Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

Health Care Friend and Marital Dispute Consultant

(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)

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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।

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डॉ. निरंकुश जी ने लीवर ठीक कर, मेरी सेक्स लाईफ लौटायी! शराब का सेवन कभी नहीं करें। जिन्दगी बर्बाद हो जायेगी।
मेरी एज 58 साल है। मुझे 10-15 साल की एज से ही कब्जी रहती थी। अनेक चूरण, काढे और गोली-कैप्सूल खाये। कब्जी ठीक नहीं हुई। सर्विस लगने के बाद फ्रेंड बने एक पड़ौसी ने 25 साल की उम्र में सलाह दी कि शराब का सेवन करने से कब्जी ठीक हो जाती है। शुरू में एक ढक्कन शराब पीना शुरू किया। कुछ असर हुआ। धीरे-धीरे शराब बढती गयी। मैं शराब का हैबीच्युअल हो गया। इस कारण घर में झगड़े रहने लगे। यदि मैं सरकारी नौकरी में नहीं होता तो मेरी पत्नी मुझे कभी की छोड़कर चली गयी होती। 45 की उम्र आते-आते मेरा वेट 70 से 45 किलो रह गया। पेट में भयंकर दर्द रहने लगा। सेक्स करने की इच्छा और शक्ति खतम सी हो गयी। इस कारण घर में अत्यधिक कलह बढ गयी। 8 साल छोटी पत्नी की हालत मुझ से देखी नहीं जाती थी। कुलमिलाकर जीना हराम हो गया। हरदम टेंशन ही टेंशन रहने लगा।

यह भी पढें: लीवर के लिए अमृत : चार औषधियाँ

अनेक डॉक्टरों को दिखाया। अनेक जांच करवायी तो सबने बताया कि लीवर खराब हो गया। मुझे सलाह दी कि शराब मेरे लिये जहर है। मगर मेरी शराब की लत नहीं छूटी। लीवर में अत्यन्त सोजन आ गयी। आंतों में अल्सर हो गये। पेट में असहनीय दर्द रहने लगा। न भूख लगती और न कुछ खाना पचता। उल्टी होने लगी। सौभाग्य से एक देशी वैद्यजी ने मेरी शराब तो छुड़ा दी। वे लीवर का भी इलाज कर रहे थे कि इसी दौरान एक दुर्घटना में वैद्य जी चल बसे। लीवर की तकलीफ की वजह से मेरा जीवन नर्क हो गया। दफ्तर में बैठकर नौकरी करना भी मुश्किल हो गया। लिव-52, त्रिफला, ईसबगोल, अनेक प्रकार के आसव और सीरप मेरी जिन्दगी के हिस्सा बन गये थे। फिर भी मैं जैसे-तैसे केवल जीवन को घसीटने की हालत में था।
इसी बीच मुझे मेरी एक सहकर्मी माधवीजी (बदला नाम) ने डॉ. निरंकुश जी के बारे में बताया कि उनकी बेटी को भयंकर ल्यूकोरिया था, जो डॉ. निरंकुश जी के इलाज से ठीक हो गया। मुझे भी डॉ. निरंकुश जी से सम्पर्क करने की सलाह दी। मैंने उनके मोबाईल 9875066111 पर बात की। मेरा सारा विवरण वाट्स एप के जरिये जानने के बाद डॉ. साहब ने कहा कि कम से कम 10 से 12 महिने तक दवाई लेनी होंगी। मेरा इलाज शुरू किया। पहले दो महिने कोई खास लाभ नहीं हुआ, तीसरे महिने मुझे लगा कि अब मेरा इलाज हो रहा है। मुझे खाने की थोड़ी-थोड़ी इच्छा होने लगी। चौथे महिने मुझे अच्छी भूख लगने लगी तथा शारीरिक शक्ति का अनुभव हुआ। दवाई लेते सात महिने हो गये हैं। अब मैं 80 परसेंट ठीक हो गया हूं। शरीर में ताकत भी बढी है। सेक्स करने की भी इच्छा होने लगी है। वजन 52 किलो हो गया है। मुझे उम्मीद है कि मैं बहुत जल्दी पूरी तरह से ठीक हो जाउंगा। मैं चाहता हूं कि मेरा नाम उजागर नहीं करें, लेकिन मेरा उक्त विवरण साईट पर सार्वजनिक किया जाये। जिससे दूसरे दु:खी लोग भी मुझे उदाहरण समझ कर अपना जीवन सुधार सकें। मैं यही कहूंगा कि शराब का सेवन कभी नहीं करें। जिन्दगी बर्बाद हो जायेगी।
—राधेश्याम गुप्ता (बदला हुआ नाम) नियर कश्मीरी गैट, दिल्ली।
~~~~~~~~मैने बहुत सारे रोगी देखे हैं। हर दिन सैकड़ों नये रोगियों के काल आते हैं। राधेश्याम गुप्ता जी अपनी आप बीती में सच नहीं लिखा है। इनकी स्थिति बहुत विचित्र रही है। इन्होंने मुझ से लीवर का इलाज करवाने के लिये सम्पर्क नहीं किया, बल्कि सेक्स पावर बढाने की दवाई के लिये सम्पर्क किया। जब इनकी सारी जानकारी प्राप्त की तो पता चला कि इनको शराब की लत थी और इनका लीवर खराब था।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
85-619-55-619/07.07.2017


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परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच।
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क्या आप अपने स्वास्थ्य की रक्षा हेतु अपने व्हाट्सएप पर
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यदि हां तो आप से उम्मीद की जाती है कि-
1. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 को अपने मोबाईल में सेव करें।
2. आप मेरे वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619 पर हेल्थ बुलेटिन प्राप्त करने हेतु
या स्वास्थ्य परामर्थ हेतु रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
3. आपका परिचय जानने के बाद आपकी स्वास्थ्य रक्षा ​हेतु
हेल्थ बुलेटिन भेजा जाने लगेगा।
लेकिन याद रहे उक्त वाट्सएप पर अन्य कोई सामग्री नहीं भेजें।
अन्यथा आपके नम्बर को ब्लॉक कर दिया जायेगा।
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
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नींबू प्रजाति के फल वसा को जला देते हैं, दिल के रोगों पर लगाम कसते हैं और वजन रोकते हैं।

अब तक यदि आप नींबू और अन्य 'सिट्रस' फलों के सेवन से दूरी बनाए हुए थे, तो यह खबर आपको निश्चित ही उनके पास ले आएगी। पिछले दिनों हुए एक शोध से जाहिर हुआ है कि नींबू तथा उसकी ही प्रजाति के फल शरीर में बनी अतिरिक्त वसा को जला देते हैं, दिल के रोगों पर लगाम कस सकते हैं और वजन वृद्धि को रोकते हैं।

यही नहीं, यह इंसुलिन की तरह मधुमेह टाइप-2 को रोकने में भी सहायक हैं। शोध के मुताबिक एक फ्लेवोनोइड 'नैरिनजेनिन' जो कि नींबू प्रजाति के पौधों में पाया जाता है, यह मानव शरीर में 'एंटीऑक्सीडेंट्स' की क्रियाशीलता को बढ़ा देता है जो शरीर में बनी अतिरिक्त वसा को संग्रहीत करने के बजाय उसे खर्च कर देते हैं।

आमतौर पर पौधों में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉइड मानव शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स की गतिविधियों को बढ़ाने में सहायक होते हैं। तो इसलिए अब जब भी खट्टा नींबूड़ा थाली में आए, उसे ना मत कहिएगा।

परामर्श : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor. 
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। 
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111. 
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
मोटापा घटाने के लिए आहार चार्ट

1. आहार चार्ट : सबसे पहले अधिक चीनी, अधिक चर्बी, अधिक मसालें वाले खाने को बंद करना होगा। नीचे पूरा आहार चार्ट दिया गया है। अगर इस चार्ट के अनुसार खाएँगे तो मोटापा बहुत ही जल्द कम हो जायगा।

  • नाश्ता (7:00-8:00) : सुबह-सुबह नाश्ता जरूरी है। अगर भूख नहीं हो तो सिर्फ एक ग्लास जूस का ले सकतें हैं जूस संतरा, मौसम्मी, अनन्नास किसी का भी हो सकता है। अगर भूख है तो नाश्ते में कोई भी मौसमी फल (सेब, अंगूर, तरबूज, खरबूजा, आम) भरपेट खाएं।
  • लंच (12:30-1:30) दोपहर का भोजन : दोपहर के भोजन में आप अपनी तासीर के अनुसार गेहूं की रोटी या चावल ले सकतें हैं। दोपहर के खाने मे आपको दाल कम से कम खानी है! दाल आप सप्ताह में एक दो बार खा सकतें हैं! रोटी के साथ आप कोई सब्जी ले सकतें हैं। दोपहर के खाने मे आपको दही जरूर लेनी है। दही की मात्रा 250 ग्राम ले सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें की दही में आपको चीनी नहीं डालनी, बल्कि सादा दही खाना है।
  • डिनर (7:00-8:00) रात का भोजन : रात के भोजन में टमाटर, खीरा, गाजर, चुकंदर कुछ भी अधिक से अधिक सब्जियों का सलाद लें। अगर आपको सलाद खाना पसंद नही है तो आप कोई भी मौसमी फल (सेब, आम, अंगूर, नाशपाती आदि) भर पेट खा सकतें हैं।
गेहूं या चावल से बना भोजन खाना दिन में केवल एक बार : उक्त आहार चार्ट में आपको इस बात का ध्यान रखना है कि आपको पूरे दिन में सिर्फ एक बार ही गेहूं या चावल से बना भोजन खाना है। अगर आप गेहूं या चावल का भोजन एक बार से ज्यादा लेने लगेंगे तो मोटापा कभी नहीं रुक पायगा। इस आहार चार्ट में आप बीच-बीच मे जूस भी पी सकतें हैं।
2. एक बार व्यायाम जरूर : दिन में कम सक कम एक बार व्यायाम जरूर करना चाहिये। व्यायाम सुबह या श्याम जब भी समय मिले किया जा सकता है, वैसे सुबह का समय अच्छा रहता है।

3. सोना-जागना : रात को जल्दी सोना चाहिए। रात 10 बजे तक सो जाना चाहिए और सुबह भी जल्दी उठना चाहिए।

अगर उपरोक्त तरीकों को पूरी तरह अपनाया जायेगा तो मोटापा बहुत ही जल्द कम हो जायगा! एक महीने में 5 से 10 किलो तक वजन कम हो जायेगा।
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aajtak.in [Edited by: भूमिका राय]
नई दिल्ली, 10 दिसम्बर 2015 | अपडेटेड: 13:32 IST

हम सभी के घरों में अजवायन एक प्रमुख मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. पर आपको शायद ही पता हो कि ये एक प्राकृतिक औषधि भी है. आप चाहें तो कई छोटी-छोटी सामान्य बीमारियों का इलाज अजवायन की मदद से कर सकते हैं. अच्छी बात ये है कि इसका फायदा बड़े और छोटे दोनों को समान रूप से होता है.

अजवायन को इस्तेमाल करने का तरीका:
अजवायन का पूरा फायदा लेने के लिए इसे पानी में उबाल लेते हैं. अगर आप चाहें तो इसे यूं भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसके पानी का इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद होता है. इसका पानी बनाने के लिए एक चम्मच अजवायन को एक कप पानी में उबाल लें. जब ये पानी आधा रह जाए और पानी मटमैला दिखने लगे तो गैस बंद कर दें. इस पानी को छान लें. जब ये ठंडा हो जाए तो इसे इस्तेमाल करें.

अजवायन के फायदे:

1. अगर आप मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं तो अजवायन का पानी पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. ये चर्बी को गलाने का काम करता है, जिससे बहुत जल्दी वजन घट जाता है.
2. अगर आपको पाचन से जुड़ी कोई समस्या है तो अजवायन का पानी आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं. अजवायन का पानी पीने से कब्ज और गैस की समस्या में राहत मिलती है.
3. अजवायन का पानी दर्द निवारक की तरह काम करता है. अगर आपको दांत दर्द की तकलीफ है तो अजवायन के पानी से गार्गल करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. साथ ही इसके इस्तेमाल से मुंह की दुर्गंध भी दूर हो जाती है.
4. पीरियड्स के दौरान दर्द और ऐंठन की समस्या से राहत पाने के लिए भी अजवायन का पानी बहुत फायदेमंद होता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो पेट के इंफेक्शन को दूर करने में मददगार होता है.
5. अगर आपको हल्की सर्दी हो रखी है तो भी अजवायन के पानी से गार्गल करना फायदेमंद रहता है. सर्दी दूर करने के लिए ग्रामीण इलाकों में लोग अजवायन का धुंआ भी लेते हैं.

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AdminJune 5, 2016

अजवायन का प्रयोग घरों में ना केवल मसाले के रूप में ही किया जाता है बल्‍कि छोटी-मोटी पेट की बीमारियां भी इसके सेवन से दूर हो जाती हैं। खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूरन बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये। वैसे तो अजवायन बड़ी ही काम की चीज़ है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है। जी हां, यह बात काफी कम लोग जानते हैं कि अजवायन का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। मोटापा कम करने के लिये अक्‍सर लोग गरम पानी और नींबू पीते हैं, जिससे शरीर के विशैले तत्‍व बाहर निकलते हैं ना कि वजन में कमी आती है।

कई बीमारियों में लाभकारी अजवायन का पानी-

पाचन क्रिया बेहतर: अजवायन में थायमॉल (Thymol) मौजूद होता है। दुनिया में सबसे अधिक थायमॉल वाला पौधा अजवायन का ही होता है। ये केमिकल गेस्ट्रिक द्रव्यों को बाहर निकालने में पेट की मदद करता है, जिससे की पाचन क्रिया आसान हो जाती है। अपच, मतली और शिशुओं के पेट दर्द जैसी समस्याओं में इससे मदद मिलती है।

अजवायन का प्रयोग घरों में ना केवल मसाले के रूप में ही किया जाता है बल्‍कि छोटी-मोटी पेट की बीमारियां भी इसके सेवन से दूर हो जाती हैं। खाना खाने के बाद हाजमा बेहतर बनाना हो तो इसका चूरन बना कर खाइये और फिर फायदा देखिये। वैसे तो अजवायन बड़ी ही काम की चीज़ है मगर इसका एक फायदा मोटापे को भी कम करने के काम आता है। जी हां, यह बात काफी कम लोग जानते हैं कि अजवायन का पानी रोज सुबह खाली पेट पीने से मोटापा प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। मोटापा कम करने के लिये अक्‍सर लोग गरम पानी और नींबू पीते हैं, जिससे शरीर के विशैले तत्‍व बाहर निकलते हैं ना कि वजन में कमी आती है।

कई बीमारियों में लाभकारी अजवायन का पानी-

पाचन क्रिया बेहतर

अजवायन में थायमॉल (Thymol) मौजूद होता है। दुनिया में सबसे अधिक थायमॉल वाला पौधा अजवायन का ही होता है। ये केमिकल गेस्ट्रिक द्रव्यों को बाहर निकालने में पेट की मदद करता है, जिससे की पाचन क्रिया आसान हो जाती है। अपच, मतली और शिशुओं के पेट दर्द जैसी समस्याओं में इससे मदद मिलती है।

वजन घटाने में मददगार

अजवायन न सिर्फ आपकी पाचन क्रिया को बेहतर करता है बल्कि आपके मेटाबॉलिज़्म को भी तेज़ी देता है, जिससे कि आपको वजन घटाने में मदद मिलती है।

सिरदर्द और कंजेस्शन से छुटकारा

अजवायन का पानी उबालने पर या उसका पानी पीते हुए जो उससे भाप मिलती है उससे सिरदर्द और नाक के कंजेस्शन (Congestion) में काफी राहत मिलती है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अजवायन में बहुत सारे वाष्पशील पदार्थ होते हैं जो कि उबाले जाने पर भाप बनकर उड़ते हैं।जब आप इस भाप को अंदर लेते हैं तो आपको सिरदर्द और जुकाम से भी राहत मिलती है।

मतली से राहत: अजवायन के पानी से मतली भी ठीक की जा सकती है। कई मामलों में, इसको पीने से लगातार आ रहीं उल्टियां भी रूक जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अजवायन में बहुत अधिक प्रभावी एंटीबैक्टीरियल तत्व होते हैं जो कि पेट से बैक्टीरिया इंफेक्शन को दूर करते हैं।

दांद दर्द करता है दूर

अजवायन दांद दर्द को दूर करने और मुंह को स्वस्थ बनाए रखने में बहुत मददगार होती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर ये सलाह देते हैं कि दांत दर्द होने पर अजवायन के पानी से कुल्ला करें। अजयावय में मौजूद थायमोल (Thymol) दर्द से राहत दिलाता है और मुंह के स्वास्थ्य का ख्याल रखता है।

दूसरी ओर अजवायन का पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्‍म बढ़ता है जिसकी वजह से कार्ब तथा फैट बर्न होने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है। तो अगर आप भी अपने बढ़ते हुए वजन से परेशान है तो, कुछ दिनों तक इस नुस्खे को आजमाइये और असर देखिये। आइये जानते हैं अजवान का पानी बनाने की विधि और रिजल्‍ट पाने के लिये किन-किन चीज़ों से परहेज रखना है।

ऐसे बनाएं अजवायन का पानी

1. कैसे तैयार करें अजवाय का पानी
2. 50 ग्राम अजवायन लें (आप चाहें तो 25 ग्राम भी ले सकते हैं पर 50 ग्राम ज्यादा प्रभाव शाली है)
3. अजवायन को 1 गिलास पानी में रातभर के लिये भिगो कर छोड़ दें और फिर सुबह पानी को छान लें।
4. उसके बाद पानी में 1 चम्मच शहद मिक्स करें और सुबह खाली पेट पी लें।
5. यदि आप चाहें तो उसी अजवायन को धूप मे सुखा कर फिर से दूसरे दिन भी प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन तीसरे दिन आपको इर्न अजवायन का प्रयोग करना होगा।
6. अजवायन के पानी को 45 दिन लगातार पियें, आपको फायदा जरुर मिलेगा। वैसे तो आपको इसका असर मात्र 15 दिनों में ही दिखने लगेगा पर अगर प्रभावी परिणाम चाहिये तो, 45 दिन लगेंगे। वजन कम होना आपके शरीर के प्रकार पर भी निर्भर करेगा। इस पानी को पीने से आपका 5 किलो वजन कम होगा पर अगर आप किसी बीमारी से पीड़ित नहीं होंगे तो।

अच्छा रिजल्ट पाने के लिये कुछ जरुरी बातों का पालन करें :-
  • 1. चावल पूरी तरह से छोड़ दें रोटियों का संख्या घटा दें। मतलब अगर आप दो राटी खाते हैं तो उसे आधा कर दें।
  • 2. आलू, शक्कर, फास्ट फूड और ऑइली फूड ना खाएं।
  • 3. भोजन करने के एक घंटे तक पानी ना पियें।
यह उपचार खास तौर पर उन महिलाओं के लिये है, जिन्हें पीरियड्स की समस्या है और जिसकी वजह से उनका वजन बढ़ जाता है।
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सदियों के अजवाइन का इस्तेमाल कई तरह के घरेलू नुस्ख़ों के लिए किया जाता रहा है। उदाहरण के लिए एसिडिटी के लिए एन्टासिड खाने के जगह पर अजवाइन खाना तो लोग सामान्यतः सेफ मानते हैं। यहाँ तक कि अर्थराइटिस होने पर भी अजवाइन का पेस्ट जोड़ों पर लगाने जैसा घरेलू इलाज दर्द को कम करने में असरदार रूप से काम करता है। जिन लोगों को बदहजमी का प्रॉबल्म होता है वह तो अजवाइन बिना सोचे समझे दिन में कितनी बार खाते हैं उसके बारे में कहना मुश्किल है। अजवाइन में थाइमोल नाम का तत्व होता है जो पीएच लेवल को नॉर्मल रखने के साथ-साथ गैस्ट्रिक जूस के निष्कासन से खाना को जल्दी हजम करवाने में मदद करता है। ये तो अजवाइन का एक पहलू है उसके दूसरे पहलू के बारे में जानकर आप आश्चर्य में पड़ जायेंगे। पढ़े-

अजवाइन के साइड-इफेक्ट्स: लेकिन डायटीशियन और न्यूट्रीशनिस्ट नेहा चांदना का कहना है कि अजवाइन को खाना तब तक स्वास्थ्य या सेहत के दृष्टि से सेफ है जब तक आप इसको सीमित मात्रा में ले रहे हैं। यानि अजवाइन का सेवन आप दिन में कम से कम 10 ग्राम तक ही ले सकते हैं। इससे ज्यादा मात्रा में अजवाइन खाने से आपके सेहत को फायदा पहुँचने से जगह पर नुकसान ही पहुँचेगा। क्यों आश्चर्य में पड़ गए न! अतिरिक्त मात्रा में अजवाइन लेने से एसिडिटी कम होने के जगह पर बढ़ सकती है, सिर दर्द, उल्टी, पेट में जलन जैसा अनुभव और अल्सर जैसे प्रॉबल्म्स का सामना करना पड़ सकता है। यहाँ तक कि प्रेगनेंट महिलायें भी अजवाइन का सेवन कब्ज़ और एसिडिटी की समस्या के लिए कर तो सकती है लेकिन दिन में 10 ग्राम से ज्यादा नहीं।
ध्यान देने की बात ये है कि छह महीने से बड़े शिशु या बच्चों के हजम शक्ति को बढ़ाने के लिए आप उनको एक छोटा चम्मच गुड़ और अजवाइन का पाउडर दे सकते है। इससे उनका डाइजेस्टिव सिस्टेम बेहतर हो जाता है, लेकिन सीमित मात्रा में।
कैसे करें इसका सेवन? अजवाइन को पानी में डालकर उबाल लें। फिर उस पानी को छानकर पियें या गुड़ के साथ भी इसको ले सकते हैं।
अजवायन एक औषधि है। जिसका उपयोग कई रोगों का इलाज करने के लिए होता है। इसका चूर्ण बनाकर सेंधानमक मिलाने से पेट की तकलीफों से चुरंत आराम मिलता है। खासकर पेट दर्द, मन्दाग्नि, अपच, अफरा, अजीर्ण और दस्त में अजवायन काफी लाभकारी है। जिसका सेवन दिन में कम से कम तीन बार करना चाहिए।
अजवाइन के फायदे
अजवाइन में 7 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 21 प्रतिशत प्रोटीन, 17 प्रतिशत खनिज, 7 प्रतिशत कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह, पोटेशियम, सोडियम, रिबोफ्लेविन, थायमिन, निकोटिनिक एसिड अल्प मात्रा में होता है। आंशिक रूप से आयोडीन, शर्करा, सेपोनिन, टेनिन, केरोटिन और 14 प्रतिशत तेल पाया जाता है।
कुछ घरेलू उपचार
  1. *100 तोला अजवायन के फूल का चूर्ण पानी में मिलाकर घाव पर लगाएं। दाद, खुजली, फुंसियां जैसे चर्मरोग में फायदा होगा। 
  2. *अजवायन के तेल की मालिश से दर्द कम होता है। प्रयोग प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए अजवायन काफी लाभदायक है।
  3. *अजवायन के फूल को शक्कर के साथ तीन- चार बार पानी घोलकर से लेने से पित्ती की बीमारी ठीक हो जाती है।
  4. *पेट खराब होने पर अजवाइन को चबाकर खाएं, उसके बाद एक कप गर्म पानी पी लें, पेट ठीक हो जाएगा।
  5. *पेट दर्द होने पर अजवाइन के दाने 10ग्राम, सोंठ 5ग्राम और काला नमक 2 ग्राम को अच्छी तरह मिलाए, फिर मिश्रण का 3 ग्राम गुनगुने पानी के साथ सेवन करें आराम मिलेगा। 
  6. *काले नमक के अजवायन पेट के कीड़े निकाल देती है।
  7. * लीवर की परेशानी होने पर 3ग्राम अजवाइन और आधा ग्राम नमक खाने के बाद लेने से लाभ होगा।
  8. *पेट में गैस होने पर हल्दी, अजवाइन और चुटकीभर काला नमक लेने से जल्दी आराम मिलता है।
  9. *पथरी की समस्या होने पर 5ग्राम ग्राम जंगली अजवाइन को पानी के साथ निगल लें। ऐसा महीने में पांच दिन करें, तो पथरी नहीं बनेगी।
  10. *अजवाइन को भूनकर कपड़े में लपेट ले, फिर रात में तकिए के नजदीक रखें, इससे दमा, सर्दी, खांसी के रोगियों को अच्छे से नींद आएगी।
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Sonu Singla 10:14:00 pm
"अजवाइन के गुण/ फायदे, अजवाइन का पानी के लाभ, अजवाइन का तेल/ नुकसान, अजवायन खाने के फायदे"
अजवायन-अजवायन का बीज छोटा,दानेदार और बारीक़ होता है।अजवायन के बीज से जो तेल या अर्क निकाला जाता है उसे सर्जरी के बाद एंटी सेप्टिक मरहम के तौर पर लगाया जाता है। इजिप्ट और अफगानिस्तान को अजवायन का घर कहा जाता है। अजवायन के पोधे को घर में लगाना भी बहुत आसान है। अक्टूबर और नवंबर इस पोधे को उगाने के लिए ज्यादा लाभदायक होते है।
खाने में इसका उपयोग-
तड़का एक खाना पकाने की विधि, जिसमें खाना पकाने के लिए तेल गरम किया जाता है उसमे पूरे मसाले डाले जाते है। भारतीय खाना पकाने में अजवाइन अक्सर थाली में तड़का का हिस्सा है। यह कम मात्रा में प्रयोग किया जाता है और लगभग हमेशा पकाया करते थे। यह अपनी मजबूत, प्रभावी स्वाद की वजह से प्रयोग होता है।अजवाइन भी सब्जियों के व्यंजन (अपने विशिष्ट स्वाद के लिए) और अचार (अपने संरक्षक के गुणों के लिए) में प्रयोग किया जाता है।
साइज: बहुत छोटा
रंग: भूरा हरे रंग के लिए पीले रंग
स्वाद: गर्म और तीखे स्वाद
पत्ते: जैसे छोटे पंख
खुशबू: मजबूत गंध, अजवायन के फूल की तरह
खुजली, फोड़े और पिम्पल्स :
• यह एक शांत, अंधेरे और सूखी जगह में एक कसकर मोहरबंद ग्लास कंटेनर में ताजा रखा जा सकता है।
• यह एक साल के लिए ताजा रहेगी।
आकार: ओवल और चोटी वाला।
अजवाइन और इसके तेल के पोषण का महत्व:
कैरम बीज 100 ग्राम प्रति होता है:
प्रोटीन -17.1%
वसा - 21.8%
खनिज-7.9%
फाइबर-21.2%
कार्बोहाइड्रेट-24.6%
इसमें कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, फास्फोरस, लोहा और नियासिन भी शामिल हैं। इसका तेल या तो बेरंग या रंग में पीला भूरे रंग का है। कैरम तेल व्यापक रूपमें कीटाणु नाशक और कवकनाशी के रूप में प्रयोग किया जाता है।
अजवाइन का लाभ:
1. अम्लता: एक चम्मच जीरा के साथ एक चम्मच अजवाइन का मिश्रण अदरक पाउडर के साथ हर रोज ले ।यह प्राकृतिक रूप से अपच समस्याओं का इलाज करने के लिए एक सबसे अच्छा तरीका है। यह अम्लता और एसिड समस्या के इलाज में उपयोगी है।
2. कब्ज: अजवाइन पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए सबसे अच्छा उपाय है। इसलिए इसे कब्ज से भी छुटकारा पाने के लिए उपयोग कर सकते हैं। अजवाइन का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
3. गुर्दा विकार और गुर्दे की पथरी: अजवाइन गुर्दे की पथरी का इलाज करने के लिए बहुत उपयोगी हैं। इसे गुर्दा रोग के इलाज के लिए और दर्द को कम करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
4. अस्थमा: गर्म पानी के साथ अजवाइन लेने से शरीर से खांसी और बलगम को निष्कासित किया जा सकता है। यह ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के इलाज के लिए बहुत उपयोगी है। इसे दिन में दो बार गुड़ के साथ सेवन किया जा सकता है। आप को निश्चय ही लाभ होगा।
5. जिगर और गुर्दे की खराबी: अजवाइन का पानी पीने से अपच और संक्रमण की वजह होने वाले आंतों में दर्द का सफल इलाज किया जा सकता है। अजवाइन जिगर और गुर्दे की खराबी के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद है।
6. मुँह समस्याएँ: अजवाइन दांत दर्द का इलाज करने के लिए असरकारक सिद्ध किया गया है। लौंग के तेल में एक हिस्सा अजवाइन का तेल होता है। दांत दर्द, मुँह से बुरी गंध और क्षय के इलाज के लिए अजवाइन पावडर और पानी के साथ कुल्ला करे । मौखिक स्वच्छता बनाए रखने के लिए यह सबसे अच्छा और कारगर तरीका है।
7. ठंड लगने पर उपयोगी: अजवाइन बंद नाक आदि सर्दी के लक्षणों का इलाज करने के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक तरीका है। राहत के लिए गर्म पानी में अजवाइन डालकर भाप ले,नाक तुरंत खुल जाएगी और सर्दी में भी आराम होगा।
अजवाइन पीसकर गुनगुने पानी के साथ इसका पेस्ट बना लें। चेहरे या शरीर के किसी भी प्रभावित हिस्से पर इस पेस्ट को लगाये । इसके अलावा सबसे अच्छा परिणाम के लिए अजवाइन के पानी से प्रभावित अंग को धोने की कोशिश करो। यह सूजन , फोड़े, पिम्पल्स या एक्जिमा में बहुत असरकारक है। नींबू के रस के साथ अजवाइन बीज का पेस्ट बना लें। यह सूजन को दूर करने में सहायक होगा।
8. अत्यधिक रक्तस्राव और अनियमित मासिक धर्म: इस समस्या में महिलाओं को अजवाइन का पानी पीने से बहुत लाभ होता है। रात में पानी से भरे मिट्टी के बर्तन में मुट्ठी भर अजवाइन भिगो दे । सुबह उन्हें पीसकर पी लो । धीरे धीरे आराम हो जायेगा।
9. पाचन: अजवाइन पाचन समस्याओं में भी बहुत लाभ पहुंचाती है। चीनी के साथ 1 बड़ा चम्मच अजवाइन चबाने से अपच से छुटकारा मिलेगा। यह चीनी के बिना भी सेवन किया जा सकता है।
10. गठिया: अजवाइन का तेल गठिया के दर्द के इलाज के लिए एक बहुत ही उपयोगी असरकारक नुस्खा है। अजवाइन के तेल के साथ नियमित रूप से प्रभावित जोड़ों पर मालिश करने से दर्द से राहत मिलती है।और गठिया रोग ठीक होने लगता है।
11. दस्त: अजवाइन पेचिश या दस्त का इलाज करने के लिए एक प्राकृतिक उपचार है। एक गिलास पानी में अजवाइन की एक मुट्ठी उबाल लें।ठंडा करके छानकर इसे दिन में दो बार पिए,तुरंत आराम मिलेगा। यह अपच और पेचिश के इलाज के लिए एक अचूक उपाय है।
12. वायरल संक्रमण: अजवाइन पाउडर के साथ दही का मिश्रण बना ले । एक पूरी रात के लिए चेहरे पर इस पेस्ट को लगाने से मुँहासे और निशान को हल्का कर सकते है। अच्छे परिणाम के लिए सुबह गुनगुने पानी से धो लें।
13. पेट दर्द में आराम: अजवाइन को नमक के साथ मिला कर गुनगुने पानी से लो। पेट दर्द में तुरंत आराम मिल जायेगा। यह बहुत अचूक नुस्खा है।
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अजवायन एक ऐसी चीज या औषधि है, जो अकेली ही एक ऐसी है जो कि सौ प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने वाली होती है।

अनेक प्रकार के गुणों से भरपूर अजवायन पाचक रूचि कारक, तीक्ष्ण, कढवी, अग्नि प्रदीप्त करने वाली, पित्तकारक तथा शूल, वात, कफ, उदर आनाह, प्लीहा, तथा क्रमि का नाश करने वाली होती है।

अति गर्म प्रकृति वालों के लिए यह हानिकारक होती है।
इसकी खेती सारे देश में होती है।

अजवायन का उपयोग औषिध के रूप में, मुख्यत: उदर एवं पाचन से समबन्धित विकारों तथा वात व्याधियों को दूर करने में बहुत गुणकारी होती है।

अजवायन में लाल मिर्च की तेजी, राई की कटुता तथा हींग और लहसुन की वातनाशक गुण एक साथ मिलते हें। इस लिए यह गुणों का भंङार है । इसी लिए यह उदर शूल, गैस, वायुशोला, पेट फूलना, वात प्रकोप आदि को दूर करता है। इसी कारण इसे घर पर छुपा हुआ वेद्य कहा गया है।

अजवायन की पत्ती का दिलकश स्वाद होता है। इसी कारण इसका (पत्ती) इतालवी व्यंजनों में, जेसे पिज्जा पास्ता आदि। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवायन की ताजा पत्ती में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन होते है.
विटामिन सी, विटामिन ए, लोहा, मैंगनीज और कैल्शियम और साथ ही युक्त ओमेगा -3 फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है। अजवायन से कैलशियम, फासफोरस, लोहा सोडियम व पोटेशियम जैसे तत्व मिलते हैं।
अजवायन के लाभ-अजवायन के गुण-अजवायन का औषिध
के रूप में उपयोग (THE BENEFITS OF PARSLEY)
  1. यह एक उत्कृष्ट एंटीऑक्सिडेंट है, अजवायन मोटापे को कम करने में भी मदद करती है। सर्दियों के मौसम में सर्द से बचने के लिए अजवायन एक सफल औषधि है। जंगली अजवायन की पत्ती का तेल श्रेष्ट माना गया है प्रतिरक्षा प्रणाली को दृढ़ करता है, श्वसन क्रिया को दुरुस्त करता है। जोड़ों और मांसपेशियों का लचीलापन बढाता है और त्वचा को संक्रमण से बचाता है। 
  2. अपच: बरसात के मौसम में पाचन क्रिया के शिथिल पड़ने पर अजवायन का सेवन काफी लाभदायक होता है। इससे अपच को दूर किया जा सकता है।
  3. अजीर्ण: अजवायन, काला नमक, सौंठ तीनों को पीसकर चूर्ण बना लें। भोजन के बाद फाँकने पर अजीर्ण, अशुद्ध वायु का बनना व ऊपर चढ़ना बंद हो जाएगा।
  4. झाईं: खीरे के रस में अजवायन पीसकर चेहरे की झाइयों पर लगाने से लाभ होता है।
  5. शराब उपद्रव नाशक: अधिक शराब पी लेने से अगर व्‍यक्ति को उल्‍टियां आ रहीं हो तो उसे अजवाईन खिलाना बेहतर होगा। इससे उसको आराम मिलेगा और भूंख भी अच्‍छी तरह से लगेगी।
  6. गर्भावस्था में: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अजवाइन जरुर खानी चाहिए, क्‍योंकि इससे ना सिर्फ खून साफ रहता है, बल्कि यह पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को संचालित भी करता है।
  7. कान दर्द: कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदे कान में डालने से आराम मिलता है। 
  8. दाद-खा़ज: शरीर में दाने हो जाएं या फिर दाद-खा़ज हो जाए तो, अजवाइन को पानी में गाढ़ा पीसकर दिन में दो बार लेप करने से फायदा होता है। घाव और जले हुए स्थानों पर भी इस लेप को लगाने से आराम मिलता है और निशान भी दूर हो जाते हैं।
  9. गठिया: गठिया के रोगी को अजवाइन के चूर्ण की पोटली बनाकर सेंकने से रोगी को दर्द में आराम पहुंचता है। अजवाइन का रस आधा कप में पानी मिलाकर आधा चम्मच पिसी सोंठ लेकर ऊपर से इसे पीलें। इससे गठिया का रोग ठीक हो जाता है।
  10. खांसी: अजवाइन के रस में एक चुटकी काला नमक मिलाकर सेवन करें। और ऊपर से गर्म पानी पी लें। इससे खांसी बंद हो जाती है।
  11. गुर्दे का दर्द: गुड़ और पिसी हुई कच्ची अजवाइन समान मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच रोजाना 4 बार खायें। इससे गुर्दे का दर्द भी ठीक हो जाता है।
  12. रात में पेशाब करने  आदत: जिन बच्चे को रात में पेशाब करने की आदत होती है उन्हें रात में लगभग आधा ग्राम अजवाइन खिलायें।
  13. चेहरे का लेप : 2 चम्मच अजवाइन को 4 चम्मच दही में पीसकर रात में सोते समय पूरे चेहरे पर मलकर लगाएं और सुबह गर्म पानी से साफ कर लें।
  14. मसूढ़ों के रोग: अजवाइन को भून व पीसकर मंजन बना लें। इससे मंजन करने से मसूढ़ों के रोग मिट जाते हैं।
  15. खट्टी डकारें: अजवाइन, सेंधानमक, सेंचर नमक, यवाक्षार, हींग और सूखे आंवले का चूर्ण आदि को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम शहद के साथ चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
  16. जुकाम के साथ हल्का बुखार: देशी अजवाइन 5 ग्राम, सतगिलोए 1 ग्राम को रात में 150 मिलीलीटर पानी में भिगोकर, सुबह मसल-छान लें। फिर इसमें नमक मिलाकर दिन में 3 बार पिलाने से लाभ मिलता है।
  17. दमा: अजवाइन का रस आधा कप इसमें इतना ही पानी मिलाकर दोनों समय (सुबह और शाम) भोजन के बाद लेने से दमा का रोग नष्ट हो जाता है।
  18. मासिक धर्म की पीड़ा: मासिक धर्म के समय पीड़ा होती हो तो 15 से 30 दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ अजवायन लेने से दर्द मिट जाता है। मासिक अधिक आता हो, गर्मी अधिक हो तो यह प्रयोग न करें। सुबह खाली पेट 2-4 गिलास पानी पीने से अनियमित मासिक स्राव में लाभ होता है।
  19. एसिडिटी: एसिडिटी की तकलीफ है तो थोड़ा-थोड़ा अजवाइन और जीरा को एक साथ भून लें। फिर इसे पानी में उबाल कर छान लें। इस छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं, एसिडिटी से राहत मिलेगी।
  20. पेट दर्द, गैस और अशुद्ध वायु: इसे अदरक (सोंठ) पाउडर और काला नमक 2-2 और 1 के अनुपात में मिलाएं भोजन करने के बाद एक चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें तो पेट दर्द व गैस की समस्या में आराम मिलेगा। अशुद्ध वायु का बनना व सर में चढ़ना ख़त्म होगा।
  21. पेट दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि: अजवायन पाउडर का एक चम्मच (टी स्पून) ले उसमे एक चुटकी काला नमक मिला कर दिन में दो या तीन बार गुनगुने पानी के साथ सेवन से पेट में दर्द, दस्त , अपच, अजीर्ण, अफारा तथा मन्दाग्नि में लाभकारी होती है।
  22. भूख लगाना: अजवायन, सौंफ, सोंठ और काला नमक को बराबर मात्रा में मिलाकर देसी घी के साथ दिन में तीन बार खाएं। भूख लगने लगेगी ।
  23. मोटापा नाशक: शाम को अजवायन को एक गिलास पानी में भिगोएं सुबह छानकर उस पानी में शहद डालकर पीने से मोटापे को कम करने में मदद होती है।
  24. मसूड़ों की सूजन: अजवायन के तेल की कुछ बूंदें गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है।
  25. खांसी जुकाम में रामबाण: खांसी जुकाम में चुटकी भर काला नमक, आधा चम्मच अजवायन और दो लोंग इन सब को पिसकर गुनगुने पानी के साथ दिन में कई बार पीने से अदभुत लाभ मिलता है। यह रामबाण दवा है।
  26. जमा कफ निकालने हेतु: आधा कप पानी में आधा चम्मच अजवायन और थोड़ी सी हल्दी पाउडर डालकर उबाले और ठंडा करें और इसमें एक चम्मच शहद डालकर पीएं। और गर्म पानी में अजवायन डालकर इसका भाप लें। इस से छाती में जमा कफ निकल जाता है ।
  27. शीत-पित्ती: शीत-पित्ती की बीमारी के लिए अजवायन के फूल को गुड के साथ मिला कर पानी से लेने से पित्ती ठीक होती है। अजवायन का चूर्ण गेरु में मिलाकर शरीर पर मलने से पित्ती में तुरन्त लाभ होता है।
  28. खांसी: बेर के पत्तों और अजवायन को पानी में उबालकर, छानकर उस पानी से गरारे करने पर खांसी में लाभ होता है।
  29. अर्धशिरशूल: अजवायन को पानी में डालकर उबालें। छानकर बार बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से आधे सिर दर्द में लाभ होता है। रात को कई बार पेशाब आने पर भी इसके सेवन से फायदा होता है।
  30. जोड़ों का दर्द: जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छे से गर्म करें व छान ले और इससे जोड़ों की मालिश करे इससे आराम होगा।
  31. कृमिनाशक: अजवायन प्रबल कीटनाशक है। आँतों में कीड़े होने पर अजवायन के साथ काले नमक का सेवन करने पर पेट के कीड़े बाहर निकल जाते हैं। अजवायन का चूर्ण और गुड समान मात्रा में मिलकर गोली बनाकर दिन में दो तीन बार खिलाने से पेट के सभी प्रकार के कीडे नष्ट हो जाते है।
  32. कृमिनाशक: एक से दो ग्राम ग्राम अजवायन का चूर्ण छाछ के साथ देने से पेट के कीडे नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते है।
  33. कृमिनाशक: सुबह दस-पन्द्रह ग्राम गुड खाकर दस-पन्द्रह मिनट बाद एक से दो ग्राम अजवायन का चूर्ण बासी पानी के साथ ले। इससे आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे मर कर मल के साथ बहार निकल जायेंगे।
  34. दस्तावर: अजवायन को रात में चबाकर गरम पानी पीने से सवेरे पेट साफ हो जाता है।
  35. खॉसी और कफ एवं कफ की दुर्गन्ध: अजवायन के फूल को शहद में मिलाकर लेने से खॉसी और कफ में फायदेमंद होता है। इससे कफ की दुर्गन्ध भी खत्म होती है।
  36. चोट सूजन व दर्द: चोट लगने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस बाँधने से चोट की सूजन व दर्द कम होती है।
  37. दस्त: अजवायन का अर्क या तेल 10-15 बूँद बराबर लेते रहने से दस्त बंद होते हैं।
  38. ठंड का बुखार: अजवायन का चूर्ण दो-दो ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार लेने से ठंड का बुखार शान्त होता है।
  39. ब्लडप्रेशर: ब्लडप्रेशर, बाय का दर्द, रक्तचाप और चर्म रोगों, में ऊँगलियों के काम न करने पर अजवायन के फूल एवं गिलोय का अर्क 1-1 ग्राम साथ मिलाकर लेना लाभ दायक होता है।
  40. चर्मरोग: अजवायन के फूल (सफ़ेद दाने के रूप में बाज़ार में उपलब्ध) का चूर्ण पानी में मिलाकर उस घोल से घाव, दाद, खुजली, फुंसियाँ आदि धोने पर ये चर्मरोग नष्ट होते हैं।
  41. प्रसव के बाद: अजवायन का प्रसव के बाद अग्नि की प्रदिप्त करने और भोजन को पचाने, वायु एवं गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए सभी परम्परागत भारतीय परिवारों में लड्डू बना कर खिलाया जाने की परंपरा हे। यह चमत्कारी लाभ देता हे। प्रसूति स्त्रियों को अजवायन व गुड मिलाकर देने से भूख बढ़ती है। प्रसव के बाद अजवायन के प्रयोग से गर्भाशय शुद्ध होता है। गर्भाशय पूर्वास्थिती में आ जाता है। दूध ज्यादा बनता है। बुखार व कमर का दर्द ठीक करता है। इससे खराब मासिक चक्र ठीक भी हो जाता हें।
  42. पेट दर्द, जलन, अफारा और मलमूत्र की रूकावट: अजवायन 10 ग्राम, छोटी हरड़ का चूर्ण 6 ग्राम, सेंधा नमक 3 ग्राम, हींग 3 ग्राम का चूर्ण बनाकर रखें और 3-3 ग्राम की मात्रा में जल के साथ लें तो पेट दर्द, जलन, अफारा , और मलमूत्र की रूकावट दूर होती है।
  43. बदन दर्द: अजवायन चूर्ण गरम पानी के साथ लेने से या अर्क को गुनगुना करके पीने से या इसके तेल की मालिश करने से बदन दर्द ठीक होता है।
  44. शक्तिशाली एंटीबायोटिक, एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सिडेंट: अजवायन की पत्ती माहवारी के विकारों के उपचार, फेफड़ों की समस्याओं और अजीर्ण में और प्रयोग किया जाता है यह शक्तिशाली एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सिडेंट भी होता है। अजवायन की पत्ती में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक तत्व हंड यह संक्रमण को दूर रखने के महत्वपूर्ण होता है।
  45. किडनी या गुर्दे का दर्द: किडनी या गुर्दे संबंधी परेशानी में एक बड़ा चम्मच जीरा और दो चम्मच अजावयन को पीस कर पाउडर बना लें। इसमें थोड़ा सा काला नमक और एक चम्मच भूरे रंग का सिरका डाले। हर घंटे बाद एक-एक चम्मच इस मिश्रण का लें। दर्द से जल्द ही आराम मिल जाएगा।
  46. हाजमा: दोपहर को भोजन के बाद पिसी 2 - 3 ग्राम अजवायन लेने से खाना आसानी से हजम होता है।
  47. पुरानी खांसी: पान में अजवायन को डाल कर खाने से पुरानी खांसी ठीक होती है।
  48. मालिश: अजवायन को सरसों के तेल में डाल कर पकायें उससे बच्चों को मालिश करें सर्दी-जुकाम में तथा प्रसव उपरांत लाभ होगा।
  49. मसूड़ों में सूजन: मसूड़ों में सूजन होने पर अजवायन के तेल की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर कुल्ला करने से सूजन कम होती है।
  50. आधे सिर में दर्द: आधे सिर में दर्द होने पर एक चम्मच अजवायन आधा लीटर पानी में डालकर उबालें। पानी को छानकर रखें एवं दिन में दो-तीन बार थोड़ा-थोड़ा लेते रहने से काफी लाभ होगा।
  51. जोड़ों का दर्द: सरसों के तेल में अजवायन डालकर अच्छी तरह गरम करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
  52. चोट के नीले-लाल दाग: चोट लगने पर नीले-लाल दाग पड़ने पर अजवायन एवं हल्दी की पुल्टिस चोट पर बाँधने पर दर्द व सूजन कम होती है।
  53. मुख में दुर्गंध: मुख से दुर्गंध आने पर थोड़ी सी अजवायन को पानी में उबालकर रख लें, फिर इस पानी से दिन में दो-तीन बार कुल्ला करने पर दो-तीन दिन में दुर्गंध खत्म हो जाती है।
स्रोत : http://desi-prescriptions.blogspot.in/2015/10/benefits-of-parsley.html
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निवेदन : उपरोक्त पोस्ट में दी गयी जानकारी अच्छी लगे तो कृपया लेखक के उत्साहवर्धन के लिये एक कमेंट अवश्य करें। हमारे द्वारा पीलिया की दवाई मुफ्त में दी जाती है। जबकि-पैट में गैस, ऐसीडिटी, कब्जी, आँतों के अल्सर/छाले, लीवर/यकृत में सूजन/कमजोरी सिरदर्द, आधासीसी/माईग्रेन, पथरी, आसान और बिना सिजेरियन सुरक्षित प्रसव/डिलेवरी, विरह वेदना/प्रेम विछोह, डिप्रेशन, प्रदर, प्रमेह, शीघ्रपतन, यौन दुर्बलता, चिकनगुनिया/डेंगू के दर्द, सियाटिक आदि जटिल रोगों का बहुत कम खर्चे में उपचार किया जाता है। इसके अलावा दाम्पत्य विवाद समाधान के लिये भी सम्पर्क किया जा सकता है। 
नोट : कृपया उपचार के नाम पर गारण्टी देकर ठगने वालों से बचें और एक बार सेवा का मौका प्रदान करें। उपचारक बाद में पहले-स्वास्थ्य रक्षक सखा डॉ. पुरुषोत्तम मीणा-मोबाईल एवं वाट्स एप नम्बर : 9875066111.


अलसी के करिश्माई फायदे, ऐसे करें इस्तेमाल
  1. क्या आप जानते हैं कि अलसी का सेवन त्वचा पर बढ़ती उम्र के असर को कम करता है।
  2. अलसी का सेवन भोजन के पहले या भोजन के साथ करने से पेट भरने का एहसास होकर भूख कम लगती है। 
  3. इसके रेशे पाचन को सुगम बनाते हैं, इस कारण वजन नियंत्रण करने में अलसी सहायक है।
  4. चयापचय की दर को बढ़ाता है एवं यकृत को स्वस्थ रखता है।
  5. प्राकृतिक रेचक गुण होने से पेट साफ रख कब्ज से मुक्ति दिलाता है। 
कैसे लें अलसी : अलसी को धीमी आंच पर हल्का भून लें। फिर मिक्सर में दरदरा पीस कर किसी एयर टाइट डिब्बे में भरकर रख लें। रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच पावडर पानी के साथ लें। इसे सब्जी या दाल में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखें।

अलसी सेवन के दौरान पानी खूब पीना चाहिए। इसमें फायबर अधिक होता है, जो पानी ज्यादा मांगता है। एक चम्मच अलसी पावडर को 360 मिलीलीटर पानी में तब तक धीमी आंच पर पकाएं जब तक कि यह पानी आधा न रह जाए। थोड़ा ठंडा होने पर शहद या शकर मिलाकर सेवन करें। सर्दी, खांसी, जुकाम में यह चाय दिन में दो-तीन बार सेवन की जा सकती है। अस्थमा में भी यह चाय बड़ी उपयोगी है।
अलसी और अस्थमा: अस्थमा वालों के लिए एक और नुस्खा भी है। एक चम्मच अलसी पावडर आधा गिलास पानी में सुबह भिगो दें। शाम को इसे छानकर पी लें। शाम को भिगोकर सुबह सेवन करें। गिलास कांच या चांदी का होना चाहिए। 

क्या है अलसी में : अलसी में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, केरोटिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन और नियासिन पाए जाते हैं। यह गनोरिया, नेफ्राइटिस, अस्थमा, सिस्टाइटिस, कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, कब्ज, बवासीर, एक्जिमा के उपचार में उपयोगी है।

http://hindi.webdunia.com/health-care/benefit-of-flax-seeds-116092200040_1.html
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अलसी के लाभकारी गुण (Benefits of Flaxseeds)

अलसी में पाये जाने वाले प्रमुख तत्व:
आयरन
जिंक
पोटैशियम
फोस्फोरस
कैल्शियम
विटामिन सी
विटामिन ई
कैरोटीन
विटामिन बी काम्प्लेक्स
मैगनिशियम
मैगनीस
पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स

अलसी के बीज का सेवन त्वचा को स्वस्थ और स्निग्ध बनाता है, नाखून को मजबूत और चिकना बनाता है, नेत्र-दृष्टि बरक़रार रखता है, बालों को टूटने से रोकता है और डैंड्रफ भी दूर करता है।

अलसी त्वचा की बीमारियों एक्जिमा, सोराइसिस के उपचार में भी कारगर माना गया है।

अलसी के बीज लिग्नांस का बहुत अच्छा स्रोत है, जोकि एस्ट्रोजन और एंटी ओक्सिडेंट गुणों से भरपूर है। इसी वजह से यह औरतों के हार्मोनल बैलेंस के लिए बहुत सहायक होता है।

इन्हें खाली खाएं, हल्का भून कर खाएं अथवा सलाद या दही में मिलाकर खाएं, चाहे तो जूस में मिलाकर पियें। यह जूस के स्वाद को बिना बदले उसकी पोषकता कई गुना बढ़ा देगा।

अलसी के बीज ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने, हाइपरटेंशन के रोगियों के लिए, ब्लड शुगर कंट्रोल में अत्यंत लाभदायक है।

यह बीज विटामिन बी काम्प्लेक्स, मैगनिशियम, मैगनीस तत्वों से भरपूर है जो कि कोलेस्ट्रोल को कम करते है।

अलसी में पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड्स होता है जो कि विशेष रूप से ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और कोलन कैंसर से बचाव करता है।

इन बीजों में पाए जाने वाला अल्फा-लिनोलेनिक एसिड जोड़ो की बीमारी आर्थराइटिस के लिए और सभी तरह के जॉइंट पेन में बहुत राहत दिलाता है।

गर्भवती स्त्रियों और स्तनपान कराने वाली माताओं को इसका सेवन अवश्य करना चाहिए। आज भी शहरो और कस्बों के कई परिवारों में ऐसी स्त्रियों को अलसी के बने लड्डू और अन्य भोज्य पदार्थ दिए जाते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे पूर्वज अलसी का महत्व अच्छी तरह जानते थे, पर हम इन्हें भुलाकर सिर्फ दवाइयां खाने में विश्वास करने लगे हैं।

अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड्स का बहुत अच्छा स्रोत माने जाते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की कैप्सूल्स का यह अच्छा विकल्प भी है। डाईटिशियन और डाक्टर भी आजकल इसे खाने की सलाह देते है।

यह बीज फाइबर से भरपूर होते हैं अतः यह वजन घटाने में भी बहुत कारगर है।

महिलाओं में रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाली समस्याओं में भी अलसी के उपयोग से राहत मिलती है। यह देखा गया है कि माइल्ड मेनोपॉज़ की समस्या में रोजाना लगभग 40 ग्राम पिसी हुई अलसी खाने से वही लाभ प्राप्त होते हैं जो हार्मोन थैरेपी से मिलते हैं।

अलसी किडनी संबंधित समस्याओं में भी लाभकारी है। डायबिटीज़, कैंसर, ल्यूपस, और आर्थ्राइटिस आदि रोगों में भी इसके प्रभावों पर रिसर्च की जा रही है।

अलसी के बीज एंटी बैकटिरियल, एंटी फंगल और एंटी वायरल होते है। इनका उपयोग शरीर की रोग प्रतिरोधक-क्षमता बढाता है।

अलसी कैसे खाएं, कितनी खाएं (How to consume flaxseeds):

अलसी के साबुत बीज कई बार हमारे शरीर से पचे बिना निकल जाते हैं। इसलिए इन्हें पीसकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। 20 ग्राम (1 टेबल स्पून) अलसी पाउडर को सुबह खाली पेट हल्के गर्म पानी के साथ लेने से शुरुआत करें। आप इसे फल या सब्जियों के ताजे जूस में मिला सकते हैं या अपने भोजन में ऊपर से बुरक कर भी खा सकते हैं। दिन भर में 2 टेबलस्पून (40 ग्राम) से ज्यादा अलसी का सेवन न करें।

साबुत अलसी लंबे समय तक खराब नहीं होती, लेकिन इसका पाउडर हवा में मौजूद ऑक्सीजन के प्रभाव में खराब हो जाता है, इसलिए ज़रूरत के मुताबिक अलसी को ताज़ा पीसकर ही इस्तेमाल करें। इसे अधिक मात्रा में पीसकर न रखें। बहुत ज्यादा सेंकने या फ्राई करने से इसके औषधीय गुण नष्ट हो सकते हैं और इसका स्वाद बिगड़ सकता है।

अलसी खाने से कुछ लोगों को शुरुआत में कब्ज हो सकती है। ऐसा होने पर पानी ज्यादा पिएं। अलसी खून को पतला करती है। इसलिए यदि आपको ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो इसके सेवन से पहले डॉक्टर से परामर्श कर लें।

अलसी के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़नेवाले प्रभावों पर हालांकि कोई बड़ी रिसर्च नहीं हुई है, लेकिन पारंपरिक ज्ञान में Flax seed को बहुत गुणकारी माना गया है। इसके उपयोग से कोलेस्ट्रॉल के लेवल में कमी आना देखा गया है।
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जो अलसी खाए वो गाये जवानी ज़िंदाबाद, और बुढ़ापा बाये बाये।
अलसी–एक चमत्कारी आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक दैविक भोजन।
गुणधर्म–अलसी एक प्रकार का तिलहन है। इसका बीज सुनहरे रंग का तथा अत्यंत चिकना होता है। फर्नीचर के वार्निश में इसके तेल का आज भी प्रयोग होता है। आयुर्वेदिक मत के अनुसार अलसी वातनाशक, पित्तनाशक तथा कफ निस्सारक भी होती है। मूत्रल प्रभाव एवं व्रणरोपण, रक्तशोधक, दुग्धवर्द्धक, ऋतुस्राव नियामक, चर्मविकारनाशक, सूजन एवं दरद निवारक, जलन मिटाने वाला होता है। यकृत, आमाशय एवं आँतों की सूजन दूर करता है। बवासीर एवं पेट विकार दूर करता है। सुजाकनाशक तथा गुरदे की पथरी दूर करता है। अलसी में विटामिन बी एवं कैल्शियम, मैग्नीशियम, काॅपर, लोहा, जिंक, पोटेशियम आदि खनिज लवण होते हैं। इसके तेल में 36 से 40 प्रतिशत ओमेगा-3 होता है।

जब से परिष्कृत यानी “रिफाइन्ड तेल” (जो बनते समय उच्च तापमान, हेग्जेन, कास्टिक सोडा, फोस्फोरिक एसिड, ब्लीचिंग क्ले आदि घातक रसायनों के संपर्क से गुजरता है), ट्रांसफेट युक्त पूर्ण या आंशिक हाइड्रोजिनेटेड वसा यानी वनस्पति घी (जिसका प्रयोग सभी पैकेट बंद खाद्य पदार्थों व बेकरी उत्पादनों में धड़ल्ले से किया जाता है), रासायनिक खाद, कीटनाशक, प्रिजर्वेटिव, रंग, रसायन आदि का प्रयोग बढ़ा है तभी से डायबिटीज के रोगियों की संख्या बढ़ी है। हलवाई और भोजनालय भी वनस्पति घी या रिफाइन्ड तेल का प्रयोग भरपूर प्रयोग करते हैं और व्यंजनों को तलने के लिए तेल को बार-बार गर्म करते हैं जिससे वह जहर से भी बदतर हो जाता है। शोधकर्ता इन्ही को डायबिटीज का प्रमुख कारण मानते हैं। पिछले तीन-चार दशकों से हमारे भोजन में ओमेगा-3 वसा अम्ल की मात्रा बहुत ही कम हो गई है और इस कारण हमारे शरीर में ओमेगा-3 व ओमेगा-6 वसा अम्ल यानी हिंदी में कहें तो ॐ-3 और ॐ-6 वसा अम्लों का अनुपात 1:40 या 1:80 हो गया है जबकि यह 1:1 होना चाहिये। यह भी डायबिटीज का एक बड़ा कारण है। डायबिटीज के नियंत्रण हेतु आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक व दैविक भोजन अलसी को “अमृत“ तुल्य माना गया है।

अलसी शरीर को स्वस्थ रखती है व आयु बढ़ाती है। अलसी में 23 प्रतिशत ओमेगा-3 फेटी एसिड, 20 प्रतिशत प्रोटीन, 27 प्रतिशत फाइबर, लिगनेन, विटामिन बी ग्रुप, सेलेनियम, पोटेशियम, मेगनीशियम, जिंक आदि होते हैं। सम्पूर्ण विश्व ने अलसी को सुपर स्टार फूड के रूप में स्वीकार कर लिया है और इसे आहार का अंग बना लिया है, लेकिन हमारे देश की स्थिति बिलकुल विपरीत है । अलसी को अतसी, उमा, क्षुमा, पार्वती, नीलपुष्पी, तीसी आदि नामों से भी पुकारा जाता है। अलसी दुर्गा का पांचवा स्वरूप है। प्राचीनकाल में नवरात्री के पांचवे दिन स्कंदमाता यानी अलसी की पूजा की जाती थी और इसे प्रसाद के रूप में खाया जाता था। जिससे वात, पित्त और कफ तीनों रोग दूर होते है।

ओमेगा-3 हमारे शरीर की सारी कोशिकाओं, उनके न्युक्लियस, माइटोकोन्ड्रिया आदि संरचनाओं के बाहरी खोल या झिल्लियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यही इन झिल्लियों को वांछित तरलता, कोमलता और पारगम्यता प्रदान करता है। ओमेगा-3 का अभाव होने पर शरीर में जब हमारे शरीर में ओमेगा-3 की कमी हो जाती है तो ये भित्तियां मुलायम व लचीले ओमेगा-3 के स्थान पर कठोर व कुरुप ओमेगा-6 फैट या ट्रांस फैट से बनती है, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का संतुलन बिगड़ जाता है, प्रदाहकारी प्रोस्टाग्लेंडिन्स बनने लगते हैं, हमारी कोशिकाएं इन्फ्लेम हो जाती हैं, सुलगने लगती हैं और यहीं से ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, डिप्रेशन, आर्थ्राइटिस और कैंसर आदि रोगों की शुरूवात हो जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार हर रोग की जड़ पेट है और पेट साफ रखने में यह इसबगोल से भी ज्यादा प्रभावशाली है। आई.बी.एस., अल्सरेटिव कोलाइटिस, अपच, बवासीर, मस्से आदि का भी उपचार करती है अलसी।

अलसी शर्करा ही नियंत्रित नहीं रखती, बल्कि मधुमेह के दुष्प्रभावों से सुरक्षा और उपचार भी करती है। अलसी में रेशे भरपूर 27% पर शर्करा 1.8% यानी नगण्य होती है। इसलिए यह शून्य-शर्करा आहार कहलाती है और मधुमेह के लिए आदर्श आहार है। अलसी बी.एम.आर. बढ़ाती है, खाने की ललक कम करती है, चर्बी कम करती है, शक्ति व स्टेमिना बढ़ाती है, आलस्य दूर करती है और वजन कम करने में सहायता करती है। चूँकि ओमेगा-3 और प्रोटीन मांस-पेशियों का विकास करते हैं अतः बॉडी बिल्डिंग के लिये भी नम्बर वन सप्लीमेन्ट है अलसी।

अलसी कॉलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और हृदयगति को सही रखती है। रक्त को पतला बनाये रखती है अलसी। रक्तवाहिकाओं को साफ करती रहती है अलसी।

चश्में से भी मुक्ति दिला देती है अलसी। दृष्टि को स्पष्ट और सतरंगी बना देती है अलसी।

अलसी एक फीलगुड फूड है, क्योंकि अलसी से मन प्रसन्न रहता है, झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता है, पॉजिटिव एटिट्यूड बना रहता है यह आपके तन, मन और आत्मा को शांत और सौम्य कर देती है। अलसी के सेवन से मनुष्य लालच, ईर्ष्या, द्वेश और अहंकार छोड़ देता है। इच्छाशक्ति, धैर्य, विवेकशीलता बढ़ने लगती है, पूर्वाभास जैसी शक्तियाँ विकसित होने लगती हैं। इसीलिए अलसी देवताओं का प्रिय भोजन थी। यह एक प्राकृतिक वातानुकूलित भोजन है।

माइन्ड का Sim card है अलसी यहां सिम का मतलब सेरीनिटी, इमेजिनेशन और मेमोरी तथा कार्ड का मतलब कन्सन्ट्रेशन, क्रियेटिविटी, अलर्टनेट, रीडिंग राईटिंग थिंकिंग एबिलिटी और डिवाइन है।

त्वचा, केश और नाखुनों का नवीनीकरण या जीर्णोद्धार करती है अलसी। अलसी के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनाते हैं। अलसी सुरक्षित, स्थाई और उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाता है। त्वचा, केश और नाखून के हर रोग जैसे मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, खुजली, सूखी त्वचा, सोरायसिस, ल्यूपस, डेन्ड्रफ, बालों का सूखा, पतला या दोमुंहा होना, बाल झड़ना आदि का उपचार है अलसी। चिर यौवन का स्रोता है अलसी। बालों का काला हो जाना या नये बाल आ जाना जैसे चमत्कार भी कर देती है अलसी। किशोरावस्था में अलसी के सेवन करने से कद बढ़ता है।

लिगनेन का सबसे बड़ा स्रोत अलसी ही है जो जीवाणुरोधी, विषाणुरोधी, फफूंदरोधी और कैंसररोधी है। अलसी शरीर की रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ कर शरीर को बाहरी संक्रमण या आघात से लड़ने में मदद करती हैं और शक्तिशाली एंटी-आक्सीडेंट है। लिगनेन वनस्पति जगत में पाये जाने वाला एक उभरता हुआ सात सितारा पोषक तत्व है जो स्त्री हार्मोन ईस्ट्रोजन का वानस्पतिक प्रतिरूप है और नारी जीवन की विभिन्न अवस्थाओं जैसे रजस्वला, गर्भावस्था, प्रसव, मातृत्व और रजोनिवृत्ति में विभिन्न हार्मोन्स् का समुचित संतुलन रखता है। लिगनेन मासिकधर्म को नियमित और संतुलित रखता है। लिगनेन रजोनिवृत्ति जनित-कष्ट और अभ्यस्त गर्भपात का प्राकृतिक उपचार है। लिगनेन दुग्धवर्धक है। लिगनेन स्तन, बच्चेदानी, आंत, प्रोस्टेट, त्वचा व अन्य सभी कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू तथा एंलार्ज प्रोस्टेट आदि बीमारियों से बचाव व उपचार करता है।

जोड़ की हर तकलीफ का तोड़ है अलसी। जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जरी का सस्ता और बढ़िया उपचार है अलसी। ­­ आर्थ्राइटिस, शियेटिका, ल्युपस, गाउट, ओस्टियोआर्थ्राइटिस आदि का उपचार है अलसी।

कई असाध्य रोग जैसे अस्थमा, एल्ज़ीमर्स, मल्टीपल स्कीरोसिस, डिप्रेशन, पार्किनसन्स, ल्यूपस नेफ्राइटिस, एड्स, स्वाइन फ्लू आदि का भी उपचार करती है अलसी। कभी-कभी चश्में से भी मुक्ति दिला देती है अलसी। दृष्टि को स्पष्ट और सतरंगी बना देती है अलसी।
  • अलसी बांझपन, पुरूषहीनता, शीघ्रस्खलन व स्थम्भन दोष में बहुत लाभदायक है।
  • मीनोपोज़ (माहवारी सम्बंधित) की तकलीफों पर पॉज़ लगा देती है अलसी।
  • पुरुषरोग में सस्टेन्ड रिलीज़ वियाग्रा है अलसी। जो अलसी खाये वो गाये जवानी ज़िंदाबाद बुढ़ापा बाय बाय।
  • पुरूष को कामदेव तो स्त्रियों को रति बनाती है अलसी।
  • बॉडी बिल्डिंग के लिये नम्बर वन सप्लीमेन्ट है अलसी।
  • जोड़ की तकलीफों का तोड़ है अलसी। जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जरी का सस्ता और बढ़िया विकल्प है अलसी।
  • क्रूर, कुटिल, कपटी, कठिन, कष्टप्रद कर्करोग का सस्ता, सरल, सुलभ, संपूर्ण और सुरक्षित समाधान है अलसी।
1952 में डॉ. योहाना बुडविग ने ठंडी विधि से निकले अलसी के तेल, पनीर, कैंसररोधी फलों और सब्ज़ियों से कैंसर के उपचार का तरीका विकसित किया था जो बुडविग प्रोटोकोल के नाम से जाना जाता है। यह कर्करोग का सस्ता, सरल, सुलभ, संपूर्ण और सुरक्षित समाधान है। उन्हें 90 प्रतिशत से ज्यादा सफलता मिलती थी। इसके इलाज से वे रोगी भी ठीक हो जाते थे जिन्हें अस्पताल में यह कहकर डिस्चार्ज कर दिया जाता था कि अब कोई इलाज नहीं बचा है, वे एक या दो धंटे ही जी पायेंगे सिर्फ दुआ ही काम आयेगी। उन्होंने सशर्त दिये जाने वाले नोबल पुरस्कार को एक नहीं सात बार ठुकराया।

अलसी सेवन का तरीकाः-

  1. हमें प्रतिदिन 30 – 60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये। 30 ग्राम आदर्श मात्रा है। अलसी को रोज मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना चाहिये। डायबिटीज के रोगी सुबह शाम अलसी की रोटी खायें। कैंसर में बुडविग आहार-विहार की पालना पूरी श्रद्धा और पूर्णता से करना चाहिये। इससे ब्रेड, केक, कुकीज, आइसक्रीम, चटनियाँ, लड्डू आदि स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जाते हैं।
  2. अलसी को सूखी कढ़ाई में डालिये, रोस्ट कीजिये (अलसी रोस्ट करते समय चट चट की आवाज करती है) और मिक्सी से पीस लीजिये. इन्हें थोड़े दरदरे पीसिये, एकदम बारीक मत कीजिये. भोजन के बाद सौंफ की तरह इसे खाया जा सकता है .
  3. अलसी की पुल्टिस का प्रयोग गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया और पसलियों के दर्द में लगाकर किया जाता है। इसके साथ यह चोट, मोच, जोड़ों की सूजन, शरीर में कहीं गांठ या फोड़ा उठने पर लगाने से शीघ्र लाभ पहुंचाती है। यह श्वास नलियों और फेफड़ों में जमे कफ को निकाल कर दमा और खांसी में राहत देती है।
  4. इसकी बड़ी मात्रा विरेचक तथा छोटी मात्रा गुर्दो को उत्तेजना प्रदान कर मूत्र निष्कासक है। यह पथरी, मूत्र शर्करा और कष्ट से मूत्र आने पर गुणकारी है। अलसी के तेल का धुआं सूंघने से नाक में जमा कफ निकल आता है और पुराने जुकाम में लाभ होता है। यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी गुण दर्शाता है। अलसी के काढ़े से एनिमा देकर मलाशय की शुद्धि की जाती है। उदर रोगों में इसका तेल पिलाया जाता हैं।
  5. अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है। पथरी, सुजाक एवं पेशाब की जलन में अलसी का फांट पीने से रोग में लाभ मिलता है। अलसी के कोल्हू से दबाकर निकाले गए (कोल्ड प्रोसेस्ड) तेल को फ्रिज में एयर टाइट बोतल में रखें। स्नायु रोगों, कमर एवं घुटनों के दर्द में यह तेल पंद्रह मि.ली. मात्रा में सुबह-शाम पीने से काफी लाभ मिलेगा।
  6. इसी कार्य के लिए इसके बीजों का ताजा चूर्ण भी दस-दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ प्रयोग में लिया जा सकता है। यह नाश्ते के साथ लें।
  7. बवासीर, भगदर, फिशर आदि रोगों में अलसी का तेल (एरंडी के तेल की तरह) लेने से पेट साफ हो मल चिकना और ढीला निकलता है। इससे इन रोगों की वेदना शांत होती है।
  8. अलसी के बीजों का मिक्सी में बनाया गया दरदरा चूर्ण पंद्रह ग्राम, मुलेठी पांच ग्राम, मिश्री बीस ग्राम, आधे नींबू के रस को उबलते हुए तीन सौ ग्राम पानी में डालकर बर्तन को ढक दें। तीन घंटे बाद छानकर पीएं। इससे गले व श्वास नली का कफ पिघल कर जल्दी बाहर निकल जाएगा। मूत्र भी खुलकर आने लगेगा।
  9. इसकी पुल्टिस हल्की गर्म कर फोड़ा, गांठ, गठिया, संधिवात, सूजन आदि में लाभ मिलता है।
  10. डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है। अलसी व गैहूं के मिश्रित आटे में (जहां अलसी और गैहूं बराबर मात्रा में हो)
  11. स्रोत : http://onlyayurved.com/supplement/flax-seed/



ज्‍यादा मात्रा में अलसी खाने के नुकसान:

1. लूज मोशंस: अगर अलसी ज्‍यादा मात्रा में खाई जाए तो लूज़-मोशन हो सकते हैं. अगर इन्‍हें सही मात्रा में खाया जाए तो कब्‍ज से राहत म‍िलती है और अच्‍छी तरह पेट की सफाई भी हो जाती है. हालांकि, जरूरत से ज्‍यादा खाने पर आपको बार-बार वॉशरूम जाना पड़ेगा. यही नहीं डायरिया की आशंका भी रहती है. ऐसे लोग जो पहले से ही इन दिक्‍कतों का सामना कर रहे हैं उन्‍हें किसी भी हाल में अलसी का इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए. 

2. आंतों में ब्‍लॉकेज: विशेषज्ञों की मानें तो पर्याप्‍त मात्रा में तरल पदार्थ लिए बिना जरूरत से ज्‍यादा अलसी खाने से आंतों में ब्‍लॉकेज आ सकता है. जिन्‍हें पहले से ही इस तरह की श‍िकायत रही है उन्‍हें अलसी के बीज नहीं खाने चाहिए. खासतौर से Scleroderma के मरीजों को इन्‍हें नहीं खाना चाहिए क्‍योंकि इससे भयानक कब्‍ज हो सकता है. हालांकि अलसी के तेल का इस्‍तेमाल Scleroderma के इलाज के लिए किया जाता है. 

3. एलर्जी: ज्‍यादा अलसी खाने वाले कुछ लोग एलर्जी की श‍िकायत कर चुके हैं. ज्‍यादा अलसी खाने से सांस लेने में रुकावट, लो ब्‍लड प्रेशर और तीव्रग्राहिता जैसे एलर्जिक रिएक्‍शन हो सकते हैं. यही नहीं घबराहट, पेट में दर्द और उल्‍टी की श‍िकायत भी हो सकती है. 

4. जो महिलाएं प्रेग्‍नेंट होना चाहती हैं: अलसी के बीज एस्‍ट्रोजन की तरह काम करते हैं और जो महिलाएं रोजाना अलसी के बीज खाती हैं उनके पीरियड साइकिल में बदलाव आ सकता है. इसके अलावा जो महिलाएं हार्मोनल दिक्‍कतों जैसे कि पॉलिसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम, यूटरिन फायब्रॉयड्स, यूटरिन कैंसर और ओवरी कैंसर से जूझ रही हैं उन्‍हें अलसी को अपनी डाइट में शामिल करते वक्‍त सावधानी बरतनी चाहिए. ज्‍यादा मात्रा में अलसी खाने से इन दिक्‍कतों की वजह से बांझपन का खतरा बढ़ सकता है. 

5. प्रेग्‍नेंसी के दौरान असुरक्ष‍ित: चूंकि अलसी के बीजों में एस्‍ट्रोजन जैसे गुण होते हैं इसलिए इससे पीरियड्स आ सकते हैं. प्रेग्‍नेंट महिलाओं को अलसी के बीज खाने की सलाह नहीं दी जाती है क्‍योंकि इन्‍हें खाने से पीरियड्स आ सकते हैं जो होने वाले बच्‍चे और मां दोनों को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी हैं. 

6. दवाइयों पर रिएक्‍शन: फाइबर युक्‍त अलसी पाचन तंत्र को ब्‍लॉक कर कुछ दवाइयों और सप्‍लीमेंट्स को अवशोषित नहीं होने देती है. अगर आप इस तरह की दवाई ले रहे हैं तो अलसी न खाएं. यही नहीं अलसी के बीज खून को पतला करने वाली दवाइयों और ब्‍लड शुगर की दवाइयों को भी प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में आपको यही सलाह दी जाती है कि अलसी के अपनी डाइट में शमिल करने से पहले डॉक्‍टर की सलाह जरूर लें. 

दिल्‍ली की रहने वाली न्‍यूट्रिशनिस्ट पूजा मल्‍होत्रा कहती हैं कि सही मात्रा में अलसी खाने से ब्‍लड शुगर लेवल कम होता है, ब्‍लड कोलेस्‍ट्रॉल सही रहता है और ऑटोइम्‍यून डिस्‍ऑर्डर को ठीक करने में मदद मिलती है. अलसी के बीज फाइबर, मिनरल्‍स, ओमेगा 3 फैटी एसिड और एंटीऑक्‍सीडेंट गुणों से भरपूर हैं.

डिस्‍क्‍लेमर (Disclaimer: A statement that denies something, especially responsibility): ऊपर बताई गईं बातें जेनरिक जानकारी है. यह क्‍वालिफाइड डॉक्‍टर की राय का विकल्‍प नहीं है. ज्‍यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें. उक्त जानकारी को पढकर खुद का उपचार करना सही नहीं है। फिर भी कोई ऐसा करता है तो किसी प्रकार की परेशानी होने के लिये हेल्थ केयर फ्रेंड की कोई जिम्‍मेदारी नहीं होगी।

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

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सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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Cucumber कब्जी कमजोरी कमर कमर दर्द कमेड़ा करेला कर्ण वेदना कर्णरोग कष्टार्तव-Dysmenorrhea कांच निकलना काजू कान कानून सम्मत काम काम शक्ति कामवाण पाउडर कामशक्ति कामशक्ति-Sexual power कामेच्छा कामोत्तेजना कायाकल्प कार्बोहाइड्रेट कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates काला जीरा काला नमक काली जीरी काली तुलसी काली मिर्च काले निशान कास-खांसी-Cough किडनी किडनी संक्रमण किडनी स्‍टोन कीड़े कीमोथेरेपी कुकरौंधा कुकुंदर कुटकी-Black Hellebore कुबडापन कुमेड़ा कुल्थी कुल्ला कुष्ट कुष्ठ कृमि केला केसर कैफीन-Caffeine कैलोरी कैलोरी चार्ट कैलोरी-Calories कैवांच कैविटी कैंसर कॉफी कॉफ़ी कॉलेस्ट्रॉल कोंडी घास कोढ़ कोबरा कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol कोलेस्ट्रोल कौंच कौमार्य क्रियाशीलता क्रोध क्षय रोग-Tuberculosis क्षारीय तत्व क्षुधानाश खजूर खजूर की चटनी खनिज खरबूजा-Musk melon खरेंटी खरैंटी शिलाजीत खाज खांसी खिरेंटी खिरैटी खीप खीरा खुजली खुशी-Joy खुश्की खुश्बू खोया गंजापन-Baldness गठिया गठिया-Arthritis गठिया-Gout गड़तुम्बा गंडा-ताबीज गंध गन्ने का रस गरमा गरम गर्भ निरोधक गर्भधारण गर्भपात गर्भवती गर्भवती कैसे हों? गर्भावस्था गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy गर्भाशय गर्भाशय भ्रंश गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy गर्म पानी गर्मी गर्मी-Heat गलगण्ड गाजर गाजवां गांठ गाँठ-Knot गारंटी गारण्टेड इलाज गाल ब्लैडर गिलोय गिल्टी गुड़हल गुंदा गुदाद्वार गुदाभ्रंश गुम्मा गुर्दे गुलज़ाफ़री गुस्सा गृध्रसी गृह-स्वामिनी गेदुआ की छाछ गैस गैस्ट्रिक गैहूं का जवारा गोक्षुरादि चूर्ण गोखरू गोखरू (LAND CALTROPS) गोंद कतीरा-Hog-Gum गोंदी गोभी-Cabbage गोरख मुंडी गोरखगांजा गोरखबूटी गोरखमुंडी ग्रीन-टी घमोरी घरेलु ​नुस्खे घाघरा घाव चकवड़ चक्कर चपाती चमत्कारिक सब्जियां चरित्र चर्बी चर्म चर्म रोग चर्मरोग चाय चाय-Tea चालीस के पार-Forty Across चिकनगुनिया चिकित्सकीय चिटकन चिंतित चिरायता-Absinth चिरोटा चुंबन चोक चौलाई छपाकी छरहरी काया छाछ छाजन बूटी छाले छींक छीकें छुअ छुआरा छुहारा छोटा गोखरू छोटा धतूरा छोटी हरड़ जंक फूड जकवड़ जख्म जंगली तिल्ली जंगली तुलसी जंगली पेड़ जंगली मिर्ची जंगली-कटीली चौलाई जटामांसी-Spikenard जलजमनी जलन जलोदर रोग-Ascites Disease जवारा जवारे जवासा-Alhag जहर जामुन का जूस जायफल जिगर जीरा जीवन रक्षक जीवनी शक्ति जुएं जुकाम जुदाई जुलाब जूएं जूस जोड़ों के दर्द जोड़ों में दर्द जौ ज्यूस ज्योति ज्वर ज्वर-Fiver झाइयाँ झांईं झाड़-फूंक झुर्रियाँ झुर्रियां झुर्री झूठे दर्द टमाटर का रस टमाटर-Tomatoes टाइफाइड टाटबडंगा टायफायड टूटी हड्डी टॉन्सिल टोटला ट्यूमर ठंड ठंडापन ठेकेदार डॉक्टर डकार डकारें डायबिटीज डायरिया डिग्री फ़ारेनहाइट डिग्री सेल्सियस डिजिसेक्सुअल डिटॉक्सीफाई डिटॉक्सीफिकेशन डिनर डिप्रेशन डिब्बाबंद भोजन डिलेवरी डीकामाली डीगामाली डेंगू डेंगू-Dengue डॉ. निरंकुश डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' डॉ. मीणा ढकार ढीलापन ढीली योनि तकलीफ का सही इलाज तंत्र-मंत्र तम्बाकू तरबूज-Watermelon तलाक ताकत तिल तिल्ली तुंबा तुंबी तुम्बा तुलसी तेल त्रिदोषनाशक त्रिफला त्वचा त्वचा रोग थकान थाईरायड थायरायड-Thyroid थायरॉइड दण्डनीय अपराध दंत वेदना दन्तकृमि दन्तरोग दमा दर वेदना दरार दर्द दर्द निवारक दर्द निवारक दवा दर्दनाक दस्त दही दाग-धब्बे-Stains-Spots दाढ़ दांत दांतो में कैविटी-Teeth Cavity दाद दाम्पत्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot बदबू बंध्यापन बबूल-ACACIA बरसाती बीमारियाँ बरसाती बीमारियां बलगम बलवृद्धि बला बलात्कार बवासीर बहरापन बहुनिया बहुमूत्रता- बांझपन बादाम-Almonds बादाम. बाल बाल झड़ना बाल झडऩा-Hair Falling बिना सिजेरियन मां बनें बिवाई बीजबंद बीड़ी बीमारियों के अनुसार औषधियां बीमारी बील बुखार बूंद-बूंद पेशाब बेल बेली बैक्टीरिया बॉयोकैमी ब्र​ह्मदण्डी ब्रेस्ट ग्रोथ ब्लड प्रेशर ब्लैक मेलिंग ब्लॉकेज भगंदर भगंदर-Fistula-in-ano भगनासा भगन्दर भगोष्ठ भड़भांड़ भय भविष्य भस्मक रोग भावनात्मक भुई आंवला-Phyllanthus Niruri भूई आमला भूई आंवला भूख भूख बढ़ाने भूत-प्रेत भूमि भूमि आंवला भोजनलीवर मकोय मकोय-Soleanum nigrum मक्का मक्का के भुट्टे मंजीठ मटर-PEA मंद दृष्टि मंदाग्नि मदार मधुमेह मधुमेह-Diabetes मन्दाग्नि-Dyspepsia मरुआ मरोड़ मर्द मर्दाना मलाशय मलेरिया मलेरिया (Malaria) मवाद मसाले मस्तिष्क मस्से मस्से-WARTS महंगा इलाज महत्वपूर्ण लेख महाबला माइग्रेन माईग्रेन माईंड सैट माजूफल मानवव्यवहार मानसिक मानसिक लक्षण मानसिक-Mental मानिसक तनाव-Mental Stress मायोपिया मासिक मासिक-धर्म मासिकधर्म मासिकस्राव माहवारी मिनरल मिर्गी मिर्च-Chili मीठा खाने की आदत मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex मुख्य लक्षण मुधमेह मुलहठी मुलेठी मुहाँसे मूँगफली मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders मूत्र मूत्र असंयमितता मूत्र में जलन-Burning in Urine मूत्ररोग मूत्राशय मूत्रेन्द्रिय मूर्च्छा (Unconsciousness) मूली मूली कर रस मृत्यु मृत्युदण्ड मेथी मेथी दाना मेंहदी मैथुन मोगरा (Mogra) मोटापा मोटापा-Obesity मोतियाबिंद मौत मौलसिरी मौसमी बीमारियां यकृत यकृत प्लीहा यकृत वृद्धि-Liver Growth यकृत-लीवर-जिगर-Lever यूपेटोरियम परफोलियेटम यूरिक एसिड लेबल योग विज्ञापन योन योन संतुष्टि योनि योनि ढीली योनि शिथिल योनि शूल-Vaginal Colic योनि संकोचन योनिद्वारा योनिभ्रंश योनी योनी संकोचन यौन यौन आनंद यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills) यौन क्षमता यौन दौर्बल्य यौन शक्तिवर्धक यौन शिक्षा यौन समस्याएं यौनतृप्ति यौनशक्ति यौनशिक्षा यौनसुख यौनानंद यौनि रक्त प्रदर (Blood Pradar) रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA रक्तचाप रक्तपित्त रक्तशोधक रक्ताल्पता रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia रस-juices रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum रामबाण रामबाण औषधियाँ-Panacea 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स्तम्भन स्त्री स्त्रीत्व स्त्रैण स्पर्श स्मृति-लोप स्वप्न दोष स्वप्नदोष स्वप्नदोष-Night Fall स्वभाव स्वभावगत स्वरभंग स्वर्णक्षीरी स्वस्थ स्वास्थ्य स्वास्थ्य परामर्श स्वास्थ्य रक्षक सखा हजारदानी हड़जोड़ हड्डी हड्डी में दर्द हड्डी संक्रमण हड्डीतोड़ ज्वर हड्डीतोड़ बुखार हरड़ हरसिंगार हरी दूब-CREEPING CYNODAN हरीतकी हर्टबर्न हस्तमैथुन हस्तमैथुन-Masturbation हाई बीपी हाथ-पैर नहीं कटवायें हारसिंगार हालात हिचकी हिचकी-Hiccup हिमोग्लोबिन-hemoglobin हिस्टीरिया हिस्टीरिया-Hysteria हींग हीनतर हुरहुर हुलहुल हृदय हृदय-Heart हेपेटाइटिस हेपेटाईटिस हेल्थ टिप्स-Health-Tips हेल्थ बुलेटिन हैजा हैपीनेस-Happiness हैल्थ होम केयर टिप्स-Home Care Tips होम्यापैथ होम्योपैथ होम्योपैथिक होम्योपैथिक इलाज होम्योपैथिक उपचार होम्योपैथी होम्योपैथी-Homeopathy