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शहद और लहसुन के अनुभवसिद्ध उपयोग (Experienced Uses of Honey and Garlic)

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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आदिम युग से संसारभर के आदिवासी अपनी बीमारियों का प्राकृतिक तरीके से उपचार करते आये हैं। इस ज्ञान को बिना लेखबद्ध किये हजारों सालों तक पीढी दर पीढी आगे बढाया जाता रहा है। कालांतर में इसी ज्ञान को भारत में आयुर्वेद नाम दिया गया और धन्वंतरि को आयुर्वेद का जन्मदाता घोषित कर दिया गया। जिसका लाभ यह हुआ कि जड़ी-बूटियों को लेखबद्ध किया जाने लगा और उनका लाभ वृहद स्तर पर मिलने लगा। जिससे मानवता का बहुत भला हुआ है। यद्यपि अभी भी गोपनीयता या अन्य कारणों से संसार के अनेक आदिवासी कबीलों को प्राप्त जड़ी-बूटियों के ज्ञान की जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पायी है। फिर भी आयुर्वेद के शोधार्थियों ने अपना काम जारी रखकर बहुत सी जड़ी-बूटियों तथा दवाईयों के मिश्रण को मानव जीवन के लिये उपयोगी बनाया है। इसी क्रम में शहद और लहसुन के मिश्रण के कुछ अनुभवसिद्ध नुस्खे जनहित में यहां प्रस्तुत कर रहा हूं:

सामग्री:
1. आॅर्गेनिक लहसुन की मध्यम आकार की 2 कलियां।
2. छोटी मधुमक्खी का शुद्ध जंगली शहद एक चम्मच।

बनाने की विधि:
लहसुन को कलियों को छीलकर, उन्हें हल्‍का सा कुचल/कूट लें और इनको फि‍र शहद में मिला लें। कलियों को शहद में 5 मिनट तक रखी रहने दें, जिससे लहसुन की कलियों में शहद अंदर तक भर जाये।

सेवन विधि:
उक्त कुचली हुई और शहद में डूबी हुई कलियों को प्रतिदिन सुबह खाली पेट चबा-चबाकर खाना चाहिये। ध्यान रहे केवल खाली पेट ही सेवन करना उपयोगी रहेगा।

[@] *नोट: कृपया सम्पूर्ण लेख को ध्यान से पढें और यदि पढ़ने के बाद यदि यह उपयोगी लगे तो जनहित में इसे अन्य लोगों को आगे फॉरवर्ड/शेयर किया जा सकता है!* [@]

सेवन के लाभ:
1. कोलेस्ट्रॉल का दुश्मन (Enemy of Cholesterol): शहद और लहसुन में प्राकृतिक तरीके से कोलेस्ट्रॉल को कम करने के गुण पाये जाते हैं। अत: शहद और लहसुन यह मिश्रण जहां एक ओर कोलेस्ट्रॉल का बनना रोकता है, वहीं दूसरी ओर हमारे हृदय की धमनियों में पहले से जमे हुए कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में भी मददगार सिद्ध होता है।

2. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये (Increase the immunity): जिन लोगों को जरा सा मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम हो जाती है या जिन्हें बार-बार बीमारियां होती ही रहती हैं। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। अत: जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम है, उनको लहसनु एवं शहद के उक्त मिश्रण का विशेषकर सर्दियों में सेवन करना चाहिये।

3. संक्रामक रोधी (Anti-infectious): किसी भी तरह के फंगल संक्रमण से बचाव हेतु शहद और लहसुन के मिश्रण का सेवन लाभकारी है। एंटी बैक्टीरियल एवं एंटी फंगल गुणों से भरपूर (Anti-bacterial and Anti-fungal Properties) यह मिश्रण हमें अनेक प्रकार के इंफेक्शन/संक्रमण से से बचाए रखने में सहायक होता है। लेकिन जिनका पाचनतंत्र ठीक नहीं है, उन्हें सबसे पहले अपनी वाचन प्रणाली को ठीक करना चाहिये।

4. गले की समस्याएं: सर्दियों में होने वाली गले की समस्याएं, जैसे खराश व सूजन आदि में शहद और लहसुन के मिश्रण का उपयोग फायदेमंद रहता है। एंटी इंफ्लेमेटरी (Anti Inflammatory) गुणों से भरपूर होने के कारण यह बहुत लाभकारी सिद्ध हुआ है।


5 सर्दी जुकाम: सर्दी जुकाम से बचने के लिए शहद और लहसुन के इस मिश्रण का प्रयोग फायदेमंद रहता है। तासीर में गर्म होने के कारण यह सर्दी से उत्पन्न होने वाले सभी प्रकार के रोगों से आराम दिलाने में काफी कारगर सिद्ध होता रहा है।—डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', 23.11.2018

स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।
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हमारे आपपास में बहुतायत में पायी जाने पाली त्रिदोषनाशक एक महौषधि द्रोणपुष्पी विषहर है, जो सांप और बिच्छू जहर नाशक है। एक्जिमा (Eczema) एवं एलर्जी सहित चर्मरोगों, विषैले द्रव्य नाशक (Antitoxins), साईनस/Sinus एवं पुराने सिरदर्द से मुक्ति दिलाती है। पुराने, हठी एवं विषम-ज्वर बुखार, सूजन, खांसी-जुकाम और संधिवात नाशक होने के अलावा, यकृत/लीवर रक्षक (Liver Protector), यकृत वृद्धि+तिल्ली वृद्धि (Fatty Liver+Spleen Increase) उपचारक, संक्रमण रोधी (Anti Infective), पीलिया (Jaundice), अनिद्रा (Insomnia), श्वास, दमा, अस्थमा (Asthma) और स्नायविक-विकारों (Neurotic Disorders) सहित अनेक बीमारियों की बहुत अच्छी औषधि है। विस्तार से जानने के लिये निम्न लेख पढा जा सकता है।

आॅर्गेनिक द्रोणपुष्पी
(गुम्मा, तुम्बा, Dronapushpi, Leucas Cephalotes, Gumma, Tumba, Spiderwort) के औषधीय उपयोग (Medicinal Uses)

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

Botanical Name (वानस्पतिक नाम): Leucas Cephalotes
English Name (अंग्रेजी नाम): Spider Wort, Spiderwort
Family (कुल): Lamiaceae (लेमिएसी) or Labiatae
Synonyms(पर्यायवाची):
हिन्दी-गुम्मा, गूमाडलेडोना, गोया, मोरापाती, धुरपीसग;
राजस्थानी-उडापता (Udapata), निडालू कुबी (Nidalu kubi)
संस्कृत-द्रोणपुष्पी, फलेपुष्पा, पालिंदी, कुंभयोनिका, द्रोणा;
कन्नड़-तुम्बे (Thumbai);
गुजराती-दोशिनाकुबो (Doshinokubo), कुबो (Kubo), कुबी (Kubi);
तमिल-कोकरातासिल्टा (Kocaratacilta), नेयप्पीरक्कू (Neyppirkku);
पंजाबी-छत्रा (Chatra), गुल्डोडा (Guldoda), मलडोडा (Maldoda);
मराठी-तुम्बा (Tumba), देवखुम्बा (Devkhumba), शेतवाद (Shetvad);
तेलुगु-पेड्डातुम्नी (Peddatumni), तुम्मी (Tummi) तुम्बई (Thumbai);
बंगाली-घलघसे (Ghalghase), बराहलकसा (Barahalkasa);
मलयालम-तुम्बा (Tumba);
नेपाली-सयपत्री (Syapatri);


संकलन (Collection): सितम्बर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के पहले-दूसरे सप्ताह के दौरान अर्थात बरसात के मौसम की समाप्ति के बाद जैसे ही धूप निकलना शूरू हो तो इसके पौधे को जड़ से उखाड़ कर और छाया शुष्क करके इसका पंचांग बनाया जा सकता है। इसी प्रकार से हरे पत्ते और पकने पर इसके फलों को सुखाकर बीज संग्रहित किये जा सकते हैं। संग्रहित औषधि तत्वों को ठीक से सुखाकर सूखे और हवाबंद डब्बों में सुरक्षित किया जाना चाहिये।

द्रोणपुष्पी का सत बनाने की विधि: द्रोणपुष्पी के रस में दो गुना पानी मिलाकर एक बर्तन में 24 घंटे के लिए स्थिर रख दें। 24 घंटे बाद ऊपर का पानी निथारकर फेंक दें और नीचे बचे हुए अवशेष/Residue को किसी चौड़े बर्तन में फैलाकर छाया में सुखा लें। तीन चार दिन बाद जब यह अवशेष सूख जाये तो इसे संग्रहित करके हवाबंद कांच की बोतल में पैक करके रख लें। इसे ही द्रोणपुष्पी का सत कहते हैं। अनुभवी वैद्यों का मत है कि इसे प्रतिदिन आधा ग्राम की मात्र में लेने से सब प्रकार की व्याधियां समाप्त हो जाती हैं। और अगर कोई व्याधि नहीं भी है, तब भी इसे लेने से व्याधियों से बचे रहते हैं, प्रदूषणजन्य बीमारियों से भी बचाव होता है। अर्थात रोगप्रतिरोधक क्षमता विकसित/मजबूत हो जाती है।

चेतावनी (Warning): यहां प्रस्तुत विवरण केवल जनहित में औषधियों/दवाइयों, मानव स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता बढाने के लिए ही लिखा गया है। पाठक स्वयं अपना इलाज करने का खतरा मोल नहीं लें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]

द्रोणपुष्पी के हानिकारक प्रभाव: ठण्डी प्रकृति के लोगों को द्रोणपुष्पी का अधिक मात्रा में उपयोग हानिकारक हो सकता है।

औषधीय उपयोग (Medicinal Uses): सर्वोत्तम परिणामों हेतु आॅर्गेनिक औषधि का ही उपयोग करें। (Use only organic medicine for best results):-

1-त्रिदोषनाशक: यह उन गिनीचुनी महा औषधियों में शामिल है जो वात, पित्त, कफ तीनों को नष्ट करती हैं।

2-साँप के काटने पर: यह विषहर है। यह हर प्रकार के जहर का असर खत्म करता है। द्रोणपुष्पी के बारे में अनेक लेखकों का मत है कि कितना भी जहरीला साँप क्यों न काटा हो, व्यक्ति को तुरंत द्रोणपुष्पी के पत्ते या टहनी को खिलाना चाहिए या इसके 10 से 15 बून्द रस पिला देना चाहिए। जहर के प्रभाव से यदि व्यक्ति बेहोश हो गया हो तो द्रोणपुष्पी के रस निकाल कर, उसके कान, मुँह और नाक के रास्ते टपका दें। उसकी बेहोशी टूट जायेगी। यदि दंशित व्यक्ति के शरीर में जान बाकी होगी तो निश्चित ही उसकी जान बच जायेगी। होश में आने के बाद उसे 4—5 घंटे तक तक सोन न दें।

3-बिच्छू-दंश: द्रोणपुष्पी के पत्रों को पीसकर बिच्दू दंश स्थान पर बांधने/लगाने से विषाक्त प्रभाव नष्ट हो जाता है।

4-चर्म रोग (Skin diseases): द्रोणपुष्पी एक्जिमा (Eczema) एवं एलर्जी सहित सभी प्रकार की त्वचा सम्बन्धी समस्याओं के उपचार के लिए उपयोगी है। यह रक्तशोधक माना जाता है। यही वजह है कि यदि त्वचा या रक्त सम्बन्धी कोई भी परेशानी है, सांप के जहर का असर है, कोई विषैला कीड़ा काट गया है, या चमड़ी/Skin पर Allopathy/ऐलोपैथी की दवाइयों का दुष्प्रभाव/Reaction हो गया है; तो इसके 5 ग्राम पंचांग में, 3 ग्राम नीम के पत्ते मिलाकर, दो गिलास पानी में उबाल लें। जब आधा गिलास बच जाए तो कुछ दिनों तक रोगी को सुबह—शाम पिलायें। सभी तकलीफों से मुक्ति मिलेगी।

5-विषैले द्रव्य नाशक (Antitoxins): सब्जियों, दूध, जंक फूड, तेल, खाद्य पदार्थों आदि में अस्वास्थ्यकर कीटनाशकों एवं अखाद्य द्रव्यों/पदार्थों की मिलावट के कारण मानव शरीर में अनेक प्रकार के विषैले द्रव्यों, कैमीकल्स/Chemicals, Toxins/विषाक्त पदार्थों आदि का जहर जमा हो जाता है। इनके कारण शरीर में दाद, खाज, खुजली, एलर्जी सहित विभिन्न प्रकार की बाहरी और आंतरिक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। द्रोणपुष्पी के पंचांग/पाउडर का काढ़ा पिलाने से इनका समाधान संभव है। चर्मरोगों और अनेक प्रकार की एलर्जी सम्बन्धी बीमारियों को ठीक करने के लिए द्रोणपुष्पी के सत का भी सेवन किया जा सकता है।

6-साईनस/Sinus या पुराना सिरदर्द: साईनस/Sinus या पुराना सिरदर्द है तो द्रोणपुष्पी के रस में दो गुना पानी मिलाकर चार-चार बूँद नाक में डालें। 3-4 दिन करने से ही आराम मिल जायेगा और जमा हुआ कफ भी बाहर निकल जायेगा।

7-पुराना बुखार (Old Fever): पुराना बुखार जो बार बार आ जाता हो या जाता ही नहीं हो तो द्रोणपुष्पी की दो तीन टहनियों में गिलोय और नीम मिलाकर काढ़ा बनाकर कुछ दिन पिलायें। या दो चम्मच द्रोणपुष्पी के रस के साथ 5 कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर रोगी को पिलाने से बुखार ठीक हो जाता है।

8-विषम-ज्वर (Odd Fever): द्रोणपुष्पी की टहनी को पीस कर पुटली बनाले और उसे बाए हाथ के नाड़ी पर कपड़ा के सहयोग से बाँध दे। इसे रोगी का ज्वर बहुत ही जल्द ठीक हो जाता है। या 5 मिलीलीटर द्रोणपुष्पी पत्र-स्वरस में 1 ग्राम काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से मलेरिया ठीक हो होता है। 10-30 मिलीलीटर पंचांग पाउडर क्वाथ का सेवन करने से विषमज्वर ठीक हो जाता है।

9-यकृत रक्षक (Liver Protector): यदि किसी रोगी का लीवर खराब हो गया हो और काफी समय से ठीक नहीं हो रहा हो। उसका SGOT, SGPT बढा हुआ हो। या रोगी को पीलिया रोग हो रहा हो। तो द्रोणपुष्पी के काढ़े में कुछ दिनों तक 4-5 मुनक्का डालकर मसलकर छानकर पिलायें।

10-यकृत वृद्धि+तिल्ली वृद्धि (Fatty Liver+Spleen Increase): द्रोणपुष्पी की जड़ का चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में 1 ग्राम पीपल के चूर्ण के साथ सुबह-शाम कुछ हफ्ते तक सेवन करने से जिगर बढ़ने का रोग दूर हो जाता है। तिल्ली वृद्धि (Spleen Increase) विकार में भी समान रूप से उपयोगी है।

11-संक्रमण रोधी (Anti Infective): किसी भी प्रकार के संक्रमण/Infection के लिये द्रोणपुष्पी अत्यधिक उपयोगी है। यहां तक कि कैंसर (Cancer) जैसी घातक समस्याओं से लड़ने में भी के लिए द्रोणपुष्पी का ताजा पंचांग या पाउडर, भृंगराज एवं देसी बबूल की पत्तियों का काढ़ा बनाकर नियमित रूप से रोगी को पिलाते रहें। इससे चिकित्सा में जटिलता कम होंगी। मगर कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के निर्देशन में अन्य जरूरी दवाइयों का सेवन भी जारी रखें। उन इवाइयों के साक—साथ भी इसे ले सकते हैं।

12-शोथ (सूजन) (Inflammation): द्रोणपुष्पी और नीम के पत्तों की कौंपलों को पीसकर रोगी के सूजन वाले अंग पर गर्म-गर्म लेप लगाने से सूजन में आराम मिलता है।

13-खांसी-जुकाम (Cough & Cold): द्रोणपुष्पी के 1 चम्मच रस में आधा चम्मच बहेड़े का चूर्ण मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से खांसी दूर हो जाती है। या 5 मिली द्रोणपुष्पी पत्र-स्वरस में समान भाग शहद मिलाकर पीने से खांसी तथा प्रतिश्याय (जुकाम) में आराम मिलता है। द्रोणपुष्पी का रस नाक में 2-2 बूंद डालने से और उसका रस नाक से सूंघने से सर्दी दूर हो जाती है।

14-संधिवात (Rheumatoid Arthritis): ताजा द्रोणपुष्पी पंचांग का क्वाथ या द्रोणपुष्पी पंचांग के पाउडर के 10-30 मिली काढे में 1-2 ग्राम पिप्पली चूर्ण मिलाकर पिलाने से संधिवात में आराम मिलता है। या 10 मिली द्रोणपुष्पी स्वरस में शहद मिलाकर पिलाने से सभी वातविकारों में लाभ होता है।

15-सिरदर्द (Headache): द्रोणपुष्पी का रस 2-2 बूंद की मात्रा में नाक के नथुनों में टपकाने से और द्रोणपुष्पी का रस में 1-2 कालीमिर्च पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द में आराम मिलता है।

16-पीलिया (Jaundice): द्रोणपुष्पी के पत्तों का 1-1 बूंद रस आंखों और नाक में हर रोज सुबह-शाम कुछ समय तक लगातार डालते रहने तथा 5 मिलीलीटर स्वरस में समभाग शहद मिलाकर पीने से पीलिया रोग दूर हो जाता है।

17-श्वास, दमा, अस्थमा (Asthma): द्रोणपुष्पी के सूखे फूल और धतूरे के फूल का छोटा सा भाग मिलाकर धूम्रपान करने से दमे का दौरा रुक जाता है। इसके अलावा द्रोणपुष्पी के पत्र स्वरस समभाग अदरख एवं शहद मिलाकर विधिवत फांट तैयार करें। मात्र 6 माशे दिन में 3 बार रोगी को पिलाने से अस्थमा ठीक हो जाता है।

18-दांतों का दर्द (Toothache): द्रोणपुष्पी का रस, समुद्रफेन, शहद तथा तिल के तेल को मिलाकर कान में डालने से दांतों के कीड़े नष्ट हो जाते हैं तथा दांतों का दर्द ठीक होता है।

19-सूखा रोग: सुखा रोग ख़ास कर छोटे बच्चों को होता है। द्रोणपुष्पी की टहनी या पत्तों को पीस कर शुद्ध घी में आग पर पक्का लें और ठंडा होने के बाद इस घी से बच्चे के शरीर पर मालिश करें। इस से बच्चों का सूखा रोग बहुत ही जल्द दूर हो जाता है।

20-अनिद्रा (Insomnia): मात्र 10-20 मिली द्रोणपुष्पी बीज के क्वाथ का सेवन करने से अच्छी नींद आती है।

21-स्नायविक-विकार (Neurotic disorder): द्रोणपुष्पी पत्र-क्वाथ का सेवन करने से स्नायविक विकारों में अराम होता है।

वयस्कों के लिये दवाई की मात्रा: चिकित्सक के परामर्शानुसार ही सेवन करें।

पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल तथा फल) का चूर्ण/पाउडर: 5 से 10 ग्राम।
पत्तों का रस: 10 से 20 मिलीलीटर।
पंचांग क्वाथ: 10-30 मिली।


ऑर्गेनिक औषधि अधिक प्रभावी (Organic Herb More Effective): भारत सरकार की कृषि नीति किसानों के हित में नहीं होने के कारण किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। जो किसानों की दुर्दशा का मूल कारण रहा है। इस कारण किसी भी तरीके से किसान अधिकतम उपज चाहता है। अत: किसानों द्वारा उपज बढाने के लिये अस्वास्थ्यकर रासायनिक उर्वरकों/खादों एवं कीटनाशकों का अधिकाधिक प्रयोग किया जाता है। (Therefore, more and more unhealthy chemical fertilizers and pesticides are used to increase yield by farmers) जिसके कारण फसल के साथ-साथ खेतों में उगने वाली वनौषधियां (Herbal Remedies) भी अप्रभावी या विषैली/विषाक्त) (Ineffective or Toxic) हो जाती हैं। जिनका औषधीय प्रयोग (Medicinal Use) करने से वांछित उपचारात्मक परिणाम (Desired Remedial Results) नहीं मिल पाते हैं। अत: उपज कम और लागत अधिक होने के बावजूद रोगियों के इलाज हेतु जैविक/ऑर्गेनिक/कार्बनिक पद्धति से उत्पादित (Produced by Organic Method) वनौषधियों का ही उपयोग किया जाना चाहिये। लेकिन ऑर्गेनिक वनौषधियों का बाजार में मिलना मुश्किल ही नहीं, असंभव सा होता जा रहा है। इसी वजह से हमारे द्वारा कुछ महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों का छोटे स्तर पर ऑर्गेनिक पद्धति से उत्पादन और, या संग्रहण किया जाना शुरू किया गया है। इसी क्रम में ऑर्गेनिक हुलहुल भी हमारे यहां उपलब्ध है। जिसे जरूरतमंद लोगों को निजी उपयोग हेतु अल्प मात्रा में घर बैठे डाक के जरिये रजिस्टर्ड पार्सल से भी पाउडर के रूप में उपलब्ध करवाया जाता है। लेकिन व्यापारियों के लिये बड़ी मात्रा में इसकी आपूर्ति करना संभव नहीं है।


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लाइलाज एलर्जी (Incurable Allergy) का इलाज
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
राजस्थान के जिला भरतपुर की बयाना तहसील के पास गाँव के एलर्जी से 8-9 वर्षों से पीड़ित 1 व्यक्ति के चार चित्र यहां प्रस्तुत हैं। जो उपचार हेतु मेरे पास आने से पहले एक दिन छोड़कर इंजेक्शन लगवाता था। इसके बाद भी उसकी दशा अत्यधिक खराब थी। जिसे 23.10.2017 के चित्र को जूम करके देखकर समझा जा सकता है। वह दिनभर खुजाता रहता था। उसके जख्मों पर मक्खियां भिनभिनाती रहती थी। अत: हमेशा मक्खियों को उड़ाता रहता था। रोगी ने बताया कि कभी-कभी उसके सारे शरीर में भयंकर सोजन आ जाती थी। जख्मों से रक्त निकलता रहता था। अनेक बार उसके लिये चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता था। इस कारण उसका जीवन अत्यधिक कष्टमय था। लोग उसे देखकर नफरत करते थे। उसके पास बैठना पसंद नहीं करते थे। इस कारण वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाता था। इस दौरान उसने बयाना, भरतपुर एवं मथुरा में अनेकों डॉक्टरों से इलाज करवाने में अपनी कड़ी मेहनत का बहुत सा रुपया खर्च किया। लेकिन सभी डॉक्टर्स ने अंत में यही कहा कि एलर्जी का कोई स्थायी इलाज सम्भव नहीं। उपरोक्त हालातों में पीड़ित व्यक्ति ने दिनांक: 23.10.17 को निदान हेतु मुझ से संपर्क किया। उसने बताया कि वह करीब 45-50 साल से बीड़ी पीने का आदी है। चूंकि धूम्रपान करने वालों को होम्योपैथिक दवाई असर नहीं करती हैं।

'लाइलाज का इलाज' हेल्थ बलैटिन प्राप्त करने हेतु 9875066111 पर वाट्सएप करें

अत: सबसे पहले बीड़ी छोड़ने हेतु उसका होम्योपैथिक उपचार किया गया। पीड़ित व्यक्ति के सहयोग से मात्र 5 दिन में उनकी बीड़ी पीने की आदत छुड़वा दी गयी। दिनांक: 28.10.17 से पीड़ित व्यक्ति की एलर्जी का निदान शुरु किया गया। आॅर्गेनिक देशी-जड़ी बूटियों एवं दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक दवाइयों के उपचार से 15.11.17 तक अनुमान से बहुत पहले एलर्जी नियंत्रित हो गयी। दिनांक: 24.12.17 तक अर्थात 2 माह में शरीर और चेहरे के सभी जख्म मिट गये। दिनांक: 30.01.18 तक, अर्थात 3 महिने में रोगी ऊपरी तौर पर एलर्जी से पूर्णत: स्वस्थ हो गया एवं खुजली बंद हो गयी। लेकिन फिर से तकलीफ न हो इसलिये कम से कम अगले 3 महिने तक रोगी का आंतरिक उपचार किया जायेगा। जिसमें उनकी रक्तशुद्धि भी की जायेगी। यह सब हमारे निरोगधाम पर पैदा की जा रही शुद्ध-ताजा आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों तथा अमृततुल्य एवं दुष्प्रभाव रहित जर्मन होम्योपैथिक-बॉयोकैमिक तत्वों-दवाईयों का सुखद परिणाम है। उक्त रोगी का विवरण जैसे ही मैंने अपनी वेब साईट website www.healthcarefriend.in पर प्रकाशित किया तो एलर्जी, दाद, खाज, खुजली आदि त्वचा/चर्म रोगों से पीड़ित लोगों के फोन आने का सिलसिला शुरू हो गया। हजारों काल आ चुके हैं। जो यह संशोधित नोट डाले जाने तक जारी है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि समयाभाव के चलते तथा हमारे निरोगधाम पर पैदा की जा रही शुद्ध-ताजा आॅर्गेनिक जड़ी-बूटियों की उपलब्धता सीमित होने के कारण मैं सीमित संख्या में ही कुछेक रोगियों का ही उपचार कर पाता हूं।

नोट: देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ महंगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारंटेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।
Online Dr. PL Meena (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 09.04.2018
हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-3 (Health Bulletin-3)

समस्या: मेरी उम्र 38 साल, लम्बाई 5 फिट 4 इंच और वजन 85 किलो है। मैं दो बच्चों का पिता हूं। मुझे विवाहपूर्व से ही शीघ्रपतन की समस्या है। इस कारण पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाता हूं। इस कारण हमारे बीच किसी न किसी बात पर लगातार तकरार होती ही रहती है। जबकि सभी प्रकार की समस्याओं की जड़ शीघ्रपतन है। इस वजह से हम एक साथ रहकर भी दुश्मनों की भांति रहते हैं। महिनों तक हमारे बीच बीतचीत तक नहीं होती है। कृपया कोई पक्का इलाज बतायें। एक्सवाईजेड त्रिवेदी, गोरखपुर, उप्र।



परामर्श: त्रिवेदी जी सबसे पहले तो आप यह समझ लें कि आपकी समस्या कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिससे आप अकेले जूझ रहे हैं, बल्कि एक अध्ययन के अनुसार भारत में 30 फीसदी लोगों का दाम्पत्य तकरीबन इसी तरह का है। आप और आप जैसी तकलीफ से जूछ रहे दम्पत्तियों के हितार्थ मैं आपको कुछ सुझाव लिख रहा हूं:-
(1) पहली बात झगड़ा करना या बातचीत बंद कर देना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को बढाना है। आपको अपने वैवाहिक सम्बन्धों की पुनर्स्थापना हेतु तुरंत किसी अनुभवी तथा विश्वास योग्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार (Marital Dispute Consultant) से सम्पर्क करना चाहिये।
(2) दूसरी बात दाम्पत्य विवाद सलाहकार से सम्पर्क करने के बाद उनकी सलाह का अनुसरण करें। जब तक आपको दाम्पत्य विवाद सलाहकार का परामर्श नहीं मिल पाता है, आप मेरी वेब साइट स्वास्थ्य रक्षक सखा (Health Care Friend) पर 'शीघ्रपतन' (Early Ejaculation) शीर्षक से प्रकाशित मेरे लेख को पढें और अपने पाचन संस्थान का उपचार करवायें। उसके बाद ही उपचार की सोचें। क्योंकि जब तक आपका पाचन संस्थान ठीक नहीं होगा, आपकी किसी भी बीमारी का आसानी से उपचार सम्भव नहीं है। जिसके लिये आप किसी स्थानीय डॉक्टर से सम्पर्क करें। या इस पोस्ट के अंत में लिखे मेरे हेल्थ वाट्सएप पर सम्पर्क करें।
(3) तीसरी बात उपचार होने तक आप त्रिफला का सेवन कर सकते हैं। लेकिन बाजारू त्रिफला नहीं लें, बल्कि थोड़ा सा श्रम खुद करें। 100 ग्राम बड़ी हरड़, 200 ग्राम बहेड़ा, 400 आंवला लें। तीनों ताजा हों। अर्थात पुराने सड़े-गले नहीं हों। तीनों को अच्छे से कूट-पीसकर कपड़छन करके पाउडर बना लें। इस सब में 200 ग्राम काले नमक का पाउडर बनाकर मिला लें। सभी को मिश्रित करके किसी एयर टाईट डब्बे में भरकर सुरक्षित रख लें। इसमें से प्रतिदिन शाम को दो टी-स्पून (Teaspoon) पाउडर शाम को आधा गिलास पानी में भिगो दें। सुबह आधा गिलास पानी और मिलायें। फिर धीमी आंच पर पकावें। जब पानी आधा रह जाये तो सुबह खाली पेट गुनगुना-गुनगुना (Lukewarm) नियमित रूप से लगातार एक से तीन महिने तक या पाचन संस्थान ठीक होने तक पियें। खाली पेट चाय और दूध का सेवन भूलकर भी नहीं करें।
(4) जब आपकी पाचन क्रिया नियमित हो जाये तो शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच का विधिवत शोधित किया हुआ पाउडर, शुद्ध आॅर्गेनिक अश्वगंधा पाउडर, शुद्ध सफेद मूसली पाउडर तीनों को कपड़छन करके समान मात्रा में मिला लें, इन तीनों के बराबर मात्रा में मिश्री पाउडर मिला लें। रात्रि सोते समय करीब 5 ग्राम पाउडर की फक्की लेकर 150 से 500 मिलीलीटर तक, अपनी क्षमतानुसार गुनगुना-गुनगुना (Lukewarm) दूध नियमित रूप से  पियें।
(5) पूरी तरह से स्वस्थ होने तक किसी भी प्रकार का नशा और मांसाहार नहीं करें। नियमित रूप से समय पर स्वास्थ्यवर्धक भोजन लें।

चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]

नोट/Note: अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे उचित समाधान प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619

----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।—डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-14.03.2018.
हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-2 (Health Bulletin-2)


नोट: सुझाई गयी सभी होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयां केवल जर्मनी निर्मित सील पैक और देशी जड़ी-बूटियां शुद्ध, ताजा तथा आॅर्गेनिक उपयोग करने पर ही परिणाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है।



1. मैं जब भी किसी बड़े अफसर से मिलता हूँ या परीक्षा या इंटरव्यू देने जाता हूँ तो मेरा कॉन्फिडेंस जवाब दे जाता है। क्या इसका कोई इलाज हो सकता है?-भरत कुलश्रेष्ठ, उज्जैन, मप्र।
परामर्श: जब भी ऐसा मौका आये आप होम्योपैथी की दवाई अर्जेण्टम नाईट्रिकम-30 की 1-1 घण्टे में 4-5 खुराक सेवन करें। सम्पूर्ण उपचार के लिये किसी योग्य हिम्योपैथ से सम्पर्क करें।
2. मेरी एज 37 वर्ष है। मैरिज को 15 साल हो गये। 2 बच्चे हैं। लेकिन मुझे अभी भी शीघ्रपतन की समस्या है। अनेक डॉक्टर्स का कहना है कि मैरिज के बाद सब ठीक हो जाता है, लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं हुआ। इस कारण हमारी मैरिज लाइफ डिस्टर्ब है। कोई पक्का इलाज बतायें।-के के सिंह, कानपुर, उप्र।
परामर्श: आपके प्रोपर/सही उपचार के लिये आपका सम्पूर्ण लक्षणात्मक विवरण जानना बहुत जरूरी है। फिर भी फौरी उपचार के लिये आप होम्योपैथी की दवाई स्टेफिसेग्रिया-200 और शुद्ध ऑर्गेनिक काले कौंच, सफेद मूसली, शतावरी, भूई आमला, शरफुंका और मिश्री का सम्भाग मिश्रण बनाकर, प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम तक शाम को दूध के साथ 2-3 महीने तक सेवन करें। आप मेरी वेब साइट पर 'शीघ्रपतन' शीर्षक से 30.11.2017 को प्रकाशित लेख अवश्य पढें। इसे पढने के बाद आपकी अनेक भ्रांतियां और उलझनें दूर हो सकेंगी।
3. मेरी पत्नी की उम्र 40 साल है। उसको 20 साल की उम्र से सफेद पानी की बीमारी है। बहुत इलाज करवाया, लेकिन कोई लाभ नहीं। बिल्कुल सूख गई है। 35 किलो भजन रह गया है। कोई काम नहीं कर पाती। चक्कर आते हैं और आधे सिर में दर्द रहता है। भूख नहीं लगती। कब्जी रहती है। क्या करें?-रमेश शर्मा, मुरेना, मध्य प्रदेश।
परामर्श: जितना आपने बताया है, उतनी सी जानकारी से उपचार बताना सम्भव नहीं है। लगता है आपकी पत्नी को लीवर में सूजन या इंफेक्शन के साथ ल्यूकोरिया/श्वेत प्रदर और माइग्रेन की पीड़ा है। इन सभी तकलीफों का प्रोपर उपचार जरूरी है। किसी योग्य होम्योपैथ और, या आयुर्वेद के डॉक्टर से सम्पर्क करें। तब तक आप उन्हें नियमित रूप से शुद्ध ऑर्गेनिक और ताजा भूई आमला, मकोय, पुनर्नवा और आंवले का काढ़ा सुबह शाम पिला सकते हैं। आपकी पत्नी की पूर्ण जानकारी हेतु मेरे हेल्थ वाट्सएप नम्बर 8561955619 पर भी सम्पर्क कर सकते हैं। 
4. मेरे अंडकोषों में 8-9 महिने से दाद और खुजली की समस्या है। जब तक गोली, कैप्सूल और इंजेक्शन लेता हूँ, सब ठीकठाक रहता है। कुछ दिन बाद फिर से तकलीफ शुरू हो जाती है। जिसमें जलन होती है और खुजाने पर रक्त निकलने लगता है। प्लीज मुझे इससे मुक्ति दिलाएं।-पीएस गंगवाल, भोपाल, मप्र।
परामर्श: सबसे जरूरी सावधानी-अपने सभी आंतरिक कपड़े सूती पहनें और उन्हें साफ रखें। जिसके लिये स्वस्थ होने तक रोजाना उबलते पानी में कपड़ों की धुलाई जरूरी है। नहाते समय नीम के पत्ते पानी में उबालें या गुनगुने पानी में एंटी इंफेक्शन पाऊडर पानी में डालकर नहाएं। प्रतिदिन होम्योपैथी की दवाई सल्फर-200+कैंथरिस-200 की एक-एक खुराक और शुद्ध ऑर्गेनिक शरफुंका+श्योनाक पाउडर, प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम तक सुबह-शाम पानी के साथ ठीक होने तक सेवन करें।
5. मेरी पत्नी की उम्र 32 साल है। विवाह को 6 महिने हुए हैं। उसकी योनि का करीब 2 इंच हिस्सा बाहर निकलता है। डॉक्टर का कहना है कि वैजाइना कोलैप्स की तकलीफ है, ऑपरेशन करना पड़ेगा। हमें बहुत घबराहट और डर है। क्या मेरी पत्नी बिना ऑपरेशन ठीक हो सकती है और क्या वह माँ बन पाएगी? खर्चे की कोई दिक्कत नहीं हम दोनों जॉब करते हैं।-मनीष पांचाल, रेवाड़ी, हरियाणा।
परामर्श: बिना बच्चों को जन्म दिये योनिभ्रंश अर्थात वैजाइना कोलैप्स, लगभग असम्भव। मामला उतना सरल नहीं जितना आप को लग रहा है। आपकी पत्नी के सहयोग के बिना उपचार सम्भव नहीं। उन्हें सम्पूर्ण केस हिस्ट्री ईमानदारी से बतानी होगी। आप तुरन्त किसी होम्योपैथ से सम्पर्क करें या मेरे हेल्थ वाट्सएप 85619 55619 पर सम्पर्क करें। तब तक होम्योपैथी की दवाई कोलोफाईलम-200 + कॉस्टीकम-200 सुबह शाम सेवन करवा सकते हैं।
चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]

Note: अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे उचित समाधान प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619

----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।

यौन शक्तिवर्धक (केसर-युक्त) 'कामवाण पाउडर'-Sexual Power


स्त्री एवं पुरुष दोनों के स्वस्थ, सफल एवं सन्तुष्टि प्रदायक यौन-सम्बन्ध दाम्पत्य जीवन की आधारशिला होते हैं। वर्तमान में अनेक प्रकार के तनाव और मानसिक दबावों के चलते यौन-क्षमता समाप्त या कमजोर होती जा रही हैं। स्त्रियों में श्वेतप्रदर सहित अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इन सब कारणों से लोगों के दाम्पत्य जीवन बिखर रहे हैं।




यौन अक्षमता को थोड़ा स्पष्ट करना बहुत जरूरी है। जो पुरुष अपनी पत्नी से यौन संबन्ध नहीं बना पाते या जल्द ही स्खलित या शिथिल या ठंडे हो जाते हैं, वे यौन रोगी या नपुंसकता के रोगी कहलाते हैं। इस समस्या का सीधा सम्बंध लैंगिक कमजोरी से ही माना जाता है। इनमें से बहुसंख्यक पुरुष शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन उनके अवचेतन मन में बैठे कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फंसकर, यौन-अक्षमता के शिकार होकर वे मानसिक रूप से नपुंसक/नामर्द हो जाते हैं। मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डरने लगते हैं। वे इतने भयभीत रहते हैं कि सहवास भी नहीं कर पाते। इस कारण उनकी मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती ही चली जाती है।

इसका दु:खद दुष्परिणाम यह होता है कि इस रोग में रोगी अपनी परेशानी, किसी दूसरे को नहीं बता पाता या उसे सही उपचार नहीं करा पाता, मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पत्नी को पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता, तो रोगी की पत्नी को उसकी अक्षमता का पता चल ही जाता है। वह जान जाती है कि उसका पति नंपुसकता के शिकार है। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े और विवाद शुरू हो जाते हैं। अनेक मामलों में बात विवाहेत्तर यौन सम्बन्धों या तलाक तक पहुंच जाती है।

वास्तव में ऐसे रोगियों का इलाज होम्योपैथी के जरिये सम्भव है, लेकिन न तो ऐसे रोगी प्रयास करते हैं और न हीं उन्हें समर्पित तथा अनुभवी होम्योपैथ डॉक्टर मिल पाते हैं। इस कारण वे जीवनभर घुट-घुट कर अपमानजनक जीवन जीने को विवश होते हैं।

बहुत से सामान्य पुरुषों की यौन कमजोरी जो नामर्दी तक नहीं पहुंच पाती है, वे भी धीरे-धीरे उपरोक्त स्थिति की ओर लगातार बढ रहे होते हैं, लेकिन शर्म-संकोचवश वे अपनी समस्या को किसी के सामने नहीं रख पाते हैं। ऐसे लोगों को अपनी शारीरिक यौन क्षमताओं को बरकरार रखने तथा बढाने के लिये प्रतिवर्ष खुराक लेते रहना चाहिये। इससे उन्हें बहुत सम्बल मिल सकता है।

ऐसे लोगों के लिये स्प्ष्ट किया जाता है कि हमारे देश में अनेक आयुर्वेदिक औषधियां स्त्री और पुरुष दोनों में संतुलित कामशक्ति का संचार करने में अनादिकाल से सम्पूरक सिद्ध होती रही हैं। मगर दु:ख का विषय है कि जंगल लगातार समाप्त होते जा रहे हैं और प्रगति की राह पर चलने को मजबूर किसानों द्वारा खेती में जहरीले कीटनाशकों और खादों का उपयोग किया जाता है। ऐसे में खेतों में या खेतों ​के किनारे पैदा होने वाली शुद्ध आॅर्गेनिक औषधियां मिलना लगभग मुश्किल सा हो गया है। कुछ लोग व्यावसायिक रूप से औषधियों की खेती करने लगे हैं, लेकिन अधिक उपज लेने के चक्कर में, उनके द्वारा भी जहरीले कीटनाशकों और खादों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है।

उपरोक्त कारणों से बाजार में उपलब्ध औषधियों से आशातीत परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। इन हालातों में हमने राजस्थान की जलवायु में पनप सकने वाली कुछ प्रमुख औषधियों को आॅर्गेनिक विधि से पैदा करके, उन्हें छाया शुष्क करके और निर्धारित रीति से उनका शोधन करके, उनका बारीक पाउडर बनाने का छोटा सा प्रयास शुरू किया है। जो अत्यंत परिश्रमपूर्ण होने के साथ-साथ तुलनात्मक रूप से काफी मंहगा कार्य सिद्ध हो रहा है। मगर प्रसन्नता की बात यह है कि हजारों लोगों पर इन औषधियों का उपयोग करने के बाद उत्साहवर्द्धक परिणाम मिले हैं। जो सबसे बड़ा संतोष का विषय है।

अत: उपरोक्त हालातों में स्त्री-पुरुषों को यौन समस्याओं से सम्बन्धित ताजा एवं शुद्ध 'कामवाण पाउडर' को इच्छुक लोगों को अग्रिम आॅर्डर पर एक और दो माह के उपयोग हेतु क्रमश: 300 एवं 600 ग्राम के पैक में घर बैठे रीजनेबल कीमत पर, रजिस्टर्ड पार्सल के जरिये उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। इन दवाइयों का पहली बार लगातार 6 महिने तक तथा इसके बाद हर साल एक-दो महिने सेवन करते रहने पर कोई भी सामान्य पुरुष 65 से 70 साल तक सफलतापूर्वक यौनसम्बन्ध बना सकता है।
'कामवाण पाउडर' में मुख्यत: निम्न महत्वपूर्ण औषधियों का सम्मिश्रण है:-

01. सफेद मूसली: संकेत-प्राकृतिक रूप से कामोत्तेजक, पुष्टिकारक, एंटीऑक्सीडेंट, वीर्य, यौन शक्ति, उर्जा, शुक्राणु, सेक्स आवृति/ड्राईव, स्तम्भन और बल वर्द्धक। नियमित रक्त संचार करके यौनांगों को स्वस्थ एवं शक्ति प्रदान करती है। वीर्य को पुष्ट और गाढा करती है, साथ ही रोगों से लड़ने हेतु शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है। श्वेतप्रदर, बांझपन, शिथिलता, ठंडापन, नपुंसकता, शीघ्रपतन और अल्पशुक्राणुता से बचाती है।
02. बबूल की पत्ती एवं कच्ची फली: संकेत-यौन कमजोरी तथा शीघ्रपतन को ठीक करके स्तम्भन शक्ति बढाती हैं। वीर्य को गाढा करके शुक्राणुओं की संख्या में वृद्धि करती हैं। मूत्र विकारों से मुक्ति दिलाती हैं।
03. अश्वगंधा: संकेत-इसे इण्डियन जिनसेंग भी कहा जाता है। लेकिन अश्वगंधा पूरी तरह से प्राकृतिक परिणाम प्रदान करती है। यह वातनाशक, बलकारक, शक्तिवर्द्धक तथा पाचनशक्ति वर्द्धक। बांझपन, गर्भस्त्राव, श्वेतप्रदर, रक्तप्रदर, जोड़ों में दर्द, कमरदर्द, नपुंसकता, यौन कमजोरी, शीघ्रपतन, कमजोर पाचन प्रणाली, गठिया, वातरोग, शियाटिका, हाई ब्लड पेशर, थकावट आदि को दूर करती है।
04. मुलेठी: संकेत-वात, पित्त और कफ-त्रिदोषनाशक। नपुंसकता (नामर्दी), ऐसिडिटी, कब्ज, आंव, अल्सर, कफ, खांसी, मूत्ररोग, अनियमित और दर्दनाक माहवारी, स्नायु कमजोरी, जोड़ों एवं मांसपेशियों के दर्द आदि को दूर करके, प्राकृतिक कामशक्ति बढाती है। हृदय को मजबूत करती है। नेत्रज्योति एवं रक्त की मात्रा बढाती है। सौन्दर्य वर्द्धक है।
05. शतावरी: संकेत-इसे आयुर्वेदिक औषधियों की रानी कहा जाता है। यौनांगों में शिथिलता-ढीलापन, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, मूत्रविकार, अपच, अजीर्ण, कब्ज, प्रदर, माईग्रेन, अनिद्रा नाशक एवं दुग्धवर्द्धक, प्रजनन क्षमता बढाये, मधुमेह नियंत्रित करे और सुंदरता निखारे।
06. मेथी: संकेत-कोलेस्‍ट्रॉल लेवल में सुधार, ब्लड प्रेशर कंट्रोल, शुगर संतुलन, चर्म रोग नाशक, पाचनशक्ति बर्द्धक, कृमिरोग नाशक है।
07. बीजबंद: संकेत-यौन दुर्बलता, कब्ज, खूनी बवासीर, मूत्रातिसार, श्वेत प्रदर, हृदय दुर्बलता, उच्च रक्तचाप, शीघ्रपतन, कमजोरी आदि।
08. जायफल: संकेत-कामशक्ति एवं कामेन्द्रिय शक्ति वर्धक, त्वचा की झाईयाँ, जोड़ों का दर्द, वात एवं कफ नाशक, अजीर्ण, गर्भाशय-शोथ आदि में विशेष लाभदायक है।
09. वंशलोचन: संकेत-वीर्य वृद्धि, वीर्य गाढा, गर्भपात प्रतिरोधक, प्रदर, प्रमेह, यकृत/लीवर के रोग आदि में लाभदायक है।
10. गोखरू बीज: संकेत-गोखरू पुरुष के प्रजनन अंगों को स्वस्थ रखता है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता, गतिशीलता व आयतन को बढ़ावा देता है। बलवर्धक एवं प्राकृतिक कामेच्छा वर्धक। साइटिका एवं चर्मरोग में उपयोगी। सभी मूत्र रोगों में उपयोगी। त्रिदोष (वात, कफ और पित्त) नाशक। बांझपन, यौन कमजोरी, गुर्दारोगों आदि में लाभकारी।
11. शिलाजीत: संकेत-दिमागी ताकत एवं रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये और मधुमेह, रक्तचाप, तनाव, यौन कमजोरी, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष आदि को नियंत्रित करे।
12. निर्गुण्डी: संकेत-शिलाजीत के साथ निर्गुण्डी का सेवन सभी तकलीफों में आश्चर्यजनक परिणाम देता है। साथ ही पाचन-क्रिया को मजबूत करके लीवर को ताकतवर बनाती है।
13. सौंठ: संकेत-सिरदर्द, अर्द्धसिर शूल, कब्ज, भूख की कमी, अजीर्ण, मधुमेह, अंडकोषवृद्धि, दर्दनाक माहवारी, प्रदर, जोड़ों-वात-कमर के दर्द से मुक्ति। आ​दि।
14. गिलोय: संकेत-पुराना ज्वर, मधुमेह, कब्ज नाशक, यौनशक्ति वर्धक एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाली औषधि है।
15. काली मूसली: संकेत-कामेच्छा में कमी, प्रदर, सीने में जलन, चर्मरोग, पेशाब में जलन आदि को दूर करता है। शक्ति वर्धक है। शुक्राणू वर्धक। ऐण्टीआॅक्सीडेंट। प्रजनन शक्ति बढाये।   
16. आमला: संकेत-रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं नेत्रज्योति बढाये, ऐण्टीआॅक्सीडेंट-शरीर से विशैले पदार्थ निकाले, पाचनतंत्र को मजबूत करे, वृद्धावस्था की गति को रोके, दिल की रक्षा करे, नींद नहीं आना आदि।
17. मकोय: संकेत-यौन-शक्ति वर्धक, कामोत्तेक, वीर्य वर्धक, त्रिदोष (वात, कफ और पित्त) शामक, पाचन, यकृत/लीवर शोधक एवं उतेजक, शोथहर, रक्तशोधक, कुष्ठ व विषनाशक, कब्ज, बवासीर, दमा, श्वास, अनिद्रा, चर्मरोग, घबराहट, ऐंठन, बांयटे, पेट में जलन, पीलिया, यकृत रोग, गठिया आदि में उपयोगी।
18. डीकामाली: संकेत-अपच, भूख की कमी, कब्ज, चर्मरोग, संक्रमण, बवासीर, आंतों के कृमि आदि के उपचार में सहायक।
19. भूई आमला: संकेत-स्वस्थ यौनशक्ति के लिये पाचन क्रिया और पाचन क्रिया के लिये स्वस्थ लीवर का होना आवश्यक है। लीवर क्लीनिंग, गैस्ट्रिक अल्सर एवं एंटीऑक्सिडेंट हेतु उपयोगी है। भूई आमला लीवर को ताकत प्रदान करता है। शराब के सेवन से क्षतिग्रस्त यकृतों को पुनर्जीवित करे। साथ ही यह गठिया-जोड़ों के दर्द का प्राकृतिक तरीके से शमन करता है। मूत्रवर्धक, रक्तचाप को कम करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती प्रदान करे। शुगर लेवल को कम करे।
20. श्योनाक: संकेत-कब्ज, फोड़े और घावों, मुंह कैंसर, खुजली और अन्य त्वचा रोगों के लिए एक प्रभावी उपाय, गर्भधारण की संभावना बढ़ाये। रक्तशोधक। स्त्रीरोग संबंधी विकारों में उपयोगी और यहां तक कि बचपन के मनोवैज्ञानिक यौन विकारों के मामले में भी प्रभावी। दिल का टॉनिक, रक्त शोधक, रोग शामक, भूख वर्धक। गठिया-वात। पाचन शक्ति वर्धक। संक्रमण नाशक आदि।
21. कौंच: संकेत-कौंच को भारतीय बियाग्रा कहा जाता है। यद्यपि यह बियाग्रा से भी ताकवर है, लेकिन इसका प्रभाव स्थायी है, जबकि बियाग्रा का तात्कालिक प्रभाव होने के साथ-साथ अनेक दुष्प्रभाव भी होते हैं। नपुंसकता, नसों की कमजोरी, लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन, वीर्य के पतलेपन, शुक्राणुओं की कमी, दर्द व पेट की तकलीफें, मधुमेह, गैस, श्वेतप्रदर, बांझपन, गर्भपात आदि की समस्या आदि में अत्युत्तम है।
22. तालमखाना: संकेत-तालमखाना यौनशक्ति और कामोत्तेजना बढाने वाला, पेशाब साफ लाने वाला, एंटी बॉयोटिक एवं पोषक गुणों से भरपूर है। वीर्य विकार, वीर्य का पतलापन, शुक्राणुओं की कमी, नामर्दी, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन आदि में उपयोगी है। शारीरिक कमजोरी को घटाता है। यह हृदय और किडनी के लिये भी बहुत उपयोगी है। स्त्रियों की कमजोरी, विशेषकर प्रसवकाल के बाद की कमजोरी में विशेष लाभदायक है।
23. लाजवंती/छुईमुई: संकेत-नपुंसकता, शीघ्रपतन और मर्दाना कमजोरी, स्तनों का ढीलापन दूर करे, गर्भाशय  के बाहर आने की समस्या, बवासीर (Piles) और भगंदर (Anal fistula), चर्मरोग, मधुमेह, गले के रोग, संकोचक, आदि में लाभदायक है।
24. सेमलकंद/सेमल मूसली: पुष्टिकारक, कामोत्तेजक और नपुंसकता नाशक, बलकारक, अपार बलवीर्य वर्धक, स्तम्भन शक्ति बढ़ाती है, शरीर की कान्ति निखारती, प्रमेह-धातु की कमजोरी और शरीर की क्षीणता में सेमल की मूसली अव्वल दर्जे की चीज है।
25. उटंगन: संकेत-यह सभी प्रकार की यौन समस्याओं का समाधान है तथा यौनशक्ति बढाने में विशेष उपयोगी है।
26. केसर: संकेत- अजीर्ण, अपच, गैस को दूर करे। रक्‍त शुद्धिकरण करके किडनी और लिवर की करे सुरक्षा। यौन क्षमता अर्थात मर्दानगी वर्धक। माहावारी तथा गर्भाशय सम्बन्धी तकलीफों में लाभकारी। ज्योतिवर्धक। बाल झड़ना रोके। अर्थराइटिस-गठिया में आरामदायक। स्मरण-शक्ति बढाये।
इत्यादि।

जो कोई पुरुष उपरोक्त 'कामवाण पाउडर' पाउडर को घर बैठे मंगवाना चाहते हैं, वे हम से सीधे सम्पर्क कर सकते हैं।

*नोट: मेरी ओर से भेजी जा रही उक्त पाठ्य सामग्री से यदि आपको किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो प्लीज तुरंत अवगत कराएं। आगे से आपको नहीं भेजी जायेगी। यदि यह सामग्री आपको किसी अन्य स्रोत से मिली है और यदि आप अपने वाट्सएप इनबॉक्स में नियमित रूप से प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने मोबाईल में हमारा वाट्सएप 9875066111 सेव/एड करें और हमें नियमित सामग्री प्राप्त करने हेतु वाट्सएप 9875066111 पर लिखें।*
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 27 दिसम्बर, 2017, 21.40PM
शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
'शीघ्रपतन' शीर्षक से 30 नवम्बर, 2017 को लिखे लेख में निम्न विषयों की जानकारी दी जा चुकी है:-
  • 1. शीघ्रपतन से कितने पुरुष परेशान रहते हैं?
  • 2. शीघ्रपतन किसे कहते हैं?
  • 3. वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
  • 4. स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
  • 5. सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?
  • 6. शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध?
  • 7. शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण!
  • 8. शीघ्रपतन के कारण।
शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खों के बारे में बताने से पूर्व पाठकों के लिये उक्त लेख को पढना उचित रहेगा। अत: जिन पाठकों ने उक्त लेख नहीं पढा, वे हमारी वेबसाइट 'स्वास्थ्य रक्षक सखा' (www.healthcarefriend.in) पर जाकर या यहां क्लिक करके या निम्न लिंक पर जाकर इसे पढ सकते हैं। (http://www.healthcarefriend.in/2017/11/blog-post_30.html)




शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खे पढने से पहले यह जानना उचित होगा कि पूर्वोक्त 'शीघ्रपतन' शीर्षक से लिखित लेख में बताये गये शीघ्रपतन के 20 कारणों के अलावा पेट की गड़बड़ी भी 'शीघ्रपतन' एक बड़ा शारीरिक कारण होता है। अत: किसी योग्य चिकित्सक से 'शीघ्रपतन' का उपचार/परामर्श लेते समय अपने पेट की तकलीफों को कभी नहीं छुपायें। निम्न नुस्खों का इस्तेमाल करने से पहले अपने पेट की तकलीफों का उपचार अवश्य करवा लें। अन्यथा बताये गये परिणाम नहीं मिलेंगे।

शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खों की जानकारी प्रदान करने से पहले यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि इन नुस्खों में बतायी गयी औषधियों की सामग्री का उपयोग करने से पहले किसी अनुभवी चिकित्सक का परामर्श लेना जरूरी होगा। क्योंकि दवाई की मात्रा का सही-सही निर्धारण हर एक पुरुष की आयु, यौन क्षमता/समस्या, शारीरिक एवं मानसिक लक्षणों आदि के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकता है। इसके अलावा बताये गये नुस्खों में जिन आयुर्वेदिक औषधियों का उल्लेख किया गया है, यदि वे सभी शुद्ध, आॅर्गेनिक, ताजा, छाया शुष्क होंगी और जरूरत के अनुसार मात्रा में निधारित समय तक सेवन की जायेंगी तो ही वांछित परिणाम मिलेंगे।

शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!

1. गिलोय+बड़ा गोखरू+आंवला पाउडर: गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला बराबर मात्रा में लेकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसका एक चम्मच चूर्ण प्रतिदिन मिश्री और घी के साथ सेवन करने से संभोग शक्ति तथा स्तम्भन शक्ति मजबूत होती है। इन तीनों औषधियों के अलावा कुछ अन्य औषधियों के मिश्रण सहित यौन शक्तिवर्धक एवं शीघ्रपतन नाशक यह पाउडर जरूरत के अनुसार हमारी ओर से रोगियों को दिया जाता है।
2. अलसी और वंशलोचन (अधिकतर पंसारी नकली वंशलोचन बेचते हैं, क्योंकि शुद्ध वंशलोचन बहुत मंहगा आता है) समान मात्रा में लेकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसे गिलोय के रस तथा शहद के साथ हफ्ते-दस दिन से एक माह तक सेवन करें। इससे वीर्य गाढ़ा होकर यौन शक्ति एवं स्तम्भन शक्ति बढती है।
3. शोधित कौंच (निर्धारित रीति से कौंच को दूध में शोधित करके ही उपयोग किया जाना चाहिये) के बीज, शतावरी, बड़ा गोखरू, तालमखाना, अतिबला और नागबला को एक साथ मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तम्भन शक्ति बढती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतलापन, यौन-दुर्बलता और युवकों में विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत ही लाभकारी रहता है। ज्यादातर लोग कौंच का इस्तेमाल लंबे समय तक सेक्स की पॉवर बरकरार रखने के लिए किया जाता है। स्थायी यौन क्षमता बढाने के लिये कौंच के शोधित कौंच बीज पाउडर (कोई साईड इफैक्ट नहीं) विदेशी वियाग्रा (अनेक साईड इफैट) से भी 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है, चाहे लिंग की कमजोरी/शिथिलता/ढीलापन, वीर्य पतला, नपुंसकता या शीघ्रपतन कुछ भी समस्या हो सभी का स्थायी इलाज है-शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच बीज का शोधित पाउडर। जयपुर स्थित हमारे निरोगधाम पर आॅर्गेनिक रीति से सफेद और काले कौंच की छोटे स्तर पर खेती की जा रही है। जिनका उपयोग रोगियों को दी जाने वाली दवाईयों में किया जा रहा है। व्यापार के लिये कौंच उपलब्ध नहीं है।
4. निर्धारित रीति से शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच के बीज के शोधित पाउडर के साथ शुद्ध सफेदमूसली और नागौरी अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इस पाउडर की 1 चम्मच मात्रा सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से पुरुषों की सभी प्रकार की यौन-समस्याओं को दूर किया जा सकता है। हर प्रकार की शारीरिक कमजोरी दूर करने की ताकत इन कौंच के बीजों में होती है। आकार के अनुसार कौंच के बीज दो प्रकार के होते हैं-छोटे और बड़े। छोटे कौंच स्त्रियों की बीमारियों में अधिक उपयोगी होते हैं। जो योनि दोष, ब्रण, कुष्ठ दूर करते है और रक्तविकार नाशक हैं।
5. देशी बबूल की छाया शुष्क कच्ची पत्तियां, छाया शुष्क कच्ची फलियां और शुद्ध गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर हवाबंद बोतल में रख लें। इस पाउडर को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है। शीघ्रपतन से मुक्ति मिलती है और स्तम्भन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह स्वप्नदोष में भी बहुत लाभकारी है।
6. यदि शुद्ध आॅर्गेनिक मेथी के कुछ दाने रोज सेवन किये जाएं तो पुरुषों की मानसिक यौन सक्रियता बढ़ती है। इसके सेवन से पुरुषों में होने वाली लिंग उत्थान की समस्या हल हो सकती है। मेथी टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में बढोतरी करके अन्य यौन समस्याओं को भी ठीक करने में मदद करती है। रात को सोते समय आधा चम्मच पिसा हुआ शुद्ध मेथी दाना पाउडर तथा आधा चम्मच धनिया पाउडर मिलाकर गर्म दूध के साथ नियमित रूप से एक महीने तक सेवन करने से पुरुषों की यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। ब्रिसबेन स्थित आणविक चिकित्सा केंद्र के अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि भारत में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली मेथी पुरुषों की कामेच्छाओं को काफी अच्छे स्तर तक बढ़ाने में सक्षम है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है।
7. जायफल का पाउडर एक चौथाई चम्मच, सुबह-शाम शहद के साथ खायें और इसका तेल सरसों के तेल में मिलाकर शिश्न (लिंग) पर मलें। इससे नपुंसकता और शीघ्रपतन का रोग समाप्त हो जाता है।

नोट: याद रहे वर्तमान में फसल में बढोतरी के मकसद से अधिकतर किसान खाद, खरपतवार नाशक दवाई, कीटनाशक जहर इत्यादि का जमकर उपयोग करते हैं। जिसके चलते फसलों में रोगनाशक प्राकृतिक औषधीय तत्व गड़बड़ा जाते हैं या कम या नष्ट हो जाते हैं। जिसका एक मात्र समाधान है-आॅर्गेनिक खेती जो तुलनात्मक रूप से बहुत मंहगी पड़ती है और उत्पादन कम होता है। लेकिन मानवता को रोगमुक्त करना है तो आॅर्गेनिक खेती समय की मांग है। इस दिशा में हमारी ओर से बहुत छोटे स्तर पर प्रयास जारी हैं। ऐसी स्थिति में होम्योपैथिक दवाईयों का सेवन करना अधिक सुरक्षित और परिणामदायी सिद्ध होता है। इस बारे में अगले लेख में जानकारी दी जायेगी।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 07 दिसम्बर, 2017, 08.14AM
*शरीर को डिटॉक्सीफाई (जहरीले तत्वों से मुक्त) करें!*

*लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा*
यदि आपको हमेशा थकावट और कमजोरी महसूस होती है। चक्कर आते हैं। सिर दर्द रहता है। भूख नहीं लगती। गैस बनती है। गले में जलन होती है। खट्टी डाकरें आती हैं। मलत्याग सही से नहीं होता। मलत्याग के समय मरोड़/दर्द होता है। मलत्याग के समय आंव, खून या आंव/खून मिश्रिम मल आता है। मलत्याग में 3 मिनट से अधिक समय लगता है। मलत्याग से सन्तुष्टि नहीं मिलती या मलत्याग के लिये एकाधिक बार जाना पड़ता है। चेहरे पर फुंसियां और शरीर में खाज-खुजली तथा एलर्जी होती रहती है। खूनी या बादी बवासीर/पाइल्स की शिकायत है। बालों में डण्डरफ/फ्यास रहता है। *इसका स्पष्ट मतलब-आपका पेट खराब है और आपका पाचनतंत्र खराब है। लीवर सही से काम नहीं कर रहा। इससे निजात पाने के लिये आपको अपने शरीर को तुरंत डिटॉक्सीफाई करना बहुत जरूरी है। डिटॉक्सीफाई का मतलब है, शरीर में संग्रहित/जमा विषैले तत्वों का निष्कासन। क्योंकि विषैले तत्वों का शरीर में रहने देने का तात्पर्य है, खुद ही बीमारी पैदा करने वाले तत्वों से दोस्ती करना। इन्हें बाहर निकालने की प्रक्रिया को ही शरीर को डिटॉक्सीफाई करना कहते हैं।* यदि विषैले तत्व शरीर में वर्षों से जमा हैं और बीमारियों के रूप में अपना असर दिखाने लग गये हैं तो उनका प्रोपर/सही से उपचार करवाना जरूरी है। जिनके शरीर में किसी प्रकार की तकलीफ नहीं है और जो चाहते हैं कि उनके शरीर में विषैले तत्व पैदा/जमा ही नहीं हो, इसके लिये कुछ सरल सुझाव प्रस्तुत हैं:-


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परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच।
My WhatsApp No.: 85-619-55-619
क्या आप अपने स्वास्थ्य की रक्षा हेतु अपने व्हाट्सएप पर
नियमित रूप से हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करना चाहते हैं?
यदि हां तो आप से उम्मीद की जाती है कि-
1. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 को अपने मोबाईल में सेव करें।
2. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 पर हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करने हेतु
या स्वास्थ्य परामर्थ हेतु रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
3. आपका परिचय जानने के बाद आपकी स्वास्थ्य रक्षा ​हेतु
हेल्थ बुलेटिन भेजा जाने लगेगा।
लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।
अन्यथा आपके नम्बर को ब्लॉक कर दिया जायेगा।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
My Whatsapp No. : 85-619-55-619

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*01. आॅर्गेनिक फल और सब्जियों का सेवन करें:* बेशक आॅर्गेनिक फल और सब्जियों का मिलना बहुत मुश्किल है, लेकिन इनका सेवन बहुत जरूरी है। 
*02. बेकरी प्रोडक्ट्स को नहीं कहें:* शरीर और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाने वाले बेकरी प्रोडक्ट्स को तुरंत नहीं कहें। 
*03. गहरी और लम्बी सांस की आदत डालें:* गहरी और लम्बी सांस लेने की आदत डालें, जिससे शरीर के सभी अंगों तक आॅक्सीजन पहुंच सके। 
*04. ताजा नींबू पानी:* नियमित ताजा नींबू पानी पीने की आदत डालकर शरीर की गंदगी को आसानी से साफ किया जा सकता है। 
*05. ताजा और आॅर्गेनिक फलों का ज्यूस पियें:* पैक्ड ज्यूस नुकसान दायक होते हैं। अत: शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त करने के ​लिये ताजा और आॅर्गेनिक फलों का ज्यूस पियें। 
*06. भोजन में एण्टी-आॅक्सीडेंट की मात्रा बढायें:* एण्टी-आॅक्सीडेंट से लीवर एंजाइम एक्टिव होते हैं। अत: अपने भोजन में एण्टी-आॅक्सीडेंट्स की मात्रा बढायें। 
*07. रोजाना ढाई लीटर पानी पियें:* पेशाब के जरिये विषैले तत्वों के निष्कासन के लिये हर दिन कम से कम ढाई लीटर पानी पीने की आदत डालें। 
*08. हल्का भोजन:* पचने में आसान और अपने शरीर के मिजाज के अनुसार हल्के भोजन का सेवन करें। 
*09. ग्रीन-टी पियें:* शरीर से विषैले तत्वों के निष्कासन और पाचनतंत्र को ठीक करने के लिये, ब्लैक-टी को त्यागें और ग्रीन-टी का सेवन करें। 
*10. पर्याप्त नींद:* गहरी नींद से शरीर रिचार्ज होता है। अत: रोजाना न्यूनतम 6 से 8 घंटे की गहरी नींद सोना भी अनिवार्य है। 
*11. लहसुन का सेवन करें:* अपने भोजन में नियमित रूप से पर्याप्त लहसुन का सेवन करें। लहसुन में सलफ्यूरिक तत्व पाये जाते हैं, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने वाले ग्लुथाथिओन नामक एण्टी आॅक्सीडेण्ट का निर्माण करते हैं। 
*12. भोजन चबा-चबा कर खायें:* बेशक आपको कितनी भी जल्दी क्यों न हो रही हो, लेकिन भोजन को हमेशा चबा-चबा कर खाने की आत डालें। इससे भोजन में अधिक आनंद आयेगा और पचानतंत्र भी दुरुस्त रहेगा। 
*13. शराब, धूम्रपान और मांसाहार को त्यागें:* यदि शरीर से विषैले तत्वों का निष्कासन करना है तो शराब, धूम्रपान और मांसाहार को हमेशा को त्यागना होगा। 
*14. नियमित रूप से टहलें तथा व्यायाम और योग करें:* जैसे रोजाना स्नान करते हैं। ब्रुश करते हैं और दूसरे काम करते हैं। ऐसे ही नियमित रूप से *एक हजार से दस हजार कदम पैदल चलने/टहलने की आदत डालें।* इसके साथ-साथ किसी जानकार व्यक्ति के परामर्श से व्यायाम और योग भी करें। 
*15. सुबह खाली पेट चाय और दूध नहीं:* सुबह खली पेट चाय और, या दूध का सेवन शरीर में जहरीले तत्वों का निर्माण करता है। अत: इनको आज ही ना कहें।
*-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619, 09.10.2017*


भूई आंवला, भूमि आंवला, भूई आमला, भूमि आमला की 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक फसल (हेपेटाईटिस, लीवर सिरोसिस, किडनी संक्रमण, हाई बीपी, पथरी सहित अनेक रोगों की महौषधि)

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' महा औषधि


भूई आंवला एक अनेक रोग नाशक महा औषधि है। (Bhui Amla is a Multi-disease curable Great medicine) जिसका किसी योग्य डॉक्टर की देखरेख में, उचित मात्रा में निर्धारत समय तक सेवन करने पर बहुत सी लाइलाज/असाध्य (Incurable) समझी जाने वाली बीमारियों से मुक्ति पायी जा सकती है। लेकिन भूई आंवला ताजा, शुद्ध और 100 फीसदी आॅर्गेनिक होगा तो ही सही तथा वांछित परिणाम मिल पायेंगे। कीटनाशक तथा कैमीकलयुक्त खाद का उपयोग करने से इसके गुण कम या समाप्त हो सकते हैं। भूई आंवला की आॅर्गेनिक खेती करने पर तुलनात्मक रूप से किसान को बहुत कम उत्पादन मिलता है। यही मूल वजह है कि शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला की कीमत कई गुणी बढ जाती है, लेकिन आॅर्गेनिक खेती करने पर इसकी गुणवत्ता 100 फीसदी अक्षुण्ण अर्थात बरकरार (Quality intact) रहती है। किसी योग्य डॉक्टर की देखरेख में शुद्ध आॅर्गेनिक तथा ताजा भूई आंवला/आमला पाउडर का किसी भी रूप में उपचार हेतु उपयोग करने पर श्रेृष्ठ तथा जल्दी परिणाम मिलते हैं। जिसकी पुष्टि मेरे निजी अनुभव के साथ-साथ अनेक समर्पित चिकित्सकों ने भी की है।

आमतौर पर बरसात के मौसम में भूई आंवला बहुतायत में पाया जाता है, लेकिन खेतों में खरपतवार नाशक दवाईयों के उपयोग के कारण यह अमूल्य औषधि लगातार नष्ट होती जा रही है। इसी वजह से हमारे द्वारा शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला प्राप्त करने के लिये सीमित मात्रा में इसकी आॅर्गेनिक खेती की जा रही है। जिससे हम अपने रोगियों को शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला पाउडर उपलब्ध करवाने में समर्थ और सफल हो पाये हैं।

अनेक बार किन्हीं गम्भीर रोगियों के उपचार हेतु बहुत जरूरी होने पर कुछ मित्र चिकित्सकों को भी अत्यल्प मात्रा (Minimal quantity) में ताजा और शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला पाउडर उपलब्ध करवाने की कोशिश की जाती है। अनेक डॉक्टर्स की मांग के बावजूद हम अभी तक अर्थात 2017-2018 में आॅर्गेनिक भूई आमला को मांग के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में व्यापारिक दृष्टिकोंण से उपलब्ध करवाने की स्थिति में नहीं हैं। फिर भी हमारी कोशिश रहेगी कि लीज पर जमीन लेकर आने वाले वर्षों में शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला का उत्पादन बढाया जा सके। अभी तक के अनुभवों के अनुसार शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला निम्न तकलीफों/बीमारियों में कारगर सिद्ध हुआ है:—



1-अद्भुत दर्द निवारक/Wonderful Painkillers: शोध प्रमाणित करते हैं कि वास्तव में भूई आंवला पौधे की जड़ें शक्तिशाली दर्द अवरुद्ध/दर्द निवारण करने वाले एजेंट्स हैं जो मॉर्फिन से 3 गुना अधिक शक्तिशाली हैं। (In fact the roots of the Bhui Aamlaa plant contains powerful pain blocking agents which are 3 times more powerful than morphine.) अत: इसे किसी भी प्रकार के दर्द के निवारण के लिये उपयोग किया जा सकता है। यही वजह है कि शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला जिद्दी और लाइलाज गठिया, आमवात और जोड़ों के दर्द से मुक्ति दिलाने में उपयोगी सिद्ध हुआ है। (Pure Organic Bhui Anvla/Aamla has been proven useful to getting relief from Stubborn and incurable arthritis, rheumatoid and joint pain.)



2-गुर्दे और पित्ताशय की पथरी ब्रेकर या पथरी विनाशक (Kidney and gallbladder stone Breaker or Destroyer): भूई आमले के इसी अद्भुत गुण के कारण इसे Stone Breaker/स्टोन ब्रेकर/पथरी विनाशक नाम से भी जाना जाता है। (A study in German showed that people with gallstones that were given Stone Breaker for 2 weeks were completely healed of gallstones 94% of the time… amazing!) हमारा अपना अनुभव है कि कुछ अन्य ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक औषधियों के साथ इसका नियमित उपयोग करने से पथरी टूटकर/गलकर आराम से निकल जाती है।



3-प्रतिरक्षा प्रणाली वर्धक और एंटीऑक्सिडेंट-प्रतिउपचायक: ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है (Boosts up our Immune System), एंटीऑक्सिडेंट—प्रतिउपचायक (Antioxidant) का काम करता है। साथ ही यह यह एक अच्छा रोगाणुरोधक एजेंट भी (It’s a good antimicrobial agent too) है। इन सब गुणों के कारण एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा भी भूई आंवला के नियमित सेवन से रोगों से लड़ने की ताकत बढ जाती है। यही वजह है कि इसके सेवन से रोगी में हेपेटाइटिस, एचआईवी-पॉजेटिव, लीवर सिरोसिस, संक्रमित लीवर, संक्रमित किडनी जैसे रोगों से लड़ने की रोगी की ताकत कई गुणा बढ जाती है।



4-श्रृेष्ठ डीटॉक्स/Superior Detox: ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला को श्रृेष्ठतम डीटॉक्स के नाम से भी जाना जाता है। जिसे आम बोलचाल में हम गुर्दे, यकृत, आंतों सहित शरीर की आंतरिक सफाई करने वाली श्रृेष्ठ दवाई कह सकते हैं। यही वजह है कि यह हेपेटाइटिस, गैस्ट्रिक अल्सर, फैटी लीवर, मूत्रपथ संक्रमण, एचआईवी आदि से लड़कर, इन्हें स्वस्थ करने में मदद करता है।



5-रक्तचाप और रक्त शर्करा को कम करता है (Bhui Amla/Anvla Lowers Blood Pressure and also may help in Lowering Blood Sugar Levels): ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला का सेवन करने से उच्च रक्तचाप कम होकर हाई ब्लड प्रेशर और रक्त में शर्करा कम होने से मधुमेह/डायबिटीज रोग से मुक्ति मिलती है।



6-लीवर एवं गुर्दा संरक्षक/Liver and Kidney Protector or Guard: साधारण भाषा में भूई आंवला को लीवर एवं किडनी का संरक्षक और सुरक्षा गार्ड भी कहा जा सकता है। क्योंकि यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट (Powerful Antioxidant तथा रोगाणुरोधक एजेंट (Antimicrobial Agent) होने के साथ-साथ, इसमें शक्तिशाली उपचारक गुण (Powerful Healing Qualities) भी हैं। यही वजह है कि यह मूत्रपथ, जिगर/यकृत और गुर्दों की सफाई की सफाई करने में सक्षम होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि भूई आंवला शराब के सेवन से क्षतिग्रस्त होने वाले यकृतों को पुनर्जीवित करता है और फैटी जिगर/लीवर की बीमारी से पीड़ित लोगों को भी मदद करता है। यह मूत्र पथ के संक्रमण को खत्म करने में मदद करता है। (Studies show that Bhui aamla/Anvla revitalize livers damaged by alcohol intake. Bui Amla have powerful healing qualities including detoxing, liver cleansing, breakdown of gallbladder and kidney stones, it’s a powerful antioxidant, great for pain, great for hepatitis and HIV, and it’s a good antimicrobial agent too.) इस प्रकार बिना किसी बीमारी के भी यदि ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवले का सेवन किया जाये तो सम्पूर्ण पाचन संस्थान और मूत्र संस्थान स्वस्थ बना रह सकता है। लीवर और किडनी में संक्रमण होन पर ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला का पाउडर अमृत समान उपयोगी है।



7-अन्य: उपरोक्त के अलावा भी ताजा एवं 100 फीसदी शुद्ध आॅर्गेनिक भूई आंवला का सेवन करने से अनेकानेक बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिये स्वास्थ्य रक्षक सखा पर ''भूमि आंवला, भुई आंवला Phyllanthus Niruri, Country Gooseberry'' (http://www.healthcarefriend.in/2016/08/phyllanthus-niruri.html) शीर्षक से प्रकाशित विवरण को पढा जा सकता है।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111/27.08.2017 आॅन लाईन होम्योपैथ एवं परम्परागत चिकित्सक।

Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Health Care Friend and Marital Dispute Consultant
(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ),
Mobile & WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM)
Mob. No. नि:शुल्क स्वास्थ्य परामर्श चाहने वालों के लिये सार्वजनिक है।
इस पर फालतू सामग्री भेजने वालों को तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता है।

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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(Tribulus Terrestris) 14 फरवरी Abutilon Indicum Aerva Lanat Allergy Aloevera Juice Alternanthera Sessilis Alum Aluminum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Appetite Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Ban Tulasi Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Bone Infection Borax BPH Calories Calories Chart Cancer Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chemotherapy Chenopodium Album Chikungunya Cholesterol Cleome viscosa Clerodendrum Phlomidis Clitoria Ternatea Colocynth Colpoptosis Constipation Convolvulus Pluricaulis Corn Creak Crotalaria Bburhia Croton Bonplandianum Croton Sparsiflorus Cumin Date Palm Dengue Depression Diabetes digestion Disorders Divorce Dog Mustard Dronapushpi Dysentery Early Ejaculation Emblic Myrobalan Extramarital Relation Extremely Intolerance Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Ferrum Phosphoricum Fever Fissure Fistula Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hainampfer Hair Falling Headaches Health Health Care Friend Health Consultation Health Links Health Tips Heliotropium Eeuropaeum Hemorrhoids Hepatitis Hibiscus Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? Immunity Impotence IMPOTENCY Incurable indigestion Jaundice Juice Juice of Berries LAND CALTROPS Lemon Leucas Aspera Leucas Cephalotes Leucorrhea Lever Liver Liver Cirrhosis Liver fibrosis Low Blood Pressure Marital Dispute Consultant Masturbation Mental Mexican Daisy Mexican Poppy Migraine Migraines Myopia Neurons Night Jasmine Nutgrass Nutmeg Nutsedge Obesity Omega 3 Oroxylum indicum Painkillers Periquito Sessil Phyllanthus Niruri Piles Portulaca Oleracea Post Effect Pregnancy Safe-Guard Pregnancy Safeguard Pregnancy-Safe-Guard Premature Ejaculation Prostate Gland Protein Purple Nutsedge Raan Tulas Radish Rectal Collapse Rectal Prolapse rectum collapse Saffron Senna occidentalis Separation Sex Sexual Power Sickness Side Effects side effects less Side-Effects Spermatorrhoea Sperms Spiny Amaranth Stone Stone Breaker Sword fruit tree TECOMA STANS Thermometer Tickweed Tips Treatment of Incurable Tribulus Terrestris Tridax Procumbens Umbrella Sedge Unquenchable Conjugal Uterine Prolapse vaginal Creaks Vaginal Prolapse Viral Vitamins Vitex Negundo Wart Wheatgrass White Discharge Yellow Spider Flower अंकुरित अनाज अंकुरित गेहूं-Wheat germ अंकुरित भोजन-Sprouts अखरोट अंगूर-Grapes अचूक चमत्कारिक चूर्ण अजवाइन अजवायन अजीर्ण-Indigestion अंडकोष अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut अण्डी अतिबला अतिसार अतिसार-Diarrhea अतृप्त अतृप्त दाम्पत्य अत्यंत असहिष्णुता अदरक अदरख अंधश्रृद्धा अध्ययन अनिद्रा अपच अपराजिता अपराधबोध अफरा अफीम अमरूद अमृता अम्लपित्त-Pyrosis अरंडी अरणी अरण्ड अरण्डी अरलू अरुचि अरुचि-Anorexia-Distaste अर्जुन अर्थराइटिस अर्द्धसिरशूल अर्श अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles अलसी अल्टरनेथेरा सेसिलिस अल्सर अल्सर-Ulcers अवसाद अवसाद-Depression अश्मःभेदः अश्वगंधा अश्वगंधा-Winter Cherry असंतुष्ट असफल असर नहीं असली अस्थमा अस्थमा-दमा-Asthma आइरन आक आकड़ा आघात आत्महत्या आंत्र कृमि आंत्रकृमि-Helminth आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever आदिवासी आधाशीशी आधासीसी आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower आमला आमवात आमाशय आयुर्वेद आयुर्वेदिक आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक औषधियां आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup आयुर्वेदिक-Ayurvedic आरोग्य आँव आंव आंवला आंवला जूस आंवला रस आशावादी-Optimistic आसन आसान प्रसव-Easy Delivery आहार चार्ट आहार-Food आॅपरेशन आॅर्गेनिक आॅर्गेनिक कौंच इच्छा-शक्ति इन्द्रायण इन्फ्लुएंजा इमर्जेंसी में होम्योपैथी इमली-Tamarind Tree इम्युनिटी इलाज इलाज का कुल कितना खर्चा इलायची उच्च रक्तचाप उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension उत्तेजक उत्तेजना उदर शूल-Abdominal Haul उदासी उन्माद-Mania उपवास उम्र उल्टी ऊर्जा एक्जिमा एक्यूप्रेशर एग्जिमा एजिंग-Aging एंटी ऑक्सीडेंट्स एंटी-ओक्सिडेंट एंटीऑक्सीडेंट एण्टी-आॅक्सीडेंट एनजाइना एनीमिया एमिनो एसिड एरंड एलर्जी एलर्जी-Allergy एलोवेरा एलोवेरा जूस एल्यूमीनियम ऐंठन ऐलोपैथ ऐसीडिटी ऑर्गेनिक ओमेगा 3 के स्रोत ओमेगा-3 ओर्गेनिक औषध-Drug औषधि सूची-Drug List औषधियों के नुकसान-Loss of drugs कचनार कचनार-Bauhinia Purpurea कटुपर्णी कड़वाहट कंडोम कद्दू कनेर कपास-COTTON कपिकच्छू कपूरीजड़ी कफ कब्ज कब्ज़ कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation कब्ज. Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गलगण्ड गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गारण्टेड इलाज गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाद्वार गुदाभ्रंश गुम्मा गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गेदुआ की छाछ गैस गैस्ट्रिक गैहूं का जवारा गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखगांजा गोरखबूटी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिटकन चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाजन बूटी छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जख्म जंगली तिल्ली जंगली तुलसी जंगली पेड़ जंगली मिर्ची जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बंध्यापन बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूत-प्रेत भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्ररोग मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनिद्वारा योनिभ्रंश योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills) यौन क्षमता यौन दौर्बल्य यौन शक्तिवर्धक यौन शिक्षा यौन समस्याएं यौनतृप्ति यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea 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शीघ्रपतन शीस शुक्राणु शुक्राणु-Sperm शुक्राणू शुगर शोक शोथ शोध श्योनाक श्रेष्ठतर श्वास श्वांस श्वेत प्रदर श्वेत प्रदर-Leucorrhea श्वेतप्रदर षड़यंत्र संकुचन संकोच संक्रमण संक्रमित संक्रामक संखाहुली सगतरा संतरा-Orange संतान संतुष्टि सत्यानाशी सदा सुहागन सदाफूली सदाबहार सदाबहार चूर्ण सनबर्न सफ़ेद दाग सफेद पानी सफेद मूसली सब्जि सब्जी संभालू संभोग समर्पण-Dedication सरकार को सुझाव सरफोंका सरहटी सर्दी सर्दी-जुकाम सर्पक्षी सर्पविष सलाद संवाद संवेदना सहदेई सहदेवी सहानभूति साइटिका साइटिका-Sciatica साइड इफेक्ट्स साबूदाना-Sago सायटिका सिगरेट सिजेरियन सिर दर्द सिर वेदना सिरका सिरदर्द सिरोसिस सी-सेक्शन सीजर डिलेवरी सुगर सुदर्शन सुहागा सूखा रोग सूजन सेक्स सेक्स उत्तेजक दवा सेक्स परामर्श-Sex Counseling सेक्स पार्टनर सेक्स पावर सेक्स समस्या सेक्स हार्मोन सेक्‍स-Sex सेंधा नमक सेब सेमल-Bombax Ceiba सेल्स सोजन-सूजन सोंठ सोना पाठा सोयाबीन सोयाबीन (Soyabean) सोयाबीन-Soyabean सोराइसिस सोरियासिस-Psoriasis सौंठ सौंदर्य सौंदर्य-Beauty सौन्दर्य सौंफ सौंफ की चाय सौंफ-Fennel स्किन स्खलन स्तन स्तन वृद्धि स्तनपान स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्पर्श स्मृति-लोप स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य परामर्श स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डी संक्रमण हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हाई बीपी हाथ-पैर नहीं कटवायें हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हुरहुर हुलहुल हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हेल्थ बुलेटिन हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्यापैथ होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक इलाज होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy