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पित्ताशय/गाल ब्लैडर/Gallbladder पथरी: होम्योपैथिक उपचार
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
पित्त, पित्ताशय, पित्त, पित्त पथरी और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में 'पित्ताशय/गाल ब्लैडर/Gallbladder पथरी: आयुर्वेदिक उपचार' शीर्षक पूर्व प्रकाशित लेख में जानकारी दी जा चुकी है। पित्ताशय की पथरी के उपचार में आयुर्वेद के साथ-साथ होम्योपैथी की दवाईयों (Medicines) से भी आश्चर्यजनक परिणाम मिलते हैं। अत: जनहित में पित्ताशय की पथरी के होम्योपैथिक उपचार हेतु स्वास्थ्य जनजागरण हेतु संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत है। कृपया इसे पढकर खुद अपना इलाज करने का रिस्क नहीं लें।
सबसे पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि होम्योपैथी के मूल सिद्धान्त के अनुसार, होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। केवल इतना ही नहीं, बल्कि दो रोगियों की एक जैसी बीमारी के लिये अलग-अलग दवाई दी जा सकती है और एक ही दवाई से एक या एकाधिक रोगियों के अनेक रोगों को ठीक किया जा सकता है। इसकी मूल वजह यह है कि होम्योपैथी में रोग का नहीं, बल्कि रोगी का इलाज किया जाता है। रोगी के लक्षणों के अनुसार दवाई का चयन/सिलेक्शन करके रोगी की सभी मानसिक एवं शारीरिक बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। इसी सिद्धान्त के अनुसार पित्ताशय की पथरी से पीड़ित रोगियों के प्रमुख लक्षणों के अनुसार प्रस्तुत मुख्य-मुख्य होम्योपैथिक दवाईयों को उनके नाम के साथ लिखे गये लक्षणों से मिलान करके उपयोग में लाया जाता है। लेकिन याद रहे किसी भी रोग के इलाज के लिये किसी भी होम्योपैथिक दवाई के लक्षणों का मिलान कर लेनाभर पर्याप्त नहीं होता है। रोग निदान के लिये रोगी की प्रतिरोधक शक्ति, स्वभाव, नशे-खाने-पीने-सोने-टेंशन की आदतें आदि सम्पूर्ण लक्षणों को जानने के बाद ही होम्योपैथिक दवाई की उचित शक्ति और मात्रा का निर्धारण किया जा सकता है। यह कार्य कोई अनुभवी होम्योपैथ ही कर सकता है।
1. लाइकोपोडियम (Lycopodium): लक्षण-पेट के ऊपरी और दाहिने हिस्से में ऐसा दर्द होना जो तेलयुक्त पदार्थ खाने से बढ़ना। रोगी को बार-बार मलत्याग की इच्छा होती है। उसके पेशाब में ईंट के चूरे के समान लाल रंग के बारीक कण निकलते हैं। सामान्यत: रोगी पेट का साफ नहीं होना।
2. बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulgaris): लक्षण-लीवर के नीचे स्थित पित्ताशय से दर्द शुरू होकर पेट के निचले हिस्से या पाँव तक पहुँच जाता है। दर्द वाले स्थान पर दबाने और हरकत करने अर्थात हल-चल करने से दर्द का बढ़ जाता है। दर्द से राहत पाने के लिये रोगी दाहिनी ओर झुकता हुआ देखा जा सकता है। बार-बार पेशाब करने की इच्छा के साथ-साथ पेशाब में पीले या चमकदार लाल रंग के चूरे के बारीक कण निकलते हैं। पेशाब कर लेने के बाद भी रोगी को ऐसा महसूस होना, जैसे मूत्राशय में कुछ पेशाब शेष रह गया हो।
3. कल्केरिया कार्बोनिका (Calcarea Carbonica): लक्षण-यह दवाई मोटे और थुलथुले लोगों के लिये अधिक उपयुक्त है। पित्ताशय में तीव्र दर्द होना। खट्टी डकारें आना और खट्टे पित्त की उलटी भी होना। अधिक पसीना आना। सिर में अत्यधिक पसीना आना, लेकिन रोगी को ठंडी हवा सहन न होना। जबकि खाने-पीने में गरम पदार्थ अच्छे नहीं लगना और ठंण्डे पदाथों की चाहत। इसके अलावा अंडा, पेंसिल, चाक, नींबू, खड़िया आदि खाने की विशेष चाहत/इच्छा।
4. नक्स वोमिका (Nux Vomica): नोट: रोगियों के शरीर में आधुनिक चिकित्सा या आयुर्वेद की दवाईयों के शेष रहे प्रभाव/दुष्प्रभावों को नष्ट करने के लिये सामान्यत: इस दवा का उपयोग किया जाता है। लक्षण-अनियमित दिनचर्या वाले तुनक-मिजाज (Short Tempered) लोगों, जिनके खाने, पीने, जागने और सोने का कोई निश्चित समय तय नहीं होता। उन्हें यह दवाई उपयोगी होती है। ऐसा लगता है जैसे पित्ताशय की पथरी, पित्त-नली में कहीं अटक गयी है। जिसका बार-बार दर्द उठ रहा है। भूख कम लगना। कभी कब्ज होना तो कभी पतले दस्त हो जाना। बार-बार मलत्याग की इच्छा होना, लेकिन जाने पर मलत्याग न होना या बहुत ही कम मलत्याग होना। मलत्याग के लिये बैठने पर ऐसा लगना जैसे थोड़ा और-थोड़ा और मलत्याग होगा, लेकिन मलत्याग होता नहीं है। यही लक्षण पेशाब के समय भी हो सकता है। अनेक बार पेशाब बूंद-बूंद करके आता है। पेशाब में खून आना। खांसने से पेशाब निकल जाना।
5. चियोनैंथस वर्जिनिका (Chionanthus Virginica): लक्षण-आंखों की श्लेष्मा झिल्ली में पीलापन। जीभ पर पीली परत जमना। मुंह सूखा होना, किन्तु फिर भी पानी पीने के बाद भी सूखेपन के अनुभव में राहत नहीं। पेट में ऐसा दर्द होना जो पित्ताशय से मूत्राशय तक बढ़ा हुआ मालूम होता है। रोगी को पीलिया हो सकता है। सलेटी रंग का मलत्याग। पेशाब गाढ़े पीले रंग का आना। त्वचा में पीलापन/पिलांसा सा दिखना।
6. चेलिडोनियम मेजस (Chelidonium Majus): लक्षण-पीठ के पीछे की ओर दाहिने कन्धे की तरफ जो अस्थि-फलक है, उसके नीचे लगातार दर्द होते रहना। रोगी को भूख न रहे या कम लगे, जी मिचलाये और पित्त की उल्टी हो। पित्त की पथरी जब पित्ताशय छोटी-सी नलिकाओं में फंस जाती है, तो इससे भयंकर पीड़ा होती है। चेलिडोनियम इस रुकावट को खोल देती है और पित्त-पथरी निकल जाती है। विशेष लक्षण पीड़ित व्यक्ति ठंडा पानी नहीं पीना चाहता सकता। लेकिन गर्मागर्म पानी या पेय हो तो उसे सुहाता है। वह खाली पेट नहीं रह सकता। कुछ न कुछ खाने को अवश्य चाहिये।
उपरोक्त के अलावा रोगी के लक्षणों के अनुसार चाइना (China), फॉस्फोरस (Phosphorus), मेन्था पिपेरिटा (Mentha Piperita), कार्डुअस मेरिएनस (Carduus Marianus), कोलेस्टेरीनम (Cholesterinum) इत्यादि का भी उपयोग किया जा सकता है।
उपरोक्त के अलावा होम्योपैथी की छोटी बहन के नाम से जानी जाने वाली बॉयोकेमिक दवाईयां (जिन्हें 12 साल्ट के नाम से जाना जाता है) भी लक्षणानुसार पित्ताशय की पथरी के इलाज में महत्वूपर्ण साबित हो सकती हैं।
नोट:
1-यहां प्रस्तुत सामग्री के आधार पर, बिना किसी डॉक्टर की सलाह के खुद ही, अपना उपचार करना उचित नहीं है।
2-यदि उक्त सामग्री आपको उपयोगी लगे तो इसे जनहित में अपने जान-पहचान वाले लोगों के साथ साझा किया जा सकता है।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
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Jaipur, Rajasthan 03 दिसम्बर, 2017
होम्योपैथिक दवाइयों का सेवन कैसे करे?
How to take homeopathic medicines?
लेखक : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
यदि हम स्वस्थ-दीर्घ जीवन जीना चाहते हैं तो हमें अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिये। मगर आज के समय में स्वस्थ रहना भी आसान नही है। अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो आपको इसके लिए भी दवाइयों का ही सहारा लेना पड़ता है। फिर चाहे वो ऐलोपैथिक हो या आयुर्वेदिक हो या होम्योपैथिक, दवा तो लेनी ही पड़ेगी। फिर हम सभी जानते हैं की ऐलोपैथिक के साइड एफेक्ट ही कभी-कभी बड़ी बीमारियां पैदा कर देते हैं। इसी कारण अधिकांश लोगों का झुकाव आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाइयों की तरफ तेजी से बढता जा आहा है।
लेकिन यदि हम होम्योपैथिक दवाइयां ले रहे हैं तो हमें कई सावधानियां बरतनी होती हैं। आप अच्छे से और टाईम से दवा लेते हो, लेकिन अगर कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान नहीं देते हैं, तो होम्योपैथिक दवाइयों का प्रभाव/असर/Effect बहुत ही कम होगा। अत: होम्योपैथिक दवादयों को कैसे लें या इस होम्योपैथिक ट्रीटमेंट में क्या-क्या सावधानियां होनी चाहिए इस विषय को गहराई समझना होगा।
1. दवाई को टच नहीं करें : अगर आपकी होम्योपैथिक दवाइयां पिल्स या तरल द्रव्य/लिक्विड में लेनी हैं तो आपको दवाइयों को टच नहीं करना/छूना नहीं चाहिये। दवाइयों की पिल्स/साबूदाने जैसी बारीक गोलियां पिल्स कहलाती हैं/ को आप दी गयी सीसी/बॉटल के ढक्कन में डालकर या किसी अलिखित साफ पेपर पर रखकर मुख/जीभ पर डालकर चूस सकते हैं। लिक्विड को सीधे जीभ पर टपका सकते हैं या डॉक्टर की राय के अनुसार आधा कप पानी में मिलाकर बिना हाथ लगाये सेवन कर सकते हैं।
2. दवाई लेने से पहले हर बार कुल्ला करें और जीभ को साफ करें : मैं होम्योपैथिक दवाई के सेवन के लिये रोगी को सलाहदेता हूँ कि जब भी दवाई लें, हर बार पानी से अच्छे से कुड़-कुड़ करके कुल्ला करें और जीभ को साफ कर लें। जिससे मुंह में किसी प्रकार की बदबू नहीं रहे और जीभ पर गंदगी नहीं रहे। इसके बाद जीभ पर पिल्स को आराम से चूसें और पिल्स चूसने के आधा घंटे बाद तक न कुछ खायें न कुछ पियें। दवाई लेने से पूर्व जो कुछ खाना-पीना हो, उसका कुल्ला करने से पहले सेवन कर लें। इस प्रकार से सेवन करने से आश्चर्यजनक सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।
3. आधे घंटे का नियम : अगर आप होम्योपैथिक दवाइयों को कभी भी किसी भी समय दवा लेते हैं तो आप होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के सिद्धान्तों के विपरीत दवाई लेकर गलत कर रहे हैं। कोई भी होम्योपैथिक दवा लेने के आधा घंटा पहले और आध घंटा बाद कुछ नहीं लेना चाहिए। अगर कोई ऐसी कंडीशन/परिस्थिति आती है, जिसमें कि आपको कुछ लेना है तो भी कम से कम 20 मिनिट टाइम देना ही पड़ेगा। यह होम्योपैथिक दवाई लेने का मूलभूत नियम बताया जाता है।
मेरा निजी अनुभव : दवाई लेने के बाद आधा घंटे का नियम बहुत जरूरी है। दवाई लेने से पहले आधा घंटे का नियम अनिवार्य नहीं है। बल्कि इसके बजाय मैंने निम्न नियम का अनुसंधान किया है।
4. दवाइयों को कहाँ नहीं रखे कहाँ नहीं रखें :
- (1) होम्योपैथी की दवाइयों को सामान्य तापमान में रखना उचित होता है।
- (2) बेहतर होगा कि आप दवा को ठंडे स्थान पर रखें।
- (3) 30 डिग्री सेल्सीयस टेंपरेचर से अधिक तापमान पर ना रखें।
- (4) खुश्बू वाली जगह, जैसे महिलाओं के सौन्दर्य प्रसाधनों और अगरबत्ती आदि के नजदीक भी नहीं रखें।
- (5) बदबू वाली जगह, जैसे शराब, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, तम्बाकू आदि के नजदीक भी नहीं रखें।
- (6) दवाइयों को छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रखें। क्योंकि लिक्विड वाली दवाइयां एल्कोहल बेस होती हैं, जिनके अधिक सेवन करने से छोटे बच्चों को हानि हो सकती है।
5. दवाई लेने का निर्धारित समय : अगर आपको कोई दवा दिन मे एक बार लेनी होती है, तो कभी आप उसे मॉर्निंग मे लेते हैं, और कभी नाइट में, और कभी शाम में। यदि आप ऐसा कर रहे हैं तो गलत तरह से दवा ले रहे हैं। डॉक्टर ने अगर आपको किसी दवा को सुबह लेने को कहा है तो हमेशा सुबह ही लें। तभी आपको उसका परिणाम मिलेगा। और अगर आपको 2 या 3 दवाइयां लेनी होती हैं और आप सभी को एक साथ या कुछ मिनट के अन्तराल से लेते हैं तो भी आप सही नहीं कर रहे हैं। दवा सेवन करते समय आपको डॉक्टर के निर्देशों का सही से पालन करना चाहिये।
6. दवाई सेवन करते समय नशा नहीं करें : अगर आप बीड़ी, हुक्का, सिगरेट, गुटखा, किसी भी रूप में तम्बाकू (टोबेको), शराब, बीयर आदि किसी भी नसे का सेवन करते हैं तो आपको होम्योपैथिक दवाई कोई असर नहीं करेगी। बल्कि रोगी को नुकसान हो सकता है।
7. प्याज़, लहसुन और अदरक/अनियन, गार्लिक एण्ड जिंजर नहीं : प्याज़, लहसुन और अदरक जैसी तेज गंध या दुर्गंध वाली चीजों का सेवन नही करना चाहिए। अगर आप प्याज़ या लहसुन को ना नहीं कह पाते हैं तो आप दवा लेने के 1 घंटे पहले और 1 घंटे पहले इनका सेवन कर सकते हैं।
8. दूसरी पैथी की दवाइयों का सेवन करें या नहीं : होम्योपैथी का मूल सिद्धान्त तो यह है कि अगर आप होम्योपैथिक दवाइयों/मेडिसिन के साथ-साथ ऐलोपैथिक दवाइयां भी लेते हैं तो आप अपने पैसे बर्बाद कर रहे हैं। आपको ऐलोपैथिक दवाइयों/मेडिसिन के साथ होम्योपैथिक दवाई कभी नही लेनी चाहिये। आयुर्वेदिक दवाई लेने को अवश्य उचित बताया जाता है। लेकिन इस सिद्धान्त के विपरीत अनेक क्लीनिकल अनुभवों के आधार पर अनेक होम्योपैथ का कहना है कि अनेक रोगी होम्योपैथी के साथ ऐलोपैथिक और आयुर्वेद की दवाइयां लेते रहे होते हैं और फिर भी सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। मेरा व्यक्तिगत मत है कि एक से अधिक पैथी की दवाई नहीं लेनी चाहिये, या कम से कम लेनी चाहिये, क्योंकि इससे रोगी को किस पैथी से आरोग्य प्राप्त हुआ, इसका सही-सही पता नहीं चल पाता है। यद्यपि रोगियों में विश्वास और धैर्य की कमी के कारण ही ऐसा होता है।
9. चाय/कॉफी : चाय कॉफी का सेवन करना होम्योपैथिक दवाइयों के सेवन के दौरान अच्छा नही है। अत: रोगियों को चाहिये कि होम्योपैथिक दवाइयों सेवन करने के दौरान चाय/कॉफी लेना बंद ही कर दे।
10. परहेज : उपरोक्त दिशानिर्देशों के अलावा सामान्यत : आयुर्वेद की भांति होम्योपैथी में किसी प्रकार का कोई परहेज नहीं होता है। यद्यपि खुद रोगी को इस बात को जानता है कि उसे किन खाद्य और पेय पदार्थों का सेवन करना या नहीं करना लाभदायक या हानिकारक है। अत: इस बात का खुद रोगी को ही पालना करना चाहिये।
लेखक :————>>>>>>>>
सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
परम्परागत एवं होम्योपैथ चिकित्सक
M/WA No. : 9875066111/02.01.2017
Web Site : http://www.healthcarefriend.in/
facebook page : https://www.facebook.com/healthcarefriendpage/
उपशीर्षक:
Homeopathic,
आयुर्वेद,
कुल्ला,
कॉफी,
खुश्बू,
चाय,
परहेज,
बदबू,
होम्योपैथिक,
होम्योपैथी
Monday, January 02, 2017
एलर्जी का उपचार
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>>>>>एलर्जी (Allergy) एवं अतिसंवेदनशीलता (Oversentiveness) : किसी भी वस्तु का अनुभव करना संवेदनशीलता कहलाता है और जो व्यक्ति अधिक संवेदनशील होता है, उसे छोटी सी व्स्तु भी बहुत बड़ी महसूस होती है, अधिक संवेदनशीलता होने के कारण रोग ग्रस्त स्थान पर हल्का सा छू देने से भी तेज दर्द होता है और छू जाने के डर से भी रोगी काँप उठता है। इस तरह हल्का सा छूने से उत्पन्न दर्द आदि को ही अतिसंवेदनशीलता कहते है।
>>>>>कभी-कभी संवेदनशीलता गंभीर परेशानी का सबब बन जाती है, जब हमारा शरीर किसी पदार्थ के प्रति अतिसंवेदनशीलता दर्शाता है तो इसे एलर्जी कहा जाता है और जिस पदार्थ के प्रति प्रतिक्रिया दर्शाई जाती है, उसे एलर्जेन [Allergens= A substance (पदार्थ) that causes an allergic reaction (एलर्जी की प्रतिक्रिया)] कहा जाता है। इस रोग के कारण रोगी के शरीर पर छोटे-छोटे दाने निकल आते है और कभी-कभी तो इन दानों के साथ शरीर में खुजली भी मचने लगती है। इस रोग के कारण कभी-कभी रोगी के गाल तथा शरीर की त्वचा शुष्क हो जाती है।
एलर्जी की प्रतिक्रियाएं :
>>>>>अस्थमा (asthma), राइनाइटिस (Rainaitis/नासा शोध), एक्जिमा (Eczema/शरीर पर दाग धब्बे निकल जाना), माइग्रेन (आधे सर का दर्द ), पाचन संबंधी विकार (भोजन पचने में परेशानी)। इसके अलावा इस रोग के कारण व्यक्तियों को अन्य अनेक प्रकार की बीमारियां भी होती देखी जाती हैं, जो की हृदय रोग, अल्सर, दमा, एक्जिमा व मधुमेह आदि, एलर्जी के कारण रोगी एनाफाएजेटिक शॉक में भी जा सकता है और आपात्कालीन स्थिति निर्मित हो सकती है।
एलर्जी होने के कारण :
1. प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार एलर्जी उन लोगों को होती है, जिनके शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है।
2. यह रोग नशीले पदार्थों के सेवन, हानिकारक पदार्थ का पेट में चले जाना, पेट में कीड़े होना तथा रसायन युक्त भोजन का सेवन, सोंदर्य प्रसाधनों, किसी विशेष प्रकार का भोजन ग्रहण करने के कारण हो सकता है।
3. औषधियों का अधिक प्रयोग करने के कारण भी एलर्जी हो सकती है।
4. चीनी का अधिक सेवन करना या इससे बनी मिठाइयों का सेवन करने से भी एलर्जी रोग हो सकता है।
5. सिंथेटिक कपडे पहनने तथा अत्यधिक मानसिक तनाव हो जाने के कारण भी एलर्जी रोग हो सकता है।
6. बीमारी की हालत में अधिक सेक्स करने से भी एलर्जी रोग हो सकता है।
7. अधिक सोड़े वाला साबुन उपयोग करने से भी एलर्जी रोग हो सकता है।
8. कुछ लोगों में एलर्जी का कारण खाद्य पदार्थ होता है-जैसे दूध, दही, मछली, अंडे, गिरीदार फल आदि।
9. एलर्जी गेहू का आटा या चॉकलेट खाने से भी एलर्जी हो सकती है।
10. एंटीबायोटिक दवाइयों का प्रयोग करना तथा ज्वेलरी आदि से भी एलर्जी हो सकती है.
स्थानानुसार एलर्जी के लक्षण :
1. नाक की एलर्जी-नाक में खुजली होना, छीकें आना, नाक बहना, नाक बंद होना या बार बार जुकाम होना आदि।
2. आँख की एलर्जी-आखों में लालिमा, पानी आना, जलन होना, खुजली आदि।
3. श्वसन संस्थान की एलर्जी-इसमें खांसी, साँस लेने में तकलीफ एवं अस्थमा जैसी गंभीर समस्या हो सकती हैं।
4. त्वचा की एलर्जी-त्वचा की एलर्जी काफी कॉमन है और बारिश का मौसम त्वचा की एलर्जी के लिए बहुत ज्यादा मुफीद है, त्वचा की एलर्जी में त्वचा पर खुजली होना, दाने निकलना, एक्जिमा, पित्ती उछलना आदि होता है।
5. खान पान से एलर्जी-बहुत से लोगों को खाने पीने की चीजों जैसे दूध, अंडे, मछली, चॉकलेट आदि से एलर्जी होती है।
6. सम्पूर्ण शरीर की एलर्जी-कभी कभी कुछ लोगों में एलर्जी से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है और सारे शरीर में एक साथ गंभीर लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं ऐसी स्तिथि में तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाना चाहिए।
8. अंग्रेजी दवाओं से एलर्जी-कई अंग्रेजी दवाएं भी एलर्जी का सबब बन जाती हैं। जैसे पेनिसिलिन का इंजेक्शन जिसका रिएक्शन बहुत खतरनाक होता है और मौके पर ही मौत हो जाती है। इसके अलावा दर्द की गोलियां, सल्फा ड्रग्स एवं कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी सामान्य से गंभीर एलर्जी के लक्षण उत्पन्न कर सकती हैं।
9. मधु मक्खी ततैया आदि का काटना–इनसे भी कुछ लोगों में सिर्फ त्वचा की सूजन और दर्द की परेशानी होती है, जबकि कुछ लोगों को इमर्जेन्सी में जाना पड़ जाता है।
एलर्जी से बचाव/Avoidance of Allergens :
>>>>>एलर्जी से बचाव ही एलर्जी का सर्वोत्तम इलाज है। इसलिए एलर्जी से बचने के लिए इन उपायों का पालन करना चाहिए। य़दि आपको एलर्जी है तो सर्वप्रथम ये पता करें की आपको किन—किन चीजों से एलर्जी है। इसके लिए आप ध्यान से अपने खान-पान और रहन-सहन को वाच करें।
>>>>>एलर्जी से बचाव ही एलर्जी का सर्वोत्तम इलाज है। इसलिए एलर्जी से बचने के लिए इन उपायों का पालन करना चाहिए। य़दि आपको एलर्जी है तो सर्वप्रथम ये पता करें की आपको किन—किन चीजों से एलर्जी है। इसके लिए आप ध्यान से अपने खान-पान और रहन-सहन को वाच करें।
1. घर के आस पास गंदगी ना होने दें।
2. घर में अधिक से अधिक खुली और ताजा हवा आने का मार्ग प्रशस्त करें।
3. जिन खाद्य पदार्थों से एलर्जी है, उन्हें न खाएं।
4. एकदम गरम से ठण्डे और ठण्डे से गरम वातावरण में ना जाएं।
5. बाइक चलाते समय मुंह और नाक पर रुमाल बांधे, आँखों पर धूप का अच्छी क़्वालिटी का चश्मा लगायें।
6. गद्दे, रजाई, तकिये के कवर एवं चद्दर आदि समय—समय पर गरम पानी से धोते रहें।
7. रजाई, गद्दे, कम्बल आदि को समय—समय पर धूप दिखाते रहें।
8. पालतू जानवरों से एलर्जी है तो उन्हें घर में ना रखें।
9. ज़िन पौधों के पराग कणों से एलर्जी है, उनसे दूर रहें।
10. घर में मकड़ी वगैरह के जाले ना लगने दें। समय—समय पर साफ सफाई करते रहें।
11. धूल मिट्टी से बचें, यदि धूल मिट्टी भरे वातावरण में काम करना ही पड़ जाये तो फेस मास्क पहन कर काम करें।
एलर्जी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार/Naturopathy Treatment of Allergies :
1-एलर्जी रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी को 4-5 दिनों तक निम्बू पानी, नारियल पानी, सब्जियों का रस और फलों के रसों का सेवन करके उपवास रखना चाहिए। इसके बाद एक सप्ताह तक बिना पका हुआ भोजन का सेवन करना चाहिए।
2-इस रोग से पीड़ित रोगी को कभी भी डिब्बाबंद खाद्य,नमक तथा चीनी का सेवन सेवन नहीं करना चाहिए, क्योकि इससे रोग गंभीर हो सकता है।
3-एलर्जी से पीड़ित रोगी को सोयाबीन दूध में डालकर पीना चाहिए, इसका प्रतिदिन सेवन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
4-एलर्जी के रोगी व्यक्ति कुछ दिनों तक सुबह खाली पेट नीम के पत्तों को पीसकर पानी में मिलाकर पीना चाहिए तथा आधे घंटे तक कुछ भी नहीं खाना चाहिए।
5-प्रतिदिन आंवले के चूर्ण में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पानी के साथ सेवन करने से एलर्जी रोग जल्द ही ठीक हो जाता है।
6-एलर्जी के रोगी को सूर्यतृप्त नीली बोतल का पानी पीना चाहिए।
एलर्जी का होमोयोपेथिक उपचार/Homeopathic Treatment of Allergies :
1. Apis Mellifica : कीट-पतंगों से एलजीं होने तथा सूजन आने पर पर ‘एपिस’ 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।
2. अर्जेन्टम नाइट्रिकम/Argentum nitricum 200 : कोई चीज खाने से एलर्जी के लक्षण दिखाई दे तो उपचार के इस औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए। इस औषधि का प्रयोग श्लेष्मिक झिल्ली तथा शरीर के किसी भी अंग पर विशेष कर फेफड़ों पर एलर्जी के प्रभाव को ठीक करने के लिए किया जाता है।
3. ऐसेरम यूरोपम/Asarum Europaeum 200 : कभी-कभी रोगी को आवाज के प्रति संवेदनशीलता आ जाती है, रोगी हलकी आवाजें भी बर्दाश्त नहीं कर पाता, रोगी को हर समय ठण्ड लगती है।
4. आर्सेनिक एल्बम/Arsenic Album 200 : पुराने जुकाम, नजला, छींक आना, नाक से गर्म स्त्राव होना, ठण्ड लगना, समुद्र के किनारे जाने से रोग का बढ़ जाना आदि में उपयोग होता है।
5. आर्सेनिक एल्बम/Arsenic Album 200+3-नक्स-वोमिका/ Nux Vomica-30 : खाद्य पदार्थों से एलर्जी होने पर ‘आर्सेनिक’ 30 शक्ति में व ‘नक्सवोमिका’ 30 शक्ति में।
6. बेलाडोना/Belladonna-30/200 : रोगी को हल्की सी आवाज भी बर्दाश्त नहीं होती, शोर से रोगी गुस्सा हो जाता है। चेहरा लाल पड़ने पर।
7. ब्रोमीन-30 : धूल से एलर्जी होने पर ‘ब्रोमीन’ 30 शक्ति में।
8. कैमोमिला/Chamomilla 30 : इस औषधि का सेवन करने से रोगी में दर्द सहन करने की शक्ति बढ़ती है।
9. काफ़िया/Coffea 200 : किसी भी अंग में होने वाले तेज दर्द जिसे रोगी बिलकुल बर्दाश्त नही कर पाता, रोगी दर्द वाले स्थान पर छू जाने का अनुभव करके ही डर जाता है।
10. डल्कामारा/Dulcamara 30 : शरीर पर पित्ती उछलने पर ‘डल्कामारा’ 30 शक्ति में ।
11. इग्नेशिया/Ignatia Amara 30 या 200 : तम्बाकू व धुएं से एलर्जी होने पर ‘इग्नेशिया’ 30 या 200 शक्ति में।
12. नैट्रम म्यूर/Natrum Muriaticum 200 : फूल की गंध, अंडे, प्याज, गेहूं, शहद, दूध, मांस आदि से एलर्जी होने पर इस औषधि का सेवन किया जा सकता है।
13. नैट्रम म्यूर/Natrum Muriaticum 200 : अत्यधिक छींक आने पर नाक टपकने पर ‘नेट्रमम्यूर’ 200 की एक खुराक व ‘एलियम सीपा’ 30 शक्ति में।
14. नक्स-वोमिका/Nux Vomica 200 : संवेदनशीलता में ऐसे लक्षण जिसमें रोगी किसी भी प्रकार के बाहरी अनुभूति से संवेदनशील हो जाता है। जिसके कारण रोगी छोटी-छोटी बातों पर भी ग़ुस्सा हो जाता है।
15. सोरिनम/Psorinum 200 : गेहूं से एलर्जी होने पर।
16. ट्यूबरकुलीनम/Tuberculinum : जिस व्यक्ति को दूध, दही, दूध से बने पदार्थों, अंडा, मछली या मांस से किसी भी प्रकार की कोई एलर्जी हो तो पहले इस औषधि की 200 शक्ति का सेवन सप्ताह में एक बार दो सप्ताह तक ले। इससे लाभ न हो तो सल्फर औषधि की 1m/1000 का सेवन करें।
17. सल्फर/Sulphur 200 : चॉकलेट से एलर्जी होने पर।
18. अर्टिका युरेन्स/Urtica Urens 200 : दूध पीने से पित्ती उछलने के लक्षण में इस औषधि के मूलार्क का सेवन करना चाहिए।
19. पायोस 200 : धूल-मिटटी के कारण दमा रोग होना भी एक प्रकार की एलर्जी है। इस तरह के लक्षण में यह औषधि उपयोगी होती है।
20. अर्टिका युरेन्स/Urtica Urens-Q : शरीर पर चकत्ते पड़ने पर ‘आर्टिका यूरेंस’ औषधि मूल अर्क में लें। शैल फिश (एक प्रकार की मछली) खाने से होने वाली एलर्जी में भी यह लाभकारी है।
उपशीर्षक:
Allergy,
Homeopathic,
एक्जिमा,
एलर्जी,
खुजली,
छीकें,
जलन,
नाक,
पित्ती,
होम्योपैथिक
Friday, December 16, 2016
--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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(Tribulus Terrestris)
14 फरवरी
Abutilon Indicum
Aerva Lanat
Allergy
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Alternanthera Sessilis
Alum
Aluminum
Amaranthus spinosus
Ammonium chloride
Appetite
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Ash-coloured Fleabane
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Croton Sparsiflorus
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Dronapushpi
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Emblic Myrobalan
Extramarital Relation
Extremely Intolerance
Fatty liver
Femininity
FENUGREEK
Fenugreek Seeds
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Fever
Fissure
Fistula
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Gooseberry
Gourd
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Guava
Hainampfer
Hair Falling
Headaches
Health
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Health Consultation
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Hemorrhoids
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Liver
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Masturbation
Mental
Mexican Daisy
Mexican Poppy
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Migraines
Myopia
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Night Jasmine
Nutgrass
Nutmeg
Nutsedge
Obesity
Omega 3
Oroxylum indicum
Painkillers
Periquito Sessil
Phyllanthus Niruri
Piles
Portulaca Oleracea
Post Effect
Pregnancy Safe-Guard
Pregnancy Safeguard
Pregnancy-Safe-Guard
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Raan Tulas
Radish
Rectal Collapse
Rectal Prolapse
rectum collapse
Saffron
Senna occidentalis
Separation
Sex
Sexual Power
Sickness
Side Effects
side effects less
Side-Effects
Spermatorrhoea
Sperms
Spiny Amaranth
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Stone Breaker
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TECOMA STANS
Thermometer
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vaginal Creaks
Vaginal Prolapse
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Vitamins
Vitex Negundo
Wart
Wheatgrass
White Discharge
Yellow Spider Flower
अंकुरित अनाज
अंकुरित गेहूं-Wheat germ
अंकुरित भोजन-Sprouts
अखरोट
अंगूर-Grapes
अचूक चमत्कारिक चूर्ण
अजवाइन
अजवायन
अजीर्ण-Indigestion
अंडकोष
अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut
अण्डी
अतिबला
अतिसार
अतिसार-Diarrhea
अतृप्त
अतृप्त दाम्पत्य
अत्यंत असहिष्णुता
अदरक
अदरख
अंधश्रृद्धा
अध्ययन
अनिद्रा
अपच
अपराजिता
अपराधबोध
अफरा
अफीम
अमरूद
अमृता
अम्लपित्त-Pyrosis
अरंडी
अरणी
अरण्ड
अरण्डी
अरलू
अरुचि
अरुचि-Anorexia-Distaste
अर्जुन
अर्थराइटिस
अर्द्धसिरशूल
अर्श
अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles
अलसी
अल्टरनेथेरा सेसिलिस
अल्सर
अल्सर-Ulcers
अवसाद
अवसाद-Depression
अश्मःभेदः
अश्वगंधा
अश्वगंधा-Winter Cherry
असंतुष्ट
असफल
असर नहीं
असली
अस्थमा
अस्थमा-दमा-Asthma
आइरन
आक
आकड़ा
आघात
आत्महत्या
आंत्र कृमि
आंत्रकृमि-Helminth
आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever
आदिवासी
आधाशीशी
आधासीसी
आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower
आमला
आमवात
आमाशय
आयुर्वेद
आयुर्वेदिक
आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेदिक औषधियां
आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup
आयुर्वेदिक-Ayurvedic
आरोग्य
आँव
आंव
आंवला
आंवला जूस
आंवला रस
आशावादी-Optimistic
आसन
आसान प्रसव-Easy Delivery
आहार चार्ट
आहार-Food
आॅपरेशन
आॅर्गेनिक
आॅर्गेनिक कौंच
इच्छा-शक्ति
इन्द्रायण
इन्फ्लुएंजा
इमर्जेंसी में होम्योपैथी
इमली-Tamarind Tree
इम्युनिटी
इलाज
इलाज का कुल कितना खर्चा
इलायची
उच्च रक्तचाप
उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension
उत्तेजक
उत्तेजना
उदर शूल-Abdominal Haul
उदासी
उन्माद-Mania
उपवास
उम्र
उल्टी
ऊर्जा
एक्जिमा
एक्यूप्रेशर
एग्जिमा
एजिंग-Aging
एंटी ऑक्सीडेंट्स
एंटी-ओक्सिडेंट
एंटीऑक्सीडेंट
एण्टी-आॅक्सीडेंट
एनजाइना
एनीमिया
एमिनो एसिड
एरंड
एलर्जी
एलर्जी-Allergy
एलोवेरा
एलोवेरा जूस
एल्यूमीनियम
ऐंठन
ऐलोपैथ
ऐसीडिटी
ऑर्गेनिक
ओमेगा 3 के स्रोत
ओमेगा-3
ओर्गेनिक
औषध-Drug
औषधि सूची-Drug List
औषधियों के नुकसान-Loss of drugs
कचनार
कचनार-Bauhinia Purpurea
कटुपर्णी
कड़वाहट
कंडोम
कद्दू
कनेर
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कपिकच्छू
कपूरीजड़ी
कफ
कब्ज
कब्ज़
कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation
कब्ज. Cucumber
कब्जी
कमजोरी
कमर
कमर दर्द
कमेड़ा
करेला
कर्ण वेदना
कर्णरोग
कष्टार्तव-Dysmenorrhea
कांच निकलना
काजू
कान
कानून सम्मत
काम
काम शक्ति
कामवाण पाउडर
कामशक्ति
कामशक्ति-Sexual power
कामेच्छा
कामोत्तेजना
कायाकल्प
कार्बोहाइड्रेट
कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates
काला जीरा
काला नमक
काली जीरी
काली तुलसी
काली मिर्च
काले निशान
कास-खांसी-Cough
किडनी
किडनी संक्रमण
किडनी स्टोन
कीड़े
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कुकरौंधा
कुकुंदर
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कुबडापन
कुमेड़ा
कुल्थी
कुल्ला
कुष्ट
कुष्ठ
कृमि
केला
केसर
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कैलोरी
कैलोरी चार्ट
कैलोरी-Calories
कैवांच
कैविटी
कैंसर
कॉफी
कॉफ़ी
कॉलेस्ट्रॉल
कोंडी घास
कोढ़
कोबरा
कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol
कोलेस्ट्रोल
कौंच
कौमार्य
क्रियाशीलता
क्रोध
क्षय रोग-Tuberculosis
क्षारीय तत्व
क्षुधानाश
खजूर
खजूर की चटनी
खनिज
खरबूजा-Musk melon
खरेंटी
खरैंटी शिलाजीत
खाज
खांसी
खिरेंटी
खिरैटी
खीप
खीरा
खुजली
खुशी-Joy
खुश्की
खुश्बू
खोया
गंजापन-Baldness
गठिया
गठिया-Arthritis
गठिया-Gout
गड़तुम्बा
गंडा-ताबीज
गंध
गन्ने का रस
गरमा गरम
गर्भ निरोधक
गर्भधारण
गर्भपात
गर्भवती
गर्भवती कैसे हों?
गर्भावस्था
गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy
गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy
गर्भाशय
गर्भाशय भ्रंश
गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy
गर्म पानी
गर्मी
गर्मी-Heat
गलगण्ड
गाजर
गाजवां
गांठ
गाँठ-Knot
गारंटी
गारण्टेड इलाज
गाल ब्लैडर
गिलोय
गिल्टी
गुड़हल
गुंदा
गुदाद्वार
गुदाभ्रंश
गुम्मा
गुर्दे
गुलज़ाफ़री
गुस्सा
गृध्रसी
गृह-स्वामिनी
गेदुआ की छाछ
गैस
गैस्ट्रिक
गैहूं का जवारा
गोक्षुरादि चूर्ण
गोखरू
गोखरू (LAND CALTROPS)
गोंद कतीरा-Hog-Gum
गोंदी
गोभी-Cabbage
गोरख मुंडी
गोरखगांजा
गोरखबूटी
गोरखमुंडी
ग्रीन-टी
घमोरी
घरेलु नुस्खे
घाघरा
घाव
चकवड़
चक्कर
चपाती
चमत्कारिक सब्जियां
चरित्र
चर्बी
चर्म
चर्म रोग
चर्मरोग
चाय
चाय-Tea
चालीस के पार-Forty Across
चिकनगुनिया
चिकित्सकीय
चिटकन
चिंतित
चिरायता-Absinth
चिरोटा
चुंबन
चोक
चौलाई
छपाकी
छरहरी काया
छाछ
छाजन बूटी
छाले
छींक
छीकें
छुअ
छुआरा
छुहारा
छोटा गोखरू
छोटा धतूरा
छोटी हरड़
जंक फूड
जकवड़
जख्म
जंगली तिल्ली
जंगली तुलसी
जंगली पेड़
जंगली मिर्ची
जंगली-कटीली चौलाई
जटामांसी-Spikenard
जलजमनी
जलन
जलोदर रोग-Ascites Disease
जवारा
जवारे
जवासा-Alhag
जहर
जामुन का जूस
जायफल
जिगर
जीरा
जीवन रक्षक
जीवनी शक्ति
जुएं
जुकाम
जुदाई
जुलाब
जूएं
जूस
जोड़ों के दर्द
जोड़ों में दर्द
जौ
ज्यूस
ज्योति
ज्वर
ज्वर-Fiver
झाइयाँ
झांईं
झाड़-फूंक
झुर्रियाँ
झुर्रियां
झुर्री
झूठे दर्द
टमाटर का रस
टमाटर-Tomatoes
टाइफाइड
टाटबडंगा
टायफायड
टूटी हड्डी
टॉन्सिल
टोटला
ट्यूमर
ठंड
ठंडापन
ठेकेदार डॉक्टर
डकार
डकारें
डायबिटीज
डायरिया
डिग्री फ़ारेनहाइट
डिग्री सेल्सियस
डिजिसेक्सुअल
डिटॉक्सीफाई
डिटॉक्सीफिकेशन
डिनर
डिप्रेशन
डिब्बाबंद भोजन
डिलेवरी
डीकामाली
डीगामाली
डेंगू
डेंगू-Dengue
डॉ. निरंकुश
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
डॉ. मीणा
ढकार
ढीलापन
ढीली योनि
तकलीफ का सही इलाज
तंत्र-मंत्र
तम्बाकू
तरबूज-Watermelon
तलाक
ताकत
तिल
तिल्ली
तुंबा
तुंबी
तुम्बा
तुलसी
तेल
त्रिदोषनाशक
त्रिफला
त्वचा
त्वचा रोग
थकान
थाईरायड
थायरायड-Thyroid
थायरॉइड
दण्डनीय अपराध
दंत वेदना
दन्तकृमि
दन्तरोग
दमा
दर वेदना
दरार
दर्द
दर्द निवारक
दर्द निवारक दवा
दर्दनाक
दस्त
दही
दाग-धब्बे-Stains-Spots
दाढ़
दांत
दांतो में कैविटी-Teeth Cavity
दाद
दाम्पत्य
दाम्पत्य विवाद सलाहकार
दाम्पत्य-Conjugal
दाल
दालचीनी
दालें
दिमांग
दिल
दीर्घायु
दु:खी
दुर्गंध
दुर्बलता
दुष्प्रभाव
दुष्प्रभावरहित
दूध
दूध वृद्धि
दूधी
दूधी-Milk Hedge
दृष्टिदोष
दो मन
द्रोणपुष्पी
द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes
धड़कन
धनिया बीज
धनिया-Coriander
धमासा
धात
धातु
धातु पतन
धार्मिक
धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं?
धैर्यहीन
नज़ला
नपुंसक
नपुंसकता
नाइट्रिक एसिड
नाक
नाखून
नागबला
नागरमोथा
नाडी हिंगु
नाड़ी हिंगु (डिकामाली)
नामर्दी
नारकीय पीड़ा
नारियल
नाश्ता
निमोनिया
निम्न रक्तचाप
निम्बू
नियासिन
निराश
निरोगधाम
निर्गुण्डी
निर्गुन्डी
निष्कपट स्नेह
निष्ठा
निसोरा
नींद
नींबू
नींबू-Lemon
नीम-azadirachta indica
नुस्खे
नुस्खे-Tips
नेगड़
नेत्र रोग
नेुचरल
नैतिक
नॉर्मल डिलेवरी
नोनिया
नौसादर
न्युमोनिया-Pneumonia
न्यूरॉन्स
पक्षघात
पंचकर्म
पढ़ने में मन लगेगा
पंतजलि
पत्तागोभी-CABBAGE
पत्थर फोड़ी
पत्थरचट्टा
पत्नी
पथरी
पदार्थ
पनीर
पपीता
पपीता-CARICA PAPPYA
पमाड
परदेशी लांगड़ी
परम्परागत चिकित्सा
परहेज
पराठा
परामर्श
परिस्थिति
पवाड़
पवाँर
पाइल्स
पाक-कला
पाचक
पाचन
पाचनतंत्र
पाचनशक्ति
पाठक संख्या 16 लाख पार
पाठक संख्या पंद्रह लाख
पायरिया
पारदर्शिता
पारिजात
पालक
पालक-Spinach
पित्त
पित्ताशय
पित्ती
पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne
पिरामिड
पीलिया
पीलिया-Jaundice
पीलिया-कामला-Jaundice
पुआड़
पुदीना
पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava
पुरुष
पुंसत्व
पेचिश
पेट के कीड़े
पेट दर्द
पेट में गैस
पेट रोग
पेड़
पेद दर्द
पेरिकिटो सेसिल
पेशाब
पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
प्लूरिसी-Pleurisy
प्लेटलेट्स
फंगल
फटन
फफूंद-Fungi
फरास
फल
फाइबर
फिटकरी
फुंसी-Pimples
फूलगोभी-CAULIFLOWER
फेंफड़े
फेरम फॉस
फैट
फैटी लीवर
फोटोफोबिया
फोड़ा
फोड़े-Boils
फोरप्ले
फोलिक एसिड
फ्लू
फ्लू-Flu
फ्लेक्स सीड्स
बकायन
बकुल
बड़ी हरड़
बथुआ
बथुआ पाउडर
बथुआ-White Goose Foot
बदबू
बंध्यापन
बबूल-ACACIA
बरसाती बीमारियाँ
बरसाती बीमारियां
बलगम
बलवृद्धि
बला
बलात्कार
बवासीर
बहरापन
बहुनिया
बहुमूत्रता-
बांझपन
बादाम-Almonds
बादाम.
बाल
बाल झड़ना
बाल झडऩा-Hair Falling
बिना सिजेरियन मां बनें
बिवाई
बीजबंद
बीड़ी
बीमारियों के अनुसार औषधियां
बीमारी
बील
बुखार
बूंद-बूंद पेशाब
बेल
बेली
बैक्टीरिया
बॉयोकैमी
ब्रह्मदण्डी
ब्रेस्ट ग्रोथ
ब्लड प्रेशर
ब्लैक मेलिंग
ब्लॉकेज
भगंदर
भगंदर-Fistula-in-ano
भगनासा
भगन्दर
भगोष्ठ
भड़भांड़
भय
भविष्य
भस्मक रोग
भावनात्मक
भुई आंवला-Phyllanthus Niruri
भूई आमला
भूई आंवला
भूख
भूख बढ़ाने
भूत-प्रेत
भूमि
भूमि आंवला
भोजनलीवर
मकोय
मकोय-Soleanum nigrum
मक्का
मक्का के भुट्टे
मंजीठ
मटर-PEA
मंद दृष्टि
मंदाग्नि
मदार
मधुमेह
मधुमेह-Diabetes
मन्दाग्नि-Dyspepsia
मरुआ
मरोड़
मर्द
मर्दाना
मलाशय
मलेरिया
मलेरिया (Malaria)
मवाद
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मुख्य लक्षण
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मुलहठी
मुलेठी
मुहाँसे
मूँगफली
मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders
मूत्र
मूत्र असंयमितता
मूत्र में जलन-Burning in Urine
मूत्ररोग
मूत्राशय
मूत्रेन्द्रिय
मूर्च्छा (Unconsciousness)
मूली
मूली कर रस
मृत्यु
मृत्युदण्ड
मेथी
मेथी दाना
मेंहदी
मैथुन
मोगरा (Mogra)
मोटापा
मोटापा-Obesity
मोतियाबिंद
मौत
मौलसिरी
मौसमी बीमारियां
यकृत
यकृत प्लीहा
यकृत वृद्धि-Liver Growth
यकृत-लीवर-जिगर-Lever
यूपेटोरियम परफोलियेटम
यूरिक एसिड लेबल
योग विज्ञापन
योन
योन संतुष्टि
योनि
योनि ढीली
योनि शिथिल
योनि शूल-Vaginal Colic
योनि संकोचन
योनिद्वारा
योनिभ्रंश
योनी
योनी संकोचन
यौन
यौन आनंद
यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills)
यौन क्षमता
यौन दौर्बल्य
यौन शक्तिवर्धक
यौन शिक्षा
यौन समस्याएं
यौनतृप्ति
यौनशक्ति
यौनशिक्षा
यौनसुख
यौनानंद
यौनि
रक्त प्रदर (Blood Pradar)
रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA
रक्तचाप
रक्तपित्त
रक्तशोधक
रक्ताल्पता
रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia
रस-juices
रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum
रामबाण
रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines
रुक्षांश
रूढिवादी
रूसी
रूसी मोटापा
रेचक
रेठु
रोग प्रतिरोधक
रोबोट सेक्स
रोमांस
लकवा
लक्षण
लक्ष्मी
लंच
लसोड़ा
लस्सी
लहसुन
लहसुन-Garlic
लाइलाज
लाइलाज का इलाज
लाक्षणिक इलाज
लाक्षणिक जानकारी
लाभ
लिंग
लिंग प्रवेश
लिसोड़ा
लीकोरिया
लीवर
लीवर सिरोसिस
लीवर-Liver
लू-hot wind
लैंगिक
लोनिया
लौकी
लौंग की चाय
ल्युकोरिया
ल्यूकोरिया
ल्यूज योनी
वजन
वज़न
वजन कम
वजन बढाएं-Weight Increase
वन तुलसी
वन/जंगली तुलसी
वनौषधियाँ
वमन
वमन विकृति-Vomiting Distortion
वसा
वात
वात श्लैष्मिक ज्वर
वात-Rheumatism
वायरल
वायरल फीवर
वायरल बुखार-Viral Fever
वासना
विचारतंत्र
विटामिन
विधारा
वियाग्रा-Viagra
वियोग
विरह वेदना
विलायती नीम
विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध
विवाहेत्तर सम्बंध
विश्वास
विष
विष हरनी
विषखपरा
वीर्य
वीर्य वृद्धि
वीर्यपात
वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone
वृक्ष
वैज्ञानिक
वैधानिक
वैवाहिक जीवन
वैवाहिक जीवन-Marital
वैवाहिक रिश्ते
वैश्यावृति
व्याकुल
व्यायाम
व्रण
शंखपुष्पी
शरपुंखा
शराब
शरीफा-सीताफल-Custard apple
शर्करा
शलगम-Beets
शल्यक्रिया
शहद
शहद-Honey
शारीरिक
शारीरिक रिश्ते
शिथिलता
शीघ्र पतन
शीघ्रपतन
शीस
शुक्राणु
शुक्राणु-Sperm
शुक्राणू
शुगर
शोक
शोथ
शोध
श्योनाक
श्रेष्ठतर
श्वास
श्वांस
श्वेत प्रदर
श्वेत प्रदर-Leucorrhea
श्वेतप्रदर
षड़यंत्र
संकुचन
संकोच
संक्रमण
संक्रमित
संक्रामक
संखाहुली
सगतरा
संतरा-Orange
संतान
संतुष्टि
सत्यानाशी
सदा सुहागन
सदाफूली
सदाबहार
सदाबहार चूर्ण
सनबर्न
सफ़ेद दाग
सफेद पानी
सफेद मूसली
सब्जि
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