परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.-Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Health Care Friend and Marital Dispute Consultant
(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)
-:Mob. & WhatsApp No.:-
85619-55619 (10 AM to 10 PM)
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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।
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हम अपने सभी मित्रों से अनुरोध करते हैं कि हमारे इस पोस्ट को जहां तक हो सके फैलाएं; ताकि जन कल्याण हो सके और अनेक स्त्री-पुरुष जो सेक्स रोग, लिंग विकार, योनिविकार, ग्राभाय्स विकार से पीड़ित होकर जाने कहाँ–कहाँ घूम कर अपना स्वास्थ्य और जीवन नष्ट कर रहे है; वे अपने आस-पास के जाने–पहचाने वृक्षों, घास फूसों, मसाले में प्रयोग होने अली वस्तुओं, खाने-पीने में प्रयुक्त होने वाली वस्तुओं से अपनी समस्याओं का 100% गारंटी शुदा निदान कर सकें। हमारे पास अनेक लोग निराश से सम्पर्क कर रहे है और मुझे भारी पीड़ा हो रही है कि परमात्मा ने तो हमे सब कुछ दिया था; पर हमारे पास ही हमारी जीवन रक्षक दवाएं खड़ी है और यंत्रणा से इधर-उधर भटक रहे है।
धर्मालय द्वारा रोग चिकित्सा के जितने सूत्र चढ़ाये गये है; वह कोई दूकानदारी नहीं है। हम कोई दवा नहीं बनाते, न हमारा कोई प्रोडक्शन यूनिट है। हमने प्राचीन चिकित्सा पद्धति के अत्यंत साधारण और जानी-पहचानी जड़ी-बूटियों के परीक्षित योगों को अपनी वेबसाइट पर इसलिए चढ़ाया है कि सामान्य लोग अपने ही घर पर ही दवा तैयार कर अपनी प्राण रक्षा कर सकें। यह आयुर्वेद की देशी-चिकित्सा है , जो इस देश के घर-घर में कभी प्रयुक्त की जाती थी। कम्पनी मेड पेटेंट दवाओं पर आधारित चिकित्सा पद्धति में यह चिकित्सा पद्धति अतीत के अँधेरे में डूब गयी है। आज के ‘लाइलाज रोग’ का मतलब यह है कि किसी कम्पनी ने इसकी दवा इजाद नहीं की है; पर आज कोई इन नुस्खों को नहीं अपनाता; क्योंकि देशी वैद्य नामक प्राणी अब नहीं पाया जाता। आयुर्वेदिक डॉक्टर भी इन नुस्खों को नहीं अपनाता; क्योंकि पेटेंट दवाओं में प्रिस्क्रिपसन पर उसे गिफ्ट, कमीशन मिलता है , इसमें क्या मिलेगा? और वे जानते भी नहीं; क्योंकि यह कहीं पढाया नहीं जाता। आश्चर्य है कि ब्रिटिश कालीन ब्रिटिश मेडिको फार्मा का गजट इनके रिसर्च से भरा पड़ा है।
धर्मालय पर चढ़े नुस्खे तांत्रिक एवं आयुर्वेदिक है; पर ये देशी है और सार्वजनिक प्रयोग में रहे हैं। वास्तविक तांत्रिक एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा का स्वरुप इतना बड़ा वट वृक्ष है, जिसकी विशालता का वर्णन करना भी संभव नहीं है। तीन दर्जन तो चिकित्सा विधिया है और लाखों नुस्खे। कुछ तो ऐसे, जिनमें दावा किया गया है कि वली-पलित रोग नष्ट होगा और आयु 300 वर्ष होगी। वली-पलित का अर्थ बुढ़ापा है।……
लेकिन में देख रहा हूँ कि जो दवाएं लिस्ट देने पर जड़ी-बूटी का दूकानदार दे देगा; उसको कूटने-पीसने का झंझट भी बहुत लोग नहीं उठाना चाहते। वे हमसे संपर्क करते है; कहीं से बनवा दीजिये। समय माँगा, मजदूर 500 मांगता है, वैद्य तोरहे नहीं; जो इनके देशी जानकार है; वे पूरा कमर्शियल चार्ज करते है और जो दवा घर पर 2 हजार में बन सकती है; उसकी कीमत 6 हजार हो जाती है।
ऐसे बहुत से लोग दयनीय होकर पूछते हैं कि धन न हो , तो क्या करें?
धन न होगा, तो भी रोग मुक्ति होगी। समय अधिक लगेगा। आप अपना इलाज आस –पास से कर सकते है। इन विवरणों को देखें।
इन्हें पहचानिए। ये आपके प्राण रक्षक है ।
स्वप्नदोष है? जरा इन पर नजर डालिए : महीने में दो बार स्वप्नदोष में धातु गिरना कोई बिमारी नहीं है। नहाते समय मूत्र का वेग उठना कोई बिमारी नहीं है। हफ्ते में दो बार हो, तो रोग है और बार-बार मूत्राशय भरता हो, तो रोग है। इसके कई रूप है। नींद में सेक्सी स्वप्न देखना और धातु पतन, जाग्रत में भी सुंदर स्त्री को देखकर पतन, लगातार पेशाब में या बिना पेशाब के धातु पतन। सबका कारण एक ही है। अत्यधिक गर्म पदर्थों का सेवन और अप्राकृतिक मैथुन। इसमें बाद के दोनों रूप पहले से दूसरा, दुसरे से तीसरा अधिक खतरनाक है।
निदान : पांच गुलाब प्रतिदिन मिश्री के साथ खाकर ऊपर से गाय का दूध पिए। प्रतिदिन भोजन के बाद एक पका केला खाकर दूध पीये। दूध न हो, तो पानी कदापि न पिए। एक घंटा बाद पानी पीये।
इमली के बीज 300 ग्राम दूध में डालकर छोड़ दें; जब वह छिलके छोड़ दे ( इसमें 48 से 72 घंटे तक लग सकते है। दूध सूखे तो और डाल दें) फट-फट जाए, तो छिलके निकाल कर लोहे के खरल में कूट कर घोटे। पीस जाने पर उसके वजन के बराबर मिश्री डालकर घोंटे। जितना घुटेगा दवा शक्तिशाली होगी। 5-5 ग्राम की गोलियां बनाकर सवेरे-शाम दूध के साथ लें। (दूध 100 ml हो तो भी काम चल जाएगा।)
10 ग्राम बबूल का नरम पत्ता पीसकर पानी में घोलकर छानकर मिश्री मिलाकर पी जाये। शीशम का पत्ता, कैथ का पत्ता, अपामार्ग का भस्म , प्रशस्त्र है। इनेमिन कोई भी प्रयुक्त करें।
आँवले का चूर्ण 6 ग्राम, चावलों की माड़ में चीनी मिलाकर, खाकर पीयें।
विशेष –
कृपया ध्यान रखें, कब्ज न हो। कब्ज हो, तो छोटी हर्रे 50 ग्राम ,सौंफ देशी – 30 ग्राम , मिश्री 30 ग्राम अलग-अलग कूटकर मिलकर घोंटे और रख लें। इसकी मात्रा 10 ग्राम गरम दूध या पानी के साथ है। सुबह शाम लें।
बाहर थला करें। सूर्योदय से पहले उठे।
तेल, मिर्च, खटाई, कब्ज करने वाले, तले भुने, फ़ास्ट फ़ूड, शराब आदि, गर्म पदार्थ खाना, प्याज-लहसुन, मांस- मछली भी इन दिनों न खाएं। पेशा बन रोके, ठन्डे पानी से लिंग को न धोये।
बहुत सोना, बहुत जागना, चिंता करना भी वर्जित है। प्रसन्न रहें। हमारी गारंटी है कि तेन महीने में आप नार्मल हो जाएंगे। इसके बाद धातु बढायें और पौरुष बढायें । इसमें भी वह बढेगा।
इनमें से एक-दो ही अपनाएं। सभी नहीं।
लिंग एवं योनी विकार : कनेर की जड़, धतूरे की जड़, आक की जड़, अपामार्ग की जड़, लहसुन, हरताल, सुहागा, फिटकरी, हिंग, एरंड की जड़, बरगद की जटा, जायफल, लौंग, जावित्री, पीपर – 25-25 ग्राम लेकर; जायफल, जावित्री , पीपर, सुहागा , हिंग – हटाकर सबको पीसकर एक पाँव सरसों का तेल डालें । 2 लीटर बकरे या गाय का मूत्र डालकर या पानी डालकर 100 डिग्री सेंटीग्रेट पर उबालें। जब सब कुछ जल जाए, तो इस तेल को ठंडा करके छानकर में अलग निकाले गये जायफल आदि पञ्च चीजों का चूर्ण बनाकर मिला दें और बोतल में बंद कर दें।
लिंग या योनी को रेजर से साफ़ करके उसपर यह तेल लगायें एयर पान या एरंड का पत्ता लपेट कर दो घंटा रहने दें। सुबह शाम करें। ध्यान रहे हवा से बचाना होगा। पत्ते पर कपडा लपेटे।
केवल 21 दिन में नसों की विकार, ढीलापन नष्ट हो जाएगा और उसके समस्त विकार मिट जायेंगे। वह कड़ा और स्थूल हो जाएगा।
एक तेल हमारे एक मित्र भी बनाते है। यह तेल मंगवा कर भी लगा सकते है। यह लिंग वृद्धि भी करता है।
कुछ न हो तो काला तिल और दालचीनी को बराबर मात्रा में पीसकर शहद के साथ उपर्युक्त प्रकार से मालिश करके लेप करें।
लिंग की वृद्धि योनी का संकोचन
लौंग, अनार के छिलके, जायफल, माजूफल इनको पीसकर योनी में मालिश करके लेप करने से योनी संकुचित और लिंग वर्द्धित होता है। 41 दिन
केवल जायफल भैंस के दूध में पीसकर लेपकरके पान का पत्ता बांधकर रात भर छोड़ने और प्रातः काल गरम पानी से धों पर भी 41 दिन में रिजल्ट सामने होता है।
स्तम्भन का चमत्कारिक योग
धातु पुष्ट और पर्याप्त नहीं है, तो स्तम्भन का कोई अर्थ नहीं है-
हिंग को शहद में पीसकर लिंग पर लेप करें और आधा घंटा बाद पोंछकर रति करें।( कोई भी लेप सुपारी छोड़कर की जाती है।)
इसके साथ जिमीकंद (ओल) में तुलसी की जड़ बराबर पीसकर मिलाएं 5 ग्राम, 5 ग्राम पान का रस या दो तीन पत्ता में लपेटकर दबाकर रस घोंटे। फिर खा जाएँ।
स्त्री के बालों को जलाकर उसके राख में सुहागा पीसकर मिलाकर शहद लगाकर लेप करने आधा घंटा बाद पोंछकर रति करने से स्त्री हारती है।
दालचीनी 25 ग्राम , काला तिल 25 ग्राम , धोयी भांग 25 ग्राम, जायफल 25 ग्राम , लौंग 25 ग्राम और गुलाब की पत्ती 50 ग्राम – पीस कूटकर छानकर रखें। 5 ग्राम आधे घंटे पहले दूध के साथ।
धातु पुष्टकर नुस्खें
गर्मी है, तो शीशम, कैथ, आम, के पत्तों में से किसी को पीसकर 30 ग्राम लुगदी 300 ग्राम पानी में घोले-छानकर मिर्श्री मिलाकर शर्बत पियें। सुबह-शाम।
सर्दी है, तो प्याज का रस 6 ग्राम , शहद, 10 ग्राम जायफल का चूर्ण एक चुटकी डालकर चाटें और दूध पियें।
वायु है , तो एरंड की जड़ का काढ़ा साथ में 1 नम्बर नुस्खा प्रयोग करें।
मांसाहारी एक अंडा, 10 ग्राम चीनी, 20 ग्राम घी को एक साथ गर्म करेक खाएं, ऊपर से दूध पियें।
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Health Solutions For India
22 October 2013 ·
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कई लोगों का मश्वरा मिलने के बाद यह लेख आप सब की ख़िदमत में पेश कर रहा हूँ। इस में नामर्दानगी को दूर करने के 122 तरीक़े बताया गया है। उम्मिद है कि जिस किसी को भी यह परेशानी होगी। इस से वह फ़ायदा उठाऐंगे। तो आइये सब से पहले इस को पूरा पढ लिया जाए।
नपुंसकता
(IMPOTENCY)
परिचय: जो व्यक्ति यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है, वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है। इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी, किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता, मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता, तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े होते हैं और कई तरह के पारिवारिक मन मुटाव हो जाते हैं। बात यहां तक भी बढ़ जाती है कि आखिरी में उन्हें अलग होना पड़ता है।
कुछ लोग शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फसकर, सेक्स के शिकार होकर मानसिक रूप से नपुंसक हो जाते हैं। मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डर जाते हैं। सहवास भी नहीं कर पाते और मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है।
कारण: नपुंसकता के दो कारण होते हैं। शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है। नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता, तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है। हस्तमैथुन, ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसक के शिकार होते हैं। ऐसे नवयुवकों की सहवास की इच्छा कम हो जाती है।
लक्षण: मैथुन के योग्य ना रहना, नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना, या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना, इसका दूसरा लक्षण है। मैथुन अथवा बहुमैथुन के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में शिशन पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। अधिक अमचूर खाने से धातु दुर्बल होकर नपुंसकता आ जाती है।
1. हेल्थ टिप्स:
• नपुंसकता से परेशान रोगी को औषधियों खाने के साथ कुछ और बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे सुबह शाम किसी पार्क में घूमना चाहिए, खुले मैदान में, किसी नदी या झील के किनारे घूमना चाहिए। सुबह सूर्य उगने से पहले घूमना ज्यादा लाभदायक है। सुबह साफ पानी और हवा शरीर में पहुंचकर शक्ति और स्फूर्ति पैदा करती है। इससे खून भी साफ होता है।
• नपुंसकता के रोगी को अपने खाने (आहार) पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। आहार में पौष्टिक खाद्य पदार्थों घी, दूध, मक्खन के साथ सलाद भी ज़रूर खाना चाहिए। फ़ल और फ़लों के रस के सेवन से शारीरिक क्षमता बढ़ती है। नपुंसकता की चिकित्सा के चलते रोगी को अश्लील वातावरण और फिल्मों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इसका मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इससे बुरे सपने भी आते हैं, जिसमें वीर्यस्खलन होता है।
2. ईसबगोल:
• ईसबगोल की भूसी 5 ग्राम और मिश्री 5 ग्राम दोनों को रोज सुबह के समय खायें और ऊपर से दूध पी लें। इससे शीध्रपतन की विकृति खत्म होती है।
• ईसबगोल की भूसी और बड़े गोखरू का चूर्ण 20-20 ग्राम तथा छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण 5 ग्राम इन सबका चूर्ण बनाकर रोज 2 चम्मच गाय के दूध के साथ लें।
3. सफेद प्याज:
• सफेद प्याज़ का रस 8 मिलीलीटर, अदरक का रस 6 मिलीलीटर और शहद 4 ग्राम, घी 3 ग्राम मिलाकर 6 हफ्ते खाने से नपुंसकता खत्म हो जाती है।
• सफेद प्याज़ को कूटकर दो लीटर रस निकाल लें। इसमें 1 किलो शुद्ध शहद मिलाकर धीमी आग पर पकायें, जब सिर्फ शहद ही बच कर रह जाए, तो आग से उतार लें और उसमें आधा किलो सफेद मूसली का चूर्ण मिलाकर चीनी या शीशे के बर्तन में भर दें। 10 से 20 ग्राम तक दवा सुबह-शाम खाने से नामर्दी मिट जाती है।
4. जामुन:
जामुन की गुठली का चूर्ण रोज गर्म दूध के साथ खाने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द हो जाता है।
5. छुहारे:
• छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और उसी दूध को पीने से नपुंसकता खत्म होती है।
• रात को पानी में दो छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे को दूध के साथ खायें।
6. बादाम:
• बादाम की गिरी, मिश्री, सौंठ और काली मिर्च कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर, कुछ हफ्ते खाने से और ऊपर से दूध पीने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द होता है।
• बादाम को गर्म पानी में रात में भींगने दें। सुबह थोड़ी देर तक पकाकर पेय बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर रोज़ पीऐं, इससे मूत्रजनेन्द्रिय संस्थान के सारे रोग खत्म हो जाते हैं।
7. गाजर:
• रोज गाजर का रस 200 मिलीलीटर पीने से मैथुन शक्ति (संभोग) बढ़ती है।
• गाजर का हलवा, रोज़ 100 ग्राम खाने से सेक्स की क्षमता बढ़ती है।
8. कौंच:
• कौंच के बीज के चूर्ण में तालमखाना और मिश्री का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 3-3 ग्राम की मात्रा में खाने और दूध के साथ पीने से नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।
• कौंच के बीजों की गिरी तथा राल ताल मखाने के बीज। दोनों को 25 - 25 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर छान लें, फिर इसमें 50 ग्राम मिस्री मिला लें। इसमें 2 चम्मच चूर्ण रोज़ दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
9. गिलोय: गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला सभी बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण रोज़ मिस्री और घी के साथ खाने से प्रबल मैथुन शक्ति विकसित होती है।
10. जायफल:
• जायफल का चूर्ण लगभग आधा ग्राम शाम को पानी के साथ खाने से 6 हफ्ते में ही धातु (वीर्य) की कमी और मैथुन में कमजोरी दूर होगी।
• जायफल का चूर्ण एक चौथाई चम्मच सुबह - शाम शहद के साथ खाऐं और इसका तेल सरसों के तेल के मिलाकर शिश्न (लिंग) पर मलें।
11. बेल:
• बेल के पत्तों का रस 20 मिली लीटर निकालकर, उसमें सफेद जीरे का चूर्ण 5 ग्राम, मिस्री का चूर्ण 10 ग्राम के साथ खाने और दूध पीने से शरीर की कमजोरी ख़त्म होती है।
• बेल के पत्तों का रस लेकर, उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर शिश्नि पर 40 दिन तक लेप करने से नपुंसकता में लाभ होगा।
12. सफेद मूसली:
• सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मिलाकर, पीसकर चूर्ण बना कर रखें और चूर्ण बनाकर 5 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ खाने से शरीर की शक्ति और खोई हुई मैथुन शक्ति, वापस मिल जाती है।
• सफेद मूसली 250 ग्राम बारीक चूर्ण बना लें। उसे 2 लीटर दूध में मिलाकर खोया बना लें। फिर 250 ग्राम घी में डालकर इस खोए को भून लें। ठंडा हो जाने पर आधा किलो पीसकर शक्कर (चीनी) मिलाकर पलेट या थाली में जमा लें। सुबह -शाम 20 ग्राम खाने से काम शक्ति बढ़ती है।
• सफेद मूसली, सतावर, असगंध 50 - 50 ग्राम कूट छान कर, 10 ग्राम दवा सोते समय 250 मिली लीटर, कम गर्म दूध में खांड़ के संग मिलाकर लें।
• सफेद मूसली 20 ग्राम, ताल मखाने के बीज 200 ग्राम और गोखरू 200 ग्राम। तीनों को पीसकर चूर्ण बनाकर रखें, फिर इसमें से 5 ग्राम चूर्ण दूध के साथ खायें।
• सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मात्रा में कूट पीसकर चूर्ण बनाकर 6 ग्राम की मात्रा में खाने से नपुंसकता (नामर्दी) खत्म होती है।
13. चना: भीगे चने सुबह - शाम चबाकर खाने से ऊपर से बादाम की गिरी खाने से, मैथुन शक्ति बढ़ती है और नंपुसकता ख़त्म होती है।
14. शतावर:
• शतावर को दूध में देर तक उबाल कर मिस्री मिला लें और उस दूध को पीने से ही कुछ महीनों में नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म हो जाती है।
• शतावर, असगंध, एला, कुलंजन और वंशलोचन का चूर्ण बनाकर रखें। 3 ग्राम चूर्ण में 6 ग्राम शक्कर को मिलाकर खाने से और फिर ऊपर से दूध पीने से कुछ महीनों में नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।
• शतावर और असगन्ध के 4 ग्राम चूर्ण को दूध में उबाल कर पीने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।
• शतावर का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम को चीनी मिले दूध में, सुबह - शाम डालकर पीऐं, इससे नपुंसकता दूर होती है। शरीर की कमजोरी भी दूर होती है।
15. सेमल:
• सेमल के पेड़ की छाल के 20 मिली लीटर रस में मिस्री मिलाकर, पीने से शरीर में वीर्य और मैथुन शक्ति बढ़ती है।
• 10-10 ग्राम सेमल के चूर्ण और चीनी को 100 मिली लीटर पानी के साथ घोट कर सुबह-शाम लेने से बाजीकरण यानी संभोग शक्ति ठीक होती है और नपुंसकता भी दूर हो जाती है।
16. बड़ी गोखरू:
• बड़ी गोखरू का फांट या घोल सुबह-शाम लेने से काम शक्ति यानी संभोग की वृद्धि दूर होती है। 250 मिलीलीटर को खुराक के रूप में सुबह और शाम सेवन करें।
• बड़ा गोखरू और काले तिल, इन दोनों को 14 ग्राम की मात्रा में कूट-पीस लें। फिर इस को 1 किलो गाय के दूध में पकाकर खोआ बना लें। यह एक मात्रा है। इस खोयें को खाकर ऊपर से 250 मिली लीटर गाय के निकाले दूध के साथ पी लें। 40 दिन तक इसको खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
• 25 ग्राम बड़ी गोखरू के फल का चूर्ण, 250 मिली लीटर उबले पानी में डालकर रखें। इसमें से थोड़ा-थोड़ा बार-बार पिलाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
• बड़ी गोखरू के फल का चूर्ण 2 ग्राम को चीनी और घी के साथ सेवन करें तथा ऊपर से मिस्री मिले दूध का सेवन करने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
17. गोखरू:
• हस्तमैथुन की बुरी लत से पैदा हुई नपुंसकता को दूर करने के लिए 1-1 चम्मच, गोखरू के फ़ल का चूर्ण और काले तिल को मिलाकर शहद के साथ दिन में 3 बार नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक सेवन करें। इससे नपुंसकता में लाभ होता है।
• गोखरू, कौंच के बीज, सफेद मूसली, सफेद सेमर की कोमल जड़, आंवला, गिलोय का सत और मिस्री, बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 10 ग्राम से लगभग 20 ग्राम तक चूर्ण दूध के साथ खाने से नपुंसकता और वीर्य की कमजोरी दूर होती है।
• गोखरू को 3 बार दूध में उबालकर तीनों बार सुखाकर चूर्ण बनाकर खाने से नपुंसकता दूर होती है।
• गोखरू का चूर्ण और तिल बराबर मिलाकर बकरी के दूध में पकाकर शहद में मिला लें और खायें। इससे अनेक प्रकार की नपुंसकता ख़त्म होती है।
• देशी गोखरू 150 ग्राम पीसकर छान लें। इसे 5 - 5 ग्राम सुबह - शाम शहद में मिलाकर चाटने से नपुंसकता (नामर्दी) में लाभ मिलता है।
• गोखरू, तालमखाना, शतावर, कौंच के बीजों की गिरी, बड़ी खिरेंटी तथा गंगरेन इन सबको 100 ग्राम की मात्रा में लेकर पीस लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम से 10 ग्राम तक की मात्रा में रात के समय फांककर ऊपर से गरम दूध पियें। 60 दिनों तक रोज़ खाने से वीर्य बढ़ता है और नपुंसकता दूर होती है।
18. विदारीकन्द:
• विदारीकन्द के चूर्ण को घी, दूध और गूलर के रस के साथ खाने से प्रौढ़ पुरुष भी नवयुवकों की तरह मैथुन शक्ति प्राप्त कर सकता है।
• 5 ग्राम विदारीकन्द को पीसकर लुगदी बना लें। इसे खाकर ऊपर से 5 ग्राम देशी घी और मिस्री मिलाकर, दूध के साथ पियें। यह बल और वीर्य को बढ़ाता है तथा इससे नपुंसकता दूर होती है।
19. सूखे सिंघाड़े: सूखे सिंघाड़े को कूट पीसकर घी और चीनी के साथ हलवा बनाकर खाने से कुछ ही हफ्ते में नपुंसकता ख़त्म हो जाती है।
20. तरबूज़: तरबूज़ के बीजों की गिरी 6 ग्राम, मिस्री 6 ग्राम मिलाकर, चबाकर खाने से और ऊपर से दूध पीने से शरीर में शक्ति विकसित होने से नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।
21. गेंदे के बीज: गेंदे के बीज 4 ग्राम और मिस्री 4 ग्राम को पीसकर कुछ दिनों तक खाने से वीर्य स्तंभन शक्ति का विकास होता है।
22. कैथ: कैथ के सूखे पत्तों का चूर्ण 6 ग्राम रोज़ खाकर ऊपर से मिस्री मिलाकर, दूध पीने से धातु (वीर्य) बढ़ता है।
23. उड़द:
• उड़द की दाल 40 ग्राम को पीसकर शहद और घी में मिलाकर खाने से पुरुष कुछ दिनों में ही मैथुन (संभोग) करने के लायक बन जाता है।
• उड़द की दाल 40 ग्राम को पीसकर शहद और घी में मिलाकर खाने से पुरुष कुछ दिनों में ही मैथुन (संभोग) करने के लायक बन जाता है।
• उड़द की दाल के थोड़े से लड्डू बना लें। उसमें से 2-2 लड्डू खायें और ऊपर से दूध पी लें। इससे नपुंसकता दूर होती है।
24. इमली: इमली के बीजों को भून लें, फिर उनके छिलके अलग करके, उनका चूर्ण बनाकर रोज़ 3 ग्राम चूर्ण मिस्री के साथ खाने से वीर्य शक्ति बढ़ने लगती है और नपुंसकता दूर हो जाती है।
25. तुलसी:
• तुलसी की जड़ और ज़मीकन्द को पान में रखकर खाने से शीघ्रपतन की विकृति खत्म होती है।
• धातु दुर्बलता में तुलसी के बीज 1 ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से लाभ मिलता है।
• तुलसी के बीज या तुलसी की जड़ के चूर्ण में पुराना गुड़ समान मात्रा में मिलाकर 3-3 ग्राम की गोली बना लें। इसकी 1-1 गोली सुबह-शाम गाय के ताजे दूध के साथ लेते रहें। इससे नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।
• तुलसी की मंजरी या जड़ के 1 से 3 ग्राम बारीक चूर्ण में गुड़ मिलाकर ताजे दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है।
26. गंधक: गंधक और शहद को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को शिश्न (लिंग) पर लेप करें। इससे वीर्य स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है।
27. काली मूसली:
• काली मूसली का पाक बनाकर खाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
• काली मूसली 10 ग्राम की मात्रा में लेकर दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
• काली मूसली की जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम मिस्री मिले, हल्के गर्म दूध के साथ खाने से नपुंसकता में कुछ हद तक लाभ होता है।
28. काले तिल: काले तिल, सोंठ, पीपल, मिर्च, भारंगी और गुड़ समान मात्रा में मिलाकर काढ़ा बनायें। इस काढ़े को 21 दिनों तक पीने से शरीर की गर्मी बढ़ती है।
29. जावित्री: जावित्री डेढ़ ग्राम, जायफल 10 ग्राम, बड़ी इलायची 10 ग्राम और अफीम आधा ग्राम को मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इसके 2 ग्राम चूर्ण को शहद में मिलाकर सर्दियों में लगभग एक महीने तक खाने से नपुंसकता मिट जाती है। याद रहे, अफ़ीम नशाआवर है।
30. ग्वारपाठा: ग्वारपाठे का गूदा और गेहूं का आटा बराबर मात्रा में लेकर घी मिला लें। फिर इसके दुगुने वज़न के बराबर शक्कर (चीनी) लेकर हलुआ बनाकर खाने से 7 दिन में नपुंसकता दूर होती है।
31. गुलाबजल: 3 बोतल गुलाबजल में 10 ग्राम सोने का बुरादा डालकर कूटकर मिला लें। जब सब गुलाबजल उसमें समा जायें, तब निकालकर रख लें। लगभग आधा ग्राम मलाई में मिलाकर खाने से सहवास करने से जल्दी ही वीर्य पतन नहीं होता है।
32. अगर का चोया: अगर का चोया, पान में मिलाकर खाने से नामर्दी में लाभ होता है।
33. घी : सहवास से 1 घण्टा पहले शिश्न पर लगभग 1 ग्राम के चौथे भाग घी की मालिश करने से नपुंसकता नहीं रहती है।
34. मालकांगनी:
• मालकांगनी के तेल की 10 बूंदे नागबेल के पान पर लगाकर खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
नोट : औषधि खाने के साथ दूध और घी का प्रयोग ज्यादा करें।
• मांलकांगनी के बीजों को खीर में मिलाकर खाने से नपुंसकता मिट जाती है।
• मालकांगनी के दाने 50 ग्राम और 25 ग्राम शक्कर (शुगर) को आधा किलो गाय के दूध में डालकर आग पर चढ़ा दें। जब दूध का खोया बन जाए, तब उतारकर मोटी - मोटी गोली बनाकर रख लें और रोज़ 1 - 1 गोली सुबह - शाम गाय के दूध के साथ खायें। इससे नपुंसकता दूर होती है।
35. बड़ी कटेरी: बड़ी कटेरी की 25 ग्राम ताजी जड़ की छाल को गाय के दूध में उबालकर पीने से नपुंसकता मिट जाती है।
नोट : खटाई और बादीयुक्त समान ना खाऐं।
36. कलौंजी: कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नामर्दी मिट जाती है।
37. जदवार: जदवार 2 ग्राम खाने से काम शक्ति (संभोग) बढ़ती है।
38. जवासीद: जवासीद की गोंद को अकरकरा के साथ पीसकर तिल के तेल में मिलाकर लिंग पर लेप करने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर होती है।
39. धतूरा: धतूरे के बीज, अकरकरा और लौंग बराबर मात्रा में पीसकर चने के बराबर गोलियां बनाकर रोज सुबह-शाम 1-1 गोली का सेवन करें।
40. बहेड़े: बहेड़े का चूर्ण 6 ग्राम, 6 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर रोज़ खाने से नपुंसकता (नामर्दी) दूर हो जाती है।
41. महुआ: महुए के 25 ग्राम फूलों को 250 मिली लीटर दूध में उबालकर पीने से कमजोरी की नपुंसकता (नामर्दी) मिट जाती है।
42. सेमर: सेमर की छोटी जड़ों को छाया में सुखाकर पका दें। पकाने के बाद इसकी जड़ों को खाने से नपुसंकता (नामर्दी) दूर होती है।
43. सुहागा: सुहागा, कूट और मैनसिल को बराबर मिलाकर चूर्ण बनाकर चमेली के रस और तिल के तेल में पकाकर लिंग पर मलें। इससे लिंग का टेढ़ापन दूर होता है।
44. गोरखमुण्डी:
• गोरखमुण्डी 75 ग्राम कूट छानकर इसमें 75 ग्राम खांड़ मिला लें। 10 ग्राम दवा सोते समय गर्म गर्म खांड़ मिले दूध के साथ लें।
• गोरखमुण्डी के फूलों के चूर्ण को नीम के रस के साथ लेने से नपुंसकता (नामर्दी) में लाभ होता है।
45. कुलिंजन: लगभग 2 ग्राम कुलिंजन के चूर्ण को 10 ग्राम शहद में मिलाकर खाने से और ऊपर से गाय के दूध में शहद को मिलाकर पीने से काम शक्ति बढ़ती है।
46. असगन्ध: 10 ग्राम असगन्ध नागौरी के बारीक चूर्ण को गाय के 500 मिली लीटर दूध में उबालें। जब 400 मिली लीटर दूध रह जाऐ, तब उसमें शहद मिलाकर 40 दिन तक पिऐं। इससे काम शक्ति बढ़ती है।
47. दालचीनी: दालचीनी 75 ग्राम कूटकर छान लें। 5 ग्राम को पानी में पीसकर सोते समय लिंग पर सुपारी (लिंग का अगला हिस्से) को छोड़कर लेप करें और 2 - 2 ग्राम को सुबह - शाम दूध के साथ सेवन करने से नपुंसकता (नामर्दी) में आराम मिलता है।
48. सीम्बल: सीम्बल की जड़ 100 ग्राम कूट छानकर 5 - 5 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम प्रयोग करने से नपुंसकता (नामर्दी) में आराम मिलता है।
49. मल्ल सिंदूर: मल्ल सिंदूर एक ग्राम का चौथा भाग, शहद और अदरक के रस को सुबह-शाम लें। इससे हस्तमैथुन से हुई नामर्दी दूर हो जाती है।
50. हल्दी: हल्दी और कपूर 10 - 10 ग्राम पीस लें, फिर 5 ग्राम को खुराक के रूप में सुबह-शाम दूध के साथ लेना चाहिए।
51. चनसूर: चनसूर 10 ग्राम को दूध में उबालकर मिस्री के साथ सुबह-शाम खाऐं। इससे संभोग की शक्ति बढ़ जाती है।
52. कुलिजंन: कुलिजंन को मुंह में रखकर चूसते रहने से भी काम शक्ति में वृद्धि होती है।
53. उशवा: जंगली उशवा के चूर्ण में 10 ग्राम का काढ़ा बनाकर रोज़ 1 मात्रा पीते रहने से नपुंसकता दूर होती है।
54. छोटी माई: छोटी माई की दाल का चूर्ण 5 ग्राम से 10 ग्राम का काढ़ा बनाकर तैयार कर रोज़ 2 बार सेवन करने से लाभ होता है।
55. पटुओक (सन): पटुओक (सन) के बीज का तेल खाने कें काम में आता है। जिससे शरीर हुष्ट पुष्ट होता है, कामोत्तेजना बढ़ती है। इस तेल की मालिश से चोट मोच का दर्द भी जल्दी ठीक होता है।
56. लहसुन:
• नपुंसकता और कामशक्ति में कमजोरी आने पर 60 ग्राम लहसुन की कली को घी में तलकर रोजाना खाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
• लहसुन की एक पुतिया घी में भूनकर शहद मे साथ खाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
• रोज़ लगभग 20 दिन तक 4 - 5 लहसुन की कलियां दूध के साथ खाने से नपुंसकता में लाभ होता है।
57. प्याज़:
• प्याज़ के रस में घी और शहद मिला कर खाने से नपुंसकता दूर होती है। प्याज़ का रस 10 से 20 मिली लीटर रोज सुबह - शाम लें।
• प्याज़ के हिस्से का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम मिस्री मिले, दूध के साथ सुबह-शाम प्रयोग करने से कामोत्तेजना की वृद्धि होती है।
58. जबाद कस्तूरी: जबाद कस्तूरी शिश्न यानी लिंग पर लेप करने से संभोग करने में ज्यादा आनन्द मिलता है। मगर इससे गर्भधारण नहीं होता है।
59. अगर: अगर का पुराना सेंट 1 से 2 बूंद को पान में डालकर खाने से बाजीकरण होता है और नपुंसकता दूर होती है।
60. छोटी इलायची: बाजीकरण के लिए छोटी इलायची का चूर्ण लगभग आधे से दो ग्राम तक सुबह - शाम खाऐं या मिस्री मिले गर्म - गर्म दूध के साथ रोज़ रात को सोने से पहले खाऐं।
61. केवटी मोथा: केवटी मोथा के बीज 10 ग्राम पीसकर, मिस्री मिले गर्म गाय के दूध के साथ रोज़ शाम को पीने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
62. फरहद: सफेद फूल वाले फरहद की जड़ पीसकर 5 से 10 ग्राम को ठंडे दूध के साथ सुबह शाम पिलाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
63. सहजना (मुनगा): सहजना के फूलों को दूध में उबाल कर रोज़ रात को मिस्री मिलाकर पीने से नपुंसकता की बीमारी दूर होकर लाभ होता है।
64. गुंजा (करजनी): गुंजा (करजनी) की जड़ 2 ग्राम दूध में पकाकर भोजन से पहले रोज़ रात में खाने से पूरा लाभ होता है। वीर्य सम्बन्धी समस्त दोष दूर होते हैं।
65. केवांच (कपिकच्छू): केवांच (कपिकच्छू) के बीजों के बीच का हिस्सा का चूर्ण 2 से 6 ग्राम रोज़ रात को सोते समय मिस्री मिले गर्म दूध के साथ पीने से लाभदायक होता है।
66. अतिबला: अतिबला के बीज 4 से 8 ग्राम सुबह शाम मिस्री मिले गर्म दूध के साथ खाने से नपुंसकता में पूरा लाभ होता है।
67. पटेरा: पटेरा (एरफा) के फूल 3 से 6 ग्राम को घोंटकर पीसकर सुबह - शाम मिस्री मिले दूध के साथ खाने से वीर्य बढ़ता है।
68. जमालगोटा: जमालगोटा के तेल को लिंग के ऊपर लगाने से लाभ मिलता है।
69. तालमखाना: नपुंसकता को दूर करने के लियें तालमखाना के बीज का चूर्ण, 2 से 4 ग्राम केवाचं के बीज के साथ मिस्री मिले ताजे निकाले दूध के साथ सुबह - शाम पीने से लाभ होता है।
70. भंगरैया: भंगरैया के बीज मिस्री मिले गर्म दूध में डालकर दूध सेवन करने से नपुंसकता दूर होती है।
71. मधुरसा: मधुरसा की जड़ का रस 5 ग्राम से 10 ग्राम सुबह - शाम शहद के साथ खाने से शरीर मज़बूत बनाता है और कामोत्तेजना भी बढ़ती है।
72. विष्णुकान्ता: विष्णुकान्ता का रस 20 से 40 मिली लीटर या काढ़ा 40 से 80 मिली लीटर तक सुबह - शाम खाने से पूयमेह, शुक्र मेह, दुर्बल्यता (कमजोरी) आदि कष्ट दूर हो जाते है।
73. वनतुलसी: वनतुलसी के बीज 3 से 7 ग्राम लेकर मिस्री मिले गाय के दूध से लेने से लाभ होता है।
74. बड़ (बरगद):
• बड़ (बरगद) का दूध 20 से 30 बूंद रोज़ सवेरे बताशे या चीनी पर डालकर खाने से पुरुषत्व शक्ति बढ़ती है।
• नपुंसकता दूर करने के लिए बताशे में दूध की 5 -10 बूंदें सुबह - शाम रोज खाने से लाभ होता हैं।
• बरगद के पेड़ की कोंपले और गूलर के पेड़ की छाल 3 - 3 ग्राम और मिस्री 6 ग्राम इन सबको पीसकर लुगदी सी बना लें और 3 बार मुंह में रखकर खालें और ऊपर से 250 मिली लीटर दूध पी लें। 40 दिन तक खाने से वीर्य बढ़ता है और संभोग से ख़त्म शक्ति बढ़ती है।
75. सिरिस:
• सिरिस के फूलों का रस 20 से 40 मिली लीटर की मात्रा में सुबह - शाम मिस्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ होगा और इससे शीघ्रपतन में भी लाभ होगा।
• सिरिस के बीज का चूर्ण 1 से 2 ग्राम को मिस्री मिले दूध के साथ सुबह - शाम लेने से वीर्य गाढ़ा होता है।
• सिरिस की छाल का चूर्ण 3 से 6 ग्राम घी में शक्कर मिलाकर गर्म दूध के साथ 2 बार खाऐं। अगर फूलों का रस, बीज का चूर्ण और छाल का चूर्ण एक साथ मिस्री मिले दूध के साथ खाया जाए, तो शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है।
• सिरस के थोड़े से बीज सुखाकर पीस लें। इसमें 3 ग्राम चूर्ण सुबह - शाम दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
76. मुनक्का: नपुंसक व्यक्ति को मुनक्का खाने से वीर्य की वृद्धि होती है।
77. ज्वार: ज्वार को अपने खाने के रूप में लेने से नपुंसकता दूर होती है।
78. कलम्बी: कलम्बी का साग रोज खाने से वीर्य बढ़ता है।
79. चौपतिया साग: चौपतिया साग नपुंसकों के लियें फायदेमन्द है। क्योंकि इसमें वीर्य को बढ़ाने का गुण होता है।
80. भूईछत्ता: भूईछत्ता को शक्कर (शुगर) मिले दूध में बराबर रूप से उबाल कर खाने से काम शक्ति और शारीरिक शक्ति दोनों बढ़ती है।
81. रोहू मछली: रोहू मछली वीर्यवर्द्धक होता है। इसलियें नपुंसकों के लियें अनुकूल खाद्य है। हिलसा मछली भी रोहू की तरह वीर्य वर्धक होती है।
82. अंबर: नपुंसकता में अंबर आधा से एक ग्राम सुबह - शाम मिस्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
83. उटंगन: उटंगन के बीज, जो चपटे और रोमाच्छादित होते हैं, पानी में भिगोनें पर काफी लुआबदार हो जाते हैं। इनको शतावरी, कौंच बीच चूर्ण आदि के साथ सुबह शाम मिस्री मिले गर्म - गर्म दूध के साथ सेवन करने से काफी लाभ होता है।
84. बहमन सफेद-बहमन सफेद या बहमन सुर्ख की जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह और शाम मिस्री को मिलाकर गर्म-गर्म दूध से खाने से कामोद्दीपन होता है।
85. ब्रहमदण्डी: ब्रहमदण्डी का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह शाम शहद के साथ सुबह-शाम खाने से पुरुषत्व शक्ति बढ़ती है।
86. सालव मिस्री: सालव मिस्री का कनद चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह-शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है।
87. हरमल: हरमल के बीज का चूर्ण 2 से 4 ग्राम मिस्री को मिलाकर गर्म - गर्म दूध के साथ सुबह-शाम लेने से लाभ होता है।
88. आम:
• आम की मंजरी 5 ग्राम की मात्रा में सुखाकर दूध के साथ लेने से काम शक्ति बढ़ती है।
• 2 - 3 महीने आम का रस पीने से ताक़त आती है। शरीर की कमजोरी दूर होती है और शरीर मोटा होता है। इससे वात संस्थान (नर्वस सिस्टम) भी ठीक हो जाता है।
89. अनार: रोज़ मीठे अनार के 100 ग्राम दानों को दोपहर के समय खाने से संभोग शक्ति बढ़ाती है।
90. पिप्पली: पिप्पली, उड़द, लाल चावल, जौ, गेहूं। सब को 100 - 100 ग्राम की मात्रा में लेकर आटा पीसकर फिर इसको देशी घी में पूरियां बनाकर, रोज़ 3 पूरियां 40 दिन तक खाऐं। ऊपर से दूध पी लें। इससे नपुंसकता दूर हो जाती है।
91. आंवला: आंवलों का रस निकाल कर एक चम्मच आंवले के चूर्ण में मिलाकर लें। उसमें थोड़ी सी शक्कर (चीनी) और शहद मिलाकर घी के साथ सुबह-शाम खाऐं।
92. अरण्ड: अरण्ड के बीज 5 ग्राम, पुराना गुड़ 10 ग्राम, तिल 5 ग्राम, बिनौले की गिरी 5 ग्राम, कूट 2 ग्राम, जायफल 2 ग्राम, जावित्री 2 ग्राम तथा अकरकरा 2 ग्राम। इन सबको कूट - पीसकर एक साफ कपड़े में रखकर, पोटली बना लें और इस पोटली को बकरी के दूध में उबालें। दूध जब अच्छी तरह पक जायें, तो इसे ठंड़ा करके 5 दिन तक पियें तथा पोटली से शिश्नि की सिंकाई करें।
93. मुलेठी: मुलेठी, विदारीकन्द, तज, लौग, गोखरू, गिलोय और मूसली। सब चीजे 10 - 10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण रोज 40 दिन तक सेवन करें।
94. नागौरी असगंध: नागौरी असगंध और विधारा। दोनों 250 - 250 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 2 चम्मच चूर्ण देसी घी या शहद के साथ लें।
95. सालम मिस्री: सालम मिस्री, तोदरी सफेद, कौंच के बीजों की मींगी, ताल मखाना, सखाली के बीज, सफेद व काली मूसली, शतावर तथा बहमन लाल। इन सबका 10 - 10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट पीस लें और चूर्ण बना लें। 2 चम्मच रोज़ दूध से 40 दिन तक बराबर खाने से पूरा लाभ होता है।
96. नारियल: नारियल कामोत्तेजक है। वीर्य को गाढ़ा करता है।
97. चिलगोजे: 15 चिलगोजे रोज़ खाने से नपुंसकता दूर होती है।
98. शहद: शहद और दूध को मिलाकर पीने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है। शरीर बलवान होता है।
99. गेहूं: अंकुरित गेहूंओं को बिना पकायें ही खाऐं। स्वाद के लिए गुड़ या किशमिश मिलाकर खा सकते हैं। इन अंकुरित गेहूंओं में विटामिन ´ई` मिलता है। यह नपुंसकता और बांझपन में लाभकारी है।
100. पिस्ता: पिस्ता में विटामिन `ई´ बहुत होता है। विटामिन `ई´ से वीर्य बढ़ता है।
101. सफेद कनेर: सफेद कनेर की जड़ की छाल बारीक पीसकर भटकटैया के रस में खरल करके 21 दिन इन्द्री की सुपारी छोड़कर लेप करने से तेजी आ जाती है।
102. आक: किसी कपड़े को आक के दूध में चौबीस घंटे तक भिगोकर रखा रहने दें, उसके बाद निकालकर सुखा लें। फिर उस पर घी लपेट कर 2 बत्तियां बना लें और उसको लोहे की सलाई पर रखे। नीचे एक कांसे की थाली रख दे और बत्तियां जला दें, जो तेल नीचे थाली पर गिरेगा। उसे लिंग पर सुपारी छोड़ कर पूरे पर मलते रहें। आधा घंटे तक, उसके बाद एरण्ड का पत्ता लपेट कर ऊपर से कच्चा धागा बांध दें। इससे हस्तमैथुन का दोष दूर हो जाता है।
103. लौंग: लौंग 8 ग्राम, जायफल 12 ग्राम, अफीम शुद्ध 16 ग्राम, कस्तूरी लगभग आधा ग्राम, इनको कूट पीसकर शहद में मिलाकर आधे आधे ग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। 1 गोली बंगला पान में रखकर खाने से स्तम्भन होता है। अगर स्तम्भन ज्यादा हो जाऐ, तो खटाई खा ले। स्खलन हो जायेगा।
104. चमेली: चमेली के पत्तों का रस तिल के तेल की बराबर की मात्रा में मिलाकर आग पर पकाएं। जब पानी उड़ जाए और केवल तेल शेष रह जाए, तो इस तेल की मालिश शिश्न पर सुबह - शाम प्रतिदिन करना चाहिए। इससे नपुंसकता और शीघ्रपतन नष्ट हो जाता है।
105. ढाक: ढाक की जड़ का काढ़ा आधा कप की मात्रा दिन में 2 बार पीने से, बीज का तेल शिश्न पर मुण्ड छोड़कर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में लाभ मिलता है।
106. हींग: हींग को शहद के साथ पीसकर शिश्न या लिंग पर लेप करने से वीर्य ज्यादा देर तक रुकता है और संभोग करने में आंनद मिलता है।
107. मालकांगनी: मालकांगनी के तेल को पान के पत्ते पर लगा कर रात में शिशन (लिंग) पर लपेटकर सो जाऐं और 2 ग्राम बीजों को दूध की खीर के साथ सुबह - शाम सेवन करने से लाभ मिलता है।
108. आक:
• छुआरों के अन्दर की गुठली निकाल कर उनमें आक का दूध भर दे, फिर इनके ऊपर आटा लपेट कर पकायें, ऊपर का आटा जल जाने पर छुआरों को पीसकर मटर जैसी गोलियां बना लें, रात्रि के समय 1 - 2 गोली खाकर तथा दूध पीने से स्तम्भन होता है।
• आक की छाया सूखी जड़ के 20 ग्राम चूर्ण को 500 मिली लीटर दूध में उबालकर दही जमाकर घी तैयार करें, इसके सेवन से नामर्दी दूर होती है।
• आक का दूध असली मधु और गाय का घी, समभाग 4 - 5 घंटे खरल कर शीशी में भरकर रख लें, इन्द्री की सीवन और सुपारी को बचाकर इसकी धीरे धीरे मालिश करें और ऊपर से खाने का पान और एरण्ड का पत्ता बांध दें, इस प्रकार सात दिन मालिश करें। फिर 15 दिन छोड़कर पुन: मालिश करने से शिश्न के समस्त रोंगों में लाभ होता है।
109. मुलहठी: मुलहठी का पीसा हुआ चूर्ण 10 ग्राम, घी और शहद में मिलाकर चाटने से और ऊपर से मिस्री मिले गर्म गर्म दूध पीने से नपुंसकता में लाभ होता है।
110. जटामांसी–जटामांसी, सोठ, जायफल और लौंग। सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें। 1 - 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार खाऐं।
111. काकड़ासिंगी: आधा चम्मच काकड़ासिंगी कोष का बारीक चूर्ण एक कप दूध के साथ सुबह - शाम सेवन कराते रहने से कुछ हफ्ते में नपुंसकता में पूरा लाभ मिलेगा।
112. कलौंजी: कलौंजी के तेल को शिश्न व कमर पर नियमित रूप से सुबह - शाम कुछ हफ्तों तक मालिश करते रहने से यह रोग दूर हो जायेगा।
113. कनेर–सफेद कनेर की 10 ग्राम जड़ को पीसकर 20 ग्राम वनस्पति घी में पकायें। फिर ठंड़ा करके जमने पर इसे शिश्न पर सुबह - शाम लगाने से नपुंसकता में आराम मिलता है।
114. पान:
• रोगी के लिंग पर पान के पत्ते बांधने से और पान के पत्ते पर मालकांगनी का तेल 10 बूंद लगाकर दिन में 2 से 3 बार कुछ दिन खाने से नपुंसकता दूर होती है। इस प्रयोग के दौरान दूध, घी का अधिक मात्रा में सेवन जारी रखें।
• ध्वज भंग रोग में पान को चबाने से और रोगी के लिंग पर बांधने से लाभ होता है।
115. कपूर–घी में कपूर को घिसकर शिशन (पेनिस) के ऊपर मालिश करें। प्रयोग रोज़ कुछ हफ्ते तक करें।
116. अजवाइन: तीन ग्राम अजवायन को सफेद प्याज़ के रस 10 मिली लीटर में तीन बार 10 - 10 ग्राम शक्कर मिलाकर सेवन करें। 21 दिन में पूर्ण लाभ होता है। इस प्रयोग से नपुंसकता, शीघ्रपतन व शुक्राणु अल्पता के रोग में भी लाभ होता है।
117. अकरकरा:
• अकरकरा का बारीक चूर्ण शहद में मिलाकर शिश्न पर लेप करके रोजाना पान के पत्ते से लपेट रखने से शैथिल्यता दूर होकर वीर्य बढेगा।
• अकरकरा 2 ग्राम, जंगली प्याज़ 10 ग्राम इन दोनों को पीसकर लिंग पर मलने से इन्द्री कठोर हो जाती है। 11 या 21 दिन तक यह प्रयोग करना चाहिए।
118. सरसों का तेल: नपुंसकता दूर करने के लिए कटुपर्णी की एक ग्राम छाल तथा बरगद का दूध दोनों को गर्म कर चने के बराबर गोलियां बनाकर चौदह दिन तक पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से नपुंसकता दूर होती है।
119. कुचला–शोधित कुचला लगभग एक चौथाई से आधे ग्राम सुबह - शाम मिस्री मिले गर्म गर्म दूध के साथ पीने से हस्तमैथुन या ज्यादा मैथुन से हुई नामर्दी दूर हो जाती है।
120 कुलंजन–एक कप दूध मे एक चम्मच कुलंजन के चूर्ण को मिलाकर सुबह शाम पिया जाए, तो नपुंसकता दूर होती है।
121. तिल:
• तिल और गोखरू दूध में उबालकर पीने से धातु स्राव बन्द हो जाता है और नामर्दी दूर हो जाती है।
• तिल और अलसी का 100 मिली लीटर काढ़ा सुबह और शाम भोजन से पहले पिलाने से मर्दाना ताकत बढ़ती है।
• तिल का चूर्ण 10 ग्राम से 20 ग्राम रोजाना 2 बार खाने से पुरुषत्व (सहवास) शक्ति की बढ़ती है।
122. अश्वगंधा:
• अश्वगंधा का कपड़े से छना चूर्ण और खांड़ को बराबर मात्रा मे मिलाकर रखें, इसको एक चम्मच गाय के ताजे दूध के साथ सुबह भोजन से 3 घण्टे पहले चुटकी चुटकी चूर्ण खायें और ऊपर से दूध पीते रहें। रात के समय इसके बारीक चूर्ण को चमेली के तेल में अच्छी तरह घोंटकर लगाने से इन्द्रिय की शिथिलता दूर होकर कठोर और दृढ़ हो जाती है।
• अश्वगंधा, दालचीनी और कडुवा कूठ समभाग कूटकर छान लें और गाय के मक्खन में मिलाकर 5-10 ग्राम की मात्रा सुबह - शाम सुपारी छोड़ शेष लिंग पर मलें, इसको मलने के पहले और बाद में लिंग को गर्म पानी से धो लें।
• असगंध के चूर्ण में शहद, घी और मिस्री को मिलाकर सुबह के समय खाने से कुछ महीनो में ही नपुंसकता (नामर्दी) खत्म हो जाती है।
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पुरुषों की कमजोरी को जड़ से मिटाने के देसी तरीके
THURSDAY, 28 APRIL 2016

★ पुरुषों की कमजोरी को जड़ से मिटाने के देसी तरीके ★
1. तालमखाना (Talmakhana)-अधिकतर धान के खेतों में पाया जाने वाला तालमखाना लैटिन भाषा में एस्टरकैन्था-लोंगिफोलिया (Asteracantha Longifolia) कहलाता है। रोजाना सुबह और शाम लगभग 3-3 ग्राम तालमखाना के बीज दूध के साथ लेने से वीर्य गाढ़ा होता है और शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, शुक्राणुओं की कमी आदि रोगों से छुटकारा मिलता है। www.allayurvedic.org
2. गोखरू (Gokhru)-गोखरू का फल कांटेदार होता है और औषधि के रूप में काम आता है। बारिश के मौसम में यह हर जगह पर पाया जाता है। नपुंसकता रोग में गोखरू के लगभग 10 ग्राम बीजों के चूर्ण में इतने ही काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।
3. मूसली (Musli)-मूसली काली और सफेद दो तरह की होती है। सफेद मूसली काली मूसली से अधिक गुणकारी होती है और वीर्य को गाढ़ा करने वाली होती है। मूसली का 3-3 ग्राम चूर्ण सुबह और शाम दूध के साथ लेने से वीर्य गाढ़ा होता है और शरीर में काम-उत्तेजना की वृद्धि होती है। www.allayurvedic.org
4. उड़द (Urad)- उड़द के लड्डू, उड़द की दाल, दूध में बनाई हुई उड़द की खीर का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोतरी होती है।
5. अन्य उपाय-
See : http://www.allayurvedic.org/2016/04/desi-nuskhe-for-men-power.html
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पुरुषों की कमजोरी को जड़ से मिटाने के देसी तरीके
THURSDAY, 28 APRIL 2016

★ पुरुषों की कमजोरी को जड़ से मिटाने के देसी तरीके ★
1. तालमखाना (Talmakhana)-अधिकतर धान के खेतों में पाया जाने वाला तालमखाना लैटिन भाषा में एस्टरकैन्था-लोंगिफोलिया (Asteracantha Longifolia) कहलाता है। रोजाना सुबह और शाम लगभग 3-3 ग्राम तालमखाना के बीज दूध के साथ लेने से वीर्य गाढ़ा होता है और शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, शुक्राणुओं की कमी आदि रोगों से छुटकारा मिलता है। www.allayurvedic.org
2. गोखरू (Gokhru)-गोखरू का फल कांटेदार होता है और औषधि के रूप में काम आता है। बारिश के मौसम में यह हर जगह पर पाया जाता है। नपुंसकता रोग में गोखरू के लगभग 10 ग्राम बीजों के चूर्ण में इतने ही काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।
3. मूसली (Musli)-मूसली काली और सफेद दो तरह की होती है। सफेद मूसली काली मूसली से अधिक गुणकारी होती है और वीर्य को गाढ़ा करने वाली होती है। मूसली का 3-3 ग्राम चूर्ण सुबह और शाम दूध के साथ लेने से वीर्य गाढ़ा होता है और शरीर में काम-उत्तेजना की वृद्धि होती है। www.allayurvedic.org
4. उड़द (Urad)- उड़द के लड्डू, उड़द की दाल, दूध में बनाई हुई उड़द की खीर का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोतरी होती है।
5. अन्य उपाय-
- (1) वीर्य तथा सेक्स क्षमता में वृद्धि के लिए-पीपल का फल और पीपल की कोमल जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चटनी बना लें। इस 2 चम्मच चटनी को 100 मि.ली. दूध तथा 400 मि.ली. पानी में मिलाकर उसे लगभग चौथाई भाग होने तक पकाएं। फिर उसे छानकर आधा कप सुबह और शाम को पी लें।
- (2) तालमखाने के बीज, चोबचीनी, ढाक का गोंद और मोचरस (सभी 100-100 ग्राम) तथा 250 ग्राम मिश्री को कूटकर चूर्ण बना लें। रोजाना सुबह एक चम्मच चूर्ण में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं। इससे यौन रुपी कमजोरी तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे रोग दूर होते हैं।
See : http://www.allayurvedic.org/2016/04/desi-nuskhe-for-men-power.html
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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।
Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
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स्त्रीत्व की परिभाषा एवं भूमिका
"आधुनिकता की दौड़ में स्त्री को घर में सम्मान न देकर उसे बाहर खदेड़ा जा रहा है और उसके लिए सम्मान खोजा जा रहा है। जिसमें अभी तक के सभी समाज असफल रहे हैं और होते रहेंगे। "
लेखक : Ram bansal
संभवतः स्त्री स्वातंत्र्य के पक्षधर मेरे इस मत से सहमत न होंगे कि स्त्री का स्थान घर के अन्दर होता है। मेरे इस सुविचारित मत के अनेक कारण हैं-
बच्चों का लालन-पालन,
परिवार का स्वास्थ,
आदि आदि.
भारत की परम्परा के अनुसार स्त्रियों के लिए-
पति की मैथुन-संगिनी बनाना,
घर में भोजन पकाना,
परिवार के सदस्यों एवं अतिथियों की सेवा-सुश्रुवा करना
तथा बच्चों को जन्म देना एवं
उनका समुचित लालन-पालन करना,
आदि कार्य निर्धारित थे।
ये सब कार्य सकुशल किये जाने पर स्त्री के लिए 18 घंटे प्रतिदिन की व्यस्तता की मांग करते हैं तथा एक सुसंस्कृत परिवार एवं देश के निर्माण के लिए अनिवार्य हैं। इन्ही के आधार पर स्त्रीत्व को परिभाषित किया जा सकता है तथा उसकी आधुनिक समाज में भूमिका निर्धारित की जा सकती है।
स्त्री का प्रथम एवं अनिवार्य गुण स्वास्थ्य : मैथुन संयोग का परिणाम संतानोत्पत्ति होता है, किन्तु यह सभी समय संभव नहीं होता, स्त्री का ऋतुकाल इसकी अनिवार्यता होती है। इस कार्य में स्त्री के शरीर का महत्व शिशु को केवल जन्म देने के लिए न होकर उसकी निरोगिता एवं उसके पोषण के लिए दूध प्रदान करना भी होता है। इन तीनों गुणकों के लिए यह आवश्यक होता है कि स्त्री पूरी तरह से-शारीरिक एवं मानसिक स्तरों पर-स्वस्थ हो। अतः स्त्री परिभाषा का यह दूसरा अवयव है, जिसका सम्बन्ध स्त्री के सौन्दर्य से भी होता है।
भोजन पकाना तथा उसे सुपात्रों के समक्ष प्रस्तुत करना मानव जीवन की सर्वोच्च कोटि की कला है जो परिवार को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है। इसका जनप्रिय सूत्र है 'मनोयोग से पकाइए तथा प्रेम से खिलाइए' किन्तु भोजन पकाने में मनोयोग के साथ-साथ पाक-कला का भी उतना ही महत्व होता है। भोजन परोसना केवल एक भौतिक क्रिया न होकर एक मानसिक क्रिया भी होती है, जिससे साधारण भोजन का स्वाद एवं पोषण-मान भी बहुगुणित हो जाता है। परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों का स्वास्थ भोजन पर ही निर्भर करता है जो स्वस्थ समाज एवं देश का निर्माण करता है। अतः, स्त्रीत्व परिभाषा का तीसरा अवयव पाक-कला एवं प्रस्तुति सिद्ध होता है, जिसके लिए स्त्री का गृह-स्वामिनी बने रहना आवश्यक होता है।
परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
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Saturday, January 07, 2012
--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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अंकुरित गेहूं-Wheat germ
अंकुरित भोजन-Sprouts
अखरोट
अंगूर-Grapes
अचूक चमत्कारिक चूर्ण
अजवाइन
अजवायन
अजीर्ण-Indigestion
अंडकोष
अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut
अण्डी
अतिबला
अतिसार
अतिसार-Diarrhea
अतृप्त
अतृप्त दाम्पत्य
अत्यंत असहिष्णुता
अदरक
अदरख
अंधश्रृद्धा
अध्ययन
अनिद्रा
अपच
अपराजिता
अपराधबोध
अफरा
अफीम
अमरूद
अमृता
अम्लपित्त-Pyrosis
अरंडी
अरणी
अरण्ड
अरण्डी
अरलू
अरुचि
अरुचि-Anorexia-Distaste
अर्जुन
अर्थराइटिस
अर्द्धसिरशूल
अर्श
अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles
अलसी
अल्टरनेथेरा सेसिलिस
अल्सर
अल्सर-Ulcers
अवसाद
अवसाद-Depression
अश्मःभेदः
अश्वगंधा
अश्वगंधा-Winter Cherry
असंतुष्ट
असफल
असर नहीं
असली
अस्थमा
अस्थमा-दमा-Asthma
आइरन
आक
आकड़ा
आघात
आत्महत्या
आंत्र कृमि
आंत्रकृमि-Helminth
आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever
आदिवासी
आधाशीशी
आधासीसी
आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower
आमला
आमवात
आमाशय
आयुर्वेद
आयुर्वेदिक
आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेदिक औषधियां
आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup
आयुर्वेदिक-Ayurvedic
आरोग्य
आँव
आंव
आंवला
आंवला जूस
आंवला रस
आशावादी-Optimistic
आसन
आसान प्रसव-Easy Delivery
आहार चार्ट
आहार-Food
आॅपरेशन
आॅर्गेनिक
आॅर्गेनिक कौंच
इच्छा-शक्ति
इन्द्रायण
इन्फ्लुएंजा
इमर्जेंसी में होम्योपैथी
इमली-Tamarind Tree
इम्युनिटी
इलाज
इलाज का कुल कितना खर्चा
इलायची
उच्च रक्तचाप
उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension
उत्तेजक
उत्तेजना
उदर शूल-Abdominal Haul
उदासी
उन्माद-Mania
उपवास
उम्र
उल्टी
ऊर्जा
एक्जिमा
एक्यूप्रेशर
एग्जिमा
एजिंग-Aging
एंटी ऑक्सीडेंट्स
एंटी-ओक्सिडेंट
एंटीऑक्सीडेंट
एण्टी-आॅक्सीडेंट
एनजाइना
एनीमिया
एमिनो एसिड
एरंड
एलर्जी
एलर्जी-Allergy
एलोवेरा
एलोवेरा जूस
एल्यूमीनियम
ऐंठन
ऐलोपैथ
ऐसीडिटी
ऑर्गेनिक
ओमेगा 3 के स्रोत
ओमेगा-3
ओर्गेनिक
औषध-Drug
औषधि सूची-Drug List
औषधियों के नुकसान-Loss of drugs
कचनार
कचनार-Bauhinia Purpurea
कटुपर्णी
कड़वाहट
कंडोम
कद्दू
कनेर
कपास-COTTON
कपिकच्छू
कपूरीजड़ी
कफ
कब्ज
कब्ज़
कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation
कब्ज. Cucumber
कब्जी
कमजोरी
कमर
कमर दर्द
कमेड़ा
करेला
कर्ण वेदना
कर्णरोग
कष्टार्तव-Dysmenorrhea
कांच निकलना
काजू
कान
कानून सम्मत
काम
काम शक्ति
कामवाण पाउडर
कामशक्ति
कामशक्ति-Sexual power
कामेच्छा
कामोत्तेजना
कायाकल्प
कार्बोहाइड्रेट
कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates
काला जीरा
काला नमक
काली जीरी
काली तुलसी
काली मिर्च
काले निशान
कास-खांसी-Cough
किडनी
किडनी संक्रमण
किडनी स्टोन
कीड़े
कीमोथेरेपी
कुकरौंधा
कुकुंदर
कुटकी-Black Hellebore
कुबडापन
कुमेड़ा
कुल्थी
कुल्ला
कुष्ट
कुष्ठ
कृमि
केला
केसर
कैफीन-Caffeine
कैलोरी
कैलोरी चार्ट
कैलोरी-Calories
कैवांच
कैविटी
कैंसर
कॉफी
कॉफ़ी
कॉलेस्ट्रॉल
कोंडी घास
कोढ़
कोबरा
कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol
कोलेस्ट्रोल
कौंच
कौमार्य
क्रियाशीलता
क्रोध
क्षय रोग-Tuberculosis
क्षारीय तत्व
क्षुधानाश
खजूर
खजूर की चटनी
खनिज
खरबूजा-Musk melon
खरेंटी
खरैंटी शिलाजीत
खाज
खांसी
खिरेंटी
खिरैटी
खीप
खीरा
खुजली
खुशी-Joy
खुश्की
खुश्बू
खोया
गंजापन-Baldness
गठिया
गठिया-Arthritis
गठिया-Gout
गड़तुम्बा
गंडा-ताबीज
गंध
गन्ने का रस
गरमा गरम
गर्भ निरोधक
गर्भधारण
गर्भपात
गर्भवती
गर्भवती कैसे हों?
गर्भावस्था
गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy
गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy
गर्भाशय
गर्भाशय भ्रंश
गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy
गर्म पानी
गर्मी
गर्मी-Heat
गलगण्ड
गाजर
गाजवां
गांठ
गाँठ-Knot
गारंटी
गारण्टेड इलाज
गाल ब्लैडर
गिलोय
गिल्टी
गुड़हल
गुंदा
गुदाद्वार
गुदाभ्रंश
गुम्मा
गुर्दे
गुलज़ाफ़री
गुस्सा
गृध्रसी
गृह-स्वामिनी
गेदुआ की छाछ
गैस
गैस्ट्रिक
गैहूं का जवारा
गोक्षुरादि चूर्ण
गोखरू
गोखरू (LAND CALTROPS)
गोंद कतीरा-Hog-Gum
गोंदी
गोभी-Cabbage
गोरख मुंडी
गोरखगांजा
गोरखबूटी
गोरखमुंडी
ग्रीन-टी
घमोरी
घरेलु नुस्खे
घाघरा
घाव
चकवड़
चक्कर
चपाती
चमत्कारिक सब्जियां
चरित्र
चर्बी
चर्म
चर्म रोग
चर्मरोग
चाय
चाय-Tea
चालीस के पार-Forty Across
चिकनगुनिया
चिकित्सकीय
चिटकन
चिंतित
चिरायता-Absinth
चिरोटा
चुंबन
चोक
चौलाई
छपाकी
छरहरी काया
छाछ
छाजन बूटी
छाले
छींक
छीकें
छुअ
छुआरा
छुहारा
छोटा गोखरू
छोटा धतूरा
छोटी हरड़
जंक फूड
जकवड़
जख्म
जंगली तिल्ली
जंगली तुलसी
जंगली पेड़
जंगली मिर्ची
जंगली-कटीली चौलाई
जटामांसी-Spikenard
जलजमनी
जलन
जलोदर रोग-Ascites Disease
जवारा
जवारे
जवासा-Alhag
जहर
जामुन का जूस
जायफल
जिगर
जीरा
जीवन रक्षक
जीवनी शक्ति
जुएं
जुकाम
जुदाई
जुलाब
जूएं
जूस
जोड़ों के दर्द
जोड़ों में दर्द
जौ
ज्यूस
ज्योति
ज्वर
ज्वर-Fiver
झाइयाँ
झांईं
झाड़-फूंक
झुर्रियाँ
झुर्रियां
झुर्री
झूठे दर्द
टमाटर का रस
टमाटर-Tomatoes
टाइफाइड
टाटबडंगा
टायफायड
टूटी हड्डी
टॉन्सिल
टोटला
ट्यूमर
ठंड
ठंडापन
ठेकेदार डॉक्टर
डकार
डकारें
डायबिटीज
डायरिया
डिग्री फ़ारेनहाइट
डिग्री सेल्सियस
डिजिसेक्सुअल
डिटॉक्सीफाई
डिटॉक्सीफिकेशन
डिनर
डिप्रेशन
डिब्बाबंद भोजन
डिलेवरी
डीकामाली
डीगामाली
डेंगू
डेंगू-Dengue
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
डॉ. मीणा
ढकार
ढीलापन
ढीली योनि
तकलीफ का सही इलाज
तंत्र-मंत्र
तम्बाकू
तरबूज-Watermelon
तलाक
ताकत
तिल
तिल्ली
तुंबा
तुंबी
तुम्बा
तुलसी
तेल
त्रिदोषनाशक
त्रिफला
त्वचा
त्वचा रोग
थकान
थाईरायड
थायरायड-Thyroid
थायरॉइड
दण्डनीय अपराध
दंत वेदना
दन्तकृमि
दन्तरोग
दमा
दर वेदना
दरार
दर्द
दर्द निवारक
दर्द निवारक दवा
दर्दनाक
दस्त
दही
दाग-धब्बे-Stains-Spots
दाढ़
दांत
दांतो में कैविटी-Teeth Cavity
दाद
दाम्पत्य
दाम्पत्य विवाद सलाहकार
दाम्पत्य-Conjugal
दाल
दालचीनी
दालें
दिमांग
दिल
दीर्घायु
दु:खी
दुर्गंध
दुर्बलता
दुष्प्रभाव
दुष्प्रभावरहित
दूध
दूध वृद्धि
दूधी
दूधी-Milk Hedge
दृष्टिदोष
दो मन
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द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes
धड़कन
धनिया बीज
धनिया-Coriander
धमासा
धात
धातु
धातु पतन
धार्मिक
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धैर्यहीन
नज़ला
नपुंसक
नपुंसकता
नाइट्रिक एसिड
नाक
नाखून
नागबला
नागरमोथा
नाडी हिंगु
नाड़ी हिंगु (डिकामाली)
नामर्दी
नारकीय पीड़ा
नारियल
नाश्ता
निमोनिया
निम्न रक्तचाप
निम्बू
नियासिन
निराश
निरोगधाम
निर्गुण्डी
निर्गुन्डी
निष्कपट स्नेह
निष्ठा
निसोरा
नींद
नींबू
नींबू-Lemon
नीम-azadirachta indica
नुस्खे
नुस्खे-Tips
नेगड़
नेत्र रोग
नेुचरल
नैतिक
नॉर्मल डिलेवरी
नोनिया
नौसादर
न्युमोनिया-Pneumonia
न्यूरॉन्स
पक्षघात
पंचकर्म
पढ़ने में मन लगेगा
पंतजलि
पत्तागोभी-CABBAGE
पत्थर फोड़ी
पत्थरचट्टा
पत्नी
पथरी
पदार्थ
पनीर
पपीता
पपीता-CARICA PAPPYA
पमाड
परदेशी लांगड़ी
परम्परागत चिकित्सा
परहेज
पराठा
परामर्श
परिस्थिति
पवाड़
पवाँर
पाइल्स
पाक-कला
पाचक
पाचन
पाचनतंत्र
पाचनशक्ति
पाठक संख्या 16 लाख पार
पाठक संख्या पंद्रह लाख
पायरिया
पारदर्शिता
पारिजात
पालक
पालक-Spinach
पित्त
पित्ताशय
पित्ती
पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne
पिरामिड
पीलिया
पीलिया-Jaundice
पीलिया-कामला-Jaundice
पुआड़
पुदीना
पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava
पुरुष
पुंसत्व
पेचिश
पेट के कीड़े
पेट दर्द
पेट में गैस
पेट रोग
पेड़
पेद दर्द
पेरिकिटो सेसिल
पेशाब
पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
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