Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)
Health Care Friend and Marital Dispute Consultant
(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)
-:Mob. & WhatsApp No.:-
85619-55619 (10 AM to 10 PM)
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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।
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हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-3 (Health Bulletin-3)
समस्या: मेरी उम्र 38 साल, लम्बाई 5 फिट 4 इंच और वजन 85 किलो है। मैं दो बच्चों का पिता हूं। मुझे विवाहपूर्व से ही शीघ्रपतन की समस्या है। इस कारण पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाता हूं। इस कारण हमारे बीच किसी न किसी बात पर लगातार तकरार होती ही रहती है। जबकि सभी प्रकार की समस्याओं की जड़ शीघ्रपतन है। इस वजह से हम एक साथ रहकर भी दुश्मनों की भांति रहते हैं। महिनों तक हमारे बीच बीतचीत तक नहीं होती है। कृपया कोई पक्का इलाज बतायें। एक्सवाईजेड त्रिवेदी, गोरखपुर, उप्र।
परामर्श: त्रिवेदी जी सबसे पहले तो आप यह समझ लें कि आपकी समस्या कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिससे आप अकेले जूझ रहे हैं, बल्कि एक अध्ययन के अनुसार भारत में 30 फीसदी लोगों का दाम्पत्य तकरीबन इसी तरह का है। आप और आप जैसी तकलीफ से जूछ रहे दम्पत्तियों के हितार्थ मैं आपको कुछ सुझाव लिख रहा हूं:-
(1) पहली बात झगड़ा करना या बातचीत बंद कर देना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को बढाना है। आपको अपने वैवाहिक सम्बन्धों की पुनर्स्थापना हेतु तुरंत किसी अनुभवी तथा विश्वास योग्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार (Marital Dispute Consultant) से सम्पर्क करना चाहिये।
(2) दूसरी बात दाम्पत्य विवाद सलाहकार से सम्पर्क करने के बाद उनकी सलाह का अनुसरण करें। जब तक आपको दाम्पत्य विवाद सलाहकार का परामर्श नहीं मिल पाता है, आप मेरी वेब साइट स्वास्थ्य रक्षक सखा (Health Care Friend) पर 'शीघ्रपतन' (Early Ejaculation) शीर्षक से प्रकाशित मेरे लेख को पढें और अपने पाचन संस्थान का उपचार करवायें। उसके बाद ही उपचार की सोचें। क्योंकि जब तक आपका पाचन संस्थान ठीक नहीं होगा, आपकी किसी भी बीमारी का आसानी से उपचार सम्भव नहीं है। जिसके लिये आप किसी स्थानीय डॉक्टर से सम्पर्क करें। या इस पोस्ट के अंत में लिखे मेरे हेल्थ वाट्सएप पर सम्पर्क करें।
(3) तीसरी बात उपचार होने तक आप त्रिफला का सेवन कर सकते हैं। लेकिन बाजारू त्रिफला नहीं लें, बल्कि थोड़ा सा श्रम खुद करें। 100 ग्राम बड़ी हरड़, 200 ग्राम बहेड़ा, 400 आंवला लें। तीनों ताजा हों। अर्थात पुराने सड़े-गले नहीं हों। तीनों को अच्छे से कूट-पीसकर कपड़छन करके पाउडर बना लें। इस सब में 200 ग्राम काले नमक का पाउडर बनाकर मिला लें। सभी को मिश्रित करके किसी एयर टाईट डब्बे में भरकर सुरक्षित रख लें। इसमें से प्रतिदिन शाम को दो टी-स्पून (Teaspoon) पाउडर शाम को आधा गिलास पानी में भिगो दें। सुबह आधा गिलास पानी और मिलायें। फिर धीमी आंच पर पकावें। जब पानी आधा रह जाये तो सुबह खाली पेट गुनगुना-गुनगुना (Lukewarm) नियमित रूप से लगातार एक से तीन महिने तक या पाचन संस्थान ठीक होने तक पियें। खाली पेट चाय और दूध का सेवन भूलकर भी नहीं करें।
(4) जब आपकी पाचन क्रिया नियमित हो जाये तो शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच का विधिवत शोधित किया हुआ पाउडर, शुद्ध आॅर्गेनिक अश्वगंधा पाउडर, शुद्ध सफेद मूसली पाउडर तीनों को कपड़छन करके समान मात्रा में मिला लें, इन तीनों के बराबर मात्रा में मिश्री पाउडर मिला लें। रात्रि सोते समय करीब 5 ग्राम पाउडर की फक्की लेकर 150 से 500 मिलीलीटर तक, अपनी क्षमतानुसार गुनगुना-गुनगुना (Lukewarm) दूध नियमित रूप से पियें।
(5) पूरी तरह से स्वस्थ होने तक किसी भी प्रकार का नशा और मांसाहार नहीं करें। नियमित रूप से समय पर स्वास्थ्यवर्धक भोजन लें।
चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]
नोट/Note: अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे उचित समाधान प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619
----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।—डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-14.03.2018.
हस्तमैथुन की लत (Masturbation Addiction) छुड़ाने का 100% उपचार
समस्या: सर मुझे हस्तमैथुन करने की ऐसी लत लग चुकी है कि मैं लागातार प्रयास के बाद भी इसे छोड़ नहीं पा रहा हूं। अनेक ऐलोपैथ डॉक्टर कहते हैं कि हस्तमैथुन करने से कोई नुकसान नहीं होता है। इसका कोई इलाज नहीं है और विवाह ही इसका समाधान है। जबकि सर हस्तमैथुन की लत के कारण मैं मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होता जा रहा हूं। इस कारण अपराधबोध का शिकार भी हो चुका हूं? सर मुझे उचित परामर्श एवं समाधान बताने का कष्ट करें।-मनीष (बदला हुआ नाम), रायपुर, छत्तीसगढ।
समाधान: मनीष जी, आपकी बात सही है। हस्तमैथुन की लत के आदी हजारों युवक-युवतियां आप ही की जैसी स्थिति में जी रहे हैं। यदि आप किसी ऐलोपैथ डॉक्टर से सम्पर्क करेंगे तो निश्चय ही उनकी ओर से हस्तमैथुन का कोई उपचार या समाधान बताने के बजाय, आपको निम्न सलाह दी जायेंगी:-
(1)—हस्तमैथुन करना कोई बीमारी नहीं है।
(2)—हस्तमैथुन करने से कोई नुकसान नहीं होता है।
(3)—हस्तमैथुन की लत छोड़ने के लिये जल्दी शादी करें।
डॉक्टर्स की उक्त सलाह अपनी जगह पर हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मुझ से सम्पर्क करने वाले हस्तमैथुन की लत के आदी युवक अपने आप को शारीरिक कमजोरी, यौन उत्तेजना में कमी, आत्मविश्वास में कमी, अनिद्रा, कमजोर पाचन क्रिया, भूख की कमी, लैंगिक शिथिलता, स्वत: वीर्यपात और शीघ्रपतन के शिकार बताते रहते हैं।
अनुभव यही बतलाता है कि हस्तमैथुन के साईड इफैक्ट भयावह हैं। जहां तक उचित परामर्श और उपचार का सवाल है तो:-
उचित परामर्थ: अपने विश्वसनीय डॉक्टर को बेहिचक अपनी सभी तकलीफों के बारे में विस्तार से सही, सत्य और पूर्ण जानकारी से अवगत करावें। जिससे आपका समुचित परामर्श दिया जा सके।
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परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच।
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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
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उपचार: होम्योपैथी और आयुर्वेदिक औषधियों से हस्तमैथुन की लत और हस्तमैथुन के सभी तरह के साईड इफैक्ट्स का उपचार सम्भव है। मैं बताना चाहूंगा कि इस बात में कोई दो राय नहीं है कि होम्योपैथी में हस्तमैथुन की लत का 100 फीसदी उपचार सम्भव है। लेकिन हस्तमैथुन के कारण जन्मी अन्य सभी परेशानियों का भी उपचार भी उतना ही जरूरी है, जितना कि हस्तमैथुन का जरूरी है। लेकिन जब तक रोगी का पाचनतंत्र, लीवर, तिल्ली, गुर्दा और मानसिक संतुलन सही से उपचार नहीं होगा, हस्तमैथुन का कोई भी इलाज सफल नहीं हो सकता।
*-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619, 01.10.2017*
*-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, आॅल लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा। परामर्श समय: सुबह 10 से सायं 10 बजे के बीच। वाट्सएप नम्बर: 85-619-55-619, 01.10.2017*
भारत में मुख्यत: केसर की खेती कश्मीर में होती है। केसर के प्रमुख औषधीय लाभ निम्न प्रकार हैं:—
1. पाचन: पेट से जुड़ी अनेक परेशानियों जैसे अजीर्ण, अपच, गैस को दूर करने में केसर लाभकारी है। इन तकलीफों में दूध के साथ केसर का नियमित सेवन करने से लाभ मिलता है।
2. सर्दी-बुखार: यदि सर्दी और बुखार की तकलीफ से परेशान हैं तो 1 गिलास गर्म दूध में 1 चुटकी केसर और शहद मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
3. किडनी और लीवर: किडनी और लिवर के लिए केसर लाभकारी है। यह ब्लैडर और लीवर की समस्याओं को ठीक करने में मदद करती है। और रक्त शुद्धिकरण करती है।
4. यौन क्षमता एवं शारीरिक ऊर्जा वर्धक: केसर का सेवन करने से पुरुषों में यौन क्षमता अर्थात मर्दानगी बढ़ती है। अत: मर्दों को सर्दी के मौसम में केसर, बादाम और शहद का सेवन करना चाहिये। इसके अलावा केसर से शारीरिक ऊर्जा भी बढती है।
5. स्त्री रोगों में उपयोगी: विशेष रूप से सर्दियों में केसर का रोजाना सेवन करने से औरतों की महावारी तथा गर्भाशय से सम्बन्धित समस्याएं दूर होती हैं। केसर के सेवन से गर्भाशय में सूजन जैसी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं। महिलाओं की अनेक शिकायतें जैसे-मासिक चक्र में अनियमिता, गर्भाशय की सूजन, मासिक चक्र के समय दर्द होने जैसी समस्याओं में केसर का सेवन करने से आराम मिलता है।
6. तेजी से घाव भरे: केसर घाव और जख्म भरने के लिए सबसे अच्छी दवाई मानी जाती है। चोट लगने पर इसका दवाई की तरह इस्तेमाल करने से जल्दी आराम मिलता है। त्वचा के झुलसने या चोट लगने पर केसर के लेप लगाना चाहिए। इससे तुरंत फायदा होता है और नई त्वचा का निर्माण जल्द होता है।
7. ज्योतिवर्धक: केसर आंखों की परेशानी को दूर करने में भी मददगार होती है। एक शोध में यह बात सामने आयी है कि जिस प्रतिभागी ने केसर का सेवन किया उसकी नजरें बेहतर रहीं। यह मोतियाबिंद को भी दूर करती है।
8. गंजापन: गंजे लोगों के लिये तो केसर संजीवनी बूटी की तरह काम करती है। जिनके बाल सिर के बीच से उड़ जाते हैं, वे थोड़ी सी मुलेठी को दूध में पीस कर उसमें चुटकी भर केसर डाल कर पेस्ट बना लें। सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर हो जाती है। रूसी की समस्या हो या फिर बाल झड़ रहे हों, सभी समस्याओं में यह नुस्खा काम आता है।
9. गठिया दर्द: अर्थराइटिस के मरीजों के लिए भी केसर बहुत लाभकारी होता है। यह जोड़ों के दर्द से भी राहत दिलाता है। यह थकान को दूर करने और मांसपेशियों को राहत पहुंचाने का काम करता है।
10. नवजात बच्चें के लिए अमृत समान: अक्सर नवजात को सर्दी-जुकाम की समस्या घेर लेती है। इस समस्या से नवजात बच्चों को बचाने के लिए मां के दूध में केसर मिलाकर उसके नाक और माथे पर मलने से तुरंत लाभ होता है। या केसर, जायफल और लौंग का लेप बनाकर नवजात की छाती और पीठ पर लगाने से फायदा होता है। सर्दी का प्रकोप कम होता है और बच्चे को आराम मिलता है।
11. बुखार और स्मरण शक्ति: केसर में 'क्रोसिन' नामक तत्व पाया जाता है, जो वैज्ञानिक रूप से बुखार को दूर करने में उपयोगी माना जाता है। इसके साथ ही केसर एकाग्रता, स्मरण शक्ति और रिकॉल क्षमता को भी बढ़ाने का काम करता है।
12. दूध के साथ केसर: केसर को दूध के साथ मिलाकर पीने से कई तरह की शारीरिक दिक्कतेें दूर हो जाती हैं। केसर चर्म रोगों में बहुत फायदेमंद है। रोजाना रात को दूध और केसर का सेवन करने से नींद भी बहुत अच्छी आती है।
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परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच।
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सरफोंका, शरपुंखा (Purple Tephrosia)
परिचय :
शरपुंखा (संस्कृत),
सरफोंका (हिन्दी),
बनतील (बंगला),
उन्हाली (मराठी),
शरपंखी (गुजराती),
कमुविकवेलाई (तमिल),
वेंपलि (तेलुगु) तथा
टेफ्रीजिया पप्युरिया (लैटिन) में कहते हैं।
2. आकार : सरफोंका का पौधा 2-3 फुट ऊँचा, झाड़ीनुमा हर वर्ष उत्पन्न होता है। सरफोंका के पत्ते 3-6 इंच लम्बे होते हैं, जिसमें कई (13-21) छोटे पत्रक रहते हैं। फूल लाल रंग के 3-6 इंच लम्बे डंठल पर लगते हैं। फली 1-2 इंच लम्बी तथा 6-10 बीजों से युक्त होती है।
3. भेद : लाल तथा सफेद रंग के फूलों के भेद से इसकी दो जातियाँ होती हैं।
4. उपलब्धता : यह समस्त भारत में, अधिकतर पथरीली भूमि में उत्पन्न होता है। सफेद जाति का पौंधा कम प्राप्त होता है।
4. उपलब्धता : यह समस्त भारत में, अधिकतर पथरीली भूमि में उत्पन्न होता है। सफेद जाति का पौंधा कम प्राप्त होता है।
5. रासायनिक संघटन : इसमें क्लोरोफिल, राल, मोम, क्वेर्सेटीन के समान एक पदार्थ, गोंद, कुछ एल्ब्यूमिन, रंजक-द्रव्य, एश (भस्म) 6 प्रतिशत होते हैं।
6. गुण : यह स्वाद में कड़वा, कसैला, पचने पर कटु तथा हल्का, रूखा, तीक्ष्ण और गर्म होता है। इसका मुख्य प्रभाव पाचन-संस्थान पर यकृत प्लीहा रोगहर रूप में पड़ता है। यह शोथहर, चर्मरोगहर, कीटाणुहर, घाव भरनेवाला, रक्तशोधक, कफ-निःसारक, मूत्रजनक, गर्भाशय-उत्तेजक, रसायन, ज्वरहर, अग्निदीपक तथा विषहर है।
7. औषधीय प्रयोग :
उदरशूल : शरपुंखा मूल हरड़ सेंधा नमक तीनों समान भाग मिलाकर 3 ग्राम चूर्ण खाने से लाभ होता है।
प्लीहा : शरपुंखा की जड़ को मट्ठे के साथ लेने से बढ़ी हुई तिल्ली ठीक होती है।
दन्तरोग : इसकी जड़ की दातुन करने से दांतों का कोई रोग नही होता।
शस्त्रक्षत : कटे अंग का रक्त बंद करने के लिए इसकी जड़ को दातों से चबाकर बांध देने से चमत्कार होता है ।
मूषक-विष: चूहे के काटने पर इसके बीजों को मट्ठे में पीसकर पीने को दें।
8. प्रयोग, फायदे, तथा उपयोग :
शरपुंखा (Sharpunkha) का प्रयोग निम्नलिखित बीमारियों, स्थितियों और लक्षणों के उपचार, नियंत्रण, रोकथाम और सुधार के लिए किया जाता है:
लीवर सिरोसिस
पीलिया
तिल्ली/प्लीहा की वृद्धि
एनजाइना दर्द
दिल की घबराहट
9. दुष्प्रभाव : निम्नलिखित उन संभावित दुष्प्रभावों की सूची है जो उन दवाओं से हो सकते हैं जिनमें शरपुंखा (Sharpunkha) शामिल होता है। यह व्यापक सूची नहीं है। ये दुष्प्रभाव संभव हैं, लेकिन हमेशा नहीं होते हैं। कुछ दुष्प्रभाव दुर्लभ, लेकिन गंभीर हो सकते हैं। यदि आपको निम्नलिखित में से किसी भी दुष्प्रभाव का पता चलता है, और यदि ये समाप्त नहीं होते हैं तो अपने चिकित्सक से परामर्श लें।
उल्टी
जी मिचलाना
दस्त
10. Constituents of Sharpunkha : The plant contain flavonoids such as rutin, purpurin, purpurenone and purpuritenin and quercetin, retenoids like deguelin, elliptone, rotenone, tephrosin and sterols such as sitosterol. .The major constituents are Rutin, quercetin, retenoids deguelin, elliptone, rotenone, tephrosin and lupeol.
शरपुंखा के घटक : संयंत्र में फ्लूनोयोइड जैसे कि रूटीन, पुरपुरीन, पुरपुरेनोन और पुरपुरीतिनिन और क्वेरेटिन, डिएग्लिन, एल्प्टोऑन, रोटोनोइन, टेफ्रोसिन और स्टेरोल जैसे सैटेस्टेरोल जैसे रेटेनोड्स होते हैं। । प्रमुख घटक हैं रुतिन, क्वरेट्टिन, रेटेनोइड्स डिजेलिन, एल्प्टोऑन, रोटोनोइन, टेफ्रोसिन और ल्यूपोल।
11. Important Medicinal properties of Purple Tephrosia (Tephrosia Purpurea) Sharpunkha
Anthelmintic: expel parasitic worms (helminths) and other internal parasites from the body.
एन्थेल्मिंटिक: शरीर से परजीवी कीड़े (हेल्मीनथ) और अन्य आंतरिक परजीवी निकालें
Antipyretic/antifebrile/febrifuge: Effective against fever.
एंटिपेरेक्टिक / एंटिफेब्रीले / फीब्रिफ्यूज: बुखार के खिलाफ प्रभावी।
Anti-Hyperglycemic (counteracting the accumulation of excess sugar in the blood) : Counteracting high levels of glucose in the blood.
एंटी-हाइपरग्लिसेमिक (खून में अतिरिक्त चीनी का संचय करने की प्रतिक्रिया): रक्त में ग्लूकोज के उच्च स्तर का विरोध करना।
Deobstruent (Any medicine that removes obstructions; an aperient.) : Removing obstructions; having power to clear or open the natural ducts of the fluids and secretions of the body.
Deobstruent (कोई दवा जो अवरोधों को दूर करती है; एक उत्सव।): अवरोधों को दूर करना; शरीर के तरल पदार्थ और स्राव के प्राकृतिक नलिकाएं साफ़ करने या खोलने की शक्ति होने पर
Deobstruent (कोई दवा जो अवरोधों को दूर करती है; एक उत्सव।): अवरोधों को दूर करना; शरीर के तरल पदार्थ और स्राव के प्राकृतिक नलिकाएं साफ़ करने या खोलने की शक्ति होने पर
Diuretic: Promoting excretion of urine/agent that increases the amount of urine excreted.
मूत्रवर्धक: मूत्र / एजेंट के उत्सर्जन को बढ़ावा देना जिससे कि मूत्र की मात्रा बढ़ जाती है।
Depurative: Purifying agent.
आबादी: शुद्ध एजेंट
Hepatoprotective: prevent damage to the liver.
हेपेटोप्रोटेक्टीक: यकृत को नुकसान रोके।
Immunomodulatory: modifies the immune response or the functioning of the immune system.
Immunomodulatory: प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया या प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज को संशोधित करता है।
Laxative: tending to stimulate or facilitate evacuation of the bowels.
रेचक: आंत्र की निकासी को प्रोत्साहित करने या सुगम बनाने के लिए तैनात।
Medicinal Uses/औषधीय उपयोग:
Sharpunkha is recommended in conditions of enlarged spleen and disturbed liver functioning.बढ़े हुए तिल्ली और परेशान यकृत के कामकाज की परिस्थितियों में शरपुंखा की सिफारिश की जाती है।
Sharpunkha alleviates inflammation, benefits in skin diseases; and possesses antidotal, bactericidal, wound healing and haemostatic.-शरपुंखा सूजन को कम करता है, त्वचा रोगों में लाभ; और असामान्य, जीवाणुनाशक, घाव भरने और हेमोस्टेटिक होते हैं।
12. How to Use Sharpunkha plant-शरपुंखा पौधे का उपयोग कैसे करें
For medicinal purpose whole plant is used in form of juice, paste, decoction and powder.-औषधीय उद्देश्य के लिए पूरे पौधे का रस, पेस्ट, काढ़े और पाउडर के रूप में प्रयोग किया जाता है।
Paste: The leaves, flowers and tender twigs are washed and ground to form a paste.-पेस्ट करें: पत्तियां, फूल और टेंडर टहनियाँ एक पेस्ट बनाने के लिए धोया जाता है और ग्राउंड है।
Leaf juice: The leaf juice is extracted by pounding leaves and then squeezing through clothes. Dosage:14-28 ml.-पत्ता का रस: पत्ते का रस पाउंडिंग पत्तियों से निकाला जाता है और फिर कपड़े के माध्यम से फैलाए जाते हैं। खुराक: 14-28 मिलीलीटर
Dry powder of plant: For making power of plant, the plant parts are cleaned, cut and dried in the sun.-पौधे का सूखे पाउडर: पौधे की शक्ति बनाने के लिए, पौधे के हिस्सों को साफ किया जाता है, काटा जाता है और सूरज में सूख जाता है।
The dried parts are then ground to get the powder.-सूखे भागों तो पाउडर पाने के लिए जमीन है।
Dosage:3-5 grams.-खुराक: 3-5 ग्राम।
Dosage:3-5 grams.-खुराक: 3-5 ग्राम।
Decoction: For making decoction, five to ten grams of dried powder of whole plant is taken and boiled in one glass of water. It is cooked till volume reduces to one-fourth. It is filtered and taken.
काढ़े: काढ़े बनाने के लिए, पूरे पौधे के सूखे पाउडर के पांच से दस ग्राम को एक गिलास पानी में ले लिया जाता है। यह तब तक पकाया जाता है, जब मात्रा एक चौथाई तक कम हो जाती है। यह फ़िल्टर्ड और लिया जाता है।
13. Medicinal Uses of Sharpunkha-शरपुंखा के औषधीय उपयोग
In Ayurveda, whole plant of Sharpunkha is used for medicinal purpose. All parts of the plant have tonic and laxative properties. The dried plant is deobstruent and diuretic. It is used in treatment of bronchitis, obstructions of the liver, spleen and kidneys.--आयुर्वेद में, शरपुंखा के पूरे पौधे का औषधीय उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाता है। पौधे के सभी भागों में टॉनिक और रेचक गुण हैं। सूखे पौधे विकृत और मूत्रवर्धक है। इसका उपयोग ब्रोंकाइटिस, यकृत, रुम और गुर्दे की रोकथाम के उपचार में किया जाता है।
Sharpunkha dry powder is also used in removing toxins from the blood. It works like a blood purifying agent and is useful treatment of boils, pimples and other skin diseases.--शरपुंखा सूखे पाउडर का उपयोग खून से विषाक्त पदार्थों को हटाने में भी किया जाता है। यह रक्त शुद्ध एजेंट की तरह काम करता है और फोड़े, मुंह और अन्य त्वचा रोगों का उपयोगी उपचार होता है।
The decoction of the fruit is indicated in intestinal parasites.--फल का काढ़ा आंतों परजीवी में दर्शाया गया है।
Sharpunkha plant has property to heal all types of wounds (Sarva vranvishapaka). शरपुंखा पौधे में सभी प्रकार के घावों को भरने के लिए गुण है (सर्व vruvnivishapaka)।
Liver cirrhosis, jaundice, and other Diseases of liver, Spleen diseases--लिवर सिरोसिस, पीलिया, और अन्य जिगर के रोग, प्लीहा रोग
Liver cirrhosis, jaundice, and other Diseases of liver, Spleen diseases--लिवर सिरोसिस, पीलिया, और अन्य जिगर के रोग, प्लीहा रोग
1. Prepare decoction of plant and drink twice a day.-
1. पौधे का काढ़ा तैयार करें और एक दिन में दो बार पियें।
1. पौधे का काढ़ा तैयार करें और एक दिन में दो बार पियें।
2. Fresh juice (14-28 ml) of whole plant is given twice daily.
2. पूरे संयंत्र का ताजा रस (14-28 एमएल) दो बार दैनिक दिया जाता है।
2. पूरे संयंत्र का ताजा रस (14-28 एमएल) दो बार दैनिक दिया जाता है।
3. Powder (1-3 gram) of whole plant is given with one cup milk.
3. पूरे पौधे का पाउडर (1-3 ग्राम) एक कप दूध के साथ दिया जाता है।
3. पूरे पौधे का पाउडर (1-3 ग्राम) एक कप दूध के साथ दिया जाता है।
Enlargement of spleen, Diseases of spleen and liver-प्लीहा, प्लीहा और यकृत के रोगों का इज़ाफ़ा
1. Paste of root (1 to 2 gram) is given with butter milk/Chach, twice daily.
1. रूट का पेस्ट (1 से 2 ग्राम) मक्खन दूध / चाच के साथ दिया जाता है, दो बार दैनिक।
2. Drink decoction of plant.
2. पौधे का काढ़ा पियें।
Dropsy-ड्रॉप्सी
1. रूट का पेस्ट (1 से 2 ग्राम) मक्खन दूध / चाच के साथ दिया जाता है, दो बार दैनिक।
2. Drink decoction of plant.
2. पौधे का काढ़ा पियें।
Dropsy-ड्रॉप्सी
Fresh juice (14-28 ml) of whole plant is given twice daily.
पूरे संयंत्र का ताजा रस (14-28 एमएल) दो बार दैनिक दिया जाता है
Angina pain, heart palpitation
एनजाइना दर्द, दिल की दमनियां
Prepare decoction by boiling Sharpunkha panchang (5 gram), Arjun bark (5 gram) and Clove (2-3) in one glass water. Cook till initial volume reduces to one-fourth. Filter and drink. Take twice a day.-एक ग्लास पानी में शारुनपुंछ पानांचंग (5 ग्राम), अर्जुन छाल (5 ग्राम) और लौंग (2-3) को उबलते हुए काढ़ा तैयार करें। कुक तक प्रारंभिक मात्रा एक चौथाई तक कम हो जाती है फ़िल्टर और पेय दिन में दो बार लें।
Excessive cough, coughing, Kasa--अत्यधिक खाँसी, खांसी, कासा
Prepare decoction by boiling Sharpunkha panchang (panchang means all five parts of plant viz. leaves, stem, flowers, fruits and roots) (5 gram), tulsi patti (7 leaves) and dry ginger powder (2-3 gram) in one glass water. Cook till initial volume reduces to one-fourth. Filter and drink.--शरपुंखा पंचांग उबलते द्वारा काढ़ा तैयार (पंचांग का मतलब है कि सभी पांच पत्तियों अर्थात पत्ते, स्टेम, फूल, फल और जड़ें) (5 ग्राम), तुलसी पट्टी (7 पत्ते) और सूखे अदरक पाउडर (2-3 ग्राम) एक गिलास में पानी। कुक तक प्रारंभिक मात्रा एक चौथाई तक कम हो जाती है फ़िल्टर और पेय
Hyperacidity-अति अम्लता
Drink decoction of Sharpunkha panchang.
Abdominal pain, flatulence--पेट दर्द, पेट फूलना
Removing toxins from blood, blood purifying, diseases of skin, boils--रक्त से जहरीले पदार्थों को निकालना, रक्त शुद्ध करना, त्वचा के रोग, फोड़े
Prepare decoction of Sharpunkha plant with few Neem leaves and drink.--कुछ नीम पत्तियों और पेय के साथ Sharpunkha संयंत्र का काढ़ा तैयार।
Malarial fever, Visham Jwar मलेरियाय बुखार, विषम ज्वर।
Prepare decoction by boiling Sharpunkha panchang (5 gram), and giloy powder (5 gram) in one glass water. Cook till initial volume reduces to one-fourth. Filter and drink. Give twice a day.--एक ग्लास पानी में शारफुखां पंचांग (5 ग्राम), और गिलॉय पाउडर (5 ग्राम) उबलते हुए काढ़ा तैयार करें। कुक तक प्रारंभिक मात्रा एक चौथाई तक कम हो जाती है फ़िल्टर और पेय दिन में दो बार दो।
External Uses--बाहरी उपयोग
Toothache-दांत दर्द
The leaves of the plant are pounded to make a paste which is applied on teeth for ½ hours/day for three days.--पौधे की पत्तियों को एक पेस्ट बनाने के लिए बढ़ा दिया जाता है जो दाँत पर तीन दिनों के लिए आधा घंटे / दिन के लिए लागू होता है।
Non-healing wounds--गैर-चिकित्सा घाव
Boil Sharpunkha and few neem leaves in water and Wash the affected area.--शरपुंखा और कुछ नीम के पत्तों को पानी में उबालें और प्रभावित क्षेत्र धो लें।
Swelling, inflammation--सूजन, सूजन
Prepare poultice of plant and tie at the affected area.
प्रभावित इलाके में पौधे के टाइट और टाई तैयार करें।
परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
उपशीर्षक:
एनजाइना,
चर्म,
तिल्ली,
दन्तरोग,
दुष्प्रभाव,
पाचन,
यकृत प्लीहा,
शरपुंखा,
सरफोंका
Wednesday, March 29, 2017
हर्बल जूस : लाभ और दुष्प्रभाव
Herbal Juice: Benefits and Side Effects
आँख बन्द कर प्रचार किया जा रहा है कि सभी तरह के प्राकृतिक उत्पाद हमें अद्भुत फायदा पहुंचाते हैं और स्वास्थ्य के लिए अमृत हैं, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। कई बार ये आपको बीमार भी कर सकते हैं। साथ ही यह भी याद रखा जाए कि आयुर्वेदिक दवाएं उम्र, शारीरिक शक्ति और बीमारी, बीमारी की स्थिति/स्टेज, उचित मात्रा और मौसम/जलवायू के अनुसार लेने पर ही फायदेमंद साबित होती हैं। इसलिए सेवन से पूर्व किसी एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
प्राकृतिक जूस का सेवन शुरू करने से पहले भी उनकी शुद्धता और सवाल की हिदायतों को जानना जरूरी है। वरना फायदे की जगह हो नुकसान हो सकता है।
1. करेले का रस (Karele ka juice) :
प्रकृति-गर्म और खुश्क। करेला घी में छौंककर खाने से अधिक लाभदायक है।
सेवन कब और कितना-सुबह खाली पेट पानी के साथ 20 से 50 मिली तक बीमारी और चिकित्सक की सलाह के अनुसार।(1) ब्लड शुगर के लेवल को कम करता है: शुगर को नियंत्रित करने के लिए आप तीन दिन तक खली पेट सुबह करेले का जूस ले सकते हैं। मोमर्सिडीन और चैराटिन जैसे एंटी-हाइपर ग्लेसेमिक तत्वों के कारण करेले का जूस ब्लड शुगर लेवल को मांसपेशियों में संचारित करने में मदद करता है। इसके बीजों में भी पॉलीपेप्टाइड-पी होता है जो कि इन्सुलिन को काम में लेकर डायबेटिक्स में शुगर लेवल को कम करता है।
(2) सोराइसिस में उपयोगी: एक कप करेले के जूस में एक चम्मच नींबू का जूस मिला लें। इस मिश्रण का खाली पेट सेवन करें। 3 से 6 महीनें तक इसका सेवन करने से त्वचा पर सोराइसिस के लक्षण दूर होते हैं। यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और सोराइसिस को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में मदद करता है।
(3) पाचन शक्ति में वृद्धि: करेले का जूस कमजोर पाचन तंत्र को सुधारता है और अपच को दूर करता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि यह एसिड के स्त्राव को बढ़ाता है। जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है। इसलिए अच्छी पाचन क्षमता के लिए सप्ताह में एक बार सुबह करेले का जूस जरूर लें।
(4) दृष्टि क्षमता में वृद्धि: लगातार करेले के जूस का सेवन कर आप विभिन्न दृष्टि दोषों को दूर कर सकते हैं। करेले में बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए की अधिकता होती है। जिससे दृष्टि ठीक होती है। इसके अलावा इसमें उपस्थित विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाली नजरों की कमजोरी से बचाता है।
(5) अग्नाशय कैंसर में उपयोगी: रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाएं नष्ट होती हैं। ऐसा इसलिए होता हैं, क्योंकि करेले में मौजूद एंटी-कैंसर कॉम्पोनेंट्स अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं में ग्लूकोस का पाचन रोक देते हैं। जिससे इन कोशिकाओं की शक्ति ख़त्म हो जाती हैं और ये ख़त्म हो जाती हैं।
(6) लीवर को मजबूती: रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से लीवर मजबूत होता है, क्योंकि यह पीलिया जैसी बिमारियों को दूर रखता है। साथ ही यह लीवर से जहरीले पदार्थों को निकालता है और पोषण प्रदान करता है। जिससे लीवर सही काम करता है और लीवर की बीमारियां दूर रहती हैं। 3 से 8 वर्ष तक के बच्चों को आधा चम्मच करेले का रस नित्य देने से यकृत ठीक रहता है। यह पेट साफ रखता है। करेले की सब्जी खाने और दो चम्मच करेले का रस, दो चम्मच पानी, स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाकर नित्य कुछ दिन पीने से बढ़ों की यकृत क्रिया ठीक हो जाती है।
(7) रक्त शोधक: करेले का जूस शरीर में एक प्राकृतिक रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है। यह खून से जहरीले तत्वों को बाहर निकालता है और फ्री रेडिकल्स से हुए नुकसान से बचाता है। इसलिए ब्लड को साफ़ करने और मुहासों जैसी समस्याओं को दूर करने केलिए रोज एक गिलास करेले का जूस जरूर पियें।
(8) भूख बढ़ाता है: भूख नहीं लगने से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है, जिससे कि स्वास्थ्य से सम्बंधित परेशानियां होती हैं। इसलिए करेले के जूस को रोजाना पीने से पाचन क्रिया सही रहती है और जिससे भूख बढ़ती है।
(9) प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करे: जिन लोगो का प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर है, उन्हें करेले के जूस का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। इसमें विटामिन B1, B2, B3, जिंक, मैग्नीशियम पाया जाता है, जो शरीर के लिए बहुत आवश्यक तत्व हैं।
(10) चर्म रोग नाशक : करेले के रस के सेवन से पाचन क्रिया ठीक होती है। इस कारण चेहरे पर मुंहासे जैसे रोग नहीं होते। करेला पेट साफ़ करने में भी सहायक होता हैं। जिससे चर्म रोग नहीं होते। करेले की पत्तियों में भी विशेष गुण होते हैं। आप चाहे तो इसका लैप भी बना के लगा सकते हैं।
(11) पथरी :
- (A) करेले में मैग्नीशियम, फॉस्फोरस होते हैं, जो पथरी को तोड़ देते हैं। करेला वृक्क व मूत्राशय की पथरी को तोड़कर पेशाब के साथ बाहर लाता है। इसके लिए दो करेलों का रस नित्य पियें, सब्जी खायें।
- (B) दो करेलों का रस तथा एक कप छाछ मिलाकर नित्य दो बार पियें जब तक पथरी निकल नहीं जाए।
- (C) करेला पेशाब ज्यादा लाता है। इसका रस पीने से पेशाब की जलन दूर होती है। करेले का रस भूखे पेट पीना लाभदायक है।
- (D) करेले के पत्तों का रस 6 चम्मच चार चम्मच दही में मिलाकर पिलायें, इसके बाद एक कप छाछ पिलायें। इस तरह तीन दिन पिलाकर तीन दिन पिलाना बन्द रखें। इसी प्रकार पुनः चार दिन, फिर पाँच दिन पिलायें और जितने दिन पिलायें उतने ही दिन बन्द रखें। इस अवधि में चावल और खिचड़ी ही खायें।
(12) गठिया :
- (A) करेले के रस को गर्म करके गठिया पर लगायें और सब्जी खायें। जोड़ों में दर्द हो तो करेले के पत्तों के रस या करेले के रस की मालिश करें।
- (B) करेले की चटनी पीसकर गठिया की सूजन पर लेप करें। 100 ग्राम करेले सेंक कर या उबाल कर भुर्ता बनाकर गर्म-गर्म नित्य सुबह-शाम खायें। भुर्ते में सामान्य मसाले या शक्कर डाल लें। करेला गठिया व जोड़ों का दर्द दूर करता है। करेले की सब्जी में घी का छौंक लगाकर खायें। इससे संधिवात, स्नायुगतवात में लाभ होता है।
(13) सूजन :
- (A) आधा कप करेले का रस, चौथाई चम्मच पिसी हुई सोंठ, थोड़ा-सा पानी मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीने से सूजन ठीक हो जाती है।
- (B) करेले पर पानी डालकर चटनी पीस कर सूजनग्रस्त जगह पर लेप करने से सूजन दूर हो जाती है। लेप को चार घंटे बाद ठंडे पानी से धो दें।
(14) कब्ज़ : करेला कब्ज़ दूर करता है। करेले का मूल अरिष्ट, जो होम्योपैथी में मोमर्डिका कैरन्शिया Q नाम से मिलता है, की 10 बूंद चार चम्मच पानी में मिलाकर नित्य चार बार देने से कब्ज़ दूर हो जाती है।
(15) बवासीर : रक्तस्रावी बवासीर में रक्त गिरने पर आधा कप करेले का रस स्वादानुसार मिश्री या शक्कर मिलाकर नित्य दो बार पीने से लाभ होता है। बवासीर के मस्सों में दर्द, सूजन, जलन हो तो करेले का रस शौच जाने के बाद नित्य मस्सों पर लगायें। मस्से सूखने तक रस लगाते रहें। लाभ होगा।
(16) हड्डी, दाँत, मस्तिष्क, रक्त और अन्य शारीरिक अवयवों के लिए जितने फॉस्फोरस की जरूरत होती है, करेले में मिल जाता है। करेला दर्द दूर करता है, शरीर में शक्ति पैदा करता है। कफ, बलगम निकलना बन्द हो जाता है।
मात्रा–एक-दो करेले के रस को आधा कप पानी में मिलाकर लें। करेला सेवन करने से उत्पन्न विकारों को दूर करने के लिए दही, नीबू, घी और चावल में से एक का सेवन करना चाहिए।
सावधानी-करेले के जूस का अत्यधिक सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
(1) लीवर व किडनी के मरीजों के लिए करेले का अत्यधिक सेवन हानिकारक साबित हो सकता है। यह लीवर में एन्जाइम्स के निर्माण को बढ़ा देता है, जिससे लीवर प्रभावित होता है।
(2) करेले के जूस में मोमोकैरिन नामक तत्व होता है, जो महिलाओं में पीरियड्स के फ्लो को बढ़ा देता है। गर्भावस्था के दौरान करेले के ज्यादा सेवन करने से गर्भपात का खतरा भी ज्यादा रहता है।
(3) कई बार करेले के जूस के अधिक सेवन से प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स की स्थिति भी पैदा हो सकती है। साथ ही करेले में एंटी लैक्टोलन तत्व भी होते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान दूध बनने की प्रक्रिया में रुकावट पैदा करता है।
(4) करेले में मौजूद तत्व फर्टिलिटी संबंधित दवाओं का प्रभाव खत्म कर देते हैं। वहीं करेले के बीजों में लेक्टिन नामक तत्व होता है जो आंतों तक प्रोटीन को पहुंचने नहीं देता।
(5) अध्ययनों में पाया गया कि करेले के अत्यधिक सेवन से हेमोलाइटिक अनीमिया हो सकता है। हेमोलाइटिक अनीमिया में पेट दर्द, सिरदर्द, बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
3. जामुन का जूस (Juice of Berries) :

1. जामुन जूस बनाने की विधि
(1) सामग्री : 500 ग्राम पके काले जामुन, 600 ग्राम शक्कर, 1/2 चम्मच कालीमिर्च पावडर, 1/2 चम्मच काला नमक, 1/2 चम्मच भुना जीरा पावडर, 1 चम्मच साइट्रिक एसिड, पानी 1 लीटर।
(2) विधि : सबसे पहले जामुन को धोकर पानी में तब तक उबालें जब तक कि उनका छिलका न उतर जाए। अब ठंडे होने पर हाथ से मसलकर गूदे को भली-भांति निकालें और शक्कर मिलाएं। जूस को छलनी से छानें और साइट्रिक एसिड मिलाकर बोतलों में भरें। सर्व करने से पहले ठंडे पानी में मिलाएं, ऊपर से आइस क्यूब डालें और जामुन का खट्टा-मीठा शरबत पेश करें।
2. लाभ-जामुन का रस स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उत्तम किस्म का तांबा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
(1) मधुमेह : डायबिटीज रोगियों के लिए खासतौर से फायदेमंद। ब्लड में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करता है। जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है।
(2) पेट की तकलीफें : भूख न लगती हो तो कुछ दिनों तक जामुन रस का सेवन करें और आश्चर्यजनक रूप से फायदा देखें। डाइजेशन सिस्टम को सही रखने में मददगार होता है। वमन होने पर जामुन का रस सेवन करें। कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें। इसके फायदे आप खुद अनुभव करेंगे।
(3) विष नाशक : विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन के रस के साथ जामुन की पत्तियों का रस भी पिलाना चाहिए।
(4) छाले : मुंह में छाले होने पर जामुन का रस लगाएं।
(5) यकृत-तिल्ली-मूत्राशय : जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय में आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है। जामुन का रस तिल्ली के रोग में हितकारी है।
(6) यौन तथा स्मरण शक्ति वर्धक : जामुन का रस, शहद, आंवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।
(7) उल्टी-दस्त या हैजा : जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है।
(8) रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा : जामुन का रस यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है।
कब-कितना : पानी के साथ 20 मिली.।
1. जामुन जूस बनाने की विधि
(1) सामग्री : 500 ग्राम पके काले जामुन, 600 ग्राम शक्कर, 1/2 चम्मच कालीमिर्च पावडर, 1/2 चम्मच काला नमक, 1/2 चम्मच भुना जीरा पावडर, 1 चम्मच साइट्रिक एसिड, पानी 1 लीटर।
(2) विधि : सबसे पहले जामुन को धोकर पानी में तब तक उबालें जब तक कि उनका छिलका न उतर जाए। अब ठंडे होने पर हाथ से मसलकर गूदे को भली-भांति निकालें और शक्कर मिलाएं। जूस को छलनी से छानें और साइट्रिक एसिड मिलाकर बोतलों में भरें। सर्व करने से पहले ठंडे पानी में मिलाएं, ऊपर से आइस क्यूब डालें और जामुन का खट्टा-मीठा शरबत पेश करें।
2. लाभ-जामुन का रस स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उत्तम किस्म का तांबा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
(1) मधुमेह : डायबिटीज रोगियों के लिए खासतौर से फायदेमंद। ब्लड में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करता है। जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है।
(2) पेट की तकलीफें : भूख न लगती हो तो कुछ दिनों तक जामुन रस का सेवन करें और आश्चर्यजनक रूप से फायदा देखें। डाइजेशन सिस्टम को सही रखने में मददगार होता है। वमन होने पर जामुन का रस सेवन करें। कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें। इसके फायदे आप खुद अनुभव करेंगे।
(3) विष नाशक : विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन के रस के साथ जामुन की पत्तियों का रस भी पिलाना चाहिए।
(4) छाले : मुंह में छाले होने पर जामुन का रस लगाएं।
(5) यकृत-तिल्ली-मूत्राशय : जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय में आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है। जामुन का रस तिल्ली के रोग में हितकारी है।
(6) यौन तथा स्मरण शक्ति वर्धक : जामुन का रस, शहद, आंवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।
(7) उल्टी-दस्त या हैजा : जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है।
(8) रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा : जामुन का रस यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है।
कब-कितना : पानी के साथ 20 मिली.।
सावधानी : कसैला होने के कारण वात प्रकृति के लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। गले में खराश या दर्द की शिकायत होने पर भी इसका सेवन न करें। इतना ध्यान रहे कि अधिक मात्रा में जामुन रस लेने से शरीर में जकड़न की संभावना रहती है। इसे कभी खाली पेट नहीं लेना चाहिए और न ही इसके बाद दूध पीना चाहिए।

जामुन ज्यूस बनाने की विधि
सबसे पहले आप आवशयक्ता अनुसार एलोवेरा की पत्तियां ले और उसे अच्छी तरह पानी में धो लें। उसके बाद चाकू से उसके किनारे के कांटे वाले भाग काट कर निकाल दें। अब पत्तियों को सुविधानुसार छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लें, फिर पत्तियों के टुकडे लेकर उसके ऊपर का हरा छिलका निकाल कर अलग कर दें। ध्यान रहे ऐसा करते समय पत्तियों के गूदे के ऊपर की पीले रंग की पर्त भी साथ में निकाल दें, नहीं तो जूस में कड़वाहट रह जाएगी और आप उसका सेवन नहीं कर सकेंगे।
एलोवेरा के सफेद भाग को अलग करने के बाद उसे मिक्सी में डालें और दो मिनट के लिए मिक्सी को चला दें। इससे एलोवेरा की पत्तियों का जेल जूस में बदल जाएगा। अब इसे गिलास में निकालें और इसमें उचित मात्रा में पानी और नमक मिला लें। यदि आप चाहें, तो इसमें फलों का जूस भी मिला सकते हैं। ओरेंज (संतरा) जूस इसके स्वाद को टेस्टी बना देता है। इससे एलोवेरा जूस स्वादिष्ट हो जाएगा और आपको पीने में दिक्कत नहीं होगी। आइस क्यूब डालकर भी ले सकते हैं। अगर आप डायट पर हैं तो इस एलोवेरा जूस को रोज पियें।
लाभ- यह ठंडा होता है। इसे पीना स्किन और बालों के ही लिए बहुत ही फायदेमंद है। शरीर की इम्यूनिटी पावर और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में भी ये मददगार होता है। यह दिल और लिवर से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
(1) प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है : एलोवेरा में 18 धातु, 15 एमिनो एसिड और 12 विटामिन मौजूद होते हैं जो खून की कमी को दूर कर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं।
(2) चुस्ती-स्फूर्ति : एलोवेरा के कांटेदार पत्तियों को छीलकर रस निकाला जाता है। 3 से 4 चम्मदच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है।
(3) पेट रोग : एलोवेरा का जूस पीने से कब्ज की बीमारी से फायदा मिलता है। एलोवेरा का जूस बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग व पेट के विकारों को दूर करता है। एलोवेरा का जूस ब्लड को प्यूरीफाई करता है साथ ही हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है।
(4) बाल : एलोवेरा का जूस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ्पय होते हैं।
(5) शुगर : एलोवेरा का जूस पीने से शरीर में शुगर का स्तर उचित रूप से बना रहता है।
(6) जोडों का दर्द : एलोवेरा के जूस का हर रोज सेवन करने से शरीर के जोडों के दर्द को कम किया जा सकता है।
एहतियात- कफ की शिकायत है, तो मानसून या सर्दी के मौसम में इसे नहीं पीना चाहिए, क्योंकि कई बार इससे गले में खराश, खांसी और सीने में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। एलोवेरा शरीर में नए सेल्स को बनाता है और उनका ग्रोथ भी करता है, इसलिए कैंसर रोगी इसे न पिएं।
1. एलोवेरा जूस (Aloevera juice):
जामुन ज्यूस बनाने की विधि
सबसे पहले आप आवशयक्ता अनुसार एलोवेरा की पत्तियां ले और उसे अच्छी तरह पानी में धो लें। उसके बाद चाकू से उसके किनारे के कांटे वाले भाग काट कर निकाल दें। अब पत्तियों को सुविधानुसार छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लें, फिर पत्तियों के टुकडे लेकर उसके ऊपर का हरा छिलका निकाल कर अलग कर दें। ध्यान रहे ऐसा करते समय पत्तियों के गूदे के ऊपर की पीले रंग की पर्त भी साथ में निकाल दें, नहीं तो जूस में कड़वाहट रह जाएगी और आप उसका सेवन नहीं कर सकेंगे।
एलोवेरा के सफेद भाग को अलग करने के बाद उसे मिक्सी में डालें और दो मिनट के लिए मिक्सी को चला दें। इससे एलोवेरा की पत्तियों का जेल जूस में बदल जाएगा। अब इसे गिलास में निकालें और इसमें उचित मात्रा में पानी और नमक मिला लें। यदि आप चाहें, तो इसमें फलों का जूस भी मिला सकते हैं। ओरेंज (संतरा) जूस इसके स्वाद को टेस्टी बना देता है। इससे एलोवेरा जूस स्वादिष्ट हो जाएगा और आपको पीने में दिक्कत नहीं होगी। आइस क्यूब डालकर भी ले सकते हैं। अगर आप डायट पर हैं तो इस एलोवेरा जूस को रोज पियें।
लाभ- यह ठंडा होता है। इसे पीना स्किन और बालों के ही लिए बहुत ही फायदेमंद है। शरीर की इम्यूनिटी पावर और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में भी ये मददगार होता है। यह दिल और लिवर से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को कम करता है।
(1) प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है : एलोवेरा में 18 धातु, 15 एमिनो एसिड और 12 विटामिन मौजूद होते हैं जो खून की कमी को दूर कर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं।
(2) चुस्ती-स्फूर्ति : एलोवेरा के कांटेदार पत्तियों को छीलकर रस निकाला जाता है। 3 से 4 चम्मदच रस सुबह खाली पेट लेने से दिन-भर शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है।
(3) पेट रोग : एलोवेरा का जूस पीने से कब्ज की बीमारी से फायदा मिलता है। एलोवेरा का जूस बवासीर, डायबिटीज, गर्भाशय के रोग व पेट के विकारों को दूर करता है। एलोवेरा का जूस ब्लड को प्यूरीफाई करता है साथ ही हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है।
(4) बाल : एलोवेरा का जूस मेहंदी में मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकदार व स्वस्थ्पय होते हैं।
(5) शुगर : एलोवेरा का जूस पीने से शरीर में शुगर का स्तर उचित रूप से बना रहता है।
(6) जोडों का दर्द : एलोवेरा के जूस का हर रोज सेवन करने से शरीर के जोडों के दर्द को कम किया जा सकता है।
(7) चर्म रोग : एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्वगचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों, आखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है।
(8) इन्फेक्शन : एलोवेरा का जूस पीने से मच्छर काटने पर फैलने वाले इन्फेक्शन को कम किया जा सकता है।
(9) व्हाईट ब्लड सेल्स : शरीर में वहाईट ब्लड सेल्स की संख्या को बढाता है।
(10) जवान और खूबसूरत : एलोवेरा का जूस त्वचा की नमी को बनाए रखता है जिससे त्वचा स्वस्थ दिखती है। यह स्किन के कोलाजन और लचीलेपन को बढाकर स्किन को जवान और खूबसूरत बनाता है। एलोवेरा के जूस का नियमित रूप से सेवन करने से त्वचा भीतर से खूबसूरत बनती है और बढती उम्र से त्वचा पर होने वाले कुप्रभाव भी कम होते हैं। एलोवेरा को सौंदर्य निखार के लिए हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट जैसे एलोवेरा जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम आदि में प्रयोग किया जा रहा है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 10 से 30 मिली.।
(8) इन्फेक्शन : एलोवेरा का जूस पीने से मच्छर काटने पर फैलने वाले इन्फेक्शन को कम किया जा सकता है।
(9) व्हाईट ब्लड सेल्स : शरीर में वहाईट ब्लड सेल्स की संख्या को बढाता है।
(10) जवान और खूबसूरत : एलोवेरा का जूस त्वचा की नमी को बनाए रखता है जिससे त्वचा स्वस्थ दिखती है। यह स्किन के कोलाजन और लचीलेपन को बढाकर स्किन को जवान और खूबसूरत बनाता है। एलोवेरा के जूस का नियमित रूप से सेवन करने से त्वचा भीतर से खूबसूरत बनती है और बढती उम्र से त्वचा पर होने वाले कुप्रभाव भी कम होते हैं। एलोवेरा को सौंदर्य निखार के लिए हर्बल कॉस्मेटिक प्रोडक्ट जैसे एलोवेरा जैल, बॉडी लोशन, हेयर जैल, स्किन जैल, शैंपू, साबुन, फेशियल फोम आदि में प्रयोग किया जा रहा है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 10 से 30 मिली.।
2. आंवला जूस (Amla juice):
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 20 से 40 मिली.।
एहतियात- गर्मियों में तो इसे कोई भी व्यक्ति पी सकता है, लेकिन कफ की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को बारिश और ठंड के दिनों में इससे परहेज करना चाहिए।
5. जवारे का रस (Jaware Ka Ras) :
लाभ- खून की कमी दूर करता है। कैंसर मरीजों के लिए फायदेमंद होता है।
कब-कितना लें- सुबह खाली पेट पानी के साथ 40 मिली.।
एहतियात- डायबिटीज की शिकायत हो, तो इससे परहेज करें।
Source : http://www.ajabgjab.com/2015/10/herbal-juices-benefits-and-side-effects.html
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मेथी दाना/Fenugreek Seeds
मेथीदाना हो सकता है खतरनाक! जानिए 5 नुकसान:-
1 यह जरूरी नहीं कि मेथीदाने का सेवन सभी के लिए फायदेमंद हो, कुछ लोगों को इससे नुकसान भी होता है। खास तौर से जो लोग ब्लडशुगर या डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि यह यह शुगर के स्तर को प्रभावित करता है।
2 कई बार इसे खाने से पेट संबंधी समस्याएं भी होती हैं, जैसे गैस बनना, खट्टी डकार आना आदि। इससे बचने के लिए इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखें और यदि यह आपको सूट न कर रहा हो तो इसे न खाएं।
3 कई बार मेथीदाना खाने से त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। त्वचा पर सूजन या दर्द जैसी समस्या भी इसका सेवन करने से हो सकती हैं।
4 इसकी तासीर गर्म होती है। इससे मूत्र संबंधी समस्याएं भी हो सकती है। मूत्र में अजीब से गंध आना या अन्य समस्या से बचने के लिए इसका प्रयोग सोच समझ कर करें।
5 गर्भवती महिलाओं या नवजात बच्चों की मांओं को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए। इससे दस्त आदि की समस्याएं हो सकती हैं।
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हर घर में पाया जाने वाला मेथी दाना भोजन की सिर्फ स्वाद और महक ही नहीं बढ़ाता, बल्कि हमारे स्वास्थ्य की रक्षा भी करता है। मेथी दाना हमारे लिये बहुत ही गुणकारी और स्वास्थ्यवर्धक होता है।
इससे भी बड़ी बात यह है कि मेथी दाना का सर्वाधिक उत्पादन भारत में ही होता है और भारत में भी राजस्थान में सबसे ज्यादा (लगभग 80%) पैदा होता है। गुजरात, यूपी, एमपी, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब में भी इसका काफी मात्रा में उत्पादन होता है।
हरी मेथी : मेथी के पत्ते या हरी मेथी के गुण भी लगभग मेथी दाना जैसे ही होते है।
मेथी दाना के पोषक तत्व (Nutrients) : मेथी दाना में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा कई प्रकार के खनिज जैसे आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नेशियम, कॉपर, मैगनीज तथा ज़िंक आदि होते है। इसके अतिरिक्त मेथी दाना कई प्रकार के विटामिन और जरुरी पोषक तत्वों का बहुत अच्छा स्रोत है। जिसमे विटामिन बी-6, विटामिन ए, विटामिन सी, फोलिक एसिड, थायमिन, राइबोफ्लेविन तथा नियासिन आदि शामिल है।
मेथी में कई प्रकार के फायदेमंद फोटो न्यूट्रिएंट्स (Photo Nutrients=Phytonutrients are compounds found in plants or fruits, veggie, grains and grasses. They serve various functions in plants, helping to protect the plant's vitality. For example, some phytonutrients protect the plant from UV radiation while others protect it from insect attack.) भी होते है। फोटो न्यूट्रिएंट्स पेड़ पौधों में पाए जाने वाले वे तत्व है जो पौधों को तो बीमारी, फंगस आदि से बचाते ही है, हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक होते हैं।
मेथी दाना में मौजूद फायबर तथा सैपोनिन (Saponin=Saponins occur in many plant foods and get their name from their soap-like qualities. Eating saponins may help lower your cholesterol and reduce your risk of heart disease. Your immune function benefits from these plant compounds as well. Your risk of developing certain forms of cancer or getting tumors may even decrease from eating more saponins.) इसे आश्चर्यजनक औषधि बनाते है। इसमें म्यूसिलेज नाम का एक चिपचिपा तत्व होता है। मेथी को पानी में भिगोने पर यह तत्व फैलकर मल्हम जैसे जैल में परिवर्तित हो जाता है। यह जैल शरीर के तंतुओं की मरम्मत कर उन्हें मजबूत बनाने का काम करता है।
मेथी दाना का सेवन कैसे? : मेथी दाना अंकुरित करके खाया जा सकता है। मेथी दाना की किशमिश के साथ सब्जी बनाकर खाई जा सकती है। इसे साबुत ही पानी के साथ फांक सकते है या चूर्ण बनाकर बूरा चीनी मिलाकर फंकी ले सकते है। सर्दी के मौसम में मेथी के लडडू बनाकर खाये जा सकते है। अगर मेथी के दाने ज्यादा कडुवे हों तो उन्हें कैप्सूल के रूप में भी खाया जा सकता है।
मेथी को अंकुरित करने की विधि : चार चम्मच मेथी दाना धोकर आधा गिलास पानी में 6 -7 घंटे के लिए भिगो दें। इसके बाद छान कर कपड़े में बांध कर अंकुरित करके खाएं। इसका बचा हुआ पानी भी पी लेना चाहिए।
मेथी दाना से सावधान (Beware of Fenugreek Seeds) : मेथी दाना के लाभ जानने से इसके संभावित नुकसान जान लिए जाएँ : कई बीमारियों में रामबाण के रूप में काम करने वाला मेथी न केवल आपके चेहरे की सुंदरता को बरकरार रखता है, बल्कि आपकी पाचन संबंधी समस्या को भी दूर कर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं इसका सेवन कई बार आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है। आइए जानते है इसके नुकासन के बारे में…
1. डायबिटीज : मेथी के सेवन से ब्लड सुगर का स्तर प्रभावित होता है। इसलिए जो व्यक्ति डायबिटीज के मरीज हैं, उन्हें मेथी खाते समय बहुत ही सावधानी बरतनी पड़ेगी।
3. खट्टी डकार और गैस : अगर आप अच्छा और सही तरीके से भोजन नहीं लेते, तो आपको गैस और खट्टी डकार की समस्या होने लगती है। डकार में पेट की गैस को मुंह से निकाला जाता है, जिसमें कभी-कभी अजीब सी आवाज़ और गंध होती है। यह ज्यादातार तीखी भोजन खाने वालों को होती है। लेकिन अगर आप मेथी का ज्यादा सेवन करते हैं, तो आपको खट्टी डकार, गैस और सूजन जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए मेथी जब खाएं उसकी मात्रा के बारे में अच्छी तरह से जान लें।
4. दस्त : अगर आप मेथी का ज्यादा सेवन करते हैं तो आपको दस्त की समस्या हो सकती है और जिन माताओं ने अभी-अभी अपने बच्चे को जन्म दिया है, उन्हें तो मेथी खाते समय और भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि स्तनपान कराने वाली मताएं अगर दस्त की शिकार हैं तो यह रोग उनके बच्चे को भी हो सकता है। जिसकी वजह से डिहाइड्रेशन की भी समस्या हो सकती है।
5. मूत्र की गंध : गंध चाहे पसीने की हो या मूत्र की हर कोई इससे दूर भागता है। अगर आपके साथ भी यह समस्या है तो इसे जल्द से जल्द दूर कर लें। मेथी के खाने से मूत्र में गंध की समस्या आने लगती है। इसलिए इसे खाते समय सावधानी बरतें। वैसे यह बदबू मूत्र में मौजूद बैक्टीलरिया और सूक्ष्म जीवों की वजह से भी आ सकती है।
6. अन्य नुकसान : डॉक्टरों के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को मेथी का कम से कम सेवन करना चाहिए या हो सके तो इसका सेवन न करें। इसके अलावा ज्यादा मेथी दानों के सेवन से आप इंटरनल ब्लीडिंग की समस्या से जूझ सकते हैं। यहा तक की मेथी दाना आपके बच्चे की सोचने समझने की शक्ति को कम कर देता है इसलिए उसे डॉक्टर की सलाह के बाद मेथी दाना दें।
Note : मेथी दाना की तासीर बहुत गर्म होती है। जिन लोगों के शरीर से किसी भी प्रकार से रक्त निकलता हो जैसे बवासीर के कारण, नकसीर के कारण, पेशाब में रक्त जाता हो, माहवारी के समय अधिक मात्रा में या अधिक दिन तक रक्त स्राव होता हो तो उन्हें मेथी का उपयोग बड़ी सावधानी और चिकित्सक की देख रेख में करना चाहिए। मेथी दाना रक्त स्राव बढ़ा सकती है। तेज गर्मी में भी मेथी का उपयोग कम ही करना चाहिए। सर्दी के मौसम में इसका उपयोग अधिक लाभदायक सिद्ध होता है।
मेथी दाना के फायदे :
1. कोलेस्ट्रॉल : मेथी में कोलेस्ट्रॉल को कम करने का गुण होता है। इससे हानिकारक LDL कोलेस्ट्रॉल कम होता है। यही वह कोलेस्ट्रॉल है जो रक्तवाहिकाओं में जमा होकर हार्ट अटैक पैदा कर सकता है। मेथी में मौजूद फायबर गेलेक्टोमेनन के कारण भी रक्त में कोलस्ट्रोल की मात्रा कम करने में मदद मिलती है। इसके नियमित उपयोग से रक्त में क्लोट बनने की सम्भावना कम हो जाती है। इस प्रकार मेथी से हृदय रोग से बचाव हो सकता है। मेथी की सब्जी इस परेशानी में लाभ देती है। डॉक्टरों का कहना है कि यह हार्ट रोगियों के लिए एक वरदान के समान है, जिसे वह रोज अपने भोजन में खा कर अपने बढे हुए कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम कर सकता है। अगर मेथी के दाने ज्यादा कडुवे हों तो उन्हें कैप्सूल के रूप में भी खाया जा सकता है। भोजन में कुछ दाने मेथी के खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल में सुधार तो आता ही है साथ में हार्ट अटैक का रिस्क भी कम हो जाता है।
2. डायबिटीज : मेथी डायबिटीज को कंट्रोल में रखने में मदद करती है। इससे पेशाब में शक्कर की मात्रा कम हो जाती है। इसके प्राकृतिक फायबर के कारण तथा इन्सुलिन पर मेथी दाना के उपयोग से पड़ने वाले प्रभाव से डायबिटीज में यह बहुत लाभदायक सिद्ध होती है। यह इन्सुलिन के बनने तथा इसके रक्त में प्रवाहित होने की गति दोनों पर अच्छा प्रभाव डालती है। इससे ब्लड शुगर बहुत ऊपर नीचे होना बंद होता है। रोजाना तीन चार चम्मच मेथी के उपयोग से अच्छे परिणाम आ सकते है। इसके गर्म प्रभाव से बचने के लिए मेथी दाना मोटा पिसा हुआ दो चम्मच और सौंफ एक चम्मच रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह छान कर यह पानी पिएँ। हरी मेथी रक्त में शकर को कम कर देती हैं। इस कारण डायबिटीज रोगियों के लिए भी यह फायदेमंद होती है। प्रतिदिन एक चम्मच मेथी दाना पाउडर पानी के साथ फांकें। डायबिटीज से दूर रहेंगे। मधुमेह की समस्या से राहत दिलाये मेथी–मधुमेह की समस्या आजकल अनेक लोगों में देखने को मिल ही जाती है. इस परेशानी को समाप्त करने के लिए मेथी के पत्तों का रस निकाल कर सुबह शाम पियें इससे मधुमेह ठीक होने लगता है। मेथी से करें मधुमेह की रोकथाम–मेथी पाउडर का सेवन मधुमेह की समस्या को दूर करने के लिए काफी लाभदायक होता है. इसके सेवन के लिए थोड़ा मेथी पाउडर लें. अब इस पाउडर को दूध में डालकर पीए. इससे मधुमेह की समस्या कम होने लगती है। रिसर्च के अनुसार यह जानकारी प्राप्त हुई है कि यह टाइप 2 के मधुमेह रोगियों के लिए काफी लाभकारी होता है। अगर रोगी रोज़ दिन में 6-7 मेथी के दानों का या फिर मेथी के पानी का सेवन करे तो उसका ब्लड शुगर लेवल कम हो सकता है।
3. त्वचा रोगों से निजात : अगर आपको खुजली, जलन, फोड़े-फुसीं और गांठ की समस्या है तो आपको कुछ ग्राम मेथी खाने की आवश्यक्ता है। न सिर्फ खानें से बल्कि इसके पेस्ट को लगाने से भी फायदा होता है। अगर रुसी की समस्या है तो बालों में मेथी और दही मिला कर लगाने से यह समस्या जल्द दूर हो जाएगी। त्वचा रोग ठीक होता है-त्वचा रोग जैसे एक्जिमा, जलने का घाव, फोडे-फुंसी और गठिया रोग मेंथी पो पीस कर पेस्ट लगाने से ठीक हो सकता है।
4. मौसमी बीमारियां : कहा जाता है कि अगर बुखार या कोई भी अन्य बीमारी में मेथी का उपयोग किया जाए तो वह तुरंत ही ठीक हो जाती है। और अगर आप खुद को रिफ्रैश करना चाहते हैं तो मेथी के पत्तों से बनी हर्बल टी पिएं। फिर देखें कैसा फील/अनुभव करते हैं? मेथी एक अच्छी घरेलू दवा है जो कि बुखार और कई अन्य बीमारियों को ठीक करती है। यही नहीं मेथी के पत्तों से हर्ब टी बनाई जा सकती है जिससे दिमाग शांत और फ्रेश रहता है।
5. स्तन सौन्दर्य और वृद्धि : मेथी दाना की सब्जी खाने से अविकसित और छोटे स्तन बड़े और पुष्ट हो जाते है। साथ ही मेथी दाना को पानी के साथ बारीक पीसकर स्तन की हल्के हाथ से नियमित मालिश भी करनी चाहिए। इन दोनों के करने से स्तन के आकार में वृद्धि होती है। यदि स्तन में दूध सुखाना हो या स्तन में सूजन और दर्द हो तो मेथी की हरी पत्तियां पीस कर स्तन पर लगा कर दो घंटे बाद धो लें। इससे आराम मिल जाता है।
6. दाग-धब्बे : चेहरे के दाग-धब्बों को कम करें मेथी–चेहरे से दाग तथा धब्बों को समाप्त करने के लिए भी मेथी बहुत फायदेमंद होती है. इसका प्रयोग करने के लिए मेथी के दानो को पीस कर उसका लेप बना लें. अब इस लेप को अपने चेहरे पर लगाए. इससे त्वचा कोमल तथा बेदाग बनती है.
7. पाचन तंत्र : मेथी से कई प्रकार से पाचन तंत्र को फायदा पहुंचता है। इससे पेट और आँतों की जलन सूजन आदि में आराम मिलता है। यह पेट और आँतों के अल्सर में आराम दिलाती है । इसके पानी में घुलनशील फायबर आँतों की सफाई करके कब्ज मिटाते है तथा आँतों की शक्ति बढ़ाते है। मेथी में मौजूद पाचक एंजाइम अग्नाशय को अधिक क्रियाशील बना देते हैं। इससे पाचन क्रिया अत्यंत सरल हो जाती है। इससे भूख खुल कर लगने लगती है। खाने में अरुचि हो जाने पर इससे रुचि जाग्रत हो जाती है। मेथी मेटाबोलिज्म को भी सुधरती है। जिसके कारण कमजोरी दूर होती है। मेथी में लासा होता है जो पाचन से संबधित हर रोग को दूर कर देता है। यह डायरिया और हार्ट बर्न आदि को दूर करती है। इसके अलावा अगर मेथी के दाने को मठ्ठे के साथ मिला कर पिया जाए तो अल्सर और एसीडिटी में लाभ होता है। कुछ मेथी के दाने सुबह खाने से पेट के कीडे मरते हैं।
8. पेट के छाले/अल्सर : पेट के छाले ठीक करने के लिए मेथी का उपयोग–पेट के छाले ठीक करने के लिए भी मेथी एक अच्छा उपाय है। इसके लिए दो चम्मच पीसी हुयी मेथी एक कप पानी में उबाल कर मेथी का काढ़ा बना लें. अब इस काढ़े को पीए. इससे पेट के छाले कम होने लगेंगे। पाचन उपचार-डायरिया और हार्टबर्न के अलावा मेथी के रस से पेट और आंत की सभी समस्याएं दूर होती हैं। अगर आप अल्सर और एसिडिटी को ठीक करना चाहते हैं तो मेथी और मठ्ठे को घोल कर पीएं। सिर्फ यही नहीं अगर आप रोज़ सुबह खाली पेट कुछ मेथी के दानें खाएगें तो पेट के सभी रोग दूर होगें।
9. आँतों के कैंसर से बचाव : मेथी में कैंसर को मिटाने के गुण होते है। मेथी में पाया जाने वाला डिओसजेनिन नामक तत्व आँतों के कैंसर से बचाव करने में सक्षम होता है। इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले सैपोनिन , म्यूसिलेज , पेक्टिन आदि तत्व आँतों के म्युकस मेंब्रेन की रक्षा करते है। इस तरह आंतों पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव से मुक्ति दिलाकर यह कैंसर होने से बचाती है। इसमें पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट्स के कारण फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से भी बचाव संभव है।
10. मोटापा : मेथी के दानों में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। खाली पेट मेथी दानों को चबाने से एक्सट्रा कैलरी बर्न होती है। सुबह दो गिलास मेथी का पानी पीने से मोटापा दूर होता है। मेथी का पानी बनाने क लिए एक बड़ा चम्मच मेथी के दानों को दो गिलास पानी में रातभर भिगो दें और सुबह इसे छानकर पी लें।
किडनी भी स्वस्थ : मेथी का पानी पीने से किडनी भी स्वस्थ होती है।
11. दर्द निवारक : वात रोग, बुखार, गैस को दूर करने के लिए मेथी का उपयोग–शरीर की अनेक समस्याओं को दूर करने के लिए मेथी बहुत ही फायदेमंद होती है. वात रोग, बुखार तथा गैस की समस्या से निपटने के लिए थोड़ी मेथी के दाने लें. अब इन दानों को पीस कर इनका चूर्ण बना लें. इसके बाद इस चूर्ण को एक गिलास छाछ में डालकर पी लें. इससे इस सभी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा. मेथी से करें घुटनों का दर्द कम–घुटनों का दर्द लोगों को काफी परेशान करने वाला दर्द होता है. इस दर्द को समाप्त करने के लिए मेथी दाने को पीस कर बारीक़ चूर्ण बना लें. अब इस चूर्ण को रोजाना सुबह पानी के साथ खाये. इससे घुटनों का दर्द कम होने लगता है.
12. आँखों के काले घेरे : मेथी से आँखों के नीचे का कालापन हटाए-कई बार उम्र बढ़ने या कोई अन्य समस्या होने के कारण हमारी आँखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं. जिसके कारण चेहरा भी बेजान लगने लगता है. इस समस्या को दूर करने के लिए मेथी के दानों को पीस कर उसका पेस्ट बना लें. अब इस पेस्ट को अपने आँखों के नीचे कालेपन पर लगाए. इससे फायदा होगा.
13. बाल बढ़ाने के लिए : बालों को लम्बा करने के लिये मेथी का प्रयोग-लम्बे तथा घने बाल हर किसी को अच्छे लगते हैं. बालों को लम्बा करने के लिए मेथी भी बहुत फायदेमंद होती है. इसका प्रयोग करने के लिए इस के दानों को रात भर पानी में भिंगोकर रख दें. अब सुबह उसे पीसकर बालों में लगाए तथा कुछ देर बाद बालों को धो दें. इससे बाल कुछ समय बाद आपको लम्बे लगने लगेंगे।
14. खांसी और श्वांस : खाँसी से आराम पाने के लिए करें मेथी का प्रयोग-मेथी का सेवन करने से गला साफ होता है. खांसी की समस्या को ठीक करने के लिए मेथी के कुछ दानों को खायें. जिससे खांसी या श्वांस सम्बन्धी समस्याएं कम होने लगती हैं।
15. मुंह के छाले : मुंह के छाले ठीक करने के लिए मेथी का प्रयोग–मुंह के छालों को कम करने के लिए सबसे पहले मेथी के दानों को पाने में उबाल लें. अब इस पानी से कुल्ला करें। इससे मुंह के छाले कम होने लगेंगे।
16. पथरी: पथरी के इलाज में भी मेथी फायदा करती है। इस जादुई औषधि से पथरी पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है।
17. यौन शक्ति/सेक्स पावर: एक सर्वे के मुताबिक मेथी सेक्स पावर को भी बढ़ाने में सक्षम है। इस सर्वे के दौरान मेथी के इस्तेमाल से लोगों की सेक्स क्षमता में एक चौथाई का इजाफा हुआ। विशेषज्ञों के मुताबिक इंडियन करी में मेथी डाली जाती है। यह सीधे आदमियों के सेक्स हार्मोन्स को बढ़ाने का काम करती है। दूसरे अर्थों मे मेथी के सेवन से सेक्स पावर बढती है। इसलिए मेथी का सेवन आपकी यौन क्षमता में अतिशय वृद्धि करता है। यदि मेथी के कुछ दाने रोज लिए जाएं तो मानसिक सक्रियता बढ़ती है। पुरुषों में होने वाली लिंग उत्थान की समस्या इससे हल हो सकती है। इसके अलावा यह टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में इजाफा करके अन्य समस्या को भी ठीक करने में मदद करती है। रात को सोते समय आधा चम्मच पिसा हुआ मेथी दाना तथा आधा चम्मच धनिया पाउडर मिलाकर गर्म दूध के साथ नियमित एक महीने लेने से पुरुषों में यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। ब्रिसबेन स्थित आणविक चिकित्सा केंद्र के अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि भारत में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली मेथी पुरुषों की कामेच्छाओं को काफी अच्छे स्तर तक बढ़ाने में सक्षम है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है।
18. गठिया: यह वात के कारण जॉइंट्स में होने वाले दर्द से तथा गठिया रोग से मुक्ति दिला सकती है। एक चम्मच पिसा हुआ मेथी दाना सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ नियमित लेने से जॉइंट पैन में बहुत आराम आता है। मेथी के लडडू (मेथी, आटा और गुड़ से बनाये जाते है) खाने से भी जोड़ों का दर्द नहीं सताता है। टूटी हुई हड्डी इसके उपयोग से जल्दी जुड़ती है।
19. मेनोपॉज (Menopause=रजोनिवृत्ति): मेनोपोज़ के समय स्त्रियों को कई तरह की परेशानियां होती है जैसे डिप्रेशन, मूड बदलना, क्रेम्प आना, रात को बहुत पसीना आना आदि। मेथी के उपयोग से इनमे कमी हो सकती है। क्योंकि इसें स्त्री हार्मोन इस्ट्रोजन जैसे तत्व होते है। इसके अलावा इससे स्त्रियों को होने वाली अन्य हार्मोन संबंधी परेशानियां भी कम होती है।
20. गले की खराश (Sore Throat): मेथी में पाया जाने वाला म्यूसिलेज नामक तत्व गले की खराश और कफ आदि में आराम दिलाता है। दो कप पानी में दो चम्मच दाना मेथी डालकर उबाल लें। इसे छानकर इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर पियें। इससे गले की खराश, जुकाम, कफ आदि में आराम मिलता है। मेथी उबाल कर छाने हुए पानी से कुल्ला करने से मुँह की दुर्गन्ध मिटती है।
21. बालों के लिए: बालों के लिए मेथी कंडीशनर का काम करती है। इससे रुसी में भी आराम मिलता है। बालों का गिरना कम हो जाता है। दाना मेथी पाउडर को पानी में एक घंटे भिगोकर, बालों की जड़ों में लगा लें। आधा घंटे बाद धो लें। इससे बालों को ये सारे लाभ मिल जाते है। या मेथी दाना नारियल के तेल में उबालकर छान कर रख लें। इस तेल की नियमित मालिश करने से बाल घने और मुलायम होते है।
22. औरतों के लिए मेथी का सेवन (Fenugreek Intake for Women:): वैसे तो मेथी का सेवन दमा से लेकर कामेच्छा तक, कई मामलों में फायदेमंद है, लेकिन महिलाओं के लिए इसका सेवन खास वजह से भी जरूरी है। चाहे मेथी का सेवन साग के रूप में हो या फिर दाने के तौर पर, महिलाओं के लिए मासिक चक्र से जुड़ी समस्याओं के उपचार में यह काफी फायदेमंद माना जाता है।
(1) पीरियड्स में : मेथी में सेपोनिन्स और डायोसजेनिन नामक दो ऐसे तत्व हैं जो शरीर में स्टेरॉयड्स (Steroids=Steroids are synthetic hormones designed to treat medical ailments…) व एस्ट्रोजन (What Is Estrogen? The hormone that controls a woman's monthly cycle, estrogen, gets a lot of attention in women's lives, but it is actually a hormone that affects both men and women.) की तरह काम करते हैं। इनकी वजह से पीरियड्स के दौरान पड़ने वाले क्रैंप और पेट दर्द में आराम मिलता है।
(2) गर्भावस्था में: इसमें आयरन की मात्रा अधिक है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन जच्चा-बच्चा की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।
(3) सेक्स की इच्छा बढ़ाता है: मेथी में मौजूद सेपोनिन्स और डायोसजेनिन शरीर में सेक्स हार्मोन बढ़ाते हैं, जिससे महिलाओं की कामेच्छा बढ़ती है।
(4) मेनो़पॉज में: मेथी में मौजूद डायोसजेनिन और आइसोफ्लेवोन्स मेनोपॉड के दौरान महिलाओं के मूड को नियंत्रित करने में मददगार माना जाता है।
(5) हार्मोनल बैलेंस: मेथी में मौजूद डायोसजेनिन महिलाओं के शररीर में हार्मोनल संतुलन बनाए रखता है। इससे हार्मोन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
परामर्श समय : 10 AM से 10 PM के बीच। Mob & Whats App No. : 9875066111
Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your doctor.
कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें।
निवेदन : रोगियों की संख्या अधिक होने के कारण, आपको इन्तजार करना पड़ सकता है। कृपया धैर्यपूर्वक सहयोग करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-9875066111.
Request : Due to the high number of patients, you may have to wait. Please patiently collaborate.--Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'-9875066111
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Wednesday, January 04, 2017
--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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Clerodendrum Phlomidis
Clitoria Ternatea
Colocynth
Colpoptosis
Constipation
Convolvulus Pluricaulis
Corn
Creak
Crotalaria Bburhia
Croton Bonplandianum
Croton Sparsiflorus
Cumin
Date Palm
Dengue
Depression
Diabetes
digestion
Disorders
Divorce
Dog Mustard
Dronapushpi
Dysentery
Early Ejaculation
Emblic Myrobalan
Extramarital Relation
Extremely Intolerance
Fatty liver
Femininity
FENUGREEK
Fenugreek Seeds
Ferrum Phosphoricum
Fever
Fissure
Fistula
Folic Acid
Gallbladder
Gardenia Gummifera
Garlic
Ginger
Gooseberry
Gourd
Groundnut-peanut
Guava
Hainampfer
Hair Falling
Headaches
Health
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IMPOTENCY
Incurable
indigestion
Jaundice
Juice
Juice of Berries
LAND CALTROPS
Lemon
Leucas Aspera
Leucas Cephalotes
Leucorrhea
Lever
Liver
Liver Cirrhosis
Liver fibrosis
Low Blood Pressure
Marital Dispute Consultant
Masturbation
Mental
Mexican Daisy
Mexican Poppy
Migraine
Migraines
Myopia
Neurons
Night Jasmine
Nutgrass
Nutmeg
Nutsedge
Obesity
Omega 3
Oroxylum indicum
Painkillers
Periquito Sessil
Phyllanthus Niruri
Piles
Portulaca Oleracea
Post Effect
Pregnancy Safe-Guard
Pregnancy Safeguard
Pregnancy-Safe-Guard
Premature Ejaculation
Prostate Gland
Protein
Purple Nutsedge
Raan Tulas
Radish
Rectal Collapse
Rectal Prolapse
rectum collapse
Saffron
Senna occidentalis
Separation
Sex
Sexual Power
Sickness
Side Effects
side effects less
Side-Effects
Spermatorrhoea
Sperms
Spiny Amaranth
Stone
Stone Breaker
Sword fruit tree
TECOMA STANS
Thermometer
Tickweed
Tips
Treatment of Incurable
Tribulus Terrestris
Tridax Procumbens
Umbrella Sedge
Unquenchable Conjugal
Uterine Prolapse
vaginal Creaks
Vaginal Prolapse
Viral
Vitamins
Vitex Negundo
Wart
Wheatgrass
White Discharge
Yellow Spider Flower
अंकुरित अनाज
अंकुरित गेहूं-Wheat germ
अंकुरित भोजन-Sprouts
अखरोट
अंगूर-Grapes
अचूक चमत्कारिक चूर्ण
अजवाइन
अजवायन
अजीर्ण-Indigestion
अंडकोष
अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut
अण्डी
अतिबला
अतिसार
अतिसार-Diarrhea
अतृप्त
अतृप्त दाम्पत्य
अत्यंत असहिष्णुता
अदरक
अदरख
अंधश्रृद्धा
अध्ययन
अनिद्रा
अपच
अपराजिता
अपराधबोध
अफरा
अफीम
अमरूद
अमृता
अम्लपित्त-Pyrosis
अरंडी
अरणी
अरण्ड
अरण्डी
अरलू
अरुचि
अरुचि-Anorexia-Distaste
अर्जुन
अर्थराइटिस
अर्द्धसिरशूल
अर्श
अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles
अलसी
अल्टरनेथेरा सेसिलिस
अल्सर
अल्सर-Ulcers
अवसाद
अवसाद-Depression
अश्मःभेदः
अश्वगंधा
अश्वगंधा-Winter Cherry
असंतुष्ट
असफल
असर नहीं
असली
अस्थमा
अस्थमा-दमा-Asthma
आइरन
आक
आकड़ा
आघात
आत्महत्या
आंत्र कृमि
आंत्रकृमि-Helminth
आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever
आदिवासी
आधाशीशी
आधासीसी
आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower
आमला
आमवात
आमाशय
आयुर्वेद
आयुर्वेदिक
आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेदिक औषधियां
आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup
आयुर्वेदिक-Ayurvedic
आरोग्य
आँव
आंव
आंवला
आंवला जूस
आंवला रस
आशावादी-Optimistic
आसन
आसान प्रसव-Easy Delivery
आहार चार्ट
आहार-Food
आॅपरेशन
आॅर्गेनिक
आॅर्गेनिक कौंच
इच्छा-शक्ति
इन्द्रायण
इन्फ्लुएंजा
इमर्जेंसी में होम्योपैथी
इमली-Tamarind Tree
इम्युनिटी
इलाज
इलाज का कुल कितना खर्चा
इलायची
उच्च रक्तचाप
उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension
उत्तेजक
उत्तेजना
उदर शूल-Abdominal Haul
उदासी
उन्माद-Mania
उपवास
उम्र
उल्टी
ऊर्जा
एक्जिमा
एक्यूप्रेशर
एग्जिमा
एजिंग-Aging
एंटी ऑक्सीडेंट्स
एंटी-ओक्सिडेंट
एंटीऑक्सीडेंट
एण्टी-आॅक्सीडेंट
एनजाइना
एनीमिया
एमिनो एसिड
एरंड
एलर्जी
एलर्जी-Allergy
एलोवेरा
एलोवेरा जूस
एल्यूमीनियम
ऐंठन
ऐलोपैथ
ऐसीडिटी
ऑर्गेनिक
ओमेगा 3 के स्रोत
ओमेगा-3
ओर्गेनिक
औषध-Drug
औषधि सूची-Drug List
औषधियों के नुकसान-Loss of drugs
कचनार
कचनार-Bauhinia Purpurea
कटुपर्णी
कड़वाहट
कंडोम
कद्दू
कनेर
कपास-COTTON
कपिकच्छू
कपूरीजड़ी
कफ
कब्ज
कब्ज़
कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation
कब्ज. Cucumber
कब्जी
कमजोरी
कमर
कमर दर्द
कमेड़ा
करेला
कर्ण वेदना
कर्णरोग
कष्टार्तव-Dysmenorrhea
कांच निकलना
काजू
कान
कानून सम्मत
काम
काम शक्ति
कामवाण पाउडर
कामशक्ति
कामशक्ति-Sexual power
कामेच्छा
कामोत्तेजना
कायाकल्प
कार्बोहाइड्रेट
कार्बोहाइड्रेट-Carbohydrates
काला जीरा
काला नमक
काली जीरी
काली तुलसी
काली मिर्च
काले निशान
कास-खांसी-Cough
किडनी
किडनी संक्रमण
किडनी स्टोन
कीड़े
कीमोथेरेपी
कुकरौंधा
कुकुंदर
कुटकी-Black Hellebore
कुबडापन
कुमेड़ा
कुल्थी
कुल्ला
कुष्ट
कुष्ठ
कृमि
केला
केसर
कैफीन-Caffeine
कैलोरी
कैलोरी चार्ट
कैलोरी-Calories
कैवांच
कैविटी
कैंसर
कॉफी
कॉफ़ी
कॉलेस्ट्रॉल
कोंडी घास
कोढ़
कोबरा
कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल-Cholesterol
कोलेस्ट्रोल
कौंच
कौमार्य
क्रियाशीलता
क्रोध
क्षय रोग-Tuberculosis
क्षारीय तत्व
क्षुधानाश
खजूर
खजूर की चटनी
खनिज
खरबूजा-Musk melon
खरेंटी
खरैंटी शिलाजीत
खाज
खांसी
खिरेंटी
खिरैटी
खीप
खीरा
खुजली
खुशी-Joy
खुश्की
खुश्बू
खोया
गंजापन-Baldness
गठिया
गठिया-Arthritis
गठिया-Gout
गड़तुम्बा
गंडा-ताबीज
गंध
गन्ने का रस
गरमा गरम
गर्भ निरोधक
गर्भधारण
गर्भपात
गर्भवती
गर्भवती कैसे हों?
गर्भावस्था
गर्भावस्था की विकृतियां-Disorders of Pregnancy
गर्भावस्था के दौरान संभोग-Sex During Pregnancy
गर्भाशय
गर्भाशय भ्रंश
गर्भाशय-उच्छेदन के साइड इफेक्ट्स-Side Effects of Hysterectomy
गर्म पानी
गर्मी
गर्मी-Heat
गलगण्ड
गाजर
गाजवां
गांठ
गाँठ-Knot
गारंटी
गारण्टेड इलाज
गाल ब्लैडर
गिलोय
गिल्टी
गुड़हल
गुंदा
गुदाद्वार
गुदाभ्रंश
गुम्मा
गुर्दे
गुलज़ाफ़री
गुस्सा
गृध्रसी
गृह-स्वामिनी
गेदुआ की छाछ
गैस
गैस्ट्रिक
गैहूं का जवारा
गोक्षुरादि चूर्ण
गोखरू
गोखरू (LAND CALTROPS)
गोंद कतीरा-Hog-Gum
गोंदी
गोभी-Cabbage
गोरख मुंडी
गोरखगांजा
गोरखबूटी
गोरखमुंडी
ग्रीन-टी
घमोरी
घरेलु नुस्खे
घाघरा
घाव
चकवड़
चक्कर
चपाती
चमत्कारिक सब्जियां
चरित्र
चर्बी
चर्म
चर्म रोग
चर्मरोग
चाय
चाय-Tea
चालीस के पार-Forty Across
चिकनगुनिया
चिकित्सकीय
चिटकन
चिंतित
चिरायता-Absinth
चिरोटा
चुंबन
चोक
चौलाई
छपाकी
छरहरी काया
छाछ
छाजन बूटी
छाले
छींक
छीकें
छुअ
छुआरा
छुहारा
छोटा गोखरू
छोटा धतूरा
छोटी हरड़
जंक फूड
जकवड़
जख्म
जंगली तिल्ली
जंगली तुलसी
जंगली पेड़
जंगली मिर्ची
जंगली-कटीली चौलाई
जटामांसी-Spikenard
जलजमनी
जलन
जलोदर रोग-Ascites Disease
जवारा
जवारे
जवासा-Alhag
जहर
जामुन का जूस
जायफल
जिगर
जीरा
जीवन रक्षक
जीवनी शक्ति
जुएं
जुकाम
जुदाई
जुलाब
जूएं
जूस
जोड़ों के दर्द
जोड़ों में दर्द
जौ
ज्यूस
ज्योति
ज्वर
ज्वर-Fiver
झाइयाँ
झांईं
झाड़-फूंक
झुर्रियाँ
झुर्रियां
झुर्री
झूठे दर्द
टमाटर का रस
टमाटर-Tomatoes
टाइफाइड
टाटबडंगा
टायफायड
टूटी हड्डी
टॉन्सिल
टोटला
ट्यूमर
ठंड
ठंडापन
ठेकेदार डॉक्टर
डकार
डकारें
डायबिटीज
डायरिया
डिग्री फ़ारेनहाइट
डिग्री सेल्सियस
डिजिसेक्सुअल
डिटॉक्सीफाई
डिटॉक्सीफिकेशन
डिनर
डिप्रेशन
डिब्बाबंद भोजन
डिलेवरी
डीकामाली
डीगामाली
डेंगू
डेंगू-Dengue
डॉ. निरंकुश
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
डॉ. मीणा
ढकार
ढीलापन
ढीली योनि
तकलीफ का सही इलाज
तंत्र-मंत्र
तम्बाकू
तरबूज-Watermelon
तलाक
ताकत
तिल
तिल्ली
तुंबा
तुंबी
तुम्बा
तुलसी
तेल
त्रिदोषनाशक
त्रिफला
त्वचा
त्वचा रोग
थकान
थाईरायड
थायरायड-Thyroid
थायरॉइड
दण्डनीय अपराध
दंत वेदना
दन्तकृमि
दन्तरोग
दमा
दर वेदना
दरार
दर्द
दर्द निवारक
दर्द निवारक दवा
दर्दनाक
दस्त
दही
दाग-धब्बे-Stains-Spots
दाढ़
दांत
दांतो में कैविटी-Teeth Cavity
दाद
दाम्पत्य
दाम्पत्य विवाद सलाहकार
दाम्पत्य-Conjugal
दाल
दालचीनी
दालें
दिमांग
दिल
दीर्घायु
दु:खी
दुर्गंध
दुर्बलता
दुष्प्रभाव
दुष्प्रभावरहित
दूध
दूध वृद्धि
दूधी
दूधी-Milk Hedge
दृष्टिदोष
दो मन
द्रोणपुष्पी
द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes
धड़कन
धनिया बीज
धनिया-Coriander
धमासा
धात
धातु
धातु पतन
धार्मिक
धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं?
धैर्यहीन
नज़ला
नपुंसक
नपुंसकता
नाइट्रिक एसिड
नाक
नाखून
नागबला
नागरमोथा
नाडी हिंगु
नाड़ी हिंगु (डिकामाली)
नामर्दी
नारकीय पीड़ा
नारियल
नाश्ता
निमोनिया
निम्न रक्तचाप
निम्बू
नियासिन
निराश
निरोगधाम
निर्गुण्डी
निर्गुन्डी
निष्कपट स्नेह
निष्ठा
निसोरा
नींद
नींबू
नींबू-Lemon
नीम-azadirachta indica
नुस्खे
नुस्खे-Tips
नेगड़
नेत्र रोग
नेुचरल
नैतिक
नॉर्मल डिलेवरी
नोनिया
नौसादर
न्युमोनिया-Pneumonia
न्यूरॉन्स
पक्षघात
पंचकर्म
पढ़ने में मन लगेगा
पंतजलि
पत्तागोभी-CABBAGE
पत्थर फोड़ी
पत्थरचट्टा
पत्नी
पथरी
पदार्थ
पनीर
पपीता
पपीता-CARICA PAPPYA
पमाड
परदेशी लांगड़ी
परम्परागत चिकित्सा
परहेज
पराठा
परामर्श
परिस्थिति
पवाड़
पवाँर
पाइल्स
पाक-कला
पाचक
पाचन
पाचनतंत्र
पाचनशक्ति
पाठक संख्या 16 लाख पार
पाठक संख्या पंद्रह लाख
पायरिया
पारदर्शिता
पारिजात
पालक
पालक-Spinach
पित्त
पित्ताशय
पित्ती
पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne
पिरामिड
पीलिया
पीलिया-Jaundice
पीलिया-कामला-Jaundice
पुआड़
पुदीना
पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava
पुरुष
पुंसत्व
पेचिश
पेट के कीड़े
पेट दर्द
पेट में गैस
पेट रोग
पेड़
पेद दर्द
पेरिकिटो सेसिल
पेशाब
पेशाब में रुकावट
पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy
पोष्टिक लड्डू
पौधे
पौरुष
पौरुष ग्रंथि
पौष्टिक रागी रोटी
प्याज-Onion
प्यास
प्रजनन
प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा प्रणाली
प्रतिरोधक
प्रतिरोधक-Resistance
प्रदर
प्रमेह
प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery
प्रसव
प्रसव सुरक्षा चक्र
प्रसव-पीड़ा
प्रसूति
प्राणायाम
प्रेग्नेंसी-Pregnancy
प्रेम
प्रेमरस
प्रेमिका
प्रेमी
प्रोटीन
प्रोटीन का कार्य
प्रोटीन के स्रोत
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट ग्रंथि
प्रोस्टेट ग्रन्थि
प्लीहा
प्लूरिसी-Pleurisy
प्लेटलेट्स
फंगल
फटन
फफूंद-Fungi
फरास
फल
फाइबर
फिटकरी
फुंसी-Pimples
फूलगोभी-CAULIFLOWER
फेंफड़े
फेरम फॉस
फैट
फैटी लीवर
फोटोफोबिया
फोड़ा
फोड़े-Boils
फोरप्ले
फोलिक एसिड
फ्लू
फ्लू-Flu
फ्लेक्स सीड्स
बकायन
बकुल
बड़ी हरड़
बथुआ
बथुआ पाउडर
बथुआ-White Goose Foot
बदबू
बंध्यापन
बबूल-ACACIA
बरसाती बीमारियाँ
बरसाती बीमारियां
बलगम
बलवृद्धि
बला
बलात्कार
बवासीर
बहरापन
बहुनिया
बहुमूत्रता-
बांझपन
बादाम-Almonds
बादाम.
बाल
बाल झड़ना
बाल झडऩा-Hair Falling
बिना सिजेरियन मां बनें
बिवाई
बीजबंद
बीड़ी
बीमारियों के अनुसार औषधियां
बीमारी
बील
बुखार
बूंद-बूंद पेशाब
बेल
बेली
बैक्टीरिया
बॉयोकैमी
ब्रह्मदण्डी
ब्रेस्ट ग्रोथ
ब्लड प्रेशर
ब्लैक मेलिंग
ब्लॉकेज
भगंदर
भगंदर-Fistula-in-ano
भगनासा
भगन्दर
भगोष्ठ
भड़भांड़
भय
भविष्य
भस्मक रोग
भावनात्मक
भुई आंवला-Phyllanthus Niruri
भूई आमला
भूई आंवला
भूख
भूख बढ़ाने
भूत-प्रेत
भूमि
भूमि आंवला
भोजनलीवर
मकोय
मकोय-Soleanum nigrum
मक्का
मक्का के भुट्टे
मंजीठ
मटर-PEA
मंद दृष्टि
मंदाग्नि
मदार
मधुमेह
मधुमेह-Diabetes
मन्दाग्नि-Dyspepsia
मरुआ
मरोड़
मर्द
मर्दाना
मलाशय
मलेरिया
मलेरिया (Malaria)
मवाद
मसाले
मस्तिष्क
मस्से
मस्से-WARTS
महंगा इलाज
महत्वपूर्ण लेख
महाबला
माइग्रेन
माईग्रेन
माईंड सैट
माजूफल
मानवव्यवहार
मानसिक
मानसिक लक्षण
मानसिक-Mental
मानिसक तनाव-Mental Stress
मायोपिया
मासिक
मासिक-धर्म
मासिकधर्म
मासिकस्राव
माहवारी
मिनरल
मिर्गी
मिर्च-Chili
मीठा खाने की आदत
मुख मैथुन-ओरल सेक्स-Oral Sex
मुख्य लक्षण
मुधमेह
मुलहठी
मुलेठी
मुहाँसे
मूँगफली
मूड डिस्ऑर्डर-Mood Disorders
मूत्र
मूत्र असंयमितता
मूत्र में जलन-Burning in Urine
मूत्ररोग
मूत्राशय
मूत्रेन्द्रिय
मूर्च्छा (Unconsciousness)
मूली
मूली कर रस
मृत्यु
मृत्युदण्ड
मेथी
मेथी दाना
मेंहदी
मैथुन
मोगरा (Mogra)
मोटापा
मोटापा-Obesity
मोतियाबिंद
मौत
मौलसिरी
मौसमी बीमारियां
यकृत
यकृत प्लीहा
यकृत वृद्धि-Liver Growth
यकृत-लीवर-जिगर-Lever
यूपेटोरियम परफोलियेटम
यूरिक एसिड लेबल
योग विज्ञापन
योन
योन संतुष्टि
योनि
योनि ढीली
योनि शिथिल
योनि शूल-Vaginal Colic
योनि संकोचन
योनिद्वारा
योनिभ्रंश
योनी
योनी संकोचन
यौन
यौन आनंद
यौन उत्तेजक पिल्स (sexual stimulant pills)
यौन क्षमता
यौन दौर्बल्य
यौन शक्तिवर्धक
यौन शिक्षा
यौन समस्याएं
यौनतृप्ति
यौनशक्ति
यौनशिक्षा
यौनसुख
यौनानंद
यौनि
रक्त प्रदर (Blood Pradar)
रक्त रोहिड़ा-TECOMELLA UNDULATA
रक्तचाप
रक्तपित्त
रक्तशोधक
रक्ताल्पता
रक्ताल्पता (एनीमिया)-Anemia
रस-juices
रातरानी Night Blooming Jasmine/Cestrum nocturnum
रामबाण
रामबाण औषधियाँ-Panacea Medicines
रुक्षांश
रूढिवादी
रूसी
रूसी मोटापा
रेचक
रेठु
रोग प्रतिरोधक
रोबोट सेक्स
रोमांस
लकवा
लक्षण
लक्ष्मी
लंच
लसोड़ा
लस्सी
लहसुन
लहसुन-Garlic
लाइलाज
लाइलाज का इलाज
लाक्षणिक इलाज
लाक्षणिक जानकारी
लाभ
लिंग
लिंग प्रवेश
लिसोड़ा
लीकोरिया
लीवर
लीवर सिरोसिस
लीवर-Liver
लू-hot wind
लैंगिक
लोनिया
लौकी
लौंग की चाय
ल्युकोरिया
ल्यूकोरिया
ल्यूज योनी
वजन
वज़न
वजन कम
वजन बढाएं-Weight Increase
वन तुलसी
वन/जंगली तुलसी
वनौषधियाँ
वमन
वमन विकृति-Vomiting Distortion
वसा
वात
वात श्लैष्मिक ज्वर
वात-Rheumatism
वायरल
वायरल फीवर
वायरल बुखार-Viral Fever
वासना
विचारतंत्र
विटामिन
विधारा
वियाग्रा-Viagra
वियोग
विरह वेदना
विलायती नीम
विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध
विवाहेत्तर सम्बंध
विश्वास
विष
विष हरनी
विषखपरा
वीर्य
वीर्य वृद्धि
वीर्यपात
वृक्कों (गुर्दों) में पथरी-Renal (Kidney) Stone
वृक्ष
वैज्ञानिक
वैधानिक
वैवाहिक जीवन
वैवाहिक जीवन-Marital
वैवाहिक रिश्ते
वैश्यावृति
व्याकुल
व्यायाम
व्रण
शंखपुष्पी
शरपुंखा
शराब
शरीफा-सीताफल-Custard apple
शर्करा
शलगम-Beets
शल्यक्रिया
शहद
शहद-Honey
शारीरिक
शारीरिक रिश्ते
शिथिलता
शीघ्र पतन
शीघ्रपतन
शीस
शुक्राणु
शुक्राणु-Sperm
शुक्राणू
शुगर
शोक
शोथ
शोध
श्योनाक
श्रेष्ठतर
श्वास
श्वांस
श्वेत प्रदर
श्वेत प्रदर-Leucorrhea
श्वेतप्रदर
षड़यंत्र
संकुचन
संकोच
संक्रमण
संक्रमित
संक्रामक
संखाहुली
सगतरा
संतरा-Orange
संतान
संतुष्टि
सत्यानाशी
सदा सुहागन
सदाफूली
सदाबहार
सदाबहार चूर्ण
सनबर्न
सफ़ेद दाग
सफेद पानी
सफेद मूसली
सब्जि
सब्जी
संभालू
संभोग
समर्पण-Dedication
सरकार को सुझाव
सरफोंका
सरहटी
सर्दी
सर्दी-जुकाम
सर्पक्षी
सर्पविष
सलाद
संवाद
संवेदना
सहदेई
सहदेवी
सहानभूति
साइटिका
साइटिका-Sciatica
साइड इफेक्ट्स
साबूदाना-Sago
सायटिका
सिगरेट
सिजेरियन
सिर दर्द
सिर वेदना
सिरका
सिरदर्द
सिरोसिस
सी-सेक्शन
सीजर डिलेवरी
सुगर
सुदर्शन
सुहागा
सूखा रोग
सूजन
सेक्स
सेक्स उत्तेजक दवा
सेक्स परामर्श-Sex Counseling
सेक्स पार्टनर
सेक्स पावर
सेक्स समस्या
सेक्स हार्मोन
सेक्स-Sex
सेंधा नमक
सेब
सेमल-Bombax Ceiba
सेल्स
सोजन-सूजन
सोंठ
सोना पाठा
सोयाबीन
सोयाबीन (Soyabean)
सोयाबीन-Soyabean
सोराइसिस
सोरियासिस-Psoriasis
सौंठ
सौंदर्य
सौंदर्य-Beauty
सौन्दर्य
सौंफ
सौंफ की चाय
सौंफ-Fennel
स्किन
स्खलन
स्तन
स्तन वृद्धि
स्तनपान
स्तम्भन
स्त्री
स्त्रीत्व
स्त्रैण
स्पर्श
स्मृति-लोप
स्वप्न दोष
स्वप्नदोष
स्वप्नदोष-Night Fall
स्वभाव
स्वभावगत
स्वरभंग
स्वर्णक्षीरी
स्वस्थ
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य परामर्श
स्वास्थ्य रक्षक सखा
हजारदानी
हड़जोड़
हड्डी
हड्डी में दर्द
हड्डी संक्रमण
हड्डीतोड़ ज्वर
हड्डीतोड़ बुखार
हरड़
हरसिंगार
हरी दूब-CREEPING CYNODAN
हरीतकी
हर्टबर्न
हस्तमैथुन
हस्तमैथुन-Masturbation
हाई बीपी
हाथ-पैर नहीं कटवायें
हारसिंगार
हालात
हिचकी
हिचकी-Hiccup
हिमोग्लोबिन-hemoglobin
हिस्टीरिया
हिस्टीरिया-Hysteria
हींग
हीनतर
हुरहुर
हुलहुल
हृदय
हृदय-Heart
हेपेटाइटिस
हेपेटाईटिस
हेल्थ टिप्स-Health-Tips
हेल्थ बुलेटिन
हैजा
हैपीनेस-Happiness
हैल्थ
होम केयर टिप्स-Home Care Tips
होम्यापैथ
होम्योपैथ
होम्योपैथिक
होम्योपैथिक इलाज
होम्योपैथिक उपचार
होम्योपैथी
होम्योपैथी-Homeopathy








