Online Dr. P.L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा)

Health Care Friend and Marital Dispute Consultant

(स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार)

-:Mob. & WhatsApp No.:-

85619-55619 (10 AM to 10 PM)

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स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे निम्न हेल्थ वाट्सएप पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे आॅन लाइन स्वास्थ्य परामर्श प्राप्त करें।

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कोई भी डॉक्टर यह दावा नहीं कर सकता कि उसके इलाज से 100 % रोगी ठीक हो सकते हैं?-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
स्वास्थ्य परामर्श हेतु हेल्थ वाट्सएप
8561955619 (10AM to 10PM)
>>>>>किसी भी देश के बड़े से बड़े अस्पताल और बड़े से बड़े डॉक्टर द्वारा यह दावा नहीं किया जा सकता कि उनके यहां आने वाले सभी पेशेंट/रोगी गारण्टी के साथ ठीक/स्वस्थ कर दिये जाते हैं। बावजूद इसके भी 21वीं शताब्दी में भी ऐसे डॉक्टरों की कमी नहीं है, जो सभी कानूनों का धता बताकर शर्तिया इलाज करने का दावा करते हैं। कानून की धज्जियां उड़ाकर रोगियों का गारण्टी के साथ इलाज करने का दावा करने वाले विज्ञापन भी करते हैं, लेकिन ऐसे कथित एक्सपर्ट डॉक्टरों के इलाज से 20% रोगी भी ठीक नहीं हो पाते हैं। बल्कि ऐसे डॉक्टरों के यहां अपना वक्त और धन बर्बाद करके अनेक अंत में ऐसे रोगी इलाज हेतु आयुर्वेद या होम्यापैथ डॉक्टरों के पास ही आते हैं। मगर उनकी मनोदशा इस प्रकार की बन चुकी होती है कि वे आयुर्वेद या होम्यापैथ डॉक्टरों से भी गारण्टेड इलाज की उम्मीद करते हैं। बार-बार समझाने के बाद भी उनको गारण्टी ही चाहिये होती है। ऐसे रोगी हर माह में 2-4 डॉक्टर बदलते रहते हैं। यही नहीं उन्हें झटपट इलाज भी चाहिये होता है। कम से कम मैं ऐसे रोगियों का इलाज नहीं करता हूं।


>>>>>मगर यहां पर मुझे यह स्पष्ट करना बहुत जरूरी है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में तुरंत परिणाम सामने आते हैं। जैसे दवाई लेने के तुरंत बाद बुखार या दर्द कम हो सकते हैं। मगर जिन जटिल एवं पुरानी तकलीफों में तुरंत प्रभाव करने वाली दवाइयां स्थायी असर/आरोग्य नहीं कर पाती हैं, उन मामलों में रोगी अनेकों वर्षों तक इलाज लेकर भी परेशान रहने/होने के बाद या आॅपरेशन के डर से आयुर्वेद और, या होम्योपैथी डॉक्टरों की शरण में आते देखे जाते हैं। ऐसे रोगियों को इस बात को समझना चाहिये कि वर्षों पुरानी तथा अनेक नकारात्मक दवाइयों के जरिये अंदर दबा दिये गये या बिगाड़ दिये गये रोगों को तुरत-फुरत या गारण्टी के साथ कैसे ठीक किया जा सकता है? कोई भी होम्यापैथ या आयुर्वेद का डॉक्टर अपनी ओर से केवल प्रयास ही कर सकता है। मगर अधिकर रोगी इस बात को न तो समझते हैं और न ही समझना चाहते हैं। इस कारण भी ऐसे रोगियों की लुटाई भी खूब होती है।


>>>>>उदाहरण के लिये-

  • कोष्ठबद्धता, कब्ज या मलावरोधता (Constipation or Costiveness)
  • अपच (Indigestion/Dyspepsia)
  • एसिडिटी (Acidity/Sourness)
  • क्षुधानाश/भूख न लगना (Loss of Appetite)
  • फैटी लीवर (Fatty Liver)
  • हैपेटाइटिस/यकृतशोथ (Hepatitis)
  • लीवर संक्रमण (Liver Infection)
  • तिल्ली में सूजन (Swelling in the Spleen)
  • मरोड़+आंव के साथ मलत्याग, पेचिश/आमातिसार (Dysentery)
  • हैपेटाइटिश
  • बवासीर (Hemorrhoids or Piles)
  • गुदाभ्रंश (Rectal Prolapse)
  • फिशर/भगन्दर/फिस्टुला (Fissure/Fistula)
  • योनिभ्रंश (Uterine Prolapse)
  • रक्ताल्पता (Anemia)
  • प्रदर (Leucorrhoea)
  • प्रमेह/सूजाक (Gonorrhea)
  • शीघ्रपतन (Early or Premature Ejaculation)
  • यौन कमजोरी (Sexual Weakness)
  • अनिद्रा/उन्निद्रता (Insomnia)
  • हड्डी संक्रमण (Bone Infection)
  • गठिया/आर्थराइटिस/संधिशोथ (Arthritis)
>>>>>आदि जटिल रोगों से पीड़ित 99% रोगी हमारे पास इलाज हेतु तब आते हैं, जबकि वे उक्त रोगों का वर्षों तक नाकाम इलाज करवा-करवा कर, जटिल और लाइलाज जैसा बना चुके होते हैं। इसके बाद वे हम से तुरंत तथा गारंटेड इलाज (Instant and Guaranteed Treatment) की उम्मीद करते हैं! यह असंभव है। हां यदि इन तकलीफों से पीड़ित रोगी शुरू में ही किसी अनुभवी होम्यापैथ या आयुर्वेद के डॉक्टर से सम्पर्क करता है तो तुलनात्मक रूप से श्रृेष्ठ परिणामों की उम्मीद की जा सकती है। इन हालातों में मेरे जैसा व्यक्ति सिर्फ इतना ही कह सकता है कि ''मुझ से तुरंत और गारंटेड इलाज की उम्मीद नहीं करें। हां मैं, मेरी ओर से 100% कोशिश अवश्य करूंगा।''


>>>>>अंत में यही लिखना चाहूंगा कि जटिल तकलीफों से पीड़ित रोगियों को गारण्टी की उम्मीद करने के बजाय धैर्यपूर्वक किसी अनुभवी होम्योपैथ या आयुर्वेद के डॉक्टर से  इलाज करवाना चाहिये। क्योंकि कोई भी डॉक्टर यह दावा नहीं कर सकता कि उसके इलाज से 100 के 100% रोगी ठीक हो ही जाते है?-सोमवार, 29 अक्टूबर, 2018, 07.28 बजे।


>>>>> नोट: किसी भी पुरानी या लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी से पीड़ित लोगों को, अपनी बीमारी को अपनी नियति मानकर निराश या हताश (Frustrated or Depressed) होने की जरूरत नहीं है। देशी जड़ी बूटियों और होम्योपैथी में इलाज संभव है। अपने आपपास के किसी अनुभवी डॉक्टर से सम्पर्क किया जा सकता है। देशभर में अनेकानेक अनुभवी तथा योग्य होम्योपैथ/आयुर्वेद के डॉक्टर उपलब्ध हैं।


>>>>> *हां अनेकानेक स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों की जानकारी और रोगियों के अनुभवों की जानकारी हेतु मेरी निम्न वेबसाइट/Facebook Page पर विजिट/क्लिक कर सकते हैं:-*

>>>>> *Online Doctor*
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शीघ्रपतन (Premature Ejaculation) तलाक (Divorce) और विवाहेत्तर यौन सम्बन्धों (Extramarital Relations) की बड़ी वजह
(Premature Ejaculation is a Major reason for Divorce and Extramarital Relations)

जून, 2017 की 22 तारीख को मेरा वास्तविक जन्मदिन था। सोशल मीडिया पर मैंने अपने जीवन की संक्षिप्त जानकारी पेश की हुई थी। जिसे पढकर, उसी दिन रामकृपाल सिंह (बदला हुआ नाम) का वाट्सएप पर मैसेज मिला जो टूटी-फूटी रोमन हिंदी में लिखा गया था। जिसे पेशेंट रामकृपाल सिंह की सहमति से पाठकों के लिये हिंदी में पेश कर रहा हूं:-


''सर हैप्पी बर्थ डे। आज आपके जीवन के बारे में पढकर पता चला आप बहुत संघर्ष किये हो। लेकिन आपने ईमानदारी से सब कुछ सार्वजनिक कर दिया जो मेरी नजर में आपके ईमानदार और अच्छे इंसान होने का सबूत है। इसी उम्मीद से मैं आपको मेरी तकलीफ लिख रहा हूं, प्लीज मेरी मदद करके मेरी जिंदगी को बचाकर उपकार करें। मेरी उम्र 28 साल है। यूपी का रहने वाला हूं और सरकारी नौकरी करता हूं। मुझे साल में एक बार एक महिने की छुट्टी मिलती है। जब में 15-16 साल का था, तब से ही कुछ बड़े लड़कों के साथ मुठ्ठ मारने की आदत लग गयी। 3 साल पहले शादी हुई, लेकिन सेक्स शुरू करते ही कुछ ही सेकण्ड में वीर्य निकल गया। कुल 10 दिन पत्नी मेरे साथ रही, मैं कुछ विशेष नहीं कर सका। उसके बाद नौकरी पर आ गया। शायद मेरी पत्नी को सेक्स का कुछ नॉलेज नहीं था। अत: उसने मुझ से कुछ भी नहीं बोला। जैसे-तैस मां की बीमारी का बहाना बनाकर 3 महिने बाद फिर से छुट्टी पर गया। इस बार पत्नी का सारा रंग-ढंग बदला हुआ था। पहली रात को ही बोली कुछ करने की हिम्मत हो तो कुछ करो, नहीं तो परेशान मत करो। ऐसा कहते ही मेरे दिलोदिमांग में बहुत बड़ा झटका लगा और मैं कुछ नहीं कर सका। मेरी उत्तेजना ही समाप्त हो गयी। इस प्रकार जब-जब भी मैं सेक्स करने की कोशिश करता, हर बार निराशा ही हाथ लगती। पत्नी के पास जाने से पहले तो खूब इच्छा होती और उत्तेजना भी होती, लेकिन एन वक्त पर पत्नी के शब्द दिमांग में गूंजने लगते और सारा खेल खत्म हो जाता। कुल मिलाकर मैंने खुद को नामर्द मान लिया। उधर जानकारी करने पर पता चला कि मेरी पत्नी विवाह से पहले एक अच्छी चरित्रवान लड़की थी, लेकिन विवाह के बाद उसके पीहर में दो लड़कों से सम्बन्ध बन गये। दु:ख और शर्म तो यह बताते हुए है कि उसने मेरे 50 वर्षीय पिता से भी सम्बन्ध बना लिये और बेशर्मी से कहने लगी कि या तो तलाक दे दो किसी ओर से शादी कर लूंगी, नहीं तो तुमको मुझ पर पाबंदी लगाने का कोई हक नहीं है। बात-बात पर मुझे नामर्द कहने लगी। मैंने अनेक बार आत्महत्या करने की भी सोची, लेकिन अपनी मां की ओर ध्यान जाता तो रुक जाता। मैंने टीवी, अखबार के सेक्स रोगों के इलाज के विज्ञापनों पर अपनी तनख्वा का बहुत सा रुपया बर्बाद कर दिया है। सब ने मुझे खूब लूटा है, लेकिन हर जगह से मुझे निराशा ही हाथ लगी। पत्नी मेरे पिता और मेरे चचेरे भाई के साथ खुलकर गुलछर्रे उड़ा रही है। अब तो मुझ छुट्टी पर जाने में भी शर्म आती है। उधर इन सब बातों का गांव में सबको पता चल चुका है। इस कारण मेरी मां की दशा बहुत खराब है। यदि आप हकीकत में मेरा इलाज कर सकें तो प्लीज हां करें। नहीं तो अब मौत ही एक रास्ता है।''

पूर्व में भी मैं इस प्रकार के अनेक मामलों में सफलतापूर्वक इलाज कर चुका था। अत: रोगी को निराश करना उचित नहीं समझते हुए, मैंने उसे हां कह दी, लेकिन हमेशा की भांति बता दिया कि 'गारंटी या शर्तिया इलाज की उम्मीद मुझ से नहीं करें, लेकिन 100 फीसदी कोशिश करूंगा और ठीक होने की पूरी उम्मीद है।'


जैसे ही रोगी के मानसिक लक्षण पूछे तो मुझे केस बहुत आसान लगा। उसे निर्धारित रीति से समयांतराल से उचित तथा वांछित शक्ति मात्रा में अर्जेंटम नाइट्रिकम, स्टेफिसेग्रिया, केलेडियम, एग्नस कैस्टस आदि सिंगल दवाइयों के साथ हमारे द्वारा अनुभवसिद्ध होम्योपैथिक सम्पूरक मिश्रण सेक्सो टॉन, इम्यूनिटी बूस्टर और आॅर्गेनिक देशी जड़ी बूटियों से निर्मित सम्पूरक मिश्रण एक्स्ट्रा लॉस्ट पावर गैनर, कायाकल्प पाउडर, रोग प्रतिरोधक शक्ति वर्धक पाउडर आदि सेवन करने को दिये गये। सबसे महत्वपूर्ण रहा उसके दिमांग में बैठे फोबिया का निराकरण। कुल मिलाकर 6 महिने में वह सफलतापूर्वक सेक्स करने में समर्थ हो गया। रोगी ने मुझे लिखे मैसेज में बताया कि-

''डॉ. साहब आपने मेरा जीवन बदल दिया। मैं जीवनभर आपका कर्जवान रहूंगा। जून, 17 में, मैं मरना चाहता था, लेकिन अब मैं 100 साल जीना चाहता हूं। पूरी जिंदगी मजे से जीऊंगा। सर आपको खुशी होगी कि जनवरी में छुट्टी गया तो पत्नी के प्रति नफरत से भरा हुआ होने के बाद भी मैंने उसे अपनी मर्दानगी का अहसास करवाने के लिये पत्नी के साथ एक रात बितायी। एक रात में 4 बार सफलतापूर्वक सेक्स किया और दूसरे दिन कोर्ट में जाकर तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। इसके बाद उसे उसके पीहर छोड़कर आ गया। जहां मैंने उसके सारे ​कारनामों की जानकारी उसके मां-बाप को दी तथा उन्हें बोल दिया कि अब मैं इस औरत को किसी भी कीमत पर नहीं रखूंगा और किसी दुखियारी वफादार विधवा से दूसरा विवाह करके जीवन जीऊंगा।"

यह उसका व्यक्तिगत निर्णय है, जिस पर अकारण टिप्पणी करने का मुझ कोई हक नहीं है। लेकिन अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है और अभी भी वह हमारे 'कामवाण पाउडर' का नियमित सेवन कर रहा है।

अंतिम टिप्पणी: मैं अनेकों बार लिखता रहा हूं कि "सेक्स दो टांगों के बीच का नहीं, बल्कि दो कानों के बीच का खेल है।" अर्थात सेक्स शारीरिक बाद में, पहले मानसिक क्रिया है। मन पर पड़ने वाले अच्छे-बुरे विचारों का प्रभाव शरीर पर पड़ता है। शीघ्रपतन के पीछे भी 70 फीसदी से अधिक मानसिक कारण होते हैं। दूसरी बात शीघ्रपतन दाम्पत्य जीवन के बिखराव का सबसे बड़ा कारण है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध तथा तलाक के मामले बढ रहे हैं। जबकि उचित परामर्श तथा उपचार के जरिये शीघ्रपतन का उपचार संभव है। ऐसे मामलों में हमें 90 फीसदी से अधिक मामलों में सफलता मिलती रही है। जो आपने आप में बड़ा आंकड़ा है।

Online Dr. PL Meena (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा): Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सक्षा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार ), Mobile & Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619 (10AM to 10 PM), 26.04.2018

----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ महंगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम हर दिन जारी है। लेकिन 'तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज' चाहने वाले माफ करें।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-26.04.2018.
हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-3 (Health Bulletin-3)

समस्या: मेरी उम्र 38 साल, लम्बाई 5 फिट 4 इंच और वजन 85 किलो है। मैं दो बच्चों का पिता हूं। मुझे विवाहपूर्व से ही शीघ्रपतन की समस्या है। इस कारण पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाता हूं। इस कारण हमारे बीच किसी न किसी बात पर लगातार तकरार होती ही रहती है। जबकि सभी प्रकार की समस्याओं की जड़ शीघ्रपतन है। इस वजह से हम एक साथ रहकर भी दुश्मनों की भांति रहते हैं। महिनों तक हमारे बीच बीतचीत तक नहीं होती है। कृपया कोई पक्का इलाज बतायें। एक्सवाईजेड त्रिवेदी, गोरखपुर, उप्र।



परामर्श: त्रिवेदी जी सबसे पहले तो आप यह समझ लें कि आपकी समस्या कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिससे आप अकेले जूझ रहे हैं, बल्कि एक अध्ययन के अनुसार भारत में 30 फीसदी लोगों का दाम्पत्य तकरीबन इसी तरह का है। आप और आप जैसी तकलीफ से जूछ रहे दम्पत्तियों के हितार्थ मैं आपको कुछ सुझाव लिख रहा हूं:-
(1) पहली बात झगड़ा करना या बातचीत बंद कर देना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को बढाना है। आपको अपने वैवाहिक सम्बन्धों की पुनर्स्थापना हेतु तुरंत किसी अनुभवी तथा विश्वास योग्य दाम्पत्य विवाद सलाहकार (Marital Dispute Consultant) से सम्पर्क करना चाहिये।
(2) दूसरी बात दाम्पत्य विवाद सलाहकार से सम्पर्क करने के बाद उनकी सलाह का अनुसरण करें। जब तक आपको दाम्पत्य विवाद सलाहकार का परामर्श नहीं मिल पाता है, आप मेरी वेब साइट स्वास्थ्य रक्षक सखा (Health Care Friend) पर 'शीघ्रपतन' (Early Ejaculation) शीर्षक से प्रकाशित मेरे लेख को पढें और अपने पाचन संस्थान का उपचार करवायें। उसके बाद ही उपचार की सोचें। क्योंकि जब तक आपका पाचन संस्थान ठीक नहीं होगा, आपकी किसी भी बीमारी का आसानी से उपचार सम्भव नहीं है। जिसके लिये आप किसी स्थानीय डॉक्टर से सम्पर्क करें। या इस पोस्ट के अंत में लिखे मेरे हेल्थ वाट्सएप पर सम्पर्क करें।
(3) तीसरी बात उपचार होने तक आप त्रिफला का सेवन कर सकते हैं। लेकिन बाजारू त्रिफला नहीं लें, बल्कि थोड़ा सा श्रम खुद करें। 100 ग्राम बड़ी हरड़, 200 ग्राम बहेड़ा, 400 आंवला लें। तीनों ताजा हों। अर्थात पुराने सड़े-गले नहीं हों। तीनों को अच्छे से कूट-पीसकर कपड़छन करके पाउडर बना लें। इस सब में 200 ग्राम काले नमक का पाउडर बनाकर मिला लें। सभी को मिश्रित करके किसी एयर टाईट डब्बे में भरकर सुरक्षित रख लें। इसमें से प्रतिदिन शाम को दो टी-स्पून (Teaspoon) पाउडर शाम को आधा गिलास पानी में भिगो दें। सुबह आधा गिलास पानी और मिलायें। फिर धीमी आंच पर पकावें। जब पानी आधा रह जाये तो सुबह खाली पेट गुनगुना-गुनगुना (Lukewarm) नियमित रूप से लगातार एक से तीन महिने तक या पाचन संस्थान ठीक होने तक पियें। खाली पेट चाय और दूध का सेवन भूलकर भी नहीं करें।
(4) जब आपकी पाचन क्रिया नियमित हो जाये तो शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच का विधिवत शोधित किया हुआ पाउडर, शुद्ध आॅर्गेनिक अश्वगंधा पाउडर, शुद्ध सफेद मूसली पाउडर तीनों को कपड़छन करके समान मात्रा में मिला लें, इन तीनों के बराबर मात्रा में मिश्री पाउडर मिला लें। रात्रि सोते समय करीब 5 ग्राम पाउडर की फक्की लेकर 150 से 500 मिलीलीटर तक, अपनी क्षमतानुसार गुनगुना-गुनगुना (Lukewarm) दूध नियमित रूप से  पियें।
(5) पूरी तरह से स्वस्थ होने तक किसी भी प्रकार का नशा और मांसाहार नहीं करें। नियमित रूप से समय पर स्वास्थ्यवर्धक भोजन लें।

चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]

नोट/Note: अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे उचित समाधान प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619

----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।—डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'-14.03.2018.
हेल्थ बुलेटिन (स्वास्थ्य परामर्श) भाग-2 (Health Bulletin-2)


नोट: सुझाई गयी सभी होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक दवाईयां केवल जर्मनी निर्मित सील पैक और देशी जड़ी-बूटियां शुद्ध, ताजा तथा आॅर्गेनिक उपयोग करने पर ही परिणाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है।



1. मैं जब भी किसी बड़े अफसर से मिलता हूँ या परीक्षा या इंटरव्यू देने जाता हूँ तो मेरा कॉन्फिडेंस जवाब दे जाता है। क्या इसका कोई इलाज हो सकता है?-भरत कुलश्रेष्ठ, उज्जैन, मप्र।
परामर्श: जब भी ऐसा मौका आये आप होम्योपैथी की दवाई अर्जेण्टम नाईट्रिकम-30 की 1-1 घण्टे में 4-5 खुराक सेवन करें। सम्पूर्ण उपचार के लिये किसी योग्य हिम्योपैथ से सम्पर्क करें।
2. मेरी एज 37 वर्ष है। मैरिज को 15 साल हो गये। 2 बच्चे हैं। लेकिन मुझे अभी भी शीघ्रपतन की समस्या है। अनेक डॉक्टर्स का कहना है कि मैरिज के बाद सब ठीक हो जाता है, लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं हुआ। इस कारण हमारी मैरिज लाइफ डिस्टर्ब है। कोई पक्का इलाज बतायें।-के के सिंह, कानपुर, उप्र।
परामर्श: आपके प्रोपर/सही उपचार के लिये आपका सम्पूर्ण लक्षणात्मक विवरण जानना बहुत जरूरी है। फिर भी फौरी उपचार के लिये आप होम्योपैथी की दवाई स्टेफिसेग्रिया-200 और शुद्ध ऑर्गेनिक काले कौंच, सफेद मूसली, शतावरी, भूई आमला, शरफुंका और मिश्री का सम्भाग मिश्रण बनाकर, प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम तक शाम को दूध के साथ 2-3 महीने तक सेवन करें। आप मेरी वेब साइट पर 'शीघ्रपतन' शीर्षक से 30.11.2017 को प्रकाशित लेख अवश्य पढें। इसे पढने के बाद आपकी अनेक भ्रांतियां और उलझनें दूर हो सकेंगी।
3. मेरी पत्नी की उम्र 40 साल है। उसको 20 साल की उम्र से सफेद पानी की बीमारी है। बहुत इलाज करवाया, लेकिन कोई लाभ नहीं। बिल्कुल सूख गई है। 35 किलो भजन रह गया है। कोई काम नहीं कर पाती। चक्कर आते हैं और आधे सिर में दर्द रहता है। भूख नहीं लगती। कब्जी रहती है। क्या करें?-रमेश शर्मा, मुरेना, मध्य प्रदेश।
परामर्श: जितना आपने बताया है, उतनी सी जानकारी से उपचार बताना सम्भव नहीं है। लगता है आपकी पत्नी को लीवर में सूजन या इंफेक्शन के साथ ल्यूकोरिया/श्वेत प्रदर और माइग्रेन की पीड़ा है। इन सभी तकलीफों का प्रोपर उपचार जरूरी है। किसी योग्य होम्योपैथ और, या आयुर्वेद के डॉक्टर से सम्पर्क करें। तब तक आप उन्हें नियमित रूप से शुद्ध ऑर्गेनिक और ताजा भूई आमला, मकोय, पुनर्नवा और आंवले का काढ़ा सुबह शाम पिला सकते हैं। आपकी पत्नी की पूर्ण जानकारी हेतु मेरे हेल्थ वाट्सएप नम्बर 8561955619 पर भी सम्पर्क कर सकते हैं। 
4. मेरे अंडकोषों में 8-9 महिने से दाद और खुजली की समस्या है। जब तक गोली, कैप्सूल और इंजेक्शन लेता हूँ, सब ठीकठाक रहता है। कुछ दिन बाद फिर से तकलीफ शुरू हो जाती है। जिसमें जलन होती है और खुजाने पर रक्त निकलने लगता है। प्लीज मुझे इससे मुक्ति दिलाएं।-पीएस गंगवाल, भोपाल, मप्र।
परामर्श: सबसे जरूरी सावधानी-अपने सभी आंतरिक कपड़े सूती पहनें और उन्हें साफ रखें। जिसके लिये स्वस्थ होने तक रोजाना उबलते पानी में कपड़ों की धुलाई जरूरी है। नहाते समय नीम के पत्ते पानी में उबालें या गुनगुने पानी में एंटी इंफेक्शन पाऊडर पानी में डालकर नहाएं। प्रतिदिन होम्योपैथी की दवाई सल्फर-200+कैंथरिस-200 की एक-एक खुराक और शुद्ध ऑर्गेनिक शरफुंका+श्योनाक पाउडर, प्रतिदिन 2 से 5 ग्राम तक सुबह-शाम पानी के साथ ठीक होने तक सेवन करें।
5. मेरी पत्नी की उम्र 32 साल है। विवाह को 6 महिने हुए हैं। उसकी योनि का करीब 2 इंच हिस्सा बाहर निकलता है। डॉक्टर का कहना है कि वैजाइना कोलैप्स की तकलीफ है, ऑपरेशन करना पड़ेगा। हमें बहुत घबराहट और डर है। क्या मेरी पत्नी बिना ऑपरेशन ठीक हो सकती है और क्या वह माँ बन पाएगी? खर्चे की कोई दिक्कत नहीं हम दोनों जॉब करते हैं।-मनीष पांचाल, रेवाड़ी, हरियाणा।
परामर्श: बिना बच्चों को जन्म दिये योनिभ्रंश अर्थात वैजाइना कोलैप्स, लगभग असम्भव। मामला उतना सरल नहीं जितना आप को लग रहा है। आपकी पत्नी के सहयोग के बिना उपचार सम्भव नहीं। उन्हें सम्पूर्ण केस हिस्ट्री ईमानदारी से बतानी होगी। आप तुरन्त किसी होम्योपैथ से सम्पर्क करें या मेरे हेल्थ वाट्सएप 85619 55619 पर सम्पर्क करें। तब तक होम्योपैथी की दवाई कोलोफाईलम-200 + कॉस्टीकम-200 सुबह शाम सेवन करवा सकते हैं।
चेतावनी: यहां पर जनहित में स्वास्थ्य और बीमारियों के बारे में जागरूकता के लिए दवाईयों का विवरण लिखा गया है। पाठक कृपया स्वयं अपना इलाज करने का खतरा नहीं उठायें। कृपया अपने चिकित्सक के परामर्श के बिना, सुझाई गयी (किसी भी प्रकार की) दवा का सेवन नहीं करें। [Please Do not take any (kind of) suggested medicine, without consulting your Doctor.]

Note: अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करें, तुरंत स्थानीय डॉक्टर (Local Doctor) से सम्पर्क करें। हां यदि आप स्थानीय डॉक्टर्स से इलाज करवाकर थक चुके हैं, तो आप मेरे हेल्थ वाट्सएप No.: 8561955619 पर अपनी बीमारी की डिटेल और अपना नाम-पता लिखकर भेजें और घर बैठे उचित समाधान प्राप्त करें। On Line-Health Care Friend and Marital Dispute Consultant-Dr. PL Meena, Health WhatsApp No. 8561955619

----------------------------देशी जड़ी बूटियों के बारे में पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान तथा दुष्प्रभाव रहित होम्योपैथिक एवं बॉयोकैमिक जर्मन दवाईयों के सतत अध्ययन, शोधन, परीक्षण और उपचार के दौरान अनेक अनुभव सिद्ध उपयोगी नुस्खे तैयार किये गये हैं। जो बेशक कुछ मंहगे अवश्य हैं, लेकिन इन नुस्खों से हजारों रोगियों को "लाइलाज समझी जाने वाली" अनेक तकलीफों से मुक्ति मिल चुकी है और चुनौतीपूर्ण मानव सेवा का यह क्रम लगातार जारी है। तुरन्त, गारण्टेड और शर्तिया इलाज चाहने वाले माफ करें।
जो व्यक्ति खुद अपनी मदद नहीं कर सकता!
दुनियां में कोई उसकी मदद नहीं कर सकता!
आप को बीमारी का निदान चाहिये तो स्वास्थ्य-परामर्श-फॉर्म भरना ही होगा।
(रोगी और स्वास्थ्य रक्षक सखा (स्वरस) के मध्य संवाद)




रोगी: मुझे सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन की समस्या है। क्या मैं ठीक हो सकता हूं?
स्वास्थ्य रक्षक सखा (स्वरस): जरूर हो सकते हैं, लेकिन पहले आपकी डिटेल जानकारी के लिये आपको वाट्सएप या मेल पर 'स्वास्थ्य-परामर्श-फॉर्म (Health Consultation Form)' भरना होगा!
रोगी: सर फॉर्म भेज दें।
स्वरस: फॉर्म भेज दिया है। कृपया इसे ठीक पढकर और समझकर भर दें।
रोगी: सर जब मैंने अपनी तकलीफ सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन की बता दी है तो इतनी सारी जानकारी क्यों जरूरी हैं?
स्वरस: आपकी तकलीफों का सही से निदान करने के लिये।
रोगी: अब से पहले तो किसी डॉक्टर ने इतनी जानकारी नहीं पूछी। जबकि मैं 8-10 डॉक्टरों से इलाज करवा चुका हूं।
स्वरस: उन 8-10 डॉक्टरों से इलाज तो करवा चुके, लेकिन इलाज का परिणाम क्या रहा?
रोगी: सर मेरी बीमारी उनसे ठीक नहीं हुई तब ही तो आपसे कॉण्टेक्ट किया है..
स्वरस: आपका इलाज 8-10 डॉक्टरों से नहीं हुआ। इसका मतलब या तो बीमारी गंभीर है या आपने उन्हें सही से बतायी नहीं या उनमें से किसी को समझ में नहीं आयी? हमारी कोशिश है कि आपकी बीमारी के मूल कारण को समझकर उसका पक्का निदान किया जाये। इसीलिये फॉर्म में डिटेल जानकारी चाही गयी है।
रोगी: लेकिन सर इलाज तो सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन का करवाना है, आप तो मेरी पाचन क्रिया के बारे में 25 जानकारी मांग रहे हैं...?
स्वरस: आपके इलाज के लिये आपके खानपान की आदतों तथा आपकी पाचन क्रिया की जानकारी बहुत जरूरी है। बल्कि अनिवार्य है।
रोगी: सर क्या बिना डिटेल लिखे इलाज संभव नहीं?
स्वरस: बिलकुल नहीं!
रोगी: क्या आप माबाईल पर लिख सकते हैं?
स्वरस: बिलकुल नहीं!
रोगी: क्या मैं कागज पर लिखकर, उसका फोटो खींचकर भेज सकता हूं?
स्वरस: बिलकुल नहीं!
रोगी: क्या मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर समस्या बता सकता हूं?
स्वरस: बिलकुल नहीं! पहले फॉर्म भरें, उसके बाद जरूरी हुआ तो मिलने भी बुला लूंगा। वैसे 99 फीसदी केसेज में, रोगी को व्यक्तिगत रूप से मिलने की जरूरत नहीं होती है। क्योंकि मैं केवल आॅन लाईन निदान करता हूं। अत: ऐसे केस ही लेता हूं, जिनमें व्यक्तिगत रूप से मिलने की जरूरत नहीं होती है।
रोगी: सर क्या मेरी बीमारियों का पक्का इलाज हो जायेगा?
स्वरस: बिना फॉर्म भरे और बिना डिटेल जाने कुछ नहीं कहा जा सकता! इसके अलावा आप यह भी जान लें कि हम किसी को ठीक करने की गारण्टी नहीं देते हैं।
रोगी: फिर मेरा इलाज कैसे होगा?
स्वरस: आप पहले फॉर्म तो भरें!
रोगी: बिना फॉर्म भरे...?
स्वरस: बिलकुल नहीं! क्योंकि जो व्यक्ति खुद अपनी मदद नहीं कर सकता! दुनियां में कोई उसकी मदद नहीं कर सकता! आप को बीमारी का निदान चाहिये तो फॉर्म भरना ही होगा।
रोगी: सर लेकिन सिरदर्द, पाइल्स और शीघ्रपतन के इलाज के लिये इतनी सारी जानकारी क्यों?
स्वरस: आप सवाल रिपीट कर रहे हो। इसका जवाब पहले दिया जा चुका है।
रोगी: सर...
स्वरस: प्लीज मेरा और अपना समय खराब नहीं करें। आगे से फॉर्म भरे बिना किसी प्रकार के संवाद की उम्मीद नहीं करें। अन्यथा आपका नम्बर ब्लॉक कर दिया जायेगा।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' 
स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Online Dr. PL Meena: Health Care Friend and Marital Dispute Consultant, Health Advice WhatsApp No.: 85619-55619, Mobile No.: 9875066111 (10AM to 10 PM)
शीघ्रपतन का होम्योपैथिक इलाज!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
आगे बढने से पहले पाठकों को अवगत करवाना उचित होगा कि 30 नवम्बर, 2017 को 'शीघ्रपतन' शीर्षक से लिखे लेख में निम्न विषयों की जानकारी दी जा चुकी है:
1. शीघ्रपतन से कितने पुरुष परेशान रहते हैं?
2. शीघ्रपतन किसे कहते हैं?
3. वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
4. स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
5. सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?
6. शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध?
7. शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण!
8. शीघ्रपतन के कारण।
उक्त जानकारी मेरी वेबसाइट के निम्न लिंक पर पढी जा सकती है:-

07 दिसम्बर, 2017 को 'शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!' शीर्षक से लिखे लेख में शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा चुकी है।
उक्त जानकारी मेरी वेबसाइट के निम्न लिंक पर पढी जा सकती है:-
http://www.healthcarefriend.in/2017/12/blog-post_69.html

शीघ्रपतन के होम्योपैथिक इलाज के बारे में लिखने से पहले स्पष्ट कर देना उचित होगा कि होम्योपैथी में किसी भी रोग की कोई सुनिश्चित दवाई नहीं होती है। इलाज करने के लिये रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को जानने के बाद उचित दवाई का निर्धारण करना होता है, जो हम होम्योपैथ्स के लिये बहुत ही कठिन और परिश्रमपूर्ण कार्य है। दु:खद पहलु यह है कि अधिकतर रोगी, अपने लक्षण बताने में ही संकोच करते हैं। जिसके कारण रोगी को भारी शारीरिक एवं आर्थिक नुकसान होता है। साथ ही उपचारक का भी समय बर्बादा होता है और नाम खराब होता है।





यहां पर कुछ प्रमुख होम्योपैथिक औषधियों की जानकारी दी जा रही है, जो शीघ्रपतन की समस्या के समाधान में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। मगर याद रहे किसी अनुभवी होम्योपैथ के परामर्श के बिना इन दवाईयों का सेवन करना उचित नहीं होगा, क्योंकि दवाई के नाम मात्र से कुछ नहीं हो सकता। महत्वपूर्ण कार्य है, रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को पूछकर/जानकर दवा की सही मात्रा और दवा की शक्ति का निर्धारण करना।

आॅरम मेटालिकम: रोगी को आत्महत्या करने का मन करता है और अपने आप को बिल्कुल निकम्मा महसूस करता है, निराशा अधिक होने के साथ ही शरीर का रक्तदाब बढ़ जाता है, जीवन में एकदम निराशापन हो जाता है। रोगी को भूख तथा प्यास लगती है, जी मिचलाने लगता है और दम घुटने लगता है तथा गर्मी भी लगने लगती है। अण्डकोष में दर्द और सूजन आ जाती है, अण्डको अन्डकोषों में कठोरता उत्पन्न हो जाती है, लिंग में तेज उत्तेजना होती है। भयंकर शारीरिक कामोत्तेजना तथा चंचलता का भाव होना, परन्तु इसके बाद बहुत शीघ्र ही लिंग में अत्यधिक शिथिलता। मैथुन शूरू करते ही लिंग का ढीला पड़ जाना। हस्तमैथुन के दुष्परिणाम आदि लक्षण पाये जाते हैं। स्त्री रोगी की योनि में तेज उत्तेजना होती है। बांझपन का रोग तथा इसके साथ ही योनि में तेज जलन के साथ बांझपन हो तो यह दवाई स्त्रियों के लिए भी बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

सेलिनियम: सेलेनियम उन रोगियों के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है जो व्यक्ति जवानी के जोश में आकर अपने वीर्य को समय से पहले ही समाप्त कर चुके होते हैं और संभोग क्रिया के समय पूरी तरह सफल नहीं हो पाते। स्त्री के साथ संभोग क्रिया करने के बाद रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना। सोते समय रोगी का वीर्य अपने आप ही निकल जाना। मन में संभोग करने की इच्छा तेज होना, लेकिन संभोग करते समय लिंग का उत्तेजित न होना, वीर्य का पतला हो जाना। बार-बार वीर्य-स्राव। बिना कामेच्छा के ही प्रात: काल लिंग में उत्तेजना होना, परन्तु सहवास की कोशिश करने पर लिंग का शिथिल हो जाना। अत्यधिक लैंगिक दुर्बलता। मन में अत्यधिक कामेच्छा होने पर भी लिंग में कड़ापन न आना अथवा सेक्स पूर्ण न हो पाना। जननेन्द्रिय/लिंग में खुजली तथा सुरसुरी। नींद में, पाखाने के समय अथवा अनजाने में लिंग से गोंद जैसा लसदार पदार्थ निकलना आदि लक्षणों में सेलिनियम का उपयोग लाभदायी हो सकता है।

ऐग्नस कैक्टस: लैंगिक दोष उत्पन्न होना, मृत्यु का भय होना। अधिक उदासी के साथ जल्दी मृत्यु का भय महसूस हो रहा हो। मन-मस्तिष्क स्थिर न रहना, याददाश्त कमजोर होना, किसी कार्य को करने में उत्साह न होना। जो पुरुष जवानी में अधिक मौज-मस्ती करते रहे हैं और कामवासना में अधिक डूबे रहने के कारण शारीरिक रूप से कमजोर तथा नपुंसक हो जाते हैं। जिनके प्रजनन अंग ठण्डे तथा ढीले पड़ गये हों। लिंग में कमजोरी, परन्तु कामेच्छा का अधिक होना, मल-त्याग के समय जोर लगाने से अथवा नींद में वीर्य स्खलन, एकदम मानसिक अवसन्नता, कमजोर तथा अनमनेपन का भाव आदि लक्षणों में इसका सेवन करें।

ग्रैफाइटिस: हर समय डर सा लगते रहना, किसी भी काम को करने में मन न लगना, बहुत ज्यादा भावुक हो जाना, किसी भी फैसले को करने में दुविधा होना, उदास सा बैठे रहना। गर्म पीने वाली चीजों का हजम न होना। जितनी बार भी भोजन करे उतनी ही बार जी मिचलाना और उल्टी आना, आमाशय में दबाव सा महसूस होना। आमाशय में जलन होने के कारण भूख न लगन। डकार लेने में परेशानी होना। पेट में गैस बनना। सेक्स करने की इच्छा का तेज होना, लेकिन सेक्सक्रिया के दौरान अपने सहभागी को पूरी तरह से खुश न कर पाना। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण योनि में लिंग-प्रवेश के तुरन्त बाद या प्रवेश से पूर्व ही वीर्य-स्खलन हो जाए। लिंग में कड़ापन न आना। हस्तमैथुन तथा अतिरिक्त काम-तृप्ति के कारण लिंग में शिथिलता, लिंगमुण्ड/सुपारी पर कटे-फटे घाव तथा खाल उधड़ जाना, लिंग में सूजन तथा लसदार-चिपचिपे स्राव होना। सेक्स क्रिया से मन का बिल्कुल हट जाना आदि लक्षणों के नज़र आने पर रोगी को ग्रैफाइटिस औषधि देने से लाभ होता है।

लाइकोपोडियम: लाइकोपोडियम नामर्दी की मुख्य औषध है। यह ऐसे रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है जो मानसिक तथा शारीरिक दृष्टि से भी कमजोर होते हैं और जिन्हें शरीर में बहुत अधिक कमजोरी होती है। रोगी को और भी कई प्रकार के रोग होते हैं जो इस प्रकार हैं- लालची, कंजूस, धन का लालची, दूसरे के प्रति घृणा की भावना रखना आदि। रोगी को भय होता है तथा क्रोधित स्वभाव का हो जाता है, अपमान के कारण उसे और भी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। अत्यधिक मैथुन तथा अत्यधिक अप्राकृतिक मैथुन के कारण लिंग में उत्तेजना या कड़ापन ही न आना। नपुंसकता रोग होने के साथ ही रोगी को संभोग करने की इच्छा अधिक होती है तथा समय से पहले अपने आप ही वीर्य निकल जाता है और इसके बाद लिंग ठण्डा हो जाता है तथा संभोग की शक्ति कम हो जाती है अर्थात संभोग करने का मन नहीं करता है, संभोग करने के समय में लिंग में हल्का कड़ापन होता है, संभोग करते समय नींद सी आने लगती है, रोगी संभोग के प्रति भयभीत हो जाता है तथा जम्भाई आती है। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तो इन लक्षणों के साथ शीघ्रपतन के लक्षण में लाइकोपोडियम सर्वोत्तम दवाई है। यह दवाई विशेषकर वृद्धों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हो चुकी है।

फास्फोरस: रोगी का उत्साह कम, मन चिड़चिड़ा हो जाता है। उसे डर लगता है और रोगी को ऐसा लगता है कि हर कोने से कोई चीज रैंगती हुई बाहर निकल रही हो तथा उसके मन में दिव्यदृष्टि जैसी दशा उत्पन्न हो जाती है। रोगी अचानक चौंक पड़ता है। रोगी की सोचने की शक्ति कम हो जाती है, रोगी पागलों की तरह का व्यवहार करता है। उसे जीवन मेें आनन्द की अनुभूति नहीं होती है। अकेले रहने पर मृत्यु का भय लगा रहता है। दिमाग थका-थका सा रहता है। वह अपने प्रति अधिक उच्च धारणा रखता है, शरीर में उत्तेजना अधिक होती है, सारा शरीर गरम रहता है, रोगी अस्थिर रहता है और उसे चारों ओर अशान्ति प्रतीत होती है। खाना खाते ही रोगी को तुरन्त भूख लग जाती है, भोजन करने के बाद हर बार खट्टा स्वाद और खट्टी डकारें आती है, डकार आने के साथ ही खाना खाया हुआ भोजन तुरन्त वापस मुंह में आ जाता है, जैसे ही आमाशय के अन्दर पानी गरम होता है, वैसे ही उसकी उल्टी हो जाती है। रोगी में संभोग करने की शक्ति नहीं रहती है, रोगी को संभोग क्रिया करने के लिए अधिक इच्छा होती है, लेकिन उसका अपने आप ही वीर्यपात हो जाता है। दिन-रात बारम्बार पतले, लसदार रंगहीन तरल पदार्थ का मूत्र-मार्ग से स्राव होना। रोगी को संभोग करने के सपने आते हैं और अपने आप ही वीर्यपात हो जाता है। इत्यादि लक्षणों पर फास्फोरस लाभदायक है।

फास्फोरिक एसिडम: ऐसे रोगियों के रोगों को ठीक करने के लिए उपयोगी है जो पहले बहुत तन्दुरुस्त (स्वास्थ्य) रहे हों, लेकिन बाद में स्वप्नदोष, हस्तमैथुन, स्त्री प्रसंग, अनुचित बुरे कार्य करने के कारण अपने वीर्य को नष्ट करते हैं जिसके कारण उनका शरीर ठण्डा पड़ जाता है और कमजोरी अधिक हो जाती हैं। अधिक रोना-धोना और बड़बड़ाना, इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी को ठण्ड भी लगती है और अधिक निराशा होती है। रोगी को रसीले पदार्थों का सेवन करने की इच्छा होती है, खट्टी डकारें आती है, जी मिचलाने लगता है। आमाशय में दबाव महसूस होता है और भोजन करने के बाद ठीक प्रकार से नींद नहीं आती है, ठण्डा दूध पीने का मन करता है। रोगी को बार-बार पेशाब आता है तथा इसके साथ ही पेशाब में दूध जैसा सफेद पदार्थ भी आता है। जो वीर्य नहीं होता, लेकिन रोगी वीर्य समझकर परेशान होता रहता है। रोगी को रात के समय में मलत्याग करते समय वीर्यपात हो जाता है। वीर्यपात होते ही रोगी को जलन भी होती है। संभोग करने की शक्ति घट जाती है, अण्डकोष को छूने पर दर्द होता है तथा अण्डकोष सूजा रहता है, आलिंगन करने के समय में लिंग ठण्डा (शिथिल) पड़ जाता है। युवकों की अत्यधिक कामवासनाओं में लिप्तता तथा हस्तमैथुन। व्यभिचार आदि के कारण लैंगिक कमजोरी। नामर्दी के साथ अचैतन्यता/मूर्छा जैसी अवस्था। मलत्याग करने के समय में भी लिंग शिथिल पड़ा रहता है। लिंग की त्वचा पर सूजन आ जाती है तथा लिंग की सुपारी पर भी सूजन आ जाती है, लिंग पर घाव हो जाता है। मानसिक दुर्बलता। थोड़ी-बहुत उत्तेजना हो भी जाये तो सेक्स क्रिया पूर्ण न कर पाना। इस प्रकार के लक्षणों में फास्फोरिकम एसिडम का प्रयोग किया जा सकता है।

प्लैटिनम: रोगी अत्यधिक अहंकारी, अभिमानी हो जाता है। किसी की परवाह नहीं करना। सबको हर बात में अपने से छोटा समझना और अपने आप को हर बात में सब से बड़ा समझना। दूसरों के प्रति घृणा का भाव। इस प्रकार की अत्यधिक उत्तेजना, जिसके कारण हस्तमैथुन या अन्य तरीके से वीर्यपात करने को विवश होना पड़े। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण मिर्गी का दौरा पड़ जाये, असहनीय कामोत्तेजना होते रहना तथा साथ में लिंग/जननेन्द्रिय में लगातार सुरसुरी होना। अत्यधिक कामोत्तेजना के कारण शीघ्रपतन के लक्षण में प्लैटिनम लाभदायक है।

सीपिया: रोगी को अपने जननांग बिल्कुल ठण्डे से महसूस होना और उनमें बहुत ज्यादा पसीना आना, पुराना सुजाक रोग होने के कारण पेशाब के रास्ते से रात के समय दर्द के साथ स्राव का आना। लिंग के आगे के भाग पर मस्से से निकलना। बहुत दिनों तक बीमारी बने रहना अथवा बारम्बार वीर्यस्राव के कारण लिंग का दुर्बल हो जाना। कामेच्छा का घट जाना अथवा कामेच्छा के प्रति अरुचि आदि लक्षणों में सीपिया मदद कर सकती है।

सल्फर: रोगी का हर बात को तुरंत ही भूल जाना, किसी भी बात को सोचने और समझने में बहुत मुश्किल होना, मन में अजीब-अजीब से विचार आना जैसे कि वह किसी भी चीज को सुंदर वस्तु समझने लगता है, अपने आपको दुनिया का सबसे अमीर आदमी समझने लगता है, रोगी का बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाना, किसी भी व्यक्ति से सही तरीके से बात न करना, काम करने में मन न लगना, रोगी इतना आलसी हो जाता है कि उसको खुद को ही जगा पाना मुश्किल हो जाता है, खुलकर भूख लगने पर भी रोगी का हमेशा कमजोरी और दुबला-पतला सा रहना। रोगी चाहे जितना भी भोजन कर ले उसको तब भी भूख लगती रहती है, अगर रोगी भोजन नही करता तो उसके सिर में दर्द शुरू हो जाता है और कभी-कभी तो रोगी को बिल्कुल भी भूख नहीं लगती, थोड़ा सा भोजन करते ही रोगी की भूख समाप्त हो जाती है। रोगी के लिंग में सूजन आने के कारण दर्द होना। वीर्य का अपने आप ही निकल जाना। सोते समय लिंग में बहुत तेजी से खुजली का होना और लिंग का बहुत कमजोर पड़ जाना। अंडकोषों का लटक जाना। कामेच्छा के समय जबरदस्त खाँसी उठना। लिंग में भरपूर कड़ापन न आना एवं योनि में प्रवेश के पूर्व ही अथवा प्रवेश करते ही बहुत जल्दी वीर्य स्खलित हो जाना। रोगी के लिंग में बहुत ही बदबूदार पसीने आना आदि लक्षणों के आधार पर सल्फर औषधि का प्रयोग करना असरकारक रहता है।

जिंकम मेटालिकम: मुख्य क्रिया मस्तिष्क सम्बंधित लक्षणों में विशेष रूप से होती है। यह औषधि ऊतकों को सुधारने में तेजी से क्रिया करती है और ऊतकों से सम्बंधी लक्षणों को समाप्त करती है। अण्डकोष की सूजन और ऊपर की ओर खिंचाव महसूस होना। लिंग की तेज उत्तेजना। रोगी में उत्पन्न ऐसे लक्षण जिसमें रोगभ्रम रहता है और साथ ही वीर्यपात हो जाता है। बालों का झड़ना। अण्डकोषों के वीर्य की थैली में खिंचाव महसूस होना। मन से सम्बंधित ऐसे लक्षण, जिसमें रोगी की स्मरणशक्ति कमजोर होने लगती है तथा उसे थोड़े देर पहले ही कही हुए बातें याद नहीं रहती। ऐसे रोगी शोर-शराबा पसन्द नहीं करता तथा हल्के शोर-शराबा में ही गुस्सा हो जाता है। इसके अतिरिक्त काम करने की इच्छा न करना, किसी से मिलने या बातचीत करने की इच्छा न होना। दूसरे के कहे हुए बातों को दोहराते रहना। मन में बुरे विचार आना तथा काल्पनिक रूप से भयभीत रहना। मल का सूखकर कठोर हो जाना तथा कब्ज बनना। इन कारणों से शीघ्रपतन होने पर रोगी को जिंकम मेटालिकम उपयोगी सिद्ध होगी।

कैलेडियम: रोगी अत्यन्त भुलक्कड़ होता है। जो काम कर चुका हो उस पर फिर सोचने लगता है कि किया या नहीं; दरवाजा बन्द कर चुका है, किन्तु लौट कर फिर ख्याल आता है कि बन्द किया या नहीं और फिर जाकर दरवाजे की कुण्डी को हाथ लगाकर इतमिनान करता है। जिस चीज का निश्चय करना हो उसे बार-बार जाकर, देखकर, हाथ लगाकर निश्चय करता है और वापस लौटने पर फिर अनिश्चित-का-अनिश्चित बना रहता है। रोगी सारे दिन बैठा-बैठा यही सोचा करता है कि जो काम वह कर चुका है या हो जाने चाहिये थे, वे उसने किये या नहीं किये, वे हुए या नहीं हुए। मन की इस प्रकार की दुर्बलता इसमें आ जाती है। जितना ही वह किसी विषय पर मन केन्द्रित करना चाहता है, उतना ही मन उस पर केन्द्रित नहीं हो पाता। मन की इस प्रकार की दुर्बलता प्राय: व्यभिचारियों में, हस्त-मैथुन करनेवालों में पायी जाती है। रोगी का मन अत्यन्त विषयासक्त होता है। उसमें स्त्री-प्रसंग की उत्कट इच्छा होती है, परन्तु मैथुन के प्रति असमर्थता होती है। स्त्री का आलिंगन करता है, परन्तु शारीरिक उत्तेजना ही नहीं हो पाती। ऐसे लोग सड़क के किनारे खड़े हुए आती-जाती ललनाओं की ओर ताका करते हैं और उनका वीर्य रिसता रहता है। ऐसे व्यभिचारी-विचारों से ग्रस्त पुरुष रातभर उलटा-पलटा करते हैं, लेकिन संभोग करने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे रोगी को इतना मीठा पसीना आता है कि मक्खियां तक उस मिठास के लिये उसकी तरफ़ खिंची चली आती हैं। पसीना आने से रोगी को सभी तकलीफों में आराम मिलता है। इन लक्षणों में कैलेडियम सर्वोत्तम दवाई है।

कार्बोनियम सल्फ्यूरेटम: ज्यादा नशा करने के कारण रोगी की मांसपेशियों के कमजोर हो जाने पर, ठण्ड न बर्दाश्त कर पाना, त्वचा और श्लैष्मिका झिल्लियों का सुन्न पड़ जाना। ज्यादा नींद आना या नींद न आना, रोगी का चिड़चिड़ा हो जाना और याददाश्त का कमजोर हो जाना। संभोग क्रिया करने का बिल्कुल मन न करना, लिंग का सिकुड़कर छोटा हो जाना, अपने आप ही वीर्य निकल जाना। मूत्रनली से पुराने सूजाक जैसा स्राव निकलना। मूत्राशय के कष्ट, मूत्रनली में वेदना, सम्पूर्ण ध्वजभंग/नामर्दी। लिंगमुण्ड का प्रदाह, अण्डकोष में दर्द, जननेन्द्रिय में खुजली, जननेन्द्रिय की शिथिलता, सहवास के समय अतिशीघ्र स्खलित हो जाना, रात में स्वप्नदोष, कामेच्छा का अभाव आदि लक्षणों में कार्बोनियम सल्फ्यूरेटम का सेवन अत्यन्त उपयोगी है।

कोनियम मेकुलेटम: टांगों का कांपना, चलने-फिरने में परेशानी होना, कुछ दूर चलते ही शरीर का जवाब दे देना, कमजोरी, खून की कमी आदि लक्षण जो ज्यादा बुढ़ापे के लक्षण होते हैं। याददाश्त का कमजोर हो जाना और जनेन्द्रियों का कमजोर पड़ जाना। रात को नींद न आना, सुबह-सुबह बिस्तर छोड़ने का मन न करना, शरीर का टूटा-टूटा सा लगना। किसी भी चीज को रखकर कुछ ही समय में भूल जाना की कहां रखी है। पुरुष के अंदर संभोग की इच्छा तेज होने पर भी संभोग क्रिया में सफल न हो पाना, लिंग का कमजोर पड़ जाना, अण्डकोश का सख्त और बढ़ जाना। प्रचण्ड कामेच्छा रहने पर भी लिंग का उत्तेजित न होना। रात्रि में बिना स्वप्न के ही वीर्यम्राव। अत्यधिक सेक्स इच्छा होने पर भी सम्पूर्ण अथवा आंशिक, ध्वजभंग/नामर्दी। दर्द भरा वीर्यस्राव तथा भारी दर्दनाक लिंगोत्तेजना। लिंगोत्तेजना होने पर छुरी से काटने जैसा दर्द। विधुर तथा स्त्री प्रसंग के अनभ्यस्त पुरुषों की दबी हुई कामेच्छा का दुष्परिणाम, लैंगिक दुर्बलता, शीघ्रपतन के लक्षण आदि में कोनियम मेकुलेटम सर्वोत्तम दवाई है।

उक्त औषधियों के अतिरिक्त भी लक्षणानुसार होम्योपैथी में अनेकानेक ऐसी औषधियाँ हैं, जो शीघ्रपतन नामक तकलीफ का समाधान करने में उपयोगी सिद्ध होती हैं।

*नोट: मेरी ओर से भेजी जा रही उक्त पाठ्य सामग्री से यदि आपको किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो प्लीज तुरंत अवगत कराएं। आगे से आपको नहीं भेजी जायेगी। यदि यह सामग्री आपको किसी अन्य स्रोत से मिली है और यदि आप अपने वाट्सएप इनबॉक्स में नियमित रूप से प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने मोबाईल में हमारा वाट्सएप 9875066111 सेव/एड करें और हमें नियमित सामग्री प्राप्त करने हेतु वाट्सएप 9875066111 पर लिखें।*
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
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Jaipur, Rajasthan, 26 दिसम्बर, 2017, 04.44AM
शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!

लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
'शीघ्रपतन' शीर्षक से 30 नवम्बर, 2017 को लिखे लेख में निम्न विषयों की जानकारी दी जा चुकी है:-
  • 1. शीघ्रपतन से कितने पुरुष परेशान रहते हैं?
  • 2. शीघ्रपतन किसे कहते हैं?
  • 3. वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
  • 4. स्त्री की योन तृप्ति क्या है?
  • 5. सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?
  • 6. शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध?
  • 7. शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण!
  • 8. शीघ्रपतन के कारण।
शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खों के बारे में बताने से पूर्व पाठकों के लिये उक्त लेख को पढना उचित रहेगा। अत: जिन पाठकों ने उक्त लेख नहीं पढा, वे हमारी वेबसाइट 'स्वास्थ्य रक्षक सखा' (www.healthcarefriend.in) पर जाकर या यहां क्लिक करके या निम्न लिंक पर जाकर इसे पढ सकते हैं। (http://www.healthcarefriend.in/2017/11/blog-post_30.html)




शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खे पढने से पहले यह जानना उचित होगा कि पूर्वोक्त 'शीघ्रपतन' शीर्षक से लिखित लेख में बताये गये शीघ्रपतन के 20 कारणों के अलावा पेट की गड़बड़ी भी 'शीघ्रपतन' एक बड़ा शारीरिक कारण होता है। अत: किसी योग्य चिकित्सक से 'शीघ्रपतन' का उपचार/परामर्श लेते समय अपने पेट की तकलीफों को कभी नहीं छुपायें। निम्न नुस्खों का इस्तेमाल करने से पहले अपने पेट की तकलीफों का उपचार अवश्य करवा लें। अन्यथा बताये गये परिणाम नहीं मिलेंगे।

शीघ्रपतन नाशक घरेलु ​नुस्खों की जानकारी प्रदान करने से पहले यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि इन नुस्खों में बतायी गयी औषधियों की सामग्री का उपयोग करने से पहले किसी अनुभवी चिकित्सक का परामर्श लेना जरूरी होगा। क्योंकि दवाई की मात्रा का सही-सही निर्धारण हर एक पुरुष की आयु, यौन क्षमता/समस्या, शारीरिक एवं मानसिक लक्षणों आदि के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकता है। इसके अलावा बताये गये नुस्खों में जिन आयुर्वेदिक औषधियों का उल्लेख किया गया है, यदि वे सभी शुद्ध, आॅर्गेनिक, ताजा, छाया शुष्क होंगी और जरूरत के अनुसार मात्रा में निधारित समय तक सेवन की जायेंगी तो ही वांछित परिणाम मिलेंगे।

शीघ्रपतन नाशक सात घरेलु ​नुस्खे!

1. गिलोय+बड़ा गोखरू+आंवला पाउडर: गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला बराबर मात्रा में लेकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसका एक चम्मच चूर्ण प्रतिदिन मिश्री और घी के साथ सेवन करने से संभोग शक्ति तथा स्तम्भन शक्ति मजबूत होती है। इन तीनों औषधियों के अलावा कुछ अन्य औषधियों के मिश्रण सहित यौन शक्तिवर्धक एवं शीघ्रपतन नाशक यह पाउडर जरूरत के अनुसार हमारी ओर से रोगियों को दिया जाता है।
2. अलसी और वंशलोचन (अधिकतर पंसारी नकली वंशलोचन बेचते हैं, क्योंकि शुद्ध वंशलोचन बहुत मंहगा आता है) समान मात्रा में लेकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसे गिलोय के रस तथा शहद के साथ हफ्ते-दस दिन से एक माह तक सेवन करें। इससे वीर्य गाढ़ा होकर यौन शक्ति एवं स्तम्भन शक्ति बढती है।
3. शोधित कौंच (निर्धारित रीति से कौंच को दूध में शोधित करके ही उपयोग किया जाना चाहिये) के बीज, शतावरी, बड़ा गोखरू, तालमखाना, अतिबला और नागबला को एक साथ मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तम्भन शक्ति बढती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतलापन, यौन-दुर्बलता और युवकों में विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत ही लाभकारी रहता है। ज्यादातर लोग कौंच का इस्तेमाल लंबे समय तक सेक्स की पॉवर बरकरार रखने के लिए किया जाता है। स्थायी यौन क्षमता बढाने के लिये कौंच के शोधित कौंच बीज पाउडर (कोई साईड इफैक्ट नहीं) विदेशी वियाग्रा (अनेक साईड इफैट) से भी 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है, चाहे लिंग की कमजोरी/शिथिलता/ढीलापन, वीर्य पतला, नपुंसकता या शीघ्रपतन कुछ भी समस्या हो सभी का स्थायी इलाज है-शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच बीज का शोधित पाउडर। जयपुर स्थित हमारे निरोगधाम पर आॅर्गेनिक रीति से सफेद और काले कौंच की छोटे स्तर पर खेती की जा रही है। जिनका उपयोग रोगियों को दी जाने वाली दवाईयों में किया जा रहा है। व्यापार के लिये कौंच उपलब्ध नहीं है।
4. निर्धारित रीति से शुद्ध आॅर्गेनिक कौंच के बीज के शोधित पाउडर के साथ शुद्ध सफेदमूसली और नागौरी अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इस पाउडर की 1 चम्मच मात्रा सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से पुरुषों की सभी प्रकार की यौन-समस्याओं को दूर किया जा सकता है। हर प्रकार की शारीरिक कमजोरी दूर करने की ताकत इन कौंच के बीजों में होती है। आकार के अनुसार कौंच के बीज दो प्रकार के होते हैं-छोटे और बड़े। छोटे कौंच स्त्रियों की बीमारियों में अधिक उपयोगी होते हैं। जो योनि दोष, ब्रण, कुष्ठ दूर करते है और रक्तविकार नाशक हैं।
5. देशी बबूल की छाया शुष्क कच्ची पत्तियां, छाया शुष्क कच्ची फलियां और शुद्ध गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर कूट, पीस और कपड़छन करके पाउडर बना लें। इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर हवाबंद बोतल में रख लें। इस पाउडर को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है। शीघ्रपतन से मुक्ति मिलती है और स्तम्भन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह स्वप्नदोष में भी बहुत लाभकारी है।
6. यदि शुद्ध आॅर्गेनिक मेथी के कुछ दाने रोज सेवन किये जाएं तो पुरुषों की मानसिक यौन सक्रियता बढ़ती है। इसके सेवन से पुरुषों में होने वाली लिंग उत्थान की समस्या हल हो सकती है। मेथी टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में बढोतरी करके अन्य यौन समस्याओं को भी ठीक करने में मदद करती है। रात को सोते समय आधा चम्मच पिसा हुआ शुद्ध मेथी दाना पाउडर तथा आधा चम्मच धनिया पाउडर मिलाकर गर्म दूध के साथ नियमित रूप से एक महीने तक सेवन करने से पुरुषों की यौन शक्ति में बढ़ोतरी होती है। ब्रिसबेन स्थित आणविक चिकित्सा केंद्र के अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि भारत में सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली मेथी पुरुषों की कामेच्छाओं को काफी अच्छे स्तर तक बढ़ाने में सक्षम है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार मेथी के बीज में पाया जाने वाला सैपोनीन पुरुषों में पाए जाने वाले टेस्टोस्टेरॉन हॉरमोन में उत्तेजना पैदा करता है।
7. जायफल का पाउडर एक चौथाई चम्मच, सुबह-शाम शहद के साथ खायें और इसका तेल सरसों के तेल में मिलाकर शिश्न (लिंग) पर मलें। इससे नपुंसकता और शीघ्रपतन का रोग समाप्त हो जाता है।

नोट: याद रहे वर्तमान में फसल में बढोतरी के मकसद से अधिकतर किसान खाद, खरपतवार नाशक दवाई, कीटनाशक जहर इत्यादि का जमकर उपयोग करते हैं। जिसके चलते फसलों में रोगनाशक प्राकृतिक औषधीय तत्व गड़बड़ा जाते हैं या कम या नष्ट हो जाते हैं। जिसका एक मात्र समाधान है-आॅर्गेनिक खेती जो तुलनात्मक रूप से बहुत मंहगी पड़ती है और उत्पादन कम होता है। लेकिन मानवता को रोगमुक्त करना है तो आॅर्गेनिक खेती समय की मांग है। इस दिशा में हमारी ओर से बहुत छोटे स्तर पर प्रयास जारी हैं। ऐसी स्थिति में होम्योपैथिक दवाईयों का सेवन करना अधिक सुरक्षित और परिणामदायी सिद्ध होता है। इस बारे में अगले लेख में जानकारी दी जायेगी।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश', HCF&MDC
(Health Care Friend and Marital Dispute Consultant)
स्वाथ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार
Health WhatsApp हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
Mobile No. मोबाईन नम्बर: 9875066111 (10AM to 10PM)
Jaipur, Rajasthan, 07 दिसम्बर, 2017, 08.14AM
शीघ्रपतन, Sheeghrapatan, Early Discharge, Early Ejaculation, Premature Ejaculation


लेखक: डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

परामर्श हेतु हेल्थ वाट्सएप: 8561955619
30 नवम्बर, 2017

शीघ्रपतन हर एक पुरुष के यौन जीवन (Sexual life) से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील अत्यंत संवेदनशील (Extremely Sensitive) और महत्वपूर्ण (Important) विषय है। अत: इस बारे में वास्तविकता (Reality) को जानने और समझने के लिये बहुत जरूरी, बल्कि अनिवार्य है कि शीघ्रपतन से पीड़ित पुरुषों आगे पढने से पहले अपनी यौन धारणाओं, आशंकाओं और ग़लतफ़हमियों (Sexual Concepts, Doubts and Mis-conceptions) पर आधारित जानकारी को दिमांग से बाहर निकालना बहुत जरूरी है।


स्त्री-पुरुष के यौन सम्बन्धों के दौरान, स्त्री की यौनतृप्ति/संतुष्टि से पहले ही पुरुष का वीर्यपात/वीर्य स्खलित (Ejaculation-the action of ejecting semen from the body) हो जाने को ही आम बोलचाल में शीघ्रपतन कहा जाता है। शीघ्रपतन के लिये अंग्रेजी में तीन टर्म यूज की जाती हैं। (ED=Early Discharge/अर्ली डिस्चार्ज or EE=Early Ejaculation/अर्ली इजाकुलेशन or PE=Premature Ejaculation/प्रीमैच्योर इजाकुलेशन)।


एक अध्ययन के मुताबिक वर्तमान में हर एक पुरुष को अपने जीवन काल में कभी न कभी शीघ्रपतन की समस्या का सामना करना ही पड़ता है। 30 से 40 फीसदी पुरुषों को जीवनभर शीघ्रपतन की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए अगर कोई पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं तो ऐसे पुरुष को अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं होनी चाहिये। क्योंकि कोई भी अकेला पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से नहीं जूझता है, बल्कि संसार के एक-तिहाई से अधिक पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं। यद्यपि यहां पर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि अधिकतर पुरुषों के लिये शीघ्रपतन उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितनी कि पुरुषों द्वारा शीघ्रपतन की समस्या के बारे में सेक्सपर्ट या डॉक्टर से खुलकर बात नहीं करने का संकोच है। दूसरी ओर गारण्टी देकर लूट-खंसोट करने वाले सेक्सपर्ट या डॉक्टरों के चक्कर में फंसना भी पुरुषों के जीवन में शीघ्रपतन की समस्या के बने रहने का सबसे बड़ा कारण है।


शीघ्रपतन किसे कहते हैं?


  • 1. जब एक पुरुष अपनी यौन सहयोगिनी यौन सहयोगिनी (Sexual Partner) की योनि में लिंग को प्रवेश करवाकर लिंग का योनि में घर्षण करता है, तो घर्षण शुरू करने के बाद अत्यल्प समय में ही वीर्य स्खलित (Semen Discharged) हो जाने को सामान्यत: शीघ्रपतन कहा जाता है। 
  • 2. पुरुष या स्त्री को योन संतुष्टि मिलने से पहले ही वीर्य स्खलित हो जाना भी शीघ्रपतन कहा जा सकता है।
  • 3. योनि में लिंग को प्रवेश करवाने से पहले ही फोरप्ले अर्थात रोमांस के दौरान ही पुरुष के लिंग से स्वत: वीर्यपात हो जाने अर्थात वीर्य निकल जाने को को शीघ्रपतन कह सकते हैं।
  • 4. कामुक विचार, बातचीत, कामुक दृश्य, कामुक मूवी/फिल्म या किसी प्रिय, इच्छित या आकर्षक महिला को देखने या उसकी कल्पना करने से ही लिंग से स्वत: वीर्य निकल जाने को भी शीघ्रपतन कह सकते हैं।
  • 5. इसके अलावा भी कुछ अन्य कारण हो सकते हैं। जिनकी वजह से सेक्स शुरू करने, योनि में लिंग प्रविष्ठ करवाने, स्त्री की यौन संतुष्टि से पहले ही वीर्य स्खलित हो जाता है। इस स्थिति को भी शीघ्रपतन कहा जा सकता है।


वीर्य स्खलन की समय सीमा क्या होनी चाहिये?
योनि में लिंग प्रवेश कराने के बाद कितने समय में लिंग से वीर्य स्खलित होना आदर्श स्थिति मानी जानी चाहिये? इस विषय में विश्वभर के सैकड़ों वैज्ञानिक द्वारा अनेकानेक शोध और अध्ययन करने के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि वीर्य स्खलन की कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित करना असम्भव है। क्योंकि शोध और अध्ययन के दौरान निम्न तथ्य सामने आये:-

  • 1. भारत जैसी जलवायु में सामान्यत: 1 से 3 मिनट में पुरुष डिस्चार्ज हो जाते हैं।
  • 2. अपवादस्वरूप 3 मिनिट से अधिक समय तक डिस्चार्ज नहीं होने वाले पुरुषों की सेक्स सहयोगी स्त्री को भी अनेकों बार पूर्ण यौन सन्तुष्टि नहीं मिलती है।
  • 3. कुछ स्त्रियों को 1 मिनट से भी कम समय में पूर्ण यौनतृप्ति मिल जाती है।

स्त्री की यौन तृप्ति क्या है?
यह एक ऐसा सवाल है, जिसके बारे में स्त्रियों में भी मतैक्य का अभाव (Lack of Consensus) है। विश्वप्रसिद्ध महिला सेक्स-विशेषज्ञ मैरी स्टॉप्स का कहना है कि अधिकतर स्त्रियां यौन सन्तुष्टि के बारे में अपनी राय व्यक्त करते समय भ्रमित होती/रहती हैं। उनका कहना है कि यदि दस महिलाओं से यौनतृप्ति के अनुभव को शब्दों में व्यक्त करने को कहा जाये या पूछा जाये तो तकरीबन सभी के अनुभव भिन्न-भिन्न होंगे। इसका कारण स्पष्ट करते हुए मेरी स्टॉप्स कहती हैं कि प्रत्येक स्त्री का सेक्स ज्ञान, सेक्स अनुभव, सेक्स रुचि, सेक्स परफॉर्मेंश आदि का अनुभव अलग-अलग होता है। क्योंकि स्त्री को पुरुष की भांति सेक्स के दौरान वीर्य या ऊर्जा स्खलन जैसा शारीरिक अनुभव नहीं होता। बल्कि स्त्री के लिये सेक्स का आनंद मानसिक पहले और शारीरिक बाद में है। कुछ अन्य स्त्री सेक्स एक्सपर्ट का कहना है कि सेक्स के दौरान स्त्री को केवल योनि में लिंग के घर्षण करने से ही यौनतृप्ति नहीं मिलती है, बल्कि स्त्री के अंग-अंग में यौनानंद की प्राप्ति होती है, बशर्ते उसका पुरुष साथी यौन कला में प्रवीण हो?

सम्भोग को समान भोग बताना कितना सही?

एक आदर्श सम्भोग में, स्त्री-पुरुष दोनों एक साथ समान रूप से, यौनानंद प्राप्त करते हैं। इसी कारण इस शारीरिक क्रिया को सम्भोग कहा जाता है।
In an ideal sexual intercourse, both men and women receive equally, Sexual pleasure. For this reason, this physical activity is called SAMBHOG.

स्त्री की यौन संतुष्टि को पश्चिमी सेक्स एक्सपर्ट अंग्रेजी में आर्गेज्म/Orgasm कहते हैं। जबकि मैं इसके लिये हिन्दी में यौनतृप्ति या सेक्सुअ फुलफिलमेंट/Sexual Fulfillment लिखना या बोलना अधिक उपयुक्त समझता हूं। साथ ही सम्भोग को समान भोग बताने वाली उक्त धारणा मेरी राय में केवल कागजों तक सीमित है। वर्ष 1998 से लगातार दाम्पत्य विवाद सलाहकार के रूप में सेवाएं देने के दौरान अधिकतर स्त्रियों ने मुझे यह बताया कि वे यौन-सम्बन्धों के दौरान पुरुष से योनि में केवल लैंगिक घर्षण ही नहीं चाहती हैं, बल्कि सेक्स प्रारम्भ करने से पूर्व, सेक्स के दौरान और सेक्स के बाद (Before Sex, During Sex and After Sex) भी पुरुष की सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक सक्रियता चाहती हैं। जबकि पुरुष की मानसिकता इससे ठीक विपरीत या भिन्न होती है।

मैं मेरे अनेक लेखों में अनेक बार इस स्थिति को अग्रलिखित शब्दों में व्यक्त करता/लिखता आया हूं।

'स्त्री पुरुष के समक्ष समर्पण करती है, पुरुष का प्यार पाने के लिये। जबकि पुरुष स्त्री को प्यार करता है, स्त्री का शरीर पाने के लिये।'

व्यवहार में बहुत कम ऐसा होता है, जबकि पुरुष के वीर्य स्खलन के साथ ही स्त्री को यौन तृप्ति मिले।

शीघ्रपतन का गर्भधारण से सम्बन्ध

शीघ्रपतन के कारण परेशान अनेक पुरुषों के मनोमस्तिष्क में यह गलत धारणा अन्दर तक बैठ जाती है कि शीघ्रपतन के कारण वे पिता नहीं बन सकेंगे। विशेषकर युवाओं में यह आशंका घर कर जाती है, जबकि गर्भ धारण का शीघ्रपतन से कोई सम्बन्ध नहीं है। गर्भधारण के लिये सेक्स के दौरान वीर्य का अन्दर योनि में स्खलन होना ही पर्याप्त होता है। अत: शीघ्रपतन के कारण पिता नहीं बन सकने का भय 100% निराधार है।

शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण

इसमें कोई संदेह नहीं कि पुरुष जब स्त्री को सम्पूर्ण रूप से भावनात्मक तृप्ति देने में असमर्थ है तो स्त्री को यौन-क्रिया के दौरान पुरुष से शारीरिक सक्षमता की उम्मीद तो रहती ही है। ऐसे हालात में स्त्री अपने पुरुष साथी से पर्याप्त समय तक लैंगिक यौन घर्षण की उम्मीद करती है। उसे उम्मीद बनी रहती है, यदा-कदा उसे यौनतृप्ति भी मिल सकेगी। अनेक स्त्रियां अपने अनुभवों में बतलाती हैं कि बेशक उनका डिस्चार्ज नहीं होता, लेकिन जब पुरुष उन्हें सम्पूर्णता से चाहता है। प्यार करता है और मानसिक तथा शारीरिक योगदान करता है तो लम्बे लैंगिक यौन घर्षण के बाद, योनि में ऐसी अनुभूति होती है, जैसे योनि के हर एक ऊतक शिथिल हो जाना (Tissue laxation) या एक फुहार सी निकलती हुई अनुभव होती है या ऐसा लगता है, जैसे कोई जलता हुआ गर्म अंगारा एकदम से ठंडा हो गया/बुझ गया हो। वहीं कुछ का मानना है कि यौनतृपित के समय ऐसा लगता है, जैसे सागर की गहराई में गोते लगा रहे हों। योनि में ऐसा महसूस होता है, जैसे योनि बार-बार संकुचित हो रही है और वापस खुल रही है। उन पलों का आलौकिक आनंद अवर्णनीय होता है। उन पलों के दौरान भी यदि पुरुष स्खलित नहीं होता है और लैंगिक घर्षण जारी रखता है तो यौनानंद की कोई सीमा नहीं होती है।

इन दिनों तेजी से बदलते सामाजिक हालातों में जबकि स्त्री-पुरुष के मध्य विवाह पूर्व यौन सम्बन्ध (Pre-marital Sex) और विवाहेत्तर यौन सम्बन्ध (Extramarital Sex) सामान्य बात हो चुकी है। ऐसे में यदि किसी स्त्री को जब कभी उक्त या ऐसी ही सम्पूर्ण यौन अनुभूति या यौनतृप्ति अपने पति या प्रेमी से प्राप्त हो जाती है, तो उसे हर बार सेक्स में इसी प्रकार की अनुभूति की उम्मीद बनी रहती है। जिसकी प्राप्ति नहीं होने पर वह अपने प्रेमी या पति से नाखुश रहने लगती है और पति को नाकारा, नामर्द और सेक्स क्रिया में असफल मानकर चिड़चिड़ी भी हो जाती है। इन हालातों में शीघ्रपतन दाम्पत्य बिखराव का कारण भी बन सकता है।


शीघ्रपतन के कारण:
उपरोक्त पृष्ठभूमि (Background) के होते हुए भी बहुत से पुरुषों को वास्तव में शीघ्रपतन की समस्या होती है। जिसके निम्न प्रमुख कारण हैं:-
  • 1. स्त्री-पुरुष की प्रकृतिदत्त भिन्न मनोस्थिति। पुरुष शीघ्रता से सब कुछ पा लेना चाहता है, जबकि स्त्री आराम से सम्पूर्ण यौन तृप्ति की प्रतीक्षा करती है।
  • 2. वास्तविक एवं व्यावहारिक यौन शिक्षा का अभाव (Lack of real and practical sex education)।
  • 3. अपरिहार्य कारणों से (Due to Unavoidable Reasons) लम्बे समय बाद सेक्स करना।
  • 4. शीघ्रपतन हो जाने की आशंका का भय (Fear of Phobia of Premature Ejaculation)।
  • 5. अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाने की आशंका (Fear of not satisfying your wife)।
  • 6. तनाव, मानसिक दबाव या क्लेशमय स्थिति के दौरान सेक्स (Sex during stress, mental pressure or distress situations)।
  • 7. डिप्रेशन के दौरान सेक्स करना (Having Sex During Depression)।
  • 8. सेक्स के दौरान किसी के देखे/पकड़े जाने का भय (Fear of being seen/caught during sex)।
  • 9. मन में इस बात का भय कि लम्बे समय तक स्खलन को रोकना मुश्किल होगा (There is a fear in the mind that it will be difficult to stop ejaculation for a long time)।
  • 10. सेक्स के प्रति नकारात्मक या अपराधबोधात्मक विचार (Negative or guilt-related thoughts about sex)।
  • 11. नासमझ या नापसंद या बेमेल यौन साथी (Goofy or dislike or mismatched sexual partner)।
  • 12. स्त्री को दुर्गंध फैलाने वाली ल्यूकोरिया (Leukorrhoea) की बीमारी।
  • 13. सेक्स के दौरान स्त्री का सपोर्ट नहीं मिलना।
  • 14. हार्मोंस की गड़बड़।
  • 15. पुरुष का प्रोस्टेट, थॉइरॉइड या डाईबिटीज से पीड़ित होना।
  • 16. पुरुष को अपने लिंग के आकार को लेकर भ्रांति होना।
  • 17. पुरुष को फैंफड़ों सम्बंधी कोई बीमारी होने के कारण, अधिक समय तक लैंगिक यौन घर्षण करने से सांस फूल जाने का भय बने रहना।
  • 18. पुरुष मस्तिष्क के रसायनों के असामान्य (Abnormal level of brain chemicals) स्तर होना।
  • 19. सेक्स कलाओं की अज्ञानता (Ignorance of Sex Arts)।
  • 20. लिंग और योनि के आकार में अत्यधिक असमानता (Extreme inequality in the size of genders/penis and vagina)।
इत्यादि।-30 नवम्बर, 2017
नोट: उक्त लेख को दिनांक: 27.10.2018 को आंशिक रूप से सम्पादित किया गया है।

नोट: शीघ्रपतन का उपचार अगले अंक में प्रस्तुत किया जायेगा।

>>> *Online Doctor*

>>>>>>>>>> Only Online Health Care Friend and Marital Dispute Consultant (स्वास्थ्य रक्षक सखा एवं दाम्पत्य विवाद सलाहकार) Dr. P. L. Meena (डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा) Mobile & WhatsApp No.: 8561955619, *Fix Time to Call: Between 10 AM to 10 PM Only.+‎2nd Mobile: 9875066111*

शीघ्रपतन के कारण मामला तलाक तक जा पहुंचा, लेकिन.....?

मेरा जन्म एक छोटे गांव के गरीब, परम्परावादी परिवार में हुआ। जैसे-तैसे पढाई पूर्ण करने के बाद मुझे बैंक में जॉब मिली। 23 वर्ष की आयु में विवाह होने तक नेचुरल इच्छा और भावनाओं को कुचलते हुए मैंने अपने कौमार्य को सुरक्षित रखा। मैं अपने होने बाले पति के प्रति वफादार रहने के लिये 100 परसेंट कमिटेड थी।

प्रथम श्रेणी सरकारी अफसर के साथ बड़ी धूमधाम से मेरी शादी हुई। सुहागरात को ही सारे अरमान चकनाचूर हो गये। मेरे पति कुछ नहीं कर सके। जैसे ही उन्होंने सेक्स शुरू किया, उनका वीर्य बाहर ही निकल गया। दूसरी बार कोशिश की (लेकिन मुझे बाद में बताया कि) उत्तेजित ही नहीं हो सके। मैंने धैर्य बनाये रखा। 5 दिन पति के साथ रही, लेकिन वे मेरी योनि में अपने लिंग को प्रवेश नहीं करा पाये। लौटने से पहले मुझ से उन्होंने माफी मांगी और रिक्वेस्ट की, कि कुछ टाईम दीजिये, इलाज करवा लूंगा। मैं सहमत हो गयी।

मैंने अपने पीहर में किसी को कुछ नहीं बताया। अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग के कारण अगले 3 महिने तक हम मिल नहीं सके। इस बीच उन्होंने अपना इलाज करवाया था। 3 महिने बाद उन्होंने कोशिश की और लिंग प्रवेश करवा दिया, लेकिन कुछ ही क्षणों में डिस्चार्ज हो गये। यह सिलसिला महिनों चला। फिर ऐसी दवाई ली कि 20-30 मिनट में डिस्चार्ज होने लगे। जिससे मेरी योनि छिल जाती। भयंकर दर्द होता। मेरे लिये सेक्स एक दु:खद और पीड़ादायक अनुभव बन गया। भयंकर टेंशन रहने लगा। मुझे सेक्स से नफरत सी हो गयी। इधर उन्होंने शराब पीना शुरू कर दिया। टेंशन के चलते मुझे माईग्रेन हो गया। रोज पैन-किलर ब्रूफेन टेबलेट लेना शुरू कर दिया। अन्त में उन्होंने साफ कह दिया कि अब कुछ नहीं हो सकता, तुम चाहो तो तलाक लेकर दुबारा मैरिज कर सकती हो। मेरे लिये यह भयंकर अपमानकारी और घुटनभरी स्थिति बन गयी। रोती रहती। 1 साल बिलकुल अलग रहे। हालांकि मोबाईल पर बातचीत होती रहती।

जब इनकी शराब अधिक हो गयी तो मैंने 6 महिने की छुट्टी ली और अन्तिम प्रयास करने का तय किया। कुछ ही दिनों में शराब कंट्रोल हो गयी। हम डॉक्टर से मिले और सेक्सुअल प्रोब्लम बतायी। ऐलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, एक्यूपेशर सारी दवाईयां करवा ली, लेकिन इनकी शीघ्रपतन की समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। थक हारकर मैंने भी तलाक का मन बना लिया। 

इसी दौरान मेरी सहेली ने बताया कि उनके पति को शीघ्रपतन और कम उत्तेजना की दिक्कत थी तो डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' जी के आॅन लाईन ट्रीटमेंट से बिलकुल सही हो गये। मैंने खुद डॉ. 'निरंकुश' जी से बात की, उन्होंने कहा कि आपके पति से बात करने को कहो। ये इतने निराश हो गये कि बात ही नहीं करना चाहते थे। जैसे-तैसे तैयार हुए। सारी जानकारी डॉ. साहब को दी। इलाज शुरू हुआ। तीन महिने तक कोई फर्क नहीं पड़ा। 

एक दिन डॉ. सा​हब का काल आया और मुझ से पूछा, "आप यह बतायें कि आपके पति को सबसे अधिक क्या खाना पसंद है?" मैंने कहा "मिठाई! दिनभर मीठा खाते रहते हैं।" बस इतना कहते ही डॉ. साहब बोले "चिन्ता मत करो अब सब ठीक हो जायेगा।" चौथे महिने जो दवाई भेजी, तो चमत्कार हो गया। डॉ. 'निरंकुश' जी बोले "मैं शुरू से खानपान के बारे में पूछ रहा था, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब ही नहीं मिल रहा था।" कुल 6 महिने दवाई लेने के बाद अब मेरे पति पूर्ण पुरुष हैं। हमारी जिन्दगी में बहार आ गयी। शीघ्रपतन के कारण मामला तलाक लेने तक जा पहुंचा, लेकिन डॉ. 'निरंकुश' जी ने बचा लिया।
लता शर्मा (बदला हुआ नाम) जोधपुर, राजस्थान।


डॉक्टर टिप्पणी: होम्योपैथी में लक्षणों के आधार पर इलाज होता है। इस बात को प्रमाणित करने वाला यह मजबूत केस है। लता के पति से मैंने अनेक बार पूछा कि उसे मीठे और नमकीन में अधिक क्या खाना पसंद है? उनका जवाब होता कुछ भी नहीं। जब लता ने उनकी अत्यधिक मीठा खाने की आदत बतायी तो श्रीमान जी ने सफाई दी कि उनको मीठा खाने की बच्चों जैसी आदत थी, जिसे बताने में ही शर्म आती थी। यदि लता ने मुझे मीठा खाने की आदत के बारे में नहीं बताया होता, तो शायद वह कभी भी स्वस्थ नहीं हो पाता। होम्योपैथी में खाने-पीने की आदत, मानसिक लक्षणों आदि का बहुत ज्यादा महत्व होता है। अत: डॉक्टर के पूछने पर सब कुछ बेहिचक सच-सच बताना चाहिये।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' आॅन लाईन स्वास्थ्य रक्षक सखा
M&WA No. 85-619-55-619 Site: www.healthcarefriend.in


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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
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--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!

--->--->श्रीमती जानकी पुरुषोत्तम मीणा जिनका 08 अप्रेल, 2012 को असमय निधन हो गया!
सभी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन की कामना के साथ-मेरे प्यारे और दुलारे तीन बच्चों की ममतामयी अद्वितीय माँ (मम्मी) जो दुखियों, जरूतमंदों और मूक जानवरों तक पर निश्छल प्यार लुटाने वाली एवं अति सामान्य जीवन जीने की आदी महिला थी! वह पाक कला में निपुण, उदार हृदया मितव्ययी गृहणी थी! मेरी ऐसी स्वर्गीय पत्नी "जानकी मीणा" की कभी न भुलाई जा सकने वाली असंख्य हृदयस्पर्शी यादों को चिरस्थायी बनाये रखते हुए इस ब्लॉग को आज दि. 08.08.12 को फिर से पाठकों के समक्ष समर्पित कर रहा हूँ!-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

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(Tribulus Terrestris) 14 फरवरी Abutilon Indicum Aerva Lanat Allergy Aloevera Juice Alternanthera Sessilis Alum Aluminum Amaranthus spinosus Ammonium chloride Appetite Argemone Mexicana Ash-coloured Fleabane Bael Ban Tulasi Bauhinia purpurea Bernini’s Cinema Bitter Gourd Black night shade Blumea Lacera Bone Infection Borax BPH Calories Calories Chart Cancer Care Carrots Castor beans Chanca Piedra Cheese Chemotherapy Chenopodium Album Chikungunya Cholesterol Cleome viscosa Clerodendrum Phlomidis Clitoria Ternatea Colocynth Colpoptosis Constipation Convolvulus Pluricaulis Corn Creak Crotalaria Bburhia Croton Bonplandianum Croton Sparsiflorus Cumin Date Palm Dengue Depression Diabetes digestion Disorders Divorce Dog Mustard Dronapushpi Dysentery Early Ejaculation Emblic Myrobalan Extramarital Relation Extremely Intolerance Fatty liver Femininity FENUGREEK Fenugreek Seeds Ferrum Phosphoricum Fever Fissure Fistula Folic Acid Gallbladder Gardenia Gummifera Garlic Ginger Gooseberry Gourd Groundnut-peanut Guava Hainampfer Hair Falling Headaches Health Health Care Friend Health Consultation Health Links Health Tips Heliotropium Eeuropaeum Hemorrhoids Hepatitis Hibiscus Homeopathic Homeopathy Homoeopath Honey How to get pregnant? Immunity Impotence IMPOTENCY Incurable indigestion Jaundice Juice Juice of Berries LAND CALTROPS Lemon Leucas Aspera Leucas Cephalotes Leucorrhea Lever Liver Liver Cirrhosis Liver fibrosis Low Blood Pressure Marital Dispute Consultant Masturbation Mental Mexican Daisy Mexican Poppy Migraine Migraines Myopia Neurons Night Jasmine Nutgrass Nutmeg Nutsedge Obesity Omega 3 Oroxylum indicum Painkillers Periquito Sessil Phyllanthus Niruri Piles Portulaca Oleracea Post Effect Pregnancy Safe-Guard Pregnancy Safeguard Pregnancy-Safe-Guard Premature Ejaculation Prostate Gland Protein Purple Nutsedge Raan Tulas Radish Rectal Collapse Rectal Prolapse rectum collapse Saffron Senna occidentalis Separation Sex Sexual Power Sickness Side Effects side effects less Side-Effects Spermatorrhoea Sperms Spiny Amaranth Stone Stone Breaker Sword fruit tree TECOMA STANS Thermometer Tickweed Tips Treatment of Incurable Tribulus Terrestris Tridax Procumbens Umbrella Sedge Unquenchable Conjugal Uterine Prolapse vaginal Creaks Vaginal Prolapse Viral Vitamins Vitex Negundo Wart Wheatgrass White Discharge Yellow Spider Flower अंकुरित अनाज अंकुरित गेहूं-Wheat germ अंकुरित भोजन-Sprouts अखरोट अंगूर-Grapes अचूक चमत्कारिक चूर्ण अजवाइन अजवायन अजीर्ण-Indigestion अंडकोष अडूसा (वासा)-Adhatoda Vasika-Malabar nut अण्डी अतिबला अतिसार अतिसार-Diarrhea अतृप्त अतृप्त दाम्पत्य अत्यंत असहिष्णुता अदरक अदरख अंधश्रृद्धा अध्ययन अनिद्रा अपच अपराजिता अपराधबोध अफरा अफीम अमरूद अमृता अम्लपित्त-Pyrosis अरंडी अरणी अरण्ड अरण्डी अरलू अरुचि अरुचि-Anorexia-Distaste अर्जुन अर्थराइटिस अर्द्धसिरशूल अर्श अर्श रोग-बवासीर-Hemorrhoids-Piles अलसी अल्टरनेथेरा सेसिलिस अल्सर अल्सर-Ulcers अवसाद अवसाद-Depression अश्मःभेदः अश्वगंधा अश्वगंधा-Winter Cherry असंतुष्ट असफल असर नहीं असली अस्थमा अस्थमा-दमा-Asthma आइरन आक आकड़ा आघात आत्महत्या आंत्र कृमि आंत्रकृमि-Helminth आंत्रिक ज्वर-टायफाइड-Typhoid fever आदिवासी आधाशीशी आधासीसी आंधीझाड़ा-ओंगा-अपामार्ग-Prickly Chalf flower आमला आमवात आमाशय आयुर्वेद आयुर्वेदिक आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदिक औषधियां आयुर्वेदिक सीरप-Ayurvedic Syrup आयुर्वेदिक-Ayurvedic आरोग्य आँव आंव आंवला आंवला जूस आंवला रस आशावादी-Optimistic आसन आसान प्रसव-Easy Delivery आहार चार्ट आहार-Food आॅपरेशन आॅर्गेनिक आॅर्गेनिक कौंच इच्छा-शक्ति इन्द्रायण इन्फ्लुएंजा इमर्जेंसी में होम्योपैथी इमली-Tamarind Tree इम्युनिटी इलाज इलाज का कुल कितना खर्चा इलायची उच्च रक्तचाप उच्च रक्तचाप-High Blood Pressure-Hypertension उत्तेजक उत्तेजना उदर शूल-Abdominal Haul उदासी उन्माद-Mania उपवास उम्र उल्टी ऊर्जा एक्जिमा एक्यूप्रेशर एग्जिमा एजिंग-Aging एंटी ऑक्सीडेंट्स एंटी-ओक्सिडेंट एंटीऑक्सीडेंट एण्टी-आॅक्सीडेंट एनजाइना एनीमिया एमिनो एसिड एरंड एलर्जी एलर्जी-Allergy एलोवेरा एलोवेरा जूस एल्यूमीनियम ऐंठन ऐलोपैथ ऐसीडिटी ऑर्गेनिक ओमेगा 3 के स्रोत ओमेगा-3 ओर्गेनिक औषध-Drug औषधि सूची-Drug List औषधियों के नुकसान-Loss of drugs कचनार कचनार-Bauhinia Purpurea कटुपर्णी कड़वाहट कंडोम कद्दू कनेर कपास-COTTON कपिकच्छू कपूरीजड़ी कफ कब्ज कब्ज़ कब्ज-कोष्ठबद्धता-Constipation कब्ज. 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दाम्पत्य-Conjugal दाल दालचीनी दालें दिमांग दिल दीर्घायु दु:खी दुर्गंध दुर्बलता दुष्प्रभाव दुष्प्रभावरहित दूध दूध वृद्धि दूधी दूधी-Milk Hedge दृष्टिदोष दो मन द्रोणपुष्पी द्रोणपुष्पी-Leucas Cephalotes धड़कन धनिया बीज धनिया-Coriander धमासा धात धातु धातु पतन धार्मिक धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं? धैर्यहीन नज़ला नपुंसक नपुंसकता नाइट्रिक एसिड नाक नाखून नागबला नागरमोथा नाडी हिंगु नाड़ी हिंगु (डिकामाली) नामर्दी नारकीय पीड़ा नारियल नाश्ता निमोनिया निम्न रक्तचाप निम्बू नियासिन निराश निरोगधाम निर्गुण्डी निर्गुन्डी निष्कपट स्नेह निष्ठा निसोरा नींद नींबू नींबू-Lemon नीम-azadirachta indica नुस्खे नुस्खे-Tips नेगड़ नेत्र रोग नेुचरल नैतिक नॉर्मल डिलेवरी नोनिया नौसादर न्युमोनिया-Pneumonia न्यूरॉन्स पक्षघात पंचकर्म पढ़ने में मन लगेगा पंतजलि पत्तागोभी-CABBAGE पत्थर फोड़ी पत्थरचट्टा पत्नी पथरी पदार्थ पनीर पपीता पपीता-CARICA PAPPYA पमाड परदेशी लांगड़ी परम्परागत चिकित्सा परहेज पराठा परामर्श परिस्थिति पवाड़ पवाँर पाइल्स पाक-कला पाचक पाचन पाचनतंत्र पाचनशक्ति पाठक संख्या 16 लाख पार पाठक संख्या पंद्रह लाख पायरिया पारदर्शिता पारिजात पालक पालक-Spinach पित्त पित्ताशय पित्ती पिंपल-मुंहासे-Pimples-Acne पिरामिड पीलिया पीलिया-Jaundice पीलिया-कामला-Jaundice पुआड़ पुदीना पुनर्नवा-साटी-सौंटी-Punarnava पुरुष पुंसत्व पेचिश पेट के कीड़े पेट दर्द पेट में गैस पेट रोग पेड़ पेद दर्द पेरिकिटो सेसिल पेशाब पेशाब में रुकावट पेंसिल थेरेपी-Pencil Therapy पोष्टिक लड्डू पौधे पौरुष पौरुष ग्रंथि पौष्टिक रागी रोटी प्याज-Onion प्यास प्रजनन प्रतिरक्षा प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिरोधक प्रतिरोधक-Resistance प्रदर प्रमेह प्रवाहिका (पेचिश)-Dysentery प्रसव प्रसव सुरक्षा चक्र प्रसव-पीड़ा प्रसूति प्राणायाम प्रेग्नेंसी-Pregnancy प्रेम प्रेमरस प्रेमिका प्रेमी प्रोटीन प्रोटीन का कार्य प्रोटीन के स्रोत प्रोस्टेट प्रोस्‍टेट कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि प्रोस्टेट ग्रन्थि प्लीहा प्लूरिसी-Pleurisy प्लेटलेट्स फंगल फटन फफूंद-Fungi फरास फल फाइबर फिटकरी फुंसी-Pimples फूलगोभी-CAULIFLOWER फेंफड़े फेरम फॉस फैट फैटी लीवर फोटोफोबिया फोड़ा फोड़े-Boils फोरप्ले फोलिक एसिड फ्लू फ्लू-Flu फ्लेक्स सीड्स बकायन बकुल बड़ी हरड़ बथुआ बथुआ पाउडर बथुआ-White Goose Foot 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