समझना और अपने आप को हर बात में सब से बड़ा समझना। दूसरों के प्रति घृणा का भाव। इस प्रकार की अत्यधिक उत्तेजना, जिसके कारण हस्तमैथुन या अन्य तरीके से वीर्यपात करने को विवश होना पड़े। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण मिर्गी का दौरा पड़ जाये, असहनीय कामोत्तेजना होते रहना तथा साथ में लिंग/जननेन्द्रिय में लगातार सुरसुरी होना। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण शीघ्रपतन के लक्षण में प्लैटिनम लाभदायक है।

सीपिया: रोगी को अपने जननांग बिल्कुल ठण्डे से महसूस होना और उनमें बहुत ज्यादा पसीना आना, पुराना सुजाक रोग होने के कारण पेशाब के रास्ते से रात के समय दर्द के साथ स्राव का आना। लिंग के आगे के भाग पर मस्से से निकलना। बहुत दिनों तक बीमारी बने रहना अथवा बारम्बार वीर्यस्राव के कारण लिंग का दुर्बल हो जाना। कामेच्छा का घट जाना अथवा कामेच्छा के प्रति अरुचि आदि लक्षणों में सीपिया मदद कर सकती है।

सल्फर: रोगी का हर बात को तुरंत ही भूल जाना, किसी भी बात को सोचने और समझने में बहुत मुश्किल होना, मन में अजीब-अजीब से विचार आना जैसे कि वह किसी भी चीज को सुंदर वस्तु समझने लगता है, अपने आपको दुनिया का सबसे अमीर आदमी समझने लगता है, रोगी का बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाना, किसी भी व्यक्ति से सही तरीके से बात न करना, काम करने में मन न लगना, रोगी इतना आलसी हो जाता है कि उसको खुद को ही जगा पाना मुश्किल हो जाता है, खुलकर भूख लगने पर भी रोगी का हमेशा कमजोरी और दुबला-पतला सा रहना। रोगी चाहे जितना भी भोजन कर ले उसको तब भी भूख लगती रहती है, अगर रोगी भोजन नही करता तो उसके सिर में दर्द शुरू हो जाता है और कभी-कभी तो रोगी को बिल्कुल भी भूख नहीं लगती, थोड़ा सा भोजन करते ही रोगी की भूख समाप्त हो जाती है। रोगी के लिंग में सूजन आने के कारण दर्द होना। वीर्य का अपने आप ही निकल जाना। सोते समय लिंग में बहुत तेजी से खुजली का होना और लिंग का बहुत कमजोर पड़ जाना। अंडकोषों का लटक जाना। कामेच्छा के समय जबरदस्त खाँसी उठना। लिंग में भरपूर कड़ापन न आना एवं योनि में प्रवेश के पूर्व ही अथवा प्रवेश करते ही बहुत जल्दी वीर्य स्खलित हो जाना। रोगी के लिंग में बहुत ही बदबूदार पसीने आना आदि लक्षणों के आधार पर सल्फर औषधि का प्रयोग करना असरकारक रहता है।

जिंकम मेटालिकम: मुख्य क्रिया मस्तिष्क सम्बंधित लक्षणों में विशेष रूप से होती है। यह औषधि ऊतकों को सुधारने में तेजी से क्रिया करती है और ऊतकों से सम्बंधी लक्षणों को समाप्त करती है। अण्डकोष की सूजन और ऊपर की ओर खिंचाव महसूस होना। लिंग की तेज उत्तेजना। रोगी में उत्पन्न ऐसे लक्षण जिसमें रोगभ्रम रहता है और साथ ही वीर्यपात हो जाता है। बालों का झड़ना। अण्डकोषों के वीर्य की थैली में खिंचाव महसूस होना। मन से सम्बंधित ऐसे लक्षण, जिसमें रोगी की स्मरणशक्ति कमजोर होने लगती है तथा उसे थोड़े देर पहले ही कही हुए बातें याद नहीं रहती। ऐसे रोगी शोर-शराबा पसन्द नहीं करता तथा हल्के शोर-शराबा में ही गुस्सा हो जाता है। इसके अतिरिक्त काम करने की इच्छा न करना, किसी से मिलने या बातचीत करने की इच्छा न होना। दूसरे के कहे हुए बातों को दोहराते रहना। मन में बुरे विचार आना तथा काल्पनिक रूप से भयभीत रहना। मल का सूखकर कठोर हो जाना तथा कब्ज बनना। इन कारणों से शीघ्रपतन होने पर रोगी को जिंकम मेटालिकम उपयोगी सिद्ध होगी।

कैलेडियम: रोगी अत्यन्त भुलक्कड़ होता है। जो काम कर चुका हो उस पर फिर सोचने लगता है कि किया या नहीं; दरवाजा बन्द कर चुका है, किन्तु लौट कर फिर ख्याल आता है कि बन्द किया या नहीं और फिर जाकर दरवाजे की कुण्डी को हाथ लगाकर इतमिनान करता है। जिस चीज का निश्चय करना हो उसे बार-बार जाकर, देखकर, हाथ लगाकर निश्चय करता है और वापस लौटने पर फिर अनिश्चित-का-अनिश्चित बना रहता है। रोगी सारे दिन बैठा-बैठा यही सोचा करता है कि जो काम वह कर चुका है या हो जाने चाहिये थे, वे उसने किये या नहीं किये, वे हुए या नहीं हुए। मन की इस प्रकार की दुर्बलता इसमें आ जाती है। जितना ही वह किसी विषय पर मन केन्द्रित करना चाहता है, उतना ही मन उस पर केन्द्रित नहीं हो पाता। मन की इस प्रकार की दुर्बलता प्राय: व्यभिचारियों में, हस्त-मैथुन करनेवालों में पायी जाती है। रोगी का मन अत्यन्त विषयासक्त होता है। उसमें स्त्री-प्रसंग की उत्कट इच्छा होती है, परन्तु मैथुन के प्रति असमर्थता होती है। स्त्री का आलिंगन करता है, परन्तु शारीरिक उत्तेजना ही नहीं हो पाती। ऐसे लोग सड़क के किनारे खड़े हुए आती-जाती ललनाओं की ओर ताका करते हैं और उनका वीर्य रिसता रहता है। ऐसे व्यभिचारी-विचारों से ग्रस्त पुरुष रातभर उलटा-पलटा करते हैं, लेकिन संभोग करने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे रोगी को इतना मीठा पसीना आता है कि मक्खियां तक उस मिठास के लिये उसकी तरफ़ खिंची चली आती हैं। पसीना आने से रोगी को सभी तकलीफों में आराम मिलता है। इन लक्षणों में कैलेडियम सर्वोत्तम दवाई है।

कार्बोनियम सल्फ्यूरेटम: ज्यादा नशा करने के कारण रोगी की मांसपेशियों के कमजोर हो जाने पर, ठण्ड न बर्दाश्त कर पाना, त्वचा और श्लैष्मिका झिल्लियों का सुन्न पड़ जाना। ज्यादा नींद आना या नींद न आना, रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना और याददाश्त का कमजोर हो जाना। संभोग क्रिया करने का बिल्कुल मन न करना, लिंग का सिकुड़कर छोटा हो जाना, अपने आप ही वीर्य निकल जाना। मूत्रनली से पुराने सूजाक जैसा स्राव निकलना। मूत्राशय के कष्ट, मूत्रनली में वेदना, सम्पूर्ण ध्वजभंग/नामर्दी। लिंगमुण्ड का प्रदाह, अण्डकोष में दर्द, जननेन्द्रिय में खुजली, जननेन्द्रिय की शिथिलता, सहवास के समय अतिशीघ्र स्खलित हो जाना, रात में स्वप्नदोष, कामेच्छा का अभाव आदि लक्षणों में कार्बोनियम सल्फ्यूरेटम का सेवन अत्यन्त उपयोगी है।

कोनियम मेकुलेटम: टांगों का कांपना, चलने-फिरने में परेशानी होना, कुछ दूर चलते ही शरीर का जवाब दे देना, कमजोरी, खून की कमी आदि लक्षण जो ज्यादा बुढ़ापे के लक्षण होते हैं। याददाश्त का कमजोर हो जाना और जनेन्द्रियों का कमजोर पड़ जाना। रात को नींद न आना, सुबह-सुबह बिस्तर छोड़ने का मन न करना, शरीर का टूटा-टूटा सा लगना। किसी भी चीज को रखकर कुछ ही समय में भूल जाना की कहां रखी है। पुरुष के अंदर संभोग की इच्छा तेज होने पर भी संभोग क्रिया में सफल न हो पाना, लिंग का कमजोर पड़ जाना, अण्डकोश का सख्त और बढ़ जाना। प्रचण्ड कामेच्छा रहने पर भी लिंग का उत्तेजित न होना। रात्रि में बिना स्वप्न के ही वीर्यम्राव। अत्यधिक सेक्स इच्छा होने पर भी सम्पूर्ण अथवा आंशिक, ध्वजभंग/नामर्दी। दर्द भरा वीर्यस्राव तथा भारी दर्दनाक लिंगोत्तेजना। लिंगोत्तेजना होने पर छुरी से काटने जैसा दर्द। विधुर तथा स्त्री प्रसंग के अनभ्यस्त पुरुषों की दबी हुई कामेच्छा का दुष्परिणाम, लैंगिक दुर्बलता, शीघ्रपतन के लक्षण आदि में कोनियम मेकुलेटम सर्वोत्तम दवाई है।

उक्त औषधियों के अतिरिक्त भी लक्षणानुसार होम्योपैथी में अनेकानेक ऐसी औषधियाँ हैं, जो शीघ्रपतन नामक तकलीफ का समाधान करने में उपयोगी सिद्ध होती हैं।

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
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Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 26 दिसम्बर, 2017, 04.44AM
शीघ्रपतन, Sheeghrapatan, Early Discharge, Early Ejaculation, Premature Ejaculation


लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

परामर्श हेतु हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
30 नवम्बर, 2017

शीघ्रपतन हर एक पुरुष के यौन जीवन (Sexual life) से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील अत्यंत संवेदनशील (Extremely Sensitive) और महत्वपूर्ण (Important) विषय है। अत: इस बारे में वास्तविकता (Reality) को जानने और समझने के लिये बहुत जरूरी, बल्कि अनिवार्य है कि शीघ्रपतन से पीड़ित पुरुषों आगे पढने से पहले अपनी यौन धारणाओं, आशंकाओं और ग़लतफ़हमियों (Sexual Concepts, Doubts and Mis-conceptions) पर आधारित जानकारी को दिमांग से बाहर निकालना बहुत जरूरी है।


स्त्री-पुरुष के यौन सम्बन्धों के दौरान, स्त्री की यौनतृप्ति/संतुष्टि से पहले ही पुरुष का वीर्यपात/वीर्य स्खलित (Ejaculation-the action of ejecting semen from the body) हो जाने को ही आम बोलचाल में शीघ्रपतन कहा जाता है। शीघ्रपतन के लिये अंग्रेजी में तीन टर्म यूज की जाती हैं। (ED=Early Discharge/अर्ली डिस्चार्ज or EE=Early Ejaculation/अर्ली इजाकुलेशन or PE=Premature Ejaculation/प्रीमैच्योर इजाकुलेशन)।


एक अध्ययन के मुताबिक वर्तमान में हर एक पुरुष को अपने जीवन काल में कभी न कभी शीघ्रपतन की समस्या का सामना करना ही पड़ता है। 30 से 40 फीसदी पुरुषों को जीवनभर शीघ्रपतन की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए अगर कोई पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं तो ऐसे पुरुष को अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं होनी चाहिये। क्योंकि कोई भी अकेला पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से नहीं जूझता है, बल्कि संसार के एक-तिहाई से अधिक पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं। यद्यपि यहां पर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि अधिकतर पुरुषों के लिये शीघ्रपतन उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितनी कि पुरुषों द्वारा शीघ्रपतन की समस्या के बारे में सेक्सपर्ट या डॉक्टर से खुलकर बात नहीं करने का संकोच है। दूसरी ओर गारण्टी देकर लूट-खंसोट करने वाले सेक्सपर्ट या डॉक्टरों के चक्कर में फंसना भी पुरुषों के जीवन में शीघ्रपतन की समस्या के बने रहने का सबसे बड़ा कारण है।


शीघ्रपतन किसे कहते हैं?


  • 1. जब एक पुरुष अपनी यौन सहयोगिनी यौन सहयोगिनी (Sexual Partner) की योनि में लिंग को प्रवेश करवाकर लिंग का योनि में घर्षण करता है, तो घर्षण शुरू करने के बाद अत्यल्प समय में ही वीर्य स्खलित (Semen Discharged) हो जाने को सामान्यत: शीघ्रपतन कहा जाता है। 
  • 2. पुरुष या स्त्री को योन संतुष्टि मिलने से पहले ही वीर्य स्खलित हो जाना भी शीघ्रपतन कहा जा सकता है।
  • 3. योनि में लिंग को प्रवेश करवाने से पहले ही फोरप्ले अर्थात रोमांस के दौरान ही पुरुष के लिंग से स्वत: वीर्यपात हो जाने अर्थात वीर्य निकल जाने को को शीघ्रपतन कह सकते हैं।
  • 4. कामुक विचार, बातचीत, कामुक दृश्य, कामुक मूवी/फिल्म या किसी प्रिय, इच्छित या आकर्षक महिला को देखने या उसकी कल्पना करने से ही लिंग से स्वत: वीर्य निकल जाने को भी शीघ्रपतन कह सकते हैं।
  • 5. इसके अलावा भी कुछ अन्य कारण हो सकते हैं। जिनकी वजह से सेक्स शुरू करने, योनि में लिंग प्रविष्ठ करवाने, स्त्री की यौन संतुष्टि से पहले ही वीर्य स्खलित हो जाता है। इस स्थिति को भी शीघ्रपतन कहा जा सकता है।


वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
योनि में लिंग प्रवेश कराने के बाद कितने समय में लिंग से वीर्य स्खलित होना आदर्श स्थिति मानी जानी चाहिये? इस विषय में विश्वभर के सैकड़ों वैज्ञानिक द्वारा अनेकानेक शोध और अध्ययन करने के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि वीर्य स्खलन की कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित करना असम्भव है। क्योंकि शोध और अध्ययन के दौरान निम्न तथ्य सामने आये:-

  • 1. भारत जैसी जलवायु में सामान्यत: 1 से 3 मिनट में पुरुष डिस्चार्ज हो जाते हैं।
  • 2. अपवादस्वरूप 3 मिनिट से अधिक समय तक डिस्चार्ज नहीं होने वाले पुरुषों की सेक्स सहयोगी स्त्री को भी अनेकों बार पूर्ण यौन सन्तुष्टि नहीं मिलती है।
  • 3. कुछ स्त्रियों को 1 मिनट से भी कम समय में पूर्ण यौनतृप्ति मिल जाती है।

स्त्री की यौन तृप्ति क्या है?
यह एक ऐसा सवाल है, जिसके बारे में स्त्रियों में भी मतैक्य का अभाव (Lack of Consensus) है। विश्वप्रसिद्ध महिला सेक्स-विशेषज्ञ मैरी स्टॉप्स का कहना है कि अधिकतर स्त्रियां यौन सन्तुष्टि के बारे में अपनी राय व्यक्त करते समय भ्रमित होती/रहती हैं। उनका कहना है कि यदि दस महिलाओं से यौनतृप्ति के अनुभव को शब्दों में व्यक्त करने को कहा जाये या पूछा जाये तो तकरीबन सभी के अनुभव भिन्न-भिन्न होंगे। इसका कारण स्पष्ट करते हुए मेरी स्टॉप्स कहती हैं कि प्रत्येक स्त्री का सेक्स ज्ञान, सेक्स अनुभव, सेक्स रुचि, सेक्स परफॉर्मेंश आदि का अनुभव अलग-अलग होता है। क्योंकि स्त्री को पुरुष की भांति सेक्स के दौरान वीर्य या ऊर्जा स्खलन जैसा शारीरिक अनुभव नहीं होता। बल्कि स्त्री के लिये सेक्स का आनंद मानसिक पहले और शारीरिक बाद में है। कुछ अन्य स्त्री सेक्स एक्सपर्ट का कहना है कि सेक्स के दौरान स्त्री को केवल योनि में लिंग के घर्षण करने से ही यौनतृप्ति नहीं मिलती है, बल्कि स्त्री के अंग-अंग में यौनानंद की प्राप्ति होती है, बशर्ते उसका पुरुष साथी यौन कला में प्रवीण हो?

सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?

एक आदर्श सम्भोग में, स्त्री-पुरुष दोनों एक साथ समान रूप से, यौनानंद प्राप्त करते हैं। इसी कारण इस शारीरिक क्रिया को सम्भोग कहा जाता है।
In an ideal sexual intercourse, both men and women receive equally, Sexual pleasure. For this reason, this physical activity is called SAMBHOG.

स्त्री की यौन संतुष्टि को पश्चिमी सेक्स एक्सपर्ट अंग्रेजी में आर्गेज्म/Orgasm कहते हैं। जबकि मैं इसके लिये हिन्दी में यौनतृप्ति या सेक्सुअ फुलफिलमेंट/Sexual Fulfillment लिखना या बोलना अधिक उपयुक्त समझता हूं। साथ ही सम्भोग को समान भोग बताने वाली उक्त धारणा मेरी राय में केवल कागजों तक सीमित है। वर्ष 1998 से लगातार दाम्पत्य विवाद सलाहकार के रूप में सेवाएं देने के दौरान अधिकतर स्त्रियों ने मुझे यह बताया कि वे यौन-सम्बन्धों के दौरान पुरुष से योनि में केवल लैंगिक घर्षण ही नहीं चाहती हैं, बल्कि सेक्स प्रारम्भ करने से पूर्व, सेक्स के दौरान और सेक्स के बाद (Before Sex, During Sex and After Sex) भी पुरुष की सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक सक्रियता चाहती हैं। जबकि पुरुष की मानसिकता इससे ठीक विपरीत या भिन्न होती है।

मैं मेरे अनेक लेखों में अनेक बार इस स्थिति को अग्रलिखित शब्दों में व्यक्त करता/लिखता आया हूं।

'स्त्री पुरुष के समक्ष समर्पण करती है, पुरुष का प्यार पाने के लिये। जबकि पुरुष स्त्री को प्यार करता है, स्त्री का शरीर पाने के लिये।'

व्यवहार में बहुत कम ऐसा होता है, जबकि पुरुष के वीर्य स्खलन के साथ ही स्त्री को यौन तृप्ति मिले।

शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध

शीघ्रपतन के कारण परेशान अनेक पुरुषों के मनोमस्तिष्क में यह गलत धारणा अन्दर तक बैठ जाती है कि शीघ्रपतन के कारण वे पिता नहीं बन सकेंगे। विशेषकर युवाओं में यह आशंका घर कर जाती है, जबकि गर्भ धारण का शीघ्रपतन से कोई सम्बन्ध नहीं है। गर्भधारण के लिये सेक्स के दौरान वीर्य का अन्दर योनि में स्खलन होना ही पर्याप्त होता है। अत: शीघ्रपतन के कारण पिता नहीं बन सकने का भय 100% निराधार है।

शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण

इसमें कोई संदेह नहीं कि पुरुष जब स्त्री को सम्पूर्ण रूप से भावनात्मक तृप्ति देने में असमर्थ है तो स्त्री को यौन-क्रिया के दौरान पुरुष से शारीरिक सक्षमता की उम्मीद तो रहती ही है। ऐसे हालात में स्त्री अपने पुरुष साथी से पर्याप्त समय तक लैंगिक यौन घर्षण की उम्मीद करती है। उसे उम्मीद बनी रहती है, यदा-कदा उसे यौनतृप्ति भी मिल सकेगी। अनेक स्त्रियां अपने अनुभवों में बतलाती हैं कि बेशक उनका डिस्चार्ज नहीं होता, लेकिन जब पुरुष उन्हें सम्पूर्णता से चाहता है। प्यार करता है और मानसिक तथा शारीरिक योगदान करता है तो लम्बे लैंगिक यौन घर्षण के बाद, योनि में ऐसी अनुभूति होती है, जैसे योनि के हर एक ऊतक शिथिल हो जाना (Tissue laxation) या एक फुहार सी निकलती हुई अनुभव होती है या ऐसा लगता है, जैसे कोई जलता हुआ गर्म अंगारा एकदम से ठंडा हो गया/बुझ गया हो। वहीं कुछ का मानना है कि यौनतृपित के समय ऐसा लगता है, जैसे सागर की गहराई में गोते लगा रहे हों। योनि में ऐसा महसूस होता है, जैसे योनि बार-बार संकुचित हो रही है और वापस खुल रही है। उन पलों का आलौकिक आनंद अवर्णनीय होता है। उन पलों के दौरान भी यदि पुरुष स्खलित नहीं होता है और लैंगिक घर्षण जारी रखता है तो यौनानंद की कोई सीमा नहीं होती है।

इन दिनों तेजी से बदलते सामाजिक हालातों में जबकि स्त्री-पुरुष के मध्य विवाह पूर्व यौन सम्बन्ध (Pre-marital Sex) और विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध (Extramarital Sex) सामान्य बात हो चुकी है। ऐसे में यदि किसी स्त्री को जब कभी उक्त या ऐसी ही सम्पूर्ण यौन अनुभूति या यौनतृप्ति अपने पति या प्रेमी से प्राप्त हो जाती है, तो उसे हर बार सेक्स में इसी प्रकार की अनुभूति की उम्मीद बनी रहती है। जिसकी प्राप्ति नहीं होने पर वह अपने प्रेमी या पति से नाखुश रहने लगती है और पति को नाकारा, नामर्द और सेक्स क्रिया में असफल मानकर चिड़चिड़ी भी हो जाती है। इन हालातों में शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण भी बन सकता है।


शीघ्रपतन के कारण:
उपरोक्त पृष्ठभूमि (Background) के होते हुए भी बहुत से पुरुषों को वास्तव में शीघ्रपतन की समस्या होती है। जिसके निम्न प्रमुख कारण हैं:-
  • 1. स्त्री-पुरुष की प्रकृतिदत्त भिन्न मनोस्थिति। पुरुष शीघ्रता से सब कुछ पा लेना चाहता है, जबकि स्त्री आराम से सम्पूर्ण यौन तृप्ति की प्रतीक्षा करती है।
  • 2. वास्तविक एवं व्यावहारिक यौन शिक्षा का अभाव (Lack of real and practical sex education)।
  • 3. अपरिहार्य कारणों से (Due to Unavoidable Reasons) लम्बे समय बाद सेक्स करना।
  • 4. शीघ्रपतन हो जाने की आशंका का भय (Fear of Phobia of Premature Ejaculation)।
  • 5. अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाने की आशंका (Fear of not satisfying your wife)।
  • 6. तनाव, मानसिक दबाव या क्लेशमय स्थिति के दौरान सेक्स (Sex during stress, mental pressure or distress situations)।
  • 7. डिप्रेशन के दौरान सेक्स करना (Having Sex During Depression)।
  • 8. सेक्स के दौरान किसी के देखे/पकड़े जाने का भय (Fear of being seen/caught during sex)।
  • 9. मन में इस बात का भय कि लम्बे समय तक स्खलन को रोकना मुश्किल होगा (There is a fear in the mind that it will be difficult to stop ejaculation for a long time)।
  • 10. सेक्स के प्रति नकारात्मक या अपराधबोधात्मक विचार (Negative or guilt-related thoughts about sex)।
  • 11. नासमझ या नापसंद या बेमेल यौन साथी (Goofy or dislike or mismatched sexual partner)।
  • 12. स्त्री को दुर्गंध फैलाने वाली ल्यूकोरिया (Leukorrhoea) की बीमारी।
  • 13. सेक्स के दौरान स्त्री का सपोर्ट नहीं मिलना।
  • 14. हार्मोंस की गड़बड़।
  • 15. पुरुष का प्रोस्टेट, थॉइरॉइड या डाईबिटीज से पीड़ित होना।
  • 16. पुरुष को अपने लिंग के आकार को लेकर भ्रांति होना।
  • 17. पुरुष को फैंफड़ों सम्बंधी कोई बीमारी होने के कारण, अधिक समय तक लैंगिक यौन घर्षण करने से सांस फूल जाने का भय बने रहना।
  • 18. पुरुष मस्तिष्क के रसायनों के असामान्य (Abnormal level of brain chemicals) स्तर होना।
  • 19. सेक्स कलाओं की अज्ञानता (Ignorance of Sex Arts)।
  • 20. लिंग और योनि के आकार में अत्यधिक असमानता (Extreme inequality in the size of genders/penis and vagina)।
इत्यादि।-30 नवम्बर, 2017
नोट: उक्त लेख को दिनांक: 27.10.2018 को आंशिक रूप से सम्पादित किया गया है।

नोट: शीघ्रपतन का उपचार अगले अंक में प्रस्तुत किया जायेगा।

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शीघ्रपतन के कारण मामला तलाक तक जा पहुंचा, लेकिन.....?

मेरा जन्म एक छोटे गांव के गरीब, परम्परावादी परिवार में हुआ। जैसे-तैसे पढाई पूर्ण करने के बाद मुझे बैंक में जॉब मिली। 23 वर्ष की आयु में विवाह होने तक नेचुरल इच्छा और भावनाओं को कुचलते हुए मैंने अपने कौमार्य को सुरक्षित रखा। मैं अपने होने बाले पति के प्रति वफादार रहने के लिये 100 परसेंट कमिटेड थी।

प्रथम श्रेणी सरकारी अफसर के साथ बड़ी धूमधाम से मेरी शादी हुई। सुहागरात को ही सारे अरमान चकनाचूर हो गये। मेरे पति कुछ नहीं कर सके। जैसे ही उन्होंने सेक्स शुरू किया, उनका वीर्य बाहर ही निकल गया। दूसरी बार कोशिश की (लेकिन मुझे बाद में बताया कि) उत्तेजित ही नहीं हो सके। मैंने धैर्य बनाये रखा। 5 दिन पति के साथ रही, लेकिन वे मेरी योनि में अपने लिंग को प्रवेश नहीं करा पाये। लौटने से पहले मुझ से उन्होंने माफी मांगी और रिक्वेस्ट की, कि कुछ टाईम दीजिये, इलाज करवा लूंगा। मैं सहमत हो गयी।

मैंने अपने पीहर में किसी को कुछ नहीं बताया। अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग के कारण अगले 3 महिने तक हम मिल नहीं सके। इस बीच उन्होंने अपना इलाज करवाया था। 3 महिने बाद उन्होंने कोशिश की और लिंग प्रवेश करवा दिया, लेकिन कुछ ही क्षणों में डिस्चार्ज हो गये। यह सिलसिला महिनों चला। फिर ऐसी दवाई ली कि 20-30 मिनट में डिस्चार्ज होने लगे। जिससे मेरी योनि छिल जाती। भयंकर दर्द होता। मेरे लिये सेक्स एक दु:खद और पीड़ादायक अनुभव बन गया। भयंकर टेंशन रहने लगा। मुझे सेक्स से नफरत सी हो गयी। इधर उन्होंने शराब पीना शुरू कर दिया। टेंशन के चलते मुझे माईग्रेन हो गया। रोज पैन-किलर ब्रूफेन टेबलेट लेना शुरू कर दिया। अन्त में उन्होंने साफ कह दिया कि अब कुछ नहीं हो सकता, तुम चाहो तो तलाक लेकर दुबारा मैरिज कर सकती हो। मेरे लिये यह भयंकर अपमानकारी और घुटनभरी स्थिति बन गयी। रोती रहती। 1 साल बिलकुल अलग रहे। हालांकि मोबाईल पर बातचीत होती रहती।

जब इनकी शराब अधिक हो गयी तो मैंने 6 महिने की छुट्टी ली और अन्तिम प्रयास करने का तय किया। कुछ ही दिनों में शराब कंट्रोल हो गयी। हम डॉक्टर से मिले और सेक्सुअल प्रोब्लम बतायी। ऐलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, एक्यूपेशर सारी दवाईयां करवा ली, लेकिन इनकी शीघ्रपतन की समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। थक हारकर मैंने भी तलाक का मन बना लिया। 

इसी दौरान मेरी सहेली ने बताया कि उनके पति को शीघ्रपतन और कम उत्तेजना की दिक्कत थी तो डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी के आॅन लाईन ट्रीटमेंट से बिलकुल सही हो गये। मैंने खुद डॉ. 'निरंकुश' जी से बात की, उन्होंने कहा कि आपके पति से बात करने को कहो। ये इतने निराश हो गये कि बात ही नहीं करना चाहते थे। जैसे-तैसे तैयार हुए। सारी जानकारी डॉ. साहब को दी। इलाज शुरू हुआ। तीन महिने तक कोई फर्क नहीं पड़ा। 

एक दिन डॉ. सा​हब का काल आया और मुझ से पूछा, "आप यह बतायें कि आपके पति को सबसे अधिक क्या खाना पसंद है?" मैंने कहा "मिठाई! दिनभर मीठा खाते रहते हैं।" बस इतना कहते ही डॉ. साहब बोले "चिन्ता मत करो अब सब ठीक हो जायेगा।" चौथे महिने जो दवाई भेजी, तो चमत्कार हो गया। डॉ. 'निरंकुश' जी बोले "मैं शुरू से खानपान के बारे में पूछ रहा था, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब ही नहीं मिल रहा था।" कुल 6 महिने दवाई लेने के बाद अब मेरे पति पूर्ण पुरुष हैं। हमारी जिन्दगी में बहार आ गयी। शीघ्रपतन के कारण मामला तलाक लेने तक जा पहुंचा, लेकिन डॉ. 'निरंकुश' जी ने बचा लिया।
लता शर्मा (बदला हुआ नाम) जोधपुर, राजस्थान।


डॉक्टर टिप्पणी: होम्योपैथी में लक्षणों के आधार पर इलाज होता है। इस बात को प्रमाणित करने वाला यह मजबूत केस है। लता के पति से मैंने अनेक बार पूछा कि उसे मीठे और नमकीन में अधिक क्या खाना पसंद है? उनका जवाब होता कुछ भी नहीं। जब लता ने उनकी अत्यधिक मीठा खाने की आदत बतायी तो श्रीमान जी ने सफाई दी कि उनको मीठा खाने की बच्चों जैसी आदत थी, जिसे बताने में ही शर्म आती थी। यदि लता ने मुझे मीठा खाने की आदत के बारे में नहीं बताया होता, तो शायद वह कभी भी स्वस्थ नहीं हो पाता। होम्योपैथी में खाने-पीने की आदत, मानसिक लक्षणों आदि का बहुत ज्यादा महत्व होता है। अत: डॉक्टर के पूछने पर सब कुछ बेहिचक सच-सच बताना चाहिये।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
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ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर), अनियमित पीरियड्स, गर्भपात, ल्यूज योनी, सेक्स की अतिइच्छा, भय, अपराधबोध सीजर डिलेवरी इत्यादि के भय के कारण मैं विवाह के नाम से ही घबराने लगी थी।

जब मैं 13 साल की थी। मेरी मौसी की सीजर डिलेवरी हुई। 14 की थी तब चाची के रिश्ते में सीजर डिलेवरी हुई। कुछ ही समय बाद हमारे पड़ौस में सीजर डिलेवरी हुई। इस प्रकार 23 साल की हुई तब तक 20-25 सीजर डिलेवरी के केस मैंने देख लिये। सीजर के बाद अधिकतर लेडीज को मैंने कई तरह से परेशान होते और रोते हुए देखा। इस कारण मैं विवाह के नाम से ही घबराने लगी थी। हालांकि 14-15 साल की उम्र में ही मुझे सेक्स की इच्छा होने लगी थी और चाहे-अनचाहे 15 की उम्र से ही सेक्स शुरू हो गया जो शादी तक मैंने अनेक लडकों के साथ खूब इंजोय किया। प्राईवेट कम्पनी में नौकरी लग गयी तो इकोनोमिक प्रोब्लम भी खतम हो गयी। यंग बैचलर सर्किल होने के कारण कई बॉइज के साथ खुलकर सेक्स होने लगा। 




अनेक फ्रेंडस ने धोखा भी दिया तो मेरा बॉय फ्रेंड्स को लाइफ पार्टनर बनाने का सोच खतम हो गया। लेकिन हालातों के कारण जब यह तय हो गया कि मैरिज करनी ही है तो बहुत सारे टेंशन माइंड में घूमने लगे। सोचते-सोचते हैडेक (सिरदर्द) होने लगता। अधिक सेक्स करने के कारण मुझे ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) भी हो गया। पीरियड्स रैग्यूलर नहीं आते। बहुत दर्द होता था। माइंड में बहुत सारी बातें घूमती रहती थी। जैसे यदि मेरी सीजर डिलेवरी हुई तो क्या होगा? मेरे बॉय फ्रेंड्स के बारे में, मेरे होने वाले हसबैंड को पता चल गया तो क्या होगा? यदि शादी से पहले किये सेक्स के कारण मेरी वैजाईना की ल्यूजनेस (योनी के साइज के ढीलेपन) का होने वाले हसबैंड को पता चल गया तो मेरा क्या होगा? ल्यूकोरिया के कारण वैजाइना में स्मैल भी आने लगी थी। जिसका एलोपैथी डॉक्टर से इलाज करवाया लेकिन सब बेकार।

मैंने नैट पर सभी प्रोब्लम्स के सोल्यूशन तलाशने शुरू किये। अनेक डॉक्टर्स से बात भी की, लेकिन अधिकतर का मैन मकसद डराकर रुपये ऐंठना लगा। कुछ अच्छे डॉक्टर्स भी लगे, लेकिन उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ। इसी दौरान मैंने गर्भनिरोधक पिल्स के साईड इफैक्ट पढे। जिनको पढकर मैं तो घबरा ही गयी। क्योंकि मैंने तो हजारों गर्भनिरोधक पिल्स खाई थी। दो बार एबोर्ट (गर्भपात) भी करवाया था। इस कारण मुझे ऐसी अनेक मैंटल प्रोब्लम्स तथा टेंशन हो गयी, जिनको किसी को बता भी नहीं सकती थी। नैट पर अनेक तरह से सोल्यूशन मिल रहे थे, लेकिन कंफ्यूजन भी बढ रहा था। अनेक आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे पढे। लेकिन सीजर डिलवरी का मेरा भय नहीं मिटा। दूसरी टेंशन भी मुझे खाये जा रही थी। मैं खुद ग्युल्टी फील (अपराधबोध अनुभव) करने लगी। सोचने लगी मुझे भी ऐसा ही हसबैंड मिलेगा, जिसके बहुत गर्ल्स के साथ सेक्स रिलेशन रहे होंगे।

नैट पर ऐसे लड़कों के बारे में भी पढा जो मस्टरबेशन (हस्तमैथुन) करने के कारण सेक्स की पावर खो चुके थे। मुझे इसका भी भय सताने लगा कि यदि मुझे ऐसा हसबैंड मिला तो क्या होगा? क्योंकि मैं बहुत सेक्सी हो चुकी थी। हर दिन 2-4 बार सेक्स करने की इच्छा होती थी। आखिर में मैंने अपने किसी बॉय फेंड के बजाय किसी नये लड़के से मैरिज करने का तय किया। इसी बीच 2014 में मैंने हैल्थ केयर फ्रेंड (http://www.healthcarefriend.in/) पर डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश जी का एक आर्टिकल बढा। जिसमें बिना सीजर के इजी एंड सेफ डिलेवरी के बारे में लिखा था। नीचे डॉ. साहब का मो. नं. 9875066111 लिखा था। मैंने तुरंत काल किया। डॉ. साहब के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति ने पिक किया और मुझे बताया कि डॉ. साहब किसी मीटिंग में स्पीच दे रहे हैं। मुझे भी वोइस सुनाई दे रही थी। मुझे लगा कम से कम यह बंदा चोर-उचक्का तो नहीं है। सोशल स्टेटस वाला बंदा है। मैंने दूसरे दिन फिर काल किया तो डॉ. साहब ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। बात शुरू होते से ही कट गयी।

आखिर तीसरे दिन डॉ. साहब से बात हुई। मैंने उन्हें बताया कि मुझे सीजर डिलेवरी नहीं चाहिये और बैबी भी चाहिये। साथ ही हो सके तो वैजाइना की लूजनेस भी कम करनी है। मुझे सरप्राईज हुआ डॉ. मीणा जी ने सभी प्रोब्लम को सोल्व करने की बात कही। मैंने खर्चा पूछा तो बोले पहले वाट्सएप पर अपनी डिटेल्स भेजें और खर्च की चिंता नहीं करें, बहुत कम लूंगा।



सारी जानकारी देने के बाद डॉ. साहब द्वारा मुझे कहा गया कि जो कुछ भी हुआ और जो हो रहा है, उसके बारे में जितना सच तथा सही बताओगी, उतना ही इलाज तथा समाधान के सफल होने की उम्मीद की जा सकती है। मुझे सारी बातों को 100 परसेंट कॉन्फीडेंसियल रखने का विश्वास दिलाया तो मैंने अपनी सारी स्टोरी खुलकर बता दी। इसके दो दिन बाद डॉ. साहब ने मुझे 48 मिनट तक मोबाईल पर जो कुछ काउनसिल किया। मैं उसे कभी नहीं भुला सकती। डॉ. साहब ने मेरे सोचने का तरीका ही बदल दिया। मेरा सारा भय खतम कर दिया और बोल दिया कि सब कुछ भूलकर बिना संकोच ​मैरीज करो, लेकिन फ्यूचर में अपने लाइफ पार्टनर के साथ धोखा नहीं करना। हो सके तो बॉय फ्रेंड्स से अभी से ही दूर रहो। पुरानी बातों को याद करने से लाभ नहीं, नुकसान ही हो सकता है। यदि अत्यधिक सेक्स इच्छा होगी तो उसका भी नेच्युरल उपचार है।

डॉ. साहब ने मुझे यह भी विश्वास दिलाया कि यदि बाई चांस मेरे होने वाले हसबैंड को कोई सेक्सुल प्रोब्लम हुई तो उसको भी संभाल लेंगे। वैजाइना की ल्यूजनेस कम करने के साथ ही हर हाल में विदाउट सीजर नॉर्मल डिलेवरी का विश्वास दिलाया। करीब 5 महिने के उपचार के बाद मेरी वैजाइना की ल्यूजनेस लगभग खतम हो गयी। ल्यूकोरिया भी ठीक हो गया। पेट (हाजमा) खराब रहता था, वो भी ठीक हो गया। सब कुछ ठीक हो गया, लेकिन सीजर डिलेवरी का थोड़ा सा भय अभी मन में था। मैंने डॉ. साहब की एडवाईस को नहीं मानकर अपने एक पुराने बॉय फ्रेंड के साथ यह जानने के लिये सेक्स किया कि क्या वाकई मेरी वैजाइना टाईट हो चुकी है? रिलेशन के बाद मेरा बॉय फ्रेंड तो बहुत खुश हुआ ही मुझे भी बहुत अच्छा लगा।

आखिर में 28 की उम्र में मई, 2015 में मैंने फैमिली द्वारा सिलेक्ट लड़के से अरेंज मैरिज कर ली। मैरीज से पहले मेरी डॉ. साहब से व्यक्तिगत रूप से मिलने की बहुत इच्छा थी। इसलिये मैंने डॉ. साहब को मैरिज में इनवाइट भी किया। लेकिन डॉ. साहब किसी मीटिंग के कारण नहीं आये या मीटिंग का बहाना बनाया पता नहीं, लेकिन मेरी मैरिज में नहीं आये। इसका उस समय मुझे दु:ख हुआ।
आखिर मुझ जैसी गंदी और धोखेबाज लड़की की जिन्दगी में सुहागरात का क्षण आ गया। मेरे स्मार्ट हसबैंड ने वैजाइना में अपना पैनिस 2-3 बार डाला और डिस्चार्ज हो गये। उनका पहला सेंटेंस था-''डार्लिंग सोरी, मेरी गलत हैबिट्स के कारण मेरी सेक्स पावर खतम हो चुकी है, बट आई प्राउड यू, इतनी एज में भी तुम्हारी वैजाइना इतनी टाइट है। आईएम लकी।''

पहले सेक्स के कुछ समय बाद पतिदेव निढाल होकर सो गये। बैड पर लेटे हुए मेरा दिमांग घूमने लग गया। सोचिये मुझे जैसी गंदी और धोखेबाज लड़की को पाकर मेरे हसबैंड द्वारा अपने आप को लकी मानना मुझे कैसा लगा होगा? मेरे मन में बहुत से विचार घूमने लगे।
फर्स्ट-मुझे खुशी हुई कि मेरी पुरानी जिन्दगी का मेरे हसबैंड को कभी पता नहीं चलेगा। मन ही मन मैंने डॉ. मीणा जी को दिल से थैंक्स बोला।

सेकण्ड-सेक्स पावरलेस हसबैंड मिलना, मुझे लगा कि मेरे कर्मों की सजा है। लेकिन तुरंत ही खुद को संभाला डॉ. मीणा जी के होते चिंता किस बात की?

थर्ड-क्या ये बंदा मुझे कभी प्रिग्नेंट कर पायेगा?
ऐसे न जाने कितने विचार घूमते रहे और सोचते-साचते नींद आ गयी। सुबह जागने पर ननदों और भाभियों की ठिठोली के बीच मैं अन्दर ही अन्दर रो रही थी। अचानक मुझे अन्दर अकेले में बुलाकर पतिदेव महोदय ने आदेश फरमाया-''रात को जो कुछ हुआ, उसके बारे में किसी को मत बताना, मैं अपना इलाज करवा लूंगा। एक बाबा हैं, जो बहुत अच्छी दवाई देते हैं।'' मन ही मन डर भी लगा कि कहीं कोई गलत मैडीसिन नहीं ले आये? अगली रात दवाई के सेवने के बाद सेक्स शुरू किया तो आधा घंटे तक मेहनत करने के बाद भी डिस्चार्ज नहीं हुआ। परेशान होकर अधूरा ही छोड़ दिया। एक घंटे बाद फिर कोशिश की तब डिस्चार्ज हुआ। बोले अब तो ठीक है। मैंने कहा क्या खाक ठीक है? आपने मुझे क्या समझ रखा है? कौनसी मैडीसिन लाये हो? कहीं कोई साइड इफैक्ट नहीं हो जाये? बोले जो होगा देखा जायेगा, तुम तो खुश हो ना? मैंने कहा नहीं, मैं ऐसे खुश नहीं हो सकती। आप ऐसी दवाई नहीं लेना कोई नेचुरल और सेफ मैडीसन लीजिये। बेशक आप सेक्स मत करो मैं वेट कर लूंगी।

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आखिर में, मैं पीहर लौटी तो मैंने डॉ. साहब को सारी कहानी बतायी। डॉ. साहब की एडवाइस के मुताबिक मैंने एक झूंठी कहानी गढकर डॉ. मीणा जी का नम्बर अपने हसबैंड को दिया। डॉ. मीणा जी से उनकी बात हुई, उपचार शुरू हुआ और नवम्बर, 2015 तक मेरे हसबैंड 100% मर्द बन गये। इस बीच  हम दोनों की डॉ. साहब से बात होने लगी। अब डॉ. साहब की सलाह के मुताबिक मुझे कंसीव (गर्भधारण) करना था। जनवरी, 2016 में मुझे कंसीव करने में सफलता मिली। दूसरे महिने से ही मैंने डॉक्टर साहब के 'प्रसव सुरक्षा चक्र' (http://www.healthcarefriend.in/2017/07/blog-post_18.html) की दवाईयों को अन्तिम दिन तक सेवन किया। ठीक समय पर नवम्बर, 2016 में बिना सीजर, बिना फाल्स लैबर पैन, बिना इंज्री, बिना परेशानी और लगभग बिना डॉक्टरी मदद के मैं एक स्वस्थ बेटे की मां बन चुकी हूं। मन ही मन अपने आप को लकी माना और मैंने डॉ. साहब के लिये भगवान से दुआएं मांगी। काश ऐसा डॉक्टर और एडवाईजर सबको मिले। डॉ. साहब की सलाह के मुताबिक मार्च, 2017 के पहले वीक में हमने डिलेवरी के बाद पहली बार सेक्स किया। मेरे हसबैंक को सरप्राईज हुआ और बोले-"तू तो वापस कुंवारी जैसी हो गयी! मजा आ गया।"

अन्त में सबसे बड़ा सवाल इस सबका खर्चा किना हुआ? फिगर (आंकडा) देने के बजाय मैं इतना ही कहूंगी कि बहुत ही कम खर्चा हुआ। इतना बता दूं कि मेरे इलाज, मेरे हसबैंड के इलाज और अन्त में प्रसव सुरक्षा चक्र पर कुल मिलाकर मेरी एक महिने की सैलेरी भी खर्च नहीं हुई। अब हम बहुत खुश हैं। बीच-बीच में डॉ. साहब से दुआ-सलाम करते रहते हैं।

डॉ. साहब कृपया आप मेरी इस स्टोरी को अपनी वेबसाइट पर डालने का कष्ट करें। जिससे दूसरे हम जैसे दु:खी लोग भी इंस्पायर हो सकें। खुद को अनलकी और ग्युल्टी मानने वाली एक लकी लड़की-बदला हुआ नाम 'प्रतिभा'।

डॉक्टर टिप्पणी: प्रतिभा और प्रतिभा के हसबैंड जैसी समस्याओं का सामना करने वाले युवक-युवतियां की संख्या असंख्य है। जो यौनशिक्षा की ​कमी, गलत संगत, अपराधबोध, अविश्वास, संकोच और गलत आदतों के कारण घुट-घुट कर जीने को विवश हैं। ऐसे लोगों के परिवार और जीवन बिखर रहे हैं। बड़ी संख्या में होने वाले तलाकों की छुपी वजह यौन सम्बन्धों में असंतुष्टि होता है। मेरे पास तकरीब हर दिन ऐसे अनेकों व्यथित युवक-युवतियां के काल आते रहते हैं। हम पर जो विश्वास कर लेते हैं, उनका उपचार हो जाता है और जो हम पर विश्वास नहीं कर पाते उनकी वे जानें। मैं इतना ही लिखूंगा कि यदि सही डॉक्टर को, सही समय पर, सच बताओगे तो शारीरिक और मानसिक व्यधियों और परेशानियों से मुक्ति सम्भव है! मैडम प्रतिभा के हसबैंड की स्टोरी भी बड़ी दर्दनाक और युवकों को सबक सिखाने वाली है। लेकिन उनकी अनुमति के बिना प्रकाशन नहीं किया जायेगा।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-85-619-55-619
निरोगधाम पर 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच

हमारा मकसद है रोगियों का आरोग्य अर्थात रोगमुक्ति। यह तब ही सम्भव है, जबकि उनको सही, शुद्ध और ताजा दवाईयां उपलब्ध हों। वर्तमान में बड़े-बड़े नाम वाले बाबाओं तक की औषधियां निर्धारित मानदण्डों पर खरी नहीं उतर रही हैं। ऐसे में रोगी करें भी तो करें क्या?

ऐसे में हम कम से कम हमारे सम्पर्क में आने वाले रोगियों को तो 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक औषधियां उपलब्ध करवाने की कौशिश कर रहे हैं। इस दिशा में हमने छोटी सी शुरूआत की है। हमने हमारे फॉर्म पर कुछ अति महत्वपूर्ण औषधियों की खेती शुरू की है। जिनमें यौन रोगों के निवारण तथा यौन क्षमता बढाने के लिये सुप्र​षिद्ध——कौंच——नामक औषधि भी शामिल है। पिछले वर्ष भी हमने 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच की खेती की थी। कौंच के पाउडर से अकल्पनीय परिणाम सामने आये हैं। यद्यपि हम रोगियों की जरूरत पूरी करने में असफल रहे। इस कारण इस बार हमने पिछले साल की तुलना में 100 गुणा अधिक कौंच के पौधे लगाये हैं। कौंच के पौधों का रोपण वर्षाकाल के शुरू होने से बहुत पहले ही कर दिया था। अत: अब बेल छोड़ रहे हैं। जिनके ओरिजनल चित्र प्रस्तुत हैं।

कौंच सहित महत्वपूर्ण औषधियों की पैदावार करना इस कारण भी जरूरी हो गया, क्योंकि बाजार में सड़ी—गली और अनुपयोगी औषधियां मिलती हैं। जिनसे सही परिणाम नहीं ​मिलने पर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का विश्वास टूटता है और उपचार करने वाला चिकित्सक बदनाम होते हैं। साथ ही रोगी के धन का भी अपव्यय होता है। रोगी का स्वास्थ्य खराब हो जाता है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिये हमारा लेख—''कौंच : सड़ी-गली-पुरानी अनुपयोगी आयुर्वेदिक औषधियां!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश''' पढा जा सकता है।

यहां पर हमारे फॉर्म पर रोपे गये कौंच की बेलों के नवीनतम 11 जनू, 2017 के चित्र प्रस्तुत हैं।

कौंच के बारे में भी संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत है:

कौंच के पौधे के सभी भागों में औषधीय गुण होते हैं। इसकी पत्तियों, बीजों व शाखाओं का इस्तेमाल दवा के तौर पर किया जाता है। ज्यादातर कौंच का इस्तेमाल लंबे समय तक यौन—शक्ति बरकरार रखने के लिए किया जता है। आयुर्वेदाचार्यों का मत है कि कौंच के बीज अमेरिका की प्रसिद्ध सेक्स शक्ति वर्धक दवा वियग्रा से भी 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होते है। मेरा अपना अनुभव है कि 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच को सही तरीके से शोधन करके अन्य 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक दवाईयों के साथ सेवन करने से निम्न तकलीफों में अकल्पनीय परिणाम मिलते हैं:
1 लिंग की कमजोरी।
लिंग की नसों की कमजोरी
2 वीर्य का पतलापन।
3 नपुंसकता/नामर्दी।
4 शीघ्रपतन/शीघ्रस्खलन।
5 उत्तेजना में कमी।
6 बदन दर्द/गठिया दर्द।
7 पेट/गैस की तकलीफे।
8 मधुमेह/डायबिटीज।
9 पुराना बुखार।
10 बदन में सूजन।
11 गैस की समस्या।
12 श्वेत प्रदर/ल्यूकोरिया।
13 मासिकधर्म की तकलीफें।
14 स्तन वृद्धि।
15 खिलाडि़यों की मांसपेशियों में खिंचाव।
16 शारीरिक बलवृद्धि।
17 वजन बढ़ाना।
18 पुरानी खांसी।
19 उदर कृमि नष्ट।
20 शुक्राणुओं की कमी।
इत्यादि।
नोट: हमें खेद है कि हमारे पास उपलब्ध सौ फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक औषधियों की उपलब्धता में कमी के कारण हम, हम से सम्पर्क करने वाले सभी आयुर्वेद प्रेक्टिशनर्स को औषधियां उपलब्ध नहीं करवा पाते हैं। क्योंकि हमारी पहली प्राथमिकता हम से सम्पर्क करने वाले रोगियों का उपचार करना है।
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? 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Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया 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बदबू बंध्यापन बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूत-प्रेत भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी 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