मनोशारीरिक विकारों की अनदेखी सेक्स जीवन बर्बाद कर सकती है।
लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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मनुष्य ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव-जन्तु के जीवन में सेक्स एक अनिवार्य क्रिया है। जिससे यह संसार संचालित हो रहा है। मनुष्य के लिये सेक्स अत्यधिक सुखद और आनन्ददायक क्रिया है। यही वजह है कि प्रत्येक स्त्री और पुरुष को एक उम्र के बाद विवाह से पूर्व और विवाह के बाद सुखद सेक्स का आनन्द की अतृप्ति/Dissatisfaction बनी रहती है। सेक्स की अतृप्त इच्छा बनी रहना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि ऐसा बहुत ही स्वाभाविक है। आमतौर पर सेक्स में स्त्री की सन्तुष्टि को पुरुष की सेक्स करने की कला या शारीरिक क्षमता या पौरुष/Virility से जोड़ा जाता है। इस कारण प्रत्येक पुरुष के लिये अपनी सेक्स पार्टनर को संतुष्ट करना बहुत ज़रूरी समझा जाता है। अगर किसी कारण से कोई पुरुष अपनी सेक्स पार्टनर को सन्तुष्ट नहीं कर पाता है या किसी कारण से कोई स्त्री, अपने पुरुष साथी से सन्तुष्ट नहीं हो पाती है तो इसे सीधे पुरुष की योन क्षमता या मर्दानगी में कमी करार दे दिया जाता है। जो बिलकुल भी सही और उचित नहीं है। क्योंकि अनेक बार, अनेक कारणों से जो असहज हालातों में अनेक पुरुष सही से सेक्स नहीं कर पाते हैं या लम्बे समय तक सेक्स करना चाहते हैं, मगर अधिकतर मामलों में वे सफल नहीं हो पाते हैं। यह असफलता उन्हें हर वक्त सताती है। इस कारण उनको अपराधबोध (Guilty Feeling) आ घेरता है। उनका घरेलु और व्यावसायिक/कार्यालयीन कार्यों में मन नहीं लगता। अनेक पुरुष इस कारण तनाव और अवसाद (Stress and Depression) से ग्रस्त होकर विभिन्न मानसिक और शारीरिक बीमारियों के शिकार होते हुए देखे जा सकत हैं।
इसी प्रकार पुरुष के सम्पूर्ण रूप से शारीरिक रूप से सक्षम होने और पुरुष के सभी प्रकार के प्रयासों के बाद भी अनेक औरतें सेक्स के दौरान सन्तुष्ट नहीं हो पाती हैं। जिससे ऐसी स्त्रियां भी तनाव और अवसाद से ग्रस्त होकर अनेक शारीरिक बीमारियों सहित, हिस्टीरिया (Hysteria) से पीड़ित होती देखी जा सकती हैं।
इसलिये बार-बार यह सवाल उठता रहता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है?
हमारे पास प्रतिदिन आने वाले टेलीफोन/मोबाईल काल्स में 18 वर्ष से 60 वर्ष तक के पुरुषों के लिये यह एक जटिल सवाल (Knotty Question) और अनसुलझी समस्या (Unsolved Problem) बना हुआ है। सेक्स में असन्तुष्टि से ऐसे स्त्री-पुरुष अत्यधिक परेशान रहते हैं। हजारों-लाखों लोगों का दाम्पत्य जीवन (Married Life) इस कारण बिखर कर बर्बाद हो रहा है। इसी कारण अनेक लोग तलाक लेने को विवश हो रहे हैं और दु:खद कड़वा सच यह भी है कि कुछ कमजोर मानसिकता के लोग आत्मघात (Suicide) तक कर लेते हैं। अत: '
स्वास्थ्य रक्षक सखा' के पाठकों के लिये इस विषय पर 1990 से और वर्तमान तक हजारों स्त्रियों और पुरुषों की सेक्स समस्याओं के समाधान और उपचार के अनुभवों पर आधारित महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत है:—
1. सेक्स एज्युकेशन/Sex Education : सभी जीवों में सेक्स ओपन अर्थात् सरेआम होता है। अत: उनकी नयी पीढी को किसी प्रकार की औपचारित सेक्स एज्युकेशन की जरूरत नहीं होती है। इसके विपरीत मानव ने, विशेषकर भारतीय उपमहाद्वीप में सेक्स को गुप्त, गोपनीय और घृणित करार देकर, सेक्स के बारे में प्रत्येक युवा होने वाली, नयी पीढी को मानसिक और सामाजिक रूप से असहज बना दिया है। भारत में एक मोपेड को चलाने के लिये तो लाईसेंस की जरूरत होती है, लेकिन यौन जीवन प्रारम्भ करने के लिये किसी प्रकार की सेक्स एज्युकेशन या ज्ञान की कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है। यही वजह है कि बिना वैज्ञानिक, सही और जरूरी ज्ञान के सेक्स जीवन का असहज, असन्तुष्ट और तनावपूर्ण रहना स्वाभाविक है। अत: बहुत जरूरी है कि सभी स्त्री-पुरुष सेक्स का सही ज्ञान प्राप्त करें। वर्ष 1997 से हमारी ओर से व्यावसायिक दाम्पत्य सलाहकार के रूप में सेवाएं प्रदान की जाती रही है। अब तक कई सौ दम्पत्ति (Couple) इसका लाभ उठा चुके हैं।
2. सेक्स पर खुलकर चर्चा जरूरी है : सेक्स पार्टनर या पति-पत्नी को केवल शरीररिक तौर पर या शक्ल-ओ-सूरत से जानना ही पर्याप्त नहीं होता है, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं, मानसिक स्थिति और शारीरिक जरूरतों पर खुलकर आपसी चर्चा करना बेहद जरूरी होता है। आश्चर्यजनक रूप से अनेक पति-पत्नी वर्षों साथ रहने के बाद भी सेक्स जरूरतों पर सहज होकर चर्चा नहीं कर पाते हैं। जो उनके दु:खद सेक्स का मूल कारण हो सकता है।
3. रोमांस (Romance) के जरिये जीवन में रोमांच (Excitement) पैदा करें : बिना रोमांच के जीवन निरर्थक है। रोमांच के बिना सेक्स का कोई मूल्य ही नहीं है। अत: पति-पत्नी या सेक्स पार्टनर्स को रोमांस का व्यावहारिक अनुभव और महत्व समझना बहुत जरूरी है। जिससे जीवन में रोमांच और ताजगी बनी रहे।
4. फोरप्ले (Foreplay) अर्थात संभोग पूर्व क्रीड़ा : आमतौर पर सेक्स की उतावली में पुरुष फोरप्ले को नकारते हैं। या उनको सेक्स में अधैर्य के कारण फोरप्ले का व्यावहारिक महत्व समझ में नहीं आता है। इसके चलते स्त्री को सेक्स में सन्तुष्टि नहीं मिल पाती है और सेक्स सम्बन्धों में निराशा और रूखापन आ जाता है। जिसके चलते यौन जीवन बिखर सकता है।
5. सेक्स के दौरान पूर्वाग्रहों से मुक्ति जरूरी : किसी बुरे, अप्रिय, अनुभव, धुत्कार, असफलता या पर-पुरुष या पर-स्त्री यौन अनुभव के कारण या अन्य किसी कारण से अनेक स्त्री-पुरुष शारीरिक रूप से सेक्स करने से पूर्व, मन ही मन में सेक्स के बारे में अनेक प्रकार की कल्पनाएं करके, सेक्स के सम्भावित अंतिम अंजाम (Possible Final Result) तक पहुंच जाते हैं। जिसके कारण उनके द्वारा वास्तव में सहजता से सेक्स करना असम्भव हो जाता है। लगातार और लम्बे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहने के कारण, अकसर ऐसे स्त्री-पुरुष सेक्स में असफल या असन्तुष्ट पाये जाते हैं। स्त्री आनन्द के चर्मोत्कर्ष (Orgasm or Climax) पर पहुंचने से पहले ही पुरुष स्खलित हो जाते हैं या पुरुष के पर्याप्त समय तक सेक्स जारी रखने के बाद भी स्त्री उत्तेजना और आनन्द की अनुभूतिक (Excitement and Pleasure) का अनुभव ही नहीं कर पाती है। इसके कारण अनेक बार पुरुष अपने आप को असक्षम या नपुंसक और स्त्री खुद को फ्रिजिडिटी का शिकार अनुभव करने लगती है। ऐसे में स्त्री के मन में सेक्स के प्रति अरुचि या घृणा हो उत्पन्न हो सकती है। इस स्थिति का जल्दी से जल्दी उचित परामर्श के जरिये समाधान बहुत जरूरी होता है।
6. मनोशारीरिक विकार : कुछ स्त्रियों और पुरुषों में वास्तविक मानसिक और शारीरिक समस्याएं देखने को मिलती हैं। जिनके चलते उन्हें अन्तर्द्वन्द्व से गुजरना पड़ता है। ऐसे हालात उत्पन्न हो जाते हैं, जब मन साथ देता है तो शरीर साथ नहीं देता और शरीर साथ देता है तो मन इनकार कर देता है। यदि लम्बे समय तक इसका समाधान नहीं हो तो यह स्थिति भी पुरुष को नामर्द और स्त्री को ठण्डी बना सकते हैं। अत: इस स्थिति का भी जल्दी से जल्दी उचित परामर्श के जरिये सही समाधान बहुत जरूरी होता है।
7. औषधीय उपचार : सेक्स से सम्बन्धित करीब 10 फीसदी मामले ही ऐसे होते हैं, जिनमें केवल औषधीय उपचार (Medicinal Treatment) ही एक मात्र समाधान होता है। अन्यथा अधिकतर मामलों में मनोशारीरिक चिकित्सा की जरूरत होती है। जिसमें उचित परामर्श और औषधीय उपचार दोनों का संयुक्त समावेश होता है। जिन मामलों में औषधीय उपचार की जरूरत होती है। उन में सेक्स उत्तेजक दवाईयों का उपयोग हानिकारक हो सकता है। अत: आयुर्वेद और होम्योपैथी का औषधीय उपचार दुष्प्रभाव रहित, सुरक्षित, बेहतर और दीर्घकालिक और स्थायी परिणाम दायक होता है।
उपरोक्त के अलावा स्वस्थ और सफल सेक्स के लिये—
1. सही समय पर उचित, नियमित एवं पोषक भोजन।
2. नियमित और उचित व्यायाम।
3. पर्याप्त नींद।
4. तनाव रहित तथा नशामुक्त सहज जीवन बहुत जरूरी है।
और
5. मनोशारीरिक विकारों की अनदेखी नहीं करें। अन्यथा यह आपके यौन जीवन बर्बाद कर सकती है।
सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
परम्परागत एवं होम्योपैथ चिकित्सक
M/WA No. : 9875066111/11.01.2017
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परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111