============
पवाड़, चिरोटा या चक्रमर्द – फालतू समझकर ना फेंके इसे, ये पौधा आधा दर्जन रोगों की रामबाण दवा है…….
Posted on May 28, 2014
by Swami Devaishta chakoda
चिरोटा या चक्रमर्द हिन्दुस्तान के हर प्रांतों में भरपूर देखा जा सकता है। खेत-खलिहानों, मैदानी भागों, सड़क के किनारे और जंगलों में प्रचुरता से पाए जाने वाले इस पौधे में अनेक औषधीय गुणों की भरमार है। हालांकि इसे किसी खरपतवार से कम नहीं माना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम केस्सिया टोरा/ है। चिरोटा से जुड़े हर्बल नुस्खों को और जानें किस तरह से आदिवासी इसे इस्तेमाल करते हैं। फालतू समझकर ना फेंके इसे, क्योंकि ये पौधा आधा दर्जन रोगों की रामबाण दवा है:—
1–आदिवासी अंचलों में इसकी पत्तियों का उपयोग भाजी के तौर पर भी होता है और ऐसा माना जाता है कि यह भाजी अत्यधिक पौष्टिक होती है और इसे आदिवासी रसोई में भाजी के तौर पर पकाया और बड़े चाव से खाया जाता है।
2–यदि किसी व्यक्ति को दाद-खाज और खुजली की समस्या हो तो चिरोटा के बीजों को पानी में कुचलकर रोग-ग्रस्त अंग पर लगाने से फायदा होता है। आधुनिक विज्ञान भी इसके एंटी-बैक्टिरियल गुणों को साबित कर चुका है।
3–पीलिया होने पर डांग गुजरात के हर्बल जानकार चिरोटा की पत्तियों और बीजों का काढ़ा रोगी को देते है। लगभग 50 ग्राम पत्तियों को 2 कप पानी में उबाला जाता है, जब पानी एक कप शेष बचता है तो इसे छानकर रोगियों को दिया जाता है। माना जाता है कि पीलिया जल्द ही ठीक हो जाता है।
4–इसकी जड़ों के चूर्ण में थोड़ी सी मात्रा में नींबू का रस मिलाया जाए और दाद-खाज पर लगाया जाए। लेपित करने के बाद इस पर सूती कपड़े की पट्टी लपेट दी जाए। प्रतिदिन ऐसा करने से एक सप्ताह के भीतर ही दाद-खाज की छुट्टी हो जाती है।
5–पत्तियों और बीजों को कुचलकर पेस्ट तैयार किया जाए और इस पेस्ट को बवासीर होने पर रोगी के घाव को बाहर से लेपित किया जाए, आराम मिल जाता है।
6–पातालकोट के आदिवासी मुर्गी के अंडों से एल्बूमिन (अंडे के अंदर का चिपचिपा तरल पदार्थ) के साथ पत्तियों को अच्छी तरह से फेंट कर टूटी हुयी हड्डियों के ऊपर प्लास्टर की तरह लगाते है, इनका मानना है कि ये हड्डियों को जोडऩे का कार्य करता है।
7–पत्तियों के काढे को दांतों पर लगाने और इसी काढे से कुल्ला करने से से दांतों की समस्या जैसे दांत दर्द, मसूड़ों से खून आना आदि शिकायत में आराम मिलता है।
8–लगभग 10 ग्राम बीजों को एक कप पानी में उबालकर काढा तैयार कर बच्चों को देने से पेट के कृमि मर जाते हैं और शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।
9–चिरोटा की पत्तियों और बीजों का उपयोग अनेक रोगों जैसे दाद-खाज, खुजली, कोढ, पेट में मरोड़ और दर्द आदि के निवारण के लिये किया जाता है। आदिवासियों के अनुसार पत्तियों को बारीक पीसकर दाद-खाज, खुजली, घाव आदि पर लगाया जाए तो अतिशीघ्र आराम मिल जाता है।
साभार: https://sambodhihealingcenter.wordpress.com/2014/05/28/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A5%82/
------------
NOTE: यहां पर सभी लेखों में लिखी गयी दवाईयों का विवरण जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा मोल नहीं लें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.] हमारे 95 फीसदी रोगियों को व्यक्तिगत रूप से हम से आकर मिलने की जरूरत नहीं पड़ती। यद्यपि रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
My Whatsapp No. : 8-5619-5-5619