कैंसर (Cancer): कहीं देर न हो जाये?
लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
तेजी से भागती दौड़ती 21वीं सदी की पीढी के मन में भी भयावह खौफ है-कैंसर के नाम का। अत: अभी भी कैंसर का नाम ही मौत का पर्याय समझा जाता है। कारण-शुरूआत में कैंसर की मौत भयानक होती थी। वर्तमान में कैंसर को लाइलाज नहीं माना जाता और असाध्य मामलों में भी चिकित्सा विज्ञान ने कैंसर की मौत को असान बना दिया है। इसके बावजूद भी लोगों के मन में कैंसर का आतंक बना हुआ है। समझने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरूआत में कैंसर का इलाज संभव है। उचित इलाज के बाद रोगी स्वस्थ और बिल्कुल सामान्य जीवन जी सकता है।

यद्यपि यह दु:खद है कि कैंसर के नाम से रोगी के परिजनों को जमकर लूटा जा रहा है। यह भी देखने में आता है कि यदि कोई वैद्य, हकीम या डॉक्टर सस्से में कैंसर का उपचार करना चाहे तो अधिकतर मामलों में रोगी के परिजन उस पर विश्वास ही नहीं करते हैं। क्योंकि लोगों की मानसिकता (Mentality) इस प्रकार की हो गया है कि जितनी बड़ी बीमारी उतना ही महंगा इलाज (expensive treatment) है। अत: लोग सस्ती दवाईयों पर पर भरोसा नहीं करते। इस वजह से भी अनेक लोग बेमौत मर रहे हैं। जबकि अनेक बहुत सस्ती ऐसी जड़ी-बूटियां और होम्योपैथिक दवाइयां उपलब्ध हैं, जिनके उचित मात्रा में विधिवत तथा नियमित सेवन से कैंसर की प्रारंभिक और कुछ मामलों में अंतिम अवस्था में भी जीवन को बचाया जा सकता है।
खर्चीली कीमोथेरेपी (Chemotherapy) लेने के बाद भी लगातार हो रही कैंसर मौतों से भी लोगों को कैंसर का व्यापारिक गणित समझ में नहीं आना दु:खद है। कैंसर अनेक प्रकार के होते हैं। कैंसर के विभिन्न रूपों और उनके लक्षणों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है। लेकिन इन लक्षणों के होने पर जरूरी नहीं कि कैंसर ही हो, लेकिन सावधानी जरूरी है। अत: इन लक्षणों के प्रकट होने पर सतर्कता जरूरी है:-
01. आमाशय कैंसर: उल्टियां होते रहना, उल्टी और दस्त में खून आना, वजन का लगातार घटना, भूख न लगना आदि।
02. फेफड़ों का कैंसर: लगातार बुखार, छाती में दर्द, लगातार खांसी रहना, खांसते वक्त छाती में दर्द, बलगम में खून आना आदि।
03. स्तन कैंसर: शुरू में स्तन में ऐसी गांठ हो] जिसमें दर्द रहता हो, स्तन में रक्त स्राव होना, कांख में गांठ होना, स्तन की त्वचा का अधिक खुरदरा होना, त्वचा पर सूजन होना आदि।
04. लीवर कैंसर: भूख न लगना, बार-बार पीलिया होना, लीवर में सोजन या लीवर बढ़ जाना, दायें ओर की पसलियों के ठीक नीचे दर्द होना आदि।
05. मुख कैंसर: मुख से दुर्गंध आना, खाने व निगलने में तकलीफ, मुंह में लगातार छालों का बने रहना और छालों का जल्दी ठीक न होना आदि।
06. किडनी कैंसर: पीठ में लगातार दर्द बने रहना, पेशाब में रक्त आना, पेट में गांठ का होना आदि।
07. ब्लड कैंसर: बार-बार ज्वर से पीडि़त रहना, शरीर में खून की कमी बने रहना, त्वचा पर लाल चकत्ते उभरना, गर्दन व जांघ में गांठ बन जाना, तिल्ली का बढऩा, गुदा या मूत्र मार्ग से खून आना आदि।
08. ओवरी कैंसर: पेट के निचले हिस्से में गांठ का होना, वजन घटना, पेट के निचले हिस्से में भारीपन बने रहना आदि।
09. गर्भाशय कैंसर: पेट के निचले भाग में भारीपन का रहना और दर्द रहना, मासिक धर्म का अधिक मात्र में और अधिक दिनों तक आना, बदबूदार श्वेतप्रदर स्राव , मल-मूत्र विसर्जन में दर्द होना, अचानक मासिक धर्म के बंद होने के बाद फिर से खून स्राव का होना आदि।
10. त्वचा कैंसर: त्वचा पर घाव होना, घाव का जल्दी न भरना, घाव का फैलते जाना, घाव में मामूली दर्द बने रहना, घाव से खून का रिसना आदि।
11. गुदा कैंसर: शौच के समय बहुत दर्द होना, शौच के साथ खून निकलना, गुदा का बाहर निकलना, गुदा में गांठ का हो जाना आदि।
12. थायराइड कैंसर: गले के बीच में गांठ बनना, उस गांठ में दर्द बने रहना, सांस लेने में तकलीफ होना, खाते, पीते, निगलते समय गले में दर्द होना आदि।
13. ब्रेन कैंसर: सिर में लगातार दर्द बने रहना, मिर्गी के दौरे पडऩा, अशान्त नींद, शरीर के किसी भाग में लकवे का होना, बार-बार बेहोश हो जाना आदि।
14. अण्डकोष का कैंसर: एक तरफ से अण्डकोष का बढऩा, अण्डकोष में दर्द महसूस न होना, खांसते और सांस लेते समय तकलीफ का होना आदि।
15. आहार नली का कैंसर: गले में खाना अटकना, खाना खाते समय दर्द होना, खून की उल्टी होना, खाना बहुत धीरे-धीरे खा पाना आदि।
16. बड़ी आंत का कैंसर: पाचनतंत्र का अस्वस्थ होना, कभी दस्त और कभी कब्ज़ होना, मल के साथ रक्त स्राव होना, शौच के समय तकलीफ होना या दर्द होना, गुदा द्वार के अन्दर गांठ का होना आदि।
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-Online Dr. P. L. Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 8561955619 (10AM to 10 PM), 31.05.2018.