Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

Health Care Friend and Marital Dispute Consultant

(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)

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85619-55619 (10 AM to 10 PM)

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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।

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फेरम फॉस (Ferrum Phosphoricum) खिलाओ खुद-ब-खुद भूख (Appetite) लगने लगेगी।




जब रोगी की तबियत खराब हो और उसे भूख नहीं हो तो रोगी को जबरदस्ती भोजन खिलाकर उसकी पाचनशक्ति नष्ट मत करो, प्राकृतिक तरीके से भूख पैदा करने की कोशिश करो। रोगी की स्थिति के अनुसार उचित मात्रा और शक्ति में बॉयाकैमिक फेरम फॉस खिलाओ। उसे खुद-ब-खुद भूख लगने लगेगी।-Online Dr. P. L. Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 21.05.2018.
डॉ. निरंकुश जी ने लीवर ठीक कर, मेरी सेक्स लाईफ लौटायी! शराब का सेवन कभी नहीं करें। जिन्दगी बर्बाद हो जायेगी।
मेरी एज 58 साल है। मुझे 10-15 साल की एज से ही कब्जी रहती थी। अनेक चूरण, काढे और गोली-कैप्सूल खाये। कब्जी ठीक नहीं हुई। सर्विस लगने के बाद फ्रेंड बने एक पड़ौसी ने 25 साल की उम्र में सलाह दी कि शराब का सेवन करने से कब्जी ठीक हो जाती है। शुरू में एक ढक्कन शराब पीना शुरू किया। कुछ असर हुआ। धीरे-धीरे शराब बढती गयी। मैं शराब का हैबीच्युअल हो गया। इस कारण घर में झगड़े रहने लगे। यदि मैं सरकारी नौकरी में नहीं होता तो मेरी पत्नी मुझे कभी की छोड़कर चली गयी होती। 45 की उम्र आते-आते मेरा वेट 70 से 45 किलो रह गया। पेट में भयंकर दर्द रहने लगा। सेक्स करने की इच्छा और शक्ति खतम सी हो गयी। इस कारण घर में अत्यधिक कलह बढ गयी। 8 साल छोटी पत्नी की हालत मुझ से देखी नहीं जाती थी। कुलमिलाकर जीना हराम हो गया। हरदम टेंशन ही टेंशन रहने लगा।

यह भी पढें: लीवर के लिए अमृत : चार औषधियाँ

अनेक डॉक्टरों को दिखाया। अनेक जांच करवायी तो सबने बताया कि लीवर खराब हो गया। मुझे सलाह दी कि शराब मेरे लिये जहर है। मगर मेरी शराब की लत नहीं छूटी। लीवर में अत्यन्त सोजन आ गयी। आंतों में अल्सर हो गये। पेट में असहनीय दर्द रहने लगा। न भूख लगती और न कुछ खाना पचता। उल्टी होने लगी। सौभाग्य से एक देशी वैद्यजी ने मेरी शराब तो छुड़ा दी। वे लीवर का भी इलाज कर रहे थे कि इसी दौरान एक दुर्घटना में वैद्य जी चल बसे। लीवर की तकलीफ की वजह से मेरा जीवन नर्क हो गया। दफ्तर में बैठकर नौकरी करना भी मुश्किल हो गया। लिव-52, त्रिफला, ईसबगोल, अनेक प्रकार के आसव और सीरप मेरी जिन्दगी के हिस्सा बन गये थे। फिर भी मैं जैसे-तैसे केवल जीवन को घसीटने की हालत में था।
इसी बीच मुझे मेरी एक सहकर्मी माधवीजी (बदला नाम) ने डॉ. निरंकुश जी के बारे में बताया कि उनकी बेटी को भयंकर ल्यूकोरिया था, जो डॉ. निरंकुश जी के इलाज से ठीक हो गया। मुझे भी डॉ. निरंकुश जी से सम्पर्क करने की सलाह दी। मैंने उनके मोबाईल 9875066111 पर बात की। मेरा सारा विवरण वाट्स एप के जरिये जानने के बाद डॉ. साहब ने कहा कि कम से कम 10 से 12 महिने तक दवाई लेनी होंगी। मेरा इलाज शुरू किया। पहले दो महिने कोई खास लाभ नहीं हुआ, तीसरे महिने मुझे लगा कि अब मेरा इलाज हो रहा है। मुझे खाने की थोड़ी-थोड़ी इच्छा होने लगी। चौथे महिने मुझे अच्छी भूख लगने लगी तथा शारीरिक शक्ति का अनुभव हुआ। दवाई लेते सात महिने हो गये हैं। अब मैं 80 परसेंट ठीक हो गया हूं। शरीर में ताकत भी बढी है। सेक्स करने की भी इच्छा होने लगी है। वजन 52 किलो हो गया है। मुझे उम्मीद है कि मैं बहुत जल्दी पूरी तरह से ठीक हो जाउंगा। मैं चाहता हूं कि मेरा नाम उजागर नहीं करें, लेकिन मेरा उक्त विवरण साईट पर सार्वजनिक किया जाये। जिससे दूसरे दु:खी लोग भी मुझे उदाहरण समझ कर अपना जीवन सुधार सकें। मैं यही कहूंगा कि शराब का सेवन कभी नहीं करें। जिन्दगी बर्बाद हो जायेगी।
—राधेश्याम गुप्ता (बदला हुआ नाम) नियर कश्मीरी गैट, दिल्ली।
~~~~~~~~मैने बहुत सारे रोगी देखे हैं। हर दिन सैकड़ों नये रोगियों के काल आते हैं। राधेश्याम गुप्ता जी अपनी आप बीती में सच नहीं लिखा है। इनकी स्थिति बहुत विचित्र रही है। इन्होंने मुझ से लीवर का इलाज करवाने के लिये सम्पर्क नहीं किया, बल्कि सेक्स पावर बढाने की दवाई के लिये सम्पर्क किया। जब इनकी सारी जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि इनको शराब की लत थी और इनका लीवर खराब था।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
85-619-55-619/07.07.2017


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परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच।
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लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
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अलसी के करिश्माई फायदे, ऐसे करें इस्तेमाल
  1. क्या आप जानते हैं कि अलसी का सेवन त्वचा पर बढ़ती उम्र के असर को कम करता है।
  2. अलसी का सेवन भोजन के पहले या भोजन के साथ करने से पेट भरने का एहसास होकर भूख कम लगती है। 
  3. इसके रेशे पाचन को सुगम बनाते हैं, इस कारण वजन नियंत्रण करने में अलसी सहायक है।
  4. चयापचय की दर को बढ़ाता है एवं यकृत को स्वस्थ रखता है।
  5. प्राकृतिक रेचक गुण होने से पेट साफ रख कब्ज से मुक्ति दिलाता है। 
कैसे लें अलसी : अलसी को धीमी आंच पर हल्का भून लें। फिर मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख लें। रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच पावडर पानी के साथ लें। इसे सब्जी या दाल में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखें।

अलसी सेवन के दौरान पानी खूब पीना चाहिए। इसमें फायबर अधिक होता है, जो पानी ज्यादा मांगता है। एक चम्मच अलसी पावडर को 360 मिलीलीटर पानी में तब तक धीमी आंच पर पकाएं जब तक कि यह पानी आधा न रह जाए। थोड़ा ठंडा होने पर शहद या शकर मिलाकर सेवन करें। सर्दी, खांसी, जुकाम में यह चाय दिन में दो-तीन बार सेवन की जा सकती है। अस्थमा में भी यह चाय बड़ी उपयोगी है।
अलसी और अस्थमा: अस्थमा वालों के लिए एक और नुस्खा भी है। एक चम्मच अलसी पावडर आधा गिलास पानी में सुबह भिगो दें। शाम को इसे छानकर पी लें। शाम को भिगोकर सुबह सेवन करें। गिलास कांच या चांदी का होना चाहिए। 

क्या है अलसी में : अलसी में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, केरोटिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन और नियासिन पाए जाते हैं। यह गनोरिया, नेफ्राइटिस, अस्थमा, सिस्टाइटिस, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, कब्ज, बवासीर, एक्जिमा के उपचार में उपयोगी है।

http://hindi.webdunia.com/health-care/benefit-of-flax-seeds-116092200040_1.html
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अलसी के लाभकारी गुण (Benefits of Flaxseeds)

अलसी में पाये जाने वाले प्रमुख तत्व:
आयरन
जिंक
पोटैशियम
फोस्फोरस
कैल्शियम
विटामिन सी
विटामिन ई
कैरोटीन
विटामिन बी काम्प्लेक्स
मैगनिशियम
मैगनीस
पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स

अलसी के बीज का सेवन त्वचा को स्वस्थ और स्निग्ध बनाता है, नाखून को मजबूत और चिकना बनाता है, नेत्र-दृष्टि बरक़रार रखता है, बालों को टूटने से रोकता है और डैंड्रफ भी दूर करता है।

अलसी त्वचा की बीमारियों एक्जिमा, सोराइसिस के उपचार में भी कारगर माना गया है।

अलसी के बीज लिग्नांस का बहुत अच्छा स्रोत है, जोकि एस्ट्रोजन और एंटी ओक्सिडेंट गुणों से भरपूर है। इसी वजह से यह औरतों के हार्मोनल बैलेंस के लिए बहुत सहायक होता है।

इन्हें खाली खाएं, हल्का भून कर खाएं अथवा सलाद या दही में मिलाकर खाएं, चाहे तो जूस में मिलाकर पियें। यह जूस के स्वाद को बिना बदले उसकी पोषकता कई गुना बढ़ा देगा।

अलसी के बीज ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने, हाइपरटेंशन के रोगियों के लिए, ब्लड शुगर कंट्रोल में अत्यंत लाभदायक है।

यह बीज विटामिन बी काम्प्लेक्स, मैगनिशियम, मैगनीस तत्वों से भरपूर है जो कि कोलेस्ट्रोल को कम करते है।

अलसी में पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स होता है जो कि विशेष रूप से ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और कोलन कैंसर से बचाव करता है।

इन बीजों में पाए जाने वाला अल्फा-लिनोलेनिक एसिड जोड़ो की बीमारी आर्थराइटिस के लिए और सभी तरह के जॉइंट पेन में बहुत राहत दिलाता है।

गर्भवती स्त्रियों और स्तनपान कराने वाली माताओं को इसका सेवन अवश्य करना चाहिए। आज भी शहरो और कस्बों के कई परिवारों में ऐसी स्त्रियों को अलसी के बने लड्डू और अन्य भोज्य पदार्थ दिए जाते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे पूर्वज अलसी का महत्व अच्छी तरह जानते थे, पर हम इन्हें भुलाकर सिर्फ दवाइयां खाने में विश्वास करने लगे हैं।

अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड्स का बहुत अच्छा स्रोत माने जाते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की कैप्सूल्स का यह अच्छा विकल्प भी है। डाईटिशियन और डाक्टर भी आजकल इसे खाने की सलाह देते है।

यह बीज फाइबर से भरपूर होते हैं अतः यह वजन घटाने में भी बहुत कारगर है।

महिलाओं में रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाली समस्याओं में भी अलसी के उपयोग से राहत मिलती है। यह देखा गया है कि माइल्ड मेनोपॉज़ की समस्या में रोजाना लगभग 40 ग्राम पिसी हुई अलसी खाने से वही लाभ प्राप्त होते हैं जो हार्मोन थैरेपी से मिलते हैं।

अलसी किडनी संबंधित समस्याओं में भी लाभकारी है। डायबिटीज़, कैंसर, ल्यूपस, और आर्थ्राइटिस आदि रोगों में भी इसके प्रभावों पर रिसर्च की जा रही है।

अलसी के बीज एंटी बैकटिरियल, एंटी फंगल और एंटी वायरल होते है। इनका उपयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक-क्षमता बढाता है।

अलसी कैसे खाएं, कितनी खाएं (How to consume flaxseeds):

अलसी के साबुत बीज कई बार हमारे शरीर से पचे बिना निकल जाते हैं। इसलिए इन्हें पीसकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। 20 ग्राम (1 टेबल स्पून) अलसी पाउडर को सुबह खाली पेट हल्के गर्म पानी के साथ लेने से शुरुआत करें। आप इसे फल या सब्जियों के ताजे जूस में मिला सकते हैं या अपने भोजन में ऊपर से बुरक कर भी खा सकते हैं। दिन भर में 2 टेबलस्पून (40 ग्राम) से ज्यादा अलसी का सेवन न करें।

साबुत अलसी लंबे समय तक खराब नहीं होती, लेकिन इसका पाउडर हवा में मौजूद ऑक्सीजन के प्रभाव में खराब हो जाता है, इसलिए ज़रूरत के मुताबिक अलसी को ताज़ा पीसकर ही इस्तेमाल करें। इसे अधिक मात्रा में पीसकर न रखें। बहुत ज्यादा सेंकने या फ्राई करने से इसके औषधीय गुण नष्ट हो सकते हैं और इसका स्वाद बिगड़ सकता है।

अलसी खाने से कुछ लोगों को शुरुआत में कब्ज हो सकती है। ऐसा होने पर पानी ज्यादा पिएं। अलसी खून को पतला करती है। इसलिए यदि आपको ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो इसके सेवन से पहले डॉक्टर से परामर्श कर लें।

अलसी के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़नेवाले प्रभावों पर हालांकि कोई बड़ी रिसर्च नहीं हुई है, लेकिन पारंपरिक ज्ञान में Flax seed को बहुत गुणकारी माना गया है। इसके उपयोग से कोलेस्ट्रॉल के लेवल में कमी आना देखा गया है।
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जो अलसी खाए वो गाये जवानी ज़िंदाबाद, और बुढ़ापा बाये बाये।
अलसी–एक चमत्कारी आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक दैविक भोजन।
गुणधर्म–अलसी एक प्रकार का तिलहन है। इसका बीज सुनहरे रंग का तथा अत्यंत चिकना होता है। फर्नीचर के वार्निश में इसके तेल का आज भी प्रयोग होता है। आयुर्वेदिक मत के अनुसार अलसी वातनाशक, पित्तनाशक तथा कफ निस्सारक भी होती है। मूत्रल प्रभाव एवं व्रणरोपण, रक्तशोधक, दुग्धवर्द्धक, ऋतुस्राव नियामक, चर्मविकारनाशक, सूजन एवं दरद निवारक, जलन मिटाने वाला होता है। यकृत, आमाशय एवं आँतों की सूजन दूर करता है। बवासीर एवं पेट विकार दूर करता है। सुजाकनाशक तथा गुरदे की पथरी दूर करता है। अलसी में विटामिन बी एवं कैल्शियम, मैग्नीशियम, काॅपर, लोहा, जिंक, पोटेशियम आदि खनिज लवण होते हैं। इसके तेल में 36 से 40 प्रतिशत ओमेगा-3 होता है।

जब से परिष्कृत यानी “रिफाइन्ड तेल” (जो बनते समय उच्च तापमान, हेग्जेन, कास्टिक सोडा, फोस्फोरिक एसिड, ब्लीचिंग क्ले आदि घातक रसायनों के संपर्क से गुजरता है), ट्रांसफेट युक्त पूर्ण या आंशिक हाइड्रोजिनेटेड वसा यानी वनस्पति घी (जिसका प्रयोग सभी पैकेट बंद खाद्य पदार्थों व बेकरी उत्पादनों में धड़ल्ले से किया जाता है), रासायनिक खाद, कीटनाशक, प्रिजर्वेटिव, रंग, रसायन आदि का प्रयोग बढ़ा है तभी से डायबिटीज के रोगियों की संख्या बढ़ी है। हलवाई और भोजनालय भी वनस्पति घी या रिफाइन्ड तेल का प्रयोग भरपूर प्रयोग करते हैं और व्यंजनों को तलने के लिए तेल को बार-बार गर्म करते हैं जिससे वह जहर से भी बदतर हो जाता है। शोधकर्ता इन्ही को डायबिटीज का प्रमुख कारण मानते हैं। पिछले तीन-चार दशकों से हमारे भोजन में ओमेगा-3 वसा अम्ल की मात्रा बहुत ही कम हो गई है और इस कारण हमारे शरीर में ओमेगा-3 व ओमेगा-6 वसा अम्ल यानी हिंदी में कहें तो ॐ-3 और ॐ-6 वसा अम्लों का अनुपात 1:40 या 1:80 हो गया है जबकि यह 1:1 होना चाहिये। यह भी डायबिटीज का एक बड़ा कारण है। डायबिटीज के नियंत्रण हेतु आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक व दैविक भोजन अलसी को “अमृत“ तुल्य माना गया है।

अलसी शरीर को स्वस्थ रखती है व आयु बढ़ाती है। अलसी में 23 प्रतिशत ओमेगा-3 फेटी एसिड, 20 प्रतिशत प्रोटीन, 27 प्रतिशत फाइबर, लिगनेन, विटामिन बी ग्रुप, सेलेनियम, पोटेशियम, मेगनीशियम, जिंक आदि होते हैं। सम्पूर्ण विश्व ने अलसी को सुपर स्टार फूड के रूप में स्वीकार कर लिया है और इसे आहार का अंग बना लिया है, लेकिन हमारे देश की स्थिति बिलकुल विपरीत है । अलसी को अतसी, उमा, क्षुमा, पार्वती, नीलपुष्पी, तीसी आदि नामों से भी पुकारा जाता है। अलसी दुर्गा का पांचवा स्वरूप है। प्राचीनकाल में नवरात्री के पांचवे दिन स्कंदमाता यानी अलसी की पूजा की जाती थी और इसे प्रसाद के रूप में खाया जाता था। जिससे वात, पित्त और कफ तीनों रोग दूर होते है।

ओमेगा-3 हमारे शरीर की सारी कोशिकाओं, उनके न्युक्लियस, माइटोकोन्ड्रिया आदि संरचनाओं के बाहरी खोल या झिल्लियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यही इन झिल्लियों को वांछित तरलता, कोमलता और पारगम्यता प्रदान करता है। ओमेगा-3 का अभाव होने पर शरीर में जब हमारे शरीर में ओमेगा-3 की कमी हो जाती है तो ये भित्तियां मुलायम व लचीले ओमेगा-3 के स्थान पर कठोर व कुरुप ओमेगा-6 फैट या ट्रांस फैट से बनती है, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का संतुलन बिगड़ जाता है, प्रदाहकारी प्रोस्टाग्लेंडिन्स बनने लगते हैं, हमारी कोशिकाएं इन्फ्लेम हो जाती हैं, सुलगने लगती हैं और यहीं से ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, डिप्रेशन, आर्थ्राइटिस और कैंसर आदि रोगों की शुरूवात हो जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार हर रोग की जड़ पेट है और पेट साफ रखने में यह इसबगोल से भी ज्यादा प्रभावशाली है। आई.बी.एस., अल्सरेटिव कोलाइटिस, अपच, बवासीर, मस्से आदि का भी उपचार करती है अलसी।

अलसी शर्करा ही नियंत्रित नहीं रखती, बल्कि मधुमेह के दुष्प्रभावों से सुरक्षा और उपचार भी करती है। अलसी में रेशे भरपूर 27% पर शर्करा 1.8% यानी नगण्य होती है। इसलिए यह शून्य-शर्करा आहार कहलाती है और मधुमेह के लिए आदर्श आहार है। अलसी बी.एम.आर. बढ़ाती है, खाने की ललक कम करती है, चर्बी कम करती है, शक्ति व स्टेमिना बढ़ाती है, आलस्य दूर करती है और वजन कम करने में सहायता करती है। चूँकि ओमेगा-3 और प्रोटीन मांस-पेशियों का विकास करते हैं अतः बॉडी बिल्डिंग के लिये भी नम्बर वन सप्लीमेन्ट है अलसी।

अलसी कॉलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और हृदयगति को सही रखती है। रक्त को पतला बनाये रखती है अलसी। रक्तवाहिकाओं को साफ करती रहती है अलसी।

चश्में से भी मुक्ति दिला देती है अलसी। दृष्टि को स्पष्ट और सतरंगी बना देती है अलसी।

अलसी एक फीलगुड फूड है, क्योंकि अलसी से मन प्रसन्न रहता है, झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता है, पॉजिटिव एटिट्यूड बना रहता है यह आपके तन, मन और आत्मा को शांत और सौम्य कर देती है। अलसी के सेवन से मनुष्य लालच, ईर्ष्या, द्वेश और अहंकार छोड़ देता है। इच्छाशक्ति, धैर्य, विवेकशीलता बढ़ने लगती है, पूर्वाभास जैसी शक्तियाँ विकसित होने लगती हैं। इसीलिए अलसी देवताओं का प्रिय भोजन थी। यह एक प्राकृतिक वातानुकूलित भोजन है।

माइन्ड का Sim card है अलसी यहां सिम का मतलब सेरीनिटी, इमेजिनेशन और मेमोरी तथा कार्ड का मतलब कन्सन्ट्रेशन, क्रियेटिविटी, अलर्टनेट, रीडिंग राईटिंग थिंकिंग एबिलिटी और डिवाइन है।

त्वचा, केश और नाखुनों का नवीनीकरण या जीर्णोद्धार करती है अलसी। अलसी के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनाते हैं। अलसी सुरक्षित, स्थाई और उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाता है। त्वचा, केश और नाखून के हर रोग जैसे मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, खुजली, सूखी त्वचा, सोरायसिस, ल्यूपस, डेन्ड्रफ, बालों का सूखा, पतला या दोमुंहा होना, बाल झड़ना आदि का उपचार है अलसी। चिर यौवन का स्रोता है अलसी। बालों का काला हो जाना या नये बाल आ जाना जैसे चमत्कार भी कर देती है अलसी। किशोरावस्था में अलसी के सेवन करने से कद बढ़ता है।

लिगनेन का सबसे बड़ा स्रोत अलसी ही है जो जीवाणुरोधी, विषाणुरोधी, फफूंदरोधी और कैंसररोधी है। अलसी शरीर की रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ कर शरीर को बाहरी संक्रमण या आघात से लड़ने में मदद करती हैं और शक्तिशाली एंटी-आक्सीडेंट है। लिगनेन वनस्पति जगत में पाये जाने वाला एक उभरता हुआ सात सितारा पोषक तत्व है जो स्त्री हार्मोन ईस्ट्रोजन का वानस्पतिक प्रतिरूप है और नारी जीवन की विभिन्न अवस्थाओं जैसे रजस्वला, गर्भावस्था, प्रसव, मातृत्व और रजोनिवृत्ति में विभिन्न हार्मोन्स् का समुचित संतुलन रखता है। लिगनेन मासिकधर्म को नियमित और संतुलित रखता है। लिगनेन रजोनिवृत्ति जनित-कष्ट और अभ्यस्त गर्भपात का प्राकृतिक उपचार है। लिगनेन दुग्धवर्धक है। लिगनेन स्तन, बच्चेदानी, आंत, प्रोस्टेट, त्वचा व अन्य सभी कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू तथा एंलार्ज प्रोस्टेट आदि बीमारियों से बचाव व उपचार करता है।

जोड़ की हर तकलीफ का तोड़ है अलसी। जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जरी का सस्ता और बढ़िया उपचार है अलसी। ­­ आर्थ्राइटिस, शियेटिका, ल्युपस, गाउट, ओस्टियोआर्थ्राइटिस आदि का उपचार है अलसी।

कई असाध्य रोग जैसे अस्थमा, एल्ज़ीमर्स, मल्टीपल स्कीरोसिस, डिप्रेशन, पार्किनसन्स, ल्यूपस नेफ्राइटिस, एड्स, स्वाइन फ्लू आदि का भी उपचार करती है अलसी। कभी-कभी चश्में से भी मुक्ति दिला देती है अलसी। दृष्टि को स्पष्ट और सतरंगी बना देती है अलसी।
  • अलसी बांझपन, पुरूषहीनता, शीघ्रस्खलन व स्थम्भन दोष में बहुत लाभदायक है।
  • मीनोपोज़ (माहवारी सम्बंधित) की तकलीफों पर पॉज़ लगा देती है अलसी।
  • पुरुषरोग में सस्टेन्ड रिलीज़ वियाग्रा है अलसी। जो अलसी खाये वो गाये जवानी ज़िंदाबाद बुढ़ापा बाय बाय।
  • पुरूष को कामदेव तो स्त्रियों को रति बनाती है अलसी।
  • बॉडी बिल्डिंग के लिये नम्बर वन सप्लीमेन्ट है अलसी।
  • जोड़ की तकलीफों का तोड़ है अलसी। जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जरी का सस्ता और बढ़िया विकल्प है अलसी।
  • क्रूर, कुटिल, कपटी, कठिन, कष्टप्रद कर्करोग का सस्ता, सरल, सुलभ, संपूर्ण और सुरक्षित समाधान है अलसी।
1952 में डॉ. योहाना बुडविग ने ठंडी विधि से निकले अलसी के तेल, पनीर, कैंसररोधी फलों और सब्ज़ियों से कैंसर के उपचार का तरीका विकसित किया था जो बुडविग प्रोटोकोल के नाम से जाना जाता है। यह कर्करोग का सस्ता, सरल, सुलभ, संपूर्ण और सुरक्षित समाधान है। उन्हें 90 प्रतिशत से ज्यादा सफलता मिलती थी। इसके इलाज से वे रोगी भी ठीक हो जाते थे जिन्हें अस्पताल में यह कहकर डिस्चार्ज कर दिया जाता था कि अब कोई इलाज नहीं बचा है, वे एक या दो धंटे ही जी पायेंगे सिर्फ दुआ ही काम आयेगी। उन्होंने सशर्त दिये जाने वाले नोबल पुरस्कार को एक नहीं सात बार ठुकराया।

अलसी सेवन का तरीकाः-

  1. हमें प्रतिदिन 30 – 60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये। 30 ग्राम आदर्श मात्रा है। अलसी को रोज मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना चाहिये। डायबिटीज के रोगी सुबह शाम अलसी की रोटी खायें। कैंसर में बुडविग आहार-विहार की पालना पूरी श्रद्धा और पूर्णता से करना चाहिये। इससे ब्रेड, केक, कुकीज, आइसक्रीम, चटनियाँ, लड्डू आदि स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जाते हैं।
  2. अलसी को सूखी कढ़ाई में डालिये, रोस्ट कीजिये (अलसी रोस्ट करते समय चट चट की आवाज करती है) और मिक्सी से पीस लीजिये. इन्हें थोड़े दरदरे पीसिये, एकदम बारीक मत कीजिये. भोजन के बाद सौंफ की तरह इसे खाया जा सकता है .
  3. अलसी की पुल्टिस का प्रयोग गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया और पसलियों के दर्द में लगाकर किया जाता है। इसके साथ यह चोट, मोच, जोड़ों की सूजन, शरीर में कहीं गांठ या फोड़ा उठने पर लगाने से शीघ्र लाभ पहुंचाती है। यह श्वास नलियों और फेफड़ों में जमे कफ को निकाल कर दमा और खांसी में राहत देती है।
  4. इसकी बड़ी मात्रा विरेचक तथा छोटी मात्रा गुर्दो को उत्तेजना प्रदान कर मूत्र निष्कासक है। यह पथरी, मूत्र शर्करा और कष्ट से मूत्र आने पर गुणकारी है। अलसी के तेल का धुआं सूंघने से नाक में जमा कफ निकल आता है और पुराने जुकाम में लाभ होता है। यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी गुण दर्शाता है। अलसी के काढ़े से एनिमा देकर मलाशय की शुद्धि की जाती है। उदर रोगों में इसका तेल पिलाया जाता हैं।
  5. अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है। पथरी, सुजाक एवं पेशाब की जलन में अलसी का फांट पीने से रोग में लाभ मिलता है। अलसी के कोल्हू से दबाकर निकाले गए (कोल्ड प्रोसेस्ड) तेल को फ्रिज में एयर टाइट बोतल में रखें। स्नायु रोगों, कमर एवं घुटनों के दर्द में यह तेल पंद्रह मि.ली. मात्रा में सुबह-शाम पीने से काफी लाभ मिलेगा।
  6. इसी कार्य के लिए इसके बीजों का ताजा चूर्ण भी दस-दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ प्रयोग में लिया जा सकता है। यह नाश्ते के साथ लें।
  7. बवासीर, भगदर, फिशर आदि रोगों में अलसी का तेल (एरंडी के तेल की तरह) लेने से पेट साफ हो मल चिकना और ढीला निकलता है। इससे इन रोगों की वेदना शांत होती है।
  8. अलसी के बीजों का मिक्सी में बनाया गया दरदरा चूर्ण पंद्रह ग्राम, मुलेठी पांच ग्राम, मिश्री बीस ग्राम, आधे नींबू के रस को उबलते हुए तीन सौ ग्राम पानी में डालकर बर्तन को ढक दें। तीन घंटे बाद छानकर पीएं। इससे गले व श्वास नली का कफ पिघल कर जल्दी बाहर निकल जाएगा। मूत्र भी खुलकर आने लगेगा।
  9. इसकी पुल्टिस हल्की गर्म कर फोड़ा, गांठ, गठिया, संधिवात, सूजन आदि में लाभ मिलता है।
  10. डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है। अलसी व गैहूं के मिश्रित आटे में (जहां अलसी और गैहूं बराबर मात्रा में हो)
  11. स्रोत : http://onlyayurved.com/supplement/flax-seed/



ज्‍यादा मात्रा में अलसी खाने के नुकसान:

1. लूज मोशंस: अगर अलसी ज्‍यादा मात्रा में खाई जाए तो लूज़-मोशन हो सकते हैं. अगर इन्‍हें सही मात्रा में खाया जाए तो कब्‍ज से राहत म‍िलती है और अच्‍छी तरह पेट की सफाई भी हो जाती है. हालांकि, जरूरत से ज्‍यादा खाने पर आपको बार-बार वॉशरूम जाना पड़ेगा. यही नहीं डायरिया की आशंका भी रहती है. ऐसे लोग जो पहले से ही इन दिक्‍कतों का सामना कर रहे हैं उन्‍हें किसी भी हाल में अलसी का इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए. 

2. आंतों में ब्‍लॉकेज: विशेषज्ञों की मानें तो पर्याप्‍त मात्रा में तरल पदार्थ लिए बिना जरूरत से ज्‍यादा अलसी खाने से आंतों में ब्‍लॉकेज आ सकता है. जिन्‍हें पहले से ही इस तरह की श‍िकायत रही है उन्‍हें अलसी के बीज नहीं खाने चाहिए. खासतौर से Scleroderma के मरीजों को इन्‍हें नहीं खाना चाहिए क्‍योंकि इससे भयानक कब्‍ज हो सकता है. हालांकि अलसी के तेल का इस्‍तेमाल Scleroderma के इलाज के लिए किया जाता है. 

3. एलर्जी: ज्‍यादा अलसी खाने वाले कुछ लोग एलर्जी की श‍िकायत कर चुके हैं. ज्‍यादा अलसी खाने से सांस लेने में रुकावट, लो ब्‍लड प्रेशर और तीव्रग्राहिता जैसे एलर्जिक रिएक्‍शन हो सकते हैं. यही नहीं घबराहट, पेट में दर्द और उल्‍टी की श‍िकायत भी हो सकती है. 

4. जो महिलाएं प्रेग्‍नेंट होना चाहती हैं: अलसी के बीज एस्‍ट्रोजन की तरह काम करते हैं और जो महिलाएं रोजाना अलसी के बीज खाती हैं उनके पीरियड साइकिल में बदलाव आ सकता है. इसके अलावा जो महिलाएं हार्मोनल दिक्‍कतों जैसे कि पॉलिसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम, यूटरिन फायब्रॉयड्स, यूटरिन कैंसर और ओवरी कैंसर से जूझ रही हैं उन्‍हें अलसी को अपनी डाइट में शामिल करते वक्‍त सावधानी बरतनी चाहिए. ज्‍यादा मात्रा में अलसी खाने से इन दिक्‍कतों की वजह से बांझपन का खतरा बढ़ सकता है. 

5. प्रेग्‍नेंसी के दौरान असुरक्ष‍ित: चूंकि अलसी के बीजों में एस्‍ट्रोजन जैसे गुण होते हैं इसलिए इससे पीरियड्स आ सकते हैं. प्रेग्‍नेंट महिलाओं को अलसी के बीज खाने की सलाह नहीं दी जाती है क्‍योंकि इन्‍हें खाने से पीरियड्स आ सकते हैं जो होने वाले बच्‍चे और मां दोनों को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी हैं. 

6. दवाइयों पर रिएक्‍शन: फाइबर युक्‍त अलसी पाचन तंत्र को ब्‍लॉक कर कुछ दवाइयों और सप्‍लीमेंट्स को अवशोषित नहीं होने देती है. अगर आप इस तरह की दवाई ले रहे हैं तो अलसी न खाएं. यही नहीं अलसी के बीज खून को पतला करने वाली दवाइयों और ब्‍लड शुगर की दवाइयों को भी प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में आपको यही सलाह दी जाती है कि अलसी के अपनी डाइट में शमिल करने से पहले डॉक्‍टर की सलाह जरूर लें. 

दिल्‍ली की रहने वाली न्‍यूट्रिशनिस्ट पूजा मल्‍होत्रा कहती हैं कि सही मात्रा में अलसी खाने से ब्‍लड शुगर लेवल कम होता है, ब्‍लड कोलेस्‍ट्रॉल सही रहता है और ऑटोइम्‍यून डिस्‍ऑर्डर को ठीक करने में मदद मिलती है. अलसी के बीज फाइबर, मिनरल्‍स, ओमेगा 3 फैटी एसिड और एंटीऑक्‍सीडेंट गुणों से भरपूर हैं.

डिस्‍क्‍लेमर (Disclaimer: A statement that denies something, especially responsibility): ऊपर बताई गईं बातें जेनरिक जानकारी है. यह क्‍वालिफाइड डॉक्‍टर की राय का विकल्‍प नहीं है. ज्‍यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें. उक्त जानकारी को पढकर खुद का उपचार करना सही नहीं है। फिर भी कोई ऐसा करता है तो किसी प्रकार की परेशानी होने के लिये हेल्थ केयर फ्रेंड की कोई जिम्‍मेदारी नहीं होगी।
हमारे शरीर की अग्नि खाये गये भोजन को पचाने का काम करती है,यदि यह अग्नि किसी कारण से मंद पड़ जाये तो भोजन ठीक तरह से नही पचता है, भोजन के ठीक से नही पचने के कारण शरीर में कितने ही रोग पैदा हो जाते है, अनियमित खानपान से वायु पित्त और कफ़ दूषित हो जाते है, जिसकी वजह से भूख लगनी बंद हो जाती है,और अजीर्ण अपच वायु विकार तथा पित्त आदि की शिकायतें आने लगती है, भूख लगनी बंद हो जाती है,शरीर टूटने लगता है, स्वाद बिगड जाता है, पेट में भारीपन महसूस होने लगता है, पेट खराब होने से दिमाग खराब रहना चालू हो जाता है,अथवा समझ लीजिये कि शरीर का पूरा का पूरा तंत्र ही खराब हो जाता है,इसके लिये मंन्दाग्नि से हमेशा बचना चाहिये और तकलीफ़ होने पर इन दवाओं का प्रयोग करना चाहिये।
  1. * भूख नही लगने पर आधा माशा फ़ूला हुआ सुहागा एक कप गुनगुने पानी में दो तीन बार लेने से भूख खुल जाती है। 
  2. * काला नमक चाटने से गैस खारिज होती है,और भूख बढती है,यह नमक पेट को भी साफ़ करता है। 
  3. * हरड का चूर्ण सौंठ और गुड के साथ अथवा सेंधे नमक के साथ सेवन करने से मंदाग्नि (Indigestion) ठीक होती है। 
  4. * सेंधा नमक, हींग अजवायन और त्रिफ़ला का समभाग लेकर कूट पीस कर चूर्ण बना लें,इस चूर्ण के बराबर पुराना गुड लेकर सारे चूर्ण के अन्दर मिला दें,और छोटी छोटी गोलियां बना लें,रोजाना ताजे पानी से एक या दो गोली लेना चालू कर दे,यह गोलियां खाना खाने के बाद ली जाती है,इससे खाना पचेगा भी और भूख भी बढेगी। 
  5. * हरड को नीब की निबोलियों के साथ लेने से भूख बढती है, और शरीर के चर्म रोगों का भी नाश होता है। 
  6. * हरड गुड और सौंठ का चूर्ण बनाकर उसे थोडा थोडा मट्ठे के साथ रोजाना लेने से भूख खुल जाती है। 
  7. * छाछ के रोजाना लेने से मंदाग्नि खत्म हो जाती है। 
  8. * सोंठ का चूर्ण घी में मिलाकर चाटने से और गरम जल खूब पीने से भूख खूब लगती है। 
  9. * रोज भोजन करने से पहले छिली हुई अदरक को सेंधा नमक लगाकर खाने से भूख बढती है। 
  10. * लाल मिर्च को नीबू के रस में चालीस दिन तक खरल करके दो दो रत्ती की गोलियां बना लें, रोज एक गोली खाने से भूख बढती है। 
  11. * गेंहूं के चोकर में सेंधा नमक और अजवायन मिलाकर रोटी बनवायी जाये,इससे भूख बहुत बढती है। 
  12. * मोठ की दाल मंदाग्नि और बुखार की नाशक है। 
  13. * डेढ ग्राम सांभर नमक रोज सुबह फ़ांककर पानी पीलें, मंदाग्नि का नामोनिशान मिट जायेगा। 
  14. * पके टमाटर की फ़ांके चूंसते रहने से भूख खुल जाती है। 
  15. * दो छुहारों का गूदा निकाल कर तीन सौ ग्राम दूध में पका लें, छुहारों का सत निकलने पर दूध को पी लें, इससे खाना भी पचता है, और भूख भी लगती है। 
  16. * जीरा सोंठ अजवायन छोटी पीपल और काली मिर्च समभाग में लें,उसमे थोडी सी हींग मिला लें, फ़िर इन सबको खूब बारीक पीस कर चूर्ण बना लें,इस चूर्ण का एक चम्मच भाग छाछ मे मिलाकर रोजाना पीना चालू करें,दो सप्ताह तक लेने से कैसी भी कब्जियत में फ़ायदा देगा। 
  17. * भोजन के आधा घंटा पूर्व चुकन्दर गाजर टमाटर पत्ता गोभी पालक तथा अन्य हरी साग सब्जियां व फ़लीदार सब्जियों के मिश्रण का रस पीने से भूख बढती है। 
  18. * सेब का सेवन करने से भूख भी बढती है और खून भी साफ़ होता है। 
  19. * अजवायन चालीस ग्राम सेंधा नमक दस ग्राम दोनो को कूट पीस कर एक साफ़ बोतल में रखलें, इसमे दो ग्राम चूर्ण रोजाना सवेरे फ़ांक कर ऊपर से पानी पी लें, इससे भूख भी बढेगी और वात वाली बीमारियां भी समाप्त होंगी। 
  20. * एक पाव सौंफ़ पानी में भिगो दें,फ़िर इस पानी में चौगुनी मिश्री मिलाकर पका लें,इस शरबत को चाटने से भूख बढती है। 
  21. * पकी हुई मीठी इमली के पत्ते सेंधा नमक या काला नमक काली मिर्च और हींग का काढा बनाकर पीने से मंदाग्नि ठीक हो जाती है। 
  22. * जायफ़ल का एक ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से जठराग्नि प्रबल होकर मंदाग्नि दूर होती है। 
  23. * सोंफ़ सोंठ और मिश्री सभी को समान भाग लेकर ताजे पानी से रोजाना लेना चाहिये इससे पाचन शक्ति प्रबल  (Strong digestion) होती है। 
  24. * जवाखार और सोंठ का चूर्ण गरम पानी से लेने से मंदाग्नि दूर होती है। 
  25. * लीची को भोजन से पहले लेने से पाचन शक्ति और भूख में बढोत्तरी होती है। 
  26. * अनार भी क्षुधा (appetite) वर्धक होता है, इसका सेवन करने से भूख बढती है। 
  27. * नीबू का रस रोजाना पानी में मिलाकर पीने से भूख बढती है। 
  28. * आधा गिलास अनन्नास का रस भोजन से पहले पीने से भूख बढती है। 
  29. * तरबूज के बीज की गिरी खाने से भूख बढती है। 
  30. * बील का फ़ल या जूस भी भूख बढाने वाला होता है। 
  31. * इमली की पत्ती की चटनी बनाकर खाने से भूख भी बढती है, और खाना भी हजम होता है। 
  32. * सिरका सोंठ काला नमक भुना सुहागा और फ़ूला हींग समभाग मे लेकर मिला लें, रोजाना खाने के बाद भूख बढती है। 
  33. * सूखा पुदीना बडी इलायची सोंठ सौंफ़ गुलाब के फ़ूल धनिया सफ़ेद जीरा अनारदाना आलूबुखारा और हरड समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें, मंदाग्नि अवश्य दूर हो जायेगी। 
  34. * एक ग्राम लाल मिर्च को अदरक और नीबू के रस में खरल कर लें,फ़िर इसकी काली मिर्च के बराबर की गोलिया बना लें, यह गोली चूसने से भूख बढती है।
स्रोत : http://www.hariomcare.com/2013/07/blog-post_6200.html
खीरे के असरकारी नुस्खे

आयुर्वेद के अनुसार खीरा स्वादिष्ट, शीतल, प्यास, दाहपित्त तथा रक्तपित्त दूर करने वाला रक्त विकार नाशक है।

औषधीय लाभ - यह कब्ज दूर करता है। पीलिया, ज्वर, प्यास, शरीर की जलन, त्वचा रोग, छाती में जलन, अजीर्ण व एसीडीटी में फायदेमंद है। 

मोटापे से परेशान लोग सलाद के रूप में इसका प्रयोग करें तो लाभ होता है। इससे गुर्दे की समस्या दूर हो सकती है।

भूख न लगने की स्थिति में इसका सेवन करने से भूख बढ़ती है।

खीरे के टुकड़े आँखों पर रखने से आँखों के नीचे का कालापन दूर होता है। खीरे के रस में नीबू-मलाई मिलाकर लगाने से चेहरे का रंग निखरता है। स्त्रोत : वेब दुनिया

बड़े काम का है खीरा, जरा खा के तो देखिए

गर्मी से बचने के लिए लोग प्राय: ठंडी चीजें खाते या पीते हैं। ज्यादातर लोग प्यास बुझाने और शरीर ठंडा रखने के लिए कोल्ड ड्रिंक पीते हैं पर यह सिर्फ कुछ देर के लिए ही ठंडक देती है। उमस और बढ़तेे तापमान के दौरान अगर शरीर को ठंडा रखना है तो खीरे को अपने खान-पान में जरूर शामिल करें। खीरा न सिर्फ शरीर को ठंडा रखता है बल्कि अगर नियमित रूप से इसका सेवन किया जाए तो यह स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियों को भी दूर करता है। अब तो लोग अपनी खूबसूरती बढ़ाने के लिए भी खीरे का इस्तेमाल करने लगे हैं।

क्यों न छिलके साहित खाएं : कई लोग खीरे का छिलका उतारकर खाते हैं। अगर छिलका सहित खाया जाए तो यह ज्यादा फायदा करता है। आप छिलके के साथ इसे खाते हैं तो इसे अच्छी तरह धोकर खाएं। सैंडविच में डालकर खाएं या सब्जी बनाएं, यह हर तरह से गुणकारी है। अगर आप अपने पाचनतंत्र को बढिय़ा रखने के साथ खिली-खिली त्वचा चाहते हैं, तो खीरे को नियमित रूप से खाएं। खीरे में मौजूद हाइड्रोजन और हमारी त्वचा में मौजूद हाइड्रोजन एक जैसा होता है। इसीलिए त्वचा की समस्या आसानी से दूर हो जाती है। आप अपने फेस पैक में भी खीरे का इस्तेमाल कर सकते हैं। खीरा में विटामिन ‘ए’ और ‘सी’ की भरपूर मात्रा होती है। इसके छिलके में फाइबर और मिनरल्स मौजूद होते हैं। इसलिए इसे छिलके के साथ खाना ज्यादा बेहतर है। खीरा में मौजूद तत्व बुढ़ापे के लक्षणों जैसे झुर्रियों और असमय बालों को सफेद होने से रोकने में मदद करता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाए : खीरे में नमी की मात्रा काफी होती है इसलिए यह त्वचा और शरीर दोनों को स्वस्थ रखती है। इसे रोज खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सर्दी और जुकाम जैसी बीमारी दूर रहती है। गर्मियों में शरीर के तापमान को एक समान रखने के लिए खीरा और अजवाइन का रस पीएं। बुखार होने पर भी खीरे का जूस फायदेमंद है।

सेहत के लिए गुणकारी : खीरा रक्तचाप को भी काबू में रखने में कारगार है। इसमें मौजूद पोटेशियम ज्यादा और कम दोनों तरह के रक्तचाप को नियंत्रित रखता है। अगर आपके नाखून बार-बार टूट जाते हैं तो आज ही खीरे का सेवन शुरू करें, यह आपके नाखूनों को मजबूती देता है। गैस की समस्या में भी खीरा बेहद लाभदायक होता है। अगर आप किडनी या लीवर की समस्या से परेशान हैं तो खीरे का नियमित रूप से सेवन करने से आपके बालों को भी फायदा होगा। अपने बालों का सेहतमंद रखने के लिए खीरे के जूस का सेवन करें। इसके नियमित इस्तेमाल से बाल लंबे और घने होते हैं। दांतों और मसूढ़े से जुड़ी समस्या और पायरिया जैसे रोग में भी खीरा फायदेमंद है। स्त्रोत : जय हिंद जनाब, 02.08.2011

खीरा आजमाएं, पिंपल्स भगाएं

कील, मुंहासे और पिंपल्स चेहरे की खूबरसूरती बिगाड़ देते हैं। ये स्कीन की चमक को तो फीका करते ही हैं, साथ में पिंपल्स के कारण फेस पर पड़ने वाले दाग-धब्बे और भी परेशान करते हैं। यदि आप भी पिंपल्स की समस्या से परेशान हैं, तो इन घरेलू नुस्खों को आजमा सकते हैं:-

- स्कीन को हेल्दी बनाने और नैचुरल ग्लो बरकरार रखने के लिए दिन भर में कम से कम एक लीटर पानी पीना बेहद जरूरी है। 
- पिंपल्स घटाने के लिए नींबू का रस लगा सकते हैं।
- एक चम्मच मूंगफली का तेल और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर चेहरे की मालिश करें। इससे मुंहासे दूर होते हैं। 
- खीरे को कद्दूकस में किस लें। अब इसे चेहरे, आंखों और गर्दन पर लगाएं। 15-20 मिनट तक सूखने दें और फिर पानी से धो लें। यह स्कीन को कॉम्लेक्शन के लिए बेहतरीन टॉनिक की तरह काम करता है। इसका नियमित इस्तेमाल करने से पिंपल्स और ब्लैकहेड्स दूर होते हैं।
- नीम की पत्तियों के साथ हल्दी पाउडर को मिलाकर पेस्ट बना लें। पिंपल्स और कील,मुंहासों पर इसे लगाएं। 25-30 मिनट के बाद इसे गर्मपानी से धो लें। 
- लौंग से बना फेस मास्क या मेथी की पत्तियों को पीसकर मुंहासों पर लगाएं। 
- मीट, शक्कर, कड़क चाय या कॉफी, आचार, सॉफ्ट ड्रिंक, कैंडी, आईसक्रीम आदि खाद्य पदार्थ पिंपल्स को बढ़ाते हैं। इनका सेवन करने बचें। 
- संतरे के छिलके से बने पाउडर पिंपल्स के उपचार में रामबाण हैं। इसमें पाए जाने वाले औषधीय गुण के कारण कुछ ही दिनों में पिंपल्स की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
- पके टमाटर या खीरे के गुदे को पिंपल्स पर लगाएं। एक घंटे के बाद चेहरा पानी से धो लें। 
- एलोवेरा मुंहासे से बचाव में कारगर होता है। यह मुंहासे की वजह से चेहरे पर पड़ने वाले गड्ढों को भी भरता है। 
- मसूर की दाल के पाडडर को दूध में भिंगोकर और उसमें कपूर व घी डालकर मुंहासे वाली जगह पर लगाएं। मुंहासे जल्दी दूर हो जाएंगे।- स्त्रोत : ह़ाई शवूंग डोट कॉम, 10 सितम्बर, 2010 



खीरा न खाने की चेतावनी




स्पेन से आयातित जैविक खीरे पर शक
क्या आपने कभी सोचा है कि आमतौर पर स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक माना जानेवाला खीरा जानलेवा भी साबित हो सकता है और उसे खाने से मना भी किया जा सकता है.

जी हां, जर्मनी की सरकार ने लोगों को तबतक खीरा न खाने की चेतावनी दी है जबतक इस बात की जांच नहीं हो जाती कि घातक ई कोलाई बैक्टीरिया का स्रोत क्या है जिसने अब तक 10 लोगों की जान ले ली है और पूरे यूरोप में फैल गया है.

ऐसा माना जा रहा है कि संक्रमित जैविक खीरा स्पेन से आ रहा था, लेकिन इसकी और जांच की जा रही है.

सब्ज़ियों में संक्रमण की वजह से सैकड़ों लोगों में हेमोलाइटिक यूरेमिक सिंड्रोम पाया गया है जिससे गुर्दे में ख़राबी आ जाती है.

ऐसे मामले स्वीडेन, डेनमार्क, नीदरलैंड्स और ब्रिटेन में भी पाए गए हैं.

रविवार को चेक गणराज्य और ऑस्ट्रिया में अधिकारियों ने स्पेन में उगाए खीरों को संक्रमण फैलने के डर से दुकानों से हटवा दिया था.

चेक अधिकारियों का कहना था कि संक्रमित खीरों का हंगरी और लक्ज़म्बर्ग में भी निर्यात किए जाने की संभावना है.

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि स्पेन से जर्मनी में जैविक खीरे का आयात किया गया और फिर जर्मनी से उन्हें दूसरे यूरोपीय देशों में भेज दिया गया.

एक और आशंका ये भी जताई जा रही है कि संक्रमित खीरे सीधे स्पेन से यूरोपीय देशों में पहुंचे होंगे.

यूरोपीय संघ के एक प्रवक्ता के मुताबिक़ स्पेन के दो हरितगृहों को जिनकी पहचान संक्रमण के स्रोत के रूप में की गई है, उन्हें बंद कर दिया गया है और इस बात की जांच की जा रही है कि वाक़ई संक्रमण वहीं से फैला या फिर उसकी शुरुआत कहीं और से हुई है.

संक्रामक खीरे ?

जैविक खीरा
स्वीडन स्थित बीमारी से बचाव और नियंत्रण के यूरोपीय केंद्र ने हेमोलाइटिक यूरेमिक सिंड्रोम को जर्मनी में ऐसे संक्रमण का अब तक का सबसे बड़ा मामला बताया है.

जर्मनी का हैम्बर्ग इलाक़ा इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है.

बर्लिन में मौजूद बीबीसी संवाददाता स्टीफ़न इवान्स का कहना है कि इस संक्रमण ने वैज्ञानिकों को भी ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जो सिंड्रोम पहले केवल पांच साल से छोटे बच्चों तक सीमित था, उसने इस बार क़रीब 90 फ़ीसदी वयस्कों को अपनी चपेट में ले लिया है जिनमें दो तिहाई संख्या महिलाओं की है.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ इतनी बड़ी संख्या में वयस्कों के संक्रमित होने की एक वजह ये हो सकती है कि अपने स्वास्थ्य का विशेष ख़्याल रखने वाले लोगों ने शायद संक्रमित खाद्य का सेवन किया होगा.

बैक्टीरिया के डीएनए के विश्लेषण की भी तैयारी की जा रही है ताकि संक्रमित लोगों की पहले पहचान की जा सके.

बैक्टीरिया से होनेवाली बीमारी सीधे तौर पर संक्रामक नहीं है लेकिन अगर कोई संक्रमित व्यक्ति दूसरे लोगों के लिए भोजन तैयार कर रहा हो तो ये बीमारी फैल सकती है.

जर्मनी के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बैक्टीरिया का स्रोत अभी भी सक्रिय हो सकता है और अगर ऐसा है तो ये समस्या और भी विकराल रूप में सामने आ सकती है. स्त्रोत : बी बी सी हिंदी, 30.05.2011

खीरा खाओ और वजन खटाओ

पानी का स्रोत माना जाने वाला खीरा अधिकतर कई लोगों को नहीं अच्‍छा लगता है। पर क्‍या आपको पता है कि इसको कई बॉलीवुड स्‍टार अपने आपको स्‍लिम-ट्रिम बनाएं रखने के लिए खाते हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि खीरा खा कर वजन कैसे कम होता है तो हमारा यह लेख जरुर पढ़ें।

फायदे-खीरे में 95% पानी और 5% फाइबर पाया जाता है। इसलिए यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के साथ ही पाचन क्रिया को भी सही रखता है तथा नमक को भी बैलेंस करता है। साथ ही खीरे से शरीर में ठंडक रहती है और यह आंखों तथा त्‍वचा को भी साफ करता है।

डाइट-अगर आपको खीरे को अपनी डाइट में शामिल करना है तो इसका सलाद तैयार करें जिसमें 2 खीरे काटें और उसमें नमक, ऑलिव आयल तथा कुछ पत्‍तेदार सब्‍जियां भी मिला लें। यह खाने से आपका पेट कम होगा और पेट भर भी जाएगा।

कुछ हर्ब जैसे, धनिया, में विटामिन ए और आयरन, कॉपर और मैगनीश्यिम जैसे मिनरल पाए जाते हैं। इसलिए इनको अपने सलाद में जरुर शामिल करें जिससे आपकी बॉडी को पोषण मिल सके।

1. ब्रेकफास्‍ट में खाएं- 
गेहूं की ब्रैड और जैम
1 कटोरा खीरे का सलाद
1 गरम कप चाय
2. लंच-दाल, रोटी, सब्‍‍जी और खीरे का सलाद।
3. डिनर-डिनर में आपको केवल सलाद ही खाना चाहिये।
अगर आप खीरे से तैयार सलाद बना कर खाएगें तो 3 दिन में लगभग 2 किलो वजन तो कम ही हो जाएगा। इसके अलावा यह हमारी त्‍वचा का भी खास ख्‍याल रखता है। स्त्रोत : हिंदी बोल्ड स्काई, Published: शनिवार, मार्च 10, 2012.
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खीरा है गुणों की खान

नयी दिल्ली, 7 मई (वार्ता)। गर्मी के मौसम में सहजता से किफायती दाम पर उपलब्ध खीरा न सिर्फ गर्मी से राहत देता है बल्कि यह पोषक तत्वों से भरपूर होने की वजह से कई बीमारियों में भी लाभदायक होता है।

पोषाहार विशेषज्ञ एवं डायटिशियन संगीता राज ने बताया कि खीरा में 96 प्रतिशत जल की मात्रा होती है जो किसी भी कंपनी के बोतलबंद पानी से बेहतर और प्राकृतिक रूप से डिस्टिल्ड होता है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर लोग खीरे का छिलका हटाकर खाना पंसद करते लेकिन इसे कभी भी बिना छिलके के नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसके छिलके में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

उन्होंने बताया कि खीरा में अल्कालिन फर्मोगि मिनरल होता है और यह एंटी आक्सीडेंट का काम करने वाले विटामिन ए एवं सी, फ्लोट, मैगनीज, मोलीबडीन्म, पोटाशियम, सिलिका और सल्फर जहां प्रचुर मात्रा पाये जाते हैं वहीं विटामिन बी कांप्लेक्स, सोडियम, कैल्सियम, फास्फोरस और क्लोरिन भी पाये जाते हैं।

उन्होंने बताया कि खीरा में मिनरलों की मात्रा अधिक होने की वजह से अब इसका उपयोग हबर्ल फेश क्रीम और फेश वाश बनाने में किया जाने लगा है। उन्होंने बताया कि खीरा में इतना कुछ होने के बावजूद यह कम कैलोरी वाला खाद्य पदार्थ है। एक सौ ग्राम खीरा में मात्र 54 कैलोरी ऊर्जा होता है।

उन्होंने बताया कि खीरा में पाये जाने वाले मिनरल अपच एवं एसिडिटी में भी लाभदायक होते हैं। पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ ही यह गैस्ट्रिक और ड्यूडीनल अल्सर के मरीजों के लिए भी दवा का काम करता है1 खीरा रक्तचाप को नियंत्रित करने तथा उसे सुचारू रूप से संचालित करने में भी मददगार है।

उन्होंने बताया कि खीरा में सिलिका नामक रासायनिक तत्व पाया जाता है जो शरीर के उत्तकों को जोडऩे में मददगार होता है। खीरा का जूस शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र के रास्ते बाहर निकालता है और किडनी में यदि पत्थर हो तो उसे ङ्क्षपघलाने में भी सहायक होता है। खीरा के जूस का सेवन बुखार के दौरान भी किया जा सकता है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में बहुत कारगर होता है।

खीरा यूरिक एसिड को कम करता है जिससे शरीर के विभिन्न स्थानों विशेषकर जोड़ों की सूजन को कम करने में मदद करता है। इसका सेवन बाल वृद्धि के लिए भी लाभदायक है1 इसके अतिरिक्त यह हर तरह से त्वचा की देखभाल में भी बहुत मददगार होता है क्योंकि इसमें पाये जाना वाला विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट त्वचा को निखारता है। स्त्रोत : dainik tribune online.com Posted On May - 8 - 2010
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गुणों की खान है खीरा 

खीरा भारतीय भोजन का अभिन्न अंग है। सच कहा जाए तो यह गुणों की खान है। खीरा न केवल भूख मिटाने बल्कि पोषण व इंस्टैंट एनर्जी देने, फैट कम करने, सरदर्द भगाने और मुंह की दुर्गंध दूर करने में काम आता है। यह डायबीटीज, किडनी, लीवर और मूत्राशय संबंधी बीमारियों में लाभदायक होता है।

खीरा में विटामिन बी, बी-2, बी-3, बी-5, बी-6, सी, फोलिक एसिड, कैल्शियम, आयरन, मैगनीशियम, फासफोरस, मिनरल और जिंक होता है। विटामिन ´ए´ और ´सी´ अधिक मात्रा में पाया जाता है। खीरा में 97 प्रतिशत तक पानी होता है और इसे खाने से भूख भी शांत होती है। यह मधुमेह के रोगियों और स्थूल शरीर वालों के लिए बहुत लाभकारी है।

इसका प्रयोग खास तौर पर सलाद के रूप में किया जाता है। यह पेशाब लाने वाला और मूत्र रोगों को दूर करने वाला होता है। खीरा ठंडा होता है और गर्मी के मौसम में इसे खाने से प्यास शांत होती है। खीरा को लैटिन में क्युकूमिस सैटाइवस कहते हैं। खीरा सफेद, पीला और हरा होता है।

आयुर्वेद के अनुसार खीरा स्वादिष्ट, शीतल, प्यास, दाहपित्त तथा रक्तपित्त दूर करने वाला रक्त विकार नाशक है।

औषधीय लाभ

यह कब्ज दूर करता है। पीलिया, ज्वर, प्यास, शरीर की जलन, त्वचा रोग, छाती में जलन, अजीर्ण व एसीडीटी में फायदेमंद है।

मोटापे से परेशान लोग सलाद के रूप में इसका प्रयोग करें तो लाभ होता है। इससे गुर्दे की समस्या दूर हो सकती है।

खीरा का सेवन करने से भूख बढती है।

खीरे के टुकड़े आँखों पर रखने से आँखों के नीचे का कालापन दूर होता है। खीरे के रस में नीबू-मलाई मिलाकर लगाने से चेहरे का रंग निखरता है।

खीरे में मौजूद फाइटो केमिकल्स हमारी स्किन को टाइट रखने में मदद करते हैं और झुर्रियों को बाय-बाय कहने में मदद करते हैं। स्विमिंग करने से पहले या बाद में अपने प्रॉब्लम एरिया पर इसके कुछ टुकड़े मलने से वजन तेजी से घटता है।

खीरा से थकान कम होती है, सिंक या स्टेनलेस स्टील के बरसों पुराने दाग मिटाने, पेन का लिखा मिटाने और यहां तक कि जूते पॉलिश करने तक में इसका प्रयोग किया जाता है। स्त्रोत : आज की खबर, 11.04.2012
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खीरा खाने के फायदे

खीरे में इरेप्सिन नामक एंजाइम होता है जो की प्रोटीन को पचाने में सहायता करता है| 
खीरा खाने से बाल स्वस्थ रहतें हैं| 
खीरे का जूस दांत के कीड़ो को ठीक करने में सहायक होता है! 
खीरा खाने से पेशाब ना आना या रूक-रूक कर आना की बिमारी ठीक हो जाती है और पेशाब खुलकर आता है| 
खीरा शुगर के मरीजों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है! इसलिए शुगर के मरीजों को खीरा जरुर खाना चाहिए| 
खीरा गुर्दे और मूत्राशय के रोगों को ठीक करने में बहुत सहायक होता है| 
खीरा लीवर की बीमारियों को होने से भी रोकता है! 
खीरा शरीर के अग्नाशय को भी स्वस्थ रखता है! 
खीरा ब्लड प्रेशर को सन्तुलित रखता है! 
खीरा शरीर की गर्मी को शांत करता है| गर्मियों में यह फायदेमंद होता है| वैसे खीरा गर्मियों के मौसम में ही पैदा है| 
खीरा शरीर की त्वचा को स्वस्थ बनाता है| इसके साथ साथ यह आँखों के लिए भी फायदेमंद होता है| 
गर्मियों में हमें रोजाना खीरा खाना चाहिए इससे हम गर्मियों में होने वाली बीमारियों से बच सकते हैं। 
स्त्रोत : हेल्थ ब्लॉग,
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Ayurvedic Syrup for Diseases

दशमूल काढ़ा : विषम ज्वर, मोतीझरा, निमोनिया का बुखार, प्रसूति ज्वर, सन्निपात ज्वर, अधिक प्यास लगना, बेहोशी, हृदय पीड़ा, छाती का दर्द, सिर व गर्दन का दर्द, कमर का दर्द दूर करने में लाभकारी है व अन्य सूतिका रोग नाशक है।

महामंजिष्ठादि काढ़ा : समस्त चर्म रोग, कोढ़, खाज, खुजली, चकत्ते, फोड़े-फुंसी, सुजाक, रक्त विकार आदि रोगों पर विशेष लाभकारी है।

महासुदर्शन काढ़ा : विषम ज्वर, धातु ज्वर, जीर्ण ज्वर, मलेरिया बुखार आदि समस्त ज्वरों पर विशेष लाभकारी है, भूख बढ़ाता है तथा पाचन शक्ति बढ़ाता है। श्वास, खांसी, पांडू रोगों आदि में हितकारी। रक्त शोधक एवं यकृत उत्तेजक ।

महा रास्नादि काढ़ा : समस्त वात रोगों में लाभकारी। आमवात, संधिवात, सर्वांगवात, पक्षघात, ग्रध्रसी, शोथ, गुल्म, अफरा, कटिग्रह, कुब्जता, जंघा और जानु की पीड़ा, वन्ध्यत्व, योनी रोग आदि नष्ट होते हैं।

रक्त शोधक : सब प्रकार की खून की खराबियां, फोड़े-फुंसी, खाज-खुजली, चकत्ते, व्रण, उपदंश (गर्मी), आदि रोगों पर लाभकारी है तथा खून साफ करता है।

सामान्य मात्रा : 10 से 25 मिली तक बराबर पानी मिलाकर भोजन करने के बाद दोनों समय पिए जाते हैं।

विविध

अर्क अजवायन : पेट व आंतों के दर्द में लाभकारी। बदहजमी, अफरा, अजीर्ण, मंदाग्नि में लाभप्रद। दीपक तथा पाचक व जिगर की बीमारियों को दूर करता है।


अर्क दशमलव : प्रसूत ज्वर एवं सब प्रकार के वात रोगों में लाभदायक है।


अर्क सुदर्शन : अनेक तरह के बुखारों में लाभदायक है। पुराने बुखार, विषम ज्वर, त्रिदोष ज्वर, इकतारा, तिजारी बुखारों को नष्ट करता है।

अर्क सौंफ : भूख बढ़ाता है। आंव-पेचिस आदि में लाभदायक है। मेदा व जिगर की बीमारियों में फायदेमंद है। प्यास व अफरा कम करता है। पित्त, ज्वर, बदहजमी, शूल, नेत्ररोग आदि में लाभकारी है।

खमीरा गावजवां : दिल-दिमाग को ताकत देता है। घबराहट व चित्त की परेशानी दूर करता है। प्यास कम करता है, नेत्रों को लाभदायक है। खांसी, श्वास (दमा), प्रमेह आदि में लाभकारी। मात्रा 10 से 25 ग्राम सुबह-शाम चाटना चाहिए।

खमीरा सन्दल : अंदरूनी गर्मी को कम करता है, प्यास को कम करता है, दिल को ताकत देता है व खास तौर पर दिल की धड़कन को कम करता है। पैत्तिक दाह, मुंह सूखना, घबराहट, जलन, गर्मी से जी मिचलाना तथा मूत्र दाह में लाभकारी। शीतल व शांतिदायक। गर्भवती स्त्रियों के लाभदायक। मात्रा 10 से 25 ग्राम सुबह, दोपहर व शाम अर्क गावजवां के साथ या केवल चाटना चाहिए।

गुलकन्द प्रवाल युक्त : अत्यंत शीतल है। कब्ज दूर करता है व पाचन शक्ति बढ़ाता है। दिल, फेफड़े, मैदा व दिमाग को ताकत देता है। जिगर की सूजन व हरारत कम करता है। गर्भवती स्त्रियों के लिए विशेष लाभदायक है। गर्मी के मौसम में बालक, वृद्ध, स्त्री, पुरुष सबको इसका सेवन करना चाहिए। मात्रा 10 से 25 ग्राम सुबह शीतल जल या दूध के साथ लेना चाहिए।


माजून मुलैयन : हाजमा करके दस्त साफ लाने के लिए प्रसिद्ध माजून है। बवासीर के मरीजों के लिए श्रेष्ठ दस्तावर दवा। मात्रा रात को सोते समय 10 ग्राम माजून दूध के साथ।


सिरका गन्ना : पाचक, रुचिकारक, बलदायक, स्वर शुद्ध करने वाला, श्वास, ज्वर तथा वात नाशक। मात्रा 10 से 25 मि.ली. सुबह व शाम भोजन के बाद।


सिरका जामुन : यकृत (लीवर) व मेदे को लाभकारी। खाना हजम करता है, भूख बढ़ाता है, पेशाब लाता है व तिल्ली के वर्म को दूर करने की प्रसिद्ध दवा। मात्रा 10 से 25 मि.ली. सुबह व शाम भोजन के बाद।

परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor. 
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गलगण्ड गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गारण्टेड इलाज गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाद्वार गुदाभ्रंश गुम्मा गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गेदुआ की छाछ गैस गैस्ट्रिक गैहूं का जवारा गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखगांजा गोरखबूटी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिटकन चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाजन बूटी छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जख्म जंगली तिल्ली जंगली तुलसी जंगली पेड़ जंगली मिर्ची जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार 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पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot 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